Category: Civic Issues

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  • Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।

    पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।

    चाकण MIDC में 3 सितंबर को क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।

    इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।

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    पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर

    पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।

    कौन-कौन सी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ?

    मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।

    किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

    मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।

    इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।

    Drone को लेकर भी कार्रवाई का सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।

    फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।

    चाकण में पहले से Traffic का बड़ा दबाव

    चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।

    सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

    17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।

    यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।

    Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।

    इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।

    इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।

    अब सवाल केवल एक Reel का नहीं

    पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।

  • मुंबई ऑटो-टैक्सी मीटर अपडेट में चिप की कमी, 30 नवंबर की डेडलाइन से बढ़ी चालकों की चिंता

    मुंबई ऑटो-टैक्सी मीटर अपडेट में चिप की कमी, 30 नवंबर की डेडलाइन से बढ़ी चालकों की चिंता

    मुंबई में नया ऑटो-टैक्सी किराया लागू है, लेकिन मीटर चिप की कमी से रिकैलिब्रेशन धीमा है। 30 नवंबर की डेडलाइन और जुर्माने का पूरा अपडेट जानें।

    मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा और काली-पीली टैक्सियों का नया किराया 1 सितंबर से लागू हो चुका है, लेकिन डिजिटल मीटरों में नई दरें अपडेट करने की प्रक्रिया अब चिप की कमी के कारण धीमी पड़ गई है। परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। ऐसे में बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर तय समय में अपडेट कराने को लेकर चालकों की चिंता बढ़ गई है।

    नए नियम के तहत ऑटो का पहले 1.5 किलोमीटर का न्यूनतम किराया 26 रुपये से बढ़कर 27 रुपये और काली-पीली टैक्सी का 31 रुपये से बढ़कर 33 रुपये हो गया है। इसके बाद ऑटो का किराया 18.22 रुपये प्रति किलोमीटर और टैक्सी का 21.90 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है।

    मीटर में चिप नहीं तो नया किराया कैसे लिया जा रहा है?

    मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा होने तक चालकों को RTO की ओर से स्वीकृत संशोधित टैरिफ कार्ड के आधार पर नया किराया लेने की अनुमति है। यानी सिर्फ इसलिए कि इलेक्ट्रॉनिक मीटर में अभी पुरानी दर दिखाई दे रही है, यात्री को अनिवार्य रूप से पुराना किराया देना जरूरी नहीं है। संशोधित टैरिफ कार्ड मीटर अपडेट होने तक लागू रहेगा।

    यही व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी। इसके बाद वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक मीटरों में संशोधित दरें अपडेट होना जरूरी होगा।

    चिप की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा

    नए किराए के लिए डिजिटल मीटर में संशोधित दरों वाली विशेष चिप लगानी पड़ती है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार चिप की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से रिकैलिब्रेशन की गति प्रभावित हो रही है। परिवहन विभाग ने मीटर कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर चिप का उत्पादन और प्रोग्रामिंग शुरू की है, लेकिन अभी आपूर्ति जरूरत के मुताबिक नहीं पहुंच पाई है।

    रिकैलिब्रेशन की प्रक्रिया में अधिकृत केंद्र पर पुरानी सील हटाकर नई किराया दर वाली चिप लगाई जाती है। इसके बाद मीटर की जांच होती है और फिर RTO की मौजूदगी में सड़क पर टेस्ट किया जाता है। प्रक्रिया सही पाए जाने पर मीटर को सील कर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

    लाखों वाहनों के मीटर अपडेट करने की चुनौती

    MMR में ऑटो और काली-पीली टैक्सियों की संख्या लाखों में है। करीब 5 लाख ऑटो और 45 हजार काली-पीली टैक्सियों का उल्लेख है।

    इसके मुकाबले क्षेत्र में मीटर टेस्टिंग और रिकैलिब्रेशन के लिए करीब 15 से 20 अधिकृत केंद्र होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों और सीमित केंद्रों के बीच 30 नवंबर की समय-सीमा पूरी करना परिवहन विभाग के लिए बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।

    एक वाहन का रिकैलिब्रेशन पूरा होने में लग सकते हैं 2-3 दिन

    रिकैलिब्रेशन सिर्फ चिप लगाने तक सीमित नहीं है। एक बार वाहन अधिकृत केंद्र पर पहुंचने के बाद पूरी प्रक्रिया में दो से तीन दिन लग सकते हैं। इसमें मीटर अपडेट, परीक्षण, RTO प्रक्रिया और सीलिंग शामिल है।

    यही वजह है कि चालकों के लिए केवल चिप की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि अधिकृत केंद्रों की क्षमता और वहां मिलने वाली तारीख भी महत्वपूर्ण हो गई है।

    रिकैलिब्रेशन शुल्क कितना है?

    परिवहन विभाग ने मीटर रिकैलिब्रेशन के लिए 700 रुपये प्रति वाहन की राशि तय किए जाने की जानकारी 6 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आई थी। इसके साथ मीटर निर्माताओं और अधिकृत एजेंसियों को GST सहित रसीद जारी करने तथा वसूली का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    हालांकि 13 और 15 सितंबर की कुछ रिपोर्टों में 600 रुपये का शुल्क और उसका अलग-अलग मदों में ब्योरा दिया गया है। इसलिए चालकों को किसी भी अतिरिक्त राशि का भुगतान करने से पहले अधिकृत केंद्र पर प्रदर्शित सरकारी शुल्क सूची और कंप्यूटर जनरेटेड रसीद जरूर लेनी चाहिए। परिवहन विभाग के निर्देशों के अनुसार केंद्रों पर CCTV निगरानी और मीटर की सील संख्या का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी है।

    30 नवंबर के बाद क्या होगा?

    30 नवंबर 2026 तक मीटर रिकैलिब्रेशन पूरा करना है। इसके बाद बिना अपडेट वाले वाहनों पर विभागीय कार्रवाई की बात कही गई है। RTO अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में 50 रुपये प्रतिदिन के संभावित दंड, अधिकतम 5,000 रुपये तक, का उल्लेख किया गया है।

    हालांकि यह राशि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रस्तावित/संभावित दंड के रूप में सामने आई है। इसलिए अंतिम कार्रवाई और दंड की शर्तें संबंधित परिवहन विभाग के आदेश के अनुसार ही लागू होंगी।

    इस स्थिति में चालकों के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि यदि कोई चालक समय रहते अधिकृत केंद्र पर पहुंचता है, लेकिन चिप उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका मीटर अपडेट नहीं हो पाता, तो क्या उसे भी deadline के बाद दंड का सामना करना पड़ेगा। उपलब्ध रिपोर्टों में इस स्थिति पर स्पष्ट छूट का उल्लेख नहीं है।

    यात्रियों के लिए नया किराया कितना?

    नई दरों के अनुसार:

    वाहनपहले 1.5 किमीउसके बाद
    ऑटो रिक्शा₹27₹18.22 प्रति किमी
    काली-पीली टैक्सी₹33₹21.90 प्रति किमी

    10 किलोमीटर की यात्रा का उदाहरण लें तो ऑटो का किराया करीब 182 रुपये और काली-पीली टैक्सी का करीब 219 रुपये बैठता है। पहले यही दूरी लगभग 171 रुपये और 207 रुपये थी।

    रात 12 बजे से सुबह 5 बजे के बीच 25 प्रतिशत अतिरिक्त किराया लागू है। संशोधित न्यूनतम दर के आधार पर यह ऑटो के लिए 33.75 रुपये और टैक्सी के लिए 41.25 रुपये के आसपास बैठता है।

    वसई और मीरा-भायंदर के चालकों को अलग सुविधा

    वसई और मीरा-भायंदर क्षेत्र में चलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों को ठाणे RTO के अंतर्गत आने वाले अधिकृत केंद्रों पर मीटर रिकैलिब्रेशन कराने की सुविधा दी गई है। अन्य क्षेत्रों के वाहनों को संबंधित RTO क्षेत्र के अधिकृत केंद्रों के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    अब सबसे बड़ी चिंता 30 नवंबर की समय-सीमा

    नई दरें लागू हो चुकी हैं, लेकिन मीटरों को अपडेट करने वाली चिप की उपलब्धता और सीमित रिकैलिब्रेशन केंद्रों के कारण प्रक्रिया की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरी ओर, चालकों के पास 30 नवंबर तक मीटर अपडेट कराने की समय-सीमा है और उसके बाद कार्रवाई तथा संभावित दैनिक दंड का प्रावधान बताया गया है।

    फिलहाल परिवहन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—चिप की आपूर्ति को पर्याप्त करना और उपलब्ध अधिकृत केंद्रों की क्षमता के जरिए बड़ी संख्या में वाहनों के मीटर समय पर अपडेट कराना। वहीं, यात्रियों के लिए इस अवधि में RTO-approved tariff card ही संशोधित किराए का प्रमुख आधार बना रहेगा।

  • महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों के लिए नए नियम लागू हैं। मेंटेनेंस, बकाया, पुनर्विकास, निधि, बैठक और नामांकन से जुड़े अहम बदलाव जानिए।

    मुंबई: महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने जून 2026 में सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के लिए अलग नियमों वाला नया अध्याय लागू किया है। इसके तहत मेंटेनेंस वसूली, बकाया पर ब्याज, अलग-अलग निधियों में योगदान, सामान्य सभा, पुनर्विकास और बकाया राशि की वसूली जैसी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। सहकार आयुक्त एवं निबंधक की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 जून 2026 को गृहनिर्माण नियम 106-सी की अधिसूचना दर्ज है।

    लेकिन फ्लैट मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। नए नियम लागू हो चुके हैं, जबकि संशोधित आदर्श उपविधियों का अलग मसौदा अभी अंतिम रूप की प्रक्रिया में है। सहकार आयुक्त की वेबसाइट पर 13 और 18 अगस्त 2026 के संशोधित आदर्श उपविधियों के मसौदे उपलब्ध हैं।

    मेंटेनेंस से जुड़े खर्च का हिसाब बदलेगा

    नए नियमों में सोसायटी के अलग-अलग खर्चों को बांटने का आधार स्पष्ट किया गया है। सेवा शुल्क सदस्यों के बीच समान रूप से बांटा जा सकता है, जबकि संपत्ति कर, पानी, बीमा, मरम्मत और कुछ अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग आधार निर्धारित हैं। मरम्मत एवं रखरखाव निधि के लिए सामान्य सभा द्वारा तय राशि कम से कम निर्माण लागत के सालाना 0.75 प्रतिशत के बराबर होनी चाहिए। डूबत निधि के लिए न्यूनतम 0.25 प्रतिशत का प्रावधान है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि हर सोसायटी अगले महीने से मनमाने तरीके से मेंटेनेंस बढ़ा सकती है। शुल्क किस मद में है और उसके लिए नियमों में कौन सा आधार तय है, यह देखना जरूरी होगा।

    फ्लैट खाली रहने पर कितना शुल्क लगेगा?

    फ्लैट का मालिक खुद वहां नहीं रहता और उसे किसी अन्य उपयोग में देता है तो गैर-निवास शुल्क को लेकर भी सीमा तय की गई है। यह शुल्क सेवा शुल्क के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसे पूरे मेंटेनेंस बिल का 10 प्रतिशत समझना सही नहीं होगा।

    यानी यदि किसी सोसायटी में सेवा शुल्क और अन्य मदों को अलग-अलग दिखाया गया है तो गैर-निवास शुल्क की गणना पूरे बिल पर 10 प्रतिशत लगाकर नहीं की जानी चाहिए।

    मेंटेनेंस नहीं देने पर 12 प्रतिशत तक ब्याज

    सोसायटी के बकाये पर ब्याज की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत साधारण ब्याज प्रति वर्ष रखी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सोसायटी स्वतः 12 प्रतिशत ब्याज लगाएगी। लागू दर सामान्य सभा द्वारा तय की जानी है और वह निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो सकती।

    बकाया वसूली की प्रक्रिया भी अधिक औपचारिक की गई है। नियम 106-सी के तहत निर्धारित प्रपत्र और दस्तावेजों के आधार पर वसूली प्रमाणपत्र की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे सोसायटी के बकाये की वसूली के लिए स्पष्ट प्रशासनिक रास्ता मिलता है।

    समिति कितनी राशि तक खर्च कर सकती है?

    मरम्मत और रखरखाव के खर्च के लिए प्रबंध समिति की वित्तीय सीमा भी सदस्यों की संख्या के अनुसार निर्धारित की गई है। 25 तक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये, 26 से 50 सदस्यों के लिए 2 लाख रुपये, 51 से 100 सदस्यों के लिए 3 लाख रुपये, 101 से 1,000 सदस्यों के लिए 4 लाख रुपये और 1,000 से अधिक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए 5 लाख रुपये है। इससे अधिक के बड़े खर्च में सामान्य सभा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

    पुनर्विकास के लिए भी प्रक्रिया तय

    पुनर्विकास अब केवल समिति और विकासक के बीच की बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में पुनर्विकास से जुड़ी सामान्य सभा की प्रक्रिया, सूचना और उपस्थिति से संबंधित प्रावधान रखे गए हैं।

    पुनर्विकास की बैठक के लिए 14 स्पष्ट दिनों की सूचना और कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई के बराबर गणपूर्ति का प्रावधान है। विकासक या ठेकेदार के चयन के लिए कुल सदस्यों के 51 प्रतिशत समर्थन की आवश्यकता बताई गई है। दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना गलत होगा—दो-तिहाई गणपूर्ति और 51 प्रतिशत समर्थन अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।

    स्व-पुनर्विकास के मामले में भी उधारी की सीमा को लेकर विशेष प्रावधान है। नियमों के अनुसार निर्धारित परिस्थितियों में सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय भूमि मूल्य के 10 गुना तक उधारी की सीमा का प्रावधान है। यह बैंक से स्वतः 10 गुना कर्ज मिलने की गारंटी नहीं है।

    मृत सदस्य के बाद फ्लैट का क्या होगा?

    नामांकन को लेकर भी फ्लैट मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हैं। किसी सदस्य की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को प्रक्रिया के अनुसार अस्थायी सदस्यता मिल सकती है, लेकिन केवल नामांकित व्यक्ति होने से संपत्ति का अंतिम स्वामित्व स्वतः उसके नाम नहीं हो जाता।

    जहां उत्तराधिकार को लेकर विवाद हो, वहां संबंधित कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। नए प्रावधानों में पंजीकृत पारिवारिक व्यवस्था के माध्यम से कुछ परिस्थितियों में हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है।

    सामान्य सभा में ऑनलाइन भागीदारी का रास्ता

    नए नियमों में सामान्य सभा की बैठकों में वीडियो सम्मेलन या ऐसे दृश्य-श्रव्य माध्यम से भागीदारी की व्यवस्था को मान्यता दी गई है, जिसमें सदस्य की पहचान और बैठक का समयबद्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इससे दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले सदस्यों के लिए भागीदारी आसान हो सकती है।

    अब संशोधित आदर्श उपविधियों की बारी

    नए नियम लागू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण संशोधित आदर्श उपविधियों का अंतिम रूप है। राज्य सरकार ने 2026 में इनका विस्तृत मसौदा जारी कर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। आधिकारिक पोर्टल पर इसका मसौदा 13 और 18 अगस्त को सूचीबद्ध है।

    सुझाव और आपत्तियां देने की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 थी। 10 सितंबर की ताजा कानूनी जानकारी के अनुसार मसौदा अब अंतिम मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है तथा अक्टूबर 2026 में लागू होने की संभावना बताई गई है। हालांकि अक्टूबर की तारीख को अभी अंतिम सरकारी अधिसूचना के रूप में नहीं माना जा सकता।

    एक बार संशोधित आदर्श उपविधियां औपचारिक रूप से जारी होने के बाद सोसायटियों को उन्हें अपनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। मौजूदा नियमों में आदर्श उपविधियां प्रकाशित होने के तीन महीने के भीतर उन्हें अपनाने का प्रावधान है।

    इसलिए महाराष्ट्र के फ्लैट मालिकों और सोसायटी समितियों के लिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि जून 2026 में लागू हुए नए वैधानिक नियमों और अभी अंतिम रूप की प्रतीक्षा कर रहे संशोधित आदर्श उपविधियों को एक ही चीज न समझें। आने वाले महीनों में उपविधियों की अंतिम अधिसूचना के बाद पार्किंग, शिकायत निवारण, विद्युत वाहन चार्जिंग, पुनर्विकास और सोसायटी के दैनिक संचालन से जुड़े कई प्रावधानों का व्यावहारिक असर और स्पष्ट होगा।

  • Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    दिवा-मुंब्रा के बीच भीड़भरी लोकल से महिला नीचे गिर गई। सिग्नल पर ट्रेन रुकी होने से जान बची। वायरल VIDEO ने लोकल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Mumbai local train में सुबह की भीड़ किस तरह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, इसका ताजा मामला गुरुवार सुबह दिवा-मुंब्रा के बीच सामने आया। CSMT की ओर जा रही भीड़भाड़ वाली लोकल से एक महिला यात्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन सिग्नल के कारण रुकी हुई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। महिला रेलवे ट्रैक के किनारे बने नाले में गिरकर फंस गई और उसे मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    सिग्नल पर रुकी थी ट्रेन, तभी हुआ हादसा

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सुबह मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में काफी भीड़ थी। दिवा और मुंब्रा के बीच ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी। इसी दौरान दरवाजे के पास मौजूद महिला यात्री भीड़ के दबाव में अपना संतुलन खो बैठी और ट्रेन से नीचे जा गिरी।

    महिला रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद नाले में जा गिरी। इसी वजह से वह सीधे ट्रेन के पहियों की चपेट में आने से बच गई। घटना के दौरान एक यात्री मोबाइल फोन से वीडियो बना रहा था, जिसके कैमरे में महिला के नीचे गिरने का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।

    घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला को मामूली चोटें आई हैं। उसकी पहचान और अस्पताल में इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    दिवा-मुंब्रा का यह रेल मार्ग फिर सवालों के घेरे में

    महिला के लोकल से गिरने की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दिवा-मुंब्रा रेल मार्ग पहले भी इसी तरह की दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।

    9 जून 2025 को इसी इलाके में दो लोकल ट्रेनों के बीच से गुजरते समय दरवाजे पर खड़े यात्रियों के गिरने की भीषण दुर्घटना हुई थी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद ट्रेन की भीड़, दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करने और इस हिस्से के तीखे मोड़ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे।

    उस हादसे की जांच के दौरान दुर्घटना के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। रेलवे की जांच में यात्रियों के सामान और आपस में टकराने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जबकि पुलिस जांच में ट्रैक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की गई।

    एक साल बाद भी भीड़ से राहत क्यों नहीं?

    2025 की दुर्घटना के बाद रेलवे की ओर से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर सेवाएं बढ़ाने और यात्री सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए। सरकारी रिकॉर्ड में दिवा के लिए 14 और मुंब्रा के लिए 16 नई उपनगरीय सेवाओं का उल्लेख किया गया था।

    इसके बावजूद 2026 में भी दिवा-मुंब्रा और आसपास के मार्गों पर सुबह के व्यस्त समय में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं। डोंबिवली से मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में भीड़ का एक कारण दिवा-मुंब्रा क्षेत्र से आने वाले यात्रियों की संख्या को भी बताया गया है।

    यही वजह है कि आज की घटना के बाद सिर्फ यह सवाल नहीं है कि महिला लोकल से कैसे गिरी, बल्कि यह भी सवाल है कि अतिरिक्त सेवाओं और सुरक्षा उपायों के बावजूद peak hours में यात्रियों को दरवाजे तक पहुंचने वाली स्थिति क्यों बन रही है।

    Automatic Door वाली लोकल से क्या बदलेगा?

    2025 की दुर्घटना के बाद मुंबई में automatic door वाली non-AC लोकल का विकल्प भी तेजी से आगे बढ़ा। ऐसी लोकल में दरवाजे अपने आप बंद होने की व्यवस्था होगी, जिससे ट्रेन चलने के दौरान यात्रियों के दरवाजे पर खड़े रहने या बाहर लटकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।

    रेलवे की ओर से नए non-AC automatic-door rake को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की रोजाना जरूरत को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की नियमित उपलब्धता और peak-hour capacity अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    सिर्फ चेतावनी से नहीं रुकेगा खतरनाक सफर

    मुंबई की उपनगरीय रेलवे में यात्रियों को footboard पर यात्रा नहीं करने की लगातार चेतावनी दी जाती है। स्टेशनों पर घोषणाएं, जागरूकता अभियान और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

    लेकिन दिवा-मुंब्रा के बीच हुई आज की घटना एक अलग चुनौती सामने रखती है। जब ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हो और यात्रियों का दबाव दरवाजे तक पहुंच जाए, तब सिर्फ चेतावनी के बजाय भीड़ प्रबंधन, पर्याप्त लोकल सेवाएं और सुरक्षित कोच व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।

    आज महिला की जान इसलिए बच गई क्योंकि ट्रेन उस समय सिग्नल पर रुकी हुई थी। वायरल वीडियो ने इस घटना को सामने ला दिया है, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—दिवा-मुंब्रा जैसे संवेदनशील रेल मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा देने के लिए रेलवे अगला ठोस कदम कब उठाएगा?

  • Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA ने IRCTC की Kurla kitchen और ISKCON Juhu के 3 food units पर कार्रवाई की। Zepto-linked facility में भी food safety violations मिले।

    मुंबई: शहर में food safety को लेकर महाराष्ट्र FDA का crackdown लगातार सख्त होता जा रहा है। ताजा कार्रवाई में Kurla की IRCTC-linked base kitchen का licence suspend किया गया है, जबकि Juhu स्थित ISKCON के तीन food establishments पर भी licence suspension की कार्रवाई हुई है। जांच में cockroaches, खुले में रखा खाना, जाम नालियां, खराब hygiene और food-safety records में गंभीर कमियां सामने आईं। Zepto से जुड़ी एक facility में भी pest infestation और cold-chain management में खामियां मिली हैं।

    IRCTC की Kurla kitchen में क्या मिला?

    महाराष्ट्र FDA ने 2 सितंबर को Kurla West स्थित R K Associates & Hoteliers Pvt Ltd की base kitchen का निरीक्षण किया। यह kitchen IRCTC network के जरिए railway passengers के लिए food supply करती है।

    जांच के दौरान food storage और preparation areas में cockroaches पाए गए। कुछ food खुले में रखा था और garbage के पास food preparation होने की बात सामने आई। Kitchen infrastructure में भी कमियां मिलीं, जिनमें damaged tiles और अस्वच्छ surfaces शामिल हैं। बर्तनों और food-contact equipment पर गंदगी तथा जंग की शिकायत भी inspection findings में शामिल रही।

    Food handlers से जुड़े records ने भी सवाल खड़े किए। कुल 34 food handlers में केवल 21 के medical fitness certificates उपलब्ध थे। एक कर्मचारी उंगली पर चोट होने के बावजूद food handling करता मिला। Food transport vehicle की cleanliness और maintenance को लेकर भी FDA ने कमियां दर्ज कीं।

    इन findings के बाद संबंधित kitchen का food licence suspend कर दिया गया।

    क्या IRCTC की पूरी catering service बंद हो गई?

    नहीं। कार्रवाई एक specific IRCTC-linked kitchen पर हुई है। FDA ने मुंबई और ठाणे में IRCTC से जुड़े कुल पांच base kitchens/food plazas की जांच की थी। R K Associates का licence suspend किया गया, जबकि Om Sai Ram Enterprises, Ambuj Hotels & Real Estate Pvt Ltd, Express Food Services और Araha Hospitality Pvt Ltd को improvement notices दिए गए।

    इसका मतलब यह है कि पूरे IRCTC food network को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है।

    ISKCON Juhu के तीन food units पर भी licence suspension

    3 सितंबर को Juhu स्थित ISKCON परिसर में food operations की जांच की गई। FDA को यहां भी कई food-safety violations मिले और तीन establishments के licences suspend किए गए।

    Food Services Restaurant से जुड़ी findings में खुले kitchen entrance, pest-control में कमी, clogged drains, drains में food waste और pest droppings जैसी समस्याएं शामिल हैं। Raw material inspection, laboratory testing, cleaning, employee medical examination, vaccination और staff training से जुड़े records में भी deficiencies बताई गई हैं।

    Govindas Restaurant में pest infestation, clogged drains और cold-storage area में पानी जमा होने की बात सामने आई। Raw और cooked food को पर्याप्त रूप से अलग नहीं रखने की कमी भी दर्ज की गई, जिससे cross-contamination का risk पैदा हो सकता है। Food testing, drinking-water testing, raw-material inspection, pest control और staff records से जुड़े compliance gaps भी पाए गए।

    Zepto-linked facility में cockroaches और cold-chain की समस्या

    FDA की कार्रवाई में Malad West स्थित Drogheria Sellers Pvt Ltd भी शामिल है, जिसे Zepto-linked food facility के तौर पर रिपोर्ट किया गया है।

    Inspection में food-storage areas में cockroaches मिलने की जानकारी सामने आई। Dairy products की storage temperature को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक milk, paneer और curd करीब 14–15°C पर रखे मिले, जबकि cold room का temperature करीब 20–21°C बताया गया। इससे cold-chain management पर सवाल खड़े हुए।

    दूसरे food businesses पर भी कार्रवाई

    FDA की ताजा कार्रवाई केवल IRCTC, ISKCON और Zepto-linked facility तक सीमित नहीं रही। मुंबई और आसपास कई अन्य food businesses भी regulatory action की चपेट में आए हैं।

    Bombay’s The Food Fusion Cafe, Ghatkopar के खिलाफ licence suspension की recommendation की गई। यहां uncovered cooked rice, खुले container में raw chicken, improperly sealed vegetables, refrigeration और drainage से जुड़ी कमियां तथा जरूरी testing/training records की कमी रिपोर्ट हुई।

    Shree Madhuram, Borivali East के registration को suspend करने की recommendation की गई। Kothari Sweet और Mulund Farsan Mart पर भी food production, expired products और pest-related violations को लेकर कार्रवाई हुई।

    Maharashtra Biryani Center, Goregaon East का licence hygiene, pest control, drainage और जरूरी food-safety documentation से जुड़ी कमियों के कारण suspend किया गया।

    FDA की कार्रवाई में Mateshwari Milk, Kharghar भी शामिल है। यहां milk processing, temperature monitoring, calibration, sanitation और labelling से जुड़ी compliance deficiencies report हुई हैं।

    Licence suspend होने का क्या मतलब है?

    Food licence suspension का मतलब संबंधित food business को उस licence के तहत food activity जारी रखने की अनुमति नहीं रहती, जब तक regulatory compliance और आगे की प्रक्रिया पूरी न हो। इसलिए “licence suspended” और “improvement notice” को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

    इसी कार्रवाई में कुछ businesses के licences suspend हुए हैं, जबकि कुछ को केवल improvement notices दिए गए हैं और कुछ के खिलाफ suspension की recommendation की गई है।

    Maharashtra FDA का crackdown क्यों बढ़ा?

    यह कार्रवाई किसी एक दिन की isolated inspection नहीं दिखती। महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ महीनों में food adulteration और hygiene violations के खिलाफ enforcement तेज किया है। Commissioner Tukaram Mundhe के नेतृत्व में विभाग ने food businesses की inspections और enforcement को अधिक systematic बनाने पर जोर दिया है।

    FDA ने अब year-round “Festival Enforcement Calendar” भी शुरू किया है। इसके तहत festivals, fairs, religious events और बड़े public gatherings के दौरान food adulteration और hygiene violations पर पहले से तय surveillance और sampling की व्यवस्था की जा रही है।

    इस plan में dairy products, sweets, edible oils, paneer, dry fruits और दूसरे high-risk food items पर विशेष निगरानी की जा सकती है। Festival से पहले manufacturing units, markets, cold stores, godowns और wholesale markets तक inspections की योजना बनाई गई है।

    आगे क्या होगा?

    ताजा कार्रवाई से संकेत साफ है कि Maharashtra FDA अब केवल restaurants पर ही नहीं, बल्कि railway food suppliers, institutional kitchens, e-commerce-linked food facilities, dairy businesses और festival-related food operations पर भी निगरानी बढ़ा रहा है।

    ऐसे में जिन businesses के licences suspend हुए हैं, उनके लिए अगला महत्वपूर्ण चरण compliance और regulatory review होगा, जबकि improvement notices पाने वाले establishments को FDA की बताई कमियों को दूर करना होगा।

    मुंबई में food safety को लेकर चल रहा यह crackdown आने वाले festival season में और तेज हो सकता है। FDA का नया enforcement calendar भी इसी दिशा में संकेत देता है कि high-risk food categories और बड़े food-distribution operations पर निगरानी अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी।

  • दही हांडी में 2 मौतें: महिला और 7 साल के बच्चे की जान गई, 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी में 2 मौतें: महिला और 7 साल के बच्चे की जान गई, 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी के दौरान मुंबई और पुणे में दो हादसों में महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हुई। मुंबई-ठाणे में 42 गोविंदा घायल हुए।

    मुंबई: महाराष्ट्र में दही हांडी के जश्न के दौरान मुंबई और पुणे में हुए दो अलग-अलग हादसों में एक महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि मुंबई और ठाणे में कुल 42 गोविंदा घायल हुए। मुंबई के मालाड में बच्चे की मौत हांडी बांधने के लिए इस्तेमाल किए गए ईंट के खंभे के गिरने से हुई, जबकि पुणे के पुराने सांगवी में कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी लोहे का ढांचा हटाते समय महिला उसकी चपेट में आ गई।

    मालाड में 7 साल के रुद्र की मौत

    मुंबई के मलाड (पश्चिम) मालवणी इलाके की एकता वेलफेयर सोसायटी में शनिवार दोपहर बच्चे दही हांडी मना रहे थे। हांडी को एक पेड़ और ईंट के खंभे के बीच रस्सी से बांधा गया था। हांडी फोड़ने के दौरान दबाव बढ़ा और खंभा टूटकर गिर गया। इसका मलबा 7 साल के रुद्र कदम के सिर पर लगा।

    रुद्र को मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुणे में महिला की जान गई

    पिंपरी-चिंचवड़ के पुराने सांगवी इलाके में शुक्रवार रात दही हांडी कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी ढांचा हटाया जा रहा था। इसी दौरान ऊपर लगी लोहे की कमान का एक हिस्सा नीचे गिर गया। इसकी चपेट में 45 वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठान आ गईं।

    पुलिस के मुताबिक, सलमा अपने पति के साथ कार्यक्रम में आई थीं। गंभीर चोट लगने के बाद उनकी मौत हो गई। सांगवी पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की है और ढांचे की अनुमति समेत हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मौत स्पीकर गिरने से नहीं हुई थी।

    मुंबई और ठाणे में 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी के दौरान मानवीय पिरामिड बनाते समय मुंबई में 32 और ठाणे में 10 गोविंदा घायल हुए। शुरुआती जानकारी में मुंबई में 22 घायलों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद के अपडेट में यह संख्या बढ़कर 32 हो गई।

    दही हांडी से पहले बीएमसी ने मुंबई के प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में आपात स्थिति के लिए 100 से ज्यादा बिस्तर तैयार रखे थे। राज्य सरकार ने भी गोविंदाओं के लिए दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने का बीमा कवर बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया था।

    मुंबई और पुणे के दोनों हादसों की वजह अलग रही। मालाड में ईंट का खंभा गिरने से बच्चे की जान गई, जबकि सांगवी में लोहे का अस्थायी ढांचा हटाते समय महिला हादसे का शिकार हुई। दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • मालाड में दही हांडी के दौरान खंभा गिरा, 7 साल के रुद्र की मौत

    मालाड में दही हांडी के दौरान खंभा गिरा, 7 साल के रुद्र की मौत

    मालाड के मालवणी में दही हांडी फोड़ते समय ईंट का खंभा गिरने से 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा शनिवार दोपहर हुआ।

    मुंबई: मालाड के मालवणी इलाके में शनिवार दोपहर दही हांडी के दौरान 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा करीब 3:01 बजे एकता वेलफेयर सोसायटी, चिकुवाड़ी में हुआ। दही हांडी फोड़ने के लिए बच्चे मानव पिरामिड बना रहे थे। इसी दौरान हांडी को बांधने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी से जुड़े ईंट के खंभे का हिस्सा दबाव में गिर गया, जिसकी चपेट में रुद्र आ गया।

    हांडी फोड़ते समय गिरा खंभा

    जानकारी के मुताबिक, दही हांडी की रस्सी एक पेड़ और जमीन तल की संरचना के ईंट के खंभे से बांधी गई थी। हांडी फोड़ने की कोशिश के दौरान खंभा दबाव नहीं सह सका और उसका हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया। मलबे की चोट रुद्र के सिर पर लगी।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। रुद्र को तुरंत मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया।

    मुंबई में 32 गोविंदा घायल

    मालाड की इस घटना के अलावा दही हांडी के दौरान मुंबई के अलग-अलग इलाकों में 32 गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का इलाज जारी था।

    दही हांडी आयोजन से पहले बीएमसी ने प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में घायल गोविंदाओं के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था रखने की जानकारी दी थी।

    हादसे की जांच

    रुद्र की मौत के बाद अब यह जांच का विषय है कि दही हांडी के लिए रस्सी किस तरह बांधी गई थी, जिस खंभे से उसे जोड़ा गया था उसकी स्थिति कैसी थी और आयोजन स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

  • मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    दहिसर में टैक्सी-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 5 आरोपी और 5 वाहन पकड़े। अब पूरे मुंबई में जांच की मांग।

    मुंबई: मुंबई में टैक्सी या रिक्शा में बैठने के बाद मीटर पर दिखने वाला किराया ही यात्री के लिए भरोसे का आधार होता है। लेकिन दहिसर में किराया मीटर के साथ इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दहिसर पुलिस ने मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर किराए में हेरफेर करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पांच वाहन जब्त किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर टैक्सी और रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए छेड़छाड़ कर यात्रियों से निर्धारित किराए से ज्यादा रकम वसूलने का आरोप है। कार्रवाई में दो काली-पिली टैक्सी, दो रिक्शा और एक मारुति आर्टिगा जब्त की गई है।

    एक टैक्सी से खुला मामला, जांच में सामने आए पांच वाहन

    दहिसर पुलिस को टैक्सी और रिक्शा के मीटर में छेड़छाड़ कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन की जांच शुरू की।

    1 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक यात्री को टैक्सी क्रमांक MH 01 CJ 6487 से सफर के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, टैक्सी चालक द्वारा मीटर में छेड़छाड़ किए जाने का संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, बोरीवली भेजा गया।

    आरटीओ की जांच में मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट जैसी डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए मीटर की रीडिंग को प्रभावित कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था।

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को ऐसे ही दूसरे वाहनों की भी जानकारी मिली। इसके बाद कुल पांच वाहनों को जब्त किया गया।

    कौन-कौन से वाहन पकड़े गए?

    पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में ये वाहन जब्त किए गए हैं—

    • काली-पिली टैक्सी — MH 01 CJ 6487
    • काली-पिली रिक्शा — MH 02 DU 0777
    • काली-पिली रिक्शा — MH 03 BY 4268
    • काली-पिली टैक्सी — MH 02 BQ 7392
    • मारुति आर्टिगा — MH 01 EM 6048

    पुलिस ने मीटर में छेड़छाड़ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट को भी जब्त किया है।

    पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

    इस मामले में पुलिस ने जौएब अल्ताफ देशमुख (32), अमीन रमजान पठाण (39), रियाज अब्दुलगनी शेख (45), नाजीर इब्राहिम पटेल (57) और आनंद कुमार नानाकप्रसाद राय (60) के खिलाफ कार्रवाई की है।

    पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    मुंबई के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल

    दहिसर में पांच वाहनों में मीटर से छेड़छाड़ सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ इन पांच वाहनों तक सीमित नहीं है।

    अगर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए किराया मीटर में हेरफेर किया जा सकता है, तो मुंबई के दूसरे इलाकों में चल रहे टैक्सी और रिक्शा के मीटर कितने सुरक्षित हैं?

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मुंबईकर टैक्सी और रिक्शा से सफर करते हैं। यात्री मीटर में दिखाई देने वाली रकम को सही मानकर भुगतान करता है। ऐसे में मीटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ होने पर उसे अतिरिक्त किराया वसूले जाने का पता भी नहीं चल सकता।

    हालांकि, दहिसर के इन पांच वाहनों के मामले से पूरे मुंबई में इस तरह की धोखाधड़ी हो रही है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जांच का मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।

    अब आरटीओ की जवाबदेही पर सवाल

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की भूमिका को लेकर भी है।

    दहिसर पुलिस की कार्रवाई के बाद क्या मुंबई के अलग-अलग इलाकों में टैक्सी और रिक्शा के मीटरों की विशेष जांच की जाएगी?

    क्या आरटीओ यह जांच करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर मीटर की रीडिंग में हेरफेर करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे वाहनों में कहीं हो तो नहीं रहा?

    और अगर ऐसी जांच होती है तो कितने वाहनों के मीटर सही पाए जाते हैं और कितनों में गड़बड़ी सामने आती है, इसकी जानकारी क्या सार्वजनिक की जाएगी?

    इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मीटर में हेरफेर का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। जिसमें, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज एरवडे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सर्जेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अधिकारी मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।

    कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके के साथ पुलिसकर्मी हेमंत बाबुराव दिवारे, सुनील चंद्रकांत राठोड, संतोष काशिनाथ भागवत और ऋषिकेश प्रवीण मोरे शामिल थे। बताया गया कि सबसे पहले इसकी जानकारी सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके को मिली थी जिसके निगरानी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से जांच के निर्देश मिले।

    दहिसर की कार्रवाई ने खोल दिया बड़ा सवाल

    दहिसर पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल पांच वाहनों और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया है। लेकिन इससे मुंबई के परिवहन तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ दहिसर में ही मीटर की ऐसी जांच होगी या आरटीओ पूरे मुंबई में टैक्सी-रिक्शा के मीटरों की व्यापक जांच शुरू करेगा?

    क्योंकि अगर मीटर ही गलत रीडिंग दिखाए, तो यात्री के पास सही किराया जानने का भरोसेमंद आधार क्या बचेगा?

    यही वह सवाल है जिसका जवाब अब मुंबई के यात्रियों को आरटीओ और संबंधित परिवहन अधिकारियों से चाहिए।

  • BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    मुंबई के अंधेरी में BMC के जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी पर ₹60 हजार रिश्वत लेने का आरोप। ACB ट्रैप में गिरफ्तारी, ₹2.78 लाख कैश बरामद।

    मुंबई: अंधेरी पश्चिम के BMC K/West Ward कार्यालय में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने रिश्वत के मामले में BMC के एक जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ACB के मुताबिक, एक बेकरी संचालक से कथित तौर पर ₹70 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद ₹60 हजार में सौदा तय हुआ, जिसके बाद ACB ने ट्रैप लगाकर कर्मचारी को रकम लेते हुए पकड़ लिया।

    मामले में जूनियर इंजीनियर नीरवकुमार चुनीलाल जैसूर (43) और BMC कर्मचारी विजय रमेश पाटील (46) को आरोपी बनाया गया है।

    बेकरी पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत का आरोप

    ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता 50 वर्षीय बेकरी संचालक है। आरोप है कि पाटील ने उससे ₹70 हजार मांगे थे। कथित तौर पर यह रकम बेकरी को चलाने देने और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने के बदले मांगी गई थी।

    शिकायत मिलने के बाद ACB ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। इसी दौरान पाटील ने शिकायतकर्ता की मुलाकात जूनियर इंजीनियर जैसूर से कराई। इसके बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम ₹70 हजार से घटकर ₹60 हजार तय हुई।

    ₹60 हजार लेते ही ACB का ट्रैप

    रकम तय होने के बाद ACB ने K/West Ward कार्यालय में ट्रैप लगाया।

    ACB के अनुसार, विजय पाटील को ₹60 हजार स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद जांच टीम ने BMC के छठी मंजिल स्थित कार्यालय से जूनियर इंजीनियर जैसूर को भी हिरासत में लिया।

    दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    कर्मचारी के पास ₹2.78 लाख कैश मिला

    ट्रैप के बाद ACB ने पाटील की तलाशी ली। उसके पास से ₹40,820 नकद और बैग से ₹2,37,600 नकद बरामद हुआ।

    इस तरह कुल ₹2,78,420 कैश मिला।

    तीन मोबाइल फोन भी जब्त

    ACB ने मामले में मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जूनियर इंजीनियर जैसूर के दो मोबाइल फोन और पाटील का एक मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।

    अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।

    अब आगे क्या होगा?

    ACB की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। इस केस में सबसे अहम सवाल अब यह है कि ₹2.78 लाख की अतिरिक्त नकदी का स्रोत क्या था और क्या उसका कथित रिश्वत प्रकरण से कोई संबंध सामने आता है।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ACB ने ₹60 हजार की कथित रिश्वत के ट्रैप में BMC के दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

  • BMC से PWD तक Transfer-Posting का खेल? नेताओं की सिफारिश पर उठे बड़े सवाल

    BMC से PWD तक Transfer-Posting का खेल? नेताओं की सिफारिश पर उठे बड़े सवाल

    BMC से PWD तक Transfer-Posting पर सवाल उठे हैं। 225 राजनीतिक सिफारिशों, BMC Randomisation और PWD tenure विवाद का पूरा मामला जानिए।

    मुंबई: सरकारी नौकरी में Transfer-Posting नियम से होना चाहिए या किसी नेता की recommendation से? BMC से लेकर महाराष्ट्र PWD तक सामने आ रही घटनाएं इसी बुनियादी सवाल को सामने ला रही हैं। BMC के रिकॉर्ड में पिछले एक साल में 225 अधिकारियों-कर्मचारियों के Transfer और Promotion को लेकर राजनीतिक सिफारिशें मिली हैं। दूसरी तरफ नागपुर PWD में कुछ Junior Engineers के लंबे समय तक एक ही जगह बने रहने और extension की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। ऐसे माहौल में BMC ने Engineers के Transfer के लिए अब Online Randomisation की व्यवस्था लागू की है।

    225 सिफारिशें, सवाल सिर्फ संख्या का नहीं

    RTI से सामने आई जानकारी के मुताबिक BMC के City Engineer Office में पिछले एक साल में 225 Transfer/Promotion recommendation letters मिले। इनमें Union Ministers, State Ministers, MPs, MLAs, MLCs और अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।

    रिकॉर्ड में Eknath Shinde का नाम 10 बार और Ramdas Athawale का 9 बार सामने आया। Girish Mahajan और Kalidas Kolambkar के नाम 7-7 बार दर्ज हैं। कई अन्य नेताओं के नाम भी रिकॉर्ड में हैं।

    यहां असली सवाल 225 की संख्या से आगे है—किसी कर्मचारी की Transfer-Posting का प्रशासनिक फैसला जिस competent authority को करना है, वहां किसी राजनीतिक जनप्रतिनिधि की recommendation की भूमिका क्या है?

    Recommendation अपने-आप में किसी Transfer को गैरकानूनी साबित नहीं करती। कई बार जनप्रतिनिधि health problem, family circumstances, travel distance या दूसरी व्यक्तिगत दिक्कतों को लेकर representation भी करते हैं। लेकिन अंतिम फैसला नियमों और सक्षम प्रशासनिक authority के आधार पर होना चाहिए। इसलिए सवाल recommendation के अस्तित्व से ज्यादा उसके प्रभाव और उसके बाद हुए फैसले की प्रक्रिया पर है।

    अब BMC में बदली Computer तय करेगा

    इसी विवाद के बीच BMC ने City Engineer Office में JE, SE और AE के लिए Employee Transfer System Based on Randomization शुरू किया है।

    2 सितंबर के circular के मुताबिक एक ही department/section में तीन साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे Engineers को 5 से 20 सितंबर के बीच Online Transfer Preference देनी होगी। कर्मचारी कम से कम एक और अधिकतम पांच विकल्प दे सकते हैं। इसके बाद available manpower और vacant posts के आधार पर computerised system Transfer process करेगा।

    ध्यान देने वाली बात यह है कि यह व्यवस्था फिलहाल City Engineer Office के JE, SE और AE पर लागू है। इसे BMC के हर कर्मचारी के लिए लागू नया Transfer rule नहीं कहा जाएगा।

    लेकिन क्या इससे Recommendation का रास्ता बंद होगा?

    यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

    अगर Transfer को computerised randomisation से तय किया जाना है, तो किसी खास कर्मचारी के लिए बाहर से आने वाली recommendation का उस process पर क्या असर होगा? क्या ऐसे मामलों के लिए कोई अलग exception mechanism होगा? और अगर exception होगा तो उसका कारण और approval public record में आएगा या नहीं?

    यानी असली transparency सिर्फ software लगाने से नहीं आएगी। Transparency तब मानी जाएगी जब Transfer का पूरा trail—tenure, vacancy, preference, competent authority का decision और exception का कारण—स्पष्ट हो।

    2025 का विवाद भी इसी सवाल को और गंभीर बनाता है

    BMC में Transfer-Posting को लेकर विवाद पहली बार नहीं उठा। 2025 में करीब 160 Engineers के Transfer को लेकर political influence और “cash-for-transfer” जैसे आरोप लगाए गए थे। विवाद बढ़ने के बाद proposed transfer process पर रोक लगी थी।

    मई 2026 में BJP MLA Mihir Kotecha ने आरोप लगाया कि पहले विवादित list में शामिल करीब 55 अधिकारियों को दोबारा उन्हीं या समान postings पर लाने की कोशिश हो रही है। BMC ने उस समय ऐसी किसी final list की जानकारी से इनकार किया था।

    इन आरोपों की पुष्टि को लेकर अंतिम निष्कर्ष अलग बात है, लेकिन लगातार उठते सवाल बताते हैं कि Transfer-Posting की प्रक्रिया पर भरोसा ही इस विवाद का केंद्र बन चुका है।

    PWD में सवाल अलग, लेकिन मुद्दा वही

    नागपुर PWD की रिपोर्ट ने Transfer और tenure की दूसरी तस्वीर सामने रखी है।

    सरकारी नियम के मुताबिक सामान्य तौर पर एक जगह तीन साल की tenure के बाद Transfer होना चाहिए और उससे आगे extension exceptional circumstances में ही होना चाहिए। लेकिन कुछ Junior Engineers के 8 से 10 साल तक एक ही जगह काम करने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में extension के लिए लिखित आदेश नहीं होने पर भी सवाल उठे हैं।

    यहीं प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा आता है—अगर tenure खत्म हो गया तो किसी कर्मचारी को उसी जगह बनाए रखने का आधार क्या था, और वह आधार किस लिखित आदेश में दर्ज है?

    BMC में राजनीतिक recommendations और PWD में tenure-extension एक ही मामला नहीं हैं। लेकिन दोनों घटनाएं एक ही बड़ी चिंता सामने लाती हैं: सरकारी Transfer-Posting में नियम कितना साफ है और उसका पालन कितना दिखाई देता है?

    BMC के सामने एक और बड़ा accountability test

    इसी समय Bombay High Court BMC की sanitation workers को housing देने की नीति पर भी लगातार जवाब मांग रहा है। 2008 की State Government policy के बावजूद करीब 18 साल में housing implementation नहीं होने पर Court ने BMC से उसके land resources की विस्तृत जानकारी मांगी है।

    BMC Commissioner के affidavit में करीब 4,176 leasehold properties, 3,505 tenanted properties/staff quarters, 3,668 vacant land tenancies, करीब 8,000 existing amenities और लगभग 6,000 public-purpose reservations का उल्लेख हुआ था। Court ने BMC की land pool को व्यापक रूप से examine करने और sanitation workers के लिए उपलब्ध land identify करने को कहा है।

    31 अगस्त की proceedings के बाद BMC को fresh comprehensive affidavit दाखिल करने के लिए 9 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। Court ने जरूरत पड़ने पर independent committee के जरिए land की स्थिति की जांच की संभावना भी रखी है।

    यह Transfer case का हिस्सा नहीं है, लेकिन BMC की broader administrative accountability पर चल रही judicial scrutiny को जरूर दिखाता है।

    अब असली कसौटी

    BMC के 225 recommendation letters हों, Engineers के लिए Randomisation System हो या PWD में tenure-extension का सवाल—मुद्दा किसी एक नेता, अधिकारी या कर्मचारी का नहीं है।

    मुद्दा यह है कि सरकारी पद पर Transfer-Posting का फैसला आखिर नियम करेगा या influence?

    BMC ने Randomisation के जरिए एक रास्ता जरूर चुना है। अब देखना यही है कि यह व्यवस्था सिर्फ Transfer order बनाने का नया software बनती है या वास्तव में ऐसी प्रक्रिया तैयार करती है जिसमें किसी की recommendation से ज्यादा महत्व नियम, tenure, vacancy और documented administrative decision का हो।