Category: Mumbai Crime

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  • मालाड में 1.30 करोड़ के गहनों की चोरी का खुलासा, दुकान के कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार

    मालाड में 1.30 करोड़ के गहनों की चोरी का खुलासा, दुकान के कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में रक्षा ज्वेलर्स से 1.30 करोड़ के सोने-चांदी के गहनों की चोरी में चार आरोपी गिरफ्तार। जानें CCTV, बदली चाबी और बरामदगी का पूरा मामला।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित रक्षा ज्वेलर्स से करीब 1.30 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के गहने चोरी करने के मामले में मालाड पुलिस ने दुकान के कर्मचारी समेत चार आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। जांच में दुकान की मूल चाबी के जैसी दूसरी चाबी बनाकर चोरी की साजिश रचने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए ज्यादातर गहने बरामद कर लिए गए हैं।

    यह मामला मालाड पश्चिम के नटराज मार्केट स्थित रक्षा ज्वेलर्स का है। दुकान के मालिक विकास जैन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। मामले में गिरफ्तार आरोपियों में खुमानसिंग दासाना, उसका भाई सोहनसिंग तुलसीसिंग दासाना और उनके दो साथी सुमनसिंग दासाना और गणेशसिंग कडेचा शामिल हैं। सभी आरोपियों को राजस्थान से पकड़कर मुंबई लाया गया और अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    चाबी बदलकर चोरी करने का आरोप

    दुकान के मालिक विकास जैन 2 अक्टूबर को परिवार के साथ राजस्थान गए थे। उस दौरान दुकान को खोलने और बंद करने की जिम्मेदारी कर्मचारी भुरेलाल राठोड को सौंपी गई थी।

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    3 अक्टूबर को भुरेलाल दुकान खोलने पहुंचा, लेकिन उसके पास मौजूद चाबी से ताला नहीं खुला। इसके बाद दुकान के कर्मचारी खुमानसिंग दासाना से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका फोन बंद था। इसकी जानकारी मिलने पर विकास जैन मुंबई लौटे और दुकान की जांच की।

    दुकान का ताला खोलकर अंदर जाने पर सोने-चांदी के गहने गायब मिले। शुरुआती जांच में चाबियों के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई। पुलिस जांच के अनुसार, दुकान की मूल चाबी के जैसी दूसरी चाबी तैयार कर उसे चाबियों के गुच्छे में बदल दिया गया था। इसी तरीके से चोरी की साजिश रचने का आरोप है।

    CCTV से मिला आरोपियों का सुराग

    चोरी का पता चलने के बाद दुकान के मालिक और कर्मचारी ने आसपास के दुकानों के CCTV फुटेज की जांच की। इसमें खुमानसिंग दासाना अपने तीन साथियों के साथ दुकान में प्रवेश करता और बाद में बैग लेकर बाहर निकलता दिखाई दिया।

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    CCTV में संदिग्धों की गतिविधियों का समय 2 अक्टूबर की रात करीब 10:15 से 10:50 बजे के बीच बताया गया है। CCTV से मिले सुराग और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को आरोपियों के राजस्थान में होने की जानकारी मिली। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से चारों को गिरफ्तार किया गया।

    सोने और चांदी के गहनों की बड़ी मात्रा चोरी

    शिकायत में चोरी हुए गहनों की कीमत करीब 1.30 करोड़ रुपये बताई गई है। चोरी हुए सामान में सोने की मूर्तियों के अलावा चांदी की मूर्तियां, कड़े, चेन और पायल जैसी वस्तुएं शामिल थीं।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, चोरी हुए सामान में लगभग 116.74 किलोग्राम चांदी और 900 ग्राम सोना शामिल था। इन वस्तुओं की एक रिपोर्टेड कीमत क्रमशः करीब 55.98 लाख और 72 लाख रुपये बताई गई है।

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    पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए ज्यादातर गहने राजस्थान से बरामद कर लिए गए हैं। लेकिन कितनी मात्रा में सोना-चांदी वापस मिला, कितने रुपये का सामान बरामद हुआ और क्या कोई गहना अब भी गायब है, इसका पूरा विवरण फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

    आरोपी कर्मचारी करीब दो साल से दुकान में काम कर रहा था

    जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, आरोपी खुमानसिंग दासाना की उम्र करीब 22 साल बताई गई है और वह लगभग दो साल से दुकान में काम कर रहा था। दुकान की गतिविधियों और चाबी तक उसकी पहुंच इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हालांकि, चोरी की योजना कब बनाई गई, दूसरे आरोपियों की इसमें क्या भूमिका थी और चोरी के बाद गहनों को कहां-कहां रखा गया, इन सवालों के जवाब जांच के विस्तृत निष्कर्षों से ही स्पष्ट होंगे।

    पुलिस हिरासत में चारों आरोपी

    गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को मुंबई लाकर अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया, ताकि चोरी के पूरे घटनाक्रम, आरोपियों की भूमिका और बरामदगी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सके।

    फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल चोरी हुए गहनों की पूरी बरामदगी और उनकी सटीक कीमत का है। पुलिस जांच के आगे बढ़ने के साथ शेष सामान, कथित साजिश और वारदात में शामिल प्रत्येक आरोपी की भूमिका से संबंधित अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

  • Mumbai Human Trafficking Case: मालाड का शख्स गिरफ्तार, जेजू द्वीप तक तस्करी की जांच

    Mumbai Human Trafficking Case: मालाड का शख्स गिरफ्तार, जेजू द्वीप तक तस्करी की जांच

    मुंबई में मानव तस्करी के कथित प्रयास में मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा गिरफ्तार। जेजू द्वीप, फर्जी पासपोर्ट, ₹7.5 लाख के कथित भुगतान पर मुंबई पुलिस कर रही है जांच।

    मुंबई: मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा (47) को एक महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप ले जाने की कथित योजना के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की। इससे एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोक लिया था। मामले में फर्जी पासपोर्ट, विदेश भेजने वाले कथित एजेंटों और ब्रिटेन तथा फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की जांच की जा रही है।

    इस मामले में कथित भुगतान की रकम भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 50,000 रुपये अग्रिम और महिला के जेजू द्वीप पहुंचने के बाद 7 लाख रुपये मिलने का वादा किया गया था। हालांकि, इस रकम के वास्तविक भुगतान और पूरे नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच जारी है।

    मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट स्कैन करते ही आया अलर्ट

    इमिग्रेशन अधिकारी विजया सोनावणे (51) के अनुसार, विल्सन सुनील डिसिल्वा का पासपोर्ट सिस्टम में स्कैन किए जाने पर मानव तस्करी से संबंधित अलर्ट दिखाई दिया था। अलर्ट में संकेत था कि वह पहले भी महिलाओं को फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश ले जा चुका है।

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    इसके बाद अधिकारियों ने उससे पूछताछ की और मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।

    जांच के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि आर्थिक परेशानियों के कारण उसने पांच लोगों के लिए फर्जी पासपोर्ट हासिल किए थे। आरोप है कि वह इन लोगों को विदेश ले जाने के दौरान कभी उनका पति तो कभी पिता बनकर पेश आता था। इस कथित बयान के आधार पर पुलिस पुराने मामलों और विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है।

    महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया ले जाने की कथित योजना

    इस मामले में प्रस्तावित यात्रा मार्ग मुंबई से मलेशिया होते हुए दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप तक बताया गया है। पुलिस के सामने यह जांचना महत्वपूर्ण है कि महिला को किस उद्देश्य से विदेश ले जाया जा रहा था, यात्रा की व्यवस्था किसने की थी और आरोपी को भुगतान करने का प्रस्ताव किस व्यक्ति या एजेंट ने दिया था।

    जेजू दक्षिण कोरिया का एक द्वीप है। इस मामले में उसका नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित योजना में महिला को वहीं पहुंचाने की बात सामने आई है। हालांकि, महिला की यात्रा का उद्देश्य, उसे दिए गए प्रस्ताव और उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने मामलों की भी जांच

    पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने पहले महिलाओं और बच्चों को फर्जी पासपोर्ट के जरिए ब्रिटेन और फ्रांस पहुंचाने में क्या भूमिका निभाई थी। इन पुराने मामलों में कथित रूप से विदेश ले जाए गए लोगों की पहचान, उनकी यात्रा के दस्तावेज और दूसरे संभावित आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस उन एजेंटों की तलाश में भी है जिन्होंने कथित तौर पर डिसिल्वा से संपर्क किया था। जांच का एक अन्य पहलू यह पता लगाना है कि पासपोर्ट तैयार कराने, यात्रा की व्यवस्था करने और विदेश पहुंचाने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

    सरकारी या इमिग्रेशन अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित होने या इस मामले में किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

    मुंबई एयरपोर्ट पर फर्जी पासपोर्ट के अन्य मामले भी सामने आए

    मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले इससे पहले भी सामने आए हैं। 5 अक्टूबर 2026 को तीन विदेशी नागरिकों को कथित फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में भी एजेंटों की भूमिका जांच के दायरे में थी।

    इसके अलावा, सहार पुलिस ने मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामलों में 20 एजेंटों को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 10 अगस्त 2026 तक सहार पुलिस के कुल 4,229 अपराध संबंधी FIR में से 1,459 पासपोर्ट फर्जीवाड़े से जुड़े थे।

    मानव तस्करी के मामलों में क्या है सबसे अहम सवाल?

    इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला को विदेश ले जाने की वास्तविक योजना क्या थी और क्या इस कथित प्रयास के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसके साथ ही, पुलिस को ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करनी होगी और उन लोगों की पहचान करनी होगी जिन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश ले जाया गया था।

  • मलाड में अमन सोनी की संदिग्ध मौत: परिवार के आरोप, पुलिस जांच और मृतक की पूरी जानकारी

    मलाड में अमन सोनी की संदिग्ध मौत: परिवार के आरोप, पुलिस जांच और मृतक की पूरी जानकारी

    मुंबई के मलाड में अमन सोनी की संदिग्ध मौत के मामले में चार दोस्तों को हिरासत में लिया गया। परिवार ने नशीले इंजेक्शन और शराब पिलाने का आरोप लगाया।

    मुंबई: मलाड पूर्व स्थित अप्पापाड़ा में अमन सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में कुरार पुलिस जांच कर रही है। परिवार ने आरोप लगाया है कि अमन को घर से ले जाकर नशीले पदार्थ के इंजेक्शन लगाए गए और शराब पिलाई गई। घटना से जुड़ा एक कथित वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में अमन के साथ मौजूद चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों से होनी है।

    कौन था अमन सोनी?

    अमन सोनी मुंबई के कुरार इलाके में रहने वाला युवक था। उसकी उम्र 19 वर्ष बताई गई है। परिवार के मुताबिक, अमन पहले नशीले पदार्थों का सेवन करता था, लेकिन दोस्तों के साथ विवाद होने के बाद उसने नशा छोड़ दिया था। परिवार का आरोप है कि घटना वाले दिन उसके परिचित उसे घर से अपने साथ ले गए थे।

    अप्पापाड़ा के उद्यान में क्या हुआ था?

    यह घटना मलाड पूर्व के कुरार इलाके में स्थित शारदाबाई गोविंद पवार सार्वजनिक उद्यान में हुई। परिवार का आरोप है कि अमन को वहां ले जाने के बाद नशीले पदार्थ के इंजेक्शन लगाए गए और शराब भी पिलाई गई। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।

    घटना से जुड़े कथित वीडियो में कुछ युवकों के उद्यान में मौजूद होने और एक युवक को इंजेक्शन लगाए जाने का दावा किया गया है। परिवार ने वीडियो में दिखाई देने वाले युवक की पहचान अमन के रूप में की है।

    चार युवक हिरासत में, पांच लोगों पर मामला दर्ज होने की जानकारी

    शुरुआती पुलिस कार्रवाई में अमन के साथ मौजूद चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। बाद की जानकारी में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने का उल्लेख भी सामने आया है। इनमें चार लोगों को अमन का परिचित बताया गया, जबकि पांचवें व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।

    पुलिस जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?

    कुरार पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस के मुताबिक, अमन को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। शुरुआती जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अमन को कौन-सा पदार्थ दिया गया था, क्या उसे जबरन इंजेक्शन लगाया गया और उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर चिकित्सकीय सहायता क्यों नहीं मिली। साथ ही, नशीला पदार्थ कहां से आया और घटना में प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसकी भी जांच जरूरी है।

    फिलहाल, अमन की मौत की असली वजह और परिवार के आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।

  • मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

    मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

    मुंबई में कथित CDR रैकेट में पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल शामिल हैं। जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी सामने आई।

    मुंबई: कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR) और मोबाइल लोकेशन डेटा की कथित अवैध सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी, 520 से अधिक SDR और 420 से ज्यादा IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

    मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार तक फैले कथित नेटवर्क के नौ संदिग्ध सदस्यों की पहचान होने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि संवेदनशील मोबाइल डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

    खोए हुए मोबाइल फोन खोजने के नाम पर सामने आया मामला

    जांच के अनुसार, यह मामला सोशल मीडिया पर खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन वापस दिलाने का दावा करने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा है। आरोपी ने इंस्टाग्राम पर इस तरह की सेवा का प्रचार किया था। आरोप है कि उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए अपना परिचय “इंस्पेक्टर संजय” के रूप में दिया और मोबाइल फोन तलाशने के लिए संपर्क करने वाले लोगों से पैसे लिए।

    क्राइम ब्रांच को सूचना मिलने के बाद जोगेश्वरी पश्चिम में कार्रवाई की गई। आरोपी के पास मौजूद दो मोबाइल फोन की जांच के दौरान कथित तौर पर CDR, SDR और लोकेशन डेटा हासिल करने से जुड़े संपर्कों की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और दूसरे राज्यों में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की गई।

    जांच में पांच गिरफ्तार, दो पुलिस कांस्टेबल भी शामिल

    इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में झारखंड और बिहार पुलिस के दो सक्रिय कांस्टेबल शामिल हैं। हालांकि, दोनों की कथित भूमिका क्या थी, उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल किया था या नहीं और डेटा हासिल करने में उनकी वास्तविक भागीदारी कितनी थी, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

    ओशिवारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले की प्राथमिकी संख्या 935/2026 और क्राइम ब्रांच केस संख्या 68/2026 बताई गई है। मुख्य संदिग्ध को 22 जून 2026 को जोगेश्वरी पश्चिम में पकड़े जाने का विवरण भी सामने आया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

    550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी मिली

    प्रारंभिक जांच में सामने आए डेटा का विवरण इस प्रकार है:

    • लगभग 50 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
    • 520 से अधिक सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR)
    • 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी
    • 420 से अधिक IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी
    • सात मोबाइल फोन जब्त

    CDR में आमतौर पर कॉल का समय, अवधि और संबंधित नंबरों जैसी जानकारी हो सकती है। SDR में मोबाइल कनेक्शन के ग्राहक से जुड़ी जानकारी हो सकती है, जबकि IMEI मोबाइल उपकरण की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर है। लोकेशन डेटा का विवरण इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी किस तकनीक और रिकॉर्ड से हासिल की गई थी।

    इन आंकड़ों को सीधे प्रभावित व्यक्तियों की संख्या नहीं माना जा सकता। एक ही मोबाइल नंबर से कई रिकॉर्ड जुड़े हो सकते हैं और एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा मोबाइल नंबर भी हो सकते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित नेटवर्क से कुल कितने लोगों की निजी जानकारी प्रभावित हुई।

    मोबाइल डेटा का गलत इस्तेमाल कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

    कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी संवेदनशील होती है। यदि ऐसी जानकारी अनधिकृत लोगों तक पहुंच जाए, तो उससे किसी व्यक्ति के संपर्कों, कॉल करने के पैटर्न और मोबाइल उपकरण की गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार इसका इस्तेमाल ठगी, निजी जानकारी जुटाने या किसी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किए जाने का जोखिम हो सकता है।

    हालांकि, इस मामले में बरामद या सप्लाई किए गए डेटा का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में हुआ है या किसी व्यक्ति की निजता को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, इसकी पुष्टि जानकारी इस वक्त नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि डेटा के बदले कितनी रकम दी जाती थी, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और क्या किसी दूरसंचार कंपनी या सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग हुआ था।

    कानूनी पहलू पर भी जरूरी जांच

    कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी तक पहुंच अधिकृत प्रक्रिया और लागू कानूनों के अधीन होती है। किसी व्यक्ति के पास मोबाइल नंबर होने से उसे उस नंबर के मालिक के कॉल रिकॉर्ड या लोकेशन डेटा तक पहुंच का अधिकार नहीं मिल जाता।

    खोया मोबाइल खोजने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें

    मोबाइल फोन खो जाने पर अनजान सोशल मीडिया खातों या खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों को बिना सत्यापन पैसे देना जोखिमपूर्ण हो सकता है। फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में नागरिक संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध CEIR सुविधा के जरिए मोबाइल ब्लॉक करने की प्रक्रिया देख सकते हैं। धोखाधड़ी होने पर साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर की जा सकती है। तत्काल वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य कथित डेटा सप्लाई के स्रोत, नेटवर्क में शामिल बाकी संदिग्धों की भूमिका और संवेदनशील मोबाइल जानकारी के इस्तेमाल का पता लगाना है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि डेटा किस माध्यम से हासिल किया गया और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है।

  • भाईंदर के प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार पर छापा, 17 महिलाओं को बचाने का दावा

    भाईंदर के प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार पर छापा, 17 महिलाओं को बचाने का दावा

    भाईंदर पूर्व के प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार में छापेमारी के दौरान 17 महिलाओं को बचाने, 10 कर्मचारियों की गिरफ्तारी और नकदी व शराब जब्ती के दावों की पूरी जानकारी।

    मीरा-भाईंदर: मुंबई से सटे भाईंदर पूर्व के नवघर रोड स्थित प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार पर 9 अक्टूबर को मीरा-भाईंदर, वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस की क्राइम ब्रांच की छापेमारी की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई में कथित तौर पर एक छिपे कमरे से 10 महिलाओं को बाहर निकाला गया, जबकि परिसर से कुल 17 महिलाओं को बचाए जाने का दावा है। कार्रवाई में कर्मचारियों की गिरफ्तारी, ग्राहकों से पूछताछ और नकदी व शराब की जब्ती से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। हालांकि, इन सभी आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

    प्यासा बार में छिपे कमरे से 10 महिलाओं को निकालने का दावा

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने नवघर रोड स्थित प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर कमरे की छिपी हुई संरचना सामने आई, जहां से 10 महिलाओं को बाहर निकाला गया।

    इस मामले में कुल 17 महिलाओं को बचाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, बाकी सात महिलाएं परिसर के किस हिस्से में मिलीं और सभी महिलाओं को किस परिस्थिति में बाहर निकाला गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कमरे का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था, वहां आने-जाने की व्यवस्था कैसी थी और क्या किसी महिला को वहां रोककर रखा गया था। इन सवालों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेज जरूरी हैं।

    10 कर्मचारियों की गिरफ्तारी, 15 ग्राहकों की स्थिति स्पष्ट नहीं

    छापेमारी से जुड़ी जानकारी में बार के मैनेजर, कैशियर, वेटर और स्टीवर्ड समेत कुल 10 कर्मचारियों को गिरफ्तार किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, गिरफ्तार लोगों के नाम, उनकी व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ दर्ज आरोपों का पूरा विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।

    इसके अलावा, बार में मौजूद 15 ग्राहकों के संबंध में भी जानकारी सामने आई है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इन सभी ग्राहकों को हिरासत में लिया गया था, उनसे केवल पूछताछ की गई या किसी अन्य कानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

    इसलिए ग्राहकों की संख्या को गिरफ्तार आरोपियों की संख्या नहीं कहा जा सकता।पुलिस का आधिकारिक बयान अबतक सामने नहीं आया है।

    ₹55 हजार नकद और ₹50 हजार की शराब जब्त होने का दावा

    इस कार्रवाई में ₹55,000 नकद और लगभग ₹50,000 मूल्य की अंग्रेजी शराब जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    हालांकि, नकदी की जब्ती और शराब के मूल्यांकन की पुष्टि के लिए आधिकारिक जब्ती सूची या पुलिस का विस्तृत बयान उपलब्ध होना जरूरी है। शराब कितनी मात्रा में मिली, उसे किस आधार पर जब्त किया गया और क्या इस संबंध में अलग से कोई मामला दर्ज हुआ, इसकी जानकारी भी अभी स्पष्ट नहीं है।

    बार के मालिक और लाइसेंसधारक की भूमिका पर भी नजर

    इस मामले में केवल कर्मचारियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि बार के संचालन और प्रबंधन से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। यह पता लगाना जरूरी होगा कि बार का लाइसेंस किसके नाम पर है, संचालन की जिम्मेदारी किसके पास थी और कथित छिपे कमरे के निर्माण या इस्तेमाल के संबंध में कोई नियम उल्लंघन हुआ था या नहीं।

    फिलहाल बार के मालिक या लाइसेंसधारक के खिलाफ कार्रवाई, लाइसेंस रद्द किए जाने, परिसर सील होने या नगर पालिका की ओर से किसी कदम की पुष्टि नहीं है।

    भाईंदर क्षेत्र में इससे पहले भी कुछ ऑर्केस्ट्रा बारों में कथित गुप्त कमरों को लेकर पुलिस कार्रवाई हो चुकी हैं।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं?

    इस मामले में संबंधित पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर नंबर, लागू कानूनी धाराएं, गिरफ्तार लोगों की अदालत में पेशी और उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, 17 महिलाओं को बचाए जाने के दावे, 15 ग्राहकों की स्थिति और जब्त नकदी व शराब के आंकड़ों की पुष्टि भी जरूरी है।

    महिलाओं को बचाए जाने की जानकारी अपने आप में मानव तस्करी, जबरन काम कराने या बंधक बनाए जाने का प्रमाण नहीं है। इन पहलुओं पर निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

    फिलहाल प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार की छापेमारी से जुड़े आंकड़ों और कार्रवाई के विवरण की आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। एमबीवीवी पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने पर गिरफ्तारी, जब्ती और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • डोसे में चूहे के वीडियो से ₹25 लाख की मांग, दो महिलाएं पकड़ी गईं

    डोसे में चूहे के वीडियो से ₹25 लाख की मांग, दो महिलाएं पकड़ी गईं

    बोरीवली के राधाकृष्ण होटल में डोसे में चूहा मिलने का वीडियो वायरल होने के बाद होटल मालिक से ₹25 लाख की कथित जबरन वसूली की मांग हुई। ₹6 लाख लेते दो महिलाएं पुलिस के जाल में फंसीं।

    मुंबई: बोरीवली के राधाकृष्ण होटल में डोसे के अंदर चूहा मिलने का वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब कथित जबरन वसूली के मामले तक पहुंच गया है। होटल मालिक से कथित तौर पर ₹25 लाख की मांग की गई थी। बातचीत के बाद रकम ₹7 लाख तय हुई। इसमें से ₹1 लाख दिए जाने के बाद बाकी ₹6 लाख लेते समय दो महिलाओं को पुलिस ने पकड़ लिया। मामले में बोरीवली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।

    पुलिस के अनुसार, पकड़ी गई महिलाओं की पहचान मानसी अमित आचार्य, उम्र 36 वर्ष और किंजल सुभाष भाटिया, उम्र 29 वर्ष के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने होटल मालिक से कार्रवाई और मामला दर्ज कराने से बचने के लिए पैसों की मांग की।

    24 सितंबर की रात शुरू हुआ था विवाद

    जानकारी के अनुसार, 24 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे बोरीवली पश्चिम स्थित राधाकृष्ण होटल-बैंक्वेट-फास्ट फूड में एक ग्राहक को दिए गए मसाला डोसे में चूहा मिलने का आरोप सामने आया था। इस घटना का वीडियो बनाया गया और 26 सितंबर के आसपास वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने होटल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान केवल डोसे में चूहा मिलने की शिकायत ही नहीं, बल्कि होटल में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कमियां भी सामने आने की जानकारी है।

    एफडीए की कार्रवाई में होटल का खाद्य लाइसेंस निलंबित किया गया। निरीक्षण के दौरान मक्खियां, फर्श पर रखी खाद्य सामग्री, खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण और नाली एवं जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी गंदगी जैसी कमियां सामने आई थीं। महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे और खाद्य विभाग के संयुक्त आयुक्त संतोष कृष्ण कांबळे के स्तर पर विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है।

    ₹25 लाख से शुरू हुई कथित मांग

    पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होटल मालिक से संपर्क कर कथित तौर पर ₹25 लाख की मांग की गई। बातचीत के बाद रकम घटाकर ₹7 लाख करने पर सहमति बनी।

    इस रकम में से ₹1 लाख 30 सितंबर को दिए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। इसके बाद बाकी ₹6 लाख 5 अक्टूबर को देने की बात तय हुई। पुलिस ने इसी दौरान जाल बिछाया।

    5 अक्टूबर को करीब शाम 5:45 बजे जब दोनों महिलाएं बाकी ₹6 लाख लेने पहुंचीं, तब पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पुलिस ने इस मामले में बोरीवली पुलिस स्टेशन में CR No. 1265/2026 दर्ज किया है।

    गिरफ्तारी की स्थिति में क्या है?

    इस मामले में दोनों महिलाओं को ₹6 लाख लेते समय पुलिस ने पकड़ा है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में उनकी आगे की कानूनी स्थिति को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। इसलिए फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दोनों पुलिस की कार्रवाई में पकड़ी गई हैं और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित पैसों की मांग में इनके अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। उपलब्ध जानकारी में अमर नाम के एक व्यक्ति का भी उल्लेख सामने आया है, जिसकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    वीडियो बनाने और वायरल करने को लेकर भी जांच

    डोसे में चूहा मिलने की मूल घटना और उसका वीडियो कैसे बना, इसकी भी जांच जारी है। उपलब्ध जानकारी में अमित त्रिवेदी का नाम उस घटनाक्रम से जुड़ा बताया गया है। हालांकि मूल घटना में चूहा डोसे तक कैसे पहुंचा, इसे लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    यानी एक तरफ होटल में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़ी एफडीए की कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी तरफ इसी घटना को लेकर होटल मालिक से कथित रूप से पैसे मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस अब दोनों घटनाक्रमों के बीच की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

    पुलिस टीम ने ऐसे पकड़ा

    इस कार्रवाई में उत्तर क्षेत्र-2 के पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे, सहायक पुलिस आयुक्त संतोष धनवटे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पुष्पलता मंडले, पुलिस निरीक्षक अपराध दिग्विजय पाटील के मार्गदर्शन में अपराध जांच टीम ने कार्रवाई की।

    टीम में राजू कोरडे, पुलिस कांस्टेबल 092951 पेडणेकर, पुलिस कांस्टेबल 111809 जाधव और महिला पुलिस कांस्टेबल 112473 नवले शामिल थीं।

    मामला अब किस दिशा में जाएगा?

    बोरीवली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। धारा 308(2) जबरन वसूली से संबंधित है, जबकि धारा 3(5) समान उद्देश्य से किए गए कृत्य में साझा मंशा से जुड़ी है।

    अब पुलिस कथित रूप से मांगी गई रकम, पहले दिए गए ₹1 लाख, 5 अक्टूबर को लिए जाने वाले ₹6 लाख, फोन और अन्य संपर्कों तथा इस पूरे घटनाक्रम में शामिल संभावित अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। वहीं डोसे में चूहा मिलने की मूल घटना और होटल की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी एफडीए कार्रवाई भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा बनी हुई है।

  • दुबई में ₹72 लाख का Gold Fraud, नकली Jewellery से असली सोना बदला; 2 गिरफ्तार

    दुबई में ₹72 लाख का Gold Fraud, नकली Jewellery से असली सोना बदला; 2 गिरफ्तार

    दुबई की Kanz Jewels में ₹72 लाख के Gold Fraud का आरोप, नकली Jewellery से असली सोना बदला गया। शिकायत के बाद ₹50 लाख मांगने का भी आरोप।

    मुंबई: दुबई की Jewellery firm Kanz Jewels में करीब ₹72 लाख के सोने के आभूषणों की कथित चोरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी के दो कर्मचारियों ने असली Jewellery निकालकर उसके वजन के बराबर नकली आभूषण Stock में रख दिए। मामला सामने आने और शिकायत के बाद दोनों ने कथित तौर पर कंपनी के executive manager Devendra Dhanak को फोन कर ₹50 लाख देने की धमकी दी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले में Subroto/Subrato Burman और Ajay Pathar को गिरफ्तार किया है।

    दोनों आरोपी 2017 से कंपनी से जुड़े थे। Burman Sales In-charge के तौर पर काम करता था, जबकि Ajay Pathar Cashier था। पुलिस की जांच में अब कथित Gold Theft के साथ-साथ नकली Jewellery के source, चोरी के सोने की बिक्री और भारत भेजी गई रकम की पूरी trail खंगाली जा रही है।

    नकली Jewellery से कैसे हुआ खेल?

    जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों ने कथित तौर पर असली सोने के आभूषणों को पुराने सोने के तौर पर बेचने का तरीका अपनाया। इसके बाद असली Jewellery के वजन के बराबर नकली आभूषण तैयार कर उन्हें वापस Stock में रख दिया जाता था।

    इन Jewellery को कथित तौर पर damaged या altered Stock के तौर पर दिखाया जाता था। इस तरह असली सोना धीरे-धीरे Stock से बाहर निकलता रहा और उसकी जगह नकली Jewellery आती रही।

    मामले का अहम सवाल यही है कि नकली आभूषण तैयार कहां किए गए और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों के अलावा किसी और की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    675 ग्राम की जांच में खुला नकली सोने का राज

    जून 2026 में कंपनी को Stock में रखे कुछ damaged या altered gold पर शक हुआ। इसके बाद करीब 675 ग्राम सोने की जांच की गई। इस जांच में 386 ग्राम नकली पाया गया।

    इसके बाद Stock verification के दौरान 84.33 ग्राम अतिरिक्त नकली Jewellery मिलने की बात सामने आई। यानी जांच के अलग-अलग चरणों में 470.33 ग्राम नकली Jewellery सामने आई।

    हालांकि, इस आंकड़े को ₹72 लाख की कथित चोरी का कुल वजन नहीं माना जा सकता। ₹72 लाख की रकम कथित चोरी किए गए आभूषणों की कीमत है, जबकि 386 ग्राम और 84.33 ग्राम की मात्रा जांच में मिले नकली Stock से संबंधित है।

    शिकायत के बाद ₹50 लाख की कथित धमकी

    कंपनी को कथित चोरी का पता चलने के बाद मामला सिर्फ Gold Theft तक सीमित नहीं रहा। शिकायतकर्ता Devendra Dhanak, जो Kanz Jewels में General Manager के तौर पर काम करते हैं, को कथित तौर पर दुबई से फोन किया गया।

    आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने उनसे ₹50 लाख की मांग की और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। कथित तौर पर यह भी कहा गया कि दुकान से एक किलो और सोना गायब किया जा सकता है।

    यही वह point है जिसने मामले को चोरी के साथ कथित extortion और criminal intimidation के angle से भी गंभीर बना दिया।

    चोरी के सोने की रकम भारत भेजने का आरोप

    जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर चोरी किए गए असली सोने से मिलने वाली रकम भारत भेजी जाती थी। रिपोर्ट में इसके लिए Ajay Pathar की भूमिका का उल्लेख है।

    अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि रकम भारत में किन accounts या लोगों तक पहुंची। उपलब्ध जानकारी में अभी तक पूरी banking trail, रकम पाने वाले व्यक्तियों या चोरी के सोने की recovery का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।

    यही कारण है कि ₹72 लाख के कथित चोरी किए गए सोने या उसकी बिक्री से मिली रकम की बरामदगी इस मामले में सबसे अहम सवालों में बनी हुई है।

    आरोपी Subroto Burman और Ajay Pathar कौन हैं?

    Subroto/Subrato Burman और Ajay Pathar दोनों 2017 से Kanz Jewels से जुड़े थे। Burman Sales In-charge था, जबकि Pathar Cashier के पद पर काम करता था।

    पुलिस के मुताबिक, Burman भारत आने के बाद पश्चिम बंगाल के एक नक्सल प्रभावित इलाके में भी ठहरा था। आरोप है कि उसे उम्मीद थी कि वहां पुलिस उस तक आसानी से नहीं पहुंच पाएगी।

    दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें Police Custody में भेजा गया।

    Kanz Jewels का Dubai connection

    Kanz Jewels Dubai के Gold Souq से जुड़ा पुराना Jewellery business है। कंपनी की public information के मुताबिक इसका Dubai में कई outlets के साथ manufacturing setup भी है। कंपनी के General Manager Devendra Dhanak का नाम भी उसके business activities से जुड़ा रहा है।

    2025 में Kanz Jewels को ‘Iconic Brand of the Year’ award भी मिला था। ऐसे में कंपनी के अंदर सामने आया यह alleged insider fraud केवल financial loss का मामला नहीं है, बल्कि high-value jewellery business में Stock verification और internal controls पर भी सवाल खड़े करता है।

    अब पुलिस के सामने सबसे बड़े सवाल

    जांच में अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ₹72 लाख के कथित चोरी किए गए Jewellery का कितना हिस्सा बरामद हुआ है, नकली Jewellery किसने तैयार की, दोनों आरोपियों के बीच पैसों और Jewellery को लेकर क्या communication हुआ और भारत में भेजी गई रकम की पूरी trail कहां तक जाती है।

    इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या इस मामले में Burman और Pathar के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति या कोई अन्य link शामिल था।

    फिलहाल दोनों आरोपी Police Custody में हैं और मामले की जांच जारी है। सबसे अहम जानकारी अब कथित चोरी के सोने की recovery, financial trail और नकली Jewellery के source से जुड़ी जांच से सामने आ सकती है।

  • स्कूल के पास नशेड़ियों का आतंक? घाटकोपर में नाबालिग की गर्दन पर टोचा इंजेक्शन

    स्कूल के पास नशेड़ियों का आतंक? घाटकोपर में नाबालिग की गर्दन पर टोचा इंजेक्शन

    घाटकोपर के बर्वेनगर में खेल रहे नाबालिग की गर्दन में कथित तौर पर इंजेक्शन टोचा गया। अस्पताल में इलाज जारी, पुलिस जांच में जुटी।

    मुंबई: घाटकोपर स्थित बर्वेनगर इलाके में स्कूल के पास खेल रहे एक नाबालिग बच्चे की गर्दन में कथित तौर पर इंजेक्शन टोचे जाने की घटना से इलाके में चिंता बढ़ गई है। बच्चा अपने दोस्तों के साथ मैदान में खेल रहा था, तभी वहां मौजूद नशा करने वाले लोगों के समूह ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट करने के बाद गर्दन में इंजेक्शन टोच दिया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे संत मुक्ताबाई महानगरपालिका सर्वसाधारण अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

    मामला बर्वेनगर में महापालिका स्कूल क्रमांक 3 के पास स्थित मैदान का बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बच्चा दोस्तों के साथ खेलने गया था। इसी दौरान वहां नशा कर रहे लोगों के एक समूह से उसका सामना हुआ। बच्चे को पकड़कर उसके साथ मारपीट की गई और उसकी गर्दन में इंजेक्शन लगाया गया। कुछ ही देर बाद उसे चक्कर आने लगा और वह मैदान में गिर पड़ा। साथ मौजूद बच्चों ने घटना की जानकारी उसके परिवार को दी, जिसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।

    इंजेक्शन में क्या था, अभी साफ नहीं

    घटना का सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चे की गर्दन में टोचे गए इंजेक्शन में आखिर कौन सा पदार्थ था। अभी इसकी कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इंजेक्शन में किसी खास नशीले पदार्थ के होने का अभी तक कोई दावा सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच और मेडिकल जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इंजेक्शन में क्या था और बच्चे की तबीयत बिगड़ने की वजह क्या रही।

    इस्तेमाल की गई सुई या सिरिंज अगर पहले किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में इस्तेमाल हुई थी, तो संक्रमण का खतरा भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूषित सुई से हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी जैसे रक्त से फैलने वाले संक्रमण का जोखिम हो सकता है। ऐसे में बच्चे की मेडिकल जांच और डॉक्टरों की निगरानी इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है।

    स्कूल के पास नशेड़ियों का जमावड़ा क्यों?

    बर्वेनगर के जिस इलाके में घटना हुई, वहां लंबे समय से नशा करने वाले लोगों की मौजूदगी को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। मैदान के आसपास का कुछ हिस्सा अपेक्षाकृत सुनसान बताया जाता है। आसपास खड़े पुराने या भंगार वाहनों में भी नशा करने वालों के बैठने की बात सामने आई है।

    सबसे गंभीर बात यह है कि इसी क्षेत्र के पास महापालिका स्कूल है और बच्चे यहां खेलने आते हैं। ऐसे में मैदान की सुरक्षा, रोशनी, सीसीटीवी, नियमित निगरानी और पुलिस गश्त को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    मुंबई के पार्क और मैदान पहले से निगरानी में

    मुंबई के सार्वजनिक उद्यानों और खुले मैदानों में नशा करने वालों की मौजूदगी का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। इस साल मार्च में सार्वजनिक उद्यानों और खुले स्थानों में नशे के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए बीएमसी और मुंबई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की बात सामने आई थी। इसमें उद्यानों और खेल मैदानों में अचानक जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया था।

    अप्रैल में भी मुंबई के उद्यानों में नशा, शराब और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतों के बीच रात की पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग उठी थी। जुलाई में राज्य सरकार की ओर से ड्रग्स-फ्री मुंबई अभियान भी शुरू किया गया था। ऐसे में बर्वेनगर की यह घटना सार्वजनिक मैदानों में इन उपायों की जमीनी निगरानी पर सवाल खड़े करती है।

    एक दिन पहले मालाड में भी सामने आया था इंजेक्शन का मामला

    मुंबई में सार्वजनिक जगहों पर नशे से जुड़ी घटनाओं को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि एक दिन पहले मालाड पूर्व के आप्पापाड़ा इलाके के एक बीएमसी गार्डन में 19 वर्षीय अमन सोनी की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया था। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि कुछ युवक उसे गार्डन ले गए थे और वहां ड्रग्स का इंजेक्शन दिया गया। पुलिस ने चार युवकों को हिरासत में लेकर जांच शुरू की थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की बात सामने आई थी।

    मालाड और घाटकोपर की घटनाओं के बीच किसी तरह का सीधा संबंध अभी सामने नहीं आया है। दोनों मामलों को एक ही गिरोह या एक ही नशीले पदार्थ से जोड़ने का भी कोई आधार नहीं है। लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने मुंबई के सार्वजनिक उद्यानों और मैदानों में नशे की समस्या तथा बच्चों और युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई है।

    पुलिस जांच में अब इन सवालों के जवाब अहम

    घाटकोपर पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे पर हमला करने वाले कितने लोग थे, उनकी पहचान हुई या नहीं, घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है या नहीं और इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद हुई या नहीं।

    इसके साथ ही पुलिस और बीएमसी के स्तर पर यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि इस मैदान में पहले नशे से जुड़ी कोई शिकायत मिली थी या नहीं, वहां नियमित गश्त होती है या नहीं और बच्चों के खेलने वाले इस स्थान पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं।

    फिलहाल बच्चे का इलाज जारी है और घटना में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन की वास्तविक प्रकृति तथा आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • मालवणी के बंद मकान में महिला का सड़ा-गला शव मिला

    मालवणी के बंद मकान में महिला का सड़ा-गला शव मिला

    मालवणी के कलेक्टर कंपाउंड में बंद किराये के मकान से महिला का सड़ा-गला शव मिला। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: मलाड पश्चिम, मालवणी के कलेक्टर कंपाउंड में बंद किराये के मकान से सोमवार शाम एक महिला का सड़ा-गला शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पड़ोसियों को मकान से तेज दुर्गंध आने के बाद घटना का पता चला, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मकान खोलकर अंदर से शव बरामद किया और जांच शुरू कर दी है।

    यह घटना मालाड के मालवणी इलाके में प्लॉट नंबर 3, बांद्रा प्लॉट, गेट नंबर 6 के पास हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार मकान बाहर से बंद था। सूचना मिलने के बाद मालवणी पुलिस मौके पर पहुंची और मकान का दरवाजा खोलकर अंदर जांच की। कमरे में महिला का शव अत्यधिक सड़ी-गली अवस्था में मिला।

    कई दिनों से पड़ा होने की आशंका

    शव की स्थिति को देखते हुए पुलिस को आशंका है कि महिला की मौत कई दिन पहले हुई होगी। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि महिला की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। शव की हालत अधिक खराब होने के कारण मौत के कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

    मालवणी पुलिस ने घटनास्थल पर पंचनामा की कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को कांदिवली पश्चिम के शताब्दी अस्पताल भेज दिया है। पोस्टमार्टम के जरिए मौत का कारण और उससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

    बंद मकान और सीसीटीवी जांच अहम

    पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला की मौत के बाद मकान बाहर से बंद कैसे हुआ। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस इलाके में आने-जाने वाले लोगों और मकान से जुड़े लोगों की गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

    महिला की पहचान और मौत का कारण अभी साफ नहीं

    फिलहाल महिला की पहचान, उसकी उम्र और मकान में वह कितने समय से रह रही थी, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह अकेली रहती थी या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति रहता था। पुलिस इन पहलुओं की जांच कर रही है।

    सबसे अहम बात यह है कि अभी महिला की मौत को हत्या मानने की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत की वजह क्या थी और बंद मकान की स्थिति का इस मामले से क्या संबंध है।

    मालवणी पुलिस मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और महिला की पहचान सामने आने के बाद मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

  • अंधेरी में बीएमसी कार्रवाई की धमकी देकर वसूली, तीन आरोपी गिरफ्तार

    अंधेरी में बीएमसी कार्रवाई की धमकी देकर वसूली, तीन आरोपी गिरफ्तार

    अंधेरी में निर्माण कार्य पर बीएमसी कार्रवाई की धमकी देकर 3 लाख रुपये मांगने का आरोप है। 25 हजार लेते तीन आरोपी पुलिस के जाल में फंसे।

    मुंबई: अंधेरी पूर्व में निर्माण कार्य पर बीएमसी कार्रवाई का डर दिखाकर एक बिल्डर से कथित तौर पर 3 लाख रुपये मांगने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद अंधेरी पुलिस ने जाल बिछाकर 25 हजार रुपये लेते समय संजय धोडामणी, प्रवीण सिंग और जीवन गुलाब पांडे को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या इसी तरीके से दूसरे निर्माण व्यावसायिकों और कंपनियों से भी पैसे वसूले गए थे।

    3 लाख रुपये की मांग, पहले 95 हजार देने का दावा

    मामला अंधेरी पूर्व के ओल्ड नागरदास रोड इलाके का है, जहां एक निर्माण कंपनी का काम चल रहा था। आरोप है कि तीनों आरोपियों ने निर्माण कार्य के खिलाफ मुंबई महानगरपालिका में शिकायत करने और कार्रवाई करवाने की धमकी देकर पैसे की मांग की।

    पुलिस शिकायत के अनुसार आरोपियों ने निर्माण कार्य रुकवाने और महानगरपालिका की कार्रवाई से बचाने के नाम पर 3 लाख रुपये मांगे थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मांग के तहत पहले 95 हजार रुपये दिए जा चुके थे।

    इसके बाद मामले की जानकारी अंधेरी पुलिस को दी गई। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

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    25 हजार रुपये लेते समय पुलिस ने पकड़ा

    पुलिस की कार्रवाई के दौरान अंधेरी पूर्व रेलवे स्टेशन क्षेत्र के आरसा होटल में आरोपियों को 25 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया। तीनों के खिलाफ जबरन वसूली और धमकी से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    मामले में 3 लाख रुपये की कथित मांग, पहले दिए गए 95 हजार रुपये और जाल में पकड़े जाने के दौरान दिए जाने वाले 25 हजार रुपये के बीच पूरी रकम का क्रम भी जांच का हिस्सा है। इसलिए अब तक कितनी रकम वास्तव में वसूली गई, इसका अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

    लेटरहेड से शिकायतें कराने की भी जांच

    मामले की जांच अब केवल इस एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है। पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने कथित तौर पर किसी संगठन के नाम से तैयार लेटरहेड का इस्तेमाल कर निर्माण व्यावसायिकों और कंपनियों के खिलाफ महानगरपालिका तथा पुलिस अधिकारियों के पास शिकायतें कीं।

    जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या पहले शिकायत या कार्रवाई का दबाव बनाया जाता था और उसके बाद संबंधित व्यक्ति से पैसे की मांग की जाती थी।

    यदि इस आशंका की पुष्टि होती है तो मामला केवल एक बिल्डर से कथित वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंधेरी पूर्व, जोगेश्वरी और एमआईडीसी इलाके में इसी तरीके से अन्य लोगों को निशाना बनाए जाने की भी जांच करनी होगी।

    क्या अन्य निर्माण व्यावसायिक भी निशाने पर थे?

    पुलिस यह पता लगा रही है कि तीनों आरोपियों ने इससे पहले कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उनके खिलाफ महानगरपालिका या पुलिस में की गई अन्य शिकायतों के पीछे भी यही लोग थे।

    जांच में कथित लेटरहेड, शिकायतों की प्रतियां, बातचीत और पैसों के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि शिकायतें वास्तविक नागरिक शिकायतों का हिस्सा थीं या कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं।

    अंधेरी में वसूली के मामलों की पृष्ठभूमि

    अंधेरी पूर्व में हाल के महीनों में कारोबारियों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को कथित तौर पर धमकाकर पैसे मांगने के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। सितंबर 2026 में एमआईडीसी क्षेत्र में कारोबारियों और कंपनियों से कथित वसूली के एक अलग मामले में संगठित अपराध के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई थी।

    मुंबई में महानगरपालिका की कार्रवाई का डर दिखाकर कथित वसूली के अन्य मामले भी सामने आते रहे हैं। जुहू में अप्रैल 2026 में एक पूर्व सफाई मार्शल पर बीएमसी अधिकारी बनकर नवीनीकरण के मलबे के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगा था। यह मामला भी वर्तमान प्रकरण से अलग है, लेकिन नागरिक निकाय की कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे मांगने के तरीके की गंभीरता को सामने लाता है।

    बीएमसी शिकायत की सच्चाई भी जांच का अहम हिस्सा

    इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि जिस निर्माण कार्य के खिलाफ शिकायत करने की धमकी दी गई थी, उसके संबंध में वास्तव में बीएमसी में कोई शिकायत की गई थी या नहीं।

    जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत कब की गई, किस विभाग में की गई, उसमें क्या आरोप लगाए गए और उसके बाद महानगरपालिका ने कोई निरीक्षण या कार्रवाई की थी या नहीं।

    अगर शिकायत और कथित पैसे की मांग के बीच कोई सीधा संबंध सामने आता है तो जांच को यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि महानगरपालिका की शिकायत प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए किया गया था या नहीं।

    मकोका की मांग पर अंतिम फैसला जांच के बाद

    निर्माण क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों ने आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका दावा है कि आरोपियों के खिलाफ पहले भी गंभीर मामले दर्ज हैं।

    हालांकि, केवल पुराने मामलों के आरोप या एक नए वसूली प्रकरण के आधार पर मकोका स्वतः लागू नहीं होता। इसके लिए कानून में निर्धारित शर्तों और लगातार संगठित आपराधिक गतिविधि से जुड़े तथ्यों की जांच जरूरी है। इसलिए इस मामले में मकोका लगाने का फैसला जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी मानदंडों के आधार पर ही होगा।

    पुलिस की जांच अब किस दिशा में?

    अंधेरी पुलिस अब तीनों आरोपियों की कथित भूमिका के अलावा यह पता लगाने में जुटी है कि उनके साथ और कौन लोग जुड़े थे, कथित संगठन या लेटरहेड का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था और क्या इसी तरीके से दूसरे निर्माण व्यावसायिकों या कंपनियों से भी पैसे मांगे गए थे।

    फिलहाल इस मामले में तीनों आरोपी पुलिस की कार्रवाई के दायरे में हैं और आगे की जांच से यह स्पष्ट होगा कि मामला एक निर्माण परियोजना से जुड़ी कथित वसूली तक सीमित था या इसके पीछे व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।