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  • ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे में IV सेट, सिरिंज और कैथेटर की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर मिला। केंद्र ने अब मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर समीक्षा शुरू की।

    मुंबई: महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में सामने आया बड़ा अंतर अब केंद्र सरकार की निगरानी तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र FDA के सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत पर मिलने के बावजूद 325 रुपये की छपी MRP वाला पाया गया। इस अंतर को 2,841 प्रतिशत तक बताया गया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा कर रही है। हालांकि, सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान कीमत सीमा लागू करने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    IV सेट से सिरिंज और कैथेटर तक बड़ी कीमत तफावत

    महाराष्ट्र FDA के जुलाई 2026 के सर्वे में मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों की जांच की गई। जांच में ट्रेड या खरीद कीमत और छपी MRP के बीच कई मामलों में बड़ा अंतर सामने आया।

    सबसे बड़ा उदाहरण IV इन्फ्यूजन सेट का है। इसकी ट्रेड कीमत 11.05 रुपये मिली, जबकि उस पर MRP 325 रुपये छपी थी। इसी तरह 6.75 रुपये में खरीदी गई 10 एमएल सिरिंज की MRP 57.20 रुपये और 29.41 रुपये की खरीद कीमत वाले कैथेटर की MRP 310 रुपये पाई गई।

    सर्वे में IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, नेब्युलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को देखा गया। कुछ अन्य वस्तुओं में भी खरीद कीमत और MRP के बीच काफी अंतर पाया गया।

    2,841 प्रतिशत का आंकड़ा आखिर बताता क्या है?

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत और 325 रुपये की MRP के बीच 2,841 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन इसका अर्थ यह सीधे नहीं है कि पूरा अंतर अस्पताल का शुद्ध मुनाफा है।

    किसी मेडिकल वस्तु की अंतिम कीमत तक पहुंचने में निर्माता, आयातक, वितरक, स्टॉकिस्ट और अस्पताल जैसे अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अस्पतालों की ओर से स्टोरेज, स्टेराइल हैंडलिंग, इन्वेंटरी, संक्रमण नियंत्रण और अन्य संचालन लागतों का भी तर्क दिया जाता है। इसी वजह से केंद्र अब अस्पतालों और दूसरे हितधारकों से कीमत और बिलिंग की पूरी व्यवस्था समझने की कोशिश कर रहा है।

    इसलिए सामने आया 2,841 प्रतिशत का आंकड़ा मुख्य रूप से खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच के अंतर को दिखाता है। इसे हर मामले में सीधे अस्पताल के मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा।

    तुकाराम मुंढे ने केंद्र से क्या मांग की?

    महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस कीमत अंतर के बाद केंद्रीय औषध विभाग और राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA के सामने मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा का मुद्दा उठाया है।

    उनकी मांग में ट्रेड मार्जिन के लिए स्पष्ट व्यवस्था, जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमतों की निगरानी और खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत शामिल है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली किसी वस्तु की वास्तविक खरीद कीमत मरीज को आमतौर पर पता नहीं होती।

    महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों की बिलिंग दरें तय करने का अधिकार अपने स्तर पर होने का दावा नहीं किया है। मुद्दा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत निर्धारण व्यवस्था और उसके नियमन से जुड़ा है।

    अब केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?

    मामले के सामने आने के बाद केंद्र ने NPPA से कीमतों में इस तरह के अंतर को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ consultation की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत और मार्जिन तय करते समय अस्पतालों की वास्तविक लागत, सप्लाई चेन और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    19 सितंबर तक स्थिति यह है कि सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान price cap लगाने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे का नियामक फैसला अलग-अलग उत्पादों और उनकी कीमत संरचना की समीक्षा के बाद लिया जाना है।

    क्या हर मेडिकल डिवाइस की कीमत NPPA तय करता है?

    नहीं। मेडिकल डिवाइस के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था अलग-अलग श्रेणियों में काम करती है।

    NPPA के अनुसार कुछ मेडिकल डिवाइस price-control व्यवस्था के तहत आते हैं, जबकि अन्य non-scheduled medical devices के मामले में सीधे ceiling price तय नहीं होता। DPCO 2013 के तहत ऐसे non-scheduled products की MRP में एक साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि की निगरानी का प्रावधान है। कुछ विशेष मामलों में NPPA ने non-scheduled medical devices की कीमत या ट्रेड मार्जिन को भी नियंत्रित किया है।

    इससे मौजूदा विवाद का मूल सवाल सामने आता है कि जिन जरूरी hospital consumables पर सीधी ceiling price व्यवस्था नहीं है, उनमें खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर उचित माना जाए।

    पहले भी मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर हस्तक्षेप हो चुका है

    मेडिकल डिवाइस की कीमतों को लेकर सरकारी हस्तक्षेप नया नहीं है। NPPA ने coronary stents और knee implants की कीमतों को नियंत्रित किया है। कोविड काल में oxygen concentrators, pulse oximeters, blood pressure monitoring machines, nebulisers, digital thermometers और glucometers समेत छह मेडिकल डिवाइस पर 70 प्रतिशत तक trade margin की सीमा लागू की गई थी।

    NPPA के पुराने दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि कुछ मेडिकल डिवाइस में अस्पतालों को कम कीमत पर उत्पाद मिलने और मरीजों की बिलिंग में छपी MRP के इस्तेमाल के बीच अंतर pricing regulation के लिए चिंता का विषय रहा है।

    अस्पतालों की कीमत में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

    मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से लिया गया अंतिम शुल्क हमेशा एक ही चीज नहीं होता। अस्पतालों की ओर से उपचार की पूरी व्यवस्था में स्टोरेज, स्टेराइल प्रोसेसिंग, संक्रमण नियंत्रण, नर्सिंग, इन्वेंटरी और बर्बादी जैसी लागतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

    इसी वजह से आगे होने वाली सरकारी चर्चा में केवल MRP और खरीद कीमत की तुलना के बजाय पूरे pricing chain और hospital billing structure को देखना महत्वपूर्ण होगा।

    दूसरे राज्यों से भी सामने आईं ऐसी चिंताएं

    यह मुद्दा केवल महाराष्ट्र तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रहा है। पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के औषध नियंत्रण तंत्र से भी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों से जुड़ी समान शिकायतें या representations मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल डिवाइस pricing framework की समीक्षा तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, महाराष्ट्र के सर्वे में सामने आए 2,841 प्रतिशत के आंकड़े को पूरे देश के सभी अस्पतालों या सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर लागू करना सही नहीं होगा।

    मरीजों के लिए सबसे अहम सवाल क्या है?

    अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल में इस्तेमाल की गई वस्तु का नाम, मात्रा, MRP और बिल की गई राशि स्पष्ट हो। किसी मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से ली गई राशि में बड़ा अंतर होने की स्थिति में itemised bill और संबंधित विवरण देखना मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

    लेकिन 11.05 रुपये की खरीद कीमत और 325 रुपये की MRP सामने आने का मतलब यह भी नहीं है कि हर अस्पताल हर मरीज से उसी MRP पर पैसा ले रहा है। वास्तविक बिलिंग अस्पताल की व्यवस्था, पैकेज, बीमा और इस्तेमाल की गई वस्तुओं के आधार पर अलग हो सकती है।

    अब आगे क्या होगा?

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे और तुकाराम मुंढे की पहल के बाद मामला अब केंद्र के स्तर पर पहुंच चुका है। NPPA से रिपोर्ट, अस्पतालों और अन्य stakeholders के साथ consultation तथा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों और मार्जिन की समीक्षा अगले चरण हैं।

    आगे की चुनौती यह तय करने की होगी कि जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए कीमतों की निगरानी किस तरह की जाए, खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर स्वीकार्य हो, supply chain में किस स्तर पर मार्जिन जोड़ा जा रहा है और मरीजों के लिए बिलिंग में कितनी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

    फिलहाल 11.05 रुपये के IV सेट की 325 रुपये MRP और 2,841 प्रतिशत के अंतर ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली छोटी दिखने वाली लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों को राष्ट्रीय नियामक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    मुंबई में गणेशोत्सव की परंपराओं को डिजिटल रूप से सहेजने के लिए BMC का Bappa.org अभियान, जानें फोटो-कहानी कैसे भेजें और क्या मिलेगा।

    मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में निभाई जाने वाली परंपराओं, यादों और सांस्कृतिक गतिविधियों को अब डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से Bappa.org पर अपने गणेशोत्सव की कहानी, तस्वीरें, वीडियो, पारंपरिक प्रथाएं और सामाजिक व पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस डिजिटल संग्रह में सिर्फ बड़े गणेश मंडल ही नहीं, बल्कि घरों में स्थापित होने वाले गणपति भी शामिल किए जा रहे हैं।

    Bappa.org क्या है?

    Bappa.org को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का डिजिटल राज्य संग्रह बताया गया है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पीढ़ियों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपराओं, परिवारों की यादों, सार्वजनिक मंडलों की गतिविधियों और मूर्ति व सजावट से जुड़ी कला को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित करना है। पोर्टल के अनुसार यह महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग का उपक्रम है।

    मुंबईकर इसमें क्या दर्ज कर सकते हैं?

    Bappa.org पर गणेशोत्सव से जुड़ी कई तरह की जानकारी साझा की जा सकती है। इसमें घर या मंडल की गणेश प्रतिमा की तस्वीर, सजावट, पारंपरिक आरती, परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा, गणेशोत्सव से जुड़ी व्यक्तिगत यादें, सामाजिक कार्य, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं।

    इसका मतलब है कि किसी परिवार के घर में हर साल एक ही तरीके से होने वाला गणेशोत्सव भी इस डिजिटल संग्रह का हिस्सा बन सकता है। इसी तरह सार्वजनिक गणेश मंडल, गृहनिर्माण संस्था और गणेश प्रतिमा से जुड़ा काम करने वाले कारीगर भी अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।

    मुंबई के घरों की परंपराएं भी बनेंगी डिजिटल रिकॉर्ड

    मुंबई में गणेशोत्सव का बड़ा हिस्सा केवल प्रसिद्ध सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में 24,631 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ था, जिनमें 24,521 घरेलू और 110 सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाएं शामिल थीं। ऐसे में घर-घर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की परंपराओं को दर्ज करने का यह प्रयास शहर की व्यापक सांस्कृतिक तस्वीर को सामने ला सकता है।

    Bappa.org के मौजूदा संग्रह में मुंबई सिटी से Parel cha Raja, Saibaba Nagar Colony और Girgaon cha Raja जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं। इसका मतलब है कि मुंबई से नागरिकों और मंडलों की भागीदारी शुरू हो चुकी है।

    Bappa.org पर कहानी कैसे दर्ज करें?

    पोर्टल के अनुसार इसके लिए किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने या अलग अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है। एक फोटो और अपनी गणेशोत्सव परंपरा के बारे में कुछ पंक्तियों से शुरुआत की जा सकती है। जानकारी भेजने के बाद टीम उसकी जांच करती है और स्वीकार की गई कहानी को डिजिटल संग्रह में दर्ज किया जाता है।

    इसके अलावा ‘घरोघरी बाप्पा’ अभियान के तहत WhatsApp के जरिए भी गणेशोत्सव की कहानी भेजने की सुविधा दी गई है। इसके लिए +91 91361 72681 नंबर जारी किया गया है। इस अभियान में भाग लेना नि:शुल्क बताया गया है।

    कहानी भेजने के बाद क्या होगा?

    Bappa.org पर स्वीकार की गई प्रविष्टियों को एक अलग रिकॉर्ड नंबर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2026-00290 और 2026-00297 जैसी प्रविष्टियां संग्रह में दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में जमा करने और स्वीकार किए जाने की तारीख के साथ डिजिटल evidence भी दिखाई देता है।

    पोर्टल की जानकारी के अनुसार प्रत्येक योगदान को सत्यापन के बाद महाराष्ट्र के राज्य सांस्कृतिक संग्रह का हिस्सा बनाया जाता है। सफलतापूर्वक कहानी दर्ज कराने वाले परिवारों को सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।

    सिर्फ मुंबई नहीं, महाराष्ट्र और विदेशों की कहानियां भी

    Bappa.org पर फिलहाल महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे स्थानों से भी गणेशोत्सव की कहानियां दिखाई दे रही हैं। पोर्टल पर मुंबई, सातारा, रायगढ़, पुणे और अन्य क्षेत्रों की प्रविष्टियों के साथ महाराष्ट्र के बाहर से भी योगदान दर्ज हैं।

    हाल की चयनित कहानियों में नए घर में पहला गणेशोत्सव, पारंपरिक गौरी-गणपति उत्सव, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों का गणेशोत्सव और विसर्जन के बाद बची मिट्टी के इस्तेमाल से जुड़ी पर्यावरणीय पहल जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल रही हैं।

    इससे साफ है कि इस डिजिटल संग्रह का दायरा केवल गणेश प्रतिमा या पंडाल की तस्वीर तक सीमित नहीं है। परिवार, परंपरा, कला, पर्यावरण और विदेशों में रहने वाले भारतीयों का गणेशोत्सव भी इसका हिस्सा बन सकता है।

    गणेशोत्सव के डिजिटल दस्तावेजीकरण का बड़ा उद्देश्य

    महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2025 में गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव के रूप में मनाने को मंजूरी दी थी। इसके बाद गणेशोत्सव से जुड़ी कला, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास बढ़े हैं।

    इसी व्यापक संदर्भ में Bappa.org पर गणेशोत्सव की परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। गणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में भी इस दस्तावेजीकरण को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गणेशोत्सव को UNESCO की मान्यता मिल चुकी है।

    मुंबईकरों के लिए इसका क्या मतलब?

    मुंबई में हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक मंडलों के जरिए गणेशोत्सव मनाते हैं। अलग-अलग इलाकों, परिवारों और समुदायों की अपनी अलग परंपराएं हैं। कई परंपराएं केवल परिवार के बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता।

    Bappa.org इसी अंतर को भरने की कोशिश करता है। किसी परिवार की कई दशक पुरानी पूजा पद्धति हो, किसी मंडल का सामाजिक काम हो, पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति हो या किसी इलाके की अलग गणेशोत्सव परंपरा—इन अनुभवों को तस्वीर और कहानी के साथ दर्ज किया जा सकता है।

    मुंबईकरों के लिए आसान भाषा में कहें तो Bappa.org पर सिर्फ यह बताना जरूरी नहीं है कि आपके घर में गणपति की मूर्ति कैसी है। यह भी बताया जा सकता है कि आपके परिवार में बाप्पा की परंपरा कब से है, सजावट कैसे होती है, कौन-सी आरती या प्रथा निभाई जाती है और गणेशोत्सव के दौरान परिवार या मंडल क्या खास करता है।

    यानी इस साल का गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी डिजिटल संग्रह में दर्ज रह सकती है। मुंबईकर अपने घर या मंडल की परंपरा को Bappa.org के माध्यम से इस राज्यव्यापी सांस्कृतिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना सकते हैं।

  • मुंबई दहिसर में 15 KM कैब राइड के बाद AC को लेकर विवाद, किराया न देने का वीडियो वायरल

    मुंबई दहिसर में 15 KM कैब राइड के बाद AC को लेकर विवाद, किराया न देने का वीडियो वायरल

    मुंबई के दहिसर में 15 KM कैब राइड के बाद AC को लेकर यात्री और ड्राइवर में विवाद का वीडियो वायरल हुआ है। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: दहिसर में कैब की करीब 15 किलोमीटर की सवारी के बाद AC को लेकर यात्री और ड्राइवर के बीच विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में यात्री का कहना है कि कैब का AC बंद था, जबकि ड्राइवर का दावा है कि AC चालू था और यात्रा के दौरान यात्री ने इसकी शिकायत नहीं की। विवाद उस समय बढ़ा जब किराए के भुगतान की बात सामने आई।

    वीडियो में ड्राइवर लगातार यात्री से किराया देने की बात करता दिखाई देता है। ड्राइवर का कहना है कि यात्री ने करीब 15 किलोमीटर तक कैब में सफर किया और इस दौरान AC को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई। उसका सवाल है कि अगर AC बंद था तो रास्ते में इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई और भुगतान का समय आने पर इस मुद्दे को क्यों उठाया जा रहा है।

    वहीं, यात्री की ओर से AC बंद होने की बात कही जा रही है। इसी दावे को लेकर दोनों के बीच बहस होती दिखाई देती है। वायरल वीडियो में यह विवाद किराए के भुगतान तक पहुंचता नजर आता है।

    15 किलोमीटर की सवारी के बाद क्या हुआ?

    वीडियो में ड्राइवर खुद करीब 15 किलोमीटर की यात्रा का उल्लेख करता है। वह यात्री से यह भी कहता सुनाई देता है कि अगर AC से परेशानी थी तो पूरी यात्रा के दौरान इसकी शिकायत की जानी चाहिए थी।

    हालांकि, केवल वायरल वीडियो के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से तय नहीं किया जा सकता कि यात्रा के दौरान कैब का AC वास्तव में बंद था या चालू। इसी तरह किराया आखिरकार दिया गया या नहीं और विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    कैब का वाहन नंबर MH 47 BY 8571 बताया जा रहा है। घटना को मुंबई के दहिसर इलाके से जोड़ा जा रहा है।

    AC को लेकर विवाद कैसे बढ़ा?

    कैब सेवाओं में यात्री और ड्राइवर के बीच विवाद कई बार किराए, वाहन की सुविधा, रूट, अतिरिक्त शुल्क या यात्रा के दौरान उपलब्ध सुविधाओं को लेकर हो सकता है। इस मामले में विवाद का केंद्र AC है।

    यात्री का पक्ष है कि AC काम नहीं कर रहा था, जबकि ड्राइवर इस दावे से सहमत नहीं है। ड्राइवर का कहना है कि AC चालू था और यात्री ने करीब 15 किलोमीटर तक सफर किया। भुगतान की बारी आने के बाद AC बंद होने की शिकायत किए जाने पर ड्राइवर ने सवाल उठाया।

    इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लेकिन वीडियो में दिखाई देने वाली बातचीत के आधार पर किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

    कैब में AC को लेकर शिकायत हो तो क्या करें?

    अगर यात्रा के दौरान AC या वाहन की किसी सुविधा को लेकर समस्या हो, तो यात्री को उसी समय ड्राइवर को इसकी जानकारी देना और संभव होने पर कैब ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करना चाहिए। इससे बाद में किराए को लेकर विवाद होने पर शिकायत का रिकॉर्ड उपलब्ध रह सकता है।

    इसी तरह ड्राइवर के लिए भी यात्री की शिकायत को यात्रा के दौरान ही स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, ताकि भुगतान के समय विवाद की स्थिति न बने।

    वायरल वीडियो के बाद अब क्या स्थिति है?

    फिलहाल इस मामले में पुलिस कार्रवाई, आधिकारिक शिकायत या संबंधित कैब प्लेटफॉर्म की ओर से कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए वायरल वीडियो में मौजूद दावों को उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

    इस मामले में आगे यदि पुलिस, कैब कंपनी या संबंधित यात्री-ड्राइवर की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि AC को लेकर वास्तविक स्थिति क्या थी और किराए के भुगतान को लेकर विवाद के बाद क्या कार्रवाई हुई।

  • Salman Khan का Katrina Kaif की ट्रोलिंग पर बयान, Bigg Boss 20 में trolls को कहा ‘parasites’

    Salman Khan का Katrina Kaif की ट्रोलिंग पर बयान, Bigg Boss 20 में trolls को कहा ‘parasites’

    Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी शेमिंग के बीच Salman Khan ने Bigg Boss 20 में trolling, age-shaming और paparazzi culture पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Salman Khan ने Bigg Boss 20 के Weekend Ka Vaar में सोशल मीडिया trolling, body-shaming और celebrity privacy को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका यह बयान Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी appearance को लेकर चल रही ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच आया है। हालांकि Salman ने Katrina का नाम नहीं लिया, लेकिन pregnancy के बाद महिलाओं के बढ़े वजन को लेकर किए जाने वाले comments पर उन्होंने सवाल उठाया। इसी दौरान उन्होंने लगातार celebrities की शक्ल-सूरत पर निजी टिप्पणियां करने वाले trolls को ‘parasites’ भी कहा।

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    Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी पर क्यों शुरू हुई ट्रोलिंग

    Katrina Kaif 14 सितंबर को अपने पति Vicky Kaushal के साथ Mumbai में Ambani परिवार के Ganesh Chaturthi समारोह में नजर आई थीं। बेटे Vihaan के जन्म के बाद यह उनकी चर्चित सार्वजनिक appearances में से एक थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ users ने उनकी पुरानी तस्वीरों से तुलना करते हुए उनके वजन और appearance पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। Fans ने इन comments को body-shaming बताते हुए Katrina का बचाव किया।

    Katrina और Vicky Kaushal ने 7 नवंबर 2025 को अपने बेटे Vihaan का स्वागत किया था। मां बनने के बाद Katrina ने फिल्मों से दूरी बनाए रखते हुए अपने परिवार और Kay Beauty से जुड़े काम पर ध्यान दिया है।

    Salman Khan ने Katrina का नाम लिए बिना क्या कहा?

    Bigg Boss 20 के Weekend Ka Vaar में Salman Khan ने pregnancy और motherhood के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर की जाने वाली trolling पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि किसी महिला को pregnant होने या मां बनने के कारण troll क्यों किया जाना चाहिए। Salman ने यह भी कहा कि जब कोई महिला दोबारा काम पर लौटेगी तो अपने तरीके से fitness पर ध्यान दे सकती है।

    इस बयान को Katrina Kaif की मौजूदा controversy से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट है कि Salman ने अपने segment में Katrina का नाम नहीं लिया। इसलिए इसे सीधे तौर पर “Salman ने Katrina के trolls को जवाब दिया” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा।

    ‘Parasites’ किसे कहा Salman ने?

    Salman का ‘parasites’ वाला बयान भी इसी broader trolling discussion का हिस्सा था। उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा जो celebrities की शक्ल, शरीर, उम्र और निजी जिंदगी को लगातार online comments का विषय बनाते हैं।

    उन्होंने अपनी appearance को लेकर होने वाली trolling का भी जिक्र किया। Salman ने बताया कि उनके वजन, उम्र और looks को लेकर comments किए जाते हैं। इसके बाद उन्होंने मंच पर अपना hat और jacket उतारा और अपने शरीर को लेकर होने वाली टिप्पणियों का सामना करने का अंदाज दिखाया।

    Salman ने खुद की उम्र को लेकर भी कहा कि वह 60 साल के हो चुके हैं और उनसे हमेशा वही appearance बनाए रखने की उम्मीद नहीं की जा सकती जो उनकी शुरुआती फिल्मों के दौर में थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी के काम को पसंद नहीं करना अलग बात है, लेकिन उस व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला करना अलग है।

    ScoutOP और Arishfa Khan के विवाद से शुरू हुई चर्चा

    Weekend Ka Vaar में trolling की चर्चा ScoutOP और Arishfa Khan से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी हुई। Salman ने ScoutOP की online comments और gaming community से जुड़ी बातों को लेकर सवाल उठाए और इसके बाद चर्चा celebrity trolling तथा सोशल मीडिया behaviour तक पहुंच गई।

    Salman ने पुराने एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें उनके मुताबिक एक व्यक्ति लगातार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक comments करता था और cyber cell की मदद से उसकी पहचान तक पहुंची थी। Salman ने anonymous accounts के पीछे छिपकर लोगों पर निजी टिप्पणियां करने की मानसिकता पर सवाल उठाया।

    Sohail Khan और Varun Sharma का भी आया जिक्र

    Salman ने केवल अपनी trolling की बात नहीं की। उन्होंने Sohail Khan और Varun Sharma जैसे लोगों की appearance पर किए जाने वाले comments का भी संदर्भ दिया। उनका कहना था कि किसी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताना अलग बात है, लेकिन किसी की शक्ल या शरीर का मजाक बनाना अलग मामला है।

    Paparazzi culture पर भी भड़के Salman Khan

    Salman का निशाना सिर्फ social media trolls तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कुछ paparazzi द्वारा female celebrities की ऐसी तस्वीरें लेने पर सवाल उठाया जिनमें कैमरे का focus उनके शरीर के खास हिस्सों पर होता है।

    इस दौरान Salman ने actresses और अपने परिवार की महिलाओं से जुड़े experiences का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी celebrity का सार्वजनिक स्थान पर होना क्या उसकी privacy और dignity खत्म कर देता है।

    उन्होंने दर्शकों और celebrities के रिश्ते को लेकर भी कहा कि फिल्म की ticket खरीदने का मतलब किसी actor की निजी जिंदगी पर अधिकार मिल जाना नहीं है। उनका तर्क था कि दर्शक फिल्म के काम को पसंद या नापसंद कर सकते हैं, लेकिन इससे व्यक्तिगत अपमान का अधिकार नहीं मिलता।

    Katrina Kaif ने खुद क्या कहा?

    Katrina Kaif ने इस specific body-shaming controversy पर सीधे तौर पर trolls को जवाब नहीं दिया है। हालांकि इसी दौरान उन्होंने pregnancy के बाद अपने शरीर और skin में हुए बदलावों तथा beauty को लेकर अपनी बदलती सोच पर बात की।

    एक interview में Katrina ने बताया कि pregnancy के बाद उनकी skin पहले से ज्यादा sensitive हो गई और उन्हें अपने लिए suitable skincare products तलाशने पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनके लिए “looking my best” का मतलब सिर्फ बाहर से अच्छा दिखना नहीं, बल्कि भीतर से healthy और अच्छा महसूस करना है।

    Katrina ने balanced diet, active रहने, meditation, सुबह कुछ समय phone से दूर रहने और natural light लेने जैसी अपनी daily habits का भी जिक्र किया। उन्होंने परिवार और दोस्तों के साथ downtime को भी अपने लिए महत्वपूर्ण बताया।

    Hrithik Roshan और Ali Zafar ने भी दिखाई प्रतिक्रिया

    Katrina की appearance पर शुरू हुई body-shaming के बीच Hrithik Roshan ने Katrina के बचाव में लिखी गई एक social media post को like किया। Hrithik की ओर से इस मामले पर कोई अलग विस्तृत बयान सामने नहीं आया, इसलिए उनके reaction को post like करने तक सीमित रखना सही है।

    वहीं Katrina के Mere Brother Ki Dulhan co-star Ali Zafar ने खुलकर body-shaming की आलोचना की। उन्होंने महिलाओं के लिए एक तय beauty standard की अपेक्षा को गलत बताते हुए लोगों से दूसरों की परिस्थितियों को समझने और अधिक empathy के साथ व्यवहार करने की अपील की।

    Karishma Tanna ने भी postpartum body पर रखी अपनी बात

    इसी controversy के बीच Karishma Tanna ने अपने postpartum body को लेकर सोशल मीडिया पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने शरीर में childbirth के बाद आए बदलावों को स्वीकार करने की बात कही और महिलाओं को दुनिया की expectations के कारण अपने शरीर को लेकर शर्म महसूस न करने का संदेश दिया।

    इससे Katrina Kaif की controversy केवल एक celebrity की appearance तक सीमित नहीं रही, बल्कि motherhood के बाद महिलाओं के शरीर को लेकर बनाए जाने वाले beauty standards पर भी चर्चा तेज हुई है।

    Post-pregnancy appearance को लेकर इतनी चर्चा क्यों?

    Pregnancy और childbirth के बाद शरीर में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। वजन, skin, hormones, sleep pattern और शरीर की overall appearance में बदलाव अलग-अलग महिलाओं में अलग तरह से दिखाई दे सकते हैं। इसलिए किसी celebrity की तस्वीर देखकर उसके स्वास्थ्य या recovery के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

    Katrina की अपनी हालिया बातचीत भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है। उन्होंने pregnancy के बाद अपनी sensitive skin और बदलती self-care जरूरतों के बारे में बात की है, लेकिन उन्होंने अपने वर्तमान वजन को लेकर कोई specific medical explanation नहीं दिया है।

    Salman Khan की टिप्पणी के बाद अब मामला सिर्फ Katrina Kaif तक सीमित नहीं

    Bigg Boss 20 में Salman Khan की टिप्पणी ने Katrina Kaif की ongoing body-shaming controversy को एक बड़े celebrity-trolling debate से जोड़ दिया है। इसमें social media comments, age-shaming, body-shaming, anonymous trolling और paparazzi द्वारा privacy की सीमाओं का सवाल शामिल हो गया है।

    फिलहाल Katrina ने इस specific trolling controversy पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। वहीं Salman Khan का बयान, Hrithik Roshan का defending post को like करना, Ali Zafar की प्रतिक्रिया और Karishma Tanna की postpartum body पर टिप्पणी ने इस मुद्दे को लगातार चर्चा में बनाए रखा है।

    Bigg Boss 20 का Weekend Ka Vaar इसी वजह से Salman Khan के trolling पर दिए गए बयान, Katrina Kaif की post-pregnancy controversy और celebrity privacy को लेकर उनकी टिप्पणियों के कारण चर्चा में है।

  • मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक BMC की विशेष कार्रवाई, 14 फीट या उससे ऊंची 39,111 झोपड़ियां जांच के दायरे में, जानिए किस पर होगा असर।

    मुंबई: मुंबई के झोपड़पट्टी क्षेत्रों में बने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों तथा उनसे जुड़े अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ियां हैं, जिनमें 39 हजार 111 संरचनाएं 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। हालांकि, इन सभी 39,111 संरचनाओं को इस अवधि में अनिवार्य रूप से तोड़ा जाएगा, ऐसा BMC की घोषणा में नहीं कहा गया है।

    BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन में और सह आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने संबंधित रहवासियों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है और ऐसा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    39,111 संरचनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा पूर्वी उपनगरों का है। यहां 31,227 झोपड़ियां 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। मुंबई शहर में ऐसी 3,348 और पश्चिमी उपनगरों में 4,536 संरचनाएं हैं। यानी इस पूरी सूची में करीब 80 प्रतिशत संरचनाएं पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं।

    कार्रवाई का पूरा आंकड़ा क्या है?

    BMC के अनुसार 39,111 ऊंची संरचनाओं में से 4,584 पर पहले ही निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 611 संरचनाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, BMC के सार्वजनिक आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं है कि 611 नोटिस वाली संरचनाएं 4,584 पर की गई कार्रवाई के आंकड़े में शामिल हैं या अलग श्रेणी में हैं। इसलिए केवल इन दोनों आंकड़ों को घटाकर अक्टूबर से कार्रवाई के लिए बची संरचनाओं की सटीक संख्या बताना अभी सही नहीं होगा।

    यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 39,111 का आंकड़ा identified structures का है, न कि 39,111 परिवारों का। BMC की घोषणा में यह जानकारी नहीं दी गई है कि इन संरचनाओं में कुल कितने परिवार या लोग रहते हैं। इसलिए इस अभियान से 39 हजार परिवार सीधे प्रभावित होंगे, ऐसा कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

    14 फीट से ज्यादा ऊंचाई का मतलब क्या पूरा घर टूटेगा?

    इस अभियान का सबसे अहम सवाल यही है। BMC ने 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को कार्रवाई के दायरे में रखा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में पूरी संरचना को ही जमीन पर गिराया जाएगा।

    जून 2026 के एक Bombay High Court मामले में 14 फीट से ऊपर बने अनधिकृत vertical extension को हटाने का मामला सामने आया था। अदालत के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति के पास 14 फीट से ऊपर vertical extension की अनुमति नहीं होने का उल्लेख है। अदालत ने लागू नियमों के तहत अनुमति के लिए आवेदन करने की संभावना का भी उल्लेख किया था। इससे स्पष्ट होता है कि मूल संरचना और बाद में किए गए अनधिकृत ऊर्ध्वाधर विस्तार की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

    यानी किसी झोपड़ी की ऊंचाई 14 फीट से अधिक पाए जाने पर कार्रवाई किस हिस्से पर होगी, यह संबंधित निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध अनुमति और रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकता है। BMC की मौजूदा घोषणा में प्रत्येक संरचना के लिए कार्रवाई का अलग प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    पुराने झोपड़ीधारकों के दस्तावेज भी महत्वपूर्ण

    इस अभियान को केवल ऊंचाई के आधार पर समझना सही नहीं होगा। झोपड़ी की ऊंचाई और उसमें रहने वाले व्यक्ति की पात्रता दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

    महाराष्ट्र सरकार की उपलब्ध पात्रता संबंधी जानकारी में 1 जनवरी 2000 या उससे पहले के आवासीय ground-floor structures के लिए निर्धारित पात्रता प्रक्रिया का उल्लेख है। पात्रता के लिए पुराने मतदाता रिकॉर्ड, अधिकृत बिजली रिकॉर्ड, सर्वेक्षण संबंधी दस्तावेज, संपत्ति कर रिकॉर्ड और अन्य स्वीकार्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होती है।

    मार्च 2026 के Bombay High Court के एक मामले में भी झोपड़ीधारक की पात्रता तय करते समय प्रस्तुत दस्तावेजों की उचित जांच और प्रत्येक संबंधित दस्तावेज पर स्पष्ट निष्कर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

    इसलिए किसी पुराने झोपड़ीधारक के पास photo-pass या अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद होने की स्थिति और बाद में किए गए अनधिकृत निर्माण की स्थिति को एक ही आधार पर नहीं देखा जा सकता।

    मुंबई में पहले भी तेज हुई है अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई

    BMC के अनुसार 24 अगस्त से 15 सितंबर 2026 के बीच मुंबई के अलग-अलग प्रशासनिक विभागों में 128 अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई की गई, जबकि 140 अन्य निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नियोजित थी। अक्टूबर से शुरू होने वाला अभियान इसी enforcement को झोपड़पट्टी क्षेत्रों में विशेष रूप से 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं पर केंद्रित करता है।

    मुंबई के पूर्वी उपनगरों में इस समय अनधिकृत कब्जों और निर्माणों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। सितंबर 2026 में Mankhurd में सरकारी जमीन से करीब 57 अनधिकृत व्यावसायिक इकाइयों को हटाया गया और लगभग छह एकड़ जमीन को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई की गई। अप्रैल 2026 में Ghatkopar-Mankhurd Link Road के आसपास भी 1,200 से अधिक अनधिकृत झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई की गई थी। ये कार्रवाई वर्तमान 14 फीट वाली BMC विशेष मुहिम से अलग हैं, लेकिन मुंबई में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ बढ़ी enforcement का व्यापक संदर्भ देती हैं।

    सुरक्षा का सवाल भी बड़ा कारण

    अनधिकृत vertical extensions और कमजोर संरचनाओं का मुद्दा केवल जमीन या निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है। 2026 में Mankhurd में मकान गिरने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच नाबालिग थे। इसके बाद अनधिकृत और असुरक्षित संरचनाओं को लेकर मुंबई में सुरक्षा संबंधी सवाल और गंभीर हुए।

    मुंबई में landslide-prone क्षेत्रों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उपलब्ध BMC Climate Action Plan से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 287 landslide-prone locations चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 209 informal settlements के भीतर हैं। 2026 में Kurla में landslide की घटना में भी आठ लोगों की मौत हुई थी। हालांकि इन घटनाओं को 39,111 संरचनाओं के अभियान का प्रत्यक्ष कारण बताने के लिए अलग आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल: 1 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

    अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाली इस विशेष मुहिम में BMC का लक्ष्य 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली identified structures पर कार्रवाई करना है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 39,111 संरचनाओं में से कितनी पर इस तीन महीने की अवधि में वास्तविक निष्कासन कार्रवाई की जाएगी, कार्रवाई किस क्रम में होगी और 611 नोटिस जारी की गई संरचनाओं तथा पहले से कार्रवाई झेल चुकी 4,584 संरचनाओं के आंकड़ों में कितना overlap है।

    यही वजह है कि इस अभियान का वास्तविक असर आने वाले दिनों में ward-wise कार्रवाई, जारी होने वाले notices और प्रत्येक संरचना के रिकॉर्ड की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा।

    फिलहाल BMC ने झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली कार्रवाई में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाएं मुख्य फोकस में रहेंगी, जबकि किसी विशेष घर या उसके हिस्से पर कार्रवाई का स्वरूप संबंधित निर्माण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय होना महत्वपूर्ण होगा।

  • अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

    अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

    अंधेरी MIDC में माथाडी यूनियन की आड़ में कथित वसूली के मामले में 7 गिरफ्तार, 4 फरार। MCOCA कार्रवाई और पुलिस जांच की पूरी जानकारी।

    मुंबई: अंधेरी पूर्व MIDC में माथाडी कामगार यूनियन के नाम पर कंपनियों, कारोबारियों और निर्माण व्यावसायिकों से कथित प्रोटेक्शन मनी वसूलने के मामले में मुंबई पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चार अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र संघटित गुन्हेगारी नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है। जांच में कथित नेटवर्क की पहुंच अंधेरी से आगे पवई, गोरेगांव पूर्व और फिल्म स्टूडियो क्षेत्र तक होने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रेड स्टार इमारत में ₹10 लाख की कथित मांग

    यह मामला 16 अगस्त को अंधेरी पूर्व के कोंडिविटा रोड स्थित ट्रेड स्टार इमारत में हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, पांचवीं मंजिल पर एक कंपनी के कार्यालय में नवीनीकरण का काम चल रहा था। वहां कुछ लोग पहुंचे और कथित तौर पर ₹10 लाख की प्रोटेक्शन मनी की मांग की। कार्यालय में पहले से काम कर रहे माथाडी कामगारों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, इस घटना में 27 वर्षीय माथाडी कामगार नदीम नसरुद्दीन शेख पर भी हमला हुआ। 17 अगस्त को MIDC पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि लकड़ी के डंडों से उसके सिर और पैरों पर वार किया गया। इसी हमले के बाद पुलिस को कथित वसूली नेटवर्क का पता चला।

    माथाडी के नाम पर काम रोककर पैसे मांगने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी किसी कंपनी में काम हासिल करने के बजाय वहां काम कर रहे श्रमिकों पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने का प्रयास करते थे। इस मामले में एक अन्य शिकायत के अनुसार, नदीम शेख से काम जारी रखने की अनुमति के बदले ₹20,000 प्रति माह मांगने का आरोप है।

    अलग-अलग घटनाओं से संबंधित

    इन दोनों रकमों को एक ही मांग मानना सही नहीं होगा। ट्रेड स्टार कार्यालय मामले में ₹10 लाख की कथित मांग का उल्लेख है, जबकि नदीम शेख से संबंधित मामले में ₹20,000 मासिक मांग का विवरण सामने आया है। वास्तविक वसूली और सभी संबंधित घटनाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    करीब 1,000 कंपनियों तक पहुंच का पुलिस दावा

    पुलिस जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क की पहुंच करीब 1,000 MIDC कंपनियों तक होने की आशंका जताई गई है। कंपनियों से ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की कथित मांग और निर्माण व्यावसायिकों से प्रोजेक्ट के आकार के आधार पर ₹120 प्रति वर्ग फुट तक वसूली के दावे भी सामने आए हैं।

    हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियों से वसूली साबित हो चुकी है। पुलिस को अब यह पता लगाना है कि कितने कारोबारी वास्तव में इस कथित नेटवर्क के संपर्क में आए, कितनों से पैसे मांगे गए और कितने लोगों ने शिकायत दर्ज कराई।

    अंधेरी से पवई और गोरेगांव तक कथित गतिविधियां

    जांच में अंधेरी MIDC के अलावा पवई के कार्यालयों, गोरेगांव पूर्व के फिल्म स्टूडियो और SEEPZ क्षेत्र का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कथित गिरोह उन कंपनियों पर नजर रखता था जहां नया काम शुरू होने वाला हो।

    अंधेरी SEEPZ क्षेत्र में करीब 450 कंपनियां और कार्यालय तथा MIDC क्षेत्र में लगभग 350 कंपनियां होने की जानकारी जांच में सामने आई है। यह औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए मामले की संभावित व्यापकता को समझा जा सकता है।

    माथाडी व्यवस्था और कथित गैरकानूनी वसूली में अंतर

    माथाडी व्यवस्था महाराष्ट्र माथाडी, हमाल तथा अन्य मैनुअल कामगार (रोजगार और कल्याण का विनियमन) अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होती है। इसका उद्देश्य असुरक्षित मैनुअल कामगारों के रोजगार और कल्याण को विनियमित करना है।

    माथाडी व्यवस्था में मुकादम श्रमिकों की टोली का नेतृत्व करता है। कंपनियां काम की जरूरत के अनुसार संबंधित व्यवस्था के माध्यम से कामगारों की सेवाएं लेती हैं। इस व्यवस्था का नाम इस्तेमाल कर किसी कंपनी पर कथित धमकी या अवैध वसूली करना एक अलग आपराधिक आरोप है।

    सात आरोपी गिरफ्तार, चार फरार

    MIDC पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

    1. पूरण अरुण सिंह उर्फ चड्डा
    2. रोहित मधुकर साळुंखे
    3. इमरान बसुद्दीन हवाळदार
    4. सुरेश गुलाबचंद गौड उर्फ किसान
    5. आकाश मानसिंग सिंह उर्फ नेपाली
    6. राजकुमार सेल्वन मुन्नुस्वामी उर्फ लाला
    7. अर्जुन मुनियन मुथु उर्फ डाकू
      पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना समेत चार आरोपी फरार हैं। वन्नियार को कथित नेटवर्क का प्रमुख बताया गया है।

    बड़ा कन्ना और छोटा कन्ना कि हो राही है जांच

    पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना और उसके भाई कन्नन स्वामी उर्फ छोटा कन्ना का नाम कथित नेटवर्क से जुड़ा है। जांच में करीब दो दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय कथित गिरोहों का भी उल्लेख हुआ है।

    पुलिस ने बड़ा कन्ना के खिलाफ लगभग 20 पुराने मारपीट और वसूली से जुड़े मामलों का उल्लेख किया है। पूरे कथित नेटवर्क के खिलाफ 24 से अधिक पुराने मामलों का पुलिस दावा भी सामने आया है। इन मामलों का वास्तविक स्वरूप और वर्तमान कानूनी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।

    MCOCA के तहत कार्रवाई क्यों?

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ MCOCA की धाराएं 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज गंभीर मामलों और कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए इस कानून का इस्तेमाल किया गया।

    मामले में MCOCA लगाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने का भी उल्लेख सामने आया है। इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल एक मारपीट या कथित वसूली की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस कथित संगठित अपराध के पैटर्न की भी जांच कर रही है।

    कथित वसूली से कारोबारियों और कामगारों पर असर

    इस मामले में पुलिस के दावों की पुष्टि होने पर कंपनियों और निर्माण व्यावसायिकों के लिए काम शुरू करने के दौरान अनधिकृत दबाव और धमकी का जोखिम महत्वपूर्ण जांच का विषय बनता है। इसी तरह, माथाडी व्यवस्था का नाम कथित तौर पर इस्तेमाल होने से वास्तविक माथाडी कामगारों और पंजीकृत यूनियनों की पहचान को लेकर भी सवाल उठते हैं।

    पुलिस ने माथाडी यूनियनों से कामगारों के पूर्ववृत्त और संबंधित पहचान की जांच करने का आग्रह करने की बात कही है। यह कदम कथित गैरकानूनी वसूली को रोकने और वैध कामगार व्यवस्था की पहचान स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सात गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने चार फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच की चुनौती है। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि वसूली की रकम किस तरह ली जाती थी, कितनी कंपनियों से पैसे मांगे गए और क्या अन्य कारोबारी भी शिकायत दर्ज कराने आगे आएंगे।

    मामले में कार और सोने के आभूषणों से जुड़े वित्तीय जांच के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, कुल बरामदगी, रकम और संपत्तियों की पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

    अंधेरी MIDC में कथित माथाडी वसूली नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार चार आरोपी फरार हैं और मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। गिरफ्तार आरोपियों को दोषी साबित होने तक कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है।

  • मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के मालवणी में धारदार हथियार से पांच लोगों पर हमला। 16 वर्षीय किशोर की मौत और अन्य लोगों के घायल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित मालवणी इलाके में शुक्रवार को धारदार हथियार से लगातार कई लोगों पर हमले की घटना सामने आई। पुलिस के अनुसार, हमले में पांच लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें 16 वर्षीय एक किशोर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हमले के पीछे की वजह की जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान आरोपी ने बिना किसी स्पष्ट उकसावे के लोगों पर चाकू से वार किए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    पहले पानी मांगा, फिर किशोर पर किया हमला

    घटना से जुड़े शुरुआती घटनाक्रम में सामने आया है कि शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे एक युवक न्यू कलेक्टर कंपाउंड में एक घर के दरवाजे पर पहुंचा और पानी मांगा। घर के 14 वर्षीय लड़के ने उसे पानी दिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से वार कर दिया।

    घायल किशोर को तत्काल कांदिवली के भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (शताब्दी) अस्पताल ले जाया गया। उसके गले पर करीब 15 टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई और शुरुआती स्थिति में उसकी हालत स्थिर बताई गई थी।

    इसके बाद आरोपी के दोपहर में दोबारा न्यू कलेक्टर कंपाउंड के प्लॉट नंबर 35 और गेट नंबर 7 के आसपास फिर हंगामा खड़ा कर दिया। वहां उसने एक अन्य युवक पर धारदार हथियार से हमला किया। इस दौरान आसपास मौजूद कुछ अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।

    हमले में 16 वर्षीय किशोर की मौत

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में पांच लोगों पर चाकू से हमला हुआ। इनमें 16 वर्षीय एक किशोर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है।

    स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा

    हमले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपी का पीछा किया और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है।

    आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर मुंबई में लोगों को निशाना बनाने के पीछे बदले की बात कही है। हालांकि इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और हमले का वास्तविक मकसद अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।

    “बंगाली” होने की पुष्टि नहीं

    घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आरोपी को “बंगाली” बताए जाने की बात सामने आई, लेकिन उपलब्ध पुलिस-सूत्र आधारित जानकारी में आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है। उसकी पहचान या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर उसे “बंगाली” कहा जा सके।

    मालवणी पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस आरोपी की गतिविधियों, हमले के क्रम और उसके कथित मकसद की पड़ताल कर रही है। हमले में घायल लोगों की स्थिति तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी जांच के साथ स्पष्ट होगी।

  • SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Mumbai से Bangladesh भेजने के आरोप पर Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा। जानिए पूरा मामला।

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की Sahida Fakir को मुंबई से Bangladesh भेजे जाने के मामले में Supreme Court ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। Sahida के बेटे Sahin Fakir ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी मां को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

    Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से Senior Advocate S. Muralidhar पेश हुए। मामला Sahin Fakir v. Union of India & Ors., WP(Crl) No. 372/2026 के रूप में सामने आया है।

    याचिका में Sahida Fakir को भारतीय नागरिक बताया गया है। उनके बेटे के अनुसार उनका स्थायी संबंध उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के Gobindapur से है। परिवार का कहना है कि उनके दादा Badshah Gazi का नाम 1952 की मतदाता सूची में और माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं।

    Sahida करीब 20 साल पहले अपने पति के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थीं और यहां घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। याचिका के अनुसार 19 जुलाई 2026 को कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें मुंबई में अपने साथ ले गए। उन्हें Chembur के एक holding centre में रखा गया और उनका Aadhaar कार्ड तथा मोबाइल फोन भी कथित तौर पर ले लिया गया।

    परिवार का आरोप है कि Sahida को 100 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी Judicial Magistrate के सामने पेश नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें हिरासत के आधार की जानकारी और परिवार से संपर्क का प्रभावी अवसर नहीं मिला।

    इसके बाद Sahida को Border Security Force (BSF) को सौंपे जाने और करीब 20 अन्य लोगों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर ले जाकर Bangladesh सीमा के पार भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद Sahida ने Bangladesh में अपनी मौजूदगी की जानकारी परिवार तक पहुंचाई और फिलहाल अस्थायी मानवीय आश्रय में रह रही हैं।

    SIR में नाम हटने का मामला क्या है?

    Sahida के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर है। याचिका के अनुसार Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।

    परिवार का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होने का फैसला नहीं है। Supreme Court ने भी 17 जुलाई 2026 को West Bengal SIR से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि electoral roll से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता खत्म होना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार Election Commission के पास नहीं है।

    यही बिंदु Sahida Fakir की याचिका में भी महत्वपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि उनकी नागरिकता पर अंतिम निर्णय हुए बिना और SIR से नाम हटाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें Bangladesh भेज दिया गया।

    परिवार ने कौन से दस्तावेज बताए?

    याचिका में Sahida की भारतीय पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के समर्थन में कई दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुराने electoral records के अलावा पहचान और नागरिक दस्तावेज शामिल हैं।

    पहले सामने आए दस्तावेजों में 2008 का voter identity card, 1988 का birth certificate, school certificate और Gobindapur में जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों को अधिकारियों के सामने रखा गया था।

    हालांकि, इन दस्तावेजों का उल्लेख याचिका और परिवार के दावों के संदर्भ में है। Supreme Court ने अभी Sahida की नागरिकता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

    याचिका में deportation प्रक्रिया पर भी सवाल

    Sahida के बेटे की याचिका केवल उनकी मां को वापस लाने तक सीमित नहीं है। इसमें 2 मई 2025 को जारी उस Standard Operating Procedure (SOP) को भी चुनौती दी गई है, जो कथित अवैध Bangladeshi nationals और Rohingya के deportation की प्रक्रिया से संबंधित है।

    याचिका में Immigration and Foreigners Order, 2025 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी मानकर देश से बाहर भेजने से पहले उसकी nationality की उचित verification और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

    याचिका में विशेष रूप से SOP के Para 9(iv) और Immigration and Foreigners Order, 2025 के Para 12(4)(C) के बीच प्रक्रिया संबंधी अंतर का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि Sahida के मामले में nationality verification और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    Supreme Court ने अभी क्या आदेश दिया है?

    इस स्तर पर Supreme Court ने केवल केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि Sahida भारतीय नागरिक हैं, उनका Bangladesh भेजा जाना अवैध था या उन्हें तत्काल भारत वापस लाने का अंतिम आदेश दिया गया है।

    अदालत के सामने फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप, Sahida की कथित हिरासत और सीमा पार भेजे जाने की परिस्थितियां तथा nationality verification से जुड़े कानूनी सवाल हैं। केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

    SIR से जुड़े मामलों में पहले भी Supreme Court ने उठाए सवाल

    Sahida Fakir का मामला ऐसे समय Supreme Court पहुंचा है जब West Bengal में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं। 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया गया था कि SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और जिन्होंने नाम बहाल करने की मांग की थी।

    Supreme Court पहले ही यह अंतर स्पष्ट कर चुका है कि electoral roll में नाम होना या हटना और किसी व्यक्ति की citizenship का अंतिम निर्धारण दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। Sahida Fakir मामले में अब यही सवाल और गंभीर रूप से सामने आया है कि किसी व्यक्ति की nationality पर विवाद होने की स्थिति में उसे देश से बाहर भेजने से पहले कौन-सी verification और procedural safeguards लागू होंगे।

    अब केंद्र के जवाब पर नजर

    Supreme Court के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को Sahida Fakir की हिरासत, nationality verification, Bangladesh भेजे जाने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे किस तरह की सुनवाई और राहत पर विचार किया जाना है।

    फिलहाल Sahida Fakir की वापसी की मांग Supreme Court के सामने लंबित है और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

  • कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में NCR के बाद दस्तावेज और डेवलपर बदलाव पर सवाल

    कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में NCR के बाद दस्तावेज और डेवलपर बदलाव पर सवाल

    कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में धमकी के आरोप पर NCR दर्ज हुआ। पुराने SRA रिकॉर्ड, डेवलपर बदलाव और Annexure-II पर उठे सवालों की पड़ताल।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम के गांधी नगर क्षेत्र की SRA योजना को लेकर विवाद अब धमकी के आरोप और पुलिस NCR तक पहुंच गया है। समाजसेवक महबूब ए. शाह को कथित तौर पर जान से मरवा देने की धमकी दिए जाने के मामले में 9 सितंबर 2026 को सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज किया गया है। विवाद की पृष्ठभूमि में SRA योजना में कथित दस्तावेजी अनियमितताओं और पात्रता के आधार पर पुनर्वसन फ्लैट मिलने से जुड़े गंभीर सवाल हैं।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गांधी नगर की संबंधित SRA योजना के पुराने और बाद के सार्वजनिक रिकॉर्ड में डेवलपर तथा CTS विवरण में अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध SRA project record में Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) के लिए 2 मई 2016 की LOI दर्ज है और उस समय डेवलपर के रूप में M/s Hari Om Developer का नाम सामने आता है। वहीं 2025 के आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम दर्ज है।

    यही बदलाव अब इस पूरे विवाद का एक अहम दस्तावेजी सवाल बन गया है कि डेवलपर में यह परिवर्तन कब, किस प्रक्रिया के तहत और किस SRA आदेश के आधार पर हुआ।

    गांधी नगर SRA योजना का पुराना रिकॉर्ड क्या बताता है?

    SRA project record के अनुसार Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) का proposal number R-S/MHADA&PVT/0002/20060509 दर्ज है। रिकॉर्ड में योजना को Active status के साथ दिखाया गया है और 2 मई 2016 की LOI का reference SRA/ENG/1406/RS/STGL/PL/LOI दिया गया है। इस entry में M/s Hari Om Developer को developer और Shri Vivek Bhole Architect Pvt. Ltd./Neo Modern को architect के रूप में दर्ज किया गया है।

    बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में इसी नाम से जुड़ी गांधी नगर SRA योजना के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। 13 जून 2025 के Apex Grievance Redressal Committee के cause list record में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) और Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. बनाम CEO/SRA, Competent Authority-7/SRA तथा Assistant Registrar/SRA के बीच Appeal (L) No. 07 of 2025 दर्ज है।

    इससे यह स्पष्ट है कि गांधी नगर SRA योजना से जुड़ा विवाद केवल स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रहा है। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इस न्यायिक कार्यवाही को अपने आप में भ्रष्टाचार का मामला नहीं कहा जा सकता

    डेवलपर और CTS रिकॉर्ड में अंतर क्यों?

    पुराने SRA record में योजना से जुड़े कई CTS numbers दर्ज हैं, जिनमें CTS 486(Pt), 487 से 490, 492 से 494, 495(Pt), 497, 498(Pt), 499, 500 से 509, 512, 513(Pt), 514, 515, 518(Pt), 536, 538, 539, 543(Pt) और 738(Pt) शामिल हैं।

    वहीं 2025 के न्यायिक रिकॉर्ड में CTS 98(Pt), 737(Pt), 738(Pt), 739, 740, 741, 755(Pt), 756(Pt), 757(Pt), 759(Pt), 761, 762 और 763 का उल्लेख मिलता है।

    CTS विवरण में यह अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। SRA योजना में संशोधन, जमीन के पुनर्गठन, CTS बदलाव, अलग हिस्सों के समावेश या revised proposal जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन इन बदलावों का आधिकारिक कारण SRA के संबंधित आदेशों और revised records से स्पष्ट होना जरूरी है।

    यही वह बिंदु है जहां गांधी नगर SRA विवाद में दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

    फर्जी दस्तावेजों के आरोप की जांच कैसे होगी?

    मामले में स्थानीय रहवासियों और समाजसेवक महबूब ए. शाह की ओर से आरोप लगाया गया है कि गरीब परिवारों को SRA योजना में फ्लैट दिलाने के भरोसे के साथ कथित तौर पर allotment letters, आदेश प्रतियां, Collector office से जुड़े दस्तावेज, सक्षम प्राधिकारी के पत्र, society NOC, बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड दिखाए जा रहे हैं।

    इन दस्तावेजों की वास्तविकता का फैसला आरोप के आधार पर नहीं किया जा सकता। प्रत्येक दस्तावेज को उस विभाग के मूल रिकॉर्ड से मिलाना होगा जिसने उसे जारी किया है।

    SRA मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज Annexure-II है। SRA की व्यवस्था में survey और document verification के बाद eligibility तय करने की प्रक्रिया Annexure-II से जुड़ी है। इसलिए किसी व्यक्ति के पास कोई पत्र या अन्य supporting document होना अपने आप में SRA rehabilitation eligibility का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    किसी दावे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए survey record, Annexure-II, eligibility determination, Competent Authority record और allotment से जुड़े दस्तावेजों के बीच समानता देखना जरूरी होगा।

    धमकी के आरोप के बाद पुलिस NCR

    एक प्रकाशित खबर को लेकर समाजसेवक महबूब ए. शाह और सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के बीच विवाद सामने आया। आरोप है कि चौधरी की ओर से गाली-गलौज के साथ महबूब ए. शाह को जान से मरवा देने की धमकी दी गई।

    महबूब ए. शाह ने इसकी सूचना कांदिवली पुलिस स्टेशन को दी। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 9 सितंबर 2026 को शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज की गई। NCR में BNS 351(3) और 352 से संबंधित प्रावधान दर्ज किए गए हैं।

    SRA योजना में अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    गांधी नगर मामले में अब केवल यह सवाल नहीं है कि महबूब ए. शाह को धमकी क्यों दी गई। उससे बड़ा सवाल यह है कि जिस SRA योजना को लेकर दस्तावेजों और पात्रता पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी आधिकारिक रिकॉर्ड श्रृंखला क्या कहती है।

    2016 के उपलब्ध SRA record में Hari Om Developer का नाम है, जबकि 2025 के न्यायिक record में Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। इसी तरह पुराने और बाद के रिकॉर्ड में CTS विवरण भी अलग दिखाई देते हैं।

    इसलिए संबंधित दस्तावेजों से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि developer में बदलाव हुआ था या scheme structure में कोई अन्य संशोधन हुआ, वह कब हुआ, किस authority ने मंजूर किया और उसके पीछे कौन-सा official order है।

    रहवासियों पर क्या पड़ सकता है असर?

    SRA योजना में eligibility या supporting documents को लेकर विवाद लंबा खिंचने पर वास्तविक पात्र परिवारों के rehabilitation process पर असर पड़ सकता है। दस्तावेजों की जांच में किसी दावे में कमी मिलने पर संबंधित व्यक्ति की पात्रता पर सवाल उठ सकता है, जबकि genuine beneficiaries के लिए भी redevelopment और rehabilitation की प्रक्रिया विवादित होने से लंबी हो सकती है।

    इसी कारण SRA योजना में survey record और Annexure-II से लेकर allotment तथा rehabilitation status तक दस्तावेजों की स्पष्टता महत्वपूर्ण होती है।

    अब आगे क्या?

    गांधी नगर SRA विवाद में अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच है। विशेष रूप से 2016 की LOI, उसके बाद के revised orders, developer appointment या change से जुड़े दस्तावेज, latest Annexure-II, Competent Authority के रिकॉर्ड और Appeal (L) No. 07 of 2025 से संबंधित आदेश इस पूरे मामले की स्थिति को अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।

    साथ ही कथित दस्तावेजों को उनके संबंधित सरकारी विभागों के मूल रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी होगा। जब तक यह verification पूरा नहीं होता, फर्जी दस्तावेजों के आरोप को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    गांधी नगर SRA योजना में उठे ये सवाल अब केवल एक NCR तक सीमित नहीं हैं। असली जवाब उन सरकारी रिकॉर्ड में छिपा है जो यह बताएंगे कि योजना में पात्रता, सोसाइटी की भूमिका, डेवलपर की स्थिति और पुनर्वसन से जुड़े दस्तावेज वास्तव में एक-दूसरे से कितने मेल खाते हैं।

  • Mumbai Cyber Fraud: Facebook-Instagram Ads से 3 लोगों ने गंवाए ₹7.55 लाख

    Mumbai Cyber Fraud: Facebook-Instagram Ads से 3 लोगों ने गंवाए ₹7.55 लाख

    मुंबई में Facebook-Instagram Ads, Fake Calls, Job Offer और APK के जरिए तीन लोगों से ₹7.55 लाख की ठगी हुई। जानें Scam का तरीका और बचाव के उपाय।

    मुंबई: Facebook और Instagram पर दिखने वाले Ads और Social Media Posts को आधार बनाकर तीन अलग-अलग मामलों में एक कारोबारी, होटल का वेटर और एक सेल्समैन से कुल ₹7,55,734 की साइबर ठगी सामने आई है। तीनों मामलों में ठगी का तरीका अलग था, लेकिन एक बात समान रही—पहले सोशल मीडिया के जरिए भरोसा बनाया गया और उसके बाद Fake Call, WhatsApp, Personal Details या APK File के जरिए पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

    इन मामलों में 58 वर्षीय Andheri निवासी कारोबारी Ketan Shah से ₹3,34,534, होटल में काम करने वाले Ramesh Singh Anand Singh Asnal से ₹2,41,200 और मॉल में सेल्समैन Salim Ibrahim Patel से ₹1,80,000 की ठगी हुई।

    Facebook पर Credit Card Ad, फिर Fake HSBC Customer Care Call

    58 वर्षीय कारोबारी Ketan Shah ने Facebook पर HSBC Credit Card से संबंधित एक Advertisement देखा। Advertisement पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपना नाम और मोबाइल नंबर दिया।

    14 अगस्त को उन्हें Rahul नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को HSBC Customer Care Executive बताया। कॉल के दौरान उन्हें एक Link भेजा गया और मौजूदा Bank Cards की जानकारी देने को कहा गया।

    Shah ने IndusInd Bank और ICICI Bank से संबंधित Card Details दर्ज कीं। इसके कुछ ही समय बाद उनके IndusInd Bank Account से ₹3,34,534 निकाल लिए गए।

    Transaction के बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। दोबारा फोन चालू करने पर उन्हें Transaction Alerts मिले। उन्होंने तुरंत Card Block कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    यह मामला दिखाता है कि Credit Card या Banking Service का नाम इस्तेमाल करने वाला कोई भी Caller अपने आप वास्तविक Bank Executive नहीं बन जाता। Social Media Advertisement पर दिया गया Mobile Number बाद में Social Engineering के लिए इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी पैदा करता है।

    Dubai Job के नाम पर होटल वेटर से ₹2.41 लाख

    दूसरे मामले में होटल वेटर Ramesh Singh Anand Singh Asnal विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे थे। उन्होंने Celebrity Chef Shubham Rawat से जुड़ी एक पोस्ट Instagram और Facebook पर देखी और नौकरी की उम्मीद में Comment Section में अपना Mobile Number डाल दिया।

    27 अगस्त को उन्हें WhatsApp पर Sohan Bhandari नाम के व्यक्ति का Call आया। उसने दावा किया कि Chef Shubham Rawat ने उनका नंबर उसे दिया है और Dubai में नौकरी की व्यवस्था हो गई है।

    इसके बाद Visa Processing, Medical Test और Offer Letter के नाम पर पैसे मांगे गए। Asnal ने 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच 18 अलग-अलग Transactions में कुल ₹2,41,200 भेज दिए।

    जब नौकरी का Offer Letter नहीं आया और संपर्क भी बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का पता चला। जांच में सामने आया कि Shubham Rawat का इस ठगी से कोई संबंध नहीं था। कथित तौर पर उनकी Profile Photograph का इस्तेमाल Fake WhatsApp Account बनाकर भरोसा कायम करने के लिए किया गया था। पुलिस ने Sohan Bhandari बनकर संपर्क करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

    इस मामले में सबसे बड़ा खतरा Social Media Impersonation का है। किसी व्यक्ति की Profile Photo, नाम या किसी परिचित की पहचान का इस्तेमाल होने से यह साबित नहीं होता कि WhatsApp Account वास्तव में उसी व्यक्ति का है।

    Instagram पर ICICI Credit Card Ad, WhatsApp से आया APK

    तीसरे मामले में मॉल में काम करने वाले Salesman Salim Ibrahim Patel ने Instagram पर ICICI Bank Credit Card का Advertisement देखा। Credit Card की जरूरत होने के कारण उन्होंने Advertisement पर Click किया।

    अगली सुबह एक Unknown Number से Call आया। Caller ने खुद को ICICI Credit Card Department का कर्मचारी बताया और कहा कि KYC Process पूरी करनी होगी।

    इसके बाद WhatsApp पर “ICICI CREDIT CARD.apk” नाम की File भेजी गई। Patel को इसे Open करने और PAN Card तथा मौजूदा SBI Credit Card की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया।

    निर्देशों का पालन करने के कुछ ही मिनट बाद उनके SBI Credit Card से दो Transactions के जरिए ₹1,80,000 निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले में Unknown Cyber Fraudster के खिलाफ जांच चल रही है।

    Social Media Ad से WhatsApp तक पहुंच रहा है Scam

    इन तीनों मामलों को साथ देखने पर ठगी का एक स्पष्ट Pattern सामने आता है।

    Facebook या Instagram पर Ad या Post दिखाई देता है। User किसी जरूरत के कारण उस पर प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद Mobile Number या अन्य जानकारी के जरिए संपर्क बनाया जाता है। फिर Scammer Bank Executive, Recruiter या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान इस्तेमाल करता है। बातचीत अक्सर WhatsApp तक पहुंचती है और यहीं से Payment, Card Details, PAN Details या App Installation के जरिए ठगी आगे बढ़ती है।

    यानी Scam की शुरुआत हमेशा पैसे मांगने से नहीं होती। कई बार शुरुआत केवल Mobile Number, Comment या Credit Card Enquiry से होती है।

    APK File को लेकर क्यों बढ़ी चिंता

    “ICICI CREDIT CARD.apk” जैसे नाम से भेजी गई File सामान्य KYC प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानी जानी चाहिए। खासकर जब कोई Unknown Caller WhatsApp पर APK भेजकर उसे Install करने के लिए कहे।

    सितंबर 2026 में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से Malicious Android Applications के जरिए Financial Fraud बढ़ने को लेकर चेतावनी सामने आई थी। Facebook और Instagram पर ऐसे Advertisements के जरिए Users को Suspicious Websites और APK Files तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई। कुछ Malicious Apps Device Accessibility Permissions का दुरुपयोग करके Smartphone पर नियंत्रण हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं।

    देश भर में APK आधारित ठगी के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी Bank, Credit Card, KYC, Pension या Refund के नाम पर WhatsApp से भेजी गई APK File को Install करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

    मुंबई में Online Fraud का कितना बड़ा खतरा है

    मुंबई में 2026 के पहले सात महीनों में 3,689 Online Fraud Cases दर्ज किए गए। इनमें Credit Card और अन्य Digital Fraud के 914 मामले सबसे बड़े दर्ज किए गए Categories में रहे। इन 914 मामलों में 142 मामलों का Detection हुआ और 81 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

    इसी अवधि में Fake Social Media Profiles और Email/SMS Morphing से जुड़े 136 मामले तथा Phishing, Man-in-the-Middle और Spoofing से जुड़े 103 मामले दर्ज हुए। Job Fraud के 70 और Fake Websites के 72 मामले भी सामने आए। कुल 3,689 मामलों में 847 मामलों का Detection और 637 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।

    इन आंकड़ों के बीच Facebook-Instagram से जुड़े मौजूदा मामले यह दिखाते हैं कि Cyber Fraud अब केवल Unknown Phone Calls तक सीमित नहीं है। Social Media Advertising, Fake Profiles, Messaging Apps और Digital Payment Systems एक ही Fraud Chain का हिस्सा बन सकते हैं।

    2,898 SIM Cards और ₹24 करोड़ के Transaction का जांच कनेक्शन

    मुंबई पुलिस की Crime Branch ने सितंबर में एक अलग Cyber Fraud Network की जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में 2,898 SIM Cards और 10 Bank Accounts के जरिए करीब ₹24 करोड़ के Transactions का Financial Trail सामने आया। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि इन Transactions के अंतिम Beneficiaries कौन थे और नेटवर्क कितना बड़ा था।

    यह मामला मौजूदा तीन ठगी की घटनाओं से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन इससे यह समझ आता है कि Cyber Fraud में इस्तेमाल होने वाले Phone Numbers, SIM Cards और Bank Accounts के पीछे अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।

    अगर Social Media Scam में पैसा कट जाए तो तुरंत क्या करें ?

    Cyber Fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण है। पैसा कटने के बाद सबसे पहले Bank या Card Issuer को तुरंत सूचना देकर Card या संबंधित Account को सुरक्षित कराना चाहिए।

    इसके बाद Financial Cyber Fraud की शिकायत के लिए 1930 Helpline पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है और National Cyber Crime Reporting Portal पर Complaint दर्ज की जा सकती है।

    Caller का Mobile Number, WhatsApp Chat, Advertisement का Screenshot, Website Link, APK का नाम, Transaction ID, Bank Alert और अन्य उपलब्ध Evidence सुरक्षित रखना चाहिए। इन्हें Delete करने के बजाय जांच के लिए सुरक्षित रखना अधिक उपयोगी है।

    यदि किसी संदिग्ध APK को Install किया गया है, तो उस Device से आगे Banking Activity करने से बचना और Device तथा संबंधित Accounts की Security जांच कराना जरूरी है।

    सिर्फ अपना पैसा नहीं, Scammer की जानकारी भी Report करें

    National Cyber Crime Reporting Portal पर Suspicious Phone Numbers, WhatsApp Numbers, Telegram Handles, Email IDs, URLs और Social Media Accounts से संबंधित जानकारी Report करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    इसलिए किसी Scam का सामना होने पर केवल Transaction Dispute तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध Digital Evidence के साथ संदिग्ध Number, Account या Link की भी जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

    Social Media पर Cyber Fraud से बचने के 7 जरूरी नियम

    1. Facebook या Instagram पर दिखाई देने वाले Advertisement को केवल Platform पर मौजूद होने के आधार पर Genuine न मानें।
    2. Bank या Credit Card के नाम पर आए Call पर Card Number, CVV, PIN या अन्य Sensitive Details साझा न करें।
    3. WhatsApp पर Unknown Number से भेजी गई APK File Install न करें।
    4. Job के नाम पर Visa, Medical या Processing Fee मांगने वाले व्यक्ति की पहचान और Employer को अलग माध्यम से Verify करें।
    5. किसी Celebrity, Chef, Businessman या परिचित व्यक्ति की Profile Photo को Identity Proof न मानें।
    6. Social Media Comment Section में अपना Mobile Number और अन्य Personal Information सार्वजनिक रूप से देने से बचें।
    7. Fraud होने पर Bank को तुरंत सूचना दें और 1930 पर जल्द से जल्द शिकायत करें।

    Facebook और Instagram पर शुरू हुई इन तीन घटनाओं में कुल ₹7.55 लाख का नुकसान हुआ है। मामलों की जांच जारी है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक स्पष्ट चेतावनी देता है—Social Media पर दिखने वाला Ad, WhatsApp Profile या फोन पर बताई गई पहचान अपने आप भरोसे का प्रमाण नहीं है। Cyber Fraud से बचने के लिए किसी भी Payment, KYC, Job Processing या App Installation से पहले स्वतंत्र Verification करना सबसे जरूरी कदम है।