Category: Civic Issues

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  • मुंबई में प्रदूषण पर BMC की बड़ी कार्रवाई, 69.55 किमी सड़कें साफ; 115 टन मलबा हटाया

    मुंबई में प्रदूषण पर BMC की बड़ी कार्रवाई, 69.55 किमी सड़कें साफ; 115 टन मलबा हटाया

    मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए BMC का विशेष अभियान जारी है। 69.55 किमी सड़कें साफ कर 39.75 टन धूल और 115 टन निर्माण मलबा हटाया गया।

    मुंबई: बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई में सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। 29 अक्टूबर को शहर की 69.55 किलोमीटर लंबी सड़कों की सफाई की गई। इस दौरान 39.75 टन धूल और 115 टन निर्माण एवं तोड़फोड़ का मलबा हटाया गया। यह विशेष अभियान 26 प्रशासनिक वार्डों की 146 सड़कों पर चलाया जा रहा है।

    मुंबई में सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए यह अभियान 28 अक्टूबर से शुरू किया गया है। इसके तहत प्रमुख यातायात मार्गों के साथ उन इलाकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जहां सड़कों पर अधिक धूल और मिट्टी जमा होती है।

    मुंबई के 13 निगरानी केंद्रों पर पीएम-10 का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक

    मुंबई में प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के 14 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 13 केंद्रों पर पीएम-10 का वार्षिक औसत राष्ट्रीय निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज किया गया है।

    बीएमसी की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, चेंबूर और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में पीएम-10 का वार्षिक औसत 125 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी राष्ट्रीय वार्षिक सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। कांदिवली एकमात्र ऐसा निगरानी केंद्र रहा, जहां यह सीमा पार नहीं हुई।

    पीएम-10 हवा में मौजूद ऐसे छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर के श्वसन तंत्र में पहुंच सकते हैं। वहीं पीएम-2.5 इससे भी छोटे कण होते हैं, जो फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं।

    किन सड़कों पर चल रहा है सफाई अभियान?

    BMC ने मुंबई के 26 प्रशासनिक वार्डों की 146 सड़कों को इस विशेष अभियान में शामिल किया है। इनमें प्रमुख यातायात मार्गों को प्राथमिकता दी गई है।

    इनमें बांद्रा-कुर्ला संपर्क मार्ग, सांताक्रूज-चेंबूर संपर्क मार्ग, पूर्वी और पश्चिमी द्रुतगति मार्ग, जोगेश्वरी-विक्रोली संपर्क मार्ग, घाटकोपर-मानखुर्द मार्ग, एसवी रोड, लिंक रोड, कार्टर रोड और सायन-मानखुर्द मार्ग शामिल हैं।

    29 अक्टूबर को कुल 29 मार्गों पर सफाई की गई। इस दौरान सड़कों के किनारों, फुटपाथ, सड़क विभाजकों और किनारे बने पत्थर के हिस्सों पर जमा धूल और मिट्टी हटाई गई। इसके साथ ही धूल वाले स्थानों पर पानी का छिड़काव और बारीक फुहारों का इस्तेमाल किया गया, ताकि सफाई के दौरान धूल हवा में न फैले।

    541 कर्मचारी और 471 स्वयंसेवक अभियान में तैनात

    इस अभियान को पूरा करने के लिए BMC ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों और मशीनों को लगाया है। 29 अक्टूबर को 541 सफाई कर्मचारी और 471 स्वयंसेवक काम कर रहे थे।

    सफाई के लिए 18 जेसीबी मशीनें, 20 डंपर, 21 धुंध छिड़काव मशीनें, 21 यांत्रिक सड़क सफाई मशीनें, 6 छोटी विद्युत सफाई मशीनें और 6 सड़क विभाजक सफाई मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

    हटाई गई धूल और निर्माण मलबे को एकत्र कर उसके उचित निपटारे की व्यवस्था भी की गई।

    निर्माण स्थलों पर भी BMC की सख्ती, 299 नोटिस जारी

    सड़क की सफाई के साथ BMC निर्माण और तोड़फोड़ के कामों से होने वाले प्रदूषण पर भी कार्रवाई कर रही है।

    अक्टूबर 2026 में 22 तारीख तक प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन नहीं करने वाले निर्माण स्थलों को 29 काम बंद करने के नोटिस और 270 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

    वार्डवार कार्रवाई में एन वार्ड में सबसे अधिक 105 कारण बताओ नोटिस जारी हुए। इसके अलावा टी वार्ड में 52 और आर-दक्षिण वार्ड में 42 नोटिस दिए गए। शेष 71 नोटिस दूसरे वार्डों में जारी किए गए।

    निर्माण स्थलों के आकार के अनुसार आसपास की सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी भी तय की गई है। 4,000 वर्ग मीटर तक के निर्माण स्थलों को दोनों ओर 100 मीटर, 4,000 से 10,000 वर्ग मीटर तक के स्थलों को 200 मीटर और 10,000 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों को दोनों ओर 500 मीटर तक सड़क की सफाई करनी है।

    हर वार्ड को 15 लाख रुपये, सफाई की निगरानी भी होगी

    इस विशेष अभियान के लिए प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड को 15 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है। यदि सभी 26 वार्डों के लिए यह राशि समान रूप से निर्धारित है, तो कुल प्रावधान 3.90 करोड़ रुपये बैठता है।

    अभियान के दौरान अधिकारियों को सफाई से पहले और बाद के स्थान-आधारित फोटो और वीडियो जमा करने, प्रतिदिन साफ किए गए मार्गों का विवरण देने तथा हटाई गई धूल और मलबे की मात्रा का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    इससे सफाई कार्य की निगरानी और वार्डवार प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

    प्रदूषण से बच्चों और सांस के मरीजों को अधिक खतरा

    सड़कों पर जमा धूल और हवा में मौजूद बारीक कणों का असर आम लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से खांसी, आंखों और गले में जलन तथा सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अस्थमा के मरीजों की समस्या भी बढ़ सकती है।

    बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों को वायु प्रदूषण से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

    हालांकि, केवल सड़कों की सफाई से मुंबई का पूरा वायु प्रदूषण खत्म नहीं हो सकता। वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य, कचरा जलाना और मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को प्रभावित करती हैं। इसलिए सड़क की धूल हटाने के साथ इन दूसरे स्रोतों पर नियंत्रण भी जरूरी है।

    मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाने की मांग

    मुंबई के पालक मंत्री आशीष शेलार ने भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर अतिरिक्त उपाय करने का सुझाव दिया है।

    उनके सुझावों में सप्ताह में एक दिन निर्माण और तोड़फोड़ का काम बंद रखने पर विचार, प्रदूषण वाले इलाकों में पानी का छिड़काव, रात के समय मशीनों से सड़कों की सफाई बढ़ाना और कचरा जलाने तथा अवैध रूप से निर्माण मलबा फेंकने की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करना शामिल है।

    इसके अलावा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और निर्माण स्थलों पर वायु गुणवत्ता मापने वाले उपकरणों की व्यवस्था पूरी करने पर भी जोर दिया गया है।

    सप्ताह में एक दिन निर्माण कार्य बंद रखने का सुझाव है, इसे लागू सरकारी आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

    BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा के मार्गदर्शन और उप आयुक्त (घनकचरा व्यवस्थापन) किरण दिघावकर के नेतृत्व में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अभियान की घोषित अवधि 6 नवंबर 2026 तक है।

    अब इस अभियान की प्रभावशीलता का आकलन केवल साफ की गई सड़कों और हटाए गए मलबे से नहीं, बल्कि संबंधित इलाकों में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में आने वाले बदलाव से भी होगा।

  • मुंबई में प्रदूषण पर बीएमसी सख्त, बिल्डरों पर कार्रवाई और निर्माण रोकने का प्रस्ताव

    मुंबई में प्रदूषण पर बीएमसी सख्त, बिल्डरों पर कार्रवाई और निर्माण रोकने का प्रस्ताव

    मुंबई में वायु प्रदूषण रोकने के लिए बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने धूल नियंत्रण और सेंसर जांच के निर्देश दिए। निर्माण पर साप्ताहिक रोक का प्रस्ताव भी सामने आया।

    मुंबई: शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बीएमसी ने निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और प्रदूषण मापने वाले यंत्रों की निगरानी सख्त करने के निर्देश दिए हैं। महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े ने स्पष्ट किया कि निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों पर धूल रोकने की जिम्मेदारी संबंधित विकासकों और बिल्डरों की होगी। इसी बीच, प्रदूषण कम करने के लिए सप्ताह में एक दिन निर्माण और तोड़फोड़ का काम बंद रखने का प्रस्ताव भी सामने आया है।

    27 अक्टूबर 2026 को हुई समीक्षा बैठक में आयुक्त ने अधिकारियों को वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी 28 बिंदुओं वाले दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि प्रदूषण मापने वाले केंद्र या सेंसर बंद मिलने अथवा गलत आंकड़े दिखाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    निर्माण स्थलों पर धूल फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

    मुंबई में निर्माण कार्य और तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण बढ़ा सकती है। इसे नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों को ढकना, पानी का छिड़काव करना, मलबे को खुले में फैलने से रोकना और परिसर के आसपास सफाई बनाए रखना जरूरी है।

    आयुक्त अश्विनी भिड़े ने संबंधित विकासकों और निर्माण कारोबारियों को इन उपायों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।

    बीएमसी के प्रदूषण नियंत्रण दिशा-निर्देशों में निर्माण सामग्री और मलबा ले जाने वाले वाहनों को ढकना, निर्माण स्थल से निकलने वाले वाहनों के पहियों की सफाई करना और धूल को हवा में फैलने से रोकने के उपाय करना भी शामिल है। नियमों के उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस, काम रोकने का नोटिस या परिसर सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

    सप्ताह में एक दिन निर्माण बंद रखने का प्रस्ताव

    मुंबई में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सप्ताह में एक दिन निर्माण और तोड़फोड़ का काम रोकने का सुझाव भी दिया गया है। महाराष्ट्र के मंत्री आशीष शेलार ने आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की शिकायत के लिए अलग हेल्पलाइन, सामाजिक माध्यम पर शिकायत व्यवस्था और कार्रवाई की साप्ताहिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने जैसे सुझाव भी दिए।

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    फिलहाल इस प्रस्ताव को लागू करने संबंधी किसी अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। यदि इस पर निर्णय लिया जाता है, तो निर्माण गतिविधियों पर रोक की अवधि, उसके दायरे और जरूरी परियोजनाओं को मिलने वाली छूट जैसी जानकारियां महत्वपूर्ण होंगी।

    मुंबई की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने से बढ़ी चिंता

    मुंबई में अक्टूबर के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। 24 अक्टूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 322 दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

    वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में सड़क की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक गतिविधियां और निर्माण कार्य शामिल हैं। ऐसे में केवल निर्माण स्थलों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। सड़क सफाई, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने वाली दूसरी गतिविधियों की निगरानी भी जरूरी है।

    आयुक्त ने आधुनिक सफाई उपकरणों का इस्तेमाल कर सड़कों की सफाई करने और धूल नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

    प्रदूषण मापने वाले सेंसर बंद मिले तो होगी सख्त कार्रवाई

    शहर की वायु गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए प्रदूषण मापने वाले केंद्रों और सेंसर का सही ढंग से काम करना जरूरी है। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी संबंधित यंत्र नियमित रूप से चालू रहें और उनसे मिलने वाले आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।

    यदि किसी केंद्र का यंत्र बंद मिलता है या गलत आंकड़े दिखाता है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    बीएमसी की निगरानी व्यवस्था में 3,166 निर्माण स्थलों और 76 निरीक्षण दलों का उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों के साथ यह जानना भी जरूरी है कि कितने स्थलों पर नियमों का पालन हो रहा है और उल्लंघन के मामलों में कितनी कार्रवाई की गई है।

    पटाखों पर मुंबई हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी

    बैठक में पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर भी चर्चा हुई। आयुक्त ने सभी वार्डों में मुंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा।

    अदालत के निर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर रोक है। स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और अदालतों जैसे शांत क्षेत्रों में भी पटाखे फोड़ने की मनाही है।

    महानगरपालिका अधिकारियों को नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संदेश पहुंचाने और सरकारी तथा निजी स्कूलों में विद्यार्थियों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को कम प्रदूषण वाले हरित पटाखों के इस्तेमाल के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

    मुंबई पुलिस के एक अलग आदेश में सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और तेज रोशनी वाली लेजर किरणों पर 4 दिसंबर तक प्रतिबंध का उल्लेख किया गया था। अदालत के निर्देश और पुलिस आदेश का दायरा अलग हो सकता है, इसलिए इनके आधार पर पटाखों की बिक्री या निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध होने का दावा नहीं किया जा सकता।

    प्रदूषण की शिकायत कहां करें?

    यदि किसी निर्माण स्थल पर खुले में मलबा फेंका जा रहा है, धूल रोकने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं या प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन दिखाई देता है, तो नागरिक बीएमसी के शिकायत माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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    बीएमसी की हेल्पलाइन 1916 पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है। शिकायत में संबंधित इलाके का नाम, निर्माण स्थल का पता और समस्या का स्पष्ट विवरण देना उपयोगी रहेगा। उपलब्ध होने पर फोटो या वीडियो भी शिकायत के साथ साझा किए जा सकते हैं।

    प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित मामलों में बीएमसी के अलावा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और पुलिस की भी भूमिका हो सकती है। शिकायत पर कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए शिकायत संख्या सुरक्षित रखना बेहतर रहेगा।

    मुंबई की हवा सुधारने के लिए क्या जरूरी है?

    निर्माण स्थलों पर धूल रोकने, सड़कों की नियमित सफाई करने, प्रदूषण मापने वाले यंत्रों को चालू रखने और पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण जैसे कदम शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद कर सकते हैं। लेकिन इनका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है।

    बैठक में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे, उपायुक्त प्रशांत गायकवाड, उपायुक्त अविनाश काटे, सभी परिमंडलों के संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त, सहायक आयुक्त और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    अब निगरानी के साथ वास्तविक कार्रवाई के आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। निर्माण स्थलों पर कितने निरीक्षण हुए, नियम तोड़ने वालों पर कितने नोटिस जारी किए गए और प्रदूषण मापने वाले कितने यंत्र सही ढंग से काम कर रहे हैं, इन जानकारियों से ही पता चलेगा कि बीएमसी के निर्देशों का जमीन पर कितना असर पड़ रहा है।

  • मुंबई: गोरेगांव रिडेवलपमेंट में देरी पर कोर्ट का फैसला, बिल्डर को देना होगा मुआवजे

    मुंबई: गोरेगांव रिडेवलपमेंट में देरी पर कोर्ट का फैसला, बिल्डर को देना होगा मुआवजे

    मुंबई के गोरेगांव में रिडेवलपमेंट में देरी के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिल्डर की याचिका खारिज की। जानें सोसायटी का केस, मुआवजे की शर्त और फैसला।

    मुंबई: गोरेगांव में हाउसिंग सोसायटी के पुनर्विकास में देरी को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिल्डर कुमार अर्बन डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड को बड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति आरती अरुण साठे की पीठ ने सेटलमेंट के फैसले को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका खारिज कर दी। यह मामला उन हाउसिंग सोसायटियों के लिए अहम है, जहां बिल्डर तय समय पर पुनर्विकास का काम पूरा नहीं करते और फ्लैट मालिकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

    यह विवाद गोरेगांव पश्चिम की “जल रत्न दीप को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड” और बिल्डर के बीच हुए पुनर्विकास समझौते से जुड़ा है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को इस मामले में फैसला सुनाया।

    2011 में हुआ था पुनर्विकास का समझौता

    जल रत्न दीप को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी ने 12 जनवरी 2011 को “कुमार अर्बन डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड” के साथ पुनर्विकास समझौता किया था। इसमें तय किया गया था कि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार बिल्डर को सोसायटी को मुआवजा देना होगा।

    समझौते की धारा 26 में पात्र देरी के लिए हर सप्ताह 10 लाख रुपये के लिक्विडेटेड डैमेजेज का प्रावधान था। इसका मतलब है कि एग्रीमेंट में संभावित नुकसान के लिए पहले से एक रकम तय की गई थी, जिसकी वसूली लागू कानूनी शर्तों और मामले की परिस्थितियों के अधीन होती है।

    काम में देरी को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मामला सेटलमेंट तक पहुंचा। सेटलमेंट ने बिल्डर की देरी के लिए मुआवजे का आदेश दिया। इसके बाद कंपनी ने सेटलमेंट एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत बॉम्बे हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

    मुआवजे की रकम को लेकर क्या है मामला?

    इस केस में मुआवजे की कैलकुलेशन महत्वपूर्ण है। यदि 62 सप्ताह की देरी पर हर सप्ताह 10 लाख रुपये की दर से कैलकुलेट की जाए, तो कुल रकम 6.20 करोड़ रुपये होती है। हालांकि, इस मामले के उपलब्ध कानूनी विवरण में सेटलमेंट द्वारा समायोजन के बाद 2.67 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किए जाने का उल्लेख भी है।

    हाई कोर्ट ने बिल्डर की याचिका क्यों खारिज की?

    मामले में मुख्य सवाल यह था कि क्या एग्रीमेंट में तय मुआवजे की शर्त को चुनौती देकर सेटलमेंट के फैसले को रद्द कराया जा सकता है।

    भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 74 के तहत एग्रीमेंट उल्लंघन होने पर उचित मुआवजे का सवाल उठता है। एग्रीमेंट में किसी निश्चित रकम का उल्लेख होने भर से हर परिस्थिति में पूरी रकम अपने आप देय नहीं हो जाती। वहीं, सेटलमेंट एवं सुलह अधिनियम की धारा 34 के तहत अदालत सेटलमेंट पुरस्कार को केवल निर्धारित कानूनी आधारों पर ही रद्द कर सकती है।

    इस मामले में हाई कोर्ट ने बिल्डर की चुनौती स्वीकार नहीं की और सेल्टलमेंट के फैसले को बरकरार रखा। इससे स्पष्ट होता है कि एग्रीमेंट में तय शर्तों और सेटलमेंट के निष्कर्षों को चुनौती देने के लिए केवल असहमति पर्याप्त नहीं है; कानूनी आधार भी जरूरी होता है।

    मुंबई की दूसरी हाउसिंग सोसायटियों के लिए क्या मायने हैं?

    मुंबई में पुरानी इमारतों का रिडेवलपमेंट कई सोसायटियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे प्रोजेक्ट में देरी होने पर फ्लैट मालिकों को वैकल्पिक आवास, किराए और अपने नए घर का कब्जा मिलने को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    इस फैसले से सोसायटियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं:

    • पुनर्विकास समझौते में काम पूरा करने की समय-सीमा और देरी पर मुआवजे की शर्त स्पष्ट होनी चाहिए।
    • बिल्डर की ओर से हुई देरी, दिए गए नोटिस और निर्माण की प्रगति से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।
    • विवाद होने पर सोसायटी को एग्रीमेंट की शर्तों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी उपाय तलाशने चाहिए।
    • मुआवजे का फैसला आने का अर्थ यह नहीं है कि पुनर्विकास का काम अपने आप पूरा हो जाएगा या सोसायटी को तत्काल भुगतान मिल जाएगा।

    इससे पहले भी मुंबई में पुनर्विकास को लेकर अलग-अलग कानूनी विवाद सामने आए हैं। गोरेगांव “जय भुवन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी” और “कुंदनमल कोठारी” से जुड़े मामले में किराए और छत संबंधी दावों को सेटलमेंट के लिए भेजने का सवाल उठा था। वहीं, अराम नगर “मीना को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी” और “परिनी अराम नगर मीना रीडेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड” से जुड़े विवाद में नए डेवलपर के जरिए पुनर्विकास आगे बढ़ाने का मुद्दा सामने आया। “संगत सदन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी” और “गिनी ग्लोबल नेक्स्ट एलएलपी” से जुड़े मामले में भी पुनर्विकास जारी रखने के अधिकार पर विवाद हुआ था। ये अलग मामले हैं, लेकिन बताते हैं कि पुनर्विकास विवाद में मुआवजे के साथ-साथ किराया, एग्रीमेंट और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का अधिकार भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    जल रत्न दीप सोसायटी के मामले में हाई कोर्ट द्वारा बिल्डर की याचिका खारिज किए जाने के बाद सेटलमेंट का फैसला बरकरार है। अदालत ने कोर्ट में जमा राशि को फैसला अपलोड होने के एक महीने के भीतर जारी करने का निर्देश भी दिया।

    इस मामले का मुख्य संदेश यह है कि पुनर्विकास समझौते में तय समय-सीमा और देरी के लिए मुआवजे की शर्तें महत्वपूर्ण हैं। लेकिन किसी सोसायटी को कितना मुआवजा मिलेगा और वह रकम कब प्राप्त होगी, यह एग्रीमेंट, सेटलमेंट के फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

  • Malad Kharodi Gaothan: SRA सर्वे पर विरोध, पुश्तैनी घरों और PN-019 पर सवाल

    Malad Kharodi Gaothan: SRA सर्वे पर विरोध, पुश्तैनी घरों और PN-019 पर सवाल

    मलाड के खारोड़ी Gaothan में SRA सर्वे का विरोध। जानें PN-019 विवाद, पुश्तैनी घरों और निवासियों की मांगों की पूरी जानकारी।

    मुंबई: मलाड पश्चिम के खारोड़ी Gaothan में Slum Rehabilitation Authority (SRA) के बायोमेट्रिक सर्वे के नोटिस मिलने के बाद विवाद फिर सामने आया है। 23 अक्टूबर 2026 की सुबह इलाके में कई जगह नोटिस चिपके मिले, जिनमें खारोड़ी को स्लम क्लस्टर PN-019 के तहत शामिल करने के प्रस्ताव से जुड़े सर्वे की जानकारी दी गई थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनका गांव पुराना है और उनके परिवार पीढ़ियों से यहां रहते आए हैं। ऐसे में वे खुद को स्लम निवासी मानने से इनकार कर रहे हैं।

    2022 में भी जारी हुए थे नोटिस, अब फिर बढ़ी चिंता

    खारोड़ी निवासी एंथनी ग्रेशियस के मुताबिक, मई 2022 में भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए थे। उस समय निवासियों ने स्थानीय विधायक असलम शेख से संपर्क किया था। ग्रेशियस ने बताया कि असलम शेख ने मुंबई उपनगर के कलेक्टर के साथ बैठक की व्यवस्था कराई थी।

    ग्रेशियस का कहना है कि खारोड़ी एक पुराना गांव है, जहां लोग अपने घरों के प्लॉट के मालिक हैं और कई परिवार पीढ़ियों से यहां रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासी इस इलाके के मूल निवासी हैं और उन्हें स्लम निवासी के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए।

    मौजूदा नोटिस मिलने के बाद निवासियों के बीच एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। असलम शेख से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उनका जवाब उपलब्ध नहीं हो सका।

    PN-019 की आधिकारिक सूची में Lower Kharodi का नाम

    SRA की 2024 की आधिकारिक स्लम क्लस्टर सूची में PN_019 के सामने Lower Kharodi का नाम दर्ज है। इसमें इस क्लस्टर का क्षेत्रफल 1,373.41 वर्ग मीटर बताया गया है।

    इसी सूची में Kharodi के अन्य क्लस्टर भी दर्ज हैं। PN_021 का क्षेत्रफल 4,915.15 वर्ग मीटर, PN_023 का 34,956.83 वर्ग मीटर, PN_024 का 3,134.18 वर्ग मीटर और PN_025 का 45,588.90 वर्ग मीटर दिया गया है।

    Watchdog Foundation ने मांगे सरकारी रिकॉर्ड

    Watchdog Foundation ने 23 अक्टूबर को संबंधित सरकारी अधिकारियों को प्रतिनिधित्व सौंपकर नए नोटिस पर चिंता जताई। संस्था का कहना है कि कई वर्षों के अंतराल के बाद फिर से नोटिस जारी होने से स्थानीय निवासियों और संपत्ति धारकों के बीच अनिश्चितता पैदा हुई है।

    फाउंडेशन के अनुसार, खारोड़ी एक स्थापित पारंपरिक बस्ती है, जहां लोगों के लंबे समय से आवासीय, सामाजिक और सामुदायिक संबंध हैं। ऐसे इलाके को स्लम क्लस्टर में शामिल करने और आगे पुनर्विकास योजना लागू करने से निवासियों के घरों, अधिकारों और भविष्य पर असर पड़ सकता है।

    फाउंडेशन के ट्रस्टी गॉडफ्रे पिमेंटा ने प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति, 2022 के नोटिस पर हुई कार्रवाई और इस प्रक्रिया को शुरू करने या जारी रखने के कानूनी तथा प्रशासनिक आधार पर क्लियरेंस की मांग की है।

    संस्था ने संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की कॉपी, निवासियों को आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर और SRA सहित दूसरे अधिकारियों के साथ बैठक की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि निवासियों की शिकायतों पर विचार होने तक ऐसे कदम न उठाए जाएं, जिन्हें बाद में पलटना मुश्किल हो।

    Gaothan और Slum Classification का विवाद क्या है?

    मुंबई के कई पारंपरिक Gaothans ऐसे गांव हैं, जो शहर के तेजी से विस्तार से पहले से मौजूद थे। इन इलाकों के कुछ निवासी अपने घरों और जमीनों को पारंपरिक या पैतृक संपत्ति मानते हैं। उनका कहना है कि ऐसे घरों को सामान्य स्लम पुनर्विकास व्यवस्था के तहत देखना उनकी मौजूदा आवासीय स्थिति को ठीक से नहीं दर्शा सकता।

    खारोड़ी के मामले में भी चिंता यह है कि अगर पुनर्विकास योजना लागू होती है, तो कई कमरों या कई मंजिलों वाले मौजूदा घरों में रहने वाले परिवारों को किस तरह का पुनर्वास मिलेगा। निवासियों को आशंका है कि उनके वर्तमान घरों की तुलना में छोटे फ्लैट मिल सकते हैं।

    हालांकि, खारोड़ी के लिए किसी अंतिम पुनर्वास पैकेज, पात्रता सूची या बेदखली आदेश की अभी कोई सटीक जानकारी नहीं है।

    BMC के सीमांकन रिकॉर्ड पर भी उठ रहे सवाल

    Gaothan की सीमाओं का स्पष्ट होना इस विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। Watchdog Foundation ने दावा किया है कि मुंबई के 189 Gaothans में से केवल 52 को Development Plan में चिह्नित किया गया है और बाकी 137 की सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं।

    सितंबर 2025 में BMC ने Gaothan और Koliwada सीमांकन पर अपने रुख में बताया था कि Development Plan 2034 में मुंबई उपनगर जिले के 64 गांवों के Gaothan क्षेत्रों की 115 सीमाएं या बहुभुज दर्शाए गए थे। इसके अलावा 22 Koliwadas की सीमाएं भी योजना में दिखाई गई थीं। बाकी सीमाओं को शामिल करने के लिए संबंधित राजस्व और सर्वे अधिकारियों से रिकॉर्ड की जरूरत बताई गई थी।

    BMC के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सीमाएं तय होने के बाद अन्य Gaothans और Koliwadas की सीमाओं को Development Plan में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

    अक्टूबर 2026 में भी मुंबई उपनगर जिले की पारंपरिक बस्तियों की सीमाओं से जुड़ा प्रशासनिक काम जारी रहा। 17 अक्टूबर को सामने आए एक सरकारी सीमांकन अपडेट में तीन अतिरिक्त Gaothans के सर्वे और पांच पहले सर्वे की गई Koliwadas की सीमाओं में अतिरिक्त क्षेत्र जोड़ने का उल्लेख किया गया था।

    हालांकि, इन कदमों से खारोड़ी के मौजूदा SRA नोटिस की स्थिति अपने-आप नहीं बदलती। यह स्पष्ट करना अभी जरूरी है कि खारोड़ी की संबंधित सीमा सरकारी रिकॉर्ड में किस तरह दर्ज है और प्रस्तावित सर्वे का उससे क्या संबंध है।

    बायोमेट्रिक सर्वे से क्या तय होता है?

    SRA की प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सर्वे और दस्तावेजों का सत्यापन पात्रता निर्धारित करने के महत्वपूर्ण चरण हैं। इस प्रक्रिया के तहत निवासियों और संबंधित मकानों की जानकारी जुटाई जा सकती है तथा पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए जा सकते हैं।

    लेकिन सर्वे का नोटिस, पात्रता का अंतिम निर्धारण और पुनर्विकास योजना की मंजूरी अलग-अलग चरण हैं। किसी परिवार को पुनर्वास का अधिकार मिलेगा या नहीं, यह संबंधित नियमों, दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करता है।

    महाराष्ट्र Slum Areas (Improvement, Clearance and Redevelopment) Act, 1971 इस व्यवस्था का प्रमुख कानूनी आधार है। खारोड़ी के मामले में यह जानना जरूरी होगा कि मौजूदा प्रस्ताव किस कानूनी प्रावधान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है और पारंपरिक बस्ती के रिकॉर्ड को किस तरह ध्यान में रखा जाएगा।

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    पुराने विवाद से लेकर अब तक क्या बदला?

    खारोड़ी में यह चिंता नई नहीं है। 2010 में भी निवासियों से दस्तावेज जमा कराने से जुड़ा मामला सामने आया था। मई 2016 में मार्वे रोड चौड़ीकरण और पुनर्वास को लेकर खारोड़ी के परिवारों की चिंताएं चर्चा में थीं। उस समय भी निवासियों ने अपने घरों और पुनर्वास की संभावित स्थिति पर सवाल उठाए थे।

    मई 2022 में समान नोटिस जारी होने की जानकारी अब फिर सामने आई है। हालांकि, 2022 के नोटिस पर प्रशासन ने क्या निर्णय लिया, प्रक्रिया क्यों आगे नहीं बढ़ी या वर्तमान नोटिस उसी प्रस्ताव की निरंतरता है या नहीं, इस पर भी प्रश्न चिन्ह बना हुआ है।

    अब आगे क्या?

    खारोड़ी के निवासियों की मांग है कि सरकार पहले प्रस्ताव की स्थिति स्पष्ट करे, पुराने नोटिस पर हुई कार्रवाई की जानकारी दे और उन्हें अपनी आपत्तियां रखने का अवसर प्रदान करे।

    अगले चरण में SRA से नोटिस की पूरी कॉपी, सर्वे की तारीख, क्षेत्र की सटीक सीमा और प्रस्ताव के कानूनी आधार पर स्पष्टता मिलना जरूरी है। BMC और मुंबई उपनगर कलेक्टर के रिकॉर्ड से यह भी जांचना होगा कि खारोड़ी Gaothan की सीमा और संबंधित संपत्तियों की स्थिति सरकारी दस्तावेजों में किस तरह दर्ज है।

  • मुंबई में कचरे के 102 ठिकाने हटाए, 286 जगहों पर बीएमसी की नजर

    मुंबई में कचरे के 102 ठिकाने हटाए, 286 जगहों पर बीएमसी की नजर

    मुंबई में कचरा जमा होने वाले 286 स्थानों की पहचान हुई है। बीएमसी ने 102 स्थान हटाए और सीसीटीवी निगरानी, निर्माण मलबे के निपटारे व सार्वजनिक शौचालयों में सुधार के निर्देश दिए।

    मुंबई: शहर में कचरा जमा होने वाले 286 स्थानों की पहचान की गई है, जिनमें से 102 स्थानों को हटाया जा चुका है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अब इन जगहों पर दोबारा कचरा जमा होने से रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही निर्माण मलबे के निपटारे, सूखे कचरे के केंद्रों के आधुनिकीकरण और सार्वजनिक शौचालयों की सुविधाओं में सुधार पर भी जोर दिया गया है।

    अतिरिक्त नगर आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को वरली स्थित बीएमसी के कमांड सेंटर में आयोजित ठोस कचरा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश दिए। बैठक में सह आयुक्त, उप आयुक्त, सहायक आयुक्त और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

    डॉ. शर्मा ने कहा कि कचरा संग्रह और परिवहन के लिए महानगरपालिका ने व्यवस्था विकसित की है। इसका वार्ड स्तर पर प्रभावी इस्तेमाल कर शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को सफाई से जुड़े कामों में तेजी लाने और जल्द बदलाव दिखाने के निर्देश दिए।

    कचरा जमा होने वाले स्थानों पर सीसीटीवी से निगरानी

    बीएमसी ने कचरा जमा होने वाले संभावित स्थानों की पहचान कर उनका नक्शा तैयार करने और सीसीटीवी के जरिए नियमित निगरानी रखने को कहा है। संबंधित वार्ड अधिकारियों को इन जगहों पर बार-बार कचरा जमा होने के कारणों का पता लगाकर स्थायी समाधान निकालना होगा।

    साफ किए गए स्थानों पर दोबारा कचरा जमा न हो, इसके लिए नियमित निरीक्षण किया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जुर्माना सहित नियमानुसार कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस मुहिम का उद्देश्य शहर में खुले स्थानों पर कचरा जमा होने की समस्या को नियंत्रित करना है।

    निर्माण मलबे के निपटारे पर सख्ती

    मुंबई में निर्माण और तोड़फोड़ से प्रतिदिन 8,500 मीट्रिक टन से अधिक मलबा निकलता है। इसके प्रसंस्करण के लिए दो परियोजनाओं की कुल क्षमता 1,200 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इस स्थिति को देखते हुए मलबे के संग्रह, परिवहन और निपटारे की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

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    बीएमसी मुख्यालय में बैठक की तस्वीर

    बीएमसी ने निर्माण स्थलों पर मलबे का वर्गीकरण करने, अधिकृत व्यवस्था से उसका परिवहन सुनिश्चित करने और उचित तरीके से निपटारा करने के निर्देश दिए हैं। मलबा ले जाने वाले वाहनों की डिजिटल प्रणाली से निगरानी रखने और निर्माण परियोजनाओं का जरूरी पंजीकरण सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    सूखे कचरे के 46 केंद्र चालू

    मुंबई में सूखे कचरे को अलग करने के लिए कुल 55 केंद्र हैं, जिनमें से 46 चालू हैं। इन केंद्रों में प्रतिदिन करीब 137.32 मीट्रिक टन सूखा कचरा जमा होता है।

    बीएमसी ने इन केंद्रों का आधुनिकीकरण करने, कचरे की छंटाई बेहतर बनाने और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को प्रभावी करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं, कचरे को संभालने की व्यवस्था और रिकॉर्ड की सटीकता की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    पांच केंद्रों को आधुनिक सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्रों में बदलने की योजना भी सामने आई है। इसके लिए राइट्स लिमिटेड को तकनीकी सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव में सलाहकार की नियुक्ति के लिए करीब 92.57 लाख रुपये और केंद्रों के विकास के लिए लगभग 23.38 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च का उल्लेख किया गया है।

    सार्वजनिक शौचालयों की सुविधाएं सुधरेंगी

    बीएमसी ने सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, पानी की आपूर्ति, बिजली और नल की व्यवस्था तथा जरूरी मरम्मत पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को शौचालयों का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने और मरम्मत व नवीनीकरण के काम तेजी से पूरा कराने को कहा गया है।

    नए और आधुनिक सार्वजनिक शौचालयों के प्रस्तावित कामों की भी नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि नागरिकों को साफ-सुथरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

    उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन

    मुंबई की सफाई व्यवस्था को लेकर बंबई उच्च न्यायालय ने महानगरपालिका से वार्ड स्तर पर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। 8 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, अदालत ने कचरा फेंकने और खुले स्थानों पर गंदगी रोकने के उपायों का विवरण मांगा था। अदालत ने यह भी कहा था कि कुछ प्रमुख इलाकों की सफाई से पूरे शहर को साफ नहीं माना जा सकता।

    डॉ. शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए महानगरपालिका प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को आपसी तालमेल से काम करने, लंबित उपायों की समीक्षा करने और तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

    बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के निर्देशों के तहत डॉ. विपिन शर्मा के मार्गदर्शन और उप नगर आयुक्त किरण दिघावकर की निगरानी में शहर की सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपाय किए जा रहे हैं। अब अभियान के तहत कचरा जमा होने वाले स्थानों की निगरानी, निर्माण मलबे के उचित निपटारे और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार पर कार्रवाई की जाएगी।

  • मुंबई स्कूल क्राइसिस: मालवणी के 14 अवैध स्कूलों पर हाई कोर्ट सख्त

    मुंबई स्कूल क्राइसिस: मालवणी के 14 अवैध स्कूलों पर हाई कोर्ट सख्त

    मालवणी के 14 अवैध स्कूलों को बंद करने और एफआईआर के बीएमसी के फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और पालिका से जवाब मांगा है।

    मुंबई: मालाड के मालवणी इलाके में 14 प्राथमिक स्कूलों को अनधिकृत घोषित कर उन पर ताला लगाने के बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश महेशचंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने इस दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के शिक्षा मंत्रालय और बीएमसी के शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रशासन से पूछा है कि इन स्कूलों में पढ़ रहे हजारों गरीब बच्चों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

    हजारों बच्चों के भविष्य पर लटकी तलवार

    यह कानूनी विवाद नाज़िर खान द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया है। याचिका में दलील दी गई है कि मालवणी के ये सभी 14 स्कूल अंग्रेजी माध्यम के हैं, जहां मुख्य रूप से कम आय वाले और गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। बीएमसी ने बिना यह शहानिशा (जांच) किए कि इन स्कूलों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है या नहीं, सीधे तालाबंदी का नोटिस थमा दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बच्चों के पुनर्वास या समायोजन की ठोस व्यवस्था किए बिना शैक्षणिक सत्र के बीच में की गई यह कार्रवाई बच्चों के शिक्षा के अधिकार का हनन करती है।

    आपराधिक मामला और राजनीतिक एंगल

    यह विवाद केवल प्रशासनिक नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि इस मामले में पुलिस एक्शन भी हो चुका है। जानकारी के मुताबिक, बीएमसी के निजी प्राथमिक स्कूल विभाग के अल्टीमेटम के बाद 19 जून 2026 को मालवणी पुलिस स्टेशन में इन सभी 14 स्कूलों के प्रिंसिपलों और प्रबंधन के खिलाफ आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। इस कार्रवाई के पीछे एक बड़ा राजनीतिक मोड़ भी जुड़ा है। इस साल जून में बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने मालवणी का दौरा किया था और इन स्कूलों पर सरकारी तथा बीएमसी की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद प्रशासन ने पुलिसिया कार्रवाई तेज कर दी थी।

    मुंबई का ‘अवैध स्कूल हब’ और कमर्शियल मॉडल

    शिक्षा विभाग के आंतरिक सर्वे के अनुसार, मुंबई और उसके आसपास के बेल्ट में कुल 206 निजी स्कूलों को अवैध घोषित किया गया है, जिनमें से अकेले गोवंडी-मानखुर्द के एम-ईस्ट वार्ड में 67 और मालाड-मालवणी के पी-पश्चिम वार्ड में 14 से 18 स्कूल रडार पर हैं। इन अवैध संस्थानों में सबसे बड़ी तादाद (162 स्कूल) इंग्लिश मीडियम की है। स्लम इलाकों में ये स्कूल 300 से 800 रुपये प्रति माह की कम फीस का लालच देकर चलते हैं, लेकिन इनके पास वैध यूडीआईएसई (UDISE) कोड या राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट 2009 की धारा 18 के तहत जरूरी सरकारी मान्यता नहीं होती।

    अभिभावकों में दहशत, क्या है अगला कदम?

    इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय अभिभावक बेहद चिंतित हैं। बीएमसी ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे अपने बच्चों का दाखिला कराने से पहले केंद्र सरकार के UDISE+ पोर्टल पर स्कूल की मान्यता जरूर जांच लें। हालांकि प्रशासन का दावा है कि प्रभावित छात्रों को नजदीकी बीएमसी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा, लेकिन याचिकाकर्ता ने कोर्ट में साफ किया है कि इन नगर पालिका स्कूलों में बुनियादी ढांचे और क्षमता की भारी कमी है। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सरकारी महकमों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई में यह तय होगा कि इन स्कूलों पर अंतिम ताला लगेगा या इन्हें नियमित होने का मौका मिलेगा।

    मालवणी के 14 अवैध घोषित स्कूलों की पूरी सूची

    1. लिटिल वर्ल्ड इंग्लिश स्कूल
      • पता: 30/238, एम.एच.बी. कॉलोनी, डी.जी. नगर, गेट नंबर 8, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    2. ज़िल इंग्लिश स्कूल
      • पता: मोनिया मस्जिद के सामने, अम्बुजवाड़ी, मालवणी गेट नंबर 8, मालाड (पश्चिम)
    3. अल-फ़ारूकिया इस्लामिक इंग्लिश स्कूल
      • पता: बंगला नंबर 46, आर.एस.सी.-6, मालवणी म्हाडा, मालाड (पश्चिम)
    4. फादर अब्राहम इंग्लिश स्कूल
      • पता: प्लॉट नंबर 101, आशीर्वाद बिल्डिंग के सामने, म्हाडा, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    5. ए.एम. इंग्लिश स्कूल
      • पता: 126/1009, गेट नंबर 7, एम. एच. बी. कॉलोनी, मच्छी मार्केट के पास मलवानी, मलाड (पश्चिम)
    6. कला विद्यालय
      • पता: म्हाडा (वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट), एजुकेशन प्लॉट नंबर M-3, आर.एस.सी.-19, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    7. गॉड एंजेल प्राइमरी स्कूल (God Angel Primary School)
      • पता: गायकवाड़ नगर बस डिपो के सामने, गेट नंबर 8, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    8. रोज़ मेरी इंग्लिश स्कूल
      • पता: प्लॉट नंबर 68, एन.सी.सी. गेट नंबर 7, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    9. एम.एच. इंग्लिश स्कूल
      • पता: 168/A, चाल नंबर 21, एम. एच. बी. कॉलोनी, गेट नंबर 8 गायकवाड़ नगर बस डिपो के सामने, मलवानी, मलाड (पश्चिम)
    10. लिटिल एंजेल इंग्लिश प्राइमरी स्कूल
      • पता: अम्बा पाड़ा, पाल नगर के पास, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    11. पद्मश्री अन्नासाहेब जाधव भारतीय समाज उन्नत मंडल स्कूल
      • पता: गेट नंबर 8, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    12. सहयोग वेलफेयर सोसाइटी स्कूल
      • पता: कानू कंपाउंड, गेट नंबर 7 के पास, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    13. क्रिसेंट इंग्लिश स्कूल
      • पता: म्हाडा कॉलोनी, मालवणी, मालाड (पश्चिम)
    14. कवि भारती इंग्लिश स्कूल
      • पता: प्लॉट नंबर 26, ऑफिस नंबर 6, 123 गेट नंबर 6, न्यू कलेक्टर कम्पाउंड, मलवानी, मालाड (पश्चिम)

    मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा समय-समय पर अपडेट की जाने वाली गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों की मूल आधिकारिक सूचियों को आप सीधे इन लिंक्स के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हैं:

    • पूरे मुंबई के गैर-मान्यता प्राप्त निजी अंग्रेजी स्कूलों की विस्तृत सूची डाउनलोड करने के लिए बीएमसी के इस आधिकारिक दस्तावेज पर जाएं: BMC English Unrecognised School List (PDF)।

    बॉम्बे हाई कोर्ट की अगली तारीख

    कोर्ट ने प्रशासन को इन 80,000 प्रभावित बच्चों की वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। इस निर्देश के अनुसार, मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह या दिसंबर 2026 के पहले सप्ताह में लिस्ट होगी।

  • मालाड में बेघर पारधी परिवार: बस्ती की जगह Pay & Park, पुनर्वास पर सवाल

    मालाड में बेघर पारधी परिवार: बस्ती की जगह Pay & Park, पुनर्वास पर सवाल

    मुंबई के मालाड में पारधी आदिवासी परिवारों की बेदखली, बच्चों की पढ़ाई, पुलिस कार्रवाई के आरोप, BMC Pay & Park और पुनर्वास की स्थिति जानें।

    मुंबई: मालाड पश्चिम मार्वे रोड के चिकुवाड़ी इलाके में पारधी आदिवासी परिवारों की बेदखली के बाद उनके पुनर्वास और रोजमर्रा की जिंदगी पर सवाल बने हुए हैं। जिस जगह पर पहले मजदूर परिवार रहते थे, वहां अब BMC Pay & Park सुविधा होने का दावा है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों की ओर से पुलिस की कार्रवाई, बच्चों की पढ़ाई और रात में सुरक्षित ठिकाना नहीं मिलने जैसी समस्याएं उठाई गई हैं।

    इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बेदखल परिवारों को अब तक वैकल्पिक आवास मिला या नहीं और जिस जमीन पर उनकी बस्ती थी, वहां पार्किंग की सुविधा किस अनुमति के तहत संचालित हो रही है।

    मालाड में पारधी परिवारों के साथ क्या हुआ?

    चिकुवाड़ी नाले के पास रहने वाले पारधी आदिवासी परिवारों की बस्ती को हटाने की कार्रवाई दिसंबर 2025 से चर्चा में रही। जानकारी के अनुसार, उस दौरान 95 घरों को ध्वस्त किया गया। इसके बाद जून 2026 में फिर से परिवारों को उस जगह से हटा दिया गया।

    18 अप्रैल 2026 की एक स्थानीय खबर में इसी इलाके में लगभग 60 झोपड़ियों को हटाए जाने और कम-से-कम 35 विद्यार्थियों के परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई थी।

    प्रभावित परिवारों का कहना है कि घरों के साथ उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का सामान और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री भी नष्ट हुई। विस्थापन के बाद कुछ परिवारों के फुटपाथों और पुलों के आसपास रहने की बात भी सामने आई।

    बस्ती की जगह पार्किंग, जमीन के इस्तेमाल पर सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू जमीन का मौजूदा इस्तेमाल है। जानकारी के मुताबिक, चिकुवाड़ी की पुरानी बस्ती वाली जगह पर BMC Pay & Park सुविधा संचालित हो रही है। वहीं, संबंधित Development Plan में इस भूखंड को Recreation Ground यानी मनोरंजन मैदान के लिए आरक्षित बताया गया है।

    इस इलाके में आवासीय इमारतों और नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का विस्तार भी हो रहा है। ऐसे में सार्वजनिक जमीन, गरीब परिवारों के आवास और शहरी विकास के बीच संतुलन का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है।

    पारधी परिवारों ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

    पारधी परिवारों की सदस्य रचना ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि उन्हें BMC और पुलिस की कार्रवाई का डर बना रहता है। उनके मुताबिक, परिवार रात में सुरक्षित जगह तलाशने के लिए वाहनों के पास, दीवारों के पीछे और पुलों के नीचे छिपने को मजबूर होते हैं।

    रचना ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें पकड़ने और भीख मांगने, चेन स्नैचिंग या ड्रग्स से जुड़े मामलों में फंसाने की धमकी देती है। ये परिवारों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और इन आरोपों से जुड़े केस रिकॉर्ड उपलब्ध होने पर ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    इस घटना का एक पुराना संदर्भ भी है। कहा जा रहा है कि बस्ती तोड़े जाने से पहले समुदाय के कुछ लोगों को पुलिस स्टेशन में मजदूरी के काम के लिए बुलाया गया था। वहां पहुंचने 85पर उन्हें Prevention of Begging Act, 1960 के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड और दर्ज मामलों का विवरण जरूरी है।

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    पारधी समुदाय का इतिहास भी इस मामले को समझने में अहम है। ब्रिटिश शासन के दौरान Criminal Tribes Act के तहत कई समुदायों को अपराधी घोषित करने वाली व्यवस्था लागू थी। 1952 में इस कानून को निरस्त किए जाने के बाद ऐसे समुदायों को विमुक्त जनजातियों (Denotified Tribes) की श्रेणी में रखा गया। इसके बावजूद पारधी समुदाय को लेकर सामाजिक पूर्वाग्रह और संदेह की समस्या बनी रहने के आरोप सामने आते रहे हैं।

    बच्चों की पढ़ाई और रोजगार पर असर

    बस्ती हटने से केवल आवास का संकट नहीं पैदा होता, बल्कि बच्चों की शिक्षा और परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। अप्रैल 2026 में सामने आए 35 विद्यार्थियों के परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं।

    इन बच्चों ने बाद में परीक्षा दी या नहीं, कितने बच्चे अब नियमित स्कूल जा रहे हैं और क्या उन्हें किताबें व अन्य शैक्षणिक सामग्री दोबारा मिली, इसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।

    समुदाय के कई सदस्य नालों की सफाई, निर्माण कार्य और दूसरे तरह की मजदूरी से जुड़े रहे हैं। रचना के अनुसार, काम के लिए मुकादम यानी काम दिलाने वाले ठेकेदारों के जरिए मजदूरों को जुटाया जाता था। उन्होंने बताया कि जब नियमित काम नहीं मिलता, तो कुछ परिवार नींबू-मिर्च से जुड़े पारंपरिक सामान और त्योहारों में इस्तेमाल होने वाली सजावटी चीजें बेचकर गुजारा करते हैं।

    ऐसे परिवारों के लिए रहने की जगह छिनने का असर काम पर जाने, सामान रखने और बच्चों की देखभाल करने तक प्रभावित हुई है।

    राशन कार्ड, बैंक खाते और वोटर लिस्ट का मुद्दा

    एक NGO की मदद से समुदाय के कुछ परिवारों ने राशन कार्ड, बैंक खाते और ई-श्रम कार्ड बनवाए थे। जानकारी के अनुसार, 2022 में समुदाय के 74 लोगों को मतदाता पहचान पत्र मिले थे।

    परिवारों ने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े प्रारूप रिकॉर्ड में 54 नाम नहीं दिखने की बात कही है।

    बेघर होने के बाद पते और पहचान से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल करना भी कठिन हो गया है। इसलिए संबंधित चुनाव अधिकारियों से यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रभावित परिवार अपने नाम की स्थिति कैसे जांच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सुधार के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपना सकते हैं।

    महाराष्ट्र सरकार के विशेष पैकेज से क्या मिलेगा?

    3 जून 2026 को महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके की ओर से पारधी समुदाय की समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पैकेज तैयार करने की बात सामने आई थी। इसमें आवास, शिक्षा, जमीन, छात्रावास, जाति प्रमाणपत्र और सरकारी योजनाओं जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे।

    हालांकि, इस घोषणा से यह साबित नहीं होता कि मालाड के बेदखल परिवारों को पुनर्वास या आर्थिक सहायता मिल सकती है। इसके लिए सरकारी शासन निर्णय, मंजूर बजट, पात्रता की शर्तें और लाभार्थियों की सूची की पुष्टि जरूरी है।

    महाराष्ट्र सरकार और BMC के सामने अब यह स्पष्ट करने का सवाल है कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास देने की कोई योजना है या नहीं। यदि कोई योजना मौजूद है, तो उसकी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया क्या है?

    अब आगे क्या?

    मालाड के पारधी परिवारों के मामले में तीन प्रमुख सवालों के जवाब अब भी जरूरी हैं। पहला, बेदखली के बाद कितने परिवार बेघर हैं और उनके पुनर्वास की क्या व्यवस्था की गई है। दूसरा, पुरानी बस्ती वाली जमीन पर Pay & Park चलाने के लिए क्या अनुमति दी गई है। तीसरा, पुलिस पर लगाए गए आरोपों और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी समस्याओं पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं।

    BMC के संबंधित वार्ड कार्यालय, मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग और चुनाव अधिकारियों से इन मुद्दों पर आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आएगी।

    फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला केवल एक बस्ती हटाने तक सीमित नहीं है। यह आवास, रोजगार, शिक्षा, नागरिक दस्तावेजों और सार्वजनिक जमीन के इस्तेमाल से जुड़े उन सवालों को सामने लाता है, जिनका जवाब प्रभावित परिवारों के साथ-साथ संबंधित प्रशासन को भी देना होगा।

  • कांदिवली बीएमसी सहायक आयुक्त आरती गोलेकर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    कांदिवली बीएमसी सहायक आयुक्त आरती गोलेकर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    कांदिवली के आर/दक्षिण विभाग में सहायक आयुक्त आरती गोलेकर की कार्यप्रणाली पर शिकायतें, जनसमस्याओं के समाधान और जवाबदेही को लेकर उठी मांग।

    मुंबई: कांदिवली स्थित बृहन्मुंबई महानगरपालिका के आर/दक्षिण विभाग की सहायक आयुक्त आरती गोलेकर की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण, अधिकारी से मुलाकात और समस्याओं के समय पर समाधान को लेकर असंतोष की बात सामने आई है। इस मामले में महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप कर शिकायतों की समीक्षा करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

    शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अपनी समस्याएं लेकर विभागीय कार्यालय पहुंचने वाले नागरिकों को सहायक आयुक्त से मुलाकात करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जनसमस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ें, तो आम लोगों को परेशानी होती है और प्रशासन के प्रति भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।

    आर/दक्षिण विभाग में सहायक आयुक्त के कार्यालय के बाहर नागरिकों की भीड़ होने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, वहां पहुंचने वाले लोगों की संख्या, लंबित शिकायतों और उनके निस्तारण में लगने वाले समय के बारे में आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा जरूरी है।

    जनसमस्याओं के समाधान को लेकर उठे सवाल

    महानगरपालिका की जिम्मेदारी नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई करना भी है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग में शिकायत दर्ज करने, संबंधित अधिकारी तक बात पहुंचाने और समाधान की जानकारी देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

    नागरिकों की अपेक्षा है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि किसी मामले के समाधान में समय लग रहा है, तो संबंधित व्यक्ति को इसकी जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि उसे बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।

    वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

    आर/दक्षिण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रही शिकायतों के मद्देनजर महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही लंबित जनशिकायतों की स्थिति स्पष्ट करने और नागरिकों से मुलाकात की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की अपेक्षा जताई गई है। कुछ लोगों ने सहायक आयुक्त आरती गोलेकर के तबादले की मांग भी उठाई है।

    आरती गोलेकर और मनपा प्रशासन के पक्ष का इंतजार

    इस मामले में सहायक आयुक्त आरती गोलेकर का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। महानगरपालिका प्रशासन की ओर से भी इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

    अब नजर इस बात पर रहेगी कि महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारी इन शिकायतों का संज्ञान लेकर क्या कदम उठाते हैं और आर/दक्षिण विभाग में जनसमस्याओं के निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

  • मुंबई में 3 नए पुल शुरू, विद्याविहार का 30 मिनट का सफर अब 10 मिनट में

    मुंबई में 3 नए पुल शुरू, विद्याविहार का 30 मिनट का सफर अब 10 मिनट में

    मुंबई में सायन, विद्याविहार और गोरेगांव-मुलुंड मार्ग के 3 पुलों का लोकार्पण हुआ। जानें, इनसे ट्रैफिक और यात्रियों को क्या राहत मिलेगी।

    मुंबई: शहर में ट्रैफिक की परेशानी कम करने और लोगों का सफर आसान बनाने की दिशा में तीन महत्वपूर्ण पुल शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 22 अक्टूबर 2026 को सायन रेलवे स्टेशन, विद्याविहार रेलवे स्टेशन और गोरेगांव-मुलुंड जोड़ मार्ग पर बने पुलों का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं से सड़क यातायात को बेहतर बनाने, समय बचाने और मुंबई के पूर्वी-पश्चिमी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा बंगले से ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका को निर्देश दिया कि शहर में चल रहे सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तय समय पर और गुणवत्ता से समझौता किए बिना पूरे किए जाएं।

    सायन ब्रिज तय समय से चार महीने पहले तैयार

    सायन रेलवे स्टेशन के पास बना पुराना ब्रिटिशकालीन पुल करीब 112 साल पुराना था। सुरक्षा कारणों से इसे बंद करना पड़ा था। इसके बाद मध्य रेलवे और बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मिलकर नया पुल तैयार किया, जिसका काम तय समय से चार महीने पहले पूरा कर लिया गया।

    इस पुल के शुरू होने से सायन और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। रेलवे लाइन के आसपास सड़क यातायात की बाधाएं कम करने में भी यह पुल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    विद्याविहार में 30 मिनट की दूरी अब 10 मिनट में

    विद्याविहार रेलवे स्टेशन के पास बने नए पुल से पूर्व और पश्चिम हिस्सों के बीच आने-जाने वाले नागरिकों का समय बच सकता है। पहले इस इलाके में एक ओर से दूसरी ओर जाने में करीब आधे घंटे तक लग जाता था। अब यह सफर लगभग 10 मिनट में पूरा हो सकेगा।

    इससे रोजाना नौकरी, कारोबार और दूसरे कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। स्टेशन के आसपास यातायात का दबाव कम करने और स्थानीय कनेक्टिविटी सुधारने के लिहाज से भी यह परियोजना अहम है।

    गोरेगांव-मुलुंड मार्ग से पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी होगी मजबूत

    गोरेगांव-मुलुंड जोड़ मार्ग पर बने पुल का उद्देश्य मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों के बीच आवागमन को आसान बनाना है। इस मार्ग पर सड़क, पुल और भूमिगत सुरंगों जैसी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, ताकि अलग-अलग इलाकों के बीच यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सके।

    इस परियोजना से यातायात का दबाव कम करने और लोगों को बेहतर वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पूरे गोरेगांव-मुलुंड मार्ग पर यात्रा का समय कितना कम होगा, इसका कोई विस्तृत आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

    25 से 50 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो रहा मुंबई का विकास

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई की पायाभूत सुविधाओं का विकास केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहर की योजना अगले 25 से 50 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि मुंबई महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी होने के साथ देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। इसलिए सड़कों, समुद्री किनारे के मार्ग, पुलों और सुरंगों जैसी परियोजनाओं को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित करना जरूरी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का असली उद्देश्य लोगों का जीवन आसान बनाना है। नागरिकों को ट्रैफिक में कम समय बिताना पड़े, उनका सफर सुरक्षित हो और वे समय पर अपने घर पहुंच सकें, इसी दिशा में काम किया जाना चाहिए। उन्होंने महानगरपालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों को परियोजनाओं में आने वाली रुकावटें दूर करने तथा सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए।

    महापौर रितु तावड़े ने क्या कहा?

    मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने कहा कि ये तीनों पुल केवल निर्माण परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि मुंबईकरों का कीमती समय बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने सायन के पुराने पुल का जिक्र करते हुए बताया कि इसे तय समय से चार महीने पहले तैयार किया गया।

    महापौर ने कहा कि शहर में सड़कों का कंक्रीटीकरण, गड्ढों से राहत, पैदल चलने वालों की सुरक्षा और हरियाली बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बनाए रखना महानगरपालिका के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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    उपमहापौर संजय घाड़ी ने कहा कि मुंबईकरों को बेहतर सड़कें और पुल उपलब्ध कराना जरूरी है। दहिसर से मुंबई के दूसरे हिस्सों तक आने-जाने वाले लोगों को रोजाना ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है और कई बार सफर में दो घंटे तक लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि जोड़ मार्ग, पुल और भूमिगत सुरंगों के विकास से यात्रा के समय के साथ ईंधन की बचत में भी मदद मिल सकती है।

    आयुक्त अश्विनी भिड़े ने बताया कि इन तीनों पुल परियोजनाओं से मुंबई की यातायात व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। शहर की बढ़ती आबादी और यातायात की जरूरतों को देखते हुए सड़क और पुल जैसी सुविधाओं का योजनाबद्ध विकास किया जा रहा है।

    कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुआ?

    लोकार्पण समारोह में उपमुख्यमंत्री सुनेत्राताई अजित पवार, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा सांस्कृतिक कार्य मंत्री और मुंबई उपनगर जिले के पालकमंत्री एडवोकेट आशीष शेलार शामिल हुए।

    इसके अलावा सांसद अनिल देसाई और रविंद्र वायकर, विधायक अमित साटम, पराग शाह, कैप्टन आर. तमिल सेल्वन, अनंत नर, सुनील प्रभू, महेश सावंत और राजहंस सिंह भी कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

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    पूर्व सांसद राहुल शेवाले, सभागृह नेता गणेश खणकर, विरोधी पक्षनेता किशोरी पेडणेकर, शिवसेना गटनेते अमेय घोले, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर, स्थापत्य समिति (उपनगर) अध्यक्ष संगीता शर्मा, एन प्रभाग समिति अध्यक्ष अश्विनी मते, एफ दक्षिण और एफ उत्तर प्रभाग समिति अध्यक्ष मानसी सातमकर तथा बाजार एवं उद्यान समिति के उपाध्यक्ष भास्कर शेट्टी भी उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम में नगरसेवक धर्मेश गिरी, सुरेश आवळे, एडवोकेट सुहास वाडकर, तुलसीराम शिंदे और सुषम सावंत तथा नगरसेविकाएं राखी जाधव, निर्मिती कानडे, अर्चना भालेराव, प्रीति सातम और साक्षी कनोजिया भी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री के सरकारी निवास वर्षा बंगले पर महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिड़े, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी और अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर मौजूद रहे।

    इसके अलावा उपायुक्त (इंफ्रास्ट्रक्चर) गिरीश निकम, एन विभाग के सहायक आयुक्त जयदीप मोरे, पी पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त रुपाली सरमळकर, एफ उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त अरुण क्षीरसागर और प्रमुख अभियंता (पुल) राजेश मुळे सहित विभिन्न अधिकारी भी अपने-अपने स्थानों पर उपस्थित रहे।

    तीनों पुलों के शुरू होने से मुंबई की सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ट्रैफिक में वास्तविक राहत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आसपास की सड़कों पर यातायात का प्रबंधन कितना प्रभावी रहता है और बाकी जुड़ी हुई परियोजनाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं। महानगरपालिका के सामने अब इन सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने और शहर की बढ़ती यातायात जरूरतों के अनुरूप बाकी इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य पूरे करने की चुनौती है।

  • महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों में रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य, मरीजों को पहले मिलेगी खर्च की जानकारी

    महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों में रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य, मरीजों को पहले मिलेगी खर्च की जानकारी

    महाराष्ट्र में निजी अस्पतालों को इलाज और सुविधाओं के रेट मराठी व अंग्रेजी में प्रदर्शित करने होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को परिपत्र जारी किया।

    मुंबई: महाराष्ट्र में निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को अब इलाज और उपलब्ध सुविधाओं की रेट लिस्ट मरीजों को आसानी से दिखाई देने वाली जगह पर लगानी होगी। राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का अंदाजा लगाने और अपने बजट की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

    अस्पतालों को रेट लिस्ट मराठी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में प्रदर्शित करनी होगी। साथ ही, सेवाओं के शुल्क में बदलाव होने पर सूची को तुरंत अपडेट करना भी जरूरी होगा।

    इलाज और सुविधाओं के रेट दिखाना जरूरी

    इस व्यवस्था के तहत मुंबई परिचर्या गृह पंजीकरण अधिनियम, 1949 के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थानों को महाराष्ट्र परिचर्या गृह नियमावली, 2021 की अनुसूची तीन में शामिल सेवाओं और सुविधाओं के रेट प्रदर्शित करने होंगे।

    नियमों के अनुसार, अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाओं और अस्पताल से जुड़ी सुविधाओं के शुल्क को सार्वजनिक रूप से दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसका उद्देश्य मरीजों को उपलब्ध सेवाओं के संभावित खर्च की जानकारी देना है, ताकि इलाज के दौरान शुल्क को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।

    अस्पताल में ऐसी जगह लगानी होगी रेट लिस्ट

    स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार, रेट लिस्ट अस्पताल परिसर में किसी ऐसे प्रमुख स्थान पर लगानी होगी, जहां मरीजों और उनके परिजनों की आसानी से नजर पड़े। सूची ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां पहुंचकर उसे बिना परेशानी के पढ़ा जा सके।

    अस्पतालों को यह भी ध्यान रखना होगा कि रेट लिस्ट स्पष्ट और आसानी से पढ़ने योग्य हो। यदि किसी सेवा या सुविधा का शुल्क बदलता है, तो पुरानी दरों वाली सूची को तत्काल अपडेट करना होगा, ताकि मरीजों को गलत या पुरानी जानकारी के आधार पर खर्च का अनुमान न लगाना पड़े।

    केंद्र सरकार के निर्देश के बाद जारी हुआ परिपत्र

    केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के अनुरूप महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर को परिपत्र जारी किया।

    इस व्यवस्था से मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध सेवाओं और उनके शुल्क की जानकारी पहले से मिल सकेगी। इससे इलाज के खर्च की योजना बनाना आसान होगा और मरीजों तथा अस्पताल प्रशासन के बीच शुल्क को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।