Category: Mumbai Crime

Read the latest Mumbai crime news, police investigations and exclusive reports from across the city. Stay informed with updates on cybercrime, fraud, murders, theft, narcotics cases, gang activity, court proceedings and major law enforcement developments, only on Indian FastTrack.

  • Mumbai Cyber Crime: MGL का फर्जी कॉल और ‘Digital Arrest’ का डर, Senior Citizens से ₹14.48 लाख की ठगी; 3 गिरफ्तार

    Mumbai Cyber Crime: MGL का फर्जी कॉल और ‘Digital Arrest’ का डर, Senior Citizens से ₹14.48 लाख की ठगी; 3 गिरफ्तार

    मुंबई में दो cyber fraud मामलों में senior citizens से ₹14.48 लाख की ठगी का आरोप है। Dahisar Police ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    Mumbai Crime News: मुंबई में senior citizens को निशाना बनाकर किए गए cyber fraud के दो अलग-अलग मामलों में Dahisar Police ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों मामलों में पीड़ितों से कुल ₹14.48 लाख की ठगी का आरोप है। एक मामले में 68 वर्षीय Borivali निवासी को Mahanagar Gas Limited MGL का प्रतिनिधि बनकर फोन किया गया और gas bill update करने के नाम पर APK file install कराई गई। दूसरे मामले में 71 वर्षीय Dahisar महिला को money-laundering case में फंसाने और arrest करने की धमकी देकर ₹4.5 लाख transfer कराए गए।

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका इन मामलों तक सीमित थी या इनके पीछे कोई बड़ा cyber fraud network भी सक्रिय है।

    ₹9.98 लाख की ठगी: MGL अधिकारी बनकर किया फोन

    पहला मामला Borivali East में रहने वाले 68 वर्षीय senior citizen से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, 25 जुलाई को उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया। उसने अपना नाम Vinay Sharma बताया और खुद को Mahanagar Gas Limited का प्रतिनिधि बताया।

    कॉलर ने कथित तौर पर senior citizen से कहा कि उनका gas connection बंद हो सकता है और bill details update करनी होंगी।

    इसके बाद उन्हें एक APK file भेजी गई। कथित तौर पर बताया गया कि gas bill की जानकारी update करने के लिए इस application को mobile में install करना जरूरी है।

    Senior citizen ने APK install कर ली। इसके बाद पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने उनके mobile और banking activity तक अनधिकृत पहुंच हासिल की और transactions के जरिए उनके बैंक खातों से करीब ₹9.98 लाख निकाल लिए।

    Bank transactions ने खोला आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कथित money trail को track किया।

    पुलिस के अनुसार, करीब ₹3.49 लाख एक Canara Bank account तक पहुंचे, जिसे Aryan Rajesh Gupta (21) से जोड़ा गया।

    इसके अलावा करीब ₹2 लाख एक ICICI Bank account में पाए गए, जिसे Ankit Sanjay Tiwari (24) से संबंधित बताया गया।

    इसके बाद पुलिस ने Jogeshwari निवासी Aryan Rajesh Gupta और Vasai निवासी Ankit Sanjay Tiwari को गिरफ्तार किया।

    पुलिस को आशंका है कि इन bank accounts का इस्तेमाल कथित cyber fraud से प्राप्त रकम को receive और handle करने के लिए किया गया।

    Dahisar Police Station में इस मामले में 2 अगस्त को Bharatiya Nyaya Sanhita और Information Technology Act की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

    दूसरा मामला: 71 वर्षीय महिला को बनाया ‘Digital Arrest’ का शिकार

    दूसरा मामला Dahisar की 71 वर्षीय महिला से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 2 और 3 जुलाई के बीच महिला को ऐसे लोगों के calls आए, जिन्होंने खुद को senior police officials बताया।

    इनमें से एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपना नाम Rajesh Mishra बताया और महिला से कहा कि उनके खिलाफ money-laundering का मामला दर्ज हुआ है।

    कॉल करने वालों ने कथित तौर पर महिला को arrest करने की धमकी दी। पुलिस के अनुसार, इसके बाद WhatsApp video calls के जरिए महिला को लगातार निगरानी में रहने का दबाव बनाया गया।

    आरोपियों ने कथित तौर पर महिला के bank accounts और balances की जानकारी भी हासिल की।

    Arrest के डर से महिला ने आरोपियों के निर्देश पर ₹4.5 लाख एक IndusInd Bank account में transfer कर दिए। यह account Mahakal Enterprises से जुड़ा बताया गया है।

    Email ID और mobile phone की जांच से आरोपी तक पहुंची पुलिस

    इस मामले की जांच में पुलिस ने उस bank account और उससे जुड़े email ID की जानकारी हासिल की।

    Technical investigation और field-level investigation के बाद पुलिस ने Dhirajkumar Kesaram Prajapati (28) को गिरफ्तार किया।

    पुलिस का आरोप है कि ₹4.5 लाख की रकम से जुड़े bank account और email ID का संबंध Prajapati के mobile phone से सामने आया। पुलिस के अनुसार, email ID को उसके mobile phone का इस्तेमाल करके बनाया और access किया गया था।

    मामले में पुलिस अब अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।

    दो तरीके, एक निशाना—Senior Citizens

    Dahisar Police की इन दो कार्रवाइयों से cyber fraud के दो अलग-अलग तरीके सामने आते हैं।

    पहले मामले में fraudsters ने MGL के नाम और gas bill update का सहारा लेकर APK application install कराई।

    दूसरे मामले में आरोपियों ने police और money-laundering case का डर पैदा करके महिला से पैसे transfer कराए।

    दोनों मामलों में तरीका अलग था, लेकिन senior citizens को भरोसे और डर के जरिए financial fraud का शिकार बनाया गया।

    APK File: WhatsApp पर आई तो गलती से भी install न करें

    Cyber fraudsters कई बार bank KYC, electricity bill, gas connection, delivery, government service या account update जैसे बहानों का इस्तेमाल कर APK file भेजते हैं।

    किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK file को mobile में install नहीं करना चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति application install करने का दबाव बनाए, तो पहले संबंधित company या विभाग की official website या customer-care channel से इसकी पुष्टि करें।

    ‘Digital Arrest’ के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान

    अगर कोई व्यक्ति phone या video call पर खुद को police अधिकारी बताकर criminal case, money laundering या arrest की धमकी देता है और पैसे transfer करने को कहता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

    ऐसे मामलों में caller को bank details, OTP, PIN, password या अन्य confidential information नहीं देनी चाहिए।

    सबसे जरूरी बात—डर के कारण तुरंत पैसा transfer न करें।

    Cyber Fraud हुआ है तो 1930 पर तुरंत शिकायत करें

    अगर online financial fraud हो गया है, तो तुरंत 1930 पर शिकायत करें। National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी cybercrime report की जा सकती है।

    Financial fraud में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है, इसलिए घटना के बाद शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    Dahisar Police की जांच जारी

    पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई DCP Gajanan Deshmane, North Division और ACP Jayraj Ranware, Dahisar Division के मार्गदर्शन में की गई।

    Dahisar cyber police के API Sandeep Pachangne तथा investigation और cyber teams ने technical और field investigation के जरिए दोनों मामलों की जांच की।

    मुंबई पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के कथित links की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास जारी है कि इन cyber fraud मामलों में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

    महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में आरोपियों के संबंध में दी गई जानकारी पुलिस जांच और पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोप साबित होना अभी और आगे न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

  • Shakeel Noorani Arrested: ‘Joru Ka Ghulam’ डायरेक्टर रेप केस में गिरफ्तार, 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी

    Shakeel Noorani Arrested: ‘Joru Ka Ghulam’ डायरेक्टर रेप केस में गिरफ्तार, 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी

    Shakeel Noorani Arrested: ‘Joru Ka Ghulam’ के डायरेक्टर को 33 वर्षीय अभिनेत्री की शिकायत पर Malvani Police ने गिरफ्तार किया, 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी।

    मुंबई: बॉलीवुड फिल्ममेकर Shakeel Noorani को Malvani Police ने 33 वर्षीय अभिनेत्री की शिकायत से जुड़े कथित रेप और यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया है। 73 वर्षीय नूरानी को पुलिस ने Satara जिले के Medha इलाके में स्थित एक फार्महाउस से पकड़ा। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुंबई लाया गया, जहां मेडिकल जांच के बाद अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

    Shakeel Noorani ने ‘Bade Dil Wala’ (1999) और ‘Joru Ka Ghulam’ (2000) जैसी फिल्मों का निर्देशन और निर्माण किया है। मौजूदा मामला एक 33 वर्षीय अभिनेत्री की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि नूरानी ने फिल्म में काम देने और आगामी प्रोजेक्ट पर चर्चा करने के बहाने उसे अपने Malvani स्थित घर बुलाया था।

    2016 में हुई थी पहली मुलाकात

    पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, अभिनेत्री की नूरानी से पहली मुलाकात 2016 में Lokhandwala में आयोजित एक Entertainment Award Function के दौरान हुई थी। अभिनेत्री का आरोप है कि वहां नूरानी ने उससे आगामी फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत की और काम के लिए संपर्क करने को कहा।

    शिकायत के अनुसार, बाद में अभिनेत्री कथित तौर पर स्क्रिप्ट पढ़ने और फिल्म से जुड़े काम पर चर्चा करने के लिए नूरानी के Malvani स्थित घर गई थी।

    अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि वहां उसे एक Drink दिया गया, जिसके बाद वह बेहोश हो गई।

    बेहोशी के बाद वीडियो दिखाने और धमकी देने का आरोप

    शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसे होश आया तो नूरानी ने उसे अपने मोबाइल फोन पर एक कथित वीडियो दिखाया। अभिनेत्री का आरोप है कि उसे धमकी दी गई कि यदि उसने पुलिस से संपर्क किया या अपने परिवार को इस बारे में बताया, तो वीडियो को प्रसारित कर दिया जाएगा।

    अभिनेत्री ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि बाद में इसी कथित वीडियो के जरिए उसे धमकाया गया और उसके साथ कई मौकों पर यौन संबंध बनाए गए।

    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित घटनाओं के बाद नूरानी ने उसे बार-बार गर्भनिरोधक गोलियां दीं।

    ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और मामले की जांच अभी जारी है। आरोप अदालत में साबित होना अभी बाकी हैं।

    मामला 2016 से जुड़ा, 2026 में पुलिस तक पहुंची शिकायत

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अभिनेत्री की नूरानी से मुलाकात 2016 में हुई थी और शिकायत में लगाए गए आरोप भी उसी दौर से जुड़े हैं। अभिनेत्री का आरोप है कि फिल्म में काम के सिलसिले में नूरानी के संपर्क में आने के बाद उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक घटनाएं हुईं और बाद में कथित वीडियो के जरिए उसे धमकाया गया।

    शिकायतकर्ता 2026 में इलाज के लिए आर्थिक मदद की तलाश में मुंबई आई थी। इसी दौरान उसने पुलिस से संपर्क किया और 2016 से जुड़े घटनाक्रम के बारे में अपनी शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत मिलने के बाद Malvani Police ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने शिकायत में बताए गए घटनाक्रम, आरोपी की मौजूदा लोकेशन और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल की। इसी जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि Shakeel Noorani Satara के Medha इलाके में एक फार्महाउस पर मौजूद हैं, जिसके बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार किया।

    Satara के फार्महाउस से कैसे पकड़ा गया Noorani?

    जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर जानकारी मिली कि Shakeel Noorani Satara जिले के Medha इलाके में एक फार्महाउस पर ठहरे हुए हैं।

    इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से उनकी लोकेशन का पता लगाया गया। पुलिस टीम ने उन्हें Medha Police Station लाया। बाद में Malvani Police के अधिकारी Satara पहुंचे और उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया।

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद Noorani की Medha के Rural Hospital में मेडिकल जांच कराई गई और इसके बाद उन्हें मुंबई लाया गया।

    किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, Malvani Police ने मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धाराओं 64(2)(M), 123, 351(2) और 88 के तहत मामला दर्ज किया है।

    जांच में पुलिस कथित वीडियो, शिकायत में लगाए गए आरोपों और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    पुलिस को Noorani की कस्टडी क्यों चाहिए थी?

    पुलिस ने अदालत से आगे की जांच के लिए Noorani की कस्टडी मांगी।

    जांच के प्रमुख बिंदुओं में कथित वीडियो की बरामदगी और जांच, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल और यह पता लगाना शामिल है कि क्या कथित घटनाएं किसी अन्य स्थान पर भी हुई थीं।

    अदालत ने Noorani को 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

    Noorani के वकील ने आरोपों को बताया गलत

    Noorani की ओर से पेश हुए अधिवक्ता Vikas Singh Goar ने अपने मुवक्किल को गलत तरीके से फंसाए जाने का दावा किया है।

    बचाव पक्ष का कहना है कि अभिनेत्री द्वारा लगाए गए आरोप अभी अदालत के सामने साबित नहीं हुए हैं और जांच जारी है।

    कानून के तहत Shakeel Noorani तब तक निर्दोष माने जाएंगे, जब तक अदालत में उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं हो जाते।

    कौन हैं Shakeel Noorani?

    Shakeel Noorani हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े फिल्ममेकर हैं। उन्होंने 1999 में रिलीज हुई ‘Bade Dil Wala’ का निर्देशन किया था। फिल्म में Suniel Shetty और Priya Gill प्रमुख भूमिकाओं में थे। फिल्म के निर्देशक और लेखक के रूप में भी Shakeel Noorani का नाम दर्ज है।

    इसके अलावा वह 2000 में रिलीज हुई ‘Joru Ka Ghulam’ से भी जुड़े रहे हैं।

    नूरानी का नाम इससे पहले अभिनेता Sanjay Dutt से जुड़े एक अलग फिल्म विवाद में भी सामने आ चुका है। Bombay High Court के 2014 के एक फैसले में Shakeel Noorani और Sanjay Dutt के बीच फिल्म ‘Jaan Ki Baazi’ से जुड़े विवाद का उल्लेख है। यह मामला मौजूदा रेप केस से अलग है।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल Shakeel Noorani पुलिस कस्टडी में हैं और मलवानी पुलिस कथित वीडियो, शिकायत में बताए गए घटनाक्रम और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    12 अगस्त को पुलिस कस्टडी की अवधि समाप्त होने के बाद मामले में अगली कानूनी कार्रवाई पर अदालत का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

    मामले की जांच जारी है और अभिनेत्री द्वारा लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • मुंबई के हीरा कारोबार में बड़ा मामला, ₹4 करोड़ के केस में कई व्यापारियों की जांच

    मुंबई के हीरा कारोबार में बड़ा मामला, ₹4 करोड़ के केस में कई व्यापारियों की जांच

    मुंबई के हीरा कारोबार में ₹4 करोड़ के मामले में कई व्यापारियों की जांच, 983 कैरेट हीरों के भुगतान विवाद पर BKC Police ने केस दर्ज किया।

    मुंबई: मुंबई के BKC स्थित Bharat Diamond Bourse से जुड़े हीरा कारोबार में करीब ₹4 करोड़ के कथित भुगतान विवाद ने पुलिस जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एक कारोबारी पर 983 कैरेट के हीरे बिक्री के लिए लेने के बाद उनका भुगतान नहीं करने और माल वापस नहीं करने का आरोप है। इस मामले में BKC Police ने Smit Alpeshbhai Shah के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी द्वारा BDB के कुछ अन्य कारोबारियों से भी इसी तरह हीरे लेने की बात सामने आई है।

    मामला Stellar Gems Private Limited की शिकायत पर दर्ज किया गया है। कंपनी के sales manager Mrugesh Hasmukh Shah ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी की Smit Shah की firm Parshwapadya Diamond के साथ पिछले कुछ महीनों से diamond trading चल रही थी। शुरुआती transactions में payment समय पर मिलने के कारण दोनों के बीच कारोबारी भरोसा बना।

    इसके बाद कारोबार का दायरा बढ़ा और Stellar Gems ने कई consignments में 983 कैरेट के diamonds बिक्री के लिए दिए। इनकी कीमत करीब ₹4 करोड़ बताई गई है।

    भुगतान का समय आया तो संपर्क टूट गया

    शिकायत के मुताबिक, diamonds दिए जाने के बाद तय समय में payment नहीं किया गया। कंपनी की ओर से रकम के लिए आरोपी से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन payment नहीं मिला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि diamonds भी वापस नहीं किए गए।

    मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब जून 2026 के बाद आरोपी ने कथित तौर पर फोन कॉल और messages का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद Stellar Gems की ओर से BKC Police में शिकायत दर्ज कराई गई।

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो सामने आया कि आरोपी ने Bharat Diamond Bourse से जुड़े कुछ अन्य diamond traders से भी इसी तरह diamonds लिए थे। हालांकि, दूसरे कारोबारियों की संख्या, उनसे लिए गए diamonds की मात्रा और उनकी कुल कीमत अभी जांच का विषय है।

    आरोपी तक कारोबारी संपर्क कैसे पहुंचा?

    शिकायत में आरोपी और Stellar Gems के बीच बने कारोबारी संबंध की शुरुआत का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता Mrugesh Hasmukh Shah, Shum Diamond Company के proprietor Rajendra Momaya को जानते थे। शिकायत के अनुसार, Momaya ने उनकी पहचान Smit Shah की firm Parshwapadya Diamond से कराई थी।

    इसके बाद दोनों firms के बीच diamond trading शुरू हुई। शुरुआत में transactions का payment समय पर होने के कारण कारोबारी संबंध आगे बढ़े। इसी दौरान बाद की consignments में बड़ी मात्रा में diamonds दिए गए।

    यानी पुलिस के सामने अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि करीब ₹4 करोड़ के diamonds का payment क्यों नहीं हुआ, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि आरोपी ने दूसरे कारोबारियों के साथ कितने ऐसे transactions किए और उन transactions का बाद में क्या हुआ।

    Diamond Memo/Jangad व्यवस्था भी महत्वपूर्ण कड़ी

    इस मामले को समझने के लिए diamond industry में इस्तेमाल होने वाली Memo या Jangad व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। B2B diamond trade में कई बार supplier दूसरे trader को diamonds बिक्री के लिए देता है। इसे memorandum या consignment arrangement के तहत किया जा सकता है। माल बिकने के बाद settlement हो सकता है और तय शर्तों के अनुसार unsold stock वापस किया जा सकता है।

    Gem & Jewellery Export Promotion Council (GJEPC) के Code of Ethics में memorandum transactions के लिए consignment records, stock register, receiving confirmation और insurance जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।

    इसी वजह से इस मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि Stellar Gems और आरोपी की firm के बीच diamonds किस कारोबारी arrangement के तहत दिए गए थे, delivery और receiving का रिकॉर्ड क्या था तथा payment और return की शर्तें क्या तय थीं।

    हालांकि, इन specific agreements या documents की पूरी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

    जांच अब सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं

    इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि पुलिस की शुरुआती जांच में BDB के अन्य कारोबारियों से भी diamonds लेने की बात सामने आई है। अगर इन transactions की पुष्टि होती है, तो मामले का दायरा एक कंपनी के कथित ₹4 करोड़ के नुकसान से आगे बढ़ सकता है।

    पुलिस को अब अलग-अलग transactions की कड़ियों को जोड़ना होगा। इसमें यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी ने किन कारोबारियों से diamonds लिए, कब लिए, किस value के लिये लिए, payment या return की क्या शर्तें थीं और संबंधित stock की स्थिति क्या है।

    फिलहाल दूसरे कारोबारियों से जुड़े कथित transactions की कुल value सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए करीब ₹4 करोड़ को पूरे मामले का अंतिम financial loss मानना जल्दबाजी होगी।

    ‘फर्जी कंपनी’ बनाने का भी आरोप

    शिकायत में Smit Shah पर diamond traders को कथित तौर पर धोखा देने के लिए bogus company बनाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, यह शिकायत में लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    Police investigation में इस आरोप के साथ-साथ आरोपी की firm, उसके कारोबारी transactions और दूसरे traders के साथ हुए लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। जब तक जांच में इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

    BKC Police ने मामले में cheating और criminal misappropriation के आरोपों के तहत कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

    अब जांच का फोकस आरोपी से जुड़े कारोबारी transactions, दूसरे traders से लिए गए diamonds और उनके payment या return की स्थिति पर रहेगा। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि 983 कैरेट diamonds में से कोई हिस्सा बरामद हुआ है या नहीं।

    फिलहाल diamonds की recovery या ₹4 करोड़ की रकम वापस मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

    एक कारोबारी विवाद से बड़े जांच दायरे तक पहुंचा मामला

    मुंबई के diamond business से जुड़े इस मामले में शुरुआत एक कंपनी के करीब ₹4 करोड़ के कथित payment dispute से हुई, लेकिन BDB के अन्य कारोबारियों से भी diamonds लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा अब बढ़ गया है।

    अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सभी transactions सामान्य कारोबारी व्यवस्था के तहत हुए थे और बाद में payment dispute पैदा हुआ, या जांच में कई कारोबारियों से जुड़े transactions में कोई समान pattern सामने आता है।

    इसका जवाब पुलिस की आगे की जांच और संबंधित कारोबारी रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

    फिलहाल Smit Alpeshbhai Shah पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। अदालत की ओर से उनकी दोषसिद्धि नहीं हुई है।

  • मुंबई में ₹4 लाख की ठगी से खुला बड़ा राज, 22 म्यूल खातों का ₹7.42 करोड़ से लिंक

    मुंबई में ₹4 लाख की ठगी से खुला बड़ा राज, 22 म्यूल खातों का ₹7.42 करोड़ से लिंक

    मुंबई में ₹4 लाख के Telegram टास्क स्कैम की जांच से 22 म्यूल बैंक खाते सामने आए। इनका लिंक 42 साइबर फ्रॉड शिकायतों और ₹7.42 करोड़ से जुड़ा पाया गया है।

    मुंबई: मुंबई में सिर्फ ₹4 लाख की ऑनलाइन ठगी की जांच करते हुए खार पुलिस को एक बड़े साइबर नेटवर्क का पता चला है। जांच में 22 mule bank accounts सामने आए हैं, जिनका लिंक देशभर में दर्ज कम से कम 42 cyber fraud complaints से बताया जा रहा है। इन शिकायतों में कुल ₹7.42 crore से अधिक की रकम शामिल है।

    मामले की शुरुआत एक Telegram task scam से हुई थी, जिसमें एक महिला को ऑनलाइन पार्ट-टाइम काम और कमीशन का लालच दिया गया। शिकायत के अनुसार, महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹4.07 lakh जमा किए, लेकिन promised payment नहीं मिला। इसके बाद शुरू हुई जांच बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की कड़ियों से होते हुए पुलिस कथित बड़े नेटवर्क तक पहुंची।

    पुलिस की जांच में Avinash Kharat और Vikas Bhujbal की कथित भूमिका सामने आई है। दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों की गिरफ्तारी कर पुलिस जांच कर रही है।

    Telegram task scam से शुरू हुई कहानी

    खार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष कटे ने बताया कि, 6 फरवरी को एक एयरलाइन ग्राउंड स्टाफकर्मी से कथित तौर पर ‘Riya Sanvi’ नाम से संपर्क किया गया। उसे बताया गया कि वह बिना किसी जॉइनिंग फीस के पार्ट-टाइम ऑनलाइन काम कर सकती है।

    महिला को Amazon के उत्पादों के स्क्रीनशॉट लेने और उन्हें भेजने जैसे छोटे-छोटे ऑनलाइन टास्क दिए गए। इन कामों के बदले कमीशन मिलने का भरोसा दिया गया। बाद में उसे एक Telegram group में जोड़ा गया और अधिक कमाई का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करने के लिए कहा गया।

    शिकायत के मुताबिक, महिला ने कुल ₹4,07,764 यानी करीब ₹4.07 लाख जमा किए। जब उसे promised commission नहीं मिला तो उसे ठगी का एहसास हुआ और मामला खार पुलिस तक पहुंचा।

    यहीं से यह सामान्य ऑनलाइन ठगी का मामला एक बड़े Mumbai cyber fraud नेटवर्क की जांच में बदल गया।

    ₹4.07 लाख की शिकायत से 22 mule bank accounts तक पहुंची जांच

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बैंक लेनदेन और तकनीकी जानकारी की जांच शुरू की। जांच में पैसे के ट्रेल को अलग-अलग बैंक खातों से जोड़कर देखा गया।

    जांच आगे बढ़ने पर पुणे के चाकण इलाके से जुड़े एक फ्लैट और बैंक खातों की जानकारी सामने आई। पुलिस को ऐसे खातों का नेटवर्क मिला, जिनका कथित तौर पर साइबर धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया गया था।

    जांच में कुल 22 mule bank accounts का खुलासा

    इनमें:

    • 13 बैंक खाते — Avinash Kharat से जुड़े
    • 9 बैंक खाते — Vikas Bhujbal से जुड़े

    बताए गए हैं।

    पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अपने नाम के साथ-साथ अन्य लोगों के नाम पर भी बैंक खाते खुलवाए और कथित तौर पर इन खातों को साइबर जालसाजों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया।

    हालांकि, इन खातों की पूरी भूमिका और कथित नेटवर्क में आरोपियों की वास्तविक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    22 खातों का 42 cyber fraud complaints से लिंक

    जांच का सबसे बड़ा खुलासा तब सामने आया जब इन बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज कम से कम 42 cyber fraud complaints से मिलने की बात सामने आई।

    इन शिकायतों में बताई गई कुल रकम ₹7,42,28,409, यानी करीब ₹7.42 crore, बताई गई है।

    यह रकम अलग-अलग शिकायतों में रिपोर्ट की गई कुल राशि है। इसे अदालत द्वारा अंतिम रूप से साबित हुई धोखाधड़ी की रकम के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि मामले की जांच अभी जारी है।

    यानी एक तरफ शुरुआत सिर्फ करीब ₹4.07 lakh की शिकायत से हुई थी, जबकि बैंक खातों की जांच ने करीब ₹7.42 crore की कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी कड़ियां सामने ला दीं।

    क्या होता है mule bank account?

    साइबर अपराध की भाषा में mule bank account ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है जिसका इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क के लिए पैसे प्राप्त करने या आगे ट्रांसफर करने में किया जाता है।

    ऑनलाइन फ्रॉड में ठगी की रकम को सीधे मुख्य जालसाज के खाते में भेजने के बजाय कई बार ऐसे खातों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे रकम को अलग-अलग खातों में घुमाया जा सकता है और उसके वास्तविक स्रोत तथा अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए अधिक मुश्किल हो सकता है।

    इस मामले में पुलिस का आरोप है कि सामने आए बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन के लिए किया गया। जांच में अब इन खातों के पूरे financial trail को खंगाला जा रहा है।

    1930 हेल्पलाइन और साइबर डेटा से मिली अहम कड़ियां

    पुलिस ने जांच के दौरान बैंकिंग लेनदेन के साथ तकनीकी विश्लेषण का भी इस्तेमाल किया। खबर के अनुसार, 1930 cyber crime helpline और साइबर अपराध से जुड़े समन्वय तंत्र से प्राप्त जानकारी ने अलग-अलग शिकायतों और बैंक खातों के बीच संबंध तलाशने में मदद की।

    इसी जांच के दौरान Avinash Kharat और Vikas Bhujbal की कथित भूमिका सामने आई।

    अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल कौन कर रहा था, रकम किस तरह आगे भेजी जाती थी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।

    FIR में BNS और IT Act की धाराएं

    मामले में Crime Register No. 183/2026 के तहत दर्ज FIR के अनुसार, मामले में:

    • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)
    • Information Technology Act की धारा 66(c)
    • Information Technology Act की धारा 66(d)

    लगाई गई हैं।

    ये धाराएं मामले में लगाए गए आरोपों के आधार पर FIR का हिस्सा हैं। FIR में दर्ज आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता।

    जांच की निगरानी और पुलिस टीम

    मुंबई पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मामले की जांच खार पुलिस की टीम कर रही है। जांच में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक Santosh Kate, पुलिस निरीक्षक Dipali Marale, पुलिस उपनिरीक्षक Vijay Said, पुलिस उपनिरीक्षक Govind Bedke समेत पुलिसकर्मियों की टीम शामिल रही।

    मामले की निगरानी DCP Mohit Garg और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक Santosh Kate के स्तर पर की गई।

    अब आगे क्या जांच करेगी पुलिस?

    जांच का अगला फोकस इन 22 बैंक खातों के पूरे transaction trail पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

    • खातों में रकम किन साइबर फ्रॉड मामलों से पहुंची;
    • रकम आगे किन खातों में ट्रांसफर की गई;
    • इन खातों का वास्तविक संचालन कौन करता था;
    • नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं;
    • 42 शिकायतों के पीछे एक ही नेटवर्क था या अलग-अलग साइबर अपराधियों के बीच इन खातों का इस्तेमाल हुआ।

    इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

    ₹4 लाख की शिकायत ने खोला ₹7.42 करोड़ का रास्ता

    इस मामले की सबसे अहम बात यही है कि जांच की शुरुआत करीब ₹4.07 lakh के Telegram task scam से हुई थी। लेकिन एक शिकायत से शुरू हुई बैंकिंग और डिजिटल ट्रेल की जांच ने 22 mule bank accounts तक पहुंच बनाई, जिनका लिंक 42 cyber fraud complaints से बताया जा रहा है।

    इन शिकायतों में कुल रकम करीब ₹7.42 crore है।

    अब पुलिस इस कथित नेटवर्क के पीछे मौजूद लोगों, बैंक खातों के इस्तेमाल और पैसों के पूरे रास्ते की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 22 खातों का इस्तेमाल किस स्तर तक और कितने साइबर अपराधों में किया गया है।

  • Bigg Boss फेम के घर ₹1 करोड़ की चोरी, आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार; ₹51 लाख बरामद

    Bigg Boss फेम के घर ₹1 करोड़ की चोरी, आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार; ₹51 लाख बरामद

    Bigg Boss फेम लोपामुद्रा राउत के घर ₹1 करोड़ की चोरी का आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार। पुलिस ने ₹51 लाख की नकदी और कीमती सामान बरामद किया।

    मुंबई: फिल्म अभिनेत्री और मॉडल लोपामुद्रा राउत के मुंबई स्थित घर में हुई करीब ₹1 करोड़ की चोरी के मामले में मुंबई पुलिस ने बिहार के दरभंगा से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान चंदन मुखिया के रूप में हुई है, जो दरभंगा जिले के सोनकी थाना क्षेत्र के गोठ मिट्टी गांव का रहने वाला बताया गया है।

    मुंबई पुलिस की टीम ने दरभंगा पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ा। उसके पास से महंगी घड़ी, सोने के बिस्किट और नकदी समेत चोरी से जुड़ी करीब ₹51 लाख की संपत्ति बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

    सांताक्रूज पुलिस थाने में दर्ज हुई थी FIR

    लोपामुद्रा राउत के घर चोरी के बाद मुंबई के सांताक्रूज पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    जांच के दौरान तकनीकी जानकारी, मोबाइल फोन और लोकेशन से जुड़े सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। जांच की कड़ी बिहार के दरभंगा तक पहुंचने के बाद मुंबई पुलिस की टीम वहां गई और स्थानीय पुलिस के सहयोग से सोनकी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर चंदन मुखिया को गिरफ्तार किया गया।

    वेंटिलेटर के रास्ते घर में घुसने का दावा

    पुलिस जांच से जुड़ी अहम कड़ी के अनुसार, आरोपी ने अभिनेत्री के घर में वेंटिलेटर के रास्ते प्रवेश किया था। बताया गया है कि वारदात से पहले घर की रेकी की गई थी और आरोपी ने कथित तौर पर यह सुनिश्चित किया कि घर में कोई मौजूद न हो।

    सांताक्रूज पुलिस से मिली जानकारी में यह भी बताया गया है कि आरोपी बंद घरों की रेकी करता था। इसी दौरान उसकी नजर लोपामुद्रा राउत के सांताक्रूज स्थित घर पर पड़ी। इसके बाद कथित तौर पर मौका देखकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया।

    ₹12.50 लाख की लग्जरी घड़ी और सोने के बिस्किट बरामद

    दरभंगा में गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से चोरी से जुड़ी कई कीमती वस्तुएं बरामद होने की बात सामने आई है। इनमें करीब ₹12.50 लाख कीमत की लग्जरी घड़ी, लगभग ₹30 लाख मूल्य के दो सोने के बिस्किट और करीब ₹9 लाख नकद शामिल बताए गए हैं।

    मिली जानकारी में इन बरामद वस्तुओं और नकदी की कुल कीमत कभी करीब ₹51 लाख बता रही है। तो कभी पुलिस सूत्रों में कभी करीब ₹50 लाख के सामान और ₹9 लाख नकद बरामद होने का उल्लेख किया जा रहा है।

    हालांकि, चोरी की पूरी रकम और संपत्ति की बरामदगी अभी नहीं हुई है। पुलिस अन्य सामानों का पता लगाने में जुटी है।

    चोरी की रकम से जमीन खरीदने की भी जांच

    जांच में आरोपी के बिहार कनेक्शन के सामने आने के बाद पुलिस ने उसके आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदन मुखिया ने कथित तौर पर चोरी के पैसों का इस्तेमाल अपनी बहन के नाम पर करीब दो कट्ठा जमीन खरीदने में किया।

    इस जमीन की खरीद से जुड़े मामले में सोनकी थाना क्षेत्र के देकुली बाजार के एक हार्डवेयर व्यवसायी कैलाश साह से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की रकम का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    ज्वेलरी कारोबारी से पूछताछ के बाद सोने के बिस्किट मिले

    खबर के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने एक ज्वेलरी कारोबारी से भी पूछताछ की। इसके बाद दो सोने के बिस्किट बरामद किए गए।

    इन दोनों बिस्किट की कीमत करीब ₹30 लाख बताई गई है। इसके अलावा आरोपी के पास से महंगी घड़ी और नकदी बरामद होने की बात सामने आई है।

    मुंबई से दरभंगा तक पहुंची पुलिस की जांच

    इस मामले में मुंबई पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर जांच दरभंगा तक पहुंची।

    इसके बाद मुंबई पुलिस की टीम ने दरभंगा की स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    करीब ₹1 करोड़ की चोरी, आधे से ज्यादा रकम की बरामदगी

    लोपामुद्रा राउत के घर से चोरी की कुल कीमत करीब ₹1 करोड़ बताई गई है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस करीब ₹51 लाख की संपत्ति और नकदी बरामद कर चुकी है।

    बरामदगी में लग्जरी घड़ी, सोने के बिस्किट और नकदी शामिल हैं। पुलिस अब चोरी की बाकी संपत्ति का पता लगाने के साथ-साथ यह भी जांच कर रही है कि चोरी की रकम को कहां-कहां इस्तेमाल किया गया।

    आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले में उसके संभावित सहयोगियों और चोरी के पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही है। मामले की आगे की जांच जारी है।

  • मुंबई में 6 घरों में सेंधमारी का खुलासा, 26 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार; ₹45.26 लाख बरामद

    मुंबई में 6 घरों में सेंधमारी का खुलासा, 26 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार; ₹45.26 लाख बरामद

    एमएचबी पुलिस ने छह सेंधमारी की वारदातों का खुलासा करते हुए 26 वर्षीय आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी से ₹45.26 लाख का मुद्देमाल बरामद हुआ।

    मुंबई: मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्थित एमएचबी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई सेंधमारी की छह वारदातों का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 26 वर्षीय आरोपी कुलजीत सिंह उर्फ सनी को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से सोने के आभूषण, नकदी, मोबाइल फोन और स्मार्ट वॉच समेत कुल ₹45 लाख 26 हजार 690 रुपये का मुद्देमाल बरामद किया गया है।

    पुलिस के मुताबिक, एमएचबी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई सेंधमारी की वारदातों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपियों की तलाश और मामलों के खुलासे के निर्देश दिए थे। इसके बाद अपराध प्रकटीकरण टीम ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और वारदात के तरीके का विश्लेषण करते हुए जांच शुरू की।

    सीसीटीवी और तकनीकी जांच से मिला सुराग

    जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके साथ ही वारदात को अंजाम देने के तरीके और आरोपी की गतिविधियों की तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया गया।

    जांच में आरोपी के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने के बाद पुलिस ने मुंबई के अलावा नवी मुंबई, तुर्भे, वाशी और कोपरखैरणे इलाके में उसकी तलाश शुरू की।

    पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई से बाहर निकल गया है। इसके बाद उसकी संभावित आवाजाही और ठिकानों पर नजर रखी गई।

    राजस्थान जाने की खबर, गुजरात में पुलिस ने पकड़ा

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, उन्हें सूचना मिली थी कि आरोपी राजस्थान के जयपुर की ओर जा रहा है। जांच के दौरान उसके गुजरात की तरफ जाने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने गुजरात पुलिस की मदद से उसकी तलाश तेज की।

    आखिरकार आरोपी को नियोल चेक पोस्ट के पास पकड़ा गया।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुलजीत सिंह उर्फ सनी, उम्र 26 वर्ष के रूप में हुई है।

    ₹45.26 लाख का मुद्देमाल बरामद

    पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद किया गया। बरामदगी में शामिल है:

    • 329.33 ग्राम सोने के आभूषण — कीमत ₹44,12,620
    • नकद रकम — ₹70,070
    • मोबाइल फोन — ₹24,000
    • स्मार्ट वॉच — ₹20,000

    इन सभी की कुल कीमत ₹45,26,690 बताई गई है।

    mumbai-6-house-burglary-case-accused-arrested
    गिरफ्तार आरोपी के साथ एमएचबी पुलिस की तस्वीर

    छह सेंधमारी के मामलों का खुलासा

    पुलिस के अनुसार आरोपी से हुई पूछताछ और जांच के आधार पर एमएचबी पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज छह मामलों से उसका संबंध सामने आया है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निम्न मामलों का उल्लेख किया:

    1. गु.र.क्र. 758/2026 — कलम 331(3), 331(4), 305(अ) भा.न्या.सं.
    2. गु.र.क्र. 590/2026 — कलम 331(3), 331(4), 305(अ) भा.न्या.सं.
    3. गु.र.क्र. 582/2026 — कलम 331(3), 331(4), 305(अ) भा.न्या.सं.
    4. गु.र.क्र. 369/2026 — कलम 331(3), 331(4), 305(अ) भा.न्या.सं.
    5. गु.र.क्र. 350/2026 — कलम 331(3), 331(4), 305(अ) भा.न्या.सं.
    6. लक्ष्मीनारायण परिसर से संबंधित क्रमांक 302 का मामला।

    पुलिस रिकॉर्ड की जांच में आरोपी के खिलाफ दादर, माहिम, कांदिवली, आरसीएफ, धारावी, भायखला, खेरवाड़ी और मानपाडा समेत अन्य पुलिस थाना क्षेत्रों में भी सेंधमारी के मामले दर्ज होने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई है।

    पुलिस टीम की कार्रवाई

    यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में एमएचबी पुलिस थाने की अपराध प्रकटीकरण टीम ने की। प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त संदीप पुणे, सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हुंबे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।

    वहीं, पुलिस निरीक्षक मिलिंद नागपुरे (अपराध) के मार्गदर्शन में एमएचबी पुलिस थाने के अपराध प्रकटीकरण अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक वत्रे तथा पुलिसकर्मी साळुंखे, ढामळे, पवार, मस्के और घाडगे ने तकनीकी जांच और मैदानी स्तर पर जानकारी जुटाकर आरोपी की तलाश शुरू की। आरोपी के मुंबई से बाहर निकलने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम उसकी तलाश करते हुए गुजरात पहुंची और नियोल चेक पोस्ट के पास उसे गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में पूरी अपराध प्रकटीकरण टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

  • गोराई में बर्थडे पार्टी के दौरान कथित फायरिंग, पुलिस का एक्शन

    गोराई में बर्थडे पार्टी के दौरान कथित फायरिंग, पुलिस का एक्शन

    मुंबई के गोराई-2 इलाके में सड़क पर बर्थडे पार्टी के दौरान कथित एअरगन फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद बोरीवली पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: मुंबई के गोराई-2 इलाके में सड़क पर जन्मदिन की पार्टी मनाना 10 लोगों को भारी पड़ गया। 5 अगस्त की मध्यरात्रि को गोराई स्थित घारकुल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के बाहर सड़क पर आयोजित बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान कथित तौर पर एअरगन से फायरिंग किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बोरीवली पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है।

    पुलिस के मुताबिक, जन्मदिन का जश्न सार्वजनिक सड़क पर मनाया जा रहा था। आरोप है कि पार्टी के दौरान सड़क के बीच खड़ी कार के बोनट पर केक काटा गया और कुछ समय के लिए लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की।

    क्या है पूरा मामला?

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, 5 अगस्त की रात गोराई-2 इलाके में कुछ युवक अपने एक दोस्त का जन्मदिन मनाने के लिए जमा हुए थे। आधी रात के आसपास सड़क पर खड़ी एक कार के बोनट पर केक काटा गया। इसी दौरान कथित तौर पर एअरगन से फायरिंग किए जाने का आरोप है।

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस अब वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।

    borivali-airgun-firing-birthday-party
    आकाश रामकृपाल गुप्ता, जिनका जन्मदिन था (बीच में), जिन पर इस मामले में नौ अन्य लोगों के साथ केस दर्ज किया गया है।

    किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?

    बोरीवली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के अलावा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 201, 122 और 177, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(e) और 135 तथा आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।

    बोरीवली पुलिस स्टेशन की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पुष्पलता मंडले ने कहा, “हमने सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। मामले की जांच जारी है।”

    जांच की कमान वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में

    मामले की जांच पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) संदीप घुगे की निगरानी में की जा रही है। जांच टीम में सहायक पुलिस आयुक्त संतोष धनवटे, पुलिस निरीक्षक दिग्विजय पाटिल, क्राइम डिटेक्शन स्क्वाड के पुलिस निरीक्षक आनंद भगत, पुलिस उपनिरीक्षक राजू कोर्डे और पुलिस उपनिरीक्षक निर्मल कुमार भोसले शामिल हैं।

    पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित फायरिंग किसने की, एअरगन किसकी थी और वीडियो सबसे पहले किसने रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर अपलोड किया।

    borivali-airgun-firing-birthday

    किन लोगों को हिरासत में लिया गया?

    पुलिस ने इस मामले में आकाश रामकृपाल गुप्ता (26), जतिन नवीन शर्मा (26), विजयेश विजयप्रकाश उपाध्याय (26), विक्रम मंगलीलाल चौधरी उर्फ टॉम (29), ऐश्वर्या मधुकर गोमणे (26), अजिंक्य जयंत आढव (24), जय धर्मेंद्र कपाड़िया (27), रोहन जगदीश पाटिल (27), मुकुंद असराम थोरवे (25) और प्रशांत सुभाष हरिजन (25) को हिरासत में लिया है।

    पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े हर पहलू की जांच जारी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई है। वायरल क्लिप में कुछ युवक सड़क पर जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कार के बोनट पर केक काटने और सड़क पर भीड़ जमा होने के दृश्य भी देखे जा सकते हैं।

    हालांकि, पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि वीडियो में दिखाई दे रही कथित फायरिंग किस परिस्थिति में हुई और क्या उससे किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा।

    सार्वजनिक सड़कों पर जश्न को लेकर फिर उठे सवाल

    मुंबई और उसके उपनगरों में सार्वजनिक सड़कों पर जन्मदिन मनाने, बाइक स्टंट करने और हथियारों के प्रदर्शन से जुड़े कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे आयोजनों के कारण कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के आयोजनों पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    फिलहाल बोरीवली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • मुंबई लोकल में शर्मनाक हरकत! महिला को पीटा, बेल्ट निकालकर धमकाया, VIDEO वायरल

    मुंबई लोकल में शर्मनाक हरकत! महिला को पीटा, बेल्ट निकालकर धमकाया, VIDEO वायरल

    मुंबई की वेस्टर्न रेलवे लोकल में सीट को लेकर हुए विवाद के दौरान एक महिला को बेल्ट निकालकर धमकाने और हाथ उठाने का वीडियो वायरल हो गया। बोरीवली GRP ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक पुरुष यात्री कथित तौर पर पहले महिला से बहस करता है, उसी दौरान महिला पर हाथ चलता है, फिर अपना बेल्ट निकालकर उसे धमकाने लगता है। यह पूरी घटना चलती लोकल ट्रेन के डिब्बे में कई यात्रियों के सामने हुई, लेकिन वीडियो में अधिकांश लोग मूकदर्शक नजर आते हैं।

    सीट के विवाद ने लिया हिंसक रूप

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना वेस्टर्न रेलवे की एक लोकल ट्रेन में हुई। बताया जा रहा है कि महिला सीट पर लेटी हुई थी। इसी बात को लेकर एक पुरुष यात्री ने उसे सीट खाली करने के लिए कहा। महिला के विरोध करने पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने कथित तौर पर अपना बेल्ट निकाल लिया। वीडियो में वह महिला को धमकाता दिखाई देता है और उस पर हाथ उठाने की भी कोशिश करता है।

    VIDEO वायरल, यात्रियों की चुप्पी पर भी उठे सवाल

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में नाराजगी फैल गई। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि डिब्बे में कई यात्री मौजूद हैं, लेकिन बहुत कम लोग बीच-बचाव करते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स ने सवाल उठाया कि यदि समय रहते किसी यात्री ने हस्तक्षेप किया होता तो मामला इतना नहीं बढ़ता।

    बोरीवली GRP ने दर्ज किया मामला

    वीडियो वायरल होने के बाद बोरीवली Government Railway Police (GRP) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपी की पहचान करने और घटना के पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    महिला सुरक्षा पर फिर छिड़ी बहस

    मुंबई लोकल से हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं। ऐसे में चलती ट्रेन के भीतर महिला को बेल्ट निकालकर धमकाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने रेलवे प्रशासन से लोकल ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाने और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

    जांच जारी, कई सवालों के जवाब बाकी

    फिलहाल पुलिस आरोपी की पहचान और घटना के सटीक क्रम की जांच कर रही है। महिला और आरोपी की पहचान, घटना का सटीक समय और अन्य कानूनी पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा करेगी।

    Fact Box

    • घटना: महिला को बेल्ट निकालकर धमकाने का आरोप
    • स्थान: वेस्टर्न रेलवे की मुंबई लोकल
    • विवाद की वजह: सीट को लेकर कहासुनी
    • कार्रवाई: बोरीवली GRP ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की
    • स्थिति: आरोपी की पहचान और तलाश जारी
  • मुंबई: खोया मोबाइल वापस दिलाकर बोरीवली पुलिस ने जीता मुंबईकरों का भरोसा

    मुंबई: खोया मोबाइल वापस दिलाकर बोरीवली पुलिस ने जीता मुंबईकरों का भरोसा

    मुंबई के बोरीवली पुलिस स्टेशन ने गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन उनके असली मालिकों को लौटाकर एक बार फिर लोगों का भरोसा जीता। जानिए कैसे तकनीकी जांच के जरिए शिकायतकर्ताओं को मिली बड़ी राहत।

    मुंबई: मोबाइल फोन आज केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, जरूरी दस्तावेज, निजी यादें और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मोबाइल गुम या चोरी होने पर ज्यादातर लोग उसके वापस मिलने की उम्मीद छोड़ देते हैं। लेकिन मुंबई के बोरीवली पुलिस स्टेशन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समय पर शिकायत और तकनीकी जांच के जरिए खोया हुआ मोबाइल भी उसके असली मालिक तक पहुंचाया जा सकता है।

    इसी पहल के तहत 5 अगस्त 2026 को बोरीवली पुलिस स्टेशन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गुम और चोरी हुए 50 मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए। वर्षों बाद अपना मोबाइल वापस मिलने पर कई शिकायतकर्ताओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और उन्होंने मुंबई पुलिस का आभार व्यक्त किया।

    तकनीकी जांच से मिली सफलता

    बोरीवली पुलिस ने बताया कि गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन की तलाश के लिए आधुनिक तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग का सहारा लिया गया। मोबाइल बरामद होने के बाद उनकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने एक बार फिर यह साबित किया कि समय पर दर्ज की गई शिकायत कई बार खोया हुआ मोबाइल वापस दिला सकती है।

    वर्षों से लगातार चल रहा है रिकवरी अभियान

    बोरीवली पुलिस की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती पुष्पलता मंडले ने बताया कि, वर्ष 2019 से 2025 के दौरान 450 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए गए। वहीं 1 जनवरी 2026 से अब तक 225 मोबाइल फोन सफलतापूर्वक रिकवर कर शिकायतकर्ताओं को सौंपे जा चुके हैं। पुलिस प्रत्येक शिकायत निवारण दिवस के दौरान भी बरामद मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया जारी रखे हुए है।

    वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ मोबाइल वितरण

    मोबाइल वितरण कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त (परिमंडल-02) श्री संदीप घुगे, सहायक पुलिस आयुक्त (बोरीवली विभाग) श्री संतोष घेवरे तथा वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती पुष्पलता मंडले मौजूद रहीं। इसके अलावा बोरीवली पुलिस स्टेशन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं को मोबाइल सौंपते हुए नागरिकों से अपील की कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने पर बिना देरी किए पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते तकनीकी जांच शुरू की जा सके।

    शिकायतकर्ताओं के चेहरों पर लौटी मुस्कान

    कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका मोबाइल दोबारा मिल पाएगा। किसी के मोबाइल में परिवार की तस्वीरें थीं तो किसी के लिए वह रोजमर्रा के काम और महत्वपूर्ण दस्तावेजों का जरिया था। मोबाइल वापस मिलने के बाद लोगों ने बोरीवली पुलिस की सराहना करते हुए इसे आम नागरिकों के लिए भरोसा बढ़ाने वाली पहल बताया।

    समय पर शिकायत करना क्यों है जरूरी?

    पुलिस का कहना है कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने की स्थिति में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, उसके बरामद होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। नागरिक ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर इस प्रक्रिया में सहयोग कर सकते हैं।

  • मुंबई पुलिस में बिना भर्ती 10 लोग लेते रहे सैलरी, 6.41 करोड़ रुपये के घोटाले ने उठाए बड़े सवाल

    मुंबई पुलिस में बिना भर्ती 10 लोग लेते रहे सैलरी, 6.41 करोड़ रुपये के घोटाले ने उठाए बड़े सवाल

    मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी होने का मामला सामने आया है। जानिए घोटाला कैसे पकड़ा गया, किन अधिकारियों पर एफआईआर हुई और आगे क्या होगा।

    मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय प्रभाग (नॉर्थ रीजनल डिवीजन) में करोड़ों रुपये के कथित वेतन घोटाले का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच के मुताबिक, पुलिस के पेरोल सिस्टम में 10 ऐसे लोगों के नाम दर्ज पाए गए, जिनका विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था। आरोप है कि इन नामों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी की गई। मामला तब सामने आया, जब कर्मचारियों का डेटा पुरानी ‘सेवार्थ’ (Sevaarth) प्रणाली से नए सिस्टम में ट्रांसफर किया जा रहा था।

    घोटाला कैसे सामने आया?

    पुलिस विभाग में कर्मचारियों के रिकॉर्ड को पुराने पेरोल सिस्टम से नए सिस्टम में स्थानांतरित किया जा रहा था। इसी दौरान डेटा मिलान और आंतरिक ऑडिट में कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, दिसंबर 2019, जनवरी और फरवरी 2020 के अलावा जून से सितंबर 2020 के बीच संदिग्ध भुगतान किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ नाम ऐसे थे, जिनके सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।

    इसके बाद नॉर्थ रीजन के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने समता नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    कौन हैं वे 10 लोग, जिनके नाम पर निकली सैलरी?

    जांच में जिन दस नामों का उल्लेख सामने आया है, उनमें—

    • रामदास भोगले
    • सुधाकर कदम
    • सरजू यादव
    • भगवत भोसले
    • गुणाजी खावकर
    • महादेव हलदणकर
    • राजेंद्र सोनार
    • उत्तम थोरात
    • सूर्यकांत पाटिल
    • पांडुरंग कदम

    शामिल हैं।

    हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी वास्तविक व्यक्ति हैं या केवल फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए इन नामों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस संबंधित बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर

    समता नगर पुलिस स्टेशन में पांच तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस थाने की तस्वीर

    इनमें शामिल हैं—

    • रामकिशन गोस्वामी (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
    • नागेश तलवडेकर (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
    • विजया चव्हाण (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
    • अजय राठौड़ (मुख्य लिपिक)
    • अमोल मेश्राम (वरिष्ठ लिपिक)

    इन पर सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी आरोपी को निलंबित किया गया है या नहीं।

    किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120(बी) और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

    हालांकि, एफआईआर वर्ष 2026 में दर्ज हुई है, लेकिन कथित अपराध 2019 और 2020 के दौरान हुआ था। इसी वजह से मामले में IPC की धाराएं लगाई गई हैं।

    इन धाराओं में सरकारी धन का गबन, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, सबूत मिटाना और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।

    नोट: 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है, लेकिन 1 जुलाई 2024 से पहले हुए अपराधों पर कई मामलों में IPC के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

    📊 6.41 करोड़ रुपये का हिसाब

    नोट: नीचे दिया गया गणित उपलब्ध जानकारी के आधार पर अनुमान है। पुलिस ने अभी तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।

    विवरणअनुमानित आंकड़ा
    कुल कथित रकम6.41 करोड़ रुपये
    फर्जी कर्मचारियों की संख्या10
    प्रति व्यक्ति औसत रकम64.1 लाख रुपये
    संदिग्ध अवधि7 महीने
    प्रति व्यक्ति औसत मासिक भुगतान9.15 लाख रुपये
    सभी 10 लोगों को प्रति माह कुल भुगतान91.5 लाख रुपये

    यदि 6.41 करोड़ रुपये को 10 लोगों में बराबर बांटा जाए, तो प्रत्येक व्यक्ति के नाम पर औसतन 64.1 लाख रुपये निकले होंगे।

    टाइमलाइन: कब क्या हुआ?

    • दिसंबर 2019: संदिग्ध भुगतान शुरू हुए।
    • जनवरी–फरवरी 2020: कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी रहा।
    • जून–सितंबर 2020: भुगतान जारी रहने का दावा।
    • 2026: डेटा माइग्रेशन के दौरान गड़बड़ी सामने आई।
    • अगस्त 2026: समता नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।

    🏛️ इस घोटाले का मुंबई पुलिस और आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?

    यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है। इसने सरकारी विभागों की पेरोल व्यवस्था, डिजिटल सुरक्षा और ऑडिट सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुंबई पुलिस विभाग पर संभावित असर

    • कर्मचारियों के रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन हो सकता है।
    • पेरोल सिस्टम का तकनीकी ऑडिट कराया जा सकता है।
    • संवेदनशील विभागों में एक्सेस कंट्रोल सख्त किया जा सकता है।
    • वेतन भुगतान प्रक्रिया की निगरानी बढ़ सकती है।

    क्या अन्य यूनिटों का भी ऑडिट होगा?

    फिलहाल जांच नॉर्थ रीजन तक सीमित है, लेकिन अगर सिस्टम स्तर की खामियां सामने आती हैं, तो मुंबई पुलिस की अन्य इकाइयों के रिकॉर्ड की भी जांच हो सकती है।

    टैक्सपेयर्स के पैसे पर क्या असर होगा?

    सरकारी कर्मचारियों का वेतन जनता के टैक्स से दिया जाता है। यदि जांच में गबन की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला मामला माना जाएगा।

    सबसे बड़ा सवाल: बिना भर्ती हुए सिस्टम तक पहुंचे कैसे?

    पूरे मामले का सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल यही है कि जिन लोगों की कभी भर्ती ही नहीं हुई, उनके नाम पुलिस के पेरोल सिस्टम में कैसे दर्ज हुए।

    जांच एजेंसियां फिलहाल इन बिंदुओं पर काम कर रही हैं—

    • क्या फर्जी कर्मचारी आईडी बनाई गई थीं?
    • क्या किसी अधिकारी के लॉगिन का गलत इस्तेमाल हुआ?
    • क्या फर्जी नियुक्ति दस्तावेज तैयार किए गए?
    • क्या बैंक खाते पहले से खोले गए थे?
    • क्या विभाग के बाहर के लोग भी शामिल हैं?

    इन्हीं सवालों के जवाब से पूरे घोटाले की असली तस्वीर सामने आएगी।

    आगे क्या हो सकता है?

    फिलहाल जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल लॉग और विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

    अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं—

    • एफआईआर नंबर क्या है?
    • शिकायत किस अधिकारी ने दर्ज कराई?
    • 6.41 करोड़ रुपये किन खातों में भेजे गए?
    • क्या किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है?
    • क्या विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है?
    • क्या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जांच में शामिल होगी?

    🔎 समझिए पूरा मामला

    घोस्ट एम्प्लॉई (Ghost Employee) क्या होता है?

    ऐसे व्यक्ति को “घोस्ट एम्प्लॉई” कहा जाता है, जिसका नाम किसी संस्था के रिकॉर्ड में कर्मचारी के रूप में दर्ज हो, लेकिन वह वास्तव में वहां काम नहीं करता हो।

    आमतौर पर ऐसे मामलों में—

    • फर्जी कर्मचारी आईडी बनाई जाती है।
    • नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं।
    • बैंक खाते खोले जाते हैं।
    • वेतन सीधे उन खातों में ट्रांसफर किया जाता है।

    सेवार्थ (Sevaarth) सिस्टम क्या है?

    सेवार्थ महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल पेरोल और कर्मचारी प्रबंधन प्लेटफॉर्म है। इसी सिस्टम के जरिए सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, बैंक खातों और सेवा रिकॉर्ड का प्रबंधन किया जाता है।

    Official Sources

    FAQ

    मुंबई पुलिस वेतन घोटाला क्या है?

    यह मामला मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी होने से जुड़ा है।

    कितने लोगों के नाम सामने आए हैं?

    जांच में 10 ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनका पुलिस विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं बताया गया है।

    मामला कैसे सामने आया?

    सेवार्थ पेरोल सिस्टम से नए सिस्टम में डेटा ट्रांसफर के दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई।

    किन अधिकारियों पर मामला दर्ज हुआ है?

    पांच तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

    जांच अब किस दिशा में बढ़ रही है?

    पुलिस बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।