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कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से 200 किलो की लोहे की बीम पुलिस कार्यालय के सामने गिरी। पहले भी निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत थी, 4 पर केस दर्ज।
मुंबई: कांजुरमार्ग में निर्माणाधीन इमारत की 13वीं मंजिल से करीब 200 किलो वजनी लोहे की बीम गिरने की घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीम सीधे कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन के एक्सटर्नमेंट विभाग के कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने गिरी। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय की टिन की छत और पास का पेड़ क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
यह घटना 18 सितंबर की दोपहर की है। एक्सटर्नमेंट विभाग में तैनात सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) विश्वास दशरथ देसाई उस समय कार्यालय में कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने भारी लोहे की बीम पड़ी मिली। बीम नीचे आने से पहले एक पेड़ और कार्यालय की टिन की छत से टकराई थी।
200 किलो की बीम के गिरने से पहले भी सामने आई थी समस्या
इस घटना को गंभीर बनाने वाली सबसे अहम बात यह है कि निर्माण स्थल से निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत पहले भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी पत्थर, गिट्टी और लोहे की रॉड आसपास गिर चुकी थीं। निर्माण स्थल के ठेकेदार को इस संबंध में पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है।
ऐसे में अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले की शिकायतों और चेतावनी के बाद साइट पर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए थे। यह भी जांच का विषय है कि इतनी भारी बीम 13वीं मंजिल से नीचे गिरने की स्थिति तक कैसे पहुंची और उस समय उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।
ठेकेदार, इंजीनियर और दो सेफ्टी सुपरवाइजर पर केस
पुलिस ने KAMS Realtor से जुड़े साइट ठेकेदार मितेश जैन, साइट इंजीनियर धनराज रामचंद्र जगताप और सेफ्टी सुपरवाइजर विक्रम तथा सोहेल मिर्जा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लोगों की जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने घटना के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर बीम के निर्माण स्थल से गिरने की पुष्टि की गई। हालांकि बीम के गिरने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है।
जिस प्रोजेक्ट की 13वीं मंजिल से बीम गिरी, उसका RERA रिकॉर्ड
सार्वजनिक रियल एस्टेट रिकॉर्ड में KAMS Realtors का Kams Krystel प्रोजेक्ट कांजुरमार्ग ईस्ट के Purshotam Godbole Road पर दर्ज है और इसका MahaRERA registration number P51800051412 है। परियोजना अभी निर्माणाधीन दर्ज है और इसके लिए 31 दिसंबर 2026 की completion date दर्ज है। RERA-derived रिकॉर्ड में प्रोजेक्ट के लिए Ground + 24 Floor संरचना दर्ज है।
रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि इस प्रोजेक्ट से संबंधित MahaRERA में CC12501288 नंबर की एक शिकायत 17 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी और वह disposed/order approved स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं होता कि वह शिकायत निर्माण स्थल की सुरक्षा से संबंधित थी।
हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन खतरा गंभीर था
घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे और बीम कार्यालय के प्रवेश द्वार के ठीक सामने आकर गिरी। बीम का पेड़ और कार्यालय की छत से टकराना इस बात को महत्वपूर्ण बनाता है कि निर्माण स्थल से गिरने वाली सामग्री का जोखिम केवल वहां काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद कार्यालयों और लोगों तक भी पहुंच सकता है। इस मामले में किसी के घायल नहीं होने की पुष्टि है, जबकि कार्यालय की टिन की छत को नुकसान पहुंचा है।
मुंबई में निर्माण स्थलों से गिरने वाली भारी सामग्री को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में site barricading, material handling, ऊंचाई पर सामग्री की सुरक्षित व्यवस्था और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उपाय जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं।
अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम
कांजुरमार्ग की इस घटना में पुलिस जांच के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि बीम कैसे गिरी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले निर्माण सामग्री गिरने की शिकायतें कब-कब हुईं, ठेकेदार को किस तरह की चेतावनी दी गई, उसके बाद क्या सुरक्षा उपाय किए गए और घटना के समय साइट पर भारी सामग्री को संभालने की व्यवस्था क्या थी।
फिलहाल पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बीम गिरने की तकनीकी वजह, साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और पहले की शिकायतों के बाद उठाए गए कदमों से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अंधेरी MIDC में माथाडी यूनियन की आड़ में कथित वसूली के मामले में 7 गिरफ्तार, 4 फरार। MCOCA कार्रवाई और पुलिस जांच की पूरी जानकारी।
मुंबई: अंधेरी पूर्व MIDC में माथाडी कामगार यूनियन के नाम पर कंपनियों, कारोबारियों और निर्माण व्यावसायिकों से कथित प्रोटेक्शन मनी वसूलने के मामले में मुंबई पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चार अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र संघटित गुन्हेगारी नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है। जांच में कथित नेटवर्क की पहुंच अंधेरी से आगे पवई, गोरेगांव पूर्व और फिल्म स्टूडियो क्षेत्र तक होने की जानकारी सामने आई है।
ट्रेड स्टार इमारत में ₹10 लाख की कथित मांग
यह मामला 16 अगस्त को अंधेरी पूर्व के कोंडिविटा रोड स्थित ट्रेड स्टार इमारत में हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, पांचवीं मंजिल पर एक कंपनी के कार्यालय में नवीनीकरण का काम चल रहा था। वहां कुछ लोग पहुंचे और कथित तौर पर ₹10 लाख की प्रोटेक्शन मनी की मांग की। कार्यालय में पहले से काम कर रहे माथाडी कामगारों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है।
पुलिस के अनुसार, इस घटना में 27 वर्षीय माथाडी कामगार नदीम नसरुद्दीन शेख पर भी हमला हुआ। 17 अगस्त को MIDC पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि लकड़ी के डंडों से उसके सिर और पैरों पर वार किया गया। इसी हमले के बाद पुलिस को कथित वसूली नेटवर्क का पता चला।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी किसी कंपनी में काम हासिल करने के बजाय वहां काम कर रहे श्रमिकों पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने का प्रयास करते थे। इस मामले में एक अन्य शिकायत के अनुसार, नदीम शेख से काम जारी रखने की अनुमति के बदले ₹20,000 प्रति माह मांगने का आरोप है।
अलग-अलग घटनाओं से संबंधित
इन दोनों रकमों को एक ही मांग मानना सही नहीं होगा। ट्रेड स्टार कार्यालय मामले में ₹10 लाख की कथित मांग का उल्लेख है, जबकि नदीम शेख से संबंधित मामले में ₹20,000 मासिक मांग का विवरण सामने आया है। वास्तविक वसूली और सभी संबंधित घटनाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
करीब 1,000 कंपनियों तक पहुंच का पुलिस दावा
पुलिस जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क की पहुंच करीब 1,000 MIDC कंपनियों तक होने की आशंका जताई गई है। कंपनियों से ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की कथित मांग और निर्माण व्यावसायिकों से प्रोजेक्ट के आकार के आधार पर ₹120 प्रति वर्ग फुट तक वसूली के दावे भी सामने आए हैं।
हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियों से वसूली साबित हो चुकी है। पुलिस को अब यह पता लगाना है कि कितने कारोबारी वास्तव में इस कथित नेटवर्क के संपर्क में आए, कितनों से पैसे मांगे गए और कितने लोगों ने शिकायत दर्ज कराई।
जांच में अंधेरी MIDC के अलावा पवई के कार्यालयों, गोरेगांव पूर्व के फिल्म स्टूडियो और SEEPZ क्षेत्र का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कथित गिरोह उन कंपनियों पर नजर रखता था जहां नया काम शुरू होने वाला हो।
अंधेरी SEEPZ क्षेत्र में करीब 450 कंपनियां और कार्यालय तथा MIDC क्षेत्र में लगभग 350 कंपनियां होने की जानकारी जांच में सामने आई है। यह औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए मामले की संभावित व्यापकता को समझा जा सकता है।
माथाडी व्यवस्था और कथित गैरकानूनी वसूली में अंतर
माथाडी व्यवस्था महाराष्ट्र माथाडी, हमाल तथा अन्य मैनुअल कामगार (रोजगार और कल्याण का विनियमन) अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होती है। इसका उद्देश्य असुरक्षित मैनुअल कामगारों के रोजगार और कल्याण को विनियमित करना है।
माथाडी व्यवस्था में मुकादम श्रमिकों की टोली का नेतृत्व करता है। कंपनियां काम की जरूरत के अनुसार संबंधित व्यवस्था के माध्यम से कामगारों की सेवाएं लेती हैं। इस व्यवस्था का नाम इस्तेमाल कर किसी कंपनी पर कथित धमकी या अवैध वसूली करना एक अलग आपराधिक आरोप है।
सात आरोपी गिरफ्तार, चार फरार
MIDC पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
पूरण अरुण सिंह उर्फ चड्डा
रोहित मधुकर साळुंखे
इमरान बसुद्दीन हवाळदार
सुरेश गुलाबचंद गौड उर्फ किसान
आकाश मानसिंग सिंह उर्फ नेपाली
राजकुमार सेल्वन मुन्नुस्वामी उर्फ लाला
अर्जुन मुनियन मुथु उर्फ डाकू पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना समेत चार आरोपी फरार हैं। वन्नियार को कथित नेटवर्क का प्रमुख बताया गया है।
बड़ा कन्ना और छोटा कन्ना कि हो राही है जांच
पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना और उसके भाई कन्नन स्वामी उर्फ छोटा कन्ना का नाम कथित नेटवर्क से जुड़ा है। जांच में करीब दो दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय कथित गिरोहों का भी उल्लेख हुआ है।
पुलिस ने बड़ा कन्ना के खिलाफ लगभग 20 पुराने मारपीट और वसूली से जुड़े मामलों का उल्लेख किया है। पूरे कथित नेटवर्क के खिलाफ 24 से अधिक पुराने मामलों का पुलिस दावा भी सामने आया है। इन मामलों का वास्तविक स्वरूप और वर्तमान कानूनी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।
MCOCA के तहत कार्रवाई क्यों?
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ MCOCA की धाराएं 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज गंभीर मामलों और कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए इस कानून का इस्तेमाल किया गया।
मामले में MCOCA लगाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने का भी उल्लेख सामने आया है। इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल एक मारपीट या कथित वसूली की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस कथित संगठित अपराध के पैटर्न की भी जांच कर रही है।
इस मामले में पुलिस के दावों की पुष्टि होने पर कंपनियों और निर्माण व्यावसायिकों के लिए काम शुरू करने के दौरान अनधिकृत दबाव और धमकी का जोखिम महत्वपूर्ण जांच का विषय बनता है। इसी तरह, माथाडी व्यवस्था का नाम कथित तौर पर इस्तेमाल होने से वास्तविक माथाडी कामगारों और पंजीकृत यूनियनों की पहचान को लेकर भी सवाल उठते हैं।
पुलिस ने माथाडी यूनियनों से कामगारों के पूर्ववृत्त और संबंधित पहचान की जांच करने का आग्रह करने की बात कही है। यह कदम कथित गैरकानूनी वसूली को रोकने और वैध कामगार व्यवस्था की पहचान स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
सात गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने चार फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच की चुनौती है। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि वसूली की रकम किस तरह ली जाती थी, कितनी कंपनियों से पैसे मांगे गए और क्या अन्य कारोबारी भी शिकायत दर्ज कराने आगे आएंगे।
मामले में कार और सोने के आभूषणों से जुड़े वित्तीय जांच के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, कुल बरामदगी, रकम और संपत्तियों की पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
अंधेरी MIDC में कथित माथाडी वसूली नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार चार आरोपी फरार हैं और मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। गिरफ्तार आरोपियों को दोषी साबित होने तक कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है।
मुंबई के मालवणी में धारदार हथियार से पांच लोगों पर हमला। 16 वर्षीय किशोर की मौत और अन्य लोगों के घायल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार।
मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित मालवणी इलाके में शुक्रवार को धारदार हथियार से लगातार कई लोगों पर हमले की घटना सामने आई। पुलिस के अनुसार, हमले में पांच लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें 16 वर्षीय एक किशोर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हमले के पीछे की वजह की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान आरोपी ने बिना किसी स्पष्ट उकसावे के लोगों पर चाकू से वार किए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
पहले पानी मांगा, फिर किशोर पर किया हमला
घटना से जुड़े शुरुआती घटनाक्रम में सामने आया है कि शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे एक युवक न्यू कलेक्टर कंपाउंड में एक घर के दरवाजे पर पहुंचा और पानी मांगा। घर के 14 वर्षीय लड़के ने उसे पानी दिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से वार कर दिया।
घायल किशोर को तत्काल कांदिवली के भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (शताब्दी) अस्पताल ले जाया गया। उसके गले पर करीब 15 टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई और शुरुआती स्थिति में उसकी हालत स्थिर बताई गई थी।
इसके बाद आरोपी के दोपहर में दोबारा न्यू कलेक्टर कंपाउंड के प्लॉट नंबर 35 और गेट नंबर 7 के आसपास फिर हंगामा खड़ा कर दिया। वहां उसने एक अन्य युवक पर धारदार हथियार से हमला किया। इस दौरान आसपास मौजूद कुछ अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।
हमले में 16 वर्षीय किशोर की मौत
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में पांच लोगों पर चाकू से हमला हुआ। इनमें 16 वर्षीय एक किशोर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है।
स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा
हमले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपी का पीछा किया और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है।
आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर मुंबई में लोगों को निशाना बनाने के पीछे बदले की बात कही है। हालांकि इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और हमले का वास्तविक मकसद अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
“बंगाली” होने की पुष्टि नहीं
घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आरोपी को “बंगाली” बताए जाने की बात सामने आई, लेकिन उपलब्ध पुलिस-सूत्र आधारित जानकारी में आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है। उसकी पहचान या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर उसे “बंगाली” कहा जा सके।
मालवणी पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस आरोपी की गतिविधियों, हमले के क्रम और उसके कथित मकसद की पड़ताल कर रही है। हमले में घायल लोगों की स्थिति तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी जांच के साथ स्पष्ट होगी।
कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में धमकी के आरोप पर NCR दर्ज हुआ। पुराने SRA रिकॉर्ड, डेवलपर बदलाव और Annexure-II पर उठे सवालों की पड़ताल।
मुंबई: कांदिवली पश्चिम के गांधी नगर क्षेत्र की SRA योजना को लेकर विवाद अब धमकी के आरोप और पुलिस NCR तक पहुंच गया है। समाजसेवक महबूब ए. शाह को कथित तौर पर जान से मरवा देने की धमकी दिए जाने के मामले में 9 सितंबर 2026 को सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज किया गया है। विवाद की पृष्ठभूमि में SRA योजना में कथित दस्तावेजी अनियमितताओं और पात्रता के आधार पर पुनर्वसन फ्लैट मिलने से जुड़े गंभीर सवाल हैं।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गांधी नगर की संबंधित SRA योजना के पुराने और बाद के सार्वजनिक रिकॉर्ड में डेवलपर तथा CTS विवरण में अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध SRA project record में Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) के लिए 2 मई 2016 की LOI दर्ज है और उस समय डेवलपर के रूप में M/s Hari Om Developer का नाम सामने आता है। वहीं 2025 के आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम दर्ज है।
यही बदलाव अब इस पूरे विवाद का एक अहम दस्तावेजी सवाल बन गया है कि डेवलपर में यह परिवर्तन कब, किस प्रक्रिया के तहत और किस SRA आदेश के आधार पर हुआ।
गांधी नगर SRA योजना का पुराना रिकॉर्ड क्या बताता है?
SRA project record के अनुसार Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) का proposal number R-S/MHADA&PVT/0002/20060509 दर्ज है। रिकॉर्ड में योजना को Active status के साथ दिखाया गया है और 2 मई 2016 की LOI का reference SRA/ENG/1406/RS/STGL/PL/LOI दिया गया है। इस entry में M/s Hari Om Developer को developer और Shri Vivek Bhole Architect Pvt. Ltd./Neo Modern को architect के रूप में दर्ज किया गया है।
बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में इसी नाम से जुड़ी गांधी नगर SRA योजना के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। 13 जून 2025 के Apex Grievance Redressal Committee के cause list record में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) और Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. बनाम CEO/SRA, Competent Authority-7/SRA तथा Assistant Registrar/SRA के बीच Appeal (L) No. 07 of 2025 दर्ज है।
इससे यह स्पष्ट है कि गांधी नगर SRA योजना से जुड़ा विवाद केवल स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रहा है। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इस न्यायिक कार्यवाही को अपने आप में भ्रष्टाचार का मामला नहीं कहा जा सकता
पुराने SRA record में योजना से जुड़े कई CTS numbers दर्ज हैं, जिनमें CTS 486(Pt), 487 से 490, 492 से 494, 495(Pt), 497, 498(Pt), 499, 500 से 509, 512, 513(Pt), 514, 515, 518(Pt), 536, 538, 539, 543(Pt) और 738(Pt) शामिल हैं।
वहीं 2025 के न्यायिक रिकॉर्ड में CTS 98(Pt), 737(Pt), 738(Pt), 739, 740, 741, 755(Pt), 756(Pt), 757(Pt), 759(Pt), 761, 762 और 763 का उल्लेख मिलता है।
CTS विवरण में यह अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। SRA योजना में संशोधन, जमीन के पुनर्गठन, CTS बदलाव, अलग हिस्सों के समावेश या revised proposal जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन इन बदलावों का आधिकारिक कारण SRA के संबंधित आदेशों और revised records से स्पष्ट होना जरूरी है।
यही वह बिंदु है जहां गांधी नगर SRA विवाद में दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
मामले में स्थानीय रहवासियों और समाजसेवक महबूब ए. शाह की ओर से आरोप लगाया गया है कि गरीब परिवारों को SRA योजना में फ्लैट दिलाने के भरोसे के साथ कथित तौर पर allotment letters, आदेश प्रतियां, Collector office से जुड़े दस्तावेज, सक्षम प्राधिकारी के पत्र, society NOC, बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड दिखाए जा रहे हैं।
इन दस्तावेजों की वास्तविकता का फैसला आरोप के आधार पर नहीं किया जा सकता। प्रत्येक दस्तावेज को उस विभाग के मूल रिकॉर्ड से मिलाना होगा जिसने उसे जारी किया है।
SRA मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज Annexure-II है। SRA की व्यवस्था में survey और document verification के बाद eligibility तय करने की प्रक्रिया Annexure-II से जुड़ी है। इसलिए किसी व्यक्ति के पास कोई पत्र या अन्य supporting document होना अपने आप में SRA rehabilitation eligibility का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
किसी दावे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए survey record, Annexure-II, eligibility determination, Competent Authority record और allotment से जुड़े दस्तावेजों के बीच समानता देखना जरूरी होगा।
एक प्रकाशित खबर को लेकर समाजसेवक महबूब ए. शाह और सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के बीच विवाद सामने आया। आरोप है कि चौधरी की ओर से गाली-गलौज के साथ महबूब ए. शाह को जान से मरवा देने की धमकी दी गई।
महबूब ए. शाह ने इसकी सूचना कांदिवली पुलिस स्टेशन को दी। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 9 सितंबर 2026 को शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज की गई। NCR में BNS 351(3) और 352 से संबंधित प्रावधान दर्ज किए गए हैं।
SRA योजना में अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
गांधी नगर मामले में अब केवल यह सवाल नहीं है कि महबूब ए. शाह को धमकी क्यों दी गई। उससे बड़ा सवाल यह है कि जिस SRA योजना को लेकर दस्तावेजों और पात्रता पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी आधिकारिक रिकॉर्ड श्रृंखला क्या कहती है।
2016 के उपलब्ध SRA record में Hari Om Developer का नाम है, जबकि 2025 के न्यायिक record में Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। इसी तरह पुराने और बाद के रिकॉर्ड में CTS विवरण भी अलग दिखाई देते हैं।
इसलिए संबंधित दस्तावेजों से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि developer में बदलाव हुआ था या scheme structure में कोई अन्य संशोधन हुआ, वह कब हुआ, किस authority ने मंजूर किया और उसके पीछे कौन-सा official order है।
SRA योजना में eligibility या supporting documents को लेकर विवाद लंबा खिंचने पर वास्तविक पात्र परिवारों के rehabilitation process पर असर पड़ सकता है। दस्तावेजों की जांच में किसी दावे में कमी मिलने पर संबंधित व्यक्ति की पात्रता पर सवाल उठ सकता है, जबकि genuine beneficiaries के लिए भी redevelopment और rehabilitation की प्रक्रिया विवादित होने से लंबी हो सकती है।
इसी कारण SRA योजना में survey record और Annexure-II से लेकर allotment तथा rehabilitation status तक दस्तावेजों की स्पष्टता महत्वपूर्ण होती है।
अब आगे क्या?
गांधी नगर SRA विवाद में अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच है। विशेष रूप से 2016 की LOI, उसके बाद के revised orders, developer appointment या change से जुड़े दस्तावेज, latest Annexure-II, Competent Authority के रिकॉर्ड और Appeal (L) No. 07 of 2025 से संबंधित आदेश इस पूरे मामले की स्थिति को अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।
साथ ही कथित दस्तावेजों को उनके संबंधित सरकारी विभागों के मूल रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी होगा। जब तक यह verification पूरा नहीं होता, फर्जी दस्तावेजों के आरोप को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गांधी नगर SRA योजना में उठे ये सवाल अब केवल एक NCR तक सीमित नहीं हैं। असली जवाब उन सरकारी रिकॉर्ड में छिपा है जो यह बताएंगे कि योजना में पात्रता, सोसाइटी की भूमिका, डेवलपर की स्थिति और पुनर्वसन से जुड़े दस्तावेज वास्तव में एक-दूसरे से कितने मेल खाते हैं।
मुंबई में Facebook-Instagram Ads, Fake Calls, Job Offer और APK के जरिए तीन लोगों से ₹7.55 लाख की ठगी हुई। जानें Scam का तरीका और बचाव के उपाय।
मुंबई: Facebook और Instagram पर दिखने वाले Ads और Social Media Posts को आधार बनाकर तीन अलग-अलग मामलों में एक कारोबारी, होटल का वेटर और एक सेल्समैन से कुल ₹7,55,734 की साइबर ठगी सामने आई है। तीनों मामलों में ठगी का तरीका अलग था, लेकिन एक बात समान रही—पहले सोशल मीडिया के जरिए भरोसा बनाया गया और उसके बाद Fake Call, WhatsApp, Personal Details या APK File के जरिए पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
इन मामलों में 58 वर्षीय Andheri निवासी कारोबारी Ketan Shah से ₹3,34,534, होटल में काम करने वाले Ramesh Singh Anand Singh Asnal से ₹2,41,200 और मॉल में सेल्समैन Salim Ibrahim Patel से ₹1,80,000 की ठगी हुई।
Facebook पर Credit Card Ad, फिर Fake HSBC Customer Care Call
58 वर्षीय कारोबारी Ketan Shah ने Facebook पर HSBC Credit Card से संबंधित एक Advertisement देखा। Advertisement पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपना नाम और मोबाइल नंबर दिया।
14 अगस्त को उन्हें Rahul नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को HSBC Customer Care Executive बताया। कॉल के दौरान उन्हें एक Link भेजा गया और मौजूदा Bank Cards की जानकारी देने को कहा गया।
Shah ने IndusInd Bank और ICICI Bank से संबंधित Card Details दर्ज कीं। इसके कुछ ही समय बाद उनके IndusInd Bank Account से ₹3,34,534 निकाल लिए गए।
Transaction के बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। दोबारा फोन चालू करने पर उन्हें Transaction Alerts मिले। उन्होंने तुरंत Card Block कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
यह मामला दिखाता है कि Credit Card या Banking Service का नाम इस्तेमाल करने वाला कोई भी Caller अपने आप वास्तविक Bank Executive नहीं बन जाता। Social Media Advertisement पर दिया गया Mobile Number बाद में Social Engineering के लिए इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी पैदा करता है।
दूसरे मामले में होटल वेटर Ramesh Singh Anand Singh Asnal विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे थे। उन्होंने Celebrity Chef Shubham Rawat से जुड़ी एक पोस्ट Instagram और Facebook पर देखी और नौकरी की उम्मीद में Comment Section में अपना Mobile Number डाल दिया।
27 अगस्त को उन्हें WhatsApp पर Sohan Bhandari नाम के व्यक्ति का Call आया। उसने दावा किया कि Chef Shubham Rawat ने उनका नंबर उसे दिया है और Dubai में नौकरी की व्यवस्था हो गई है।
इसके बाद Visa Processing, Medical Test और Offer Letter के नाम पर पैसे मांगे गए। Asnal ने 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच 18 अलग-अलग Transactions में कुल ₹2,41,200 भेज दिए।
जब नौकरी का Offer Letter नहीं आया और संपर्क भी बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का पता चला। जांच में सामने आया कि Shubham Rawat का इस ठगी से कोई संबंध नहीं था। कथित तौर पर उनकी Profile Photograph का इस्तेमाल Fake WhatsApp Account बनाकर भरोसा कायम करने के लिए किया गया था। पुलिस ने Sohan Bhandari बनकर संपर्क करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
इस मामले में सबसे बड़ा खतरा Social Media Impersonation का है। किसी व्यक्ति की Profile Photo, नाम या किसी परिचित की पहचान का इस्तेमाल होने से यह साबित नहीं होता कि WhatsApp Account वास्तव में उसी व्यक्ति का है।
Instagram पर ICICI Credit Card Ad, WhatsApp से आया APK
तीसरे मामले में मॉल में काम करने वाले Salesman Salim Ibrahim Patel ने Instagram पर ICICI Bank Credit Card का Advertisement देखा। Credit Card की जरूरत होने के कारण उन्होंने Advertisement पर Click किया।
अगली सुबह एक Unknown Number से Call आया। Caller ने खुद को ICICI Credit Card Department का कर्मचारी बताया और कहा कि KYC Process पूरी करनी होगी।
इसके बाद WhatsApp पर “ICICI CREDIT CARD.apk” नाम की File भेजी गई। Patel को इसे Open करने और PAN Card तथा मौजूदा SBI Credit Card की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया।
निर्देशों का पालन करने के कुछ ही मिनट बाद उनके SBI Credit Card से दो Transactions के जरिए ₹1,80,000 निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले में Unknown Cyber Fraudster के खिलाफ जांच चल रही है।
Social Media Ad से WhatsApp तक पहुंच रहा है Scam
इन तीनों मामलों को साथ देखने पर ठगी का एक स्पष्ट Pattern सामने आता है।
Facebook या Instagram पर Ad या Post दिखाई देता है। User किसी जरूरत के कारण उस पर प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद Mobile Number या अन्य जानकारी के जरिए संपर्क बनाया जाता है। फिर Scammer Bank Executive, Recruiter या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान इस्तेमाल करता है। बातचीत अक्सर WhatsApp तक पहुंचती है और यहीं से Payment, Card Details, PAN Details या App Installation के जरिए ठगी आगे बढ़ती है।
यानी Scam की शुरुआत हमेशा पैसे मांगने से नहीं होती। कई बार शुरुआत केवल Mobile Number, Comment या Credit Card Enquiry से होती है।
APK File को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
“ICICI CREDIT CARD.apk” जैसे नाम से भेजी गई File सामान्य KYC प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानी जानी चाहिए। खासकर जब कोई Unknown Caller WhatsApp पर APK भेजकर उसे Install करने के लिए कहे।
सितंबर 2026 में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से Malicious Android Applications के जरिए Financial Fraud बढ़ने को लेकर चेतावनी सामने आई थी। Facebook और Instagram पर ऐसे Advertisements के जरिए Users को Suspicious Websites और APK Files तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई। कुछ Malicious Apps Device Accessibility Permissions का दुरुपयोग करके Smartphone पर नियंत्रण हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं।
देश भर में APK आधारित ठगी के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी Bank, Credit Card, KYC, Pension या Refund के नाम पर WhatsApp से भेजी गई APK File को Install करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
मुंबई में Online Fraud का कितना बड़ा खतरा है
मुंबई में 2026 के पहले सात महीनों में 3,689 Online Fraud Cases दर्ज किए गए। इनमें Credit Card और अन्य Digital Fraud के 914 मामले सबसे बड़े दर्ज किए गए Categories में रहे। इन 914 मामलों में 142 मामलों का Detection हुआ और 81 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
इसी अवधि में Fake Social Media Profiles और Email/SMS Morphing से जुड़े 136 मामले तथा Phishing, Man-in-the-Middle और Spoofing से जुड़े 103 मामले दर्ज हुए। Job Fraud के 70 और Fake Websites के 72 मामले भी सामने आए। कुल 3,689 मामलों में 847 मामलों का Detection और 637 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।
इन आंकड़ों के बीच Facebook-Instagram से जुड़े मौजूदा मामले यह दिखाते हैं कि Cyber Fraud अब केवल Unknown Phone Calls तक सीमित नहीं है। Social Media Advertising, Fake Profiles, Messaging Apps और Digital Payment Systems एक ही Fraud Chain का हिस्सा बन सकते हैं।
2,898 SIM Cards और ₹24 करोड़ के Transaction का जांच कनेक्शन
मुंबई पुलिस की Crime Branch ने सितंबर में एक अलग Cyber Fraud Network की जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में 2,898 SIM Cards और 10 Bank Accounts के जरिए करीब ₹24 करोड़ के Transactions का Financial Trail सामने आया। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि इन Transactions के अंतिम Beneficiaries कौन थे और नेटवर्क कितना बड़ा था।
यह मामला मौजूदा तीन ठगी की घटनाओं से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन इससे यह समझ आता है कि Cyber Fraud में इस्तेमाल होने वाले Phone Numbers, SIM Cards और Bank Accounts के पीछे अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।
अगर Social Media Scam में पैसा कट जाए तो तुरंत क्या करें ?
Cyber Fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण है। पैसा कटने के बाद सबसे पहले Bank या Card Issuer को तुरंत सूचना देकर Card या संबंधित Account को सुरक्षित कराना चाहिए।
इसके बाद Financial Cyber Fraud की शिकायत के लिए 1930 Helpline पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है और National Cyber Crime Reporting Portal पर Complaint दर्ज की जा सकती है।
Caller का Mobile Number, WhatsApp Chat, Advertisement का Screenshot, Website Link, APK का नाम, Transaction ID, Bank Alert और अन्य उपलब्ध Evidence सुरक्षित रखना चाहिए। इन्हें Delete करने के बजाय जांच के लिए सुरक्षित रखना अधिक उपयोगी है।
यदि किसी संदिग्ध APK को Install किया गया है, तो उस Device से आगे Banking Activity करने से बचना और Device तथा संबंधित Accounts की Security जांच कराना जरूरी है।
सिर्फ अपना पैसा नहीं, Scammer की जानकारी भी Report करें
National Cyber Crime Reporting Portal पर Suspicious Phone Numbers, WhatsApp Numbers, Telegram Handles, Email IDs, URLs और Social Media Accounts से संबंधित जानकारी Report करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
इसलिए किसी Scam का सामना होने पर केवल Transaction Dispute तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध Digital Evidence के साथ संदिग्ध Number, Account या Link की भी जानकारी देना महत्वपूर्ण है।
Facebook और Instagram पर शुरू हुई इन तीन घटनाओं में कुल ₹7.55 लाख का नुकसान हुआ है। मामलों की जांच जारी है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक स्पष्ट चेतावनी देता है—Social Media पर दिखने वाला Ad, WhatsApp Profile या फोन पर बताई गई पहचान अपने आप भरोसे का प्रमाण नहीं है। Cyber Fraud से बचने के लिए किसी भी Payment, KYC, Job Processing या App Installation से पहले स्वतंत्र Verification करना सबसे जरूरी कदम है।
मुंबई के मुलुंड में Snapchat और सोशल मीडिया के जरिए महिला को निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोप में 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार।
मुंबई: मुलुंड में सोशल मीडिया के जरिए एक महिला को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगने के मामले में पुलिस ने पंजाब से 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान Satnam Mandeep Singh के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, महिला द्वारा आगे की मांग मानने से इनकार करने के बाद आरोपी ने उसका एक वीडियो उसके रिश्तेदारों और अन्य लोगों को भेज दिया।
मुलुंड पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला से संपर्क किया और धीरे-धीरे उसके साथ परिचय बढ़ाया। इसके बाद उसके पास मौजूद महिला के निजी फोटो और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसों की मांग की गई। मामला तब गंभीर हो गया जब महिला ने आरोपी की आगे की मांग पूरी करने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर उसने वीडियो दूसरे लोगों तक पहुंचा दिया।
इसके बाद महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पंजाब तक पहुंची और Satnam Mandeep Singh को गिरफ्तार किया गया।
मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 351(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(E) और 67(A) के तहत कार्रवाई की गई है।
इन धाराओं में कथित जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, निजता के उल्लंघन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रसारण से जुड़े अपराध शामिल हैं।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी ने महिला से कुल कितनी रकम मांगी थी या अब तक कितनी रकम हासिल की गई थी। इसी तरह आरोपी ने महिला के निजी फोटो और वीडियो किस माध्यम से हासिल किए, इसकी पूरी जानकारी भी सामने नहीं आई है। इन पहलुओं की जांच का परिणाम आगे की पुलिस कार्रवाई में स्पष्ट हो सकता है।
मुलुंड का यह मामला उस साइबर अपराध के पैटर्न को सामने लाता है जिसमें किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील तस्वीरों और वीडियो को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे या दूसरी मांगें पूरी कराने की कोशिश करता है।
मुंबई और आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में निजी डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर कथित ब्लैकमेल और उगाही के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। अगस्त 2026 में एक अलग मामले में मुंबई की 35 वर्षीय महिला पर ठाणे के एक व्यक्ति से निजी फोटो-वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर कथित तौर पर करीब 1.39 करोड़ रुपये की उगाही करने का मामला दर्ज हुआ था।
सितंबर 2026 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक अन्य कथित सेक्सटॉर्शन मामले में 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। उस मामले में निजी WhatsApp चैट सार्वजनिक करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर 64 लाख रुपये लेने का आरोप है। यह मुलुंड मामले से अलग घटना है और दोनों मामलों को एक ही नेटवर्क से जोड़ने की कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अगर निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी मिले तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सबसे पहले आरोपी की धमकी के दबाव में आकर चैट या अन्य डिजिटल सबूत मिटाने से बचना चाहिए। बातचीत के स्क्रीनशॉट, आरोपी का मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल या यूजरनेम, वीडियो या फोटो, संबंधित URL और अगर कोई ऑनलाइन भुगतान हुआ है तो उसकी रसीद या बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन अपराध की शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल के अनुसार शिकायत के दौरान चैट, स्क्रीनशॉट, वीडियो, फोटो, URL और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य उपयोगी हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को संबंधित प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्ट किया जा सकता है।
अगर मामला आर्थिक साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन पैसे के तत्काल ट्रांसफर से जुड़ा हो तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के जरिए भी सहायता ली जा सकती है।
जांच में आगे क्या सामने आ सकता है?
मुलुंड पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह हो सकता है कि आरोपी ने महिला के निजी कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह किया, क्या उसके पास अन्य लोगों की ऐसी सामग्री भी थी और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसे किसी अतिरिक्त आरोपी या दूसरे पीड़ित की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस की जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी ने महिला से कितनी रकम की मांग की थी, कोई भुगतान हुआ था या नहीं और निजी वीडियो कितने लोगों तक भेजा गया। इन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मुलुंड पुलिस की कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। निजी फोटो या वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर दबाव बनाने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया के पीछे छिपा हो, तब भी तकनीकी जांच के जरिए उसकी पहचान और लोकेशन तक पहुंचा जा सकता है।
पालघर अस्पताल हिंसा में रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तारियां हुईं। 22 आरोपियों की पुलिस हिरासत, CCTV जांच और हाईकोर्ट की निगरानी पर पूरी जानकारी।
पालघर: मुंबई से सटे पालघर जिले के रिलीफ हॉस्पिटल में दही-हांडी के बाद हुई हिंसा के मामले में जांच अब गिरफ्तारी से आगे बढ़कर डिजिटल सबूत और पुलिस जांच की निगरानी तक पहुंच गई है। विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक कुल 23 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
मामले में पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और कथित तौर पर उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुरुआती जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
पालघर अस्पताल में विवाद कैसे शुरू हुआ?
यह मामला 5 सितंबर की रात और 6 सितंबर की शुरुआती घंटों में पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में हुआ। दही-हांडी समारोह के दौरान घायल हुए कुछ गोविंदा अस्पताल में भर्ती थे। उपचार, जांच, डिस्चार्ज और अस्पताल के बिल को लेकर विवाद के बाद शिवसेना से जुड़े लोगों के अस्पताल पहुंचने का आरोप है।
पुलिस और अस्पताल की शिकायत के अनुसार, अस्पताल में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई, डॉक्टरों को धमकाया गया और कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई। एक घायल व्यक्ति को ICU से जबरन बाहर ले जाने का आरोप भी मामले का हिस्सा है। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान किए जाने की बात कही है।
शुरुआती रिपोर्टों में पांच घायल गोविंदाओं के इलाज और करीब 19,866 रुपये के बिल को लेकर विवाद सामने आया था। एक घायल गोविंदा को आगे की जांच के लिए स्कैन कराने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई। बाद में घायल गोविंदा केशव ठाकुर को वर्टिब्रल कंप्रेशन फ्रैक्चर पाए जाने और D10-D12 कशेरुकाओं की स्थिरीकरण सर्जरी किए जाने की जानकारी दी गई।
23 गिरफ्तारियां कैसे हुईं?
शुरुआत में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात और तत्कालीन जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित आरोपी शामिल थे। 7 सितंबर को राहुल घरात की गिरफ्तारी हुई।
इसके बाद 11 सितंबर को विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और 12 गोविंदा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। रोहित गावित को मीरा रोड से पकड़े जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई। पुलिस के अनुसार, उनके पुराने मोबाइल में नया SIM इस्तेमाल किए जाने के बाद तकनीकी निगरानी के जरिए उनका पता लगाने में मदद मिली
इसके बाद फरार बताए जा रहे आरोपियों पर कार्रवाई तेज हुई। 13-14 सितंबर को आठ शिवसेना पदाधिकारी पुलिस के सामने पेश हुए, जबकि साईराज पाटील के चालक साहिल राउत को भी गिरफ्तार किया गया। इससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 23 तक पहुंच गई।
पुलिस के सामने पेश होने वालों में कुंदन सांखे, साईराज पाटील, मनीष उर्फ विक्की सांखे, राहुल सांखे, ऋषभ वारे, नगरसेविका नीलम सांखे और मनोज घरात के नाम सामने आए हैं।
22 या 23 गिरफ्तार? आंकड़े में अंतर क्यों दिख रहा है?
मामले में 22 और 23 दोनों आंकड़े दिखाई दे रहे हैं। 14 सितंबर को 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसी रिपोर्ट में पुलिस द्वारा CCTV के आधार पर 22 लोगों की पहचान किए जाने का उल्लेख है।
इसके बाद आठ आरोपियों के surrender और साईराज पाटील के चालक साहिल राउत की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तारियां 23 बताई गईं। इसलिए 22 का आंकड़ा पुलिस हिरासत में भेजे गए आरोपियों से और 23 का आंकड़ा कुल गिरफ्तारियों से जुड़ा दिखाई देता है।
रोहित गावित, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत दी गई। उनके बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि घटनास्थल पर उनकी भूमिका को लेकर आरोपों की जांच जरूरी है और उन्होंने किसी गैरकानूनी इरादे से अस्पताल जाने से इनकार किया। दूसरी ओर पुलिस ने उनकी भूमिका और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जांच के लिए हिरासत की जरूरत बताई।
कुंदन सांखे, जो शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख रहे हैं, बाद में पुलिस के सामने पेश हुए। पुलिस के मुताबिक वह उन आरोपियों में शामिल हैं जिनकी भूमिका की जांच CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस ने अदालत से पांच दिन की हिरासत मांगते हुए जांच के कई कारण बताए। इनमें आरोपियों के voice samples लेना, मोबाइल डिवाइस जब्त करना और CCTV के cloud storage में मौजूद फुटेज को सुरक्षित करना शामिल था। पुलिस ने अदालत को बताया कि CCTV से संबंधित cloud data बेंगलुरु स्थित सर्वर पर होने की जानकारी है।
आरोपियों के बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि वे घायल दोस्त से मिलने अस्पताल गए थे और उनके पीछे कोई गैरकानूनी इरादा नहीं था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मजिस्ट्रेट योगेश एच. गजभिये ने अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए पुलिस हिरासत मंजूर की।
मामले में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान या हानि की रोकथाम) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार आरोपों में दंगा, मारपीट, आपराधिक धमकी, बिना अनुमति प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य संबंधित अपराध शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर क्यों सवाल उठाए?
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण developments में से एक बॉम्बे हाईकोर्ट की दखल है। अदालत ने पालघर पुलिस की शुरुआती जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई और जांच को पर्याप्त तरीके से आगे नहीं बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए।
अदालत ने पंचनामा, गवाहों के बयान और घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूतों के संग्रह को लेकर सवाल उठाए। अस्पताल में मौजूद सलाइन बोतल जैसे संभावित सबूत को जब्त नहीं किए जाने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा 17 सितंबर बताई गई है।
जांच अधिकारी भी बदले गए
मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों में बदलाव भी हुआ। शुरुआती जांच PSI विनायक केसरकर के पास थी। इसके बाद पालघर SDPO उमेश गावली और फिर डहाणू SDPO निशा जाधव को जांच की जिम्मेदारी दी गई। 14 सितंबर की रिपोर्ट में निशा जाधव को पुलिस की ओर से अदालत में आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए पेश होने की जानकारी दी गई है।
हाईकोर्ट की निगरानी में अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिवसेना ने क्या कार्रवाई की?
मामले में नाम सामने आने के बाद शिवसेना ने अपने कई पदाधिकारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की। जिसमें राहुल घरात, कुंदन सांखे, साईराज पाटील समेत सात पदाधिकारियों के निलंबित कर दिया गया है।
अब आगे क्या होगा?
16 सितंबर तक दी गई पुलिस हिरासत के बाद यानी कल 17 सितंबर आरोपियों को अदालत के सामने फिर पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए या पुलिस हिरासत बढ़ाई जाए या किसी आरोपी को जमानत संबंधी राहत मिले।
साथ ही पुलिस के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल फोन, voice samples और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक की निगरानी रिपोर्ट भी अगले चरण में महत्वपूर्ण होगी।
मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस जांच और अदालत की निगरानी दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।
मुंबई में 1995 और 1997 के अलग-अलग मामलों में वांछित दो आरोपी करीब तीन दशक बाद गिरफ्तार हुए। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी सुरागों से तलाश की।
मुंबई: करीब तीन दशक पुराने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में वांछित दो आरोपियों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस ने 53 वर्षीय सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा को कांदिवली ईस्ट से गिरफ्तार किया, जबकि मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने 48 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा सैयद को बांद्रा ईस्ट के बेहरामपाड़ा इलाके से पकड़ा है। दोनों मामलों में आरोपी लंबे समय से पुलिस की तलाश में थे।
1997 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी
समता नगर पुलिस के अनुसार, विश्वकर्मा के खिलाफ Crime No. 347/1997 दर्ज किया गया था। मामले में IPC की धारा 363, 366 और 376 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार मामला नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा था।
करीब 29 साल से लंबित इस मामले में पुलिस ने पुराने पते और परिचितों से जुड़ी जानकारी दोबारा जुटाई। स्थानीय पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी सुरागों के आधार पर उसके कांदिवली ईस्ट के ठाकुर विलेज स्थित जीवाला पाड़ा में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने उसे 3 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।
1995 के मामले में बेहरामपाड़ा से आरोपी पकड़ा
दिंडोशी पुलिस के अनुसार, मोहम्मद मुस्तफा सैयद के खिलाफ Crime No. 146/1995 में IPC की धारा 376(1) के तहत मामला दर्ज था। पुलिस के मुताबिक कथित अपराध के समय सैयद नाबालिग था। उसके खिलाफ डोंगरी स्थित Juvenile Court से search warrant जारी हुआ था।
करीब 30 साल बाद उसके बेहरामपाड़ा में होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने इलाके में चार दिनों तक तलाश की। पुराने स्थानीय निवासियों, पड़ोसियों, दुकानदारों और अन्य लोगों से मिली जानकारी के साथ उपलब्ध रिकॉर्ड और मतदाता सूची का इस्तेमाल कर उसकी पहचान की गई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर Juvenile Court के समक्ष पेश किया गया।
दोनों मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दशकों बाद आरोपियों की मौजूदा पहचान और ठिकाना तलाशना था। इसके लिए पुराने पुलिस रिकॉर्ड और पते को वर्तमान स्थानीय जानकारी से जोड़ा गया। समता नगर मामले में तकनीकी जानकारी से मिले सुराग भी जांच का हिस्सा रहे, जबकि दिंडोशी पुलिस ने स्थानीय स्तर पर लगातार पूछताछ की।
दोनों गिरफ्तारियों के बाद संबंधित मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
कल्याण के आगरा रोड पर व्यापारी से 40 लाख रुपये की दिनदहाड़े लूट हुई। चार आरोपी बाइक से आए, हमला कर कैश बैग ले गए। CCTV से जांच जारी।
ठाणे: कल्याण के आगरा रोड पर मंगलवार को दिनदहाड़े करीब 40 लाख रुपये की नकदी लूटने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। बैंक में रकम जमा करने जा रहे 62 वर्षीय व्यापारी फारूख अख्तर को दो बाइकों पर आए चार आरोपियों ने निशाना बनाया। आरोपियों ने उनकी दोपहिया गाड़ी को लात मारकर गिराया, मारपीट की और नकदी से भरा बैग लेकर फरार हो गए।
यह वारदात आगरा रोड स्थित शू मॉल के सामने हुई और आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई। घटना के बाद बाजारपेठ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की है। पुलिस आरोपियों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने के लिए CCTV फुटेज खंगाल रही है।
बैंक में जमा करने जा रहे थे नकदी
जानकारी के मुताबिक, फारूख अख्तर बिस्किट और सिगरेट का कारोबार करते हैं। वह अपने एक साथी के साथ वालधुनी इलाके से बैंक में नकदी जमा करने के लिए निकले थे। इसी दौरान आगरा रोड पर शू मॉल के सामने आरोपियों ने उनकी बाइक को निशाना बनाया।
दो बाइकों पर सवार चार लोगों ने व्यापारी की गाड़ी को लात मारी, जिससे वह सड़क पर गिर गए। इसके बाद आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और नकदी से भरा बैग लेकर मौके से फरार हो गए।
अपराध में इस्तेमाल की गई दोनों बाइकों को Suzuki Burgman और Splendor बताया गया है। दोनों वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।
CCTV में कैद हुई वारदात
लूट की पूरी घटना इलाके में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। अब पुलिस इन फुटेज के जरिए आरोपियों के हुलिए, उनकी गतिविधियों और वारदात के बाद भागने के रास्ते की जानकारी जुटा रही है।
जांच का एक अहम हिस्सा आसपास लगे दूसरे CCTV कैमरों की फुटेज को जोड़ना भी है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी वारदात के बाद किस दिशा में गए और क्या उन्होंने भागने के लिए पहले से कोई रास्ता तय किया था।
इस वारदात में सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को व्यापारी के पास बड़ी मात्रा में नकदी होने की जानकारी कैसे मिली।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यापारी की पहले से रेकी की गई थी। हालांकि, बैंक में रकम जमा करने के लिए जाते समय व्यापारी को सीधे निशाना बनाए जाने के कारण पुलिस की जांच में यह पहलू महत्वपूर्ण हो सकता है। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
चार पुलिस टीमें जांच में जुटीं
वारदात की सूचना मिलते ही बाजारपेठ पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा किया। आरोपियों की तलाश के लिए चार पुलिस टीमें लगाई गई हैं। CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस की जांच में अब यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों का इस्तेमाल कहां से हुआ और आरोपी वारदात के बाद किस रास्ते से निकले।
कल्याण के व्यस्त आगरा रोड जैसे इलाके में दिनदहाड़े करीब 40 लाख रुपये की लूट ने व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर बड़ी रकम लेकर बैंक जाने वाले कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब गणेशोत्सव को देखते हुए कल्याण में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए रूट मार्च भी किया था। ऐसे में व्यस्त कारोबारी इलाके में हुई इस वारदात के बाद पुलिस की जांच और सुरक्षा व्यवस्था पर भी लोगों की नजर रहेगी।
आरोपियों की गिरफ्तारी और रकम की बरामदगी का इंतजार
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपियों की गिरफ्तारी या करीब 40 लाख रुपये की नकदी बरामद होने की पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस CCTV और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
अब जांच में सबसे अहम सवाल यही हैं कि चारों आरोपी कौन हैं, उन्हें नकदी की जानकारी कैसे मिली, वारदात के बाद वे किस रास्ते से फरार हुए और क्या पूरी रकम बरामद हो पाती है। पुलिस की अगली कार्रवाई से इस मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
मालवणी पुलिस ने 263 ग्राम हेरोइन जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच में नालासोपारा से हरिद्वार तक सप्लाई कनेक्शन सामने आया है।
मुंबई: मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके में हेरोइन तस्करी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 263 ग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस की जानकारी के अनुसार, जब्त हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय अनुमानित कीमत ₹78.90 लाख है। इस कार्रवाई में 19 वर्षीय एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच में हेरोइन के स्रोत का कनेक्शन नालासोपारा से हरिद्वार, उत्तराखंड तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
यह कार्रवाई 14 अगस्त 2026 को मालवणी के शांति वेलफेयर सोसायटी, लक्ष्मी नगर, अली तालाब रोड, खारोडी इलाके से शुरू हुए मामले की जांच के दौरान सामने आई।
4.90 ग्राम हेरोइन के साथ पहली गिरफ्तारी
पुलिस की जानकारी के अनुसार, 14 अगस्त की रात करीब 8 बजे मालवणी पुलिस को शांति वेलफेयर सोसायटी परिसर में एक 34 वर्षीय व्यक्ति के पास हेरोइन होने की जानकारी मिली। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 4.90 ग्राम हेरोइन बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अनुमानित कीमत ₹1.50 लाख बताई गई है।
पुलिस ने इस मामले में मालवणी पुलिस थाने में गु.र.क्र. 1361/2026 दर्ज कर NDPS Act की धारा 8(c) के साथ 21(a) के तहत कार्रवाई की।
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी से पुलिस को पता चला कि यह हेरोइन नालासोपारा से लाई गई थी।
नालासोपारा में 263 ग्राम हेरोइन तक पहुंची जांच
इसके बाद आरोपी से मिली जानकारी और गुप्त सूचना के आधार पर मालवणी पुलिस ने नालासोपारा पश्चिम के वाघेश्वरी इलाके में स्थित गोल्डन अपार्टमेंट में कार्रवाई की।
पुलिस की जानकारी के अनुसार, यहां उत्तर प्रदेश के रहने वाले 19 वर्षीय एक युवक के कब्जे से 263 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। इस हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय अनुमानित कीमत ₹78.90 लाख बताई गई है। आरोपी को गिरफ्तार कर इसी मामले की जांच में शामिल किया गया है।
यानी शुरुआती 4.90 ग्राम की बरामदगी से शुरू हुई जांच आगे बढ़कर 263 ग्राम के बड़े स्टॉक तक पहुंची।
263 ग्राम हेरोइन को Commercial Quantity क्यों माना जाता है?
हेरोइन के लिए अधिसूचित मात्रा के अनुसार 250 ग्राम Commercial Quantity की सीमा है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की उपलब्ध जानकारी में हेरोइन के लिए Small Quantity 5 ग्राम और Commercial Quantity 250 ग्राम निर्धारित है।
इस मामले में बरामद 263 ग्राम हेरोइन, 250 ग्राम की Commercial Quantity सीमा से 13 ग्राम अधिक है।
NDPS Act की धारा 21(c) में Commercial Quantity से संबंधित मामलों के लिए कठोर सजा का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले में संबंधित आरोपी के खिलाफ अंतिम रूप से कौन-कौन सी धाराएं लागू की गई हैं, इसकी पुष्टि आगे की केस रिकॉर्ड और जांच से होगी।
हरिद्वार तक पहुंचा सप्लाई का धागा
पुलिस की जांच में गिरफ्तार 19 वर्षीय आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने यह हेरोइन हरिद्वार जिले के सिगरोड गांव, उत्तराखंड निवासी एक वांछित आरोपी से प्राप्त की थी।
इस जानकारी के आधार पर अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उस कथित सप्लायर तक पहुंचने और हेरोइन की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने पर केंद्रित हो सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और माल की अंतिम सप्लाई किन लोगों तक की जानी थी।
मामले की आगे की जांच जारी है।
नालासोपारा में हाल की ड्रग्स कार्रवाई भी चर्चा में
इस मामले में नालासोपारा का नाम ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में इस इलाके से जुड़े कई ड्रग्स मामलों में पुलिस कार्रवाई हुई है। 16 अगस्त को नालासोपारा पूर्व में एक कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 73 ग्राम कोकीन जब्त कर एक नाइजीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
सितंबर में सामने आए एक अन्य बड़े मामले में नालासोपारा से शुरू हुई जांच कथित मेफेड्रोन नेटवर्क तक पहुंची थी। उस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में ड्रग्स और उससे जुड़े सामान की बरामदगी की जानकारी दी गई थी।
हालांकि, इन अलग-अलग मामलों को मालवणी के 263 ग्राम हेरोइन मामले से जोड़ने वाली कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए दोनों घटनाओं को अलग-अलग मामलों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मालवणी पुलिस की पूरी टीम ने की कार्रवाई
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त, उत्तर प्रादेशिक विभाग शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त, उत्तर परिमंडल-02 संदिप घुगे, सहायक पुलिस आयुक्त, मालवणी विभाग महेशकुमार ठाकुर और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रानी लक्ष्मण पुरी के मार्गदर्शन में की गई।
कार्रवाई में सहायक पुलिस निरीक्षक मीना मरे, पुलिस उपनिरीक्षक प्रदिप लोंढे, पुलिस हेड कांस्टेबल 040193 रब्बिल शेख, पुलिस कांस्टेबल 140053 साजिद शेख, 140085 मुदस्सर देसाई, 141568 कालिदास खुडे, 142613 दत्तात्रय गावडे, 140660 सुमित सोरटे और तकनीकी सहायता के लिए पुलिस कांस्टेबल 100014 आदित्य राणे शामिल रहे।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल क्या है?
263 ग्राम हेरोइन की बरामदगी के बाद जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस को कथित सप्लायर तक पहुंचने के साथ-साथ हेरोइन कहां से लाई गई, किसके लिए लाई गई थी, इसके पीछे और कौन लोग हैं और माल की सप्लाई के लिए किस माध्यम का इस्तेमाल किया गया, जैसे पहलुओं की जांच करनी होगी।
मालवणी पुलिस की जानकारी के अनुसार, इस मामले में हरिद्वार के सिगरोड गांव से जुड़े कथित वांछित आरोपी का पता लगाने और पूरी सप्लाई श्रृंखला की जानकारी हासिल करने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही है।
मामले में आगे की कार्रवाई और जांच के आधार पर ही कथित ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।