Category: Civic Issues

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  • बोरिवली में 35 अतिक्रमणों पर बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, 8 किमी फुटपाथ होंगे मुक्त

    बोरिवली में 35 अतिक्रमणों पर बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, 8 किमी फुटपाथ होंगे मुक्त

    बोरिवली पश्चिम में बीएमसी ने 20 अनधिकृत निर्माण और 15 स्टॉल हटाए। 6 फुटपाथ के करीब 8 किमी हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने की मुहिम जारी है।

    मुंबई: बोरिवली पश्चिम में पैदल चलने वालों के लिए रास्ता खाली कराने की मुहिम के तहत बीएमसी ने 20 अनधिकृत निर्माण और 15 अनधिकृत स्टॉल पर कार्रवाई की है। 29 सितंबर को लोकमान्य तिलक रोड, मार्केट लेन और बोरिवली सबवे रोड क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के साथ पहले चरण में चिन्हित 6 फुटपाथ के करीब 8 किलोमीटर हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने का काम आगे बढ़ाया गया है।

    यह कार्रवाई ‘पादचारी प्रथम’ अभियान के तहत की गई। बीएमसी का उद्देश्य फुटपाथ पर मौजूद ऐसे अतिक्रमण और निर्माण हटाकर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित, लगातार और बाधामुक्त रास्ता उपलब्ध कराना है। इसका सीधा असर बोरिवली पश्चिम रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाले यात्रियों और आसपास के इलाकों में पैदल चलने वाले नागरिकों पर पड़ने की उम्मीद है।

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    कार्यवाही की तस्वीर

    बोरिवली पश्चिम में इन जगहों पर हुई कार्रवाई

    बीएमसी के अनुसार लोकमान्य तिलक रोड, मार्केट लेन और बोरिवली सबवे रोड परिसर में कार्रवाई की गई। कुल 20 अनधिकृत निर्माण और 15 अनधिकृत स्टॉल हटाए गए।

    कार्रवाई के लिए बीएमसी ने 2 जेसीबी, 5 डंपर, 10 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और 20 कामगार तैनात किए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15 से अधिक पुलिसकर्मियों का बंदोबस्त भी किया गया।

    उपायुक्त परिमंडल-7 मनीष वळंजु के मार्गदर्शन में और आर-मध्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल तांबे के नेतृत्व में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और कामगारों की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

    6 पदपथों पर करीब 8 किलोमीटर का अभियान

    बीएमसी ने बोरिवली क्षेत्र में पहले चरण के तहत 6 फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का काम शुरू किया है। इन सभी हिस्सों की कुल लंबाई करीब 8 किलोमीटर बताई गई है।

    फिलहाल बीएमसी की ओर से जारी जानकारी में इन 6 फुटपाथ की पूरी सूची और प्रत्येक फुटपाथ की अलग-अलग लंबाई सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, अभियान का उद्देश्य इन मार्गों पर पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह को बाधामुक्त करना है।

    बोरिवली पश्चिम में फुटपाथ पर अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से सामने आती रही है। वर्ष 2019 में भी रोकडिया लेन से बोरिवली स्टेशन पश्चिम की ओर जाने वाले पदपथ पर अतिक्रमण के कारण लोगों को सड़क पर चलने की स्थिति का उल्लेख किया गया था।

    मुंबई में बड़े अभियान का हिस्सा है कार्रवाई

    बोरिवली की कार्रवाई मुंबई के व्यापक ‘पादचारी प्रथम’ अभियान का हिस्सा है। अभियान के पहले चरण में बीएमसी ने 200 फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने का लक्ष्य रखा था। अगस्त के अंत तक 134 पदपथों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी थी और करीब 197 किलोमीटर फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का दावा किया गया था। उस समय 1,459 स्थानों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।

    बीएमसी ने अगस्त में पहले चरण के लिए करीब 320 किलोमीटर पदपथों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए थे। अभियान में अनधिकृत फेरीवालों के साथ फुटपाथ पर मौजूद अन्य प्रकार के अवरोध हटाने और फुटपाथ की सुधार, सुरक्षा तथा सुंदरीकरण से जुड़े काम करने पर भी जोर दिया गया था।

    सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं, पदपथ की मरम्मत भी

    बोरिवली पश्चिम में फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब बीएमसी ने इसी क्षेत्र में फुटपाथ की मरम्मत के लिए भी निविदा प्रक्रिया शुरू की है।

    आर-मध्य विभाग के बीट नंबर 17 में बोरिवली पश्चिम के विभिन्न स्थानों पर फुटपाथ की मरम्मत के लिए करीब 18.09 लाख रुपये की निविदा जारी की गई थी। इसकी निविदा प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई और बोली खोलने की तारीख 30 सितंबर रखी गई थी।

    इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में फुटपाथ को उपयोगी बनाने के लिए अतिक्रमण हटाने के साथ मरम्मत का काम भी अलग स्तर पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, 29 सितंबर की कार्रवाई में हटाए गए अतिक्रमण वाले सभी स्थान इस मरम्मत परियोजना में शामिल हैं या नहीं, इसकी अलग से पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    अब असली चुनौती दोबारा अतिक्रमण रोकने की

    फुटपाथ खाली कराने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह रहेगी कि इन जगहों पर दोबारा अतिक्रमण न हो और पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध रास्ता लगातार बना रहे। बोरिवली पश्चिम के अलग-अलग इलाकों में इस वर्ष भी फुटपाथ और सड़क पर फेरीवालों तथा अन्य अवरोधों को लेकर नागरिक शिकायतें सामने आती रही हैं। चीकूवाड़ी और साईबाबा नगर रोड जैसे इलाकों में पैदल यात्रियों के लिए जगह कम होने की शिकायतें दर्ज हुई थीं।

    इसलिए 29 सितंबर की कार्रवाई के बाद केवल हटाए गए निर्माणों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि यह भी देखना होगा कि इन मार्गों पर पैदल चलने की जगह कितनी लगातार और उपयोगी रहती है।

    पैदल चलना अब मौलिक अधिकार

    बोरिवली की यह कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब सर्वोच्च न्यायालय ने 19 जून 2026 के फैसले में सुरक्षित और चिन्हित फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है। अदालत ने कहा कि सड़क होने पर नगर निगमों और अन्य संबंधित स्थानीय निकायों का दायित्व है कि पैदल चलने वालों के लिए चिन्हित और अच्छी तरह बनाए गए फुटपाथ उपलब्ध कराए जाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चिन्हित फुटपाथ पर पैदल चलने का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता रखता है।

    ऐसे में बोरिवली में 6 फुटपाथ के करीब 8 किलोमीटर हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। इसके बाद इन रास्तों का रखरखाव, पैदल यात्रियों के लिए लगातार उपलब्ध जगह और दोबारा अतिक्रमण रोकने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    फिलहाल बीएमसी की कार्रवाई जारी है और बोरिवली पश्चिम के चिन्हित फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का काम अभियान के अगले चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

    मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

    मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर नया मोड़ आया है। आयुक्त अश्विनी भिडे के स्पष्टीकरण से अभियान पर सवाल उठे।

    मुंबई: 39 हजार 111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर आखिरी वक्त में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 19 सितंबर को महापालिका ने 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले 39,111 अनधिकृत झोपड़ी निर्माणों के खिलाफ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक विशेष कार्रवाई की घोषणा की थी। अब 29 सितंबर को BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के साथ हुई बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इन 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई अलग से आदेश जारी नहीं किया गया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ के अनुसार, आयुक्त ने बताया कि महापालिका नियमित कार्रवाई कर रही है।

    इस स्पष्टीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली वह विशेष कार्रवाई अब किस रूप में होगी, जिसकी घोषणा खुद महापालिका प्रशासन ने की थी।

    39,111 का आंकड़ा आया कहां से?

    BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें 39,111 ऐसी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें मुंबई शहर की 3,348, पश्चिमी उपनगरों की 4,536 और पूर्वी उपनगरों की सबसे अधिक 31,227 संरचनाएं शामिल हैं।

    यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 39,111 का आंकड़ा उन संरचनाओं का है जिन्हें BMC ने कार्रवाई के लिए चिन्हित किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी 39,111 घरों को अलग-अलग demolition notice जारी हो चुके हैं।

    BMC के अनुसार 4,584 संरचनाओं पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी, जबकि 611 को नोटिस दिए जा चुके थे। बाकी चिन्हित संरचनाओं के अनधिकृत हिस्से खुद हटाने के लिए कहा गया था और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की बात कही गई थी।

    1 अक्टूबर से क्या होने वाला था?

    19 सितंबर को घोषित योजना के मुताबिक 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक तीन महीने की विशेष मुहिम चलनी थी। इसका फोकस झोपड़पट्टी क्षेत्रों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण पर था। BMC ने लोगों से अपने स्तर पर अनधिकृत हिस्से हटाने की अपील भी की थी।

    यह कार्रवाई ऐसे समय घोषित हुई जब कुर्ला में पहाड़ी किनारे बसे आवासीय क्षेत्र में भूस्खलन की घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी और मानखुर्द में भी मकान गिरने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद अनधिकृत और असुरक्षित निर्माणों पर कार्रवाई का मुद्दा और गंभीर हुआ। हालांकि 39,111 सभी संरचनाओं को खतरनाक घोषित किया गया है, ऐसा उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता।

    अब आयुक्त के स्पष्टीकरण से क्या बदला?

    28 सितंबर को वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में सांसदों, विधायक असलम शेख और नगरसेवकों के प्रतिनिधिमंडल ने BMC आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात की। इसके बाद गायकवाड़ ने बताया कि आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई आदेश प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है और नियमित कार्रवाई ही जारी है।

    लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद मामला पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। उसी दिन BMC General Body में इस मुद्दे पर पांच घंटे से ज्यादा समय तक विवाद चला। BJP के Leader of House गणेश खनकर ने मांग की कि आयुक्त खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करें। आयुक्त के बैठक में नहीं पहुंचने के बाद Mayor रितु तावड़े ने सदन स्थगित कर दिया।

    यानी एक तरफ 19 सितंबर की विशेष कार्रवाई की घोषणा मौजूद है और दूसरी तरफ 29 सितंबर को आयुक्त के बारे में सामने आया स्पष्टीकरण है। 1 अक्टूबर को वास्तव में कौन-सी कार्रवाई होगी, इसका स्पष्ट प्रशासनिक स्वरूप अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

    14 फीट की सीमा पर भी उठे सवाल

    इस कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा 14 फीट की ऊंचाई की सीमा है। Govandi New Sangam Welfare Society की ओर से अधिवक्ता Faiyaz Alam Shaikh ने BMC आयुक्त, SRA, MMRDA और Housing Department के Principal Secretary को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में 14 फीट की सीमा को पुराने कानूनी प्रावधान से जोड़ते हुए कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई और demolition के बजाय structural audit, eligibility verification और rehabilitation जैसे विकल्पों की मांग की गई।

    समाजवादी पार्टी के विधायक Rais Shaikh ने कहा था कि इस कार्रवाई से करीब 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह प्रभावित आबादी का राजनीतिक दावा है, BMC द्वारा जारी आधिकारिक population figure नहीं।

    रिहायश और पुनर्वसन का सवाल

    कार्रवाई के विरोध में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि यदि कोई संरचना हटाई जाती है तो वहां रहने वाले पात्र परिवारों का पुनर्वसन किस व्यवस्था के तहत होगा।

    वर्षा गायकवाड़ ने SRA, MHADA, PAP और cluster redevelopment जैसी व्यवस्थाओं के जरिए पात्र परिवारों के पुनर्वसन की मांग की है। BMC में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी झोपड़ीवासियों की पात्रता की जांच, 2011 या लागू cut-off date के आधार पर verification और उसके बाद rehabilitation की मांग उठाई है।

    इस बीच BMC House के Leader गणेश खनकर ने भी कार्रवाई स्थगित करने की मांग की थी। वहीं Mayor रितु तावड़े ने General Body में कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना फैसला आगे बढ़ाया गया तो उसे पलटने की मांग उठ सकती है।

    अब सवाल सिर्फ झोपड़ी तोड़ने का नहीं

    इस पूरे विवाद में एक और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने BJP पर दबाव में अपनी स्थिति संभालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर कुछ नागरिक कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई के विरोध को अनधिकृत झोपड़ियों को राजनीतिक संरक्षण देने के रूप में देखने की बात कही है। इन दावों और आरोपों के बीच प्रशासन के वास्तविक लिखित आदेश और कार्रवाई की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है।

    वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर प्रस्तावित कार्रवाई रोकने की मांग की। बैठक के बाद उनके हवाले से यह बात सामने आई कि इतनी बड़ी संख्या में संरचनाओं को एक ही दिन में गिराना व्यावहारिक नहीं होगा।

    BMC के अभियान की कमान किसके पास?

    19 सितंबर की योजना में आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी। इसके लिए अतिरिक्त महापालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन और संयुक्त आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।

    इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल यह है कि 1 अक्टूबर से प्रस्तावित विशेष अभियान के लिए जारी की गई आंतरिक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति में क्या बदलाव हुआ है।

    आम झोपड़ीवासी क्या समझें?

    फिलहाल 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना का BMC की सूची में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसी दिन पूरा घर गिरा दिया जाएगा। इसी तरह किसी संरचना पर जारी नोटिस, पहले की गई कार्रवाई और नई प्रस्तावित कार्रवाई—तीनों की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अलग हो सकती है।

    जिन लोगों को BMC का नोटिस मिला है, उन्हें अपने पास उपलब्ध पुराने दस्तावेज, पात्रता से जुड़े कागजात, redevelopment या SRA से संबंधित रिकॉर्ड और नोटिस की प्रतियां सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी भी कार्रवाई की स्थिति में संबंधित BMC विभाग से लिखित स्थिति और लागू प्रक्रिया की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा।

    फिलहाल 1 अक्टूबर सबसे अहम तारीख बनी हुई है। 19 सितंबर को घोषित तीन महीने की विशेष मुहिम, 39,111 चिन्हित संरचनाओं का आंकड़ा और 29 सितंबर को सामने आया आयुक्त का स्पष्टीकरण—इन तीनों के बीच प्रशासनिक स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 1 अक्टूबर से BMC किस प्रकार की कार्रवाई शुरू करती है और क्या उसके लिए कोई स्पष्ट लिखित आदेश या वार्ड-स्तरीय प्रक्रिया सामने आती है।

  • Cooper Hospital Death Certificate Case: 6 साल बाद भी जांच का जवाब नहीं, डॉक्टर अब BMC के अहम पद पर

    Cooper Hospital Death Certificate Case: 6 साल बाद भी जांच का जवाब नहीं, डॉक्टर अब BMC के अहम पद पर

    Cooper Hospital के 2020 death certificate मामले में ₹10,000 रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। डॉक्टर Niranjan Kshirsagar suspend हुए, लेकिन जांच का अंतिम नतीजा अब भी स्पष्ट नहीं।

    मुंबई: Cooper Hospital में अप्रैल 2020 में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ₹10,000 मांगने और ₹7,000 लेने के आरोप से जुड़ा मामला छह साल बाद फिर सवालों के घेरे में है। उस समय BMC ने Casualty Medical Officer Dr Niranjan Kshirsagar को जांच लंबित रहने तक निलंबित किया था। अब 2026 में इसी नाम के Dr Niranjan Kshirsagar को Jogeshwari के Hindu Hriday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Municipal Hospital में Medical Superintendent के रूप में सार्वजनिक रूप से दर्ज किया गया है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से दोनों पदों पर दर्ज व्यक्ति की पहचान को अंतिम रूप से एक ही व्यक्ति साबित करने वाला BMC सेवा रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

    2020 में क्या हुआ था

    अप्रैल 2020 में Andheri West के Gaondevi निवासी Abu Bakar Gulab Khan की हार्ट अटैक से मौत के बाद उनके परिवार को Cooper Hospital में मृत्यु प्रमाणपत्र लेने के दौरान कथित तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ा था। परिवार के सदस्य Yusuf Jafri Ali Shaikh ने दावा किया था कि अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों ने Covid-19 के कारण मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने में कई दिन लगने की बात कही और ₹10,000 की मांग की। आरोप के मुताबिक बाद में ₹7,000 पर मामला तय हुआ और परिवार को एक डॉक्टर के पास भेजा गया।

    मामला सामने आने के बाद Andheri West के तत्कालीन BJP MLA Ameet Satam ने ऑडियो रिकॉर्डिंग Municipal Commissioner Praveen Pardeshi को भेजकर जांच की मांग की थी। Cooper Hospital के तत्कालीन Dean Dr Pinakin Gujjar ने जांच शुरू होने की पुष्टि की थी, जबकि तत्कालीन Additional Municipal Commissioner (Health) Suresh Kakani ने दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी।

    Dr Niranjan Kshirsagar ने रिश्वत लेने से इनकार किया था। उनका कहना था कि वह उस रात ड्यूटी पर नहीं थे और परिवार ने करीब रात 2 बजे उनसे संपर्क किया था। उनके अनुसार ₹7,000 रिश्वत नहीं बल्कि उनकी फीस थी, जिसमें देर रात consultation का charge भी शामिल था। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार postmortem नहीं चाहता था और उन्होंने मदद की थी। Kshirsagar ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह 15 वर्षों की सेवा में पहले कभी रिश्वत के आरोप का सामना नहीं कर चुके थे।

    BMC ने क्या कार्रवाई की थी

    ऑडियो सामने आने के एक दिन बाद BMC ने Dr Niranjan Kshirsagar को inquiry pending रहने तक suspend कर दिया था। उस समय सामने आई जानकारी के अनुसार preliminary inquiry में परिवार जिस डॉक्टर को private doctor बता रहा था, उसके Cooper Hospital से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। Ameet Satam ने उन दूसरे डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की मांग की थी, जिन्होंने परिवार को Kshirsagar तक पहुंचाया था।

    लेकिन इस मामले का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल आज भी यही है कि उस departmental inquiry का अंतिम परिणाम क्या निकला। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में इस specific मामले की final inquiry report, अंतिम disciplinary order, charge-sheet, clean chit, dismissal या अन्य अंतिम कार्रवाई का स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आता।

    Death Certificate और Cause of Death Certificate एक नहीं

    इस मामले को समझने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र और Medical Certificate of Cause of Death के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    Medical Certificate of Cause of Death वह चिकित्सकीय प्रमाणपत्र है जिसमें मृत्यु का कारण दर्ज किया जाता है। Registration of Births and Deaths Act की मौजूदा Section 10 के अनुसार, किसी medical institution में मृत्यु होने पर institution को cause-of-death certificate बिना शुल्क उपलब्ध कराना होता है। इस प्रमाणपत्र पर उस medical practitioner के हस्ताक्षर होते हैं जिसने मृतक को हाल की बीमारी के दौरान attend किया था और इसकी एक copy निकटतम रिश्तेदार को दी जानी है।

    2023 के संशोधन के बाद यह जिम्मेदारी medical institution के स्तर पर और स्पष्ट की गई। नए प्रावधान के मुताबिक medical institution, चाहे वह सरकारी हो या निजी, death होने पर cause-of-death certificate free of charge उपलब्ध कराएगा।

    इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में मृत्यु से जुड़े किसी भी अलग medical service के लिए कोई निजी शुल्क असंभव है। लेकिन Cooper मामले में Dr Kshirsagar द्वारा बताए गए ₹7,000 को official death-certificate fee मानने का कोई सार्वजनिक BMC fee record उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष यह था कि यह late-night consultation की फीस थी।

    आज BMC से Death Certificate लेने की प्रक्रिया क्या है

    महाराष्ट्र सरकार के Aaple Sarkar portal पर BMC के लिए Death Certificate जारी करने की notified service timeline 3 दिन है। इसमें designated officer Divisional Medical Health Officer (Deputy Registrar), first appellate officer Divisional Deputy Executive Health Officer और second appellate officer Executive Health Officer बताए गए हैं।

    यह वर्तमान व्यवस्था है। इसे अप्रैल 2020 में लागू Covid-period procedure पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। 2020 में महामारी के दौरान deaths की जांच और documentation को लेकर अलग प्रशासनिक व्यवस्था लागू थी।

    Covid काल में death certificate को लेकर क्या बदला था

    Cooper Hospital का यह मामला ऐसे समय सामने आया था जब Covid-19 के कारण मृत्यु की जांच और documentation को लेकर अस्पतालों और परिवारों के सामने अतिरिक्त प्रक्रियात्मक दबाव था। बाद में BMC ने non-Covid deaths को लेकर यह स्पष्ट किया था कि apparent non-Covid death के मामले में death certificate पाने के लिए Covid certificate जरूरी नहीं था। उस समय BMC ने non-Covid deaths के cause-of-death certificate को लेकर अलग procedure भी जारी की थी।

    इसलिए 2020 की घटना में परिवार को बताई गई संभावित देरी और उस समय लागू वास्तविक BMC procedure के बीच अंतर की जांच इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी है।

    ₹7,000 की payment पर अब भी बड़ा सवाल

    Dr Kshirsagar का दावा था कि ₹7,000 उनकी फीस थी। दूसरी तरफ परिवार की ओर से इसे death certificate जल्दी दिलाने के लिए भुगतान बताया गया था। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इस राशि की कोई ऐसी receipt, official fee schedule या BMC-authorised private consultation record सामने नहीं आया जिससे इस payment की प्रकृति निर्णायक रूप से स्पष्ट हो सके।

    उपलब्ध जानकारी में यह आरोप और डॉक्टर का अलग बचाव दोनों मौजूद हैं, जबकि departmental inquiry का अंतिम सार्वजनिक निष्कर्ष स्पष्ट नहीं है।

    अगर सरकारी काम के बदले पैसे मांगे जाएं तो क्या करें

    महाराष्ट्र Anti-Corruption Bureau की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत ACB में की जा सकती है। ACB के complaint system में public servant, department, bribe demand और pending government work जैसी जानकारी देने के साथ audio, video और image evidence उपलब्ध कराने की सुविधा भी है।

    ऐसी स्थिति में नागरिक को payment का receipt मांगने, अधिकारी का नाम और पद दर्ज करने, तारीख-समय नोट करने और उपलब्ध documentary या audio-video evidence सुरक्षित रखने की जरूरत है। प्रशासनिक service में देरी या certificate जारी नहीं होने जैसी समस्या के लिए BMC की grievance mechanism भी उपलब्ध है।

    2026 में death registration के नियमों में भी बदलाव

    महाराष्ट्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को Maharashtra Registration of Births and Deaths (Amendment) Rules, 2026 को notify किया है। यह बदलाव Maharashtra Birth and Death Registration Rules, 2000 में संशोधन करता है।

    इसके अलावा केंद्र के स्तर पर Registration of Births and Deaths कानून में हालिया संशोधनों के बाद birth और death registration व्यवस्था में कई बदलाव लागू हुए हैं। Cause-of-death certificate से संबंधित statutory provisions भी 2023 के संशोधन के बाद बदले हैं।

    2026 में Dr Niranjan Kshirsagar की वर्तमान भूमिका

    अगस्त 2026 की सार्वजनिक रिपोर्टों में Jogeshwari के Hindu Hriday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Municipal Hospital में Medical Superintendent के रूप में Dr Niranjan Kshirsagar का नाम सामने आया है। 20 अगस्त 2026 की hospital inspection report में Medical Superintendents Dr Chhaya Shinde और Dr Niranjan Kshirsagar की मौजूदगी दर्ज है।

    15 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में भी इसी अस्पताल के Medical Superintendent Dr Niranjan Kshirsagar ने canteen से जुड़े विवाद पर hospital administration का पक्ष रखा था।

    हालांकि 2020 के Cooper Hospital मामले में दर्ज Dr Niranjan Kshirsagar और 2026 में Jogeshwari Trauma Care Hospital में दर्ज Dr Niranjan Kshirsagar एक ही व्यक्ति हैं, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए BMC का आधिकारिक service/transfer record जरूरी है। इसलिए दोनों records को अभी एक ही व्यक्ति मानकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा

    सबसे बड़ा सवाल अब भी जांच के अंतिम नतीजे का

    Cooper Hospital के 2020 के मामले में तत्कालीन कार्रवाई स्पष्ट है—जांच शुरू हुई और Dr Niranjan Kshirsagar को suspension का सामना करना पड़ा। लेकिन छह साल बाद भी उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि departmental inquiry अंततः किस निष्कर्ष पर पहुंची।

    यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण unanswered question है: क्या ₹7,000 की payment को लेकर डॉक्टर की सफाई स्वीकार हुई, क्या कोई departmental punishment हुआ, क्या आरोप साबित नहीं हुए, या जांच किसी अन्य निष्कर्ष तक पहुंची?

    जब तक BMC की final inquiry report या संबंधित service record सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आता, इस मामले को आरोप, suspension और डॉक्टर के defence के स्तर पर ही तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

  • Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा, समुद्री जीवन और मछुआरों की रोजी पर उठे सवाल

    Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा, समुद्री जीवन और मछुआरों की रोजी पर उठे सवाल

    Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा होगा। 400 MLD परियोजना, brine discharge, मछली कारोबार और पर्यावरणीय शर्तों पर जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: मनोरी में प्रस्तावित समुद्री जल शुद्धिकरण परियोजना को लेकर मछुआरा समुदाय और तटीय गांवों के लोगों का विरोध अब तेज हो गया है। गोरेई में 26 सितंबर को हुई बैठक में 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक मोर्चा निकालने का फैसला लिया गया। प्रदर्शनकारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका की मनोरी-गोरेई Desalination Plant परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल समुद्र से बड़े पैमाने पर पानी खींचने, अत्यधिक नमक वाले brine को वापस समुद्र में छोड़ने और इसके संभावित असर को लेकर है।

    बैठक में गोरेई, मनोरी, पाली, मालवणी, उत्तन और उरण से जुड़े मछुआरा, किसान और तटीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में गोरेई विलेजर्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष स्विटी हेन्रिक्स, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के कार्याध्यक्ष और उत्तन निवासी बर्नार्ड डी’मेलो, गोरेई मच्छीमार सोसायटी के अध्यक्ष ओल्डिन वसाईकर, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के अध्यक्ष देवेंद्र तांडेल, नगरसेविका शर्मिला बागाजी, राजाराम पाटील, मनोज माशेलकर, हेमंत कोली, पाली-उत्तन मच्छिमार सहकारी सोसायटी के सचिव आल्सन निग्रेल लिंटन मुनीस, डेनिस डिसोजा और धारावी बेट के स्थानीय नागरिक मौजूद थे।

    19 अक्टूबर के मोर्चे में क्या मांग होगी?

    मछुआरा समुदाय की मुख्य मांग परियोजना को रद्द करने की है। समुदाय का कहना है कि मनोरी-गोरेई तट के समुद्री क्षेत्र पर उनकी आजीविका निर्भर है और परियोजना के कारण समुद्र से पानी लेने तथा प्रक्रिया के बाद अधिक नमक वाले पानी को वापस समुद्र में छोड़ने से मछली पकड़ने के क्षेत्र, समुद्री जैव विविधता और पारंपरिक रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।

    स्विटी हेन्रिक्स ने कहा कि स्थानीय लोगों से पर्याप्त चर्चा किए बिना पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और परियोजना का मछली पकड़ने, नौवहन तथा मछुआरों की आजीविका पर क्या असर होगा, इस पर स्पष्टता नहीं है। सितंबर में हुए विरोध के बाद अधिकारियों की ओर से बातचीत की पहल होने की बात भी सामने आई है।

    बर्नार्ड डी’मेलो ने कहा कि कोली समुदाय के लिए समुद्र केवल आय का साधन नहीं बल्कि उनकी परंपरा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने परियोजना से मछली पकड़ने के क्षेत्रों पर खतरे की आशंका जताई है।

    400 MLD की परियोजना में पहले कितना पानी बनेगा?

    मनोरी परियोजना को Sea Water Reverse Osmosis यानी SWRO तकनीक पर विकसित किया जा रहा है। इसकी पहली चरण की क्षमता 200 MLD रखी गई है और आगे इसे 400 MLD तक बढ़ाया जा सकता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 200 MLD Phase-I और भविष्य में 400 MLD क्षमता का उल्लेख है।

    परियोजना के लिए मनोरी गांव में लगभग 20 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार यह महाराष्ट्र सरकार की जमीन है, जो महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में थी। इसमें सर्वे नंबर 257 (भाग), 263, 289/1, 290 और 291 शामिल हैं। जमीन को पथरीली और बंजर प्रकृति की बताया गया है।

    समुद्र से पानी लेने के बाद क्या समुद्र में वापस जाएगा?

    यही विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू है।

    RO प्रक्रिया में समुद्री पानी से कम लवणता वाला पानी अलग किया जाता है और बचा हुआ ज्यादा लवणता वाला पानी brine के रूप में निकलता है। मनोरी परियोजना में इस brine को समुद्र में छोड़े जाने का प्रस्ताव है।

    पर्यावरणीय आकलन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार Phase-I में brine reject करीब 300 MLD और Phase-II में करीब 600 MLD तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित brine की औसत लवणता लगभग 56.8 PSU बताई गई है, जबकि intake क्षेत्र के समुद्री पानी की लवणता करीब 35.5 PSU बताई गई है।

    मछुआरा संगठनों को आशंका है कि इस तरह के concentrated brine discharge से मछलियों के प्रजनन क्षेत्र, plankton और समुद्री food chain पर असर पड़ सकता है। हालांकि उपलब्ध पर्यावरणीय दस्तावेजों में इसे संभावित प्रभाव के रूप में जांचने और नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल किए गए हैं; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि परियोजना से निश्चित रूप से समुद्री नुकसान होगा।

    सरकारी दस्तावेजों में भी brine के असर पर सवाल उठा

    25 मार्च 2026 की महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में परियोजना पर चर्चा के दौरान concentrated brine discharge और मछलियों पर संभावित असर से जुड़ा सवाल सामने आया था। परियोजना के सलाहकार पक्ष ने discharge location और उससे जुड़े नियंत्रण उपायों की जानकारी दी थी।

    इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली, लेकिन मंजूरी के साथ marine ecology की निगरानी और brine के दीर्घकालीन प्रभाव का अध्ययन करने की शर्तें भी रखी गईं। पर्यावरणीय असर पर शोध के लिए शुरुआती तौर पर 10 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की शर्त सामने आई है। इसमें brine के पुन: उपयोग, बेहतर desalination technology और marine pollution कम करने के उपायों पर भी शोध शामिल है।

    मनोरी क्रीक और मैंग्रोव को लेकर क्या शर्तें हैं?

    परियोजना से जुड़े CRZ दस्तावेजों में साइट को CRZ-I(B), CRZ-III और CRZ-IV क्षेत्रों से संबंधित बताया गया है। मनोरी क्रीक में स्थानीय मछुआरों की गतिविधियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

    CRZ मंजूरी में मनोरी क्रीक में गतिविधियों पर प्रतिबंध, आसपास के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और समुद्र की सतह तथा समुद्री तल पर असर कम करने के उपाय शामिल किए गए हैं। पाइपलाइन बिछाने में tunnelling का इस्तेमाल करने की शर्त भी रखी गई है ताकि seabed disturbance कम किया जा सके।

    इसका मतलब यह है कि परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन मंजूरी बिना शर्त नहीं है। Marine ecology, brine discharge, मैंग्रोव और समुद्री क्षेत्र की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी परियोजना का हिस्सा हैं।

    मछुआरों की आजीविका का सवाल कितना बड़ा है?

    मनोरी और आसपास के तटीय इलाकों में विवाद केवल समुद्र में मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। पर्यावरणीय आकलन से जुड़ी जानकारी के अनुसार परियोजना क्षेत्र की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से fishing और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर बताई गई है। मनोरी में करीब 200 motorised और 150 non-motorised boats तथा उत्तन में लगभग 400 fishing boats का उल्लेख किया गया है।

    मछली कारोबार से जुड़े रोजगार में मछली पकड़ने के अलावा fish-seed collection, sorting, झींगा छीलना, मछली सुखाना, बिक्री, जाल बनाना, नावों की मरम्मत और अन्य shore-based activities भी शामिल हैं। महिलाओं की भूमिका भी इस पूरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बताई गई है।

    मछली पकड़ने का सामान्य मौसम 15 अगस्त से 31 मई तक बताया गया है। ऐसे में अक्टूबर में प्रस्तावित मोर्चा उस समय हो रहा है जब स्थानीय fishing season चल रहा होगा।

    BMC को इस परियोजना की जरूरत क्यों लगती है?

    मुंबई की बढ़ती जल जरूरत को देखते हुए BMC desalination को अतिरिक्त और climate-resilient water source के रूप में विकसित करना चाहता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में मनोरी परियोजना को शहर की जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। 2041 के लिए मुंबई की projected water demand 6,424 MLD बताई गई है।

    इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा जल स्रोतों पर निर्भरता के साथ एक अतिरिक्त समुद्री जल स्रोत तैयार करना है। Phase-I में 200 MLD और आगे 400 MLD तक क्षमता बढ़ाने की योजना इसी दीर्घकालीन जरूरत से जुड़ी है।

    मनोरी से मुंबई तक पानी कैसे पहुंचेगा?

    Desalination plant से तैयार पानी को शहर के वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए अलग underground conveyance system तैयार किया जा रहा है। मनोरी से चर्कोप और आगे महावीर नगर, कांदिवली तक लगभग 7.2 किलोमीटर का underground tunnel प्रस्तावित है।

    इस tunnel और संबंधित infrastructure के लिए लगभग 2,241.3 करोड़ रुपये का contract Afcons Infrastructure Ltd से जुड़ा है। परियोजना को पूरा करने की अवधि 45 महीने और commissioning का लक्ष्य दिसंबर 2029 बताया गया है।

    11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा सिर्फ plant की निर्माण लागत नहीं

    मनोरी परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग आंकड़ों के कारण भ्रम की स्थिति रही है। BMC से जुड़े दस्तावेजों और tender information के अनुसार 11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा केवल plant बनाने की लागत नहीं बल्कि लंबे समय के operation, maintenance, electricity और अन्य खर्चों को भी शामिल करता है। GVPR Engineers Limited को परियोजना के लिए चुना गया था।

    परियोजना की मूल construction cost करीब 4,077 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 20 साल के maintenance और electricity समेत अन्य lifecycle expenses जुड़े हैं। दूसरी ओर, 2,241.3 करोड़ रुपये का आंकड़ा अलग underground water-conveyance tunnel package से संबंधित है।

    परियोजना की शुरुआत से अब तक क्या हुआ?

    मनोरी desalination project को BMC के Standing Committee और Municipal Corporation से फरवरी 2021 में मंजूरी मिली थी। शुरुआत में 200 MLD plant को भविष्य में 400 MLD तक विस्तार योग्य बनाने की योजना रखी गई थी। शुरुआती tender प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद BMC ने 28 मई 2025 को Design-Build-Operate आधार पर नया tender जारी किया।

    मार्च 2026 में पुराने baseline environmental data की validity समाप्त होने के बाद जनवरी-फरवरी 2026 में environmental baseline monitoring दोबारा की गई और updated EIA पेश किया गया।

    इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली। मंजूरी के साथ marine research, brine monitoring, मैंग्रोव सुरक्षा, मनोरी क्रीक की सुरक्षा, tunnelling और renewable-energy से जुड़ी शर्तें लागू की गईं।

    अब आगे क्या होगा?

    26 सितंबर की बैठक के बाद 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक प्रस्तावित मोर्चा इस विवाद का अगला बड़ा घटनाक्रम होगा। मछुआरा और तटीय समुदाय परियोजना को रद्द करने की मांग पर कायम हैं।

    दूसरी ओर, परियोजना को CRZ मंजूरी मिल चुकी है और BMC इसे मुंबई की दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए विकसित कर रहा है। अब विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहेगा कि पर्यावरणीय मंजूरी में रखी गई marine monitoring, brine management, मैंग्रोव संरक्षण और मनोरी क्रीक से जुड़ी शर्तों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और स्थानीय मछुआरा समुदाय के साथ आगे कितनी प्रभावी बातचीत होती है।

    19 अक्टूबर का मोर्चा इसी टकराव का अगला चरण होगा—एक तरफ मुंबई की बढ़ती पानी की जरूरत और दूसरी तरफ मनोरी-गोरेई के समुद्र पर निर्भर समुदाय की पर्यावरण और आजीविका संबंधी चिंताएं।

  • आदिवासी छात्रों का 180 किमी मुंबई मार्च शुरू, 584 मौतों से लेकर स्कूल सुविधाओं तक उठे सवाल

    आदिवासी छात्रों का 180 किमी मुंबई मार्च शुरू, 584 मौतों से लेकर स्कूल सुविधाओं तक उठे सवाल

    महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों ने नाशिक से मुंबई तक 180 किमी मार्च शुरू किया। आश्रमशालाओं में 584 मौतें, सुरक्षा, भोजन और लंबित मांगें मुद्दा बनीं।

    मुंबई: नाशिक से मुंबई तक आदिवासी छात्रों का 180 किमी ‘Tribal Gen Z Ulgulan’ मार्च सोमवार, 28 सितंबर को शुरू हो गया। करीब 40 दिनों से नाशिक में चल रहे धरने के बाद सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति के नेतृत्व में छात्र और आदिवासी समुदाय के लोग मुंबई के राजभवन की ओर पैदल रवाना हुए हैं। आंदोलन का केंद्र सिर्फ स्कूलों की सुविधाएं नहीं, बल्कि आश्रमशालाओं में छात्रों की सुरक्षा, मौतों की जांच, भोजन व्यवस्था, छात्रावास सुविधाएं, लंबित आर्थिक सहायता और सरकारी आश्वासनों के क्रियान्वयन का सवाल बन चुका है।

    आयोजकों के अनुसार पहले दिन करीब 1,500 छात्र शामिल हो सकते हैं। यह मार्च नाशिक, खानदेश, उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ सहित अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रों और समर्थकों को जोड़ रहा है। मार्च का अंतिम पड़ाव मुंबई का राजभवन है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसके 4 से 5 अक्टूबर के बीच मुंबई पहुंचने की संभावना है।

    आखिर छात्र 180 किमी पैदल मुंबई क्यों आ रहे हैं?

    छात्रों का कहना है कि नाशिक में लंबे धरने और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद उनकी कई प्रमुख मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी मांगों में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके का इस्तीफा, आदिवासी विकास विभाग के सचिव विजय वाघमारे और आयुक्त लीना बंसोडे के तबादले, आश्रमशालाओं और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार, विद्यार्थियों की मौतों की स्वतंत्र जांच तथा पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता शामिल है।

    25 सितंबर को आदिवासी विकास विभाग और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठक भी हुई थी। सरकार ने 27 मांगों पर अपनी स्थिति बताते हुए सात पन्नों का पत्र जारी किया। कुछ मांगों पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई, जबकि कई मामलों को नीतिगत निर्णय से जोड़कर अभी लंबित रखा गया है। छात्रों की मुख्य आपत्ति यह है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट लिखित प्रतिबद्धता और जमीन पर कार्रवाई चाहिए।

    दो साल में 584 आदिवासी छात्रों की मौत का आंकड़ा क्यों बना बड़ा मुद्दा?

    इस आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू महाराष्ट्र की आश्रमशालाओं से जुड़ा 584 विद्यार्थियों की मौत का सरकारी आंकड़ा है। आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 2024-25 और 2025-26 के दौरान सरकारी और सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं में कुल 584 विद्यार्थियों की मौत दर्ज हुई। इनमें 384 मौतें सरकारी आश्रमशालाओं और 200 मौतें सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं से जुड़ी थीं।

    इन मौतों के कारणों में गंभीर बीमारी, सिकल सेल, दुर्घटना, आत्महत्या और सर्पदंश शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 273 मौतें गंभीर बीमारी, 228 दुर्घटना, 55 फांसी और 28 सर्पदंश से जुड़ी थीं। कुल मौतों में लगभग 88 प्रतिशत मौतें विद्यार्थियों के घर पर और करीब 11 प्रतिशत आश्रमशाला परिसर में हुईं। हालांकि 584 मौतों का सवाल सीधे स्कूल की लापरवाही से जुड़ा नहीं है। असल सवाल प्रत्येक मौत के कारण, इलाज, सुरक्षा व्यवस्था और संस्थागत जिम्मेदारी की जांच का है।

    इसी वजह से आंदोलनकारी स्वतंत्र और मामले-दर-मामले जांच की मांग कर रहे हैं। नाशिक के सांसद भास्कर भगरे ने भी 584 मौतों की अलग-अलग परिस्थितियों की जांच की मांग उठाई है, जिसमें इलाज, पोषण, पेयजल, स्वच्छता, आवास, कर्मचारियों की उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की जांच शामिल है।

    गढ़चिरौली की तीन छात्राओं की मौत ने बढ़ाए सवाल

    9 अगस्त को गढ़चिरौली के जपतलाई गांव स्थित सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूल के छात्रावास में सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद राज्य सरकार ने संबंधित स्कूल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की कार्रवाई की और पूरे राज्य की आश्रमशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।

    मामला बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ तक भी पहुंचा। अदालत के रिकॉर्ड में छात्रावास में पर्याप्त शौचालय और स्नानघर, अलमारियों, भोजन कक्ष और सीसीटीवी जैसी व्यवस्थाओं से जुड़ी कमियों का उल्लेख है। एक निरीक्षण में 9 सीसीटीवी में से केवल 5 के काम करने की जानकारी भी सामने आई। अदालत ने पहले के निरीक्षण और बाद की जांच में सामने आई स्थितियों के अंतर को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जरूरत बताई।

    मामले में मारोतराव कोवसे, उनके बेटे विश्वजीत कोवसे और छात्रावास अधीक्षक भाग्यश्री चिल्लमवार से जुड़ी अग्रिम जमानत याचिकाएं भी हाईकोर्ट के सामने आईं और अदालत ने उन्हें खारिज किया। इस मामले की कानूनी जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है।

    584 मौतों की जांच के लिए बनी समिति, लेकिन सवाल रिपोर्ट पर

    आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने 584 विद्यार्थियों की मौत के कारणों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाए जाने की जानकारी दी है। सरकार के अनुसार आश्रमशालाओं की जांच चल रही है और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    अब छात्रों की मांग यह है कि जांच केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित न रहे और मौतों की स्वतंत्र तथा पारदर्शी जांच हो। दूसरी ओर सरकार की ओर से विशेषज्ञ समिति और आश्रमशालाओं के निरीक्षण की प्रक्रिया चलने की बात कही गई है। इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई होगी।

    511 सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं के ऑडिट पर भी नजर

    गढ़चिरौली की घटना के बाद राज्य सरकार ने लगभग 511 सहायता प्राप्त आश्रमशालाओं का तीसरे पक्ष से सुरक्षा ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षा, आधारभूत ढांचे और बच्चों के रहने की परिस्थितियों की जांच करना था।

    अब सवाल यह है कि 28 सितंबर तक कितनी आश्रमशालाओं का ऑडिट पूरा हुआ, कितनी जगह कमियां मिलीं और कितने संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। यह जानकारी सामने आना आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक पर सरकार की वास्तविक प्रगति स्पष्ट कर सकता है।

    केंद्रीय रसोई व्यवस्था पर भी बड़ा विवाद

    आंदोलनकारी आश्रमशालाओं के लिए केंद्रीय रसोई से खाना भेजने की व्यवस्था खत्म करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि खाना पहले तैयार होने और लंबी दूरी तक ले जाए जाने के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। कच्चे माल की लेबलिंग, एक्सपायरी और गुणवत्ता जांच को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    सरकार ने कहा है कि केंद्रीय रसोई से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में भोजन पहुंचाया जाता है और इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए समिति बनाई गई है। इसी बीच स्कूलों, छात्रावासों, आश्रमशालाओं, केंद्रीय रसोई और भोजन आपूर्तिकर्ताओं की जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की विशेष निरीक्षण मुहिम भी शुरू की गई है। इसमें भोजन के नमूने, एफएसएसएआई पंजीकरण, प्रशिक्षित कर्मचारियों और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच शामिल है।

    सरकारी छात्रावास मुफ्त, फिर फीस वसूली का आरोप क्यों?

    आदिवासी विकास विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार पात्र अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए सरकारी छात्रावास में रहने, भोजन और शैक्षणिक सामग्री जैसी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

    इसके बावजूद आंदोलन से जुड़े लोगों ने कुछ संस्थानों में प्रवेश, दान और अन्य शुल्क के नाम पर बड़ी रकम वसूले जाने का आरोप लगाया है। कुछ मामलों में यह रकम एक लाख रुपये तक होने का दावा किया गया है। छात्रों ने ऐसी कथित वसूली की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

    इस आरोप की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए संबंधित संस्थानों के शुल्क रिकॉर्ड और विभागीय जांच का सामने आना जरूरी होगा।

    Swayam योजना का पैसा भी आंदोलन का मुद्दा

    आंदोलन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयम् योजना के लंबित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की राशि जारी करने और सहायता बढ़ाने की मांग भी शामिल है।

    स्वयम् योजना उन अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए है जिन्हें सरकारी छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता और जो उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ते हैं। योजना के तहत भोजन, आवास, निर्वाह और शैक्षणिक सामग्री जैसी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है। छात्रों का कहना है कि लंबित भुगतान और सहायता की अपर्याप्त राशि के कारण उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    अगस्त में छात्रावास के नियम बदले, फिर भी आंदोलन क्यों जारी?

    अगस्त में छात्रावास प्रवेश और नियमों को लेकर छात्रों का विरोध तेज हुआ था। 30 वर्ष की आयु सीमा सहित नए प्रावधानों को लेकर विवाद के बाद सरकार ने 14 अगस्त के संबंधित शासन निर्णय और संशोधित नियम वापस लेने तथा आयु सीमा हटाने की घोषणा की थी।

    लेकिन इसके बाद आंदोलन खत्म नहीं हुआ। इसका कारण यह है कि छात्रों की मौजूदा मांगें केवल छात्रावास की आयु सीमा तक सीमित नहीं हैं। अब मुद्दा आश्रमशालाओं की सुरक्षा, 584 मौतों की जांच, भोजन, छात्रावास, स्वास्थ्य सुविधा, आर्थिक सहायता और अधिकारियों की जवाबदेही तक फैल चुका है।

    नाशिक से मुंबई तक आगे क्या?

    मार्च के दौरान छात्र दिन में पैदल चलने और रात में खुले स्थानों पर रुकने की योजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित मार्ग नाशिक से इगतपुरी, कसारा, शाहपुर और ठाणे क्षेत्र होते हुए मुंबई तक जाने का है। आयोजकों का लक्ष्य राजभवन पहुंचकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सीधे मुलाकात करना है।

    आंदोलन से जुड़े राहुल पावरा सहित नेताओं का कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रों और आदिवासी समुदाय के लोगों की भागीदारी बढ़ रही है। पहले हुए संवादों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मंत्री अशोक उईके और नाशिक के तत्कालीन जिलाधिकारी आयुष प्रसाद से बातचीत का भी उल्लेख किया गया था। छात्रों की मांग है कि सरकार उनके मुद्दों पर लिखित और स्पष्ट निर्णय दे।

    इससे पहले 3 सितंबर को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर भूख हड़ताल समाप्त कर आंदोलन मुंबई ले जाने का आग्रह किया था। अब आंदोलन नाशिक से निकलकर सीधे राज्य की राजधानी की ओर बढ़ गया है।

    सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि 180 किलोमीटर की इस पैदल यात्रा के मुंबई पहुंचने से पहले सरकार छात्रों के साथ कोई ठोस लिखित समझौता करती है या आंदोलन राजभवन तक पहुंचता है। 25 सितंबर के सात पन्नों के सरकारी जवाब के बाद अब छात्रों की नजर केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मांगों के वास्तविक क्रियान्वयन पर है।

  • महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, पुणे के 8 तालुकों में किसानों को मिलेगी राहत

    महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित, पुणे के 8 तालुकों में किसानों को मिलेगी राहत

    महाराष्ट्र के 265 तालुकों में सूखा घोषित हुआ है। पुणे के 8 तालुकों में राहत उपाय लागू, फसल नुकसान का मुआवजा सर्वे के बाद तय होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र के 358 में से 265 तालुकों में सूखे की स्थिति घोषित कर दी गई है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में तत्काल राहत उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। पुणे जिले के भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर तालुकों को भी सूखा प्रभावित सूची में शामिल किया गया है।

    लंबे समय तक बारिश नहीं होने और खरीफ फसलों पर पड़े असर को देखते हुए यह फैसला सूखा प्रबंधन व्यवस्था के तहत लिया गया है। राज्य में प्रभावित तालुकों की संख्या कुल 358 में से करीब 74 प्रतिशत है।

    पुणे के 8 तालुकों में सूखे का असर

    पुणे जिले के आठ तालुकों में खरीफ मौसम के दौरान बारिश की कमी से फसलों और पानी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। भोर, वेल्हे, खेड़, शिरूर, बारामती, इंदापुर, दौंड और पुरंदर को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने के बाद इन क्षेत्रों में राहत उपाय लागू होंगे।

    कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने दौंड, बारामती और इंदापुर सहित प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसल और पानी की स्थिति का जायजा लिया था। ग्रामीण इलाकों में खरीफ फसलों के नुकसान के साथ पेयजल और पशुओं के लिए पानी तथा चारे को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

    किसानों को कर्ज से लेकर बिजली तक राहत

    सूखा प्रभावित तालुकों में किसानों को भू-राजस्व में छूट दी जाएगी। अल्पकालिक फसल ऋणों के पुनर्गठन और कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत दी गई है। 7.5 अश्वशक्ति तक के कृषि पंपों के बिजली बिल से जुड़ी राहत पहले से लागू थी। नई व्यवस्था में इससे अधिक क्षमता वाले कृषि पंपों के लिए भी प्रभावित क्षेत्रों में रियायत का प्रावधान किया गया है। सूखा प्रभावित गांवों में बिजली की कमी के कारण कृषि पंपों के बिजली कनेक्शन नहीं काटने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    राहत में विद्यार्थियों और मजदूरों को भी शामिल किया गया

    सूखा प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम उपलब्ध कराने के नियमों में ढील दी जाएगी।

    फसल खराब होने से कृषि पर निर्भर मजदूरों की आय प्रभावित होने की स्थिति में रोजगार गारंटी के काम उनके लिए वैकल्पिक आय का माध्यम बन सकते हैं।

    पानी और चारे की व्यवस्था पर भी जोर

    सूखा प्रभावित गांवों में पेयजल व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकर उपलब्ध कराए जाएंगे। पशुओं के लिए पानी और पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने को भी कहा गया है।

    सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण के काम शुरू करने और किसानों तथा कृषि मजदूरों के लिए अनाज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    फसल नुकसान का मुआवजा अभी तय नहीं

    सूखा घोषित होने के बावजूद किसानों को मिलने वाली फसल नुकसान की अंतिम आर्थिक सहायता की राशि अभी तय नहीं हुई है। इसके लिए पहले खेतों में फसल नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

    जिला कलेक्टरों को पंचनामा तैयार करने और सर्वेक्षण किए गए खेतों की तस्वीरों के साथ जीपीएस निर्देशांक दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी कृषि विभाग के माध्यम से आगे भेजी जाएगी। नुकसान के आकलन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग सरकारी निर्णय के जरिए आर्थिक सहायता तय की जाएगी।

    इसका मतलब यह है कि सूखा प्रभावित घोषित होने के बाद राहत उपाय तुरंत लागू हो रहे हैं, लेकिन फसल नुकसान का प्रत्यक्ष मुआवजा कितना मिलेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    पुणे में रबी फसल के लिए समय से पहले पानी

    खरीफ फसल पर बारिश की कमी का असर पड़ने के बीच पुणे के ग्रामीण इलाकों में रबी फसल के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की तैयारी भी तेज की गई है।

    खड़कवासला बांध प्रणाली से मुठा नहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया सामान्य समय से करीब तीन सप्ताह पहले शुरू की गई है। 25 सितंबर से पानी छोड़े जाने की योजना है। इससे दौंड और इंदापुर सहित सिंचाई पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्रों को रबी फसल के लिए पानी मिलने की उम्मीद है।

    पुणे में बारिश की लंबी कमी

    पुणे में इस वर्ष बारिश के लंबे अंतराल ने स्थिति को और गंभीर बनाया है। शिवाजीनगर में 1 अगस्त के बाद 24 सितंबर तक 54 दिनों के दौरान एक दिन भी 10 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश दर्ज नहीं हुई। यह 2018 के बाद वहां ऐसा सबसे लंबा दौर बताया गया है।

    राज्य स्तर पर भी 1 जून से 18 सितंबर के बीच सामान्य 932.3 मिलीमीटर के मुकाबले करीब 755.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो लगभग 18.8 प्रतिशत कम है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की कमी एक जैसी नहीं रही और कई इलाकों में स्थिति इससे अधिक गंभीर रही।

    महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे का असर

    सूखा घोषित किए गए 265 तालुके राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं। विदर्भ में 95, मराठवाड़ा में 74, उत्तर महाराष्ट्र में 49, पुणे संभाग में 35 और कोंकण में 12 तालुके प्रभावित हैं।

    खरीफ मौसम में सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तुअर, मूंग और उड़द जैसी फसलों पर बारिश की कमी का असर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में फसल की स्थिति के साथ कीट और रोग की समस्या भी सामने आई है।

    अब किसानों को क्या देखना होगा

    अगले चरण में सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया फसल नुकसान का सर्वेक्षण और पंचनामा है। खेतों की स्थिति का दस्तावेजीकरण होने के बाद नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसी आकलन के आधार पर आगे आर्थिक सहायता का निर्णय लिया जाएगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से ऋण, बिजली, भू-राजस्व, पानी, चारा, रोजगार और परीक्षा शुल्क से जुड़े राहत उपाय लागू किए गए हैं। वहीं, फसल नुकसान के लिए मिलने वाली अंतिम आर्थिक सहायता का फैसला सर्वेक्षण और सत्यापन पूरा होने के बाद किया जाना है।

  • 14 फुट से ऊपर की झोपड़ियां तोड़ने से पहले बीएमसी बताए, क्या सो रहा था प्रशासन?

    14 फुट से ऊपर की झोपड़ियां तोड़ने से पहले बीएमसी बताए, क्या सो रहा था प्रशासन?

    मुंबई में 14 फुट या उससे ऊंची झोपड़ियों पर बीएमसी की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। पुनर्वास के बीच पुराने ढांचों पर कार्रवाई, प्रशासनिक जवाबदेही और मुंबईकरों के पैसे के इस्तेमाल पर सवाल।

    मुंबई: 14 फुट या उससे अधिक ऊंचाई वाली 39,111 झोपड़ी संरचनाओं के खिलाफ बीएमसी ने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक विशेष कार्रवाई की घोषणा की है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2,23,150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें 39,111 संरचनाएं 14 फुट या उससे अधिक ऊंचाई की बताई गई हैं। मुंबई शहर में 3,348, पश्चिमी उपनगरों में 4,536 और पूर्वी उपनगरों में 31,227 संरचनाएं शामिल हैं। 4,584 संरचनाओं पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और 611 को नोटिस दिए गए हैं।

    लेकिन इस कार्रवाई के साथ एक बुनियादी सवाल खड़ा होता है—अगर इन झोपड़ियों में अनधिकृत निर्माण वर्षों से मौजूद था और बीएमसी के पास वार्ड स्तर पर निगरानी तथा कार्रवाई की व्यवस्था थी, तो निर्माण को 14 फुट से अधिक होने से पहले क्यों नहीं रोका गया? इसमें साफ है कि भ्रष्टाचार खुद बीएमसी के अधिकारियों ने किया है। वरना अवैध निर्माण होते ही नहीं।

    अब पुराने ढांचे तोड़ने की तैयारी क्यों?

    मुंबई में झोपड़पट्टियों के पुनर्विकास और पात्र झोपड़ीवासियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की एसआरए व्यवस्था पहले से काम कर रही है। एसआरए की आधिकारिक व्यवस्था में झोपड़पट्टी का सर्वे, झोपड़ियों का माप, पात्रता का निर्धारण और पुनर्वास योजना को आगे बढ़ाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

    ऐसे में सवाल यह है कि जिन इलाकों में पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है, वहां वर्षों पुराने झोपड़ी ढांचों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई क्या उसी पुनर्वास प्रक्रिया के साथ तालमेल के लिए या किसी खास डेवलपर को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है?

    नया अवैध निर्माण रोकना था, पुराने घर तोड़ना क्यों?

    अनधिकृत निर्माण पर कार्रवाई की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन प्रशासनिक नीति का सबसे अहम सवाल यह है कि कार्रवाई का केंद्र क्या होना चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति आज नया अवैध निर्माण कर रहा है, अतिरिक्त मंजिल खड़ी कर रहा है या झोपड़ी की ऊंचाई लगातार बढ़ा रहा है, तो उसे निर्माण के दौरान ही रोकना बीएमसी की जिम्मेदारी के दायरे में आता है। इसी के लिए तो प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियां की गई है।

    इसके विपरीत वर्षों से मौजूद झोपड़ी को अब केवल उसकी मौजूदा ऊंचाई के आधार पर निशाना बनाना गरीब परिवारों के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

    यही वजह है कि बीएमसी को सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए—39,111 संरचनाएं इतनी बड़ी संख्या में 14 फुट या उससे अधिक ऊंचाई तक पहुंचीं तो इन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

    मुंबईकरों के पैसों से अधिकारियों को वेतन, फिर जवाबदेही किसकी?

    यह सवाल केवल झोपड़ी तोड़ने तक सीमित नहीं है। यह मुंबईकरों के पैसे और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

    बीएमसी के अलग-अलग वार्डों में अनधिकृत निर्माण की निगरानी, निरीक्षण, नोटिस और कार्रवाई के लिए अधिकारी और कर्मचारी नियुक्त हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन सार्वजनिक धन से दिया जाता है। यह धन मुंबईकरों से मिलने वाले कर और विभिन्न शुल्कों से आता है।

    अगर किसी इलाके में अनधिकृत निर्माण वर्षों तक बढ़ता रहा और अब हजारों संरचनाओं पर एक साथ कार्रवाई की जरूरत पड़ रही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उस दौरान निगरानी व्यवस्था ने क्या काम किया?

    अगर किसी अधिकारी की जिम्मेदारी के क्षेत्र में निर्माण बढ़ता रहा, तो वहां के सहायक आयुक्त की जवाबदेही तय है? जब मुंबई भर में इतना बड़ा आंकड़ा सामने आया है तो क्या पुराने निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या यह देखा जाएगा कि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई थी या नियमित निरीक्षण ही नहीं हुआ?

    और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—अगर प्रशासन की निगरानी में कमी के कारण आज बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और कार्रवाई पर सार्वजनिक धन खर्च होगा, तो उस अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी किसकी होगी?

    मुंबईकर अपने मेहनत के पैसे से बीएमसी को वेतन और प्रशासनिक व्यवस्था चलाने के लिए पैसा देते हैं। इसलिए जनता यह जानने का अधिकार रखती है कि जिस निर्माण को समय रहते रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, उसे वर्षों तक बढ़ने देने के बाद अब उसी पर कार्रवाई करने में होने वाला अतिरिक्त सरकारी खर्च किस प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।

    हालांकि केवल किसी निर्माण के लंबे समय तक मौजूद रहने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी अधिकारी ने जानबूझकर उसे बनने दिया या भ्रष्टाचार किया। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित मामलों के निरीक्षण रिकॉर्ड, शिकायतें, नोटिस, कार्रवाई आदेश और अधिकारी की जिम्मेदारी की जांच जरूरी होगी।

    लेकिन अगर बीएमसी वास्तव में जवाबदेही को गंभीरता से लेना चाहती है, तो 39,111 संरचनाओं की कार्रवाई के साथ यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि इनमें से कितने मामले पुराने हैं और उन पर पहले क्या कार्रवाई की गई थी।

    14 फुट का मानक नया नहीं

    बीएमसी के पुराने रिकॉर्ड में भी 14 फुट से अधिक ऊंचाई बढ़ाने वाले अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के उदाहरण मिलते हैं। यानी 14 फुट की सीमा सितंबर 2026 में अचानक सामने आया नया मानक नहीं है।

    इससे निगरानी की जवाबदेही और महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि यह सीमा पहले से प्रशासनिक कार्रवाई के दायरे में थी, तो इतने बड़े पैमाने पर संरचनाएं इस सीमा तक कैसे पहुंचीं?

    गरीब परिवारों पर कार्रवाई का असली असर क्या होगा?

    बीएमसी का कहना है कि कार्रवाई 14 फुट से ऊपर बने अनधिकृत हिस्से पर केंद्रित होगी। लेकिन जमीन पर रहने वाले परिवार के लिए यह सवाल इतना सरल नहीं है।

    कई झोपड़ियां वर्षों में धीरे-धीरे बदली और ऊपर की ओर बढ़ी हैं। नीचे का हिस्सा और बाद में जोड़ा गया हिस्सा कई मामलों में एक ही संरचना का हिस्सा हो सकता है। ऐसे में केवल ऊपर का हिस्सा हटाने से पूरी संरचना की मजबूती प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कई मामलों में ऊपर के हिस्से को तोड़ते समय पूरा स्ट्रक्चर ही भरभरा कर गिर गया है।

    इसलिए कार्रवाई से पहले प्रत्येक संरचना की वास्तविक स्थिति, निर्माण का समय, नीचे और ऊपर के हिस्से का संबंध तथा परिवार की पुनर्वास स्थिति दर्ज करना जरूरी होगा।

    एसआरए चल रहा है तो बीएमसी और एसआरए में तालमेल कहां है?

    शहरभर में सरकार ऑलरेडी झोपड़पट्टी हटाओ अभियान चला रही है। जिसके तहत अलग अलग सरकारी योजनाओं पर काम चल रहा है। जैसे कि एसआरए की व्यवस्था में झोपड़ी की पहचान, सर्वे, पात्रता और पुनर्वास योजना की प्रक्रिया पहले से मौजूद है। ऐसे में 39,111 संरचनाओं की सूची तैयार करते समय बीएमसी और बाकी सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड का मिलान होना चाहिए।

    यह साफ होना चाहिए कि इनमें से कितनी झोपड़ियां बाकी सरकारी योजनाओं के सर्वे में दर्ज हैं, कितने परिवार पात्रता प्रक्रिया में हैं, कितनी जगहों पर पुनर्वास योजना स्वीकृत या चल रही है और कितने मामलों में कोई पुनर्वास योजना नहीं है।

    यदि ऐसा समन्वय नहीं किया गया है तो कार्रवाई गरीब परिवारों के लिए दोहरी परेशानी पैदा कर सकती है—पहले वर्षों तक पुनर्वास की प्रतीक्षा और फिर मौजूदा घर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई।

    कार्रवाई से पहले बीएमसी को जवाब देना चाहिए

    39,111 झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई कोई सामान्य प्रशासनिक अभियान नहीं है। इसके पीछे हजारों परिवार और उनके घर जुड़े हैं।

    इसलिए बीएमसी को कार्रवाई शुरू करने से पहले 14 फुट की ऊंचाई नापने का स्पष्ट आधार, वॉर्डवार सूची, प्रत्येक संरचना के खिलाफ पूर्व कार्रवाई का रिकॉर्ड, एसआरए रिकॉर्ड से मिलान और कार्रवाई के दौरान परिवारों की सुरक्षा से जुड़े नियम सार्वजनिक करने चाहिए।

    इसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में ये निर्माण वर्षों तक बढ़ते रहे, उनकी भूमिका और जवाबदेही की समीक्षा कैसे होगी।

    नया अवैध निर्माण रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन वर्षों से मौजूद गरीबों के घरों पर कार्रवाई करने से पहले यह जवाब भी जरूरी है कि जब ये निर्माण बढ़ रहे थे, तब प्रशासन क्या कर रहा था?

    और अगर उस समय निगरानी नहीं हुई, तो मुंबईकरों के मेहनत के पैसे से अधिकारियों को दिए गए वेतन और उस पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही आखिर किसकी है?

    मुंबई को अनधिकृत निर्माण से मुक्त करने की नीति यदि वास्तव में सुरक्षा और नियोजन के उद्देश्य से है, तो उसका पहला लक्ष्य नया अवैध निर्माण रोकना, दूसरा पुराने मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही तय करना और तीसरा सरकारी योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास होना चाहिए।

    पुराने घरों पर कार्रवाई करके केवल आंकड़ा कम करना समाधान नहीं है। समाधान तब होगा जब अवैध निर्माण भी रुके, प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो और गरीब परिवार पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले अपने घर से बेघर न हों।

  • मुंबई Water Cut: 29 सितंबर को चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 24 घंटे पानी बंद, 7 दिन लो-प्रेशर

    मुंबई Water Cut: 29 सितंबर को चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 24 घंटे पानी बंद, 7 दिन लो-प्रेशर

    मुंबई के चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 29 सितंबर से 24 घंटे पानी बंद रहेगा। पूरी प्रभावित इलाकों की सूची और 7 दिन के लो-प्रेशर की जानकारी देखें।

    मुंबई: चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द के कई इलाकों में 29 सितंबर को 24 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहेगी। BMC नए water tunnel की commissioning का काम करेगी, जिसके चलते 29 सितंबर सुबह 10 बजे से 30 सितंबर सुबह 10 बजे तक प्रभावित क्षेत्रों में पानी नहीं आएगा। इसके बाद भी करीब सात दिनों तक कुछ इलाकों में पानी कम दबाव यानी low pressure से मिलने की संभावना है।

    BMC ने प्रभावित इलाकों के निवासियों को shutdown शुरू होने से पहले पर्याप्त पानी जमा रखने और पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी है।

    कब से कब तक बंद रहेगी पानी की सप्लाई?

    पानी की सप्लाई 29 सितंबर सुबह 10 बजे से बंद होगी और 30 सितंबर सुबह 10 बजे बहाल की जाएगी। हालांकि, supply शुरू होने के बाद तुरंत सामान्य pressure मिलने की गारंटी नहीं है। BMC के अनुसार, इसके बाद लगभग सात दिनों तक affected areas में low-pressure water supply की स्थिति रह सकती है।

    इसका मतलब है कि 24 घंटे का complete shutdown खत्म होने के बाद भी ऊपरी मंजिलों, ज्यादा ऊंचाई वाली इमारतों और उन housing societies में परेशानी रह सकती है जहां पानी पहुंचने के लिए पर्याप्त pressure जरूरी होता है।

    M-East Ward में किन इलाकों पर असर?

    M-East Ward में Lallubhai Compound, Shivajinagar, Washinaka, Mankhurd, Govandi, Bainganwadi, Bharat Nagar, Cheetah Camp, Deonar Village और Deonar Colony, Rafiq Nagar, Mandala, Padma Nagar, Vishnu Nagar, Maharashtra Nagar और Indian Oil Nagar प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

    इसके अलावा BD Patil Marg के आसपास refinery area के कुछ हिस्सों में भी पानी की सप्लाई प्रभावित होगी।

    M-West Ward में किन इलाकों में पानी बंद रहेगा?

    M-West Ward में Chembur के बड़े हिस्से में पानी की सप्लाई प्रभावित होगी। इनमें Maitri Park, Ghatla, Chembur Gaothan, Subhash Nagar, Suman Nagar, Tilak Nagar, Sindhi Camp, Chembur Camp, Gandhi Market, Central Avenue Road, R C Marg, Mahul Village, Wadala, Vashi Naka, Bhakti Park और Sahakar Nagar शामिल हैं।

    Shell Colony और P L Lokhande Marg के आसपास के इलाकों में भी असर पड़ेगा।

    कौन-कौन से बड़े संस्थान प्रभावित क्षेत्र में हैं?

    प्रभावित क्षेत्र की सूची में BPCL, Mazagon Dock, Tata Power, Aegis Ltd और BPT जैसे बड़े institutional और industrial establishments भी शामिल हैं।

    इन संस्थानों के अपने internal water-storage और supply arrangements अलग हो सकते हैं, इसलिए इनके operational impact को residential water supply के समान मानना उचित नहीं होगा।

    नए water tunnel की commissioning क्यों हो रही है?

    यह shutdown केवल सामान्य पाइपलाइन maintenance के लिए नहीं है। BMC Mumbai के eastern और central हिस्सों के water-distribution network को मजबूत करने के लिए नए underground water tunnel system की commissioning कर रही है।

    इस broader network में Amar Mahal से Pratiksha Nagar तक का करीब 1,800-mm diameter का tunnel शामिल है। यह network Parel, Trombay Reservoir और आगे Turbhe High Level Reservoir से जुड़ता है। ऐसे connection का उद्देश्य water distribution network को मजबूत करना और अलग-अलग water-supply systems के बीच distribution capacity को बेहतर बनाना है।

    29 सितंबर का shutdown इसी broader tunnel commissioning process की अगली operational stage से जुड़ा है।

    2026 में पहले भी हो चुके हैं water shutdown

    Chembur, Govandi और Mankhurd के लिए 2026 में tunnel-related water-supply disruptions पहले भी हो चुके हैं। मई में Amar Mahal से Pratiksha Nagar तक नए 1,800-mm tunnel को commission करने के लिए 30 घंटे का बड़ा shutdown किया गया था। इसके बाद मई में ही Chembur, Govandi और Mankhurd के कुछ हिस्सों में tunnel commissioning से जुड़े काम के कारण अलग water cut भी हुआ था।

    इसलिए 29 सितंबर का shutdown इस क्षेत्र के water infrastructure में चल रहे बड़े commissioning और network-integration work की अगली कड़ी है।

    30 सितंबर के बाद पानी पूरी तरह सामान्य कब होगा?

    30 सितंबर सुबह 10 बजे से supply बहाल होने की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में करीब सात दिनों तक low pressure रहने की संभावना है। इसलिए पानी आने का मतलब यह नहीं होगा कि हर इलाके में तुरंत सामान्य pressure बहाल हो जाएगा।

    खासकर ऊपरी मंजिलों और ऐसे residential buildings में जहां पानी overhead tanks तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त pressure की जरूरत होती है, recovery period के दौरान ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है।

    Residents को क्या करना चाहिए?

    प्रभावित इलाकों के घरों और housing societies को 29 सितंबर सुबह 10 बजे से पहले अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी का भंडारण कर लेना चाहिए। पानी का इस्तेमाल पीने, खाना बनाने, सफाई और अन्य जरूरी घरेलू कामों के लिए प्राथमिकता के आधार पर करना उपयोगी रहेगा।

    Housing societies को shutdown से पहले अपने overhead और storage tanks की स्थिति भी जांच लेनी चाहिए, ताकि 24 घंटे की supply disruption के दौरान उपलब्ध storage का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

    क्या BMC टैंकर से पानी उपलब्ध कराएगी?

    29 सितंबर के shutdown के लिए उपलब्ध ताजा सार्वजनिक जानकारी में प्रभावित इलाकों के लिए किसी specific tanker point या अलग tanker deployment schedule की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसी particular location पर tanker उपलब्ध होने का दावा बिना BMC की पुष्टि के नहीं किया जाना चाहिए।

    अभी सबसे जरूरी बात यह है कि प्रभावित निवासी shutdown से पहले अपनी पानी की जरूरत पूरी करने की तैयारी रखें।

    पानी की सप्लाई पर असर क्यों महत्वपूर्ण है?

    Chembur, Govandi और Mankhurd के प्रभावित हिस्सों में बड़ी residential आबादी के साथ commercial, institutional और industrial establishments भी हैं। ऐसे में 24 घंटे का shutdown केवल घरेलू पानी की समस्या तक सीमित नहीं रहेगा। इसके बाद सात दिनों तक low pressure रहने की स्थिति भी उन इमारतों और कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो नियमित municipal water pressure पर निर्भर हैं।

    BMC का यह काम पूरा होने के बाद नए tunnel और existing water-distribution network के बीच connection और commissioning प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल residents के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थिति 29 सितंबर से शुरू होने वाला 24-hour shutdown और उसके बाद संभावित सात दिन का low-pressure period है।

  • मुंबई लोकल को मिलेगी नई रफ्तार: Borivali, Andheri और Virar में 4 नए प्लेटफॉर्म, 30-40 अतिरिक्त सर्विस की बनेगी गुंजाइश

    मुंबई लोकल को मिलेगी नई रफ्तार: Borivali, Andheri और Virar में 4 नए प्लेटफॉर्म, 30-40 अतिरिक्त सर्विस की बनेगी गुंजाइश

    Western Railway Borivali, Andheri और Virar में 4 नए प्लेटफॉर्म बनाएगी। 5वीं-6वीं लाइन से Virar तक 30-40 अतिरिक्त लोकल सर्विस की क्षमता बढ़ेगी।

    मुंबई: मुंबई लोकल ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए Western Railway के तीन बड़े स्टेशनों पर capacity augmentation का काम आगे बढ़ रहा है। Borivali में दो, Andheri में एक और Virar में एक नया प्लेटफॉर्म प्रस्तावित है।

    इसके साथ Borivali-Virar के बीच 5वीं और 6वीं रेल लाइन का काम भी आगे बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में Virar तक करीब 30-40 अतिरिक्त suburban local services चलाने के लिए operational capacity बन सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 30-40 नई लोकल ट्रेनें तुरंत शुरू होने जा रही हैं।

    इस पूरे infrastructure expansion का मकसद सिर्फ प्लेटफॉर्म बढ़ाना नहीं है। Borivali-Virar corridor में suburban और लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए अलग capacity तैयार करना, स्टेशन संचालन को ज्यादा flexible बनाना और बढ़ते passenger load के मुताबिक भविष्य की local services के लिए जगह तैयार करना इसका बड़ा उद्देश्य है।

    Borivali में दो नए प्लेटफॉर्म, अलग-अलग projects से जुड़ा काम

    Borivali में बनने वाले दोनों प्लेटफॉर्म एक ही उद्देश्य के लिए नहीं हैं। पहला Platform 3A, Borivali-Virar 5वीं और 6वीं लाइन project से जुड़ा है। दूसरा Platform 1A, Goregaon-Borivali Harbour Line extension के लिए बनाया जाएगा। दोनों प्लेटफॉर्म करीब 330 मीटर लंबे और 7 मीटर चौड़े होने की योजना है।

    Platform 3A का संबंध Borivali-Virar corridor की suburban capacity से है। नई 5वीं और 6वीं लाइनें उपलब्ध होने के बाद local और दूसरे train movements को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग capacity मिल सकेगी। इससे existing four-line corridor पर train paths को लेकर होने वाले operational conflicts कम करने में मदद मिलेगी।

    Borivali station पर Platform 10 को भी north और south दिशा में extend करने तथा northern-end yard को नई 5वीं और 6वीं lines से जोड़ने जैसे infrastructure works की योजना का हिस्सा बनाया गया है। इससे station की handling capacity और operational flexibility बढ़ाने का प्रयास होगा।

    Andheri में सिर्फ नया प्लेटफॉर्म नहीं, East-side exit भी बदलेगा

    Andheri में expansion का passenger impact अलग तरह का है। पहले चरण में platforms 4 और 5 को south की ओर extend किया जाएगा। Platform 5 से Virar दिशा में train reversal की operational सुविधा विकसित करने की योजना है।

    Platforms 6 और 7 को भी extend किया जाएगा और signalling में बदलाव होंगे। Signal S-49 को south की ओर shift करने तथा Platform 7 के northern end पर नया signal लगाने की योजना है। इससे longer trains को platform पर पूरी तरह accommodate करने में मदद मिलेगी।

    Andheri expansion का दूसरा चरण यात्रियों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। Sixth line के साथ station के north side पर नया 12-coach home platform प्रस्तावित है। इसे double-discharge platform के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे Platform 9 पर आने वाली ट्रेन के यात्रियों को दोनों तरफ से उतरने की सुविधा मिल सकेगी।

    इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा Andheri East की तरफ जाने वाले यात्रियों को हो सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में यात्रियों को Andheri East Road की दिशा में सीधे निकलने का रास्ता मिलेगा। अभी peak hours में यात्रियों को काफी हद तक foot overbridges और संकरी सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे भीड़ बढ़ती है। नए arrangement का उद्देश्य passenger flow को बेहतर करना और FOB तथा staircases पर दबाव कम करना है।

    Andheri station रोजाना करीब 4.5 लाख यात्रियों और 1,000 से ज्यादा suburban train movements को संभालता है। इसलिए यहां capacity augmentation का मतलब केवल अतिरिक्त train handling नहीं, बल्कि यात्रियों की station के अंदर आवाजाही को बेहतर बनाना भी है।

    Virar में नए प्लेटफॉर्म के साथ 15-coach local का भी बड़ा connection

    Virar में प्रस्तावित नया प्लेटफॉर्म Borivali-Virar 5वीं और 6वीं लाइन project से जुड़ा है। लेकिन Virar station पर इससे अलग capacity augmentation का काम पहले ही महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच चुका है।

    अप्रैल 2026 में Platform 3A और 4A को 6.5 मीटर से बढ़ाकर 10.5 मीटर चौड़ा किया गया और इन्हें 15-coach suburban trains को accommodate करने के लिए extend किया गया। इसके अलावा western side पर नया home Platform 5A भी बनाया गया। Western Railway और Mumbai Railway Vikas Corporation ने upgraded infrastructure पर EMU trial run भी किया था।

    Virar corridor में capacity बढ़ाने की रणनीति केवल नई railway lines तक सीमित नहीं है। Longer 15-coach trains को संभालने के लिए platform infrastructure भी तैयार किया जा रहा है।

    30-40 अतिरिक्त लोकल सेवाओं का मतलब क्या है?

    यह इस पूरे development का सबसे अहम सवाल है। जानकारी के अनुसार नई platforms और 5वीं-6वीं lines करीब 30-40 अतिरिक्त local services के लिए operational flexibility पैदा कर सकती हैं। इसे तत्काल 30-40 नई ट्रेनों की घोषणा के रूप में नहीं समझना चाहिए।

    पहले Borivali-Virar corridor की अतिरिक्त tracks और associated infrastructure तैयार होंगे। इसके बाद available capacity, signalling, train paths, rakes और operational requirements के आधार पर services बढ़ाने की योजना बनाई जा सकती है। Western Railway के मौजूदा network में पहले से बड़ी संख्या में suburban services चलती हैं और 15-coach trains तथा नए rakes के जरिए passenger carrying capacity बढ़ाने का भी काम चल रहा है।

    5वीं और 6वीं लाइन से local trains को क्या फायदा होगा?

    Borivali-Virar का 5वीं और 6वीं लाइन project 26 किलोमीटर लंबा है और इसकी स्वीकृत लागत ₹2,184 करोड़ है। इसका मुख्य उद्देश्य heavily utilised corridor में अतिरिक्त rail capacity तैयार करना और suburban तथा अन्य train movements के बीच बेहतर segregation करना है।

    अगस्त 2026 में इस project की physical progress करीब 30 प्रतिशत बताई गई थी और completion target 2029 रखा गया था। Project में land acquisition, bridges, platforms, foot overbridges, railway structures और अन्य civil works शामिल हैं।

    Project की प्रगति में Borivali से Virar के बीच कई locations पर railway structures को relocate करने का काम भी शामिल है। Dahisar, Mira Road, Bhayandar, Naigaon, Nalasopara और Vasai Road जैसे हिस्सों में relocation और associated works progress में रहे हैं।

    Latest project status में land acquisition और statutory clearances भी महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध project status के अनुसार लगभग 16 hectare में से 17 hectare के आसपास required land acquisition का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका था, जबकि bridge, earthwork, FOB और station-related works अलग-अलग चरणों में चल रहे थे।

    Virar के आगे Dahanu तक भी बढ़ रही है railway capacity

    Borivali-Virar expansion को अलग project मानकर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। Virar के आगे Virar-Dahanu Road section में भी 3rd और 4th railway lines का project चल रहा है।

    यह project करीब 64 किलोमीटर लंबा है और इसकी sanctioned cost ₹3,587 करोड़ है। इसका उद्देश्य Virar से Dahanu Road तक railway capacity बढ़ाना है।

    इससे Western Railway के northern suburban corridor में Borivali से Virar और आगे Dahanu तक capacity augmentation की एक बड़ी श्रृंखला तैयार हो रही है। Virar station पर 15-coach trains के लिए किए गए upgrades इसी broader capacity expansion का हिस्सा हैं।

    Harbour Line extension से Borivali को मिलेगा एक और connection

    Borivali का दूसरा नया platform Goregaon-Borivali Harbour Line extension से जुड़ा है। यह extension करीब 7 किलोमीटर लंबा है और इसकी sanctioned cost ₹826 करोड़ है।

    इस project के पूरा होने के बाद Harbour Line की connectivity Borivali तक बढ़ाने के लिए infrastructure तैयार होगा। इसलिए Borivali में Platform 1A का निर्माण केवल Virar-bound local capacity का हिस्सा नहीं है, बल्कि western suburbs में Harbour Line network को आगे बढ़ाने की योजना से भी जुड़ा है।

    Mumbai local network में यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?

    Mumbai suburban railway में passenger demand लगातार ऊंची है और existing corridors पर suburban तथा long-distance trains के बीच track capacity का इस्तेमाल करना पड़ता है। अतिरिक्त lines का सबसे बड़ा operational benefit यह है कि railway को train movements को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से plan करने के लिए अतिरिक्त track capacity मिलेगी।

    इसके साथ 15-coach trains, नए rakes, station platforms, signalling और passenger circulation infrastructure में सुधार होने से capacity augmentation कई स्तरों पर हो रही है। Mumbai suburban network की capacity बढ़ाने के लिए 238 नए 12-car rakes की procurement भी sanctioned है, जिसकी लागत ₹19,293 करोड़ बताई गई है।

    यात्रियों को फायदा कब मिलेगा?

    चार नए platforms और associated station works का फायदा construction और commissioning के बाद ही पूरी तरह दिखाई देगा। Borivali-Virar 5वीं और 6वीं लाइन project का latest reported completion target 2029 है। इसलिए 30-40 अतिरिक्त local services की संभावित capacity को भी long-term infrastructure benefit के रूप में देखना होगा, न कि तत्काल timetable change के रूप में।

    Virar में 15-coach trains के लिए platform infrastructure का upgrade पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि Borivali-Virar corridor की नई lines और Borivali तथा Andheri के station works आगे की capacity को मजबूत करेंगे।

    कुल मिलाकर Western Railway के Borivali, Andheri और Virar में होने वाले ये काम केवल नए platforms जोड़ने तक सीमित नहीं हैं। इनके साथ नई railway lines, longer local trains, Harbour Line connectivity, signalling और passenger circulation में बदलाव जुड़े हैं। अगर निर्धारित infrastructure works और commissioning समय पर आगे बढ़ते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर Virar तक suburban services की future capacity और heavily crowded Western Railway corridor के operational flexibility पर देखने को मिलेगा।

  • मुंबई FDA का बड़ा एक्शन: नकली घी से Kandivali Jain Sweet तक, कई ठिकानों पर कार्रवाई; Gallops का लाइसेंस सस्पेंड

    मुंबई FDA का बड़ा एक्शन: नकली घी से Kandivali Jain Sweet तक, कई ठिकानों पर कार्रवाई; Gallops का लाइसेंस सस्पेंड

    मुंबई FDA की बड़ी कार्रवाई में Gallops समेत 5 food establishments के लाइसेंस सस्पेंड किए गए। Malad में संदिग्ध मिलावटी घी, जबकि Kandivali के Jain Sweet & Bhelpuri House पर hygiene violations को लेकर कार्रवाई।

    मुंबई: त्योहारी सीजन के बीच महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई में food safety को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। Mahalaxmi Racecourse स्थित मशहूर Gallops Restaurant समेत पांच food establishments के लाइसेंस या registrations सस्पेंड किए गए हैं। वहीं अलग कार्रवाई में Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House पर भी food licence suspension की कार्रवाई हुई है।

    इस पूरे enforcement drive में सबसे बड़ी कार्रवाई Malad East स्थित Gurukrupa Dairy Products में सामने आई, जहां FDA अधिकारियों ने refined sunflower oil, vanaspati और branded ghee को मिलाकर कथित तौर पर ‘Pooja Ghee’ तैयार किए जाने का मामला पकड़ा। कार्रवाई के दौरान करीब 2,464.05 किलो संबंधित food stock जब्त किया गया। FDA के अनुसार जब्त stock की कीमत करीब 13.55 लाख रुपये थी, जबकि machinery सहित कुल जब्ती का मूल्य करीब 15.15 लाख रुपये बताया गया है।

    Gallops के kitchen में blood और ketchup-stained ice, cockroaches भी मिले

    Mahalaxmi Racecourse स्थित Gallops Restaurant में FDA inspection के दौरान refrigerator में रखी ice पर non-vegetarian food से जुड़े blood और ketchup के stains पाए गए। इसके अलावा raw material को torn और damaged packaging में रखने की बात सामने आई।

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    Inspection में kitchen में grease accumulation, खराब हालत वाली दीवारें, drainage points की inadequate covering, cockroach traps की खराब स्थिति, पानी जमा होना तथा live cockroaches और ants की मौजूदगी दर्ज की गई।

    FDA के अनुसार food handlers के annual medical examination और vaccination से संबंधित जरूरी records भी उपलब्ध नहीं थे। इन food-safety और hygiene violations के आधार पर Gallops का food licence suspend किया गया। Restaurant की ओर से कहा गया कि food-safety requirements पूरी करने के लिए operations को अस्थायी रूप से रोका गया है।

    Malad में ‘Pooja Ghee’ को लेकर बड़ा मामला

    Malad East स्थित Gurukrupa Dairy Products में FDA अधिकारियों ने refined sunflower oil, vanaspati यानी hydrogenated fat और branded ghee को दो boilers में मिलाए जाने का मामला पकड़ा।

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    FDA के अनुसार इस मिश्रण से white और yellow ghee तैयार किया जा रहा था और इसे ‘Pooja Ghee’ के नाम से बेचने की व्यवस्था थी। अधिकारियों ने labelling को भी misleading बताया है।

    Inspection के दौरान परिसर में rats और cockroaches की मौजूदगी की जानकारी भी सामने आई।

    कार्रवाई में करीब 2,464.05 किलो adulterated और misleadingly labelled ghee, refined sunflower oil और vanaspati जब्त किए गए। इनकी कीमत करीब ₹13.55 लाख बताई गई है। इसके अलावा दो boilers और एक khoya-making machine भी जब्त की गई, जिनकी कीमत करीब ₹1.60 लाख बताई गई। इस तरह stock और equipment की कुल कीमत करीब ₹15.15 लाख तक पहुंचती है।

    Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House पर भी FDA कार्रवाई

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    FDA की इसी enforcement कार्रवाई में Kandivali West रेलवे स्टेशन के पास Madhu Kunj, V.L. Road स्थित Jain Sweet & Bhelpuri House का food licence भी suspend किया गया।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई hygiene violations को लेकर हुई थी। Jain Sweet & Bhelpuri House को उन food establishments में शामिल किया गया है जिनके licences FDA ने हालिया inspection drive के दौरान suspend किए।

    Gufran Seekh Corner बिना valid food licence के मिला

    Andheri West के Versova-Yari Road स्थित Gufran Seekh Corner में FDA अधिकारियों को valid food licence या registration नहीं मिला।

    Inspection के दौरान food storage और segregation, premises और equipment की cleanliness, pest control तथा potable water testing से संबंधित कमियां भी सामने आईं। Food handlers के medical examination records से संबंधित deficiencies भी बताई गईं।

    22 सितंबर को FDA ने binding order जारी कर establishment को तत्काल business बंद करने का निर्देश दिया। यह तब तक जारी रहेगा जब तक valid licence या registration प्राप्त नहीं किया जाता और बताई गई deficiencies को दूर नहीं किया जाता।

    Bandra के Dreamer Hospitality और Mirari पर भी कार्रवाई

    Bandra West के Bandstand इलाके में स्थित Dreamer Hospitality Pvt Ltd के inspection में hygiene और health-related provisions के उल्लंघन पाए गए। इसके बाद licence suspension और आगे की legal action की प्रक्रिया शुरू की गई।

    इसी तरह St Dominic Road, Bandra West स्थित Mirari में भी hygiene और health से संबंधित violations सामने आने के बाद regulatory action लिया गया।

    इस FDA की प्रमुख ताजा कार्रवाई में मुंबई के पांच establishments — Gallops, Gurukrupa Dairy Products, Gufran Seekh Corner, Dreamer Hospitality Pvt Ltd और Mirari — शामिल रहे।

    सिर्फ restaurants नहीं, food supply chain भी FDA के निशाने पर

    मुंबई FDA की हालिया कार्रवाई से यह भी सामने आता है कि food safety inspection केवल restaurants तक सीमित नहीं है।

    एक तरफ Gallops जैसे restaurant में kitchen hygiene, food storage और pest control की जांच हुई, तो दूसरी तरफ Gurukrupa Dairy Products में food manufacturing और product composition की जांच सामने आई। Gufran Seekh Corner में licensing compliance भी कार्रवाई का आधार बना।

    इसके अलावा हालिया अलग कार्रवाई में Kandivali East के एक Amazon-linked warehouse और अन्य food establishments पर भी sanitation, drainage, segregation और storage से जुड़ी कमियों को लेकर licence suspension किया गया।

    घी में vegetable oil या vanaspati की मिलावट क्यों गंभीर है?

    FSSAI के notified standards के अनुसार ghee milk fat आधारित regulated food product है। ऐसे में refined vegetable oil या vanaspati की मिलावट केवल ingredient बदलने का मामला नहीं है, बल्कि product की composition और labelling से भी जुड़ सकता है।

    हालांकि किसी product को केवल रंग, खुशबू, जमने या घरेलू test के आधार पर असली या मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। अंतिम निष्कर्ष के लिए निर्धारित laboratory testing और regulatory assessment जरूरी होता है।

    महाराष्ट्र में food safety enforcement तेज

    महाराष्ट्र में FDA ने पिछले महीनों में food safety enforcement को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है। खबर के अनुसार जून से अगस्त 2026 के दौरान राज्य में 12,083 food establishments की inspections की गईं। इस दौरान 5,269 improvement notices जारी किए गए और 603 food licences suspend किए गए।

    इसी enforcement period में food products की करीब ₹67.20 करोड़ की जब्ती, 655 FIR और 875 गिरफ्तारियों** की जानकारी भी सामने आई है।

    त्योहारी सीजन में ghee, khoya, sweets, oil, jaggery और अन्य food products की मांग बढ़ने के बीच FDA की निगरानी और enforcement का दायरा भी बढ़ाया गया है।

    त्योहारी सीजन में consumers कैसे रहें सावधान?

    खाद्य पदार्थ खरीदते समय consumers को packaged product का label ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासकर manufacturer details, FSSAI licence/registration details, manufacturing date, expiry/best-before information और ingredients की जानकारी देखना जरूरी है।

    Dairy products, ghee, sweets और अन्य खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय साफ-सफाई और storage conditions पर भी ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि किसी दुकान की बाहरी cleanliness देखकर किसी food product की authenticity की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती।

    Food product की quality या safety को लेकर गंभीर शिकायत होने पर संबंधित food-safety authority के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। FDA की ओर से food-quality complaints के लिए toll-free number 1800222365 और Food & Drug Grievance Portal की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

    आगे क्या होगा?

    Gallops समेत licence suspension की कार्रवाई झेल रहे establishments को संबंधित food-safety deficiencies को दूर करना होगा। Gufran Seekh Corner के मामले में valid food licence या registration हासिल करने और deficiencies दूर करने तक closure order लागू है।

    Gurukrupa Dairy Products से जब्त stock और machinery के मामले में आगे regulatory और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं Kandivali West के Jain Sweet & Bhelpuri House समेत अन्य establishments पर हुई कार्रवाई में संबंधित hygiene deficiencies को दूर करने के बाद regulatory process आगे बढ़ेगा।

    FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने food safety से समझौता नहीं करने और expired, tampered या unhygienically prepared food के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

    नोट: इस रिपोर्ट में “नकली घी” शब्द FDA और मीडिया रिपोर्टों में इस्तेमाल किए गए आरोप/विवरण के संदर्भ में है। Malad में जब्त stock की अंतिम प्रकृति और composition का निर्धारण संबंधित regulatory/laboratory प्रक्रिया से होगा।