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मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से तड़ीपार कर दिया है। जानिए किन इलाकों के आरोपी इस सूची में शामिल हैं और उन पर क्या आरोप हैं।
मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई शहर और उपनगरों की सीमा से तड़ीपार (Externment) कर दिया है। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, मारपीट, लूट, हथियारों के दम पर धमकाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे मामलों में शामिल रहे हैं।
पुलिस ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?
मुंबई पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों की गतिविधियों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में डर का माहौल बन गया था। कई लोग शिकायत दर्ज कराने से भी डर रहे थे। इसी वजह से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत इन अपराधियों के खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की गई।
पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी क्षेत्र) के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया।
मुंबई पुलिस ने साफ किया है कि अगर तड़ीपार किया गया कोई भी आरोपी आदेश का उल्लंघन करते हुए मुंबई शहर या उपनगरों में प्रवेश करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके इलाके में कोई तड़ीपार अपराधी दिखाई देता है या किसी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी मिलती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन 100 और 112 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
इस कार्रवाई का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और व्यापारियों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही, इलाके में जबरन वसूली, दादागिरी और हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
FAQ
सवाल: मुंबई पुलिस ने कितने अपराधियों को तड़ीपार किया है?
नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए तड़ीपार किया गया है।
सवाल: तड़ीपार कितने समय के लिए किया गया है?
सभी आरोपियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से बाहर रहने का आदेश दिया गया है।
सवाल: किन पुलिस स्टेशनों के आरोपी शामिल हैं?
कस्तूरबा मार्ग, समतानगर और दहिसर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के आरोपी शामिल हैं।
सवाल: अगर तड़ीपार आरोपी मुंबई में दिखे तो क्या करें?
तुरंत 100, 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें।
मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में अगले 24 घंटों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। जानिए किन इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और स्कूल बसों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
मुंबई: कुछ दिनों की राहत के बाद मानसून एक बार फिर मुंबई और उसके आसपास के इलाकों पर मेहरबान होता दिखाई दे रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और ठाणे के लिए येलो अलर्ट, जबकि पालघर और रायगढ़ के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
हालांकि, इस बार सबसे बड़ा सवाल सिर्फ बारिश का नहीं है। असली चिंता उन लाखों लोगों की है जो हर सुबह लोकल ट्रेन, बस, ऑटो और निजी वाहनों से ऑफिस और स्कूल पहुंचते हैं। अगर शुक्रवार सुबह पीक आवर के दौरान भारी बारिश हुई, तो क्या एक बार फिर मुंबई की रफ्तार थम सकती है?
मानसून फिर क्यों बना चिंता की वजह?
जुलाई के आखिरी सप्ताह में कुछ दिनों की राहत के बाद एक बार फिर अरब सागर की ओर से नमी बढ़ी है। मौसम विभाग ने मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है।
मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पालघर और रायगढ़ के कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है।
मौसम विभाग का अलर्ट जारी होते ही ज्यादातर खबरें सिर्फ बारिश के आंकड़ों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन असली असर इन लोगों पर पड़ता है—
ऑफिस जाने वाले कर्मचारी
सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच मुंबई की सड़कें और लोकल ट्रेनें सबसे ज्यादा व्यस्त रहती हैं। अगर इसी समय भारी बारिश होती है, तो लाखों लोगों का सफर प्रभावित हो सकता है।
स्कूल और कॉलेज के छात्र
स्कूल बसों, ऑटो और निजी वाहनों से स्कूल जाने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ सकती है। देर रात छुट्टी की घोषणा होने से माता-पिता भी असमंजस में रहते हैं।
लोकल ट्रेन यात्री
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों से रोजाना करीब 70 से 75 लाख यात्री सफर करते हैं। थोड़ी देर की बारिश भी ट्रेनों की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।
डिलीवरी एजेंट और कैब चालक
बारिश बढ़ने पर सड़क जाम, पानी भरने और लंबी दूरी तय करने की वजह से डिलीवरी और कैब सेवाओं पर असर पड़ता है।
इन 10 इलाकों पर सबसे ज्यादा नजर रखने की जरूरत
मुंबई में हर साल कुछ इलाके ऐसे हैं जहां सबसे पहले जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा होती है।
1. सायन सर्कल
सायन मुंबई के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। भारी बारिश के दौरान यहां पानी जमा होने की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं।
2. किंग्स सर्कल
हाई टाइड और तेज बारिश के दौरान इस इलाके में जलभराव बढ़ सकता है।
3. कुर्ला
मध्य रेलवे के यात्रियों के लिए कुर्ला स्टेशन बेहद महत्वपूर्ण है। यहां पानी भरने से लाखों यात्रियों पर असर पड़ सकता है।
4. चेंबूर
चेंबूर और आसपास के इलाकों में बारिश के दौरान ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
5. अंधेरी सबवे
अंधेरी सबवे में पानी भरने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
6. मिलन सबवे (सांताक्रूज)
तेज बारिश के दौरान यहां वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
7. दादर टीटी
दादर मुंबई का प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब है। यहां बारिश का असर पूरे शहर पर दिखाई देता है।
8. भांडुप
पूर्वी उपनगरों के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या देखी जाती है।
9. कल्याण के निचले इलाके
कल्याण और डोंबिवली के कई इलाकों में भारी बारिश के दौरान पानी भरने की आशंका रहती है।
10. वसई-विरार बेल्ट
पिछले कुछ वर्षों में वसई-विरार क्षेत्र में जलभराव के कारण रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है।
सुबह 8 बजे से 11 बजे का समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच का समय सबसे संवेदनशील माना जाता है।
अगर इसी समय भारी बारिश हुई, तो—
लोकल ट्रेनें देरी से चल सकती हैं।
बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
स्कूल बसों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं।
वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर लंबा जाम लग सकता है।
एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लग सकता है।
प्रशासन को पहले से स्पष्ट नीति बनाने की मांग
ऐन मौके पर सिर्फ बारिश, ट्रैफिक और लोकल ट्रेनों की बात होती है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या देर रात होने वाली घोषणाएं हैं।
अगर रात 10 बजे के बाद स्कूल बंद करने का फैसला लिया जाता है, तो—
माता-पिता असमंजस में पड़ जाते हैं।
स्कूल बस ऑपरेटरों की योजना प्रभावित होती है।
कामकाजी माता-पिता को छुट्टी की व्यवस्था करनी पड़ती है।
बच्चों को सुबह जल्दी उठकर इंतजार करना पड़ता है।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई अभिभावक मॉनसून के लिए पहले से स्पष्ट नीति बनाने की मांग कर रहे हैं।
हाई टाइड और बारिश साथ आई तो क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई में जलभराव का सबसे बड़ा कारण सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि हाई टाइड और ड्रेनेज सिस्टम पर बढ़ता दबाव भी है।
अगर भारी बारिश और हाई टाइड एक ही समय पर आते हैं, तो—
सायन, कुर्ला और चेंबूर जैसे इलाकों में पानी भर सकता है।
सबवे बंद किए जा सकते हैं।
ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ सकता है।
लोकल ट्रेनों की गति कम हो सकती है।
लोकल ट्रेन और एयरपोर्ट यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट
फिलहाल पश्चिम रेलवे, मध्य रेलवे और हार्बर लाइन पर सेवाएं सामान्य चल रही हैं, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए यात्रियों को घर से निकलने से पहले रेलवे और ट्रैफिक पुलिस के अपडेट जरूर देखने चाहिए।
एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को कम से कम एक घंटा अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी जाती है।
अगर आप शुक्रवार सुबह घर से निकल रहे हैं, तो ये 10 काम जरूर करें
✅ मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें।
✅ पावर बैंक साथ रखें।
✅ लोकल ट्रेन का लाइव स्टेटस चेक करें।
✅ ऑफिस और स्कूल की एडवाइजरी पढ़ लें।
✅ वाटरप्रूफ बैग का इस्तेमाल करें।
✅ वैकल्पिक रास्ता पहले से तय कर लें।
✅ जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
✅ छाता और रेनकोट साथ रखें।
✅ ट्रैफिक अपडेट देखते रहें।
✅ किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें।
क्या शुक्रवार को स्कूल बंद हो सकते हैं?
फिलहाल मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में स्कूल बंद करने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। हालांकि, मौसम की स्थिति खराब होने पर स्थानीय प्रशासन आखिरी समय में फैसला ले सकता है।
माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे सुबह स्कूल, बीएमसी और मौसम विभाग की वेबसाइट जरूर देखें।
मुंबई के 20 सबसे संवेदनशील सबवे और सड़कें, जहां बारिश के दौरान सबसे पहले बढ़ती है परेशानी
मुंबई में हर साल मानसून के दौरान कुछ ऐसे सबवे और सड़कें हैं, जहां थोड़ी देर की तेज बारिश भी ट्रैफिक व्यवस्था को प्रभावित कर देती है। बीएमसी ने 2026 के मानसून सीजन के लिए शहर में सैकड़ों जलभराव वाले स्थानों की पहचान की है। इनमें से कई जगहों पर सुधार कार्य किए गए हैं, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी खतरा बना हुआ है।
बीएमसी ने मानसून से पहले शहर के जलभराव वाले 496 स्थानों की पहचान की थी। इनमें से कई जगहों पर पंप और जलनिकासी व्यवस्था तैनात की गई है।
बारिश के दौरान बीएमसी कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर, जिन्हें मोबाइल में सेव कर लेना चाहिए
भारी बारिश के दौरान सिर्फ मौसम विभाग की चेतावनी जानना काफी नहीं है। अगर आपके इलाके में पेड़ गिर जाए, सड़क पर पानी भर जाए या कोई आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो ये नंबर आपके काम आ सकते हैं।
बीएमसी ने मानसून से पहले शहर के जलभराव वाले इलाकों में सैकड़ों पंप लगाए हैं और हजारों कर्मचारियों को तैनात किया है। इसके अलावा, कई संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद, शहर में अब भी 29 ऐसे स्थान हैं, जहां जलनिकासी से जुड़े काम पूरी तरह पूरे नहीं हो पाए हैं।
सिर्फ बारिश नहीं, मुंबई के सामने असली चुनौती क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई में जलभराव की समस्या सिर्फ भारी बारिश की वजह से नहीं होती। हाई टाइड, पुराना ड्रेनेज सिस्टम, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और निचले इलाकों में बढ़ता दबाव भी इसके बड़े कारण हैं। महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में बाढ़ से निपटने के लिए 13,000 करोड़ रुपये की एक नई योजना की घोषणा की है।
31 जुलाई को हाई टाइड का समय क्या है और इसका मुंबई पर क्या असर पड़ सकता है?
मुंबई में भारी बारिश के दौरान सिर्फ बादल ही परेशानी की वजह नहीं बनते, बल्कि हाई टाइड (समुद्र में ऊंची लहरें) भी जलभराव का बड़ा कारण बनती हैं। अगर तेज बारिश और हाई टाइड एक ही समय पर आती है, तो निचले इलाकों में पानी निकलने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
31 जुलाई को समुद्र में दो बार हाई टाइड और दो बार लो टाइड आने की संभावना है। ऐसे समय में बीएमसी और आपदा प्रबंधन विभाग विशेष निगरानी रख रहे हैं।
हाई टाइड के दौरान किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है?
वर्ली सी फेस
मरीन ड्राइव
हाजी अली
सायन
किंग्स सर्कल
दादर
कुर्ला
चेंबूर
बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी)
हाई टाइड के दौरान लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
समुद्र किनारे जाने से बचें।
जलभराव वाले इलाकों से होकर यात्रा न करें।
ट्रैफिक पुलिस और बीएमसी के अलर्ट पर नजर रखें।
जरूरत न हो तो घर से बाहर निकलने से बचें।
नोट: हाई टाइड का सटीक समय हर दिन बदलता है। ताजा जानकारी के लिए मौसम विभाग और बीएमसी की वेबसाइट देखें।
मुंबई के कौन-कौन से स्कूल और इलाके हर साल बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं?
बारिश का सबसे ज्यादा असर सिर्फ ट्रैफिक पर नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों पर भी पड़ता है। मुंबई के कई स्कूल ऐसे इलाकों में हैं, जहां हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है।
ऐसे इलाके जहां अभिभावकों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है
सायन
कुर्ला
चेंबूर
दादर
अंधेरी ईस्ट
सांताक्रूज
भांडुप
मुलुंड
वसई
विरार
माता-पिता के लिए जरूरी सलाह
स्कूल का आधिकारिक व्हाट्सऐप ग्रुप जरूर चेक करें।
बच्चों के बैग में वाटरप्रूफ कवर रखें।
स्कूल बस की लाइव लोकेशन पर नजर रखें।
बच्चों को खुले नालों और पानी भरी सड़कों से दूर रखें।
आपातकालीन संपर्क नंबर बच्चों के बैग में रखें।
सबसे बड़ी समस्या क्या है?
अक्सर स्कूल बंद करने की घोषणा देर रात होती है। इससे कामकाजी माता-पिता, स्कूल बस ऑपरेटर और छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई अभिभावक पहले से स्पष्ट मॉनसून नीति की मांग कर रहे हैं।
लोकल ट्रेन के कौन-से सेक्शन बारिश के दौरान सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं?
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें हर दिन करीब 70 से 75 लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। लेकिन भारी बारिश के दौरान कुछ रेलवे सेक्शन सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
मुंबई के वर्सोवा में स्ट्रोक से पीड़ित 73 वर्षीय शरद कदम को पुलिस ने कथित तौर पर शराबी समझकर पांच घंटे थाने में रखा। इलाज में देरी के बाद उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
मुंबई: वर्सोवा इलाके में पुलिस की कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। 73 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यवसायी शरद कदम को कार चलाते समय स्ट्रोक आया, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें शराब के नशे में समझकर करीब पांच घंटे तक वर्सोवा पुलिस स्टेशन में बैठाए रखा। इलाज में देरी के बाद उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
क्या है पूरा मामला?
परिवार के अनुसार, 25 जुलाई की सुबह करीब 9 बजे वर्सोवा निवासी शरद कदम अपनी कार चला रहे थे। इसी दौरान उन्हें अचानक स्ट्रोक आया और वह वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सके। उनकी कार दूसरी कार से टकरा गई।
घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कथित तौर पर उनकी लड़खड़ाती आवाज और असामान्य व्यवहार को शराब के नशे का संकेत माना। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें थाने ले जाकर बैठा दिया।
वर्सोवा पुलिस ने एक कांस्टेबल की शिकायत के आधार पर शरद कदम के खिलाफ लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना तरीके से वाहन चलाने और नशे में ड्राइविंग करने का मामला दर्ज किया है।
एफआईआर के अनुसार, पुलिसकर्मी ने दावा किया कि दुर्घटनास्थल पर कदम के मुंह से शराब की गंध आ रही थी। पुलिस का कहना है कि बाद में उन्हें रक्त में अल्कोहल की जांच के लिए कूपर अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट का अभी इंतजार है।
हालांकि, परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मौके पर कोई ब्रेथलाइजर टेस्ट नहीं कराया और उनकी बिगड़ती हालत को गंभीरता से नहीं लिया।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
शरद कदम के भतीजे और अंधेरी पश्चिम के पार्षद रोहन राठौड़ ने आरोप लगाया कि पुलिस और दुर्घटना में शामिल दूसरी कार में मौजूद एक डॉक्टर ने स्ट्रोक के स्पष्ट संकेतों को नजरअंदाज कर दिया।
राठौड़ के अनुसार, जब एक रिश्तेदार, जो पेशे से वकील हैं, पुलिस स्टेशन पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि शरद कदम वहां गिर पड़े थे और ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। इसके बावजूद उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया।
परिवार का कहना है कि चिकित्सा सहायता में हुई देरी के कारण उनके शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।
रात में अस्पताल में कराया गया भर्ती
परिवार के मुताबिक, शरद कदम को रात करीब 8 बजे कूपर अस्पताल से नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें स्ट्रोक का मरीज बताया।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के मरीजों के लिए शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है।
विधायक अमित साठम ने मांगी कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद विधायक अमित साठम ने मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर वर्सोवा पुलिस स्टेशन के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने डीसीपी पुरुषोत्तम कराड से पूछा है कि अगर बुजुर्ग व्यक्ति की हालत गंभीर थी तो उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता क्यों नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। दूसरी ओर, परिवार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
Mumbai Local Violence: रेलवे पुलिस कमिश्नर एम. राकेश कलसागर ने कहा कि हालिया हिंसा का मुख्य कारण भीड़ नहीं, बल्कि निजी विवाद, गुस्सा और नशा है।
Mumbai Local Violence: मुंबई लोकल में बढ़ती हिंसा पर GRP कमिश्नर का बड़ा बयान
मुंबई: मुंबई के सबअर्बन रेलवे नेटवर्क में हाल की हिंसक घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर IPS एम. राकेश कलसागर ने कहा है कि हालिया घटनाओं के पीछे भीड़भाड़ को मुख्य कारण नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, कई मामलों में छोटी व्यक्तिगत बहस, ईगो क्लैश, अचानक गुस्सा और कुछ मामलों में नशे की हालत हिंसा बढ़ने की वजह बनी है।
रेलवे पुलिस ने हिंसा रोकने के लिए स्टेशनों पर रैंडम चेकिंग, हथियारों की जांच, विजिबल फुट पेट्रोलिंग और संवेदनशील कोचों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने जैसे कदमों पर जोर दिया है।
लोकल ट्रेन में हिंसा की असल वजह क्या है?
मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर के अनुसार, हाल की हिंसक घटनाओं को केवल भीड़भाड़ या लोकल ट्रेनों में जगह की कमी से जोड़ना सही नहीं है। उनका कहना है कि कई घटनाओं में विवाद की शुरुआत छोटी व्यक्तिगत बातों से हुई और बाद में बहस हिंसक झड़प में बदल गई।
इनमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत विवाद, ईगो क्लैश, गुस्से में अचानक प्रतिक्रिया और नशे की हालत जैसे कारण सामने आए हैं। कमिश्नर के अनुसार, हाल के कुछ मामलों में शामिल लोग नशे में थे, जिससे विवाद और अधिक बढ़ गया।
हालांकि, मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीड़भाड़ लंबे समय से एक गंभीर चुनौती है। हालिया हिंसक घटनाओं के संदर्भ में पुलिस कमिश्नर ने इसे इन मामलों का मुख्य कारण नहीं माना है।
मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर IPS एम. राकेश कलसागर
स्टेशन एंट्री पर रैंडम चेकिंग तेज
चाकू, कटर और अन्य नुकीली वस्तुओं से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए GRP ने स्टेशनों पर जांच बढ़ाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रत्येक GRP पुलिस स्टेशन में चेकिंग के लिए पांच लोगों की टीम तैनात की गई है।
स्टेशन के प्रवेश द्वारों पर रैंडम इंस्पेक्शन भी किया जा रहा है। जांच के दौरान यात्रियों के पास से चाकू, कटर ब्लेड और अन्य नुकीली वस्तुएं मिलने के मामले सामने आए हैं। पुलिस यात्रियों से रोजाना की रेल यात्रा के दौरान ऐसी वस्तुएं साथ नहीं रखने की अपील कर रही है।
GRP का कहना है कि कई नुकीले औजार घर या काम की जगह पर उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन उन्हें बिना जरूरत लोकल ट्रेन से यात्रा करते समय साथ ले जाना सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए महिलाओं के डिब्बों समेत ट्रेन के कुछ हिस्सों में सुरक्षा तैनाती के समय में बदलाव किया गया है।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, होम गार्ड्स की ड्यूटी पहले रात 9 बजे से सुबह 6 बजे तक रहती थी। अब इसे सुबह 8 बजे तक बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य सुबह के समय होने वाली बहस, हाथापाई और अन्य विवादों पर जल्द हस्तक्षेप करना है।
इसके अलावा, यात्रियों को हिंसा से बचने और नुकीली वस्तुएं साथ न रखने के लिए बैनर, सार्वजनिक संदेश और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है।
24×7 फुट पेट्रोलिंग पर जोर
मुंबई रेलवे पुलिस के अनुसार, स्टेशन परिसर में लगातार पुलिस की मौजूदगी हिंसा को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों को रेलवे स्टेशनों और प्लेटफॉर्म पर विजिबल पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मुंबई रेलवे पुलिस की आधिकारिक संगठनात्मक जानकारी के अनुसार, रेलवे पुलिस व्यवस्था के तहत मुंबई के विभिन्न रेलवे क्षेत्रों में अलग-अलग जोन और पुलिस इकाइयां काम करती हैं।
पुलिस के अनुसार, कई छोटी बहस और हाथापाई को मौके पर ही रोक दिया जाता है, जिससे वे गंभीर अपराध में बदलने से पहले नियंत्रित हो जाती हैं। कमिश्नर ने बताया कि पिछले दो से तीन वर्षों में हिंसक झगड़ों के लगभग 40 से 45 मामले आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा उनके इंटरव्यू में दिए गए बयान पर आधारित है।
पिछले कुछ समय में मुंबई के सबअर्बन रेलवे नेटवर्क पर कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें मामूली विवादों ने गंभीर रूप ले लिया। 16 जुलाई 2026 को एक लोकल ट्रेन के महिला प्रथम श्रेणी डिब्बे में सीट को लेकर विवाद के दौरान पेपर स्प्रे इस्तेमाल किए जाने की घटना सामने आई। इसके अलावा, अलग-अलग घटनाओं में मारपीट और यात्रियों के घायल होने की खबरें भी सामने आईं।
एक अन्य मामले में सीट को लेकर हुए विवाद में दो यात्री घायल हुए। शुरुआती रिपोर्टों में धारदार हथियार के इस्तेमाल की बात कही गई थी, लेकिन GRP की प्रारंभिक जांच में किसी धारदार हथियार के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई थी। मामले की जांच जारी रही।
इन घटनाओं के बाद यात्रियों के बीच सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई है।
बैगेज स्कैनर और मेटल डिटेक्टर लगाने पर जोर
मुंबई रेलवे पुलिस लंबे समय में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए स्टेशनों पर तकनीकी जांच व्यवस्था बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, रेलवे स्टेशनों पर बैगेज स्कैनर, Door Frame Metal Detectors (DFMDs) और पार्सल स्कैनर लगाने की जरूरत पर रेलवे को कई बार पत्र लिखा गया है।
इन उपकरणों की मदद से स्टेशन परिसर में हथियारों और अन्य संदिग्ध वस्तुओं की जांच को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है। हालांकि, इन व्यवस्थाओं की स्थापना और कार्यान्वयन रेलवे तथा संबंधित एजेंसियों के स्तर पर होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
मुंबई रेलवे पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी विवाद की स्थिति में खुद कानून हाथ में न लें। अगर किसी यात्री को खतरा महसूस हो या कोई हिंसक स्थिति बनती है, तो तुरंत पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है।
मुंबई रेलवे पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, रेलवे पुलिस की 1512 टोल-फ्री हेल्पलाइन उपलब्ध है। इसके अलावा 1800 22 1512 और आधिकारिक WhatsApp हेल्पलाइन नंबर भी दिए गए हैं।
GRP कमिश्नर के अनुसार, हालिया हिंसक घटनाओं का मुख्य कारण भीड़भाड़ नहीं है।
व्यक्तिगत विवाद, ईगो क्लैश और अचानक गुस्सा कई मामलों में प्रमुख कारण बताए गए।
कुछ हालिया मामलों में नशे की हालत भी सामने आई।
स्टेशन एंट्री पर रैंडम चेकिंग बढ़ाई गई है।
नुकीली वस्तुओं और हथियारों की जांच पर जोर है।
महिलाओं के डिब्बों में होम गार्ड्स की ड्यूटी सुबह 8 बजे तक बढ़ाई गई है।
रेलवे स्टेशनों पर 24×7 विजिबल फुट पेट्रोलिंग पर जोर दिया जा रहा है।
बैगेज स्कैनर और DFMDs लगाने की मांग की गई है।
आपात स्थिति में मुंबई रेलवे पुलिस की आधिकारिक हेल्पलाइन 1512 पर संपर्क किया जा सकता है।
मुंबई लोकल में हालिया हिंसक घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर एम. राकेश कलसागर के अनुसार, इन घटनाओं को केवल भीड़भाड़ से जोड़ना सही नहीं है। पुलिस के मुताबिक, व्यक्तिगत विवाद, गुस्सा और नशे जैसी स्थितियां कई मामलों में हिंसा बढ़ने की वजह बनी हैं।
GRP अब रैंडम चेकिंग, विजिबल पेट्रोलिंग, सुरक्षा बलों की तैनाती और जागरूकता अभियानों के साथ-साथ तकनीकी सुरक्षा उपकरणों पर भी जोर दे रही है। यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि किसी विवाद को खुद हिंसा में बदलने के बजाय तुरंत रेलवे पुलिस से मदद मांगी जाए।
मुंबई लोकल में हिंसा बढ़ने की मुख्य वजह क्या बताई गई है?
मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर के अनुसार, हालिया मामलों में व्यक्तिगत विवाद, ईगो क्लैश, अचानक गुस्सा और कुछ मामलों में नशे की स्थिति प्रमुख कारणों के रूप में सामने आई है।
क्या मुंबई लोकल में हिंसा का मुख्य कारण भीड़भाड़ है?
रेलवे पुलिस कमिश्नर के अनुसार, हाल की हिंसक घटनाओं में भीड़भाड़ को मुख्य कारण नहीं माना गया है। हालांकि, मुंबई लोकल में भीड़भाड़ लंबे समय से एक अलग सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।
मुंबई रेलवे पुलिस की हेल्पलाइन क्या है?
मुंबई रेलवे पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यात्री 1512 या 1800 22 1512 पर संपर्क कर सकते हैं।
क्या रेलवे स्टेशनों पर हथियारों की जांच बढ़ाई गई है?
हां। GRP ने रैंडम चेकिंग और स्टेशन प्रवेश पर निरीक्षण बढ़ाने की जानकारी दी है। नुकीली वस्तुओं और अन्य संदिग्ध सामान की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
Chembur Chemical Tanker Blast में मेंटेनेंस के दौरान टैंकर में धमाका हुआ। हादसे में 1 व्यक्ति की मौत और 3 घायल हुए। जानिए पूरी घटना।
मुंबई: मुंबई के चेंबूर (पूर्व) इलाके में शुक्रवार शाम एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया। Chembur Chemical Tanker Blast में मेंटेनेंस के दौरान एक केमिकल/गैस टैंकर में जोरदार विस्फोट हो गया। हादसे में चार लोग घायल हुए, जिनमें से एक व्यक्ति की इलाज के दौरान सायन अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस और फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना की जांच जारी है।
घटना मुकुंद नगर, महीसुर कॉलोनी के पास शाम करीब 5 बजे हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, एक खाली टैंकर पर वेल्डिंग/मेंटेनेंस का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक तेज धमाका हुआ, जिससे आसपास अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, टैंकर की मरम्मत के दौरान वेल्डिंग की जा रही थी। उसी समय टैंकर के भीतर विस्फोट हो गया। हादसे में टैंकर चालक की मौत हो गई, जबकि दो वेल्डर सहित कुल तीन अन्य लोग घायल हुए। हालांकि कुछ शुरुआती रिपोर्टों में चार घायलों का उल्लेख किया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि सभी तथ्यों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद की जाएगी।
राहत और बचाव अभियान तुरंत शुरू
धमाके की सूचना मिलते ही:
मुंबई फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं।
मुंबई पुलिस ने इलाके को घेर लिया।
108 एम्बुलेंस सेवा ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
BEST और बीएमसी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया।
धमाके की वजह क्या थी?
फिलहाल विस्फोट के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि:
क्या टैंकर पूरी तरह गैस-फ्री था?
वेल्डिंग से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं?
मेंटेनेंस प्रक्रिया में कोई तकनीकी लापरवाही हुई थी या नहीं?
चेंबूर औद्योगिक गतिविधियों वाला इलाका है। इससे पहले भी यहां मेंटेनेंस के दौरान औद्योगिक विस्फोट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों के बाद विशेषज्ञ नियमित रूप से हॉट वर्क (Hot Work) के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल, गैस-फ्री सर्टिफिकेशन और निरीक्षण प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करने की जरूरत बताते रहे हैं।
लोगों के मन में उठ रहे प्रमुख सवाल
इस घटना के बाद लोग इंटरनेट पर इन सवालों के जवाब खोज रहे हैं:
Chembur Chemical Tanker Blast कैसे हुआ?
चेंबूर ब्लास्ट में कितने लोग घायल हुए?
मृतक कौन था?
क्या टैंकर खाली था?
धमाके की जांच कौन कर रहा है?
क्या सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था?
चेंबूर में हुआ यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और विस्फोट की वास्तविक वजह सामने आने का इंतजार है। आधिकारिक रिपोर्ट आने तक किसी भी संभावित कारण को अंतिम नहीं माना जा सकता।
Cow Vigilante Threat: मुंबई के मालवनी में गायों का वीडियो बनाने पर महिला सोशल वर्कर को रेप और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज, पुलिस जांच में जुटी।
मुंबई: मुंबई के मालाड़ (पश्चिम) मालवनी इलाके में एक महिला सोशल वर्कर को कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर मालवणी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि खुद को गौरक्षक बताने वाले कुछ लोगों ने महिला को इसलिए धमकाया क्योंकि उसने सड़क किनारे कूड़े के ढेर में भोजन तलाश रही गायों का वीडियो रिकॉर्ड किया था।
शिकायतकर्ता महिला का दावा है कि घटना के दौरान आरोपियों ने वीडियो हटाने का दबाव बनाया और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। पुलिस अब उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता मीनाक्षी कलिता, जो पशु कल्याण और स्ट्रीट डॉग्स को भोजन कराने का काम करती हैं, के अनुसार वह रोज की तरह मालाड़ (पश्चिम) मालवनी के मर्वे बीच क्षेत्र में पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कई गायें कूड़े के ढेर में भोजन तलाश रही हैं।
महिला ने इस स्थिति का वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया ताकि बेसहारा पशुओं की हालत को सामने लाया जा सके। आरोप है कि तभी कुछ युवक वहां पहुंचे और वीडियो तुरंत डिलीट करने की मांग करने लगे।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि यदि वीडियो नहीं हटाया गया और उनकी छवि खराब हुई तो महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर हत्या कर दी जाएगी।
महिला सोशल वर्कर का कहना है कि घटना के बाद जब वह वहां से निकलीं तो आरोपियों ने काफी दूर तक उनका पीछा किया। शिकायतकर्ता के अनुसार इस दौरान की वीडियो रिकॉर्डिंग उनके मोबाइल फोन में मौजूद है, जिसे पुलिस को सौंप दिया गया है।
पुलिस अब इस वीडियो समेत अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
मालवनी पुलिस ने दर्ज किया मामला
शिकायत मिलने के बाद मालवनी पुलिस ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि धमकी देने वाले लोगों की पहचान क्या है और घटना में कितने लोग शामिल थे।
समाचार लिखे जाने तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है।
महिला सोशल वर्कर ने उठाया बड़ा सवाल
घटना के बाद महिला सोशल वर्कर ने सवाल उठाया कि यदि कुछ लोग स्वयं को गौरक्षक बताते हैं तो उन्हें उन गायों की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए जो सड़कों पर कूड़े-कचरे में भोजन तलाशने के लिए मजबूर हैं।
उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संगठन को बदनाम करना नहीं था, बल्कि बेसहारा पशुओं की वास्तविक स्थिति को सामने लाना था।
पुलिस जांच में किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस?
धमकी देने वालों की पहचान
मोबाइल वीडियो की फोरेंसिक जांच
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान
घटनास्थल के आसपास के CCTV फुटेज
कथित धमकी के दौरान मौजूद अन्य डिजिटल साक्ष्य
यह मामला महिला सुरक्षा, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक स्थान पर कथित डराने-धमकाने जैसी गंभीर कानूनी पहलुओं से जुड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।
मालवनी में सामने आया यह मामला महिला सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों मुद्दों को एक साथ सामने लाता है। फिलहाल शिकायत दर्ज हो चुकी है और पुलिस उपलब्ध वीडियो सहित सभी साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने तक आरोपों को शिकायतकर्ता के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। पुलिस की आधिकारिक जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
FAQ Section
Q1. यह घटना कहां की है? यह मामला मुंबई के मालवनी इलाके का है।
Q2. शिकायत किसने दर्ज कराई है? महिला सोशल वर्कर मीनाक्षी कलिता ने शिकायत दर्ज कराई है।
Q3. आरोप क्या हैं? आरोप है कि गायों का वीडियो बनाने पर कुछ लोगों ने रेप और जान से मारने की धमकी दी।
Q4. क्या पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है? हाँ, मालवनी पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Q5. क्या किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है? समाचार लिखे जाने तक गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Fake Milk मामले में दहिसर पुलिस ने अमूल और गोकुल ब्रांड के नाम पर मिलावटी दूध बेचने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया। 470 लीटर दूध नष्ट किया गया।
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शहर में खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। दहिसर पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में अमूल और गोकुल जैसे नामी ब्रांड के दूध में मिलावट कर लोगों को बेचने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मौके से 470 लीटर मिलावटी दूध, नकली पैकिंग सामग्री और दूध में मिलावट करने के उपकरण जब्त किए हैं।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ब्रांडेड दूध के पैकेट खोलकर उसमें गंदा पानी मिलाता था और फिर पैकेट को दोबारा सील कर बाजार में असली दूध बताकर बेच देता था। यह मिलावटी दूध छोटे बच्चों और आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता था।
मुंबई पुलिस की क्राईम ब्रांच युनिट-12 को सूचना मिली थी कि दहिसर पूर्व के दुबे चाल, राजेश कंपाउंड इलाके में एक व्यक्ति ब्रांडेड दूध के पैकेटों में मिलावट कर उन्हें दोबारा बाजार में बेच रहा है।
सूचना के आधार पर गुरुवार सुबह अपराध शाखा और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने संयुक्त छापा मारा। कार्रवाई के दौरान आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
ऐसे करता था दूध में मिलावट
जांच में सामने आया कि आरोपी—
अमूल और गोकुल कंपनी के दूध के पैकेट ब्लेड से सावधानीपूर्वक खोलता था।
पैकेट से कुछ मात्रा में दूध निकाल देता था।
उसकी जगह गंदा और अशुद्ध पानी मिलाता था।
फिर गर्म स्टोव और मोमबत्ती की मदद से पैकेट को दोबारा सील कर देता था।
इसके बाद उसे असली ब्रांडेड दूध बताकर ग्राहकों को बेच देता था।
इस तरीके से उपभोक्ताओं को आसानी से धोखा दिया जा रहा था।
पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि—
केवल अधिकृत दुकानों से ही दूध खरीदें।
पैकेट की सील और पैकिंग ध्यान से जांचें।
यदि पैकेट पहले से खुला या संदिग्ध लगे तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
मिलावटी खाद्य पदार्थों की शिकायत खाद्य एवं औषधि प्रशासन या पुलिस को करें।
दहिसर में हुई यह कार्रवाई मुंबई में खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। समय रहते पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक मिलावटी दूध पहुंचने से पहले ही उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी यह मिलावटी दूध किन इलाकों में सप्लाई करता था और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
FAQ Section
प्रश्न 1: यह कार्रवाई कहां हुई?
दहिसर पूर्व के दुबे चाल, राजेश कंपाउंड इलाके में।
प्रश्न 2: कितनी मात्रा में मिलावटी दूध मिला?
करीब 470 लीटर मिलावटी दूध बरामद किया गया।
प्रश्न 3: कौन-कौन से ब्रांड के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था?
अमूल और गोकुल ब्रांड के पैकेटों का।
प्रश्न 4: दूध में क्या मिलाया जाता था?
पैकेट से कुछ दूध निकालकर उसमें अशुद्ध पानी मिलाया जाता था।
प्रश्न 5: जांच कौन कर रहा है?
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा की इकाई-12 और खाद्य एवं औषधि प्रशासन।
Mumbai Monsoon के बीच अंधेरी सबवे के पास पेड़ की डाल गिरने से 47 वर्षीय कर्मचारी गंभीर घायल। ब्रेन सर्जरी के बाद SICU में भर्ती, हालत नाजुक।
मुंबई: शहर में लगातार हो रही बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है। अंधेरी सबवे के पास बुधवार सुबह एक 47 वर्षीय व्यक्ति पर अचानक पेड़ की भारी डाल गिर गई। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आपातकालीन ब्रेन सर्जरी की। फिलहाल उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उन्हें सर्जिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (SICU) में रखा गया है।
यह घटना एक बार फिर मानसून के दौरान मुंबई में पुराने और कमजोर पेड़ों की सुरक्षा तथा समय पर उनकी छंटाई को लेकर सवाल खड़े करती है।
Mumbai Monsoon: अंधेरी सबवे के पास कैसे हुआ हादसा?
अंधेरी पुलिस के अनुसार यह घटना बुधवार सुबह करीब 8:50 बजे हुई।
47 वर्षीय आदेश गायकर, जो विरार पूर्व के रहने वाले हैं, रोज की तरह लोकल ट्रेन से अंधेरी स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन से अपने कार्यालय की ओर पैदल जाते समय वे अपने मित्र प्रदीप वेंगुर्लेकर के साथ अंधेरी सबवे के पास पहुंचे ही थे कि अचानक एक बड़ा पेड़ का हिस्सा टूटकर सीधे उनके ऊपर गिर गया।
पेड़ की डाल पहले उनकी छतरी से टकराई और फिर सिर पर जोरदार वार हुआ। गंभीर चोट लगने के कारण वह सड़क पर गिर पड़े और उनके सिर से काफी खून बहने लगा।
आदेश गायकर के मित्र प्रदीप वेंगुर्लेकर, जो हादसे के समय उनके साथ मौजूद थे, ने बताया कि वह उनसे कुछ कदम आगे चल रहे थे।
उनके अनुसार अचानक जोरदार आवाज आई और पेड़ की मोटी डाल टूटकर सीधे आदेश के ऊपर गिर गई।
उन्होंने बताया कि कुछ ही सेकंड में आदेश सड़क पर खून से लथपथ पड़े थे। आसपास मौजूद लोगों और पुलिस ने तत्काल मदद की, जिससे उन्हें बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाया जा सका।
पत्नी बोलीं— दो दिन बाद काम पर लौटे थे
आदेश गायकर की पत्नी अपेक्षा गायकर ने बताया कि लगातार बारिश के कारण उन्होंने दो दिन की छुट्टी ली थी।
बुधवार सुबह वह लगभग 7 बजे घर से टिफिन लेकर निकले थे।
करीब 10 बजे परिवार को हादसे की जानकारी मिली।
उन्होंने कहा,
“डॉक्टरों ने ब्रेन सर्जरी की है। अभी तक उन्हें होश नहीं आया है। डॉक्टरों ने बताया है कि अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
Mumbai Monsoon में ऐसे हादसे क्यों बढ़ जाते हैं?
लगातार बारिश और तेज हवाओं के दौरान—
पुराने पेड़ों की शाखाएं कमजोर हो जाती हैं।
सड़न वाले पेड़ अचानक गिर सकते हैं।
भारी बारिश के बाद मिट्टी ढीली होने से पेड़ भी उखड़ सकते हैं।
फुटपाथ और स्टेशन के आसपास पैदल चलने वालों पर सबसे अधिक खतरा रहता है।
इसी कारण नागरिक प्रशासन नियमित ट्री ऑडिट और कमजोर शाखाओं की छंटाई करता है, हालांकि कई बार मौसम की तीव्रता के कारण अचानक दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
नागरिकों के लिए सावधानी
मानसून के दौरान यदि संभव हो तो—
बड़े और पुराने पेड़ों के नीचे रुकने से बचें।
तेज हवा के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें।
प्रशासन द्वारा जारी मौसम अलर्ट का पालन करें।
किसी पेड़ के झुके होने या शाखा टूटने की सूचना तुरंत बीएमसी हेल्पलाइन पर दें।
अंधेरी सबवे के पास हुआ यह हादसा याद दिलाता है कि मुंबई में मानसून केवल जलभराव ही नहीं बल्कि पेड़ों की कमजोर शाखाओं से भी बड़ा खतरा पैदा करता है। फिलहाल आदेश गायकर का इलाज जारी है और परिवार उनकी सलामती की दुआ कर रहा है। वहीं प्रशासन के लिए यह घटना मानसून के दौरान ट्री सेफ्टी और नियमित निरीक्षण को और प्रभावी बनाने की जरूरत की ओर संकेत करती है।
School Holiday Circular के बावजूद कांदिवली की कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल स्कूल खुली रही। BMC ने स्कूल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुंबई: भारी बारिश के कारण बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा मुंबई की सभी निजी और सरकारी स्कूलों में छुट्टी घोषित किए जाने के बावजूद कांदिवली पश्चिम स्थित कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल स्कूल का प्राथमिक विभाग दोपहर सत्र में खुला रहने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल को नोटिस जारी कर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
मंगलवार को मुंबई में लगातार तेज बारिश हो रही थी। मौसम विभाग की चेतावनी और संभावित भारी वर्षा को देखते हुए BMC ने शहर की सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया था। इसके लिए आधिकारिक परिपत्र भी जारी किया गया था।
School Holiday Circular के बावजूद खुला रहा प्राथमिक विभाग
जानकारी के अनुसार, कांदिवली पश्चिम के महावीर नगर में स्थित कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल स्कूल ने अपने दोपहर सत्र के प्राथमिक विभाग की कक्षाएं जारी रखीं। स्कूल बसें भी चलती रहीं और अभिभावकों को बच्चों को बारिश के बीच स्कूल छोड़ने जाना पड़ा।
स्थानीय अभिभावकों के बीच इसे लेकर नाराजगी देखी गई। उनका कहना था कि जब पूरे मुंबई में स्कूल बंद रखने का आदेश था, तब बच्चों को स्कूल बुलाना जोखिम भरा था।
शिक्षा विभाग को मिली शिकायत
पश्चिम विभाग के शिक्षा निरीक्षक संजय जावीरे ने बताया कि BMC का परिपत्र सभी स्कूलों को भेजा गया था। इसके बावजूद कांदिवली की इस स्कूल के दोपहर सत्र के चालू रहने की शिकायत विभाग को मिली। शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने स्कूल प्रशासन से संपर्क किया।
स्कूल प्रबंधन ने विभाग को बताया कि सुबह का माध्यमिक विभाग बंद रखा गया था, लेकिन कुछ अभिभावकों ने ऑरेंज अलर्ट के बावजूद प्राथमिक विभाग की कक्षाएं जारी रखने का अनुरोध किया था। इसी कारण स्कूल खोला गया।
हालांकि शिक्षा विभाग के फोन के बाद दोपहर लगभग 1.30 बजे स्कूल ने कक्षाएं बंद कर बच्चों को घर भेज दिया।
सरकारी आदेश का पालन जरूरी: शिक्षा विभाग
जब शिक्षा निरीक्षक से पूछा गया कि क्या अभिभावकों के अनुरोध पर सरकारी परिपत्र के बावजूद स्कूल चालू रखा जा सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी आदेश का पालन करना अनिवार्य है। इसी वजह से बाद में बच्चों को छुट्टी दी गई।
उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल को नोटिस जारी कर लिखित जवाब मांगा गया है। विभाग अब यह जांच करेगा कि BMC के आदेश के बावजूद स्कूल क्यों चालू रखा गया।
भारी बारिश में स्कूल बंद रखने का क्या होता है नियम?
मुंबई में भारी बारिश, जलभराव या मौसम विभाग की गंभीर चेतावनी के दौरान BMC और प्रशासन छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों में छुट्टी घोषित करते हैं। ऐसे आदेश सभी सरकारी, अनुदानित और निजी स्कूलों पर लागू होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि कई इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।
अभिभावकों के लिए क्या संदेश?
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान स्कूल से मिलने वाले आधिकारिक संदेशों और BMC के निर्देशों पर ध्यान दें। किसी भी भ्रम की स्थिति में सीधे स्कूल प्रशासन या संबंधित शिक्षा अधिकारी से जानकारी लेना बेहतर है।
कांदिवली की कपोल विद्यानिधि इंटरनेशनल स्कूल का मामला मुंबई में School Holiday Circular के पालन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजर शिक्षा विभाग की जांच और स्कूल प्रशासन के जवाब पर टिकी है। मानसून के दौरान छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती आगे भी जारी रहने की संभावना है।
Construction Safety को लेकर कल्याण-डोंबिवली के बिल्डरों ने 16 फीट ऊंचे टीन शेड का नियम बदलने की मांग की। तेज बारिश और आंधी में कई शेड गिरने से बढ़ी चिंता।
कल्याण। ठाणे, मुंबई, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली में पिछले दो दिनों से हो रही तेज बारिश और आंधी के बीच निर्माण स्थलों पर लगाए जाने वाले 16 फीट ऊंचे टीन के सुरक्षा घेरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कई जगह तेज हवा के कारण ये भारी टीन शेड गिर गए, जिससे पैदल चलने वाले लोग घायल हुए और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। अब कल्याण-डोंबिवली के बिल्डरों ने राज्य सरकार से इस नियम में बदलाव की मांग की है।
निर्माण स्थल पर 16 फीट ऊंचा घेरा लगाना है अनिवार्य
वर्तमान निर्माण नियमों के अनुसार, किसी भी इमारत का काम शुरू करने से पहले पूरे भूखंड के चारों ओर करीब 16 फीट ऊंचा टीन का सुरक्षा घेरा लगाना अनिवार्य है। इसका उद्देश्य निर्माण स्थल से उड़ने वाली धूल, मिट्टी और निर्माण सामग्री को बाहर फैलने से रोकना तथा आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
यदि बिल्डर इस नियम का पालन नहीं करता तो स्थानीय नगर निगम या नगर नियोजन प्राधिकरण निर्माण अनुमति देने से इनकार कर सकता है या कार्रवाई कर सकता है।
बिल्डरों का कहना है कि पिछले दो दिनों में तेज हवा और मूसलाधार बारिश के कारण कल्याण, डोंबिवली, ठाणे, मुंबई और नवी मुंबई के कई निर्माण स्थलों पर लगे 16 फीट ऊंचे टीन शेड गिर गए। कुछ स्थानों पर राहगीर घायल हुए, जबकि कई वाहनों को नुकसान पहुंचा।
उनका कहना है कि भारी लोहे के ढांचे और मोटे टीन से बने ये सुरक्षा घेरे सामान्य परिस्थितियों में उपयोगी हैं, लेकिन तेज हवा के दौरान यही लोगों के लिए खतरा बन जाते हैं।
सरकार से नियम में बदलाव की मांग
बिल्डरों ने राज्य सरकार और संबंधित निर्माण प्राधिकरणों से मांग की है कि 16 फीट ऊंचे टीन शेड की अनिवार्यता समाप्त कर छह से आठ फीट ऊंचा टीन लगाया जाए। इसके ऊपर हरे रंग की मजबूत जाली लगाने की अनुमति दी जाए, जिससे सुरक्षा भी बनी रहे और तेज हवा में बड़े हादसों का खतरा भी कम हो।
उनका कहना है कि इससे निर्माण स्थल भी सुरक्षित रहेगा और आसपास रहने वाले लोगों तथा राहगीरों की जान को भी कम खतरा होगा।
निर्माण अनुमति के लिए जरूरी है वर्तमान नियम
बिल्डरों के अनुसार, निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए उन्हें पहले पूरे भूखंड के चारों ओर 16 फीट ऊंचा टीन और लोहे का ढांचा लगाना पड़ता है। नियम का पालन नहीं करने पर निर्माण अनुमति मिलने में परेशानी आती है। इसलिए मजबूरी में यह व्यवस्था करनी पड़ती है, जबकि खराब मौसम में यही ढांचा जोखिम पैदा कर देता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
निर्माण सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा घेरा जरूरी है, लेकिन उसका डिजाइन स्थानीय मौसम और हवा की गति को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए। अत्यधिक ऊंचे और भारी ढांचे की जगह ऐसे सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए जो लोगों की सुरक्षा के साथ तेज हवा का दबाव भी सहन कर सकें।
फिलहाल सरकार या संबंधित निर्माण प्राधिकरण की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि इस प्रस्ताव पर विचार होता है तो निर्माण सुरक्षा नियमों में बदलाव की संभावना बन सकती है।
तेज बारिश और आंधी के दौरान कई निर्माण स्थलों पर सुरक्षा घेरा गिरने की घटनाओं के बाद निर्माण सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बिल्डरों ने 16 फीट ऊंचे टीन शेड की अनिवार्यता में बदलाव की मांग की है। अब निगाहें राज्य सरकार और निर्माण प्राधिकरणों के फैसले पर टिकी हैं कि सुरक्षा और व्यावहारिक जरूरतों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है।
FAQ
प्रश्न: 16 फीट टीन शेड क्यों लगाया जाता है? उत्तर: निर्माण स्थल से धूल, मलबा और अन्य सामग्री बाहर न फैले तथा राहगीरों की सुरक्षा बनी रहे, इसके लिए।
प्रश्न: बिल्डर क्या मांग कर रहे हैं? उत्तर: 16 फीट की जगह 6 से 8 फीट ऊंचा टीन और उसके ऊपर सुरक्षा जाली लगाने की अनुमति।
प्रश्न: किन इलाकों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं? उत्तर: कल्याण, डोंबिवली, ठाणे, मुंबई और नवी मुंबई के कई निर्माण स्थलों पर।
प्रश्न: क्या सरकार ने नियम बदल दिया है? उत्तर: नहीं। फिलहाल केवल मांग की गई है, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।