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  • मुंबई में 2 अक्टूबर से DigiHealth Connect अभियान, ABHA से Ayushman Card तक जानें किसे क्या फायदा

    मुंबई में 2 अक्टूबर से DigiHealth Connect अभियान, ABHA से Ayushman Card तक जानें किसे क्या फायदा

    मुंबई में 2 अक्टूबर से 100 दिन का DigiHealth Connect अभियान शुरू होगा। ABHA, 70+ Ayushman Card और PMJAY-MJPJAY रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी यहां जानें।

    मुंबई: 2 अक्टूबर 2026 से मुंबई में 100 दिनों के लिए Mumbai DigiHealth Connect (MDC) अभियान शुरू होने जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका का यह अभियान सिर्फ ABHA कार्ड बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के Ayushman Vay Vandana Card, पात्र लाभार्थियों के PMJAY/MJPJAY कार्ड, BMC की स्वास्थ्य संस्थाओं और healthcare professionals को डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से जोड़ने पर भी केंद्रित होगा।

    अभियान के दौरान मुंबई के अलग-अलग इलाकों में नागरिकों का ABHA registration कराने के साथ अस्पतालों, दवाखानों, आपला दवाखाना, प्रसूतिगृह, प्रशासनिक कार्यालय, स्कूल-कॉलेज, गृहनिर्माण संस्थाओं, झोपड़पट्टी बस्तियों, बाजारों और राशन दुकानों तक registration अभियान पहुंचाया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों के लिए विशेष जनसंपर्क और डोर टू डोर अभियान भी चलाया जाएगा।

    इस अभियान को समझने से पहले आप को बतादें कि —ABHA और Ayushman Card एक ही चीज नहीं हैं। ABHA डिजिटल हेल्थ पहचान है, जबकि Ayushman Vay Vandana और PM-JAY स्वास्थ्य उपचार के लिए पात्र लाभार्थियों को health coverage उपलब्ध कराने से जुड़ी योजनाएं हैं।

    ABHA Card क्या है और इससे मुंबईकरों को क्या फायदा होगा?

    Ayushman Bharat Health Account यानी ABHA एक डिजिटल हेल्थ पहचान है, जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से जोड़ने और उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। ABDM के तहत ABHA, Health Facility Registry और Healthcare Professionals Registry जैसे digital building blocks तैयार किए गए हैं।

    सितंबर 2026 की स्थिति में देश में 97.8 करोड़ से ज्यादा ABHA बनाए जा चुके थे और 121 करोड़ से ज्यादा health records इनसे link हो चुके थे। इसके अलावा 5.6 लाख से ज्यादा health facilities और लगभग 11 लाख healthcare professionals ABDM ecosystem में registered थे।

    ABHA का फायदा उस समय ज्यादा महत्वपूर्ण होता है जब नागरिक का health record ABDM-enabled health facilities और digital systems से link होता है। इसके जरिए उपलब्ध digital health services में health records, laboratory reports, treatment information और discharge summaries जैसे records को डिजिटल रूप से access करने की सुविधा शामिल हो सकती है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि ABHA बनते ही किसी व्यक्ति के पुराने सभी मेडिकल रिकॉर्ड अपने आप online हो जाएंगे। Records को संबंधित digital health systems से link किया जाना और health information के access/share के लिए consent-based व्यवस्था लागू होती है।

    क्या ABHA Card से मुफ्त इलाज मिलता है?

    नहीं। ABHA को मुफ्त इलाज या health insurance card समझना सही नहीं है।

    ABHA मुख्य रूप से digital health identity है। वहीं PM-JAY और उससे जुड़ी पात्र health assurance schemes उपचार के लिए health coverage उपलब्ध कराती हैं। इसलिए ABHA बनवाने और Ayushman Card बनवाने को दो अलग प्रक्रियाओं के रूप में समझना चाहिए।

    70 साल या उससे अधिक उम्र के नागरिकों के लिए क्या मिलेगा?

    MDC अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के Ayushman Vay Vandana Card से जुड़ा है।

    सरकारी व्यवस्था के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक, उसकी आय या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, इस coverage के लिए पात्र है। 70+ senior citizens के लिए Aadhaar-based e-KYC की आवश्यकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना में आय की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

    इसका annual health cover ₹5 लाख तक है। यदि परिवार में एक से अधिक 70+ सदस्य हैं, तो ₹5 लाख की सीमा परिवार के आधार पर लागू होती है; हर बुजुर्ग के लिए अलग से ₹5 लाख जोड़कर ₹10 लाख या उससे ज्यादा मान लेना सही नहीं होगा। पहले से PM-JAY beneficiary परिवार में 70+ सदस्य के लिए अतिरिक्त benefit का प्रावधान है और इसके लिए Aadhaar e-KYC दोबारा करना पड़ सकता है।

    यानी 70+ नागरिकों के मामले में ABHA और Ayushman Vay Vandana Card की भूमिका अलग है। ABHA digital health identity है, जबकि Vay Vandana Card PM-JAY health coverage से संबंधित है।

    राशन दुकान पर PMJAY और MJPJAY Card भी बनेंगे

    Mumbai DigiHealth Connect अभियान में राशन दुकानों को भी registration network का हिस्सा बनाया गया है। पात्र राशन कार्डधारकों की पहचान, राशन कार्ड या E-KYC के जरिए eligibility verification और इसके बाद PMJAY/MJPJAY Card registration की व्यवस्था की जाएगी।

    इस काम में सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेविका यानी CHV और ASHA कार्यकर्ताओं की भूमिका रहेगी। राशन दुकानों के लिए समय निर्धारित किया जाएगा, ताकि वहां आने वाले पात्र लाभार्थियों का registration किया जा सके।

    आप को बता दें, कि केवल राशन कार्ड होना हर व्यक्ति को स्वतः किसी एक scheme का beneficiary नहीं बना देता। PM-JAY और MJPJAY में beneficiary identification के लिए निर्धारित eligibility criteria लागू होते हैं।

    महाराष्ट्र की मौजूदा MJPJAY व्यवस्था में अलग-अलग beneficiary categories हैं। इनमें Yellow, Antyodaya Anna Yojana, Annapurna और Orange ration card categories के साथ-साथ expanded scheme में White ration card और अन्य निर्धारित categories भी शामिल हैं। पात्रता category के अनुसार अलग हो सकती है और अंतिम verification scheme के निर्धारित documents तथा beneficiary database के आधार पर होती है।

    PM-JAY benefits की portability भी महत्वपूर्ण है। पात्र beneficiary को देशभर में empanelled hospitals में scheme के नियमों के अनुसार cashless treatment की सुविधा मिल सकती है, जबकि MJPJAY के तहत महाराष्ट्र के network hospitals में cashless treatment की व्यवस्था है।

    मुंबई में ABHA और दूसरे कार्ड कहां बनाए जाएंगे?

    BMC के अभियान के दौरान registration को नागरिकों के नजदीक पहुंचाने की योजना है। इसके लिए BMC hospitals, dispensaries, Aapla Dawakhana, maternity homes, administrative ward offices, schools, colleges, housing societies, slum settlements, markets और ration shops जैसे स्थानों पर registration activities की जाएंगी।

    BMC headquarters और विभागीय तथा प्रशासनिक कार्यालयों में अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष ABHA registration camps भी आयोजित किए जाएंगे।

    अभियान के तीसरे चरण में senior citizens, persons with disabilities और disadvantaged sections के लिए special outreach तथा घरपोच यानी डोर टू डोर registration अभियान पर जोर रहेगा।

    हालांकि BMC की घोषणा में अभी प्रत्येक ward के लिए अलग-अलग camp की तारीख, समय और exact location की विस्तृत सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए नागरिकों को अपने इलाके के camp की जानकारी के लिए BMC की आगे जारी होने वाली स्थानीय सूचना पर ध्यान देना होगा।

    अभियान तीन चरणों में चलेगा

    पहले चरण में जनजागृति अभियान, अधिकारियों-कर्मचारियों और volunteers का training, volunteer registration तथा प्रचार सामग्री का वितरण किया जाएगा।

    दूसरे चरण में बड़े पैमाने पर नागरिकों का registration किया जाएगा। इसमें अस्पतालों, दवाखानों, आपला दवाखाना, प्रसूतिगृह, प्रशासनिक कार्यालय, educational institutions, housing societies, slum areas, markets और ration shops को शामिल किया गया है।

    तीसरे चरण में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों तक विशेष outreach पहुंचाई जाएगी। इस दौरान घरपोच registration और विशेष ABHA camps आयोजित किए जाएंगे।

    BMC की पूरी व्यवस्था में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी?

    अभियान में Medical Health Officers की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रत्येक administrative ward में ABHA registration की progress की निगरानी Assistant Commissioners और Deputy Commissioners करेंगे।

    BMC Commissioner Ashwini Bhide ने नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। Additional Municipal Commissioner (City) Prajakta Verma ने Public Health Department को अधिक से अधिक नागरिकों को ABHA registration से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने BMC की सभी health institutions को Health Facility Registry यानी HFR में register करने तथा पात्र doctors, nurses, AYUSH practitioners, pharmacists और physiotherapists सहित healthcare professionals को Healthcare Professional Registry यानी HPR में register करने का लक्ष्य रखने को कहा है।

    Public Health Committee Chairman Harish Bhandirge ने भी अधिक से अधिक मुंबईकरों से इस अभियान में भाग लेने की अपील की है।

    HFR और HPR से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?

    HFR यानी Health Facility Registry में health facilities को digital ecosystem में register किया जाता है, जबकि HPR में healthcare professionals की verified digital registry तैयार होती है।

    इससे MDC अभियान केवल नागरिकों के ABHA बनाने की drive नहीं रह जाता। इसका दूसरा हिस्सा BMC की health facilities और healthcare workforce को national digital health ecosystem से जोड़ना है।

    राष्ट्रीय स्तर पर ABDM में 5.6 लाख से अधिक health facilities और लगभग 11 लाख healthcare professionals registered हो चुके हैं।

    BMC में digital health services का अगला चरण क्या होगा?

    MDC अभियान के objectives में ABHA-linked health records के साथ Scan & Share, e-prescription, e-discharge summary, digital laboratory और radiology reports तथा EMR/HMIS जैसी digital services का विस्तार शामिल है।

    BMC पहले से अपनी कुछ health facilities में HMIS आधारित digital health infrastructure का इस्तेमाल कर रहा है। BMC के उपलब्ध Year Book में B.Y.L. Nair Hospital और Kasturba Hospital में cloud-based HMIS/Aarogya Sanchayani के implementation का उल्लेख है, जिसमें patient data और कुछ medical information को digital रूप में manage करने की व्यवस्था शामिल है।

    इसलिए MDC को केवल नया registration campaign समझना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसका एक उद्देश्य BMC की health services को broader ABDM digital ecosystem के साथ जोड़ना और digital health services का इस्तेमाल बढ़ाना भी है।

    क्या ABHA बनने के बाद medical records सुरक्षित रहेंगे?

    ABDM framework में health information sharing consent-based व्यवस्था पर आधारित है। ABHA digital identity बनने का अर्थ यह नहीं है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को नागरिक के सभी medical records स्वतः देखने की अनुमति मिल जाती है।

    Digital health records को link और share करने की प्रक्रिया में consent और authorised access की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ABDM का उद्देश्य interoperable digital health ecosystem तैयार करना है, जिसमें नागरिक अपने health records को digital रूप से manage कर सके।

    मुंबईकरों के लिए सबसे जरूरी बात

    अगर किसी परिवार में 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र का सदस्य है, तो इस अभियान के दौरान ABHA और Ayushman Vay Vandana Card को अलग-अलग समझना सबसे जरूरी है। ABHA digital health identity है, जबकि 70+ senior citizens के लिए Ayushman Vay Vandana PM-JAY health coverage से संबंधित है।

    इसी तरह PMJAY/MJPJAY registration को भी ABHA registration से अलग समझना होगा। राशन दुकानों पर होने वाला registration पात्र लाभार्थियों की eligibility verification के बाद किया जाएगा।

    MDC अभियान के जरिए BMC नागरिकों, health facilities और healthcare professionals—तीनों को digital health framework से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले 100 दिनों के अभियान में registration, awareness, training और targeted outreach के जरिए इसका विस्तार किया जाएगा।

    राष्ट्रीय स्तर पर ABDM पहले ही 97.8 करोड़ से ज्यादा ABHA और 121 करोड़ से ज्यादा linked health records का आंकड़ा पार कर चुका है। ऐसे में मुंबई में शुरू होने वाला यह 100 दिवसीय अभियान नागरिकों तक digital health services और पात्र health-assurance benefits को जमीनी स्तर पर पहुंचाने की दिशा में BMC की महत्वपूर्ण पहल है।

  • बोरिवली में 35 अतिक्रमणों पर बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, 8 किमी फुटपाथ होंगे मुक्त

    बोरिवली में 35 अतिक्रमणों पर बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, 8 किमी फुटपाथ होंगे मुक्त

    बोरिवली पश्चिम में बीएमसी ने 20 अनधिकृत निर्माण और 15 स्टॉल हटाए। 6 फुटपाथ के करीब 8 किमी हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने की मुहिम जारी है।

    मुंबई: बोरिवली पश्चिम में पैदल चलने वालों के लिए रास्ता खाली कराने की मुहिम के तहत बीएमसी ने 20 अनधिकृत निर्माण और 15 अनधिकृत स्टॉल पर कार्रवाई की है। 29 सितंबर को लोकमान्य तिलक रोड, मार्केट लेन और बोरिवली सबवे रोड क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के साथ पहले चरण में चिन्हित 6 फुटपाथ के करीब 8 किलोमीटर हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने का काम आगे बढ़ाया गया है।

    यह कार्रवाई ‘पादचारी प्रथम’ अभियान के तहत की गई। बीएमसी का उद्देश्य फुटपाथ पर मौजूद ऐसे अतिक्रमण और निर्माण हटाकर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित, लगातार और बाधामुक्त रास्ता उपलब्ध कराना है। इसका सीधा असर बोरिवली पश्चिम रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाले यात्रियों और आसपास के इलाकों में पैदल चलने वाले नागरिकों पर पड़ने की उम्मीद है।

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    कार्यवाही की तस्वीर

    बोरिवली पश्चिम में इन जगहों पर हुई कार्रवाई

    बीएमसी के अनुसार लोकमान्य तिलक रोड, मार्केट लेन और बोरिवली सबवे रोड परिसर में कार्रवाई की गई। कुल 20 अनधिकृत निर्माण और 15 अनधिकृत स्टॉल हटाए गए।

    कार्रवाई के लिए बीएमसी ने 2 जेसीबी, 5 डंपर, 10 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और 20 कामगार तैनात किए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15 से अधिक पुलिसकर्मियों का बंदोबस्त भी किया गया।

    उपायुक्त परिमंडल-7 मनीष वळंजु के मार्गदर्शन में और आर-मध्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल तांबे के नेतृत्व में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और कामगारों की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

    6 पदपथों पर करीब 8 किलोमीटर का अभियान

    बीएमसी ने बोरिवली क्षेत्र में पहले चरण के तहत 6 फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का काम शुरू किया है। इन सभी हिस्सों की कुल लंबाई करीब 8 किलोमीटर बताई गई है।

    फिलहाल बीएमसी की ओर से जारी जानकारी में इन 6 फुटपाथ की पूरी सूची और प्रत्येक फुटपाथ की अलग-अलग लंबाई सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, अभियान का उद्देश्य इन मार्गों पर पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह को बाधामुक्त करना है।

    बोरिवली पश्चिम में फुटपाथ पर अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से सामने आती रही है। वर्ष 2019 में भी रोकडिया लेन से बोरिवली स्टेशन पश्चिम की ओर जाने वाले पदपथ पर अतिक्रमण के कारण लोगों को सड़क पर चलने की स्थिति का उल्लेख किया गया था।

    मुंबई में बड़े अभियान का हिस्सा है कार्रवाई

    बोरिवली की कार्रवाई मुंबई के व्यापक ‘पादचारी प्रथम’ अभियान का हिस्सा है। अभियान के पहले चरण में बीएमसी ने 200 फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने का लक्ष्य रखा था। अगस्त के अंत तक 134 पदपथों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी थी और करीब 197 किलोमीटर फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का दावा किया गया था। उस समय 1,459 स्थानों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।

    बीएमसी ने अगस्त में पहले चरण के लिए करीब 320 किलोमीटर पदपथों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए थे। अभियान में अनधिकृत फेरीवालों के साथ फुटपाथ पर मौजूद अन्य प्रकार के अवरोध हटाने और फुटपाथ की सुधार, सुरक्षा तथा सुंदरीकरण से जुड़े काम करने पर भी जोर दिया गया था।

    सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं, पदपथ की मरम्मत भी

    बोरिवली पश्चिम में फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब बीएमसी ने इसी क्षेत्र में फुटपाथ की मरम्मत के लिए भी निविदा प्रक्रिया शुरू की है।

    आर-मध्य विभाग के बीट नंबर 17 में बोरिवली पश्चिम के विभिन्न स्थानों पर फुटपाथ की मरम्मत के लिए करीब 18.09 लाख रुपये की निविदा जारी की गई थी। इसकी निविदा प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई और बोली खोलने की तारीख 30 सितंबर रखी गई थी।

    इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में फुटपाथ को उपयोगी बनाने के लिए अतिक्रमण हटाने के साथ मरम्मत का काम भी अलग स्तर पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, 29 सितंबर की कार्रवाई में हटाए गए अतिक्रमण वाले सभी स्थान इस मरम्मत परियोजना में शामिल हैं या नहीं, इसकी अलग से पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    अब असली चुनौती दोबारा अतिक्रमण रोकने की

    फुटपाथ खाली कराने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह रहेगी कि इन जगहों पर दोबारा अतिक्रमण न हो और पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध रास्ता लगातार बना रहे। बोरिवली पश्चिम के अलग-अलग इलाकों में इस वर्ष भी फुटपाथ और सड़क पर फेरीवालों तथा अन्य अवरोधों को लेकर नागरिक शिकायतें सामने आती रही हैं। चीकूवाड़ी और साईबाबा नगर रोड जैसे इलाकों में पैदल यात्रियों के लिए जगह कम होने की शिकायतें दर्ज हुई थीं।

    इसलिए 29 सितंबर की कार्रवाई के बाद केवल हटाए गए निर्माणों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि यह भी देखना होगा कि इन मार्गों पर पैदल चलने की जगह कितनी लगातार और उपयोगी रहती है।

    पैदल चलना अब मौलिक अधिकार

    बोरिवली की यह कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब सर्वोच्च न्यायालय ने 19 जून 2026 के फैसले में सुरक्षित और चिन्हित फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है। अदालत ने कहा कि सड़क होने पर नगर निगमों और अन्य संबंधित स्थानीय निकायों का दायित्व है कि पैदल चलने वालों के लिए चिन्हित और अच्छी तरह बनाए गए फुटपाथ उपलब्ध कराए जाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चिन्हित फुटपाथ पर पैदल चलने का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता रखता है।

    ऐसे में बोरिवली में 6 फुटपाथ के करीब 8 किलोमीटर हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। इसके बाद इन रास्तों का रखरखाव, पैदल यात्रियों के लिए लगातार उपलब्ध जगह और दोबारा अतिक्रमण रोकने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    फिलहाल बीएमसी की कार्रवाई जारी है और बोरिवली पश्चिम के चिन्हित फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का काम अभियान के अगले चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • जुहू बीच पर 34 टन कचरा साफ, सवाल अब यह कि बार-बार लौटता कचरा कब रुकेगा?

    जुहू बीच पर 34 टन कचरा साफ, सवाल अब यह कि बार-बार लौटता कचरा कब रुकेगा?

    जुहू बीच पर सी, शोर, शाईन-2026 अभियान में 34 टन कचरा हटाया गया। जुलाई में भी 1,825 टन कचरा निकला था, जानिए पूरी तस्वीर।

    मुंबई: जुहू समुद्रकिनारे पर गणेशोत्सव के बाद शनिवार को ‘सी, शोर, शाईन-2026’ विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान करीब 34 टन कचरा संकलित किया गया। दिव्याज फाउंडेशन, बृहन्मुंबई महानगरपालिका, मुंबई पुलिस और मेघा श्रेय की संयुक्त पहल में विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों ने हिस्सा लिया। अभियान में प्रसिद्ध अभिनेता अजय देवगन, दिव्याज फाउंडेशन की संस्थापिका अमृता फडणवीस, कौशल्य विकास, रोजगार, उद्योजकता और नावीन्यता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधायक अमित साटम, विधायक राम कदम, बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे, स्थानीय नगरसेविका सीमा सिंग, सह आयुक्त डॉ. भाग्यश्री कापसे और सहायक आयुक्त चक्रपाणी अल्ले सहित कई लोग मौजूद रहे।

    जुहू में 34 टन कचरा हटाया गया, लेकिन समस्या कितनी बड़ी है?

    आज का 34 टन कचरा गणेशोत्सव के बाद चलाए गए विशेष अभियान में संकलित हुआ है। इसे मुंबई के समुद्रकिनारों पर जमा होने वाले पूरे कचरे का आंकड़ा नहीं माना जा सकता। जुहू में कचरा जमा होने की समस्या इससे पहले भी बड़े स्तर पर सामने आ चुकी है।

    जुलाई में भारी बारिश और ऊंची ज्वार के दौरान बीएमसी की विशेष सफाई मुहिम में जुहू के करीब छह किलोमीटर लंबे समुद्रकिनारे से 1,825 टन कचरा हटाया गया था। उसी अभियान में मुंबई के सात समुद्रकिनारों से कुल 2,499 टन से अधिक ठोस कचरा हटाकर उसका निपटान किया गया था। इसमें प्लास्टिक, थर्मोकोल, लकड़ी का मलबा और अन्य सामग्री शामिल थी।

    उस दौरान जुहू बीच पर सामान्य दिनों की तुलना में कचरे की मात्रा में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बीएमसी के अनुसार भारी बारिश और ऊंची ज्वार के दौरान समुद्रकिनारे तक रोजाना करीब 350 टन कचरा पहुंच रहा था, जबकि सामान्य दिनों में यह मात्रा करीब 60 टन बताई गई थी।

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    नालों से समुद्र और फिर समुद्र से किनारे तक पहुंचता कचरा

    जुलाई में सामने आई स्थिति ने यह भी स्पष्ट किया था कि समुद्रकिनारे पर जमा होने वाला कचरा केवल समुद्र में सीधे फेंके गए कचरे का परिणाम नहीं है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार नालों और खुले जलनिकासी मार्गों में पहुंचा प्लास्टिक, थर्मोकोल, कपड़े, लकड़ी और घरेलू कचरा बारिश के पानी के साथ समुद्र तक पहुंच सकता है। ऊंची ज्वार के दौरान यही कचरा वापस समुद्रकिनारे पर आ जाता है।

    इसलिए गणेशोत्सव के बाद की 34 टन की सफाई के साथ जुहू में कचरे को समुद्र तक पहुंचने से रोकने का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

    गणेशोत्सव के लिए बीएमसी ने की थी व्यापक व्यवस्था

    इस वर्ष गणेश विसर्जन के लिए बीएमसी ने मुंबई में 383 से अधिक कृत्रिम विसर्जन तालाब 278 स्थानों पर तैयार किए थे। इसके अलावा 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थल उपलब्ध कराए गए, जिनमें 44 समुद्रकिनारे और जेट्टी तथा 23 प्राकृतिक झीलें शामिल थीं। विसर्जन व्यवस्था के लिए 25 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए थे।

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    निर्माल्य के लिए 498 कलश और 326 निर्माल्य डंपर भी उपलब्ध कराए गए थे। इसका उद्देश्य पूजा सामग्री को अलग से एकत्र करना और उसे जलस्रोतों में जाने से रोकना था।

    अब निर्माल्य से बनेंगे उपयोगी उत्पाद

    जुहू में गणेश विसर्जन के बाद जमा निर्माल्य में से फूलों को अलग कर उन पर प्रक्रिया करने की तैयारी की गई है। बीएमसी और डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान के संयुक्त प्रयास से इन फूलों से अगरबत्ती और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाने हैं।

    इस पहल से पूजा सामग्री को सीधे कचरे के रूप में फेंकने के बजाय उसका दोबारा उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इस अभियान में 34 टन के कुल कचरे में निर्माल्य की वास्तविक मात्रा कितनी थी, इसका अलग आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

    समुद्रकिनारे की सफाई के साथ रोकथाम पर भी सवाल

    जुहू बीच पर शनिवार का अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान समुद्र और समुद्रकिनारे को स्वच्छ रखने के लिए नागरिकों से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई।

    बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे ने कहा कि समुद्र मुंबई की बड़ी संपत्ति है और कचरा तथा प्लास्टिक समुद्र में जाने से समुद्र और समुद्रकिनारे दोनों अस्वच्छ होते हैं। उन्होंने गणेशोत्सव के बाद भी स्वच्छता की भावना बनाए रखने और समुद्रकिनारों को साफ रखने में सहयोग करने की अपील की।

    अजय देवगन ने भी शहर और देश को स्वच्छ रखना सामूहिक जिम्मेदारी बताया। अमृता फडणवीस ने उत्सव के बाद शहर की सफाई में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। मंगल प्रभात लोढ़ा ने नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और प्रशासन के संयुक्त प्रयास को स्वच्छता संदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया।

    विधायक अमित साटम ने कहा कि बीएमसी के प्रयासों के कारण इस वर्ष बड़ी संख्या में गणेशमूर्तियों का विसर्जन समुद्र के बजाय कृत्रिम तालाबों में किया गया। उन्होंने आगे प्रक्रिया किए हुए पानी को ही समुद्र में छोड़ने की दिशा में प्रयासों का भी उल्लेख किया।

    मुंबई के लिए असली चुनौती सिर्फ सफाई नहीं

    जुहू में 34 टन कचरा हटाने के बाद तत्काल समुद्रकिनारा साफ दिखाई दे सकता है, लेकिन जुलाई में 1,825 टन कचरा हटाए जाने और भारी बारिश के दौरान कचरे की बड़ी मात्रा समुद्र तक पहुंचने की स्थिति यह सवाल भी सामने रखती है कि कचरे को समुद्र तक पहुंचने से पहले रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

    गणेशोत्सव के लिए कृत्रिम विसर्जन तालाबों और निर्माल्य संग्रह की व्यवस्था बढ़ाने के बावजूद प्राकृतिक समुद्रकिनारों पर सफाई की जरूरत बनी हुई है। इसलिए आगे की चुनौती सफाई अभियान के साथ-साथ कचरे के स्रोत, नालों और समुद्र तक पहुंचने वाले मार्गों पर रोकथाम तथा निर्माल्य के वैज्ञानिक पुनःउपयोग की व्यवस्था को मजबूत करना होगी।

    शनिवार के अभियान में संकलित 34 टन कचरे के बाद फिलहाल जुहू समुद्रकिनारा साफ किया गया है। अब इस सफाई को लंबे समय तक बनाए रखना और दोबारा समुद्रकिनारे तक पहुंचने वाले कचरे को कम करना प्रशासन और नागरिकों, दोनों के लिए अगली चुनौती है।

  • मुंबई Water Cut: 29 सितंबर को चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 24 घंटे पानी बंद, 7 दिन लो-प्रेशर

    मुंबई Water Cut: 29 सितंबर को चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 24 घंटे पानी बंद, 7 दिन लो-प्रेशर

    मुंबई के चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 29 सितंबर से 24 घंटे पानी बंद रहेगा। पूरी प्रभावित इलाकों की सूची और 7 दिन के लो-प्रेशर की जानकारी देखें।

    मुंबई: चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द के कई इलाकों में 29 सितंबर को 24 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहेगी। BMC नए water tunnel की commissioning का काम करेगी, जिसके चलते 29 सितंबर सुबह 10 बजे से 30 सितंबर सुबह 10 बजे तक प्रभावित क्षेत्रों में पानी नहीं आएगा। इसके बाद भी करीब सात दिनों तक कुछ इलाकों में पानी कम दबाव यानी low pressure से मिलने की संभावना है।

    BMC ने प्रभावित इलाकों के निवासियों को shutdown शुरू होने से पहले पर्याप्त पानी जमा रखने और पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी है।

    कब से कब तक बंद रहेगी पानी की सप्लाई?

    पानी की सप्लाई 29 सितंबर सुबह 10 बजे से बंद होगी और 30 सितंबर सुबह 10 बजे बहाल की जाएगी। हालांकि, supply शुरू होने के बाद तुरंत सामान्य pressure मिलने की गारंटी नहीं है। BMC के अनुसार, इसके बाद लगभग सात दिनों तक affected areas में low-pressure water supply की स्थिति रह सकती है।

    इसका मतलब है कि 24 घंटे का complete shutdown खत्म होने के बाद भी ऊपरी मंजिलों, ज्यादा ऊंचाई वाली इमारतों और उन housing societies में परेशानी रह सकती है जहां पानी पहुंचने के लिए पर्याप्त pressure जरूरी होता है।

    M-East Ward में किन इलाकों पर असर?

    M-East Ward में Lallubhai Compound, Shivajinagar, Washinaka, Mankhurd, Govandi, Bainganwadi, Bharat Nagar, Cheetah Camp, Deonar Village और Deonar Colony, Rafiq Nagar, Mandala, Padma Nagar, Vishnu Nagar, Maharashtra Nagar और Indian Oil Nagar प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

    इसके अलावा BD Patil Marg के आसपास refinery area के कुछ हिस्सों में भी पानी की सप्लाई प्रभावित होगी।

    M-West Ward में किन इलाकों में पानी बंद रहेगा?

    M-West Ward में Chembur के बड़े हिस्से में पानी की सप्लाई प्रभावित होगी। इनमें Maitri Park, Ghatla, Chembur Gaothan, Subhash Nagar, Suman Nagar, Tilak Nagar, Sindhi Camp, Chembur Camp, Gandhi Market, Central Avenue Road, R C Marg, Mahul Village, Wadala, Vashi Naka, Bhakti Park और Sahakar Nagar शामिल हैं।

    Shell Colony और P L Lokhande Marg के आसपास के इलाकों में भी असर पड़ेगा।

    कौन-कौन से बड़े संस्थान प्रभावित क्षेत्र में हैं?

    प्रभावित क्षेत्र की सूची में BPCL, Mazagon Dock, Tata Power, Aegis Ltd और BPT जैसे बड़े institutional और industrial establishments भी शामिल हैं।

    इन संस्थानों के अपने internal water-storage और supply arrangements अलग हो सकते हैं, इसलिए इनके operational impact को residential water supply के समान मानना उचित नहीं होगा।

    नए water tunnel की commissioning क्यों हो रही है?

    यह shutdown केवल सामान्य पाइपलाइन maintenance के लिए नहीं है। BMC Mumbai के eastern और central हिस्सों के water-distribution network को मजबूत करने के लिए नए underground water tunnel system की commissioning कर रही है।

    इस broader network में Amar Mahal से Pratiksha Nagar तक का करीब 1,800-mm diameter का tunnel शामिल है। यह network Parel, Trombay Reservoir और आगे Turbhe High Level Reservoir से जुड़ता है। ऐसे connection का उद्देश्य water distribution network को मजबूत करना और अलग-अलग water-supply systems के बीच distribution capacity को बेहतर बनाना है।

    29 सितंबर का shutdown इसी broader tunnel commissioning process की अगली operational stage से जुड़ा है।

    2026 में पहले भी हो चुके हैं water shutdown

    Chembur, Govandi और Mankhurd के लिए 2026 में tunnel-related water-supply disruptions पहले भी हो चुके हैं। मई में Amar Mahal से Pratiksha Nagar तक नए 1,800-mm tunnel को commission करने के लिए 30 घंटे का बड़ा shutdown किया गया था। इसके बाद मई में ही Chembur, Govandi और Mankhurd के कुछ हिस्सों में tunnel commissioning से जुड़े काम के कारण अलग water cut भी हुआ था।

    इसलिए 29 सितंबर का shutdown इस क्षेत्र के water infrastructure में चल रहे बड़े commissioning और network-integration work की अगली कड़ी है।

    30 सितंबर के बाद पानी पूरी तरह सामान्य कब होगा?

    30 सितंबर सुबह 10 बजे से supply बहाल होने की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में करीब सात दिनों तक low pressure रहने की संभावना है। इसलिए पानी आने का मतलब यह नहीं होगा कि हर इलाके में तुरंत सामान्य pressure बहाल हो जाएगा।

    खासकर ऊपरी मंजिलों और ऐसे residential buildings में जहां पानी overhead tanks तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त pressure की जरूरत होती है, recovery period के दौरान ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है।

    Residents को क्या करना चाहिए?

    प्रभावित इलाकों के घरों और housing societies को 29 सितंबर सुबह 10 बजे से पहले अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी का भंडारण कर लेना चाहिए। पानी का इस्तेमाल पीने, खाना बनाने, सफाई और अन्य जरूरी घरेलू कामों के लिए प्राथमिकता के आधार पर करना उपयोगी रहेगा।

    Housing societies को shutdown से पहले अपने overhead और storage tanks की स्थिति भी जांच लेनी चाहिए, ताकि 24 घंटे की supply disruption के दौरान उपलब्ध storage का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

    क्या BMC टैंकर से पानी उपलब्ध कराएगी?

    29 सितंबर के shutdown के लिए उपलब्ध ताजा सार्वजनिक जानकारी में प्रभावित इलाकों के लिए किसी specific tanker point या अलग tanker deployment schedule की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसी particular location पर tanker उपलब्ध होने का दावा बिना BMC की पुष्टि के नहीं किया जाना चाहिए।

    अभी सबसे जरूरी बात यह है कि प्रभावित निवासी shutdown से पहले अपनी पानी की जरूरत पूरी करने की तैयारी रखें।

    पानी की सप्लाई पर असर क्यों महत्वपूर्ण है?

    Chembur, Govandi और Mankhurd के प्रभावित हिस्सों में बड़ी residential आबादी के साथ commercial, institutional और industrial establishments भी हैं। ऐसे में 24 घंटे का shutdown केवल घरेलू पानी की समस्या तक सीमित नहीं रहेगा। इसके बाद सात दिनों तक low pressure रहने की स्थिति भी उन इमारतों और कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो नियमित municipal water pressure पर निर्भर हैं।

    BMC का यह काम पूरा होने के बाद नए tunnel और existing water-distribution network के बीच connection और commissioning प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल residents के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थिति 29 सितंबर से शुरू होने वाला 24-hour shutdown और उसके बाद संभावित सात दिन का low-pressure period है।

  • Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    मुंबई में गणेशोत्सव की परंपराओं को डिजिटल रूप से सहेजने के लिए BMC का Bappa.org अभियान, जानें फोटो-कहानी कैसे भेजें और क्या मिलेगा।

    मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में निभाई जाने वाली परंपराओं, यादों और सांस्कृतिक गतिविधियों को अब डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से Bappa.org पर अपने गणेशोत्सव की कहानी, तस्वीरें, वीडियो, पारंपरिक प्रथाएं और सामाजिक व पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस डिजिटल संग्रह में सिर्फ बड़े गणेश मंडल ही नहीं, बल्कि घरों में स्थापित होने वाले गणपति भी शामिल किए जा रहे हैं।

    Bappa.org क्या है?

    Bappa.org को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का डिजिटल राज्य संग्रह बताया गया है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पीढ़ियों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपराओं, परिवारों की यादों, सार्वजनिक मंडलों की गतिविधियों और मूर्ति व सजावट से जुड़ी कला को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित करना है। पोर्टल के अनुसार यह महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग का उपक्रम है।

    मुंबईकर इसमें क्या दर्ज कर सकते हैं?

    Bappa.org पर गणेशोत्सव से जुड़ी कई तरह की जानकारी साझा की जा सकती है। इसमें घर या मंडल की गणेश प्रतिमा की तस्वीर, सजावट, पारंपरिक आरती, परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा, गणेशोत्सव से जुड़ी व्यक्तिगत यादें, सामाजिक कार्य, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं।

    इसका मतलब है कि किसी परिवार के घर में हर साल एक ही तरीके से होने वाला गणेशोत्सव भी इस डिजिटल संग्रह का हिस्सा बन सकता है। इसी तरह सार्वजनिक गणेश मंडल, गृहनिर्माण संस्था और गणेश प्रतिमा से जुड़ा काम करने वाले कारीगर भी अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।

    मुंबई के घरों की परंपराएं भी बनेंगी डिजिटल रिकॉर्ड

    मुंबई में गणेशोत्सव का बड़ा हिस्सा केवल प्रसिद्ध सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में 24,631 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ था, जिनमें 24,521 घरेलू और 110 सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाएं शामिल थीं। ऐसे में घर-घर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की परंपराओं को दर्ज करने का यह प्रयास शहर की व्यापक सांस्कृतिक तस्वीर को सामने ला सकता है।

    Bappa.org के मौजूदा संग्रह में मुंबई सिटी से Parel cha Raja, Saibaba Nagar Colony और Girgaon cha Raja जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं। इसका मतलब है कि मुंबई से नागरिकों और मंडलों की भागीदारी शुरू हो चुकी है।

    Bappa.org पर कहानी कैसे दर्ज करें?

    पोर्टल के अनुसार इसके लिए किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने या अलग अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है। एक फोटो और अपनी गणेशोत्सव परंपरा के बारे में कुछ पंक्तियों से शुरुआत की जा सकती है। जानकारी भेजने के बाद टीम उसकी जांच करती है और स्वीकार की गई कहानी को डिजिटल संग्रह में दर्ज किया जाता है।

    इसके अलावा ‘घरोघरी बाप्पा’ अभियान के तहत WhatsApp के जरिए भी गणेशोत्सव की कहानी भेजने की सुविधा दी गई है। इसके लिए +91 91361 72681 नंबर जारी किया गया है। इस अभियान में भाग लेना नि:शुल्क बताया गया है।

    कहानी भेजने के बाद क्या होगा?

    Bappa.org पर स्वीकार की गई प्रविष्टियों को एक अलग रिकॉर्ड नंबर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2026-00290 और 2026-00297 जैसी प्रविष्टियां संग्रह में दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में जमा करने और स्वीकार किए जाने की तारीख के साथ डिजिटल evidence भी दिखाई देता है।

    पोर्टल की जानकारी के अनुसार प्रत्येक योगदान को सत्यापन के बाद महाराष्ट्र के राज्य सांस्कृतिक संग्रह का हिस्सा बनाया जाता है। सफलतापूर्वक कहानी दर्ज कराने वाले परिवारों को सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।

    सिर्फ मुंबई नहीं, महाराष्ट्र और विदेशों की कहानियां भी

    Bappa.org पर फिलहाल महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे स्थानों से भी गणेशोत्सव की कहानियां दिखाई दे रही हैं। पोर्टल पर मुंबई, सातारा, रायगढ़, पुणे और अन्य क्षेत्रों की प्रविष्टियों के साथ महाराष्ट्र के बाहर से भी योगदान दर्ज हैं।

    हाल की चयनित कहानियों में नए घर में पहला गणेशोत्सव, पारंपरिक गौरी-गणपति उत्सव, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों का गणेशोत्सव और विसर्जन के बाद बची मिट्टी के इस्तेमाल से जुड़ी पर्यावरणीय पहल जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल रही हैं।

    इससे साफ है कि इस डिजिटल संग्रह का दायरा केवल गणेश प्रतिमा या पंडाल की तस्वीर तक सीमित नहीं है। परिवार, परंपरा, कला, पर्यावरण और विदेशों में रहने वाले भारतीयों का गणेशोत्सव भी इसका हिस्सा बन सकता है।

    गणेशोत्सव के डिजिटल दस्तावेजीकरण का बड़ा उद्देश्य

    महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2025 में गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव के रूप में मनाने को मंजूरी दी थी। इसके बाद गणेशोत्सव से जुड़ी कला, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास बढ़े हैं।

    इसी व्यापक संदर्भ में Bappa.org पर गणेशोत्सव की परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। गणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में भी इस दस्तावेजीकरण को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गणेशोत्सव को UNESCO की मान्यता मिल चुकी है।

    मुंबईकरों के लिए इसका क्या मतलब?

    मुंबई में हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक मंडलों के जरिए गणेशोत्सव मनाते हैं। अलग-अलग इलाकों, परिवारों और समुदायों की अपनी अलग परंपराएं हैं। कई परंपराएं केवल परिवार के बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता।

    Bappa.org इसी अंतर को भरने की कोशिश करता है। किसी परिवार की कई दशक पुरानी पूजा पद्धति हो, किसी मंडल का सामाजिक काम हो, पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति हो या किसी इलाके की अलग गणेशोत्सव परंपरा—इन अनुभवों को तस्वीर और कहानी के साथ दर्ज किया जा सकता है।

    मुंबईकरों के लिए आसान भाषा में कहें तो Bappa.org पर सिर्फ यह बताना जरूरी नहीं है कि आपके घर में गणपति की मूर्ति कैसी है। यह भी बताया जा सकता है कि आपके परिवार में बाप्पा की परंपरा कब से है, सजावट कैसे होती है, कौन-सी आरती या प्रथा निभाई जाती है और गणेशोत्सव के दौरान परिवार या मंडल क्या खास करता है।

    यानी इस साल का गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी डिजिटल संग्रह में दर्ज रह सकती है। मुंबईकर अपने घर या मंडल की परंपरा को Bappa.org के माध्यम से इस राज्यव्यापी सांस्कृतिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना सकते हैं।

  • मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक BMC की विशेष कार्रवाई, 14 फीट या उससे ऊंची 39,111 झोपड़ियां जांच के दायरे में, जानिए किस पर होगा असर।

    मुंबई: मुंबई के झोपड़पट्टी क्षेत्रों में बने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों तथा उनसे जुड़े अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ियां हैं, जिनमें 39 हजार 111 संरचनाएं 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। हालांकि, इन सभी 39,111 संरचनाओं को इस अवधि में अनिवार्य रूप से तोड़ा जाएगा, ऐसा BMC की घोषणा में नहीं कहा गया है।

    BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन में और सह आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने संबंधित रहवासियों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है और ऐसा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    39,111 संरचनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा पूर्वी उपनगरों का है। यहां 31,227 झोपड़ियां 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। मुंबई शहर में ऐसी 3,348 और पश्चिमी उपनगरों में 4,536 संरचनाएं हैं। यानी इस पूरी सूची में करीब 80 प्रतिशत संरचनाएं पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं।

    कार्रवाई का पूरा आंकड़ा क्या है?

    BMC के अनुसार 39,111 ऊंची संरचनाओं में से 4,584 पर पहले ही निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 611 संरचनाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, BMC के सार्वजनिक आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं है कि 611 नोटिस वाली संरचनाएं 4,584 पर की गई कार्रवाई के आंकड़े में शामिल हैं या अलग श्रेणी में हैं। इसलिए केवल इन दोनों आंकड़ों को घटाकर अक्टूबर से कार्रवाई के लिए बची संरचनाओं की सटीक संख्या बताना अभी सही नहीं होगा।

    यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 39,111 का आंकड़ा identified structures का है, न कि 39,111 परिवारों का। BMC की घोषणा में यह जानकारी नहीं दी गई है कि इन संरचनाओं में कुल कितने परिवार या लोग रहते हैं। इसलिए इस अभियान से 39 हजार परिवार सीधे प्रभावित होंगे, ऐसा कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

    14 फीट से ज्यादा ऊंचाई का मतलब क्या पूरा घर टूटेगा?

    इस अभियान का सबसे अहम सवाल यही है। BMC ने 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को कार्रवाई के दायरे में रखा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में पूरी संरचना को ही जमीन पर गिराया जाएगा।

    जून 2026 के एक Bombay High Court मामले में 14 फीट से ऊपर बने अनधिकृत vertical extension को हटाने का मामला सामने आया था। अदालत के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति के पास 14 फीट से ऊपर vertical extension की अनुमति नहीं होने का उल्लेख है। अदालत ने लागू नियमों के तहत अनुमति के लिए आवेदन करने की संभावना का भी उल्लेख किया था। इससे स्पष्ट होता है कि मूल संरचना और बाद में किए गए अनधिकृत ऊर्ध्वाधर विस्तार की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

    यानी किसी झोपड़ी की ऊंचाई 14 फीट से अधिक पाए जाने पर कार्रवाई किस हिस्से पर होगी, यह संबंधित निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध अनुमति और रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकता है। BMC की मौजूदा घोषणा में प्रत्येक संरचना के लिए कार्रवाई का अलग प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    पुराने झोपड़ीधारकों के दस्तावेज भी महत्वपूर्ण

    इस अभियान को केवल ऊंचाई के आधार पर समझना सही नहीं होगा। झोपड़ी की ऊंचाई और उसमें रहने वाले व्यक्ति की पात्रता दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

    महाराष्ट्र सरकार की उपलब्ध पात्रता संबंधी जानकारी में 1 जनवरी 2000 या उससे पहले के आवासीय ground-floor structures के लिए निर्धारित पात्रता प्रक्रिया का उल्लेख है। पात्रता के लिए पुराने मतदाता रिकॉर्ड, अधिकृत बिजली रिकॉर्ड, सर्वेक्षण संबंधी दस्तावेज, संपत्ति कर रिकॉर्ड और अन्य स्वीकार्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होती है।

    मार्च 2026 के Bombay High Court के एक मामले में भी झोपड़ीधारक की पात्रता तय करते समय प्रस्तुत दस्तावेजों की उचित जांच और प्रत्येक संबंधित दस्तावेज पर स्पष्ट निष्कर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

    इसलिए किसी पुराने झोपड़ीधारक के पास photo-pass या अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद होने की स्थिति और बाद में किए गए अनधिकृत निर्माण की स्थिति को एक ही आधार पर नहीं देखा जा सकता।

    मुंबई में पहले भी तेज हुई है अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई

    BMC के अनुसार 24 अगस्त से 15 सितंबर 2026 के बीच मुंबई के अलग-अलग प्रशासनिक विभागों में 128 अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई की गई, जबकि 140 अन्य निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नियोजित थी। अक्टूबर से शुरू होने वाला अभियान इसी enforcement को झोपड़पट्टी क्षेत्रों में विशेष रूप से 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं पर केंद्रित करता है।

    मुंबई के पूर्वी उपनगरों में इस समय अनधिकृत कब्जों और निर्माणों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। सितंबर 2026 में Mankhurd में सरकारी जमीन से करीब 57 अनधिकृत व्यावसायिक इकाइयों को हटाया गया और लगभग छह एकड़ जमीन को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई की गई। अप्रैल 2026 में Ghatkopar-Mankhurd Link Road के आसपास भी 1,200 से अधिक अनधिकृत झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई की गई थी। ये कार्रवाई वर्तमान 14 फीट वाली BMC विशेष मुहिम से अलग हैं, लेकिन मुंबई में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ बढ़ी enforcement का व्यापक संदर्भ देती हैं।

    सुरक्षा का सवाल भी बड़ा कारण

    अनधिकृत vertical extensions और कमजोर संरचनाओं का मुद्दा केवल जमीन या निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है। 2026 में Mankhurd में मकान गिरने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच नाबालिग थे। इसके बाद अनधिकृत और असुरक्षित संरचनाओं को लेकर मुंबई में सुरक्षा संबंधी सवाल और गंभीर हुए।

    मुंबई में landslide-prone क्षेत्रों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उपलब्ध BMC Climate Action Plan से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 287 landslide-prone locations चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 209 informal settlements के भीतर हैं। 2026 में Kurla में landslide की घटना में भी आठ लोगों की मौत हुई थी। हालांकि इन घटनाओं को 39,111 संरचनाओं के अभियान का प्रत्यक्ष कारण बताने के लिए अलग आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल: 1 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

    अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाली इस विशेष मुहिम में BMC का लक्ष्य 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली identified structures पर कार्रवाई करना है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 39,111 संरचनाओं में से कितनी पर इस तीन महीने की अवधि में वास्तविक निष्कासन कार्रवाई की जाएगी, कार्रवाई किस क्रम में होगी और 611 नोटिस जारी की गई संरचनाओं तथा पहले से कार्रवाई झेल चुकी 4,584 संरचनाओं के आंकड़ों में कितना overlap है।

    यही वजह है कि इस अभियान का वास्तविक असर आने वाले दिनों में ward-wise कार्रवाई, जारी होने वाले notices और प्रत्येक संरचना के रिकॉर्ड की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा।

    फिलहाल BMC ने झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली कार्रवाई में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाएं मुख्य फोकस में रहेंगी, जबकि किसी विशेष घर या उसके हिस्से पर कार्रवाई का स्वरूप संबंधित निर्माण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय होना महत्वपूर्ण होगा।

  • गणेशोत्सव में BMC का ‘मोदक महोत्सव 2026’, महिला बचत समूहों के हाथों से बने मोदक अब घर पहुंचेंगे

    गणेशोत्सव में BMC का ‘मोदक महोत्सव 2026’, महिला बचत समूहों के हाथों से बने मोदक अब घर पहुंचेंगे

    BMC के ‘मोदक महोत्सव 2026’ में महिला बचत समूहों द्वारा तैयार उकडी और तले हुए मोदक मुंबईकरों को मिलेंगे। 14 सितंबर से होम डिलीवरी के लिए shgeshop.com पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे।

    मुंबई: गणपति बाप्पा के आगमन के साथ ही घरों में नैवेद्य की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गणेशोत्सव में भगवान गणेश को प्रिय माने जाने वाले मोदक की मांग को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से इस वर्ष ‘मोदक महोत्सव 2026’ का आयोजन किया गया है। इस पहल के तहत BMC द्वारा संचालित महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए उकडी के और तले हुए मोदक मुंबईकरों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

    इस पहल के तहत नागरिकों को मोदक खरीदने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है। https://shgeshop.com वेबसाइट के माध्यम से पूरे गणेशोत्सव के दौरान ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकेगा। ऑनलाइन पंजीकरण करने वाले नागरिकों को 14 सितंबर 2026 से मोदक की होम डिलीवरी उपलब्ध कराई जाएगी।

    एक दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी

    BMC के नियोजन विभाग के अनुसार, मोदक की होम डिलीवरी का लाभ लेने के लिए मुंबईकरों को कम से कम एक दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। यह होम डिलीवरी सेवा केवल मुंबई क्षेत्र में उपलब्ध रहेगी।

    ‘मोदक महोत्सव 2026’ पूरे गणेशोत्सव काल के दौरान जारी रहेगा। इसके तहत नागरिकों को उकडी के साथ-साथ तले हुए मोदक भी उपलब्ध होंगे।

    महिला बचत समूहों ने तैयार किए मोदक

    गणेशोत्सव के दौरान मोदक की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए BMC द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त महिला बचत समूहों के माध्यम से इस महोत्सव का आयोजन किया गया है। इन समूहों द्वारा तैयार किए गए मोदक गणेशोत्सव के पूरे कालखंड में ग्राहकों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

    इस पहल का उद्देश्य केवल गणेशोत्सव के दौरान नागरिकों को मोदक उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि महिला बचत समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और उनके व्यवसाय को बढ़ावा देना भी है।

    महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर जोर

    मुंबई महानगर में महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से BMC के माध्यम से महिला बचत समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, उनके व्यवसाय को गति देने और उन्हें अधिक व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए BMC की ओर से अलग-अलग नवाचारपूर्ण और व्यवसाय-केंद्रित पहल की जाती हैं।

    इसी प्रयास के तहत इस वर्ष गणेशोत्सव के अवसर पर ‘मोदक महोत्सव 2026’ आयोजित किया गया है।

    गणेशोत्सव के साथ महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

    BMC के अनुसार, इस पहल के माध्यम से महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण मोदक नागरिकों को उपलब्ध होंगे। साथ ही, मुंबईकरों को गणेशोत्सव की खुशियों के साथ महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का अवसर भी मिलेगा।

    इस संबंध में निदेशक (नियोजन) डॉ. (श्रीमती) प्राची जांभेकर ने जानकारी दी कि महिला बचत समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके व्यवसाय को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है।

    मीनल तुर्डे के मार्गदर्शन में आयोजन

    यह उपक्रम महिला व बालकल्याण समिति की अध्यक्षा श्रीमती मीनल तुर्डे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।

    BMC की ओर से मुंबईकरों से अपील की गई है कि वे ‘मोदक महोत्सव 2026’ को उत्स्फूर्त प्रतिसाद दें और महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को प्रोत्साहित करें।

    मोदक की होम डिलीवरी कैसे मिलेगी?

    • मोदक: उकडी के और तले हुए मोदक
    • ऑनलाइन पंजीकरण: https://shgeshop.com
    • होम डिलीवरी शुरू: 14 सितंबर 2026 से
    • पंजीकरण: डिलीवरी से कम से कम एक दिन पहले
    • डिलीवरी क्षेत्र: केवल मुंबई
    • उपलब्धता: पूरे गणेशोत्सव काल में
    • तैयारी: BMC द्वारा संचालित/आर्थिक सहायता प्राप्त महिला बचत समूह
    • आयोजन: ‘मोदक महोत्सव 2026’
    • मार्गदर्शन: महिला व बालकल्याण समिति अध्यक्षा श्रीमती मीनल तुर्डे
    • जानकारी: BMC नियोजन विभाग तथा निदेशक (नियोजन) डॉ. (श्रीमती) प्राची जांभेकर
  • Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai में C&D Waste पर BMC सख्त, MDCTS registration की deadline 23 सितंबर 2026। बिना VTMS वाले वाहनों पर ₹25,000 जुर्माने की कार्रवाई होगी।

    मुंबई: शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे (C&D Waste) पर BMC ने अब डिजिटल निगरानी सख्त कर दी है।** 9 सितंबर 2026 की सार्वजनिक सूचना के मुताबिक C&D Waste से जुड़े projects, waste generators, transporters और processing/recycling से जुड़े stakeholders को Mumbai Debris Control & Tracking System (MDCTS) पर registration करना होगा। इसकी deadline 23 सितंबर 2026 है।

    इसके साथ C&D Waste ले जाने वाले वाहनों में BMC द्वारा अधिकृत Vehicle Tracking and Monitoring System (VTMS) लगाना अनिवार्य किया गया है। बिना registration या authorised और functioning VTMS के transport करने वाले वाहन पर प्रति वाहन, प्रति उल्लंघन ₹25,000 का दंड लगाया जा सकता है।

    किन लोगों को MDCTS Registration करना होगा?

    यह नियम सिर्फ बड़े builders तक सीमित नहीं है। C&D Waste पैदा करने वाले projects, developers, contractors, सरकारी व अन्य agencies, transporters तथा processing, recycling, unloading और authorised backfilling से जुड़े stakeholders इसके दायरे में हैं।

    संबंधित पक्षों को निर्धारित format में C&D Waste Management Plan भी देना होगा। Excavation से निकलने वाली मिट्टी या अन्य सामग्री को C&D Waste से अलग रखना और अलग transport करना जरूरी होगा।

    VTMS से मलबे वाले वाहनों पर कैसे नजर रखी जाएगी?

    VTMS के जरिए वाहन की movement को source से authorised destination तक track करने की व्यवस्था होगी। इससे route और disposal location की निगरानी के साथ unauthorised dumping की पहचान आसान हो सकती है।

    BMC ने यह भी अनिवार्य किया है कि transport के दौरान वाहनों को ठीक से cover रखा जाए, ताकि मलबा सड़क पर न गिरे और धूल से प्रदूषण न फैले।

    घर में Renovation कराने वालों पर क्या असर होगा?

    घर, दुकान या अन्य property में repair, renovation या demolition से निकलने वाला मलबा भी C&D Waste management व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।

    इसलिए renovation कराने वालों को मलबा सड़क, खाली प्लॉट या किसी अनधिकृत जगह पर नहीं डलवाना चाहिए। इसे authorised collection, transportation और disposal/processing व्यवस्था के जरिए भेजना होगा।

    छोटे स्तर के debris के लिए BMC की मौजूदा व्यवस्था में authorised collection सुविधा का प्रावधान है। लागू मात्रा और प्रक्रिया के लिए MDCTS/BMC की वर्तमान guidelines देखना जरूरी होगा।

    नियम तोड़ने पर ₹25,000 के अलावा क्या होगा?

    MDCTS registration या authorised VTMS के बिना C&D Waste transport करने वाले वाहन पर ₹25,000 प्रति vehicle, प्रति violation का दंड लगाया जा सकता है।

    Unauthorised dumping, बिना अनुमति transportation या disposal तथा अन्य नियमों के उल्लंघन पर काम रोकने, permissions cancel करने, bank guarantee जब्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

    BMC ने पहले ही कितनी कार्रवाई की?

    C&D Waste dumping पर BMC की कार्रवाई पहले से जारी है। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 के बीच 419 C&D Waste-related violations में ₹31.64 लाख का जुर्माना लगाया गया। इनमें 349 unauthorised dumping और 70 approved plan के बिना transportation के मामले थे।

    अगस्त में ही 65 C&D Waste violations पर ₹8.54 लाख की कार्रवाई हुई।

    मुंबई में रोज 8,000 टन मलबा, Processing Capacity कितनी?

    MDCTS की जरूरत के पीछे मुंबई में पैदा होने वाला भारी C&D Waste भी बड़ी वजह है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई में रोज करीब 8,000 टन C&D Waste निकलता है, जबकि Dahisar और Diaghar की मौजूदा processing facilities की combined capacity करीब 1,200 टन प्रतिदिन है। इससे waste generation और processing capacity के बीच बड़ा gap सामने आता है।

    यह gap illegal dumping, road dust, drainage blockage और खुले स्थानों पर debris जमा होने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    BMC 2,000 TPD नई Processing Capacity जोड़ने की तैयारी में

    BMC City, Eastern Suburbs और Western Suburbs में integrated C&D Waste processing facilities विकसित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसके जरिए कुल 2,000 TPD तक additional processing capacity विकसित करने का प्रस्ताव है।

    BMC tender records के अनुसार संबंधित प्रक्रिया में bid submission की deadline 10 सितंबर 2026 और bid opening 11 सितंबर 2026 निर्धारित थी।

    इससे स्पष्ट है कि महानगरपालिका illegal dumping पर enforcement के साथ processing infrastructure बढ़ाने पर भी काम कर रही है।

    MDCTS से क्या बदलेगा?

    MDCTS और VTMS का उद्देश्य C&D Waste की movement को अधिक traceable बनाना है। यानी waste generator से transporter और फिर authorised processing/disposal location तक की chain पर digital monitoring बढ़ेगी।

    इससे unauthorised dumping करने वाले वाहनों की पहचान और transporter तथा waste generator की accountability मजबूत हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता authorised processing capacity, collection network और field-level enforcement पर भी निर्भर करेगी।

    23 सितंबर से पहले क्या करना जरूरी है?

    C&D Waste से जुड़े stakeholders को deadline से पहले:

    • MDCTS registration पूरा करना होगा।
    • जरूरी C&D Waste Management Plan जमा करना होगा।
    • authorised transporter का इस्तेमाल करना होगा।
    • वाहनों में authorised, functioning VTMS रखना होगा।
    • excavation material को C&D Waste से अलग रखना होगा।
    • मलबा केवल authorised destination पर भेजना होगा।
    • transport के दौरान vehicle को ठीक से cover रखना होगा।

    BMC ने MDCTS portal पर जारी होने वाली आगे की instructions पर नजर रखने की सलाह दी है।

    23 सितंबर 2026 के बाद compliance को लेकर BMC की enforcement और सख्त हो सकती है। मुंबई में C&D Waste की बड़ी मात्रा को देखते हुए अब चुनौती सिर्फ illegal dumping रोकने की नहीं, बल्कि waste की पूरी chain—generation, collection, transportation, tracking और processing—को प्रभावी बनाने की है।

  • साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसे में असलम शेख की पत्नी के खाते में ₹10 लाख जमा हुए। जानिए जांच, BMC कार्रवाई और जिम्मेदारी पर अब तक क्या हुआ।

    मुंबई: साकीनाका स्थित खैरानी रोड मैनहोल हादसे में दिवंगत असलम शेख के परिवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से ₹10 लाख की आर्थिक सहायता मिल गई है। यह रकम असलम शेख की पत्नी अंजुम शेख के बैंक खाते में 4 अगस्त 2026 को सीधे जमा की गई थी। 8 सितंबर को उनकी ओर से महानगरपालिका को लिखित आभार पत्र दिए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई।

    लेकिन इस आर्थिक मदद के साथ करीब दो महीने पुराने इस मामले में एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—2 जुलाई को खुले मैनहोल में गिरकर हुई असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई और जांच अब किस स्थिति में है?

    अंजुम शेख के खाते में कब जमा हुए ₹10 लाख?

    BMC के मुताबिक, दुर्घटना के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे ने शेख परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एल विभाग कार्यालय ने परिवार से बैंक खाते और वारसाहक्क से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे कराए।

    2 जुलाई को खैरानी रोड पर क्या हुआ था?

    2 जुलाई 2026 को साकीनाका के खैरानी रोड पर drainage-related काम के दौरान एक मैनहोल खुला हुआ था। इसी दौरान असलम शेख उसमें गिर गए और तेज पानी के बहाव में बह गए। कई घंटे की तलाश के बाद उनका शव drainage channel से बरामद किया गया। उस समय मौके पर पर्याप्त barricading और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

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    मृतक असलम शेख की फाइल तस्वीर

    जानकारी के अनुसार असलम शेख साकीनाका के यादव नगर इलाके के रहने वाले थे। घटना के बाद BMC और पुलिस दोनों स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।

    हादसे के बाद BMC ने क्या कार्रवाई की?

    हादसे के तत्काल बाद BMC ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके साथ contractor की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने भी contractor और उससे जुड़े तीन contractual workers के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन workers को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, जबकि contractor के बारे में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।

    इससे मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि manhole maintenance, contractor supervision और civic accountability का मुद्दा बन गया।

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    घटना की पुरानी तस्वीर

    जांच में work order को लेकर क्यों उठे सवाल?

    इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया।

    BMC की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई। इसके बाद यह सवाल उठा कि जिस स्थान पर protective grille लगाने का काम चल रहा था, उस काम के लिए औपचारिक work order किसके पास था और काम किसकी अनुमति से शुरू हुआ था।

    अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक contractor ने show-cause notice के जवाब में दावा किया कि उसके work order की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उसने किसी को काम नहीं दिया था। इस दावे ने जांच को और जटिल बना दिया।

    सबसे गंभीर सवाल—अगर contractor का work order समाप्त हो चुका था, तो मैनहोल पर protective work कौन कर रहा था और वह काम किस अनुमति या निगरानी में किया जा रहा था?

    हालांकि यह सवाल जांच के संदर्भ में है और इसे किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और पुलिस की कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

    BMC की जांच में contractor और अधिकारियों की भूमिका पर क्या सामने आया?

    जुलाई के अंत तक BMC की inquiry report सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे थे। 31 जुलाई की रिपोर्टों में बताया गया था कि हादसे के करीब एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी।

    बाद की रिपोर्टिंग में fact-finding exercise से contractor और संबंधित ward अधिकारियों की ओर से safety और procedural lapses की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि जांच केवल contractor तक सीमित नहीं थी, बल्कि civic supervision की भूमिका भी जांच के दायरे में थी।

    हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    हादसे से पहले ही BMC को High Court से मिल चुकी थी चेतावनी

    असलम शेख की मौत से कुछ ही दिन पहले Bombay High Court ने मुंबई में खुले मैनहोल को लेकर BMC को कड़ी फटकार लगाई थी।

    अदालत ने monsoon के दौरान खुले मैनहोल से किसी इंसानी जान के जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया था और BMC से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। असलम शेख की मौत के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि जब manhole safety पहले से न्यायिक निगरानी में थी, तब खैरानी रोड पर maintenance work के दौरान सुरक्षा व्यवस्था क्यों विफल हुई।

    BMC ने पूरे मुंबई के मैनहोल की safety को लेकर क्या कहा?

    हादसे के बाद BMC ने शहर के सभी 26 wards में manhole inspection और सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी।

    लेकिन जुलाई में BMC के Additional Municipal Commissioner ने यह भी स्पष्ट किया था कि महानगरपालिका यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि मुंबई के हर manhole chamber में protective safety net मौजूद है, क्योंकि safety-net installation एक continuous process है।

    यही बात इस मामले को सिर्फ साकीनाका की एक दुर्घटना से आगे ले जाती है। Mumbai में manhole safety की समस्या में पुराने covers, maintenance के दौरान खोले गए chambers, protective grills, barricading और monitoring—सभी शामिल हैं।

    जानकारी के अनुसार मुंबई में करीब 3,400 किलोमीटर का storm-water drain network और 2,081 किलोमीटर का sewer network है, जिसके maintenance के लिए बड़ी संख्या में manholes का इस्तेमाल होता है।

    क्या ₹10 लाख मिलने से मामला खत्म हो गया?

    नहीं। ₹10 लाख की आर्थिक सहायता परिवार के लिए तत्काल वित्तीय सहारा है, लेकिन इससे पुलिस जांच या प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप समाप्त नहीं होती।

    असलम शेख की मौत के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों को अलग-अलग देखना जरूरी है—

    • परिवार को आर्थिक सहायता: ₹10 लाख खाते में जमा हो चुके हैं।
    • प्रशासनिक कार्रवाई: BMC अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया हुई।
    • कानूनी जिम्मेदारी: contractor और workers के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी महत्वपूर्ण है।

    इसलिए आर्थिक सहायता को अंतिम कानूनी compensation या मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जवाबदेही स्पष्ट न करे।

  • QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    मुंबई के QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति देने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा निकालेगी।

    मुंबई: QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति देने और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन की ओर से 10 सितंबर 2026 को बोरीवली पश्चिम में मोर्चा निकाला जाएगा। यूनियन का दावा है कि QR-Code होने के बावजूद बड़ी संख्या में फेरीवाले पिछले दो वर्षों से कारोबार से वंचित हैं।

    यूनियन के मुताबिक, इस स्थिति के कारण फेरीवालों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर फेरीवालों में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर यह मोर्चा आयोजित किया जा रहा है।

    मोर्चा 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे जांभली गली, मोक्ष प्लाजा, एस.वी. रोड, बोरीवली पश्चिम से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी महानगरपालिका के आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचेंगे।

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    QR-Code के बाद भी कारोबार से वंचित रखने का आरोप

    आजाद हॉकर यूनियन का कहना है कि QR-Code जारी होने के बावजूद संबंधित फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति नहीं मिल रही है। यूनियन ने दावा किया है कि पिछले करीब दो वर्षों से इस समस्या के कारण कई फेरीवाले अपने रोजमर्रा के रोजगार से वंचित हैं।

    यूनियन के अनुसार, एक तरफ फेरीवालों को पहचान और नियमन से जुड़ी प्रक्रिया के तहत QR-Code दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ कारोबार करने के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने इसे लेकर प्रशासन से स्पष्ट नीति और कानूनी व्यवस्था के तहत कारोबार की अनुमति देने की मांग की है।

    Street Vendors Act लागू करने की मांग

    मोर्चे में Street Vendors Act, 2014 को पूरी तरह लागू करने की मांग भी उठाई जाएगी। यूनियन ने न्यायालय के आदेशों का पालन करने तथा संरक्षित फेरीवालों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न रोकने की मांग की है।

    आजाद हॉकर यूनियन की प्रमुख मांगों में QR-Code धारक फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल रोकना, पिछले दो वर्षों से रोजगार से वंचित फेरीवालों को कारोबार का अवसर देना और कानून के तहत उन्हें सुरक्षित तरीके से कारोबार करने की व्यवस्था करना शामिल है।

    यूनियन का कहना है कि फेरीवालों को सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों के रूप में देखने के बजाय उन्हें कानून के दायरे में लाकर रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।

    “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों का मुद्दा नहीं”

    यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल बोरीवली तक सीमित नहीं है। मुंबई में बड़ी संख्या में फेरीवाले अपने परिवार का खर्च इसी रोजगार से चलाते हैं।

    यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा, “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों की लड़ाई नहीं है, बल्कि मुंबई के हजारों मेहनतकश फेरीवालों के रोजगार और अधिकार की लड़ाई है। रोजगार हमारा अधिकार है। प्रशासन को फेरीवालों की समस्या को सहानुभूति और कानूनी दृष्टिकोण से देखना चाहिए।”

    यूनियन ने मुंबई के सभी QR-Code धारक फेरीवालों और अन्य मेहनतकश फेरीवालों से मोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

    कौन-कौन होंगे शामिल?

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चे में नगर पथ विक्रेता समिति, मुंबई के सदस्य दया शंकर सिंह और जय शंकर सिंह तथा जोन 7 के सदस्य प्रकाश उदेसी और शांताराम शिंदे प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इनके अलावा लवकुश तिवारी और सलाउद्दीन पटेल के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    मोर्चे का आयोजन शांताराम शिंदे, प्रवीण पाठक, रवी खावडिया, राकेश खावडिया, श्याम सुंदर झा, रविंद्र मिश्रा, फिरोज खान, अहसान अंसारी, पवन तांडले, मनोज राय और राजेश राऊत की ओर से किया जा रहा है।

    10 सितंबर को बोरीवली में जुटेंगे फेरीवाले

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत दोपहर 12 बजे जांभली गली से होगी और आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचकर फेरीवालों की मांगों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

    अब मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि QR-Code धारक फेरीवालों की कारोबार संबंधी मांग और Street Vendors Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महानगरपालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है।