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  • साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसे में असलम शेख की पत्नी के खाते में ₹10 लाख जमा हुए। जानिए जांच, BMC कार्रवाई और जिम्मेदारी पर अब तक क्या हुआ।

    मुंबई: साकीनाका स्थित खैरानी रोड मैनहोल हादसे में दिवंगत असलम शेख के परिवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से ₹10 लाख की आर्थिक सहायता मिल गई है। यह रकम असलम शेख की पत्नी अंजुम शेख के बैंक खाते में 4 अगस्त 2026 को सीधे जमा की गई थी। 8 सितंबर को उनकी ओर से महानगरपालिका को लिखित आभार पत्र दिए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई।

    लेकिन इस आर्थिक मदद के साथ करीब दो महीने पुराने इस मामले में एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—2 जुलाई को खुले मैनहोल में गिरकर हुई असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई और जांच अब किस स्थिति में है?

    अंजुम शेख के खाते में कब जमा हुए ₹10 लाख?

    BMC के मुताबिक, दुर्घटना के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे ने शेख परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एल विभाग कार्यालय ने परिवार से बैंक खाते और वारसाहक्क से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे कराए।

    2 जुलाई को खैरानी रोड पर क्या हुआ था?

    2 जुलाई 2026 को साकीनाका के खैरानी रोड पर drainage-related काम के दौरान एक मैनहोल खुला हुआ था। इसी दौरान असलम शेख उसमें गिर गए और तेज पानी के बहाव में बह गए। कई घंटे की तलाश के बाद उनका शव drainage channel से बरामद किया गया। उस समय मौके पर पर्याप्त barricading और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

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    मृतक असलम शेख की फाइल तस्वीर

    जानकारी के अनुसार असलम शेख साकीनाका के यादव नगर इलाके के रहने वाले थे। घटना के बाद BMC और पुलिस दोनों स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।

    हादसे के बाद BMC ने क्या कार्रवाई की?

    हादसे के तत्काल बाद BMC ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके साथ contractor की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने भी contractor और उससे जुड़े तीन contractual workers के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन workers को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, जबकि contractor के बारे में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।

    इससे मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि manhole maintenance, contractor supervision और civic accountability का मुद्दा बन गया।

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    घटना की पुरानी तस्वीर

    जांच में work order को लेकर क्यों उठे सवाल?

    इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया।

    BMC की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई। इसके बाद यह सवाल उठा कि जिस स्थान पर protective grille लगाने का काम चल रहा था, उस काम के लिए औपचारिक work order किसके पास था और काम किसकी अनुमति से शुरू हुआ था।

    अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक contractor ने show-cause notice के जवाब में दावा किया कि उसके work order की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उसने किसी को काम नहीं दिया था। इस दावे ने जांच को और जटिल बना दिया।

    सबसे गंभीर सवाल—अगर contractor का work order समाप्त हो चुका था, तो मैनहोल पर protective work कौन कर रहा था और वह काम किस अनुमति या निगरानी में किया जा रहा था?

    हालांकि यह सवाल जांच के संदर्भ में है और इसे किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और पुलिस की कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

    BMC की जांच में contractor और अधिकारियों की भूमिका पर क्या सामने आया?

    जुलाई के अंत तक BMC की inquiry report सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे थे। 31 जुलाई की रिपोर्टों में बताया गया था कि हादसे के करीब एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी।

    बाद की रिपोर्टिंग में fact-finding exercise से contractor और संबंधित ward अधिकारियों की ओर से safety और procedural lapses की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि जांच केवल contractor तक सीमित नहीं थी, बल्कि civic supervision की भूमिका भी जांच के दायरे में थी।

    हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    हादसे से पहले ही BMC को High Court से मिल चुकी थी चेतावनी

    असलम शेख की मौत से कुछ ही दिन पहले Bombay High Court ने मुंबई में खुले मैनहोल को लेकर BMC को कड़ी फटकार लगाई थी।

    अदालत ने monsoon के दौरान खुले मैनहोल से किसी इंसानी जान के जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया था और BMC से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। असलम शेख की मौत के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि जब manhole safety पहले से न्यायिक निगरानी में थी, तब खैरानी रोड पर maintenance work के दौरान सुरक्षा व्यवस्था क्यों विफल हुई।

    BMC ने पूरे मुंबई के मैनहोल की safety को लेकर क्या कहा?

    हादसे के बाद BMC ने शहर के सभी 26 wards में manhole inspection और सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी।

    लेकिन जुलाई में BMC के Additional Municipal Commissioner ने यह भी स्पष्ट किया था कि महानगरपालिका यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि मुंबई के हर manhole chamber में protective safety net मौजूद है, क्योंकि safety-net installation एक continuous process है।

    यही बात इस मामले को सिर्फ साकीनाका की एक दुर्घटना से आगे ले जाती है। Mumbai में manhole safety की समस्या में पुराने covers, maintenance के दौरान खोले गए chambers, protective grills, barricading और monitoring—सभी शामिल हैं।

    जानकारी के अनुसार मुंबई में करीब 3,400 किलोमीटर का storm-water drain network और 2,081 किलोमीटर का sewer network है, जिसके maintenance के लिए बड़ी संख्या में manholes का इस्तेमाल होता है।

    क्या ₹10 लाख मिलने से मामला खत्म हो गया?

    नहीं। ₹10 लाख की आर्थिक सहायता परिवार के लिए तत्काल वित्तीय सहारा है, लेकिन इससे पुलिस जांच या प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप समाप्त नहीं होती।

    असलम शेख की मौत के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों को अलग-अलग देखना जरूरी है—

    • परिवार को आर्थिक सहायता: ₹10 लाख खाते में जमा हो चुके हैं।
    • प्रशासनिक कार्रवाई: BMC अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया हुई।
    • कानूनी जिम्मेदारी: contractor और workers के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी महत्वपूर्ण है।

    इसलिए आर्थिक सहायता को अंतिम कानूनी compensation या मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जवाबदेही स्पष्ट न करे।

  • QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    मुंबई के QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति देने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा निकालेगी।

    मुंबई: QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति देने और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन की ओर से 10 सितंबर 2026 को बोरीवली पश्चिम में मोर्चा निकाला जाएगा। यूनियन का दावा है कि QR-Code होने के बावजूद बड़ी संख्या में फेरीवाले पिछले दो वर्षों से कारोबार से वंचित हैं।

    यूनियन के मुताबिक, इस स्थिति के कारण फेरीवालों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर फेरीवालों में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर यह मोर्चा आयोजित किया जा रहा है।

    मोर्चा 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे जांभली गली, मोक्ष प्लाजा, एस.वी. रोड, बोरीवली पश्चिम से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी महानगरपालिका के आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचेंगे।

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    QR-Code के बाद भी कारोबार से वंचित रखने का आरोप

    आजाद हॉकर यूनियन का कहना है कि QR-Code जारी होने के बावजूद संबंधित फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति नहीं मिल रही है। यूनियन ने दावा किया है कि पिछले करीब दो वर्षों से इस समस्या के कारण कई फेरीवाले अपने रोजमर्रा के रोजगार से वंचित हैं।

    यूनियन के अनुसार, एक तरफ फेरीवालों को पहचान और नियमन से जुड़ी प्रक्रिया के तहत QR-Code दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ कारोबार करने के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने इसे लेकर प्रशासन से स्पष्ट नीति और कानूनी व्यवस्था के तहत कारोबार की अनुमति देने की मांग की है।

    Street Vendors Act लागू करने की मांग

    मोर्चे में Street Vendors Act, 2014 को पूरी तरह लागू करने की मांग भी उठाई जाएगी। यूनियन ने न्यायालय के आदेशों का पालन करने तथा संरक्षित फेरीवालों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न रोकने की मांग की है।

    आजाद हॉकर यूनियन की प्रमुख मांगों में QR-Code धारक फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल रोकना, पिछले दो वर्षों से रोजगार से वंचित फेरीवालों को कारोबार का अवसर देना और कानून के तहत उन्हें सुरक्षित तरीके से कारोबार करने की व्यवस्था करना शामिल है।

    यूनियन का कहना है कि फेरीवालों को सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों के रूप में देखने के बजाय उन्हें कानून के दायरे में लाकर रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।

    “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों का मुद्दा नहीं”

    यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल बोरीवली तक सीमित नहीं है। मुंबई में बड़ी संख्या में फेरीवाले अपने परिवार का खर्च इसी रोजगार से चलाते हैं।

    यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा, “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों की लड़ाई नहीं है, बल्कि मुंबई के हजारों मेहनतकश फेरीवालों के रोजगार और अधिकार की लड़ाई है। रोजगार हमारा अधिकार है। प्रशासन को फेरीवालों की समस्या को सहानुभूति और कानूनी दृष्टिकोण से देखना चाहिए।”

    यूनियन ने मुंबई के सभी QR-Code धारक फेरीवालों और अन्य मेहनतकश फेरीवालों से मोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

    कौन-कौन होंगे शामिल?

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चे में नगर पथ विक्रेता समिति, मुंबई के सदस्य दया शंकर सिंह और जय शंकर सिंह तथा जोन 7 के सदस्य प्रकाश उदेसी और शांताराम शिंदे प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इनके अलावा लवकुश तिवारी और सलाउद्दीन पटेल के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    मोर्चे का आयोजन शांताराम शिंदे, प्रवीण पाठक, रवी खावडिया, राकेश खावडिया, श्याम सुंदर झा, रविंद्र मिश्रा, फिरोज खान, अहसान अंसारी, पवन तांडले, मनोज राय और राजेश राऊत की ओर से किया जा रहा है।

    10 सितंबर को बोरीवली में जुटेंगे फेरीवाले

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत दोपहर 12 बजे जांभली गली से होगी और आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचकर फेरीवालों की मांगों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

    अब मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि QR-Code धारक फेरीवालों की कारोबार संबंधी मांग और Street Vendors Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महानगरपालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है।

  • महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को 5% नौकरी आरक्षण, 3 महीने में Sports Certificate Verification अनिवार्य

    महाराष्ट्र में खिलाड़ियों को 5% नौकरी आरक्षण, 3 महीने में Sports Certificate Verification अनिवार्य

    महाराष्ट्र में खिलाड़ियों के 5% नौकरी आरक्षण की नई नीति मंजूर, पुराने प्रमाणपत्रों का 3 महीने में सत्यापन जरूरी; जानिए किसे मिलेगा लाभ।

    मुंबई: महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए बड़ा फैसला हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल ने सरकारी, अर्ध-सरकारी और अन्य पात्र संस्थाओं में खिलाड़ियों के लिए लागू 5% नौकरी आरक्षण की संशोधित नीति को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव यह है कि आरक्षण का लाभ लेने वाले खिलाड़ियों को अपने Sports Certificate की वैधता का सत्यापन तीन महीने के भीतर कराना होगा।

    यह तीन महीने की समयसीमा नए संशोधित शासन निर्णय (GR) के जारी होने की तारीख से लागू होगी। सरकार ने Sports Quota से जुड़े पहले के सभी शासन निर्णयों को रद्द कर एक एकीकृत नीति लागू करने का फैसला किया है। नया GR जल्द जारी किया जाएगा।

    5% Sports Quota किन नौकरियों में लागू होगा?

    संशोधित नीति के तहत यह आरक्षण मंत्रालयीन विभागों और उनके अधीन सरकारी कार्यालयों के साथ जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, महानगरपालिका, सरकारी उपक्रम, मंडल, महामंडल, विश्वविद्यालय, सरकारी अनुदान प्राप्त शैक्षणिक संस्थान, आश्रमशाला, सहकारी संस्थाओं और सरकारी निधि अथवा अनुदान प्राप्त अन्य पात्र संस्थाओं में सीधी भर्ती के पदों पर लागू रहेगा।

    इसमें समूह-अ, समूह-ब, समूह-क और समूह-ड के पद शामिल होंगे।

    महाराष्ट्र में 5% Sports Quota की व्यवस्था 30 अप्रैल 2005 से लागू है। क्रीड़ा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अब तक 4,949 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में इसका लाभ मिल चुका है।

    किस खिलाड़ी को किस पद के लिए पात्रता मिलेगी?

    नई नीति में खेल उपलब्धि और प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर अलग-अलग समूहों के लिए पात्रता तय की गई है।

    समूह-अ: ओलंपिक, एशियन गेम्स, वरिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप/कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, टेनिस ग्रैंड स्लैम, ग्रैंडमास्टर स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं और पैरालंपिक सहित अधिकृत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त खिलाड़ी।

    समूह-ब राजपत्रित: युवा/कनिष्ठ विश्व एवं एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, यूथ ओलंपिक तथा संबंधित अंतरराष्ट्रीय स्कूल, विश्वविद्यालय और पैरा प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-ब अराजपत्रित: नेशनल गेम्स, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, राष्ट्रीय फेडरेशन कप, पैरा नेशनल गेम्स और राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-क: खेलो इंडिया, अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय वरिष्ठ/युवा/कनिष्ठ, स्कूल, अंतर-विश्वविद्यालय और पैरा खेल प्रतियोगिताओं के पदक विजेता।

    समूह-ड: निर्धारित खेल योग्यता रखने वाले खिलाड़ी अथवा वरिष्ठ वर्ग की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता, राष्ट्रीय चैंपियनशिप और वरिष्ठ पैरा राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ी।

    क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और शतरंज भी पात्र खेलों में

    नई नीति में खेलों की पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। 2005 के बाद लगातार तीन ओलंपिक में शामिल खेलों के साथ क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, शतरंज और मल्लखंब को भी शामिल किया गया है।

    ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, पैरा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन ओलंपिक वाली शर्त लागू नहीं होगी।

    पात्र खेलों में एथलेटिक्स, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, फुटबॉल, हॉकी, जूडो, रोइंग, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी, सेलिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग और अन्य निर्धारित खेल भी शामिल हैं।

    पुराने Sports Certificate वालों के लिए क्या बदलेगा?

    नई नीति का यह हिस्सा हजारों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराने शासन निर्णयों के तहत Sports Quota के पात्र खिलाड़ियों को भी नए GR की तारीख से तीन महीने के भीतर अपने Sports Certificate का verification कराना होगा।

    यानी केवल पहले से जारी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसकी वैधता की पुष्टि कराना जरूरी होगा।

    ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ से होगी डिजिटल जांच

    सरकार Sports Certificate verification के लिए ‘क्रीड़ा ई-प्रमाण’ की डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है। प्रतियोगिता समाप्त होने के सात दिनों के भीतर परिणामों को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ upload करना अनिवार्य होगा।

    Blockchain technology के जरिए रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और automated cryptographic hash के माध्यम से उसकी authenticity जांचने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य फर्जी और छेड़छाड़ किए गए खेल प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना है।

    5% आरक्षण का उद्देश्य क्या है?

    सरकार के मुताबिक इस नीति का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी रोजगार में अवसर देना और उनकी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मजबूत करना है।

    Sports Quota को Mission Lakshyavedh जैसी खेल प्रोत्साहन पहलों के साथ देखने पर इसका व्यापक उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर training और competition के साथ भविष्य की employment security उपलब्ध कराना भी है।

    महाराष्ट्र कैबिनेट के अन्य फैसले

    PRAGATI Health Project

    सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2026 से 2031 तक PRAGATI Project लागू करने को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹4,250 करोड़ है, जिसमें ₹2,975 करोड़ Asian Development Bank loan और ₹1,275 करोड़ राज्य का हिस्सा होगा।

    इसके तहत कोल्हापुर और नांदेड में 500-500 बेड, नागपुर और लातूर में 300-300 बेड तथा पुणे में 200 बेड का विशेष रेफरल अस्पताल प्रस्तावित है। कुल 2,430 पद भी बनाए जाएंगे।

    Hyosung India को Capital Grant

    छत्रपति संभाजीनगर के Auric City, Shendra में Hyosung India के Spandex/Elastomeric Yarn manufacturing project को Integrated and Sustainable Textile Policy 2023-28 के तहत विशेष मामले में capital grant देने को मंजूरी मिली है। सरकार ने इसे मराठवाड़ा और विदर्भ में निवेश तथा रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया है।

    Madha में District and Additional Sessions Court

    सोलापुर के Madha में नया District and Additional Sessions Court स्थापित होगा। अभी यहां के मामले Barshi court में चलते हैं। नए न्यायालय के लिए 20 नियमित और 6 outsourced पद मंजूर किए गए हैं।

    मुंबई में दो भूमि संबंधी फैसले

    मुंबई के Bhuleshwar स्थित Kaivalyadham Yogic Centre के भूमि पट्टे का अगले 30 वर्षों के लिए ₹12 सालाना की रियायती दर पर नवीनीकरण मंजूर किया गया है।

    वहीं Chembur की Bhikkhu Sangh United Buddhist Mission संस्था को उसके कब्जे में रही 1,735 वर्ग मीटर सरकारी जमीन नाममात्र दर पर lease पर देने को मंजूरी दी गई है।

    Koradi में Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को जमीन

    नागपुर के Koradi में तीर्थक्षेत्र विकास योजना के तहत विकसित सरकारी जमीन को Shri Mahalakshmi Jagdamba Sansthan को 30 वर्ष के लिए lease पर देने की मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य तीर्थक्षेत्र में सुविधाओं और रखरखाव का बेहतर प्रबंधन करना है।

    आगे क्या?

    Sports Quota के मामले में अब संशोधित एकीकृत Government Resolution जारी होना सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम है। इसी के बाद verification की औपचारिक प्रक्रिया और तीन महीने की समयसीमा प्रभावी होगी।

    खिलाड़ियों के लिए नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव केवल 5% आरक्षण जारी रखना नहीं, बल्कि eligibility, certificate verification और digital authentication को एकीकृत व्यवस्था में लाना है।

  • Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA ने IRCTC की Kurla kitchen और ISKCON Juhu के 3 food units पर कार्रवाई की। Zepto-linked facility में भी food safety violations मिले।

    मुंबई: शहर में food safety को लेकर महाराष्ट्र FDA का crackdown लगातार सख्त होता जा रहा है। ताजा कार्रवाई में Kurla की IRCTC-linked base kitchen का licence suspend किया गया है, जबकि Juhu स्थित ISKCON के तीन food establishments पर भी licence suspension की कार्रवाई हुई है। जांच में cockroaches, खुले में रखा खाना, जाम नालियां, खराब hygiene और food-safety records में गंभीर कमियां सामने आईं। Zepto से जुड़ी एक facility में भी pest infestation और cold-chain management में खामियां मिली हैं।

    IRCTC की Kurla kitchen में क्या मिला?

    महाराष्ट्र FDA ने 2 सितंबर को Kurla West स्थित R K Associates & Hoteliers Pvt Ltd की base kitchen का निरीक्षण किया। यह kitchen IRCTC network के जरिए railway passengers के लिए food supply करती है।

    जांच के दौरान food storage और preparation areas में cockroaches पाए गए। कुछ food खुले में रखा था और garbage के पास food preparation होने की बात सामने आई। Kitchen infrastructure में भी कमियां मिलीं, जिनमें damaged tiles और अस्वच्छ surfaces शामिल हैं। बर्तनों और food-contact equipment पर गंदगी तथा जंग की शिकायत भी inspection findings में शामिल रही।

    Food handlers से जुड़े records ने भी सवाल खड़े किए। कुल 34 food handlers में केवल 21 के medical fitness certificates उपलब्ध थे। एक कर्मचारी उंगली पर चोट होने के बावजूद food handling करता मिला। Food transport vehicle की cleanliness और maintenance को लेकर भी FDA ने कमियां दर्ज कीं।

    इन findings के बाद संबंधित kitchen का food licence suspend कर दिया गया।

    क्या IRCTC की पूरी catering service बंद हो गई?

    नहीं। कार्रवाई एक specific IRCTC-linked kitchen पर हुई है। FDA ने मुंबई और ठाणे में IRCTC से जुड़े कुल पांच base kitchens/food plazas की जांच की थी। R K Associates का licence suspend किया गया, जबकि Om Sai Ram Enterprises, Ambuj Hotels & Real Estate Pvt Ltd, Express Food Services और Araha Hospitality Pvt Ltd को improvement notices दिए गए।

    इसका मतलब यह है कि पूरे IRCTC food network को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है।

    ISKCON Juhu के तीन food units पर भी licence suspension

    3 सितंबर को Juhu स्थित ISKCON परिसर में food operations की जांच की गई। FDA को यहां भी कई food-safety violations मिले और तीन establishments के licences suspend किए गए।

    Food Services Restaurant से जुड़ी findings में खुले kitchen entrance, pest-control में कमी, clogged drains, drains में food waste और pest droppings जैसी समस्याएं शामिल हैं। Raw material inspection, laboratory testing, cleaning, employee medical examination, vaccination और staff training से जुड़े records में भी deficiencies बताई गई हैं।

    Govindas Restaurant में pest infestation, clogged drains और cold-storage area में पानी जमा होने की बात सामने आई। Raw और cooked food को पर्याप्त रूप से अलग नहीं रखने की कमी भी दर्ज की गई, जिससे cross-contamination का risk पैदा हो सकता है। Food testing, drinking-water testing, raw-material inspection, pest control और staff records से जुड़े compliance gaps भी पाए गए।

    Zepto-linked facility में cockroaches और cold-chain की समस्या

    FDA की कार्रवाई में Malad West स्थित Drogheria Sellers Pvt Ltd भी शामिल है, जिसे Zepto-linked food facility के तौर पर रिपोर्ट किया गया है।

    Inspection में food-storage areas में cockroaches मिलने की जानकारी सामने आई। Dairy products की storage temperature को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक milk, paneer और curd करीब 14–15°C पर रखे मिले, जबकि cold room का temperature करीब 20–21°C बताया गया। इससे cold-chain management पर सवाल खड़े हुए।

    दूसरे food businesses पर भी कार्रवाई

    FDA की ताजा कार्रवाई केवल IRCTC, ISKCON और Zepto-linked facility तक सीमित नहीं रही। मुंबई और आसपास कई अन्य food businesses भी regulatory action की चपेट में आए हैं।

    Bombay’s The Food Fusion Cafe, Ghatkopar के खिलाफ licence suspension की recommendation की गई। यहां uncovered cooked rice, खुले container में raw chicken, improperly sealed vegetables, refrigeration और drainage से जुड़ी कमियां तथा जरूरी testing/training records की कमी रिपोर्ट हुई।

    Shree Madhuram, Borivali East के registration को suspend करने की recommendation की गई। Kothari Sweet और Mulund Farsan Mart पर भी food production, expired products और pest-related violations को लेकर कार्रवाई हुई।

    Maharashtra Biryani Center, Goregaon East का licence hygiene, pest control, drainage और जरूरी food-safety documentation से जुड़ी कमियों के कारण suspend किया गया।

    FDA की कार्रवाई में Mateshwari Milk, Kharghar भी शामिल है। यहां milk processing, temperature monitoring, calibration, sanitation और labelling से जुड़ी compliance deficiencies report हुई हैं।

    Licence suspend होने का क्या मतलब है?

    Food licence suspension का मतलब संबंधित food business को उस licence के तहत food activity जारी रखने की अनुमति नहीं रहती, जब तक regulatory compliance और आगे की प्रक्रिया पूरी न हो। इसलिए “licence suspended” और “improvement notice” को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

    इसी कार्रवाई में कुछ businesses के licences suspend हुए हैं, जबकि कुछ को केवल improvement notices दिए गए हैं और कुछ के खिलाफ suspension की recommendation की गई है।

    Maharashtra FDA का crackdown क्यों बढ़ा?

    यह कार्रवाई किसी एक दिन की isolated inspection नहीं दिखती। महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ महीनों में food adulteration और hygiene violations के खिलाफ enforcement तेज किया है। Commissioner Tukaram Mundhe के नेतृत्व में विभाग ने food businesses की inspections और enforcement को अधिक systematic बनाने पर जोर दिया है।

    FDA ने अब year-round “Festival Enforcement Calendar” भी शुरू किया है। इसके तहत festivals, fairs, religious events और बड़े public gatherings के दौरान food adulteration और hygiene violations पर पहले से तय surveillance और sampling की व्यवस्था की जा रही है।

    इस plan में dairy products, sweets, edible oils, paneer, dry fruits और दूसरे high-risk food items पर विशेष निगरानी की जा सकती है। Festival से पहले manufacturing units, markets, cold stores, godowns और wholesale markets तक inspections की योजना बनाई गई है।

    आगे क्या होगा?

    ताजा कार्रवाई से संकेत साफ है कि Maharashtra FDA अब केवल restaurants पर ही नहीं, बल्कि railway food suppliers, institutional kitchens, e-commerce-linked food facilities, dairy businesses और festival-related food operations पर भी निगरानी बढ़ा रहा है।

    ऐसे में जिन businesses के licences suspend हुए हैं, उनके लिए अगला महत्वपूर्ण चरण compliance और regulatory review होगा, जबकि improvement notices पाने वाले establishments को FDA की बताई कमियों को दूर करना होगा।

    मुंबई में food safety को लेकर चल रहा यह crackdown आने वाले festival season में और तेज हो सकता है। FDA का नया enforcement calendar भी इसी दिशा में संकेत देता है कि high-risk food categories और बड़े food-distribution operations पर निगरानी अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी।

  • मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई में फर्जी PMO ID और हथियार का मामला: दो गिरफ्तार, आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मुंबई के BKC में फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो गिरफ्तार हुए। कोर्ट में आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ फ्रॉड हुआ है।

    मुंबई: बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार के साथ प्रवेश के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है।”**

    पुलिस के मुताबिक, घटना BKC के Jio World परिसर से जुड़े इलाके में सामने आई। एक व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जुड़ा अधिकारी बताया था। उसके साथ मौजूद व्यक्ति के पास हथियार मिला। हालांकि, मुंबई पुलिस ने फिलहाल कहा है कि इस घटना का प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    BKC में कैसे सामने आया मामला?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे को देखते हुए 7 सितंबर को BKC इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। इसी दौरान सुरक्षा जांच के बीच एक व्यक्ति की पहचान और गतिविधियों पर संदेह हुआ।

    पुलिस जांच के अनुसार, उस व्यक्ति ने कथित तौर पर PMO का पहचान पत्र दिखाया। जांच में पहचान पत्र की authenticity पर सवाल उठे और बाद में इसे फर्जी बताया गया।

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    गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट से बाहर लाते मुंबई पुलिस की तस्वीर

    खबर के मुताबिक, कथित ID में पदनाम और validity से जुड़ी विसंगतियां थीं। इसी दौरान साथ मौजूद व्यक्ति की तलाशी में हथियार बरामद हुआ।

    दो लोगों की गिरफ्तारी

    मामले में पुलिस ने रोहन प्रेमल पारेख और दिलीप राजाराम कुंडे को गिरफ्तार किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुंडे के पास मिला firearm लाइसेंसी बताया गया है।

    पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार किसके नाम पर है और उसे हाई-सिक्योरिटी वाले इलाके में किन परिस्थितियों में लाया गया था।

    मामले में एक तीसरे व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

    कोर्ट में आरोपी ने कहा- “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है”

    मामले में सबसे अहम नया मोड़ कोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आया। मुख्य आरोपी की ओर से बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसे कथित तौर पर एक offer letter, पहचान पत्र और कुछ सरकारी communications मिले थे।

    बचाव पक्ष के मुताबिक, आरोपी को विश्वास दिलाया गया था कि वह किसी सरकारी या PMO से जुड़ी भूमिका में है। इसी आधार पर यह दावा किया गया कि आरोपी खुद किसी धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है।

    हालांकि, यह आरोपी और उसके बचाव पक्ष का दावा है, जिसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित PMO ID और offer letter किसने तैयार किए तथा ये दस्तावेज आरोपी तक कैसे पहुंचे।

    फर्जी PMO ID की जांच क्यों महत्वपूर्ण?

    किसी सरकारी संस्था की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल इस मामले को सामान्य पहचान संबंधी विवाद से आगे ले जाता है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ID वास्तव में कहां तैयार हुई, उसे किसने आरोपी को दिया और क्या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका है।

    आरोपियों के मोबाइल फोन और communications से भी इस कड़ी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

    हथियार लाइसेंसी था, फिर भी सवाल क्यों उठे?

    बरामद firearm के लाइसेंसी होने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस की जांच केवल हथियार के लाइसेंस तक सीमित नहीं है।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हथियार किसके नाम पर था, उसे लेकर आरोपी वहां क्यों पहुंचा और उस स्थान पर हथियार ले जाने की परिस्थितियां क्या थीं।

    क्या PM मोदी के कार्यक्रम से था कोई संबंध?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, अब तक आरोपियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बीच कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

    घटना ऐसे समय हुई जब PM मोदी के दौरे को लेकर BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। इसी वजह से फर्जी PMO ID और हथियार से जुड़ी जानकारी सामने आते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।

    जांच में अब क्या पता लगाना बाकी है?

    पुलिस की जांच मुख्य रूप से इन सवालों पर केंद्रित है कि कथित फर्जी PMO ID किसने बनाई, आरोपी को यह दस्तावेज कैसे मिला और उसके पास मौजूद कथित offer letter व communications का स्रोत क्या था।

    इसके अलावा, आरोपी के BKC पहुंचने का वास्तविक उद्देश्य, हथियार की परिस्थितियां और मामले में तीसरे व्यक्ति की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि क्या आरोपी वास्तव में किसी सरकारी पहचान के नाम पर ठगा गया था या उसने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया?

    इसका जवाब जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई में Global Fintech Fest 2026 से जुड़े कार्यक्रम के लिए आए थे। उनके दौरे से पहले BKC में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।

    इसी दौरान सामने आए फर्जी PMO ID और हथियार के मामले में दो आरोपी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। वहीं, “मेरे साथ फ्रॉड हुआ है” वाला आरोपी का दावा भी जांच के दायरे में है।

    अब जांच का फोकस कथित फर्जी पहचान पत्र के स्रोत, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यक्ति और आरोपियों की वास्तविक मंशा का पता लगाने पर है।

  • मुंबई में बिल्डर ने दिया कम कारपेट एरिया, फ्लैट मालिकों को ₹6.64 लाख लौटाने का आदेश

    मुंबई में बिल्डर ने दिया कम कारपेट एरिया, फ्लैट मालिकों को ₹6.64 लाख लौटाने का आदेश

    मुंबई मालाड के बिल्डर को कम कारपेट एरिया देने पर ₹6.64 लाख मुआवजा, 9% ब्याज, मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश।

    मुंबई: मालाड पश्चिम में agreement में तय carpet area से कम फ्लैट देने के मामले में महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Sion के बिल्डर Chinnappan Anthony, proprietor of M/s Milan Builders and Developers, को फ्लैट मालिकों को ₹6,64,640 मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा प्रत्येक शिकायतकर्ता को ₹50,000 मानसिक परेशानी और ₹25,000 मुकदमेबाजी खर्च भी देना होगा।

    560 की जगह मिला 518.46 वर्गफुट area

    मामला मालाड पश्चिम के Shree Balaji Ashirwad प्रोजेक्ट का है। प्रोजेक्ट का पता नहर नगर रोड, भंडारवाड़ा मार्ग, Smt. KG Mittal Institute of Management के सामने, नेवी कॉलोनी के पास, मालाड पश्चिम, मुंबई – 400064 बताया गया है। यह इलाका लिंक रोड कॉरिडोर और पश्चिमी उपनगरों से जुड़ा हुआ है तथा आसपास बैंक, ATM और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    शिकायतकर्ता के 11 जनवरी 2016 के registered Agreement for Sale में फ्लैट का carpet area 560 वर्गफुट तय था। नवंबर 2016 में possession मिलने के बाद registered architect से measurement कराई गई, जिसमें area 518.46 वर्गफुट निकला।

    यानी agreement में तय area से 41.54 वर्गफुट, करीब 7.42 प्रतिशत कम जगह मिली।

    शिकायतकर्ता ने ₹16,000 प्रति वर्गफुट के आधार पर नुकसान की गणना की, जिससे ₹6,64,640 की राशि बनी।

    बिल्डर की दलील नहीं मानी

    Developer ने architect की measurement पर सवाल उठाते हुए complaint का विरोध किया। उसने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता landowner है, इसलिए उसे consumer नहीं माना जाना चाहिए।

    आयोग ने दोनों दलीलों को खारिज कर दिया। उसके मुताबिक developer ने architect की report को चुनौती देने के लिए कोई स्वतंत्र expert measurement पेश नहीं की। वहीं development arrangement के तहत constructed flat पाने वाला landowner भी structural deficiency और statutory non-compliance के मामलों में consumer हो सकता है।

    आयोग ने कहा कि agreement में तय carpet area को purchaser की लिखित सहमति या उचित consideration adjustment के बिना कम करना सेवा में कमी और unfair trade practice है।

    Full OC और society formation पर भी आदेश

    मामले में building का पूर्ण Occupation Certificate (OC) नहीं होने और cooperative housing society का गठन नहीं किए जाने की शिकायत भी की गई थी। आयोग ने इन statutory obligations को continuing nature का माना और developer को संबंधित authorities के साथ जरूरी formalities पूरी करने का निर्देश दिया।

    इसी वजह से developer की यह दलील भी नहीं चली कि शिकायत पुरानी होने के कारण limitation से बाहर है। हालांकि हर पुराने property dispute में यही नियम लागू नहीं होता; complaint की तारीख और cause of action के आधार पर limitation तय होती है।

    Flat मालिकों के लिए क्या मायने?

    इस फैसले से साफ है कि flat खरीदते समय Agreement for Sale में दर्ज carpet area को ध्यान से जांचना जरूरी है। Possession के बाद area में अंतर मिले तो independent architect से measurement कराकर report सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। Buyer को OC, sanctioned plan, society formation और conveyance की स्थिति भी जांचनी चाहिए।

    यह फैसला यह भी नहीं कहता कि हर carpet-area dispute में ₹6.64 लाख compensation मिलेगा। इस मामले में रकम 41.54 वर्गफुट की कमी और ₹16,000 प्रति वर्गफुट के valuation basis पर तय हुई।

  • Andheri में BMC की बड़ी कार्रवाई: 34,000 वर्ग फुट में बने 9 अवैध ढांचे हटे, Fire Station का रास्ता साफ

    Andheri में BMC की बड़ी कार्रवाई: 34,000 वर्ग फुट में बने 9 अवैध ढांचे हटे, Fire Station का रास्ता साफ

    Andheri के Chitrakoot Ground पर BMC ने 34,000 वर्ग फुट में बने अवैध ढांचे हटाए। 1991 से लंबित Fire Station का रास्ता साफ, अब निर्माण की बारी।

    मुंबई: Andheri West के Link Road स्थित Chitrakoot Ground पर BMC ने सोमवार को बड़ी demolition कार्रवाई करते हुए Fire Station के लिए आरक्षित जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को हटा दिया है। करीब 34,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली संरचनाओं पर हुई इस कार्रवाई में garage, banquet/marriage hall और अन्य निर्माण शामिल थे। Bombay High Court में इसी विवाद से जुड़े मामले में नौ संरचनाओं का उल्लेख है। अदालत ने 25 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए कुल ₹10 लाख की लागत भी लगाई थी।

    यह कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि Chitrakoot Ground का यह हिस्सा 1991 से Fire Station के लिए आरक्षित बताया जाता रहा है। करीब 34 साल से अटकी इस परियोजना के लिए अब जमीन खाली कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हालांकि, जमीन खाली होने के बाद अगला सवाल अब यही है कि Ambivali Fire Station का वास्तविक निर्माण कब शुरू होगा।

    BMC ने क्या-क्या हटाया?

    BMC के K-West Ward ने Chitrakoot Ground पर करीब 34,000 वर्ग फुट में फैले अनधिकृत निर्माण हटाए। इनमें DRM Motors, DRM Apparels और Chitrakoot Banquet Hall के अवैध ढांचे बनाए गए थे। कार्रवाई के दौरान BMC के Building and Factory विभाग ने भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया और Amboli Police Station की पुलिस टीम personnel सुरक्षा के लिए मौजूद रहे।

    Bombay High Court में दाखिल मामले में संबंधित निर्माणों के रूप में porta cabins, temporary office structures, car workshop और तीन banquet halls समेत नौ संरचनाओं का विवाद सामने आया था।

    मामला Bombay High Court तक कैसे पहुंचा?

    BMC की कार्रवाई से पहले संबंधित निजी निर्माण कंपनी ने civic body’s demolition notices और orders को Bombay High Court में चुनौती दी थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक BMC ने 13 मई 2026 को notices जारी किए और बाद में 1 जुलाई 2026 को removal orders जारी किए।

    मामला Shah Constructions Co. Ltd. बनाम Municipal Corporation of Greater Mumbai के रूप में हाई कोर्ट पहुंचा। 25 अगस्त 2026 को जस्टिस A.S. Gadkari और जस्टिस Kamal Khata की पीठ ने दोनों writ petitions खारिज कर दीं। अदालत ने प्रत्येक याचिका पर ₹5 लाख यानी कुल ₹10 लाख की लागत लगाई।

    हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण को लेकर क्या कहा?

    मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पुराने municipal records, tax assessments, licences और repair permissions जैसे दस्तावेजों पर भरोसा किया गया था। अदालत ने माना कि ऐसे दस्तावेज अपने आप किसी निर्माण को कानूनी नहीं बना देते। किसी संरचना को वैध साबित करने के लिए sanctioned plan और उसके मूल निर्माण की विश्वसनीय जानकारी जरूरी थी।

    मामले में लगभग 34,000 वर्ग फुट constructed area में से करीब 18,000 वर्ग फुट हिस्सा हटाने की पेशकश भी की गई थी, लेकिन अदालत ने बाकी निर्माण को बचाने का आधार स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार यह साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं था कि पुराने और बाद में किए गए निर्माण को स्पष्ट रूप से अलग किया जा सकता है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि property-tax assessment, licences या repair permissions किसी अनधिकृत निर्माण को स्वतः regularise नहीं करते। इसी आधार पर BMC के notices और demolition orders को बरकरार रखा गया।

    1991 से Fire Station के लिए आरक्षित है जमीन

    Chitrakoot Ground का यह हिस्सा Development Plan में Fire Station के लिए आरक्षित किए जाने के बाद भी दशकों तक अपने उद्देश्य के अनुसार विकसित नहीं हो सका। स्थानीय नागरिक संगठनों और पुरानी रिपोर्टों के अनुसार reservation का इतिहास 1991 तक जाता है।

    इस परियोजना को लेकर 2009 में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया था। जानकारी के अनुसार BMC के Building Proposal Department ने Ambivali Fire Station के निर्माण के लिए Commencement Certificate जारी किया था। लेकिन निर्माण आगे नहीं बढ़ा और बाद में वह अनुमति रद्द हो गई।

    यानी जमीन आरक्षित होने, construction permission मिलने और वर्षों तक प्रशासनिक follow-up के बावजूद Fire Station जमीन पर आकार नहीं ले सका।

    2016 से 2024 तक चलता रहा प्रशासनिक Follow-Up

    यह मामला केवल हाल की demolition drive से शुरू नहीं हुआ। उपलब्ध जानकारी में Mumbai Fire Brigade की 2016 से 2024 तक की correspondence और administrative follow-up का उल्लेख है।

    इस दौरान जमीन के acquisition, handover, development proposal और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर पत्राचार और बैठकें हुईं। 2022 में Suburban Collector के साथ बैठक हुई थी। 2023 में Ambivali Fire Station development proposal से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई थी।

    2025 में भी Fire Brigade ने जमीन को Fire Station के लिए उपलब्ध कराने को लेकर Collector स्तर पर मामला उठाया था। उस समय करीब 5,500 वर्ग मीटर के plot का उल्लेख किया गया था।

    2026 में जमीन खाली कराने की प्रक्रिया तेज हुई

    मार्च 2026 में BMC ने संबंधित पक्ष को Fire Station के लिए आरक्षित जमीन hand over करने के लिए सात दिन का अंतिम समय दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले notice और reminder communication के जरिए जमीन सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।

    इसके बाद project से जुड़ी ₹1.33 करोड़ की bank guarantee भी सामने आई। जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2026 को Municipal Commissioner के पक्ष में यह guarantee जमा की गई थी। अप्रैल में अधिकारियों की ओर से आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी।

    लेकिन सितंबर तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में Fire Station का actual construction शुरू होने की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई थी। यही वजह है कि मौजूदा demolition के बाद परियोजना की अगली समयसीमा सबसे अहम सवाल बन गई है।

    Chitrakoot Ground पर पहले भी हो चुकी है आग की घटना

    Fire Station की जरूरत केवल कागजों में दर्ज reservation का मामला नहीं है। जुलाई 2022 में इसी Chitrakoot Ground पर एक फिल्म सेट में आग लगने से 32 वर्षीय मजदूर की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी इलाके में Fire Station की जरूरत और emergency response को लेकर सवाल उठे थे।

    Lokhandwala-Oshiwara और Link Road का इलाका पिछले वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। यहां residential towers, commercial establishments और high-rise buildings बढ़े हैं। ऐसे इलाके में Fire Brigade के लिए response time बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

    एक वरिष्ठ Fire official के अनुसार वर्तमान में Andheri West के लिए fire brigades को Vile Parle, Goregaon और Bandra जैसे स्थानों से dispatch करना पड़ सकता है, जबकि peak traffic के दौरान दूरी और congestion response time को प्रभावित कर सकते हैं।

    पुरानी रिपोर्टों में traffic और दूरी के कारण emergency response में 30 से 45 मिनट तक की देरी की चिंता भी दर्ज की गई हैं।

    स्थानीय नागरिक वर्षों से उठा रहे हैं मांग

    Lokhandwala-Oshiwara Citizens Association सहित स्थानीय नागरिक समूह लंबे समय से इस जमीन पर Fire Station विकसित करने की मांग करते रहे हैं।

    नागरिकों का कहना है कि केवल demolition करके मामला खत्म नहीं होना चाहिए। पूरी आरक्षित जमीन को दोबारा encroachment से सुरक्षित करना और construction process को आगे बढ़ाना जरूरी है।

    स्थानीय BJP corporator Rupesh Sawarkar ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के बाद से Fire Station की जमीन से encroachment हटाने के लिए प्रशासन के साथ follow-up किया। उनका दावा है कि आरक्षित जमीन का इस्तेमाल wedding functions, film shoots और turf cricket जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और lease arrangements में financial irregularities की आशंका थी।

    अब जमीन खाली होने के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या?

    BMC की कार्रवाई ने Fire Station के लिए लंबे समय से अटकी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लेकिन demolition का मतलब Fire Station का निर्माण शुरू होना नहीं है।

    अब प्रशासन के सामने अगली जिम्मेदारियां हैं—क्या पूरा आरक्षित भूखंड सुरक्षित और उपलब्ध हो चुका है, Fire Department को possession कब मिलेगा, final building plan की स्थिति क्या है, project की लागत कितनी है, tender जारी हुआ है या नहीं, निर्माण एजेंसी कौन होगी और Fire Station कब तक operational होगा।

    फरवरी 2026 में करीब 18 महीने के संभावित construction timeline की चर्चा हुई थी, जबकि अप्रैल में आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी। अब सितंबर की demolition कार्रवाई के बाद इस timeline की स्थिति स्पष्ट करना BMC के लिए जरूरी होगा।

    34 साल पुराने Ambivali Fire Station के लिए रास्ते का एक बड़ा अवरोध जरूर हटा है, लेकिन Andheri West के लोगों को अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद निर्माण शुरू होने और Fire Station operational होने की तारीख का इंतजार है।

  • ठाकरे गुट के 14 विधायक शिंदे के संपर्क में? जल्द ‘Operation Tiger-4’ का दावा

    ठाकरे गुट के 14 विधायक शिंदे के संपर्क में? जल्द ‘Operation Tiger-4’ का दावा

    महाराष्ट्र में Operation Tiger-4 की चर्चा तेज, 14 UBT विधायकों के शिंदे गुट के संपर्क में होने का दावा। जानिए क्या है पूरा मामला और कितनी है पुष्टि।

    मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर की चर्चा तेज हो गई है। दावा किया गया है कि उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और जल्द ‘Operation Tiger-4’ देखने को मिल सकता है।

    एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना विधायक मुरजी पटेल ने सोमवार को यह दावा करते हुए कहा कि इन विधायकों के शिंदे गुट में आने के लिए नेतृत्व के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार है। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों के बाद कुछ नगरसेवक भी शिंदे गुट का रुख कर सकते हैं।

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    कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते विधायक मर्जी पटेल की तस्वीर

    14 विधायकों का आंकड़ा क्यों अहम है?

    उद्धव ठाकरे गुट के पास विधानसभा में 20 विधायक हैं। ऐसे में 14 विधायक दो-तिहाई संख्या बनाते हैं, इसलिए यह आंकड़ा दल-बदल कानून के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल 14 विधायकों के अलग होने से अयोग्यता से सुरक्षा अपने आप तय नहीं होती। संविधान की दसवीं अनुसूची में विलय से जुड़ी विशेष शर्तें लागू होती हैं।

    Operation Tiger-4 से पहले क्या हुआ?

    जून 2026 में ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे। इसके बाद इसे Operation Tiger की सफलता बताया गया। बाद में विधायकों और स्थानीय स्तर के नेताओं को लेकर भी इसी तरह के दावे सामने आते रहे।

    अब 14 विधायकों के संपर्क में होने के दावे ने इस राजनीतिक अभियान के अगले चरण की चर्चा बढ़ा दी है।

    क्या 14 विधायकों के नाम सामने आए हैं?

    फिलहाल 14 विधायकों की कोई आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई सूची सामने नहीं आई है।

    ठाकरे गुट की ओर से ऐसे दावों को पहले भी खारिज किया गया है। ताजा जानकारी में संजय राऊत ने भी इस दावे को राजनीतिक बयान बताते हुए खारिज करने की बात कही है।

    क्या Operation Tiger-4 आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है?

    अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल 14 विधायकों के संपर्क में होने का दावा ही सामने आया है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बताए गए 14 विधायक कौन हैं और क्या उनमें से कोई सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में जाने की पुष्टि करता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ मुंबई के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

    डिस्क्लेमर: इस खबर में 14 विधायकों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की जानकारी शिवसेना विधायक मुरजी पटेल के दावे पर आधारित है। अभी तक इन 14 विधायकों के नाम, उनके संपर्क में होने या शिंदे गुट में शामिल होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए।

  • अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

    यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।

    कारोबारी और पत्नी को ऑफिस तक कैसे ले जाया गया?

    पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।

    कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।

    ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।

    ₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।

    आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।

    यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।

    पूर्व ड्राइवर पर क्यों गया पुलिस का शक?

    जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?

    Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।

    पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।

    पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।

    अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

    • Santosh Uday Khopatkar, 37
    • Vinay Ramesh More, 37
    • Prem Kishan Sabnani, 50
    • Pragya Harish Main/Maine, 27
    • Reshma Shyamrao Warang, 41
    • Sabina Hafiz Shaikh, 48

    पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।

    क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?

    जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।

    जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।

    फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?

    इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

    लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।

    इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।

    कारोबारी ऐसी स्थिति में क्या सावधानी रखें?

    अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।

    खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।

    हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।

    पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

    Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।

    पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।

    फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

  • दही हांडी में 2 मौतें: महिला और 7 साल के बच्चे की जान गई, 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी में 2 मौतें: महिला और 7 साल के बच्चे की जान गई, 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी के दौरान मुंबई और पुणे में दो हादसों में महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हुई। मुंबई-ठाणे में 42 गोविंदा घायल हुए।

    मुंबई: महाराष्ट्र में दही हांडी के जश्न के दौरान मुंबई और पुणे में हुए दो अलग-अलग हादसों में एक महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि मुंबई और ठाणे में कुल 42 गोविंदा घायल हुए। मुंबई के मालाड में बच्चे की मौत हांडी बांधने के लिए इस्तेमाल किए गए ईंट के खंभे के गिरने से हुई, जबकि पुणे के पुराने सांगवी में कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी लोहे का ढांचा हटाते समय महिला उसकी चपेट में आ गई।

    मालाड में 7 साल के रुद्र की मौत

    मुंबई के मलाड (पश्चिम) मालवणी इलाके की एकता वेलफेयर सोसायटी में शनिवार दोपहर बच्चे दही हांडी मना रहे थे। हांडी को एक पेड़ और ईंट के खंभे के बीच रस्सी से बांधा गया था। हांडी फोड़ने के दौरान दबाव बढ़ा और खंभा टूटकर गिर गया। इसका मलबा 7 साल के रुद्र कदम के सिर पर लगा।

    रुद्र को मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुणे में महिला की जान गई

    पिंपरी-चिंचवड़ के पुराने सांगवी इलाके में शुक्रवार रात दही हांडी कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी ढांचा हटाया जा रहा था। इसी दौरान ऊपर लगी लोहे की कमान का एक हिस्सा नीचे गिर गया। इसकी चपेट में 45 वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठान आ गईं।

    पुलिस के मुताबिक, सलमा अपने पति के साथ कार्यक्रम में आई थीं। गंभीर चोट लगने के बाद उनकी मौत हो गई। सांगवी पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की है और ढांचे की अनुमति समेत हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मौत स्पीकर गिरने से नहीं हुई थी।

    मुंबई और ठाणे में 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी के दौरान मानवीय पिरामिड बनाते समय मुंबई में 32 और ठाणे में 10 गोविंदा घायल हुए। शुरुआती जानकारी में मुंबई में 22 घायलों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद के अपडेट में यह संख्या बढ़कर 32 हो गई।

    दही हांडी से पहले बीएमसी ने मुंबई के प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में आपात स्थिति के लिए 100 से ज्यादा बिस्तर तैयार रखे थे। राज्य सरकार ने भी गोविंदाओं के लिए दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने का बीमा कवर बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया था।

    मुंबई और पुणे के दोनों हादसों की वजह अलग रही। मालाड में ईंट का खंभा गिरने से बच्चे की जान गई, जबकि सांगवी में लोहे का अस्थायी ढांचा हटाते समय महिला हादसे का शिकार हुई। दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।