BMC का बड़ा फैसला: 3 दिन में जन्म-मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र, पुराने प्रमाणपत्र को भी QR वाला बना सकेंगे

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मुंबई में BMC ने जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आसान की है। जानिए 3 दिन की समयसीमा, QR प्रमाणपत्र और सुधार की पूरी जानकारी।

मुंबई: मुंबईकरों के लिए जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले आसान और तेज होने जा रही है। बीएमसी ने नए जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र के आवेदनों को तीन कार्य दिवस में निपटाने की व्यवस्था की है। जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम जोड़ने की सुविधा भी तीन कार्य दिवस में देने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। तीन दिन की समयसीमा पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने या जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में सुधार के लिए नहीं है। इन मामलों में ज्यादा समय लग सकता है।

बीएमसी की यह नई व्यवस्था ऐसे समय में आई है जब मुंबई में जन्म प्रमाणपत्रों की लंबित अर्जियों, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने और क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्र की बढ़ती मांग को लेकर नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

अब नए प्रमाणपत्र के लिए क्या होगा?

बीएमसी के वार्ड कार्यालय में मौजूद नागरी सुविधा केंद्र यानी सीएफसी के जरिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण पोर्टल पर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्र में सुधार के लिए भी आवेदन की सुविधा इसी व्यवस्था के जरिए उपलब्ध होगी।

आवेदन जमा करने के बाद नागरिक को यूनिक पहचान संख्या वाली पावती दी जाएगी। इस पहचान संख्या से आवेदन की स्थिति की जानकारी ली जा सकेगी।

इससे नागरिकों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि उनका आवेदन किस स्थिति में है और उसे लेकर बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।

तीन दिन में कौन-कौन से प्रमाणपत्र मिलेंगे?

नई व्यवस्था के तहत नए आवेदन वाले:

  • जन्म प्रमाणपत्र
  • मृत्यु प्रमाणपत्र
  • विवाह प्रमाणपत्र

को तीन कार्य दिवस में जारी करने की व्यवस्था की गई है।

जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम दर्ज कराने की सुविधा भी तीन कार्य दिवस में उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

यानी अगर किसी बच्चे का जन्म दर्ज हो चुका है लेकिन प्रमाणपत्र में नाम दर्ज नहीं है, तो उसके लिए भी अलग से लंबी प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा।

पुराने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र का क्या होगा?

मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों के पास पुराने समय के कागजी या हस्तलिखित जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र हैं। ऐसे लोगों के लिए बीएमसी ने पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की सुविधा शुरू की है।

इसके लिए सीएफसी में अलग खिड़की उपलब्ध कराई गई है।

पुराने प्रमाणपत्र की मूल प्रति जमा करनी होगी। इसके बाद बीएमसी अपने विभागीय रिकॉर्ड से उसकी जानकारी का मिलान करेगी।

सामान्य स्थिति में पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की प्रक्रिया करीब 25 कार्य दिवस में पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।

लेकिन अगर रिकॉर्ड बहुत पुराना है, स्थानीय कार्यालय में उपलब्ध नहीं है या उसे खोजने में परेशानी आती है, तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है।

इसलिए पुराने प्रमाणपत्र के मामले में तीन दिन वाली समयसीमा लागू समझना सही नहीं होगा।

क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र क्यों जरूरी हो रहा है?

क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र सिर्फ नया दिखने वाला कागज नहीं है। इसका एक बड़ा फायदा दस्तावेज की जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से सत्यापित करने में हो सकता है।

देश के कई नगर निकायों में क्यूआर कोड के जरिए प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। इससे फर्जी प्रमाणपत्रों की पहचान करने और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन आसान हो सकता है।

मुंबई में भी इसकी जरूरत खास तौर पर उन लोगों को महसूस हो रही है जिन्हें जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल पासपोर्ट, विदेश में पढ़ाई, वीजा या दूसरे जरूरी दस्तावेजी कामों में करना पड़ता है।

हालांकि, यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर काम के लिए क्यूआर प्रमाणपत्र अनिवार्य है। किसी खास विभाग की अपनी अलग दस्तावेजी जरूरत हो सकती है।

जन्म प्रमाणपत्र में किन चीजों में सुधार कराया जा सकता है?

बीएमसी की नई व्यवस्था में जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े कई तरह के सुधार के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

इनमें बच्चे के:

  • नाम में सुधार
  • पता बदलना
  • जन्म तारीख से जुड़ा सुधार
  • लिंग संबंधी सुधार

जैसे मामले शामिल हैं।

लेकिन इन सुधारों के लिए तीन कार्य दिवस वाली सुविधा लागू नहीं है। बीएमसी के मुताबिक ऐसे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र सुधार मामलों के निपटारे के लिए करीब 25 कार्य दिवस की व्यवस्था है।

मृत्यु प्रमाणपत्र में भी सुधार की सुविधा

अगर मृत्यु प्रमाणपत्र में जानकारी गलत दर्ज हो गई है तो उसके सुधार के लिए भी सीएफसी के जरिए आवेदन किया जा सकेगा।

यह सुविधा उन परिवारों के लिए खास तौर पर काम की हो सकती है जिन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र का इस्तेमाल बैंक, बीमा, पेंशन, संपत्ति या दूसरे सरकारी कामों में करना पड़ता है।

मृत्यु प्रमाणपत्र में किसी गलती के कारण परिवार को आगे की प्रक्रिया रोकनी पड़ती है। ऐसे मामलों में आवेदन की स्थिति पता चलना और तय समयसीमा मिलना नागरिकों के लिए राहत की बात है।

विवाह प्रमाणपत्र में सुधार कितने दिन में होगा?

विवाह प्रमाणपत्र में सुधार के मामलों के लिए बीएमसी ने तीन कार्य दिवस में आवेदन निपटाने की व्यवस्था बताई है।

यह उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जिन्हें विवाह प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी में सुधार कराने की जरूरत है और आगे किसी सरकारी या कानूनी काम के लिए सही प्रमाणपत्र चाहिए।

बीएमसी ने सीएफसी पर क्या बदलाव करने को कहा?

बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने इस नई व्यवस्था को लेकर लोगों में ज्यादा से ज्यादा जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

सीएफसी में अलग-अलग सेवाओं और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी देने वाले नोटिस बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

इसका फायदा यह होगा कि नागरिकों को आवेदन से पहले यह पता चल सके कि किस सेवा के लिए कहां और किस तरह आवेदन करना है।

क्या अब बीएमसी कार्यालय के चक्कर कम होंगे?

यही इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा हो सकता है।

पहले प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद नागरिकों को यह पता नहीं रहता था कि उनका आवेदन किस स्थिति में है और काम कब तक होगा। ऐसे में कई बार उन्हें सीएफसी या संबंधित कार्यालय में जाकर जानकारी लेनी पड़ती थी।

अब यूनिक पहचान संख्या और आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा से यह प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकती है।

लेकिन असली बदलाव तभी माना जाएगा जब तय समयसीमा जमीन पर भी लागू हो और पुराने रिकॉर्ड वाले मामलों में अनावश्यक देरी कम हो।

मुंबई में क्यूआर प्रमाणपत्र की मांग क्यों बढ़ी?

बीएमसी पहले से ही जन्म प्रमाणपत्रों की लंबित अर्जियों को कम करने के लिए डिजिटल व्यवस्था, अतिरिक्त कर्मचारियों और सीएफसी की सेवाओं को बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है।

क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्रों की मांग भी बढ़ी है। खासकर शिक्षा, पासपोर्ट और विदेश जाने से जुड़े कामों में दस्तावेजों के सत्यापन की जरूरत ज्यादा होती है।

यही वजह है कि पुराने प्रमाणपत्रों को भी नए क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्र में बदलने की सुविधा महत्वपूर्ण बन गई है।

देश में भी बदल रहा है प्रमाणपत्रों का तरीका

मुंबई का यह कदम अकेला बदलाव नहीं है। देश के दूसरे शहरों में भी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र को डिजिटल बनाने, ऑनलाइन उपलब्ध कराने और क्यूआर कोड के जरिए उसकी प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था बढ़ रही है।

दिल्ली में नगर निकाय की सेवाओं को डिजिटल लॉकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम चल रहा है। इसका मकसद नागरिकों को प्रमाणपत्र आसानी से उपलब्ध कराना और उनके सत्यापन को तेज करना है।

यानी आने वाले समय में जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे प्रमाणपत्र सिर्फ कागज पर निर्भर दस्तावेज नहीं रहेंगे, बल्कि उनका डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सत्यापन भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

आम मुंबईकर पर क्या असर पड़ेगा?

इस बदलाव का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिन्हें किसी जरूरी काम के लिए प्रमाणपत्र जल्दी चाहिए।

बच्चे के स्कूल या आगे की पढ़ाई से जुड़े काम, पासपोर्ट, विदेश जाने की तैयारी, बैंक और बीमा के काम या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद जरूरी कागजी प्रक्रिया—इन सभी मामलों में प्रमाणपत्र समय पर मिलना काफी महत्वपूर्ण होता है।

अगर बीएमसी की तीन कार्य दिवस वाली समयसीमा सही तरीके से लागू होती है तो नागरिकों का समय बचेगा और कार्यालयों के चक्कर भी कम हो सकते हैं।

दूसरी तरफ, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने में रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की समस्या अभी भी चुनौती बनी रहेगी।

सबसे जरूरी बात: तीन दिन वाली खबर को ऐसे समझें

मुंबईकरों को इस नई व्यवस्था को लेकर तीन अलग-अलग समयसीमा याद रखनी चाहिए:

नया जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र — तीन कार्य दिवस।

जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम दर्ज करना — तीन कार्य दिवस।

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में सुधार और पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर वाले प्रमाणपत्र में बदलना — सामान्य मामलों में करीब 25 कार्य दिवस।

पुराना रिकॉर्ड बीएमसी के रिकॉर्ड में नहीं मिलता है या उसे खोजने में परेशानी होती है तो इसमें और समय लग सकता है।

अब असली नजर बीएमसी की कार्यप्रणाली पर

बीएमसी ने समयसीमा तय करके नागरिकों की एक बड़ी परेशानी को कम करने की कोशिश की है। लेकिन इस फैसले की असली परीक्षा अब शुरू होगी।

मुंबई जैसे बड़े शहर में रोजाना बड़ी संख्या में जन्म, मृत्यु और विवाह से जुड़े आवेदन आते हैं। ऐसे में तीन कार्य दिवस की समयसीमा तभी सफल होगी जब सीएफसी में पर्याप्त कर्मचारी हों, पुराने रिकॉर्ड आसानी से मिलें और डिजिटल व्यवस्था बिना रुकावट काम करे।

फिलहाल मुंबईकरों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि प्रमाणपत्र के आवेदन को लेकर समयसीमा और आवेदन की स्थिति जानने की व्यवस्था पहले से ज्यादा साफ की जा रही है।

और अगर आपके पास कोई बहुत पुराना जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र है, तो उसे आखिरी समय तक संभालकर रखने के बजाय यह जांच लेना बेहतर होगा कि उसे क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की जरूरत है या नहीं।


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