BMC से PWD तक Transfer-Posting पर सवाल उठे हैं। 225 राजनीतिक सिफारिशों, BMC Randomisation और PWD tenure विवाद का पूरा मामला जानिए।
मुंबई: सरकारी नौकरी में Transfer-Posting नियम से होना चाहिए या किसी नेता की recommendation से? BMC से लेकर महाराष्ट्र PWD तक सामने आ रही घटनाएं इसी बुनियादी सवाल को सामने ला रही हैं। BMC के रिकॉर्ड में पिछले एक साल में 225 अधिकारियों-कर्मचारियों के Transfer और Promotion को लेकर राजनीतिक सिफारिशें मिली हैं। दूसरी तरफ नागपुर PWD में कुछ Junior Engineers के लंबे समय तक एक ही जगह बने रहने और extension की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। ऐसे माहौल में BMC ने Engineers के Transfer के लिए अब Online Randomisation की व्यवस्था लागू की है।
225 सिफारिशें, सवाल सिर्फ संख्या का नहीं
RTI से सामने आई जानकारी के मुताबिक BMC के City Engineer Office में पिछले एक साल में 225 Transfer/Promotion recommendation letters मिले। इनमें Union Ministers, State Ministers, MPs, MLAs, MLCs और अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं।
रिकॉर्ड में Eknath Shinde का नाम 10 बार और Ramdas Athawale का 9 बार सामने आया। Girish Mahajan और Kalidas Kolambkar के नाम 7-7 बार दर्ज हैं। कई अन्य नेताओं के नाम भी रिकॉर्ड में हैं।
यहां असली सवाल 225 की संख्या से आगे है—किसी कर्मचारी की Transfer-Posting का प्रशासनिक फैसला जिस competent authority को करना है, वहां किसी राजनीतिक जनप्रतिनिधि की recommendation की भूमिका क्या है?
Recommendation अपने-आप में किसी Transfer को गैरकानूनी साबित नहीं करती। कई बार जनप्रतिनिधि health problem, family circumstances, travel distance या दूसरी व्यक्तिगत दिक्कतों को लेकर representation भी करते हैं। लेकिन अंतिम फैसला नियमों और सक्षम प्रशासनिक authority के आधार पर होना चाहिए। इसलिए सवाल recommendation के अस्तित्व से ज्यादा उसके प्रभाव और उसके बाद हुए फैसले की प्रक्रिया पर है।
अब BMC में बदली Computer तय करेगा
इसी विवाद के बीच BMC ने City Engineer Office में JE, SE और AE के लिए Employee Transfer System Based on Randomization शुरू किया है।
2 सितंबर के circular के मुताबिक एक ही department/section में तीन साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे Engineers को 5 से 20 सितंबर के बीच Online Transfer Preference देनी होगी। कर्मचारी कम से कम एक और अधिकतम पांच विकल्प दे सकते हैं। इसके बाद available manpower और vacant posts के आधार पर computerised system Transfer process करेगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह व्यवस्था फिलहाल City Engineer Office के JE, SE और AE पर लागू है। इसे BMC के हर कर्मचारी के लिए लागू नया Transfer rule नहीं कहा जाएगा।
लेकिन क्या इससे Recommendation का रास्ता बंद होगा?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
अगर Transfer को computerised randomisation से तय किया जाना है, तो किसी खास कर्मचारी के लिए बाहर से आने वाली recommendation का उस process पर क्या असर होगा? क्या ऐसे मामलों के लिए कोई अलग exception mechanism होगा? और अगर exception होगा तो उसका कारण और approval public record में आएगा या नहीं?
यानी असली transparency सिर्फ software लगाने से नहीं आएगी। Transparency तब मानी जाएगी जब Transfer का पूरा trail—tenure, vacancy, preference, competent authority का decision और exception का कारण—स्पष्ट हो।
2025 का विवाद भी इसी सवाल को और गंभीर बनाता है
BMC में Transfer-Posting को लेकर विवाद पहली बार नहीं उठा। 2025 में करीब 160 Engineers के Transfer को लेकर political influence और “cash-for-transfer” जैसे आरोप लगाए गए थे। विवाद बढ़ने के बाद proposed transfer process पर रोक लगी थी।
मई 2026 में BJP MLA Mihir Kotecha ने आरोप लगाया कि पहले विवादित list में शामिल करीब 55 अधिकारियों को दोबारा उन्हीं या समान postings पर लाने की कोशिश हो रही है। BMC ने उस समय ऐसी किसी final list की जानकारी से इनकार किया था।
इन आरोपों की पुष्टि को लेकर अंतिम निष्कर्ष अलग बात है, लेकिन लगातार उठते सवाल बताते हैं कि Transfer-Posting की प्रक्रिया पर भरोसा ही इस विवाद का केंद्र बन चुका है।
PWD में सवाल अलग, लेकिन मुद्दा वही
नागपुर PWD की रिपोर्ट ने Transfer और tenure की दूसरी तस्वीर सामने रखी है।
सरकारी नियम के मुताबिक सामान्य तौर पर एक जगह तीन साल की tenure के बाद Transfer होना चाहिए और उससे आगे extension exceptional circumstances में ही होना चाहिए। लेकिन कुछ Junior Engineers के 8 से 10 साल तक एक ही जगह काम करने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में extension के लिए लिखित आदेश नहीं होने पर भी सवाल उठे हैं।
यहीं प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा आता है—अगर tenure खत्म हो गया तो किसी कर्मचारी को उसी जगह बनाए रखने का आधार क्या था, और वह आधार किस लिखित आदेश में दर्ज है?
BMC में राजनीतिक recommendations और PWD में tenure-extension एक ही मामला नहीं हैं। लेकिन दोनों घटनाएं एक ही बड़ी चिंता सामने लाती हैं: सरकारी Transfer-Posting में नियम कितना साफ है और उसका पालन कितना दिखाई देता है?
BMC के सामने एक और बड़ा accountability test
इसी समय Bombay High Court BMC की sanitation workers को housing देने की नीति पर भी लगातार जवाब मांग रहा है। 2008 की State Government policy के बावजूद करीब 18 साल में housing implementation नहीं होने पर Court ने BMC से उसके land resources की विस्तृत जानकारी मांगी है।
BMC Commissioner के affidavit में करीब 4,176 leasehold properties, 3,505 tenanted properties/staff quarters, 3,668 vacant land tenancies, करीब 8,000 existing amenities और लगभग 6,000 public-purpose reservations का उल्लेख हुआ था। Court ने BMC की land pool को व्यापक रूप से examine करने और sanitation workers के लिए उपलब्ध land identify करने को कहा है।
31 अगस्त की proceedings के बाद BMC को fresh comprehensive affidavit दाखिल करने के लिए 9 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। Court ने जरूरत पड़ने पर independent committee के जरिए land की स्थिति की जांच की संभावना भी रखी है।
यह Transfer case का हिस्सा नहीं है, लेकिन BMC की broader administrative accountability पर चल रही judicial scrutiny को जरूर दिखाता है।
अब असली कसौटी
BMC के 225 recommendation letters हों, Engineers के लिए Randomisation System हो या PWD में tenure-extension का सवाल—मुद्दा किसी एक नेता, अधिकारी या कर्मचारी का नहीं है।
मुद्दा यह है कि सरकारी पद पर Transfer-Posting का फैसला आखिर नियम करेगा या influence?
BMC ने Randomisation के जरिए एक रास्ता जरूर चुना है। अब देखना यही है कि यह व्यवस्था सिर्फ Transfer order बनाने का नया software बनती है या वास्तव में ऐसी प्रक्रिया तैयार करती है जिसमें किसी की recommendation से ज्यादा महत्व नियम, tenure, vacancy और documented administrative decision का हो।
