मिस्र में टीवी एंकर सारा ख़लीफ़ा समेत 12 को फांसी की सजा मिली। 750 किलो ड्रग्स, हथियार और डिजिटल सबूतों वाले केस में अब अपील होगी।
मिस्र: टीवी एंकर और निर्माता सारा ख़लीफ़ा समेत 12 लोगों को ड्रग्स बनाने और उसकी तस्करी के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। काहिरा की आपराधिक अदालत ने शनिवार, 5 सितंबर को यह फैसला सुनाया। अदालत के मुताबिक आरोपियों ने विदेश से नशीले पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल मंगाकर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने और उन्हें बेचने के लिए एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाया था। मामले में 750 किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ और उन्हें बनाने की सामग्री जब्त किए जाने की बात सामने आई है।
सारा ख़लीफ़ा को उनके अपराध और सुरक्षा से जुड़े टीवी कार्यक्रम ‘मिशन इम्पॉसिबल’ के लिए जाना जाता है। वह इस मामले में खुद को निर्दोष बताती रही हैं। उनके वकील ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

सारा ख़लीफ़ा को फांसी की सजा क्यों मिली?
अदालत के सामने अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सारा ख़लीफ़ा और अन्य आरोपियों ने एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाया था। इस गिरोह पर विदेश से ऐसे कच्चे माल को मंगाने का आरोप था, जिसका इस्तेमाल सिंथेटिक नशीले पदार्थ बनाने में किया जाता था।
आरोप केवल ड्रग्स रखने या बेचने तक सीमित नहीं थे। अभियोजन के मुताबिक नेटवर्क पर ड्रग्स के निर्माण, तस्करी और बिना लाइसेंस हथियार व गोला-बारूद रखने के आरोप भी थे। अदालत ने इन्हीं आरोपों में दोषी ठहराए गए 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई।
750 किलो से ज्यादा ड्रग्स और दो ठिकानों पर चल रही थी कथित लैब
मामले की जांच में अधिकारियों ने 750 किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद करने का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक दो अपार्टमेंट का इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रग्स तैयार करने और रखने के लिए किया जाता था।
जांच में बिना लाइसेंस हथियार और गोला-बारूद भी बरामद होने की बात सामने आई। यही वजह है कि मामला केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक संगठित आपराधिक नेटवर्क के रूप में पेश किया गया।
अदालत में 20 गवाह और डिजिटल सबूत भी पेश किए गए
अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 20 गवाहों के बयान पेश किए। इसके अलावा अदालत में तकनीकी और डिजिटल सबूत भी रखे गए, जिनमें संदेश, तस्वीरें और वीडियो शामिल थे।
अभियोजन का दावा था कि ये सबूत आरोपियों की कथित आपराधिक गतिविधियों को जोड़ते हैं। अदालत ने इन्हीं सबूतों और गवाहियों पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।
सारा ख़लीफ़ा ने आरोपों पर क्या कहा?
सारा ख़लीफ़ा ने मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्होंने ड्रग्स पहले कभी नहीं देखे थे और उनका दावा था कि पहली बार उन्हें नशीले पदार्थ तब दिखाई दिए, जब उनकी तस्वीर नशीला पदार्थ विरोधी एजेंसी के कार्यालय में ली गई।
उनके बचाव पक्ष ने अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। फैसले के बाद उनके वकील ने कहा कि वह तय कानूनी समय सीमा के भीतर अपील दाखिल करेंगे।
28 आरोपियों में 12 को फांसी, बाकी का क्या हुआ?
यह मामला कुल 28 आरोपियों का था। अदालत के फैसले के मुताबिक:
- 12 आरोपियों को मौत की सजा
- 9 आरोपियों को उम्रकैद
- 7 आरोपियों को बरी
यानी अदालत ने सभी आरोपियों को एक जैसा दोषी नहीं माना।
क्या सारा ख़लीफ़ा को अब तुरंत फांसी दी जाएगी?
नहीं।
मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी सारा ख़लीफ़ा और अन्य दोषियों के पास कानूनी अपील का रास्ता है। वे मिस्र की सर्वोच्च आपराधिक अपीलीय अदालत, कोर्ट ऑफ कैसैशन, में फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
मौत की सजा से पहले ग्रैंड मुफ़्ती की राय क्यों ली गई?
मिस्र में मौत की सजा वाले मामलों में अदालत अंतिम फैसला सुनाने से पहले मामले के कागजात देश के ग्रैंड मुफ़्ती के पास भेजती है। अगस्त में सारा ख़लीफ़ा और अन्य आरोपियों के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी।
ग्रैंड मुफ़्ती की राय अदालत के लिए सलाहकारी होती है, बाध्यकारी नहीं। इसके बाद अदालत ने 5 सितंबर को अपना फैसला सुनाया।
सारा ख़लीफ़ा कौन हैं?
सारा ख़लीफ़ा मिस्र की टीवी एंकर और मीडिया निर्माता हैं। वह ‘मिशन इम्पॉसिबल’ नाम के कार्यक्रम से चर्चा में आई थीं, जिसमें अपराध और सुरक्षा से जुड़े मामले दिखाए जाते थे।
ड्रग्स मामले में उनकी गिरफ्तारी अप्रैल 2025 में हुई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और मामला मिस्र के चर्चित ‘ग्रैंड ड्रग केस’ के रूप में सामने आया।
फांसी की सजा वाले मामले के साथ सारा को दूसरी सजा भी मिली
5 सितंबर को ही सारा ख़लीफ़ा को एक अलग मामले में 3 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई गई। यह मामला एक युवक के साथ कथित मारपीट, उसके कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाने और उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार से जुड़ा था।
मिस्र की स्थानीय अदालत के मुताबिक इस मामले में दूसरे आरोपियों को भी अलग-अलग अवधि की सजा मिली।
इस मामले में आगे क्या होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अपील होगा। सारा ख़लीफ़ा के वकील ने साफ कहा है कि मौत की सजा के खिलाफ अपील की जाएगी। इसलिए आने वाले समय में अदालत के सामने यह सवाल होगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहता है, बदलता है या मामले में आगे कोई कानूनी राहत मिलती है।
