जुहू बीच पर सी, शोर, शाईन-2026 अभियान में 34 टन कचरा हटाया गया। जुलाई में भी 1,825 टन कचरा निकला था, जानिए पूरी तस्वीर।
मुंबई: जुहू समुद्रकिनारे पर गणेशोत्सव के बाद शनिवार को ‘सी, शोर, शाईन-2026’ विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान करीब 34 टन कचरा संकलित किया गया। दिव्याज फाउंडेशन, बृहन्मुंबई महानगरपालिका, मुंबई पुलिस और मेघा श्रेय की संयुक्त पहल में विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों ने हिस्सा लिया। अभियान में प्रसिद्ध अभिनेता अजय देवगन, दिव्याज फाउंडेशन की संस्थापिका अमृता फडणवीस, कौशल्य विकास, रोजगार, उद्योजकता और नावीन्यता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधायक अमित साटम, विधायक राम कदम, बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे, स्थानीय नगरसेविका सीमा सिंग, सह आयुक्त डॉ. भाग्यश्री कापसे और सहायक आयुक्त चक्रपाणी अल्ले सहित कई लोग मौजूद रहे।
जुहू में 34 टन कचरा हटाया गया, लेकिन समस्या कितनी बड़ी है?
आज का 34 टन कचरा गणेशोत्सव के बाद चलाए गए विशेष अभियान में संकलित हुआ है। इसे मुंबई के समुद्रकिनारों पर जमा होने वाले पूरे कचरे का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। जुहू में कचरा जमा होने की समस्या इससे पहले भी बड़े स्तर पर सामने आ चुकी है।
जुलाई में भारी बारिश और ऊंची ज्वार के दौरान बीएमसी की विशेष सफाई मुहिम में जुहू के करीब छह किलोमीटर लंबे समुद्रकिनारे से 1,825 टन कचरा हटाया गया था। उसी अभियान में मुंबई के सात समुद्रकिनारों से कुल 2,499 टन से अधिक ठोस कचरा हटाकर उसका निपटान किया गया था। इसमें प्लास्टिक, थर्मोकोल, लकड़ी का मलबा और अन्य सामग्री शामिल थी।
उस दौरान जुहू बीच पर सामान्य दिनों की तुलना में कचरे की मात्रा में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बीएमसी के अनुसार भारी बारिश और ऊंची ज्वार के दौरान समुद्रकिनारे तक रोजाना करीब 350 टन कचरा पहुंच रहा था, जबकि सामान्य दिनों में यह मात्रा करीब 60 टन बताई गई थी।

नालों से समुद्र और फिर समुद्र से किनारे तक पहुंचता कचरा
जुलाई में सामने आई स्थिति ने यह भी स्पष्ट किया था कि समुद्रकिनारे पर जमा होने वाला कचरा केवल समुद्र में सीधे फेंके गए कचरे का परिणाम नहीं है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार नालों और खुले जलनिकासी मार्गों में पहुंचा प्लास्टिक, थर्मोकोल, कपड़े, लकड़ी और घरेलू कचरा बारिश के पानी के साथ समुद्र तक पहुंच सकता है। ऊंची ज्वार के दौरान यही कचरा वापस समुद्रकिनारे पर आ जाता है।
इसलिए गणेशोत्सव के बाद की 34 टन की सफाई के साथ जुहू में कचरे को समुद्र तक पहुंचने से रोकने का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
गणेशोत्सव के लिए बीएमसी ने की थी व्यापक व्यवस्था
इस वर्ष गणेश विसर्जन के लिए बीएमसी ने मुंबई में 383 से अधिक कृत्रिम विसर्जन तालाब 278 स्थानों पर तैयार किए थे। इसके अलावा 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थल उपलब्ध कराए गए, जिनमें 44 समुद्रकिनारे और जेट्टी तथा 23 प्राकृतिक झीलें शामिल थीं। विसर्जन व्यवस्था के लिए 25 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे।

निर्माल्य के लिए 498 कलश और 326 निर्माल्य डंपर भी उपलब्ध कराए गए थे। इसका उद्देश्य पूजा सामग्री को अलग से एकत्र करना और उसे जलस्रोतों में जाने से रोकना था।
अब निर्माल्य से बनेंगे उपयोगी उत्पाद
जुहू में गणेश विसर्जन के बाद जमा निर्माल्य में से फूलों को अलग कर उन पर प्रक्रिया करने की तैयारी की गई है। बीएमसी और डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान के संयुक्त प्रयास से इन फूलों से अगरबत्ती और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाने हैं।
इस पहल से पूजा सामग्री को सीधे कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उसका दोबारा उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इस अभियान में 34 टन के कुल कचरे में निर्माल्य की वास्तविक मात्रा कितनी थी, इसका अलग आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
समुद्रकिनारे की सफाई के साथ रोकथाम पर भी सवाल
जुहू बीच पर शनिवार का अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान समुद्र और समुद्रकिनारे को स्वच्छ रखने के लिए नागरिकों से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई।
बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि समुद्र मुंबई की बड़ी संपत्ति है और कचरा तथा प्लास्टिक समुद्र में जाने से समुद्र और समुद्रकिनारे दोनों अस्वच्छ होते हैं। उन्होंने गणेशोत्सव के बाद भी स्वच्छता की भावना बनाए रखने और समुद्रकिनारों को साफ रखने में सहयोग करने की अपील की।
अजय देवगन ने भी शहर और देश को स्वच्छ रखना सामूहिक जिम्मेदारी बताया। अमृता फडणवीस ने उत्सव के बाद शहर की सफाई में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। मंगल प्रभात लोढ़ा ने नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन के संयुक्त प्रयास को स्वच्छता संदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।
विधायक अमित साटम ने कहा कि बीएमसी के प्रयासों के कारण इस वर्ष बड़ी संख्या में गणेशमूर्तियों का विसर्जन समुद्र के बजाय कृत्रिम तालाबों में किया गया। उन्होंने आगे प्रक्रिया किए हुए पानी को ही समुद्र में छोड़ने की दिशा में प्रयासों का भी उल्लेख किया।
मुंबई के लिए असली चुनौती सिर्फ सफाई नहीं
जुहू में 34 टन कचरा हटाने के बाद तत्काल समुद्रकिनारा साफ दिखाई दे सकता है, लेकिन जुलाई में 1,825 टन कचरा हटाए जाने और भारी बारिश के दौरान कचरे की बड़ी मात्रा समुद्र तक पहुंचने की स्थिति यह सवाल भी सामने रखती है कि कचरे को समुद्र तक पहुंचने से पहले रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
गणेशोत्सव के लिए कृत्रिम विसर्जन तालाबों और निर्माल्य संग्रह की व्यवस्था बढ़ाने के बावजूद प्राकृतिक समुद्रकिनारों पर सफाई की जरूरत बनी हुई है। इसलिए आगे की चुनौती सफाई अभियान के साथ-साथ कचरे के स्रोत, नालों और समुद्र तक पहुंचने वाले मार्गों पर रोकथाम तथा निर्माल्य के वैज्ञानिक पुनःउपयोग की व्यवस्था को मजबूत करना होगी।
शनिवार के अभियान में संकलित 34 टन कचरे के बाद फिलहाल जुहू समुद्रकिनारा साफ किया गया है। अब इस सफाई को लंबे समय तक बनाए रखना और दोबारा समुद्रकिनारे तक पहुंचने वाले कचरे को कम करना प्रशासन और नागरिकों, दोनों के लिए अगली चुनौती है।
