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  • राम मंदिर स्टेशन के पास सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत, इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट के fumes पर जांच

    राम मंदिर स्टेशन के पास सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत, इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट के fumes पर जांच

    मुंबई के राम मंदिर पूर्व में सार्वजनिक शौचालय में दो युवकों की मौत से हड़कंप मच गया। पड़ोसी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से chemical fumes आने की आशंका की जांच जारी है।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में राम मंदिर रेलवे स्टेशन के पास शिवशंकर नगर इलाके में रविवार तड़के एक सार्वजनिक शौचालय के अंदर दो युवकों की मौत के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। दोनों युवक शौचालय के अंदर बेहोशी की हालत में मिले। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि पास में चल रही इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से निकले chemical fumes शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं। फिलहाल मौत का अंतिम कारण पोस्टमार्टम और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

    मृतकों की पहचान 18 वर्षीय भाविन देसाई और 24 वर्षीय प्रभाकर धनिवार के रूप में की गई है। दोनों स्थानीय गणपति मंडल से जुड़े थे। शनिवार रात वे मंडल के छह अन्य सदस्यों के साथ खाना खाने गए थे और इसके बाद कुछ समय तक साथ बैठे रहे।

    करीब 2:30 बजे शौचालय गए थे दोनों युवक

    जानकारी के अनुसार रात करीब 2:30 बजे भाविन देसाई और प्रभाकर धनिवार सार्वजनिक शौचालय गए। काफी समय बीतने के बाद जब दोनों वापस नहीं लौटे तो उनके साथ मौजूद युवकों को चिंता हुई। वे शौचालय के अंदर पहुंचे तो दोनों को बेहोशी की हालत में पाया।

    साथियों ने दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों को जोगेश्वरी पूर्व के ट्रॉमा केयर अस्पताल ले जाया गया था और करीब 3:45 से 3:49 बजे के बीच उनकी मौत की पुष्टि हुई।

    शौचालय से तेज chemical smell आने की बात

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शौचालय से तेज chemical smell आने की जानकारी दी। इसी के बाद आशंका जताई गई कि अंदर किसी chemical substance या fumes का प्रभाव हो सकता है।

    हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि शौचालय के अंदर मौजूद chemical कौन-सा था, उसकी concentration कितनी थी या वह वहां तक किस रास्ते से पहुंचा। अधिकारियों की जांच का एक अहम हिस्सा इसी source की पहचान करना है।

    पास की इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट पर क्यों पहुंची जांच?

    पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सार्वजनिक शौचालय के ठीक पास चल रही एक छोटी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट में चल रही प्रक्रिया से chemical fumes निकले थे या नहीं।

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल शेख के अनुसार, यूनिट में electroplating process चल रहा था और यह जांच की जा रही है कि वहां से निकले fumes सार्वजनिक शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं। यूनिट का मालिक घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।

    पुलिस ने जांच का हवाला देते हुए दोनों मौतों के लिए यूनिट या उसके मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। पुलिस की जांच यह निर्धारित करेगी कि fumes और मौतों के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध था या नहीं।

    कौन-सा chemical था, अभी सबसे बड़ा सवाल

    इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर शौचालय के अंदर कौन-सा chemical या gas मौजूद था।

    पुलिस ने बताया कि किसी specific chemical या gas का नाम सामने नहीं आया है। न ही यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हुआ है कि शौचालय के अंदर की हवा में किस पदार्थ की मौजूदगी पाई गई या उसकी कितनी मात्रा थी।

    BMC, Fire Brigade और MPCB की टीमें मौके पर पहुंचीं

    घटना की जानकारी मिलने के बाद मुंबई फायर ब्रिगेड, मुंबई पुलिस, 108 एंबुलेंस सेवा, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल यानी MPCB और BMC के वार्ड कर्मचारियों की टीमें मौके पर पहुंचीं।

    जांच में सार्वजनिक शौचालय के भीतर की स्थिति के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र और संभावित chemical source की भी पड़ताल की जा रही है।

    अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि मौके पर की गई जांच में क्या पाया गया, क्या किसी chemical या gas का sample लिया गया और उसकी laboratory testing से क्या सामने आता है।

    सार्वजनिक शौचालय की ventilation पर भी उठेंगे सवाल

    घटना के बाद सिर्फ आसपास की industrial activity ही जांच का विषय नहीं है। यह भी देखा जाना जरूरी है कि सार्वजनिक शौचालय की ventilation व्यवस्था कैसी थी और वहां हवा के आने-जाने की पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं।

    अगर बाहरी fumes किसी तरह अंदर पहुंचे थे, तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि शौचालय की संरचना, ventilation, drainage या किसी अन्य रास्ते ने fumes के जमा होने में कोई भूमिका निभाई थी या नहीं।

    यही वजह है कि घटना की पूरी जांच में केवल संभावित chemical source ही नहीं, बल्कि public toilet की physical condition और maintenance व्यवस्था को भी देखा जाना महत्वपूर्ण होगा।

    पुलिस ने accidental death report दर्ज की

    Vanrai Police ने मामले में accidental death report दर्ज की है। पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ा काम दोनों मौतों के वास्तविक कारण और chemical exposure की संभावित भूमिका को स्थापित करना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट से निकलने वाले fumes वास्तव में शौचालय तक पहुंचे थे या नहीं और अगर पहुंचे थे तो उनका दोनों युवकों पर क्या प्रभाव पड़ा।

    अब जांच के नतीजों पर टिकी नजर

    राम मंदिर पूर्व की इस घटना में फिलहाल दो मौतें हो चुकी हैं, लेकिन chemical source और मौत के बीच संबंध अभी जांच का विषय है। किस substance के कारण खतरा पैदा हुआ, वह कहां से आया, शौचालय तक कैसे पहुंचा और क्या किसी नियम या सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन हुआ था—इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।

    फिलहाल पुलिस, BMC, Fire Brigade और MPCB की जांच के साथ पोस्टमार्टम निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं से यह स्पष्ट होगा कि शिवशंकर नगर के सार्वजनिक शौचालय में दोनों युवकों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।

  • महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, पुणे के 8 तालुकों में किसानों को मिलेगी राहत

    महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, पुणे के 8 तालुकों में किसानों को मिलेगी राहत

    महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित हुआ है। पुणे के 8 तालुकों में राहत उपाय लागू, फसल नुकसान का मुआवजा सर्वे के बाद तय होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित कर दी गई है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में तत्काल राहत उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। पुणे जिले के भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर तालुकों को भी सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया गया है।

    लंबे समय तक बारिश नहीं होने और खरीफ फसलों पर पड़े असर को देखते हुए यह फैसला सूखा प्रबंधन व्यवस्था के तहत लिया गया है। राज्य में प्रभावित तालुकों की संख्या कुल 358 में से करीब 74 प्रतिशत है।

    पुणे के 8 तालुकों में सूखे का असर

    पुणे जिले के आठ तालुकों में खरीफ मौसम के दौरान बारिश की कमी से फसलों और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बाद इन क्षेत्रों में राहत उपाय लागू होंगे।

    कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने दौंड, बारामती और इंदापुर सहित प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसल और पानी की स्थिति का जायजा लिया था। ग्रामीण इलाकों में खरीफ फसलों के नुकसान के साथ पेयजल और पशुओं के लिए पानी तथा चारे को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

    किसानों को कर्ज से लेकर बिजली तक राहत

    सूखा प्रभावित तालुकों में किसानों को भू-राजस्व में छूट दी जाएगी। अल्पकालिक फसल ऋणों के पुनर्गठन और कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी गई है। 7.5 अश्वशक्ति तक के कृषि पंपों के बिजली बिल से जुड़ी राहत पहले से लागू थी। नई व्यवस्था में इससे अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों के लिए भी प्रभावित क्षेत्रों में रियायत का प्रावधान किया गया है। सूखा प्रभावित गांवों में बिजली की कमी के कारण कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    राहत में विद्यार्थियों और मजदूरों को भी शामिल किया गया

    सूखा प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम उपलब्ध कराने के नियमों में ढील दी जाएगी।

    फसल खराब होने से कृषि पर निर्भर मजदूरों की आय प्रभावित होने की स्थिति में रोजगार गारंटी के काम उनके लिए वैकल्पिक आय का माध्यम बन सकते हैं।

    पानी और चारे की व्यवस्था पर भी जोर

    सूखा प्रभावित गांवों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जाएंगे। पशुओं के लिए पानी और पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

    सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के काम शुरू करने और किसानों तथा कृषि मजदूरों के लिए अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    फसल नुकसान का मुआवजा अभी तय नहीं

    सूखा घोषित होने के बावजूद किसानों को मिलने वाली फसल नुकसान की अंतिम आर्थिक सहायता की राशि अभी तय नहीं हुई है। इसके लिए पहले खेतों में फसल नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

    जिला कलेक्टरों को पंचनामा तैयार करने और सर्वेक्षण किए गए खेतों की तस्वीरों के साथ जीपीएस निर्देशांक दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी कृषि विभाग के माध्यम से आगे भेजी जाएगी। नुकसान के आकलन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग सरकारी निर्णय के जरिए आर्थिक सहायता तय की जाएगी।

    इसका मतलब यह है कि सूखा प्रभावित घोषित होने के बाद राहत उपाय तुरंत लागू हो रहे हैं, लेकिन फसल नुकसान का प्रत्यक्ष मुआवजा कितना मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    पुणे में रबी फसल के लिए समय से पहले पानी

    खरीफ फसल पर बारिश की कमी का असर पड़ने के बीच पुणे के ग्रामीण इलाकों में रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की तैयारी भी तेज की गई है।

    खड़कवासला बांध प्रणाली से मुठा नहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया सामान्य समय से करीब तीन सप्ताह पहले शुरू की गई है। 25 सितंबर से पानी छोड़े जाने की योजना है। इससे दौंड और इंदापुर सहित सिंचाई पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्रों को रबी फसल के लिए पानी मिलने की उम्मीद है।

    पुणे में बारिश की लंबी कमी

    पुणे में इस वर्ष बारिश के लंबे अंतराल ने स्थिति को और गंभीर बनाया है। शिवाजीनगर में 1 अगस्त के बाद 24 सितंबर तक 54 दिनों के दौरान एक दिन भी 10 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हुई। यह 2018 के बाद वहां ऐसा सबसे लंबा दौर बताया गया है।

    राज्य स्तर पर भी 1 जून से 18 सितंबर के बीच सामान्य 932.3 मिलीमीटर के मुकाबले करीब 755.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो लगभग 18.8 प्रतिशत कम है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की कमी एक जैसी नहीं रही और कई इलाकों में स्थिति इससे अधिक गंभीर रही।

    महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे का असर

    सूखा घोषित किए गए 265 तालुके राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं। विदर्भ में 95, मराठवाड़ा में 74, उत्तर महाराष्ट्र में 49, पुणे संभाग में 35 और कोंकण में 12 तालुके प्रभावित हैं।

    खरीफ मौसम में सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द जैसी फसलों पर बारिश की कमी का असर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में फसल की स्थिति के साथ कीट और रोग की समस्या भी सामने आई है।

    अब किसानों को क्या देखना होगा

    अगले चरण में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया फसल नुकसान का सर्वेक्षण और पंचनामा है। खेतों की स्थिति का दस्तावेजीकरण होने के बाद नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी आकलन के आधार पर आगे आर्थिक सहायता का निर्णय लिया जाएगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से ऋण, बिजली, भू-राजस्व, पानी, चारा, रोजगार और परीक्षा शुल्क से जुड़े राहत उपाय लागू किए गए हैं। वहीं, फसल नुकसान के लिए मिलने वाली अंतिम आर्थिक सहायता का फैसला सर्वेक्षण और सत्यापन पूरा होने के बाद किया जाना है।

  • जुहू बीच पर 34 टन कचरा साफ, सवाल अब यह कि बार-बार लौटता कचरा कब रुकेगा?

    जुहू बीच पर 34 टन कचरा साफ, सवाल अब यह कि बार-बार लौटता कचरा कब रुकेगा?

    जुहू बीच पर सी, शोर, शाईन-2026 अभियान में 34 टन कचरा हटाया गया। जुलाई में भी 1,825 टन कचरा निकला था, जानिए पूरी तस्वीर।

    मुंबई: जुहू समुद्रकिनारे पर गणेशोत्सव के बाद शनिवार को ‘सी, शोर, शाईन-2026’ विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान करीब 34 टन कचरा संकलित किया गया। दिव्याज फाउंडेशन, बृहन्मुंबई महानगरपालिका, मुंबई पुलिस और मेघा श्रेय की संयुक्त पहल में विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों ने हिस्सा लिया। अभियान में प्रसिद्ध अभिनेता अजय देवगन, दिव्याज फाउंडेशन की संस्थापिका अमृता फडणवीस, कौशल्य विकास, रोजगार, उद्योजकता और नावीन्यता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधायक अमित साटम, विधायक राम कदम, बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे, स्थानीय नगरसेविका सीमा सिंग, सह आयुक्त डॉ. भाग्यश्री कापसे और सहायक आयुक्त चक्रपाणी अल्ले सहित कई लोग मौजूद रहे।

    जुहू में 34 टन कचरा हटाया गया, लेकिन समस्या कितनी बड़ी है?

    आज का 34 टन कचरा गणेशोत्सव के बाद चलाए गए विशेष अभियान में संकलित हुआ है। इसे मुंबई के समुद्रकिनारों पर जमा होने वाले पूरे कचरे का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। जुहू में कचरा जमा होने की समस्या इससे पहले भी बड़े स्तर पर सामने आ चुकी है।

    जुलाई में भारी बारिश और ऊंची ज्वार के दौरान बीएमसी की विशेष सफाई मुहिम में जुहू के करीब छह किलोमीटर लंबे समुद्रकिनारे से 1,825 टन कचरा हटाया गया था। उसी अभियान में मुंबई के सात समुद्रकिनारों से कुल 2,499 टन से अधिक ठोस कचरा हटाकर उसका निपटान किया गया था। इसमें प्लास्टिक, थर्मोकोल, लकड़ी का मलबा और अन्य सामग्री शामिल थी।

    उस दौरान जुहू बीच पर सामान्य दिनों की तुलना में कचरे की मात्रा में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बीएमसी के अनुसार भारी बारिश और ऊंची ज्वार के दौरान समुद्रकिनारे तक रोजाना करीब 350 टन कचरा पहुंच रहा था, जबकि सामान्य दिनों में यह मात्रा करीब 60 टन बताई गई थी।

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    नालों से समुद्र और फिर समुद्र से किनारे तक पहुंचता कचरा

    जुलाई में सामने आई स्थिति ने यह भी स्पष्ट किया था कि समुद्रकिनारे पर जमा होने वाला कचरा केवल समुद्र में सीधे फेंके गए कचरे का परिणाम नहीं है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार नालों और खुले जलनिकासी मार्गों में पहुंचा प्लास्टिक, थर्मोकोल, कपड़े, लकड़ी और घरेलू कचरा बारिश के पानी के साथ समुद्र तक पहुंच सकता है। ऊंची ज्वार के दौरान यही कचरा वापस समुद्रकिनारे पर आ जाता है।

    इसलिए गणेशोत्सव के बाद की 34 टन की सफाई के साथ जुहू में कचरे को समुद्र तक पहुंचने से रोकने का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    गणेशोत्सव के लिए बीएमसी ने की थी व्यापक व्यवस्था

    इस वर्ष गणेश विसर्जन के लिए बीएमसी ने मुंबई में 383 से अधिक कृत्रिम विसर्जन तालाब 278 स्थानों पर तैयार किए थे। इसके अलावा 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थल उपलब्ध कराए गए, जिनमें 44 समुद्रकिनारे और जेट्टी तथा 23 प्राकृतिक झीलें शामिल थीं। विसर्जन व्यवस्था के लिए 25 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे।

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    निर्माल्य के लिए 498 कलश और 326 निर्माल्य डंपर भी उपलब्ध कराए गए थे। इसका उद्देश्य पूजा सामग्री को अलग से एकत्र करना और उसे जलस्रोतों में जाने से रोकना था।

    अब निर्माल्य से बनेंगे उपयोगी उत्पाद

    जुहू में गणेश विसर्जन के बाद जमा निर्माल्य में से फूलों को अलग कर उन पर प्रक्रिया करने की तैयारी की गई है। बीएमसी और डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान के संयुक्त प्रयास से इन फूलों से अगरबत्ती और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाने हैं।

    इस पहल से पूजा सामग्री को सीधे कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उसका दोबारा उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इस अभियान में 34 टन के कुल कचरे में निर्माल्य की वास्तविक मात्रा कितनी थी, इसका अलग आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

    समुद्रकिनारे की सफाई के साथ रोकथाम पर भी सवाल

    जुहू बीच पर शनिवार का अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान समुद्र और समुद्रकिनारे को स्वच्छ रखने के लिए नागरिकों से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई।

    बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि समुद्र मुंबई की बड़ी संपत्ति है और कचरा तथा प्लास्टिक समुद्र में जाने से समुद्र और समुद्रकिनारे दोनों अस्वच्छ होते हैं। उन्होंने गणेशोत्सव के बाद भी स्वच्छता की भावना बनाए रखने और समुद्रकिनारों को साफ रखने में सहयोग करने की अपील की।

    अजय देवगन ने भी शहर और देश को स्वच्छ रखना सामूहिक जिम्मेदारी बताया। अमृता फडणवीस ने उत्सव के बाद शहर की सफाई में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। मंगल प्रभात लोढ़ा ने नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन के संयुक्त प्रयास को स्वच्छता संदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    विधायक अमित साटम ने कहा कि बीएमसी के प्रयासों के कारण इस वर्ष बड़ी संख्या में गणेशमूर्तियों का विसर्जन समुद्र के बजाय कृत्रिम तालाबों में किया गया। उन्होंने आगे प्रक्रिया किए हुए पानी को ही समुद्र में छोड़ने की दिशा में प्रयासों का भी उल्लेख किया।

    मुंबई के लिए असली चुनौती सिर्फ सफाई नहीं

    जुहू में 34 टन कचरा हटाने के बाद तत्काल समुद्रकिनारा साफ दिखाई दे सकता है, लेकिन जुलाई में 1,825 टन कचरा हटाए जाने और भारी बारिश के दौरान कचरे की बड़ी मात्रा समुद्र तक पहुंचने की स्थिति यह सवाल भी सामने रखती है कि कचरे को समुद्र तक पहुंचने से पहले रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

    गणेशोत्सव के लिए कृत्रिम विसर्जन तालाबों और निर्माल्य संग्रह की व्यवस्था बढ़ाने के बावजूद प्राकृतिक समुद्रकिनारों पर सफाई की जरूरत बनी हुई है। इसलिए आगे की चुनौती सफाई अभियान के साथ-साथ कचरे के स्रोत, नालों और समुद्र तक पहुंचने वाले मार्गों पर रोकथाम तथा निर्माल्य के वैज्ञानिक पुनःउपयोग की व्यवस्था को मजबूत करना होगी।

    शनिवार के अभियान में संकलित 34 टन कचरे के बाद फिलहाल जुहू समुद्रकिनारा साफ किया गया है। अब इस सफाई को लंबे समय तक बनाए रखना और दोबारा समुद्रकिनारे तक पहुंचने वाले कचरे को कम करना प्रशासन और नागरिकों, दोनों के लिए अगली चुनौती है।

  • मानखुर्द से अगवा 2 साल का बच्चा 40 घंटे बाद मिला, महिला और पति गिरफ्तार

    मानखुर्द से अगवा 2 साल का बच्चा 40 घंटे बाद मिला, महिला और पति गिरफ्तार

    मानखुर्द मार्केट रोड से लापता 2 साल 4 महीने के बच्चे को 40 घंटे की तलाश के बाद पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। महिला और उसका पति गिरफ्तार।

    मुंबई: मानखुर्द मार्केट रोड इलाके से लापता हुए 2 साल 4 महीने के बच्चे को मुंबई पुलिस ने करीब 40 घंटे की लगातार तलाश के बाद सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने बच्चे को ले जाने वाली महिला मुस्कान भोलाकुमार साह और उसके पति भोलाकुमार जग्गु साह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, महिला बच्चे को अपने साथ ले गई थी, जबकि उसके पति ने कथित तौर पर इस वारदात में उसकी मदद की।

    घटना 23 सितंबर 2026 की शाम करीब 6 बजे की है। बच्चा अपने परिवार के साथ मानखुर्द के मार्केट रोड इलाके में था। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गया। परिजनों की शिकायत के बाद मानखुर्द पुलिस ने अपराध क्रमांक 627/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज किया।

    सीसीटीवी से मिली अहम कड़ी

    बच्चे की तलाश के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में मानखुर्द, देवनार, आरसीएफ और ट्रॉम्बे पुलिस थानों की कुल आठ टीमें बनाई गईं। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान एक महिला बच्चे को अपने साथ ले जाती दिखाई दी।

    इसके बाद पुलिस ने महिला की संभावित गतिविधियों और आवाजाही का पता लगाने के लिए तकनीकी जानकारी का विश्लेषण शुरू किया। संदिग्धों की गतिविधियों की जांच के साथ पुलिस ने मानवीय सूचना तंत्र की भी मदद ली। बच्चे को मुंबई से बाहर ले जाए जाने की आशंका को देखते हुए रेलवे स्टेशनों सहित दूसरे संभावित स्थानों पर भी तलाश की गई।

    40 घंटे बाद बच्चे की सकुशल बरामदगी

    पुलिस की दिन-रात लगातार चली करीब 40 घंटे की तलाश के बाद बच्चे का पता लगा लिया गया। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर उसके परिवार के हवाले कर दिया। बच्चे के मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

    मामले में मुस्कान भोलाकुमार साह और उसके पति भोलाकुमार जग्गु साह, दोनों निवासी दुर्गामाता मंदिर गली, महाराष्ट्र नगर, मानखुर्द, मुंबई को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महिला की भूमिका बच्चे को अपने साथ ले जाने की थी, जबकि उसके पति पर इस अपराध में उसकी मदद करने का आरोप है।

    अपहरण के पीछे की वजह की जांच

    पुलिस जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बच्चे को ले जाने के पीछे आरोपियों का कथित मकसद क्या था। बच्चे को कहां रखा गया था और आरोपी उसे किस दिशा में ले गए थे, इसकी विस्तृत जानकारी भी जांच का हिस्सा है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर इस पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।

    इस मामले में बच्चे को सकुशल बरामद करना जांच की सबसे अहम सफलता रही। हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला ने बच्चे को क्यों अपने साथ ले जाया और इस घटना में उसके पति की भूमिका किस स्तर तक थी।

    धारा 137(2) में सात साल तक की सजा का प्रावधान

    भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 नाबालिग को उसके वैध अभिभावक की देखरेख से बिना सहमति ले जाने से संबंधित है। धारा 137(2) के तहत दोष सिद्ध होने पर सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

    मुंबई में लापता बच्चों के मामलों पर भी पुलिस की लगातार नजर रहती है। 2025 में मुंबई पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, नाबालिगों के लापता होने के 2,182 मामले दर्ज हुए थे और 2,165 बच्चों को तलाश कर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया था। इन आंकड़ों में लापता नाबालिगों के वे मामले भी शामिल होते हैं जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत अपहरण के रूप में दर्ज किया जाता है।

    फिलहाल मानखुर्द मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चे की बरामदगी के बाद पुलिस अब उसके अपहरण की वजह, आरोपियों की पूरी भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

  • 14 फुट से ऊपर की झोपड़ियां तोड़ने से पहले बीएमसी बताए, क्या सो रहा था प्रशासन?

    14 फुट से ऊपर की झोपड़ियां तोड़ने से पहले बीएमसी बताए, क्या सो रहा था प्रशासन?

    मुंबई में 14 फुट या उससे ऊंची झोपड़ियों पर बीएमसी की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। पुनर्वास के बीच पुराने ढांचों पर कार्रवाई, प्रशासनिक जवाबदेही और मुंबईकरों के पैसे के इस्तेमाल पर सवाल।

    मुंबई: 14 फुट या उससे अधिक ऊंचाई वाली 39,111 झोपड़ी संरचनाओं के खिलाफ बीएमसी ने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक विशेष कार्रवाई की घोषणा की है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2,23,150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें 39,111 संरचनाएं 14 फुट या उससे अधिक ऊंचाई की बताई गई हैं। मुंबई शहर में 3,348, पश्चिमी उपनगरों में 4,536 और पूर्वी उपनगरों में 31,227 संरचनाएं शामिल हैं। 4,584 संरचनाओं पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और 611 को नोटिस दिए गए हैं।

    लेकिन इस कार्रवाई के साथ एक बुनियादी सवाल खड़ा होता है—अगर इन झोपड़ियों में अनधिकृत निर्माण वर्षों से मौजूद था और बीएमसी के पास वार्ड स्तर पर निगरानी तथा कार्रवाई की व्यवस्था थी, तो निर्माण को 14 फुट से अधिक होने से पहले क्यों नहीं रोका गया? इसमें साफ है कि भ्रष्टाचार खुद बीएमसी के अधिकारियों ने किया है। वरना अवैध निर्माण होते ही नहीं।

    अब पुराने ढांचे तोड़ने की तैयारी क्यों?

    मुंबई में झोपड़पट्टियों के पुनर्विकास और पात्र झोपड़ीवासियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की एसआरए व्यवस्था पहले से काम कर रही है। एसआरए की आधिकारिक व्यवस्था में झोपड़पट्टी का सर्वे, झोपड़ियों का माप, पात्रता का निर्धारण और पुनर्वास योजना को आगे बढ़ाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

    ऐसे में सवाल यह है कि जिन इलाकों में पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है, वहां वर्षों पुराने झोपड़ी ढांचों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई क्या उसी पुनर्वास प्रक्रिया के साथ तालमेल के लिए या किसी खास डेवलपर को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है?

    नया अवैध निर्माण रोकना था, पुराने घर तोड़ना क्यों?

    अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन प्रशासनिक नीति का सबसे अहम सवाल यह है कि कार्रवाई का केंद्र क्या होना चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति आज नया अवैध निर्माण कर रहा है, अतिरिक्त मंजिल खड़ी कर रहा है या झोपड़ी की ऊंचाई लगातार बढ़ा रहा है, तो उसे निर्माण के दौरान ही रोकना बीएमसी की जिम्मेदारी के दायरे में आता है। इसी के लिए तो प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियां की गई है।

    इसके विपरीत वर्षों से मौजूद झोपड़ी को अब केवल उसकी मौजूदा ऊंचाई के आधार पर निशाना बनाना गरीब परिवारों के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

    यही वजह है कि बीएमसी को सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए—39,111 संरचनाएं इतनी बड़ी संख्या में 14 फुट या उससे अधिक ऊंचाई तक पहुंचीं तो इन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

    मुंबईकरों के पैसों से अधिकारियों को वेतन, फिर जवाबदेही किसकी?

    यह सवाल केवल झोपड़ी तोड़ने तक सीमित नहीं है। यह मुंबईकरों के पैसे और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

    बीएमसी के अलग-अलग वार्डों में अनधिकृत निर्माण की निगरानी, निरीक्षण, नोटिस और कार्रवाई के लिए अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन सार्वजनिक धन से दिया जाता है। यह धन मुंबईकरों से मिलने वाले कर और विभिन्न शुल्कों से आता है।

    अगर किसी इलाके में अनधिकृत निर्माण वर्षों तक बढ़ता रहा और अब हजारों संरचनाओं पर एक साथ कार्रवाई की जरूरत पड़ रही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उस दौरान निगरानी व्यवस्था ने क्या काम किया?

    अगर किसी अधिकारी की जिम्मेदारी के क्षेत्र में निर्माण बढ़ता रहा, तो वहां के सहायक आयुक्त की जवाबदेही तय है? जब मुंबई भर में इतना बड़ा आंकड़ा सामने आया है तो क्या पुराने निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या यह देखा जाएगा कि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई थी या नियमित निरीक्षण ही नहीं हुआ?

    और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—अगर प्रशासन की निगरानी में कमी के कारण आज बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और कार्रवाई पर सार्वजनिक धन खर्च होगा, तो उस अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी किसकी होगी?

    मुंबईकर अपने मेहनत के पैसे से बीएमसी को वेतन और प्रशासनिक व्यवस्था चलाने के लिए पैसा देते हैं। इसलिए जनता यह जानने का अधिकार रखती है कि जिस निर्माण को समय रहते रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, उसे वर्षों तक बढ़ने देने के बाद अब उसी पर कार्रवाई करने में होने वाला अतिरिक्त सरकारी खर्च किस प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।

    हालांकि केवल किसी निर्माण के लंबे समय तक मौजूद रहने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी अधिकारी ने जानबूझकर उसे बनने दिया या भ्रष्टाचार किया। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के निरीक्षण रिकॉर्ड, शिकायतें, नोटिस, कार्रवाई आदेश और अधिकारी की जिम्मेदारी की जांच जरूरी होगी।

    लेकिन अगर बीएमसी वास्तव में जवाबदेही को गंभीरता से लेना चाहती है, तो 39,111 संरचनाओं की कार्रवाई के साथ यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि इनमें से कितने मामले पुराने हैं और उन पर पहले क्या कार्रवाई की गई थी।

    14 फुट का मानक नया नहीं

    बीएमसी के पुराने रिकॉर्ड में भी 14 फुट से अधिक ऊंचाई बढ़ाने वाले अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के उदाहरण मिलते हैं। यानी 14 फुट की सीमा सितंबर 2026 में अचानक सामने आया नया मानक नहीं है।

    इससे निगरानी की जवाबदेही और महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि यह सीमा पहले से प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में थी, तो इतने बड़े पैमाने पर संरचनाएं इस सीमा तक कैसे पहुंचीं?

    गरीब परिवारों पर कार्रवाई का असली असर क्या होगा?

    बीएमसी का कहना है कि कार्रवाई 14 फुट से ऊपर बने अनधिकृत हिस्से पर केंद्रित होगी। लेकिन जमीन पर रहने वाले परिवार के लिए यह सवाल इतना सरल नहीं है।

    कई झोपड़ियां वर्षों में धीरे-धीरे बदली और ऊपर की ओर बढ़ी हैं। नीचे का हिस्सा और बाद में जोड़ा गया हिस्सा कई मामलों में एक ही संरचना का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में केवल ऊपर का हिस्सा हटाने से पूरी संरचना की मजबूती प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कई मामलों में ऊपर के हिस्से को तोड़ते समय पूरा स्ट्रक्चर ही भरभरा कर गिर गया है।

    इसलिए कार्रवाई से पहले प्रत्येक संरचना की वास्तविक स्थिति, निर्माण का समय, नीचे और ऊपर के हिस्से का संबंध तथा परिवार की पुनर्वास स्थिति दर्ज करना जरूरी होगा।

    एसआरए चल रहा है तो बीएमसी और एसआरए में तालमेल कहां है?

    शहरभर में सरकार ऑलरेडी झोपड़पट्टी हटाओ अभियान चला रही है। जिसके तहत अलग अलग सरकारी योजनाओं पर काम चल रहा है। जैसे कि एसआरए की व्यवस्था में झोपड़ी की पहचान, सर्वे, पात्रता और पुनर्वास योजना की प्रक्रिया पहले से मौजूद है। ऐसे में 39,111 संरचनाओं की सूची तैयार करते समय बीएमसी और बाकी सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड का मिलान होना चाहिए।

    यह साफ होना चाहिए कि इनमें से कितनी झोपड़ियां बाकी सरकारी योजनाओं के सर्वे में दर्ज हैं, कितने परिवार पात्रता प्रक्रिया में हैं, कितनी जगहों पर पुनर्वास योजना स्वीकृत या चल रही है और कितने मामलों में कोई पुनर्वास योजना नहीं है।

    यदि ऐसा समन्वय नहीं किया गया है तो कार्रवाई गरीब परिवारों के लिए दोहरी परेशानी पैदा कर सकती है—पहले वर्षों तक पुनर्वास की प्रतीक्षा और फिर मौजूदा घर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई।

    कार्रवाई से पहले बीएमसी को जवाब देना चाहिए

    39,111 झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई कोई सामान्य प्रशासनिक अभियान नहीं है। इसके पीछे हजारों परिवार और उनके घर जुड़े हैं।

    इसलिए बीएमसी को कार्रवाई शुरू करने से पहले 14 फुट की ऊंचाई नापने का स्पष्ट आधार, वॉर्डवार सूची, प्रत्येक संरचना के खिलाफ पूर्व कार्रवाई का रिकॉर्ड, एसआरए रिकॉर्ड से मिलान और कार्रवाई के दौरान परिवारों की सुरक्षा से जुड़े नियम सार्वजनिक करने चाहिए।

    इसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में ये निर्माण वर्षों तक बढ़ते रहे, उनकी भूमिका और जवाबदेही की समीक्षा कैसे होगी।

    नया अवैध निर्माण रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन वर्षों से मौजूद गरीबों के घरों पर कार्रवाई करने से पहले यह जवाब भी जरूरी है कि जब ये निर्माण बढ़ रहे थे, तब प्रशासन क्या कर रहा था?

    और अगर उस समय निगरानी नहीं हुई, तो मुंबईकरों के मेहनत के पैसे से अधिकारियों को दिए गए वेतन और उस पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही आखिर किसकी है?

    मुंबई को अनधिकृत निर्माण से मुक्त करने की नीति यदि वास्तव में सुरक्षा और नियोजन के उद्देश्य से है, तो उसका पहला लक्ष्य नया अवैध निर्माण रोकना, दूसरा पुराने मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही तय करना और तीसरा सरकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास होना चाहिए।

    पुराने घरों पर कार्रवाई करके केवल आंकड़ा कम करना समाधान नहीं है। समाधान तब होगा जब अवैध निर्माण भी रुके, प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो और गरीब परिवार पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले अपने घर से बेघर न हों।

  • मुंबई Coastal Road पर केबल चोरी का संकट, 110 किमी केबल बदली; 60-65 CCTV बंद

    मुंबई Coastal Road पर केबल चोरी का संकट, 110 किमी केबल बदली; 60-65 CCTV बंद

    मुंबई Coastal Road पर बार-बार केबल चोरी से स्ट्रीट लाइट और 60-65 CCTV प्रभावित हैं। BMC ने 110 किमी केबल बदली, पुलिस के साथ नई योजना शुरू।

    मुंबई: धर्मवीर स्वराज्यरक्षक छत्रपती संभाजी महाराज मुंबई किनारी रस्ता (दक्षिण) पर बार-बार हो रही पावर और CCTV केबल चोरी ने स्ट्रीट लाइटिंग और निगरानी व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अनुसार, अलग-अलग हिस्सों में केबल चोरी और काटे जाने के कारण कई पथदिवे बंद हैं, जबकि करीब 60-65 CCTV कैमरे भी प्रभावित हुए हैं। स्थिति सुधारने के लिए नई केबल डालने का काम शुरू कर दिया गया है और मुंबई पुलिस के साथ मिलकर चोरी रोकने की नई प्रतिबंधात्मक योजना पर काम किया जा रहा है।

    समस्या कितनी बड़ी है?

    BMC के अनुसार, Coastal Road शुरू होने के बाद पहले स्ट्रीट लाइट के लिए तांबे यानी कॉपर के केबल से बिजली दी गई थी। कोस्टल रोड के शुरू होते ही अलग-अलग जगहों से कॉपर केबल चोरी होने लगी। इन घटनाओं के संबंध में संबंधित ठेकेदारों की ओर से पुलिस थानों में करीब 20 से 25 FIR और शिकायतें दर्ज कराई गईं।

    कॉपर केबल चोरी रोकने के लिए बाद में एल्युमिनियम पावर केबल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इससे भी समस्या खत्म नहीं हुई। महालक्ष्मी मंदिर, मद्रासी वाडी, मार्कडेश्वर मंदिर और वरली के कुछ हिस्सों में एल्युमिनियम केबल चोरी और काटे जाने की घटनाएं सामने आती रहीं। BMC के अनुसार, चोरी और नुकसान के बाद कुछ जगहों पर केबल दो से तीन बार तक बदली जा चुकी है।

    110 किलोमीटर केबल बदली जा चुकी

    बार-बार होने वाली चोरी और केबल कटिंग के बाद BMC अब तक करीब 110 किलोमीटर की दूरी के बराबर पावर केबल बदल चुकी है। इसके बावजूद कई हिस्सों में समस्या दोहराई गई। लगातार मरम्मत और पुनर्स्थापना की जरूरत पड़ने से Coastal Road की प्रकाश व्यवस्था को बनाए रखना चुनौती बन गया है।

    BMC के अनुसार, मुंबई Coastal Road एक हाई-स्पीड और Access Controlled मार्ग है। ऐसे मार्ग पर रात के समय पर्याप्त रोशनी सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। मौजूदा स्थिति में वरली और महालक्ष्मी मंदिर के आसपास कुछ हिस्सों में अंधेरा दिखाई दे रहा है।

    CCTV निगरानी भी प्रभावित

    समस्या केवल स्ट्रीट लाइट तक सीमित नहीं है। CCTV नेटवर्क से जुड़ी फाइबर कम्युनिकेशन केबलों के चोरी होने या काटे जाने से करीब 60-65 कैमरे बंद हुए हैं। इससे Coastal Road के कुछ हिस्सों में निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है।

    उपलब्ध सिविक जानकारी में Coastal Road के दो carriageways पर 165 CCTV कैमरों का अलग विवरण भी सामने आया है। इनमें उत्तर दिशा वाले carriageway के 81 में से 18 और दक्षिण दिशा वाले carriageway के 84 में से 16 कैमरे CAT-6 केबल चोरी होने के कारण काम नहीं कर रहे थे। इस तरह इस विवरण के आधार पर 34 कैमरे प्रभावित बताए गए हैं। टनल के कैमरे काम कर रहे थे।

    इससे प्रभावित CCTV की संख्या को लेकर BMC के 60-65 और 165 में से 34 वाले आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। सभी प्रभावित और चालू कैमरों की अद्यतन संख्या स्पष्ट नहीं है।

    हालिया BMW हादसे के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता

    Coastal Road पर CCTV और speed monitoring की चर्चा ऐसे समय तेज हुई है, जब 20 सितंबर को Lotus Jetty के पास एक तेज रफ्तार BMW दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। CCTV फुटेज में कार के सड़क की रेलिंग से टकराकर नीचे गिरने की घटना रिकॉर्ड हुई थी। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू की थी।

    हादसे के बाद वरली के नागरिकों ने Coastal Road पर तेज रफ्तार वाहनों, रात के समय निगरानी और speed enforcement को लेकर BMC तथा ट्रैफिक पुलिस के सामने चिंता जताई। सितंबर 2024 से Coastal Road पर करीब 40,000 e-challans जारी किए जा चुके हैं और इनमें लगभग 70 प्रतिशत मामले speeding से जुड़े हैं।

    Speed monitoring में भी कुछ कमियां सामने आई हैं। Coastal Road पर ANPR कैमरों की व्यवस्था में भी अंतर है और दक्षिण दिशा में लगाया गया एक ANPR कैमरा काम नहीं कर रहा था। ट्रैफिक पुलिस ने यह भी बताया है कि बहुत अधिक गति से चलने वाले वाहनों की स्पष्ट नंबर प्लेट कैप्चर करने में तकनीकी सीमाएं हैं।

    अगस्त में भी हुई थी Coastal Road से केबल चोरी

    Coastal Road पर केबल चोरी की समस्या नई नहीं है। अगस्त 2026 में NSCI Dome के पास स्ट्रीट लाइटों को बिजली देने वाली कॉपर केबल चोरी हुई थी। चोरी 12 अगस्त की सुबह करीब 3 से 3.15 बजे के बीच हुई थी। इस मामले में Tardeo Police ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया था। चोरी की गई केबल की कीमत करीब 2.62 लाख रुपये बताई गई थी।

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में Hussain Kadir Shaikh उर्फ Choko, Nur Mohammad Amir Khan, Aman Bilal Shaikh और Jakir Shaikh शामिल थे। नाबालिग को Juvenile Justice Board के समक्ष पेश किया गया था। पुलिस के अनुसार चोरी की गई केबल एक scrap dealer को बेची गई थी और उसे तलाशने तथा केबल बरामद करने की कोशिश की जा रही थी।

    इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह थी कि Coastal Road के maintenance से जुड़े Top Turbo Engineers Pvt Ltd के कर्मचारियों की patrol के दौरान कई स्ट्रीट लाइट बंद मिली थीं। जांच में पोलों से बिजली की केबल गायब होने की जानकारी सामने आई थी।

    L&T, HCC और maintenance contractors की शिकायतें

    वर्तमान स्थिति को लेकर BMC ने बताया है कि केबल चोरी की घटनाओं के संबंध में संबंधित contractors की ओर से पुलिस में करीब 20-25 FIR और शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इनमें Coastal Road के निर्माण और संबंधित कार्यों से जुड़े L&T और HCC तथा संचालन एवं रखरखाव से जुड़े contractors शामिल हैं।

    अब BMC और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

    लगातार चोरी के बाद अब BMC और मुंबई पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई है। इसका उद्देश्य केवल चोरी के बाद केबल बदलना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।

    BMC के अनुसार, चोरी हुई या क्षतिग्रस्त हुई पावर केबलों की जगह नई केबल डालने का काम शुरू है। साथ ही CCTV नेटवर्क से जुड़ी क्षतिग्रस्त और चोरी हुई केबलों को भी जल्द से जल्द बहाल करने की प्रक्रिया चल रही है।

    अब सबसे बड़ी चुनौती केवल केबल बदलने की नहीं, बल्कि उसे दोबारा चोरी होने से रोकने की है। कॉपर केबल के बाद एल्युमिनियम केबल इस्तेमाल किए जाने के बावजूद चोरी और कटिंग की घटनाएं जारी रहने से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि नई व्यवस्था में केबलों की सुरक्षा, निगरानी और पुलिस गश्त को किस तरह मजबूत किया जाएगा।

    Coastal Road पर फिलहाल मुख्य लक्ष्य प्रभावित स्ट्रीट लाइट और CCTV व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करना है। इसके साथ ही BMC और पुलिस की प्रस्तावित प्रतिबंधात्मक व्यवस्था यह तय करेगी कि बार-बार केबल बदलने के बजाय इस समस्या का स्थायी समाधान कैसे किया जाए।

  • IIT Bombay Sahil Wakode Case: 20 बयान दर्ज, Doolla का बयान बाकी; अब Exam Rules में बदलाव

    IIT Bombay Sahil Wakode Case: 20 बयान दर्ज, Doolla का बयान बाकी; अब Exam Rules में बदलाव

    IIT Bombay छात्र साहिल वाकोडे केस में Crime Branch ने 20 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। प्रो. दुल्ला का बयान बाकी है और परीक्षा नियमों में बदलाव की तैयारी है।

    मुंबई: IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में जांच और विरोध दोनों तेज हो गए हैं। मुंबई Crime Branch अब तक परीक्षा में मौजूद छात्रों, शिक्षकों, संस्थान के कर्मचारियों और हॉस्टल स्टाफ समेत 20 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, लेकिन मामले में नामजद प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान अभी दर्ज नहीं हुआ है। इसी बीच IIT Bombay ने परीक्षा में कथित अकादमिक अनियमितता से जुड़े नियमों और प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी है और छात्रों को कार्रवाई से पहले अपने मेंटर से बात करने का अवसर देने जैसे बदलावों पर विचार किया जा रहा है।

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    साहिल वाकोडे की मौत 18 सितंबर को हुई थी। वह IIT Bombay के Energy Science and Engineering विभाग में BTech के दूसरे वर्ष के छात्र थे। परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर हुई घटना के कुछ घंटे बाद उन्हें हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। इस घटना के बाद परिवार ने जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए, जबकि संस्थान की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है। मामले की जांच अब मुंबई Crime Branch कर रही है।

    Crime Branch की जांच में अब तक क्या सामने आया?

    जांच एजेंसी ने परीक्षा हॉल में मौजूद छात्रों और परीक्षा की निगरानी कर रहे शिक्षकों के बयान दर्ज किए हैं। हॉस्टल स्टाफ से भी पूछताछ की गई है। जांच का एक अहम हिस्सा 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान हुई घटना से लेकर साहिल के हॉस्टल पहुंचने और बाद की परिस्थितियों को जोड़ना है।

    साहिल के मोबाइल फोन से जांचकर्ताओं को अभी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी नहीं मिल पाई है। फोन पैटर्न लॉक से सुरक्षित है और स्क्रीन पर कुछ मिस्ड कॉल की सूचनाएं दिखाई दी थीं, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन कॉल्स में कौन शामिल था। Crime Branch फोन से कॉल, संदेश और अन्य डिजिटल जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस ने फोन और संस्थान की CCTV फुटेज को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा है। CCTV फुटेज से परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं की पुष्टि और उनका क्रम समझने की कोशिश की जा रही है।

    प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान अभी बाकी

    मामले में साहिल के पिता की शिकायत पर प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में जातिगत उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं तथा SC/ST अत्याचार निवारण कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है। इन आरोपों की जांच जारी है और इन्हें अभी न्यायिक रूप से साबित नहीं माना जा सकता।

    Crime Branch ने मामले से जुड़े कई लोगों से पूछताछ पूरी कर ली है, लेकिन 25 सितंबर तक प्रो. दुल्ला का बयान दर्ज नहीं हुआ था। इसलिए जांच में उनका पक्ष एक महत्वपूर्ण लंबित कड़ी बना हुआ है।

    IIT Bombay ने प्रो. दुल्ला को प्रशासनिक जिम्मेदारी से हटाने के बाद जांच के दौरान छुट्टी पर भेजा है। छात्रों की ओर से उन्हें पूरी तरह निलंबित करने की मांग भी उठी थी।

    साहिल के परिवार के आरोप और IIT Bombay का पक्ष

    साहिल के माता-पिता रविंद्र वाकोडे और सोनाली वाकोडे का आरोप है कि उनके बेटे ने संस्थान में जातिगत टिप्पणियों और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत उनसे की थी। परिवार ने संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है।

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    दूसरी ओर IIT Bombay की ओर से कहा गया है कि साहिल ने संस्थान के SC/ST Cell या प्रशासन के सामने ऐसी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। मामले में कुछ छात्रों और फैकल्टी सदस्यों की ओर से भी जातिगत भेदभाव के आरोपों पर अलग-अलग राय सामने आई है। इसलिए इस पहलू की स्वतंत्र जांच अभी महत्वपूर्ण है।

    IIT Bombay ने साहिल की मौत से जुड़े अपने शुरुआती communication को लेकर माफी भी दोहराई है। इसके बाद संस्थान की ओर से परीक्षा और अकादमिक misconduct की प्रक्रिया की समीक्षा का कदम सामने आया है।

    अब IIT Bombay में परीक्षा के नियम बदल सकते हैं

    साहिल की मौत के बाद IIT Bombay ने academic misconduct से जुड़े नियमों की समीक्षा के लिए एक नई समिति बनाई है। इसमें faculty और students को बराबर प्रतिनिधित्व दिया गया है। समिति परीक्षा के दौरान suspected malpractice से निपटने के लिए स्पष्ट और step-by-step SOP तैयार करेगी।

    प्रस्तावित बदलावों में यह भी शामिल है कि किसी छात्र पर परीक्षा में अनियमितता का आरोप लगने के बाद disciplinary action से पहले उसे अपने student mentor से बात करने का अवसर दिया जाए। इसके अलावा answer sheet के पहले पेज पर examination malpractice के नियम और संभावित परिणाम स्पष्ट रूप से लिखने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

    इन बदलावों का उद्देश्य suspected academic misconduct के मामलों में प्रक्रिया को ज्यादा स्पष्ट और समान बनाना है। हालांकि revised SOP और नियम लागू होने से पहले उन्हें Senate की मंजूरी लेनी होगी।

    Mid-Semester Exam अब 10 और 11 अक्टूबर को

    Sahil Wakode मामले के बाद IIT Bombay के बचे हुए Mid-Semester examinations एक बार फिर टाल दिए गए हैं। 26 और 27 सितंबर को होने वाली परीक्षाएं अब 10 और 11 अक्टूबर को होंगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार timetable में बदलाव नहीं किया गया है।

    संस्थान ने परीक्षा टालने का संबंध नई academic misconduct committee को student-friendly SOP और संशोधित नियम तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय देने से जोड़ा है।

    छात्रों की 18 मांगों का क्या असर हुआ?

    साहिल की मौत के बाद IIT Bombay के छात्रों ने 18 सूत्रीय मांगें रखी थीं। इनमें स्वतंत्र जांच, student welfare और grievance redressal व्यवस्था में सुधार, healthcare सुविधाओं को मजबूत करना तथा 24 घंटे psychiatrist की उपलब्धता जैसी मांगें शामिल थीं।

    इन मांगों के बीच अब academic misconduct की प्रक्रिया में student representation, mentor intervention और स्पष्ट examination SOP तैयार करने की दिशा में संस्थागत कदम उठाया गया है। इससे साफ है कि विवाद का असर सिर्फ मौजूदा जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि IIT Bombay की परीक्षा और student-support व्यवस्था में बदलाव तक पहुंच गया है।

    NCSC ने भी शुरू की जांच

    राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने 24 सितंबर को IIT Bombay पहुंचकर मामले की मौके पर जांच की। उन्होंने संस्थान के निदेशक, अधिकारियों, संबंधित फैकल्टी और अन्य लोगों से जानकारी ली तथा उस परीक्षा कक्ष का भी निरीक्षण किया जहां 18 सितंबर की घटना हुई थी। आयोग ने साहिल की मौत से पहले की परिस्थितियों, संबंधित फैकल्टी की भूमिका और SC छात्रों के लिए grievance mechanisms की जानकारी मांगी है।

    साहिल के माता-पिता ने आयोग के सामने भी अपनी शिकायत और मांगें रखी हैं। परिवार इसके साथ ही मुंबई के आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन कर चुका है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    मुंबई कांग्रेस का IIT Bombay के बाहर आंदोलन

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    24 सितंबर को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड के नेतृत्व में कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ताओं ने IIT Bombay के पवई परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने वर्षा गायकवाड समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान गायकवाड ने साहिल की मौत को “institutional murder” बताते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    वर्षा गायकवाड ने शिक्षा संस्थानों में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव तथा RSS के कथित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए। ये राजनीतिक आरोप हैं; साहिल वाकोडे मामले में RSS की भूमिका स्थापित करने वाला स्वतंत्र प्रमाण अभी सामने नहीं आया है।

    इस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने दमन का आरोप लगाया, जबकि पुलिस की कार्रवाई का तत्काल संदर्भ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब बाकी हैं?

    साहिल वाकोडे मामले में अब जांच का फोकस केवल परीक्षा हॉल की घटना तक सीमित नहीं है। Crime Branch को यह स्पष्ट करना है कि 18 सितंबर की परीक्षा में वास्तव में क्या हुआ, उसके बाद साहिल किन लोगों के संपर्क में था, उसके मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों में क्या जानकारी है तथा परिवार की ओर से लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होती है या नहीं।

    इसके साथ ही प्रो. सूर्यनारायण दुल्ला का बयान, CCTV और डिजिटल फोरेंसिक जांच तथा संस्थान की आंतरिक जांच रिपोर्ट मामले की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर साहिल की मौत के कारणों और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है।

    IIT Bombay में अब परीक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव, 10 और 11 अक्टूबर की परीक्षाएं, Crime Branch की जांच, NCSC की पड़ताल और परिवार व छात्रों की मांगें इस मामले के अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे।

  • Mount Mary Fair में नशे में धुत्त महिला का हंगामा, हिरासत में लेने गई महिला पुलिसकर्मी को काटा

    Mount Mary Fair में नशे में धुत्त महिला का हंगामा, हिरासत में लेने गई महिला पुलिसकर्मी को काटा

    मुंबई के Mount Mary Fair में हंगामा कर रही 28 वर्षीय KJ Nikki ने महिला कांस्टेबल यशोदा चौगुले को कथित तौर पर काटा। Bandra Court ने कस्टडी में भेजा।

    मुंबई: बांद्रा वेस्ट में Mount Mary Fair के दौरान हंगामा कर रही 28 वर्षीय महिला को हिरासत में लेने की कोशिश के दौरान महिला पुलिस कांस्टेबल पर कथित हमला करने और उसका हाथ काटने का मामला सामने आया है। घटना 20 सितंबर की रात करीब 9:10 बजे Carmel Church, Chapel Road के बाहर हुई। पुलिस ने आरोपी KJ Nikki को गिरफ्तार कर Bandra Court में पेश किया, जहां उसे कस्टडी में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के मुताबिक, Mount Mary Fair के दौरान सड़क पर दो महिलाओं के हंगामा करने की सूचना मिली थी। इसके बाद Bandra Police Mobile 06 की टीम मौके पर पहुंची। Beat officer API Varapde ने स्थिति संभालने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की मदद मांगी थी। पुलिस के अनुसार दोनों महिलाएं नशे की हालत में थीं।

    क्या हुआ था Mount Mary Fair में?

    पुलिस के अनुसार, मौके पर पहुंची महिला पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को शांत करने और वहां से चले जाने के लिए कहा। आरोप है कि KJ Nikki ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की और पुलिस वाहन में जाने से इनकार करते हुए हिरासत का विरोध किया।

    इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई। शिकायत के अनुसार, Nikki ने महिला पुलिस कांस्टेबल यशोदा चौगुले (37) को पीछे से पकड़ लिया और उनके बाएं हाथ पर काट लिया। इससे चौगुले के हाथ से खून निकलने की बात सामने आई है। दूसरी महिला कांस्टेबल Padvi ने हस्तक्षेप कर चौगुले को छुड़ाया, जबकि अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने आरोपी को काबू में किया।

    शिकायत में डंडे से मारने का भी आरोप

    इस मामले में सिर्फ काटने का ही आरोप नहीं है। यशोदा चौगुले की शिकायत के अंतिम विवरण में आरोप लगाया गया है कि काटने से पहले उनके बाएं हाथ पर डंडे से वार किया गया था।

    पुलिस ने आरोपी महिला को Bandra Police Station ले जाने के बाद यशोदा चौगुले और आरोपी दोनों का medical examination कराया। शिकायत में आरोपी पर सार्वजनिक शांति भंग करने, पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज करने और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

    Bandra Court में पेशी के बाद क्या हुआ?

    गिरफ्तारी के बाद KJ Nikki को Bandra Court के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने उसे कस्टडी में भेज दिया। मामले की आगे की जांच Bandra Police कर रही है।

    Mount Mary Fair में भारी पुलिस बंदोबस्त क्यों था?

    Mount Mary Fair के दौरान Bandra में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और लोगों की आवाजाही रहती है। इसी वजह से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे ही सुरक्षा बंदोबस्त के दौरान यह विवाद सामने आया।

    इस घटना में फिलहाल पुलिस की कार्रवाई, महिला कांस्टेबल यशोदा चौगुले की शिकायत और आरोपी की कोर्ट में पेशी प्रमुख घटनाक्रम हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।

  • Mushtaq Khan Death: ‘Welcome’ और ‘Gadar’ के अभिनेता का 56 की उम्र में निधन, आखिरी दिनों तक कर रहे थे शूटिंग

    Mushtaq Khan Death: ‘Welcome’ और ‘Gadar’ के अभिनेता का 56 की उम्र में निधन, आखिरी दिनों तक कर रहे थे शूटिंग

    Mushtaq Khan का 24 सितंबर को मुंबई के Nanavati Hospital में निधन हो गया। 56 वर्षीय अभिनेता कैंसर से जूझ रहे थे और मौत से पहले तक शूटिंग कर रहे थे।

    मुंबई: ‘Welcome’, ‘Gadar: Ek Prem Katha’, ‘Gadar 2’, ‘Aashiqui’ और ‘Jodi No. 1’ जैसी फिल्मों में यादगार supporting और comic roles निभाने वाले अभिनेता Mushtaq Khan का गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को निधन हो गया। वह 56 वर्ष के थे। उन्होंने मुंबई के Nanavati Hospital में शाम करीब 7 बजे अंतिम सांस ली। पिछले करीब 15 दिनों से उनका इलाज चल रहा था और हाल के दिनों में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ी थी।

    Mushtaq Khan पिछले कुछ वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे। करीब पांच साल पहले उन्हें बीमारी का पता चला था और इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था। हाल में बीमारी दोबारा गंभीर होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके बेटे Mohsin के अनुसार अस्पताल ले जाने से पहले तक वह काम कर रहे थे और उनकी कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या सामने नहीं आई थी।

    अस्पताल जाने से पहले तक शूटिंग कर रहे थे Mushtaq Khan

    Mushtaq Khan के निधन से जुड़ी सबसे अहम जानकारी यह है कि वह अस्पताल में भर्ती होने से पहले तक शूटिंग कर रहे थे। उनके बेटे Mohsin के अनुसार अभिनेता Salman Khan के बॉडीगार्ड Shera के बेटे की debut film की शूटिंग में व्यस्त थे। इसके बाद पेट में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान कैंसर की जानकारी सामने आई और पिछले कुछ दिनों में उनकी हालत बिगड़ती चली गई।

    25 सितंबर को मुंबई में होगी अंतिम विदाई

    Mushtaq Khan का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 25 सितंबर को मुंबई में किया जाएगा। उनकी अंतिम विदाई Yari Road Kabristan में होगी। वह अपने पीछे पत्नी, एक बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं।

    ‘Welcome’ के Balu और ‘Gadar’ के Gul Khan से मिली खास पहचान

    Mushtaq Khan ने अपने लंबे करियर में मुख्य भूमिकाओं से ज्यादा supporting और character roles के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। 2007 की फिल्म ‘Welcome’ में Balu के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। फिल्म में उनका ‘Meri ek taang nakli hai, main hockey ka bahot bada khiladi tha…’ वाला संवाद आज भी उनके सबसे यादगार comic moments में गिना जाता है।

    ‘Gadar: Ek Prem Katha’ में उन्होंने Gul Khan का किरदार निभाया था। 2001 में आई इस फिल्म के बाद वह 2023 में ‘Gadar 2’ में भी इसी franchise का हिस्सा बने। इसके अलावा ‘Aashiqui’ में Rafoo Master, ‘Hum Hain Rahi Pyar Ke’, ‘Dil Hai Ki Manta Nahin’, ‘Sadak’, ‘Jodi No. 1’, ‘Mujhse Shaadi Karogi’, ‘Hera Pheri’, ‘Wanted’, ‘Rowdy Rathore’, ‘Welcome Back’, ‘Stree’, ‘Badhaai Do’ और ‘Stree 2’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए।

    1980 से शुरू हुआ था फिल्मी सफर

    Mushtaq Khan ने 1980 में ‘Albert Pinto Ko Gussa Kyon Aata Hai’ से screen debut किया था। इसके बाद उन्होंने फिल्मों के साथ television और theatre में भी काम किया। उनका career चार दशक से ज्यादा समय तक चला और supporting roles में उनकी comic timing, dialogue delivery और अलग अंदाज ने उन्हें लगातार काम दिलाया।

    उनके करियर की खास बात यह रही कि उन्होंने केवल comedy तक खुद को सीमित नहीं रखा। Crime, drama, social और character-based फिल्मों में भी उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।

    2026 में भी लगातार एक्टिंग कर रहे थे

    निधन से पहले Mushtaq Khan का काम रुका नहीं था। 2026 में उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें ‘Bhabiji Ghar Par Hain’, ‘Drop Out’, ‘Hum Angrezon Ke Zamane Ke Jailor Hai’ और ‘Cocaine’ शामिल हैं। ‘Cocaine’ 5 सितंबर 2026 को रिलीज हुई और उपलब्ध filmography में इसे उनकी सबसे हालिया रिलीज फिल्मों में दर्ज किया गया है। कुछ अन्य projects 2026 में completed या under-production status में भी दर्ज हैं।

    यानी अस्पताल में भर्ती होने से कुछ समय पहले तक वह सक्रिय रूप से फिल्मों के लिए काम कर रहे थे।

    Salim Khan की मदद से Mahesh Bhatt तक पहुंचे थे

    Mushtaq Khan ने निधन से करीब एक महीने पहले अपने संघर्ष के दिनों की एक कहानी साझा की थी, जो उनके शुरुआती फिल्मी सफर को समझने के लिए खास है।

    1980 के दशक में वह Mahesh Bhatt के साथ काम करना चाहते थे। Salim Khan की recommendation के जरिए उन्हें Bhatt से मिलने का मौका मिला। उस समय Mushtaq Khan के घर में telephone तक नहीं था। उन्होंने पास के एक किराना दुकानदार से कहा था कि अगर उनके लिए कोई फोन आए तो उन्हें जानकारी दे दें। इसके बदले वह दुकानदार को हर message के लिए 1 रुपये देते थे।

    करीब 15 दिन इंतजार करने के बाद आखिरकार वह संदेश आया जिसका उन्हें इंतजार था। इसके बाद Mahesh Bhatt के साथ उनका professional association आगे बढ़ा और उन्होंने Bhatt की कई फिल्मों में काम किया। यह रिश्ता ‘Kabzaa’ से आगे बढ़कर ‘Aashiqui’, ‘Dil Hai Ki Manta Nahin’, ‘Sadak’, ‘Saathi’, ‘Sir’, ‘Hum Hain Rahi Pyar Ke’, ‘Gumrah’, ‘Naaraaz’ और ‘Chaahat’ जैसी फिल्मों तक पहुंचा।

    2024 में हुआ था Mushtaq Khan का अपहरण

    Mushtaq Khan की जिंदगी के आखिरी वर्षों में एक बड़ी आपराधिक घटना भी जुड़ी रही। नवंबर 2024 में उन्हें एक event में बुलाने के बहाने दिल्ली बुलाया गया और इसके बाद उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें बिजनौर ले जाया गया था, जहां उनसे करीब 2.20 लाख रुपये की फिरौती वसूले जाने का मामला सामने आया था। इसी गिरोह ने बाद में comedian Sunil Pal को भी निशाना बनाया था।

    इस मामले में 2026 में भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। फरवरी में आरोपियों पर Gangster Act के तहत कार्रवाई की गई और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद 28 फरवरी को दो और आरोपियों की गिरफ्तारी तथा गिरोह के सरगना के surrender की जानकारी सामने आई। अप्रैल 2026 में मामले में वांछित आरोपी Shashank को भी गिरफ्तार किया गया।

    पुलिस की कार्रवाई के अनुसार इस मामले में कुल 10 आरोपियों पर Gangster Act के तहत कार्रवाई की गई थी। फरवरी में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पूर्व सभासद Sarthak Chaudhary और Ankit Pahadi के नाम भी सामने आए थे।

    आखिरी समय में भी काम और लंबा करियर पीछे छोड़ गए

    Mushtaq Khan ने अपने career में 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उनकी पहचान उन कलाकारों में रही जो मुख्य भूमिका में न होते हुए भी कहानी में अपनी मौजूदगी दर्ज करा देते थे। ‘Welcome’ के Balu से लेकर ‘Gadar’ के Gul Khan और ‘Stree 2’ जैसे बाद के projects तक उनका काम कई पीढ़ियों के दर्शकों तक पहुंचा।

    उनके निधन की खबर के बाद फिल्म और television industry में शोक की लहर है। ‘Welcome’ के निर्देशक Anees Bazmee ने उन्हें याद करते हुए उनके काम और व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि दी। अभिनेता Sanjay Mishra ने भी उनके निधन पर दुख जताया और Mushtaq Khan को अपने लिए guardian जैसा बताया। Theatre और television से जुड़े उनके पुराने साथी Ashoke Pandit ने भी उनके साथ लंबे professional संबंध को याद किया।

    56 वर्ष की उम्र में Mushtaq Khan का निधन ऐसे समय हुआ जब वह अब भी अभिनय में सक्रिय थे। उनकी 2026 की फिल्में और निधन से ठीक पहले चल रहा काम उनके लंबे career की आखिरी कड़ी बन गए।

  • Kalina Library Case: छगन भुजबल को कोर्ट से राहत, ‘Invisible Support’ थ्योरी पर सवाल

    Kalina Library Case: छगन भुजबल को कोर्ट से राहत, ‘Invisible Support’ थ्योरी पर सवाल

    Kalina Central Library केस में छगन भुजबल और पांच पूर्व PWD अधिकारियों को डिस्चार्ज किया गया। जानिए ₹2.5 करोड़, जमीन लीज और ₹137 करोड़ का पूरा मामला।

    मुंबई: मुंबई की विशेष अदालत ने महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल को Kalina Central Library से जुड़े 2015 के ACB भ्रष्टाचार मामले में डिस्चार्ज कर दिया है। अदालत ने माना कि किसी प्रशासनिक फैसले का गलत, आर्थिक रूप से नुकसानदेह या प्रक्रियागत रूप से अनियमित होना अपने आप में आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आरोपी की स्पष्ट भागीदारी, आवश्यक मंशा या जानकारी का ठोस आधार होना जरूरी है।

    विशेष MP/MLA अदालत के जज महेश के. जाधव ने भुजबल के साथ पांच पूर्व PWD अधिकारियों को भी मामले से डिस्चार्ज किया। इनमें तत्कालीन PWD अधिकारी गजानन सावंत, हरीश पाटिल, अनिलकुमार गायकवाड़, संजय सोलंकी और एमएस शाह शामिल थे। इस आदेश के साथ भुजबल के PWD मंत्री रहने के दौरान दर्ज लंबित ACB भ्रष्टाचार मामलों में Kalina Library मामला भी समाप्त हो गया है।

    कोर्ट ने भुजबल को क्यों किया डिस्चार्ज?

    मामले में अभियोजन का आरोप था कि तत्कालीन PWD मंत्री भुजबल ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए मुंबई विश्वविद्यालय के Kalina परिसर में Central Library बनाने के लिए निजी डेवलपर Indiabulls Real Estate Ltd को फायदा पहुंचाया।

    अभियोजन ने कथित तौर पर भुजबल और उनके अधीन अधिकारियों के बीच एक ऐसी व्यवस्था का आरोप लगाया था जिसमें मंत्री की ओर से प्रत्यक्ष निर्देश या हस्तक्षेप सामने नहीं आया, लेकिन अधिकारियों को कथित तौर पर उनका “Invisible Support” हासिल था।

    अदालत ने इस दलील को पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं माना। कोर्ट के अनुसार किसी आपराधिक साजिश को केवल परिस्थितियों से निकाले गए अनुमान के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता। उपलब्ध सामग्री में भुजबल की व्यक्तिगत भागीदारी और आवश्यक आपराधिक मंशा को स्थापित करने वाली पर्याप्त कड़ी नहीं मिली।

    अदालत ने यह भी कहा कि किसी प्रशासनिक निर्णय के बाद में गलत, आर्थिक रूप से नुकसानदेह या प्रक्रियागत रूप से अनियमित पाए जाने और उसके आधार पर आपराधिक जिम्मेदारी तय होने के बीच अंतर है।

    ₹2.5 करोड़ की sponsorship पर क्या था विवाद?

    इस मामले की जांच में भुजबल से जुड़े एक welfare foundation को मिले कथित corporate sponsorship payments भी जांच के केंद्र में थे।

    ACB की जांच में ₹2.5 करोड़ के दो payments का उल्लेख किया गया था। इनमें ₹1 करोड़ और ₹1.5 करोड़ की रकम शामिल थी। जांच एजेंसी ने इन payments को library project से जुड़े फैसलों के साथ जोड़ते हुए कथित quid pro quo यानी लाभ के बदले भुगतान की आशंका जताई थी।

    हालांकि अदालत ने foundation को banking channels के जरिए मिली रकम को अपने आप में आपराधिक gratification या Prevention of Corruption Act के तहत criminal misconduct साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के अनुसार केवल किसी public servant से जुड़े foundation को पैसा मिलना, बिना अतिरिक्त ठोस साक्ष्य के, अपराध स्थापित नहीं करता।

    Kalina की चार एकड़ जमीन का क्या था पूरा मामला?

    Kalina Central Library विवाद की जड़ मुंबई विश्वविद्यालय की करीब चार एकड़ जमीन से जुड़ी थी। यह जमीन Central Library के निर्माण के लिए राज्य सरकार को दी गई थी।

    PWD ने 2009 में library project के लिए tender प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद project को ऐसे मॉडल पर आगे बढ़ाया गया जिसमें निजी developer को library का निर्माण करना था और बदले में जमीन के एक हिस्से के commercial development और लंबे lease अधिकार दिए जाने थे।

    विवाद का प्रमुख हिस्सा यह था कि करीब 7,000 वर्ग मीटर जमीन को 99 साल की अवधि के लिए केवल 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर lease देने की व्यवस्था की गई थी। ACB ने इसी व्यवस्था को सरकारी जमीन के कम मूल्य पर हस्तांतरण और राज्य को नुकसान से जोड़ते हुए जांच की थी।

    ACB ने राज्य को कितने नुकसान का आरोप लगाया था?

    ACB ने इस पूरे arrangement से राज्य को 75 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आरोप लगाया था। कुछ रिपोर्टों में जांच एजेंसी के अनुमानित नुकसान को करीब 79 करोड़ रुपये बताया गया है।

    यह राशि और welfare foundation को मिले कथित ₹2.5 करोड़ एक ही रकम नहीं हैं। ₹2.5 करोड़ alleged sponsorship payments से जुड़ा आरोप था, जबकि ₹75 करोड़ से अधिक का आंकड़ा जमीन और project arrangement से कथित सरकारी नुकसान से संबंधित था।

    Central Library project का आखिर क्या हुआ?

    मामला केवल अदालत तक सीमित नहीं रहा। Library project की जमीन और construction agreement को लेकर विवाद कई वर्षों तक चला।

    2010 में project के लिए work order जारी हुआ था और construction को 36 महीने में पूरा किया जाना था। Library building की अनुमानित construction cost करीब ₹82.5 करोड़ बताई गई थी।

    बाद में project की प्रगति को लेकर विवाद बढ़ा और 2019 में महाराष्ट्र सरकार ने private developer के साथ agreement समाप्त करने का फैसला किया। इसके बाद जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई।

    सरकार ने developer को ₹137.07 करोड़ क्यों दिए?

    Agreement खत्म होने के बाद private developer ने करीब ₹229.6 करोड़ compensation की मांग की थी। इसके बाद audit और settlement प्रक्रिया के जरिए मामला तय किया गया और सरकार ने ₹137.07 करोड़ का भुगतान किया।

    इसके बाद भी Central Library project की कहानी खत्म नहीं हुई। 2022 में अधूरे civil और electrical काम को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने करीब ₹53 करोड़ का नया tender जारी किया।

    इस तरह project से जुड़े विवाद में अलग-अलग चरणों पर ₹2.5 करोड़ के alleged sponsorship payments, ₹75 करोड़ से अधिक के alleged state loss, ₹137.07 करोड़ के settlement और ₹53 करोड़ के fresh construction tender जैसे अलग-अलग आंकड़े सामने आए। इन रकमों को आपस में जोड़कर एक ही “घोटाले की रकम” मानना सही नहीं होगा।

    मामले में पहले भी अधिकारियों को राहत मिल चुकी थी

    Kalina case में कुछ PWD अधिकारियों को इससे पहले भी राहत मिल चुकी थी। 2021 में तत्कालीन PWD अधिकारियों अनिलकुमार गायकवाड़ और संजय सोलंकी को discharge किया गया था।

    अब भुजबल और मामले में बचे अन्य आरोपियों के discharge के बाद इस ACB case में सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है।

    2015 से 2026 तक कैसे बदली मामले की तस्वीर?

    Kalina Central Library विवाद की शुरुआत 2009 की tender प्रक्रिया से जुड़ी थी। 2010 में project का work order जारी हुआ। 2010 और 2011 में welfare foundation को हुए sponsorship payments जांच का हिस्सा बने। 2015 में ACB ने मामला दर्ज किया।

    इसके बाद आरोपपत्र और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। 2019 में सरकार ने project agreement समाप्त किया और ₹137.07 करोड़ के settlement के बाद जमीन वापस ली। 2021 में कुछ PWD अधिकारियों को discharge किया गया और 2022 में अधूरे library work के लिए ₹53 करोड़ का fresh tender निकाला गया।

    24 सितंबर 2026 को Special MP/MLA Court ने छगन भुजबल और पांच पूर्व PWD अधिकारियों को भी discharge कर दिया।

    भुजबल के लिए इस फैसले का क्या मतलब है?

    छगन भुजबल वर्तमान में महाराष्ट्र के Food, Civil Supplies and Consumer Protection मंत्री हैं। महाराष्ट्र सरकार के विभागीय पोर्टल पर उनका नाम वर्तमान मंत्री के रूप में दर्ज है।

    आज का आदेश उनके PWD मंत्री कार्यकाल से जुड़े लंबित ACB corruption cases में अंतिम मामले के रूप में सामने आया है। इससे पहले 2026 में Maharashtra Sadan और उससे जुड़े मामलों में भी उन्हें न्यायिक राहत मिल चुकी थी।

    हालांकि Kalina मामले का विस्तृत reasoned order अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं था। इसलिए आगे की कानूनी स्थिति, यदि कोई नई कार्यवाही होती है, तो विस्तृत आदेश के सामने आने के बाद अधिक स्पष्ट होगी।

    कलिना Central Library विवाद में अदालत का मौजूदा निष्कर्ष यह है कि उपलब्ध अभियोजन सामग्री भुजबल की ऐसी आपराधिक भागीदारी, मंशा या जानकारी स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं थी, जिससे उनके खिलाफ आरोप तय कर मुकदमा आगे बढ़ाया जा सके।