Category: Public Safety

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  • मुंबई: आधी रात वरळी कोळीवाडा में समुद्र से व्यक्ति को PSI व्हावळे ने बचाया

    मुंबई: आधी रात वरळी कोळीवाडा में समुद्र से व्यक्ति को PSI व्हावळे ने बचाया

    Mumbai News: वरळी कोळीवाडा में आधी रात आत्महत्या के इरादे से समुद्र में उतरे व्यक्ति को PSI व्हावळे और कांस्टेबल पवार ने सुरक्षित बाहर निकालकर जान बचाई।

    मुंबई: वरळी कोळीवाडा इलाके में 2 नवंबर 2026 की आधी रात समुद्र में आत्महत्या के इरादे से उतरे एक व्यक्ति की जान पुलिस की सतर्कता से बच गई। मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से सूचना मिलने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और कांस्टेबल पवार मौके पर पहुंचे और समुद्र में उतरकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला।

    घटना रात 12 बजकर 26 मिनट की है। समय पर की गई पुलिस कार्रवाई से संभावित जनहानि टल गई।

    मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली थी सूचना

    वरळी कोळीवाडा इलाके में एक व्यक्ति आत्महत्या करने के उद्देश्य से समुद्र में उतर गया था। इसकी जानकारी मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष को मिली। नियंत्रण कक्ष से सूचना मिलने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और बीट मार्शल-1 पर तैनात पुलिस कांस्टेबल क्रमांक 111052 पवार तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुए।

    मौके पर पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने देखा कि एक व्यक्ति समुद्र के पानी में मौजूद है और उसकी जान को खतरा है।

    समुद्र में उतरकर पुलिसकर्मियों ने किया बचाव

    व्यक्ति की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और कांस्टेबल पवार ने समुद्र में उतरकर उसे बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। दोनों पुलिसकर्मियों के प्रयासों के बाद व्यक्ति को सुरक्षित समुद्र से बाहर निकाल लिया गया।

    इस कार्रवाई में पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना तत्काल कदम उठाया। समय पर किए गए बचाव अभियान से एक संभावित जानलेवा घटना टल गई।

    बचाए गए व्यक्ति की पहचान और चिकित्सा सहायता

    समुद्र से बाहर निकालने के बाद पुलिस ने व्यक्ति की पहचान और घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की कार्रवाई की। साथ ही उसकी प्रकृति की जांच करते हुए उसे जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगे की कार्रवाई की गई।

    हालांकि, बचाए गए व्यक्ति की उम्र, पहचान, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति और आत्महत्या का प्रयास करने के पीछे की वजह के बारे में फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    आधी रात की पुलिस सतर्कता से टली संभावित जनहानि

    वरळी कोळीवाडा की इस घटना में मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली सूचना के बाद तत्काल घटनास्थल पर पहुंचना और समुद्र में उतरकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना महत्वपूर्ण रहा।

    पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और पुलिस कांस्टेबल पवार की इस कार्रवाई से संभावित जनहानि टल गई। घटना की जानकारी दादर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री बालकृष्ण घाडीगांवकर को सविनय प्रस्तुत की गई।

    आत्महत्या के प्रयास से संबंधित ऐसी घटनाओं में समय पर सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। संकट में फंसे किसी व्यक्ति की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस या आपातकालीन सहायता से संपर्क करना उसकी जान बचाने में मददगार हो सकता है।

  • मुंबई के अल्पिन टॉवर में 15 वर्षीय लड़की की मौत, पुलिस ने दर्ज किया ADR

    मुंबई के अल्पिन टॉवर में 15 वर्षीय लड़की की मौत, पुलिस ने दर्ज किया ADR

    मुंबई के कांदिवली पूर्व स्थित अल्पिन टॉवर में 15 वर्षीय लड़की की मौत हुई। शताब्दी अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, पुलिस ने ADR दर्ज कर जांच शुरू की।

    मुंबई: कांदिवली पूर्व स्थित ठाकुर विलेज के ‘अल्पिन टॉवर’ में 15 वर्षीय लड़की की मौत से इलाके में चिंता का माहौल है। 1 नवंबर 2026 की देर रात पुलिस को घटना की जानकारी मिली थी। लड़की को कांदिवली पश्चिम स्थित शताब्दी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने रात 2:22 बजे उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर आगे की जांच शुरू की है।

    यह घटना अल्पिन टॉवर के कमरा नंबर 2804 में हुई। शुरुआती पुलिस जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना 1 नवंबर को रात करीब 1:53 बजे मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    शताब्दी अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

    घटना के बाद परिजन लड़की को तुरंत कांदिवली पश्चिम स्थित शताब्दी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद रात 2:22 बजे उसे मृत घोषित कर दिया।

    इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा किया और आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कराई। मृतका के शव को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखा गया था।

    पिता का बयान दर्ज, किसी पर संदेह नहीं जताया

    इस मामले में पुलिस ने मृतका के पिता का बयान भी दर्ज किया है। शुरुआती पुलिस जानकारी के अनुसार, पिता ने अपने बयान में किसी पर संदेह व्यक्त नहीं किया है।

    हालांकि, परिवार की ओर से संदेह नहीं जताया जाना अपने आप में घटना के कारण की पुष्टि नहीं करता। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस जांच में अब किन बातों पर नजर?

    फिलहाल इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की गई है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और उससे मिलने वाले चिकित्सकीय निष्कर्ष आगे की जांच के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

    मृत्यु के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी, घटना से पहले किन परिस्थितियों में यह सब हुआ और क्या कोई अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है, इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं।

    पुलिस की ओर से उपलब्ध शुरुआती जानकारी में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या किसी विशेष कारण की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए घटना को लेकर सोशल मीडिया पर फैलने वाले अप्रमाणित दावों पर भरोसा करना उचित नहीं होगा।

    किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की जरूरत

    इस घटना ने किशोर उम्र के बच्चों की भावनात्मक और मानसिक स्थिति को लेकर भी ध्यान आकर्षित किया है। माता-पिता और शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और उनकी परेशानियों को गंभीरता से सुनें।

    यदि कोई किशोर भावनात्मक तनाव या मानसिक परेशानी से गुजर रहा है, तो उसे समय पर विशेषज्ञ की मदद मिलनी चाहिए। इसके लिए भारत सरकार की Tele-MANAS मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 14416 पर निःशुल्क सहायता उपलब्ध है।

    फिलहाल कांदिवली के अल्पिन टॉवर में हुई इस घटना में पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम से मिलने वाले निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। मृत्यु का वास्तविक कारण और उससे जुड़े अन्य तथ्य सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • Pune Bus Accident: चलती इलेक्ट्रिक बस के पहियों के नीचे आईं 79 वर्षीय महिला, मौत; चालक पर केस

    Pune Bus Accident: चलती इलेक्ट्रिक बस के पहियों के नीचे आईं 79 वर्षीय महिला, मौत; चालक पर केस

    Pune Hadapsar Bus Accident: कमलाबाई लोंढे की इलेक्ट्रिक बस के पिछले पहियों के नीचे आने से मौत। पुलिस ने चालक पर लापरवाही का मामला दर्ज किया।

    पुणे: हडपसर में 29 अक्टूबर को हुए इलेक्ट्रिक बस हादसे में 79 वर्षीय कमलाबाई दादू लोंढे की मौत हो गई। वह सासवड स्थित मंदिर में दर्शन के लिए जा रही थीं। पुलिस ने बस चालक के खिलाफ लापरवाही से मौत और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। हादसे के बाद पुणे की सार्वजनिक बसों में यात्रियों, खासकर बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।

    हडपसर में कैसे हुआ हादसा?

    यह घटना दोपहर करीब 12 बजे हडपसर इलाके में हुई। कमलाबाई दादू लोंढे भेकराई नगर डिपो से संचालित इलेक्ट्रिक बस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। यह बस हडपसर गाडीतल से सासवड की ओर जा रही थी।

    हडपसर पुलिस स्टेशन के उपनिरीक्षक राघवेंद्र सालगर के अनुसार, महिला ने चलती बस के पिछले दरवाजे से चढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और उनके पैर बस के पिछले पहियों के नीचे आ गए।

    हादसे के बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    कमलाबाई सासवड में मंदिर दर्शन के लिए जा रही थीं। एक सामान्य धार्मिक यात्रा उनके परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गई।

    चालक तुषार देविदास कामठे पर दर्ज हुआ मामला

    हडपसर पुलिस ने बस चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 281 के साथ मोटर वाहन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

    धारा 106(1) लापरवाही के कारण किसी व्यक्ति की मौत होने से संबंधित है, जबकि धारा 281 सार्वजनिक रास्ते पर खतरनाक या लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ी है।

    प्रारंभिक स्थानीय जानकारी में बस चालक की पहचान तुषार देविदास कामठे के रूप में बताई गई थी। शुरुआती घटनाक्रम में उसे हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, पुलिस उपनिरीक्षक राघवेंद्र सालगर के बाद के बयान के अनुसार, चालक की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि नहीं हुई। उसे जांच में उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया है।

    महिला के बेटे सुरेंद्र लोंढे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। मामले में चालक की जिम्मेदारी और दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच जारी है।

    पुणे में पहले भी सामने आ चुका है चलती बस से जुड़ा जानलेवा हादसा

    हडपसर की घटना से पहले 24 अगस्त 2026 को पुणे के सिंहगढ़ रोड पर 25 वर्षीय छात्रा कंचन बलवंत खड्डा की बस दुर्घटना में मौत हुई थी।

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    कंचन डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) की छात्रा थीं। वह चलती PMPML बस के सामने वाले दरवाजे से नीचे गिर गई थीं। इसके बाद वह एक स्कूल बस के पहियों के नीचे आ गईं और उनकी मौत हो गई।

    इस घटना के बाद पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) ने बसों के खुले दरवाजों के साथ चलने के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया था।

    PMPML ने बसों के दरवाजे बंद रखने के दिए थे निर्देश

    सितंबर 2026 में PMPML ने शहर में चलने वाली बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कार्रवाई शुरू की थी। परिवहन प्रशासन ने बस चलते समय सभी दरवाजे बंद रखने और डिपो से निकलने से पहले उनकी स्थिति जांचने के निर्देश दिए थे।

    ड्राइवर, कंडक्टर और डिपो मैनेजर को भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

    इसके बावजूद पुणे में बसों के खुले दरवाजों के साथ चलने की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में हडपसर की नई घटना ने बस संचालन और यात्री सुरक्षा के इंतजामों पर दोबारा ध्यान खींचा है।

    हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि 29 अक्टूबर के हादसे में सितंबर के सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन हुआ था।

    बुजुर्ग यात्रियों के लिए बस में चढ़ने की व्यवस्था कितनी सुरक्षित?

    PMPML ने दिसंबर 2024 में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को बस के सामने वाले दरवाजे से प्रवेश देने की व्यवस्था से संबंधित निर्देश जारी किए थे। इसका उद्देश्य पीछे के दरवाजे पर भीड़ के कारण होने वाली परेशानी कम करना था।

    इस व्यवस्था के संदर्भ में अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित बोर्डिंग सुविधा वर्तमान में कितनी प्रभावी है और क्या इसका पालन सभी संबंधित बस रूटों पर किया जा रहा है।

    बस के पूरी तरह रुकने के बाद ही यात्रियों को चढ़ने और उतरने देना तथा सभी यात्रियों के सुरक्षित होने के बाद वाहन आगे बढ़ाना सार्वजनिक परिवहन की बुनियादी सुरक्षा प्रक्रिया है।

    1 नवंबर से बुजुर्गों को PMPML टिकट पर 50% छूट

    इसी बीच PMPML ने 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के यात्रियों के लिए 1 नवंबर 2026 से नियमित बस टिकटों पर 50 प्रतिशत किराया छूट लागू की है।

    यह सुविधा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और PMRDA क्षेत्र के सभी PMPML बस रूटों पर लागू है।

    छूट का लाभ लेने के लिए यात्री आधार कार्ड, PAN कार्ड या PMPML का वरिष्ठ नागरिक पहचान पत्र दिखा सकते हैं। आधार कार्ड पर पूरी जन्मतिथि दर्ज होना जरूरी है।

    पहले वरिष्ठ नागरिकों को 70 रुपये के दैनिक पास पर 35 रुपये में यात्रा की सुविधा मिलती थी। अब 50 प्रतिशत छूट सामान्य टिकटों पर भी लागू कर दी गई है।

    यह फैसला बुजुर्ग यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। लेकिन किराये में राहत के साथ उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण

    हडपसर हादसे में पुलिस की जांच के साथ PMPML की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। संबंधित इलेक्ट्रिक बस का CCTV फुटेज, GPS रिकॉर्ड, ड्यूटी विवरण और दुर्घटना के समय बस की वास्तविक स्थिति जांच में मददगार हो सकती है।

    इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि बस निर्धारित स्टॉप पर रुकी थी या नहीं और यात्रियों के चढ़ने से पहले वाहन आगे बढ़ा था या नहीं।

    फिलहाल पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां और चालक की कानूनी जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • दिवाली सफाई में बड़ी सेंध: मुंबई में ऑनलाइन क्लीनर्स का ₹12 लाख का स्कैम

    दिवाली सफाई में बड़ी सेंध: मुंबई में ऑनलाइन क्लीनर्स का ₹12 लाख का स्कैम

    मुंबई के मलाड में ऑनलाइन ऐप से बुक किए गए सफाईकर्मियों ने घर से 12 लाख के गहने उड़ाए। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 3 को दबोचा। जानिए सुरक्षा नियम।

    मुंबई: त्योहारों के सीजन में अगर आप भी घर की ‘दिवाली सफाई’ के लिए किसी ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रोफेशनल क्लीनर्स बुक कर रहे हैं, तो बेहद सतर्क हो जाइए। मुंबई में इस समय ‘प्रोफेशनल दिवाली क्लीनर्स स्कैम’ का एक बेहद खतरनाक और संगठित नेटवर्क एक्टिव हो गया है।

    मलाड वेस्ट के पॉश ‘फाल्कन टावर’ में रहने वाले एक परिवार को ऑनलाइन ऐप से सफाईकर्मी बुलाना भारी पड़ गया। यहां सफाई के बहाने आए शातिर गिरोह ने घर की अलमारी साफ कर ₹12 लाख के सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर लिया। मलाड पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    केमिकल स्प्रे और ‘वड़ा पाव’ की आड़ में वारदात

    यह सनसनीखेज घटना 26 अक्टूबर की है, जब 52 वर्षीय महिला ने एक दिन पहले ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए होम-क्लीनिंग सर्विस बुक की थी। अगली सुबह करीब 10 बजे चार सफाईकर्मी फ्लैट पर पहुंचे। उन्होंने मास्टर बेडरूम में केमिकल स्प्रे करने की बात कही और घरवालों को सांस फूलने व बदबू के डर से दूर रहने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने खुद को कमरे के अंदर लॉक कर लिया और अलमारी का लॉकर तोड़कर 50 ग्राम का सोने का नेकलेस, 10 ग्राम का मंगलसूत्र, 50 ग्राम का गोल्ड बिस्कुट और 500 ग्राम चांदी के सिक्के निकाल लिए।

    चोरी के माल को तुरंत ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने एक शातिर चाल चली। करीब 11:30 बजे, एक सफाईकर्मी ‘वड़ा पाव’ खरीदने के बहाने बाहर गया और चोरी के सारे आभूषण बाहर खड़े अपने तीसरे साथी को पास कर दिए। इसके बाद बाकी आरोपी काम अधूरा छोड़कर अगले दिन आने का वादा करते हुए दोपहर 1:30 बजे वहां से निकल गए। 28 अक्टूबर को जब परिवार ने अलमारी खोली, तब चोरी का खुलासा हुआ।

    मास्टरमाइंड का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

    पीड़ित परिवार की शिकायत पर मलाड पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर फौरन जांच शुरू की। पुलिस की डिटेक्शन टीम ने जाल बिछाकर मुख्य साजिशकर्ता पवन धीवर (26), सत्यम शुक्ला (18) और अनीश चौरसिया (19) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी पवन धीवर का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और यह पूरा गैंग जून 2026 से इस ऑनलाइन सफाई कंपनी में एक्टिव था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 11 तोला सोना (लगभग 8 से 9 लाख रुपये मूल्य) बरामद कर लिया है। बाकी की चांदी और बचे हुए आभूषणों की तलाश के लिए पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

    ऑनलाइन कंपनियों की लापरवाही और उपभोक्ता के अधिकार

    इस घटना ने गिग-इकोनॉमी और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। मुंबई पुलिस के नियमों के मुताबिक, किसी भी सर्विस एग्रीगेटर ऐप या एजेंसी के लिए अपने सभी फील्ड स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification Certificate) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कंपनियां बिना बैकग्राउंड चेक किए किसी अपराधी को आपके बेडरूम तक भेज रही हैं, तो उपभोक्ता लापरवाही के तहत कंपनियों के खिलाफ भी पुलिस में आपराधिक मामला और कंज्यूमर कोर्ट में भारी मुआवजे का केस दर्ज कराया जा सकता है।

    सुरक्षा के लिए इन 4 बातों का रखें ध्यान

    • प्रोफाइल और आईडी का मिलान: घर में प्रवेश देने से पहले सफाईकर्मियों के आधार कार्ड और ऐप पर दिख रही प्रोफाइल फोटो को जरूर चेक करें।
    • कर्मचारियों पर सीधी नजर: जब कर्मचारी घर के अंदर काम कर रहे हों, तो परिवार का कम से कम एक सदस्य निगरानी के लिए वहां जरूर मौजूद रहे। केमिकल स्प्रे के बहाने उन्हें कमरे में अकेला न छोड़ें।
    • सोसाइटी गेट पर सख्त एंट्री: सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड्स को निर्देश दें कि वे आने वाले हर सर्विस प्रोवाइडर की तस्वीर और उनके बैग्स की चेकिंग एंट्री बुक में दर्ज करें।
    • कीमती सामान पहले करें सुरक्षित: सफाई शुरू होने से पहले ही अपने सोने, चांदी और कैश को ऐसे कमरों या लॉकर में शिफ्ट कर दें, जहां सफाई नहीं होनी है।

    मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी फिलहाल पुलिस कस्टडी में हैं और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गैंग ने मुंबई के अन्य किन इलाकों में सफाई के बहाने चोरियां की हैं।

  • मलाड SRA विवाद: अभिजीत केलकर ने कहा- मेरी जान को खतरा, फडणवीस-शिंदे से मांगी मदद

    मलाड SRA विवाद: अभिजीत केलकर ने कहा- मेरी जान को खतरा, फडणवीस-शिंदे से मांगी मदद

    मुंबई के मलाड पूर्व में चॉल के पुनर्विकास को लेकर मराठी अभिनेता अभिजीत केलकर ने गंभीर आरोप लगाए। जान को खतरा बताते हुए देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे से मदद मांगी।

    मुंबई: मलाड पूर्व में चॉल के पुनर्विकास को लेकर मराठी अभिनेता अभिजीत केलकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि बिल्डर और कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव में लोगों के पुश्तैनी घर तोड़े जा रहे हैं और विरोध करने वाले निवासियों को धमकियां दी जा रही हैं। अभिनेता ने अपनी जान को खतरा बताते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मदद की गुहार लगाई है।

    31 अक्टूबर 2026 को सामने आई उनकी फेसबुक पोस्ट में मलाड पूर्व के पुष्पा पार्क और बाणडोंगरी इलाके का मामला उठाया गया है। केलकर का कहना है कि वह पिछले छह महीनों से इस पूरे विवाद को देख रहे हैं और खुद भी इसका सामना कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि उनका विरोध पुनर्विकास से नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं और लोगों के घरों पर अधिकार छीनने की कोशिशों से है।

    अभिजीत केलकर ने फेसबुक पोस्ट में क्या आरोप लगाए?

    अभिजीत केलकर ने अपनी पोस्ट में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि उन्हें दोनों नेताओं पर भरोसा है, लेकिन मलाड पूर्व के पुष्पा पार्क और बाणडोंगरी में स्थानीय स्तर पर गरीब परिवारों के साथ अन्याय हो रहा है।

    उन्होंने लिखा कि इन इलाकों में उनके परिवार के पुश्तैनी घर हैं। उनके माता-पिता ने मेहनत करके यहां अपना घर बनाया और परिवार का पालन-पोषण किया। इन घरों से कई परिवारों की पीढ़ियों की यादें और जीवन जुड़ा हुआ है।

    अभिनेता के अनुसार, कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि और बिल्डर मिलकर गरीब परिवारों के सिर से छत छीनने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर के पैसे के प्रभाव से व्यवस्था को प्रभावित किया जा रहा है और स्थानीय लोगों को कथित तौर पर गुंडों के जरिए धमकाया जा रहा है।

    केलकर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ घर बिना उचित एग्रीमेंट और जरूरी दस्तावेज दिखाए तोड़े जा रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि वह किसी को बदनाम नहीं करना चाहते, इसलिए फिलहाल संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि आगे चलकर उन्हें नाम उजागर करने पड़ सकते हैं।

    ‘मेरी जान को खतरा है’, परिवार को बताकर घर से निकले अभिनेता

    इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात अभिजीत केलकर का अपनी सुरक्षा को लेकर जताया गया डर है।

    उन्होंने फेसबुक पोस्ट में कहा कि उनकी जान को खतरा है। उन्होंने बताया कि घर से निकलने से पहले अपनी मां, पत्नी और बच्चों को पूरी स्थिति के बारे में बता दिया है।

    अभिनेता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें उनके अधिकार के घर मिलने चाहिए।

    उनका कहना है कि जिन परिवारों ने वर्षों तक मेहनत करके अपने घर बनाए हैं, उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के बेघर नहीं किया जाना चाहिए।

    घरों को आधा तोड़ने और पुनर्विकास की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    अभिजीत केलकर ने अपनी एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में तोड़े गए घरों की तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं। उन्होंने पुनर्विकास की प्रक्रिया और निर्माण स्थल की व्यवस्था पर कई सवाल उठाए हैं।

    उनके आरोपों के मुताबिक:

    • कुछ घरों को कथित तौर पर आधा तोड़ दिया गया है, जबकि निर्माण स्थल के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
    • प्रभावित लोगों को घर खाली करने के लिए लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
    • कुछ परिवारों के पास उचित एग्रीमेंट और पूरे दस्तावेज नहीं होने के बावजूद तोड़फोड़ की जा रही है।
    • निर्माण स्थल तक पहुंचने के लिए पर्याप्त सड़क की व्यवस्था नहीं है। वहां केवल एक संकरा पुल है, जिससे लोगों का आना-जाना संभव है।
    • जिन जमीन मालिकों की जमीन पर पुनर्विकास प्रस्तावित है, उनसे कथित तौर पर NOC नहीं लिया गया है।

    केलकर ने सवाल उठाया है कि अगर जमीन मालिक पहले ही कोर्ट का रुख कर चुके हैं और भविष्य में अदालत ने पुनर्विकास परियोजना पर रोक लगा दी, तो जिन लोगों के घर पहले ही तोड़े जा चुके होंगे, उन्हें घर या किराया कैसे मिलेगा?

    50-60 साल से रह रहे परिवारों को SRA में अपात्र करने का आरोप

    अभिनेता ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) की पात्रता प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

    उनका आरोप है कि कुछ परिवार पिछले 50 से 60 वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं, लेकिन बिल्डर के सामने झुकने से इनकार करने वाले कुछ लोगों को SRA प्रक्रिया के तहत अपात्र घोषित कर दिया गया है।

    इसके उलट, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय दबंगों ने कथित तौर पर अनधिकृत झोपड़ियां बनाकर उन्हें पात्र करवा लिया है।

    केलकर ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए मांग की है कि लंबे समय से रहने वाले वास्तविक निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

    सैन्य परिसर के पास निर्माण को लेकर भी उठाया सवाल

    अभिजीत केलकर ने पुनर्विकास परियोजना की जगह के पास स्थित सैन्य परिसर और Central Ordnance Depot (COD) का मुद्दा भी उठाया है।

    उनका सवाल है कि सैन्य प्रतिष्ठान के आसपास निर्माण की ऊंचाई और अन्य नियमों को ध्यान में रखते हुए परियोजना को आवश्यक मंजूरियां मिली हैं या नहीं।

    उन्होंने आशंका जताई कि यदि घर तोड़ने के बाद रक्षा विभाग की ओर से निर्माण पर आपत्ति आती है या परियोजना को अनुमति नहीं मिलती, तो पहले से बेघर हो चुके परिवारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

    यह सवाल भी उठाया गया है कि परियोजना की सड़क कनेक्टिविटी, जमीन मालिकों की सहमति और निर्माण संबंधी मंजूरियों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

    पुनर्विकास के खिलाफ नहीं हैं अभिजीत केलकर

    अभिनेता ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया है कि वह मलाड के चॉल और झुग्गी बस्ती इलाकों में पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं।

    उनकी मांग है कि पुनर्विकास की प्रक्रिया पारदर्शी हो और लंबे समय से रहने वाले परिवारों को उनके अधिकारों के अनुसार घर मिलें। जिन लोगों को SRA के तहत अपात्र घोषित किया गया है, उनकी पात्रता की भी जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सवाल किया है कि क्या वे लिखित रूप में यह जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं कि चॉल में रहने वाले सभी वास्तविक और प्रभावित परिवारों को उनका हक मिलेगा?

    केलकर का कहना है कि यदि प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों और घरों की गारंटी लिखित रूप में दी जाती है, तो वे पुनर्विकास प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

    फिलहाल इस मामले में बिल्डर, संबंधित स्थानीय जनप्रतिनिधियों, SRA और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अभिजीत केलकर द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और मलाड पूर्व के प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

  • मुंबई में प्रदूषण पर BMC की बड़ी कार्रवाई, 69.55 किमी सड़कें साफ; 115 टन मलबा हटाया

    मुंबई में प्रदूषण पर BMC की बड़ी कार्रवाई, 69.55 किमी सड़कें साफ; 115 टन मलबा हटाया

    मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए BMC का विशेष अभियान जारी है। 69.55 किमी सड़कें साफ कर 39.75 टन धूल और 115 टन निर्माण मलबा हटाया गया।

    मुंबई: बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने मुंबई में सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। 29 अक्टूबर को शहर की 69.55 किलोमीटर लंबी सड़कों की सफाई की गई। इस दौरान 39.75 टन धूल और 115 टन निर्माण एवं तोड़फोड़ का मलबा हटाया गया। यह विशेष अभियान 26 प्रशासनिक वार्डों की 146 सड़कों पर चलाया जा रहा है।

    मुंबई में सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए यह अभियान 28 अक्टूबर से शुरू किया गया है। इसके तहत प्रमुख यातायात मार्गों के साथ उन इलाकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जहां सड़कों पर अधिक धूल और मिट्टी जमा होती है।

    मुंबई के 13 निगरानी केंद्रों पर पीएम-10 का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक

    मुंबई में प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के 14 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से 13 केंद्रों पर पीएम-10 का वार्षिक औसत राष्ट्रीय निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज किया गया है।

    बीएमसी की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, चेंबूर और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में पीएम-10 का वार्षिक औसत 125 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी राष्ट्रीय वार्षिक सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। कांदिवली एकमात्र ऐसा निगरानी केंद्र रहा, जहां यह सीमा पार नहीं हुई।

    पीएम-10 हवा में मौजूद ऐसे छोटे कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर के श्वसन तंत्र में पहुंच सकते हैं। वहीं पीएम-2.5 इससे भी छोटे कण होते हैं, जो फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं।

    किन सड़कों पर चल रहा है सफाई अभियान?

    BMC ने मुंबई के 26 प्रशासनिक वार्डों की 146 सड़कों को इस विशेष अभियान में शामिल किया है। इनमें प्रमुख यातायात मार्गों को प्राथमिकता दी गई है।

    इनमें बांद्रा-कुर्ला संपर्क मार्ग, सांताक्रूज-चेंबूर संपर्क मार्ग, पूर्वी और पश्चिमी द्रुतगति मार्ग, जोगेश्वरी-विक्रोली संपर्क मार्ग, घाटकोपर-मानखुर्द मार्ग, एसवी रोड, लिंक रोड, कार्टर रोड और सायन-मानखुर्द मार्ग शामिल हैं।

    29 अक्टूबर को कुल 29 मार्गों पर सफाई की गई। इस दौरान सड़कों के किनारों, फुटपाथ, सड़क विभाजकों और किनारे बने पत्थर के हिस्सों पर जमा धूल और मिट्टी हटाई गई। इसके साथ ही धूल वाले स्थानों पर पानी का छिड़काव और बारीक फुहारों का इस्तेमाल किया गया, ताकि सफाई के दौरान धूल हवा में न फैले।

    541 कर्मचारी और 471 स्वयंसेवक अभियान में तैनात

    इस अभियान को पूरा करने के लिए BMC ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों और मशीनों को लगाया है। 29 अक्टूबर को 541 सफाई कर्मचारी और 471 स्वयंसेवक काम कर रहे थे।

    सफाई के लिए 18 जेसीबी मशीनें, 20 डंपर, 21 धुंध छिड़काव मशीनें, 21 यांत्रिक सड़क सफाई मशीनें, 6 छोटी विद्युत सफाई मशीनें और 6 सड़क विभाजक सफाई मशीनों का इस्तेमाल किया गया।

    हटाई गई धूल और निर्माण मलबे को एकत्र कर उसके उचित निपटारे की व्यवस्था भी की गई।

    निर्माण स्थलों पर भी BMC की सख्ती, 299 नोटिस जारी

    सड़क की सफाई के साथ BMC निर्माण और तोड़फोड़ के कामों से होने वाले प्रदूषण पर भी कार्रवाई कर रही है।

    अक्टूबर 2026 में 22 तारीख तक प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन नहीं करने वाले निर्माण स्थलों को 29 काम बंद करने के नोटिस और 270 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

    वार्डवार कार्रवाई में एन वार्ड में सबसे अधिक 105 कारण बताओ नोटिस जारी हुए। इसके अलावा टी वार्ड में 52 और आर-दक्षिण वार्ड में 42 नोटिस दिए गए। शेष 71 नोटिस दूसरे वार्डों में जारी किए गए।

    निर्माण स्थलों के आकार के अनुसार आसपास की सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी भी तय की गई है। 4,000 वर्ग मीटर तक के निर्माण स्थलों को दोनों ओर 100 मीटर, 4,000 से 10,000 वर्ग मीटर तक के स्थलों को 200 मीटर और 10,000 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों को दोनों ओर 500 मीटर तक सड़क की सफाई करनी है।

    हर वार्ड को 15 लाख रुपये, सफाई की निगरानी भी होगी

    इस विशेष अभियान के लिए प्रत्येक प्रशासनिक वार्ड को 15 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है। यदि सभी 26 वार्डों के लिए यह राशि समान रूप से निर्धारित है, तो कुल प्रावधान 3.90 करोड़ रुपये बैठता है।

    अभियान के दौरान अधिकारियों को सफाई से पहले और बाद के स्थान-आधारित फोटो और वीडियो जमा करने, प्रतिदिन साफ किए गए मार्गों का विवरण देने तथा हटाई गई धूल और मलबे की मात्रा का रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    इससे सफाई कार्य की निगरानी और वार्डवार प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

    प्रदूषण से बच्चों और सांस के मरीजों को अधिक खतरा

    सड़कों पर जमा धूल और हवा में मौजूद बारीक कणों का असर आम लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से खांसी, आंखों और गले में जलन तथा सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अस्थमा के मरीजों की समस्या भी बढ़ सकती है।

    बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों को वायु प्रदूषण से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

    हालांकि, केवल सड़कों की सफाई से मुंबई का पूरा वायु प्रदूषण खत्म नहीं हो सकता। वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य, कचरा जलाना और मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को प्रभावित करती हैं। इसलिए सड़क की धूल हटाने के साथ इन दूसरे स्रोतों पर नियंत्रण भी जरूरी है।

    मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाने की मांग

    मुंबई के पालक मंत्री आशीष शेलार ने भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर अतिरिक्त उपाय करने का सुझाव दिया है।

    उनके सुझावों में सप्ताह में एक दिन निर्माण और तोड़फोड़ का काम बंद रखने पर विचार, प्रदूषण वाले इलाकों में पानी का छिड़काव, रात के समय मशीनों से सड़कों की सफाई बढ़ाना और कचरा जलाने तथा अवैध रूप से निर्माण मलबा फेंकने की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करना शामिल है।

    इसके अलावा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और निर्माण स्थलों पर वायु गुणवत्ता मापने वाले उपकरणों की व्यवस्था पूरी करने पर भी जोर दिया गया है।

    सप्ताह में एक दिन निर्माण कार्य बंद रखने का सुझाव है, इसे लागू सरकारी आदेश नहीं माना जाना चाहिए।

    BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े के निर्देश पर अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा के मार्गदर्शन और उप आयुक्त (घनकचरा व्यवस्थापन) किरण दिघावकर के नेतृत्व में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अभियान की घोषित अवधि 6 नवंबर 2026 तक है।

    अब इस अभियान की प्रभावशीलता का आकलन केवल साफ की गई सड़कों और हटाए गए मलबे से नहीं, बल्कि संबंधित इलाकों में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में आने वाले बदलाव से भी होगा।

  • मुंबई में फर्जी एक्सीडेंट के नाम पर वसूली का आरोप, गोरेगांव में 1,000 रुपये देने पड़े

    मुंबई में फर्जी एक्सीडेंट के नाम पर वसूली का आरोप, गोरेगांव में 1,000 रुपये देने पड़े

    मुंबई के गोरेगांव में पैर कुचलने का आरोप लगाकर एक कार चालक से 1,000 रुपये लेने का मामला सामने आया। जानें पुलिस की सलाह और बचाव के तरीके।

    मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में सड़क हादसे के नाम पर पैसे वसूलने का संदिग्ध मामला सामने आया है। स्कूल से अपने दो बच्चों को लेकर घर लौट रहे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दोपहिया सवार ने उसका रास्ता रोककर पैर कुचलने का दावा किया और इलाज के नाम पर पैसे मांगे। विवाद खत्म करने के लिए व्यक्ति ने कथित तौर पर 1,000 रुपये ऑनलाइन दे दिए। घटना के बाद गोरेगांव पुलिस ने वाहन चालकों को दबाव में पैसे न देने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेने की सलाह दी है।

    यह घटना अनमोल फॉर्च्यून इमारत के पास की बताई गई है। कार चला रहे शुक्ला के मुताबिक, वह हाल ही में दोपहर करीब 4:15 बजे अपने बच्चों को स्कूल से लेकर घर जा रहे थे। इसी दौरान एक दोपहिया सवार ने उनकी कार के पीछे के शीशे पर हाथ मारा और उन्हें रुकने के लिए कहा।

    पैर कुचलने का आरोप लगाकर मांगे पैसे

    शुक्ला ने बताया कि दोपहिया सवार ने उन पर गाड़ी से अपना पैर कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने इस आरोप को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें न तो किसी टक्कर का एहसास हुआ था और न ही दोपहिया वाहन के कार से टकराने का।

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    शुक्ला के अनुसार, बाइक सवार ने इलाज के खर्च के नाम पर पैसे मांगे। जब उन्होंने नकद पैसे नहीं होने की बात कही, तो उसने ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड दिखा दिया। इस दौरान कार में बैठे दोनों बच्चे डर गए थे।

    शुक्ला ने बताया कि विवाद बढ़ने और बच्चों को और परेशानी से बचाने के लिए उन्होंने आखिरकार 1,000 रुपये का भुगतान कर दिया। उनके अनुसार, पैसे मिलने के बाद बाइक सवार ने भुगतान का स्क्रीनशॉट भी मांगा और कहा कि क्यूआर कोड उसके एक दोस्त का है।

    पुलिस की गश्ती गाड़ी पहुंची, फिर भी विवाद खत्म करने की मांग

    शुक्ला के मुताबिक, घटना के दौरान पुलिस की गश्ती गाड़ी वहां से गुजरी और पुलिसकर्मियों ने रुककर दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने दोनों को विवाद सुलझाने के लिए पुलिस थाने चलने को कहा।

    शुक्ला का आरोप है कि बाद में दोपहिया सवार ने पुलिस के सामने मामला सुलझाने के बजाय आपस में विवाद खत्म करने पर जोर दिया। बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने पैसे देने का फैसला किया।

    घटना के बाद शुक्ला ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया, ताकि दूसरे वाहन चालक भी सावधान रहें। उनकी पोस्ट पर कई लोगों ने इसी तरह के कथित अनुभव बताए।

    बांद्रा, जोगेश्वरी और चेंबूर से भी आए ऐसे अनुभव

    शुक्ला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जॉन सी. ने बताया कि पिछले साल उनके चालक को दो लोगों ने रोककर आरोप लगाया था कि उसकी गाड़ी से उनकी एसयूवी पर खरोंच आई है। चालक ने इस आरोप पर सवाल उठाया, क्योंकि दूसरी गाड़ी उसकी गाड़ी से आगे खड़ी थी। इसके बाद उसने दोनों से बातचीत बंद कर दी और पास के सांताक्रूज पुलिस थाने चलने को कहा। जॉन सी. के मुताबिक, पुलिस थाने चलने की बात सुनकर दोनों वहां से चले गए।

    एस. ए. थेवर ने बताया कि उनके साथ भी कई बार इसी तरह की घटना हुई। उनके मुताबिक, पहली बार एक वाहन चालक ने बीमार बच्चे के इलाज का हवाला देकर उनसे पैसे लिए थे। बाद में जब इसी तरह की कहानी दोबारा सुनाई गई, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उन्होंने कम से कम छह बार ऐसी बातें सुनीं।

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    निमेश दवे ने बताया कि जोगेश्वरी से एक दोपहिया सवार उनका पीछा कर रहा था। फ्लाईओवर पर पहुंचने के बाद उसने वाहन रोककर टक्कर मारने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह गाड़ी चलाते समय फोन पर बात कर रहे थे। दवे के अनुसार, जब उन्होंने सवार से नीचे चलकर बात करने को कहा और उसने उनकी गाड़ी पर मीडिया का स्टिकर देखा, तो वह वहां से चला गया।

    दवे ने बताया कि बाद में पुलिस से बातचीत करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि कथित तौर पर पैसे वसूलने वाले लोग फ्लाईओवर जैसी जगहों को चुन सकते हैं, जहां आसपास पैदल चलने वाले लोग या पुलिसकर्मी कम दिखाई देते हैं।

    गोरेगांव पुलिस ने क्या सलाह दी?

    गोरेगांव पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक सतीश उमारे ने वाहन चालकों से कहा कि विवाद होने पर दबाव में आकर किसी को पैसे न दें। ऐसी स्थिति में नजदीकी पुलिस थाने जाएं या रास्ते में पुलिसकर्मी अथवा यातायात पुलिस दिखाई देने पर उनसे मदद लें।

    उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को खतरा महसूस हो रहा है, तो उसे जरूरी स्थिति को छोड़कर वाहन से बाहर निकलने से बचना चाहिए। दुर्घटना होने या किसी के घायल होने पर चिकित्सा सहायता देना जरूरी है।

    उमारे के अनुसार, वाहन चालक पुलिस से मदद लेने के लिए 100 या 112 पर फोन कर सकते हैं अथवा नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी।

    अगर कोई हादसे का आरोप लगाकर पैसे मांगे तो क्या करें?

    ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी और वाहन में बैठे यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखें। किसी के आरोप पर तुरंत पैसे देने के बजाय पुलिस की मदद लें और घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी दें।

    अगर वास्तव में दुर्घटना हुई है या कोई घायल है, तो चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं। विवाद के दौरान वाहन का नंबर, घटना का समय और जगह, गवाहों की जानकारी तथा सुरक्षित तरीके से उपलब्ध तस्वीरें या कैमरे की रिकॉर्डिंग संभालकर रखें।

    अगर आपने ऑनलाइन भुगतान कर दिया है, तो लेनदेन की पहचान संख्या, भुगतान का समय और प्राप्तकर्ता की जानकारी सुरक्षित रखें। संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में बैंक या भुगतान सेवा को सूचित करें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। धमकी या तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर संपर्क करें।

    वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि वास्तविक दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करें, लेकिन किसी विवादित मांग के दबाव में आने के बजाय पुलिस को सूचना दें।

  • Mumbai FDA Action: 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस से सस्पेंड, 564 लीटर दूध नष्ट

    Mumbai FDA Action: 7 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस से सस्पेंड, 564 लीटर दूध नष्ट

    Mumbai FDA ने 7 खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। 564 लीटर दूध नष्ट और नाल बाजार में ₹4.22 लाख का प्रतिबंधित गुटखा जब्त किया गया।

    मुंबई: मुंबई में Food and Drug Administration (FDA) ने खाद्य सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन पर 7 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। 23 और 24 अक्टूबर 2026 को हुई अलग-अलग कार्रवाइयों में शहर के छह इलाकों से कुल 564 लीटर दूध नष्ट किया गया, जबकि नाल बाजार में ₹4,22,880 का प्रतिबंधित गुटखा जब्त किया गया। डेयरियों की स्वच्छता और लाइसेंस संबंधी अनियमितताओं पर भी कार्रवाई शुरू की गई है।

    मुंबई के किन 7 प्रतिष्ठानों पर हुई कार्रवाई?

    FDA की कार्रवाई में लोअर परेल स्थित Mumbai Darbar Family Restaurant और अंधेरी वेस्ट के Ottoman Cafe समेत सात प्रतिष्ठान शामिल हैं। इनके अलावा Chacha Eagle Kulfi Falooda (जोगेश्वरी वेस्ट), Bharat Canteen (अंधेरी वेस्ट), Green Turtle Hospitality (ओशिवारा), Atul Tiffin (भायखला) और P. B. Enterprises (सिवरी वेस्ट) के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं।

    निरीक्षण के दौरान Food Safety and Standards (Licensing and Registration of Food Businesses) Regulations, 2011 के Schedule 4 से संबंधित उल्लंघन सामने आए। इनमें रसोई और ड्रेनेज सिस्टम की अस्वच्छ स्थिति, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को सही तरीके से स्टोर नहीं करना, अनधिकृत फूड कलर का इस्तेमाल और खाद्य पदार्थ संभालने वाले कर्मचारियों के मेडिकल सर्टिफिकेट की कमी शामिल है।

    छह इलाकों में 564 लीटर दूध नष्ट

    FDA ने गोवंडी, मानखुर्द, एंटॉप हिल, चेंबूर, धारावी और माहिम में डेयरियों तथा दूध बिक्री केंद्रों की जांच की। इस अभियान में संदिग्ध खुले दूध के नमूने लेने के साथ भंडारण और हैंडलिंग संबंधी नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दूध नष्ट किया गया।

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    कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:

    • Sainath Dairy & Farsan Mart, गोवंडी: 45 लीटर संदिग्ध खुला दूध।
    • Maharana Dairy, मानखुर्द: 40 लीटर संदिग्ध खुला दूध।
    • Sagar Milk Centre, एंटॉप हिल: 250 लीटर दूध, जिसकी कीमत ₹11,625 बताई गई।
    • Shakti Dairy, धारावी: 31 लीटर दूध।
    • Rahul Milk Centre, माहिम वेस्ट: 198 लीटर दूध।

    इन पांच स्थानों की कुल मात्रा 564 लीटर होती है। साईनाथ डेयरी और महाराणा डेयरी से जब्त 85 लीटर संदिग्ध दूध के नमूने लैब जांच के लिए भी लिए गए।

    दो डेयरियों के खिलाफ अलग-अलग कानूनी कार्रवाई

    FDA ने मानखुर्द स्थित Agasti Milk Agency के खिलाफ स्वच्छता संबंधी उल्लंघनों के मामले में लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, गोवंडी ईस्ट की Yadav Dairy पर कथित रूप से बिना लाइसेंस कारोबार करने के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।

    नाल बाजार में ₹4.22 लाख का प्रतिबंधित गुटखा जब्त

    मुंबई के नाल बाजार इलाके में FDA ने ₹4,22,880 मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा जब्त किया। जांच के दौरान सात अनौपचारिक नमूने भी लिए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहली बार के अपराध के संबंध में मामला दर्ज किया गया है।

    इस मामले में प्रतिबंधित उत्पादों की सप्लाई कहां से हुई, इसके पीछे कौन लोग शामिल थे और जब्त माल की आगे क्या कानूनी स्थिति बनी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

    महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा पर व्यापक कार्रवाई

    मुंबई की स्थानीय कार्रवाई के बीच महाराष्ट्र में FDA का व्यापक अभियान भी जारी है। 25 अक्टूबर को सामने आए राज्यव्यापी अपडेट में कुल ₹12.74 करोड़ के खाद्य पदार्थों और प्रतिबंधित उत्पादों की जब्ती, 68 लाइसेंस सस्पेंड होने, सात प्रतिष्ठानों को बंद करने के आदेश, प्रतिबंधित उत्पादों से जुड़े 22 FIR और 20 गिरफ्तारी हुई है।

    एक अलग जांच में ठाणे और पुणे जिलों में नष्ट किए जाने के लिए निर्धारित खाद्य स्टॉक के दोबारा बाजार में पहुंचने की आशंका भी सामने आई। इस मामले में 8,392 किलोग्राम खाद्य स्टॉक, जिसकी अनुमानित कीमत ₹48.09 लाख बताई गई। संबंधित कंपनियों के पास निपटान का पूरा और सत्यापन योग्य रिकॉर्ड नहीं होने की जानकारी दी गई।

    उपभोक्ताओं के लिए क्या जरूरी है?

    इस कार्रवाई के बाद दूध और बाहर मिलने वाले खाने की गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी है। उपभोक्ता दूध खरीदते समय पैकिंग, एक्सपायरी डेट, स्टोरेज की स्थिति और विक्रेता की विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए। खुले दूध के मामले में केवल दिखावट या गंध के आधार पर उसकी सुरक्षा तय नहीं की जा सकती।

    रेस्टोरेंट में साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों का सही भंडारण और कर्मचारियों की स्वच्छता भी महत्वपूर्ण हैं। किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर उपभोक्ता FSSAI के Food Safety Connect पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं और खाद्य कारोबार के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन की जानकारी जांच सकते हैं।

    फिलहाल, इस मामले में आगे की महत्वपूर्ण जानकारी दूध के नमूनों की लैब रिपोर्ट, संबंधित डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति और निलंबित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड पर होने वाले अगले फैसलों से सामने आएगी।

  • मुंबई कोस्टल रोड पर 80 हजार चालान, 30 हजार ओवरस्पीडिंग के; 60% से ज्यादा बकाया

    मुंबई कोस्टल रोड पर 80 हजार चालान, 30 हजार ओवरस्पीडिंग के; 60% से ज्यादा बकाया

    मुंबई कोस्टल रोड पर एक साल में 80 हजार से ज्यादा चालान जारी हुए। 30 हजार से अधिक ओवरस्पीडिंग, 11 करोड़ रुपये के जुर्माने और CCTV सुरक्षा से जुड़े सवाल?

    मुंबई: मुंबई कोस्टल रोड पर एक साल में 80 हजार से ज्यादा ट्रैफिक चालान जारी किए गए हैं। इनमें 30 हजार से अधिक मामले ओवरस्पीडिंग से जुड़े हैं, जबकि 60% से ज्यादा चालान अब तक बकाया हैं। सितंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच जारी इन चालानों पर करीब 11 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। हाल ही में तीन छात्रों की जान लेने वाले BMW हादसे के बाद कोस्टल रोड पर तेज रफ्तार और ट्रैफिक सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

    RTI से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में कार, वैन और जीप जैसे हल्के मोटर वाहनों के 29,727 चालान जारी किए गए। इन पर 5.9 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा 50 हजार से ज्यादा चालान ट्रैफिक साइन और संकेतों का पालन नहीं करने के मामलों में जारी हुए।

    हालांकि, अलग-अलग श्रेणियों के आंकड़ों में संभावित ओवरलैप और कुल जुर्माने में से वास्तव में कितनी रकम वसूल हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। इसलिए 11 करोड़ रुपये को वसूल की गई राशि नहीं माना जा सकता।

    कोस्टल रोड पर कितनी है स्पीड लिमिट?

    मुंबई कोस्टल रोड पर सभी हिस्सों में एक जैसी स्पीड लिमिट लागू नहीं है। यहां ट्रैफिक नियमों के अनुसार, मुख्य सीधे हिस्सों पर अधिकतम गति सीमा 80 किमी प्रति घंटा, टनल में 60 किमी प्रति घंटा और कुछ मोड़ों तथा सड़क मिलने वाले हिस्सों पर 40 किमी प्रति घंटा बताई गई है। वाहन चालकों को संबंधित हिस्से पर लगे संकेतों और लागू ट्रैफिक निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

    दोपहिया और तिपहिया वाहनों सहित कुछ श्रेणियों के वाहनों को कोस्टल रोड पर चलने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद प्रतिबंधित श्रेणियों के वाहनों के चालान भी जारी किए गए हैं।

    स्थानीय निवासी निगुम लखानी ने बताया कि पुलिस पेट्रोलिंग के बावजूद देर रात और सुबह के समय महंगी कारों को तेज रफ्तार से चलते देखा जाता है। उनके अनुसार, टनल के एग्जिट से हाजी अली तक के हिस्से में तेज रफ्तार की समस्या ज्यादा दिखाई देती है, जबकि आगे सड़क पर अधिक मोड़ हैं।

    लखानी ने यह भी कहा कि कुछ वाहन चालक मॉडिफाइड मफलर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे काफी शोर होता है और वरिष्ठ नागरिकों को परेशानी होती है। उनका मानना है कि महंगी कारों के कुछ मालिकों पर केवल आर्थिक जुर्माने का पर्याप्त असर नहीं पड़ता। उन्होंने बार-बार नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने जैसे सख्त कदम उठाने की मांग की।

    BMW हादसे में तीन छात्रों की मौत के बाद बढ़ी चिंता

    20 सितंबर 2026 को मुंबई कोस्टल रोड पर एक BMW कार के दुर्घटनाग्रस्त होने से तीन छात्रों की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य छात्र घायल हुआ था। इनमें एक मृतक नाबालिग भी था।

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    कार Marine Drive से हाजी अली की ओर जा रही थी। वर्ली के पास Lotus Jetty क्षेत्र में कार तेज रफ्तार में कोस्टल रोड के बैरियर से टकराई और करीब 70 फीट नीचे निर्माणाधीन जगह पर जा गिरी। CCTV फुटेज में दुर्घटना से पहले कार तेज गति से चलती दिखाई दी थी।

    इस हादसे ने कोस्टल रोड पर स्पीड लिमिट के पालन, बैरियर की सुरक्षा और रात के समय ट्रैफिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए।

    कोस्टल रोड पर सुपरकार रेसिंग का मामला भी आया था सामने

    सितंबर 2026 की शुरुआत में कोस्टल रोड टनल में कई हाई-एंड कारों के तेज रफ्तार से चलने और एक-दूसरे को ओवरटेक करने का वीडियो सामने आया था। घटना 3 सितंबर की रात करीब 11:15 बजे दक्षिण दिशा वाले हिस्से में हुई थी।

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    इस मामले में Marine Drive पुलिस ने अज्ञात वाहन चालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जानकारी के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 और 125 तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 का उल्लेख किया गया था। इन धाराओं का संबंध लापरवाही से वाहन चलाने और सड़क सुरक्षा से जुड़े अपराधों से है।

    लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच चालान की संख्या यह सवाल उठाती है कि नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी है और क्या बार-बार उल्लंघन करने वाले चालकों की पहचान करके उनके खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई की जा रही है।

    CCTV कैमरे बंद होने से निगरानी पर सवाल

    कोस्टल रोड पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के साथ निगरानी व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है। केबल चोरी और काटे जाने की घटनाओं के कारण लगभग 60 से 65 CCTV कैमरों के प्रभावित होने और कुछ हिस्सों में स्ट्रीट लाइटिंग बाधित होने की जानकारी सामने आई थी।

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    वर्ली ALM के चेयरमैन वीरेन शाह ने बताया था कि मार्कंडेश्वर के पास कुछ लोगों को केबल हटाकर ले जाते हुए देखने के बाद अधिकारियों से शिकायत की गई थी।

    सितंबर के अंत में BMC ने CCTV व्यवस्था से जुड़ी समस्या के स्थायी समाधान के लिए L&T से तकनीकी विकल्पों पर काम करने को कहा था। इनमें केबलों को अधिक सुरक्षित तरीके से बिछाने और मोबाइल नेटवर्क पर चलने वाले वायरलेस कैमरों की व्यवहार्यता की जांच जैसे विकल्प शामिल थे। उस समय की जानकारी के अनुसार, लगभग 110 किलोमीटर बिजली केबल बदली जा चुकी थी।

    हालांकि, 23 अक्टूबर 2026 तक कितने कैमरे दोबारा चालू हुए और क्या स्थायी समाधान लागू हो गया है, इसका ताजा जानकारी नहीं है। यह भी जानकारी नहीं है कि बंद कैमरों के कारण किसी खास दुर्घटना की जांच प्रभावित हुई थी या नहीं।

    11 करोड़ रुपये के जुर्माने में से कितनी रकम वसूल हुई?

    इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल चालान जारी होने के बाद उनकी वसूली का है। उपलब्ध RTI-आधारित आंकड़ों के अनुसार, 60% से अधिक चालान बकाया हैं।

    मुंबई कोस्टल रोड पर ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए चालान जारी करने के साथ उनकी वसूली, ओवरस्पीडिंग पर लगातार निगरानी, प्रतिबंधित वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और CCTV कैमरों की बहाली भी महत्वपूर्ण है।

  • मुंबई में पटाखामुक्त दिवाली के लिए बीएमसी की मुहिम, स्कूलों में होंगी प्रतियोगिताएं

    मुंबई में पटाखामुक्त दिवाली के लिए बीएमसी की मुहिम, स्कूलों में होंगी प्रतियोगिताएं

    मुंबई में बीएमसी स्कूलों में पटाखामुक्त दिवाली के लिए जागरूकता अभियान चलाएगी। जानें प्रतियोगिताओं, हाईकोर्ट के निर्देशों और प्रदूषण की स्थिति के बारे में।

    मुंबई: दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का शिक्षा विभाग स्कूलों में जागरूकता अभियान चला रहा है। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए वीडियो, पोस्टर, बैनर और नारा प्रतियोगिताओं के साथ जागरूकता रैलियां, नुक्कड़ नाटक और सामूहिक शपथ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है, जब मुंबई में सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे फोड़ने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं।

    23 अक्टूबर 2026 को बीएमसी प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, ‘पटाखामुक्त-प्रदूषणमुक्त पर्यावरण’ अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण के दुष्परिणाम और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना है। इसके जरिए बच्चों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    स्कूलों में होंगी वीडियो और पोस्टर प्रतियोगिताएं

    अभियान के तहत विद्यार्थी पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण, स्वास्थ्य पर उनके असर और बिना पटाखों के त्योहार मनाने के महत्व पर छोटे वीडियो बनाएंगे। पोस्टर और बैनर प्रतियोगिताओं में ‘पटाखे नहीं, साफ हवा चाहिए’ और ‘प्रदूषणमुक्त त्योहार, सेहतमंद जीवन’ जैसे संदेशों को शामिल किया जाएगा।

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    इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण, ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर नारा लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों को अपनी रचनाओं के जरिए अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों तक भी जागरूकता का संदेश पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    रैली, नुक्कड़ नाटक और सामूहिक शपथ

    बीएमसी के शिक्षा विभाग की योजना के तहत स्कूल परिसरों और आसपास के इलाकों में जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और पटाखामुक्त त्योहार मनाने की सामूहिक शपथ भी दिलाई जाएगी।

    पटाखों से होने वाले नुकसान को समझाने के लिए नुक्कड़ नाटक, भाषण, निबंध लेखन और वक्तृत्व प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। स्कूलों की नियमित प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का संदेश दिया जाएगा।

    इस अभियान में अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। विद्यार्थियों की ओर से तैयार वीडियो, पोस्टर और नारों के जरिए परिवारों तथा आसपास के लोगों को प्रदूषण कम करने के लिए जागरूक किया जाएगा।

    सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने को लेकर हाईकोर्ट के निर्देश

    मुंबई में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के पालन पर जोर दिया है। 15 अक्टूबर 2026 को सामने आए घटनाक्रम में अदालत ने अपने 22 सितंबर के आदेश को पूरे साल और सभी त्योहारों पर लागू बताया। सार्वजनिक सड़कों, गलियों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने पर रोक के पालन को लेकर प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं।

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    22 और 23 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, अदालत ने बीएमसी, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मुंबई पुलिस से नियमों के पालन तथा नागरिकों तक सार्वजनिक सूचना पहुंचाने के संबंध में सवाल किए। पुलिस स्तर पर निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाने को कहा गया। 23 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 अक्टूबर को इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख निर्धारित थी।

    मुंबई पुलिस ने अलग से 6 अक्टूबर से 4 दिसंबर 2026 तक सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने और तेज लेजर रोशनी के इस्तेमाल पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया था। यह पुलिस का अलग आदेश है। सार्वजनिक स्थानों पर लागू रोक को पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं कहा जा सकता।

    मुंबई में प्रदूषण भी चिंता का विषय

    मुंबई में अक्टूबर के दौरान हवा की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है। 22 अक्टूबर को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया था, जो भारत के वायु गुणवत्ता सूचकांक पैमाने पर मध्यम श्रेणी में आता है। महीने के दौरान कई दिन हवा की गुणवत्ता खराब रहने की जानकारी भी सामने आई है।

    शहर में प्रदूषण के कारणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और दूसरे कण शामिल हैं। ऐसे में पटाखों से होने वाले अतिरिक्त धुएं और ध्वनि प्रदूषण को कम करने के प्रयासों को व्यापक पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में देखा जा रहा है।

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    पटाखों से निकलने वाला धुआं बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। तेज आवाज से भी संवेदनशील लोगों को दिक्कत हो सकती है। हालांकि, मुंबई में वायु प्रदूषण के सभी कारणों को केवल पटाखों से जोड़ना सही नहीं होगा।

    अभियान की समयसीमा और भागीदारी की जानकारी का इंतजार

    बीएमसी की ओर से जारी जानकारी में प्रतियोगिताओं के आयोजन और जागरूकता गतिविधियों की रूपरेखा दी गई है, लेकिन कितने स्कूलों और विद्यार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा, प्रतियोगिताओं की अंतिम तारीख क्या होगी और परिणाम कब घोषित किए जाएंगे, इसका विस्तृत ब्योरा आना अभी बाकी है।

    बीएमसी के शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और नागरिकों से पर्यावरण के अनुकूल तथा सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने में सहयोग करने की अपील की है। अभियान के जरिए संदेश दिया जा रहा है कि दिवाली की खुशियां मनाते समय साफ हवा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।