Category: Civic Issues

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  • करीना कपूर के पसंदीदा Royal China का लाइसेंस सस्पेंड, मुंबई में फफूंद और कीट मिलने का दावा

    करीना कपूर के पसंदीदा Royal China का लाइसेंस सस्पेंड, मुंबई में फफूंद और कीट मिलने का दावा

    करीना कपूर और सैफ अली खान से जुड़े मुंबई के Royal China रेस्टोरेंट पर खाद्य सुरक्षा कार्रवाई हुई। निरीक्षण में फफूंद, कीट और गलत स्टोरेज की खामियों का दावा है।

    मुंबई: मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित लोकप्रिय चाइनीज रेस्टोरेंट Royal China पर खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। 9 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, रेस्टोरेंट के निरीक्षण में फफूंद, फंगल ग्रोथ, कीटों की मौजूदगी और खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित तरीके से स्टोर नहीं करने जैसी गंभीर खामियां पाई गईं। इसके बाद रेस्टोरेंट का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए जाने और तत्काल प्रभाव से खाद्य पदार्थों की बिक्री, खरीद और वितरण रोकने का निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

    यह रेस्टोरेंट अपने Cantonese cuisine के लिए जाना जाता है। बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान और सैफ अली खान भी इससे जुड़े चर्चित ग्राहकों में शामिल हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई ने इस प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट को चर्चा में ला दिया है।

    निरीक्षण में क्या-क्या खामियां मिलीं?

    Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) द्वारा किए गए औचक निरीक्षण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट परिसर में फफूंद और फंगल ग्रोथ, गंभीर कीट संक्रमण और खाद्य पदार्थों के असुरक्षित भंडारण से जुड़ी समस्याएं सामने आईं।

    निरीक्षण से संबंधित वीडियो में खाने और आसपास की सतहों पर कीटों की गतिविधि के संकेत भी दिखाए गए। खाद्य पदार्थों के आसपास इस तरह की स्थिति स्वच्छता और भोजन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

    हालांकि, इन खामियों के सामने आने का मतलब यह नहीं है कि रेस्टोरेंट में परोसे गए हर व्यंजन के दूषित होने या किसी ग्राहक के बीमार पड़ने की पुष्टि हो गई है। इसके लिए अलग से प्रमाण और जांच के नतीजे जरूरी हैं।

    लाइसेंस सस्पेंड, खाद्य कारोबार रोकने का निर्देश

    खाद्य सुरक्षा से जुड़ी खामियों के बाद Royal China का FSSAI लाइसेंस सस्पेंड किए जाने की जानकारी दी गई है। साथ ही रेस्टोरेंट को तत्काल प्रभाव से खाद्य पदार्थों की बिक्री, खरीद और वितरण बंद करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

    लाइसेंस सस्पेंड होने और स्थायी रूप से रद्द होने में अंतर है। रेस्टोरेंट दोबारा कारोबार कब शुरू कर सकता है, यह संबंधित आदेश, सुधारात्मक कार्रवाई और खाद्य सुरक्षा विभाग की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल लाइसेंस बहाल होने या दोबारा निरीक्षण के बाद कारोबार शुरू करने की स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    करीना कपूर, सैफ अली खान और अनन्या पांडे से जुड़ा है नाम

    Royal China दक्षिण मुंबई का जाना-पहचाना रेस्टोरेंट है, जहां Cantonese और अन्य चाइनीज व्यंजन परोसे जाते हैं। करीना कपूर खान और सैफ अली खान के अलावा अभिनेत्री अनन्या पांडे भी इस रेस्टोरेंट से जुड़ी अपनी पसंद का जिक्र कर चुकी हैं।

    पिछले साल दिए गए एक इंटरव्यू में अनन्या पांडे ने बताया था कि वह कभी-कभी अपनी चीट नाइट्स पर Royal China से चिली चिकन मंगाती हैं। हालांकि, किसी सेलिब्रिटी का इस रेस्टोरेंट से जुड़ाव खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों या उनसे होने वाले किसी स्वास्थ्य नुकसान का प्रमाण नहीं है।

    मुंबई में रेस्टोरेंट की स्वच्छता पर बढ़ी निगरानी

    मुंबई और महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई का दायरा Royal China तक सीमित नहीं रहा है। सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में भी कई खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में स्वच्छता, कीट नियंत्रण, रेफ्रिजरेशन और खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण जैसी व्यवस्थाओं पर सवाल उठे थे।

    Royal China के मामले में अब महत्वपूर्ण यह होगा कि रेस्टोरेंट प्रबंधन खामियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और खाद्य सुरक्षा विभाग आगे क्या निर्णय लेता है। ग्राहकों के लिए भी यह मामला याद दिलाता है कि किसी रेस्टोरेंट की लोकप्रियता या ऊंची कीमतें अपने आप में सुरक्षित भोजन की गारंटी नहीं होतीं।

  • घाटकोपर मलजल शोधन परियोजना तेज, मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

    घाटकोपर मलजल शोधन परियोजना तेज, मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

    घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र का काम तेज किया गया है। 33.7 करोड़ लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले केंद्र को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    मुंबई: घाटकोपर पूर्व में बन रहे मलजल शोधन केंद्र का काम तय समय में पूरा करने के लिए महानगरपालिका ने निर्माण की रफ्तार बढ़ा दी है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (परियोजना) अभिजीत बांगर ने गुरुवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण, मशीनरी और बिजली से जुड़े कामों की समीक्षा की। परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और 1 अक्टूबर से करीब 1,000 कर्मचारी यहां काम कर रहे हैं।

    33.7 करोड़ लीटर प्रतिदिन मलजल का होगा शोधन

    घाटकोपर मलजल शोधन केंद्र की क्षमता प्रतिदिन 337 मिलियन लीटर यानी 33.7 करोड़ लीटर मलजल के शोधन की होगी। यहां क्रमिक जैविक शोधन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मलजल को बेहतर तरीके से साफ करने के साथ समुद्र और खाड़ी में जाने वाले उपचारित पानी की गुणवत्ता में सुधार करना है।

    नई व्यवस्था में पूरे 337 मिलियन लीटर मलजल का द्वितीय स्तर पर शोधन किया जाएगा। इसके अलावा करीब 170 मिलियन लीटर यानी 17 करोड़ लीटर पानी को तृतीय स्तर तक शोधन करने की योजना है। इस पानी का उपयोग पीने के अलावा अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।

    पुरानी व्यवस्था से क्या बदलेगा

    घाटकोपर क्षेत्र की मौजूदा मलजल व्यवस्था में पानी को मुख्य रूप से शुरुआती स्तर पर साफ करने के बाद खाड़ी की ओर छोड़ा जाता है। नई परियोजना के पूरा होने पर शोधन की प्रक्रिया अधिक उन्नत होगी। इससे उपचारित पानी की गुणवत्ता बेहतर होने और खाड़ी तथा समुद्री पर्यावरण पर मलजल के प्रभाव को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना का लाभ घाटकोपर के साथ मानखुर्द, गोवंडी और चेंबूर क्षेत्र को भी मिलेगा। हालांकि इसका सीधा उद्देश्य पेयजल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मलजल के बेहतर शोधन और उपचारित पानी के गैर-पेय उपयोग को बढ़ाना है।

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    दिसंबर तक जलवाहिनी, मार्च में पूरी परियोजना

    परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जलवाहिनी का काम 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद पूरी मलजल शोधन परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने की समयसीमा रखी गई है।

    परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है। 1 अक्टूबर 2026 से करीब 1,000 कर्मचारी निर्माण स्थल पर काम कर रहे हैं। अभिजीत बांगर ने निर्देश दिया कि परियोजना पूरी होने तक अतिरिक्त कार्यबल की व्यवस्था जारी रखी जाए।

    पंपिंग केंद्र भी महत्वपूर्ण कड़ी

    मलजल शोधन केंद्र के साथ घाटकोपर मलजल आगमन पंपिंग केंद्र के उन्नयन का काम भी जुड़ा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मलजल को शोधन केंद्र तक प्रभावी तरीके से पहुंचाना है। पंपिंग व्यवस्था और शोधन केंद्र के काम समय पर पूरे होना पूरी परियोजना के संचालन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण से लेकर बिजली व्यवस्था तक समीक्षा

    निरीक्षण के दौरान अभिजीत बांगर ने शोधन प्रक्रिया के लिए बनाई जा रही टंकियों, पानी के आने-जाने की व्यवस्था, पंप गृह, गाद शोधन इकाई और आंतरिक पाइपलाइन के काम की समीक्षा की। उन्होंने पंप, वायु आपूर्ति यंत्र, छनाई व्यवस्था, गाद शोधन उपकरण और अन्य मशीनरी की स्थापना का भी जायजा लिया।

    बिजली से जुड़े कामों में विद्युत पट्ट, तार व्यवस्था, मोटरों को बिजली आपूर्ति, नियंत्रण एवं स्वचालन व्यवस्था, निगरानी और नियंत्रण प्रणाली तथा वैकल्पिक बिजली व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

    बांगर ने अधिकारियों को सभी काम समानांतर रूप से तेज गति से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता, कर्मचारियों की सुरक्षा और काम की कार्यक्षमता को प्राथमिकता देने को कहा।

    मुंबई की बड़ी मलजल योजना का हिस्सा

    घाटकोपर केंद्र मुंबई में बनाए जा रहे सात बड़े मलजल शोधन केंद्रों की व्यापक योजना का हिस्सा है। इन परियोजनाओं की कुल प्रस्तावित शोधन क्षमता 2,464 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इसका उद्देश्य शहर से निकलने वाले मलजल को निर्धारित मानकों के अनुसार उपचारित करना, समुद्री जल की गुणवत्ता सुधारना और उपचारित पानी के पुन: उपयोग की संभावनाएं बढ़ाना है।

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    घाटकोपर परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन 33.7 करोड़ लीटर मलजल के शोधन की क्षमता विकसित होगी। फिलहाल महानगरपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण, जलवाहिनी, मशीनरी और विद्युत प्रणालियों के सभी काम पूरे कर केंद्र को संचालन के लिए तैयार करना है।

    निरीक्षण के दौरान उप आयुक्त (अभियांत्रिकी) शशांक भोरे, प्रमुख अभियंता (मुंबई मलनि:सारण परियोजना) राजेंद्र परब और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

  • मालवणी, मालाड पश्चिम के आपला दवाखाना में डिजिटल भुगतान की तैयारी

    मालवणी, मालाड पश्चिम के आपला दवाखाना में डिजिटल भुगतान की तैयारी

    मालवणी, मालाड पश्चिम के महानगरपालिका स्वास्थ्य केंद्रों और आपला दवाखाना में डिजिटल भुगतान सुविधा देने के निर्देश, माता-बाल स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा।

    मुंबई: मालवणी, मालाड पश्चिम के महानगरपालिका स्वास्थ्य केंद्रों और हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना में मरीजों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने 8 अक्टूबर को मालवणी और मालाड पश्चिम क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र तथा आंगनवाड़ी का निरीक्षण करते हुए भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने के निर्देश दिए।

    मालवणी-2 स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण व्यवस्था की समीक्षा

    मालवणी-2 स्थित नागरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के दौरान प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने मरीजों के पंजीकरण की व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली के कामकाज की जानकारी ली। मरीजों का पंजीकरण आसान बनाने के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

    इसके साथ ही महानगरपालिका के दवाखानों में भुगतान मशीनें उपलब्ध कराने और मरीजों को डिजिटल भुगतान का विकल्प देने को कहा गया।

    आपला दवाखाना में भी डिजिटल भुगतान

    हिंदुहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। यहां मरीजों के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। सभी दवाखानों और आपला दवाखाना में भुगतान मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

    माता और बच्चों के स्वास्थ्य पर जोर

    निरीक्षण के दौरान माता और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण सेवाओं की भी समीक्षा की गई। गर्भधारण से पहले के समय से लेकर बच्चे के दो वर्ष की आयु तक माता और बच्चे के पोषण, स्वास्थ्य, वृद्धि और विकास पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

    आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से चलाए जा रहे माता-बाल स्वास्थ्य, पोषण और बीमारी की रोकथाम से जुड़े काम की भी जानकारी ली गई। बरसात में होने वाली बीमारियों, संक्रामक रोगों और क्षय रोग की रोकथाम के लिए किए जा रहे क्षेत्रीय कार्यों की भी समीक्षा की गई।

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    मालवणी आंगनवाड़ी निरीक्षण के दौरान की तस्वीर

    आंगनवाड़ी में पोषण आहार की जांच

    मालाड पश्चिम के मार्वे रोड, कच्चा रोड स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की व्यवस्था देखी गई। दैनिक आहार, मासिक पोषण आहार वितरण और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड की जानकारी ली गई।

    बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी दर्ज करने और निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा रही सरकारी व्यवस्था के कामकाज की भी समीक्षा की गई।

    बोरीवली के बाल उपचार केंद्र की सराहना

    बोरीवली पूर्व स्थित महानगरपालिका के कॉम्प्रिहेन्सिव थैलेसीमिया केयर, बाल रक्त रोग, कैंसर और अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण केंद्र का भी निरीक्षण किया गया। प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने केंद्र के काम की सराहना की।

    केंद्र में उपचार से कई बच्चों को सामान्य जीवन जीने में मदद मिली है। अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण से थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों के पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद मजबूत हुई है। केंद्र की सेवाओं और कार्यप्रणाली को उल्लेखनीय बताया गया।

    निरीक्षण के दौरान पी उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वलवी, पी पूर्व विभाग की सहायक आयुक्त रूपाली सरमलकर, उप कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वर्षा पुरी, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।

  • विद्याविहार फ्लाईओवर तैयार, 10 अक्टूबर तक ट्रैफिक के लिए रेडी

    विद्याविहार फ्लाईओवर तैयार, 10 अक्टूबर तक ट्रैफिक के लिए रेडी

    विद्याविहार ईस्ट-वेस्ट फ्लाईओवर का मुख्य काम पूरा हो गया है। Noise Barrier समेत अंतिम काम जारी हैं और 10 अक्टूबर तक ट्रैफिक के लिए तैयार होने की उम्मीद है।

    मुंबई: विद्याविहार इलाके में ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी को बेहतर करने वाले फ्लाईओवर का मुख्य काम पूरा हो गया है। रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग को लालबहादूर शास्त्री मार्ग से जोड़ने वाले इस फ्लाईओवर पर अब Noise Barrier समेत कुछ अंतिम काम चल रहे हैं। BMC की तैयारी के अनुसार 10 अक्टूबर 2026 तक फ्लाईओवर को ट्रैफिक के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

    अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रकल्प) अभिजीत बांगर ने ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों के साथ प्रोजेक्ट साइट का निरीक्षण किया। इस दौरान फ्लाईओवर, दोनों तरफ के Approach Road, आसपास के जंक्शन, Signals और पैदल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया। फ्लाईओवर शुरू होने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए BMC और ट्रैफिक पुलिस को समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

    Noise Barrier का काम अंतिम चरण में

    फ्लाईओवर का मुख्य सिविल वर्क पूरा हो चुका है। रंगकाम, सड़क, लाइटिंग और दूसरी जरूरी finishing का काम भी पूरा किया जा चुका है। अब नागरिकों की सुरक्षा और आसपास के इलाके में शोर को नियंत्रित करने के लिहाज से जरूरी Noise Barrier लगाने का काम अंतिम चरण में है।

    इसके अलावा फ्लाईओवर के आसपास जरूरत के अनुसार दिशादर्शक फलक, Barricading और Traffic Regulation की व्यवस्था की जाएगी। पीक ऑवर में Approach Road पर जाम की स्थिति न बने, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ अलग से planning की जा रही है।

    30-45 मिनट की यात्रा घटकर 10-15 मिनट होने की उम्मीद

    विद्याविहार में रेलवे लाइन के कारण पूर्व और पश्चिम के बीच सीधा सड़क संपर्क नहीं होने से वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है। Peak Hour में इस वजह से यात्रा में करीब 30 से 45 मिनट तक लगने की स्थिति सामने आती रही है।

    नया फ्लाईओवर शुरू होने के बाद यह सफर करीब 10 से 15 मिनट तक आने की उम्मीद है। इसका सीधा फायदा विद्याविहार के साथ घाटकोपर और कुर्ला क्षेत्र के वाहन चालकों को मिल सकता है।

    हालांकि फ्लाईओवर शुरू होने के बाद ट्रैफिक पूरी तरह खत्म हो जाएगा, ऐसा कहा नहीं जा सकता। असली असर दोनों तरफ के Approach Road और प्रमुख जंक्शन पर ट्रैफिक के दबाव पर निर्भर करेगा। इसी वजह से BMC ने Signals, वाहन वर्दळ, पैदल यातायात और Peak Hour Traffic को ध्यान में रखकर व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

    करीब 650 मीटर का ईस्ट-वेस्ट कनेक्टर

    रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग और लालबहादूर शास्त्री मार्ग को जोड़ने वाला यह फ्लाईओवर करीब 650 मीटर लंबा है। इसमें रेलवे ट्रैक के ऊपर लगभग 100 मीटर का हिस्सा है, जबकि पूर्व दिशा में करीब 220 मीटर और पश्चिम दिशा में करीब 330 मीटर के Approach Road तैयार किए गए हैं।

    रेलवे ट्रैक के ऊपर लगाए गए बड़े Steel Girder इस प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके जरिए रेलवे लाइन के ऊपर सड़क संपर्क तैयार किया गया है।

    स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों को भी फायदा

    यह प्रोजेक्ट सिर्फ वाहन चालकों के लिए नहीं है। फ्लाईओवर से विद्याविहार रेलवे स्टेशन के पैदल मार्गों तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है।

    प्रोजेक्ट के दौरान दोनों तरफ के टिकट खिड़की कक्ष, स्टेशन मास्टर कार्यालय और सीढ़ियों का पुनर्निर्माण किया गया है। रेलवे हद्द में सीढ़ियों के जरिए पैदल मार्ग को आसपास के उपरस्ते से जोड़ने की सुविधा भी तैयार की गई है।

    इससे स्टेशन के आसपास पैदल चलने वाले यात्रियों की कनेक्टिविटी में भी सुधार होने की उम्मीद है।

    1991 में प्रस्तावित हुआ था प्रोजेक्ट

    विद्याविहार ईस्ट-वेस्ट कनेक्टर की कहानी नई नहीं है। यह प्रोजेक्ट 1991 में प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद कई वर्षों तक इसकी योजना, टेंडर और जमीन से जुड़ी प्रक्रियाएं चलती रहीं। निर्माण का काम शुरू होने के बाद भी डिजाइन बदलाव, कोविड-19, रेलवे से जुड़े काम, प्रभावित संरचनाओं के पुनर्वास, सड़क चौड़ीकरण और दूसरी तकनीकी बाधाओं के कारण समयसीमा आगे बढ़ती रही।

    यानी करीब 35 साल पहले प्रस्तावित हुआ यह कनेक्टर अब जाकर ट्रैफिक शुरू होने के अंतिम चरण में पहुंचा है।

    प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ी

    प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत करीब 99.98 करोड़ रुपये बताई गई थी। बाद में अलग-अलग बदलाव और अतिरिक्त कामों के कारण इसकी रिपोर्टेड लागत बढ़कर करीब 178.93 करोड़ रुपये तक पहुंची।

    लंबे समय से चल रहे इस प्रोजेक्ट में अब मुख्य निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अंतिम तैयारी पर फोकस है।

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    बीएमसी अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण की तस्वीर

    ट्रैफिक पुलिस के साथ होगा अंतिम प्लान

    पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक-पूर्व विभाग) प्रदीप चव्हाण, महानगरपालिका के मुख्य अभियंता (पूल) राजेश मुळे, उपप्रमुख अभियंता (पूल) नरेश मेघराजानी और संबंधित अधिकारी निरीक्षण के दौरान मौजूद थे।

    अभिजीत बांगर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फ्लाईओवर शुरू होने के बाद वाहन और पैदल यातायात दोनों सुरक्षित रहें। जरूरत के अनुसार दिशादर्शक फलक, Barricading और ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था की जाए। खास तौर पर अधिक भीड़ वाले समय में फ्लाईओवर के Approach Road पर Traffic Congestion नहीं बढ़े, इसके लिए पहले से planning करने पर जोर दिया गया है।

    अब फ्लाईओवर के लिए मुख्य निर्माण चरण लगभग पूरा हो चुका है। Noise Barrier और दूसरी अंतिम व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण इसे सुरक्षित तरीके से ट्रैफिक के लिए शुरू करना होगा।

  • मुंबई में 94% पानी भरा, फिर भी 10% कटौती क्यों? मेयर रितू तावडे ने लिया बड़ा जायजा

    मुंबई में 94% पानी भरा, फिर भी 10% कटौती क्यों? मेयर रितू तावडे ने लिया बड़ा जायजा

    मुंबई के सात जलाशयों में 94.24% पानी होने के बावजूद 10% कटौती जारी है। मेयर रितू तावडे ने जलाशयों और 455 MLD पिसे परियोजना का निरीक्षण किया।

    मुंबई: इस समय शहर के सातों जलाशयों में 94.24 फीसदी पानी उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद 10 फीसदी पानी कटौती जारी है। इसी बीच मुंबई की मेयर रितू तावडे ने गुरुवार को महानगरपालिका के पदाधिकारियों, स्थायी समिति के सदस्यों और अधिकारियों के साथ शहर को पानी पहुंचाने वाले प्रमुख जलस्रोतों और परियोजनाओं का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान पानी के भंडार, आपूर्ति व्यवस्था, पुरानी व्यवस्था की स्थिति और आने वाले वर्षों की जरूरतों को लेकर विस्तृत जानकारी ली गई।

    इस दौरे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मुंबई में इस साल जून के दौरान पानी की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। उस समय सातों जलाशयों में पानी का भंडार 7 फीसदी से भी नीचे पहुंच गया था। मानसून के बाद स्थिति तेजी से बदली और सितंबर के अंत तक जलाशयों में पानी 96 फीसदी से ज्यादा हो गया। इसके बावजूद महानगरपालिका ने 10 फीसदी कटौती अभी तक वापस नहीं ली है।

    जलाशय भरे हैं तो पानी कटौती क्यों जारी है?

    मुंबईकरों के लिए इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जलाशयों में 94 फीसदी से ज्यादा पानी है, तो फिर पानी की कटौती क्यों जारी है?

    इसका जवाब केवल जलाशयों में मौजूद पानी की मात्रा से नहीं मिलता। महानगरपालिका को पूरे साल की जरूरत, अगले मानसून तक पानी की उपलब्धता, शहर में पानी के वितरण, पुराने पाइप और पंपिंग सिस्टम तथा पानी की बर्बादी को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

    यानी जलाशय भरने का मतलब यह नहीं है कि मुंबई में अगले ही दिन सामान्य आपूर्ति बहाल की जा सकती है। पानी को जलाशय से निकालकर पंप करना, उसका शुद्धिकरण करना और फिर शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    पिसे में 455 MLD की नई पंपिंग व्यवस्था

    मेयर रितू तावडे के निरीक्षण में पिसे की 455 MLD क्षमता वाली नई पंपिंग परियोजना महत्वपूर्ण रही। इसके साथ भातसा नदी पर नए पिकअप वियर और गेट की व्यवस्था भी बनाई जा रही है। परियोजना का करीब 60 फीसदी काम पूरा बताया गया है।

    यह समझना जरूरी है कि 455 MLD का मतलब मुंबई की मौजूदा पानी आपूर्ति में सीधे 455 MLD की बढ़ोतरी नहीं है। इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य मौजूदा पंपिंग व्यवस्था को बैकअप देना है।

    पिसे की मौजूदा व्यवस्था का कुछ हिस्सा कई दशक पुराना है। ऐसे में किसी पंप की मरम्मत, रखरखाव या तकनीकी खराबी के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। नई पंपिंग सुविधा इसी तरह मुंबई की पानी आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद कर सकती है।

    पिसे-पांजरापूर के बीच बनेगी करीब 8 किलोमीटर की भूमिगत सुरंग

    मुंबई की पानी आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विकास पिसे और पांजरापूर के बीच करीब 8 किलोमीटर लंबी भूमिगत पानी की सुरंग है। महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर में महानगरपालिका की इस योजना को मंजूरी दी थी।

    फिलहाल पिसे से पांजरापूर के बीच चार बड़ी पाइपलाइनों के जरिए करीब 2,020 MLD पानी आगे भेजा जाता है। इनमें सबसे पुरानी पाइपलाइन 1979 में शुरू हुई थी। इसके बाद 1986, 1996 और 2007 में अन्य पाइपलाइनें शुरू की गईं। यानी सबसे पुरानी पाइपलाइन अब करीब 47 साल पुरानी हो चुकी है।

    पुरानी पाइपलाइनों पर बढ़ता दबाव, मौजूदा व्यवस्था की सीमाएं और भविष्य में मुंबई की बढ़ने वाली पानी की जरूरत को देखते हुए भूमिगत सुरंग की योजना तैयार की गई है।

    हालांकि यह सुरंग अभी तैयार नहीं हुई है। इसके लिए आगे भूगर्भीय जांच और जरूरी पर्यावरण तथा अन्य मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    पांजरापूर में पानी साफ करने की क्षमता भी बढ़ेगी

    पिसे से पहुंचने वाले पानी की पूरी व्यवस्था में पांजरापूर की अहम भूमिका है। यहां करीब 1,450 MLD पानी का शुद्धिकरण यवई क्षेत्र में किया जाता है। इसके बाद पानी मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है।

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    पांजरापूर में 910 MLD क्षमता का नया जल शुद्धिकरण संयंत्र भी विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 3,145 करोड़ रुपये का ठेका दिया जा चुका है।

    दूसरी तरफ भांडुप में 2,000 MLD क्षमता वाला नया जल शुद्धिकरण संयंत्र भी मुंबई की भविष्य की पानी जरूरतों को पूरा करने की योजना का हिस्सा है। इसका लक्ष्य 2028 तक पूरा करने का रखा गया है।

    मुंबई की पानी की जरूरत लगातार बढ़ रही है

    मुंबई की मौजूदा पानी की जरूरत करीब 4,665 MLD मानी जाती है, जबकि आपूर्ति लगभग 4,100 MLD के आसपास है। यानी मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच करीब 565 MLD का अंतर है।

    आने वाले वर्षों में यह दबाव और बढ़ने वाला है। 2041 तक मुंबई की पानी की जरूरत करीब 6,424 MLD तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में केवल मौजूदा सात जलाशयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

    इसी वजह से मुंबई के लिए नए जलस्रोत और नई आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने पर भी काम चल रहा है। गारगई परियोजना से करीब 440 MLD अतिरिक्त पानी मिलने की योजना है। वहीं मनोरी में 200 MLD क्षमता वाला समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने का संयंत्र प्रस्तावित है। मनोरी से मुंबई के पश्चिमी हिस्से तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 7.2 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग की योजना भी आगे बढ़ रही है।

    इस साल पानी की स्थिति में आया बड़ा बदलाव

    मुंबई में इस साल पानी की स्थिति काफी तेजी से बदली है। जून में मानसून कमजोर रहने के कारण सात जलाशयों में पानी का भंडार 7 फीसदी से भी नीचे चला गया था। उस समय पानी की कमी को देखते हुए शहर में कटौती और पानी बचाने पर जोर दिया गया।

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    इसके बाद मानसून में अच्छी बारिश होने से जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ा। सितंबर के अंत तक सातों जलाशयों में पानी 96.54 फीसदी तक पहुंच गया था। 8 अक्टूबर को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह स्तर करीब 94.24 फीसदी है।

    इसके बावजूद महानगरपालिका ने अभी 10 फीसदी कटौती समाप्त नहीं की है। इसका कारण यह है कि केवल मौजूदा पानी देखकर फैसला लेने के बजाय पूरे साल की जरूरत और अगले मानसून तक उपलब्धता को ध्यान में रखना पड़ता है।

    निरीक्षण में कौन-कौन मौजूद रहे?

    मेयर रितू तावडे के साथ सभागृह नेता गणेश खणकर, विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर, स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे, शिक्षा समिति अध्यक्ष राजेश्री शिरवडकर, कांग्रेस के गुटनेता अशरफ आजमी, एआईएमआईएम के गुटनेता विजय उबाले, समाजवादी पार्टी की गुटनेता अमरीन अब्रहानी, सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष हरिष भांदिर्गे मौजूद रहे।

    इसके अलावा स्थायी समिति सदस्य श्रद्धा जाधव, जमीर कुरैशी, डॉ. सईदा खान, प्रीती सातम, शिवकुमार झा, तेजिंदर तिवाना, प्रकाश दरेकर, मीनाक्षी पाटणकर, दीपमाला बढ़े, लक्ष्मी भाटिया, ट्यूलिप मिरांडा और अजंता यादव भी निरीक्षण में शामिल रहे।

    महानगरपालिका की ओर से उप आयुक्त (विशेष इंजीनियरिंग) पुरुषोत्तम मालवदे, जल अभियंता मंगेश शेवाले और प्रमुख अभियंता (पानी आपूर्ति परियोजना) दिलीप पाटील सहित संबंधित अधिकारी और इंजीनियर मौजूद थे।

    अब मुंबईकरों को किस बात का इंतजार?

    फिलहाल मुंबई के सामने दो अलग-अलग तस्वीरें हैं। एक तरफ जलाशयों में 94 फीसदी से ज्यादा पानी है, जबकि दूसरी तरफ 10 फीसदी पानी कटौती जारी है। इसका मतलब साफ है कि महानगरपालिका की चुनौती केवल पानी जमा करने की नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से शहर तक पहुंचाने की भी है।

    पिसे की नई 455 MLD पंपिंग व्यवस्था, पिसे-पांजरापूर की प्रस्तावित भूमिगत सुरंग, पांजरापूर और भांडुप की नई शुद्धिकरण क्षमता तथा गारगई और मनोरी जैसी भविष्य की परियोजनाएं मुंबई की लंबी अवधि की पानी सुरक्षा से जुड़ी हैं।

    अब नजर इस बात पर रहेगी कि जलाशयों में मौजूदा स्तर को देखते हुए महानगरपालिका 10 फीसदी पानी कटौती पर कब फैसला करती है और पिसे-पांजरापूर सहित दूसरी परियोजनाएं कब तक जमीन पर पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू करती हैं।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR विवाद के बीच 2.07 करोड़ मतदाताओं पर नजर

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई-दिल्ली में प्रदर्शन, SIR को लेकर विवाद तेज। महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम और 12 अक्टूबर की समयसीमा जानिए।

    मुंबई: मुंबई और दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुए। मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ का आह्वान किया, जबकि दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। विरोध का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर है। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया के तहत करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हुए हैं, हालांकि यह संख्या अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की नहीं है।

    मुंबई में शिवाजी पार्क के बाहर कड़ी सुरक्षा

    मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद सीजेपी ने शुक्रवार शाम 4 बजे शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास आंदोलन करने का ऐलान किया। पुलिस ने शिवाजी पार्क में सभा से जुड़े न्यायिक निर्देश, आवश्यक स्थानीय अनुमति, यातायात, शोर और आसपास के अस्पतालों तक पहुंच जैसे कारणों का हवाला दिया है। प्रदर्शन को देखते हुए शिवाजी पार्क और दादर रेलवे स्टेशन के आसपास बैरिकेडिंग तथा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।

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    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन को देशव्यापी अभियान की शुरुआत बताया है। उनके साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका भी अभियान में सक्रिय हैं। सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाकर चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा नागरिक समाज की भागीदारी की मांग रखी है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की है।

    अभिजीत दीपके को लेकर हिरासत की खबर पर भी स्थिति स्पष्ट हुई। एक दिन पहले मरीन ड्राइव के पास उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी, लेकिन सीजेपी ने इसका खंडन किया और दीपके ने कार के भीतर से अपनी तस्वीर साझा की।

    शिवाजी पार्क में स्थानीय लोगों की आपत्ति

    प्रदर्शन को लेकर दादर के कुछ स्थानीय निवासियों ने भी आपत्ति जताई है। सुनील भगवत ने कहा कि शिवाजी पार्क में लगातार प्रदर्शनों से आम लोगों की परेशानी बढ़ती है। स्थानीय निवासी रविंद्र ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान भीड़, यातायात और आसपास के स्कूलों तथा अस्पताल पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया। ये स्थानीय निवासियों की आपत्तियां हैं और इन्हें पूरे इलाके की सामूहिक राय के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत

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    दिल्ली में जंतर-मंतर के पास एसएफआई और डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। एएपी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। बाद की जानकारी में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या 500 से अधिक बताई गई। आरजेडी सांसद मनोज झा भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल बताए गए हैं।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की गई। इसके तहत बिना लिखित अनुमति के सभा, जुलूस, प्रदर्शन, धरना, नारेबाजी और भाषण पर प्रतिबंध लगाया गया। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस तथा सुरक्षा बल तैनात किए गए और कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई।

    एसआईआर विवाद के केंद्र में महाराष्ट्र के 2.07 करोड़ मतदाता

    महाराष्ट्र में एसआईआर के कारण मतदाता सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल 2.07 करोड़ नामों का है। राज्य में एसआईआर से पहले करीब 9.79 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम शामिल हुए। लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके नाम प्रारूप सूची में नहीं आए।

    हालांकि, 2.07 करोड़ का आंकड़ा अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं है। पात्र मतदाता दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम शामिल करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने ऐसे छूटे हुए पात्र मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं।

    1.22 करोड़ मतदाताओं का मामला क्या है?

    महाराष्ट्र में करीब 1.22 करोड़ मतदाता ऐसे भी हैं जिन्हें उनके पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े विवरण में विसंगति या मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस प्रक्रिया में चिन्हित किया गया है। इनमें करीब 62.48 लाख मामले ऐसे हैं जिनमें पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदारों की जानकारी को लेकर तार्किक विसंगति बताई गई, जबकि करीब 59.76 लाख मतदाता पुराने रिकॉर्ड में रिश्तेदार से मैप नहीं हो सके।

    यह आंकड़ा 2.07 करोड़ से अलग है। इसलिए 1.22 करोड़ और 2.07 करोड़ को जोड़कर या दोनों को ‘हटाए गए मतदाता’ बताकर देखना सही नहीं होगा।

    नोटिस मिला है तो क्या करना होगा?

    एसआईआर प्रक्रिया में ‘नो मैपिंग’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने प्रक्रिया आसान की है। अब सामान्य स्थिति में ऐसे मतदाता को हर मामले में व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन कार्यालय जाकर सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी नहीं है।

    बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकता है और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड किया जा सकता है। कुछ मामलों में जरूरत पड़ने पर सुनवाई ऑनलाइन भी की जा सकती है और परिवार का कोई वयस्क सदस्य मतदाता की ओर से उपस्थित हो सकता है।

    चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर एसआईआर 2026 के लिए नाम खोजने, प्रारूप मतदाता सूची देखने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और बीएलओ से संपर्क करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पात्र व्यक्ति लगातार चलने वाली मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास आवेदन भी कर सकते हैं।

    महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक दावा-आपत्ति

    महाराष्ट्र में एसआईआर से संबंधित दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक रखी गई है और संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जानी है।

    इसका मतलब है कि प्रारूप सूची में नाम नहीं मिलने या एसआईआर नोटिस मिलने वाले मतदाताओं के लिए अभी प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। चुनाव आयोग की व्यवस्था के अनुसार ऐसे मामलों में दावा, आपत्ति और दस्तावेज जमा करने का अवसर उपलब्ध है।

    ईसीआई के भीतर कथित मतभेद पर भी विवाद

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का एक कारण चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल भी हैं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से करीब 10 महीने में कम से कम 14 अवसरों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।

    इनमें मतदाता सूची, नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनाव आयोग की तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषय शामिल बताए गए। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर सहित उसके महत्वपूर्ण फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए।

    मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। याचिका में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और एसआईआर को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में उठाई गई मांगों को अभी न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

    4 अक्टूबर को मुंबई में फिर बड़ा मार्च

    2 अक्टूबर के आंदोलन के बाद महाराष्ट्र में विरोध का अगला बड़ा कार्यक्रम 4 अक्टूबर को प्रस्तावित है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के संयुक्त मार्च में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) भी शामिल होने की घोषणा कर चुकी हैं।

    मार्च भायखला से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय तक जाने का कार्यक्रम है। कांग्रेस की ओर से नाना पटोले और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की ओर से सुप्रिया सुले ने भागीदारी की पुष्टि की है।

    आगे क्या होगा?

    मुंबई में सीजेपी ने आंदोलन को गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों तक ले जाने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। दूसरी ओर विपक्षी दलों ने भी एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अलग-अलग कार्यक्रमों की घोषणा की है।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। एक तरफ ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध देश के कई हिस्सों में फैल रहा है, वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र के लाखों मतदाताओं के लिए एसआईआर प्रक्रिया में अपने नाम और दस्तावेज की स्थिति जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर की दावा-आपत्ति समयसीमा और 16 नवंबर की प्रस्तावित अंतिम मतदाता सूची अब इस विवाद का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है।

  • CJP का 2 अक्टूबर मुंबई प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा क्या हैं मांगें?

    CJP का 2 अक्टूबर मुंबई प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा क्या हैं मांगें?

    CJP के 2 अक्टूबर मुंबई प्रदर्शन से पहले जानिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR, 2025 की मतदाता सूची और चुनाव आयोग सुधार से जुड़ी पूरी मांगें।

    मुंबई: 2 अक्टूबर को मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कई अन्य मांगें भी सामने आई हैं। अभिजीत दिपके के नेतृत्व में होने वाला यह प्रदर्शन शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 पर शाम 4 बजे शुरू करने की घोषणा की गई है। मुंबई पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP ने आंदोलन जारी रखने और जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन करने की बात कही है।

    इस आंदोलन का केंद्र सिर्फ ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं है। CJP ने एसआईआर को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने, चुनाव आयोग से जुड़े 2023 के कानून को बदलने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र व पारदर्शी व्यवस्था बनाने जैसी मांगें भी रखी हैं।

    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ आपराधिक जांच की मांग

    CJP की पहली प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। इसके साथ संगठन ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कथित फैसलों के संबंध में यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आदेश किस स्तर से दिए गए थे।

    CJP ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची से जुड़ी केंद्रीकृत प्रक्रिया और एसआईआर के दौरान लिए गए फैसलों पर स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों की जांच ऐसी स्वतंत्र संस्था से होनी चाहिए जिस पर लोगों का भरोसा हो।

    एसआईआर रोकने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग

    CJP की दूसरी बड़ी मांग विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को तत्काल रोकने की है। संगठन जनवरी 2025 की मतदाता सूची को फिर से आधार बनाने और आगामी चुनावों को फिलहाल रोकने की मांग कर रहा है।

    इसके अलावा एसआईआर से जुड़े फैसलों और कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। CJP ने एसआईआर से संबंधित फाइलों और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने तथा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की भी मांग उठाई है।

    महाराष्ट्र में एसआईआर को लेकर क्या स्थिति है?

    महाराष्ट्र में एसआईआर के कारण यह विवाद आम मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। 31 अगस्त को जारी प्रारूप मतदाता सूची में करीब 7.72 करोड़ नाम शामिल हुए थे, जबकि एसआईआर से पहले महाराष्ट्र में करीब 9.79 करोड़ मतदाता थे। लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के गणना प्रपत्र उस चरण में उपलब्ध नहीं हो सके थे।

    हालांकि 2.07 करोड़ का आंकड़ा अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की संख्या नहीं है। इन मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति की प्रक्रिया उपलब्ध है। इसके अलावा करीब 1.22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां चिन्हित की गई हैं, जिनमें पिछले रिकॉर्ड से जानकारी का मेल नहीं होना या संबंधित व्यक्ति से रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाना शामिल है।

    महाराष्ट्र में दावा और आपत्ति की तारीख बढ़ी

    एसआईआर को लेकर महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि दावा और आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। नोटिस, दावे और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर तक चलेगी और अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।

    नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए भी प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ जैसे कारणों से नोटिस पाने वाले मतदाताओं से दस्तावेज लेने के लिए बूथ लेवल अधिकारी घर जा सकते हैं। ऐसे मामलों में मतदाता को केवल दस्तावेज जमा करने के लिए अनिवार्य रूप से चुनाव कार्यालय पहुंचने की जरूरत नहीं होगी।

    2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून में बदलाव की मांग

    CJP की तीसरी प्रमुख मांग चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को खत्म करने की है। संगठन इसके स्थान पर ऐसी नई व्यवस्था चाहता है जिसमें चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया अधिक स्वतंत्र और पारदर्शी हो तथा नागरिक समाज की भागीदारी हो।

    मौजूदा कानून का आधिकारिक नाम ‘Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023’ है। CJP इसी नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव को चुनाव आयोग के व्यापक सुधार से जोड़ रही है।

    ईसीआई के भीतर मतभेदों की खबर के बाद विवाद क्यों बढ़ा?

    चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब आयोग के भीतर एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर मतभेदों की जानकारी सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

    दूसरी ओर चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि एसआईआर सहित आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। इसलिए इन आपत्तियों को आयोग के कामकाज में किसी अंतिम रूप से सिद्ध टूट के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता।

    एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी किए बदलाव

    विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने की घोषणा की है। इसमें एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी के साथ स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ को शामिल किया जाना है।

    आयोग ने यह भी कहा है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलती हैं, उनके दस्तावेज लेने के लिए स्थानीय अधिकारी जरूरत पड़ने पर उनके घर जा सकते हैं। इसका उद्देश्य ऐसे मतदाताओं पर कार्यालयों में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने का बोझ कम करना है।

    फॉर्म 6 में एसआईआर से जुड़ी घोषणा भी बदली

    30 सितंबर को एसआईआर से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया। जिन राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां ईसीआई के ईसीआईनेट पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़ी गई अतिरिक्त एसआईआर घोषणा हटा दी गई। जिन राज्यों में एसआईआर अभी जारी है, वहां यह घोषणा दिखाई दे रही थी।

    यह बदलाव उस समय सामने आया जब फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे थे।

    मुंबई में प्रदर्शन को पुलिस की अनुमति नहीं

    2 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए CJP ने शिवाजी पार्क को स्थान चुना है, लेकिन मुंबई पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। पुलिस की ओर से शिवाजी पार्क में सभा से जुड़े नियमों, 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश, यातायात, शोर और आसपास के अस्पतालों तक आपातकालीन आवाजाही जैसे मुद्दों का हवाला दिया गया है।

    इसके बावजूद CJP ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है। संगठन ने पहले ही कहा है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में मुंबई में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।

    CJP ने प्रदर्शन का स्थान भी स्पष्ट किया

    2 अक्टूबर को मुंबई के अलावा अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन की खबरों के बीच CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने स्पष्ट किया कि 2 अक्टूबर का निर्धारित प्रदर्शन केवल मुंबई के शिवाजी पार्क में होगा। दूसरे शहरों में आंदोलन की जानकारी बाद में घोषित करने की बात कही गई है।

    CJP के आंदोलन में अभिजीत दिपके के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका भी प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। CJP के राष्ट्रीय संगठन में दिपके राष्ट्रीय संयोजक, जबकि दास और रांका सह-संयोजक की भूमिका में हैं।

    2 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

    CJP ने 2 अक्टूबर के मुंबई प्रदर्शन को व्यापक आंदोलन की शुरुआत बताया है। संगठन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है और आगे गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों में प्रदर्शन की योजना बताई है।

    मुंबई में 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अलग मार्च की भी घोषणा हो चुकी है। इस तरह 2 अक्टूबर का CJP प्रदर्शन और 4 अक्टूबर का ठाकरे गुटों का मार्च अलग-अलग कार्यक्रम हैं, हालांकि दोनों में एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे साझा हैं।

    महाराष्ट्र के मतदाताओं के लिए फिलहाल सबसे अहम तारीख 12 अक्टूबर है, जब तक एसआईआर की प्रारूप मतदाता सूची पर दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद 10 नवंबर तक दावों और नोटिसों के निपटारे की प्रक्रिया चलेगी और 16 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।

    इस बीच CJP का 2 अक्टूबर का प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर होने वाला है। आंदोलन के अगले चरण और महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची पर होने वाली कार्रवाई से इस विवाद की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

  • मुंबई में आज से टोल महंगा: ट्रक-बस समेत इन वाहनों के नए रेट, 2029 तक जारी रहेगी वसूली

    मुंबई में आज से टोल महंगा: ट्रक-बस समेत इन वाहनों के नए रेट, 2029 तक जारी रहेगी वसूली

    मुंबई के पांच प्रवेश टोल नाकों पर 1 अक्टूबर से नए रेट लागू हो गए हैं। जानें किस वाहन पर कितना टोल, किसे छूट और 2029 तक वसूली क्यों जारी रहेगी।

    मुंबई: 1 अक्टूबर 2026 से मुंबई के पांच प्रमुख प्रवेश टोल नाकों पर कॉमर्शियल और भारी वाहनों के लिए टोल की नई दरें लागू हो गई हैं। मिनी बस और हल्के कॉमर्शियल वाहन के लिए अब 90 रुपये, ट्रक और बस के लिए 180 रुपये तथा भारी मोटर वाहन के लिए 225 रुपये प्रति यात्रा टोल देना होगा। इससे अलग निजी कार, एसयूवी और पहले से छूट प्राप्त हल्के वाहनों पर इस बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ेगा।

    नई दरें मुंबई के वाशी, ऐरोली, मुलुंड एलबीएस रोड, मुलुंड ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और दहिसर वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे स्थित पांच प्रवेश बिंदुओं पर लागू हुई हैं। अटल सेतु का टोल इस व्यवस्था से अलग है।

    मुंबई के पांच टोल नाकों पर अब कितना शुल्क

    वाहन श्रेणीपुराना टोलनया टोलबढ़ोतरी
    मिनी बस और एलसीवी75 रुपये90 रुपये15 रुपये
    ट्रक और बस150 रुपये180 रुपये30 रुपये
    भारी मोटर वाहन190 रुपये225 रुपये35 रुपये

    महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल यानी एमएसआरडीसी के आधिकारिक सार्वजनिक नोटिस में 1 अक्टूबर 2023 से 30 सितंबर 2026 तक मिनी बस/एलसीवी के लिए 75 रुपये, ट्रक/बस के लिए 150 रुपये और भारी मोटर वाहनों के लिए 190 रुपये प्रति यात्रा दर निर्धारित थी। इसलिए भारी वाहन की नई दर 190 से बढ़कर 225 रुपये हुई है।

    इस हिसाब से मिनी बस और एलसीवी तथा ट्रक-बस श्रेणी में वृद्धि 20 प्रतिशत है, जबकि भारी मोटर वाहन की बढ़ोतरी करीब 18.4 प्रतिशत है।

    निजी कार और एसयूवी चालकों को क्या देना होगा

    इस बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर कॉमर्शियल और भारी वाहनों पर है। निजी कार और एसयूवी के लिए मुंबई के इन पांच प्रवेश बिंदुओं पर टोल छूट जारी है। हल्के मोटर वाहन, स्कूल बस और राज्य परिवहन बसों को अक्टूबर 2024 से दी गई छूट भी जारी है। सार्वजनिक परिवहन बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी भी इस टोल से मुक्त हैं।

    यानी सामान्य निजी कार से मुंबई में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को 1 अक्टूबर की इस नई दर के कारण अतिरिक्त टोल नहीं देना पड़ेगा।

    एक महीने में कितना बढ़ सकता है खर्च

    नई दर प्रति यात्रा लागू है। इसलिए नियमित रूप से मुंबई आने-जाने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए कुल खर्च उनकी टोल-योग्य यात्राओं की संख्या पर निर्भर करेगा।

    उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 26 दिनों तक रोज एक टोल-योग्य यात्रा करता है, तो एलसीवी के मामले में पुराने और नए टोल के बीच करीब 390 रुपये महीने का अतिरिक्त अंतर होगा। ट्रक या बस के लिए यह अंतर 780 रुपये और भारी मोटर वाहन के लिए 910 रुपये महीने होगा।

    यदि साल में ऐसी 312 यात्राएं मानी जाएं तो अतिरिक्त राशि क्रमशः 4,680 रुपये, 9,360 रुपये और 10,920 रुपये तक पहुंच सकती है। यह केवल गणना का उदाहरण है; वास्तविक खर्च वाहन की यात्रा और टोल नाके से गुजरने की संख्या पर निर्भर करेगा।

    50 और 100 कूपन लेने पर टोल में कितनी छूट

    बार-बार मुंबई आने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए अग्रिम टोल कूपन की व्यवस्था भी है। एमएसआरडीसी के अनुसार 50 कूपन खरीदने पर 25 प्रतिशत और 100 कूपन खरीदने पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। टोल प्लाजा पर रियायती यात्रा स्मार्ट कार्ड भी जारी किए जाते हैं।

    नई दर पर प्रकाशित छूट प्रतिशत को लागू करने पर 90 रुपये के टोल पर 25 प्रतिशत छूट के बाद प्रभावी राशि 67.50 रुपये और 50 प्रतिशत छूट के बाद 45 रुपये बैठती है। 180 रुपये के टोल पर ये राशि 135 और 90 रुपये तथा 225 रुपये के टोल पर 168.75 और 112.50 रुपये होगी।

    टोल बढ़ाने की व्यवस्था क्या है

    मुंबई के इन पांच प्रवेश बिंदुओं पर टोल कलेक्शन सितंबर 2002 में शुरू हुआ था। मौजूदा रियायत व्यवस्था में दरों का संशोधन तीन वर्ष के अंतराल पर किया जाता है। अक्टूबर 2023 में पिछली दरें लागू हुई थीं और 30 सितंबर 2026 को वह अवधि पूरी हुई। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से संशोधित दरें लागू की गई हैं।

    2010 में मुंबई एंट्री पॉइंट्स लिमिटेड यानी एमईपीएल ने एमएसआरडीसी को बुनियादी ढांचे से जुड़े पूंजीगत खर्च के लिए 2,100 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया था। इसके बाद कंपनी को टोल संग्रह के जरिए निवेश के साथ वित्तपोषण, प्रशासन, संचालन और रखरखाव से जुड़े खर्चों की वसूली की व्यवस्था मिली।

    इन प्रवेश बिंदुओं की टोल व्यवस्था मुंबई और आसपास विकसित किए गए फ्लाईओवर, पुल, सबवे और रोड ओवरब्रिज जैसे बुनियादी ढांचे की लागत तथा उससे जुड़ी व्यवस्थाओं से जुड़ी रही है। ऐतिहासिक रूप से इस परियोजना के तहत 55 फ्लाईओवर बनाए जाने का उल्लेख मिलता है।

    2026 में टोल खत्म होना था, फिर 2029 तक क्यों बढ़ा

    यह इस समय टोल व्यवस्था से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। पांच प्रवेश बिंदुओं पर टोल कलेक्शन की मौजूदा अवधि पहले नवंबर 2026 में समाप्त होनी थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इसे 17 सितंबर 2029 तक बढ़ाने की व्यवस्था की है।

    अक्टूबर 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में पांच प्रवेश टोल नाकों पर कारों और छोटे वाहनों को टोल से छूट दी गई थी। इस छूट से टोल संचालक को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए बाद में मुआवजे की व्यवस्था की गई। उपलब्ध सरकारी निर्णय के अनुसार इसी व्यवस्था के तहत टोल संग्रह की अवधि 2029 तक बढ़ाई गई।

    2025 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में पांच प्रवेश बिंदुओं पर दी गई टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई को मंजूरी दी गई थी। इस व्यवस्था के साथ 19 नवंबर 2026 से 17 सितंबर 2029 तक अलग-अलग वाहन श्रेणियों की वास्तविक समय वाहन संख्या का आंकड़ा रखने और सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया।

    इसी निर्णय में मुंबई और उपनगरों के 27 फ्लाईओवर तथा संबंधित संरचनाओं के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी निजी ठेकेदार के पास जारी रखने को मंजूरी दी गई। वाशी क्रीक ब्रिज से संबंधित टोल राजस्व में कमी की भरपाई के लिए 775.58 करोड़ रुपये की चरणबद्ध नकद व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई थी।

    टोल बढ़ने से माल ढुलाई और जरूरी सामान पर क्या असर पड़ेगा

    टोल वृद्धि का सीधा असर कॉमर्शियल वाहनों के परिचालन खर्च पर पड़ेगा। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के सलाहकार और पूर्व अध्यक्ष बाल मलकीत सिंह ने बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा है कि अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए परिवहन कंपनियां माल ढुलाई शुल्क बढ़ा सकती हैं और इसका असर आगे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। उन्होंने भारी कॉमर्शियल वाहनों को भी छोटे वाहनों की तरह टोल छूट देने की मांग की है।

    ऐसा नहीं है कि टोल बढ़ते ही फल, सब्जी या दूसरी आवश्यक वस्तुओं की कीमत निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। अंतिम कीमत पर ईंधन, दूरी, माल ढुलाई, मांग-आपूर्ति और अन्य लागतों का भी असर होता है। फिलहाल उपभोक्ता कीमतों पर असर को लेकर परिवहन क्षेत्र की चिंता सामने आई है, वास्तविक कीमत वृद्धि का कोई समान या निश्चित आंकड़ा सामने नहीं आया है।

    आगे क्या बदलेगा

    19 नवंबर 2026 से 17 सितंबर 2029 तक वाहन श्रेणीवार वास्तविक समय यातायात आंकड़ा रखने की व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पांचों प्रवेश बिंदुओं से गुजरने वाले वाहनों की संख्या और श्रेणीवार यातायात का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

    फिलहाल 1 अक्टूबर 2026 से लागू नई दरों के अनुसार मिनी बस और एलसीवी के लिए 90 रुपये, ट्रक और बस के लिए 180 रुपये तथा भारी मोटर वाहन के लिए 225 रुपये प्रति यात्रा टोल देना होगा। निजी कार और एसयूवी समेत पहले से छूट प्राप्त वाहनों पर इस संशोधन का टोल प्रभाव नहीं है। मुंबई के पांच प्रवेश बिंदुओं की मौजूदा टोल व्यवस्था अब 17 सितंबर 2029 तक जारी रहने की निर्धारित व्यवस्था के तहत चल रही है।

  • घर में दुकान या कारोबार चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सील करने की प्रक्रिया से मचा हड़कंप

    घर में दुकान या कारोबार चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सील करने की प्रक्रिया से मचा हड़कंप

    आवासीय इलाके में बिना मंजूरी कारोबार चलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सील करने का निर्देश दिया है। जानें किन संपत्तियों पर कार्रवाई होगी और किसे फिलहाल राहत है।

    नई दिल्ली: आवासीय इलाके में घर या संपत्ति का दुकान, कार्यालय या दूसरे व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 के आदेश में स्थिति स्पष्ट कर दी है। जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित किया गया है और जहां स्वीकृति भी आवासीय उपयोग की है, वहां व्यावसायिक गतिविधि पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहली कार्रवाई के तौर पर सील किया जा सकता है। हालांकि, यह आदेश हर घर में चल रहे हर कारोबार पर स्वतः लागू नहीं होता। भूमि उपयोग, स्वीकृत भवन योजना और संबंधित क्षेत्र के नियम इसके लिए अहम होंगे।

    यह मामला लॉगनाथन बनाम तमिलनाडु सरकार से जुड़ा है। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही है। मामले की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा को न्याय मित्र बनाया गया है। अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी और राज्यों तथा संबंधित प्राधिकरणों को उससे एक सप्ताह पहले अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी है।

    आवासीय इलाके में कारोबार मिला तो पहले होगा सील

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जिन क्षेत्रों को विशेष रूप से आवासीय घोषित किया गया है और जहां राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकरण ने केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां व्यावसायिक गतिविधि नहीं चलनी चाहिए। ऐसी गतिविधि मिलने पर परिसर को पहली कार्रवाई के तौर पर सील किया जाना है।

    इसमें केवल सड़क किनारे बनी बड़ी दुकानें ही नहीं, बल्कि आवासीय संपत्ति का स्वीकृत उपयोग बदलकर चलाया जा रहा अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल भी जांच के दायरे में आ सकता है। कोचिंग केंद्र, कार्यालय, पीजी और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े मामले भी इस व्यापक भूमि उपयोग जांच का हिस्सा रहे हैं।

    हर घर में दुकान चलाने पर तुरंत कार्रवाई नहीं

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि केवल किसी घर में कोई व्यावसायिक गतिविधि दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकलेगा कि उसे तुरंत सील कर दिया जाएगा।

    सबसे पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीन या इलाका किस उपयोग के लिए निर्धारित है। इसके बाद स्वीकृत भवन योजना और सक्षम प्राधिकरण से मिली अनुमति की स्थिति देखी जाएगी। यदि क्षेत्र स्पष्ट रूप से आवासीय है और भवन का उपयोग भी केवल आवासीय उद्देश्य के लिए स्वीकृत है, लेकिन वहां नियमों के खिलाफ व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, तो सीलिंग की कार्रवाई हो सकती है।

    मिश्रित उपयोग वाले इलाकों में फिलहाल राहत

    ऐसे इलाके जहां भूमि उपयोग स्पष्ट रूप से केवल आवासीय या केवल व्यावसायिक निर्धारित नहीं है, वहां स्थिति अलग है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ऐसे मामलों में जमीन पर मौजूदा स्थिति नहीं बदलने का निर्देश दिया है। हालांकि संबंधित प्रशासनिक और कानूनी कार्यवाही कागजों पर जारी रह सकती है।

    इसके साथ ही आप को बता दें, कि मिश्रित उपयोग वाले इलाके में दुकान चलाने वाले हर व्यक्ति के लिए तत्काल सील का खतरा नहीं है। यहां संबंधित क्षेत्र का मास्टर प्लान और लागू नियम देखना जरूरी होगा।

    मालिकाना विवाद भी नहीं बनेगा अपने आप बचाव

    यदि किसी मकान, जमीन या इमारत को लेकर अदालत में मुकदमा चल रहा है, तो केवल मुकदमा लंबित होने से कार्रवाई अपने आप नहीं रुकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि संपत्ति का वास्तविक उपयोग उस उद्देश्य के खिलाफ है जिसके लिए जमीन या भवन आवंटित किया गया था और सक्षम प्राधिकरण ने जिस योजना को मंजूरी दी थी, तो लंबित मुकदमा होने के बावजूद परिसर को सील किया जा सकता है।

    बिना किसी मंजूरी का निर्माण मिला तो सील होगा या ध्वस्तीकरण

    सुप्रीम कोर्ट ने उन संरचनाओं को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिया है जो पूरी तरह बिना किसी सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बनाई गई हैं। ऐसी संरचनाओं के मामले में कानून के अनुसार सील या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।

    नगर निकाय मनमानी कार्रवाई नहीं कर सकते

    सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ संपत्ति मालिकों और कारोबारियों पर ही ध्यान नहीं दिया है। नगर निकायों और संबंधित अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    यदि समान परिस्थितियों वाली संपत्तियों में से कुछ पर कार्रवाई और कुछ को बिना कारण छोड़ने की शिकायत सामने आती है, तो अदालत ने इसे गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है। आदेश में अधिकारियों को किसी भी तरह की चुनिंदा कार्रवाई से बचने को कहा गया है।

    भोपाल में सील प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल

    सुप्रीम कोर्ट के सामने भोपाल की कार्रवाई का मामला भी आया। वहां कुछ संपत्तियों को सील करने के बाद थोड़े समय में दोबारा खोलने की स्थिति पर सवाल उठे। अदालत को बताया गया कि कुछ मामलों में सील करने के बाद ऐसा कोई नया घटनाक्रम सामने नहीं आया था, जिससे संपत्ति खोलने का आधार स्पष्ट हो। कोर्ट ने कार्रवाई में एकरूपता और नियमों के पालन पर जोर दिया।

    भोपाल का मास्टर प्लान भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। अदालत के सामने यह बताया गया कि वहां मास्टर प्लान लंबे समय से संशोधित नहीं हुआ था और नया मसौदा तैयार किया गया है। हालांकि संपत्तियों के मौजूदा उपयोग की वैधता जांचते समय लागू मास्टर प्लान और भवन नियमों को आधार बनाने की बात स्पष्ट की गई है।

    देशभर में क्यों बढ़ी चिंता

    यह मामला मूल रूप से एक बिना स्वीकृति बने जी+1 भवन से जुड़ा था, लेकिन मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे व्यापक स्तर पर लेते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में आवासीय इलाकों के गैर-आवासीय इस्तेमाल की जांच का निर्देश दिया था। संबंधित नगर निकायों को अपने क्षेत्र में ऐसे मामलों की पहचान कर स्थिति अदालत के सामने रखने को कहा गया था।

    इसके बाद भूमि उपयोग और अनधिकृत निर्माण से जुड़े मामले दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, मेरठ और अन्य शहरों तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जमीन पर की गई वास्तविक कार्रवाई का ब्योरा मांगा है, केवल कागजी अनुपालन को पर्याप्त नहीं माना है।

    घर में दुकान चलाने वालों को क्या जांचना चाहिए

    ऐसी संपत्ति के मालिक या किरायेदार को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि जमीन और भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है। इसके साथ स्वीकृत भवन योजना, संबंधित क्षेत्र का मास्टर प्लान, भवन उपविधियां और व्यावसायिक उपयोग से जुड़ी अनुमति की स्थिति देखना जरूरी है।

    सिर्फ व्यापार संबंधी पंजीकरण या लाइसेंस होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि भवन का भूमि उपयोग भी नियमों के अनुसार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना है।

    मुंबई में क्या स्थिति है

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बीएमसी से जुड़ी ऐसी कोई भी प्रक्रिया सामने नहीं आई है।हालांकि मुंबई में आवासीय संपत्ति के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं। जुहू में एक आवासीय संपत्ति में व्यावसायिक उपयोग के लिए किए जा रहे काम को लेकर बीएमसी ने स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया था। स्थानीय निवासियों ने आपत्ति जताई थी। ऐसे कई मामले देखने को मिल सकते है।

    अगली सुनवाई में क्या होगा

    लॉगनाथन मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित है। राज्यों और संबंधित प्राधिकरणों को उससे एक सप्ताह पहले अपनी अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी है। न्याय मित्र अजीत कुमार सिन्हा को भी समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आवासीय क्षेत्र में चल रहा कारोबार अपने आप अवैध नहीं माना जाएगा, लेकिन जहां क्षेत्र स्पष्ट रूप से केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और स्वीकृत उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, वहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत सीलिंग की कार्रवाई का रास्ता साफ है। वहीं मिश्रित या स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किए गए उपयोग वाले क्षेत्रों में फिलहाल जमीनी स्थिति बनाए रखने का निर्देश है।

  • मुंबई में 96.64% पानी फिर भी 10% कटौती क्यों? BMC ने बताई मई 2027 तक की स्थिति

    मुंबई में 96.64% पानी फिर भी 10% कटौती क्यों? BMC ने बताई मई 2027 तक की स्थिति

    मुंबई की 7 झीलों में 96.64% पानी के बावजूद 10% कटौती जारी है। BMC ने मई 2027 तक के स्टॉक, 500 MLD गैप और नए जल प्लान की जानकारी दी।

    मुंबई: सातों जलापूर्ति झीलों में 96.64% पानी होने के बावजूद मुंबई में 10% पानी की कटौती हटाने की तैयारी नहीं है। BMC ने अब साफ किया है कि मौजूदा जल भंडार को बचाकर चलाना जरूरी है और उपलब्ध स्टॉक का अनुमान 17 मई 2027 तक लगाया गया है। ऐसे में सवाल है कि जब झीलें लगभग भर चुकी हैं तो मुंबई में पानी की कटौती क्यों जारी है और आने वाले महीनों में इसका असर कितना बढ़ सकता है।

    BMC के अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने नागरिक निकाय की बैठक में बताया कि मौजूदा पानी का स्टॉक मई 2027 तक चलाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और सदन में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने 10% पानी की कटौती वापस लेने की मांग उठाई थी। इसके जवाब में BMC प्रशासन ने मौजूदा कटौती जारी रखने की जरूरत बताई।

    मुंबई की सात झीलों में कितना पानी है?

    मुंबई को पानी देने वाली सात प्रमुख झीलें तुलसी, विहार, भातसा, तानसा, मोडक सागर, अपर वैतरणा और मिडिल वैतरणा हैं। 29 सितंबर को इनमें कुल 13,98,722 मिलियन लीटर उपयोगी पानी था, जो 14,47,363 मिलियन लीटर की कुल उपयोगी क्षमता का 96.64% है। 30 सितंबर की सुबह यह स्टॉक 96.37% दर्ज किया गया। यानी झीलों का स्तर ऊंचा होने के बावजूद उसमें लगातार मामूली गिरावट भी देखी जा रही है।

    पिछले दो वर्षों की तुलना करें तो 29 सितंबर 2025 को यही स्टॉक 97.57% और 2024 में 99.09% था। इस साल सातों झीलें 100% के स्तर तक नहीं पहुंच सकीं।

    96% पानी होने के बावजूद संकट क्यों?

    सिर्फ झीलों में मौजूद पानी का प्रतिशत देखकर पूरे साल की जल सुरक्षा तय नहीं होती। मुंबई की सालाना जरूरत पूरी करने के लिए सातों जलाशयों का पूरा उपयोगी भंडार करीब 14.47 लाख मिलियन लीटर होना जरूरी माना जाता है। मौजूदा स्टॉक इस स्तर से नीचे है और अगले मानसून तक शहर को लगातार पानी उपलब्ध कराना है।

    यही वजह है कि BMC फिलहाल पानी की बचत को प्राथमिकता दे रहा है। मई में जब सातों झीलों का स्टॉक सिर्फ 23.5% के आसपास रह गया था, तब 15 मई से पूरे मुंबई में 10% पानी की कटौती लागू की गई थी। बाद में जुलाई की भारी बारिश से जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ा, लेकिन कटौती वापस नहीं ली गई।

    मुंबई की पानी की जरूरत और सप्लाई में भी बड़ा अंतर

    मुंबई के जल संकट की एक वजह सिर्फ बारिश नहीं है। शहर में पानी की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच भी बड़ा अंतर बना हुआ है। BMC के आंकड़ों के अनुसार शहर को करीब 4,100 MLD पानी की आपूर्ति होती है, जबकि मांग लगभग 4,600 MLD है। यानी करीब 500 MLD का अंतर है। इसके अलावा पानी के वितरण तंत्र में 32 से 35% तक पानी लीकेज और चोरी के कारण नुकसान होने का अनुमान है।

    इसका मतलब यह है कि जलाशयों में पानी बढ़ने के बावजूद शहर के सामने पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और वितरण व्यवस्था में होने वाले नुकसान को कम करने की चुनौती बनी हुई है।

    महाराष्ट्र के सूखे का मुंबई पर भी असर

    महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह राज्य के करीब 74% तालुकों के बराबर है। 18 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18.8% कम बारिश दर्ज की गई थी। मराठवाड़ा और विदर्भ के कई हिस्सों में कमी और ज्यादा रही।

    मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था सात प्रमुख झीलों पर निर्भर है, लेकिन कुछ अतिरिक्त जल स्रोत राज्य के नियंत्रण में हैं। राज्य के दूसरे हिस्सों में जल संकट बढ़ने की स्थिति में इन संसाधनों के इस्तेमाल और जल उपलब्धता को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है। इसलिए मुंबई के लिए सिर्फ अपने सात जलाशयों का मौजूदा प्रतिशत देखना पर्याप्त नहीं है।

    El Niño और बढ़ते तापमान की चिंता

    BMC ने अक्टूबर और नवंबर के दौरान El Niño के प्रभाव के मजबूत होने की संभावना और उससे तापमान बढ़ने की स्थिति में झीलों से पानी के तेजी से वाष्पीकरण की चिंता जताई है। इसी कारण प्रशासन मौजूदा जल भंडार को बिना अतिरिक्त दबाव के अगले मानसून तक खींचना चाहता है।

    इस साल जुलाई में हुई भारी बारिश ने मुंबई को बड़ी राहत दी थी। जुलाई की शुरुआत में सातों जलाशयों का स्टॉक बेहद निचले स्तर पर था, लेकिन कुछ ही दिनों में भारी बारिश के कारण इसमें तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि अगस्त और सितंबर में जलाशयों में बढ़ोतरी की रफ्तार काफी धीमी रही।

    BMC का नया प्लान: 3,000 कुएं और 10,000 रिचार्ज स्ट्रक्चर

    जल संकट की आशंका के बीच BMC अब पारंपरिक जल स्रोतों को भी दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। करीब 3,000 पुराने कुओं को साफ कर उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाने की योजना पर काम हो रहा है। कुओं की सफाई, पानी की गुणवत्ता और खारेपन की जांच की जा रही है, क्योंकि मुंबई के तटीय इलाकों में भूजल में समुद्री पानी के प्रवेश की समस्या भी सामने आ सकती है।

    इसके साथ ही भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए करीब 10,000 रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना भी सामने आई है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को जमीन में उतारकर भूजल स्तर को मजबूत करना है।

    पानी की कमी बढ़ी तो टैंकर व्यवस्था भी बदल सकती है

    जल संकट की स्थिति में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने की संभावना को देखते हुए BMC एक नई टैंकर नियमन नीति तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य पानी की कमी वाले इलाकों में टैंकर आपूर्ति को नियंत्रित करना और संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाना है। प्रस्तावित नीति को संबंधित समितियों के सामने रखा जाना है और मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

    मुंबई में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ेगा?

    जून में जब सातों झीलों का स्टॉक 10% के करीब पहुंच गया था, तब BMC ने निर्माण स्थलों और स्विमिंग पूल के लिए पानी की आपूर्ति रोकने तथा औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 20% अतिरिक्त कटौती लागू करने का फैसला किया था।

    मौजूदा समय में ऐसे पुराने प्रतिबंधों को स्वतः लागू मानना सही नहीं होगा। लेकिन अगर जल भंडार में दोबारा गंभीर गिरावट आती है तो BMC के पास पहले इस्तेमाल किए गए संरक्षण उपायों को दोबारा लागू करने का विकल्प मौजूद रहेगा।

    मुंबई के लिए आगे की बड़ी योजनाएं

    दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए BMC की योजनाओं में गारगाई बांध से 440 MLD, मनोरी desalination project से 400 MLD और वर्सोवा desalination project से करीब 200 MLD अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। इन परियोजनाओं से कुल करीब 1,040 MLD अतिरिक्त क्षमता तैयार करने की योजना है।

    इसके अलावा बारिश के पानी के इस्तेमाल और भूजल रिचार्ज पर भी जोर बढ़ाया जा रहा है। मुंबई में भारी बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में stormwater को बाढ़ रोकने के लिए समुद्र और खाड़ियों की ओर पंप करना पड़ता है। इसी बीच वसई-विहार प्रणाली से अतिरिक्त पानी हासिल करने और stormwater management को बेहतर बनाने जैसी योजनाओं पर भी काम हो रहा है।

    फिलहाल क्या स्थिति है?

    मुंबई में 10% पानी की कटौती अभी जारी है। सातों झीलों का स्टॉक करीब 96% से अधिक है, लेकिन पिछले दो वर्षों की तुलना में इस साल का स्तर कम है। BMC ने मौजूदा भंडार को 17 मई 2027 तक बनाए रखने का अनुमान दिया है और पानी की कटौती को हटाने के बजाय जल संरक्षण पर जोर दिया है।

    आने वाले महीनों में मुंबई के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक झीलों के catchment में बारिश, तापमान और वाष्पीकरण, शहर की पानी की मांग, वितरण में होने वाला नुकसान और अगले मानसून से पहले उपलब्ध जल भंडार रहेगा। अभी उपलब्ध आंकड़े तत्काल पानी खत्म होने का संकेत नहीं देते, लेकिन BMC की रणनीति साफ है कि मौजूदा स्टॉक को अगले मानसून तक सुरक्षित रखने के लिए पानी की बचत जारी रखनी होगी।