भिवंडी के बालाजी नगर में कोहिनूर बिल्डिंग हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। देर रात इमारत कैसे ढही, मरम्मत का काम किसकी अनुमति से चल रहा था और अब जांच किस दिशा में बढ़ रही है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
महाराष्ट्र: थाने जिले के भिवंडी बालाजी नगर इलाके में गुरुवार देर रात हुए कोहिनूर बिल्डिंग हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। रात करीब 11 बजे के आसपास चार मंजिला इमारत का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य पूरी रात चलता रहा और अब तक भी मलबे को हटाने का काम जारी है।
यह हादसा सिर्फ एक इमारत गिरने की घटना नहीं है, बल्कि इसके साथ कई ऐसे सवाल भी जुड़े हुए हैं जिनके जवाब अब प्रशासन, पुलिस और जांच एजेंसियां तलाश रही हैं।

हादसे वाली रात आखिर क्या हुआ था?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 8 बजे से ही इमारत के अंदर से दरारें पड़ने और दीवारों के टूटने जैसी आवाजें आने लगी थीं। कुछ परिवारों ने खतरे को देखते हुए अपने घर छोड़ दिए, लेकिन कई लोग और मजदूर अभी भी इमारत के अंदर मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात बढ़ने के साथ इमारत की हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब 11 बजे के आसपास अचानक उसका एक बड़ा हिस्सा गिर गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग सबसे पहले बचाव कार्य में जुट गए। बाद में पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं।
जांच एजेंसियां किन सवालों के जवाब तलाश रही हैं?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इमारत के अंदर मरम्मत का काम किसकी अनुमति से चल रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या मरम्मत शुरू करने से पहले किसी इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ की रिपोर्ट ली गई थी या नहीं।
इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर भी केंद्रित है कि इमारत के मालिक, ठेकेदार और स्थानीय प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभाईं या नहीं।

मालिक और प्रशासन दोनों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे से पहले इमारत की हालत लगातार खराब हो रही थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर इमारत कमजोर थी तो वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया।
जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या स्थानीय प्रशासन को पहले से खतरे की जानकारी थी। अगर शिकायतें पहले से मिली थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई और आखिर किन परिस्थितियों में लोग आखिरी समय तक उसी इमारत में रह रहे थे।
मालिक और ठेकेदार पर क्या आरोप हैं?
प्रारंभिक पुलिस जांच में कोहिनूर बिल्डिंग के मालिक बिलाल अबूबकर और मरम्मत कार्य से जुड़े ठेकेदार अशोक का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि मरम्मत किसकी अनुमति से हो रही थी और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
बिल्डिंग में कौन लोग रहते थे?
कोहिनूर बिल्डिंग में कुल 48 फ्लैट थे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यहां किरायेदार परिवार, दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबार से जुड़े लोग रहते थे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 200 लोग इस इमारत से प्रभावित हुए हैं। अभी तक प्रशासन ने सभी परिवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
क्या हादसे की वजह अवैध मरम्मत बनी?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं बिना तकनीकी मंजूरी के किए जा रहे निर्माण कार्य ने इमारत की संरचना को और कमजोर तो नहीं कर दिया था।
फिलहाल अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है, लेकिन जांच में मरम्मत से जुड़े दस्तावेजों और ठेकेदार की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।
क्या रहवासियों ने चंदा जुटाकर कराई थी मरम्मत?
स्थानीय लोगों का दावा है कि कोहिनूर बिल्डिंग की हालत लगातार खराब हो रही थी। उनके मुताबिक, इमारत में रहने वाले कई परिवारों ने आपस में चंदा इकट्ठा करके मरम्मत का काम शुरू कराया था। रहवासियों का कहना है कि उनके पास तुरंत दूसरी जगह जाने का कोई विकल्प नहीं था, इसलिए उन्होंने इमारत को रहने लायक बनाने की कोशिश की।
हालांकि, अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि मरम्मत का काम किसी अधिकृत इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ की निगरानी में हो रहा था या नहीं। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि मरम्मत के लिए कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी या नहीं।
कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कई परिवार वर्षों से उसी इमारत में रह रहे थे और आर्थिक तंगी के कारण दूसरी जगह शिफ्ट होना उनके लिए आसान नहीं था।
“स्थानीय लोगों के अनुसार, मरम्मत के लिए रहवासियों ने चंदा इकट्ठा किया था, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि काम तकनीकी मंजूरी और सुरक्षा मानकों के तहत किया जा रहा था या नहीं।”
उस रात के दो घंटे अब जांच का सबसे बड़ा हिस्सा
हादसे से पहले रात 9 बजे से 11 बजे के बीच क्या हुआ, यह अब पूरी जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उस दौरान किसी ने पुलिस या नगर निगम को फोन किया था, क्या लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की गई थी और क्या प्रशासन को समय रहते खतरे की जानकारी मिल गई थी।
अगर इन दो घंटों की पूरी तस्वीर सामने आ जाती है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि हादसा सिर्फ एक दुर्घटना था या इसके पीछे लापरवाही भी शामिल थी।
पूरे शहर की नजर अब जांच रिपोर्ट पर
भिवंडी हादसे के बाद पूरे शहर की नजर अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। स्थानीय लोगों के मन में अभी भी कई सवाल हैं और सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और मलबे को हटाने के साथ-साथ पूरे मामले की जांच भी जारी है।

