मुंबई के QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति देने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा निकालेगी।
मुंबई: QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति देने और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन की ओर से 10 सितंबर 2026 को बोरीवली पश्चिम में मोर्चा निकाला जाएगा। यूनियन का दावा है कि QR-Code होने के बावजूद बड़ी संख्या में फेरीवाले पिछले दो वर्षों से कारोबार से वंचित हैं।
यूनियन के मुताबिक, इस स्थिति के कारण फेरीवालों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर फेरीवालों में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर यह मोर्चा आयोजित किया जा रहा है।
मोर्चा 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे जांभली गली, मोक्ष प्लाजा, एस.वी. रोड, बोरीवली पश्चिम से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी महानगरपालिका के आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचेंगे।

QR-Code के बाद भी कारोबार से वंचित रखने का आरोप
आजाद हॉकर यूनियन का कहना है कि QR-Code जारी होने के बावजूद संबंधित फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति नहीं मिल रही है। यूनियन ने दावा किया है कि पिछले करीब दो वर्षों से इस समस्या के कारण कई फेरीवाले अपने रोजमर्रा के रोजगार से वंचित हैं।
यूनियन के अनुसार, एक तरफ फेरीवालों को पहचान और नियमन से जुड़ी प्रक्रिया के तहत QR-Code दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ कारोबार करने के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने इसे लेकर प्रशासन से स्पष्ट नीति और कानूनी व्यवस्था के तहत कारोबार की अनुमति देने की मांग की है।
Street Vendors Act लागू करने की मांग
मोर्चे में Street Vendors Act, 2014 को पूरी तरह लागू करने की मांग भी उठाई जाएगी। यूनियन ने न्यायालय के आदेशों का पालन करने तथा संरक्षित फेरीवालों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न रोकने की मांग की है।
आजाद हॉकर यूनियन की प्रमुख मांगों में QR-Code धारक फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल रोकना, पिछले दो वर्षों से रोजगार से वंचित फेरीवालों को कारोबार का अवसर देना और कानून के तहत उन्हें सुरक्षित तरीके से कारोबार करने की व्यवस्था करना शामिल है।
यूनियन का कहना है कि फेरीवालों को सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों के रूप में देखने के बजाय उन्हें कानून के दायरे में लाकर रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।
“यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों का मुद्दा नहीं”
यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल बोरीवली तक सीमित नहीं है। मुंबई में बड़ी संख्या में फेरीवाले अपने परिवार का खर्च इसी रोजगार से चलाते हैं।
यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा, “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों की लड़ाई नहीं है, बल्कि मुंबई के हजारों मेहनतकश फेरीवालों के रोजगार और अधिकार की लड़ाई है। रोजगार हमारा अधिकार है। प्रशासन को फेरीवालों की समस्या को सहानुभूति और कानूनी दृष्टिकोण से देखना चाहिए।”
यूनियन ने मुंबई के सभी QR-Code धारक फेरीवालों और अन्य मेहनतकश फेरीवालों से मोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
कौन-कौन होंगे शामिल?
आयोजकों के अनुसार, मोर्चे में नगर पथ विक्रेता समिति, मुंबई के सदस्य दया शंकर सिंह और जय शंकर सिंह तथा जोन 7 के सदस्य प्रकाश उदेसी और शांताराम शिंदे प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इनके अलावा लवकुश तिवारी और सलाउद्दीन पटेल के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।
मोर्चे का आयोजन शांताराम शिंदे, प्रवीण पाठक, रवी खावडिया, राकेश खावडिया, श्याम सुंदर झा, रविंद्र मिश्रा, फिरोज खान, अहसान अंसारी, पवन तांडले, मनोज राय और राजेश राऊत की ओर से किया जा रहा है।
10 सितंबर को बोरीवली में जुटेंगे फेरीवाले
आयोजकों के अनुसार, मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत दोपहर 12 बजे जांभली गली से होगी और आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचकर फेरीवालों की मांगों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा।
अब मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि QR-Code धारक फेरीवालों की कारोबार संबंधी मांग और Street Vendors Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महानगरपालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है।
