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  • मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के मालवणी में धारदार हथियार से पांच लोगों पर हमला। 16 वर्षीय किशोर की मौत और अन्य लोगों के घायल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित मालवणी इलाके में शुक्रवार को धारदार हथियार से लगातार कई लोगों पर हमले की घटना सामने आई। पुलिस के अनुसार, हमले में पांच लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें 16 वर्षीय एक किशोर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हमले के पीछे की वजह की जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान आरोपी ने बिना किसी स्पष्ट उकसावे के लोगों पर चाकू से वार किए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    पहले पानी मांगा, फिर किशोर पर किया हमला

    घटना से जुड़े शुरुआती घटनाक्रम में सामने आया है कि शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे एक युवक न्यू कलेक्टर कंपाउंड में एक घर के दरवाजे पर पहुंचा और पानी मांगा। घर के 14 वर्षीय लड़के ने उसे पानी दिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से वार कर दिया।

    घायल किशोर को तत्काल कांदिवली के भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (शताब्दी) अस्पताल ले जाया गया। उसके गले पर करीब 15 टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई और शुरुआती स्थिति में उसकी हालत स्थिर बताई गई थी।

    इसके बाद आरोपी के दोपहर में दोबारा न्यू कलेक्टर कंपाउंड के प्लॉट नंबर 35 और गेट नंबर 7 के आसपास फिर हंगामा खड़ा कर दिया। वहां उसने एक अन्य युवक पर धारदार हथियार से हमला किया। इस दौरान आसपास मौजूद कुछ अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।

    हमले में 16 वर्षीय किशोर की मौत

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में पांच लोगों पर चाकू से हमला हुआ। इनमें 16 वर्षीय एक किशोर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है।

    स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा

    हमले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपी का पीछा किया और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है।

    आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर मुंबई में लोगों को निशाना बनाने के पीछे बदले की बात कही है। हालांकि इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और हमले का वास्तविक मकसद अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।

    “बंगाली” होने की पुष्टि नहीं

    घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आरोपी को “बंगाली” बताए जाने की बात सामने आई, लेकिन उपलब्ध पुलिस-सूत्र आधारित जानकारी में आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है। उसकी पहचान या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर उसे “बंगाली” कहा जा सके।

    मालवणी पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस आरोपी की गतिविधियों, हमले के क्रम और उसके कथित मकसद की पड़ताल कर रही है। हमले में घायल लोगों की स्थिति तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी जांच के साथ स्पष्ट होगी।

  • Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।

    पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।

    चाकण MIDC में 3 सितंबर को क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।

    इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।

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    पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर

    पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।

    कौन-कौन सी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ?

    मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।

    किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

    मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।

    इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।

    Drone को लेकर भी कार्रवाई का सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।

    फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।

    चाकण में पहले से Traffic का बड़ा दबाव

    चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।

    सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

    17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।

    यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।

    Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।

    इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।

    इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।

    अब सवाल केवल एक Reel का नहीं

    पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।

  • SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Bangladesh भेजने का आरोप, Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा

    SIR में वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद Sahida Fakir को Mumbai से Bangladesh भेजने के आरोप पर Supreme Court ने Centre से जवाब मांगा। जानिए पूरा मामला।

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की Sahida Fakir को मुंबई से Bangladesh भेजे जाने के मामले में Supreme Court ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। Sahida के बेटे Sahin Fakir ने अदालत में याचिका दाखिल कर अपनी मां को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।

    Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V. Mohana की तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से Senior Advocate S. Muralidhar पेश हुए। मामला Sahin Fakir v. Union of India & Ors., WP(Crl) No. 372/2026 के रूप में सामने आया है।

    याचिका में Sahida Fakir को भारतीय नागरिक बताया गया है। उनके बेटे के अनुसार उनका स्थायी संबंध उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के Gobindapur से है। परिवार का कहना है कि उनके दादा Badshah Gazi का नाम 1952 की मतदाता सूची में और माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं।

    Sahida करीब 20 साल पहले अपने पति के साथ काम की तलाश में मुंबई आई थीं और यहां घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। याचिका के अनुसार 19 जुलाई 2026 को कुछ लोग, जिन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें मुंबई में अपने साथ ले गए। उन्हें Chembur के एक holding centre में रखा गया और उनका Aadhaar कार्ड तथा मोबाइल फोन भी कथित तौर पर ले लिया गया।

    परिवार का आरोप है कि Sahida को 100 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और इस दौरान उन्हें किसी Judicial Magistrate के सामने पेश नहीं किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि उन्हें हिरासत के आधार की जानकारी और परिवार से संपर्क का प्रभावी अवसर नहीं मिला।

    इसके बाद Sahida को Border Security Force (BSF) को सौंपे जाने और करीब 20 अन्य लोगों के साथ उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की ओर ले जाकर Bangladesh सीमा के पार भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद Sahida ने Bangladesh में अपनी मौजूदगी की जानकारी परिवार तक पहुंचाई और फिलहाल अस्थायी मानवीय आश्रय में रह रही हैं।

    SIR में नाम हटने का मामला क्या है?

    Sahida के मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर है। याचिका के अनुसार Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया और इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील लंबित है।

    परिवार का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त होने का फैसला नहीं है। Supreme Court ने भी 17 जुलाई 2026 को West Bengal SIR से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया था कि electoral roll से नाम हटने का मतलब अपने आप नागरिकता खत्म होना नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार Election Commission के पास नहीं है।

    यही बिंदु Sahida Fakir की याचिका में भी महत्वपूर्ण है। याचिका में कहा गया है कि उनकी नागरिकता पर अंतिम निर्णय हुए बिना और SIR से नाम हटाने के खिलाफ उनकी अपील लंबित रहते हुए उन्हें Bangladesh भेज दिया गया।

    परिवार ने कौन से दस्तावेज बताए?

    याचिका में Sahida की भारतीय पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के समर्थन में कई दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। इनमें पुराने electoral records के अलावा पहचान और नागरिक दस्तावेज शामिल हैं।

    पहले सामने आए दस्तावेजों में 2008 का voter identity card, 1988 का birth certificate, school certificate और Gobindapur में जमीन से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन दस्तावेजों को अधिकारियों के सामने रखा गया था।

    हालांकि, इन दस्तावेजों का उल्लेख याचिका और परिवार के दावों के संदर्भ में है। Supreme Court ने अभी Sahida की नागरिकता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

    याचिका में deportation प्रक्रिया पर भी सवाल

    Sahida के बेटे की याचिका केवल उनकी मां को वापस लाने तक सीमित नहीं है। इसमें 2 मई 2025 को जारी उस Standard Operating Procedure (SOP) को भी चुनौती दी गई है, जो कथित अवैध Bangladeshi nationals और Rohingya के deportation की प्रक्रिया से संबंधित है।

    याचिका में Immigration and Foreigners Order, 2025 के कुछ प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी व्यक्ति को विदेशी या अवैध प्रवासी मानकर देश से बाहर भेजने से पहले उसकी nationality की उचित verification और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

    याचिका में विशेष रूप से SOP के Para 9(iv) और Immigration and Foreigners Order, 2025 के Para 12(4)(C) के बीच प्रक्रिया संबंधी अंतर का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि Sahida के मामले में nationality verification और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    Supreme Court ने अभी क्या आदेश दिया है?

    इस स्तर पर Supreme Court ने केवल केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अभी यह घोषित नहीं किया है कि Sahida भारतीय नागरिक हैं, उनका Bangladesh भेजा जाना अवैध था या उन्हें तत्काल भारत वापस लाने का अंतिम आदेश दिया गया है।

    अदालत के सामने फिलहाल याचिकाकर्ता के आरोप, Sahida की कथित हिरासत और सीमा पार भेजे जाने की परिस्थितियां तथा nationality verification से जुड़े कानूनी सवाल हैं। केंद्र सरकार का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

    SIR से जुड़े मामलों में पहले भी Supreme Court ने उठाए सवाल

    Sahida Fakir का मामला ऐसे समय Supreme Court पहुंचा है जब West Bengal में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं। 25 अगस्त 2026 को अदालत को बताया गया था कि SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें उन लोगों की थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और जिन्होंने नाम बहाल करने की मांग की थी।

    Supreme Court पहले ही यह अंतर स्पष्ट कर चुका है कि electoral roll में नाम होना या हटना और किसी व्यक्ति की citizenship का अंतिम निर्धारण दो अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। Sahida Fakir मामले में अब यही सवाल और गंभीर रूप से सामने आया है कि किसी व्यक्ति की nationality पर विवाद होने की स्थिति में उसे देश से बाहर भेजने से पहले कौन-सी verification और procedural safeguards लागू होंगे।

    अब केंद्र के जवाब पर नजर

    Supreme Court के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को Sahida Fakir की हिरासत, nationality verification, Bangladesh भेजे जाने की प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिका में उठाए गए सवालों पर आगे किस तरह की सुनवाई और राहत पर विचार किया जाना है।

    फिलहाल Sahida Fakir की वापसी की मांग Supreme Court के सामने लंबित है और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।

  • कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में NCR के बाद दस्तावेज और डेवलपर बदलाव पर सवाल

    कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में NCR के बाद दस्तावेज और डेवलपर बदलाव पर सवाल

    कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में धमकी के आरोप पर NCR दर्ज हुआ। पुराने SRA रिकॉर्ड, डेवलपर बदलाव और Annexure-II पर उठे सवालों की पड़ताल।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम के गांधी नगर क्षेत्र की SRA योजना को लेकर विवाद अब धमकी के आरोप और पुलिस NCR तक पहुंच गया है। समाजसेवक महबूब ए. शाह को कथित तौर पर जान से मरवा देने की धमकी दिए जाने के मामले में 9 सितंबर 2026 को सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज किया गया है। विवाद की पृष्ठभूमि में SRA योजना में कथित दस्तावेजी अनियमितताओं और पात्रता के आधार पर पुनर्वसन फ्लैट मिलने से जुड़े गंभीर सवाल हैं।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गांधी नगर की संबंधित SRA योजना के पुराने और बाद के सार्वजनिक रिकॉर्ड में डेवलपर तथा CTS विवरण में अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध SRA project record में Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) के लिए 2 मई 2016 की LOI दर्ज है और उस समय डेवलपर के रूप में M/s Hari Om Developer का नाम सामने आता है। वहीं 2025 के आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम दर्ज है।

    यही बदलाव अब इस पूरे विवाद का एक अहम दस्तावेजी सवाल बन गया है कि डेवलपर में यह परिवर्तन कब, किस प्रक्रिया के तहत और किस SRA आदेश के आधार पर हुआ।

    गांधी नगर SRA योजना का पुराना रिकॉर्ड क्या बताता है?

    SRA project record के अनुसार Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) का proposal number R-S/MHADA&PVT/0002/20060509 दर्ज है। रिकॉर्ड में योजना को Active status के साथ दिखाया गया है और 2 मई 2016 की LOI का reference SRA/ENG/1406/RS/STGL/PL/LOI दिया गया है। इस entry में M/s Hari Om Developer को developer और Shri Vivek Bhole Architect Pvt. Ltd./Neo Modern को architect के रूप में दर्ज किया गया है।

    बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में इसी नाम से जुड़ी गांधी नगर SRA योजना के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। 13 जून 2025 के Apex Grievance Redressal Committee के cause list record में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) और Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. बनाम CEO/SRA, Competent Authority-7/SRA तथा Assistant Registrar/SRA के बीच Appeal (L) No. 07 of 2025 दर्ज है।

    इससे यह स्पष्ट है कि गांधी नगर SRA योजना से जुड़ा विवाद केवल स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रहा है। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इस न्यायिक कार्यवाही को अपने आप में भ्रष्टाचार का मामला नहीं कहा जा सकता

    डेवलपर और CTS रिकॉर्ड में अंतर क्यों?

    पुराने SRA record में योजना से जुड़े कई CTS numbers दर्ज हैं, जिनमें CTS 486(Pt), 487 से 490, 492 से 494, 495(Pt), 497, 498(Pt), 499, 500 से 509, 512, 513(Pt), 514, 515, 518(Pt), 536, 538, 539, 543(Pt) और 738(Pt) शामिल हैं।

    वहीं 2025 के न्यायिक रिकॉर्ड में CTS 98(Pt), 737(Pt), 738(Pt), 739, 740, 741, 755(Pt), 756(Pt), 757(Pt), 759(Pt), 761, 762 और 763 का उल्लेख मिलता है।

    CTS विवरण में यह अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। SRA योजना में संशोधन, जमीन के पुनर्गठन, CTS बदलाव, अलग हिस्सों के समावेश या revised proposal जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन इन बदलावों का आधिकारिक कारण SRA के संबंधित आदेशों और revised records से स्पष्ट होना जरूरी है।

    यही वह बिंदु है जहां गांधी नगर SRA विवाद में दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

    फर्जी दस्तावेजों के आरोप की जांच कैसे होगी?

    मामले में स्थानीय रहवासियों और समाजसेवक महबूब ए. शाह की ओर से आरोप लगाया गया है कि गरीब परिवारों को SRA योजना में फ्लैट दिलाने के भरोसे के साथ कथित तौर पर allotment letters, आदेश प्रतियां, Collector office से जुड़े दस्तावेज, सक्षम प्राधिकारी के पत्र, society NOC, बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड दिखाए जा रहे हैं।

    इन दस्तावेजों की वास्तविकता का फैसला आरोप के आधार पर नहीं किया जा सकता। प्रत्येक दस्तावेज को उस विभाग के मूल रिकॉर्ड से मिलाना होगा जिसने उसे जारी किया है।

    SRA मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज Annexure-II है। SRA की व्यवस्था में survey और document verification के बाद eligibility तय करने की प्रक्रिया Annexure-II से जुड़ी है। इसलिए किसी व्यक्ति के पास कोई पत्र या अन्य supporting document होना अपने आप में SRA rehabilitation eligibility का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    किसी दावे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए survey record, Annexure-II, eligibility determination, Competent Authority record और allotment से जुड़े दस्तावेजों के बीच समानता देखना जरूरी होगा।

    धमकी के आरोप के बाद पुलिस NCR

    एक प्रकाशित खबर को लेकर समाजसेवक महबूब ए. शाह और सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के बीच विवाद सामने आया। आरोप है कि चौधरी की ओर से गाली-गलौज के साथ महबूब ए. शाह को जान से मरवा देने की धमकी दी गई।

    महबूब ए. शाह ने इसकी सूचना कांदिवली पुलिस स्टेशन को दी। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 9 सितंबर 2026 को शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज की गई। NCR में BNS 351(3) और 352 से संबंधित प्रावधान दर्ज किए गए हैं।

    SRA योजना में अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    गांधी नगर मामले में अब केवल यह सवाल नहीं है कि महबूब ए. शाह को धमकी क्यों दी गई। उससे बड़ा सवाल यह है कि जिस SRA योजना को लेकर दस्तावेजों और पात्रता पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी आधिकारिक रिकॉर्ड श्रृंखला क्या कहती है।

    2016 के उपलब्ध SRA record में Hari Om Developer का नाम है, जबकि 2025 के न्यायिक record में Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। इसी तरह पुराने और बाद के रिकॉर्ड में CTS विवरण भी अलग दिखाई देते हैं।

    इसलिए संबंधित दस्तावेजों से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि developer में बदलाव हुआ था या scheme structure में कोई अन्य संशोधन हुआ, वह कब हुआ, किस authority ने मंजूर किया और उसके पीछे कौन-सा official order है।

    रहवासियों पर क्या पड़ सकता है असर?

    SRA योजना में eligibility या supporting documents को लेकर विवाद लंबा खिंचने पर वास्तविक पात्र परिवारों के rehabilitation process पर असर पड़ सकता है। दस्तावेजों की जांच में किसी दावे में कमी मिलने पर संबंधित व्यक्ति की पात्रता पर सवाल उठ सकता है, जबकि genuine beneficiaries के लिए भी redevelopment और rehabilitation की प्रक्रिया विवादित होने से लंबी हो सकती है।

    इसी कारण SRA योजना में survey record और Annexure-II से लेकर allotment तथा rehabilitation status तक दस्तावेजों की स्पष्टता महत्वपूर्ण होती है।

    अब आगे क्या?

    गांधी नगर SRA विवाद में अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच है। विशेष रूप से 2016 की LOI, उसके बाद के revised orders, developer appointment या change से जुड़े दस्तावेज, latest Annexure-II, Competent Authority के रिकॉर्ड और Appeal (L) No. 07 of 2025 से संबंधित आदेश इस पूरे मामले की स्थिति को अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।

    साथ ही कथित दस्तावेजों को उनके संबंधित सरकारी विभागों के मूल रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी होगा। जब तक यह verification पूरा नहीं होता, फर्जी दस्तावेजों के आरोप को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    गांधी नगर SRA योजना में उठे ये सवाल अब केवल एक NCR तक सीमित नहीं हैं। असली जवाब उन सरकारी रिकॉर्ड में छिपा है जो यह बताएंगे कि योजना में पात्रता, सोसाइटी की भूमिका, डेवलपर की स्थिति और पुनर्वसन से जुड़े दस्तावेज वास्तव में एक-दूसरे से कितने मेल खाते हैं।

  • Crime & Corruption Control Association और वन विभाग की कार्रवाई, अवैध पेड़ कटाई का खुलासा

    Crime & Corruption Control Association और वन विभाग की कार्रवाई, अवैध पेड़ कटाई का खुलासा

    Crime & Corruption Control Association और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 61 लकड़ी की बल्लियां जब्त हुईं। तीन आरोपियों को तीन दिन की वन हिरासत मिली।

    महाराष्ट्र/चालीसगांव : अवैध पेड़ कटाई और जंगल से लकड़ी निकालने के मामले में Crime & Corruption Control Association और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की है। कार्रवाई में सागौन और अंजन की कुल 61 लकड़ी की बल्लियां, एक ट्रैक्टर और ट्रॉली जब्त की गई। तीन आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद तीन दिन की वन हिरासत मिली है।

    जानकारी के अनुसार, Crime & Corruption Control Association को संरक्षित वन क्षेत्र में जीवित पेड़ों की कथित अवैध कटाई की सूचना मिली थी। संगठन ने करीब पांच दिन तक जानकारी का सत्यापन और निगरानी करने के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों के साथ कार्रवाई की।

    पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोकुल आनंदा गोपाल, उम्र 40 वर्ष, अरविंद विजय जाधव, उम्र 20 वर्ष और निलेश एकनाथ राठोड, उम्र 25 वर्ष, सभी निवासी बोद्रा के रूप में हुई है।

    कार्रवाई में 4 सागौन और 57 अंजन की बल्लियां जब्त की गईं। इसके अलावा ट्रैक्टर MH 19 CV 4603 और ट्रॉली MH 19 E 2685 भी जब्त की गई है।

    हालांकि 61 बल्लियों का मतलब 61 कटे हुए पेड़ नहीं है। वास्तविक रूप से कितने जीवित पेड़ काटे गए, यह कटाई स्थल की जांच, पेड़ों के ठूंठ और जब्त लकड़ी के माप से स्पष्ट होगा।

    मामले में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26(1)(f)(d), 41 और 42 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303(2) के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। लागू धाराओं की अंतिम स्थिति एफआईआर और आधिकारिक वन अपराध रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।

    जांच का अगला फोकस लकड़ी की पूरी कड़ी पर

    Crime & Corruption Control Association के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने जांच को केवल तीन आरोपियों तक सीमित नहीं रखने की मांग की है। संगठन के अनुसार, अभयारण्य से काटी गई लकड़ी को गन्ना कटाई मजदूरों के मुकादमों को बेचने की जानकारी मिली है। इसलिए कथित खरीदारों, लकड़ी की बिक्री, भुगतान और परिवहन की कड़ी की जांच की मांग की गई है।

    संगठन ने छह महीने के CDR और संबंधित मोबाइल संचार तथा WhatsApp बातचीत की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की मांग भी की है। साथ ही क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों या कर्मचारियों की संभावित भूमिका की जांच की बात कही गई है। फिलहाल किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं है।

    अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच पर भी जोर दिया गया है। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ मामलों में अधूरे दस्तावेजों के कारण आरोपियों को कम अवधि की वन हिरासत के बाद जमानत मिल गई थी। इस मामले में जब्ती पंचनामा, लकड़ी का माप, कटाई स्थल, वाहन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे।

    वन संरक्षण के लिहाज से मामला क्यों अहम

    गौताला-औट्रामघाट वन्यजीव अभयारण्य 260.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला संरक्षित वन क्षेत्र है। 2026 के अध्ययनों में यहां तेंदुए के आवास, वन क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बाघों की संभावित वापसी से जुड़े पहलुओं को महत्वपूर्ण बताया गया है।

    गौताला क्षेत्र में पहले भी बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई का मामला सामने आ चुका है। 2021 में पटनेदेवी क्षेत्र में जांच के दौरान 479 चंदन के पेड़ों की कटाई और 593 अन्य पेड़ों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। उस मामले में तीन वन कर्मचारियों के निलंबन और विभागीय जांच का उल्लेख किया गया था।

    हालांकि पुराने मामले को मौजूदा कार्रवाई से जोड़ने का कोई स्वतंत्र आधार सामने नहीं आया है।

    अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब्त लकड़ी वास्तव में कितने जीवित पेड़ों से आई, कटाई का सटीक स्थान क्या था और लकड़ी कहां ले जाई जा रही थी। यदि जांच खरीदारों, भुगतान, वाहन और मोबाइल संपर्कों तक पहुंचती है, तो इससे अवैध पेड़ कटाई की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है। Crime & Corruption Control Association ने आगे की जांच पर नजर रखने की बात कही है।

  • Mumbai Cyber Fraud: Facebook-Instagram Ads से 3 लोगों ने गंवाए ₹7.55 लाख

    Mumbai Cyber Fraud: Facebook-Instagram Ads से 3 लोगों ने गंवाए ₹7.55 लाख

    मुंबई में Facebook-Instagram Ads, Fake Calls, Job Offer और APK के जरिए तीन लोगों से ₹7.55 लाख की ठगी हुई। जानें Scam का तरीका और बचाव के उपाय।

    मुंबई: Facebook और Instagram पर दिखने वाले Ads और Social Media Posts को आधार बनाकर तीन अलग-अलग मामलों में एक कारोबारी, होटल का वेटर और एक सेल्समैन से कुल ₹7,55,734 की साइबर ठगी सामने आई है। तीनों मामलों में ठगी का तरीका अलग था, लेकिन एक बात समान रही—पहले सोशल मीडिया के जरिए भरोसा बनाया गया और उसके बाद Fake Call, WhatsApp, Personal Details या APK File के जरिए पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

    इन मामलों में 58 वर्षीय Andheri निवासी कारोबारी Ketan Shah से ₹3,34,534, होटल में काम करने वाले Ramesh Singh Anand Singh Asnal से ₹2,41,200 और मॉल में सेल्समैन Salim Ibrahim Patel से ₹1,80,000 की ठगी हुई।

    Facebook पर Credit Card Ad, फिर Fake HSBC Customer Care Call

    58 वर्षीय कारोबारी Ketan Shah ने Facebook पर HSBC Credit Card से संबंधित एक Advertisement देखा। Advertisement पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपना नाम और मोबाइल नंबर दिया।

    14 अगस्त को उन्हें Rahul नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को HSBC Customer Care Executive बताया। कॉल के दौरान उन्हें एक Link भेजा गया और मौजूदा Bank Cards की जानकारी देने को कहा गया।

    Shah ने IndusInd Bank और ICICI Bank से संबंधित Card Details दर्ज कीं। इसके कुछ ही समय बाद उनके IndusInd Bank Account से ₹3,34,534 निकाल लिए गए।

    Transaction के बाद उनका मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया। दोबारा फोन चालू करने पर उन्हें Transaction Alerts मिले। उन्होंने तुरंत Card Block कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    यह मामला दिखाता है कि Credit Card या Banking Service का नाम इस्तेमाल करने वाला कोई भी Caller अपने आप वास्तविक Bank Executive नहीं बन जाता। Social Media Advertisement पर दिया गया Mobile Number बाद में Social Engineering के लिए इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी पैदा करता है।

    Dubai Job के नाम पर होटल वेटर से ₹2.41 लाख

    दूसरे मामले में होटल वेटर Ramesh Singh Anand Singh Asnal विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे थे। उन्होंने Celebrity Chef Shubham Rawat से जुड़ी एक पोस्ट Instagram और Facebook पर देखी और नौकरी की उम्मीद में Comment Section में अपना Mobile Number डाल दिया।

    27 अगस्त को उन्हें WhatsApp पर Sohan Bhandari नाम के व्यक्ति का Call आया। उसने दावा किया कि Chef Shubham Rawat ने उनका नंबर उसे दिया है और Dubai में नौकरी की व्यवस्था हो गई है।

    इसके बाद Visa Processing, Medical Test और Offer Letter के नाम पर पैसे मांगे गए। Asnal ने 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच 18 अलग-अलग Transactions में कुल ₹2,41,200 भेज दिए।

    जब नौकरी का Offer Letter नहीं आया और संपर्क भी बंद हो गया, तब उन्हें ठगी का पता चला। जांच में सामने आया कि Shubham Rawat का इस ठगी से कोई संबंध नहीं था। कथित तौर पर उनकी Profile Photograph का इस्तेमाल Fake WhatsApp Account बनाकर भरोसा कायम करने के लिए किया गया था। पुलिस ने Sohan Bhandari बनकर संपर्क करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।

    इस मामले में सबसे बड़ा खतरा Social Media Impersonation का है। किसी व्यक्ति की Profile Photo, नाम या किसी परिचित की पहचान का इस्तेमाल होने से यह साबित नहीं होता कि WhatsApp Account वास्तव में उसी व्यक्ति का है।

    Instagram पर ICICI Credit Card Ad, WhatsApp से आया APK

    तीसरे मामले में मॉल में काम करने वाले Salesman Salim Ibrahim Patel ने Instagram पर ICICI Bank Credit Card का Advertisement देखा। Credit Card की जरूरत होने के कारण उन्होंने Advertisement पर Click किया।

    अगली सुबह एक Unknown Number से Call आया। Caller ने खुद को ICICI Credit Card Department का कर्मचारी बताया और कहा कि KYC Process पूरी करनी होगी।

    इसके बाद WhatsApp पर “ICICI CREDIT CARD.apk” नाम की File भेजी गई। Patel को इसे Open करने और PAN Card तथा मौजूदा SBI Credit Card की जानकारी दर्ज करने के लिए कहा गया।

    निर्देशों का पालन करने के कुछ ही मिनट बाद उनके SBI Credit Card से दो Transactions के जरिए ₹1,80,000 निकाल लिए गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मामले में Unknown Cyber Fraudster के खिलाफ जांच चल रही है।

    Social Media Ad से WhatsApp तक पहुंच रहा है Scam

    इन तीनों मामलों को साथ देखने पर ठगी का एक स्पष्ट Pattern सामने आता है।

    Facebook या Instagram पर Ad या Post दिखाई देता है। User किसी जरूरत के कारण उस पर प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद Mobile Number या अन्य जानकारी के जरिए संपर्क बनाया जाता है। फिर Scammer Bank Executive, Recruiter या किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान इस्तेमाल करता है। बातचीत अक्सर WhatsApp तक पहुंचती है और यहीं से Payment, Card Details, PAN Details या App Installation के जरिए ठगी आगे बढ़ती है।

    यानी Scam की शुरुआत हमेशा पैसे मांगने से नहीं होती। कई बार शुरुआत केवल Mobile Number, Comment या Credit Card Enquiry से होती है।

    APK File को लेकर क्यों बढ़ी चिंता

    “ICICI CREDIT CARD.apk” जैसे नाम से भेजी गई File सामान्य KYC प्रक्रिया का हिस्सा नहीं मानी जानी चाहिए। खासकर जब कोई Unknown Caller WhatsApp पर APK भेजकर उसे Install करने के लिए कहे।

    सितंबर 2026 में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से Malicious Android Applications के जरिए Financial Fraud बढ़ने को लेकर चेतावनी सामने आई थी। Facebook और Instagram पर ऐसे Advertisements के जरिए Users को Suspicious Websites और APK Files तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई। कुछ Malicious Apps Device Accessibility Permissions का दुरुपयोग करके Smartphone पर नियंत्रण हासिल करने में सक्षम हो सकते हैं।

    देश भर में APK आधारित ठगी के मामले सामने आते रहे हैं। इसलिए किसी Bank, Credit Card, KYC, Pension या Refund के नाम पर WhatsApp से भेजी गई APK File को Install करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

    मुंबई में Online Fraud का कितना बड़ा खतरा है

    मुंबई में 2026 के पहले सात महीनों में 3,689 Online Fraud Cases दर्ज किए गए। इनमें Credit Card और अन्य Digital Fraud के 914 मामले सबसे बड़े दर्ज किए गए Categories में रहे। इन 914 मामलों में 142 मामलों का Detection हुआ और 81 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

    इसी अवधि में Fake Social Media Profiles और Email/SMS Morphing से जुड़े 136 मामले तथा Phishing, Man-in-the-Middle और Spoofing से जुड़े 103 मामले दर्ज हुए। Job Fraud के 70 और Fake Websites के 72 मामले भी सामने आए। कुल 3,689 मामलों में 847 मामलों का Detection और 637 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आ चुकी है।

    इन आंकड़ों के बीच Facebook-Instagram से जुड़े मौजूदा मामले यह दिखाते हैं कि Cyber Fraud अब केवल Unknown Phone Calls तक सीमित नहीं है। Social Media Advertising, Fake Profiles, Messaging Apps और Digital Payment Systems एक ही Fraud Chain का हिस्सा बन सकते हैं।

    2,898 SIM Cards और ₹24 करोड़ के Transaction का जांच कनेक्शन

    मुंबई पुलिस की Crime Branch ने सितंबर में एक अलग Cyber Fraud Network की जांच में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। जांच में 2,898 SIM Cards और 10 Bank Accounts के जरिए करीब ₹24 करोड़ के Transactions का Financial Trail सामने आया। पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि इन Transactions के अंतिम Beneficiaries कौन थे और नेटवर्क कितना बड़ा था।

    यह मामला मौजूदा तीन ठगी की घटनाओं से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है, लेकिन इससे यह समझ आता है कि Cyber Fraud में इस्तेमाल होने वाले Phone Numbers, SIM Cards और Bank Accounts के पीछे अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।

    अगर Social Media Scam में पैसा कट जाए तो तुरंत क्या करें ?

    Cyber Fraud में समय बहुत महत्वपूर्ण है। पैसा कटने के बाद सबसे पहले Bank या Card Issuer को तुरंत सूचना देकर Card या संबंधित Account को सुरक्षित कराना चाहिए।

    इसके बाद Financial Cyber Fraud की शिकायत के लिए 1930 Helpline पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है और National Cyber Crime Reporting Portal पर Complaint दर्ज की जा सकती है।

    Caller का Mobile Number, WhatsApp Chat, Advertisement का Screenshot, Website Link, APK का नाम, Transaction ID, Bank Alert और अन्य उपलब्ध Evidence सुरक्षित रखना चाहिए। इन्हें Delete करने के बजाय जांच के लिए सुरक्षित रखना अधिक उपयोगी है।

    यदि किसी संदिग्ध APK को Install किया गया है, तो उस Device से आगे Banking Activity करने से बचना और Device तथा संबंधित Accounts की Security जांच कराना जरूरी है।

    सिर्फ अपना पैसा नहीं, Scammer की जानकारी भी Report करें

    National Cyber Crime Reporting Portal पर Suspicious Phone Numbers, WhatsApp Numbers, Telegram Handles, Email IDs, URLs और Social Media Accounts से संबंधित जानकारी Report करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    इसलिए किसी Scam का सामना होने पर केवल Transaction Dispute तक सीमित रहने के बजाय उपलब्ध Digital Evidence के साथ संदिग्ध Number, Account या Link की भी जानकारी देना महत्वपूर्ण है।

    Social Media पर Cyber Fraud से बचने के 7 जरूरी नियम

    1. Facebook या Instagram पर दिखाई देने वाले Advertisement को केवल Platform पर मौजूद होने के आधार पर Genuine न मानें।
    2. Bank या Credit Card के नाम पर आए Call पर Card Number, CVV, PIN या अन्य Sensitive Details साझा न करें।
    3. WhatsApp पर Unknown Number से भेजी गई APK File Install न करें।
    4. Job के नाम पर Visa, Medical या Processing Fee मांगने वाले व्यक्ति की पहचान और Employer को अलग माध्यम से Verify करें।
    5. किसी Celebrity, Chef, Businessman या परिचित व्यक्ति की Profile Photo को Identity Proof न मानें।
    6. Social Media Comment Section में अपना Mobile Number और अन्य Personal Information सार्वजनिक रूप से देने से बचें।
    7. Fraud होने पर Bank को तुरंत सूचना दें और 1930 पर जल्द से जल्द शिकायत करें।

    Facebook और Instagram पर शुरू हुई इन तीन घटनाओं में कुल ₹7.55 लाख का नुकसान हुआ है। मामलों की जांच जारी है, लेकिन घटनाओं का तरीका एक स्पष्ट चेतावनी देता है—Social Media पर दिखने वाला Ad, WhatsApp Profile या फोन पर बताई गई पहचान अपने आप भरोसे का प्रमाण नहीं है। Cyber Fraud से बचने के लिए किसी भी Payment, KYC, Job Processing या App Installation से पहले स्वतंत्र Verification करना सबसे जरूरी कदम है।

  • Mumbai Cyber Crime: Snapchat पर महिला को ब्लैकमेल करने का आरोप, Punjab से 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार

    Mumbai Cyber Crime: Snapchat पर महिला को ब्लैकमेल करने का आरोप, Punjab से 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार

    मुंबई के मुलुंड में Snapchat और सोशल मीडिया के जरिए महिला को निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने के आरोप में 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार।

    मुंबई: मुलुंड में सोशल मीडिया के जरिए एक महिला को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांगने के मामले में पुलिस ने पंजाब से 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान Satnam Mandeep Singh के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, महिला द्वारा आगे की मांग मानने से इनकार करने के बाद आरोपी ने उसका एक वीडियो उसके रिश्तेदारों और अन्य लोगों को भेज दिया।

    मुलुंड पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से महिला से संपर्क किया और धीरे-धीरे उसके साथ परिचय बढ़ाया। इसके बाद उसके पास मौजूद महिला के निजी फोटो और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसों की मांग की गई। मामला तब गंभीर हो गया जब महिला ने आरोपी की आगे की मांग पूरी करने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर उसने वीडियो दूसरे लोगों तक पहुंचा दिया।

    इसके बाद महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाया गया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पंजाब तक पहुंची और Satnam Mandeep Singh को गिरफ्तार किया गया।

    आरोपी पर BNS और IT Act की धाराएं

    मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 351(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(E) और 67(A) के तहत कार्रवाई की गई है।

    इन धाराओं में कथित जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, निजता के उल्लंघन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रसारण से जुड़े अपराध शामिल हैं।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी ने महिला से कुल कितनी रकम मांगी थी या अब तक कितनी रकम हासिल की गई थी। इसी तरह आरोपी ने महिला के निजी फोटो और वीडियो किस माध्यम से हासिल किए, इसकी पूरी जानकारी भी सामने नहीं आई है। इन पहलुओं की जांच का परिणाम आगे की पुलिस कार्रवाई में स्पष्ट हो सकता है।

    निजी फोटो-वीडियो से ब्लैकमेल करने का खतरा

    मुलुंड का यह मामला उस साइबर अपराध के पैटर्न को सामने लाता है जिसमें किसी व्यक्ति की निजी या संवेदनशील तस्वीरों और वीडियो को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में आरोपी अक्सर सामग्री सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे या दूसरी मांगें पूरी कराने की कोशिश करता है।

    मुंबई और आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में निजी डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर कथित ब्लैकमेल और उगाही के अलग-अलग मामले सामने आए हैं। अगस्त 2026 में एक अलग मामले में मुंबई की 35 वर्षीय महिला पर ठाणे के एक व्यक्ति से निजी फोटो-वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर कथित तौर पर करीब 1.39 करोड़ रुपये की उगाही करने का मामला दर्ज हुआ था।

    सितंबर 2026 में मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक अन्य कथित सेक्सटॉर्शन मामले में 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। उस मामले में निजी WhatsApp चैट सार्वजनिक करने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर 64 लाख रुपये लेने का आरोप है। यह मुलुंड मामले से अलग घटना है और दोनों मामलों को एक ही नेटवर्क से जोड़ने की कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    अगर निजी फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी मिले तो क्या करें?

    ऐसी स्थिति में सबसे पहले आरोपी की धमकी के दबाव में आकर चैट या अन्य डिजिटल सबूत मिटाने से बचना चाहिए। बातचीत के स्क्रीनशॉट, आरोपी का मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल या यूजरनेम, वीडियो या फोटो, संबंधित URL और अगर कोई ऑनलाइन भुगतान हुआ है तो उसकी रसीद या बैंक रिकॉर्ड सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

    राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन अपराध की शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल के अनुसार शिकायत के दौरान चैट, स्क्रीनशॉट, वीडियो, फोटो, URL और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य उपयोगी हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को संबंधित प्लेटफॉर्म पर भी रिपोर्ट किया जा सकता है।

    अगर मामला आर्थिक साइबर धोखाधड़ी या ऑनलाइन पैसे के तत्काल ट्रांसफर से जुड़ा हो तो साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 के जरिए भी सहायता ली जा सकती है।

    जांच में आगे क्या सामने आ सकता है?

    मुलुंड पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह हो सकता है कि आरोपी ने महिला के निजी कंटेंट का इस्तेमाल किस तरह किया, क्या उसके पास अन्य लोगों की ऐसी सामग्री भी थी और मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसे किसी अतिरिक्त आरोपी या दूसरे पीड़ित की पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस की जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी ने महिला से कितनी रकम की मांग की थी, कोई भुगतान हुआ था या नहीं और निजी वीडियो कितने लोगों तक भेजा गया। इन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

    फिलहाल मुलुंड पुलिस की कार्रवाई ने एक महत्वपूर्ण बात सामने रखी है। निजी फोटो या वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर दबाव बनाने वाला व्यक्ति सोशल मीडिया के पीछे छिपा हो, तब भी तकनीकी जांच के जरिए उसकी पहचान और लोकेशन तक पहुंचा जा सकता है।

  • मुंबई में 124 पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, IICT प्रोजेक्ट पर उठे कई सवाल

    मुंबई में 124 पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, IICT प्रोजेक्ट पर उठे कई सवाल

    मुंबई Film City में IICT के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों के ट्रांसप्लांट पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा।

    मुंबई: Film City के पास प्रस्तावित Indian Institute of Creative Technologies (IICT) के स्थायी कैंपस के लिए 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी है।

    चीफ जस्टिस सूर्य कांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मुंबई की Tree Authority की ओर से यह आवेदन रखा गया था। मामला Aarey में पेड़ों की कटाई से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की पहले से चल रही कार्यवाही से जुड़ा है।

    IICT के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों को दूसरी जगह लगाने का प्रस्ताव

    प्रस्तावित कैंपस के लिए कुल 457 पेड़ प्रभावित होने की बात सामने आई है। इनमें 124 पेड़ों को काटने और 333 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति मांगी गई है।

    Tree Authority की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित जमीन Film City में है और Aarey Forest के अंदर नहीं आती। कोर्ट के सामने आवेदन इसलिए भी रखा गया क्योंकि जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने Aarey Colony क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति को लेकर Tree Authority पर बिना कोर्ट की मंजूरी के आगे बढ़ने पर रोक लगाई थी।

    इस मामले में अभी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रस्तावित कैंपस की जमीन की वास्तविक कानूनी और भौगोलिक स्थिति क्या है और पेड़ों की कटाई तथा ट्रांसप्लांटेशन का मौजूदा प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया है।

    IICT आखिर क्या है?

    यह परियोजना केवल एक सामान्य फिल्म इंस्टीट्यूट नहीं है। Indian Institute of Creative Technologies को Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality यानी AVGC-XR क्षेत्र के लिए National Centre of Excellence के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    IICT एक Section 8 कंपनी के रूप में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और उद्योग जगत की भागीदारी से बनाई गई है। इसमें केंद्र सरकार की 34 प्रतिशत और महाराष्ट्र सरकार की 14 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है। बाकी हिस्सेदारी उद्योग संगठनों की है।

    केंद्र सरकार ने IICT की स्थापना के लिए 391.15 करोड़ रुपये की one-time budgetary support को मंजूरी दी थी। वहीं Film City के स्थायी कैंपस से जुड़ी पहले की जानकारी में अलग project cost सामने आई थी, इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही लागत मानना सही नहीं होगा।

    IICT का मौजूदा काम पहले से जारी है। संस्थान ने मुंबई के NFDC परिसर से जुलाई 2025 में काम शुरू किया था। अप्रैल 2026 तक 18 courses में 136 students के enrolled होने की जानकारी सामने आई थी। Film City में प्रस्तावित परिसर इसका permanent campus होगा।

    सरकार ने IICT को AVGC-XR ecosystem के विस्तार से भी जोड़ा है। 15,000 secondary schools और 500 colleges में AVGC Content Creator Labs स्थापित करने की योजना भी सामने आ चुकी है।

    Aarey और Film City को लेकर क्यों उठ रहा है सवाल?

    इस मामले में Aarey Forest, Aarey Colony और Film City को एक ही जगह मानना सही नहीं होगा। परियोजना पक्ष का कहना है कि जिस जमीन पर IICT campus प्रस्तावित है, वह Film City में है और Aarey Forest का हिस्सा नहीं है।

    वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता और NGO Vanashakti की ओर से इस location और project के लिए वैकल्पिक जगहों की संभावना पर सवाल उठाए गए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुंधति काटजू ने कोर्ट में पूछा कि जंगल से सटे क्षेत्र में इस तरह का संस्थान बनाने के लिए यही जगह क्यों जरूरी है और क्या दूसरे स्थानों की suitability का अध्ययन किया गया है।

    पेड़ों की संख्या में बदलाव ने भी सवाल खड़े किए

    इस पूरे मामले में पेड़ों के आंकड़ों का बदलना भी ध्यान देने योग्य है। जनवरी 2026 में सामने आई जानकारी में इसी IICT campus के लिए 255 पेड़ों की कटाई और 201 पेड़ों के transplantation का आंकड़ा बताया गया था। उस हिसाब से कुल 456 पेड़ प्रभावित होने थे।

    अब सुप्रीम कोर्ट के सामने 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों के transplantation का आंकड़ा रखा गया है। कुल संख्या 457 होती है, लेकिन दोनों प्रस्तावों में कटाई और transplantation की संख्या में बड़ा बदलाव है।

    उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव revised tree survey, project design में परिवर्तन, पेड़ों की श्रेणी में बदलाव या किसी अन्य तकनीकी मूल्यांकन के कारण हुआ। इसलिए इस अंतर का आधिकारिक स्पष्टीकरण आगे महत्वपूर्ण हो सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र पेड़ मूल्यांकन का विकल्प

    सुनवाई के दौरान पेड़ों की संख्या और उनके मूल्यांकन को लेकर भी चर्चा हुई। Tree Authority की ओर से यह बताया गया कि जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र संस्था से assessment कराया जा सकता है। इसके लिए IIT Bombay, VJTI और Bombay Natural History Society जैसे संस्थानों के नाम भी सामने आए।

    इससे मामले का फोकस सिर्फ पेड़ काटने की संख्या तक सीमित नहीं रहता। यह भी देखा जा सकता है कि कौन से पेड़ काटने की श्रेणी में रखे गए हैं, किन पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जा सकता है और क्या परियोजना में पेड़ों को बचाने के लिए वैकल्पिक डिजाइन या व्यवस्था संभव है।

    5,000 पेड़ लगाने का undertaking

    परियोजना पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट को compensatory afforestation के तहत महाराष्ट्र Forest Development Corporation के माध्यम से 5,000 पेड़ लगाने का undertaking दिए जाने की जानकारी दी है।

    लेकिन compensatory plantation में सिर्फ संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती। plantation की जगह, पेड़ों की प्रजातियां, survival monitoring और लंबे समय तक उनकी देखरेख भी महत्वपूर्ण होंगी।

    Aarey से जुड़े पुराने मामलों में भी compensatory afforestation और पेड़ों के survival की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के सामने महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। इसलिए इस मामले में भी 5,000 पेड़ों के plantation की वास्तविक निगरानी आगे अहम हो सकती है।

    2025 के 95 पेड़ों वाले मामले से भी जुड़ता है मामला

    Film City क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर 2025 में Goregaon-Mulund Link Road से संबंधित 95 पेड़ों का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के सामने आया था। उस मामले में भी Film City की जमीन और Aarey से संबंधित कोर्ट के आदेश के बीच संबंध को लेकर सवाल उठा था।

    सुप्रीम कोर्ट ने उस कार्यवाही में alternative options, expert assessment और compensatory afforestation जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया था। वर्तमान IICT मामले में भी alternative site और पेड़ों के independent assessment का मुद्दा सामने आया है।

    जनवरी 2025 का सुप्रीम कोर्ट आदेश क्यों महत्वपूर्ण है?

    10 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने Aarey Colony क्षेत्र में Tree Authority द्वारा पेड़ काटने की अनुमति देने की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। Tree Authority आवेदन पर विचार कर सकती है, लेकिन Aarey Colony में पेड़ों की कटाई के लिए कोर्ट की अनुमति के बिना आगे नहीं बढ़ सकती।

    इसी पृष्ठभूमि में वर्तमान IICT आवेदन सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। हालांकि वर्तमान मामले में परियोजना पक्ष का स्पष्ट कहना है कि संबंधित जमीन Aarey Forest के भीतर नहीं है।

    Environmental clearance और tree-cutting permission अलग-अलग हैं

    IICT campus को लेकर environmental और wildlife clearance से संबंधित प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। अगस्त 2026 में परियोजना के Sanjay Gandhi National Park के आसपास के eco-sensitive zone से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं पर भी मंजूरी और शर्तों की जानकारी सामने आई थी।

    इन शर्तों में wildlife conservation के लिए राशि जमा करना, compound wall और सुरक्षा उपाय तथा wildlife को प्रभावित करने वाली high-intensity lighting पर नियंत्रण जैसे प्रावधान शामिल बताए गए थे।

    हालांकि environmental या wildlife clearance को Supreme Court की tree-felling permission के बराबर नहीं माना जा सकता। वर्तमान सुनवाई में 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के transplantation के लिए Court की भूमिका इसी वजह से महत्वपूर्ण है।

    IICT का विस्तार भी जारी

    IICT का permanent campus ऐसे समय में प्रस्तावित है जब संस्थान अपने education और industry ecosystem का विस्तार कर रहा है। अगस्त 2026 में Netflix के साथ partnership के तहत 100 students के लिए scholarships की घोषणा की गई थी। छह professional programmes के लिए financial support का प्रावधान किया गया है।

    इससे IICT का दायरा traditional filmmaking से आगे animation, VFX, gaming और अन्य creative technologies तक दिखाई देता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद कोर्ट tree-felling proposal, पेड़ों की संख्या, project location, alternative possibilities और compensatory afforestation से जुड़े पहलुओं पर आगे विचार कर सकता है।

    अगर स्वतंत्र tree assessment कराया जाता है, तो 124 पेड़ों की कटाई और 333 पेड़ों के transplantation के मौजूदा आंकड़ों की स्वतंत्र जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

    फिलहाल स्थिति साफ है: IICT के स्थायी Film City campus के लिए 124 पेड़ काटने और 333 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने की अनुमति का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है, लेकिन पेड़ काटने की अंतिम अनुमति अभी नहीं मिली है। आने वाले दो सप्ताह में महाराष्ट्र सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के बाद इस मामले की अगली दिशा स्पष्ट होगी।

  • सानपाड़ा LPG ब्लास्ट: गैस लीक के बाद जमा हुई LPG में आग, दो भाई गंभीर; 6 दुकानें क्षतिग्रस्त

    सानपाड़ा LPG ब्लास्ट: गैस लीक के बाद जमा हुई LPG में आग, दो भाई गंभीर; 6 दुकानें क्षतिग्रस्त

    नवी मुंबई के सानपाड़ा में LPG गैस लीक के बाद धमाका हुआ। दो भाई गंभीर रूप से झुलसे, 6 दुकानें और सामने के अस्पताल की कांच की खिड़कियां टूटीं।

    नवी मुंबई: सानपाड़ा सेक्टर-1 में मंगलवार सुबह हुए जोरदार धमाके को लेकर शुरुआती जानकारी में सिलेंडर ब्लास्ट की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में गैस लीक होने के बाद LPG के जमा होने और फिर आग पकड़ने की संभावना सामने आई है। हादसे में दो भाई गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि धमाके के असर से छह दुकानों को नुकसान पहुंचा और सामने स्थित अस्पताल की कांच की खिड़कियां टूट गईं।

    यह घटना करीब सुबह 6 बजे सेक्टर-1 स्थित प्रतीक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के ग्राउंड फ्लोर के एक खाद्य प्रतिष्ठान में हुई। धमाका Sagar Family Restaurant होने की जानकारी प्राप्त हुई है।

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    घटना स्थल की तस्वीर

    गैस लीक के बाद हुआ जोरदार धमाका

    फायर विभाग के अनुसार दुकान में तीन कमर्शियल LPG सिलेंडर रखे हुए थे। शुरुआती जानकारी में एक सिलेंडर से गैस लीक होने की बात सामने आई थी। बाद में घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने परिसर और सिलेंडरों की जांच की। प्रारंभिक आकलन में यह संभावना सामने आई कि सिलेंडर के खुद फटने के बजाय LPG लीक होकर बंद परिसर में जमा हुई और किसी ignition source के संपर्क में आने के बाद आग लगी, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

    प्रारंभिक जांच के हवाले से बताया गया, कि दोनों भाई दुकान में ही रहते और फास्ट-फूड का कारोबार चलाते थे। रात के दौरान एक LPG सिलेंडर से गैस लीक होने की आशंका है। सुबह काम शुरू करने के दौरान लाइट स्विच से निकली संभावित electrical spark से जमा गैस के ignite होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी घटना की परिस्थितियों और ignition के वास्तविक स्रोत की जांच कर रही है।

    दो भाई गंभीर रूप से झुलसे

    हादसे में मनीष लालबहादुर यादव और उनके भाई अर्जुन लालबहादुर यादव गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मनीष की उम्र 27 वर्ष और अर्जुन की उम्र 46 वर्ष बताई है। दोनों को गंभीर रूप से झुलसने के बाद उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।

    मनीष को करीब 75 प्रतिशत और अर्जुन को 85 से 90 प्रतिशत तक झुलसने की जानकारी दी गई है।

    छह दुकानों को नुकसान, अस्पताल की कांच भी टूटी

    धमाका इतना तेज था कि सिर्फ संबंधित खाद्य दुकान ही प्रभावित नहीं हुई। प्रतीक CHS की दो आसपास की दुकानों और बगल की अभिमन्यु को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की तीन अन्य दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। इस तरह कुल छह दुकानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

    धमाके का असर सामने स्थित Suraj Hospital तक पहुंचा। अस्पताल की कांच की facade और खिड़कियां टूट गईं। हालांकि अस्पताल के मरीजों और कर्मचारियों में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    फायर ब्रिगेड को 6:13 बजे मिली सूचना

    वाशी फायर स्टेशन के डिविजनल अधिकारी पुरुषोत्तम जाधव के अनुसार सुबह 6:13 बजे धमाके की सूचना फायर स्टेशन को मिली। फायर ब्रिगेड की टीम करीब पांच मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गई। मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के साथ घटना के कारणों की जांच शुरू की गई।

    पुलिस और फॉरेंसिक टीम कर रही जांच

    घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम ने दुकान और वहां रखे LPG सिलेंडरों की जांच की है। प्रारंभिक फॉरेंसिक आकलन गैस लीक के बाद ignition की ओर इशारा करता है, लेकिन गैस लीक होने का सटीक कारण और आग पकड़ने का वास्तविक स्रोत अभी जांच का विषय है।

    इस हादसे में फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि तीन कमर्शियल LPG सिलेंडरों में से किस हिस्से से गैस लीक हुई और leakage का कारण क्या था। इसके साथ ही LPG पाइप, रेगुलेटर और अन्य उपकरणों की स्थिति तथा दुकान में गैस के जमा होने की परिस्थितियों की जांच भी घटना की पूरी वजह सामने लाने में महत्वपूर्ण होगी।

    घटना की जांच जारी है और दोनों घायलों की चिकित्सकीय स्थिति पर भी आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • Palghar Hospital Violence: रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तार, 22 को पुलिस हिरासत; हाईकोर्ट की जांच पर नजर

    Palghar Hospital Violence: रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तार, 22 को पुलिस हिरासत; हाईकोर्ट की जांच पर नजर

    पालघर अस्पताल हिंसा में रोहित गावित समेत 23 गिरफ्तारियां हुईं। 22 आरोपियों की पुलिस हिरासत, CCTV जांच और हाईकोर्ट की निगरानी पर पूरी जानकारी।

    पालघर: मुंबई से सटे पालघर जिले के रिलीफ हॉस्पिटल में दही-हांडी के बाद हुई हिंसा के मामले में जांच अब गिरफ्तारी से आगे बढ़कर डिजिटल सबूत और पुलिस जांच की निगरानी तक पहुंच गई है। विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख कुंदन सांखे समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। मिली जानकारी के अनुसार अब तक कुल 23 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई है।

    मामले में पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और कथित तौर पर उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुरुआती जांच के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

    पालघर अस्पताल में विवाद कैसे शुरू हुआ?

    यह मामला 5 सितंबर की रात और 6 सितंबर की शुरुआती घंटों में पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में हुआ। दही-हांडी समारोह के दौरान घायल हुए कुछ गोविंदा अस्पताल में भर्ती थे। उपचार, जांच, डिस्चार्ज और अस्पताल के बिल को लेकर विवाद के बाद शिवसेना से जुड़े लोगों के अस्पताल पहुंचने का आरोप है।

    पुलिस और अस्पताल की शिकायत के अनुसार, अस्पताल में कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई, डॉक्टरों को धमकाया गया और कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई। एक घायल व्यक्ति को ICU से जबरन बाहर ले जाने का आरोप भी मामले का हिस्सा है। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान किए जाने की बात कही है।

    शुरुआती रिपोर्टों में पांच घायल गोविंदाओं के इलाज और करीब 19,866 रुपये के बिल को लेकर विवाद सामने आया था। एक घायल गोविंदा को आगे की जांच के लिए स्कैन कराने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई। बाद में घायल गोविंदा केशव ठाकुर को वर्टिब्रल कंप्रेशन फ्रैक्चर पाए जाने और D10-D12 कशेरुकाओं की स्थिरीकरण सर्जरी किए जाने की जानकारी दी गई।

    23 गिरफ्तारियां कैसे हुईं?

    शुरुआत में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात और तत्कालीन जिला प्रमुख कुंदन सांखे सहित आरोपी शामिल थे। 7 सितंबर को राहुल घरात की गिरफ्तारी हुई।

    इसके बाद 11 सितंबर को विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित और 12 गोविंदा सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। रोहित गावित को मीरा रोड से पकड़े जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई। पुलिस के अनुसार, उनके पुराने मोबाइल में नया SIM इस्तेमाल किए जाने के बाद तकनीकी निगरानी के जरिए उनका पता लगाने में मदद मिली

    इसके बाद फरार बताए जा रहे आरोपियों पर कार्रवाई तेज हुई। 13-14 सितंबर को आठ शिवसेना पदाधिकारी पुलिस के सामने पेश हुए, जबकि साईराज पाटील के चालक साहिल राउत को भी गिरफ्तार किया गया। इससे कुल गिरफ्तारियों की संख्या 23 तक पहुंच गई।

    पुलिस के सामने पेश होने वालों में कुंदन सांखे, साईराज पाटील, मनीष उर्फ विक्की सांखे, राहुल सांखे, ऋषभ वारे, नगरसेविका नीलम सांखे और मनोज घरात के नाम सामने आए हैं।

    22 या 23 गिरफ्तार? आंकड़े में अंतर क्यों दिख रहा है?

    मामले में 22 और 23 दोनों आंकड़े दिखाई दे रहे हैं। 14 सितंबर को 22 आरोपियों को 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। इसी रिपोर्ट में पुलिस द्वारा CCTV के आधार पर 22 लोगों की पहचान किए जाने का उल्लेख है।

    इसके बाद आठ आरोपियों के surrender और साईराज पाटील के चालक साहिल राउत की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तारियां 23 बताई गईं। इसलिए 22 का आंकड़ा पुलिस हिरासत में भेजे गए आरोपियों से और 23 का आंकड़ा कुल गिरफ्तारियों से जुड़ा दिखाई देता है।

    रोहित गावित और कुंदन सांखे पर क्या आरोप हैं?

    रोहित गावित, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और पुलिस हिरासत दी गई। उनके बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि घटनास्थल पर उनकी भूमिका को लेकर आरोपों की जांच जरूरी है और उन्होंने किसी गैरकानूनी इरादे से अस्पताल जाने से इनकार किया। दूसरी ओर पुलिस ने उनकी भूमिका और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों की जांच के लिए हिरासत की जरूरत बताई।

    कुंदन सांखे, जो शिवसेना के पूर्व जिला प्रमुख रहे हैं, बाद में पुलिस के सामने पेश हुए। पुलिस के मुताबिक वह उन आरोपियों में शामिल हैं जिनकी भूमिका की जांच CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

    पुलिस को आरोपियों की हिरासत क्यों चाहिए थी?

    पुलिस ने अदालत से पांच दिन की हिरासत मांगते हुए जांच के कई कारण बताए। इनमें आरोपियों के voice samples लेना, मोबाइल डिवाइस जब्त करना और CCTV के cloud storage में मौजूद फुटेज को सुरक्षित करना शामिल था। पुलिस ने अदालत को बताया कि CCTV से संबंधित cloud data बेंगलुरु स्थित सर्वर पर होने की जानकारी है।

    आरोपियों के बचाव पक्ष ने पुलिस हिरासत का विरोध करते हुए कहा कि वे घायल दोस्त से मिलने अस्पताल गए थे और उनके पीछे कोई गैरकानूनी इरादा नहीं था। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद मजिस्ट्रेट योगेश एच. गजभिये ने अपराध की गंभीरता और प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए पुलिस हिरासत मंजूर की।

    किन धाराओं में मामला दर्ज है?

    मामले में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और संपत्ति को नुकसान या हानि की रोकथाम) अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

    मिली जानकारी के अनुसार आरोपों में दंगा, मारपीट, आपराधिक धमकी, बिना अनुमति प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य संबंधित अपराध शामिल हैं।

    हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर क्यों सवाल उठाए?

    इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण developments में से एक बॉम्बे हाईकोर्ट की दखल है। अदालत ने पालघर पुलिस की शुरुआती जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई और जांच को पर्याप्त तरीके से आगे नहीं बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए।

    अदालत ने पंचनामा, गवाहों के बयान और घटनास्थल से महत्वपूर्ण सबूतों के संग्रह को लेकर सवाल उठाए। अस्पताल में मौजूद सलाइन बोतल जैसे संभावित सबूत को जब्त नहीं किए जाने पर भी अदालत ने नाराजगी जताई।

    हाईकोर्ट ने कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक को जांच की व्यक्तिगत निगरानी करने और रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट पेश करने की समयसीमा 17 सितंबर बताई गई है।

    जांच अधिकारी भी बदले गए

    मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों में बदलाव भी हुआ। शुरुआती जांच PSI विनायक केसरकर के पास थी। इसके बाद पालघर SDPO उमेश गावली और फिर डहाणू SDPO निशा जाधव को जांच की जिम्मेदारी दी गई। 14 सितंबर की रिपोर्ट में निशा जाधव को पुलिस की ओर से अदालत में आरोपियों की हिरासत की मांग करते हुए पेश होने की जानकारी दी गई है।

    हाईकोर्ट की निगरानी में अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    शिवसेना ने क्या कार्रवाई की?

    मामले में नाम सामने आने के बाद शिवसेना ने अपने कई पदाधिकारियों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की। जिसमें राहुल घरात, कुंदन सांखे, साईराज पाटील समेत सात पदाधिकारियों के निलंबित कर दिया गया है।

    अब आगे क्या होगा?

    16 सितंबर तक दी गई पुलिस हिरासत के बाद यानी कल 17 सितंबर आरोपियों को अदालत के सामने फिर पेश किया जाना है। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए या पुलिस हिरासत बढ़ाई जाए या किसी आरोपी को जमानत संबंधी राहत मिले।

    साथ ही पुलिस के लिए CCTV फुटेज, मोबाइल फोन, voice samples और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार कोकण विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक की निगरानी रिपोर्ट भी अगले चरण में महत्वपूर्ण होगी।

    मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस जांच और अदालत की निगरानी दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।