Category: Crime News

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  • मुंबई WEH हिट एंड रन: बीकेसी जा रहे बैंककर्मी दंपति घायल, फरार कार चालक की तलाश

    मुंबई WEH हिट एंड रन: बीकेसी जा रहे बैंककर्मी दंपति घायल, फरार कार चालक की तलाश

    मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर बहार जंक्शन के पास कार की टक्कर से बैंककर्मी दंपति घायल हो गया। अंधेरी पुलिस फरार चालक की तलाश कर रही है।

    मुंबई: वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर अंधेरी पूर्व के बहार जंक्शन के पास तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में बीकेसी स्थित कार्यालय जा रहे बैंककर्मी दंपति सर्वेश प्रभु और उनकी पत्नी अदिति घायल हो गए। दुर्घटना के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। अंधेरी पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है।

    यह दुर्घटना शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 की सुबह करीब 8 बजे हुई। सर्वेश प्रभु, 29, और उनकी पत्नी अदिति, 31, कांदिवली स्थित अपने घर से मोटरसाइकिल पर निकले थे। घर से निकलने के करीब 15 मिनट बाद बहार जंक्शन के पास उनकी बाइक को पीछे से एक काले रंग की तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों मोटरसाइकिल से सड़क पर गिर गए। हादसे में बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई।

    हादसे में पति को कई चोटें, पत्नी की कलाई में फ्रैक्चर

    दुर्घटना में सर्वेश प्रभु के दोनों हाथों की हथेलियों और दाहिने घुटने में चोटें आईं। वहीं, उनकी पत्नी अदिति के दाहिने हाथ की कलाई में फ्रैक्चर हो गया।

    घटना के बाद कार चालक घायलों की मदद करने या मौके पर रुकने के बजाय फरार हो गया। दंपति वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर नोट नहीं कर सका। हालांकि, उन्होंने कार का रंग काला होने की जानकारी पुलिस को दी।

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    घटना की सूचना मिलने के बाद अंधेरी पुलिस मौके पर पहुंची और घायल दंपति को जोगेश्वरी पूर्व स्थित ट्रॉमा केयर अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया।

    अंधेरी पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया

    सर्वेश प्रभु की शिकायत के आधार पर अंधेरी पुलिस ने अज्ञात कार चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर वाहन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

    फिलहाल आरोपी चालक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन और उसके चालक की पहचान करने में जुटी है।

    सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ रिकॉर्ड की जांच

    अंधेरी पुलिस ने दुर्घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि टक्कर के बाद काली कार किस रास्ते से आगे गई।

    इसके साथ ही वाहन की पहचान के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।

    सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ रिकॉर्ड की जांच के जरिए फरार चालक तथा दुर्घटना में शामिल कार का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर सड़क सुरक्षा का सवाल

    मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यालयों की ओर आवागमन करते हैं। कांदिवली से बीकेसी जा रहे बैंककर्मी दंपति के साथ हुआ यह हादसा दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।

    कार और मोटरसाइकिल के बीच पीछे से होने वाली टक्कर में बाइक सवारों के सड़क पर गिरने और गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है। इस मामले में भी दोनों सवारों को चोटें आईं और मोटरसाइकिल क्षतिग्रस्त हुई।

    फिलहाल अंधेरी पुलिस सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ रिकॉर्ड के आधार पर फरार कार चालक की पहचान करने में जुटी है। आरोपी की गिरफ्तारी और घायल दंपति की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आगे की जानकारी सामने आने का इंतजार है।

  • महाराष्ट्र में समीर जब्बार पटेल की बेरहमी से हत्या, पूर्व नगराध्यक्ष गिरफ्तार, मकोका की मांग

    महाराष्ट्र में समीर जब्बार पटेल की बेरहमी से हत्या, पूर्व नगराध्यक्ष गिरफ्तार, मकोका की मांग

    तुलजापुर में समीर पटेल की बेरहमी से हत्या के मामले में पूर्व नगराध्यक्ष संतोष कदम गिरफ्तार। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मकोका और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग तेज।

    महाराष्ट्र: धाराशिव जिले के तुलजापुर में कॉलेज छात्र समीर जब्बार पटेल की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी और सत्ताधारी दल से जुड़े पूर्व नगराध्यक्ष संतोष देवीदास कदम उर्फ परमेश्वर को गिरफ्तार कर लिया है। इस वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों और विपक्षी नेताओं में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार और जनसंगठनों ने आरोपियों पर मकोका (MCOCA) के तहत कार्रवाई करने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग तेज कर दी है।

    पुलिस के मुताबिक, इस हत्याकांड में संतोष कदम के साथ संजय विलास जाधव को भी गिरफ्तार किया गया है। वारदात में शामिल कुल 8 नामजद आरोपियों में से अन्य फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। धाराशिव की पुलिस अधीक्षक (SP) रितु खोकर कल्याण के नेतृत्व में मामले की जांच जारी है।

    अपहरण और क्रूरता की पूरी वारदात

    पुलिस जांच और चश्मदीदों के बयानों के अनुसार, वारदात की शुरुआत 3 और 4 नवंबर की दरमियानी रात को हुई। आरोपी सबसे पहले समीर के दोस्त अरबाज अफसर सय्यद को एक चाय की टपरी से जबरन गाड़ी में बिठाकर ले गए। आरोपियों ने अरबाज का मोबाइल छीनकर उसकी चैट्स खंगालीं और उसकी जेब से 10,000 रुपये भी लूट लिए। इसके बाद समीर को फोन करके भारती बुआ मठ (शिंदे महाराज के आश्रम) के पार्किंग कंपाउंड में बुलाया गया।

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    वहां 15 से 20 लोगों के झुंड ने समीर पर लाठियों, बेल्ट और लोहे के रॉड से जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बरता का आरोपियों ने वीडियो भी बनाया। गंभीर रूप से घायल समीर को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हमले में घायल अरबाज का इलाज जिला सरकारी अस्पताल में चल रहा है।

    पुराने विवाद और संशय में मर्डर

    तुलजापुर पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार, इस खौफनाक वारदात के पीछे प्रेम प्रसंग का संशय और पुराना विवाद है। आरोपी संतोष कदम ने करीब तीन महीने पहले समीर पर अपनी एक रिश्तेदार की लड़की का पीछा करने का आरोप लगाया था। उस वक्त समीर के माता-पिता से भी इसकी शिकायत की गई थी। इसी रंजिश के चलते इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया।

    राजनीतिक रसूख के दुरुपयोग पर आक्रोश

    मुख्य आरोपी के सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पूर्व सांसद इम्तियाज जलील सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा की है और तुलजापुर में एक बड़े मोर्चे की चेतावनी दी है। जनता का आरोप है कि आरोपियों ने एक संगठित गिरोह की तरह इस वारदात को अंजाम दिया, इसलिए उन पर मकोका जैसी सख्त धाराएं लगाई जाएं ताकि कोई भी राजनीतिक रसूख का फायदा उठाकर कानून से बच न सके।

    तुलजापुर और धाराशिव के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस प्रशासन ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और फरार आरोपियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने का भरोसा दिया है।

  • मुंबई मालाड ATM फ्रॉड: 7 ग्राहकों के ₹45,500 चोरी, फरहान अली गिरफ्तार

    मुंबई मालाड ATM फ्रॉड: 7 ग्राहकों के ₹45,500 चोरी, फरहान अली गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में ATM कैश ट्रैपिंग से सात खाताधारकों के ₹45,500 चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस ने फरहान अली को गिरफ्तार कर फरार साथी की तलाश शुरू की।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित पद्मानगर इलाके में एटीएम से नकदी चोरी के मामले में बांगुर नगर पुलिस ने फरहान अली जाफर अली को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने अपने साथी के साथ मिलकर एटीएम के नकदी निकालने वाले हिस्से में प्लास्टिक पट्टी लगाकर सात खाताधारकों के कुल 45,500 रुपये चुराए। पुलिस ने आरोपी के पास से 10,000 रुपये नकद, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल किया गया चार पहिया वाहन बरामद किया है। मामले में एक अन्य आरोपी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

    यह घटना 25 अक्टूबर 2026 को मालाड पश्चिम के पद्मानगर इलाके में स्थित एक बैंक के एटीएम केंद्र पर हुई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने दिनभर में 20 से 25 बार एटीएम सेंटर पर जाकर कथित तौर पर नकदी चोरी की। फरहान अली को 1 नवंबर को मालाड से गिरफ्तार किया गया।

    एटीएम में प्लास्टिक पट्टी लगाकर की नकदी चोरी

    आरोपियों ने एटीएम के नकदी वितरण वाले हिस्से में नीले रंग की प्लास्टिक पट्टी लगाई थी। इस वजह से मशीन से पैसे निकालने वाले ग्राहकों का लेनदेन पूरा हो जाता था और उनके खाते से रकम भी कट जाती थी, लेकिन नकदी बाहर नहीं निकल पाती थी।

    ग्राहक इसे एटीएम की तकनीकी खराबी समझकर बिना नकदी लिए केंद्र से चले जाते थे। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर वापस आकर प्लास्टिक पट्टी हटाते और मशीन में फंसी नकदी निकाल लेते थे। फिर उसी पट्टी को दोबारा लगाकर अगले ग्राहक को निशाना बनाया जाता था।

    इस तरह आरोपियों ने एक ही दिन में सात खाताधारकों को निशाना बनाकर 45,500 रुपये की कथित चोरी की।

    बैंक मैनेजर की शिकायत से सामने आया मामला

    मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक आलोक कुमार रामबाबू शर्मा को सूचना मिली कि एटीएम के नकदी निकालने वाले हिस्से पर नीले रंग की प्लास्टिक पट्टी लगाई गई है। इससे मशीन के साथ छेड़छाड़ होने का संदेह पैदा हुआ।

    इसके कुछ समय बाद बैंक मैनेजर को एक ग्राहक की शिकायत भी मिली कि एटीएम से पैसे निकालने के दौरान उसके खाते से रकम कट गई, लेकिन नकदी नहीं मिली।

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    इसके बाद आलोक कुमार रामबाबू शर्मा एटीएम केंद्र पहुंचे और मशीन का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उन्हें एटीएम के साथ छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी मिली। बैंक मैनेजर की शिकायत के आधार पर बांगुर नगर पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    फरहान अली गिरफ्तार, साथी की तलाश जारी

    डीसीपी पुरुषोत्तम कराड, उत्तर क्षेत्र-1 और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जयवंत पवार के मार्गदर्शन में एपीआई संदीप उबाले ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने फरहान अली जाफर अली को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने साथी की मदद से एटीएम धोखाधड़ी को अंजाम देने की बात स्वीकार की। हालांकि, मामले में शामिल दूसरा आरोपी अभी फरार है।

    पुलिस ने आरोपी के पास से 10,000 रुपये नकद, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल किया गया चार पहिया वाहन बरामद किया है। बरामद रकम पूरी चोरी की राशि है या उसका एक हिस्सा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    मुंबई में एटीएम कैश ट्रैपिंग के मामले चिंता का विषय

    एटीएम में नकदी फंसाकर चोरी करने की इस तकनीक को कैश ट्रैपिंग कहा जाता है। इसमें एटीएम के नकदी वितरण हिस्से के साथ छेड़छाड़ करके ग्राहकों को नकदी मिलने से रोका जाता है। ग्राहक के खाते से रकम कटने के बाद आरोपी मशीन में फंसी नकदी हासिल कर लेते हैं।

    मुंबई और नवी मुंबई में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मालाड, भांडुप, वाशी और तलोजा में एटीएम से नकदी फंसाकर चोरी करने के मामले पुलिस की जांच में सामने आए हैं। इन घटनाओं में एटीएम के नकदी वितरण हिस्से में प्लास्टिक पट्टी, टेप या अन्य उपकरण लगाकर ग्राहकों की नकदी रोकने का तरीका सामने आया था।

    एटीएम से पैसे नहीं निकलने पर ग्राहक क्या करें?

    यदि एटीएम से नकदी निकालते समय खाते से पैसे कट जाते हैं, लेकिन मशीन से नकदी नहीं मिलती, तो ग्राहक को तुरंत बैंक में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, असफल एटीएम लेनदेन में बैंक को निर्धारित समय सीमा के भीतर रकम वापस करनी होती है। RBI के निर्देशों के मुताबिक, असफल लेनदेन का स्वतः रिवर्सल अधिकतम T+5 कैलेंडर दिनों में होना चाहिए। निर्धारित समय के बाद रकम वापस नहीं होने पर लागू नियमों के तहत ग्राहक को प्रतिदिन 100 रुपये का मुआवजा मिल सकता है।

    ग्राहकों को एटीएम से नकदी नहीं मिलने पर लेनदेन का एसएमएस, बैंक स्टेटमेंट, एटीएम केंद्र का पता और शिकायत संख्या सुरक्षित रखनी चाहिए। यदि एटीएम में किसी प्रकार की संदिग्ध पट्टी या उपकरण दिखाई देता है, तो उसे स्वयं हटाने के बजाय बैंक और पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

    पुलिस की जांच जारी

    बांगुर नगर पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है। साथ ही जांच की जा रही है कि फरहान अली और उसका साथी मुंबई के अन्य एटीएम केंद्रों पर भी इसी तरह की धोखाधड़ी में शामिल थे या नहीं।

    पुलिस के सामने अब फरार आरोपी की गिरफ्तारी, चोरी की पूरी रकम का पता लगाने और अन्य संभावित मामलों में आरोपियों की भूमिका की जांच करना महत्वपूर्ण है।

  • 17 साल से फरार मुलुंड हत्याकांड का आरोपी टिटवाला से गिरफ्तार, ऐसे मिला सुराग

    17 साल से फरार मुलुंड हत्याकांड का आरोपी टिटवाला से गिरफ्तार, ऐसे मिला सुराग

    मुंबई के 2009 मुलुंड हत्याकांड में 17 साल से फरार फिरोज शेख गिरफ्तार। बिहार से टिटवाला तक ठिकाना बदलकर रह रहा था आरोपी, पुलिस ने ऐसे पकड़ा।

    मुंबई: मुलुंड में 2009 में हुए हत्या के मामले में 17 साल से फरार आरोपी फिरोज मोहम्मद सुलेमान शेख को मुलुंड पुलिस ने टिटवाला पूर्व के बनेली गांव से गिरफ्तार किया है। आरोपी बिहार में अपने पैतृक गांव से लेकर कई जगहों पर ठिकाना बदलकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह अपनी पहचान छिपाने के लिए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बदलता रहता था। आखिरकार गुप्त सूचना और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंचने में सफल रही।

    गिरफ्तार आरोपी की उम्र पुलिस से संबंधित उपलब्ध जानकारी में 39 वर्ष बताई गई है। वह बनेली गांव की लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में अपने परिवार के साथ रह रहा था और एक निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था।

    पुराने विवाद में हुई थी मसकूर की हत्या

    यह मामला 20 जून 2009 का है। मुलुंड पुलिस थाना क्षेत्र में इराम उर्फ मसकूर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फिरोज, अफरोज और उनके दो अन्य साथियों पर हत्या में शामिल होने का आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे पुरानी रंजिश थी। बताया जाता है कि फिरोज के भाई को मृतक के साथ काम करते समय आंखों में चोट लगी थी, जिसके बाद उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी। इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच गांव की जमीन को लेकर भी विवाद चल रहा था।

    इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर मसकूर के सिर पर हथौड़े से वार किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मुलुंड पुलिस थाने में CR No. 218/2009 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

    बिहार में तलाश के बाद टिटवाला में मिला ठिकाना

    हत्या के बाद फिरोज पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो गया था। पुलिस ने बिहार में उसके पैतृक गांव में भी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद उसे वांटेड आरोपी घोषित किया गया।

    पुलिस को जांच के दौरान जानकारी मिली कि आरोपी अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है और मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड बदलता रहता है। इस वजह से उसकी तलाश में परेशानी आ रही थी।

    मुलुंड पुलिस ने बिहार में अपने गुप्त मुखबिरों के नेटवर्क की मदद से उसकी जानकारी जुटाई। गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर पता चला कि आरोपी अब बिहार में नहीं, बल्कि टिटवाला पूर्व के बनेली गांव में रह रहा है।

    इसके बाद पुलिस टीम ने लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया। वह वहां परिवार के साथ रह रहा था और निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था। पूछताछ और जांच में उसकी पहचान 2009 के हत्या मामले के वांटेड आरोपी के रूप में हुई।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई

    यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) मनोज कुमार, अपर पुलिस आयुक्त पूर्व प्रादेशिक विभाग धनंजय कुलकर्णी, पुलिस उपायुक्त पूर्व परिमंडल-3 अभयसिंह देशमुख और सहायक पुलिस आयुक्त मुलुंड विभाग सुदर्शन होनवडजकर के मार्गदर्शन में की गई।

    वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष घाटेकर की निगरानी में सहायक पुलिस निरीक्षक विनोद लभडे और पुलिस उपनिरीक्षक स्वप्निल महाजन ने टीम के साथ कार्रवाई की।

    इस टीम में पुलिस हवलदार चव्हाण, शेडगे और चौघुले तथा पुलिस सिपाही शिंपी, करदोरे, गावडे, सरकटे और आव्हाड शामिल थे। बिहार में मुखबिरों से मिली जानकारी और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में टीम को सफलता मिली।

    गिरफ्तारी के बाद पुराने मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर

    करीब 17 साल पुराने इस हत्या मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में शामिल बताए गए अन्य तीन आरोपियों की वर्तमान स्थिति और पुराने मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी सामने आना बाकी है।

    भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध गंभीर श्रेणी में आता है, जबकि धारा 34 साझा मंशा से किए गए अपराध में सामूहिक जिम्मेदारी से संबंधित है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई अदालत और पुलिस जांच के अनुसार होगी।

  • मुंबई: आधी रात वरळी कोळीवाडा में समुद्र से व्यक्ति को PSI व्हावळे ने बचाया

    मुंबई: आधी रात वरळी कोळीवाडा में समुद्र से व्यक्ति को PSI व्हावळे ने बचाया

    Mumbai News: वरळी कोळीवाडा में आधी रात आत्महत्या के इरादे से समुद्र में उतरे व्यक्ति को PSI व्हावळे और कांस्टेबल पवार ने सुरक्षित बाहर निकालकर जान बचाई।

    मुंबई: वरळी कोळीवाडा इलाके में 2 नवंबर 2026 की आधी रात समुद्र में आत्महत्या के इरादे से उतरे एक व्यक्ति की जान पुलिस की सतर्कता से बच गई। मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से सूचना मिलने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और कांस्टेबल पवार मौके पर पहुंचे और समुद्र में उतरकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला।

    घटना रात 12 बजकर 26 मिनट की है। समय पर की गई पुलिस कार्रवाई से संभावित जनहानि टल गई।

    मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली थी सूचना

    वरळी कोळीवाडा इलाके में एक व्यक्ति आत्महत्या करने के उद्देश्य से समुद्र में उतर गया था। इसकी जानकारी मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष को मिली। नियंत्रण कक्ष से सूचना मिलने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और बीट मार्शल-1 पर तैनात पुलिस कांस्टेबल क्रमांक 111052 पवार तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुए।

    मौके पर पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने देखा कि एक व्यक्ति समुद्र के पानी में मौजूद है और उसकी जान को खतरा है।

    समुद्र में उतरकर पुलिसकर्मियों ने किया बचाव

    व्यक्ति की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और कांस्टेबल पवार ने समुद्र में उतरकर उसे बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। दोनों पुलिसकर्मियों के प्रयासों के बाद व्यक्ति को सुरक्षित समुद्र से बाहर निकाल लिया गया।

    इस कार्रवाई में पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना तत्काल कदम उठाया। समय पर किए गए बचाव अभियान से एक संभावित जानलेवा घटना टल गई।

    बचाए गए व्यक्ति की पहचान और चिकित्सा सहायता

    समुद्र से बाहर निकालने के बाद पुलिस ने व्यक्ति की पहचान और घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की कार्रवाई की। साथ ही उसकी प्रकृति की जांच करते हुए उसे जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगे की कार्रवाई की गई।

    हालांकि, बचाए गए व्यक्ति की उम्र, पहचान, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति और आत्महत्या का प्रयास करने के पीछे की वजह के बारे में फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    आधी रात की पुलिस सतर्कता से टली संभावित जनहानि

    वरळी कोळीवाडा की इस घटना में मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली सूचना के बाद तत्काल घटनास्थल पर पहुंचना और समुद्र में उतरकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना महत्वपूर्ण रहा।

    पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और पुलिस कांस्टेबल पवार की इस कार्रवाई से संभावित जनहानि टल गई। घटना की जानकारी दादर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री बालकृष्ण घाडीगांवकर को सविनय प्रस्तुत की गई।

    आत्महत्या के प्रयास से संबंधित ऐसी घटनाओं में समय पर सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। संकट में फंसे किसी व्यक्ति की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस या आपातकालीन सहायता से संपर्क करना उसकी जान बचाने में मददगार हो सकता है।

  • Mumbai Crime: ₹55 लाख की MD केस में फरार ‘बंटी-बबली’ तमिलनाडु से गिरफ्तार

    Mumbai Crime: ₹55 लाख की MD केस में फरार ‘बंटी-बबली’ तमिलनाडु से गिरफ्तार

    समता नगर पुलिस ने ₹55 लाख की MD ड्रग्स केस में फरार माला राय और अविनाश झा उर्फ ‘लोटा’ को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया।

    मुंबई: पोईसर में MD ड्रग्स बरामदगी के बाद दोनों आरोपी मुंबई छोड़कर फरार हो गए थे। समता नगर पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए उनकी लोकेशन दक्षिण भारत में ट्रेस की। तमिलनाडु में मौजूदगी की पुष्टि के बाद स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों को गिरफ्तार किया गया।

    पोईसर स्थित घर से बरामद हुई थी 220 ग्राम MD ड्रग्स

    समता नगर पुलिस ने इससे पहले माला राय के पोईसर स्थित घर पर कार्रवाई करते हुए 220 ग्राम MD ड्रग्स बरामद की थी। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 55 लाख रुपये बताई गई थी।

    इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने माला राय की तलाश शुरू की। जांच के दौरान जानकारी सामने आई कि वह अपने कथित ड्रग्स सप्लायर साथी अविनाश झा उर्फ ‘लोटा’ के साथ मुंबई से फरार हो गई थी। दोनों की तलाश के लिए पुलिस ने विशेष टीम गठित की।

    PSI योगेश राउत की टीम ने तमिलनाडु में की गिरफ्तारी

    फरार आरोपियों की तलाश PSI योगेश राउत के नेतृत्व में की गई। तकनीकी जांच के जरिए उनकी लोकेशन का पता लगाया गया और तमिलनाडु में मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद स्थानीय पुलिस की सहायता से गिरफ्तारी की गई।

    PSI योगेश राउत के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ कर MD ड्रग्स के स्रोत और इस कारोबार में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

    MD ड्रग्स का स्रोत और सप्लाई नेटवर्क जांच के घेरे में

    DCP गजानन राजमाने के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और मुंबई में इसकी सप्लाई किन लोगों तक की जानी थी।

    जांच में ड्रग्स की खरीद-फरोख्त, संभावित सप्लायर और कारोबार में शामिल अन्य लोगों की भूमिका पर ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल ड्रग्स के वास्तविक स्रोत और संभावित ग्राहकों की पहचान सार्वजनिक नहीं हुई है।

    अविनाश झा उर्फ ‘लोटा’ के नाम से पुराने NDPS केस का न्यायालयीन रिकॉर्ड

    City Sessions Court, Mumbai के न्यायालयीन रिकॉर्ड में Avinash Mohannath Zha @ Lota के नाम से समता नगर पुलिस स्टेशन से संबंधित एक पुराने NDPS मामले का उल्लेख मिलता है।

    रिकॉर्ड में FIR संख्या 1431, वर्ष 2022 और Sessions Case 101150/2024 का विवरण दर्ज है। इसमें NDPS Act की धारा 8(C) और 22 का उल्लेख भी है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी से इस पुराने न्यायालयीन रिकॉर्ड और वर्तमान 220 ग्राम MD ड्रग्स बरामदगी के मामले के बीच सीधा संबंध स्पष्ट नहीं होता। इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग माना जाना चाहिए।

    माला राय का नाम पुराने NDPS मामले में भी दर्ज

    Mala Harishchandra Ray vs State of Maharashtra नामक बॉम्बे हाईकोर्ट के एक पुराने न्यायालयीन रिकॉर्ड में भी NDPS मामले का उल्लेख है। इसमें Samta Nagar Police Station के CR No. 517 of 2023 का विवरण उपलब्ध है।

    इस रिकॉर्ड में NDPS Act की धारा 8(c), 22(b) और 29 का उल्लेख किया गया है। इसमें अगस्त 2023 की पुलिस कार्रवाई और माला राय का आरोपी के रूप में नाम दर्ज होने की जानकारी है।

    हालांकि, इस पुराने मामले और वर्तमान MD ड्रग्स बरामदगी के बीच संबंध की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    जांच जारी, अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल

    माला राय और अविनाश झा की तमिलनाडु से गिरफ्तारी के बाद समता नगर पुलिस की जांच अब ड्रग्स के स्रोत और कथित सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। पूछताछ से मिलने वाले सुरागों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपियों के खिलाफ आरोपों और उनकी दोषसिद्धि का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

  • Pune Bus Accident: चलती इलेक्ट्रिक बस के पहियों के नीचे आईं 79 वर्षीय महिला, मौत; चालक पर केस

    Pune Bus Accident: चलती इलेक्ट्रिक बस के पहियों के नीचे आईं 79 वर्षीय महिला, मौत; चालक पर केस

    Pune Hadapsar Bus Accident: कमलाबाई लोंढे की इलेक्ट्रिक बस के पिछले पहियों के नीचे आने से मौत। पुलिस ने चालक पर लापरवाही का मामला दर्ज किया।

    पुणे: हडपसर में 29 अक्टूबर को हुए इलेक्ट्रिक बस हादसे में 79 वर्षीय कमलाबाई दादू लोंढे की मौत हो गई। वह सासवड स्थित मंदिर में दर्शन के लिए जा रही थीं। पुलिस ने बस चालक के खिलाफ लापरवाही से मौत और खतरनाक तरीके से वाहन चलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। हादसे के बाद पुणे की सार्वजनिक बसों में यात्रियों, खासकर बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।

    हडपसर में कैसे हुआ हादसा?

    यह घटना दोपहर करीब 12 बजे हडपसर इलाके में हुई। कमलाबाई दादू लोंढे भेकराई नगर डिपो से संचालित इलेक्ट्रिक बस में सवार होने की कोशिश कर रही थीं। यह बस हडपसर गाडीतल से सासवड की ओर जा रही थी।

    हडपसर पुलिस स्टेशन के उपनिरीक्षक राघवेंद्र सालगर के अनुसार, महिला ने चलती बस के पिछले दरवाजे से चढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और उनके पैर बस के पिछले पहियों के नीचे आ गए।

    हादसे के बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    कमलाबाई सासवड में मंदिर दर्शन के लिए जा रही थीं। एक सामान्य धार्मिक यात्रा उनके परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गई।

    चालक तुषार देविदास कामठे पर दर्ज हुआ मामला

    हडपसर पुलिस ने बस चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और 281 के साथ मोटर वाहन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।

    धारा 106(1) लापरवाही के कारण किसी व्यक्ति की मौत होने से संबंधित है, जबकि धारा 281 सार्वजनिक रास्ते पर खतरनाक या लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़ी है।

    प्रारंभिक स्थानीय जानकारी में बस चालक की पहचान तुषार देविदास कामठे के रूप में बताई गई थी। शुरुआती घटनाक्रम में उसे हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। हालांकि, पुलिस उपनिरीक्षक राघवेंद्र सालगर के बाद के बयान के अनुसार, चालक की मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें शराब सेवन की पुष्टि नहीं हुई। उसे जांच में उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया है।

    महिला के बेटे सुरेंद्र लोंढे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। मामले में चालक की जिम्मेदारी और दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच जारी है।

    पुणे में पहले भी सामने आ चुका है चलती बस से जुड़ा जानलेवा हादसा

    हडपसर की घटना से पहले 24 अगस्त 2026 को पुणे के सिंहगढ़ रोड पर 25 वर्षीय छात्रा कंचन बलवंत खड्डा की बस दुर्घटना में मौत हुई थी।

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    कंचन डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (DIAT) की छात्रा थीं। वह चलती PMPML बस के सामने वाले दरवाजे से नीचे गिर गई थीं। इसके बाद वह एक स्कूल बस के पहियों के नीचे आ गईं और उनकी मौत हो गई।

    इस घटना के बाद पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड (PMPML) ने बसों के खुले दरवाजों के साथ चलने के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया था।

    PMPML ने बसों के दरवाजे बंद रखने के दिए थे निर्देश

    सितंबर 2026 में PMPML ने शहर में चलने वाली बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कार्रवाई शुरू की थी। परिवहन प्रशासन ने बस चलते समय सभी दरवाजे बंद रखने और डिपो से निकलने से पहले उनकी स्थिति जांचने के निर्देश दिए थे।

    ड्राइवर, कंडक्टर और डिपो मैनेजर को भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

    इसके बावजूद पुणे में बसों के खुले दरवाजों के साथ चलने की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे में हडपसर की नई घटना ने बस संचालन और यात्री सुरक्षा के इंतजामों पर दोबारा ध्यान खींचा है।

    हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि 29 अक्टूबर के हादसे में सितंबर के सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन हुआ था।

    बुजुर्ग यात्रियों के लिए बस में चढ़ने की व्यवस्था कितनी सुरक्षित?

    PMPML ने दिसंबर 2024 में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को बस के सामने वाले दरवाजे से प्रवेश देने की व्यवस्था से संबंधित निर्देश जारी किए थे। इसका उद्देश्य पीछे के दरवाजे पर भीड़ के कारण होने वाली परेशानी कम करना था।

    इस व्यवस्था के संदर्भ में अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए निर्धारित बोर्डिंग सुविधा वर्तमान में कितनी प्रभावी है और क्या इसका पालन सभी संबंधित बस रूटों पर किया जा रहा है।

    बस के पूरी तरह रुकने के बाद ही यात्रियों को चढ़ने और उतरने देना तथा सभी यात्रियों के सुरक्षित होने के बाद वाहन आगे बढ़ाना सार्वजनिक परिवहन की बुनियादी सुरक्षा प्रक्रिया है।

    1 नवंबर से बुजुर्गों को PMPML टिकट पर 50% छूट

    इसी बीच PMPML ने 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के यात्रियों के लिए 1 नवंबर 2026 से नियमित बस टिकटों पर 50 प्रतिशत किराया छूट लागू की है।

    यह सुविधा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और PMRDA क्षेत्र के सभी PMPML बस रूटों पर लागू है।

    छूट का लाभ लेने के लिए यात्री आधार कार्ड, PAN कार्ड या PMPML का वरिष्ठ नागरिक पहचान पत्र दिखा सकते हैं। आधार कार्ड पर पूरी जन्मतिथि दर्ज होना जरूरी है।

    पहले वरिष्ठ नागरिकों को 70 रुपये के दैनिक पास पर 35 रुपये में यात्रा की सुविधा मिलती थी। अब 50 प्रतिशत छूट सामान्य टिकटों पर भी लागू कर दी गई है।

    यह फैसला बुजुर्ग यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को किफायती बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। लेकिन किराये में राहत के साथ उनकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब महत्वपूर्ण

    हडपसर हादसे में पुलिस की जांच के साथ PMPML की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। संबंधित इलेक्ट्रिक बस का CCTV फुटेज, GPS रिकॉर्ड, ड्यूटी विवरण और दुर्घटना के समय बस की वास्तविक स्थिति जांच में मददगार हो सकती है।

    इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि बस निर्धारित स्टॉप पर रुकी थी या नहीं और यात्रियों के चढ़ने से पहले वाहन आगे बढ़ा था या नहीं।

    फिलहाल पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां और चालक की कानूनी जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • दिवाली सफाई में बड़ी सेंध: मुंबई में ऑनलाइन क्लीनर्स का ₹12 लाख का स्कैम

    दिवाली सफाई में बड़ी सेंध: मुंबई में ऑनलाइन क्लीनर्स का ₹12 लाख का स्कैम

    मुंबई के मलाड में ऑनलाइन ऐप से बुक किए गए सफाईकर्मियों ने घर से 12 लाख के गहने उड़ाए। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 3 को दबोचा। जानिए सुरक्षा नियम।

    मुंबई: त्योहारों के सीजन में अगर आप भी घर की ‘दिवाली सफाई’ के लिए किसी ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रोफेशनल क्लीनर्स बुक कर रहे हैं, तो बेहद सतर्क हो जाइए। मुंबई में इस समय ‘प्रोफेशनल दिवाली क्लीनर्स स्कैम’ का एक बेहद खतरनाक और संगठित नेटवर्क एक्टिव हो गया है।

    मलाड वेस्ट के पॉश ‘फाल्कन टावर’ में रहने वाले एक परिवार को ऑनलाइन ऐप से सफाईकर्मी बुलाना भारी पड़ गया। यहां सफाई के बहाने आए शातिर गिरोह ने घर की अलमारी साफ कर ₹12 लाख के सोने-चांदी के आभूषणों पर हाथ साफ कर लिया। मलाड पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

    केमिकल स्प्रे और ‘वड़ा पाव’ की आड़ में वारदात

    यह सनसनीखेज घटना 26 अक्टूबर की है, जब 52 वर्षीय महिला ने एक दिन पहले ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए होम-क्लीनिंग सर्विस बुक की थी। अगली सुबह करीब 10 बजे चार सफाईकर्मी फ्लैट पर पहुंचे। उन्होंने मास्टर बेडरूम में केमिकल स्प्रे करने की बात कही और घरवालों को सांस फूलने व बदबू के डर से दूर रहने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने खुद को कमरे के अंदर लॉक कर लिया और अलमारी का लॉकर तोड़कर 50 ग्राम का सोने का नेकलेस, 10 ग्राम का मंगलसूत्र, 50 ग्राम का गोल्ड बिस्कुट और 500 ग्राम चांदी के सिक्के निकाल लिए।

    चोरी के माल को तुरंत ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने एक शातिर चाल चली। करीब 11:30 बजे, एक सफाईकर्मी ‘वड़ा पाव’ खरीदने के बहाने बाहर गया और चोरी के सारे आभूषण बाहर खड़े अपने तीसरे साथी को पास कर दिए। इसके बाद बाकी आरोपी काम अधूरा छोड़कर अगले दिन आने का वादा करते हुए दोपहर 1:30 बजे वहां से निकल गए। 28 अक्टूबर को जब परिवार ने अलमारी खोली, तब चोरी का खुलासा हुआ।

    मास्टरमाइंड का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड

    पीड़ित परिवार की शिकायत पर मलाड पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर फौरन जांच शुरू की। पुलिस की डिटेक्शन टीम ने जाल बिछाकर मुख्य साजिशकर्ता पवन धीवर (26), सत्यम शुक्ला (18) और अनीश चौरसिया (19) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी पवन धीवर का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और यह पूरा गैंग जून 2026 से इस ऑनलाइन सफाई कंपनी में एक्टिव था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 11 तोला सोना (लगभग 8 से 9 लाख रुपये मूल्य) बरामद कर लिया है। बाकी की चांदी और बचे हुए आभूषणों की तलाश के लिए पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

    ऑनलाइन कंपनियों की लापरवाही और उपभोक्ता के अधिकार

    इस घटना ने गिग-इकोनॉमी और ऑनलाइन सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। मुंबई पुलिस के नियमों के मुताबिक, किसी भी सर्विस एग्रीगेटर ऐप या एजेंसी के लिए अपने सभी फील्ड स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification Certificate) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कंपनियां बिना बैकग्राउंड चेक किए किसी अपराधी को आपके बेडरूम तक भेज रही हैं, तो उपभोक्ता लापरवाही के तहत कंपनियों के खिलाफ भी पुलिस में आपराधिक मामला और कंज्यूमर कोर्ट में भारी मुआवजे का केस दर्ज कराया जा सकता है।

    सुरक्षा के लिए इन 4 बातों का रखें ध्यान

    • प्रोफाइल और आईडी का मिलान: घर में प्रवेश देने से पहले सफाईकर्मियों के आधार कार्ड और ऐप पर दिख रही प्रोफाइल फोटो को जरूर चेक करें।
    • कर्मचारियों पर सीधी नजर: जब कर्मचारी घर के अंदर काम कर रहे हों, तो परिवार का कम से कम एक सदस्य निगरानी के लिए वहां जरूर मौजूद रहे। केमिकल स्प्रे के बहाने उन्हें कमरे में अकेला न छोड़ें।
    • सोसाइटी गेट पर सख्त एंट्री: सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड्स को निर्देश दें कि वे आने वाले हर सर्विस प्रोवाइडर की तस्वीर और उनके बैग्स की चेकिंग एंट्री बुक में दर्ज करें।
    • कीमती सामान पहले करें सुरक्षित: सफाई शुरू होने से पहले ही अपने सोने, चांदी और कैश को ऐसे कमरों या लॉकर में शिफ्ट कर दें, जहां सफाई नहीं होनी है।

    मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी फिलहाल पुलिस कस्टडी में हैं और पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस गैंग ने मुंबई के अन्य किन इलाकों में सफाई के बहाने चोरियां की हैं।

  • दिंडोशी पुलिस की मालेगांव में बड़ी कार्रवाई, 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त

    दिंडोशी पुलिस की मालेगांव में बड़ी कार्रवाई, 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त

    मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव के कबाड़ गोदाम से 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त किए। इनकी कीमत ₹1.15 करोड़ बताई गई, एक आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मुंबई में मोबाइल चोरी के बाद उनके पार्ट्स निकालकर बेचने के कथित कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। दिंडोशी पुलिस ने नासिक जिले के मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई कर 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड जब्त किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

    पुलिस की जांच मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क में हुई दो मोबाइल की चोरी से शुरू हुई थी, लेकिन इसकी कड़ी मालेगांव तक पहुंच गई। अब पुलिस जब्त मदरबोर्ड की पहचान कर यह पता लगाने में जुटी है कि वे मुंबई और दूसरे इलाकों से चोरी हुए किन मोबाइल फोन के हैं और इस कथित कारोबार में और कौन-कौन शामिल है।

    मालाड के पुष्पा पार्क से शुरू हुई थी जांच

    इस मामले की शुरुआत 22 सितंबर 2026 को मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क इलाके में हुई मोबाइल चोरी की शिकायत से हुई थी। यहां एक महिला के बैग से दो मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। इसके बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 1073/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    चोरी की इस घटना की जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मुंबई से चोरी किए गए मोबाइल फोन मालेगांव ले जाए जा रहे हैं। वहां मोबाइल खोलकर उनके अलग-अलग पार्ट्स निकाले जाते हैं और मदरबोर्ड को कबाड़ के रूप में बेचने का कारोबार किया जा रहा है।

    मालेगांव के कबाड़ गोदाम से मिले 1,150 मदरबोर्ड

    जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान वहां से 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड बरामद किए गए। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है।

    इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जब्त किए गए मदरबोर्ड के स्रोत और उनकी पहचान की जांच की जा रही है।

    चोरी के मोबाइल के पार्ट्स अलग करके बेचने का शक

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू चोरी के मोबाइल फोन को खोलकर उनके पार्ट्स अलग-अलग बेचने का कथित तरीका है। मोबाइल का पूरा हैंडसेट बेचने के बजाय उसके मदरबोर्ड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को अलग करके बेचने से चोरी के फोन की पहचान और बरामदगी की जांच जटिल हो सकती है।

    1,150 मदरबोर्ड किन मोबाइल फोन के हैं?

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल जब्त मदरबोर्ड की पहचान करना है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ये मदरबोर्ड मुंबई में चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन से जुड़े हैं या दूसरे इलाकों के मामलों से भी इनका संबंध है।

    जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गोदाम तक ये मदरबोर्ड किस माध्यम से पहुंचे, उन्हें किसने खरीदा और आगे किन लोगों को बेचने की तैयारी थी। फिलहाल अबतक पूरे सप्लाई नेटवर्क या अन्य आरोपियों की संख्या की जांच नहीं हुई है।

    मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?

    मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद फोन का IMEI नंबर और जरूरी दस्तावेज तैयार रखकर केंद्र सरकार के CEIR पोर्टल पर मोबाइल ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    CEIR के जरिए चोरी या गुम हुए मोबाइल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक कराया जा सकता है। यदि ब्लॉक किया गया फोन किसी नेटवर्क पर दोबारा इस्तेमाल होता है, तो उसकी ट्रेसिंग में पुलिस को मदद मिल सकती है।

    आधिकारिक पोर्टल: https://www.ceir.gov.in/

    दिंडोशी पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य फोकस जब्त किए गए 1,150 मदरबोर्ड की पहचान और उनके वास्तविक स्रोत का पता लगाना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद पुर्जे किन मोबाइल चोरी के मामलों से जुड़े हैं और मालेगांव तक पहुंचने वाले इस कथित कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।