Category: Mumbai Crime

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  • मुंबई WEH हिट एंड रन: बीकेसी जा रहे बैंककर्मी दंपति घायल, फरार कार चालक की तलाश

    मुंबई WEH हिट एंड रन: बीकेसी जा रहे बैंककर्मी दंपति घायल, फरार कार चालक की तलाश

    मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर बहार जंक्शन के पास कार की टक्कर से बैंककर्मी दंपति घायल हो गया। अंधेरी पुलिस फरार चालक की तलाश कर रही है।

    मुंबई: वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर अंधेरी पूर्व के बहार जंक्शन के पास तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में बीकेसी स्थित कार्यालय जा रहे बैंककर्मी दंपति सर्वेश प्रभु और उनकी पत्नी अदिति घायल हो गए। दुर्घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। अंधेरी पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है।

    यह दुर्घटना शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 की सुबह करीब 8 बजे हुई। सर्वेश प्रभु, 29, और उनकी पत्नी अदिति, 31, कांदिवली स्थित अपने घर से मोटरसाइकिल पर निकले थे। घर से निकलने के करीब 15 मिनट बाद बहार जंक्शन के पास उनकी बाइक को पीछे से एक काले रंग की तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों मोटरसाइकिल से सड़क पर गिर गए। हादसे में बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई।

    हादसे में पति को कई चोटें, पत्नी की कलाई में फ्रैक्चर

    दुर्घटना में सर्वेश प्रभु के दोनों हाथों की हथेलियों और दाहिने घुटने में चोटें आईं। वहीं, उनकी पत्नी अदिति के दाहिने हाथ की कलाई में फ्रैक्चर हो गया।

    घटना के बाद कार चालक घायलों की मदद करने या मौके पर रुकने के बजाय फरार हो गया। दंपति वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट नहीं कर सका। हालांकि, उन्होंने कार का रंग काला होने की जानकारी पुलिस को दी।

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    घटना की सूचना मिलने के बाद अंधेरी पुलिस मौके पर पहुंची और घायल दंपति को जोगेश्वरी पूर्व स्थित ट्रॉमा केयर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया।

    अंधेरी पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया

    सर्वेश प्रभु की शिकायत के आधार पर अंधेरी पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर वाहन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

    फिलहाल आरोपी चालक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन और उसके चालक की पहचान करने में जुटी है।

    सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ रिकॉर्ड की जांच

    अंधेरी पुलिस ने दुर्घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि टक्कर के बाद काली कार किस रास्ते से आगे गई।

    इसके साथ ही वाहन की पहचान के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।

    सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ रिकॉर्ड की जांच के जरिए फरार चालक तथा दुर्घटना में शामिल कार का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर सड़क सुरक्षा का सवाल

    मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यालयों की ओर आवागमन करते हैं। कांदिवली से बीकेसी जा रहे बैंककर्मी दंपति के साथ हुआ यह हादसा दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।

    कार और मोटरसाइकिल के बीच पीछे से होने वाली टक्कर में बाइक सवारों के सड़क पर गिरने और गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है। इस मामले में भी दोनों सवारों को चोटें आईं और मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हुई।

    फिलहाल अंधेरी पुलिस सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ रिकॉर्ड के आधार पर फरार कार चालक की पहचान करने में जुटी है। आरोपी की गिरफ्तारी और घायल दंपति की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आगे की जानकारी सामने आने का इंतजार है।

  • मुंबई मालाड ATM फ्रॉड: 7 ग्राहकों के ₹45,500 चोरी, फरहान अली गिरफ्तार

    मुंबई मालाड ATM फ्रॉड: 7 ग्राहकों के ₹45,500 चोरी, फरहान अली गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में ATM कैश ट्रैपिंग से सात खाताधारकों के ₹45,500 चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस ने फरहान अली को गिरफ्तार कर फरार साथी की तलाश शुरू की।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित पद्मानगर इलाके में एटीएम से नकदी चोरी के मामले में बांगुर नगर पुलिस ने फरहान अली जाफर अली को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने अपने साथी के साथ मिलकर एटीएम के नकदी निकालने वाले हिस्से में प्लास्टिक पट्टी लगाकर सात खाताधारकों के कुल 45,500 रुपये चुराए। पुलिस ने आरोपी के पास से 10,000 रुपये नकद, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल किया गया चार पहिया वाहन बरामद किया है। मामले में एक अन्य आरोपी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

    यह घटना 25 अक्टूबर 2026 को मालाड पश्चिम के पद्मानगर इलाके में स्थित एक बैंक के एटीएम केंद्र पर हुई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने दिनभर में 20 से 25 बार एटीएम सेंटर पर जाकर कथित तौर पर नकदी चोरी की। फरहान अली को 1 नवंबर को मालाड से गिरफ्तार किया गया।

    एटीएम में प्लास्टिक पट्टी लगाकर की नकदी चोरी

    आरोपियों ने एटीएम के नकदी वितरण वाले हिस्से में नीले रंग की प्लास्टिक पट्टी लगाई थी। इस वजह से मशीन से पैसे निकालने वाले ग्राहकों का लेनदेन पूरा हो जाता था और उनके खाते से रकम भी कट जाती थी, लेकिन नकदी बाहर नहीं निकल पाती थी।

    ग्राहक इसे एटीएम की तकनीकी खराबी समझकर बिना नकदी लिए केंद्र से चले जाते थे। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर वापस आकर प्लास्टिक पट्टी हटाते और मशीन में फंसी नकदी निकाल लेते थे। फिर उसी पट्टी को दोबारा लगाकर अगले ग्राहक को निशाना बनाया जाता था।

    इस तरह आरोपियों ने एक ही दिन में सात खाताधारकों को निशाना बनाकर 45,500 रुपये की कथित चोरी की।

    बैंक मैनेजर की शिकायत से सामने आया मामला

    मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक आलोक कुमार रामबाबू शर्मा को सूचना मिली कि एटीएम के नकदी निकालने वाले हिस्से पर नीले रंग की प्लास्टिक पट्टी लगाई गई है। इससे मशीन के साथ छेड़छाड़ होने का संदेह पैदा हुआ।

    इसके कुछ समय बाद बैंक मैनेजर को एक ग्राहक की शिकायत भी मिली कि एटीएम से पैसे निकालने के दौरान उसके खाते से रकम कट गई, लेकिन नकदी नहीं मिली।

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    इसके बाद आलोक कुमार रामबाबू शर्मा एटीएम केंद्र पहुंचे और मशीन का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्हें एटीएम के साथ छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी मिली। बैंक मैनेजर की शिकायत के आधार पर बांगुर नगर पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    फरहान अली गिरफ्तार, साथी की तलाश जारी

    डीसीपी पुरुषोत्तम कराड, उत्तर क्षेत्र-1 और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जयवंत पवार के मार्गदर्शन में एपीआई संदीप उबाले ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने फरहान अली जाफर अली को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने साथी की मदद से एटीएम धोखाधड़ी को अंजाम देने की बात स्वीकार की। हालांकि, मामले में शामिल दूसरा आरोपी अभी फरार है।

    पुलिस ने आरोपी के पास से 10,000 रुपये नकद, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल किया गया चार पहिया वाहन बरामद किया है। बरामद रकम पूरी चोरी की राशि है या उसका एक हिस्सा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    मुंबई में एटीएम कैश ट्रैपिंग के मामले चिंता का विषय

    एटीएम में नकदी फंसाकर चोरी करने की इस तकनीक को कैश ट्रैपिंग कहा जाता है। इसमें एटीएम के नकदी वितरण हिस्से के साथ छेड़छाड़ करके ग्राहकों को नकदी मिलने से रोका जाता है। ग्राहक के खाते से रकम कटने के बाद आरोपी मशीन में फंसी नकदी हासिल कर लेते हैं।

    मुंबई और नवी मुंबई में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मालाड, भांडुप, वाशी और तलोजा में एटीएम से नकदी फंसाकर चोरी करने के मामले पुलिस की जांच में सामने आए हैं। इन घटनाओं में एटीएम के नकदी वितरण हिस्से में प्लास्टिक पट्टी, टेप या अन्य उपकरण लगाकर ग्राहकों की नकदी रोकने का तरीका सामने आया था।

    एटीएम से पैसे नहीं निकलने पर ग्राहक क्या करें?

    यदि एटीएम से नकदी निकालते समय खाते से पैसे कट जाते हैं, लेकिन मशीन से नकदी नहीं मिलती, तो ग्राहक को तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, असफल एटीएम लेनदेन में बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर रकम वापस करनी होती है। RBI के निर्देशों के मुताबिक, असफल लेनदेन का स्वतः रिवर्सल अधिकतम T+5 कैलेंडर दिनों में होना चाहिए। निर्धारित समय के बाद रकम वापस नहीं होने पर लागू नियमों के तहत ग्राहक को प्रतिदिन 100 रुपये का मुआवजा मिल सकता है।

    ग्राहकों को एटीएम से नकदी नहीं मिलने पर लेनदेन का एसएमएस, बैंक स्टेटमेंट, एटीएम केंद्र का पता और शिकायत संख्या सुरक्षित रखनी चाहिए। यदि एटीएम में किसी प्रकार की संदिग्ध पट्टी या उपकरण दिखाई देता है, तो उसे स्वयं हटाने के बजाय बैंक और पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

    पुलिस की जांच जारी

    बांगुर नगर पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है। साथ ही जांच की जा रही है कि फरहान अली और उसका साथी मुंबई के अन्य एटीएम केंद्रों पर भी इसी तरह की धोखाधड़ी में शामिल थे या नहीं।

    पुलिस के सामने अब फरार आरोपी की गिरफ्तारी, चोरी की पूरी रकम का पता लगाने और अन्य संभावित मामलों में आरोपियों की भूमिका की जांच करना महत्वपूर्ण है।

  • 17 साल से फरार मुलुंड हत्याकांड का आरोपी टिटवाला से गिरफ्तार, ऐसे मिला सुराग

    17 साल से फरार मुलुंड हत्याकांड का आरोपी टिटवाला से गिरफ्तार, ऐसे मिला सुराग

    मुंबई के 2009 मुलुंड हत्याकांड में 17 साल से फरार फिरोज शेख गिरफ्तार। बिहार से टिटवाला तक ठिकाना बदलकर रह रहा था आरोपी, पुलिस ने ऐसे पकड़ा।

    मुंबई: मुलुंड में 2009 में हुए हत्या के मामले में 17 साल से फरार आरोपी फिरोज मोहम्मद सुलेमान शेख को मुलुंड पुलिस ने टिटवाला पूर्व के बनेली गांव से गिरफ्तार किया है। आरोपी बिहार में अपने पैतृक गांव से लेकर कई जगहों पर ठिकाना बदलकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह अपनी पहचान छिपाने के लिए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बदलता रहता था। आखिरकार गुप्त सूचना और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंचने में सफल रही।

    गिरफ्तार आरोपी की उम्र पुलिस से संबंधित उपलब्ध जानकारी में 39 वर्ष बताई गई है। वह बनेली गांव की लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में अपने परिवार के साथ रह रहा था और एक निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था।

    पुराने विवाद में हुई थी मसकूर की हत्या

    यह मामला 20 जून 2009 का है। मुलुंड पुलिस थाना क्षेत्र में इराम उर्फ मसकूर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फिरोज, अफरोज और उनके दो अन्य साथियों पर हत्या में शामिल होने का आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे पुरानी रंजिश थी। बताया जाता है कि फिरोज के भाई को मृतक के साथ काम करते समय आंखों में चोट लगी थी, जिसके बाद उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी। इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच गांव की जमीन को लेकर भी विवाद चल रहा था।

    इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर मसकूर के सिर पर हथौड़े से वार किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मुलुंड पुलिस थाने में CR No. 218/2009 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

    बिहार में तलाश के बाद टिटवाला में मिला ठिकाना

    हत्या के बाद फिरोज पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो गया था। पुलिस ने बिहार में उसके पैतृक गांव में भी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद उसे वांटेड आरोपी घोषित किया गया।

    पुलिस को जांच के दौरान जानकारी मिली कि आरोपी अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है और मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड बदलता रहता है। इस वजह से उसकी तलाश में परेशानी आ रही थी।

    मुलुंड पुलिस ने बिहार में अपने गुप्त मुखबिरों के नेटवर्क की मदद से उसकी जानकारी जुटाई। गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर पता चला कि आरोपी अब बिहार में नहीं, बल्कि टिटवाला पूर्व के बनेली गांव में रह रहा है।

    इसके बाद पुलिस टीम ने लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया। वह वहां परिवार के साथ रह रहा था और निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था। पूछताछ और जांच में उसकी पहचान 2009 के हत्या मामले के वांटेड आरोपी के रूप में हुई।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

    यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) मनोज कुमार, अपर पुलिस आयुक्त पूर्व प्रादेशिक विभाग धनंजय कुलकर्णी, पुलिस उपायुक्त पूर्व परिमंडल-3 अभयसिंह देशमुख और सहायक पुलिस आयुक्त मुलुंड विभाग सुदर्शन होनवडजकर के मार्गदर्शन में की गई।

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष घाटेकर की निगरानी में सहायक पुलिस निरीक्षक विनोद लभडे और पुलिस उपनिरीक्षक स्वप्निल महाजन ने टीम के साथ कार्रवाई की।

    इस टीम में पुलिस हवलदार चव्हाण, शेडगे और चौघुले तथा पुलिस सिपाही शिंपी, करदोरे, गावडे, सरकटे और आव्हाड शामिल थे। बिहार में मुखबिरों से मिली जानकारी और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में टीम को सफलता मिली।

    गिरफ्तारी के बाद पुराने मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर

    करीब 17 साल पुराने इस हत्या मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में शामिल बताए गए अन्य तीन आरोपियों की वर्तमान स्थिति और पुराने मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी सामने आना बाकी है।

    भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध गंभीर श्रेणी में आता है, जबकि धारा 34 साझा मंशा से किए गए अपराध में सामूहिक जिम्मेदारी से संबंधित है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई अदालत और पुलिस जांच के अनुसार होगी।

  • Mumbai Crime: ₹55 लाख की MD केस में फरार ‘बंटी-बबली’ तमिलनाडु से गिरफ्तार

    Mumbai Crime: ₹55 लाख की MD केस में फरार ‘बंटी-बबली’ तमिलनाडु से गिरफ्तार

    समता नगर पुलिस ने ₹55 लाख की MD ड्रग्स केस में फरार माला राय और अविनाश झा उर्फ ‘लोटा’ को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया।

    मुंबई: पोईसर में MD ड्रग्स बरामदगी के बाद दोनों आरोपी मुंबई छोड़कर फरार हो गए थे। समता नगर पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए उनकी लोकेशन दक्षिण भारत में ट्रेस की। तमिलनाडु में मौजूदगी की पुष्टि के बाद स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों को गिरफ्तार किया गया।

    पोईसर स्थित घर से बरामद हुई थी 220 ग्राम MD ड्रग्स

    समता नगर पुलिस ने इससे पहले माला राय के पोईसर स्थित घर पर कार्रवाई करते हुए 220 ग्राम MD ड्रग्स बरामद की थी। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 55 लाख रुपये बताई गई थी।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने माला राय की तलाश शुरू की। जांच के दौरान जानकारी सामने आई कि वह अपने कथित ड्रग्स सप्लायर साथी अविनाश झा उर्फ ‘लोटा’ के साथ मुंबई से फरार हो गई थी। दोनों की तलाश के लिए पुलिस ने विशेष टीम गठित की।

    PSI योगेश राउत की टीम ने तमिलनाडु में की गिरफ्तारी

    फरार आरोपियों की तलाश PSI योगेश राउत के नेतृत्व में की गई। तकनीकी जांच के जरिए उनकी लोकेशन का पता लगाया गया और तमिलनाडु में मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद स्थानीय पुलिस की सहायता से गिरफ्तारी की गई।

    PSI योगेश राउत के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ कर MD ड्रग्स के स्रोत और इस कारोबार में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

    MD ड्रग्स का स्रोत और सप्लाई नेटवर्क जांच के घेरे में

    DCP गजानन राजमाने के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और मुंबई में इसकी सप्लाई किन लोगों तक की जानी थी।

    जांच में ड्रग्स की खरीद-फरोख्त, संभावित सप्लायर और कारोबार में शामिल अन्य लोगों की भूमिका पर ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल ड्रग्स के वास्तविक स्रोत और संभावित ग्राहकों की पहचान सार्वजनिक नहीं हुई है।

    अविनाश झा उर्फ ‘लोटा’ के नाम से पुराने NDPS केस का न्यायालयीन रिकॉर्ड

    City Sessions Court, Mumbai के न्यायालयीन रिकॉर्ड में Avinash Mohannath Zha @ Lota के नाम से समता नगर पुलिस स्टेशन से संबंधित एक पुराने NDPS मामले का उल्लेख मिलता है।

    रिकॉर्ड में FIR संख्या 1431, वर्ष 2022 और Sessions Case 101150/2024 का विवरण दर्ज है। इसमें NDPS Act की धारा 8(C) और 22 का उल्लेख भी है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी से इस पुराने न्यायालयीन रिकॉर्ड और वर्तमान 220 ग्राम MD ड्रग्स बरामदगी के मामले के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं होता। इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग माना जाना चाहिए।

    माला राय का नाम पुराने NDPS मामले में भी दर्ज

    Mala Harishchandra Ray vs State of Maharashtra नामक बॉम्बे हाईकोर्ट के एक पुराने न्यायालयीन रिकॉर्ड में भी NDPS मामले का उल्लेख है। इसमें Samta Nagar Police Station के CR No. 517 of 2023 का विवरण उपलब्ध है।

    इस रिकॉर्ड में NDPS Act की धारा 8(c), 22(b) और 29 का उल्लेख किया गया है। इसमें अगस्त 2023 की पुलिस कार्रवाई और माला राय का आरोपी के रूप में नाम दर्ज होने की जानकारी है।

    हालांकि, इस पुराने मामले और वर्तमान MD ड्रग्स बरामदगी के बीच संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    जांच जारी, अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल

    माला राय और अविनाश झा की तमिलनाडु से गिरफ्तारी के बाद समता नगर पुलिस की जांच अब ड्रग्स के स्रोत और कथित सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। पूछताछ से मिलने वाले सुरागों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ आरोपों और उनकी दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

  • दिवाली सफाई में बड़ी सेंध: मुंबई में ऑनलाइन क्लीनर्स का ₹12 लाख का स्कैम

    दिवाली सफाई में बड़ी सेंध: मुंबई में ऑनलाइन क्लीनर्स का ₹12 लाख का स्कैम

    मुंबई के मलाड में ऑनलाइन ऐप से बुक किए गए सफाईकर्मियों ने घर से 12 लाख के गहने उड़ाए। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 3 को दबोचा। जानिए सुरक्षा नियम।

    मुंबई: त्योहारों के सीजन में अगर आप भी घर की ‘दिवाली सफाई’ के लिए किसी ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रोफेशनल क्लीनर्स बुक कर रहे हैं, तो बेहद सतर्क हो जाइए। मुंबई में इस समय ‘प्रोफेशनल दिवाली क्लीनर्स स्कैम’ का एक बेहद खतरनाक और संगठित नेटवर्क एक्टिव हो गया है।

    मलाड वेस्ट के पॉश ‘फाल्कन टावर’ में रहने वाले एक परिवार को ऑनलाइन ऐप से सफाईकर्मी बुलाना भारी पड़ गया। यहां सफाई के बहाने आए शातिर गिरोह ने घर की अलमारी साफ कर ₹12 लाख के सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर लिया। मलाड पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    केमिकल स्प्रे और ‘वड़ा पाव’ की आड़ में वारदात

    यह सनसनीखेज घटना 26 अक्टूबर की है, जब 52 वर्षीय महिला ने एक दिन पहले ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए होम-क्लीनिंग सर्विस बुक की थी। अगली सुबह करीब 10 बजे चार सफाईकर्मी फ्लैट पर पहुंचे। उन्होंने मास्टर बेडरूम में केमिकल स्प्रे करने की बात कही और घरवालों को सांस फूलने व बदबू के डर से दूर रहने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने खुद को कमरे के अंदर लॉक कर लिया और अलमारी का लॉकर तोड़कर 50 ग्राम का सोने का नेकलेस, 10 ग्राम का मंगलसूत्र, 50 ग्राम का गोल्ड बिस्कुट और 500 ग्राम चांदी के सिक्के निकाल लिए।

    चोरी के माल को तुरंत ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने एक शातिर चाल चली। करीब 11:30 बजे, एक सफाईकर्मी ‘वड़ा पाव’ खरीदने के बहाने बाहर गया और चोरी के सारे आभूषण बाहर खड़े अपने तीसरे साथी को पास कर दिए। इसके बाद बाकी आरोपी काम अधूरा छोड़कर अगले दिन आने का वादा करते हुए दोपहर 1:30 बजे वहां से निकल गए। 28 अक्टूबर को जब परिवार ने अलमारी खोली, तब चोरी का खुलासा हुआ।

    मास्टरमाइंड का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

    पीड़ित परिवार की शिकायत पर मलाड पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर फौरन जांच शुरू की। पुलिस की डिटेक्शन टीम ने जाल बिछाकर मुख्य साजिशकर्ता पवन धीवर (26), सत्यम शुक्ला (18) और अनीश चौरसिया (19) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी पवन धीवर का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और यह पूरा गैंग जून 2026 से इस ऑनलाइन सफाई कंपनी में एक्टिव था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 11 तोला सोना (लगभग 8 से 9 लाख रुपये मूल्य) बरामद कर लिया है। बाकी की चांदी और बचे हुए आभूषणों की तलाश के लिए पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

    ऑनलाइन कंपनियों की लापरवाही और उपभोक्ता के अधिकार

    इस घटना ने गिग-इकोनॉमी और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। मुंबई पुलिस के नियमों के मुताबिक, किसी भी सर्विस एग्रीगेटर ऐप या एजेंसी के लिए अपने सभी फील्ड स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification Certificate) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कंपनियां बिना बैकग्राउंड चेक किए किसी अपराधी को आपके बेडरूम तक भेज रही हैं, तो उपभोक्ता लापरवाही के तहत कंपनियों के खिलाफ भी पुलिस में आपराधिक मामला और कंज्यूमर कोर्ट में भारी मुआवजे का केस दर्ज कराया जा सकता है।

    सुरक्षा के लिए इन 4 बातों का रखें ध्यान

    • प्रोफाइल और आईडी का मिलान: घर में प्रवेश देने से पहले सफाईकर्मियों के आधार कार्ड और ऐप पर दिख रही प्रोफाइल फोटो को जरूर चेक करें।
    • कर्मचारियों पर सीधी नजर: जब कर्मचारी घर के अंदर काम कर रहे हों, तो परिवार का कम से कम एक सदस्य निगरानी के लिए वहां जरूर मौजूद रहे। केमिकल स्प्रे के बहाने उन्हें कमरे में अकेला न छोड़ें।
    • सोसाइटी गेट पर सख्त एंट्री: सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड्स को निर्देश दें कि वे आने वाले हर सर्विस प्रोवाइडर की तस्वीर और उनके बैग्स की चेकिंग एंट्री बुक में दर्ज करें।
    • कीमती सामान पहले करें सुरक्षित: सफाई शुरू होने से पहले ही अपने सोने, चांदी और कैश को ऐसे कमरों या लॉकर में शिफ्ट कर दें, जहां सफाई नहीं होनी है।

    मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी फिलहाल पुलिस कस्टडी में हैं और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गैंग ने मुंबई के अन्य किन इलाकों में सफाई के बहाने चोरियां की हैं।

  • दिंडोशी पुलिस की मालेगांव में बड़ी कार्रवाई, 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त

    दिंडोशी पुलिस की मालेगांव में बड़ी कार्रवाई, 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त

    मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव के कबाड़ गोदाम से 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त किए। इनकी कीमत ₹1.15 करोड़ बताई गई, एक आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मुंबई में मोबाइल चोरी के बाद उनके पार्ट्स निकालकर बेचने के कथित कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। दिंडोशी पुलिस ने नासिक जिले के मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई कर 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड जब्त किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    पुलिस की जांच मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क में हुई दो मोबाइल की चोरी से शुरू हुई थी, लेकिन इसकी कड़ी मालेगांव तक पहुंच गई। अब पुलिस जब्त मदरबोर्ड की पहचान कर यह पता लगाने में जुटी है कि वे मुंबई और दूसरे इलाकों से चोरी हुए किन मोबाइल फोन के हैं और इस कथित कारोबार में और कौन-कौन शामिल है।

    मालाड के पुष्पा पार्क से शुरू हुई थी जांच

    इस मामले की शुरुआत 22 सितंबर 2026 को मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क इलाके में हुई मोबाइल चोरी की शिकायत से हुई थी। यहां एक महिला के बैग से दो मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। इसके बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 1073/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    चोरी की इस घटना की जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मुंबई से चोरी किए गए मोबाइल फोन मालेगांव ले जाए जा रहे हैं। वहां मोबाइल खोलकर उनके अलग-अलग पार्ट्स निकाले जाते हैं और मदरबोर्ड को कबाड़ के रूप में बेचने का कारोबार किया जा रहा है।

    मालेगांव के कबाड़ गोदाम से मिले 1,150 मदरबोर्ड

    जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान वहां से 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड बरामद किए गए। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है।

    इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जब्त किए गए मदरबोर्ड के स्रोत और उनकी पहचान की जांच की जा रही है।

    चोरी के मोबाइल के पार्ट्स अलग करके बेचने का शक

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू चोरी के मोबाइल फोन को खोलकर उनके पार्ट्स अलग-अलग बेचने का कथित तरीका है। मोबाइल का पूरा हैंडसेट बेचने के बजाय उसके मदरबोर्ड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को अलग करके बेचने से चोरी के फोन की पहचान और बरामदगी की जांच जटिल हो सकती है।

    1,150 मदरबोर्ड किन मोबाइल फोन के हैं?

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल जब्त मदरबोर्ड की पहचान करना है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ये मदरबोर्ड मुंबई में चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन से जुड़े हैं या दूसरे इलाकों के मामलों से भी इनका संबंध है।

    जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गोदाम तक ये मदरबोर्ड किस माध्यम से पहुंचे, उन्हें किसने खरीदा और आगे किन लोगों को बेचने की तैयारी थी। फिलहाल अबतक पूरे सप्लाई नेटवर्क या अन्य आरोपियों की संख्या की जांच नहीं हुई है।

    मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?

    मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद फोन का IMEI नंबर और जरूरी दस्तावेज तैयार रखकर केंद्र सरकार के CEIR पोर्टल पर मोबाइल ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    CEIR के जरिए चोरी या गुम हुए मोबाइल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक कराया जा सकता है। यदि ब्लॉक किया गया फोन किसी नेटवर्क पर दोबारा इस्तेमाल होता है, तो उसकी ट्रेसिंग में पुलिस को मदद मिल सकती है।

    आधिकारिक पोर्टल: https://www.ceir.gov.in/

    दिंडोशी पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य फोकस जब्त किए गए 1,150 मदरबोर्ड की पहचान और उनके वास्तविक स्रोत का पता लगाना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद पुर्जे किन मोबाइल चोरी के मामलों से जुड़े हैं और मालेगांव तक पहुंचने वाले इस कथित कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 12वीं गिरफ्तारी, हरियाणा से अमन गिरफ्तार

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में 12वीं गिरफ्तारी, हरियाणा से अमन गिरफ्तार

    टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के सोनीपत से अमन को गिरफ्तार किया। बैंक खाते में 50 हजार रुपये के लेनदेन की जांच जारी है।

    मुंबई: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने 12वीं गिरफ्तारी की है। हरियाणा के सोनीपत जिले के रोहणा गांव से अमन को गिरफ्तार किया गया है। उसके बैंक खाते में 50 हजार रुपये के कथित लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रकम का 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू में हुई फायरिंग से क्या संबंध है।

    अमन को पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी कुणाल का दोस्त बताया जा रहा है। मुंबई पुलिस की टीम उसे आगे की पूछताछ के लिए मुंबई लेकर आई है। जांच का मुख्य फोकस अब पैसों के लेनदेन, आरोपियों के आपसी संपर्क और फायरिंग की कथित साजिश में अमन की भूमिका पर है।

    अमन के बैंक खाते में 50 हजार रुपये की जांच

    जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, अमन का नाम बैंक खाते में हुए लेनदेन की पड़ताल के दौरान सामने आया। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि उसके खाते में रकम किसने भेजी, पैसे भेजने का उद्देश्य क्या था और क्या इसका संबंध फायरिंग मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों से है।

    फिलहाल 50 हजार रुपये के लेनदेन को लेकर जांच जारी है। केवल खाते में रकम आने से किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका साबित नहीं होती। पुलिस की पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से इस संबंध में आगे की जानकारी सामने आ सकती है।

    11 आरोपियों को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत

    अमन की गिरफ्तारी से पहले इस मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों को 29 अक्टूबर को मुंबई की विशेष MCOCA अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

    इन आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए 10 दिन की हिरासत मांगी थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के बीच कथित साजिश, हथियारों की व्यवस्था और आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच की जानी है।

    मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के प्रावधान भी लागू किए गए हैं। पुलिस ने कथित संगठित आपराधिक नेटवर्क, आर्थिक लाभ और समाज में डर पैदा करने की आशंका को जांच का हिस्सा बनाया है। अदालत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    अनिल पंडित की तलाश, कथित गैंग कनेक्शन की जांच

    इस मामले में अनिल पंडित को वांछित आरोपी बताया गया है। पुलिस को संदेह है कि उसका लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध हो सकता है। जांच एजेंसी कथित हमले की योजना, हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

    पुलिस ने अदालत में डिजिटल सबूत, वॉइस चैट और मैसेजिंग ऐप पर हुई बातचीत की जांच का भी जिक्र किया है। इन सबूतों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित हमले के निर्देश किसने दिए और इसमें शामिल लोगों की क्या भूमिका थी। अनिल पंडित की कथित भूमिका और गैंग से संबंधों को अभी आरोपों और जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

    18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग

    यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं। अभिनेता इस घटना में सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए।

    घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में कथित हमलावरों के अलावा हथियारों की सप्लाई, वित्तीय लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

    अमन की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि उसके बैंक खाते में आए 50 हजार रुपये का मामले से कोई सीधा संबंध है या नहीं। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पहले गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसके संपर्क किस प्रकार के थे और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

  • धारावी में ₹35 लाख की SRA फ्लैट धोखाधड़ी, 7 महीने से फरार आरोपी गिरफ्तार

    धारावी में ₹35 लाख की SRA फ्लैट धोखाधड़ी, 7 महीने से फरार आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के धारावी में 62 वर्षीय महिला से SRA फ्लैट दिलाने के नाम पर ₹35 लाख की कथित ठगी। सात महीने से फरार आरोपी Murugan Anbalagan Pallan गिरफ्तार।

    मुंबई: धारावी में 62 वर्षीय महिला को निर्माणाधीन Slum Rehabilitation Authority (SRA) प्रोजेक्ट में फ्लैट दिलाने का कथित झांसा देकर ₹35 लाख लेने के मामले में पुलिस ने Murugan Anbalagan Pallan को गिरफ्तार किया है। आरोपी करीब सात महीने से फरार बताया जा रहा था। इस मामले में Rajesh Pillai और Vinita Samadhan Surwade के नाम भी सह-आरोपियों के तौर पर सामने आए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, महिला ने अपना पुराना फ्लैट बेचकर नए घर के लिए रकम जुटाई थी। आरोप है कि ₹35 लाख देने के बावजूद उन्हें न फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज दिए गए। शिकायत के बाद धारावी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    पुराने फ्लैट को बेचकर जुटाए थे पैसे

    मामले की जानकारी के अनुसार, महिला ने 2005 में अपने पति के माध्यम से धारावी में एक फ्लैट खरीदा था। बाद में उन्होंने यह फ्लैट ₹10 लाख के डिपॉजिट पर किराये पर दे दिया था। परिवार कुछ समय के लिए रायगढ़ चला गया था और करीब डेढ़ साल बाद वापस धारावी लौटा।

    इस दौरान महिला के पति की तबीयत खराब थी और उनके बेटे ने हाल ही में नई नौकरी शुरू की थी। ऐसे में किरायेदार से अपना फ्लैट वापस लेने के लिए ₹10 लाख का डिपॉजिट लौटाना परिवार के लिए मुश्किल हो रहा था।

    महिला ने इसके बाद अपना फ्लैट बेचने का फैसला किया। उन्होंने संपत्ति ₹40 लाख में बेची और किरायेदार को ₹10 लाख लौटाए। इसके बाद वह बची हुई रकम से दूसरी जगह घर खरीदना चाहती थीं।

    SRA या MHADA में सस्ता फ्लैट दिलाने का वादा

    पुलिस के अनुसार, इसी दौरान महिला की मुलाकात Murugan Anbalagan Pallan से हुई। आरोप है कि उसने उन्हें Slum Rehabilitation Authority (SRA) या Maharashtra Housing and Area Development Authority (MHADA) की योजना के तहत कम कीमत पर फ्लैट दिलाने का भरोसा दिया।

    महिला को कथित तौर पर बताया गया कि आरोपियों ने पहले भी कई लोगों को कम कीमत पर कमरे या फ्लैट दिलाने में मदद की है। इसके बाद धारावी में निर्माणाधीन SRA प्रोजेक्ट में ₹35 लाख में फ्लैट दिलाने का वादा किया गया।

    महिला ने इस वादे पर भरोसा करके आरोपियों को किस्तों में ₹35 लाख दिए। हालांकि, आरोप है कि रकम लेने के बाद उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं सौंपा गया और न ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

    शिकायत करने पर कथित तौर पर टालने लगे आरोपी

    महिला ने जब फ्लैट के कब्जे और दस्तावेजों के बारे में आरोपियों से जवाब मांगा, तो कथित तौर पर वे उन्हें टालने लगे। इसके बाद महिला ने धारावी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने Murugan Anbalagan Pallan, Rajesh Pillai और Vinita Samadhan Surwade के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और अन्य संबंधित अपराधों के तहत मामला दर्ज किया।

    मामले में Murugan Anbalagan Pallan को करीब सात महीने तक फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया। अन्य दो सह-आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी मौजूदा कानूनी स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    SRA फ्लैट लेने से पहले किन बातों की जांच जरूरी?

    यह मामला उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो मुंबई में SRA या दूसरी सरकारी आवास योजनाओं के तहत कम कीमत पर फ्लैट खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।

    किसी भी निर्माणाधीन पुनर्वसन प्रोजेक्ट में फ्लैट लेने से पहले संबंधित प्राधिकरण से आवंटन और पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है। केवल एजेंट या बिचौलिए के भरोसे बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है।

    खरीदारों को संबंधित फ्लैट के आवंटन पत्र, विक्रेता के अधिकार, लागू हस्तांतरण नियमों और भवन के जरूरी अनुमोदनों की जांच करनी चाहिए। भुगतान की रसीदें, बैंक ट्रांसफर का रिकॉर्ड और लिखित समझौते भी सुरक्षित रखने चाहिए।

    धारावी के इस मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर जिस फ्लैट का वादा किया गया था, वह किस विशेष SRA प्रोजेक्ट या भवन में था।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस की जांच में कथित भुगतान, फ्लैट के वादे और आरोपियों की भूमिका से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

  • मुंबई में फर्जी एक्सीडेंट के नाम पर वसूली का आरोप, गोरेगांव में 1,000 रुपये देने पड़े

    मुंबई में फर्जी एक्सीडेंट के नाम पर वसूली का आरोप, गोरेगांव में 1,000 रुपये देने पड़े

    मुंबई के गोरेगांव में पैर कुचलने का आरोप लगाकर एक कार चालक से 1,000 रुपये लेने का मामला सामने आया। जानें पुलिस की सलाह और बचाव के तरीके।

    मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में सड़क हादसे के नाम पर पैसे वसूलने का संदिग्ध मामला सामने आया है। स्कूल से अपने दो बच्चों को लेकर घर लौट रहे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दोपहिया सवार ने उसका रास्ता रोककर पैर कुचलने का दावा किया और इलाज के नाम पर पैसे मांगे। विवाद खत्म करने के लिए व्यक्ति ने कथित तौर पर 1,000 रुपये ऑनलाइन दे दिए। घटना के बाद गोरेगांव पुलिस ने वाहन चालकों को दबाव में पैसे न देने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेने की सलाह दी है।

    यह घटना अनमोल फॉर्च्यून इमारत के पास की बताई गई है। कार चला रहे शुक्ला के मुताबिक, वह हाल ही में दोपहर करीब 4:15 बजे अपने बच्चों को स्कूल से लेकर घर जा रहे थे। इसी दौरान एक दोपहिया सवार ने उनकी कार के पीछे के शीशे पर हाथ मारा और उन्हें रुकने के लिए कहा।

    पैर कुचलने का आरोप लगाकर मांगे पैसे

    शुक्ला ने बताया कि दोपहिया सवार ने उन पर गाड़ी से अपना पैर कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने इस आरोप को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें न तो किसी टक्कर का एहसास हुआ था और न ही दोपहिया वाहन के कार से टकराने का।

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    शुक्ला के अनुसार, बाइक सवार ने इलाज के खर्च के नाम पर पैसे मांगे। जब उन्होंने नकद पैसे नहीं होने की बात कही, तो उसने ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड दिखा दिया। इस दौरान कार में बैठे दोनों बच्चे डर गए थे।

    शुक्ला ने बताया कि विवाद बढ़ने और बच्चों को और परेशानी से बचाने के लिए उन्होंने आखिरकार 1,000 रुपये का भुगतान कर दिया। उनके अनुसार, पैसे मिलने के बाद बाइक सवार ने भुगतान का स्क्रीनशॉट भी मांगा और कहा कि क्यूआर कोड उसके एक दोस्त का है।

    पुलिस की गश्ती गाड़ी पहुंची, फिर भी विवाद खत्म करने की मांग

    शुक्ला के मुताबिक, घटना के दौरान पुलिस की गश्ती गाड़ी वहां से गुजरी और पुलिसकर्मियों ने रुककर दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने दोनों को विवाद सुलझाने के लिए पुलिस थाने चलने को कहा।

    शुक्ला का आरोप है कि बाद में दोपहिया सवार ने पुलिस के सामने मामला सुलझाने के बजाय आपस में विवाद खत्म करने पर जोर दिया। बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने पैसे देने का फैसला किया।

    घटना के बाद शुक्ला ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया, ताकि दूसरे वाहन चालक भी सावधान रहें। उनकी पोस्ट पर कई लोगों ने इसी तरह के कथित अनुभव बताए।

    बांद्रा, जोगेश्वरी और चेंबूर से भी आए ऐसे अनुभव

    शुक्ला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जॉन सी. ने बताया कि पिछले साल उनके चालक को दो लोगों ने रोककर आरोप लगाया था कि उसकी गाड़ी से उनकी एसयूवी पर खरोंच आई है। चालक ने इस आरोप पर सवाल उठाया, क्योंकि दूसरी गाड़ी उसकी गाड़ी से आगे खड़ी थी। इसके बाद उसने दोनों से बातचीत बंद कर दी और पास के सांताक्रूज पुलिस थाने चलने को कहा। जॉन सी. के मुताबिक, पुलिस थाने चलने की बात सुनकर दोनों वहां से चले गए।

    एस. ए. थेवर ने बताया कि उनके साथ भी कई बार इसी तरह की घटना हुई। उनके मुताबिक, पहली बार एक वाहन चालक ने बीमार बच्चे के इलाज का हवाला देकर उनसे पैसे लिए थे। बाद में जब इसी तरह की कहानी दोबारा सुनाई गई, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उन्होंने कम से कम छह बार ऐसी बातें सुनीं।

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    निमेश दवे ने बताया कि जोगेश्वरी से एक दोपहिया सवार उनका पीछा कर रहा था। फ्लाईओवर पर पहुंचने के बाद उसने वाहन रोककर टक्कर मारने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह गाड़ी चलाते समय फोन पर बात कर रहे थे। दवे के अनुसार, जब उन्होंने सवार से नीचे चलकर बात करने को कहा और उसने उनकी गाड़ी पर मीडिया का स्टिकर देखा, तो वह वहां से चला गया।

    दवे ने बताया कि बाद में पुलिस से बातचीत करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि कथित तौर पर पैसे वसूलने वाले लोग फ्लाईओवर जैसी जगहों को चुन सकते हैं, जहां आसपास पैदल चलने वाले लोग या पुलिसकर्मी कम दिखाई देते हैं।

    गोरेगांव पुलिस ने क्या सलाह दी?

    गोरेगांव पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक सतीश उमारे ने वाहन चालकों से कहा कि विवाद होने पर दबाव में आकर किसी को पैसे न दें। ऐसी स्थिति में नजदीकी पुलिस थाने जाएं या रास्ते में पुलिसकर्मी अथवा यातायात पुलिस दिखाई देने पर उनसे मदद लें।

    उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को खतरा महसूस हो रहा है, तो उसे जरूरी स्थिति को छोड़कर वाहन से बाहर निकलने से बचना चाहिए। दुर्घटना होने या किसी के घायल होने पर चिकित्सा सहायता देना जरूरी है।

    उमारे के अनुसार, वाहन चालक पुलिस से मदद लेने के लिए 100 या 112 पर फोन कर सकते हैं अथवा नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी।

    अगर कोई हादसे का आरोप लगाकर पैसे मांगे तो क्या करें?

    ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी और वाहन में बैठे यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखें। किसी के आरोप पर तुरंत पैसे देने के बजाय पुलिस की मदद लें और घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी दें।

    अगर वास्तव में दुर्घटना हुई है या कोई घायल है, तो चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं। विवाद के दौरान वाहन का नंबर, घटना का समय और जगह, गवाहों की जानकारी तथा सुरक्षित तरीके से उपलब्ध तस्वीरें या कैमरे की रिकॉर्डिंग संभालकर रखें।

    अगर आपने ऑनलाइन भुगतान कर दिया है, तो लेनदेन की पहचान संख्या, भुगतान का समय और प्राप्तकर्ता की जानकारी सुरक्षित रखें। संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में बैंक या भुगतान सेवा को सूचित करें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। धमकी या तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर संपर्क करें।

    वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि वास्तविक दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करें, लेकिन किसी विवादित मांग के दबाव में आने के बजाय पुलिस को सूचना दें।