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मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ रुपये की चोरी होने के राज ठाकरे के दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों पर सफाई दी है।
मुंबई: दादर के सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे के एक बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति और करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। ठाकरे ने दावा किया है कि मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की चोरी हो रही है। यह आरोप सामने आते ही सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या देश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक की दान व्यवस्था में वास्तव में कोई बड़ी गड़बड़ी है, या फिर यह सिर्फ प्रशासनिक खामियों का मामला है?
राज ठाकरे ने मनसे विद्यार्थी सेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टियों की ओर से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए पत्र में गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
आज महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेनेचा २० वा वर्धापनदिन. त्यानिमित्त आयोजित मेळाव्यात माझ्या महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेनेतील सहकाऱ्यांना संबोधित केलं.
१) माझ्या राजकारणाची सुरुवात विद्यार्थी सेनेतून झाली. तिथे काम करत इथपर्यंत आलो. अमित आणि त्याचे सहकारी उत्तम काम… pic.twitter.com/cRiftSPzk7
राज ठाकरे ने अपने भाषण में दावा किया कि मंदिर की दान पेटी से पैसे चोरी करने के आरोप में कुछ कर्मचारियों को पकड़ा गया था। उनके मुताबिक, पहले हर बुधवार मंदिर की दान पेटी से लगभग 50 लाख रुपये निकलते थे, लेकिन कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद यही राशि तीन हफ्तों में बढ़कर करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
ठाकरे ने सवाल उठाया कि अगर कुछ ही हफ्तों में दान की रकम तीन गुना बढ़ सकती है, तो पहले जमा होने वाला बाकी पैसा आखिर कहां जा रहा था।
इसी आधार पर उन्होंने दावा किया कि मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
करोड़ों श्रद्धालुओं के मन में उठे सवाल
सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ मुंबई का धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में जब दान की रकम को लेकर इतने बड़े आरोप सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या मंदिर की दान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है?
दान पेटी की निगरानी कैसे होती है?
कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
क्या सरकार इस मामले की जांच कराएगी?
अगर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार कौन है?
यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जनता की आस्था का विषय बन चुका है।
मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों पर क्या कहा?
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने राज ठाकरे के आरोपों को अधूरी जानकारी पर आधारित बताया है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन ने पाया था कि कुछ स्थायी और संविदा कर्मचारी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से अलग-अलग माध्यमों से पैसे वसूल रहे थे।
ट्रस्ट के अनुसार, 19 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और बाहरी एजेंटों तथा स्टॉल संचालकों के हस्तक्षेप को रोका गया। इसके बाद मंदिर की आय में बड़ा इजाफा देखने को मिला।
सरवणकर का कहना है कि दो साल पहले जहां हर महीने 40 से 45 लाख रुपये का दान मिलता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 98 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
हालांकि, ट्रस्ट ने साफ किया है कि पत्र में सीधे तौर पर “दान चोरी” का जिक्र नहीं किया गया था।
राज ठाकरे ने सरकार से क्या मांग की?
मनसे प्रमुख ने कहा कि अगर मंदिर की आय में अचानक इतनी बड़ी वृद्धि हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
फिलहाल किसी सरकारी एजेंसी ने यह आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि सिद्धिविनायक मंदिर में 18 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। मंदिर ट्रस्ट भी इन आरोपों से इनकार कर रहा है।
असली सवाल: आस्था के पैसों की निगरानी कौन करेगा?
यह विवाद सिर्फ एक मंदिर का नहीं है। देशभर के बड़े धार्मिक संस्थानों में हर साल करोड़ों रुपये का दान आता है। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि क्या मंदिरों, दरगाहों और अन्य धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन को और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ऑडिट, सीसीटीवी निगरानी, स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत कर सकती हैं।
मुंबई साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल और कई बैंक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में देशभर के 84 साइबर अपराधों से कनेक्शन सामने आया है।
मुंबई साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश
मुंबई साइबर पुलिस के मध्य विभाग ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, 22 चेकबुक, 23 सिम कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है।
गिरफ्तार आरोपियों के साथ केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की तस्वीर
गुप्त सूचना के बाद बोरीवली में बिछाया जाल
मुंबई साइबर पुलिस थाना, मध्य विभाग, वर्ली को 29 जुलाई 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि सलमान पठान और उसके साथी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने आने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक, चंदावरकर रोड, बोरीवली (पश्चिम) में जाल बिछाया।
करीब तीन बजे सलमान पठान और उसके साथी बैंक से 10 लाख रुपये निकाल चुके थे और अन्य 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस जांच में पता चला कि सलमान पठान के भाईंदर पश्चिम स्थित केजीएन एंटरप्राइजेज और मीरा रोड के शांति शॉपिंग सेंटर स्थित रिचा एंटरप्राइजेज कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने दोनों जगहों पर छापेमारी कर चार अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खोलकर चेक के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालते थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध भारत के विभिन्न राज्यों में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
मुंबई साइबर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 106/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 61(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से कमाए गए पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने के लिए करते हैं।
आसान भाषा में समझें तो साइबर ठग सीधे अपने बैंक खाते में पैसे नहीं मंगवाते। वे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं या किसी लालच में फंसाकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को ही “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।
साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
साइबर अपराधी पहले लोगों को फर्जी कॉल, निवेश योजना, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन नौकरी या लॉटरी जैसे झांसे में फंसाकर पैसे ठगते हैं। इसके बाद यह रकम सीधे उनके खाते में न जाकर म्यूल अकाउंट में भेजी जाती है।
इसके बाद आरोपी—
बैंक से नकद रकम निकाल लेते हैं।
रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
चेक और एटीएम कार्ड के जरिए पैसे निकालते हैं।
कई बैंक खातों के जरिए पैसों का स्रोत छिपाने की कोशिश करते हैं।
लोग अनजाने में कैसे बन जाते हैं म्यूल अकाउंट होल्डर?
कई बार अपराधी लोगों को हर महीने कमीशन देने का लालच देकर उनका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।
आमतौर पर अपराधी लोगों से कहते हैं—
“आपके खाते में पैसा आएगा, आपको सिर्फ़ निकालकर देना है।”
“घर बैठे कमाई का मौका है।”
“कंपनी के लिए बैंक अकाउंट चाहिए।”
“किराये पर बैंक खाता दीजिए।”
ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
इस मामले में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे किया गया?
मुंबई साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकाल रहे थे। आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से पाया गया है।
साइबर पुलिस की चेतावनी
मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। अगर कोई व्यक्ति साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले खाते का मालिक पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इन अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के नेतृत्व में की गई। इस ऑपरेशन में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) बजरंग बनसोडे और सहायक पुलिस आयुक्त सुवर्णा शिंदे का मार्गदर्शन रहा।
कार्रवाई को सफल बनाने में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढाव, पुलिस निरीक्षक रविकिरण डोरले, सहायक पुलिस निरीक्षक अतुल सानप, मानसिंग वचकले, सविता कावरे, पुलिस हवलदार अभिजीत गोंजारी, नवनाथ वेताले, विकास तटकरे, किरण पाटिल, श्रीकांत पोंल, नंदकिशोर महाजन, तनिषा मयेकर और कैलाश बाबरे ने अहम भूमिका निभाई।
मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट ने एंटीलिया बम प्रकरण और मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाजे, प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों पर आरोप तय किए। जानिए अब मुकदमे में आगे क्या होगा।
मुंबई: मुंबई के बहुचर्चित एंटीलिया बम प्रकरण और मनसुख हिरेन हत्याकांड में शनिवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने पूर्व पुलिस अधिकारियों सचिन वाजे, प्रदीप शर्मा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं। आरोप तय होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश करेगी।
करीब साढ़े पांच साल पुराने इस मामले में पहली बार अदालत में सबूतों और गवाहों की विस्तृत जांच शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है। यही वजह है कि यह फैसला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे मामले की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर एक स्कॉर्पियो कार मिली थी। कार के अंदर जिलेटिन की छड़ें और धमकी भरा पत्र बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में पता चला कि यह वाहन ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन का था।
बॉम्बे हाईकोर्ट की फाइल तस्वीर
कार मिलने के महज आठ दिन बाद, 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव ठाणे की खाड़ी से बरामद हुआ। इसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और जांच महाराष्ट्र एटीएस से होते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तक पहुंच गई।
एनआईए ने सचिन वाजे पर क्या आरोप लगाए?
एनआईए के आरोपपत्र के मुताबिक, तत्कालीन पुलिस अधिकारी सचिन वाजे पर आरोप है कि उन्होंने एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी कार खड़ी करने की साजिश रची थी। एजेंसी का दावा है कि इसका उद्देश्य शहर के प्रभावशाली लोगों के बीच डर पैदा करना और कथित तौर पर उगाही के लिए माहौल बनाना था।
जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया है कि जब मनसुख हिरेन ने इस मामले की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, तो उन्हें साजिश की “कमजोर कड़ी” माना गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई।
हालांकि, सभी आरोपियों ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है और आरोपों से इनकार किया है।
प्रदीप शर्मा की भूमिका को लेकर क्या है दावा?
एनआईए के अनुसार, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा पर भी इस कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। एजेंसी का कहना है कि शर्मा और अन्य आरोपियों ने मिलकर पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने में भूमिका निभाई थी।
हालांकि, अदालत में अभी इन आरोपों की सुनवाई होगी और अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही आएगा।
अब अदालत में क्या होगा?
आरोप तय होने के बाद अब अभियोजन पक्ष अपने गवाह और सबूत पेश करेगा। इसके बाद बचाव पक्ष को जिरह का मौका मिलेगा।
आने वाले महीनों में अदालत इन अहम सवालों पर सुनवाई करेगी—
एंटीलिया के बाहर कार किसने खड़ी की?
मनसुख हिरेन की मौत आत्महत्या थी या हत्या?
क्या सचिन वाजे और अन्य आरोपी कथित साजिश का हिस्सा थे?
जांच एजेंसियों के डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत कितने मजबूत हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ट्रायल लंबा चल सकता है क्योंकि मामले में बड़ी संख्या में गवाह, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक दस्तावेज शामिल हैं।
नवी मुंबई पुलिस ने थाईलैंड से जुड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जानिए कैसे तुर्भे, चेंबूर, घाटकोपर और डोंबिवली तक फैला था 1.36 करोड़ रुपये का यह रैकेट।
महाराष्ट्र: नवी मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसके तार थाईलैंड से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से करीब 1.36 करोड़ रुपये कीमत का हाइड्रो गांजा, कोकीन और अन्य सामान बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल नवी मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि घाटकोपर, चेंबूर, डोंबिवली, मीरा रोड और तुर्भे तक फैला हुआ था।
पहली गिरफ्तारी की तस्वीर
कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?
पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 10 जुलाई को हुई, जब नवी मुंबई एंटी-नारकोटिक्स सेल को सूचना मिली कि तुर्भे के होटल Monday में ठहरे दो युवक ड्रग्स सप्लाई से जुड़े हैं। इसके बाद पुलिस ने होटल पर छापा मारकर तलोजा निवासी अब्दुल रऊफ खान और वाशी निवासी मिथुन मानकुरे को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से 648.5 ग्राम हाइड्रो गांजा और पांच ग्राम कोकीन बरामद की गई।
पूछताछ के दौरान पुलिस को मीरा रोड निवासी अयान राजकोटवाला का नाम मिला। अयान की गिरफ्तारी के बाद जांच चेंबूर तक पहुंची, जहां से गौरव चिंदारकर को पकड़ा गया। यहीं से पुलिस को पहली बार थाईलैंड कनेक्शन का पता चला।
थाईलैंड से मुंबई तक कैसे पहुंचता था ड्रग्स?
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी वृषांग भनुशाली है, जो फिलहाल थाईलैंड में रह रहा है। जांच में सामने आया है कि वह वहीं से हाइड्रो गांजा भारत भेजता था। भारत में उसके दो कथित सहयोगी—घाटकोपर निवासी नीरज शाह और डोंबिवली निवासी सुरेश भनुशाली—ड्रग्स की सप्लाई संभालते थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सप्लाई चेन कुछ इस तरह काम करती थी—
तुर्भे: 648.5 ग्राम हाइड्रो गांजा और 5 ग्राम कोकीन
मीरा रोड: 203 ग्राम हाइड्रो गांजा
डोंबिवली: 451.5 ग्राम हाइड्रो गांजा
घाटकोपर: 4.3 ग्राम हाइड्रो गांजा
12 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
पढ़े-लिखे युवा क्राइम में शामिल
इस मामले का एक चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में कुछ पढ़े-लिखे युवा भी शामिल हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और डिजिटल पेमेंट के जरिए यह नेटवर्क चलाया जा रहा था? फिलहाल जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।
ड्रग्स भारत में किस रास्ते से पहुंचा?
क्या एयर कार्गो या कुरियर नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ?
थाईलैंड में बैठा मास्टरमाइंड किन लोगों के संपर्क में था?
क्या मुंबई के दूसरे इलाकों में भी सप्लाई हो रही थी?
क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं?
नवी मुंबई पुलिस ने मुख्य आरोपी वृषांग भनुशाली के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
भिवंडी के बालाजी नगर में कोहिनूर बिल्डिंग हादसे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। देर रात इमारत कैसे ढही, मरम्मत का काम किसकी अनुमति से चल रहा था और अब जांच किस दिशा में बढ़ रही है, पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
महाराष्ट्र: थाने जिले के भिवंडी बालाजी नगर इलाके में गुरुवार देर रात हुए कोहिनूर बिल्डिंग हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। रात करीब 11 बजे के आसपास चार मंजिला इमारत का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत और बचाव कार्य पूरी रात चलता रहा और अब तक भी मलबे को हटाने का काम जारी है।
यह हादसा सिर्फ एक इमारत गिरने की घटना नहीं है, बल्कि इसके साथ कई ऐसे सवाल भी जुड़े हुए हैं जिनके जवाब अब प्रशासन, पुलिस और जांच एजेंसियां तलाश रही हैं।
हादसे वाली रात आखिर क्या हुआ था?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 8 बजे से ही इमारत के अंदर से दरारें पड़ने और दीवारों के टूटने जैसी आवाजें आने लगी थीं। कुछ परिवारों ने खतरे को देखते हुए अपने घर छोड़ दिए, लेकिन कई लोग और मजदूर अभी भी इमारत के अंदर मौजूद थे।
#Bhiwandi#BreakingNews A building the government itself had flagged as dangerous just collapsed in Bhiwandi, Maharashtra, mid repair, at 11:30pm on Thursday. The toll keeps rising, at least nine dead now, up from three earlier tonight, with several more feared trapped in the… pic.twitter.com/el3Z1Ok2PF
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात बढ़ने के साथ इमारत की हालत लगातार बिगड़ती गई और करीब 11 बजे के आसपास अचानक उसका एक बड़ा हिस्सा गिर गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग सबसे पहले बचाव कार्य में जुट गए। बाद में पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इमारत के अंदर मरम्मत का काम किसकी अनुमति से चल रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या मरम्मत शुरू करने से पहले किसी इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ की रिपोर्ट ली गई थी या नहीं।
इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था। जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर भी केंद्रित है कि इमारत के मालिक, ठेकेदार और स्थानीय प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभाईं या नहीं।
मालिक और प्रशासन दोनों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे से पहले इमारत की हालत लगातार खराब हो रही थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर इमारत कमजोर थी तो वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया।
जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या स्थानीय प्रशासन को पहले से खतरे की जानकारी थी। अगर शिकायतें पहले से मिली थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई और आखिर किन परिस्थितियों में लोग आखिरी समय तक उसी इमारत में रह रहे थे।
मालिक और ठेकेदार पर क्या आरोप हैं?
प्रारंभिक पुलिस जांच में कोहिनूर बिल्डिंग के मालिक बिलाल अबूबकर और मरम्मत कार्य से जुड़े ठेकेदार अशोक का नाम सामने आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि मरम्मत किसकी अनुमति से हो रही थी और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी।
कोहिनूर बिल्डिंग में कुल 48 फ्लैट थे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यहां किरायेदार परिवार, दिहाड़ी मजदूर और छोटे कारोबार से जुड़े लोग रहते थे। शुरुआती अनुमान के मुताबिक करीब 200 लोग इस इमारत से प्रभावित हुए हैं। अभी तक प्रशासन ने सभी परिवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
क्या हादसे की वजह अवैध मरम्मत बनी?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं बिना तकनीकी मंजूरी के किए जा रहे निर्माण कार्य ने इमारत की संरचना को और कमजोर तो नहीं कर दिया था।
फिलहाल अधिकारियों ने इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है, लेकिन जांच में मरम्मत से जुड़े दस्तावेजों और ठेकेदार की भूमिका की गहन पड़ताल की जा रही है।
क्या रहवासियों ने चंदा जुटाकर कराई थी मरम्मत?
स्थानीय लोगों का दावा है कि कोहिनूर बिल्डिंग की हालत लगातार खराब हो रही थी। उनके मुताबिक, इमारत में रहने वाले कई परिवारों ने आपस में चंदा इकट्ठा करके मरम्मत का काम शुरू कराया था। रहवासियों का कहना है कि उनके पास तुरंत दूसरी जगह जाने का कोई विकल्प नहीं था, इसलिए उन्होंने इमारत को रहने लायक बनाने की कोशिश की।
हालांकि, अभी तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि मरम्मत का काम किसी अधिकृत इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ की निगरानी में हो रहा था या नहीं। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि मरम्मत के लिए कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी या नहीं।
कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कई परिवार वर्षों से उसी इमारत में रह रहे थे और आर्थिक तंगी के कारण दूसरी जगह शिफ्ट होना उनके लिए आसान नहीं था।
“स्थानीय लोगों के अनुसार, मरम्मत के लिए रहवासियों ने चंदा इकट्ठा किया था, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि काम तकनीकी मंजूरी और सुरक्षा मानकों के तहत किया जा रहा था या नहीं।”
उस रात के दो घंटे अब जांच का सबसे बड़ा हिस्सा
हादसे से पहले रात 9 बजे से 11 बजे के बीच क्या हुआ, यह अब पूरी जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उस दौरान किसी ने पुलिस या नगर निगम को फोन किया था, क्या लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की गई थी और क्या प्रशासन को समय रहते खतरे की जानकारी मिल गई थी।
अगर इन दो घंटों की पूरी तस्वीर सामने आ जाती है, तो यह स्पष्ट हो सकता है कि हादसा सिर्फ एक दुर्घटना था या इसके पीछे लापरवाही भी शामिल थी।
भिवंडी हादसे के बाद पूरे शहर की नजर अब प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। स्थानीय लोगों के मन में अभी भी कई सवाल हैं और सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और मलबे को हटाने के साथ-साथ पूरे मामले की जांच भी जारी है।
कांदिवली में 17 साल की लड़की की हत्या के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी उसे गिफ्ट के बहाने जंगल ले गया था।
मुंबई: कांदिवली ईस्ट में 17 वर्षीय छात्रा की हत्या के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। समतानगर पुलिस के अनुसार, 22 वर्षीय आरोपी सूरज वाघमारे ने कथित तौर पर टीवी पर क्राइम शो देखकर हत्या की योजना बनाई थी। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने लड़की को “यूनिक गिफ्ट” देने के बहाने दामूनगर जंगल इलाके में बुलाया और वहां वारदात को अंजाम दिया।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और पुलिस हत्या की पूरी साजिश, घटनास्थल से मिले सबूतों और दोनों के रिश्ते के हर पहलू की जांच कर रही है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुंबई के कांदिवली ईस्ट स्थित समतानगर पुलिस थाना क्षेत्र का है। जंगल में गश्त के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को एक नाबालिग लड़की का शव मिला, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा। शुरुआती जांच के बाद मृतका की पहचान 17 वर्षीय सिद्धि विश्वकर्मा के रूप में हुई।
जांच में सामने आया कि सिद्धि और आरोपी सूरज वाघमारे पिछले करीब डेढ़ साल से एक-दूसरे को जानते थे।
दोस्ती से हत्या तक की टाइमलाइन
समय
क्या हुआ
डेढ़ साल पहले
गणपति मंडल में दोनों की मुलाकात हुई
बाद में
दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू हुए
पिछले कुछ महीनों में
शादी को लेकर विवाद बढ़ा
घटना वाले दिन
आरोपी ने लड़की को जंगल में बुलाया
जंगल में
आंखों पर पट्टी बांधने के बाद हमला
कुछ घंटे बाद
जंगल में शव बरामद हुआ
जांच के बाद
आरोपी सूरज वाघमारे गिरफ्तार
पुलिस जांच में हुआ खुलासा
पुलिस के अनुसार, आरोपी शादी को लेकर लड़की पर दबाव बना रहा था, लेकिन नाबालिग ने कथित तौर पर इससे इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने हत्या की योजना बनाई।
जांच अधिकारियों का दावा है कि आरोपी ने पहले से पूरी साजिश तैयार की थी। लड़की को एक खास तोहफा देने का झांसा देकर जंगल में बुलाया और उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी।
पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की।
जांच के दौरान पुलिस को शक है कि आरोपी ने टीवी पर प्रसारित क्राइम शो देखकर हत्या और सबूत मिटाने के तरीकों के बारे में जानकारी जुटाई थी।
हालांकि, यह जांच का हिस्सा है और पुलिस इस बात की पुष्टि करने के लिए आरोपी के मोबाइल फोन, इंटरनेट हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच कर रही है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी टीवी शो या फिल्म को सीधे तौर पर अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस फिलहाल आरोपी के इरादों और मानसिक स्थिति की भी जांच कर रही है।
जंगल क्यों चुना गया?
दामूनगर का जंगल इलाका अपेक्षाकृत सुनसान माना जाता है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपी ने ऐसी जगह इसलिए चुनी, जहां लोगों की आवाजाही कम हो और वारदात के बाद पहचान छिपाना आसान हो।
पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
BMC की 1.5 करोड़ रुपये की 6 नई Toyota Innova Crysta खरीद योजना पर विवाद शुरू हो गया है। जानिए वाहन खरीद प्रक्रिया, BMC का पक्ष, विपक्ष के सवाल और BEST से जुड़े मुद्दों की पूरी जानकारी।
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च कर 6 नई Toyota Innova Crysta गाड़ियां खरीदने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए इसे खर्च की प्राथमिकता से जुड़ा मुद्दा बताया है। वहीं बीजेपी ने कहा है कि वाहन बदलने का फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इस पर पहले चर्चा हो चुकी थी।
इस पूरे मामले में सवाल सिर्फ नई कारों की खरीद का नहीं है, बल्कि यह भी है कि BMC में सरकारी वाहनों की खरीद प्रक्रिया कैसे होती है और वाहन बदलने के क्या नियम हैं?
BMC ने 6 नई कारों का प्रस्ताव क्यों रखा?
BMC प्रशासन ने मौजूदा Mahindra Scorpio-N वाहनों की जगह 6 Toyota Innova Crysta गाड़ियां लेने का प्रस्ताव रखा है।
इन वाहनों का उपयोग प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारियों के लिए प्रस्तावित है:
उप महापौर
सदन नेता
विपक्ष नेता
स्थायी समिति अध्यक्ष
सुधार समिति अध्यक्ष
शिक्षा समिति अध्यक्ष
BMC का कहना है कि शहर में लंबे सफर, आधिकारिक बैठकों और निरीक्षण कार्यों के लिए बेहतर वाहन सुविधा की जरूरत होती है।
बीजेपी नेता गणेश खनकर ने भी यह सवाल उठाया कि राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अलग-अलग श्रेणी की गाड़ियां देने की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।
उनका कहना है कि सभी के लिए एक समान वाहन नीति होनी चाहिए।
आदित्य ठाकरे ने BEST का मुद्दा क्यों उठाया?
शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने BMC के इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए BEST और मुंबई के सार्वजनिक परिवहन का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि जब आम मुंबईकर BEST बसों और लोकल ट्रेन जैसी सेवाओं पर निर्भर हैं, तब जनप्रतिनिधियों को भी शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की स्थिति समझनी चाहिए।
BEST की मौजूदा चुनौतियां क्या हैं?
BEST मुंबई की महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन सेवा है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
बसों की संख्या और संचालन
यात्रियों की ओर से कई बार बसों की उपलब्धता, रूट और समय को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
बसों का रखरखाव
BEST बसों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
कुछ रिपोर्टों में:
खराब दरवाजे
बसों में पानी आने की शिकायत
रखरखाव संबंधी समस्याएं
जैसे मुद्दे सामने आए हैं।
आर्थिक चुनौतियां
BEST की वित्तीय स्थिति भी लंबे समय से चर्चा में रही है।
BMC द्वारा BEST को आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव और BEST के खर्चों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।
मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से तड़ीपार कर दिया है। जानिए किन इलाकों के आरोपी इस सूची में शामिल हैं और उन पर क्या आरोप हैं।
मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई शहर और उपनगरों की सीमा से तड़ीपार (Externment) कर दिया है। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, मारपीट, लूट, हथियारों के दम पर धमकाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे मामलों में शामिल रहे हैं।
पुलिस ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?
मुंबई पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों की गतिविधियों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में डर का माहौल बन गया था। कई लोग शिकायत दर्ज कराने से भी डर रहे थे। इसी वजह से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत इन अपराधियों के खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की गई।
पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी क्षेत्र) के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया।
मुंबई पुलिस ने साफ किया है कि अगर तड़ीपार किया गया कोई भी आरोपी आदेश का उल्लंघन करते हुए मुंबई शहर या उपनगरों में प्रवेश करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके इलाके में कोई तड़ीपार अपराधी दिखाई देता है या किसी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी मिलती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन 100 और 112 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
इस कार्रवाई का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और व्यापारियों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही, इलाके में जबरन वसूली, दादागिरी और हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
FAQ
सवाल: मुंबई पुलिस ने कितने अपराधियों को तड़ीपार किया है?
नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए तड़ीपार किया गया है।
सवाल: तड़ीपार कितने समय के लिए किया गया है?
सभी आरोपियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से बाहर रहने का आदेश दिया गया है।
सवाल: किन पुलिस स्टेशनों के आरोपी शामिल हैं?
कस्तूरबा मार्ग, समतानगर और दहिसर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के आरोपी शामिल हैं।
सवाल: अगर तड़ीपार आरोपी मुंबई में दिखे तो क्या करें?
तुरंत 100, 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें।
मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। जानिए किन इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और स्कूल बसों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
मुंबई: कुछ दिनों की राहत के बाद मानसून एक बार फिर मुंबई और उसके आसपास के इलाकों पर मेहरबान होता दिखाई दे रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और ठाणे के लिए येलो अलर्ट, जबकि पालघर और रायगढ़ के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
हालांकि, इस बार सबसे बड़ा सवाल सिर्फ बारिश का नहीं है। असली चिंता उन लाखों लोगों की है जो हर सुबह लोकल ट्रेन, बस, ऑटो और निजी वाहनों से ऑफिस और स्कूल पहुंचते हैं। अगर शुक्रवार सुबह पीक आवर के दौरान भारी बारिश हुई, तो क्या एक बार फिर मुंबई की रफ्तार थम सकती है?
मानसून फिर क्यों बना चिंता की वजह?
जुलाई के आखिरी सप्ताह में कुछ दिनों की राहत के बाद एक बार फिर अरब सागर की ओर से नमी बढ़ी है। मौसम विभाग ने मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है।
मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पालघर और रायगढ़ के कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है।
मौसम विभाग का अलर्ट जारी होते ही ज्यादातर खबरें सिर्फ बारिश के आंकड़ों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन असली असर इन लोगों पर पड़ता है—
ऑफिस जाने वाले कर्मचारी
सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच मुंबई की सड़कें और लोकल ट्रेनें सबसे ज्यादा व्यस्त रहती हैं। अगर इसी समय भारी बारिश होती है, तो लाखों लोगों का सफर प्रभावित हो सकता है।
स्कूल और कॉलेज के छात्र
स्कूल बसों, ऑटो और निजी वाहनों से स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है। देर रात छुट्टी की घोषणा होने से माता-पिता भी असमंजस में रहते हैं।
लोकल ट्रेन यात्री
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों से रोजाना करीब 70 से 75 लाख यात्री सफर करते हैं। थोड़ी देर की बारिश भी ट्रेनों की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।
डिलीवरी एजेंट और कैब चालक
बारिश बढ़ने पर सड़क जाम, पानी भरने और लंबी दूरी तय करने की वजह से डिलीवरी और कैब सेवाओं पर असर पड़ता है।
इन 10 इलाकों पर सबसे ज्यादा नजर रखने की जरूरत
मुंबई में हर साल कुछ इलाके ऐसे हैं जहां सबसे पहले जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है।
1. सायन सर्कल
सायन मुंबई के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। भारी बारिश के दौरान यहां पानी जमा होने की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं।
2. किंग्स सर्कल
हाई टाइड और तेज बारिश के दौरान इस इलाके में जलभराव बढ़ सकता है।
3. कुर्ला
मध्य रेलवे के यात्रियों के लिए कुर्ला स्टेशन बेहद महत्वपूर्ण है। यहां पानी भरने से लाखों यात्रियों पर असर पड़ सकता है।
4. चेंबूर
चेंबूर और आसपास के इलाकों में बारिश के दौरान ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
5. अंधेरी सबवे
अंधेरी सबवे में पानी भरने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
6. मिलन सबवे (सांताक्रूज)
तेज बारिश के दौरान यहां वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
7. दादर टीटी
दादर मुंबई का प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब है। यहां बारिश का असर पूरे शहर पर दिखाई देता है।
8. भांडुप
पूर्वी उपनगरों के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या देखी जाती है।
9. कल्याण के निचले इलाके
कल्याण और डोंबिवली के कई इलाकों में भारी बारिश के दौरान पानी भरने की आशंका रहती है।
10. वसई-विरार बेल्ट
पिछले कुछ वर्षों में वसई-विरार क्षेत्र में जलभराव के कारण रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है।
सुबह 8 बजे से 11 बजे का समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच का समय सबसे संवेदनशील माना जाता है।
अगर इसी समय भारी बारिश हुई, तो—
लोकल ट्रेनें देरी से चल सकती हैं।
बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
स्कूल बसों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं।
वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लंबा जाम लग सकता है।
एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लग सकता है।
प्रशासन को पहले से स्पष्ट नीति बनाने की मांग
ऐन मौके पर सिर्फ बारिश, ट्रैफिक और लोकल ट्रेनों की बात होती है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या देर रात होने वाली घोषणाएं हैं।
अगर रात 10 बजे के बाद स्कूल बंद करने का फैसला लिया जाता है, तो—
माता-पिता असमंजस में पड़ जाते हैं।
स्कूल बस ऑपरेटरों की योजना प्रभावित होती है।
कामकाजी माता-पिता को छुट्टी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
बच्चों को सुबह जल्दी उठकर इंतजार करना पड़ता है।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई अभिभावक मॉनसून के लिए पहले से स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।
हाई टाइड और बारिश साथ आई तो क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई में जलभराव का सबसे बड़ा कारण सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि हाई टाइड और ड्रेनेज सिस्टम पर बढ़ता दबाव भी है।
अगर भारी बारिश और हाई टाइड एक ही समय पर आते हैं, तो—
सायन, कुर्ला और चेंबूर जैसे इलाकों में पानी भर सकता है।
सबवे बंद किए जा सकते हैं।
ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ सकता है।
लोकल ट्रेनों की गति कम हो सकती है।
लोकल ट्रेन और एयरपोर्ट यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट
फिलहाल पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे और हार्बर लाइन पर सेवाएं सामान्य चल रही हैं, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए यात्रियों को घर से निकलने से पहले रेलवे और ट्रैफिक पुलिस के अपडेट जरूर देखने चाहिए।
एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को कम से कम एक घंटा अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी जाती है।
अगर आप शुक्रवार सुबह घर से निकल रहे हैं, तो ये 10 काम जरूर करें
✅ मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें।
✅ पावर बैंक साथ रखें।
✅ लोकल ट्रेन का लाइव स्टेटस चेक करें।
✅ ऑफिस और स्कूल की एडवाइजरी पढ़ लें।
✅ वाटरप्रूफ बैग का इस्तेमाल करें।
✅ वैकल्पिक रास्ता पहले से तय कर लें।
✅ जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
✅ छाता और रेनकोट साथ रखें।
✅ ट्रैफिक अपडेट देखते रहें।
✅ किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें।
क्या शुक्रवार को स्कूल बंद हो सकते हैं?
फिलहाल मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में स्कूल बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। हालांकि, मौसम की स्थिति खराब होने पर स्थानीय प्रशासन आखिरी समय में फैसला ले सकता है।
माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे सुबह स्कूल, बीएमसी और मौसम विभाग की वेबसाइट जरूर देखें।
मुंबई के 20 सबसे संवेदनशील सबवे और सड़कें, जहां बारिश के दौरान सबसे पहले बढ़ती है परेशानी
मुंबई में हर साल मानसून के दौरान कुछ ऐसे सबवे और सड़कें हैं, जहां थोड़ी देर की तेज बारिश भी ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर देती है। बीएमसी ने 2026 के मानसून सीजन के लिए शहर में सैकड़ों जलभराव वाले स्थानों की पहचान की है। इनमें से कई जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी खतरा बना हुआ है।
बीएमसी ने मानसून से पहले शहर के जलभराव वाले 496 स्थानों की पहचान की थी। इनमें से कई जगहों पर पंप और जलनिकासी व्यवस्था तैनात की गई है।
बारिश के दौरान बीएमसी कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर, जिन्हें मोबाइल में सेव कर लेना चाहिए
भारी बारिश के दौरान सिर्फ मौसम विभाग की चेतावनी जानना काफी नहीं है। अगर आपके इलाके में पेड़ गिर जाए, सड़क पर पानी भर जाए या कोई आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो ये नंबर आपके काम आ सकते हैं।
बीएमसी ने मानसून से पहले शहर के जलभराव वाले इलाकों में सैकड़ों पंप लगाए हैं और हजारों कर्मचारियों को तैनात किया है। इसके अलावा, कई संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद, शहर में अब भी 29 ऐसे स्थान हैं, जहां जलनिकासी से जुड़े काम पूरी तरह पूरे नहीं हो पाए हैं।
सिर्फ बारिश नहीं, मुंबई के सामने असली चुनौती क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई में जलभराव की समस्या सिर्फ भारी बारिश की वजह से नहीं होती। हाई टाइड, पुराना ड्रेनेज सिस्टम, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और निचले इलाकों में बढ़ता दबाव भी इसके बड़े कारण हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में बाढ़ से निपटने के लिए 13,000 करोड़ रुपये की एक नई योजना की घोषणा की है।
31 जुलाई को हाई टाइड का समय क्या है और इसका मुंबई पर क्या असर पड़ सकता है?
मुंबई में भारी बारिश के दौरान सिर्फ बादल ही परेशानी की वजह नहीं बनते, बल्कि हाई टाइड (समुद्र में ऊंची लहरें) भी जलभराव का बड़ा कारण बनती हैं। अगर तेज बारिश और हाई टाइड एक ही समय पर आती है, तो निचले इलाकों में पानी निकलने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
31 जुलाई को समुद्र में दो बार हाई टाइड और दो बार लो टाइड आने की संभावना है। ऐसे समय में बीएमसी और आपदा प्रबंधन विभाग विशेष निगरानी रख रहे हैं।
हाई टाइड के दौरान किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है?
वर्ली सी फेस
मरीन ड्राइव
हाजी अली
सायन
किंग्स सर्कल
दादर
कुर्ला
चेंबूर
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी)
हाई टाइड के दौरान लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
समुद्र किनारे जाने से बचें।
जलभराव वाले इलाकों से होकर यात्रा न करें।
ट्रैफिक पुलिस और बीएमसी के अलर्ट पर नजर रखें।
जरूरत न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें।
नोट: हाई टाइड का सटीक समय हर दिन बदलता है। ताजा जानकारी के लिए मौसम विभाग और बीएमसी की वेबसाइट देखें।
मुंबई के कौन-कौन से स्कूल और इलाके हर साल बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं?
बारिश का सबसे ज्यादा असर सिर्फ ट्रैफिक पर नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों पर भी पड़ता है। मुंबई के कई स्कूल ऐसे इलाकों में हैं, जहां हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है।
ऐसे इलाके जहां अभिभावकों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है
सायन
कुर्ला
चेंबूर
दादर
अंधेरी ईस्ट
सांताक्रूज
भांडुप
मुलुंड
वसई
विरार
माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
स्कूल का आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप जरूर चेक करें।
बच्चों के बैग में वाटरप्रूफ कवर रखें।
स्कूल बस की लाइव लोकेशन पर नजर रखें।
बच्चों को खुले नालों और पानी भरी सड़कों से दूर रखें।
आपातकालीन संपर्क नंबर बच्चों के बैग में रखें।
सबसे बड़ी समस्या क्या है?
अक्सर स्कूल बंद करने की घोषणा देर रात होती है। इससे कामकाजी माता-पिता, स्कूल बस ऑपरेटर और छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई अभिभावक पहले से स्पष्ट मॉनसून नीति की मांग कर रहे हैं।
लोकल ट्रेन के कौन-से सेक्शन बारिश के दौरान सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं?
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें हर दिन करीब 70 से 75 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। लेकिन भारी बारिश के दौरान कुछ रेलवे सेक्शन सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
चेंबूर में स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत के एक महीने बाद बीएमसी ने थर्ड-पार्टी जांच का फैसला लिया है। आंतरिक रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद अब जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।
मुंबई: चेंबूर में 30 जून को स्कूल बस पर पेड़ गिरने से 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई थी। घटना के एक महीने बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मामले में स्वतंत्र (थर्ड-पार्टी) जांच कराने का फैसला लिया है, क्योंकि उसकी आंतरिक रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
एक झटके में उजड़ गया परिवार
30 जून की दोपहर चेंबूर के डायमंड गार्डन इलाके में बच्चे स्कूल से घर लौट रहे थे। इसी दौरान करीब 70 साल पुराना पीपल का पेड़ अचानक स्कूल बस पर गिर गया। हादसे में 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे घायल हो गए।
इस हादसे ने पूरे मुंबई को झकझोर दिया। विहान के परिवार का कहना है कि सिर्फ मुआवजा देने से उनका बेटा वापस नहीं आएगा, बल्कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
BMC की रिपोर्ट पर क्यों मचा बवाल?
हादसे के बाद बीएमसी ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सड़क और उद्यान विभाग को पहली नजर में जिम्मेदार नहीं माना, लेकिन नाले के निर्माण का काम करने वाले ठेकेदार और सुपरवाइजिंग कंसल्टेंट पर कुल 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की।
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि जब पेड़ सार्वजनिक सड़क पर गिरा और एक बच्चे की जान चली गई, तो किसी अधिकारी की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई।
अब होगी थर्ड-पार्टी जांच
विवाद बढ़ने के बाद बीएमसी ने अब पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने का फैसला लिया है। यह जांच किसी बाहरी एजेंसी से कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसे के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था।
मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने भी आंतरिक रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि केवल ठेकेदार पर जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है।
क्या पहले से था खतरे का अंदेशा?
कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि पेड़ की जड़ों को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी। मिली जानकारी के मुताबिक, इलाके में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान पेड़ की जड़ों पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की गई थी।
हालांकि, बीएमसी की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि पेड़ के अंदर सड़न और जड़ों के कमजोर होने की वजह से यह हादसा हुआ।
बीएमसी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 28 जून से 5 जुलाई के बीच मुंबई में पेड़ और शाखाएं गिरने की 1,158 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसके बाद शहर में पेड़ों की सुरक्षा और मॉनसून से पहले होने वाली जांच पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
विहान की मौत के बाद क्या बदलेगा?
थर्ड-पार्टी जांच से अब इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है—
क्या निर्माण कार्य ने पेड़ की जड़ों को नुकसान पहुंचाया था?
क्या अधिकारियों को पहले से खतरे की जानकारी थी?
क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए नई नीति बनेगी?
क्या किसी अधिकारी या ठेकेदार पर आपराधिक कार्रवाई होगी?
फिलहाल, विहान का परिवार और स्थानीय लोग इसी इंतजार में हैं कि इस हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी।