मुंबई के गोरेगांव पूर्व में 18 महीने की बच्ची की मौत के मामले में CCTV फुटेज, नाबालिग की भूमिका, परिवारों के बीच विवाद और पुलिस जांच की पूरी जानकारी जानें।
मुंबई: गोरेगांव पूर्व में 18 महीने की बच्ची की मौत के मामले में CCTV फुटेज से एक नाबालिग लड़की की कथित भूमिका सामने आई है। 14 अक्टूबर 2026 की रात हुई इस घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की गई और नाबालिग को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किया गया।
यह घटना नागरिक निवारा परिसर स्थित शिवशक्ति प्रकल्प नंबर 1 की रिहायशी इमारत में हुई। घटना के बाद परिवार में मातम है और पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
CCTV फुटेज में क्या सामने आया?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृत बच्ची और नाबालिग लड़की एक ही इमारत में आसपास रहते थे। घटना वाले दिन नाबालिग बच्ची के परिवार के घर आई थी। इसी दौरान 18 महीने की बच्ची इमारत की छठी मंजिल के पास से नीचे गिर गई।

CCTV फुटेज में नाबालिग लड़की द्वारा बच्ची को उठाकर इमारत के खुले हिस्से से नीचे धकेलने का दृश्य दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, घटना के सटीक घटनाक्रम और नीचे गिरने की जगह को लेकर उपलब्ध विवरणों में अंतर है। इसलिए डक्ट, सीढ़ियों और रेलिंग से जुड़े विवरणों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
बच्ची को गंभीर चोटें आईं। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इमारत में रहने वाले लोग सदमे में हैं।
पुलिस की जांच और अब तक की कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की गई और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।
नाबालिग को बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस घटना के दौरान मौजूद परिस्थितियों, CCTV फुटेज और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है।
परिवारों के बीच पहले विवाद की भी चर्चा
मृत बच्ची के परिवार की ओर से दोनों परिवारों के बीच पहले बिल्ली को लेकर विवाद होने की बात कही गई है। हालांकि, इस कथित विवाद और बच्ची की मौत के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
CCTV कैमरे बंद किए जाने या फुटेज मिटाए जाने से संबंधित आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की जांच का अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं है।
नाबालिग की उम्र पर भी है कानूनी दांवपेच
इस मामले में नाबालिग की उम्र 10 वर्ष बताई गई है, यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में सात वर्ष से अधिक और बारह वर्ष से कम उम्र के बच्चे की आपराधिक जिम्मेदारी तय करते समय भारतीय न्याय संहिता की धारा 21 के तहत उसकी समझ और परिपक्वता पर विचार किया जाता है। केवल आरोप के आधार पर नाबालिग को दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।
रिहायशी इमारतों की सुरक्षा पर भी उठते हैं सवाल
इस घटना के बाद इमारतों में खुले डक्ट, सीढ़ियों के किनारे, रेलिंग और बच्चों के खेलने वाले कॉमन एरिया की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में इमारत की सुरक्षा व्यवस्था में किसी आधिकारिक लापरवाही की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल पुलिस जांच में CCTV फुटेज, घटना की परिस्थितियों और संबंधित लोगों के बयानों की अहम भूमिका है। FIR, पोस्टमॉर्टम और बाल कल्याण समिति की आगे की कार्रवाई के बारे में नई आधिकारिक जानकारी सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।




















