Category: Maharashtra

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  • कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से 200 किलो की लोहे की बीम पुलिस कार्यालय के सामने गिरी। पहले भी निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत थी, 4 पर केस दर्ज।

    मुंबई: कांजुरमार्ग में निर्माणाधीन इमारत की 13वीं मंजिल से करीब 200 किलो वजनी लोहे की बीम गिरने की घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीम सीधे कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन के एक्सटर्नमेंट विभाग के कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने गिरी। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय की टिन की छत और पास का पेड़ क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

    यह घटना 18 सितंबर की दोपहर की है। एक्सटर्नमेंट विभाग में तैनात सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) विश्वास दशरथ देसाई उस समय कार्यालय में कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने भारी लोहे की बीम पड़ी मिली। बीम नीचे आने से पहले एक पेड़ और कार्यालय की टिन की छत से टकराई थी।

    200 किलो की बीम के गिरने से पहले भी सामने आई थी समस्या

    इस घटना को गंभीर बनाने वाली सबसे अहम बात यह है कि निर्माण स्थल से निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत पहले भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी पत्थर, गिट्टी और लोहे की रॉड आसपास गिर चुकी थीं। निर्माण स्थल के ठेकेदार को इस संबंध में पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है।

    ऐसे में अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले की शिकायतों और चेतावनी के बाद साइट पर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए थे। यह भी जांच का विषय है कि इतनी भारी बीम 13वीं मंजिल से नीचे गिरने की स्थिति तक कैसे पहुंची और उस समय उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।

    ठेकेदार, इंजीनियर और दो सेफ्टी सुपरवाइजर पर केस

    पुलिस ने KAMS Realtor से जुड़े साइट ठेकेदार मितेश जैन, साइट इंजीनियर धनराज रामचंद्र जगताप और सेफ्टी सुपरवाइजर विक्रम तथा सोहेल मिर्जा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लोगों की जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस ने घटना के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर बीम के निर्माण स्थल से गिरने की पुष्टि की गई। हालांकि बीम के गिरने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है।

    जिस प्रोजेक्ट की 13वीं मंजिल से बीम गिरी, उसका RERA रिकॉर्ड

    सार्वजनिक रियल एस्टेट रिकॉर्ड में KAMS Realtors का Kams Krystel प्रोजेक्ट कांजुरमार्ग ईस्ट के Purshotam Godbole Road पर दर्ज है और इसका MahaRERA registration number P51800051412 है। परियोजना अभी निर्माणाधीन दर्ज है और इसके लिए 31 दिसंबर 2026 की completion date दर्ज है। RERA-derived रिकॉर्ड में प्रोजेक्ट के लिए Ground + 24 Floor संरचना दर्ज है।

    रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि इस प्रोजेक्ट से संबंधित MahaRERA में CC12501288 नंबर की एक शिकायत 17 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी और वह disposed/order approved स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं होता कि वह शिकायत निर्माण स्थल की सुरक्षा से संबंधित थी।

    हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन खतरा गंभीर था

    घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे और बीम कार्यालय के प्रवेश द्वार के ठीक सामने आकर गिरी। बीम का पेड़ और कार्यालय की छत से टकराना इस बात को महत्वपूर्ण बनाता है कि निर्माण स्थल से गिरने वाली सामग्री का जोखिम केवल वहां काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद कार्यालयों और लोगों तक भी पहुंच सकता है। इस मामले में किसी के घायल नहीं होने की पुष्टि है, जबकि कार्यालय की टिन की छत को नुकसान पहुंचा है।

    मुंबई में निर्माण स्थलों से गिरने वाली भारी सामग्री को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में site barricading, material handling, ऊंचाई पर सामग्री की सुरक्षित व्यवस्था और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उपाय जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम

    कांजुरमार्ग की इस घटना में पुलिस जांच के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि बीम कैसे गिरी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले निर्माण सामग्री गिरने की शिकायतें कब-कब हुईं, ठेकेदार को किस तरह की चेतावनी दी गई, उसके बाद क्या सुरक्षा उपाय किए गए और घटना के समय साइट पर भारी सामग्री को संभालने की व्यवस्था क्या थी।

    फिलहाल पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बीम गिरने की तकनीकी वजह, साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और पहले की शिकायतों के बाद उठाए गए कदमों से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मुंबई Coastal Road पर BMW 75 फीट नीचे गिरी, 3 छात्रों की मौत, 1 गंभीर

    मुंबई Coastal Road पर BMW 75 फीट नीचे गिरी, 3 छात्रों की मौत, 1 गंभीर

    मुंबई Coastal Road पर तेज रफ्तार BMW हादसे में Sanay Gujjar, Aditya Jakasania और Dhairya Sheth की मौत, Aditya Oswal गंभीर घायल।

    मुंबई: Coastal Road पर रविवार तड़के तेज रफ्तार BMW के भीषण हादसे में तीन छात्रों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। हादसा Marine Drive से Haji Ali की ओर जा रही BMW के नियंत्रण से बाहर होने के बाद हुआ। कार Coastal Road की बाहरी दीवार से टकराकर करीब 75 फीट नीचे निर्माणाधीन पार्किंग क्षेत्र में जा गिरी। चारों युवकों को Nair Hospital ले जाया गया, जहां तीन को मृत घोषित किया गया और एक का इलाज जारी है।

    हादसा सुबह करीब 5 बजे Northbound stretch पर Lotus Jetty और Lala Lajpatrai College के सामने हुआ। CCTV फुटेज में BMW तेज रफ्तार में आती, बाहरी railing से टकराती और उसके बाद हवा में उछलकर नीचे गिरती दिखाई दे रही है। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का नियंत्रण खोना हादसे की संभावित वजह सामने आई है। हालांकि BMW की वास्तविक गति कितनी थी, यह जांच से स्पष्ट होना बाकी है।

    मृतकों की पहचान Sanay Gujjar (21), Aditya Jakasania (19) और Dhairya Sheth (17) के रूप में हुई है। गंभीर रूप से घायल युवक की पहचान Aditya Kalpeshwar Oswal (23) के रूप में हुई है। उसे Nair Hospital के Trauma Ward में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत गंभीर बताई गई है।

    पुलिस के मुताबिक Sanay Gujjar BMW चला रहे थे। Sanay Ahmedabad के रहने वाले थे और मुंबई में Paying Guest के तौर पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार Sanay Gujjar, Aditya Oswal और Dhairya Sheth BBA की पढ़ाई कर रहे थे। चारों युवकों के Ahmedabad से होने और मुंबई में पढ़ाई के लिए रहने की जानकारी भी सामने आई है।

    पुलिस के अनुसार BMW Sanay Gujjar के परिवार की थी। दुर्घटना के समय चारों युवक Marine Drive से लौट रहे थे और Haji Ali की दिशा में जा रहे थे। हादसे के बाद पुलिस ने मृतकों के परिवारों को सूचना दी है और दोस्तों तथा अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

    CCTV में हादसे का पूरा क्रम

    CCTV में दिखाई दे रहा है कि BMW Coastal Road के elevated हिस्से पर तेज गति से आगे बढ़ रही थी। Lotus Jetty के पास वाहन बाहरी railing से टकराया। टक्कर के बाद BMW सड़क के किनारे से नीचे चली गई और हवा में कई बार पलटते हुए निर्माणाधीन क्षेत्र में जा गिरी। दुर्घटना के बाद कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

    पुलिस के अनुसार घटना का CCTV समय करीब 5:03 बजे दर्ज हुआ, जबकि Coastal Road Control Room को दुर्घटना की सूचना करीब 5:20 बजे मिली। दोनों समय अलग होने की वजह CCTV timestamp और Control Room को सूचना मिलने का समय है।

    BMW का रजिस्ट्रेशन नंबर भी सामने आया

    दुर्घटनाग्रस्त BMW का registration number DD-01-C-6302 बताया गया है। यह जानकारी दुर्घटना के बाद वाहन की पहचान और उसके ownership तथा registration records की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    इस वाहन से जुड़ी एक अलग जानकारी भी सामने आती है। मार्च 2026 में इसी registration number वाली कार को लेकर Gamdevi Police ने rash and negligent driving का मामला दर्ज किया था। उस मामले में चालक के रूप में Sanay Gujjar का ही नाम दर्ज किया गया था।

    हादसे की वजह पर जांच जारी

    फिलहाल पुलिस की प्राथमिक जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का नियंत्रण खोना सामने आया है। लेकिन हादसे की अंतिम वजह तय होना अभी बाकी है। वाहन की वास्तविक गति, दुर्घटना से पहले की driving conditions और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस हादसे को racing या शराब के प्रभाव में driving का मामला बताना अभी जल्दबाजी होगी।

    Coastal Road पर इस हादसे के बाद तेज रफ्तार और road safety को लेकर सवाल फिर सामने आए हैं। यह corridor Marine Drive को Worli की ओर Bandra-Worli Sea Link के अंतिम हिस्से से जोड़ता है और इसकी कुल लंबाई करीब 10.58 किलोमीटर है। ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी और दुर्घटना संभावित हिस्सों पर सुरक्षा व्यवस्था हादसे की जांच के साथ महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।

    फिलहाल Tardeo Police हादसे की परिस्थितियों की जांच कर रही है। CCTV फुटेज, वाहन की स्थिति, प्रत्यक्षदर्शियों और मृतकों के दोस्तों के बयान जांच का हिस्सा हैं। Aditya Oswal का इलाज जारी है, जबकि तीन मृतकों के शवों को आगे की कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए रखा गया है। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की अंतिम वजह और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

  • ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    ₹11 के IV सेट की ₹325 MRP, 2,841% का अंतर; केंद्र ने अस्पतालों से मांगा कीमतों का हिसाब

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे में IV सेट, सिरिंज और कैथेटर की खरीद कीमत और MRP में भारी अंतर मिला। केंद्र ने अब मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों पर समीक्षा शुरू की।

    मुंबई: महाराष्ट्र में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों में सामने आया बड़ा अंतर अब केंद्र सरकार की निगरानी तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र FDA के सर्वे में एक IV इन्फ्यूजन सेट 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत पर मिलने के बावजूद 325 रुपये की छपी MRP वाला पाया गया। इस अंतर को 2,841 प्रतिशत तक बताया गया है। इसके बाद अब केंद्र सरकार अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा कर रही है। हालांकि, सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान कीमत सीमा लागू करने का अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    IV सेट से सिरिंज और कैथेटर तक बड़ी कीमत तफावत

    महाराष्ट्र FDA के जुलाई 2026 के सर्वे में मुंबई महानगर क्षेत्र, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों की जांच की गई। जांच में ट्रेड या खरीद कीमत और छपी MRP के बीच कई मामलों में बड़ा अंतर सामने आया।

    सबसे बड़ा उदाहरण IV इन्फ्यूजन सेट का है। इसकी ट्रेड कीमत 11.05 रुपये मिली, जबकि उस पर MRP 325 रुपये छपी थी। इसी तरह 6.75 रुपये में खरीदी गई 10 एमएल सिरिंज की MRP 57.20 रुपये और 29.41 रुपये की खरीद कीमत वाले कैथेटर की MRP 310 रुपये पाई गई।

    सर्वे में IV सेट, सिरिंज, कैथेटर, नेब्युलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों को देखा गया। कुछ अन्य वस्तुओं में भी खरीद कीमत और MRP के बीच काफी अंतर पाया गया।

    2,841 प्रतिशत का आंकड़ा आखिर बताता क्या है?

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 11.05 रुपये की ट्रेड कीमत और 325 रुपये की MRP के बीच 2,841 प्रतिशत का अंतर है, लेकिन इसका अर्थ यह सीधे नहीं है कि पूरा अंतर अस्पताल का शुद्ध मुनाफा है।

    किसी मेडिकल वस्तु की अंतिम कीमत तक पहुंचने में निर्माता, आयातक, वितरक, स्टॉकिस्ट और अस्पताल जैसे अलग-अलग स्तर शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अस्पतालों की ओर से स्टोरेज, स्टेराइल हैंडलिंग, इन्वेंटरी, संक्रमण नियंत्रण और अन्य संचालन लागतों का भी तर्क दिया जाता है। इसी वजह से केंद्र अब अस्पतालों और दूसरे हितधारकों से कीमत और बिलिंग की पूरी व्यवस्था समझने की कोशिश कर रहा है।

    इसलिए सामने आया 2,841 प्रतिशत का आंकड़ा मुख्य रूप से खरीद कीमत और घोषित MRP के बीच के अंतर को दिखाता है। इसे हर मामले में सीधे अस्पताल के मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा।

    तुकाराम मुंढे ने केंद्र से क्या मांग की?

    महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इस कीमत अंतर के बाद केंद्रीय औषध विभाग और राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA के सामने मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों की समीक्षा का मुद्दा उठाया है।

    उनकी मांग में ट्रेड मार्जिन के लिए स्पष्ट व्यवस्था, जरूरी मेडिकल उपकरणों की कीमतों की निगरानी और खरीद कीमत तथा घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत शामिल है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली किसी वस्तु की वास्तविक खरीद कीमत मरीज को आमतौर पर पता नहीं होती।

    महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों की बिलिंग दरें तय करने का अधिकार अपने स्तर पर होने का दावा नहीं किया है। मुद्दा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत निर्धारण व्यवस्था और उसके नियमन से जुड़ा है।

    अब केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया?

    मामले के सामने आने के बाद केंद्र ने NPPA से कीमतों में इस तरह के अंतर को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही अस्पतालों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ consultation की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमत और मार्जिन तय करते समय अस्पतालों की वास्तविक लागत, सप्लाई चेन और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

    19 सितंबर तक स्थिति यह है कि सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर एक समान price cap लगाने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। आगे का नियामक फैसला अलग-अलग उत्पादों और उनकी कीमत संरचना की समीक्षा के बाद लिया जाना है।

    क्या हर मेडिकल डिवाइस की कीमत NPPA तय करता है?

    नहीं। मेडिकल डिवाइस के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था अलग-अलग श्रेणियों में काम करती है।

    NPPA के अनुसार कुछ मेडिकल डिवाइस price-control व्यवस्था के तहत आते हैं, जबकि अन्य non-scheduled medical devices के मामले में सीधे ceiling price तय नहीं होता। DPCO 2013 के तहत ऐसे non-scheduled products की MRP में एक साल में 10 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि की निगरानी का प्रावधान है। कुछ विशेष मामलों में NPPA ने non-scheduled medical devices की कीमत या ट्रेड मार्जिन को भी नियंत्रित किया है।

    इससे मौजूदा विवाद का मूल सवाल सामने आता है कि जिन जरूरी hospital consumables पर सीधी ceiling price व्यवस्था नहीं है, उनमें खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर उचित माना जाए।

    पहले भी मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर हस्तक्षेप हो चुका है

    मेडिकल डिवाइस की कीमतों को लेकर सरकारी हस्तक्षेप नया नहीं है। NPPA ने coronary stents और knee implants की कीमतों को नियंत्रित किया है। कोविड काल में oxygen concentrators, pulse oximeters, blood pressure monitoring machines, nebulisers, digital thermometers और glucometers समेत छह मेडिकल डिवाइस पर 70 प्रतिशत तक trade margin की सीमा लागू की गई थी।

    NPPA के पुराने दस्तावेजों में यह भी दर्ज है कि कुछ मेडिकल डिवाइस में अस्पतालों को कम कीमत पर उत्पाद मिलने और मरीजों की बिलिंग में छपी MRP के इस्तेमाल के बीच अंतर pricing regulation के लिए चिंता का विषय रहा है।

    अस्पतालों की कीमत में क्या-क्या शामिल हो सकता है?

    मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से लिया गया अंतिम शुल्क हमेशा एक ही चीज नहीं होता। अस्पतालों की ओर से उपचार की पूरी व्यवस्था में स्टोरेज, स्टेराइल प्रोसेसिंग, संक्रमण नियंत्रण, नर्सिंग, इन्वेंटरी और बर्बादी जैसी लागतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।

    इसी वजह से आगे होने वाली सरकारी चर्चा में केवल MRP और खरीद कीमत की तुलना के बजाय पूरे pricing chain और hospital billing structure को देखना महत्वपूर्ण होगा।

    दूसरे राज्यों से भी सामने आईं ऐसी चिंताएं

    यह मुद्दा केवल महाराष्ट्र तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रहा है। पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु के औषध नियंत्रण तंत्र से भी मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों से जुड़ी समान शिकायतें या representations मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में मामला राष्ट्रीय स्तर पर मेडिकल डिवाइस pricing framework की समीक्षा तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, महाराष्ट्र के सर्वे में सामने आए 2,841 प्रतिशत के आंकड़े को पूरे देश के सभी अस्पतालों या सभी मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर लागू करना सही नहीं होगा।

    मरीजों के लिए सबसे अहम सवाल क्या है?

    अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिल में इस्तेमाल की गई वस्तु का नाम, मात्रा, MRP और बिल की गई राशि स्पष्ट हो। किसी मेडिकल कंज्यूमेबल की खरीद कीमत और मरीज से ली गई राशि में बड़ा अंतर होने की स्थिति में itemised bill और संबंधित विवरण देखना मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।

    लेकिन 11.05 रुपये की खरीद कीमत और 325 रुपये की MRP सामने आने का मतलब यह भी नहीं है कि हर अस्पताल हर मरीज से उसी MRP पर पैसा ले रहा है। वास्तविक बिलिंग अस्पताल की व्यवस्था, पैकेज, बीमा और इस्तेमाल की गई वस्तुओं के आधार पर अलग हो सकती है।

    अब आगे क्या होगा?

    महाराष्ट्र FDA के सर्वे और तुकाराम मुंढे की पहल के बाद मामला अब केंद्र के स्तर पर पहुंच चुका है। NPPA से रिपोर्ट, अस्पतालों और अन्य stakeholders के साथ consultation तथा मेडिकल कंज्यूमेबल्स की कीमतों और मार्जिन की समीक्षा अगले चरण हैं।

    आगे की चुनौती यह तय करने की होगी कि जरूरी मेडिकल कंज्यूमेबल्स के लिए कीमतों की निगरानी किस तरह की जाए, खरीद कीमत और MRP के बीच कितना अंतर स्वीकार्य हो, supply chain में किस स्तर पर मार्जिन जोड़ा जा रहा है और मरीजों के लिए बिलिंग में कितनी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

    फिलहाल 11.05 रुपये के IV सेट की 325 रुपये MRP और 2,841 प्रतिशत के अंतर ने अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली छोटी दिखने वाली लेकिन बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाली मेडिकल वस्तुओं की कीमतों को राष्ट्रीय नियामक बहस के केंद्र में ला दिया है।

  • Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    Bappa.org क्या है? मुंबईकर अब घर के गणपति की कहानी भी डिजिटल संग्रह में दर्ज कर सकेंगे

    मुंबई में गणेशोत्सव की परंपराओं को डिजिटल रूप से सहेजने के लिए BMC का Bappa.org अभियान, जानें फोटो-कहानी कैसे भेजें और क्या मिलेगा।

    मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के घरों और सार्वजनिक मंडलों में निभाई जाने वाली परंपराओं, यादों और सांस्कृतिक गतिविधियों को अब डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की पहल तेज हो गई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने मुंबईकरों से Bappa.org पर अपने गणेशोत्सव की कहानी, तस्वीरें, वीडियो, पारंपरिक प्रथाएं और सामाजिक व पर्यावरणीय गतिविधियों की जानकारी दर्ज करने की अपील की है। खास बात यह है कि इस डिजिटल संग्रह में सिर्फ बड़े गणेश मंडल ही नहीं, बल्कि घरों में स्थापित होने वाले गणपति भी शामिल किए जा रहे हैं।

    Bappa.org क्या है?

    Bappa.org को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का डिजिटल राज्य संग्रह बताया गया है। इसका उद्देश्य महाराष्ट्र में पीढ़ियों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपराओं, परिवारों की यादों, सार्वजनिक मंडलों की गतिविधियों और मूर्ति व सजावट से जुड़ी कला को डिजिटल रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित करना है। पोर्टल के अनुसार यह महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग का उपक्रम है।

    मुंबईकर इसमें क्या दर्ज कर सकते हैं?

    Bappa.org पर गणेशोत्सव से जुड़ी कई तरह की जानकारी साझा की जा सकती है। इसमें घर या मंडल की गणेश प्रतिमा की तस्वीर, सजावट, पारंपरिक आरती, परिवार की वर्षों पुरानी परंपरा, गणेशोत्सव से जुड़ी व्यक्तिगत यादें, सामाजिक कार्य, पर्यावरण संरक्षण के प्रयास और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं।

    इसका मतलब है कि किसी परिवार के घर में हर साल एक ही तरीके से होने वाला गणेशोत्सव भी इस डिजिटल संग्रह का हिस्सा बन सकता है। इसी तरह सार्वजनिक गणेश मंडल, गृहनिर्माण संस्था और गणेश प्रतिमा से जुड़ा काम करने वाले कारीगर भी अपनी कहानी साझा कर सकते हैं।

    मुंबई के घरों की परंपराएं भी बनेंगी डिजिटल रिकॉर्ड

    मुंबई में गणेशोत्सव का बड़ा हिस्सा केवल प्रसिद्ध सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर को डेढ़ दिन के गणपति विसर्जन के दौरान मुंबई में 24,631 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ था, जिनमें 24,521 घरेलू और 110 सार्वजनिक मंडलों की प्रतिमाएं शामिल थीं। ऐसे में घर-घर मनाए जाने वाले गणेशोत्सव की परंपराओं को दर्ज करने का यह प्रयास शहर की व्यापक सांस्कृतिक तस्वीर को सामने ला सकता है।

    Bappa.org के मौजूदा संग्रह में मुंबई सिटी से Parel cha Raja, Saibaba Nagar Colony और Girgaon cha Raja जैसी प्रविष्टियां दिखाई दे रही हैं। इसका मतलब है कि मुंबई से नागरिकों और मंडलों की भागीदारी शुरू हो चुकी है।

    Bappa.org पर कहानी कैसे दर्ज करें?

    पोर्टल के अनुसार इसके लिए किसी विशेष ऐप को डाउनलोड करने या अलग अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं है। एक फोटो और अपनी गणेशोत्सव परंपरा के बारे में कुछ पंक्तियों से शुरुआत की जा सकती है। जानकारी भेजने के बाद टीम उसकी जांच करती है और स्वीकार की गई कहानी को डिजिटल संग्रह में दर्ज किया जाता है।

    इसके अलावा ‘घरोघरी बाप्पा’ अभियान के तहत WhatsApp के जरिए भी गणेशोत्सव की कहानी भेजने की सुविधा दी गई है। इसके लिए +91 91361 72681 नंबर जारी किया गया है। इस अभियान में भाग लेना नि:शुल्क बताया गया है।

    कहानी भेजने के बाद क्या होगा?

    Bappa.org पर स्वीकार की गई प्रविष्टियों को एक अलग रिकॉर्ड नंबर दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर 2026-00290 और 2026-00297 जैसी प्रविष्टियां संग्रह में दर्ज हैं। इन रिकॉर्ड में जमा करने और स्वीकार किए जाने की तारीख के साथ डिजिटल evidence भी दिखाई देता है।

    पोर्टल की जानकारी के अनुसार प्रत्येक योगदान को सत्यापन के बाद महाराष्ट्र के राज्य सांस्कृतिक संग्रह का हिस्सा बनाया जाता है। सफलतापूर्वक कहानी दर्ज कराने वाले परिवारों को सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र दिए जाने की जानकारी भी दी गई है।

    सिर्फ मुंबई नहीं, महाराष्ट्र और विदेशों की कहानियां भी

    Bappa.org पर फिलहाल महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों के साथ दूसरे स्थानों से भी गणेशोत्सव की कहानियां दिखाई दे रही हैं। पोर्टल पर मुंबई, सातारा, रायगढ़, पुणे और अन्य क्षेत्रों की प्रविष्टियों के साथ महाराष्ट्र के बाहर से भी योगदान दर्ज हैं।

    हाल की चयनित कहानियों में नए घर में पहला गणेशोत्सव, पारंपरिक गौरी-गणपति उत्सव, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों का गणेशोत्सव और विसर्जन के बाद बची मिट्टी के इस्तेमाल से जुड़ी पर्यावरणीय पहल जैसी अलग-अलग कहानियां शामिल रही हैं।

    इससे साफ है कि इस डिजिटल संग्रह का दायरा केवल गणेश प्रतिमा या पंडाल की तस्वीर तक सीमित नहीं है। परिवार, परंपरा, कला, पर्यावरण और विदेशों में रहने वाले भारतीयों का गणेशोत्सव भी इसका हिस्सा बन सकता है।

    गणेशोत्सव के डिजिटल दस्तावेजीकरण का बड़ा उद्देश्य

    महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2025 में गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव के रूप में मनाने को मंजूरी दी थी। इसके बाद गणेशोत्सव से जुड़ी कला, परंपरा, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास बढ़े हैं।

    इसी व्यापक संदर्भ में Bappa.org पर गणेशोत्सव की परंपराओं का डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। गणेशोत्सव की सांस्कृतिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रयासों के संदर्भ में भी इस दस्तावेजीकरण को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि गणेशोत्सव को UNESCO की मान्यता मिल चुकी है।

    मुंबईकरों के लिए इसका क्या मतलब?

    मुंबई में हर साल लाखों लोग घरों और सार्वजनिक मंडलों के जरिए गणेशोत्सव मनाते हैं। अलग-अलग इलाकों, परिवारों और समुदायों की अपनी अलग परंपराएं हैं। कई परंपराएं केवल परिवार के बुजुर्गों की यादों तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता।

    Bappa.org इसी अंतर को भरने की कोशिश करता है। किसी परिवार की कई दशक पुरानी पूजा पद्धति हो, किसी मंडल का सामाजिक काम हो, पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति हो या किसी इलाके की अलग गणेशोत्सव परंपरा—इन अनुभवों को तस्वीर और कहानी के साथ दर्ज किया जा सकता है।

    मुंबईकरों के लिए आसान भाषा में कहें तो Bappa.org पर सिर्फ यह बताना जरूरी नहीं है कि आपके घर में गणपति की मूर्ति कैसी है। यह भी बताया जा सकता है कि आपके परिवार में बाप्पा की परंपरा कब से है, सजावट कैसे होती है, कौन-सी आरती या प्रथा निभाई जाती है और गणेशोत्सव के दौरान परिवार या मंडल क्या खास करता है।

    यानी इस साल का गणेशोत्सव खत्म होने के बाद भी उसकी कहानी डिजिटल संग्रह में दर्ज रह सकती है। मुंबईकर अपने घर या मंडल की परंपरा को Bappa.org के माध्यम से इस राज्यव्यापी सांस्कृतिक रिकॉर्ड का हिस्सा बना सकते हैं।

  • Crime & Corruption Control Association की सूचना पर चालीसगांव में वन मजदूर के घर से काला हिरण जब्त

    Crime & Corruption Control Association की सूचना पर चालीसगांव में वन मजदूर के घर से काला हिरण जब्त

    Schedule-I में शामिल संरक्षित काला हिरण खेत के घर में बंधा मिला; वरिष्ठ वन अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई

    महाराष्ट्र/चालीसगांव: गौताला अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीव से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। Crime & Corruption Control Association (CCCA) को मिली गुप्त जानकारी के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद बनाई गई विशेष टीम ने कार्रवाई कर एक खेत स्थित घर से जिंदा नर काला हिरण बरामद किया। वन विभाग के मुताबिक, काला हिरण करीब दो साल का है।

    CCCA के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों को जानकारी मिली थी कि शिवापुर निवासी और वन विभाग में वनमजदूर के तौर पर काम करने वाले सुभाष शिवाजी कुऱ्हाडे के खेत स्थित घर में काला हिरण बांधकर रखा गया था। जानकारी मिलते ही इसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

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    इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेष टीम ने संबंधित घर पर कार्रवाई हुई। टीम को वहां काला हिरण जिंदा और बंधा हुआ मिला। वन विभाग ने उसे अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित कर लिया। वन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये काला हिरण प्रजाति का 2 साल का नर है।

    Crime & Corruption Control Association ने दी थी गुप्त जानकारी

    इस मामले में CCCA की अहम भूमिका रही। संगठन के पदाधिकारियों को काला हिरण बांधकर रखे जाने की जानकारी मिली थी, जिसे उन्होंने सीधे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया। इसके बाद वन विभाग ने विशेष टीम बनाकर कार्रवाई की।

    CCCA का कहना है कि वन अपराधों से जुड़ी जानकारी मिलने पर संगठन उसे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाता है और कार्रवाई में सहयोग करता है।

    वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला

    वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में Wild Life (Protection) Act, 1972 की धारा 9, 39(अ), 39(ब), 40(2) और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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    काला हिरण यानी Blackbuck (Antilope cervicapra) Schedule-I में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे वन्यजीव को अवैध तरीके से पकड़कर रखना या उसका कारोबार करना कानून के तहत अपराध है।

    काला हिरण कहां से आया, इसकी जांच जरूरी

    CCCA की ओर से मिली जानकारी में एक अन्य वन कर्मचारी की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। संगठन का दावा है कि संबंधित कर्मचारी ने काला हिरण खेत के घर में रखने के लिए कहा था और उसकी संभावित बिक्री की तैयारी की जा रही थी।

    हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच होना बाकी है। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि काला हिरण कहां से आया, उसे किसने पकड़ा, यहां तक कैसे पहुंचा और क्या उसे बेचने की कोशिश की जा रही थी।

    15 दिनों में अंजन, चंदन और अब काला हिरण

    CCCA के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों में गौताला अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आए हैं। इनमें अंजन पेड़ों की कथित अवैध कटाई और तस्करी, चंदन तस्करी और अब जिंदा काला हिरण बरामदगी शामिल है।

    CCCA का कहना है कि इन मामलों को देखते हुए वन अपराधों की पूरी कड़ी की जांच की जरूरत है। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर संदेह है, तो उसे जांच और सबूतों के आधार पर साफ किया जाना चाहिए।

    संभावित तस्करी रास्तों की भी जांच की मांग

    CCCA के अनुसार, जानकारी जुटाने के दौरान कुछ ऐसे रास्तों की जानकारी सामने आई है, जिनका इस्तेमाल वन्यजीव या वन्यजीवों से जुड़ी सामग्री की अवैध आवाजाही के लिए किए जाने का शक है। इनमें चालीसगांव–धुले–नवापुर–गुजरात, चालीसगांव–मालेगांव–मुंबई और चालीसगांव–छत्रपति संभाजीनगर–अहिल्यानगर–मुंबई मार्ग शामिल हैं।

    इन रास्तों से वास्तव में तस्करी हो रही है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    CCCA ने पूरी कड़ी की जांच की मांग की

    CCCA ने मांग की है कि जांच सिर्फ काला हिरण मिलने तक सीमित न रहे। काला हिरण कहां से आया, किसने उसे यहां पहुंचाया, संभावित खरीदार कौन था और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जाए।

    CCCA ने कहा है कि भविष्य में भी वन्यजीव अपराधों से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिलने पर उसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाकर कार्रवाई में सहयोग किया जाएगा।

  • मुंबई दहिसर में 15 KM कैब राइड के बाद AC को लेकर विवाद, किराया न देने का वीडियो वायरल

    मुंबई दहिसर में 15 KM कैब राइड के बाद AC को लेकर विवाद, किराया न देने का वीडियो वायरल

    मुंबई के दहिसर में 15 KM कैब राइड के बाद AC को लेकर यात्री और ड्राइवर में विवाद का वीडियो वायरल हुआ है। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: दहिसर में कैब की करीब 15 किलोमीटर की सवारी के बाद AC को लेकर यात्री और ड्राइवर के बीच विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में यात्री का कहना है कि कैब का AC बंद था, जबकि ड्राइवर का दावा है कि AC चालू था और यात्रा के दौरान यात्री ने इसकी शिकायत नहीं की। विवाद उस समय बढ़ा जब किराए के भुगतान की बात सामने आई।

    वीडियो में ड्राइवर लगातार यात्री से किराया देने की बात करता दिखाई देता है। ड्राइवर का कहना है कि यात्री ने करीब 15 किलोमीटर तक कैब में सफर किया और इस दौरान AC को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई। उसका सवाल है कि अगर AC बंद था तो रास्ते में इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई और भुगतान का समय आने पर इस मुद्दे को क्यों उठाया जा रहा है।

    वहीं, यात्री की ओर से AC बंद होने की बात कही जा रही है। इसी दावे को लेकर दोनों के बीच बहस होती दिखाई देती है। वायरल वीडियो में यह विवाद किराए के भुगतान तक पहुंचता नजर आता है।

    15 किलोमीटर की सवारी के बाद क्या हुआ?

    वीडियो में ड्राइवर खुद करीब 15 किलोमीटर की यात्रा का उल्लेख करता है। वह यात्री से यह भी कहता सुनाई देता है कि अगर AC से परेशानी थी तो पूरी यात्रा के दौरान इसकी शिकायत की जानी चाहिए थी।

    हालांकि, केवल वायरल वीडियो के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से तय नहीं किया जा सकता कि यात्रा के दौरान कैब का AC वास्तव में बंद था या चालू। इसी तरह किराया आखिरकार दिया गया या नहीं और विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच क्या कार्रवाई हुई, इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    कैब का वाहन नंबर MH 47 BY 8571 बताया जा रहा है। घटना को मुंबई के दहिसर इलाके से जोड़ा जा रहा है।

    AC को लेकर विवाद कैसे बढ़ा?

    कैब सेवाओं में यात्री और ड्राइवर के बीच विवाद कई बार किराए, वाहन की सुविधा, रूट, अतिरिक्त शुल्क या यात्रा के दौरान उपलब्ध सुविधाओं को लेकर हो सकता है। इस मामले में विवाद का केंद्र AC है।

    यात्री का पक्ष है कि AC काम नहीं कर रहा था, जबकि ड्राइवर इस दावे से सहमत नहीं है। ड्राइवर का कहना है कि AC चालू था और यात्री ने करीब 15 किलोमीटर तक सफर किया। भुगतान की बारी आने के बाद AC बंद होने की शिकायत किए जाने पर ड्राइवर ने सवाल उठाया।

    इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लेकिन वीडियो में दिखाई देने वाली बातचीत के आधार पर किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

    कैब में AC को लेकर शिकायत हो तो क्या करें?

    अगर यात्रा के दौरान AC या वाहन की किसी सुविधा को लेकर समस्या हो, तो यात्री को उसी समय ड्राइवर को इसकी जानकारी देना और संभव होने पर कैब ऐप के माध्यम से शिकायत दर्ज करना चाहिए। इससे बाद में किराए को लेकर विवाद होने पर शिकायत का रिकॉर्ड उपलब्ध रह सकता है।

    इसी तरह ड्राइवर के लिए भी यात्री की शिकायत को यात्रा के दौरान ही स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है, ताकि भुगतान के समय विवाद की स्थिति न बने।

    वायरल वीडियो के बाद अब क्या स्थिति है?

    फिलहाल इस मामले में पुलिस कार्रवाई, आधिकारिक शिकायत या संबंधित कैब प्लेटफॉर्म की ओर से कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए वायरल वीडियो में मौजूद दावों को उसी रूप में देखा जाना चाहिए।

    इस मामले में आगे यदि पुलिस, कैब कंपनी या संबंधित यात्री-ड्राइवर की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आती है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि AC को लेकर वास्तविक स्थिति क्या थी और किराए के भुगतान को लेकर विवाद के बाद क्या कार्रवाई हुई।

  • Salman Khan का Katrina Kaif की ट्रोलिंग पर बयान, Bigg Boss 20 में trolls को कहा ‘parasites’

    Salman Khan का Katrina Kaif की ट्रोलिंग पर बयान, Bigg Boss 20 में trolls को कहा ‘parasites’

    Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी शेमिंग के बीच Salman Khan ने Bigg Boss 20 में trolling, age-shaming और paparazzi culture पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Salman Khan ने Bigg Boss 20 के Weekend Ka Vaar में सोशल मीडिया trolling, body-shaming और celebrity privacy को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका यह बयान Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी appearance को लेकर चल रही ऑनलाइन ट्रोलिंग के बीच आया है। हालांकि Salman ने Katrina का नाम नहीं लिया, लेकिन pregnancy के बाद महिलाओं के बढ़े वजन को लेकर किए जाने वाले comments पर उन्होंने सवाल उठाया। इसी दौरान उन्होंने लगातार celebrities की शक्ल-सूरत पर निजी टिप्पणियां करने वाले trolls को ‘parasites’ भी कहा।

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    Katrina Kaif की पोस्ट-प्रेग्नेंसी बॉडी पर क्यों शुरू हुई ट्रोलिंग

    Katrina Kaif 14 सितंबर को अपने पति Vicky Kaushal के साथ Mumbai में Ambani परिवार के Ganesh Chaturthi समारोह में नजर आई थीं। बेटे Vihaan के जन्म के बाद यह उनकी चर्चित सार्वजनिक appearances में से एक थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ users ने उनकी पुरानी तस्वीरों से तुलना करते हुए उनके वजन और appearance पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। Fans ने इन comments को body-shaming बताते हुए Katrina का बचाव किया।

    Katrina और Vicky Kaushal ने 7 नवंबर 2025 को अपने बेटे Vihaan का स्वागत किया था। मां बनने के बाद Katrina ने फिल्मों से दूरी बनाए रखते हुए अपने परिवार और Kay Beauty से जुड़े काम पर ध्यान दिया है।

    Salman Khan ने Katrina का नाम लिए बिना क्या कहा?

    Bigg Boss 20 के Weekend Ka Vaar में Salman Khan ने pregnancy और motherhood के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर की जाने वाली trolling पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि किसी महिला को pregnant होने या मां बनने के कारण troll क्यों किया जाना चाहिए। Salman ने यह भी कहा कि जब कोई महिला दोबारा काम पर लौटेगी तो अपने तरीके से fitness पर ध्यान दे सकती है।

    इस बयान को Katrina Kaif की मौजूदा controversy से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यह स्पष्ट है कि Salman ने अपने segment में Katrina का नाम नहीं लिया। इसलिए इसे सीधे तौर पर “Salman ने Katrina के trolls को जवाब दिया” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा।

    ‘Parasites’ किसे कहा Salman ने?

    Salman का ‘parasites’ वाला बयान भी इसी broader trolling discussion का हिस्सा था। उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा जो celebrities की शक्ल, शरीर, उम्र और निजी जिंदगी को लगातार online comments का विषय बनाते हैं।

    उन्होंने अपनी appearance को लेकर होने वाली trolling का भी जिक्र किया। Salman ने बताया कि उनके वजन, उम्र और looks को लेकर comments किए जाते हैं। इसके बाद उन्होंने मंच पर अपना hat और jacket उतारा और अपने शरीर को लेकर होने वाली टिप्पणियों का सामना करने का अंदाज दिखाया।

    Salman ने खुद की उम्र को लेकर भी कहा कि वह 60 साल के हो चुके हैं और उनसे हमेशा वही appearance बनाए रखने की उम्मीद नहीं की जा सकती जो उनकी शुरुआती फिल्मों के दौर में थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी के काम को पसंद नहीं करना अलग बात है, लेकिन उस व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला करना अलग है।

    ScoutOP और Arishfa Khan के विवाद से शुरू हुई चर्चा

    Weekend Ka Vaar में trolling की चर्चा ScoutOP और Arishfa Khan से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी हुई। Salman ने ScoutOP की online comments और gaming community से जुड़ी बातों को लेकर सवाल उठाए और इसके बाद चर्चा celebrity trolling तथा सोशल मीडिया behaviour तक पहुंच गई।

    Salman ने पुराने एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें उनके मुताबिक एक व्यक्ति लगातार सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक comments करता था और cyber cell की मदद से उसकी पहचान तक पहुंची थी। Salman ने anonymous accounts के पीछे छिपकर लोगों पर निजी टिप्पणियां करने की मानसिकता पर सवाल उठाया।

    Sohail Khan और Varun Sharma का भी आया जिक्र

    Salman ने केवल अपनी trolling की बात नहीं की। उन्होंने Sohail Khan और Varun Sharma जैसे लोगों की appearance पर किए जाने वाले comments का भी संदर्भ दिया। उनका कहना था कि किसी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताना अलग बात है, लेकिन किसी की शक्ल या शरीर का मजाक बनाना अलग मामला है।

    Paparazzi culture पर भी भड़के Salman Khan

    Salman का निशाना सिर्फ social media trolls तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कुछ paparazzi द्वारा female celebrities की ऐसी तस्वीरें लेने पर सवाल उठाया जिनमें कैमरे का focus उनके शरीर के खास हिस्सों पर होता है।

    इस दौरान Salman ने actresses और अपने परिवार की महिलाओं से जुड़े experiences का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी celebrity का सार्वजनिक स्थान पर होना क्या उसकी privacy और dignity खत्म कर देता है।

    उन्होंने दर्शकों और celebrities के रिश्ते को लेकर भी कहा कि फिल्म की ticket खरीदने का मतलब किसी actor की निजी जिंदगी पर अधिकार मिल जाना नहीं है। उनका तर्क था कि दर्शक फिल्म के काम को पसंद या नापसंद कर सकते हैं, लेकिन इससे व्यक्तिगत अपमान का अधिकार नहीं मिलता।

    Katrina Kaif ने खुद क्या कहा?

    Katrina Kaif ने इस specific body-shaming controversy पर सीधे तौर पर trolls को जवाब नहीं दिया है। हालांकि इसी दौरान उन्होंने pregnancy के बाद अपने शरीर और skin में हुए बदलावों तथा beauty को लेकर अपनी बदलती सोच पर बात की।

    एक interview में Katrina ने बताया कि pregnancy के बाद उनकी skin पहले से ज्यादा sensitive हो गई और उन्हें अपने लिए suitable skincare products तलाशने पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनके लिए “looking my best” का मतलब सिर्फ बाहर से अच्छा दिखना नहीं, बल्कि भीतर से healthy और अच्छा महसूस करना है।

    Katrina ने balanced diet, active रहने, meditation, सुबह कुछ समय phone से दूर रहने और natural light लेने जैसी अपनी daily habits का भी जिक्र किया। उन्होंने परिवार और दोस्तों के साथ downtime को भी अपने लिए महत्वपूर्ण बताया।

    Hrithik Roshan और Ali Zafar ने भी दिखाई प्रतिक्रिया

    Katrina की appearance पर शुरू हुई body-shaming के बीच Hrithik Roshan ने Katrina के बचाव में लिखी गई एक social media post को like किया। Hrithik की ओर से इस मामले पर कोई अलग विस्तृत बयान सामने नहीं आया, इसलिए उनके reaction को post like करने तक सीमित रखना सही है।

    वहीं Katrina के Mere Brother Ki Dulhan co-star Ali Zafar ने खुलकर body-shaming की आलोचना की। उन्होंने महिलाओं के लिए एक तय beauty standard की अपेक्षा को गलत बताते हुए लोगों से दूसरों की परिस्थितियों को समझने और अधिक empathy के साथ व्यवहार करने की अपील की।

    Karishma Tanna ने भी postpartum body पर रखी अपनी बात

    इसी controversy के बीच Karishma Tanna ने अपने postpartum body को लेकर सोशल मीडिया पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने शरीर में childbirth के बाद आए बदलावों को स्वीकार करने की बात कही और महिलाओं को दुनिया की expectations के कारण अपने शरीर को लेकर शर्म महसूस न करने का संदेश दिया।

    इससे Katrina Kaif की controversy केवल एक celebrity की appearance तक सीमित नहीं रही, बल्कि motherhood के बाद महिलाओं के शरीर को लेकर बनाए जाने वाले beauty standards पर भी चर्चा तेज हुई है।

    Post-pregnancy appearance को लेकर इतनी चर्चा क्यों?

    Pregnancy और childbirth के बाद शरीर में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। वजन, skin, hormones, sleep pattern और शरीर की overall appearance में बदलाव अलग-अलग महिलाओं में अलग तरह से दिखाई दे सकते हैं। इसलिए किसी celebrity की तस्वीर देखकर उसके स्वास्थ्य या recovery के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

    Katrina की अपनी हालिया बातचीत भी इसी बदलाव की ओर इशारा करती है। उन्होंने pregnancy के बाद अपनी sensitive skin और बदलती self-care जरूरतों के बारे में बात की है, लेकिन उन्होंने अपने वर्तमान वजन को लेकर कोई specific medical explanation नहीं दिया है।

    Salman Khan की टिप्पणी के बाद अब मामला सिर्फ Katrina Kaif तक सीमित नहीं

    Bigg Boss 20 में Salman Khan की टिप्पणी ने Katrina Kaif की ongoing body-shaming controversy को एक बड़े celebrity-trolling debate से जोड़ दिया है। इसमें social media comments, age-shaming, body-shaming, anonymous trolling और paparazzi द्वारा privacy की सीमाओं का सवाल शामिल हो गया है।

    फिलहाल Katrina ने इस specific trolling controversy पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। वहीं Salman Khan का बयान, Hrithik Roshan का defending post को like करना, Ali Zafar की प्रतिक्रिया और Karishma Tanna की postpartum body पर टिप्पणी ने इस मुद्दे को लगातार चर्चा में बनाए रखा है।

    Bigg Boss 20 का Weekend Ka Vaar इसी वजह से Salman Khan के trolling पर दिए गए बयान, Katrina Kaif की post-pregnancy controversy और celebrity privacy को लेकर उनकी टिप्पणियों के कारण चर्चा में है।

  • मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 39,111 झोपड़ियां BMC के रडार पर, 1 अक्टूबर से 14 फीट से ऊंची संरचनाओं पर कार्रवाई

    मुंबई में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक BMC की विशेष कार्रवाई, 14 फीट या उससे ऊंची 39,111 झोपड़ियां जांच के दायरे में, जानिए किस पर होगा असर।

    मुंबई: मुंबई के झोपड़पट्टी क्षेत्रों में बने अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक विशेष अभियान चलाएगी। इस अभियान के तहत 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों तथा उनसे जुड़े अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी। BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ियां हैं, जिनमें 39 हजार 111 संरचनाएं 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। हालांकि, इन सभी 39,111 संरचनाओं को इस अवधि में अनिवार्य रूप से तोड़ा जाएगा, ऐसा BMC की घोषणा में नहीं कहा गया है।

    BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन में और सह आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने संबंधित रहवासियों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है और ऐसा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    39,111 संरचनाओं में सबसे बड़ा हिस्सा पूर्वी उपनगरों का है। यहां 31,227 झोपड़ियां 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई की पाई गई हैं। मुंबई शहर में ऐसी 3,348 और पश्चिमी उपनगरों में 4,536 संरचनाएं हैं। यानी इस पूरी सूची में करीब 80 प्रतिशत संरचनाएं पूर्वी उपनगरों में स्थित हैं।

    कार्रवाई का पूरा आंकड़ा क्या है?

    BMC के अनुसार 39,111 ऊंची संरचनाओं में से 4,584 पर पहले ही निष्कासन की कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि 611 संरचनाओं को नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, BMC के सार्वजनिक आंकड़ों से यह स्पष्ट नहीं है कि 611 नोटिस वाली संरचनाएं 4,584 पर की गई कार्रवाई के आंकड़े में शामिल हैं या अलग श्रेणी में हैं। इसलिए केवल इन दोनों आंकड़ों को घटाकर अक्टूबर से कार्रवाई के लिए बची संरचनाओं की सटीक संख्या बताना अभी सही नहीं होगा।

    यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 39,111 का आंकड़ा identified structures का है, न कि 39,111 परिवारों का। BMC की घोषणा में यह जानकारी नहीं दी गई है कि इन संरचनाओं में कुल कितने परिवार या लोग रहते हैं। इसलिए इस अभियान से 39 हजार परिवार सीधे प्रभावित होंगे, ऐसा कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

    14 फीट से ज्यादा ऊंचाई का मतलब क्या पूरा घर टूटेगा?

    इस अभियान का सबसे अहम सवाल यही है। BMC ने 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों को कार्रवाई के दायरे में रखा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जा सकता कि हर मामले में पूरी संरचना को ही जमीन पर गिराया जाएगा।

    जून 2026 के एक Bombay High Court मामले में 14 फीट से ऊपर बने अनधिकृत vertical extension को हटाने का मामला सामने आया था। अदालत के रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति के पास 14 फीट से ऊपर vertical extension की अनुमति नहीं होने का उल्लेख है। अदालत ने लागू नियमों के तहत अनुमति के लिए आवेदन करने की संभावना का भी उल्लेख किया था। इससे स्पष्ट होता है कि मूल संरचना और बाद में किए गए अनधिकृत ऊर्ध्वाधर विस्तार की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

    यानी किसी झोपड़ी की ऊंचाई 14 फीट से अधिक पाए जाने पर कार्रवाई किस हिस्से पर होगी, यह संबंधित निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध अनुमति और रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकता है। BMC की मौजूदा घोषणा में प्रत्येक संरचना के लिए कार्रवाई का अलग प्रारूप सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    पुराने झोपड़ीधारकों के दस्तावेज भी महत्वपूर्ण

    इस अभियान को केवल ऊंचाई के आधार पर समझना सही नहीं होगा। झोपड़ी की ऊंचाई और उसमें रहने वाले व्यक्ति की पात्रता दो अलग-अलग मुद्दे हैं।

    महाराष्ट्र सरकार की उपलब्ध पात्रता संबंधी जानकारी में 1 जनवरी 2000 या उससे पहले के आवासीय ground-floor structures के लिए निर्धारित पात्रता प्रक्रिया का उल्लेख है। पात्रता के लिए पुराने मतदाता रिकॉर्ड, अधिकृत बिजली रिकॉर्ड, सर्वेक्षण संबंधी दस्तावेज, संपत्ति कर रिकॉर्ड और अन्य स्वीकार्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि अंतिम पात्रता संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद तय होती है।

    मार्च 2026 के Bombay High Court के एक मामले में भी झोपड़ीधारक की पात्रता तय करते समय प्रस्तुत दस्तावेजों की उचित जांच और प्रत्येक संबंधित दस्तावेज पर स्पष्ट निष्कर्ष की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

    इसलिए किसी पुराने झोपड़ीधारक के पास photo-pass या अन्य पुराने दस्तावेज मौजूद होने की स्थिति और बाद में किए गए अनधिकृत निर्माण की स्थिति को एक ही आधार पर नहीं देखा जा सकता।

    मुंबई में पहले भी तेज हुई है अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई

    BMC के अनुसार 24 अगस्त से 15 सितंबर 2026 के बीच मुंबई के अलग-अलग प्रशासनिक विभागों में 128 अनधिकृत निर्माणों पर निष्कासन की कार्रवाई की गई, जबकि 140 अन्य निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई नियोजित थी। अक्टूबर से शुरू होने वाला अभियान इसी enforcement को झोपड़पट्टी क्षेत्रों में विशेष रूप से 14 फीट और उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं पर केंद्रित करता है।

    मुंबई के पूर्वी उपनगरों में इस समय अनधिकृत कब्जों और निर्माणों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर भी कार्रवाई जारी है। सितंबर 2026 में Mankhurd में सरकारी जमीन से करीब 57 अनधिकृत व्यावसायिक इकाइयों को हटाया गया और लगभग छह एकड़ जमीन को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई की गई। अप्रैल 2026 में Ghatkopar-Mankhurd Link Road के आसपास भी 1,200 से अधिक अनधिकृत झोपड़ी संरचनाओं पर कार्रवाई की गई थी। ये कार्रवाई वर्तमान 14 फीट वाली BMC विशेष मुहिम से अलग हैं, लेकिन मुंबई में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ बढ़ी enforcement का व्यापक संदर्भ देती हैं।

    सुरक्षा का सवाल भी बड़ा कारण

    अनधिकृत vertical extensions और कमजोर संरचनाओं का मुद्दा केवल जमीन या निर्माण नियमों तक सीमित नहीं है। 2026 में Mankhurd में मकान गिरने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच नाबालिग थे। इसके बाद अनधिकृत और असुरक्षित संरचनाओं को लेकर मुंबई में सुरक्षा संबंधी सवाल और गंभीर हुए।

    मुंबई में landslide-prone क्षेत्रों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उपलब्ध BMC Climate Action Plan से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मुंबई में 287 landslide-prone locations चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 209 informal settlements के भीतर हैं। 2026 में Kurla में landslide की घटना में भी आठ लोगों की मौत हुई थी। हालांकि इन घटनाओं को 39,111 संरचनाओं के अभियान का प्रत्यक्ष कारण बताने के लिए अलग आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।

    अब सबसे बड़ा सवाल: 1 अक्टूबर के बाद क्या होगा?

    अक्टूबर से दिसंबर तक चलने वाली इस विशेष मुहिम में BMC का लक्ष्य 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली identified structures पर कार्रवाई करना है। लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 39,111 संरचनाओं में से कितनी पर इस तीन महीने की अवधि में वास्तविक निष्कासन कार्रवाई की जाएगी, कार्रवाई किस क्रम में होगी और 611 नोटिस जारी की गई संरचनाओं तथा पहले से कार्रवाई झेल चुकी 4,584 संरचनाओं के आंकड़ों में कितना overlap है।

    यही वजह है कि इस अभियान का वास्तविक असर आने वाले दिनों में ward-wise कार्रवाई, जारी होने वाले notices और प्रत्येक संरचना के रिकॉर्ड की जांच के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा।

    फिलहाल BMC ने झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने की अपील की है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली कार्रवाई में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाएं मुख्य फोकस में रहेंगी, जबकि किसी विशेष घर या उसके हिस्से पर कार्रवाई का स्वरूप संबंधित निर्माण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तय होना महत्वपूर्ण होगा।

  • अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

    अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

    अंधेरी MIDC में माथाडी यूनियन की आड़ में कथित वसूली के मामले में 7 गिरफ्तार, 4 फरार। MCOCA कार्रवाई और पुलिस जांच की पूरी जानकारी।

    मुंबई: अंधेरी पूर्व MIDC में माथाडी कामगार यूनियन के नाम पर कंपनियों, कारोबारियों और निर्माण व्यावसायिकों से कथित प्रोटेक्शन मनी वसूलने के मामले में मुंबई पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चार अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र संघटित गुन्हेगारी नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है। जांच में कथित नेटवर्क की पहुंच अंधेरी से आगे पवई, गोरेगांव पूर्व और फिल्म स्टूडियो क्षेत्र तक होने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रेड स्टार इमारत में ₹10 लाख की कथित मांग

    यह मामला 16 अगस्त को अंधेरी पूर्व के कोंडिविटा रोड स्थित ट्रेड स्टार इमारत में हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, पांचवीं मंजिल पर एक कंपनी के कार्यालय में नवीनीकरण का काम चल रहा था। वहां कुछ लोग पहुंचे और कथित तौर पर ₹10 लाख की प्रोटेक्शन मनी की मांग की। कार्यालय में पहले से काम कर रहे माथाडी कामगारों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, इस घटना में 27 वर्षीय माथाडी कामगार नदीम नसरुद्दीन शेख पर भी हमला हुआ। 17 अगस्त को MIDC पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि लकड़ी के डंडों से उसके सिर और पैरों पर वार किया गया। इसी हमले के बाद पुलिस को कथित वसूली नेटवर्क का पता चला।

    माथाडी के नाम पर काम रोककर पैसे मांगने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी किसी कंपनी में काम हासिल करने के बजाय वहां काम कर रहे श्रमिकों पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने का प्रयास करते थे। इस मामले में एक अन्य शिकायत के अनुसार, नदीम शेख से काम जारी रखने की अनुमति के बदले ₹20,000 प्रति माह मांगने का आरोप है।

    अलग-अलग घटनाओं से संबंधित

    इन दोनों रकमों को एक ही मांग मानना सही नहीं होगा। ट्रेड स्टार कार्यालय मामले में ₹10 लाख की कथित मांग का उल्लेख है, जबकि नदीम शेख से संबंधित मामले में ₹20,000 मासिक मांग का विवरण सामने आया है। वास्तविक वसूली और सभी संबंधित घटनाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    करीब 1,000 कंपनियों तक पहुंच का पुलिस दावा

    पुलिस जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क की पहुंच करीब 1,000 MIDC कंपनियों तक होने की आशंका जताई गई है। कंपनियों से ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की कथित मांग और निर्माण व्यावसायिकों से प्रोजेक्ट के आकार के आधार पर ₹120 प्रति वर्ग फुट तक वसूली के दावे भी सामने आए हैं।

    हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियों से वसूली साबित हो चुकी है। पुलिस को अब यह पता लगाना है कि कितने कारोबारी वास्तव में इस कथित नेटवर्क के संपर्क में आए, कितनों से पैसे मांगे गए और कितने लोगों ने शिकायत दर्ज कराई।

    अंधेरी से पवई और गोरेगांव तक कथित गतिविधियां

    जांच में अंधेरी MIDC के अलावा पवई के कार्यालयों, गोरेगांव पूर्व के फिल्म स्टूडियो और SEEPZ क्षेत्र का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कथित गिरोह उन कंपनियों पर नजर रखता था जहां नया काम शुरू होने वाला हो।

    अंधेरी SEEPZ क्षेत्र में करीब 450 कंपनियां और कार्यालय तथा MIDC क्षेत्र में लगभग 350 कंपनियां होने की जानकारी जांच में सामने आई है। यह औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए मामले की संभावित व्यापकता को समझा जा सकता है।

    माथाडी व्यवस्था और कथित गैरकानूनी वसूली में अंतर

    माथाडी व्यवस्था महाराष्ट्र माथाडी, हमाल तथा अन्य मैनुअल कामगार (रोजगार और कल्याण का विनियमन) अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होती है। इसका उद्देश्य असुरक्षित मैनुअल कामगारों के रोजगार और कल्याण को विनियमित करना है।

    माथाडी व्यवस्था में मुकादम श्रमिकों की टोली का नेतृत्व करता है। कंपनियां काम की जरूरत के अनुसार संबंधित व्यवस्था के माध्यम से कामगारों की सेवाएं लेती हैं। इस व्यवस्था का नाम इस्तेमाल कर किसी कंपनी पर कथित धमकी या अवैध वसूली करना एक अलग आपराधिक आरोप है।

    सात आरोपी गिरफ्तार, चार फरार

    MIDC पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

    1. पूरण अरुण सिंह उर्फ चड्डा
    2. रोहित मधुकर साळुंखे
    3. इमरान बसुद्दीन हवाळदार
    4. सुरेश गुलाबचंद गौड उर्फ किसान
    5. आकाश मानसिंग सिंह उर्फ नेपाली
    6. राजकुमार सेल्वन मुन्नुस्वामी उर्फ लाला
    7. अर्जुन मुनियन मुथु उर्फ डाकू
      पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना समेत चार आरोपी फरार हैं। वन्नियार को कथित नेटवर्क का प्रमुख बताया गया है।

    बड़ा कन्ना और छोटा कन्ना कि हो राही है जांच

    पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना और उसके भाई कन्नन स्वामी उर्फ छोटा कन्ना का नाम कथित नेटवर्क से जुड़ा है। जांच में करीब दो दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय कथित गिरोहों का भी उल्लेख हुआ है।

    पुलिस ने बड़ा कन्ना के खिलाफ लगभग 20 पुराने मारपीट और वसूली से जुड़े मामलों का उल्लेख किया है। पूरे कथित नेटवर्क के खिलाफ 24 से अधिक पुराने मामलों का पुलिस दावा भी सामने आया है। इन मामलों का वास्तविक स्वरूप और वर्तमान कानूनी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।

    MCOCA के तहत कार्रवाई क्यों?

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ MCOCA की धाराएं 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज गंभीर मामलों और कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए इस कानून का इस्तेमाल किया गया।

    मामले में MCOCA लगाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने का भी उल्लेख सामने आया है। इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल एक मारपीट या कथित वसूली की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस कथित संगठित अपराध के पैटर्न की भी जांच कर रही है।

    कथित वसूली से कारोबारियों और कामगारों पर असर

    इस मामले में पुलिस के दावों की पुष्टि होने पर कंपनियों और निर्माण व्यावसायिकों के लिए काम शुरू करने के दौरान अनधिकृत दबाव और धमकी का जोखिम महत्वपूर्ण जांच का विषय बनता है। इसी तरह, माथाडी व्यवस्था का नाम कथित तौर पर इस्तेमाल होने से वास्तविक माथाडी कामगारों और पंजीकृत यूनियनों की पहचान को लेकर भी सवाल उठते हैं।

    पुलिस ने माथाडी यूनियनों से कामगारों के पूर्ववृत्त और संबंधित पहचान की जांच करने का आग्रह करने की बात कही है। यह कदम कथित गैरकानूनी वसूली को रोकने और वैध कामगार व्यवस्था की पहचान स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सात गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने चार फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच की चुनौती है। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि वसूली की रकम किस तरह ली जाती थी, कितनी कंपनियों से पैसे मांगे गए और क्या अन्य कारोबारी भी शिकायत दर्ज कराने आगे आएंगे।

    मामले में कार और सोने के आभूषणों से जुड़े वित्तीय जांच के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, कुल बरामदगी, रकम और संपत्तियों की पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

    अंधेरी MIDC में कथित माथाडी वसूली नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार चार आरोपी फरार हैं और मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। गिरफ्तार आरोपियों को दोषी साबित होने तक कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है।

  • मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के मालवणी में धारदार हथियार से पांच लोगों पर हमला। 16 वर्षीय किशोर की मौत और अन्य लोगों के घायल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित मालवणी इलाके में शुक्रवार को धारदार हथियार से लगातार कई लोगों पर हमले की घटना सामने आई। पुलिस के अनुसार, हमले में पांच लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें 16 वर्षीय एक किशोर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हमले के पीछे की वजह की जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान आरोपी ने बिना किसी स्पष्ट उकसावे के लोगों पर चाकू से वार किए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    पहले पानी मांगा, फिर किशोर पर किया हमला

    घटना से जुड़े शुरुआती घटनाक्रम में सामने आया है कि शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे एक युवक न्यू कलेक्टर कंपाउंड में एक घर के दरवाजे पर पहुंचा और पानी मांगा। घर के 14 वर्षीय लड़के ने उसे पानी दिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से वार कर दिया।

    घायल किशोर को तत्काल कांदिवली के भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (शताब्दी) अस्पताल ले जाया गया। उसके गले पर करीब 15 टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई और शुरुआती स्थिति में उसकी हालत स्थिर बताई गई थी।

    इसके बाद आरोपी के दोपहर में दोबारा न्यू कलेक्टर कंपाउंड के प्लॉट नंबर 35 और गेट नंबर 7 के आसपास फिर हंगामा खड़ा कर दिया। वहां उसने एक अन्य युवक पर धारदार हथियार से हमला किया। इस दौरान आसपास मौजूद कुछ अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।

    हमले में 16 वर्षीय किशोर की मौत

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में पांच लोगों पर चाकू से हमला हुआ। इनमें 16 वर्षीय एक किशोर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है।

    स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा

    हमले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपी का पीछा किया और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है।

    आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर मुंबई में लोगों को निशाना बनाने के पीछे बदले की बात कही है। हालांकि इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और हमले का वास्तविक मकसद अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।

    “बंगाली” होने की पुष्टि नहीं

    घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आरोपी को “बंगाली” बताए जाने की बात सामने आई, लेकिन उपलब्ध पुलिस-सूत्र आधारित जानकारी में आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है। उसकी पहचान या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर उसे “बंगाली” कहा जा सके।

    मालवणी पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस आरोपी की गतिविधियों, हमले के क्रम और उसके कथित मकसद की पड़ताल कर रही है। हमले में घायल लोगों की स्थिति तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी जांच के साथ स्पष्ट होगी।