साकीनाका मैनहोल हादसे में असलम शेख की पत्नी के खाते में ₹10 लाख जमा हुए। जानिए जांच, BMC कार्रवाई और जिम्मेदारी पर अब तक क्या हुआ।
मुंबई: साकीनाका स्थित खैरानी रोड मैनहोल हादसे में दिवंगत असलम शेख के परिवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से ₹10 लाख की आर्थिक सहायता मिल गई है। यह रकम असलम शेख की पत्नी अंजुम शेख के बैंक खाते में 4 अगस्त 2026 को सीधे जमा की गई थी। 8 सितंबर को उनकी ओर से महानगरपालिका को लिखित आभार पत्र दिए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई।
लेकिन इस आर्थिक मदद के साथ करीब दो महीने पुराने इस मामले में एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—2 जुलाई को खुले मैनहोल में गिरकर हुई असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई और जांच अब किस स्थिति में है?
अंजुम शेख के खाते में कब जमा हुए ₹10 लाख?
BMC के मुताबिक, दुर्घटना के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे ने शेख परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एल विभाग कार्यालय ने परिवार से बैंक खाते और वारसाहक्क से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे कराए।
2 जुलाई को खैरानी रोड पर क्या हुआ था?
2 जुलाई 2026 को साकीनाका के खैरानी रोड पर drainage-related काम के दौरान एक मैनहोल खुला हुआ था। इसी दौरान असलम शेख उसमें गिर गए और तेज पानी के बहाव में बह गए। कई घंटे की तलाश के बाद उनका शव drainage channel से बरामद किया गया। उस समय मौके पर पर्याप्त barricading और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

जानकारी के अनुसार असलम शेख साकीनाका के यादव नगर इलाके के रहने वाले थे। घटना के बाद BMC और पुलिस दोनों स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।
हादसे के बाद BMC ने क्या कार्रवाई की?
हादसे के तत्काल बाद BMC ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके साथ contractor की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।
पुलिस ने भी contractor और उससे जुड़े तीन contractual workers के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन workers को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, जबकि contractor के बारे में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।
इससे मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि manhole maintenance, contractor supervision और civic accountability का मुद्दा बन गया।

जांच में work order को लेकर क्यों उठे सवाल?
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया।
BMC की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई। इसके बाद यह सवाल उठा कि जिस स्थान पर protective grille लगाने का काम चल रहा था, उस काम के लिए औपचारिक work order किसके पास था और काम किसकी अनुमति से शुरू हुआ था।
अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक contractor ने show-cause notice के जवाब में दावा किया कि उसके work order की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उसने किसी को काम नहीं दिया था। इस दावे ने जांच को और जटिल बना दिया।
सबसे गंभीर सवाल—अगर contractor का work order समाप्त हो चुका था, तो मैनहोल पर protective work कौन कर रहा था और वह काम किस अनुमति या निगरानी में किया जा रहा था?
हालांकि यह सवाल जांच के संदर्भ में है और इसे किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और पुलिस की कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेगा।
BMC की जांच में contractor और अधिकारियों की भूमिका पर क्या सामने आया?
जुलाई के अंत तक BMC की inquiry report सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे थे। 31 जुलाई की रिपोर्टों में बताया गया था कि हादसे के करीब एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी।
बाद की रिपोर्टिंग में fact-finding exercise से contractor और संबंधित ward अधिकारियों की ओर से safety और procedural lapses की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि जांच केवल contractor तक सीमित नहीं थी, बल्कि civic supervision की भूमिका भी जांच के दायरे में थी।
हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहने वाला है।
हादसे से पहले ही BMC को High Court से मिल चुकी थी चेतावनी
असलम शेख की मौत से कुछ ही दिन पहले Bombay High Court ने मुंबई में खुले मैनहोल को लेकर BMC को कड़ी फटकार लगाई थी।
अदालत ने monsoon के दौरान खुले मैनहोल से किसी इंसानी जान के जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया था और BMC से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। असलम शेख की मौत के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि जब manhole safety पहले से न्यायिक निगरानी में थी, तब खैरानी रोड पर maintenance work के दौरान सुरक्षा व्यवस्था क्यों विफल हुई।
BMC ने पूरे मुंबई के मैनहोल की safety को लेकर क्या कहा?
हादसे के बाद BMC ने शहर के सभी 26 wards में manhole inspection और सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी।
लेकिन जुलाई में BMC के Additional Municipal Commissioner ने यह भी स्पष्ट किया था कि महानगरपालिका यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि मुंबई के हर manhole chamber में protective safety net मौजूद है, क्योंकि safety-net installation एक continuous process है।
यही बात इस मामले को सिर्फ साकीनाका की एक दुर्घटना से आगे ले जाती है। Mumbai में manhole safety की समस्या में पुराने covers, maintenance के दौरान खोले गए chambers, protective grills, barricading और monitoring—सभी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार मुंबई में करीब 3,400 किलोमीटर का storm-water drain network और 2,081 किलोमीटर का sewer network है, जिसके maintenance के लिए बड़ी संख्या में manholes का इस्तेमाल होता है।
क्या ₹10 लाख मिलने से मामला खत्म हो गया?
नहीं। ₹10 लाख की आर्थिक सहायता परिवार के लिए तत्काल वित्तीय सहारा है, लेकिन इससे पुलिस जांच या प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप समाप्त नहीं होती।
असलम शेख की मौत के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों को अलग-अलग देखना जरूरी है—
- परिवार को आर्थिक सहायता: ₹10 लाख खाते में जमा हो चुके हैं।
- प्रशासनिक कार्रवाई: BMC अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया हुई।
- कानूनी जिम्मेदारी: contractor और workers के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी महत्वपूर्ण है।
इसलिए आर्थिक सहायता को अंतिम कानूनी compensation या मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जवाबदेही स्पष्ट न करे।
