मुंबईकरों के ₹248 करोड़ का नया Flyover, कई बाइकर्स फिसलकर गिरे; अब BMC ने सड़क पर लगाए Speed Breaker

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मुंबई के ₹248 करोड़ के Mrinaltai Gore Flyover पर बाइकर्स के फिसलने के बाद BMC ने rumble strips लगाए। 2021 की Vigilance रिपोर्ट भी सवाल उठा चुकी थी।

मुंबई: गोरेगांव में करीब ₹248 करोड़ की लागत से बने Mrinaltai Gore Flyover Extension पर बाइकर्स के फिसलने की शिकायतों के बाद BMC ने अब कार्रवाई शुरू की है। Relief Road की तरफ जाने वाले हिस्से के sharp turns पर BMC ने रफ्तार कम करने वाले rumble strips लगाए हैं। 29 अगस्त को इसी फ्लाईओवर की दीवार से एक ट्रक टकरा गया था, जिसके बाद sound barrier का एक हिस्सा नीचे SV Road पर गिर गया था। गनीमत रही कि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

नया फ्लाईओवर 6 जून 2026 को आम लोगों के लिए खोला गया था। इसके बाद से Relief Road की तरफ जाने वाले arm की सड़क को लेकर लगातार शिकायतें सामने आईं। खासकर बारिश या सड़क गीली होने पर दोपहिया वाहन फिसलने और बाइकर्स के गिरने के वीडियो सामने आए। यह हिस्सा नीचे उतरने के बाद एक turn पर आता है, जहां बाइक को सड़क की पर्याप्त grip मिलना ज्यादा जरूरी है।

BMC ने पहले बताया था कि flyover की 40 mm मोटी mastic asphalt surface पर stone aggregates डाले गए हैं ताकि tyre को friction मिले और वाहन फिसलें नहीं। लेकिन मौजूदा शिकायतों के बाद अब चार ऐसे spots चिन्हित किए गए हैं जहां turn और slope है। BMC अधिकारी के मुताबिक दो जगह 15 mm thick rumblers लगाए जा चुके हैं और दो अन्य जगहों पर भी इन्हें लगाया जाना है। साथ ही cautionary और speed-limit boards लगाने तथा sound barriers की मरम्मत की बात कही गई है।

यहां Speed Breaker शब्द आम लोगों के लिए समझने में आसान है, लेकिन तकनीकी तौर पर लगाए गए rumble strips सामान्य ऊंचे speed breaker जैसे नहीं हैं। इनका मकसद सड़क पर vibration और अतिरिक्त grip देकर वाहन चालकों को turn और slope पर सावधान करना तथा रफ्तार कम कराना है।

सवाल सिर्फ फिसलन का नहीं, ₹248 करोड़ के पूरे प्रोजेक्ट का है

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस 750 मीटर लंबे, चार लेन वाले flyover पर करीब ₹248 करोड़ खर्च हुए, उसे शुरू हुए अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए और उसके एक हिस्से पर दोपहिया वाहनों की safety को लेकर corrective treatment करना पड़ा। यह वही project है जिसकी construction timeline करीब आठ साल तक खिंची और जिसकी लागत भी बार बार बढ़ाई गई।

BMC ने नवंबर 2018 में इसका work order जारी किया था और शुरुआती completion target 24 महीने का था। लेकिन project 2026 में जाकर पूरा हुआ। अंतिम लागत ₹247.97 करोड़ तक पहुंची, जबकि मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआती estimate ₹170.82 करोड़ था—यानी करीब 45 फीसदी की बढ़ोतरी।

काम के दौरान contractor पर penalties भी लगाई गईं। BMC के मुताबिक आठ साल में कुल करीब ₹27 लाख की penalty लागू की गई, जो ₹248 करोड़ के project cost का एक फीसदी भी नहीं है। इनमें construction delay और site safety से जुड़े मामलों की penalties शामिल थीं।

लेकिन असली सवाल 2026 में नहीं, 2021 में उठ चुका था

इस flyover की कहानी में सबसे गंभीर कड़ी BMC की अपनी Vigilance रिपोर्ट है। जून 2021 की internal vigilance inspection में construction quality, structural elements और monitoring से जुड़े कई सवाल उठाए गए थे—यानी flyover के public use में आने से करीब पांच साल पहले।

रिपोर्ट में flyover के कई joints और piers में cracks तथा honeycombing मिलने की बात कही गई थी। पांच pillars में cracks और honeycombing का उल्लेख था। Honeycombing concrete में बनने वाली खाली जगहों को कहा जाता है, जो खराब compaction से जुड़ी हो सकती हैं और concrete की strength पर असर डाल सकती हैं।

Vigilance team ने यह भी सवाल उठाया था कि flyover के piers के पास मौजूद road panels के उठने या damage होने की संभावना को design में पर्याप्त तरीके से address किया गया था या नहीं। अगर ऐसी स्थिति में सड़क unsafe होती है तो उसकी repair contractor की जिम्मेदारी होने की बात रिपोर्ट में दर्ज थी।

रिपोर्ट में quality records को लेकर भी सवाल थे। Steel और ready-mix concrete यानी RMC से जुड़े जरूरी records उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा मई 2019 और नवंबर 2020 में concrete strength के tests fail होने के बावजूद कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।

और यहां monitoring का सवाल भी सामने आता है। नियुक्त consulting engineer को महीने में कम से कम दो site inspections करनी थीं, लेकिन Vigilance रिपोर्ट में ऐसे visits के records उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। Contractors और supervising municipal engineers पर effective quality control और monitoring सुनिश्चित नहीं करने को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

सबसे चौंकाने वाली बात penalties को लेकर थी। फरवरी से मई 2019 के बीच चार अलग-अलग मामलों में contractor पर ₹500 की penalty लगाई गई, जबकि contract conditions में minimum penalty ₹5,000 बताई गई थी। रिपोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि cracks, honeycombing और rough concrete surfaces के लिए penalty क्यों नहीं लगाई गई।

हालांकि, 1 जून 2021 की compliance report में Bridges Department ने बताया था कि contractor को penalty और warning letter दिया गया, corrective measures और rectification work किए गए तथा records update किए गए। Supervisory staff को भी ज्यादा सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे।

यानी आज का सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क पर rumble strips क्यों लगाने पड़े। बड़ा सवाल यह भी है कि 2021 में Vigilance ने जो कमियां बताई थीं, उनके बाद rectification वास्तव में कितनी प्रभावी रही और बाद के वर्षों में किस स्तर पर उसकी जांच हुई।

आठ साल का project, बढ़ी लागत और फिर safety correction

Mrinaltai Gore Flyover Extension का मकसद Goregaon में east-west connectivity को बेहतर करना था। 750 मीटर का यह four-lane arm existing flyover network को Ram Mandir Road और Relief Road से जोड़ता है। लेकिन project को पूरा होने में शुरुआती 24 महीने के target के मुकाबले करीब आठ साल लग गए।

मार्च 2026 में भी project करीब 80 फीसदी complete बताया गया था और cost escalation को लेकर BMC Standing Committee में सवाल उठ चुके थे। इसी दौरान corporators ने project delay और बढ़ती लागत पर भी आपत्ति जताई थी।

फिर जून में flyover खुला तो शुरुआती दिनों में uneven surface, loose grit और patchy stretches को लेकर शिकायतें सामने आईं। BMC ने उस समय road condition को structural deficiency नहीं माना और mastic asphalt तथा stone chips को technical construction process का हिस्सा बताया था। Experts ने भी यह कहा था कि mastic asphalt और stone aggregates का इस्तेमाल friction देने के लिए किया जाता है, हालांकि curved हिस्सों पर पर्याप्त grip बेहद जरूरी है।

अब सितंबर में situation यह है कि उसी नए flyover के कुछ turns और slopes पर BMC को rumble treatment करना पड़ रहा है। एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए transport planner Vivek Pai ने इस तरह की slick surface के संभावित कारणों में mastic surface के बहुत smooth होने और bitumen bleeding जैसे technical factors की चर्चा की है। इसे flyover की खराबी का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता, लेकिन surface grip का सवाल जरूर गंभीर बन गया है।

BMC से अब जवाब किस बात का चाहिए?

BMC का मौजूदा safety action जरूरी है और अगर rumble strips, warning boards और sound barrier repairs से दुर्घटनाओं का risk कम होता है तो यह स्वागत योग्य कदम है।

लेकिन ₹248 करोड़ के इस project में accountability का सवाल इससे खत्म नहीं होता।

अब यह साफ होना चाहिए कि 2021 की Vigilance रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर किस अधिकारी ने compliance verify किया, rectification की final inspection किसने की, consultant ने कितनी site inspections कीं, quality records किस स्तर पर verify हुए, concrete और road surface की final quality किसने certify की और public opening से पहले safety assessment किस आधार पर किया गया।

BMC ने जुलाई 2026 में bridge, flyover और tunnel projects के लिए पांच साल के लिए 29 technical consultants का panel बनाने का प्रस्ताव भी रखा था। प्रस्ताव में consultant की design-related गलती से project cost या design variation बढ़ने पर penalty का प्रावधान रखने की बात कही गई थी।

अब Mrinaltai Gore Flyover का मामला एक सीधा सवाल छोड़ता है—अगर ₹248 करोड़ खर्च करके बना नया flyover तीन महीने के भीतर ही ऐसे turns पर safety correction मांगने लगे जहां बाइकर्स फिसल रहे हैं, तो गलती सिर्फ सड़क पर rumble strips लगाने से खत्म मानी जाए या फिर पूरे project की planning, quality monitoring और accountability की भी दोबारा जांच होनी चाहिए?

मुंबईकरों के टैक्स के पैसे से बने इस flyover पर अब असली जरूरत सिर्फ रफ्तार कम करने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि शुरुआत से आखिर कहां-कहां निगरानी कमजोर पड़ी।

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