अंधेरी में निर्माण कार्य पर बीएमसी कार्रवाई की धमकी देकर 3 लाख रुपये मांगने का आरोप है। 25 हजार लेते तीन आरोपी पुलिस के जाल में फंसे।
मुंबई: अंधेरी पूर्व में निर्माण कार्य पर बीएमसी कार्रवाई का डर दिखाकर एक बिल्डर से कथित तौर पर 3 लाख रुपये मांगने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद अंधेरी पुलिस ने जाल बिछाकर 25 हजार रुपये लेते समय संजय धोडामणी, प्रवीण सिंग और जीवन गुलाब पांडे को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इसी तरीके से दूसरे निर्माण व्यावसायिकों और कंपनियों से भी पैसे वसूले गए थे।
3 लाख रुपये की मांग, पहले 95 हजार देने का दावा
मामला अंधेरी पूर्व के ओल्ड नागरदास रोड इलाके का है, जहां एक निर्माण कंपनी का काम चल रहा था। आरोप है कि तीनों आरोपियों ने निर्माण कार्य के खिलाफ मुंबई महानगरपालिका में शिकायत करने और कार्रवाई करवाने की धमकी देकर पैसे की मांग की।
पुलिस शिकायत के अनुसार आरोपियों ने निर्माण कार्य रुकवाने और महानगरपालिका की कार्रवाई से बचाने के नाम पर 3 लाख रुपये मांगे थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मांग के तहत पहले 95 हजार रुपये दिए जा चुके थे।
इसके बाद मामले की जानकारी अंधेरी पुलिस को दी गई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

25 हजार रुपये लेते समय पुलिस ने पकड़ा
पुलिस की कार्रवाई के दौरान अंधेरी पूर्व रेलवे स्टेशन क्षेत्र के आरसा होटल में आरोपियों को 25 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया। तीनों के खिलाफ जबरन वसूली और धमकी से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
मामले में 3 लाख रुपये की कथित मांग, पहले दिए गए 95 हजार रुपये और जाल में पकड़े जाने के दौरान दिए जाने वाले 25 हजार रुपये के बीच पूरी रकम का क्रम भी जांच का हिस्सा है। इसलिए अब तक कितनी रकम वास्तव में वसूली गई, इसका अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
लेटरहेड से शिकायतें कराने की भी जांच
मामले की जांच अब केवल इस एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है। पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने कथित तौर पर किसी संगठन के नाम से तैयार लेटरहेड का इस्तेमाल कर निर्माण व्यावसायिकों और कंपनियों के खिलाफ महानगरपालिका तथा पुलिस अधिकारियों के पास शिकायतें कीं।
जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या पहले शिकायत या कार्रवाई का दबाव बनाया जाता था और उसके बाद संबंधित व्यक्ति से पैसे की मांग की जाती थी।
यदि इस आशंका की पुष्टि होती है तो मामला केवल एक बिल्डर से कथित वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंधेरी पूर्व, जोगेश्वरी और एमआईडीसी इलाके में इसी तरीके से अन्य लोगों को निशाना बनाए जाने की भी जांच करनी होगी।
क्या अन्य निर्माण व्यावसायिक भी निशाने पर थे?
पुलिस यह पता लगा रही है कि तीनों आरोपियों ने इससे पहले कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उनके खिलाफ महानगरपालिका या पुलिस में की गई अन्य शिकायतों के पीछे भी यही लोग थे।
जांच में कथित लेटरहेड, शिकायतों की प्रतियां, बातचीत और पैसों के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि शिकायतें वास्तविक नागरिक शिकायतों का हिस्सा थीं या कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं।
अंधेरी में वसूली के मामलों की पृष्ठभूमि
अंधेरी पूर्व में हाल के महीनों में कारोबारियों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को कथित तौर पर धमकाकर पैसे मांगने के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। सितंबर 2026 में एमआईडीसी क्षेत्र में कारोबारियों और कंपनियों से कथित वसूली के एक अलग मामले में संगठित अपराध के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई थी।
मुंबई में महानगरपालिका की कार्रवाई का डर दिखाकर कथित वसूली के अन्य मामले भी सामने आते रहे हैं। जुहू में अप्रैल 2026 में एक पूर्व सफाई मार्शल पर बीएमसी अधिकारी बनकर नवीनीकरण के मलबे के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगा था। यह मामला भी वर्तमान प्रकरण से अलग है, लेकिन नागरिक निकाय की कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगने के तरीके की गंभीरता को सामने लाता है।
बीएमसी शिकायत की सच्चाई भी जांच का अहम हिस्सा
इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि जिस निर्माण कार्य के खिलाफ शिकायत करने की धमकी दी गई थी, उसके संबंध में वास्तव में बीएमसी में कोई शिकायत की गई थी या नहीं।
जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत कब की गई, किस विभाग में की गई, उसमें क्या आरोप लगाए गए और उसके बाद महानगरपालिका ने कोई निरीक्षण या कार्रवाई की थी या नहीं।
अगर शिकायत और कथित पैसे की मांग के बीच कोई सीधा संबंध सामने आता है तो जांच को यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि महानगरपालिका की शिकायत प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए किया गया था या नहीं।
मकोका की मांग पर अंतिम फैसला जांच के बाद
निर्माण क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों ने आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका दावा है कि आरोपियों के खिलाफ पहले भी गंभीर मामले दर्ज हैं।
हालांकि, केवल पुराने मामलों के आरोप या एक नए वसूली प्रकरण के आधार पर मकोका स्वतः लागू नहीं होता। इसके लिए कानून में निर्धारित शर्तों और लगातार संगठित आपराधिक गतिविधि से जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी है। इसलिए इस मामले में मकोका लगाने का फैसला जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी मानदंडों के आधार पर ही होगा।
पुलिस की जांच अब किस दिशा में?
अंधेरी पुलिस अब तीनों आरोपियों की कथित भूमिका के अलावा यह पता लगाने में जुटी है कि उनके साथ और कौन लोग जुड़े थे, कथित संगठन या लेटरहेड का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था और क्या इसी तरीके से दूसरे निर्माण व्यावसायिकों या कंपनियों से भी पैसे मांगे गए थे।
फिलहाल इस मामले में तीनों आरोपी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में हैं और आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मामला एक निर्माण परियोजना से जुड़ी कथित वसूली तक सीमित था या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।
