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मुंबई मालाड के बिल्डर को कम कारपेट एरिया देने पर ₹6.64 लाख मुआवजा, 9% ब्याज, मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश।
मुंबई: मालाड पश्चिम में agreement में तय carpet area से कम फ्लैट देने के मामले में महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Sion के बिल्डर Chinnappan Anthony, proprietor of M/s Milan Builders and Developers, को फ्लैट मालिकों को ₹6,64,640 मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा प्रत्येक शिकायतकर्ता को ₹50,000 मानसिक परेशानी और ₹25,000 मुकदमेबाजी खर्च भी देना होगा।
560 की जगह मिला 518.46 वर्गफुट area
मामला मालाड पश्चिम के Shree Balaji Ashirwad प्रोजेक्ट का है। प्रोजेक्ट का पता नहर नगर रोड, भंडारवाड़ा मार्ग, Smt. KG Mittal Institute of Management के सामने, नेवी कॉलोनी के पास, मालाड पश्चिम, मुंबई – 400064 बताया गया है। यह इलाका लिंक रोड कॉरिडोर और पश्चिमी उपनगरों से जुड़ा हुआ है तथा आसपास बैंक, ATM और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
शिकायतकर्ता के 11 जनवरी 2016 के registered Agreement for Sale में फ्लैट का carpet area 560 वर्गफुट तय था। नवंबर 2016 में possession मिलने के बाद registered architect से measurement कराई गई, जिसमें area 518.46 वर्गफुट निकला।
यानी agreement में तय area से 41.54 वर्गफुट, करीब 7.42 प्रतिशत कम जगह मिली।
शिकायतकर्ता ने ₹16,000 प्रति वर्गफुट के आधार पर नुकसान की गणना की, जिससे ₹6,64,640 की राशि बनी।
बिल्डर की दलील नहीं मानी
Developer ने architect की measurement पर सवाल उठाते हुए complaint का विरोध किया। उसने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता landowner है, इसलिए उसे consumer नहीं माना जाना चाहिए।
आयोग ने दोनों दलीलों को खारिज कर दिया। उसके मुताबिक developer ने architect की report को चुनौती देने के लिए कोई स्वतंत्र expert measurement पेश नहीं की। वहीं development arrangement के तहत constructed flat पाने वाला landowner भी structural deficiency और statutory non-compliance के मामलों में consumer हो सकता है।
आयोग ने कहा कि agreement में तय carpet area को purchaser की लिखित सहमति या उचित consideration adjustment के बिना कम करना सेवा में कमी और unfair trade practice है।
Full OC और society formation पर भी आदेश
मामले में building का पूर्ण Occupation Certificate (OC) नहीं होने और cooperative housing society का गठन नहीं किए जाने की शिकायत भी की गई थी। आयोग ने इन statutory obligations को continuing nature का माना और developer को संबंधित authorities के साथ जरूरी formalities पूरी करने का निर्देश दिया।
इसी वजह से developer की यह दलील भी नहीं चली कि शिकायत पुरानी होने के कारण limitation से बाहर है। हालांकि हर पुराने property dispute में यही नियम लागू नहीं होता; complaint की तारीख और cause of action के आधार पर limitation तय होती है।
Flat मालिकों के लिए क्या मायने?
इस फैसले से साफ है कि flat खरीदते समय Agreement for Sale में दर्ज carpet area को ध्यान से जांचना जरूरी है। Possession के बाद area में अंतर मिले तो independent architect से measurement कराकर report सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। Buyer को OC, sanctioned plan, society formation और conveyance की स्थिति भी जांचनी चाहिए।
यह फैसला यह भी नहीं कहता कि हर carpet-area dispute में ₹6.64 लाख compensation मिलेगा। इस मामले में रकम 41.54 वर्गफुट की कमी और ₹16,000 प्रति वर्गफुट के valuation basis पर तय हुई।
Andheri के Chitrakoot Ground पर BMC ने 34,000 वर्ग फुट में बने अवैध ढांचे हटाए। 1991 से लंबित Fire Station का रास्ता साफ, अब निर्माण की बारी।
मुंबई: Andheri West के Link Road स्थित Chitrakoot Ground पर BMC ने सोमवार को बड़ी demolition कार्रवाई करते हुए Fire Station के लिए आरक्षित जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को हटा दिया है। करीब 34,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली संरचनाओं पर हुई इस कार्रवाई में garage, banquet/marriage hall और अन्य निर्माण शामिल थे। Bombay High Court में इसी विवाद से जुड़े मामले में नौ संरचनाओं का उल्लेख है। अदालत ने 25 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए कुल ₹10 लाख की लागत भी लगाई थी।
यह कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि Chitrakoot Ground का यह हिस्सा 1991 से Fire Station के लिए आरक्षित बताया जाता रहा है। करीब 34 साल से अटकी इस परियोजना के लिए अब जमीन खाली कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हालांकि, जमीन खाली होने के बाद अगला सवाल अब यही है कि Ambivali Fire Station का वास्तविक निर्माण कब शुरू होगा।
BMC के K-West Ward ने Chitrakoot Ground पर करीब 34,000 वर्ग फुट में फैले अनधिकृत निर्माण हटाए। इनमें DRM Motors, DRM Apparels और Chitrakoot Banquet Hall के अवैध ढांचे बनाए गए थे। कार्रवाई के दौरान BMC के Building and Factory विभाग ने भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया और Amboli Police Station की पुलिस टीम personnel सुरक्षा के लिए मौजूद रहे।
Bombay High Court में दाखिल मामले में संबंधित निर्माणों के रूप में porta cabins, temporary office structures, car workshop और तीन banquet halls समेत नौ संरचनाओं का विवाद सामने आया था।
मामला Bombay High Court तक कैसे पहुंचा?
BMC की कार्रवाई से पहले संबंधित निजी निर्माण कंपनी ने civic body’s demolition notices और orders को Bombay High Court में चुनौती दी थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक BMC ने 13 मई 2026 को notices जारी किए और बाद में 1 जुलाई 2026 को removal orders जारी किए।
मामला Shah Constructions Co. Ltd. बनाम Municipal Corporation of Greater Mumbai के रूप में हाई कोर्ट पहुंचा। 25 अगस्त 2026 को जस्टिस A.S. Gadkari और जस्टिस Kamal Khata की पीठ ने दोनों writ petitions खारिज कर दीं। अदालत ने प्रत्येक याचिका पर ₹5 लाख यानी कुल ₹10 लाख की लागत लगाई।
हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण को लेकर क्या कहा?
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पुराने municipal records, tax assessments, licences और repair permissions जैसे दस्तावेजों पर भरोसा किया गया था। अदालत ने माना कि ऐसे दस्तावेज अपने आप किसी निर्माण को कानूनी नहीं बना देते। किसी संरचना को वैध साबित करने के लिए sanctioned plan और उसके मूल निर्माण की विश्वसनीय जानकारी जरूरी थी।
मामले में लगभग 34,000 वर्ग फुट constructed area में से करीब 18,000 वर्ग फुट हिस्सा हटाने की पेशकश भी की गई थी, लेकिन अदालत ने बाकी निर्माण को बचाने का आधार स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार यह साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं था कि पुराने और बाद में किए गए निर्माण को स्पष्ट रूप से अलग किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि property-tax assessment, licences या repair permissions किसी अनधिकृत निर्माण को स्वतः regularise नहीं करते। इसी आधार पर BMC के notices और demolition orders को बरकरार रखा गया।
1991 से Fire Station के लिए आरक्षित है जमीन
Chitrakoot Ground का यह हिस्सा Development Plan में Fire Station के लिए आरक्षित किए जाने के बाद भी दशकों तक अपने उद्देश्य के अनुसार विकसित नहीं हो सका। स्थानीय नागरिक संगठनों और पुरानी रिपोर्टों के अनुसार reservation का इतिहास 1991 तक जाता है।
इस परियोजना को लेकर 2009 में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया था। जानकारी के अनुसार BMC के Building Proposal Department ने Ambivali Fire Station के निर्माण के लिए Commencement Certificate जारी किया था। लेकिन निर्माण आगे नहीं बढ़ा और बाद में वह अनुमति रद्द हो गई।
यानी जमीन आरक्षित होने, construction permission मिलने और वर्षों तक प्रशासनिक follow-up के बावजूद Fire Station जमीन पर आकार नहीं ले सका।
2016 से 2024 तक चलता रहा प्रशासनिक Follow-Up
यह मामला केवल हाल की demolition drive से शुरू नहीं हुआ। उपलब्ध जानकारी में Mumbai Fire Brigade की 2016 से 2024 तक की correspondence और administrative follow-up का उल्लेख है।
इस दौरान जमीन के acquisition, handover, development proposal और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर पत्राचार और बैठकें हुईं। 2022 में Suburban Collector के साथ बैठक हुई थी। 2023 में Ambivali Fire Station development proposal से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई थी।
2025 में भी Fire Brigade ने जमीन को Fire Station के लिए उपलब्ध कराने को लेकर Collector स्तर पर मामला उठाया था। उस समय करीब 5,500 वर्ग मीटर के plot का उल्लेख किया गया था।
2026 में जमीन खाली कराने की प्रक्रिया तेज हुई
मार्च 2026 में BMC ने संबंधित पक्ष को Fire Station के लिए आरक्षित जमीन hand over करने के लिए सात दिन का अंतिम समय दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले notice और reminder communication के जरिए जमीन सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।
इसके बाद project से जुड़ी ₹1.33 करोड़ की bank guarantee भी सामने आई। जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2026 को Municipal Commissioner के पक्ष में यह guarantee जमा की गई थी। अप्रैल में अधिकारियों की ओर से आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी।
लेकिन सितंबर तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में Fire Station का actual construction शुरू होने की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई थी। यही वजह है कि मौजूदा demolition के बाद परियोजना की अगली समयसीमा सबसे अहम सवाल बन गई है।
Chitrakoot Ground पर पहले भी हो चुकी है आग की घटना
Fire Station की जरूरत केवल कागजों में दर्ज reservation का मामला नहीं है। जुलाई 2022 में इसी Chitrakoot Ground पर एक फिल्म सेट में आग लगने से 32 वर्षीय मजदूर की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी इलाके में Fire Station की जरूरत और emergency response को लेकर सवाल उठे थे।
Lokhandwala-Oshiwara और Link Road का इलाका पिछले वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। यहां residential towers, commercial establishments और high-rise buildings बढ़े हैं। ऐसे इलाके में Fire Brigade के लिए response time बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक वरिष्ठ Fire official के अनुसार वर्तमान में Andheri West के लिए fire brigades को Vile Parle, Goregaon और Bandra जैसे स्थानों से dispatch करना पड़ सकता है, जबकि peak traffic के दौरान दूरी और congestion response time को प्रभावित कर सकते हैं।
पुरानी रिपोर्टों में traffic और दूरी के कारण emergency response में 30 से 45 मिनट तक की देरी की चिंता भी दर्ज की गई हैं।
स्थानीय नागरिक वर्षों से उठा रहे हैं मांग
Lokhandwala-Oshiwara Citizens Association सहित स्थानीय नागरिक समूह लंबे समय से इस जमीन पर Fire Station विकसित करने की मांग करते रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि केवल demolition करके मामला खत्म नहीं होना चाहिए। पूरी आरक्षित जमीन को दोबारा encroachment से सुरक्षित करना और construction process को आगे बढ़ाना जरूरी है।
स्थानीय BJP corporator Rupesh Sawarkar ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के बाद से Fire Station की जमीन से encroachment हटाने के लिए प्रशासन के साथ follow-up किया। उनका दावा है कि आरक्षित जमीन का इस्तेमाल wedding functions, film shoots और turf cricket जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और lease arrangements में financial irregularities की आशंका थी।
अब जमीन खाली होने के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या?
BMC की कार्रवाई ने Fire Station के लिए लंबे समय से अटकी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लेकिन demolition का मतलब Fire Station का निर्माण शुरू होना नहीं है।
अब प्रशासन के सामने अगली जिम्मेदारियां हैं—क्या पूरा आरक्षित भूखंड सुरक्षित और उपलब्ध हो चुका है, Fire Department को possession कब मिलेगा, final building plan की स्थिति क्या है, project की लागत कितनी है, tender जारी हुआ है या नहीं, निर्माण एजेंसी कौन होगी और Fire Station कब तक operational होगा।
फरवरी 2026 में करीब 18 महीने के संभावित construction timeline की चर्चा हुई थी, जबकि अप्रैल में आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी। अब सितंबर की demolition कार्रवाई के बाद इस timeline की स्थिति स्पष्ट करना BMC के लिए जरूरी होगा।
34 साल पुराने Ambivali Fire Station के लिए रास्ते का एक बड़ा अवरोध जरूर हटा है, लेकिन Andheri West के लोगों को अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद निर्माण शुरू होने और Fire Station operational होने की तारीख का इंतजार है।
महाराष्ट्र में Operation Tiger-4 की चर्चा तेज, 14 UBT विधायकों के शिंदे गुट के संपर्क में होने का दावा। जानिए क्या है पूरा मामला और कितनी है पुष्टि।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर की चर्चा तेज हो गई है। दावा किया गया है किउद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और जल्द ‘Operation Tiger-4’ देखने को मिल सकता है।
एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना विधायक मुरजी पटेल ने सोमवार को यह दावा करते हुए कहा कि इन विधायकों के शिंदे गुट में आने के लिए नेतृत्व के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार है। उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों के बाद कुछ नगरसेवक भी शिंदे गुट का रुख कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते विधायक मर्जी पटेल की तस्वीर
उद्धव ठाकरे गुट के पास विधानसभा में 20 विधायक हैं। ऐसे में 14 विधायक दो-तिहाई संख्या बनाते हैं, इसलिए यह आंकड़ा दल-बदल कानून के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, केवल 14 विधायकों के अलग होने से अयोग्यता से सुरक्षा अपने आप तय नहीं होती। संविधान की दसवीं अनुसूची में विलय से जुड़ी विशेष शर्तें लागू होती हैं।
Operation Tiger-4 से पहले क्या हुआ?
जून 2026 में ठाकरे गुट के छह लोकसभा सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे। इसके बाद इसे Operation Tiger की सफलता बताया गया। बाद में विधायकों और स्थानीय स्तर के नेताओं को लेकर भी इसी तरह के दावे सामने आते रहे।
अब 14 विधायकों के संपर्क में होने के दावे ने इस राजनीतिक अभियान के अगले चरण की चर्चा बढ़ा दी है।
फिलहाल 14 विधायकों की कोई आधिकारिक या स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई सूची सामने नहीं आई है।
ठाकरे गुट की ओर से ऐसे दावों को पहले भी खारिज किया गया है। ताजा जानकारी में संजय राऊत ने भी इस दावे को राजनीतिक बयान बताते हुए खारिज करने की बात कही है।
क्या Operation Tiger-4 आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है?
अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल 14 विधायकों के संपर्क में होने का दावा ही सामने आया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बताए गए 14 विधायक कौन हैं और क्या उनमें से कोई सार्वजनिक रूप से शिंदे गुट में जाने की पुष्टि करता है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ मुंबई के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में 14 विधायकों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की जानकारी शिवसेना विधायक मुरजी पटेल के दावे पर आधारित है। अभी तक इन 14 विधायकों के नाम, उनके संपर्क में होने या शिंदे गुट में शामिल होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को फिलहाल राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए।
अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।
पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।
कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।
ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।
₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।
आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।
यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।
जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।
हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?
Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।
पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
Santosh Uday Khopatkar, 37
Vinay Ramesh More, 37
Prem Kishan Sabnani, 50
Pragya Harish Main/Maine, 27
Reshma Shyamrao Warang, 41
Sabina Hafiz Shaikh, 48
पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।
क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?
जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।
जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।
फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?
इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।
लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।
इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।
अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।
खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।
हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।
Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।
पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।
फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।
दही हांडी के दौरान मुंबई और पुणे में दो हादसों में महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हुई। मुंबई-ठाणे में 42 गोविंदा घायल हुए।
मुंबई: महाराष्ट्र में दही हांडी के जश्न के दौरान मुंबई और पुणे में हुए दो अलग-अलग हादसों में एक महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि मुंबई और ठाणे में कुल 42 गोविंदा घायल हुए। मुंबई के मालाड में बच्चे की मौत हांडी बांधने के लिए इस्तेमाल किए गए ईंट के खंभे के गिरने से हुई, जबकि पुणे के पुराने सांगवी में कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी लोहे का ढांचा हटाते समय महिला उसकी चपेट में आ गई।
मालाड में 7 साल के रुद्र की मौत
मुंबई के मलाड (पश्चिम) मालवणी इलाके की एकता वेलफेयर सोसायटी में शनिवार दोपहर बच्चे दही हांडी मना रहे थे। हांडी को एक पेड़ और ईंट के खंभे के बीच रस्सी से बांधा गया था। हांडी फोड़ने के दौरान दबाव बढ़ा और खंभा टूटकर गिर गया। इसका मलबा 7 साल के रुद्र कदम के सिर पर लगा।
रुद्र को मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुणे में महिला की जान गई
पिंपरी-चिंचवड़ के पुराने सांगवी इलाके में शुक्रवार रात दही हांडी कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी ढांचा हटाया जा रहा था। इसी दौरान ऊपर लगी लोहे की कमान का एक हिस्सा नीचे गिर गया। इसकी चपेट में 45 वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठान आ गईं।
पुलिस के मुताबिक, सलमा अपने पति के साथ कार्यक्रम में आई थीं। गंभीर चोट लगने के बाद उनकी मौत हो गई। सांगवी पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की है और ढांचे की अनुमति समेत हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मौत स्पीकर गिरने से नहीं हुई थी।
दही हांडी के दौरान मानवीय पिरामिड बनाते समय मुंबई में 32 और ठाणे में 10 गोविंदा घायल हुए। शुरुआती जानकारी में मुंबई में 22 घायलों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद के अपडेट में यह संख्या बढ़कर 32 हो गई।
दही हांडी से पहले बीएमसी ने मुंबई के प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में आपात स्थिति के लिए 100 से ज्यादा बिस्तर तैयार रखे थे। राज्य सरकार ने भी गोविंदाओं के लिए दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने का बीमा कवर बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया था।
मुंबई और पुणे के दोनों हादसों की वजह अलग रही। मालाड में ईंट का खंभा गिरने से बच्चे की जान गई, जबकि सांगवी में लोहे का अस्थायी ढांचा हटाते समय महिला हादसे का शिकार हुई। दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मालाड के मालवणी में दही हांडी फोड़ते समय ईंट का खंभा गिरने से 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा शनिवार दोपहर हुआ।
मुंबई: मालाड के मालवणी इलाके में शनिवार दोपहर दही हांडी के दौरान 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा करीब 3:01 बजे एकता वेलफेयर सोसायटी, चिकुवाड़ी में हुआ। दही हांडी फोड़ने के लिए बच्चे मानव पिरामिड बना रहे थे। इसी दौरान हांडी को बांधने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी से जुड़े ईंट के खंभे का हिस्सा दबाव में गिर गया, जिसकी चपेट में रुद्र आ गया।
हांडी फोड़ते समय गिरा खंभा
जानकारी के मुताबिक, दही हांडी की रस्सी एक पेड़ और जमीन तल की संरचना के ईंट के खंभे से बांधी गई थी। हांडी फोड़ने की कोशिश के दौरान खंभा दबाव नहीं सह सका और उसका हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया। मलबे की चोट रुद्र के सिर पर लगी।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। रुद्र को तुरंत मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया।
मुंबई में 32 गोविंदा घायल
मालाड की इस घटना के अलावा दही हांडी के दौरान मुंबई के अलग-अलग इलाकों में 32 गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का इलाज जारी था।
दही हांडी आयोजन से पहले बीएमसी ने प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में घायल गोविंदाओं के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था रखने की जानकारी दी थी।
हादसे की जांच
रुद्र की मौत के बाद अब यह जांच का विषय है कि दही हांडी के लिए रस्सी किस तरह बांधी गई थी, जिस खंभे से उसे जोड़ा गया था उसकी स्थिति कैसी थी और आयोजन स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के पास अनवारी फेरी प्रोपेलर में रस्सी फंसने से समुद्र में बंद हो गई। 34 यात्रियों समेत 38 लोगों को दूसरी नाव ने सुरक्षित निकाला।
मुंबई: गेटवे ऑफ इंडिया से समुद्री सैर पर निकली अनवारी फेरी गुरुवार रात समुद्र में अचानक बंद हो गई। फेरी में 34 यात्री और चार चालक दल के सदस्य समेत कुल 38 लोग सवार थे। करीब रात 8:30 बजे खराबी आने के बाद चालक दल ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पास चल रही दूसरी फेरी की मदद से सभी लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद रेस्क्यू कि तस्वीर
प्रोपेलर में फंसी थी रस्सी
पुलिस के मुताबिक, फेरी के प्रोपेलर में रस्सी फंस गई थी, जिसकी वजह से वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। उस समय अनवारी गेटवे से करीब 1.5 समुद्री मील दूर थी और करीब 30 मिनट की समुद्री सैर पूरी करके लौट रही थी।
फेरी के चालक दल ने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी। गेटवे की बीट चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद नावों से मदद लेने की कोशिश शुरू की।
‘आजाद हिंद’ ने खींचकर पहुंचाया जेट्टी तक
पुलिस को पता चला कि आजाद हिंद नाम की एक दूसरी फेरी आसपास चल रही है। पुलिस ने उसके मालिक जुनैद मुल्ला से संपर्क किया। इसके बाद आजाद हिंद को अनवारी की मदद के लिए भेजा गया।
आजाद हिंद ने खराब पड़ी फेरी को खींचकर गेटवे ऑफ इंडिया की जेट्टी नंबर 2 तक पहुंचाया। उपलब्ध पुलिस-आधारित बयान के अनुसार करीब 9:10 बजे सभी 38 लोगों को सुरक्षित उतार लिया गया।
पुलिस करेगी चालक दल से पूछताछ
घटना के बाद पुलिस चालक दल से पूछताछ करेगी। इसका मकसद यह पता लगाना है कि प्रोपेलर में रस्सी कैसे फंसी और फेरी समुद्र में रुकने की स्थिति में कैसे पहुंची। फिलहाल किसी यात्री के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
गेटवे से चलने वाली नावों की सुरक्षा का मुद्दा नया नहीं है। दिसंबर 2024 में गेटवे के पास हुए गंभीर नौका हादसे के बाद महाराष्ट्र में नावों में यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करने और सुरक्षा जांच बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए थे।
हालांकि, गुरुवार रात अनवारी में सवार यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी थी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसी तरह फेरी की तकनीकी जांच, फिटनेस और आगे की कार्रवाई को लेकर भी पुलिस की पूछताछ के बाद ही स्थिति साफ होगी।
फिलहाल इस घटना में सभी 38 लोग सुरक्षित हैं। अब जांच का मुख्य सवाल यही है कि समुद्र में फेरी के प्रोपेलर में रस्सी कैसे फंसी और ऐसी स्थिति से बचने के लिए आगे क्या सुरक्षा कदम उठाए जाते हैं।
श्रीनगर एयरपोर्ट पर पार्किंग के दौरान IndiGo की 6E 225 उड़ान VDGS पोल से टकरा गई। सभी यात्री सुरक्षित हैं, विमान को नुकसान हुआ।
जम्मू-कश्मीर: श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से पहुंची IndiGo की उड़ान 6E 225 पार्किंग के दौरान एक सिग्नल खंभे से टकरा गई। हादसा करीब सुबह 9:02 बजे बे नंबर 6 में विमान को पार्क करते समय हुआ। विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
विमान का पंजीकरण VT-NOG बताया गया है। टक्कर के बाद विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा और यात्रियों को विमान से उतारने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया गया।
लैंडिंग के समय नहीं, पार्किंग के दौरान हुआ हादसा
यह घटना विमान के रनवे पर उतरते समय नहीं हुई। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विमान श्रीनगर पहुंचने के बाद पार्किंग बे में अपनी जगह पर लगाया जा रहा था, तभी वह VDGS पोल के संपर्क में आया। यानी लैंडिंग हादसा नहीं है, जमीन पर पार्किंग के दौरान हुई घटना है।
VDGS यानी Visual Docking Guidance System विमान को पार्किंग की सही स्थिति और रुकने की जगह बताने वाला सिग्नल पोल है। श्रीनगर एयरपोर्ट की घटना में इसी सिस्टम के पोल से विमान का संपर्क हुआ। जानकारी के मुताबिक इस पोल पर विमान को दिशा और स्थिति बताने वाली प्रदर्शन इकाई के साथ लेजर और कैमरा सेंसर भी जुड़े होते हैं।
श्रीनगर एयरपोर्ट पर मुंबई से श्रीनगर जा रही इंडिगो की उड़ान पार्किंग के दौरान एक खंभे से टकरा गई। यह घटना सुबह करीब 9:02 बजे बे नंबर 06 पर हुई। विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यात्रियों को सीढ़ियों की मदद से विमान से pic.twitter.com/CY0qWHjicx
टक्कर के बाद विमान को नुकसान हुआ है। तस्वीरों और मौके से सामने आई जानकारी में विमान के अगले हिस्से के पास क्षति दिखाई दे रही है, लेकिन नुकसान की सटीक तकनीकी सीमा और विमान दोबारा उड़ान के लिए कब उपलब्ध होगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
विमान की पहचान Airbus A321neo के रूप में की गई है।
क्या श्रीनगर एयरपोर्ट की दूसरी उड़ानें प्रभावित हुईं?
एयरपोर्ट प्रशासन के मुताबिक घटना के बावजूद श्रीनगर एयरपोर्ट का सामान्य संचालन जारी रहा और दूसरी उड़ानों के आगमन-प्रस्थान पर तत्काल कोई व्यापक असर नहीं पड़ा।
हालांकि, जिस विमान के साथ यह घटना हुई, उसकी अगली उड़ान को लेकर स्थिति पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। कुछ उड़ान-ट्रैकिंग सेवाओं में 6E 226, यानी श्रीनगर से नवी मुंबई जाने वाली वापसी उड़ान की स्थिति रद्द दिखाई गई है, लेकिन अलग-अलग ट्रैकिंग सेवाओं में स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए इसके आधार पर अंतिम फैसला मानने से पहले IndiGo की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
ब्रेक फेल होने की बात कितनी सही?
घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों में विमान के ब्रेक सिस्टम में खराबी को संभावित वजह बताया गया है। लेकिन यह बात अभी आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हुई है।
श्रीनगर एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि घटना की परिस्थितियों की जांच संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद ही सही कारण सामने आएगा। इसलिए फिलहाल ब्रेक फेल होने को हादसे की निश्चित वजह बताना सही नहीं है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल सुरक्षित हैं। विमान को हुई तकनीकी क्षति, घटना का वास्तविक कारण और वापसी की उड़ान पर इसका अंतिम असर जांच और एयरलाइन की आगे की जानकारी के बाद स्पष्ट होगा।
दहिसर में टैक्सी-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 5 आरोपी और 5 वाहन पकड़े। अब पूरे मुंबई में जांच की मांग।
मुंबई: मुंबई में टैक्सी या रिक्शा में बैठने के बाद मीटर पर दिखने वाला किराया ही यात्री के लिए भरोसे का आधार होता है। लेकिन दहिसर में किराया मीटर के साथ इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।दहिसर पुलिस ने मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर किराए में हेरफेर करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पांच वाहन जब्त किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर टैक्सी और रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए छेड़छाड़ कर यात्रियों से निर्धारित किराए से ज्यादा रकम वसूलने का आरोप है। कार्रवाई में दो काली-पिली टैक्सी, दो रिक्शा और एक मारुति आर्टिगा जब्त की गई है।
एक टैक्सी से खुला मामला, जांच में सामने आए पांच वाहन
दहिसर पुलिस को टैक्सी और रिक्शा के मीटर में छेड़छाड़ कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन की जांच शुरू की।
1 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक यात्री को टैक्सी क्रमांक MH 01 CJ 6487 से सफर के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, टैक्सी चालक द्वारा मीटर में छेड़छाड़ किए जाने का संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, बोरीवली भेजा गया।
आरटीओ की जांच में मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट जैसी डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए मीटर की रीडिंग को प्रभावित कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को ऐसे ही दूसरे वाहनों की भी जानकारी मिली। इसके बाद कुल पांच वाहनों को जब्त किया गया।
कौन-कौन से वाहन पकड़े गए?
पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में ये वाहन जब्त किए गए हैं—
काली-पिली टैक्सी — MH 01 CJ 6487
काली-पिली रिक्शा — MH 02 DU 0777
काली-पिली रिक्शा — MH 03 BY 4268
काली-पिली टैक्सी — MH 02 BQ 7392
मारुति आर्टिगा — MH 01 EM 6048
पुलिस ने मीटर में छेड़छाड़ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट को भी जब्त किया है।
इस मामले में पुलिस ने जौएब अल्ताफ देशमुख (32), अमीन रमजान पठाण (39), रियाज अब्दुलगनी शेख (45), नाजीर इब्राहिम पटेल (57) और आनंद कुमार नानाकप्रसाद राय (60) के खिलाफ कार्रवाई की है।
पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
मुंबई के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल
दहिसर में पांच वाहनों में मीटर से छेड़छाड़ सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ इन पांच वाहनों तक सीमित नहीं है।
अगर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए किराया मीटर में हेरफेर किया जा सकता है, तो मुंबई के दूसरे इलाकों में चल रहे टैक्सी और रिक्शा के मीटर कितने सुरक्षित हैं?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मुंबईकर टैक्सी और रिक्शा से सफर करते हैं। यात्री मीटर में दिखाई देने वाली रकम को सही मानकर भुगतान करता है। ऐसे में मीटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ होने पर उसे अतिरिक्त किराया वसूले जाने का पता भी नहीं चल सकता।
हालांकि, दहिसर के इन पांच वाहनों के मामले से पूरे मुंबई में इस तरह की धोखाधड़ी हो रही है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जांच का मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।
अब आरटीओ की जवाबदेही पर सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की भूमिका को लेकर भी है।
दहिसर पुलिस की कार्रवाई के बाद क्या मुंबई के अलग-अलग इलाकों में टैक्सी और रिक्शा के मीटरों की विशेष जांच की जाएगी?
क्या आरटीओ यह जांच करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर मीटर की रीडिंग में हेरफेर करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे वाहनों में कहीं हो तो नहीं रहा?
और अगर ऐसी जांच होती है तो कितने वाहनों के मीटर सही पाए जाते हैं और कितनों में गड़बड़ी सामने आती है, इसकी जानकारी क्या सार्वजनिक की जाएगी?
इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मीटर में हेरफेर का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई
यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। जिसमें, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज एरवडे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सर्जेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अधिकारी मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।
कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके के साथ पुलिसकर्मी हेमंत बाबुराव दिवारे, सुनील चंद्रकांत राठोड, संतोष काशिनाथ भागवत और ऋषिकेश प्रवीण मोरे शामिल थे। बताया गया कि सबसे पहले इसकी जानकारी सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके को मिली थी जिसके निगरानी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से जांच के निर्देश मिले।
दहिसर की कार्रवाई ने खोल दिया बड़ा सवाल
दहिसर पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल पांच वाहनों और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया है। लेकिन इससे मुंबई के परिवहन तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ दहिसर में ही मीटर की ऐसी जांच होगी या आरटीओ पूरे मुंबई में टैक्सी-रिक्शा के मीटरों की व्यापक जांच शुरू करेगा?
मुंबई के अंधेरी में BMC के जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी पर ₹60 हजार रिश्वत लेने का आरोप। ACB ट्रैप में गिरफ्तारी, ₹2.78 लाख कैश बरामद।
मुंबई: अंधेरी पश्चिम के BMC K/West Ward कार्यालय में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने रिश्वत के मामले में BMC के एक जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ACB के मुताबिक, एक बेकरी संचालक से कथित तौर पर ₹70 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद ₹60 हजार में सौदा तय हुआ, जिसके बाद ACB ने ट्रैप लगाकर कर्मचारी को रकम लेते हुए पकड़ लिया।
मामले में जूनियर इंजीनियर नीरवकुमार चुनीलाल जैसूर (43) और BMC कर्मचारी विजय रमेश पाटील (46) को आरोपी बनाया गया है।
बेकरी पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत का आरोप
ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता 50 वर्षीय बेकरी संचालक है। आरोप है कि पाटील ने उससे ₹70 हजार मांगे थे। कथित तौर पर यह रकम बेकरी को चलाने देने और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने के बदले मांगी गई थी।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। इसी दौरान पाटील ने शिकायतकर्ता की मुलाकात जूनियर इंजीनियर जैसूर से कराई। इसके बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम ₹70 हजार से घटकर ₹60 हजार तय हुई।
रकम तय होने के बाद ACB ने K/West Ward कार्यालय में ट्रैप लगाया।
ACB के अनुसार, विजय पाटील को ₹60 हजार स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद जांच टीम ने BMC के छठी मंजिल स्थित कार्यालय से जूनियर इंजीनियर जैसूर को भी हिरासत में लिया।
दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कर्मचारी के पास ₹2.78 लाख कैश मिला
ट्रैप के बाद ACB ने पाटील की तलाशी ली। उसके पास से ₹40,820 नकद और बैग से ₹2,37,600 नकद बरामद हुआ।
ACB ने मामले में मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जूनियर इंजीनियर जैसूर के दो मोबाइल फोन और पाटील का एक मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।
अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।
अब आगे क्या होगा?
ACB की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। इस केस में सबसे अहम सवाल अब यह है कि ₹2.78 लाख की अतिरिक्त नकदी का स्रोत क्या था और क्या उसका कथित रिश्वत प्रकरण से कोई संबंध सामने आता है।