Category: Public Safety

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  • सानपाड़ा LPG ब्लास्ट: गैस लीक के बाद जमा हुई LPG में आग, दो भाई गंभीर; 6 दुकानें क्षतिग्रस्त

    सानपाड़ा LPG ब्लास्ट: गैस लीक के बाद जमा हुई LPG में आग, दो भाई गंभीर; 6 दुकानें क्षतिग्रस्त

    नवी मुंबई के सानपाड़ा में LPG गैस लीक के बाद धमाका हुआ। दो भाई गंभीर रूप से झुलसे, 6 दुकानें और सामने के अस्पताल की कांच की खिड़कियां टूटीं।

    नवी मुंबई: सानपाड़ा सेक्टर-1 में मंगलवार सुबह हुए जोरदार धमाके को लेकर शुरुआती जानकारी में सिलेंडर ब्लास्ट की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में गैस लीक होने के बाद LPG के जमा होने और फिर आग पकड़ने की संभावना सामने आई है। हादसे में दो भाई गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि धमाके के असर से छह दुकानों को नुकसान पहुंचा और सामने स्थित अस्पताल की कांच की खिड़कियां टूट गईं।

    यह घटना करीब सुबह 6 बजे सेक्टर-1 स्थित प्रतीक को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के ग्राउंड फ्लोर के एक खाद्य प्रतिष्ठान में हुई। धमाका Sagar Family Restaurant होने की जानकारी प्राप्त हुई है।

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    घटना स्थल की तस्वीर

    गैस लीक के बाद हुआ जोरदार धमाका

    फायर विभाग के अनुसार दुकान में तीन कमर्शियल LPG सिलेंडर रखे हुए थे। शुरुआती जानकारी में एक सिलेंडर से गैस लीक होने की बात सामने आई थी। बाद में घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने परिसर और सिलेंडरों की जांच की। प्रारंभिक आकलन में यह संभावना सामने आई कि सिलेंडर के खुद फटने के बजाय LPG लीक होकर बंद परिसर में जमा हुई और किसी ignition source के संपर्क में आने के बाद आग लगी, जिससे जोरदार धमाका हुआ।

    प्रारंभिक जांच के हवाले से बताया गया, कि दोनों भाई दुकान में ही रहते और फास्ट-फूड का कारोबार चलाते थे। रात के दौरान एक LPG सिलेंडर से गैस लीक होने की आशंका है। सुबह काम शुरू करने के दौरान लाइट स्विच से निकली संभावित electrical spark से जमा गैस के ignite होने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी घटना की परिस्थितियों और ignition के वास्तविक स्रोत की जांच कर रही है।

    दो भाई गंभीर रूप से झुलसे

    हादसे में मनीष लालबहादुर यादव और उनके भाई अर्जुन लालबहादुर यादव गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मनीष की उम्र 27 वर्ष और अर्जुन की उम्र 46 वर्ष बताई है। दोनों को गंभीर रूप से झुलसने के बाद उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।

    मनीष को करीब 75 प्रतिशत और अर्जुन को 85 से 90 प्रतिशत तक झुलसने की जानकारी दी गई है।

    छह दुकानों को नुकसान, अस्पताल की कांच भी टूटी

    धमाका इतना तेज था कि सिर्फ संबंधित खाद्य दुकान ही प्रभावित नहीं हुई। प्रतीक CHS की दो आसपास की दुकानों और बगल की अभिमन्यु को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की तीन अन्य दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। इस तरह कुल छह दुकानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

    धमाके का असर सामने स्थित Suraj Hospital तक पहुंचा। अस्पताल की कांच की facade और खिड़कियां टूट गईं। हालांकि अस्पताल के मरीजों और कर्मचारियों में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

    फायर ब्रिगेड को 6:13 बजे मिली सूचना

    वाशी फायर स्टेशन के डिविजनल अधिकारी पुरुषोत्तम जाधव के अनुसार सुबह 6:13 बजे धमाके की सूचना फायर स्टेशन को मिली। फायर ब्रिगेड की टीम करीब पांच मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गई। मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने के साथ घटना के कारणों की जांच शुरू की गई।

    पुलिस और फॉरेंसिक टीम कर रही जांच

    घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम ने दुकान और वहां रखे LPG सिलेंडरों की जांच की है। प्रारंभिक फॉरेंसिक आकलन गैस लीक के बाद ignition की ओर इशारा करता है, लेकिन गैस लीक होने का सटीक कारण और आग पकड़ने का वास्तविक स्रोत अभी जांच का विषय है।

    इस हादसे में फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि तीन कमर्शियल LPG सिलेंडरों में से किस हिस्से से गैस लीक हुई और leakage का कारण क्या था। इसके साथ ही LPG पाइप, रेगुलेटर और अन्य उपकरणों की स्थिति तथा दुकान में गैस के जमा होने की परिस्थितियों की जांच भी घटना की पूरी वजह सामने लाने में महत्वपूर्ण होगी।

    घटना की जांच जारी है और दोनों घायलों की चिकित्सकीय स्थिति पर भी आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    गोरेगांव में कपड़ों को लेकर दोस्त की हत्या, पत्थर से चेहरे पर वार

    मुंबई के गोरेगांव में कपड़े और निजी सामान के विवाद में 26 वर्षीय युवक की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की है।

    मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में कपड़े और निजी सामान इस्तेमाल करने को लेकर दो दोस्तों के बीच हुआ विवाद जानलेवा हो गया। पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय सूरज शंकर डोले पर उसके दोस्त बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे ने कथित तौर पर पहले हाथों से हमला किया और फिर फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उसके चेहरे पर मार दिया। गंभीर चोटों के बाद सूरज की मौत हो गई। आरोपी घटना के बाद मौके से फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

    गोरेगांव पश्चिम में कहां हुई घटना?

    पुलिस के अनुसार, घटना 9 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे गोरेगांव पश्चिम में एसवी रोड पर किंग स्टूडियो के पास, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के सामने हुई। मृतक सूरज डोले मीरा रोड का रहने वाला था और गोरेगांव में पशु देखभाल के क्षेत्र में काम करता था। आरोपी सुबोध वाघमारे भी इसी क्षेत्र में काम करता था।

    कपड़े ही नहीं, बैग और निजी सामान को लेकर था विवाद

    पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, सूरज कथित तौर पर सुबोध के कपड़े और दूसरी निजी चीजें उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करता था। सुबोध ने यह भी आरोप लगाया कि सूरज उसके कपड़ों से भरा बैग लेकर गया था और मांगने के बावजूद वापस नहीं किया था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।

    घटना के समय दोनों के बीच बहस हो रही थी। उनके दोस्त सुधांशु पांडे ने बीच-बचाव करते हुए झगड़े की वजह पूछी। शिकायत के अनुसार, इसी दौरान सुबोध ने सूरज के कपड़े और सामान इस्तेमाल करने की बात कही।

    बहस के बाद पत्थर से चेहरे पर हमला

    एफआईआर में दर्ज विवरण के मुताबिक, बहस के दौरान सूरज ने कथित तौर पर सुबोध को गाली दी। इसके बाद सुबोध ने उस पर हाथों से हमला किया। विवाद बढ़ने पर उसने फुटपाथ पर पड़ा पत्थर उठाकर सूरज के चेहरे पर वार कर दिया।

    हमले में सूरज को गंभीर चोट लगी और काफी खून बहा। इसके बाद सुबोध मौके से फरार हो गया। बाद में सूरज मृत पाया गया।

    पिता की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज

    मामले में सूरज के पिता शंकर डोले की शिकायत के आधार पर गोरेगांव पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोपी की पहचान बाबासाहेब उर्फ सुबोध भीमराव वाघमारे के रूप में हुई है। उसकी उम्र 37 वर्ष बताई गई है। पुलिस के मुताबिक, वह पशु देखभाल का काम करता है और गोरेगांव पश्चिम में फुटपाथ पर रहता है।

    पुलिस ने हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध एफआईआर की रिपोर्ट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2) और 352 का उल्लेख है।

    आरोपी की तलाश जारी

    घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। मामले की जांच पुलिस निरीक्षक मनोज गाडले के नेतृत्व में की जा रही है। पुलिस अब घटना के पूरे घटनाक्रम और आरोपी की तलाश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

    घटना को लेकर उपलब्ध जानकारी में अभी सीसीटीवी फुटेज, हमले में इस्तेमाल पत्थर की बरामदगी या पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट जैसी जानकारियां सामने नहीं आई हैं। इन पहलुओं पर पुलिस की आगे की कार्रवाई से मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    दिवा-मुंब्रा के बीच भीड़भरी लोकल से महिला नीचे गिर गई। सिग्नल पर ट्रेन रुकी होने से जान बची। वायरल VIDEO ने लोकल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Mumbai local train में सुबह की भीड़ किस तरह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, इसका ताजा मामला गुरुवार सुबह दिवा-मुंब्रा के बीच सामने आया। CSMT की ओर जा रही भीड़भाड़ वाली लोकल से एक महिला यात्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन सिग्नल के कारण रुकी हुई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। महिला रेलवे ट्रैक के किनारे बने नाले में गिरकर फंस गई और उसे मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    सिग्नल पर रुकी थी ट्रेन, तभी हुआ हादसा

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सुबह मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में काफी भीड़ थी। दिवा और मुंब्रा के बीच ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी। इसी दौरान दरवाजे के पास मौजूद महिला यात्री भीड़ के दबाव में अपना संतुलन खो बैठी और ट्रेन से नीचे जा गिरी।

    महिला रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद नाले में जा गिरी। इसी वजह से वह सीधे ट्रेन के पहियों की चपेट में आने से बच गई। घटना के दौरान एक यात्री मोबाइल फोन से वीडियो बना रहा था, जिसके कैमरे में महिला के नीचे गिरने का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।

    घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला को मामूली चोटें आई हैं। उसकी पहचान और अस्पताल में इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    दिवा-मुंब्रा का यह रेल मार्ग फिर सवालों के घेरे में

    महिला के लोकल से गिरने की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दिवा-मुंब्रा रेल मार्ग पहले भी इसी तरह की दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।

    9 जून 2025 को इसी इलाके में दो लोकल ट्रेनों के बीच से गुजरते समय दरवाजे पर खड़े यात्रियों के गिरने की भीषण दुर्घटना हुई थी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद ट्रेन की भीड़, दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करने और इस हिस्से के तीखे मोड़ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे।

    उस हादसे की जांच के दौरान दुर्घटना के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। रेलवे की जांच में यात्रियों के सामान और आपस में टकराने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जबकि पुलिस जांच में ट्रैक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की गई।

    एक साल बाद भी भीड़ से राहत क्यों नहीं?

    2025 की दुर्घटना के बाद रेलवे की ओर से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर सेवाएं बढ़ाने और यात्री सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए। सरकारी रिकॉर्ड में दिवा के लिए 14 और मुंब्रा के लिए 16 नई उपनगरीय सेवाओं का उल्लेख किया गया था।

    इसके बावजूद 2026 में भी दिवा-मुंब्रा और आसपास के मार्गों पर सुबह के व्यस्त समय में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं। डोंबिवली से मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में भीड़ का एक कारण दिवा-मुंब्रा क्षेत्र से आने वाले यात्रियों की संख्या को भी बताया गया है।

    यही वजह है कि आज की घटना के बाद सिर्फ यह सवाल नहीं है कि महिला लोकल से कैसे गिरी, बल्कि यह भी सवाल है कि अतिरिक्त सेवाओं और सुरक्षा उपायों के बावजूद peak hours में यात्रियों को दरवाजे तक पहुंचने वाली स्थिति क्यों बन रही है।

    Automatic Door वाली लोकल से क्या बदलेगा?

    2025 की दुर्घटना के बाद मुंबई में automatic door वाली non-AC लोकल का विकल्प भी तेजी से आगे बढ़ा। ऐसी लोकल में दरवाजे अपने आप बंद होने की व्यवस्था होगी, जिससे ट्रेन चलने के दौरान यात्रियों के दरवाजे पर खड़े रहने या बाहर लटकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।

    रेलवे की ओर से नए non-AC automatic-door rake को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की रोजाना जरूरत को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की नियमित उपलब्धता और peak-hour capacity अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    सिर्फ चेतावनी से नहीं रुकेगा खतरनाक सफर

    मुंबई की उपनगरीय रेलवे में यात्रियों को footboard पर यात्रा नहीं करने की लगातार चेतावनी दी जाती है। स्टेशनों पर घोषणाएं, जागरूकता अभियान और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

    लेकिन दिवा-मुंब्रा के बीच हुई आज की घटना एक अलग चुनौती सामने रखती है। जब ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हो और यात्रियों का दबाव दरवाजे तक पहुंच जाए, तब सिर्फ चेतावनी के बजाय भीड़ प्रबंधन, पर्याप्त लोकल सेवाएं और सुरक्षित कोच व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।

    आज महिला की जान इसलिए बच गई क्योंकि ट्रेन उस समय सिग्नल पर रुकी हुई थी। वायरल वीडियो ने इस घटना को सामने ला दिया है, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—दिवा-मुंब्रा जैसे संवेदनशील रेल मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा देने के लिए रेलवे अगला ठोस कदम कब उठाएगा?

  • गणपति आगमन में मुंबई में 2 मौतें, 7 घायल; उल्हासनगर में बिना अनुमति यात्रा पर केस

    गणपति आगमन में मुंबई में 2 मौतें, 7 घायल; उल्हासनगर में बिना अनुमति यात्रा पर केस

    मुंबई में गणपति आगमन के दौरान भुलेश्वर में 2 मौत और 5 घायल हुए, कुर्ला में 2 घायल हुए। उल्हासनगर में बिना अनुमति आगमन यात्रा पर केस दर्ज।

    मुंबई: मुंबई और आसपास के इलाकों में गणपति आगमन के दौरान हादसों और नियमों के उल्लंघन की घटनाओं ने उत्सव की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भुलेश्वर में 22 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा गिरने से दो लोगों की मौत और पांच घायल हुए थे। इसके बाद कुर्ला में 15 फुट की प्रतिमा गिरने से दो लोग घायल हुए। इसी बीच उल्हासनगर में ठाणे पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा के बावजूद बिना अनुमति गणेश आगमन यात्रा निकालने पर मंडल के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    भुलेश्वर में प्रतिमा गिरने से दो मौतें

    22 अगस्त की रात दक्षिण मुंबई के भुलेश्वर इलाके में ‘भुलेश्वरचा राजा’ की करीब 22 फुट ऊंची गणेश प्रतिमा आगमन यात्रा के दौरान हादसे का शिकार हो गई। प्रतिमा को भायखला से भुलेश्वर ले जाया जा रहा था। जय अंबे चौक के पास प्रतिमा का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा।

    हादसे में संकेत नेवशे और ब्रिजेश हेमंत जोशी की मौत हुई, जबकि पांच लोग घायल हुए। घायलों में पांच और सात वर्ष की दो बच्चियां भी शामिल थीं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था।

    प्रतिमा के ढांचे और उसके सहारे से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नट-बोल्ट और संरचनात्मक मजबूती से जुड़े पहलुओं की भी जांच के दायरे में रखा गया। लेकिन हादसे का अंतिम कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    कुर्ला में 15 फुट की प्रतिमा गिरी

    8 सितंबर को कुर्ला में धारावी के प्रेम नगर स्थित मंडल के लिए लाई जा रही करीब 15 फुट की गणेश प्रतिमा शीटळ तलाव के पास ट्रॉली से गिर गई। जानकारी के अनुसार ट्रॉली के गतिरोधक से गुजरते समय प्रतिमा का संतुलन बिगड़ा।

    हादसे में दो लोग घायल हो गए। क्षतिग्रस्त प्रतिमा का बाद में विसर्जन कर दिया गया।

    भुलेश्वर और कुर्ला की घटनाओं को मिलाकर मुंबई में गणपति आगमन के दौरान सामने आए इन दो प्रमुख प्रतिमा हादसों में दो लोगों की मौत और सात लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।

    उल्हासनगर में बिना अनुमति गणेश आगमन यात्रा पर केस

    इसी बीच उल्हासनगर में गणेश आगमन यात्रा के दौरान अनुमति और निषेधाज्ञा के उल्लंघन का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार ठाणे पुलिस आयुक्त की ओर से लागू निषेधाज्ञा के बावजूद प्रसिद्ध गणेश मित्र मंडल, उल्हासनगर-1 ने बिना अनुमति आगमन यात्रा निकाली।

    पुलिस सिपाही बाबासाहेब पोटे की शिकायत पर मंडल के अध्यक्ष महेश धुंडलोदिया (49) सहित पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 तथा मुंबई पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) और 135 के तहत कार्रवाई की है।

    पुलिस के अनुसार 8 सितंबर को शाम करीब 5 बजे से रात 10 बजे के बीच सी क्लॉक टॉवर चौक से साधु वासवानी चौक, बालाजी मेडिकल होते हुए सोनारा हॉल तक गणेश आगमन यात्रा निकाली गई। यात्रा में डीजे, ढोल-ताशा और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया गया।

    16 सितंबर तक निषेधाज्ञा लागू

    पुलिस के मुताबिक ठाणे पुलिस आयुक्त की निषेधाज्ञा 16 सितंबर तक लागू है। इसके बावजूद बिना अनुमति यात्रा निकालने को लेकर कार्रवाई की गई है। मामले की जांच एपीआई विनोद पाटील कर रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार संबंधित मंडल के खिलाफ पहले भी इस तरह के मामले दर्ज हो चुके हैं।

    अब सुरक्षा के साथ अनुमति व्यवस्था भी सवालों में

    गणपति आगमन से जुड़ी इन घटनाओं में एक तरफ बड़ी प्रतिमाओं के सुरक्षित परिवहन का सवाल सामने आया है, तो दूसरी ओर जुलूस के लिए निर्धारित अनुमति और पुलिस के आदेशों के पालन का मुद्दा भी सामने आया है।

    बड़ी प्रतिमा को सड़क से ले जाते समय उसके ढांचे की मजबूती, परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रॉली, सड़क की स्थिति, गतिरोधक, बिजली के तार और भीड़ से सुरक्षित दूरी जैसे पहलुओं की अनदेखी हादसे का जोखिम बढ़ा सकती है। दूसरी ओर आगमन यात्रा के लिए आवश्यक अनुमति नहीं लेने पर यातायात, ध्वनि और भीड़ नियंत्रण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की स्थिति पैदा हो सकती है।

    यही वजह है कि गणपति आगमन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को केवल प्रतिमा तक सीमित रखने के बजाय प्रतिमा की संरचना, परिवहन, मार्ग, भीड़ नियंत्रण, ध्वनि व्यवस्था और पुलिस अनुमति को एक साथ देखने की जरूरत सामने आ रही है।

    फिलहाल भुलेश्वर और कुर्ला के हादसों की परिस्थितियां अलग हैं, जबकि उल्हासनगर का मामला अनुमति और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से संबंधित है। तीनों घटनाएं अलग-अलग प्रकृति की होने के बावजूद गणपति आगमन के दौरान सुरक्षा और नियमों के पालन की अहमियत को सामने लाती हैं।

  • साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसे में असलम शेख की पत्नी के खाते में ₹10 लाख जमा हुए। जानिए जांच, BMC कार्रवाई और जिम्मेदारी पर अब तक क्या हुआ।

    मुंबई: साकीनाका स्थित खैरानी रोड मैनहोल हादसे में दिवंगत असलम शेख के परिवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से ₹10 लाख की आर्थिक सहायता मिल गई है। यह रकम असलम शेख की पत्नी अंजुम शेख के बैंक खाते में 4 अगस्त 2026 को सीधे जमा की गई थी। 8 सितंबर को उनकी ओर से महानगरपालिका को लिखित आभार पत्र दिए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई।

    लेकिन इस आर्थिक मदद के साथ करीब दो महीने पुराने इस मामले में एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—2 जुलाई को खुले मैनहोल में गिरकर हुई असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई और जांच अब किस स्थिति में है?

    अंजुम शेख के खाते में कब जमा हुए ₹10 लाख?

    BMC के मुताबिक, दुर्घटना के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे ने शेख परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एल विभाग कार्यालय ने परिवार से बैंक खाते और वारसाहक्क से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे कराए।

    2 जुलाई को खैरानी रोड पर क्या हुआ था?

    2 जुलाई 2026 को साकीनाका के खैरानी रोड पर drainage-related काम के दौरान एक मैनहोल खुला हुआ था। इसी दौरान असलम शेख उसमें गिर गए और तेज पानी के बहाव में बह गए। कई घंटे की तलाश के बाद उनका शव drainage channel से बरामद किया गया। उस समय मौके पर पर्याप्त barricading और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

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    मृतक असलम शेख की फाइल तस्वीर

    जानकारी के अनुसार असलम शेख साकीनाका के यादव नगर इलाके के रहने वाले थे। घटना के बाद BMC और पुलिस दोनों स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।

    हादसे के बाद BMC ने क्या कार्रवाई की?

    हादसे के तत्काल बाद BMC ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके साथ contractor की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने भी contractor और उससे जुड़े तीन contractual workers के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन workers को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, जबकि contractor के बारे में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।

    इससे मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि manhole maintenance, contractor supervision और civic accountability का मुद्दा बन गया।

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    घटना की पुरानी तस्वीर

    जांच में work order को लेकर क्यों उठे सवाल?

    इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया।

    BMC की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई। इसके बाद यह सवाल उठा कि जिस स्थान पर protective grille लगाने का काम चल रहा था, उस काम के लिए औपचारिक work order किसके पास था और काम किसकी अनुमति से शुरू हुआ था।

    अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक contractor ने show-cause notice के जवाब में दावा किया कि उसके work order की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उसने किसी को काम नहीं दिया था। इस दावे ने जांच को और जटिल बना दिया।

    सबसे गंभीर सवाल—अगर contractor का work order समाप्त हो चुका था, तो मैनहोल पर protective work कौन कर रहा था और वह काम किस अनुमति या निगरानी में किया जा रहा था?

    हालांकि यह सवाल जांच के संदर्भ में है और इसे किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और पुलिस की कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

    BMC की जांच में contractor और अधिकारियों की भूमिका पर क्या सामने आया?

    जुलाई के अंत तक BMC की inquiry report सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे थे। 31 जुलाई की रिपोर्टों में बताया गया था कि हादसे के करीब एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी।

    बाद की रिपोर्टिंग में fact-finding exercise से contractor और संबंधित ward अधिकारियों की ओर से safety और procedural lapses की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि जांच केवल contractor तक सीमित नहीं थी, बल्कि civic supervision की भूमिका भी जांच के दायरे में थी।

    हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    हादसे से पहले ही BMC को High Court से मिल चुकी थी चेतावनी

    असलम शेख की मौत से कुछ ही दिन पहले Bombay High Court ने मुंबई में खुले मैनहोल को लेकर BMC को कड़ी फटकार लगाई थी।

    अदालत ने monsoon के दौरान खुले मैनहोल से किसी इंसानी जान के जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया था और BMC से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। असलम शेख की मौत के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि जब manhole safety पहले से न्यायिक निगरानी में थी, तब खैरानी रोड पर maintenance work के दौरान सुरक्षा व्यवस्था क्यों विफल हुई।

    BMC ने पूरे मुंबई के मैनहोल की safety को लेकर क्या कहा?

    हादसे के बाद BMC ने शहर के सभी 26 wards में manhole inspection और सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी।

    लेकिन जुलाई में BMC के Additional Municipal Commissioner ने यह भी स्पष्ट किया था कि महानगरपालिका यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि मुंबई के हर manhole chamber में protective safety net मौजूद है, क्योंकि safety-net installation एक continuous process है।

    यही बात इस मामले को सिर्फ साकीनाका की एक दुर्घटना से आगे ले जाती है। Mumbai में manhole safety की समस्या में पुराने covers, maintenance के दौरान खोले गए chambers, protective grills, barricading और monitoring—सभी शामिल हैं।

    जानकारी के अनुसार मुंबई में करीब 3,400 किलोमीटर का storm-water drain network और 2,081 किलोमीटर का sewer network है, जिसके maintenance के लिए बड़ी संख्या में manholes का इस्तेमाल होता है।

    क्या ₹10 लाख मिलने से मामला खत्म हो गया?

    नहीं। ₹10 लाख की आर्थिक सहायता परिवार के लिए तत्काल वित्तीय सहारा है, लेकिन इससे पुलिस जांच या प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप समाप्त नहीं होती।

    असलम शेख की मौत के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों को अलग-अलग देखना जरूरी है—

    • परिवार को आर्थिक सहायता: ₹10 लाख खाते में जमा हो चुके हैं।
    • प्रशासनिक कार्रवाई: BMC अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया हुई।
    • कानूनी जिम्मेदारी: contractor और workers के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी महत्वपूर्ण है।

    इसलिए आर्थिक सहायता को अंतिम कानूनी compensation या मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जवाबदेही स्पष्ट न करे।

  • महिला के पेट से निकले 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और मोमबत्ती, डॉक्टरों ने बताया कितना गंभीर था मामला

    महिला के पेट से निकले 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और मोमबत्ती, डॉक्टरों ने बताया कितना गंभीर था मामला

    आंध्र प्रदेश के नरसारावपेट में 33 वर्षीय महिला के पेट से 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और मोमबत्ती निकाली गई। जानिए डॉक्टरों ने क्या बताया।

    नरसारावपेट: आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले में डॉक्टरों के सामने एक बेहद असामान्य मामला आया है। नरसारावपेट के एक निजी अस्पताल में 33 वर्षीय महिला के पेट से 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती निकाली गई। यानी महिला के पेट में कुल 20 असामान्य वस्तुएं मिलीं। खबर के अनुसार, समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप के बाद महिला की हालत स्थिर बताई गई है।

    यह मामला केवल हैरान करने वाली घटना नहीं है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे और नुकीले सामान पेट या पाचन तंत्र में फंसने पर गंभीर परेशानी पैदा कर सकते हैं।

    महिला को दर्द की शिकायत के बाद परिवार अस्पताल लेकर पहुंचा था। जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट में बड़ी संख्या में गैर-खाद्य वस्तुएं होने की जानकारी मिली।

    डॉक्टरों ने निकालीं 20 वस्तुएं

    जानकारी के अनुसार, महिला के पेट से:

    • 14 पेन
    • 5 लकड़ी के चम्मच
    • 1 मोमबत्ती

    निकाली गई।

    नरसारावपेट के Maathasree Hospital के सर्जिकल विशेषज्ञ डॉ. पी. रामचंद्र रेड्डी ने इस मामले की जानकारी दी। डॉक्टरों की टीम ने लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए वस्तुओं को बाहर निकाला।

    Narasaraopet-Maathasree-Hospital

    एक पेन का कैप नहीं था, नोक से दर्द की आशंका

    प्राप्त जानकारी के मुताबिक, निकाले गए पेन में से एक का कैप नहीं था। डॉक्टरों को आशंका थी कि पेन की खुली नोक के कारण अंदर चोट या दर्द की स्थिति पैदा हुई हो सकती है।

    हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में यह पुष्टि नहीं हुई है कि पेन की नोक ने पेट की दीवार को नुकसान पहुंचाया था या नहीं।

    पेन और चम्मच जैसी चीजें पेट में कितनी खतरनाक हो सकती हैं?

    मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, कोई भी निगली गई वस्तु एक जैसी नहीं होती। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु:

    • कितनी लंबी है
    • नुकीली है या नहीं
    • पाचन तंत्र के किस हिस्से में मौजूद है
    • मरीज को दर्द, उल्टी या अन्य लक्षण हैं या नहीं

    American Society for Gastrointestinal Endoscopy की गाइडलाइंस के अनुसार, लंबे और sharp-pointed objects पाचन तंत्र में जटिलताएं पैदा कर सकते हैं। नुकीली वस्तुओं से अंदरूनी चोट या perforation यानी पाचन तंत्र में छेद होने का जोखिम हो सकता है।

    लंबी वस्तुओं को भी पेट से आगे पाचन तंत्र में निकलने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, इस मामले में निकाले गए लकड़ी के चम्मचों की वास्तविक लंबाई सार्वजनिक नहीं की गई है।

    यह भी जरूरी है कि हर व्यक्ति द्वारा निगली गई वस्तु के लिए ऑपरेशन जरूरी नहीं होता। डॉक्टर वस्तु के आकार, स्थिति और मरीज की हालत के आधार पर इलाज का फैसला करते हैं।

    महिला ने इतनी सारी चीजें कब निगलीं?

    यह इस घटना का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल है।

    अभी तक यह स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है कि महिला ने:

    • ये वस्तुएं कब निगलीं,
    • कितने समय के दौरान निगलीं,
    • या सभी वस्तुएं एक ही समय में पेट में पहुंचीं या नहीं।

    पिता बोले- बेटी लंबे समय से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी

    महिला के पिता के हवाले से कहा गया है कि उनकी बेटी पिछले करीब 10 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थी।

    हालांकि, महिला को कौन-सी मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, इसकी कोई आधिकारिक मेडिकल जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    कुछ खबरों में इस तरह के व्यवहार को Pica जैसी स्थिति से जोड़कर देखा गया है। Pica एक ऐसी चिकित्सकीय स्थिति हो सकती है, जिसमें व्यक्ति लगातार गैर-खाद्य वस्तुएं खाने लगता है।

    लेकिन इस महिला के मामले में Pica का कोई सार्वजनिक रूप से पुष्टि किया गया निदान सामने नहीं आया है। इसलिए केवल पेट में पेन और अन्य वस्तुएं मिलने के आधार पर महिला को Pica syndrome से पीड़ित नहींं माना जा सकता।

    कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

    किसी व्यक्ति द्वारा गलती से या जानबूझकर कोई गैर-खाद्य वस्तु निगलने की स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेष रूप से नुकीली या लंबी वस्तु निगलने पर मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है।

    पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना महत्वपूर्ण है।

    डॉक्टरों के अनुसार, किसी भी संदिग्ध मामले में घर पर इलाज करने या वस्तु को जबरन बाहर निकालने की कोशिश करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए।

    महिला की हालत में सुधार

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेट से सभी वस्तुएं निकालने के बाद महिला की हालत में सुधार बताया गया है और वह चिकित्सकीय निगरानी में रह रही है।

    नरसारावपेट की यह घटना एक असामान्य मेडिकल केस के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चेतावनी भी है। लंबे या नुकीले सामान निगलने से पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। वहीं, किसी व्यक्ति में बार-बार गैर-खाद्य वस्तुएं निगलने जैसा व्यवहार दिखाई दे तो उसे केवल अजीब आदत मानकर नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

  • गोपालगंज में चोरी के डर से छत पर चढ़ाई Scorpio, क्रेन से पहुंची 2.5 टन की SUV; VIDEO वायरल

    गोपालगंज में चोरी के डर से छत पर चढ़ाई Scorpio, क्रेन से पहुंची 2.5 टन की SUV; VIDEO वायरल

    गोपालगंज में चोरी के डर से Scorpio को क्रेन की मदद से दो मंजिला मकान की छत पर पहुंचाने का वीडियो वायरल है। जानिए पूरा मामला और सुरक्षा सवाल।

    बिहार: गोपालगंज में एक नई Scorpio को चोरी से बचाने के लिए दो मंजिला मकान की छत पर चढ़ाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक, मांझागढ़ थाना क्षेत्र के मीरा टोला गांव में मनोज यादव ने कार को घर के बाहर छोड़ने के बजाय क्रेन की मदद से छत पर पहुंचवाया। इस असामान्य तरीके ने जहां लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब ढाई टन वजन वाली SUV को आवासीय मकान की छत पर रखना कितना सुरक्षित है।

    विदेश में नौकरी, घर पर कार की सुरक्षा की चिंता

    स्थानीय जानकारी के अनुसार, मनोज यादव इजराइल में नौकरी करते हैं। बताया गया है कि घर में पुरुष सदस्य की मौजूदगी कम रहने वाली थी और कार चलाने वाला ड्राइवर भी विदेश चला गया था। ऐसे में नई Scorpio को घर के बाहर खड़ा छोड़ने पर चोरी या नुकसान का डर था। इसी वजह से कार को सुरक्षित रखने के लिए क्रेन बुलाकर उसे मकान की दूसरी मंजिल की छत तक पहुंचाया गया।

    क्रेन से छत तक कैसे पहुंची Scorpio?

    वायरल वीडियो में भारी-भरकम Scorpio को क्रेन की मदद से ऊपर उठाते हुए देखा जा सकता है। वाहन को पहले lifting equipment के जरिए ऊपर ले जाया गया और फिर मकान की छत पर उतारा गया। वीडियो में यह पूरा दृश्य इतना असामान्य है कि सोशल मीडिया यूजर्स के बीच यह चर्चा का विषय बन गया।

    लेकिन ऐसी lifting प्रक्रिया में सिर्फ क्रेन की क्षमता ही नहीं, बल्कि load balance, lifting arrangement और नीचे मौजूद लोगों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी वायरल वीडियो को देखकर आम लोगों के लिए इसी तरह भारी वाहन को छत पर रखने की कोशिश करना उचित नहीं माना जा सकता।

    क्या मकान की छत Scorpio का वजन सह सकती है?

    यही इस वायरल घटना से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।

    Mahindra Scorpio Classic के आधिकारिक owner manual में 2WD मॉडल का अधिकतम gross vehicle weight 2,510 किलोग्राम तक दिया गया है। यानी वाहन का कुल अनुमत भार लगभग 2.5 टन है।

    लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इस खास मकान की छत असुरक्षित है। किसी भवन की वास्तविक क्षमता केवल कार के वजन से तय नहीं होती। स्लैब की मोटाई, reinforcement, beams और columns की व्यवस्था, निर्माण की गुणवत्ता तथा भवन का structural design जैसे कई factors महत्वपूर्ण होते हैं।

    इसी वजह से किसी सामान्य residential roof को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि वह SUV का वजन आसानी से सह लेगी। भारी वाहन को छत पर खड़ा करने से पहले structural engineer से भवन की क्षमता की जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    कार को वापस नीचे कैसे उतारा जाएगा?

    वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का एक स्वाभाविक सवाल यह भी है कि जिस Scorpio को क्रेन से छत पर चढ़ाया गया है, उसे वापस जमीन पर कैसे लाया जाएगा।

    अगर मकान में वाहन के लिए विशेष ramp या दूसरी व्यवस्था नहीं है, तो कार को नीचे लाने के लिए दोबारा lifting equipment की जरूरत पड़ सकती है। उपलब्ध जानकारी में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वाहन को छत पर कितने समय के लिए रखा गया है और उसे वापस नीचे लाने की क्या योजना है।

    यही इस मामले का एक अहम अनुत्तरित पहलू है।

    गोपालगंज में वाहन चोरी का सवाल कितना प्रासंगिक है?

    कार को छत पर रखने की वजह स्थानीय जानकारी में चोरी का डर बताई गई है। वहीं गोपालगंज से हाल के महीनों में वाहन चोरी से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। जुलाई 2026 में पुलिस ने गोपालगंज से चोरी हुई एक Scorpio बरामद करने और मामले में आरोपियों को पकड़ने की कार्रवाई की थी। हालांकि उस घटना का इस वायरल वीडियो से कोई सीधा संबंध नहीं है।

    इसलिए इस घटना को इलाके में बढ़ती वाहन चोरी का परिणाम बताना अभी सही नहीं होगा। फिलहाल चोरी का डर ही कार को छत पर रखने की बताई गई वजह है।

    पुलिस ने क्या कहा?

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस वायरल वीडियो को लेकर पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल कार मालिक के फैसले को लेकर किसी कानूनी उल्लंघन या पुलिस कार्रवाई का दावा अभी तक नहीं किया गया है।

    सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हुआ वीडियो?

    एक SUV को क्रेन से दो मंजिला मकान की छत पर पहुंचाने का दृश्य सामान्य पार्किंग से बिल्कुल अलग है। इसी वजह से वीडियो तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। शुरुआती वायरल पोस्ट 3 सितंबर 2026 को X पर सामने आई थी, जिसके बाद अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका प्रसार हुआ।

    लोगों की दिलचस्पी सिर्फ इस बात में नहीं है कि कार छत पर क्यों रखी गई, बल्कि इस सवाल में भी है कि इतनी भारी SUV को छत पर रखना तकनीकी रूप से कितना सुरक्षित है और बाद में उसे नीचे कैसे उतारा जाएगा।

    क्या दूसरे लोग भी ऐसा कर सकते हैं?

    सिर्फ वायरल वीडियो देखकर इस तरीके की नकल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। किसी भवन की छत पर कार रखने का फैसला उस भवन की वास्तविक structural capacity जाने बिना नहीं किया जाना चाहिए।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि क्रेन से कार ऊपर उठाना संभव होना और किसी residential roof का उस वाहन का भार सुरक्षित रूप से सह पाना—दो अलग-अलग बातें हैं।

    फिलहाल गोपालगंज की यह Scorpio सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लेकिन वायरल वीडियो से आगे असली सवाल भवन की structural safety, वाहन को लंबे समय तक छत पर रखने की क्षमता और उसे भविष्य में सुरक्षित तरीके से नीचे उतारने का है। इन पहलुओं पर किसी अधिकृत structural assessment या प्रशासनिक जानकारी के सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • नेपाल में 11 दिन बाद चमत्कार, मलबे से आ रही थी आवाज और जिंदा निकली महिला; VIDEO

    नेपाल में 11 दिन बाद चमत्कार, मलबे से आ रही थी आवाज और जिंदा निकली महिला; VIDEO

    नेपाल में 11 दिन बाद मलबे से 64 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ जिंदा मिलीं। परिवार अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर चुका था। जानिए पूरा रेस्क्यू।

    नेपाल: 26 अगस्त की भीषण बाढ़ और भूस्खलन के 11वें दिन नेपाल में ऐसा रेस्क्यू हुआ, जिसने तबाही के बीच उम्मीद जगा दी। नुवाकोट जिले के बेत्रावती बाजार में 64 साल की चंडिका श्रेष्ठ अपने मलबे में दबे घर से जिंदा मिलीं। परिवार उन्हें मृत मान चुका था और अंतिम संस्कार की रस्में भी शुरू कर दी थीं।

    मलबे के अंदर से अचानक आई आवाज

    5 सितंबर को सशस्त्र पुलिस बल की एक टीम बेत्रावती में मलबा हटाने और सड़क से जुड़े काम में लगी थी। इसी दौरान जवानों को एक दबे हुए मकान की तरफ से बेहद धीमी आवाज सुनाई दी।

    बचाव दल ने पहले भी इसी जगह तलाश की थी, लेकिन तब कोई आवाज नहीं मिली थी। इस बार आवाज मिलने के बाद जवानों ने मलबे के बीच रास्ता बनाया और खिड़की तोड़कर घर के अंदर पहुंचे। जैसे-जैसे वे महिला के करीब पहुंचे, आवाज साफ होती गई।

    अंदर 64 वर्षीय चंडिका जिंदा थीं। उन्हें मलबे से बाहर निकालने के बाद नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर से काठमांडू के छाउनी स्थित बीरेंद्र अस्पताल ले जाया गया। बचाव अभियान का नेतृत्व इंस्पेक्टर सुमन बीके की टीम कर रही थी।

    बाढ़ में घर करीब 100 मीटर खिसक गया था

    चंडिका जिस मकान में फंसी थीं, वह बाढ़ के तेज बहाव और मलबे के साथ अपनी मूल जगह से करीब 100 मीटर ऊपर की ओर खिसक गया था। घर की साढ़े तीन मंजिलें पूरी तरह मलबे में दब गई थीं, जबकि चौथी मंजिल का एक हिस्सा कीचड़ में फंसा था। इसी हिस्से में चंडिका के जिंदा होने का पता चला।

    चंडिका 26 अगस्त से लापता थीं। उनके साथ घर में मौजूद परिवार के चार अन्य सदस्यों का अभी तक पता नहीं चला है। आठवें दिन परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दी थीं और कुश से प्रतीकात्मक पुतला भी तैयार किया था।

    11 दिन तक कैसे जिंदा रहीं?

    चंडिका के 11 दिनों तक मलबे के अंदर जीवित रहने की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि इस दौरान उन्हें पानी या भोजन कैसे मिला। इसलिए उनके जीवित रहने को लेकर किसी खास कारण का दावा नहीं किया गया है।

    ऐसे मामलों में मलबे के अंदर सांस लेने लायक हवा और पानी तक पहुंच सबसे अहम होती है। चंडिका के मामले में वास्तविक परिस्थितियां आगे की जानकारी से ही स्पष्ट होंगी।

    नेपाल में दूसरे लोगों को भी जिंदा बचाया गया

    चंडिका के रेस्क्यू से एक दिन पहले ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में करीब 170 मीटर अंदर फंसे दो नेपाली कर्मचारियों को जिंदा निकाला गया था।

    इसके बाद ऊपरी त्रिशूली-1 परियोजना की सुरंग में करीब 225 मीटर अंदर फंसे चीनी नागरिक लू हाईताओ को भी बचाया गया। इन अभियानों में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ सुरंग-बचाव टीमें काम कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया की टीमें भी नेपाल पहुंच चुकी हैं।

    करीब 5 हजार लोग अब भी लापता

    नेपाल के विदेश मंत्रालय के 5 सितंबर के आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, आपदा के 11वें दिन तक 13,098 लोगों को बचाया जा चुका था, जबकि करीब 5,000 लोग अब भी लापता थे। इनमें 35 देशों के करीब 600 विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब तक 1,344 शव बरामद किए जा चुके थे।

    कई लापता लोगों का संबंध जलविद्युत परियोजनाओं से है। बेत्रावती के आसपास भी ड्रोन की मदद से शवों की लोकेशन तलाशने और उन्हें निकालने का काम किया गया है। पूरे बचाव अभियान में नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के करीब 21,465 जवान लगाए गए हैं।

    घर, सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन से 7,570 घर प्रभावित हुए हैं और करीब 32,933 लोग प्रभावित आबादी में शामिल हैं। 48 सरकारी कार्यालय, 55 किलोमीटर सड़क, 37 मोटर योग्य पुल और 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

    करीब 1,806 हेक्टेयर कृषि भूमि के अलावा 13 जलविद्युत परियोजनाएं, एक सौर ऊर्जा संयंत्र और दो ट्रांसमिशन लाइनें प्रभावित हुई हैं। प्रभावित जलविद्युत क्षमता करीब 783 मेगावाट बताई गई है।

    नेपाल की इस आपदा में हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे समय में चंडिका श्रेष्ठ का 11वें दिन मलबे से जिंदा मिलना एक असाधारण रेस्क्यू के साथ उन परिवारों के लिए भी उम्मीद बना है, जिन्हें अभी अपने लोगों के मिलने का इंतजार है।

  • दही हांडी में 2 मौतें: महिला और 7 साल के बच्चे की जान गई, 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी में 2 मौतें: महिला और 7 साल के बच्चे की जान गई, 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी के दौरान मुंबई और पुणे में दो हादसों में महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हुई। मुंबई-ठाणे में 42 गोविंदा घायल हुए।

    मुंबई: महाराष्ट्र में दही हांडी के जश्न के दौरान मुंबई और पुणे में हुए दो अलग-अलग हादसों में एक महिला और 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि मुंबई और ठाणे में कुल 42 गोविंदा घायल हुए। मुंबई के मालाड में बच्चे की मौत हांडी बांधने के लिए इस्तेमाल किए गए ईंट के खंभे के गिरने से हुई, जबकि पुणे के पुराने सांगवी में कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी लोहे का ढांचा हटाते समय महिला उसकी चपेट में आ गई।

    मालाड में 7 साल के रुद्र की मौत

    मुंबई के मलाड (पश्चिम) मालवणी इलाके की एकता वेलफेयर सोसायटी में शनिवार दोपहर बच्चे दही हांडी मना रहे थे। हांडी को एक पेड़ और ईंट के खंभे के बीच रस्सी से बांधा गया था। हांडी फोड़ने के दौरान दबाव बढ़ा और खंभा टूटकर गिर गया। इसका मलबा 7 साल के रुद्र कदम के सिर पर लगा।

    रुद्र को मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुणे में महिला की जान गई

    पिंपरी-चिंचवड़ के पुराने सांगवी इलाके में शुक्रवार रात दही हांडी कार्यक्रम खत्म होने के बाद अस्थायी ढांचा हटाया जा रहा था। इसी दौरान ऊपर लगी लोहे की कमान का एक हिस्सा नीचे गिर गया। इसकी चपेट में 45 वर्षीय सलमा सलाउद्दीन पठान आ गईं।

    पुलिस के मुताबिक, सलमा अपने पति के साथ कार्यक्रम में आई थीं। गंभीर चोट लगने के बाद उनकी मौत हो गई। सांगवी पुलिस ने आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की है और ढांचे की अनुमति समेत हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मौत स्पीकर गिरने से नहीं हुई थी।

    मुंबई और ठाणे में 42 गोविंदा घायल

    दही हांडी के दौरान मानवीय पिरामिड बनाते समय मुंबई में 32 और ठाणे में 10 गोविंदा घायल हुए। शुरुआती जानकारी में मुंबई में 22 घायलों की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद के अपडेट में यह संख्या बढ़कर 32 हो गई।

    दही हांडी से पहले बीएमसी ने मुंबई के प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में आपात स्थिति के लिए 100 से ज्यादा बिस्तर तैयार रखे थे। राज्य सरकार ने भी गोविंदाओं के लिए दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने का बीमा कवर बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया था।

    मुंबई और पुणे के दोनों हादसों की वजह अलग रही। मालाड में ईंट का खंभा गिरने से बच्चे की जान गई, जबकि सांगवी में लोहे का अस्थायी ढांचा हटाते समय महिला हादसे का शिकार हुई। दोनों मामलों में पुलिस की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • मालाड में दही हांडी के दौरान खंभा गिरा, 7 साल के रुद्र की मौत

    मालाड में दही हांडी के दौरान खंभा गिरा, 7 साल के रुद्र की मौत

    मालाड के मालवणी में दही हांडी फोड़ते समय ईंट का खंभा गिरने से 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा शनिवार दोपहर हुआ।

    मुंबई: मालाड के मालवणी इलाके में शनिवार दोपहर दही हांडी के दौरान 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा करीब 3:01 बजे एकता वेलफेयर सोसायटी, चिकुवाड़ी में हुआ। दही हांडी फोड़ने के लिए बच्चे मानव पिरामिड बना रहे थे। इसी दौरान हांडी को बांधने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी से जुड़े ईंट के खंभे का हिस्सा दबाव में गिर गया, जिसकी चपेट में रुद्र आ गया।

    हांडी फोड़ते समय गिरा खंभा

    जानकारी के मुताबिक, दही हांडी की रस्सी एक पेड़ और जमीन तल की संरचना के ईंट के खंभे से बांधी गई थी। हांडी फोड़ने की कोशिश के दौरान खंभा दबाव नहीं सह सका और उसका हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया। मलबे की चोट रुद्र के सिर पर लगी।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। रुद्र को तुरंत मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया।

    मुंबई में 32 गोविंदा घायल

    मालाड की इस घटना के अलावा दही हांडी के दौरान मुंबई के अलग-अलग इलाकों में 32 गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का इलाज जारी था।

    दही हांडी आयोजन से पहले बीएमसी ने प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में घायल गोविंदाओं के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था रखने की जानकारी दी थी।

    हादसे की जांच

    रुद्र की मौत के बाद अब यह जांच का विषय है कि दही हांडी के लिए रस्सी किस तरह बांधी गई थी, जिस खंभे से उसे जोड़ा गया था उसकी स्थिति कैसी थी और आयोजन स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।