मोहन भागवत के US दौरे के बीच 90 अमेरिकी नेताओं ने RSS-linked राजनीतिक चंदे से दूरी बनाई। Ro Khanna के $6,600 और Canada की 21 charities पर सवाल उठे।
नई दिल्ली: मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के खत्म होते-होते RSS को लेकर अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। करीब 90 अमेरिकी राजनीतिक नेताओं ने ऐसा pledge लिया है जिसमें RSS और उससे जुड़े संगठनों से जुड़े राजनीतिक चंदे को स्वीकार नहीं करने, और पहले से मिले ऐसे पैसे को वापस करने या pro-democracy संगठनों को redirect करने की बात कही गई है। सबसे ज्यादा चर्चा California के Democratic Congressman Ro Khanna के उस फैसले की है, जिसमें उन्होंने $6,600 का एक contribution वापस करने की बात कही है।
यह मामला सिर्फ मोहन भागवत के New York कार्यक्रम के विरोध तक सीमित नहीं है। इसके साथ अमेरिका में political funding, RSS-linked organisations के network और भारत से जुड़े diaspora groups के राजनीतिक प्रभाव पर भी बहस तेज हो गई है। वहीं Canada में RSS से जुड़े होने के आरोपों वाली 21 registered charities को लेकर Canada Revenue Agency (CRA) में शिकायत भी दाखिल की गई है।
Ro Khanna का $6,600 वाला मामला क्या है?
सबसे अहम सवाल फिलहाल यही है कि यह $6,600 किसने दिया था।
Ro Khanna ने कहा है कि उन्हें हाल में पता चला कि यह contribution एक “pro-MAGA, billionaire with ties to the RSS” से आया था और वह इस रकम को वापस करने के बजाय किसी दूसरे उद्देश्य के लिए दे देंगे। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में उस billionaire का नाम नहीं बताया गया है। इसलिए इस donor की पहचान को लेकर किसी नाम का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।

यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण financial question भी है—किस donor ने पैसा दिया, किस campaign या political entity को दिया गया, contribution कब दिया गया और donor का RSS से संबंध किस आधार पर तय किया गया। अभी pledge की घोषणा में इन सभी सवालों का पूरा जवाब सार्वजनिक नहीं है।
90 नेताओं का pledge क्या कहता है?
Hindus for Human Rights Action और SACRED Acts की ओर से घोषित Nonviolence Pledge में तीन प्रमुख commitments हैं।
पहला, राजनीतिक हिंसा और intimidation को reject करना।
दूसरा, RSS और उसके affiliates से linked political donations को स्वीकार नहीं करना।
तीसरा, अगर ऐसा contribution पहले मिल चुका है तो उसे वापस करना या pro-democracy organisations को redirect करना।
इस pledge की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ Congress के सदस्य ही नहीं हैं। इसमें federal, state और local/municipal level के elected officials और candidates शामिल हैं। signatories Democratic और Republican—दोनों political circles से बताए गए हैं और आठ राज्यों में फैले हुए हैं।
यानी इसे “90 Congress MPs का RSS के खिलाफ फैसला” कहना गलत होगा। यह federal से लेकर local politics तक फैला हुआ एक broader political pledge है।
यह pledge अचानक नहीं आया
इस अभियान की शुरुआत 2026 में नहीं हुई। SACRED Acts ने Illinois में 2023 से Nonviolence Pledge को बढ़ावा दिया था। अब उसी campaign को Bhagwat के US दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा visibility मिली है।
आयोजकों का कहना है कि मुद्दा सिर्फ RSS नाम से सीधे आने वाले पैसे का नहीं, बल्कि उन donors, affiliates और organisations का भी है जिन्हें वे RSS network से जुड़ा मानते हैं।
SACRED Acts के executive director Pushkar Sharma ने दावा किया है कि सिर्फ Illinois में पिछले एक दशक के दौरान RSS से जुड़े बताए गए individuals ने दोनों major parties के political campaigns में कम से कम $2.5 million funnel किया। यह आयोजकों का दावा है, independent government finding नहीं।
Sciences Po research ने क्या जोड़ा?
इस debate को एक और आधार Sciences Po Paris से जुड़े “Seeing the Sangh” research/database से मिलता है। Hindus for Human Rights Action ने इसी research के हवाले से अमेरिका में RSS से जुड़े 113 organisations का उल्लेख किया है।
इस list में Republican Hindu Coalition का भी जिक्र किया गया है। 2019 में इस organisation ने Steve Bannon को co-chair बनाया था।
हालांकि यहां एक जरूरी distinction है: किसी organisation या individual को “RSS-linked” बताना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसकी हर political donation सीधे RSS से आई है। इसी वजह से Ro Khanna के $6,600 वाले मामले में donor की पहचान और connection का independent verification अहम है।
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क्या अमेरिका ने RSS पर कोई ban लगा दिया है?
नहीं।
यह दावा करना कि अमेरिका ने RSS को ban या sanction कर दिया है, अभी गलत होगा।
26 अगस्त को U.S. Commission on International Religious Freedom (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से RSS members और religious-freedom violations में allegedly involved Indian officials पर targeted sanctions पर विचार करने को कहा था। आयोग ने Mohan Bhagwat का US visa revoke करने और future entry पर रोक लगाने की recommendation भी दी थी। लेकिन USCIRF की recommendations non-binding हैं और अमेरिकी सरकार ने इन recommendations पर कोई ऐसा action नहीं लिया है जिससे RSS पर US government ban या sanction लागू हो गया हो।
भारत सरकार ने USCIRF की आलोचना को biased बताया है, जबकि RSS अपने ऊपर intolerance के आरोपों को खारिज करता है और खुद को Hindu cultural organisation के रूप में पेश करता है।
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New York में Bhagwat का कार्यक्रम हुआ, विरोध भी हुआ
यह पूरा विवाद 29 अगस्त को New York के Madison Square Garden में हुए “Universal Oneness Celebration” के आसपास तेज हुआ।
कार्यक्रम में हजारों लोग पहुंचे और Bhagwat ने unity, pluralism और humanity पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए तो वह Hindu नहीं रह सकता। उन्होंने अलग-अलग धर्मों को एक ही सत्य की ओर जाने वाले रास्तों के रूप में पेश किया।
दूसरी तरफ, कार्यक्रम से पहले civil-rights और interfaith organisations के एक समूह ने इसका विरोध किया। New York के Mayor Zohran Mamdani ने भी RSS की ideology की आलोचना की थी, हालांकि शहर के mayor के पास किसी private event को रोकने की सीधी authority नहीं थी।
इसी माहौल के बीच Brad Lander ने भी Nonviolence Pledge sign किया और RSS-linked political contributions को reject करने की बात कही।
अब विवाद Canada तक पहुंच गया
अमेरिका में political funding का विवाद चल ही रहा था कि Canada में RSS से जुड़े organisations को लेकर अलग regulatory सवाल सामने आया।
Just Peace Advocates ने Canada Revenue Agency के पास 21 registered charities के खिलाफ complaint दाखिल की है। इनमें Hindu Swayamsevak Sangh Canada, Ekal Vidyalaya Foundation of Canada, Vishwa Hindu Parishad of Ontario और Sewa Canada International Aid Inc. जैसे नाम शामिल हैं।
शिकायत में Sciences Po के data का हवाला देते हुए लगभग $46 million के funds के Canada में RSS-affiliated organisations के बीच movement और करीब $21.5 million के RSS-linked organisations abroad को जाने का दावा किया गया है। ये figures complaint करने वाले organisation के analysis/claims हैं; इन्हें Canada government की confirmed finding के रूप में नहीं पेश किया जा सकता।
CRA ने इन 21 charities को दोषी ठहराया है या उनकी charitable status रद्द कर दी है—ऐसी कोई official finding अभी सामने नहीं है। इसलिए फिलहाल मामला complaint और जांच की मांग के स्तर पर है।
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उधर Canada में Bhagwat ने क्या कहा?
दिलचस्प बात यह है कि US में funding और ideology को लेकर विवाद के बीच Bhagwat ने Canada में भी outreach जारी रखी।
31 अगस्त को Toronto में “Hindu Vishwa Bandhu – Embrace the World in Friendship” कार्यक्रम हुआ, जिसमें RSS के मुताबिक 10 provinces की 175 host organisations से 2,000 से ज्यादा delegates शामिल हुए। Bhagwat ने India की global role को service, friendship और diversity के सम्मान से जोड़कर पेश किया।
इससे तस्वीर का दूसरा पक्ष भी सामने आता है। RSS अपने overseas outreach को diaspora dialogue, Hindu society के हितों और “Vasudhaiva Kutumbakam” यानी universal oneness की सोच से जोड़ रहा है। वहीं उसके आलोचक इसी international network को political और ideological influence के नजरिए से देख रहे हैं।
अब असली सवाल क्या है?
इस पूरे विवाद का अगला बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कितने नेताओं ने pledge sign किया।
असली सवाल यह है कि “RSS-linked political money” की definition क्या होगी और इसे campaign-finance records में किस तरह track किया जाएगा।
Ro Khanna के $6,600 contribution का donor कौन है? उसका RSS connection किस documented evidence पर आधारित है? अमेरिका में ऐसे कितने contributions हैं? और क्या campaign-finance records इस alleged network को independently verify करते हैं?
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फिलहाल करीब 90 नेताओं का pledge एक राजनीतिक संदेश जरूर देता है, लेकिन इसके वास्तविक financial impact का आकलन इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही हो पाएगा।
एक तरफ RSS अपने global outreach को unity, service और Hindu diaspora engagement के रूप में पेश कर रहा है, दूसरी तरफ उसके आलोचक political funding और ideological influence पर सवाल उठा रहे हैं। Bhagwat का US-Canada दौरा खत्म होने के साथ विवाद खत्म होने के बजाय अब ज्यादा स्पष्ट रूप से एक नए मुद्दे—diaspora politics और political money—की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है।
