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  • Maharashtra Vertical Property Card: फ्लैट मालिकों के लिए बड़ा अपडेट, दिसंबर में Land Titling Act की तैयारी

    Maharashtra Vertical Property Card: फ्लैट मालिकों के लिए बड़ा अपडेट, दिसंबर में Land Titling Act की तैयारी

    महाराष्ट्र में Vertical Property Card को Land Titling Act से जोड़ने की तैयारी है। जानें फ्लैट मालिकों की जमीन हिस्सेदारी, Property Card और इसके असर की पूरी जानकारी।

    मुंबई: महाराष्ट्र में जमीन और संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने सितंबर 2026 में कहा है कि राज्य सरकार दिसंबर 2026 तक Land Titling Act लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य संपत्तियों के मालिकाना हक का अधिक स्पष्ट और निश्चित रिकॉर्ड तैयार करना तथा जमीन से जुड़े विवादों को कम करना है।

    इस व्यापक व्यवस्था में Vertical Property Card भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसके जरिए बहुमंजिला इमारतों में अलग-अलग फ्लैट मालिकों के अधिकार और जमीन में उनके हिस्से को सरकारी रिकॉर्ड में अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    Vertical Property Card क्या है?

    महाराष्ट्र में Property Card पहले से जमीन और संपत्ति के अधिकारों का सरकारी रिकॉर्ड है। भूमि अभिलेख विभाग की मौजूदा डिजिटल व्यवस्था में Property Card को ऑनलाइन देखा और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है। सरकार का आधिकारिक पोर्टल डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित Property Card को सरकारी और कानूनी कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की सुविधा भी बताता है।

    Vertical Property Card की अवधारणा का मकसद बहुमंजिला इमारत में individual flat ownership और उससे जुड़े proportionate land interest को अधिक स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड करने की दिशा में है।

    यानी बात केवल इस बात की नहीं है कि किस व्यक्ति के नाम कौन सा फ्लैट है, बल्कि यह भी है कि उस फ्लैट के मालिक का इमारत के नीचे की जमीन में संबंधित हिस्सा किस तरह रिकॉर्ड में दिखाई देगा।

    क्या फ्लैट मालिक जमीन के एक अलग हिस्से का मालिक बन जाएगा?

    यहां सबसे महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। Vertical Property Card का मतलब यह नहीं है कि किसी फ्लैट मालिक को इमारत के नीचे जमीन का कोई अलग और भौतिक रूप से चिन्हित टुकड़ा मिल जाएगा।

    Apartment ownership के कानूनी ढांचे में जमीन और common areas में मालिक का undivided interest जुड़ा होता है। इसलिए Vertical Property Card को जमीन के अलग-अलग भौतिक टुकड़ों का बंटवारा समझना सही नहीं होगा।

    यही कारण है कि इस व्यवस्था का महत्व सरकारी रिकॉर्ड में ownership और संबंधित land interest को ज्यादा स्पष्ट करने में है।

    7/12, Property Card और Vertical Property Card में क्या अंतर है?

    सामान्य जमीन रिकॉर्ड और बहुमंजिला इमारत के फ्लैट ownership record को एक ही चीज समझना सही नहीं है।

    महाराष्ट्र भूमि अभिलेख विभाग वर्तमान में 7/12, 8A, Property Card और mutation records के लिए अलग-अलग डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है।

    फ्लैट मालिक के लिए Sale Deed, Society Share Certificate, Property Card और प्रस्तावित Vertical Property Card की अपनी-अपनी भूमिका हो सकती है। इसलिए Vertical Property Card को Sale Deed या अन्य title documents का सीधा replacement मानना जल्दबाजी होगी।

    नए Land Titling Act से क्या बदलेगा?

    प्रस्तावित Land Titling framework का बड़ा उद्देश्य property ownership को ज्यादा definitive और digitally verifiable बनाना है। सितंबर में सामने आई जानकारी के अनुसार नए सिस्टम में property ownership, measurement और valuation जैसी जानकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल करने तथा QR code के जरिए रिकॉर्ड तक पहुंच उपलब्ध कराने की योजना है।

    सरकार का दावा है कि इससे जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद, फर्जी लेनदेन और रिकॉर्ड से जुड़ी अस्पष्टता कम करने में मदद मिलेगी।

    लेकिन अभी महत्वपूर्ण बात यह है कि Land Titling Act को दिसंबर 2026 में लाने की घोषणा हुई है; इसका अंतिम कानून, नियम और विस्तृत implementation mechanism आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग श्रेणी की संपत्तियों पर व्यवस्था किस तरह लागू होगी।

    Flat owners को क्या फायदा हो सकता है?

    अगर proposed system प्रभावी तरीके से लागू होता है तो फ्लैट मालिकों के लिए सबसे बड़ा फायदा ownership records की clarity हो सकता है।

    इसका असर खास तौर पर इन क्षेत्रों में पड़ सकता है:

    • संपत्ति के title verification में आसानी
    • resale के दौरान ownership records की बेहतर जांच
    • बैंक और वित्तीय संस्थानों की due diligence में मदद
    • inheritance और ownership transfer के दौरान रिकॉर्ड की स्पष्टता
    • जमीन में फ्लैट से जुड़े हिस्से की सरकारी रिकॉर्ड में बेहतर पहचान
    • property-related disputes में documentary clarity

    महाराष्ट्र सरकार पहले से Property Card और अन्य land records को डिजिटल तथा digitally signed format में उपलब्ध करा रही है।

    Home Loan और Resale पर क्या असर होगा?

    स्पष्ट सरकारी ownership records से भविष्य में property verification की प्रक्रिया आसान होने की संभावना है। बैंक किसी संपत्ति पर loan देने से पहले title और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच करते हैं। अगर सरकारी रिकॉर्ड में ownership और property details ज्यादा व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हों तो यह प्रक्रिया अधिक efficient हो सकती है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि Vertical Property Card मिलते ही हर बैंक बिना किसी अतिरिक्त जांच के home loan मंजूर कर देगा। Sale deed, title chain, encumbrance, approvals और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच फिर भी परिस्थितियों के अनुसार जरूरी हो सकती है।

    Redevelopment में क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?

    मुंबई और महाराष्ट्र में redevelopment के मामलों में जमीन का title और society का अधिकार बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में individual apartment ownership और underlying land interest का सरकारी रिकॉर्ड भविष्य में documentation को अधिक स्पष्ट करने में मदद कर सकता है।

    लेकिन केवल Vertical Property Card के आधार पर redevelopment rights तय होंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा। Conveyance, title documents, society records, development agreements और संबंधित planning तथा housing नियम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

    क्या इससे पुराने property disputes खत्म हो जाएंगे?

    ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।

    Land Titling Act का उद्देश्य ownership disputes को कम करना है, लेकिन पुराना विवाद केवल नया digital record बनने से अपने आप समाप्त नहीं हो जाता। किसी संपत्ति पर पहले से litigation, conflicting documents, mortgage या title dispute मौजूद है तो उसकी कानूनी स्थिति अलग से तय हो सकती है।

    इसी तरह Vertical Property Card को पुराने title documents या court proceedings का automatic replacement नहीं माना जाना चाहिए।

    पुराने फ्लैट मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल

    जिन लोगों ने कई साल पहले फ्लैट खरीदा है, उनके लिए मुख्य सवाल यह होगा कि नई व्यवस्था उनके existing ownership documents के साथ कैसे जुड़ेगी।

    क्या उन्हें अलग से आवेदन करना होगा?
    कौन सा विभाग Vertical Property Card जारी करेगा?
    कौन से documents चाहिए होंगे?
    क्या existing buildings पर भी यही प्रक्रिया लागू होगी?
    कितनी फीस होगी?
    और पुराने records में गलती होने पर correction कैसे होगा?

    इन सवालों का अंतिम जवाब Land Titling framework और उससे जुड़े नियम/सरकारी अधिसूचनाओं के बाद ज्यादा स्पष्ट होगा। फिलहाल महाराष्ट्र के भूमि अभिलेख विभाग की मौजूदा सेवाओं में Property Card और उससे जुड़े digital तथा mutation services उपलब्ध हैं।

    सरकार की मौजूदा डिजिटल व्यवस्था कितनी आगे बढ़ी है?

    महाराष्ट्र का भूमि अभिलेख विभाग पहले से 7/12, 8A, Property Card, e-Ferfar, document verification और digital land-record services चला रहा है। विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर digitally signed Property Card डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध है।

    इसलिए प्रस्तावित Land Titling system को पूरी तरह नई शुरुआत के बजाय मौजूदा digital land-record infrastructure को एक अधिक व्यापक ownership framework में ले जाने की दिशा में भी देखा जा सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सबसे महत्वपूर्ण अगला पड़ाव दिसंबर 2026 का Winter Session है, जहां सरकार Land Titling Act को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके बाद कानून के अंतिम प्रावधानों और implementation rules से यह ज्यादा स्पष्ट होगा कि Vertical Property Card किन संपत्तियों पर, किस प्रक्रिया से और किस authority के माध्यम से लागू होगा।

    फ्लैट मालिकों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Vertical Property Card को केवल एक नए दस्तावेज के रूप में नहीं, बल्कि महाराष्ट्र में property ownership records को अधिक स्पष्ट और digitally verifiable बनाने वाले बड़े land-record reform के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

  • गणेशोत्सव में BMC का ‘मोदक महोत्सव 2026’, महिला बचत समूहों के हाथों से बने मोदक अब घर पहुंचेंगे

    गणेशोत्सव में BMC का ‘मोदक महोत्सव 2026’, महिला बचत समूहों के हाथों से बने मोदक अब घर पहुंचेंगे

    BMC के ‘मोदक महोत्सव 2026’ में महिला बचत समूहों द्वारा तैयार उकडी और तले हुए मोदक मुंबईकरों को मिलेंगे। 14 सितंबर से होम डिलीवरी के लिए shgeshop.com पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे।

    मुंबई: गणपति बाप्पा के आगमन के साथ ही घरों में नैवेद्य की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गणेशोत्सव में भगवान गणेश को प्रिय माने जाने वाले मोदक की मांग को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से इस वर्ष ‘मोदक महोत्सव 2026’ का आयोजन किया गया है। इस पहल के तहत BMC द्वारा संचालित महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए उकडी के और तले हुए मोदक मुंबईकरों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

    इस पहल के तहत नागरिकों को मोदक खरीदने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है। https://shgeshop.com वेबसाइट के माध्यम से पूरे गणेशोत्सव के दौरान ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकेगा। ऑनलाइन पंजीकरण करने वाले नागरिकों को 14 सितंबर 2026 से मोदक की होम डिलीवरी उपलब्ध कराई जाएगी।

    एक दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी

    BMC के नियोजन विभाग के अनुसार, मोदक की होम डिलीवरी का लाभ लेने के लिए मुंबईकरों को कम से कम एक दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। यह होम डिलीवरी सेवा केवल मुंबई क्षेत्र में उपलब्ध रहेगी।

    ‘मोदक महोत्सव 2026’ पूरे गणेशोत्सव काल के दौरान जारी रहेगा। इसके तहत नागरिकों को उकडी के साथ-साथ तले हुए मोदक भी उपलब्ध होंगे।

    महिला बचत समूहों ने तैयार किए मोदक

    गणेशोत्सव के दौरान मोदक की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए BMC द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त महिला बचत समूहों के माध्यम से इस महोत्सव का आयोजन किया गया है। इन समूहों द्वारा तैयार किए गए मोदक गणेशोत्सव के पूरे कालखंड में ग्राहकों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

    इस पहल का उद्देश्य केवल गणेशोत्सव के दौरान नागरिकों को मोदक उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि महिला बचत समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और उनके व्यवसाय को बढ़ावा देना भी है।

    महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर जोर

    मुंबई महानगर में महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से BMC के माध्यम से महिला बचत समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, उनके व्यवसाय को गति देने और उन्हें अधिक व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए BMC की ओर से अलग-अलग नवाचारपूर्ण और व्यवसाय-केंद्रित पहल की जाती हैं।

    इसी प्रयास के तहत इस वर्ष गणेशोत्सव के अवसर पर ‘मोदक महोत्सव 2026’ आयोजित किया गया है।

    गणेशोत्सव के साथ महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

    BMC के अनुसार, इस पहल के माध्यम से महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण मोदक नागरिकों को उपलब्ध होंगे। साथ ही, मुंबईकरों को गणेशोत्सव की खुशियों के साथ महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का अवसर भी मिलेगा।

    इस संबंध में निदेशक (नियोजन) डॉ. (श्रीमती) प्राची जांभेकर ने जानकारी दी कि महिला बचत समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके व्यवसाय को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है।

    मीनल तुर्डे के मार्गदर्शन में आयोजन

    यह उपक्रम महिला व बालकल्याण समिति की अध्यक्षा श्रीमती मीनल तुर्डे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।

    BMC की ओर से मुंबईकरों से अपील की गई है कि वे ‘मोदक महोत्सव 2026’ को उत्स्फूर्त प्रतिसाद दें और महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को प्रोत्साहित करें।

    मोदक की होम डिलीवरी कैसे मिलेगी?

    • मोदक: उकडी के और तले हुए मोदक
    • ऑनलाइन पंजीकरण: https://shgeshop.com
    • होम डिलीवरी शुरू: 14 सितंबर 2026 से
    • पंजीकरण: डिलीवरी से कम से कम एक दिन पहले
    • डिलीवरी क्षेत्र: केवल मुंबई
    • उपलब्धता: पूरे गणेशोत्सव काल में
    • तैयारी: BMC द्वारा संचालित/आर्थिक सहायता प्राप्त महिला बचत समूह
    • आयोजन: ‘मोदक महोत्सव 2026’
    • मार्गदर्शन: महिला व बालकल्याण समिति अध्यक्षा श्रीमती मीनल तुर्डे
    • जानकारी: BMC नियोजन विभाग तथा निदेशक (नियोजन) डॉ. (श्रीमती) प्राची जांभेकर
  • मुंबई रेलवे में गुटखा तस्करी का आरोप, दो GRP कांस्टेबल निलंबित; ट्रेनों से खेप पहुंचाने की जांच

    मुंबई रेलवे में गुटखा तस्करी का आरोप, दो GRP कांस्टेबल निलंबित; ट्रेनों से खेप पहुंचाने की जांच

    मुंबई रेलवे में प्रतिबंधित गुटखा तस्करी के आरोप में दो GRP कांस्टेबल निलंबित। गुजरात से ट्रेनों के जरिए खेप पहुंचाने के आरोपों की जांच जारी।

    मुंबई: मुंबई रेलवे पुलिस ने प्रतिबंधित गुटखे की कथित तस्करी में मदद करने के आरोप में दो कांस्टेबलों को निलंबित किया है। 7 सितंबर को की गई इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा केवल दो पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। आरोप है कि गुजरात से मुंबई तक गुटखे की खेप पहुंचाने के लिए रेलवे की लंबी दूरी की ट्रेनों और उनके भंडारण क्षेत्रों का इस्तेमाल किया जाता था।

    निलंबित पुलिसकर्मियों की पहचान अनिल गुजर, बोरीवली रेलवे पुलिस थाने में तैनात कांस्टेबल और तुषार ठाकुर, वसई रेलवे पुलिस थाने में तैनात कांस्टेबल के रूप में हुई है। वरिष्ठ रेलवे पुलिस अधिकारी के अनुसार, दोनों के खिलाफ एक नागरिक की शिकायत मिलने के बाद विभागीय जांच की गई थी। जांच में उनकी कथित भूमिका सामने आने के बाद मुंबई रेलवे पुलिस आयुक्त एम. राकेश कलासागर ने निलंबन की कार्रवाई की।

    शिकायत से सामने आया कथित तस्करी नेटवर्क

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दोनों पुलिसकर्मी गुटखा आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में थे और प्रतिबंधित माल की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद करते थे। जांच के दौरान उनकी कथित भूमिका सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई की गई।

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    मामले को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि सूत्रों ने आरोप लगाया है कि केवल पुलिसकर्मियों की भूमिका नहीं थी। कथित तौर पर कुछ भंडारण ठेकेदारों को भुगतान कर खेपों की आवाजाही आसान बनाई जाती थी। कुछ रेलवे सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मियों को भी नियमित रूप से खेप गुजरने देने के लिए भुगतान किए जाने का आरोप है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच में संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होना बाकी है।

    AC कोच के भंडारण हिस्से में छिपाने का आरोप

    जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक गुटखे के पैकेट काले बैगों में रखकर ट्रेनों में छिपाए जाते थे। एक वीडियो में वातानुकूलित कोच के भंडारण हिस्से में गुटखे से भरे बैग दिखाई देने का दावा किया गया है।

    आरोप है कि कुछ खेपें वसई या बोरीवली से ट्रेनों में चढ़ाई जाती थीं और बाद में बांद्रा टर्मिनस पहुंचने के बाद टैक्सी या दूसरे वाहनों के जरिए आगे भेजी जाती थीं। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के इस्तेमाल की भी बात सामने आई है।

    जिन ट्रेनों के नाम इस मामले से जुड़े आरोपों में सामने आए हैं, उनमें सूर्यनगरी एक्सप्रेस, गोल्डन टेंपल मेल, गरीब रथ एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, भावनगर एक्सप्रेस और हरिद्वार एक्सप्रेस शामिल हैं। हालांकि, इन सभी ट्रेनों के जरिए नियमित रूप से गुटखा तस्करी होने की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    जुलाई में 320 किलो गुटखा पकड़ा गया था

    इस कार्रवाई से पहले 30 जुलाई 2026 को बोरीवली रेलवे स्टेशन पर प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। रेलवे विजिलेंस ने बांद्रा टर्मिनस-अजमेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के कोच एस-2 से करीब 320 किलोग्राम तंबाकू, पान मसाला और गुटखा उत्पाद जब्त किए थे। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.70 लाख रुपये बताई गई थी। एक व्यक्ति को पकड़े जाने के बाद आरोपी और जब्त माल को रेलवे पुलिस के हवाले किया गया था।

    हालांकि, जुलाई में पकड़ी गई इस खेप और सितंबर में निलंबित किए गए दोनों कांस्टेबलों के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही गिरोह या नेटवर्क की कार्रवाई के रूप में देखना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    GRP के साथ RPF की भूमिका पर भी सवाल

    मौजूदा आरोपों में कुछ रेलवे सुरक्षा बल कर्मियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख है। ऐसे में जांच का एक अहम सवाल यह है कि यदि प्रतिबंधित सामान नियमित रूप से रेलवे के जरिए पहुंच रहा था, तो सुरक्षा और जांच की अलग-अलग व्यवस्थाओं के बावजूद वह लगातार कैसे आगे बढ़ता रहा।

    रेलवे पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की जिम्मेदारियां अलग हैं। GRP राज्य पुलिस व्यवस्था का हिस्सा होकर रेलवे परिसर में अपराध और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभालती है, जबकि RPF रेलवे संपत्ति और यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारियां निभाती है। इसलिए दोनों एजेंसियों से जुड़े किसी भी कर्मचारी की कथित मिलीभगत की पुष्टि होने पर मामला सिर्फ तस्करी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल भी उठेगा।

    मुंबई रेलवे में पहले भी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई

    मुंबई रेलवे पुलिस में पिछले वर्ष भी पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामले सामने आए थे। सितंबर 2025 में पांच महीनों के भीतर 13 GRP कर्मियों को यात्रियों से कथित जबरन वसूली के आरोप में निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कार्रवाई मुंबई सेंट्रल, दादर, कुर्ला, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, ठाणे, कल्याण और पनवेल जैसे स्टेशनों से जुड़े मामलों में हुई थी।

    इन मामलों में यात्रियों के सामान की जांच के दौरान कथित तौर पर उन्हें ऐसे कमरों में ले जाने की शिकायतें सामने आई थीं, जहां सीसीटीवी निगरानी नहीं थी। बाद में रेलवे पुलिस ने सामान की जांच सीसीटीवी की निगरानी में करने और प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए दिशानिर्देशों पर काम किया था।

    इसी दौरान वसई रेलवे स्टेशन से जुड़े एक मामले में तीन GRP कांस्टेबलों को भी कथित वसूली के आरोप में निलंबित किया गया था।

    हालांकि, इन पुराने मामलों और वर्तमान गुटखा तस्करी मामले के बीच कोई सीधा संबंध आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।

    महाराष्ट्र में गुटखा प्रतिबंधित क्यों है?

    गुटखा और तंबाकू-युक्त ऐसे खाद्य उत्पादों पर महाराष्ट्र में प्रतिबंध लंबे समय से लागू है। प्रतिबंध का आधार खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत खाद्य पदार्थों में तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल पर रोक है। इसलिए मामला केवल अवैध बिक्री का नहीं, बल्कि प्रतिबंधित उत्पाद के निर्माण, भंडारण, परिवहन और वितरण से भी जुड़ सकता है।

    गुटखा स्वास्थ्य के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और कैंसर अनुसंधान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल मुंह और अन्य कैंसर सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम

    दो कांस्टेबलों के निलंबन के बाद जांच के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। क्या कथित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान हुई है? क्या भंडारण ठेकेदारों से पूछताछ की जा रही है? क्या किसी RPF या अन्य सुरक्षा कर्मचारी की भूमिका की औपचारिक जांच हो रही है? क्या जुलाई में पकड़ी गई 320 किलो की खेप और मौजूदा मामले के बीच कोई संबंध सामने आया है?

    इसके अलावा, जिन ट्रेनों के नाम जांच से जुड़े आरोपों में सामने आए हैं, उनके सीसीटीवी फुटेज, स्टेशन स्तर के रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी मामले की दिशा स्पष्ट कर सकती है।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दो GRP कांस्टेबलों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि कथित व्यापक नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case में समझौते के बाद दोषसिद्धि खत्म करने का रास्ता कैसे खुलता है? Bombay HC के 2019 फैसले और 2026 के Supreme Court आदेश से समझिए।

    मुंबई: चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी समझौते से राहत मिल सकती है। बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 अक्टूबर 2019 के एक फैसले में ललिता कमल व्यास की दोषसिद्धि और उसके खिलाफ पारित निचली अदालतों के आदेश रद्द कर दिए गए थे। इस पुराने फैसले की कानूनी अहमियत अब इसलिए फिर सामने आती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2025 और 2026 में भी चेक अनादरण के मामलों में दोषसिद्धि के बाद समझौते को स्वीकार करते हुए राहत दी है।

    ललिता कमल व्यास मामले में क्या हुआ था?

    ललिता कमल व्यास को मुंबई के अंधेरी स्थित 48वें महानगरीय मजिस्ट्रेट न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। यह मामला C.C. No. 4281/SS/2017 से संबंधित था। 8 मार्च 2018 के इस आदेश को चुनौती दी गई, लेकिन 19 जनवरी 2019 को सत्र न्यायालय ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और ललिता कमल व्यास के बीच विवाद आपसी समझौते से समाप्त हो गया। दोनों पक्षों ने 1 अक्टूबर 2019 को समझौता शर्तें और सहमति पत्र तैयार किया। शिकायतकर्ता की ओर से शपथपत्र भी दिया गया, जिसमें उसने आरोपी के खिलाफ आगे कोई शिकायत या दावा नहीं होने की बात कही।

    शिकायतकर्ता अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ और समझौते की पुष्टि की। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत और सत्र न्यायालय के आदेशों को रद्द करते हुए ललिता कमल व्यास को धारा 138 के अपराध से बरी कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे ने 4 अक्टूबर 2019 को सुनाया था।

    क्या दोषसिद्धि के बाद भी चेक बाउंस मामले में समझौता हो सकता है?

    यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।

    परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत धारा 138 का अपराध समझौते के जरिए समाप्त किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि मामला केवल इसलिए खत्म होने की संभावना से बाहर नहीं हो जाता कि आरोपी को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।

    हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच निजी समझौता होते ही दोषसिद्धि अपने आप समाप्त हो जाती है। समझौते को न्यायिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाना जरूरी है और अदालत के सामने पक्षों की सहमति तथा समझौते की शर्तों को रिकॉर्ड पर लाना महत्वपूर्ण होता है।

    2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही सिद्धांत दोहराया

    इस कानूनी स्थिति को अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने और स्पष्ट किया।

    Gian Chand Garg बनाम Harpal Singh मामले में आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत की दोषसिद्धि को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई। इसके बाद 6 अप्रैल 2025 को शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हुआ।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 147 के कारण धारा 138 का अपराध समझौते योग्य है और पक्षों के स्वैच्छिक समझौते की स्थिति में कार्यवाही को उचित चरण पर समाप्त किया जा सकता है। अदालत ने शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण और अंतिम समझौते के रूप में राशि स्वीकार किए जाने के बाद दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।

    2026 का सुप्रीम कोर्ट फैसला: जेल जाने के बाद भी मिली राहत

    इस कानूनी स्थिति का सबसे ताजा और महत्वपूर्ण उदाहरण Parsharvanath Weld Wires Pvt. Ltd. बनाम State of Chhattisgarh है।

    इस मामले में धारा 138 के तहत दोषसिद्धि के बाद आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा मिली थी। सत्र न्यायालय और बाद में हाई कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

    मामला यहां तक पहुंच गया कि कंपनी के निदेशक को 23 अप्रैल 2026 को सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया। इसके केवल दो दिन बाद, 25 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये देकर पूरे विवाद का अंतिम निपटारा किया गया।

    निचली अदालत और हाई कोर्ट ने अंतिम दोषसिद्धि के बाद मामले को दोबारा खोलने पर राहत देने से इनकार किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को समझौता स्वीकार करते हुए धारा 138 के अपराध को समझौते के जरिए समाप्त किया और दोषसिद्धि तथा सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्रीय जेल, रायपुर के अधीक्षक को आरोपी को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया।

    इसका सीधा मतलब क्या है?

    इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि हो जाने के बाद भी समझौते का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता।

    लेकिन इसे स्वतः मिलने वाली राहत नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता की स्वैच्छिक सहमति, समझौते की वास्तविक शर्तें, भुगतान और मामले की न्यायिक स्थिति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत ही यह तय करती है कि समझौते को स्वीकार कर दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है या नहीं।

    2025 के Gian Chand Garg फैसले और 2026 के Parsharvanath Weld Wires फैसले ने इस बात को और मजबूत किया है कि केवल इस आधार पर समझौते को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि धारा 138 के मामले में दोषसिद्धि पहले ही अंतिम स्तर तक पहुंच चुकी है।

    ललिता कमल व्यास के फैसले की आज क्यों चर्चा हो रही है?

    ललिता कमल व्यास का मामला स्वयं 2026 का नया फैसला नहीं है। बॉम्बे हाई कोर्ट का मूल निर्णय 4 अक्टूबर 2019 का है। हाल में कानूनी वेबसाइटों पर इस पुराने फैसले को दोबारा प्रकाशित या सूचीबद्ध किए जाने के कारण यह मामला फिर सामने आया है।

    इसकी मौजूदा प्रासंगिकता इसलिए है क्योंकि 2025 और 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने उसी व्यापक कानूनी सिद्धांत को आगे स्पष्ट किया है—यानी धारा 138 के मामले में स्वैच्छिक समझौते के बाद, उचित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है।

    क्या हर चेक बाउंस मामले में समझौते के बाद सजा खत्म हो जाएगी?

    नहीं। ऐसा कोई स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं है।

    समझौता होने के बाद भी उसे अदालत के समक्ष उचित तरीके से प्रस्तुत करना और न्यायिक आदेश प्राप्त करना जरूरी है। इसके अलावा, समझौते की शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं और शिकायतकर्ता की सहमति वास्तविक और स्वैच्छिक है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इसलिए धारा 138 के किसी मामले में केवल निजी समझौता हो जाने को अपने आप दोषसिद्धि समाप्त होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

    आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

    चेक अनादरण के मामलों में मुकदमा लंबा चलने के बावजूद विवाद को समझौते से समाप्त करने का रास्ता उपलब्ध रह सकता है। यहां तक कि दोषसिद्धि के बाद भी अदालत के समक्ष समझौते के आधार पर राहत मांगी जा सकती है।

    ललिता कमल व्यास का 2019 का बॉम्बे हाई कोर्ट फैसला और 2025-26 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले मिलकर यह दिखाते हैं कि धारा 138 के मामलों में समझौता केवल मुकदमे की शुरुआती अवस्था तक सीमित विकल्प नहीं है।

    हालांकि, अंतिम राहत अदालत के आदेश पर निर्भर करती है और प्रत्येक मामले के तथ्य तथा समझौते की शर्तें अलग हो सकती हैं।

  • गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    मुंबई के गोरेगांव में कपड़े और निजी सामान के विवाद में 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की है।

    मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में कपड़े और निजी सामान इस्तेमाल करने को लेकर दो दोस्तों के बीच हुआ विवाद जानलेवा हो गया। पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय सूरज शंकर डोले पर उसके दोस्त बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे ने कथित तौर पर पहले हाथों से हमला किया और फिर फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उसके चेहरे पर मार दिया। गंभीर चोटों के बाद सूरज की मौत हो गई। आरोपी घटना के बाद मौके से फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

    गोरेगांव पश्चिम में कहां हुई घटना?

    पुलिस के अनुसार, घटना 9 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे गोरेगांव पश्चिम में एसवी रोड पर किंग स्टूडियो के पास, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के सामने हुई। मृतक सूरज डोले मीरा रोड का रहने वाला था और गोरेगांव में पशु देखभाल के क्षेत्र में काम करता था। आरोपी सुबोध वाघमारे भी इसी क्षेत्र में काम करता था।

    कपड़े ही नहीं, बैग और निजी सामान को लेकर था विवाद

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, सूरज कथित तौर पर सुबोध के कपड़े और दूसरी निजी चीजें उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करता था। सुबोध ने यह भी आरोप लगाया कि सूरज उसके कपड़ों से भरा बैग लेकर गया था और मांगने के बावजूद वापस नहीं किया था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

    घटना के समय दोनों के बीच बहस हो रही थी। उनके दोस्त सुधांशु पांडे ने बीच-बचाव करते हुए झगड़े की वजह पूछी। शिकायत के अनुसार, इसी दौरान सुबोध ने सूरज के कपड़े और सामान इस्तेमाल करने की बात कही।

    बहस के बाद पत्थर से चेहरे पर हमला

    एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, बहस के दौरान सूरज ने कथित तौर पर सुबोध को गाली दी। इसके बाद सुबोध ने उस पर हाथों से हमला किया। विवाद बढ़ने पर उसने फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उठाकर सूरज के चेहरे पर वार कर दिया।

    हमले में सूरज को गंभीर चोट लगी और काफी खून बहा। इसके बाद सुबोध मौके से फरार हो गया। बाद में सूरज मृत पाया गया।

    पिता की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज

    मामले में सूरज के पिता शंकर डोले की शिकायत के आधार पर गोरेगांव पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोपी की पहचान बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे के रूप में हुई है। उसकी उम्र 37 वर्ष बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, वह पशु देखभाल का काम करता है और गोरेगांव पश्चिम में फुटपाथ पर रहता है।

    पुलिस ने हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध एफआईआर की रिपोर्ट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2) और 352 का उल्लेख है।

    आरोपी की तलाश जारी

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक मनोज गाडले के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस अब घटना के पूरे घटनाक्रम और आरोपी की तलाश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

    घटना को लेकर उपलब्ध जानकारी में अभी सीसीटीवी फुटेज, हमले में इस्तेमाल पत्थर की बरामदगी या पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट जैसी जानकारियां सामने नहीं आई हैं। इन पहलुओं पर पुलिस की आगे की कार्रवाई से मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास मस्जिद को लेकर विवाद, MMRDA ने दिए मस्जिद हटाने के निर्देश

    मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास मस्जिद को लेकर विवाद, MMRDA ने दिए मस्जिद हटाने के निर्देश

    मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास धार्मिक ढांचे को लेकर विवाद बढ़ा है। MMRDA ने MIAL को तय प्रक्रिया के तहत इसे हटाने के निर्देश दिए हैं।

    मुंबई: विलेपार्ले स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 के पास मौजूद एक मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ गया है। महाराष्ट्र महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 8 सितंबर 2026 के पत्र में कहा कि संबंधित धार्मिक ढांचे के लिए उसकी ओर से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। प्राधिकरण ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसे हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    यह ढांचा टर्मिनल-2 के वीआईपी आगमन और टैक्सी स्टैंड क्षेत्र के पास बनाया गया है। MMRDA के अनुसार संबंधित अधिसूचित क्षेत्र की अंतरिम विकास योजना में सार्वजनिक पूजा स्थल के लिए कोई प्रावधान या निर्धारित भूखंड नहीं है।

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    मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल 2 की ताजा तस्वीर

    MMRDA के पत्र में क्या कहा गया?

    प्राधिकरण ने MIAL से संबंधित ढांचे को हटाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने तथा कार्रवाई की अनुपालन जानकारी देने को कहा है। पत्र में एयरपोर्ट के अधिसूचित क्षेत्र में योजना, विकास, निर्माण और बुनियादी ढांचे के रखरखाव से जुड़ी MIAL की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ढांचा हटाने की कोई निश्चित तारीख आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है।

    3 सितंबर को सोमैया ने उठाया था मामला

    भाजपा नेता किरीट सोमैया ने 3 सितंबर को एयरपोर्ट क्षेत्र का दौरा कर इस ढांचे का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि एयरपोर्ट के पास धार्मिक निर्माण आवश्यक अनुमति के बिना किया गया है और इसे हटाया जाना चाहिए।

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    मुंबई एयरपोर्ट टर्मिनल 2

    सोमैया ने बाद में इस मामले को “मुंबई एयरपोर्ट लैंड जिहाद” बताया। हालांकि “लैंड जिहाद” कोई आधिकारिक कानूनी या प्रशासनिक श्रेणी नहीं है। MMRDA के रिकॉर्ड में मुख्य मुद्दा संबंधित ढांचे की अनुमति और भूमि उपयोग से जुड़ा है।

    क्या मस्जिद तुरंत गिराई जाएगी?

    अभी उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। MMRDA ने MIAL को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए हटाने की कार्रवाई करने को कहा है।

    सोमैया ने करीब दो सप्ताह में कार्रवाई की उम्मीद जताई है, लेकिन इसे प्रशासन की ओर से घोषित अंतिम तारीख नहीं माना जा सकता।

    प्राथमिकी को लेकर क्या स्थिति है?

    सोमैया ने संबंधित ट्रस्टियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। इस मामले में प्राथमिकी को लेकर कोई जानकारी नहीं है।

    एयरपोर्ट पर यात्रियों को क्या असर होगा?

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इस कार्रवाई के कारण टर्मिनल-2 की उड़ानों, यात्रियों की आवाजाही या सामान्य एयरपोर्ट संचालन पर असर पड़ने की कोई पुष्टि नहीं है।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास निर्माण को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल जरूर उठाए गए हैं, लेकिन उपलब्ध MMRDA जानकारी में इस ढांचे को एयरपोर्ट सुरक्षा के लिए खतरा घोषित नहीं किया गया है।

    अब आगे क्या होगा?

    अब मुख्य रूप से MIAL की कार्रवाई पर नजर रहेगी। उसे MMRDA के निर्देश के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी है और कार्रवाई की अनुपालन जानकारी प्राधिकरण को देनी है।

    इस मामले में आगे की तस्वीर हटाने की वास्तविक तारीख, MIAL की कार्रवाई और संबंधित पुलिस कार्रवाई स्पष्ट होने के बाद सामने आएगी।

  • महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र हाउसिंग सोसायटी के नए नियम लागू, मेंटेनेंस से पुनर्विकास तक बड़ा बदलाव

    महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों के लिए नए नियम लागू हैं। मेंटेनेंस, बकाया, पुनर्विकास, निधि, बैठक और नामांकन से जुड़े अहम बदलाव जानिए।

    मुंबई: महाराष्ट्र की सहकारी हाउसिंग सोसायटियों के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने जून 2026 में सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं के लिए अलग नियमों वाला नया अध्याय लागू किया है। इसके तहत मेंटेनेंस वसूली, बकाया पर ब्याज, अलग-अलग निधियों में योगदान, सामान्य सभा, पुनर्विकास और बकाया राशि की वसूली जैसी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट किया गया है। सहकार आयुक्त एवं निबंधक की आधिकारिक वेबसाइट पर 22 जून 2026 को गृहनिर्माण नियम 106-सी की अधिसूचना दर्ज है।

    लेकिन फ्लैट मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। नए नियम लागू हो चुके हैं, जबकि संशोधित आदर्श उपविधियों का अलग मसौदा अभी अंतिम रूप की प्रक्रिया में है। सहकार आयुक्त की वेबसाइट पर 13 और 18 अगस्त 2026 के संशोधित आदर्श उपविधियों के मसौदे उपलब्ध हैं।

    मेंटेनेंस से जुड़े खर्च का हिसाब बदलेगा

    नए नियमों में सोसायटी के अलग-अलग खर्चों को बांटने का आधार स्पष्ट किया गया है। सेवा शुल्क सदस्यों के बीच समान रूप से बांटा जा सकता है, जबकि संपत्ति कर, पानी, बीमा, मरम्मत और कुछ अन्य खर्चों के लिए अलग-अलग आधार निर्धारित हैं। मरम्मत एवं रखरखाव निधि के लिए सामान्य सभा द्वारा तय राशि कम से कम निर्माण लागत के सालाना 0.75 प्रतिशत के बराबर होनी चाहिए। डूबत निधि के लिए न्यूनतम 0.25 प्रतिशत का प्रावधान है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि हर सोसायटी अगले महीने से मनमाने तरीके से मेंटेनेंस बढ़ा सकती है। शुल्क किस मद में है और उसके लिए नियमों में कौन सा आधार तय है, यह देखना जरूरी होगा।

    फ्लैट खाली रहने पर कितना शुल्क लगेगा?

    फ्लैट का मालिक खुद वहां नहीं रहता और उसे किसी अन्य उपयोग में देता है तो गैर-निवास शुल्क को लेकर भी सीमा तय की गई है। यह शुल्क सेवा शुल्क के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसे पूरे मेंटेनेंस बिल का 10 प्रतिशत समझना सही नहीं होगा।

    यानी यदि किसी सोसायटी में सेवा शुल्क और अन्य मदों को अलग-अलग दिखाया गया है तो गैर-निवास शुल्क की गणना पूरे बिल पर 10 प्रतिशत लगाकर नहीं की जानी चाहिए।

    मेंटेनेंस नहीं देने पर 12 प्रतिशत तक ब्याज

    सोसायटी के बकाये पर ब्याज की अधिकतम सीमा 12 प्रतिशत साधारण ब्याज प्रति वर्ष रखी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सोसायटी स्वतः 12 प्रतिशत ब्याज लगाएगी। लागू दर सामान्य सभा द्वारा तय की जानी है और वह निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक नहीं हो सकती।

    बकाया वसूली की प्रक्रिया भी अधिक औपचारिक की गई है। नियम 106-सी के तहत निर्धारित प्रपत्र और दस्तावेजों के आधार पर वसूली प्रमाणपत्र की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इससे सोसायटी के बकाये की वसूली के लिए स्पष्ट प्रशासनिक रास्ता मिलता है।

    समिति कितनी राशि तक खर्च कर सकती है?

    मरम्मत और रखरखाव के खर्च के लिए प्रबंध समिति की वित्तीय सीमा भी सदस्यों की संख्या के अनुसार निर्धारित की गई है। 25 तक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए यह सीमा 1 लाख रुपये, 26 से 50 सदस्यों के लिए 2 लाख रुपये, 51 से 100 सदस्यों के लिए 3 लाख रुपये, 101 से 1,000 सदस्यों के लिए 4 लाख रुपये और 1,000 से अधिक सदस्यों वाली सोसायटी के लिए 5 लाख रुपये है। इससे अधिक के बड़े खर्च में सामान्य सभा की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

    पुनर्विकास के लिए भी प्रक्रिया तय

    पुनर्विकास अब केवल समिति और विकासक के बीच की बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा। नए नियमों में पुनर्विकास से जुड़ी सामान्य सभा की प्रक्रिया, सूचना और उपस्थिति से संबंधित प्रावधान रखे गए हैं।

    पुनर्विकास की बैठक के लिए 14 स्पष्ट दिनों की सूचना और कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई के बराबर गणपूर्ति का प्रावधान है। विकासक या ठेकेदार के चयन के लिए कुल सदस्यों के 51 प्रतिशत समर्थन की आवश्यकता बताई गई है। दोनों आंकड़ों को एक ही चीज समझना गलत होगा—दो-तिहाई गणपूर्ति और 51 प्रतिशत समर्थन अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।

    स्व-पुनर्विकास के मामले में भी उधारी की सीमा को लेकर विशेष प्रावधान है। नियमों के अनुसार निर्धारित परिस्थितियों में सरकारी मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता द्वारा तय भूमि मूल्य के 10 गुना तक उधारी की सीमा का प्रावधान है। यह बैंक से स्वतः 10 गुना कर्ज मिलने की गारंटी नहीं है।

    मृत सदस्य के बाद फ्लैट का क्या होगा?

    नामांकन को लेकर भी फ्लैट मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हैं। किसी सदस्य की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को प्रक्रिया के अनुसार अस्थायी सदस्यता मिल सकती है, लेकिन केवल नामांकित व्यक्ति होने से संपत्ति का अंतिम स्वामित्व स्वतः उसके नाम नहीं हो जाता।

    जहां उत्तराधिकार को लेकर विवाद हो, वहां संबंधित कानूनी दस्तावेज और उत्तराधिकार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। नए प्रावधानों में पंजीकृत पारिवारिक व्यवस्था के माध्यम से कुछ परिस्थितियों में हस्तांतरण की प्रक्रिया को भी जगह दी गई है।

    सामान्य सभा में ऑनलाइन भागीदारी का रास्ता

    नए नियमों में सामान्य सभा की बैठकों में वीडियो सम्मेलन या ऐसे दृश्य-श्रव्य माध्यम से भागीदारी की व्यवस्था को मान्यता दी गई है, जिसमें सदस्य की पहचान और बैठक का समयबद्ध रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। इससे दूसरे शहर या विदेश में रहने वाले सदस्यों के लिए भागीदारी आसान हो सकती है।

    अब संशोधित आदर्श उपविधियों की बारी

    नए नियम लागू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण संशोधित आदर्श उपविधियों का अंतिम रूप है। राज्य सरकार ने 2026 में इनका विस्तृत मसौदा जारी कर सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं। आधिकारिक पोर्टल पर इसका मसौदा 13 और 18 अगस्त को सूचीबद्ध है।

    सुझाव और आपत्तियां देने की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 थी। 10 सितंबर की ताजा कानूनी जानकारी के अनुसार मसौदा अब अंतिम मंजूरी और राजपत्र में प्रकाशन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है तथा अक्टूबर 2026 में लागू होने की संभावना बताई गई है। हालांकि अक्टूबर की तारीख को अभी अंतिम सरकारी अधिसूचना के रूप में नहीं माना जा सकता।

    एक बार संशोधित आदर्श उपविधियां औपचारिक रूप से जारी होने के बाद सोसायटियों को उन्हें अपनाने की प्रक्रिया से गुजरना होगा। मौजूदा नियमों में आदर्श उपविधियां प्रकाशित होने के तीन महीने के भीतर उन्हें अपनाने का प्रावधान है।

    इसलिए महाराष्ट्र के फ्लैट मालिकों और सोसायटी समितियों के लिए अभी सबसे जरूरी बात यह है कि जून 2026 में लागू हुए नए वैधानिक नियमों और अभी अंतिम रूप की प्रतीक्षा कर रहे संशोधित आदर्श उपविधियों को एक ही चीज न समझें। आने वाले महीनों में उपविधियों की अंतिम अधिसूचना के बाद पार्किंग, शिकायत निवारण, विद्युत वाहन चार्जिंग, पुनर्विकास और सोसायटी के दैनिक संचालन से जुड़े कई प्रावधानों का व्यावहारिक असर और स्पष्ट होगा।

  • Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    दिवा-मुंब्रा के बीच भीड़भरी लोकल से महिला नीचे गिर गई। सिग्नल पर ट्रेन रुकी होने से जान बची। वायरल VIDEO ने लोकल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Mumbai local train में सुबह की भीड़ किस तरह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, इसका ताजा मामला गुरुवार सुबह दिवा-मुंब्रा के बीच सामने आया। CSMT की ओर जा रही भीड़भाड़ वाली लोकल से एक महिला यात्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन सिग्नल के कारण रुकी हुई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। महिला रेलवे ट्रैक के किनारे बने नाले में गिरकर फंस गई और उसे मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    सिग्नल पर रुकी थी ट्रेन, तभी हुआ हादसा

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सुबह मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में काफी भीड़ थी। दिवा और मुंब्रा के बीच ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी। इसी दौरान दरवाजे के पास मौजूद महिला यात्री भीड़ के दबाव में अपना संतुलन खो बैठी और ट्रेन से नीचे जा गिरी।

    महिला रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद नाले में जा गिरी। इसी वजह से वह सीधे ट्रेन के पहियों की चपेट में आने से बच गई। घटना के दौरान एक यात्री मोबाइल फोन से वीडियो बना रहा था, जिसके कैमरे में महिला के नीचे गिरने का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।

    घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला को मामूली चोटें आई हैं। उसकी पहचान और अस्पताल में इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    दिवा-मुंब्रा का यह रेल मार्ग फिर सवालों के घेरे में

    महिला के लोकल से गिरने की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दिवा-मुंब्रा रेल मार्ग पहले भी इसी तरह की दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।

    9 जून 2025 को इसी इलाके में दो लोकल ट्रेनों के बीच से गुजरते समय दरवाजे पर खड़े यात्रियों के गिरने की भीषण दुर्घटना हुई थी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद ट्रेन की भीड़, दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करने और इस हिस्से के तीखे मोड़ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे।

    उस हादसे की जांच के दौरान दुर्घटना के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। रेलवे की जांच में यात्रियों के सामान और आपस में टकराने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जबकि पुलिस जांच में ट्रैक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की गई।

    एक साल बाद भी भीड़ से राहत क्यों नहीं?

    2025 की दुर्घटना के बाद रेलवे की ओर से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर सेवाएं बढ़ाने और यात्री सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए। सरकारी रिकॉर्ड में दिवा के लिए 14 और मुंब्रा के लिए 16 नई उपनगरीय सेवाओं का उल्लेख किया गया था।

    इसके बावजूद 2026 में भी दिवा-मुंब्रा और आसपास के मार्गों पर सुबह के व्यस्त समय में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं। डोंबिवली से मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में भीड़ का एक कारण दिवा-मुंब्रा क्षेत्र से आने वाले यात्रियों की संख्या को भी बताया गया है।

    यही वजह है कि आज की घटना के बाद सिर्फ यह सवाल नहीं है कि महिला लोकल से कैसे गिरी, बल्कि यह भी सवाल है कि अतिरिक्त सेवाओं और सुरक्षा उपायों के बावजूद peak hours में यात्रियों को दरवाजे तक पहुंचने वाली स्थिति क्यों बन रही है।

    Automatic Door वाली लोकल से क्या बदलेगा?

    2025 की दुर्घटना के बाद मुंबई में automatic door वाली non-AC लोकल का विकल्प भी तेजी से आगे बढ़ा। ऐसी लोकल में दरवाजे अपने आप बंद होने की व्यवस्था होगी, जिससे ट्रेन चलने के दौरान यात्रियों के दरवाजे पर खड़े रहने या बाहर लटकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।

    रेलवे की ओर से नए non-AC automatic-door rake को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की रोजाना जरूरत को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की नियमित उपलब्धता और peak-hour capacity अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    सिर्फ चेतावनी से नहीं रुकेगा खतरनाक सफर

    मुंबई की उपनगरीय रेलवे में यात्रियों को footboard पर यात्रा नहीं करने की लगातार चेतावनी दी जाती है। स्टेशनों पर घोषणाएं, जागरूकता अभियान और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

    लेकिन दिवा-मुंब्रा के बीच हुई आज की घटना एक अलग चुनौती सामने रखती है। जब ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हो और यात्रियों का दबाव दरवाजे तक पहुंच जाए, तब सिर्फ चेतावनी के बजाय भीड़ प्रबंधन, पर्याप्त लोकल सेवाएं और सुरक्षित कोच व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।

    आज महिला की जान इसलिए बच गई क्योंकि ट्रेन उस समय सिग्नल पर रुकी हुई थी। वायरल वीडियो ने इस घटना को सामने ला दिया है, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—दिवा-मुंब्रा जैसे संवेदनशील रेल मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा देने के लिए रेलवे अगला ठोस कदम कब उठाएगा?

  • 36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    गोरेगांव में वनराई पुलिस ने 36 वर्षीय रोहित सावंत को तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर 35 मामले दर्ज हैं।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में आगामी उत्सव से पहले वनराई पुलिस ने अवैध हथियार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 36 वर्षीय रोहित अविनाश सावंत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके पास से एक तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। खास बात यह है कि आरोपी के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

    यह कार्रवाई 9 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे और एटीसी पथक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि रोहित सावंत शिवधाम हिंदू श्मशानभूमि के बाहर, पश्चिम द्रुतगति महामार्ग की दक्षिण दिशा में गोरेगांव पूर्व में मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में दो पुलिस टीमें तैयार की गईं और मौके पर जाल बिछाया गया।

    कमर के पास मिला तमंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी मौके पर दिखाई देने के बाद टीम ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसकी पहचान रोहित अविनाश सावंत, उम्र 36 वर्ष, निवासी मलपा डोंगरी नंबर-1, चकाला, अंधेरी पूर्व के रूप में हुई।

    तलाशी के दौरान उसकी कमर के पास लोहे की नली और काली मुठ वाला एक तमंचा मिला। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये बताई है। वहीं दाहिनी जेब से तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस के अनुसार हथियार और कारतूस की कुल अनुमानित कीमत 58 हजार रुपये है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी के पास हथियार रखने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद वनराई पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 675/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    आरोपी पर पहले से 35 मामले

    पुलिस के अनुसार रोहित सावंत के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज हैं। हालांकि पुलिस की ओर से जारी जानकारी में इन मामलों की धाराओं और उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    मौजूदा मामले में पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ हथियार बरामदगी के संबंध की भी जांच कर रही है। हथियार उसे कहां से मिला और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

    आगामी उत्सव के दौरान किस काम के लिए लाया था हथियार?

    इस मामले का सबसे अहम पहलू आगामी उत्सव को लेकर पुलिस की जांच है। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है और यह कार्रवाई उत्सव शुरू होने से कुछ दिन पहले हुई है। पुलिस के मुताबिक अब यह पता लगाया जा रहा है कि रोहित सावंत यह अवैध हथियार आगामी उत्सव की अवधि में किस उद्देश्य से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी द्वारा किसी विशेष वारदात की तैयारी या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले हथियार बरामदगी को किसी संभावित हमले या साजिश से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    इस कार्रवाई में पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग, पुलिस उपायुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग-3 और सहायक पुलिस आयुक्त दिंडोशी के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई।

    वनराई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल रऊफ शेख, पुलिस निरीक्षक सुभाषचंद्र पोस्टुरे, पुलिस निरीक्षक संदीप वाघमारे तथा पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे की टीम ने कार्रवाई में भूमिका निभाई। पुलिसकर्मी 01920/सालुंखे, 041277/तेली और पुलिस सिपाही 140073/शिंदे भी कार्रवाई में शामिल रहे।

    मामले में वनराई पुलिस ने अपराध क्रमांक 675/26 दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(अ) और 135 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब हथियार की आपूर्ति, आरोपी के पुराने मामलों और हथियार रखने के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

  • गणपति आगमन में मुंबई में 2 मौतें, 7 घायल; उल्हासनगर में बिना अनुमति यात्रा पर केस

    गणपति आगमन में मुंबई में 2 मौतें, 7 घायल; उल्हासनगर में बिना अनुमति यात्रा पर केस

    मुंबई में गणपति आगमन के दौरान भुलेश्वर में 2 मौत और 5 घायल हुए, कुर्ला में 2 घायल हुए। उल्हासनगर में बिना अनुमति आगमन यात्रा पर केस दर्ज।

    मुंबई: मुंबई और आसपास के इलाकों में गणपति आगमन के दौरान हादसों और नियमों के उल्लंघन की घटनाओं ने उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भुलेश्वर में 22 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा गिरने से दो लोगों की मौत और पांच घायल हुए थे। इसके बाद कुर्ला में 15 फुट की प्रतिमा गिरने से दो लोग घायल हुए। इसी बीच उल्हासनगर में ठाणे पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा के बावजूद बिना अनुमति गणेश आगमन यात्रा निकालने पर मंडल के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    भुलेश्वर में प्रतिमा गिरने से दो मौतें

    22 अगस्त की रात दक्षिण मुंबई के भुलेश्वर इलाके में ‘भुलेश्वरचा राजा’ की करीब 22 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा आगमन यात्रा के दौरान हादसे का शिकार हो गई। प्रतिमा को भायखला से भुलेश्वर ले जाया जा रहा था। जय अंबे चौक के पास प्रतिमा का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा।

    हादसे में संकेत नेवशे और ब्रिजेश हेमंत जोशी की मौत हुई, जबकि पांच लोग घायल हुए। घायलों में पांच और सात वर्ष की दो बच्चियां भी शामिल थीं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था।

    प्रतिमा के ढांचे और उसके सहारे से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नट-बोल्ट और संरचनात्मक मजबूती से जुड़े पहलुओं की भी जांच के दायरे में रखा गया। लेकिन हादसे का अंतिम कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    कुर्ला में 15 फुट की प्रतिमा गिरी

    8 सितंबर को कुर्ला में धारावी के प्रेम नगर स्थित मंडल के लिए लाई जा रही करीब 15 फुट की गणेश प्रतिमा शीटळ तलाव के पास ट्रॉली से गिर गई। जानकारी के अनुसार ट्रॉली के गतिरोधक से गुजरते समय प्रतिमा का संतुलन बिगड़ा।

    हादसे में दो लोग घायल हो गए। क्षतिग्रस्त प्रतिमा का बाद में विसर्जन कर दिया गया।

    भुलेश्वर और कुर्ला की घटनाओं को मिलाकर मुंबई में गणपति आगमन के दौरान सामने आए इन दो प्रमुख प्रतिमा हादसों में दो लोगों की मौत और सात लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    उल्हासनगर में बिना अनुमति गणेश आगमन यात्रा पर केस

    इसी बीच उल्हासनगर में गणेश आगमन यात्रा के दौरान अनुमति और निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार ठाणे पुलिस आयुक्त की ओर से लागू निषेधाज्ञा के बावजूद प्रसिद्ध गणेश मित्र मंडल, उल्हासनगर-1 ने बिना अनुमति आगमन यात्रा निकाली।

    पुलिस सिपाही बाबासाहेब पोटे की शिकायत पर मंडल के अध्यक्ष महेश धुंडलोदिया (49) सहित पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) और 135 के तहत कार्रवाई की है।

    पुलिस के अनुसार 8 सितंबर को शाम करीब 5 बजे से रात 10 बजे के बीच सी क्लॉक टॉवर चौक से साधु वासवानी चौक, बालाजी मेडिकल होते हुए सोनारा हॉल तक गणेश आगमन यात्रा निकाली गई। यात्रा में डीजे, ढोल-ताशा और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।

    16 सितंबर तक निषेधाज्ञा लागू

    पुलिस के मुताबिक ठाणे पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा 16 सितंबर तक लागू है। इसके बावजूद बिना अनुमति यात्रा निकालने को लेकर कार्रवाई की गई है। मामले की जांच एपीआई विनोद पाटील कर रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार संबंधित मंडल के खिलाफ पहले भी इस तरह के मामले दर्ज हो चुके हैं।

    अब सुरक्षा के साथ अनुमति व्यवस्था भी सवालों में

    गणपति आगमन से जुड़ी इन घटनाओं में एक तरफ बड़ी प्रतिमाओं के सुरक्षित परिवहन का सवाल सामने आया है, तो दूसरी ओर जुलूस के लिए निर्धारित अनुमति और पुलिस के आदेशों के पालन का मुद्दा भी सामने आया है।

    बड़ी प्रतिमा को सड़क से ले जाते समय उसके ढांचे की मजबूती, परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रॉली, सड़क की स्थिति, गतिरोधक, बिजली के तार और भीड़ से सुरक्षित दूरी जैसे पहलुओं की अनदेखी हादसे का जोखिम बढ़ा सकती है। दूसरी ओर आगमन यात्रा के लिए आवश्यक अनुमति नहीं लेने पर यातायात, ध्वनि और भीड़ नियंत्रण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की स्थिति पैदा हो सकती है।

    यही वजह है कि गणपति आगमन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को केवल प्रतिमा तक सीमित रखने के बजाय प्रतिमा की संरचना, परिवहन, मार्ग, भीड़ नियंत्रण, ध्वनि व्यवस्था और पुलिस अनुमति को एक साथ देखने की जरूरत सामने आ रही है।

    फिलहाल भुलेश्वर और कुर्ला के हादसों की परिस्थितियां अलग हैं, जबकि उल्हासनगर का मामला अनुमति और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से संबंधित है। तीनों घटनाएं अलग-अलग प्रकृति की होने के बावजूद गणपति आगमन के दौरान सुरक्षा और नियमों के पालन की अहमियत को सामने लाती हैं।