MMRDA ने e-Punarvasan शुरू कर PAP पुनर्वास को डिजिटल किया। Garib Nagar के 94 पात्र परिवारों को पहले दिन कब्जा पत्र मिले, जानिए पूरी प्रक्रिया।
मुंबई: परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने 1 अक्टूबर से मुंबई में ‘ई-पुनर्वसन’ प्रणाली शुरू कर दी है। नई व्यवस्था में परियोजना प्रभावित व्यक्ति यानी पीएपी के सर्वे से लेकर पात्रता जांच, मकान आवंटन, लॉटरी और कब्जा देने तक की प्रक्रिया को एक ही डिजिटल प्रणाली से जोड़ दिया गया है। इसके पहले दिन बांद्रा पूर्व के गरीब नगर के 94 पात्र प्रभावित परिवारों को कब्जा पत्र दिए गए।
इस प्रणाली को एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने शुरू किया। इस दौरान अतिरिक्त महानगर आयुक्त-1 वेलरासु और संयुक्त महानगर आयुक्त पंकज देवरे भी मौजूद रहे।
गरीब नगर के 100 पात्र परिवारों का पुनर्वास
गरीब नगर का मामला इस नई व्यवस्था का पहला प्रमुख उदाहरण है। बांद्रा पूर्व में रेलवे परियोजना से प्रभावित 100 परिवारों को पुनर्वास के लिए पात्र माना गया था। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार इनमें 84 परिवारों के लिए कुर्ला की पुनर्वास इमारतों में आवास और 16 परिवारों के लिए एचडीआईएल कुर्ला की इमारत में आवास की व्यवस्था की गई थी।
इन पुनर्वास आवासों का क्षेत्रफल करीब 279 वर्गफुट बताया गया है। 1 अक्टूबर को शुरू हुई डिजिटल प्रक्रिया के पहले दिन 94 पात्र प्रभावित परिवारों को कब्जा पत्र मिलने की जानकारी सामने आई है। कुल 100 पात्र परिवारों और पहले दिन 94 कब्जा पत्र मिलने के बीच का अंतर इस बात से जुड़ा है कि सभी पात्र मामलों की प्रक्रिया एक ही चरण में पूरी नहीं हुई।
गरीब नगर का मामला अदालत तक पहुंचा था
गरीब नगर में पुनर्वास का मामला कई महीनों से चल रहा था। जुलाई 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष भी पात्र परिवारों को बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कठिनाइयों का मुद्दा सामने आया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को पात्र परिवारों के लिए जरूरी सुविधाएं बहाल करने और पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
1 सितंबर 2026 के न्यायिक आदेश में एमएमआरडीए ने अदालत को बताया था कि 100 पात्र पीएपी परिवारों को वैकल्पिक आवास देने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें 84 परिवारों में से 77 को आवंटन पत्र जारी हो चुके थे, लेकिन संबंधित इमारत को अधिभोग प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण उन्हें तत्काल भौतिक कब्जा नहीं दिया जा सका था। अग्निशमन विभाग की अनापत्ति भी लंबित बताई गई थी। एमएमआरडीए ने 30 सितंबर तक अधिभोग प्रमाणपत्र हासिल करने के प्रयास की जानकारी अदालत को दी थी। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 के लिए निर्धारित है।
सर्वे से लेकर कब्जे तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल
ई-पुनर्वसन में सबसे पहले मोबाइल आधारित ई-सर्वे के जरिए प्रभावित परिवारों की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके बाद आधार आधारित ऑफलाइन सत्यापन, पुराने बिजली बिलों की ऑनलाइन जांच, संयुक्त सत्यापन और पात्रता से जुड़े अनुबंध-2 की प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली में शामिल होगी।
पात्रता तय होने के बाद उपलब्ध पुनर्वास आवासों में से मकान का चयन कंप्यूटरीकृत ई-लॉटरी के जरिए किया जाएगा। एमएमआरडीए के अनुसार उपलब्ध आवासों में से चयन लॉटरी के माध्यम से होगा और चयन के दौरान मानवीय हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
इसके बाद आवंटन पत्र और कब्जा पत्र डिजिटल रूप से तैयार किए जाएंगे। लाभार्थी की पहचान की पुष्टि के लिए अंगूठे का निशान और जीवित तस्वीर भी दर्ज की जाएगी। संबंधित दस्तावेजों को क्यूआर कोड के माध्यम से जोड़ा जा सकेगा।
आधार सत्यापन की भी होगी डिजिटल व्यवस्था
ई-पुनर्वसन में आधार आधारित ऑफलाइन सत्यापन मांगने वाली संस्था यानी ओवीएसई व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। एमएमआरडीए के अनुसार वह इस व्यवस्था का इस्तेमाल करने वाला देश का पहला संगठन है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य लाभार्थी द्वारा उपलब्ध कराई गई आधार संबंधी जानकारी को ऑफलाइन तरीके से सत्यापित कर उसे संबंधित पुनर्वास मामले से जोड़ना है।
पुराने बिजली बिलों की भी ऑनलाइन जांच की जाएगी। इससे प्रभावित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत पुराने निवास संबंधी दस्तावेजों की जांच बिजली सेवा प्रदाताओं के रिकॉर्ड से की जा सकेगी।
पुनर्वास आवासों का भी बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
ई-पुनर्वसन सिर्फ लाभार्थियों का रिकॉर्ड डिजिटल नहीं करेगा। पुनर्वास इमारतों और प्रत्येक आवास का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें उपलब्ध, आवंटित और कब्जा दिए जा चुके आवासों की स्थिति दर्ज होगी।
प्राधिकरण के अधिकारी डैशबोर्ड और प्रबंधन सूचना प्रणाली के माध्यम से प्रत्येक मामले की स्थिति, आवंटन और पुनर्वास की प्रगति देख सकेंगे। कब्जा मिलने के बाद की पुनर्वास संबंधी कार्रवाई का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से रखा जाएगा।
दो साल पहले शुरू हो चुकी थी डिजिटल व्यवस्था की तैयारी
ई-पुनर्वसन को पूरी तरह अचानक शुरू की गई व्यवस्था नहीं माना जा सकता। एमएमआरडीए की आधिकारिक जानकारी के अनुसार सामाजिक विकास प्रकोष्ठ के पुनर्वास कार्य को कंप्यूटरीकृत करने और पीएपी आवंटन के लिए ई-लॉटरी प्रणाली तैयार करने का ठेका 15 अक्टूबर 2024 को दिया गया था।
इस परियोजना की लागत 1.10 करोड़ रुपये, जीएसटी को छोड़कर, निर्धारित की गई थी। इसका ठेका निओसॉफ्ट टेक प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। परियोजना के लिए तीन महीने का क्रियान्वयन और सेवा शुरू होने के बाद दो वर्ष का सहयोग निर्धारित था। इस प्रणाली में आधारभूत सामाजिक-आर्थिक सर्वे, पात्रता तय करना, लॉटरी, आवंटन पत्र और कब्जा पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल की गई थीं।
हजारों प्रभावित परिवारों तक पहुंच सकता है असर
एमएमआरडीए के पुनर्वास कार्य का दायरा गरीब नगर के 100 परिवारों तक सीमित नहीं है। प्राधिकरण के आधिकारिक आंकड़ों में विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े 42,228 आवासीय और 4,458 गैर-आवासीय परियोजना प्रभावित व्यक्तियों का उल्लेख है। इसके अलावा अन्य संस्थाओं की परियोजनाओं से जुड़े प्रभावित लोगों के लिए भी एमएमआरडीए द्वारा पुनर्वास आवास उपलब्ध कराए जाते हैं।
एमएमआरडीए के पास पहले से बड़ी संख्या में पुनर्वास आवासों का नेटवर्क भी है। ऐसे में उपलब्ध, आवंटित और कब्जा दिए गए आवासों की डिजिटल सूची तैयार होने से भविष्य में किसी पीएपी मामले की स्थिति पता करना अधिकारियों के लिए आसान हो सकता है।
ई-लॉटरी से आवंटन में क्या बदलेगा
नई व्यवस्था में आवास का चयन कंप्यूटरीकृत लॉटरी के जरिए किए जाने का दावा है। इसका उद्देश्य उपलब्ध आवासों में से चयन की प्रक्रिया को दर्ज करने योग्य बनाना और व्यक्तिगत स्तर पर मकान चुनने की गुंजाइश कम करना है।
हालांकि पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया केवल लॉटरी पर निर्भर नहीं है। सर्वे, दस्तावेजों की जांच, संयुक्त सत्यापन और पात्रता तय करना जैसे चरण लॉटरी से पहले होते हैं। इसलिए डिजिटल लॉटरी को पूरी पुनर्वास प्रक्रिया से मानवीय निर्णय खत्म होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
लाभार्थियों के लिए क्या बदलेगा
ई-पुनर्वसन के बाद किसी पीएपी मामले में सर्वे से लेकर पात्रता, आवंटन और कब्जे तक की स्थिति एकीकृत रिकॉर्ड में दर्ज की जा सकेगी। एमएमआरडीए का कहना है कि इससे अलग-अलग कागजी और एक्सेल रिकॉर्ड पर निर्भरता घटेगी तथा पुनर्वास मामलों की निगरानी आसान होगी।
प्राधिकरण के अनुसार इस व्यवस्था का एक उद्देश्य प्रभावित लोगों को बिचौलियों पर निर्भरता से बचाना और उनके पुनर्वास मामले की स्थिति को अधिक स्पष्ट बनाना भी है।
अब आगे क्या
गरीब नगर में 1 अक्टूबर को ई-पुनर्वसन के जरिए कब्जा पत्र जारी होना इस नई डिजिटल व्यवस्था का पहला बड़ा व्यावहारिक इस्तेमाल है। अब इसकी वास्तविक परीक्षा उन मामलों में होगी जहां बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों की पात्रता, दस्तावेज, आवास उपलब्धता और आवंटन एक साथ संभालना होगा।
गरीब नगर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित है। इस बीच ई-पुनर्वसन के तहत पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ने से यह भी स्पष्ट होगा कि डिजिटल सर्वे, सत्यापन, आवंटन और कब्जे की एकीकृत व्यवस्था लंबे समय से लंबित पीएपी मामलों को कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।













