अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

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अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।

कारोबारी और पत्नी को ऑफिस तक कैसे ले जाया गया?

पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।

कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।

ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।

₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।

आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।

यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।

पूर्व ड्राइवर पर क्यों गया पुलिस का शक?

जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?

Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।

पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।

अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

  • Santosh Uday Khopatkar, 37
  • Vinay Ramesh More, 37
  • Prem Kishan Sabnani, 50
  • Pragya Harish Main/Maine, 27
  • Reshma Shyamrao Warang, 41
  • Sabina Hafiz Shaikh, 48

पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।

क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?

जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।

जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।

फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?

इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।

इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।

कारोबारी ऐसी स्थिति में क्या सावधानी रखें?

अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।

खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।

हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।

पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।

पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।

फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

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