Read the latest Maharashtra news, live updates and top stories from Mumbai, Pune, Nagpur, Nashik, Thane and across the state. Stay informed with coverage on politics, crime, government schemes, business, education, weather, infrastructure and major events, only on Indian FastTrack.
Andheri में टिकटलेस यात्री ने Western Railway के TC को धक्का देकर घायल कर दिया। आंख के ऊपर चोट लगी। यात्री को पकड़कर GRP के हवाले किया गया।
मुंबई: Andheri स्टेशन पर मंगलवार शाम ticket checking के दौरान हंगामा हो गया।** Western Railway के Ticket Checker (TC) Prakash Dubey को एक ticketless passenger ने कथित तौर पर धक्का दे दिया। धक्का लगने से Dubey जमीन पर गिर गए और उनकी बाईं आंख के ऊपर चोट लग गई, जिससे bleeding शुरू हो गई।
घटना के तुरंत बाद passenger को पकड़ लिया गया और आगे की कार्रवाई के लिए Andheri GRP के हवाले कर दिया गया।
Borivali से शुरू हुआ था पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक, Dubey शाम करीब 6:40 बजे Borivali में Virar-Dadar local के second-class ordinary coach में ticket checking कर रहे थे। इसी दौरान एक passenger बिना ticket यात्रा करता मिला।
Dubey ने passenger से fine भरने को कहा। आरोप है कि passenger ने ticket arrange करने की बात कही। जब local Andheri स्टेशन पहुंची, तो Dubey ने उसे ट्रेन से उतरने को कहा।
आरोप है कि ट्रेन से नीचे उतरते ही passenger ने Dubey को धक्का दे दिया। अचानक हुए इस हमले में TC गिर पड़े और उनकी आंख के ऊपर चोट लग गई।
घायल होने के बावजूद passenger को पकड़ा
चोट लगने के बावजूद Dubey ने senior railway staffer Ganesh Rokde की मदद से passenger को पकड़ लिया। उसे पहले TC office ले जाया गया और बाद में Andheri GRP को सौंप दिया गया।
वहीं, Dubey को master office को जानकारी देने के बाद railway dispensary ले जाया गया, जहां उनकी चोट का treatment किया गया।
बिना टिकट यात्रा पर अब ₹500 minimum excess charge
इस घटना के बीच commuters के लिए यह जानना भी जरूरी है कि 2026 में railway के ticketless-travel rules में minimum excess charge ₹500 किया गया है। इसके अलावा applicable fare या fare difference भी देना पड़ सकता है।
यानी ticket को लेकर कोई dispute हो तो passenger को railway की तय प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। Ticket checking के दौरान physical confrontation करना अलग कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
Passenger को Andheri GRP के हवाले किए जाने के बाद अब मामले में FIR, आरोपी पर लगने वाली धाराएं और आगे की legal action महत्वपूर्ण होगी।
Western Railway ने ticket checking के दौरान होने वाले disputes को record करने के लिए body-camera pilot भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य passenger और railway staff के बीच विवाद की स्थिति में recorded evidence उपलब्ध कराना है।
Mumbai GMLR tunnel: SGNP के नीचे TBM Tulsi ने 5.3 किमी tunnel की खुदाई शुरू की। जानिए Goregaon-Mulund route, 20 मिनट सफर, safety और 2029 deadline की जानकारी।
मुंबई: Goregaon और Mulund के बीच सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। Goregaon-Mulund Link Road (GMLR) project के तहत Sanjay Gandhi National Park (SGNP) के नीचे twin tunnel की actual खुदाई शुरू हो गई है। BMC ने पहली Tunnel Boring Machine यानी TBM ‘Tulsi’ को excavation के लिए commission कर दिया है। यह tunnel Goregaon East की Dadasaheb Phalke Chitranagari यानी Film City को Mulund West के Amar Nagar से जोड़ेगी।
यह सिर्फ एक और road project का construction update नहीं है। GMLR पूरा होने के बाद Mumbai के western और eastern suburbs के बीच direct east-west connectivity तैयार होगी। अभी Goregaon से Mulund जाने में traffic और route के हिसाब से काफी समय लगता है, जबकि project के पूरा होने के बाद travel time करीब 90 मिनट से घटकर 20 मिनट तक आने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि यह estimated corridor travel time है, यानी हर हालत में door-to-door 20 मिनट की guarantee नहीं है।
GMLR की कुल length करीब 12.2 किलोमीटर है और project को चार phases में execute किया जा रहा है। SGNP के नीचे बनने वाला tunnel हिस्सा Phase 3(B) का सबसे अहम component है। यहां दो तीन-लेन वाली tunnels बनाई जा रही हैं, जो Film City side से शुरू होकर Mulund West के Amar Nagar तक जाएंगी।
BMC की latest जानकारी के मुताबिक tunnel package की total length करीब 6.6 किलोमीटर है। इसमें twin tunnels के साथ 17 cross passages, 720 मीटर के twin-box tunnel और Goregaon तथा Mulund की तरफ करीब 600 मीटर approach roads भी शामिल हैं। यानी सिर्फ underground boring पूरा होना ही पूरा काम नहीं है; इसके बाद approach roads, internal systems और बाकी infrastructure को भी ready करना होगा।
जिस machine ने अब खुदाई शुरू की है उसका नाम Tulsi रखा गया है। यह अत्याधुनिक Earth Pressure Balance (EPB) TBM technology पर काम करेगी। इसका इस्तेमाल खास तौर पर इस तरह किया जा रहा है कि SGNP के sensitive forest area में surface-level construction का impact कम से कम रहे।
पहली TBM की assembly पूरी हो चुकी थी और उसका Site Acceptance Test भी successfully complete किया गया। अब यही machine underground excavation का actual काम शुरू कर चुकी है। दूसरी TBM की assembly अभी चल रही है और BMC के मुताबिक उससे October 2026 में excavation शुरू करने का target है।
जंगल के नीचे tunnel बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
GMLR का सबसे sensitive हिस्सा SGNP के नीचे से गुजरता है। जमीन के ऊपर बड़ी road बनाने से forest और biodiversity पर ज्यादा disturbance हो सकता था। इसलिए tunnel boring technology के जरिए road को underground ले जाने का रास्ता चुना गया है। पुराने project documents में भी SGNP के अंदर किसी shaft की जरूरत न पड़े, इसके लिए TBM-based tunnelling का प्रस्ताव रखा गया था।
SGNP में Tulsi और Vihar lakes भी हैं, जो Mumbai की water supply का हिस्सा हैं। इसलिए इस project में tunnel construction के दौरान environment और water-related concerns को लेकर safeguards खास महत्व रखते हैं।
यही वजह है कि इस project की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ चट्टान काटकर tunnel बनाना नहीं, बल्कि sensitive forest और आसपास के ecological system को ध्यान में रखते हुए construction पूरा करना भी है।
इतनी लंबी underground road tunnel में सिर्फ road बना देना काफी नहीं है। किसी accident, fire या emergency की situation में लोगों को safe तरीके से बाहर निकालना भी जरूरी है।
GMLR tunnel में mechanical ventilation, mist-based firefighting system, CCTV surveillance, SCADA control system, LED lighting और modern signage लगाए जाएंगे। दोनों tunnels के बीच 17 cross passages भी होंगे। इनका मकसद emergency situation में एक tunnel से दूसरी tunnel तक access और evacuation की सुविधा देना है।
Tunnel में utility ducts भी रखे जाएंगे और हर tunnel में 1,800 mm diameter की water pipeline के लिए provision किया गया है। यानी underground corridor का इस्तेमाल सिर्फ traffic movement तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि city utilities के लिए भी space रखा गया है।
Goregaon से Mulund का सफर कितना बदल सकता है?
GMLR का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जिन्हें रोज western suburbs से eastern suburbs की तरफ जाना पड़ता है।
अभी Goregaon, Jogeshwari, Powai, Mulund और आसपास के routes पर traffic के कारण east-west movement काफी समय ले सकता है। GMLR के जरिए एक direct high-capacity corridor मिलने से existing roads पर traffic pressure कम करने का target है।
Project operational होने के बाद Goregaon-Mulund journey करीब 20 मिनट तक आने की उम्मीद है। इससे travel time के साथ fuel consumption में भी कमी आ सकती है। लेकिन actual journey time इस बात पर भी depend करेगा कि tunnel के entry-exit points, approach roads और आगे के connecting roads पर उस समय कितना traffic है।
Mumbai के लिए इसका फायदा सिर्फ Goregaon और Mulund तक नहीं
GMLR का असर सिर्फ इन दो इलाकों तक सीमित नहीं रहने वाला। यह western suburbs को eastern side के Mulund, Thane और आगे Navi Mumbai की तरफ जाने वाले road network से बेहतर तरीके से connect करने में मदद कर सकता है।
इससे उन commuters को भी फायदा मिलने की उम्मीद है जिन्हें रोज east-west direction में travel करना पड़ता है। Emergency services, logistics और commercial movement के लिए भी faster connectivity महत्वपूर्ण हो सकती है।
Project से प्रभावित लोगों का क्या होगा?
GMLR की construction के कारण प्रभावित होने वाले करीब 906 project-affected persons के rehabilitation का काम भी project का हिस्सा है। BMC के मुताबिक Kanjurmarg में छह ground-plus-23-storey buildings में इनका rehabilitation किया जा रहा है।
इसका मतलब GMLR की कहानी सिर्फ road और tunnel की नहीं है। Project के साथ उन लोगों का rehabilitation भी जुड़ा है जिनकी property या रहने की जगह infrastructure work से प्रभावित हुई है।
पहली TBM Tulsi ने excavation शुरू कर दिया है। दूसरी TBM की assembly चल रही है और BMC ने October 2026 में उसकी excavation शुरू करने का target रखा है।
पूरे GMLR project को February 2029 तक complete करने का target रखा गया है। BMC के मुताबिक project में अब तक करीब 21% physical progress हो चुकी है।
यानी अभी Mumbai commuters को 20 मिनट के सफर का फायदा तुरंत नहीं मिलने वाला। पहले tunnels की excavation और lining, cross passages, approach roads, ventilation, firefighting, CCTV, lighting और बाकी systems का काम पूरा होगा। उसके बाद testing और commissioning के बाद यह corridor traffic के लिए open किया जाएगा।
GMLR की असली परीक्षा अब शुरू हुई है
Goregaon-Mulund Link Road लंबे समय से Mumbai के बड़े connectivity projects में शामिल है, लेकिन अब इसका सबसे challenging underground phase जमीन पर दिखाई देने लगा है।
TBM Tulsi के शुरू होने का मतलब है कि project अब planning और preparation से निकलकर actual tunnelling phase में पहुंच गया है। आगे दूसरी TBM का काम शुरू होना, दोनों tunnels की excavation पूरी होना और बाकी road infrastructure का समय पर तैयार होना सबसे अहम रहेगा।
अगर BMC का February 2029 वाला target पूरा होता है, तो Mumbai को western और eastern suburbs के बीच एक नया direct high-capacity route मिलेगा। और अगर travel-time estimate के मुताबिक सफर करीब 20 मिनट तक आता है, तो Goregaon-Mulund के बीच रोज travel करने वाले हजारों लोगों के लिए यह सिर्फ एक नई road नहीं, बल्कि daily commute में बड़ा बदलाव हो सकता है।
मुंबई से रेप के आरोपी सब-इंस्पेक्टर अजमल हक गिरफ्तार। सॉल्ट लेक गेस्ट हाउस केस में बिधाननगर पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया।
मुंबई: पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक में महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे सब-इंस्पेक्टर अजमल हक को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है और अब उसे बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक इलाके में एक महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे पुलिस अधिकारी को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजमल हक के रूप में हुई है, जो बीरभूम जिले के नलहाटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।
पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता ले गई है। अब आरोपी सब-इंस्पेक्टर को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।
सॉल्ट लेक के गेस्ट हाउस में रेप का आरोप
पुलिस के मुताबिक, मामला पिछले साल का बताया जा रहा है। महिला ने जुलाई में बिधाननगर ईस्ट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर अजमल हक महिला को सॉल्ट लेक के सीएल ब्लॉक स्थित एक गेस्ट हाउस में लेकर गया था, जहां उसके साथ रेप किया गया।
शिकायत मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी पुलिस अधिकारी की तलाश की।
जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर को पहले जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने बीरभूम जिला पुलिस से आरोपी अधिकारी के संबंध में संपर्क किया, तो उसके गायब होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई में मौजूद है। सूचना के आधार पर बिधाननगर ईस्ट पुलिस की टीम ने कार्रवाई की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं और मामले से जुड़े कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच करेगी।
फिलहाल आरोपी पर लगाए गए रेप के आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
मुंबई लोकल में महिलाओं की Gold Chain और Mangalsutra चोरी करने वाली पुणे की 65 वर्षीय अनघा जोशी गिरफ्तार, CCTV से खुला राज।
मुंबई: Local Train में महिलाओं के गले से Gold Chain और Mangalsutra चोरी करने वाली एक 65 साल की महिला को Railway Police ने गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला का नाम अनघा जोशी है और वह पुणे की रहने वाली है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अनघा जोशी चोरी करने के लिए पुणे से मुंबई आती थी और खास बात ये है कि वह हर दिन चोरी नहीं करती थी। उसका अपना एक अलग ‘Lucky Day’ था—शनिवार।
बताया जा रहा है कि वह महीने के पहले और तीसरे शनिवार को ही मुंबई आती और Local Train में महिलाओं को अपना Target बनाती थी।
पुलिस जांच के मुताबिक अनघा जोशी का मानना था कि शनिवार उसके लिए Lucky है। इसी वजह से वह महीने के पहले और तीसरे शनिवार को पुणे से मुंबई आती थी।
मुंबई पहुंचने के बाद वह Railway Station और Local Train की भीड़ में महिलाओं पर नजर रखती थी। खासकर ऐसी महिलाएं उसके निशाने पर होती थीं, जिनके गले में Gold Chain या Mangalsutra होता था।
भीड़ में धक्का-मुक्की के दौरान वह मौका देखकर Jewellery निकाल लेती और फिर पुणे वापस चली जाती थी।
दो चोरी की घटनाओं ने खोला पूरा राज
इस मामले में पुलिस को सबसे बड़ा सुराग दो अलग-अलग चोरी की घटनाओं के बाद मिला।
2 मई को दादर Railway Station पर Borivali Local पकड़ते समय एक 44 वर्षीय महिला Banker के गले से करीब 67 हजार रुपये की Gold Chain और Pendant चोरी हो गई।
इसके करीब एक महीने बाद 6 जून को दादर में ही Borivali Local में चढ़ते समय एक महिला Finance Executive के गले से करीब 89 हजार रुपये का Mangalsutra और Gold Chain चोरी हो गई।
दोनों मामलों में शिकायत मिलने के बाद Railway Police ने जांच शुरू की।
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में अनघा जोशी ने कथित तौर पर बताया कि वह करीब 20 साल पहले भी कुछ समय तक Chain Snatching में शामिल रही थी।
पुलिस के मुताबिक मुंबई से चोरी किए गए Gold Jewellery को वह पुणे ले जाती थी और वहां कुछ ज्वैलर्स को बेच देती थी।
Police ने पुणे के कुछ ज्वैलर्स की दुकानों से चोरी के Jewellery भी बरामद किए हैं। अब जांच इस बात की भी की जा रही है कि अनघा ने पहले कितनी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया था और इस पूरे काम में उसके साथ कोई और भी शामिल था या नहीं।
पुलिस जांच में अनघा जोशी की Family Background को लेकर भी जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि उनके बेटे की एक Accident में मौत हो गई थी, जबकि उनके पति की Alcohol Addiction के चलते मौत हुई थी। इसके बाद घर चलाने और रोजमर्रा के खर्च को लेकर आर्थिक परेशानियां बढ़ गईं।
पुलिस के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों के बाद उन्होंने कथित तौर पर चोरी का रास्ता अपनाया।
हालांकि आर्थिक परेशानी अपनी जगह है, लेकिन महिलाओं की Jewellery चोरी करने के आरोप में Railway Police ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
अब पुलिस को और कितनी वारदातों का पता चलेगा?
अनघा जोशी फिलहाल Judicial Custody में हैं। पुलिस अब उनके पुराने Record और Mumbai में हुई दूसरी Jewellery Theft की घटनाओं को भी खंगाल रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ‘पहले और तीसरे शनिवार’ वाला उनका Lucky Day वाला Pattern सिर्फ इन घटनाओं तक सीमित था या उन्होंने लंबे समय से इसी तरीके से Mumbai की Local Trains में कई महिलाओं को Target किया था?
Police Investigation पूरी होने के बाद इस मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
कांदिवली वेस्ट में तड़के कमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। दमकल ने धुएं से भरी इमारत से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, कोई घायल नहीं हुआ।
मुंबई: कांदिवली वेस्ट में सोमवार तड़के एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। कांदिवली रेल्वे स्टेशन फाटक रोड पर अभिराही होटल के पास स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में करीब सुबह 4:14 बजे आग लगने की सूचना मुंबई फायर ब्रिगेड को मिली।
आग के बाद पूरी बिल्डिंग में धुआं फैल गया था। ऐसे में दूसरी मंजिल पर मौजूद लॉजिंग हाउस में रह रहे 11 लोगों को दमकलकर्मियों ने सीढ़ियों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल वायरिंग और इंस्टॉलेशन, लकड़ी के फर्नीचर, तिरपाल, बांस के साथ प्लास्टिक और एल्युमिनियम की सजावटी सामग्री तक सीमित रही। चौथी मंजिल पर मौजूद तिरुपति बैंक्वेट के करीब 50 वर्ग फीट हिस्से में भी आग का असर हुआ, जहां फर्नीचर, कपड़े और फॉल्स सीलिंग को नुकसान पहुंचा।
फायर ब्रिगेड ने बचाई जान
घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के साथ-साथ बिल्डिंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। करीब 6:07 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। शुरुआती तौर पर इस घटना को Level-1 Fire के तौर पर बताया गया है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि आग के दौरान बिल्डिंग में मौजूद 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी जनहानि की खबर नहीं है। हालांकि, बिल्डिंग के कुछ हिस्सों और अंदर रखे सामान को नुकसान पहुंचा है।
आग आखिर किस वजह से लगी? इसका अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही आग लगने की सही वजह और नुकसान की पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।
महाराष्ट्र FDA ने Vimal Elaichi विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस दिया है। 15 दिन में जवाब और प्रचार सामग्री हटाने को कहा।
मुंबई/महाराष्ट्र: विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर बॉलीवुड के तीन बड़े सितारे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के निशाने पर आ गए हैं।FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। मामला उस विज्ञापन से जुड़ा है, जिसे FDA ने प्रथम दृष्टया प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष या छद्म प्रचार से जुड़ा माना है।
नोटिस की तारीख 11 अगस्त 2026 बताई गई है और यह करीब नौ पन्नों का है। अब तीनों अभिनेताओं को नोटिस मिलने के बाद तय समय के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।
FDA को Vimal Elaichi विज्ञापन पर आपत्ति क्यों है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विज्ञापन में इलायची दिखाई जा रही है, तो FDA को आपत्ति किस बात पर है?
FDA का कहना है कि विज्ञापन में विमल नाम और ब्रांड पहचान का इस्तेमाल इस तरह किया गया हो सकता है कि उससे महाराष्ट्र में प्रतिबंधित विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार हो। यानी विवाद इलायची को प्रतिबंधित बताने का नहीं, बल्कि उसके विज्ञापन के जरिए किसी प्रतिबंधित उत्पाद की पहचान और प्रचार को बढ़ावा देने के आरोप का है।
यही मामला छद्म विज्ञापन यानी किसी प्रतिबंधित उत्पाद का सीधे नाम लिए बिना उससे जुड़े ब्रांड या दूसरे उत्पाद के जरिए प्रचार करने के सवाल तक पहुंचता है।
तीनों सितारों को क्या करना होगा?
FDA ने सिर्फ जवाब मांगकर मामला खत्म नहीं किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तीनों को संबंधित विज्ञापन अभियान में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ प्रचार अभियान से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
नोटिस में उनसे विज्ञापन से जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने और अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों से संबंधित सामग्री हटाने को भी कहा गया है। साथ ही विज्ञापन और प्रचार अभियान से जुड़े समझौते, अभियान की जानकारी, भुगतान व्यवस्था तथा यह बताने वाले दस्तावेज मांगे गए हैं कि विज्ञापन स्वीकार करने से पहले उनकी ओर से किस तरह की जांच की गई थी।
तीनों अभिनेताओं को नोटिस मिलने के बाद 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देना है।
अगर तय समय में जवाब नहीं दिया गया या FDA को जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है। तीनों को व्यक्तिगत सुनवाई का विकल्प भी दिया गया है। वे खुद या अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए अपना पक्ष रख सकते हैं।
इसका मतलब फिलहाल मामला नोटिस और जांच के चरण में है। अभी तीनों अभिनेताओं को दोषी ठहराने वाला कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।
महाराष्ट्र में पान मसाला पर पहले से रोक
इस कार्रवाई का समय भी महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र में प्रतिबंधित पान मसाला और उससे जुड़े तंबाकू उत्पादों को लेकर FDA पहले से अभियान चला रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में विमल इलायची के विज्ञापन पर कार्रवाई सामने आई है। FDA का सवाल है कि अगर राज्य में संबंधित पान मसाला प्रतिबंधित है, तो उसी से जुड़ी ब्रांड पहचान का इस्तेमाल दूसरे उत्पाद के विज्ञापन में करके क्या प्रतिबंध को अप्रत्यक्ष तरीके से दरकिनार किया जा रहा है।
विमल ब्रांड के विज्ञापनों को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी इस तरह के विज्ञापनों में बॉलीवुड सितारों की भूमिका को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
अक्षय कुमार भी इसी ब्रांड से जुड़े विज्ञापन को लेकर विवाद में आए थे और बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए उस विज्ञापन से पीछे हटने की बात कही थी।
वहीं, पहले भी शाहरुख खान और अजय देवगन के ऐसे विज्ञापनों को लेकर सार्वजनिक बहस होती रही है। मौजूदा कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी सिर्फ विज्ञापन में दिखने तक सीमित है या उसे उस ब्रांड से जुड़े दूसरे उत्पादों और उसकी बाजार पहचान की भी जांच करनी चाहिए।
क्या Vimal Elaichi खुद प्रतिबंधित है?
नहीं, इस मामले को इस तरह समझना सही नहीं होगा।
FDA की आपत्ति यह नहीं है कि इलायची अपने आप में प्रतिबंधित उत्पाद है। विवाद इस बात पर है कि क्या Vimal Elaichi के विज्ञापन का इस्तेमाल प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष प्रचार के लिए किया जा रहा है।
यही कारण है कि मामले में विज्ञापन की प्रस्तुति, ब्रांड पहचान और उसके पीछे के प्रचार उद्देश्य महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस आरोप को अभी अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
अब इस मामले में सबसे ज्यादा नजर तीनों अभिनेताओं के जवाब पर रहेगी। उन्हें यह बताना होगा कि उन्होंने संबंधित विज्ञापन में किस भूमिका में काम किया, विज्ञापन को लेकर उनके और कंपनी के बीच क्या समझौता था और उन्होंने अभियान से पहले किस तरह की जांच की थी।
इसके बाद FDA उनके जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। अगर जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि FDA ने विज्ञापन को प्रथम दृष्टया संदिग्ध मानते हुए तीनों सितारों से जवाब मांगा है, लेकिन अभी किसी को दोषी घोषित नहीं किया गया है।
अब असली सवाल यह है—क्या शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ FDA को यह समझा पाएंगे कि उनका विज्ञापन सिर्फ इलायची का था, या फिर महाराष्ट्र FDA की जांच में इसे प्रतिबंधित पान मसाला के अप्रत्यक्ष प्रचार के तौर पर आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा?
Bangladesh deport हुई 27 साल की महिला एक महीने में फिर Mumbai पहुंची। Gamdevi Police ने गिरफ्तार किया, अब re-entry route और contacts की जांच जारी है।
मुंबई: भारत बांग्लादेश बॉर्डर सुरक्षा को लेकर मुंबई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिस 27 साल की बांग्लादेशी महिला को पिछले महीने ही भारत से Bangladesh deport किया गया था, वह कथित तौर पर एक बार फिर मुंबई पहुंच गई। 15 अगस्त की सुबह Gamdevi Police ने उसे Wilson College के सामने Chowpatty से सटे फुटपाथ इलाके से गिरफ्तार किया।
अब इस पूरे मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल है—Bangladesh भेजे जाने के बाद महिला सिर्फ कुछ ही समय में दोबारा India में कैसे दाखिल हुई और Mumbai तक कैसे पहुंची?
महिला की पहचान नदीरा सुल्ताना के तौर पर हुई है। Police के मुताबिक उसके पास India में रहने के लिए जरूरी valid documents नहीं थे और जांच में उसका previous deportation record भी सामने आया।
पुलिस के मुताबिक 15 अगस्त की सुबह करीब 8:15 बजे Gamdevi Police को सूचना मिली कि एक संदिग्ध बांग्लादेशी महिला N.S. Patkar Road पर Wilson College के सामने, Chowpatty से लगे फुटपाथ इलाके में घूम रही है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए के आधार पर एक महिला को वहां पाया गया।
पुलिस ने उससे उसकी पहचान और पते के बारे में पूछताछ की। हालांकि उसके जवाब स्पष्ट नहीं थे। इसके बाद पुलिस उसे आगे की पूछताछ के लिए Gamdevi Police Station ले गई।
पहले बताया Navi Mumbai का पता, फिर सामने आई Bangladesh की पहचान
Police Station में महिला से उसका नाम, पता और India में रहने से जुड़े documents मांगे गए।
पूछताछ में उसने शुरुआत में Koparkhairane, Navi Mumbai का address बताया। लेकिन जब पुलिस ने उससे India में रहने या भारतीय नागरिकता से जुड़े valid documents मांगे तो वह उन्हें पेश नहीं कर सकी।
जांच आगे बढ़ने पर महिला ने कथित तौर पर खुद को Bangladeshi national बताया। उसकी पहचान नदीरा सुल्ताना के रूप में हुई और Bangladesh में उसका address Gopalganj बताया गया।
इसके बाद Police ने उसके पुराने records check किए।
यहीं से इस मामले ने नया मोड़ ले लिया।
खुलासा: महिला को जुलाई में ही Bangladesh भेजा गया था
Police investigation में सामने आया कि नदीरा सुल्ताना को जुलाई 2026 में ही India से Bangladesh deport किया गया था।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक उसके previous deportation order की तारीख 22 जुलाई 2026 बताई गई है और इस मामले में पहले Govandi Police की कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आया है।
यानी जिस महिला को कुछ समय पहले ही India से बाहर भेजा गया था, वह अब फिर Mumbai में मिल गई।
महिला ने पूछताछ के दौरान Koparkhairane, Navi Mumbai का address बताया था।
अब Police के लिए यह जानना भी important होगा कि यह address उसने क्यों बताया और क्या उसका वहां कोई पुराना connection है।
क्या वह पहले वहां रह चुकी थी?
क्या वहां उसका कोई contact या परिचित है?
क्या किसी ने उसे Mumbai में रहने की जगह उपलब्ध कराई?
इन सवालों के जवाब मिलने पर Police को यह समझने में मदद मिल सकती है कि Bangladesh से कथित re-entry के बाद वह Mumbai तक किस network या contact के जरिए पहुंची।
Mumbai में पहले भी सामने आए हैं ऐसे Repeat-Entry Cases
नदीरा सुल्ताना का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में Mumbai में पहले भी ऐसे cases सामने आए हैं, जिनमें पहले deport किए गए Bangladeshi nationals के कथित तौर पर दोबारा India आने की बात सामने आई।
कुछ मामलों में Police को jungle/forest route से दोबारा entry की जानकारी मिली, जबकि एक अन्य मामले में Nepal-Guwahati route की बात सामने आई थी।
जुलाई 2026 में Borivali में पकड़े गए एक Bangladeshi national के मामले में Police ने alleged human traffickers की भूमिका की भी जांच की थी।
इससे यह जरूर सामने आता है कि deportation के बाद alleged re-entry Mumbai Police के लिए एक recurring investigation angle बन चुका है।
Maharashtra में 2025 में 2,376 Deportation
महाराष्ट्र में illegal immigration को लेकर पिछले कुछ समय से Police और security agencies की कार्रवाई तेज रही है।
सरकार की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2025 में Maharashtra से 2,376 alleged illegal Bangladeshi nationals को deport किया गया था। Mumbai से भी बड़ी संख्या में deportation की कार्रवाई हुई थी।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है।
Deportation की संख्या और repeat-entry cases की संख्या अलग-अलग होती है।
इसलिए 2,376 deportations को सीधे repeat-entry का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
नदीरा का मामला इसी वजह से एक अलग सवाल खड़ा करता है—deport किए गए व्यक्ति के दोबारा India में आने की कोशिश को border और immigration system कितनी जल्दी detect कर पाता है?
India में foreigners और immigration से जुड़े मामलों के लिए Immigration and Foreigners Act, 2025 लागू है।
Valid passport या required travel document के बिना India में entry करने से जुड़े मामलों में इस कानून के तहत कार्रवाई का provision है। Forged या fraudulently obtained passport, travel document या visa का इस्तेमाल सामने आने पर अलग provisions लागू हो सकते हैं।
अब Police के सामने सबसे बड़ा सवाल ?
इस पूरे मामले में गिरफ्तारी से ज्यादा important अब Re-Entry का पूरा route है।
Police को यह पता लगाना है कि:
Bangladesh deport होने के बाद नदीरा सुल्ताना India कब वापस आई, किस border से आई, forest route कौन-सा था, India में आने के बाद Mumbai तक कैसे पहुंची और क्या किसी व्यक्ति ने उसकी मदद की।
इसके साथ उसके previous deportation record, mobile contacts, travel details और Mumbai में रहने की व्यवस्था की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
मुंबई के दहिसर पश्चिम में घर के अंदर हाइड्रोपोनिक गांजा उगाने का खुलासा। MHB पुलिस ने बब्बू कामत को गिरफ्तार किया, 2 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
मुंबई: मुंबई में गांजे की खेती का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया है। दहिसर पश्चिम के गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4 यानी (आएसी कॉलोनी) के एक घर में कथित तौर पर हाइड्रोपोनिक तरीके से गांजा उगाया जा रहा था। MHB पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि सूत्रों के मुताबिक दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान बब्बू सोनू कामत के रूप में हुई है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक राहुल और अभिषेक कन्नौजिया इस मामले में फरार बताए जा रहे हैं। दोनों की भूमिका और इस पूरे मामले में उनकी exact involvement की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह है कि पुलिस को सिर्फ तैयार गांजा नहीं मिला, बल्कि घर के अंदर पौधे उगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा setup भी बरामद हुआ है।
दहिसर के घर में चल रहा था कथित गांजा cultivation setup
मिली जानकारी के मुताबिक MHB पुलिस ने गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4, दहिसर पश्चिम स्थित एक घर में कार्रवाई की।
पुलिस से उपलब्ध विवरण के मुताबिक यहां हाइड्रोपोनिक पद्धति से गांजा उगाने का कथित setup तैयार किया गया था। मौके से सूखा गांजा, जीवित पौधे और cultivation में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के equipment और chemicals बरामद किए गए।
बरामद पौधे और सूखे गंजे कि तस्वीर
यानी मामला सिर्फ गांजा रखने तक सीमित था या इसके पीछे बाकायदा local production और supply का network काम कर रहा था, अब पुलिस की जांच का बड़ा focus यही है।
54 ग्राम गांजा और 179 ग्राम जीवित पौधे बरामद
एनएचबी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे ने बताया कि कार्रवाई में करीब 54 ग्राम सूखा गांजा बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹1.62 लाख आंकी गई है।
इसके अलावा करीब 179 ग्राम जीवित गांजे के पौधे भी मिले हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब ₹2.68 लाख आंकी जा रही है।
यानी सूखे गांजे और जीवित पौधों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹4.30 लाख बताई गई है।
लेकिन पुलिस के लिए इससे भी ज्यादा important बरामदगी उस cultivation setup की है, जिसे कथित तौर पर इन पौधों को grow करने के लिए तैयार किया गया था।
घर में मिला AC, LED, Pump से लेकर pH Meter तक
पुलिस के मुताबिक मौके से cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाले कई equipment और chemicals बरामद किए गए हैं।
इनमें पानी की टंकी, water pump, air filter, LED lights, AC, fans, pH meter, TDS meter, temperature meter, air circulation से जुड़े सामान, grow tent और अलग-अलग chemicals शामिल बताए गए हैं।
इन equipment और chemicals की पुलिस द्वारा बताई गई अनुमानित कीमत करीब ₹1.76 लाख है।
इस तरह मुंबई पुलिस के मुताबिक गांजा, पौधे और cultivation equipment व chemicals सहित पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत करीब ₹6.07 लाख है।
यह valuation पुलिस द्वारा बताई गई estimated value है।
आखिर घर में गांजा उगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
अगर पुलिस की शुरुआती जांच में यह साबित होता है कि बरामद equipment का इस्तेमाल cannabis cultivation के लिए किया जा रहा था, तो investigation सिर्फ बब्बू कामत की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी।
गिरफ्तार आरोपी के साथ एनएचबी पुलिस की टीम
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि बीज या पौधे कहां से आए, equipment किसने खरीदा, यह setup कब से चल रहा था और तैयार गांजा किसे supply किया जाना था।
इसके अलावा आरोपी के mobile phone, WhatsApp या दूसरे communication channels और financial transactions की जांच से भी आगे की कड़ी मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में राहुल और अभिषेक कन्नौजिया नाम के दो अन्य लोग फरार बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन दोनों के खिलाफ आरोपों और उनकी exact भूमिका को अभी पुलिस की जांच के आधार पर ही समझना होगा। इसलिए फिलहाल उन्हें “फरार बताए जा रहे आरोपी” के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अगर पुलिस की जांच में दोनों की भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना अहम होगा कि cultivation setup तैयार करने, पौधे लाने, गांजा बेचने या customers तक पहुंचाने में उनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस टीम की निगरानी में हुई कार्रवाई
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
इसमें पुलिस उपायुक्त संदीप पुंजे, गोरेगांव विभाग के ACP सुधाकर शिंदे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे, पुलिस निरीक्षक मिलिंद नागपुरे और पुलिस निरीक्षक दिलीप इंगळे के मार्गदर्शन का उल्लेख है।
जांच टीम में पुलिस उपनिरीक्षक संदीप वत्रे समेत पुलिसकर्मियों के नाम भी कार्रवाई से जुड़े बताए गए हैं।
मामले की जांच फिलहाल MHB पुलिस कर रही है।
मुंबई में Hydroponic Weed का बढ़ता नेटवर्क?
दहिसर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में hydroponic weed से जुड़े बड़े smuggling cases भी सामने आते रहे हैं।
मार्च 2026 में Mumbai Customs के Air Intelligence Unit ने Bangkok से आने वाले चार passengers के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 64.394 kg suspected hydroponic weed जब्त किया था। इसकी estimated illicit market value करीब ₹64.394 करोड़ बताई गई थी। खबर के मुताबिक उस समय तक वित्त वर्ष 2025-26 में CSMIA Airport Commissionerate ने 244 मामलों में 1,330 kg से ज्यादा hydroponic weed जब्त की थी और 286 लोगों को गिरफ्तार किया था।
जून 2026 में भी Mumbai Airport पर Bangkok से आए passenger से करीब 11.824 kg hydroponic weed बरामद होने का मामला सामने आया था। Customs के मुताबिक इसकी estimated illicit market value करीब ₹11.82 करोड़ थी।
इससे साफ है कि मुंबई में hydroponic cannabis को लेकर enforcement agencies पहले से alert हैं।
यह सवाल इस कार्रवाई के बाद काफी लोगों के मन में आएगा।
NDPS Act के तहत cannabis plant की cultivation प्रतिबंधित है। इसलिए सिर्फ यह कहने से कि पौधे घर के अंदर, गमले में या किसी controlled setup में उगाए जा रहे थे, activity legal नहीं हो जाती।
हालांकि किसी specific case में कौन-सी धाराएं लागू होंगी और prosecution को क्या साबित करना होगा, यह FIR, seizure, forensic evidence और investigation पर depend करता है।
इसलिए दहिसर मामले में भी आगे की legal position MHB पुलिस की FIR और court proceedings से ज्यादा साफ होगी।
मामला सिर्फ गांजे की खेती का है या पीछे कोई बड़ा network?
अगर घर में सिर्फ कुछ पौधे मिलते तो मामला अलग होता। लेकिन यहां पुलिस के मुताबिक जीवित पौधे, सूखा गांजा और cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाला equipment व chemicals भी मिले हैं।
अब पुलिस के सामने तीन बड़ी कड़ियां हैं—
पौधे कहां से आए?
गांजा किसे जाना था?
पैसा किसके जरिए आ रहा था और किस तक पहुंच रहा था?
अगर इन सवालों के जवाब में कोई supplier या buyer सामने आता है, तो दहिसर की यह कार्रवाई एक बड़े drug network की तरफ भी इशारा कर सकती है।
हालांकि अभी ऐसा कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Drug cultivation और supply का असर सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहता।
सबसे बड़ा concern यह है कि drug networks में युवाओं को छोटे-level sellers, couriers या carriers के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। Mumbai Airport के पुराने और हालिया मामलों में भी agencies ने international routes और larger syndicates की जांच की है। मार्च 2026 की एक बड़ी कार्रवाई में Customs ने कहा था कि गिरफ्तार किए गए passengers को Bangkok से cannabis लेकर Mumbai में associates तक पहुंचाना था।
ऐसे में दहिसर जैसे residential area में कथित cultivation setup मिलना local community के लिए भी चिंता की बात है।
अब पुलिस को यह पता लगाना होगा कि यह isolated operation था या इसके पीछे customers, suppliers और distributors की कोई chain भी थी।
बब्बू कामत की गिरफ्तारी के बाद investigation का अगला step सिर्फ पूछताछ तक सीमित नहीं होगा।
पुलिस को कथित तौर पर बीज और पौधों का source, cultivation equipment की खरीद, mobile communication, financial transactions, potential buyers और suppliers तक पहुंचने की कोशिश करनी होगी।
साथ ही सूत्रों के मुताबिक फरार बताए जा रहे राहुल और अभिषेक कन्नौजिया की भूमिका और whereabouts की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बब्बू सोनू कामत गिरफ्तार है, राहुल और अभिषेक कन्नौजिया फरार बताए जा रहे हैं और MHB पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कार्रवाई में 54 ग्राम सूखा गांजा, करीब 179 ग्राम जीवित पौधे और cultivation equipment व chemicals समेत करीब ₹6.07 लाख का माल जब्त किया गया है।
मुंबई के चेंबूर में FDA ने Expired Frooti, Appy Fizz समेत beverages का stock जब्त किया। Warehouse और 2 vehicles seal, आगे की sale पर रोक।
मुंबई: चेंबूर में FDA की रातभर चली कार्रवाई में expired Frooti, Appy Fizz और दूसरे beverages का stock पकड़ा गया है। वाशी नाका के प्रयाग नगर स्थित warehouse में हुई इस कार्रवाई के बाद गोदाम और दो vehicles को seal कर दिया गया।
मुंबई में cold drink या packaged beverage खरीदने वालों के लिए यह खबर सीधे काम की है। वजह है कि FDA की जांच में expired beverages का stock सामने आया है और अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गोदाम में expired माल क्यों रखा था, बल्कि यह भी है कि यह stock आगे कहां जाने वाला था।
चेंबूर में रातभर चला FDA का Raid
महाराष्ट्र Food and Drug Administration यानी FDA ने चेंबूर के वाशी नाका, प्रयाग नगर, L.U. गडकरी मार्ग स्थित एक warehouse में कार्रवाई की।
यह कार्रवाई 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे से 14 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे तक चली। यानी FDA की टीम ने रातभर warehouse की जांच की। कार्रवाई में 8 अधिकारी शामिल थे।
जांच के दौरान अधिकारियों को expired food और beverages का stock मिला।
Frooti और Appy Fizz समेत Expired Drinks मिले
जांच में सामने आए stock में Frooti, Appy Fizz, Candy Juice और दूसरे beverages शामिल बताए गए हैं।
खबर के मुताबिक Chembur warehouse से करीब 1,000 expired flavoured sparkling drink bottles मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस कार्रवाई से जुड़ी earlier report में जब्त stock की कुल कीमत करीब ₹1 लाख बताई गई थी।
यानी मामला सिर्फ एक-दो expired bottles का नहीं था, बल्कि warehouse level पर रखे गए stock का था।
FDA ने Warehouse के साथ 2 Vehicles भी किए Seal
इस कार्रवाई का एक अहम हिस्सा यह है कि FDA ने सिर्फ expired stock जब्त नहीं किया।
Warehouse को seal किया गया और दो vehicles को भी seal कर दिया गया।
चेंबूर की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब Mumbai और Maharashtra में FDA food-safety violations पर लगातार action ले रहा है।
ताजा statewide inspections में expired food, खराब storage और hygiene violations को लेकर कई establishments पर कार्रवाई की गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक Mumbai FDA ने inspections के बाद 10 food business licences suspend किए हैं और Chembur warehouse से expired flavoured sparkling drinks भी जब्त किए गए।
इससे साफ है कि FDA का focus सिर्फ restaurants तक सीमित नहीं है। Warehouse और supply chain level पर भी food products की जांच की जा रही है।
क्या Frooti या Appy Fizz खरीदना बंद कर दें?
नहीं।
इस कार्रवाई को देखकर किसी भी पूरे brand के सभी products को unsafe मानना सही नहीं होगा।
यह कार्रवाई एक specific warehouse में मिले expired stock को लेकर है। इसका मतलब यह नहीं है कि market में बिक रहे हर Frooti या Appy Fizz product में कोई समस्या है।
लेकिन इस घटना के बाद एक काम जरूर करना चाहिए—
कोई भी packaged drink खरीदने से पहले उसकी date जरूर check करें।
Cold Drink खरीदते समय ये 3 चीजें जरूर देखें
सबसे पहले bottle या packet पर Expiry/Use By या Best Before date देखें।
दूसरा, seal और packaging check करें।
और तीसरा, अगर bottle या packet में leakage, damage या असामान्य swelling दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचें।
FSSAI के food-labelling requirements में packaged food पर जरूरी product और date-related information देने का प्रावधान है। इसलिए label पढ़ना consumer के लिए सबसे आसान safety check है।
Expiry Date और Best Before में फर्क समझना भी जरूरी
कई लोग Expiry Date और Best Before को एक ही समझते हैं, जबकि दोनों का मतलब अलग हो सकता है।
FSSAI के अनुसार Use By/Expiry date food की safety से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है, जबकि Best Before मुख्य रूप से उस अवधि को बताता है जिसमें product की quality अपने best level पर रहने की उम्मीद होती है।
इसलिए packaged food या drink खरीदते समय सिर्फ तारीख देखकर नहीं, बल्कि label पर तारीख किस रूप में दी गई है, यह भी देखना चाहिए।
चेंबूर FDA Raid से क्या साफ हुआ?
चेंबूर की इस कार्रवाई ने एक important सवाल सामने रखा है—expired food और beverages की supply chain पर निगरानी कितनी जरूरी है।
एक warehouse में stock पकड़े जाने के बाद अब यह जानना अहम होगा कि यह माल वहां कब से था, इसकी आगे की destination क्या थी और इस मामले में FDA की अगली कार्रवाई क्या होती है।
फिलहाल इतना साफ है कि चेंबूर के वाशी नाका में FDA ने expired beverage stock पर action लिया है, warehouse और दो vehicles को seal किया है और आगे की sale तथा transportation रोक दी गई है।
मुंबई में packaged drinks खरीदने वाले consumers के लिए इस पूरे मामले की सबसे जरूरी सीख यही है—
Brand देखकर नहीं, bottle की date और condition देखकर खरीदें।
मुंबई में FDA की सख्ती के बाद कई रेस्टोरेंट और सरकारी कैंटीन सफाई-रेनोवेशन के लिए बंद हो रहे हैं। Domino’s के 3 आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई।
मुंबई: शहर भर में बाहर खाना खाने वालों के लिए इन दिनों Food Safety और restaurant hygiene एक बड़ा मुद्दा बन गया है। महाराष्ट्र FDA की लगातार हो रही कार्रवाई का असर अब सिर्फ उन restaurants पर नहीं दिख रहा, जिनके licences suspend किए गए हैं, बल्कि दूसरे restaurant owners भी पहले से ही अपनी kitchens और premises को ठीक करने में जुट गए हैं।
मुंबई के कई restaurants और कुछ सरकारी canteens इन दिनों repair, deep cleaning, painting और renovation के लिए अपने shutters कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक बंद कर रहे हैं। वजह साफ है—FDA की inspection में अगर hygiene या food safety से जुड़ी खामियां मिलीं तो licence suspension और public action का risk बढ़ गया है।
FDA की कार्रवाई के बाद restaurant owners alert
Indian Hotel and Restaurant Association (AHAR) के मुताबिक, FDA की तेज कार्रवाई के बाद उसके कई member restaurants ने precautionary steps शुरू कर दिए हैं। Restaurant owners kitchen की सफाई, टूटे tiles और infrastructure की मरम्मत, pest control और staff training पर ज्यादा focus कर रहे हैं।
AHAR President Vijay Shetty के मुताबिक, association से अकेले मुंबई में करीब 8,000 restaurants जुड़े हैं। उनका कहना है कि इनमें बड़ी संख्या medium-size और budget restaurants की है, जो कम margins पर operate करते हैं। ऐसे restaurants के लिए licence suspension का सीधा असर business और reputation दोनों पर पड़ सकता है।
इसी वजह से कई owners अपने restaurants को पूरी तरह बंद करने के बजाय कुछ घंटों के लिए जल्दी बंद करके रात में repair और cleaning का काम करा रहे हैं। कुछ जगहों पर partial closure भी किया जा रहा है।
Cleaning से लेकर staff training तक, हर चीज पर focus
Restaurant owners अब सिर्फ kitchen की सफाई तक सीमित नहीं रहना चाहते। कई जगह staff को FoSTaC यानी Food Safety Training and Certification के लिए भेजा जा रहा है।
इसके अलावा कुछ restaurant owners compliance और paperwork समझने के लिए experienced professionals की मदद ले रहे हैं और private food-safety auditors से भी inspection करा रहे हैं।
एक restaurant employee ने बताया कि पहले premises की cleaning दिन में दो बार होती थी, लेकिन अब lunch के बाद भी extra cleaning की जा रही है। Deep cleaning में पहले के मुकाबले काफी ज्यादा समय लगाया जा रहा है।
मानसून में flies और दूसरे pests की समस्या को देखते हुए भी restaurants extra precautions ले रहे हैं।
Washbasin से लेकर kitchen infrastructure तक बदलाव
FDA की कार्रवाई के बाद restaurant owners छोटी-छोटी चीजों को भी seriously ले रहे हैं। कहीं washbasin की position बदली गई है, तो कहीं उसे clearly label किया गया है। Kitchen में storage, cleaning व्यवस्था और food-handling process पर भी ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
मतलब साफ है—अब सिर्फ खाना अच्छा होना काफी नहीं है। Kitchen कितनी clean है और food safety rules कितने properly follow हो रहे हैं, इस पर भी restaurant owners को बराबर ध्यान देना पड़ रहा है।
FDA की सख्ती का असर सरकारी कैंटीन तक पहुंच गया है। FDA के एक अधिकारी के मुताबिक, MMRDA office की kitchen का inspection करने पहुंची टीम को पता चला कि वहां की canteen repair work के लिए voluntarily बंद थी।
BKC स्थित Mumbai Suburban District Collector परिसर और Kalina University की canteen के भी बंद होने की जानकारी सामने आई है।
इससे यह साफ है कि FDA की मौजूदा drive का असर सिर्फ private restaurants या बड़े food chains तक सीमित नहीं है।
South Mumbai के पुराने restaurants ने भी shutters गिराए
South Mumbai में भी कुछ popular eateries ने repair और makeover के नाम पर temporary closure किया है।
Kala Ghoda का Ayub’s इस महीने की शुरुआत में कुछ दिनों के लिए बंद रहा। वहीं Kalbadevi के Shree Thaker Bhojon ने भी social media पर अपने customers को बताया कि restaurant को थोड़ा नया look देने के लिए वह कुछ समय के लिए बंद रहेगा।
दूसरी तरफ, Rustom जैसे restaurants पर FDA action के बाद closure ने restaurant industry में चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे मामलों के बाद कई owners inspection का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अपने premises की कमियां दूर करने में जुट गए हैं।
Domino’s के 3 Mumbai outlets पर भी FDA action
इसी बीच FDA की कार्रवाई ने बड़े food brands को भी झटका दिया है।
महाराष्ट्र FDA ने food safety और hygiene violations के चलते Domino’s Pizza के चार outlets के food-business licences suspend किए, जिनमें तीन मुंबई में हैं। ये outlets Vile Parle West, Borivali West और R-City Mall, Ghatkopar West में हैं। चौथा outlet Satara district के Malkapur, Karad में है।
यह कार्रवाई 10 जुलाई से 11 अगस्त के बीच चलाए गए special inspection drive का हिस्सा थी। इस drive में महाराष्ट्र में major restaurant chains के 104 establishments inspect किए गए। FDA के मुताबिक इस दौरान 95 improvement notices और पांच licence suspensions किए गए।
Domino’s outlets में FDA को food storage, pest control, temperature monitoring, cleanliness और दूसरे food-safety compliance से जुड़े issues मिले।
FDA की सख्ती का असर अब साफ दिख रहा है
महाराष्ट्र में FDA की कार्रवाई अब restaurant industry के लिए एक clear warning बनती दिख रही है। पहले जहां कई restaurants inspection के बाद सुधार करने की कोशिश करते थे, वहीं अब owners inspection से पहले ही अपनी kitchens और premises को compliance-ready करने में जुटे हैं।
FDA के एक अधिकारी ने इस trend को positive बताया। उनका कहना है कि restaurant owners को आखिरकार kitchen hygiene को उतनी ही importance देनी चाहिए जितनी वे अपने restaurant के promotion और customer-facing area को देते हैं।
मुंबई के customers के लिए भी यह पूरी कहानी एक अहम सवाल छोड़ती है—जिस restaurant में आप हजारों रुपये देकर खाना खाते हैं, उसकी kitchen आखिर कितनी clean है?
FDA की मौजूदा कार्रवाई के बाद कम से कम इतना जरूर है कि इस सवाल को अब restaurant owners नजरअंदाज नहीं कर सकते।