Category: Crime News

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  • जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।

    बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

    नंदन यादव के पैर में लगी गोली

    मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।

    दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।

    रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई

    मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।

    पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।

    120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    FIR में POCSO और BNS की धाराएं

    मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।

    पुलिस पेट्रोलिंग भी जांच के दायरे में

    घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।

    महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान

    घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

    जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

    फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।

  • कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से गिरी 200 किलो की बीम, पहले भी गिरता था सामान; 4 पर केस

    कांजुरमार्ग में 13वीं मंजिल से 200 किलो की लोहे की बीम पुलिस कार्यालय के सामने गिरी। पहले भी निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत थी, 4 पर केस दर्ज।

    मुंबई: कांजुरमार्ग में निर्माणाधीन इमारत की 13वीं मंजिल से करीब 200 किलो वजनी लोहे की बीम गिरने की घटना के बाद निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीम सीधे कांजुरमार्ग पुलिस स्टेशन के एक्सटर्नमेंट विभाग के कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने गिरी। घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय की टिन की छत और पास का पेड़ क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलिस ने मामले में ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

    यह घटना 18 सितंबर की दोपहर की है। एक्सटर्नमेंट विभाग में तैनात सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) विश्वास दशरथ देसाई उस समय कार्यालय में कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें तेज आवाज सुनाई दी। बाहर निकलने पर कार्यालय के प्रवेश द्वार के सामने भारी लोहे की बीम पड़ी मिली। बीम नीचे आने से पहले एक पेड़ और कार्यालय की टिन की छत से टकराई थी।

    200 किलो की बीम के गिरने से पहले भी सामने आई थी समस्या

    इस घटना को गंभीर बनाने वाली सबसे अहम बात यह है कि निर्माण स्थल से निर्माण सामग्री गिरने की शिकायत पहले भी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इससे पहले भी पत्थर, गिट्टी और लोहे की रॉड आसपास गिर चुकी थीं। निर्माण स्थल के ठेकेदार को इस संबंध में पहले भी चेतावनी दी जा चुकी है।

    ऐसे में अब जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पहले की शिकायतों और चेतावनी के बाद साइट पर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए गए थे। यह भी जांच का विषय है कि इतनी भारी बीम 13वीं मंजिल से नीचे गिरने की स्थिति तक कैसे पहुंची और उस समय उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।

    ठेकेदार, इंजीनियर और दो सेफ्टी सुपरवाइजर पर केस

    पुलिस ने KAMS Realtor से जुड़े साइट ठेकेदार मितेश जैन, साइट इंजीनियर धनराज रामचंद्र जगताप और सेफ्टी सुपरवाइजर विक्रम तथा सोहेल मिर्जा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर लोगों की जान और व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस ने घटना के बाद निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से भी पूछताछ की। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर बीम के निर्माण स्थल से गिरने की पुष्टि की गई। हालांकि बीम के गिरने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी, इसकी जांच अभी जारी है।

    जिस प्रोजेक्ट की 13वीं मंजिल से बीम गिरी, उसका RERA रिकॉर्ड

    सार्वजनिक रियल एस्टेट रिकॉर्ड में KAMS Realtors का Kams Krystel प्रोजेक्ट कांजुरमार्ग ईस्ट के Purshotam Godbole Road पर दर्ज है और इसका MahaRERA registration number P51800051412 है। परियोजना अभी निर्माणाधीन दर्ज है और इसके लिए 31 दिसंबर 2026 की completion date दर्ज है। RERA-derived रिकॉर्ड में प्रोजेक्ट के लिए Ground + 24 Floor संरचना दर्ज है।

    रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि इस प्रोजेक्ट से संबंधित MahaRERA में CC12501288 नंबर की एक शिकायत 17 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी और वह disposed/order approved स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्थापित नहीं होता कि वह शिकायत निर्माण स्थल की सुरक्षा से संबंधित थी।

    हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन खतरा गंभीर था

    घटना के समय कार्यालय में कर्मचारी मौजूद थे और बीम कार्यालय के प्रवेश द्वार के ठीक सामने आकर गिरी। बीम का पेड़ और कार्यालय की छत से टकराना इस बात को महत्वपूर्ण बनाता है कि निर्माण स्थल से गिरने वाली सामग्री का जोखिम केवल वहां काम कर रहे मजदूरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास मौजूद कार्यालयों और लोगों तक भी पहुंच सकता है। इस मामले में किसी के घायल नहीं होने की पुष्टि है, जबकि कार्यालय की टिन की छत को नुकसान पहुंचा है।

    मुंबई में निर्माण स्थलों से गिरने वाली भारी सामग्री को लेकर हाल के दिनों में अलग-अलग घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे मामलों में site barricading, material handling, ऊंचाई पर सामग्री की सुरक्षित व्यवस्था और आसपास के सार्वजनिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उपाय जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं।

    अब जांच में इन सवालों के जवाब अहम

    कांजुरमार्ग की इस घटना में पुलिस जांच के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि बीम कैसे गिरी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पहले निर्माण सामग्री गिरने की शिकायतें कब-कब हुईं, ठेकेदार को किस तरह की चेतावनी दी गई, उसके बाद क्या सुरक्षा उपाय किए गए और घटना के समय साइट पर भारी सामग्री को संभालने की व्यवस्था क्या थी।

    फिलहाल पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बीम गिरने की तकनीकी वजह, साइट पर सुरक्षा व्यवस्था और पहले की शिकायतों के बाद उठाए गए कदमों से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी, 7 पर FIR; 3 गिरफ्तार, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी, 7 पर FIR; 3 गिरफ्तार, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    बिहार के जमुई में 19 सितंबर को 10वीं के नाबालिग छात्र-छात्रा को रोककर बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ। POCSO में FIR, 3 गिरफ्तार।

    बिहार: जमुई में 10वीं कक्षा के नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में रोककर कथित तौर पर बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज होने और 3 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

    घटना 19 सितंबर की शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच की बताई जा रही है। दोनों नाबालिग जमुई शहर के रहने वाले और 10वीं कक्षा के छात्र हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों कोचिंग से लौटने के दौरान स्कूटी से मड़वा पहाड़ की तरफ गए थे। वापस लौटते समय जमुई सदर थाना क्षेत्र में युवकों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।

    वायरल वीडियो में क्या दिखा ?

    वायरल वीडियो में दोनों नाबालिगों को कई लोगों से घिरा हुआ देखा जा सकता है। छात्र और छात्रा लोगों से उन्हें जाने देने की गुहार लगाते दिखाई देते हैं। वीडियो में छात्र के साथ खींचतान और मारपीट तथा छात्रा के साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार दिखाई देता है। एक अन्य दृश्य में एक व्यक्ति छात्रा को पकड़कर कुछ दूरी तक ले जाने की कोशिश करता दिखाई देता है।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ी और दोनों नाबालिगों की पहचान कर उनके बयान लिए गए। पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई। जांच में 6 से 7 युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है।

    प्रशासन ने क्या कहा ?

    जमुई के जिलाधिकारी नवीन ने कहा है कि घटना 19 सितंबर की शाम जमुई सदर थाना क्षेत्र की है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया, दोनों नाबालिगों से जानकारी ली गई और प्राथमिकी दर्ज की गई। प्रशासन ने नाबालिगों की निजता बनाए रखते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।

    पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज

    मामले में सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई कर रही है। जांच में POCSO Act के साथ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस ने पीड़ितों के बयान भी दर्ज किए हैं।

    इस मामले की जांच में जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल के साथ DIG राकेश कुमार भी निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का फोकस वीडियो में दिखाई देने वाले सभी लोगों की भूमिका तय करने और बाकी आरोपियों तक पहुंचने पर है।

    राहुल गांधी ने उठाए सवाल

    मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जमुई का वीडियो बेहद परेशान करने वाला है। राहुल गांधी ने घटना में शामिल लोगों की पहचान कर POCSO के तहत कार्रवाई और जल्द सजा की मांग की। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि घटना 19 सितंबर की है तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं और शाम के समय बिहार की सड़कों पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सरकार जवाब दे।

    हालांकि अब तक सामने आए पुलिस अपडेट के अनुसार कार्रवाई शुरू हो चुकी है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी भूमिका की जांच जारी है।

    नाबालिग पीड़ितों की पहचान कानूनन संरक्षित है। इसलिए उनकी पहचान, चेहरा, स्कूल, पता या ऐसी कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए जिससे उनकी पहचान सार्वजनिक हो सके। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

  • Crime & Corruption Control Association की सूचना पर चालीसगांव में वन मजदूर के घर से काला हिरण जब्त

    Crime & Corruption Control Association की सूचना पर चालीसगांव में वन मजदूर के घर से काला हिरण जब्त

    Schedule-I में शामिल संरक्षित काला हिरण खेत के घर में बंधा मिला; वरिष्ठ वन अधिकारियों की टीम ने की कार्रवाई

    महाराष्ट्र/चालीसगांव: गौताला अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीव से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। Crime & Corruption Control Association (CCCA) को मिली गुप्त जानकारी के बाद वरिष्ठ वन अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद बनाई गई विशेष टीम ने कार्रवाई कर एक खेत स्थित घर से जिंदा नर काला हिरण बरामद किया। वन विभाग के मुताबिक, काला हिरण करीब दो साल का है।

    CCCA के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने बताया कि संगठन के पदाधिकारियों को जानकारी मिली थी कि शिवापुर निवासी और वन विभाग में वनमजदूर के तौर पर काम करने वाले सुभाष शिवाजी कुऱ्हाडे के खेत स्थित घर में काला हिरण बांधकर रखा गया था। जानकारी मिलते ही इसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया गया।

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    इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेष टीम ने संबंधित घर पर कार्रवाई हुई। टीम को वहां काला हिरण जिंदा और बंधा हुआ मिला। वन विभाग ने उसे अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित कर लिया। वन अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ये काला हिरण प्रजाति का 2 साल का नर है।

    Crime & Corruption Control Association ने दी थी गुप्त जानकारी

    इस मामले में CCCA की अहम भूमिका रही। संगठन के पदाधिकारियों को काला हिरण बांधकर रखे जाने की जानकारी मिली थी, जिसे उन्होंने सीधे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाया। इसके बाद वन विभाग ने विशेष टीम बनाकर कार्रवाई की।

    CCCA का कहना है कि वन अपराधों से जुड़ी जानकारी मिलने पर संगठन उसे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाता है और कार्रवाई में सहयोग करता है।

    वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत मामला

    वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इस मामले में Wild Life (Protection) Act, 1972 की धारा 9, 39(अ), 39(ब), 40(2) और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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    काला हिरण यानी Blackbuck (Antilope cervicapra) Schedule-I में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। ऐसे वन्यजीव को अवैध तरीके से पकड़कर रखना या उसका कारोबार करना कानून के तहत अपराध है।

    काला हिरण कहां से आया, इसकी जांच जरूरी

    CCCA की ओर से मिली जानकारी में एक अन्य वन कर्मचारी की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है। संगठन का दावा है कि संबंधित कर्मचारी ने काला हिरण खेत के घर में रखने के लिए कहा था और उसकी संभावित बिक्री की तैयारी की जा रही थी।

    हालांकि, इस दावे की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी जांच होना बाकी है। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि काला हिरण कहां से आया, उसे किसने पकड़ा, यहां तक कैसे पहुंचा और क्या उसे बेचने की कोशिश की जा रही थी।

    15 दिनों में अंजन, चंदन और अब काला हिरण

    CCCA के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों में गौताला अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आए हैं। इनमें अंजन पेड़ों की कथित अवैध कटाई और तस्करी, चंदन तस्करी और अब जिंदा काला हिरण बरामदगी शामिल है।

    CCCA का कहना है कि इन मामलों को देखते हुए वन अपराधों की पूरी कड़ी की जांच की जरूरत है। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर संदेह है, तो उसे जांच और सबूतों के आधार पर साफ किया जाना चाहिए।

    संभावित तस्करी रास्तों की भी जांच की मांग

    CCCA के अनुसार, जानकारी जुटाने के दौरान कुछ ऐसे रास्तों की जानकारी सामने आई है, जिनका इस्तेमाल वन्यजीव या वन्यजीवों से जुड़ी सामग्री की अवैध आवाजाही के लिए किए जाने का शक है। इनमें चालीसगांव–धुले–नवापुर–गुजरात, चालीसगांव–मालेगांव–मुंबई और चालीसगांव–छत्रपति संभाजीनगर–अहिल्यानगर–मुंबई मार्ग शामिल हैं।

    इन रास्तों से वास्तव में तस्करी हो रही है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    CCCA ने पूरी कड़ी की जांच की मांग की

    CCCA ने मांग की है कि जांच सिर्फ काला हिरण मिलने तक सीमित न रहे। काला हिरण कहां से आया, किसने उसे यहां पहुंचाया, संभावित खरीदार कौन था और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जाए।

    CCCA ने कहा है कि भविष्य में भी वन्यजीव अपराधों से जुड़ी गोपनीय जानकारी मिलने पर उसे वरिष्ठ वन अधिकारियों तक पहुंचाकर कार्रवाई में सहयोग किया जाएगा।

  • अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

    अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

    अंधेरी MIDC में माथाडी यूनियन की आड़ में कथित वसूली के मामले में 7 गिरफ्तार, 4 फरार। MCOCA कार्रवाई और पुलिस जांच की पूरी जानकारी।

    मुंबई: अंधेरी पूर्व MIDC में माथाडी कामगार यूनियन के नाम पर कंपनियों, कारोबारियों और निर्माण व्यावसायिकों से कथित प्रोटेक्शन मनी वसूलने के मामले में मुंबई पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चार अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र संघटित गुन्हेगारी नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है। जांच में कथित नेटवर्क की पहुंच अंधेरी से आगे पवई, गोरेगांव पूर्व और फिल्म स्टूडियो क्षेत्र तक होने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रेड स्टार इमारत में ₹10 लाख की कथित मांग

    यह मामला 16 अगस्त को अंधेरी पूर्व के कोंडिविटा रोड स्थित ट्रेड स्टार इमारत में हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, पांचवीं मंजिल पर एक कंपनी के कार्यालय में नवीनीकरण का काम चल रहा था। वहां कुछ लोग पहुंचे और कथित तौर पर ₹10 लाख की प्रोटेक्शन मनी की मांग की। कार्यालय में पहले से काम कर रहे माथाडी कामगारों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है।

    पुलिस के अनुसार, इस घटना में 27 वर्षीय माथाडी कामगार नदीम नसरुद्दीन शेख पर भी हमला हुआ। 17 अगस्त को MIDC पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि लकड़ी के डंडों से उसके सिर और पैरों पर वार किया गया। इसी हमले के बाद पुलिस को कथित वसूली नेटवर्क का पता चला।

    माथाडी के नाम पर काम रोककर पैसे मांगने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी किसी कंपनी में काम हासिल करने के बजाय वहां काम कर रहे श्रमिकों पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने का प्रयास करते थे। इस मामले में एक अन्य शिकायत के अनुसार, नदीम शेख से काम जारी रखने की अनुमति के बदले ₹20,000 प्रति माह मांगने का आरोप है।

    अलग-अलग घटनाओं से संबंधित

    इन दोनों रकमों को एक ही मांग मानना सही नहीं होगा। ट्रेड स्टार कार्यालय मामले में ₹10 लाख की कथित मांग का उल्लेख है, जबकि नदीम शेख से संबंधित मामले में ₹20,000 मासिक मांग का विवरण सामने आया है। वास्तविक वसूली और सभी संबंधित घटनाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    करीब 1,000 कंपनियों तक पहुंच का पुलिस दावा

    पुलिस जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क की पहुंच करीब 1,000 MIDC कंपनियों तक होने की आशंका जताई गई है। कंपनियों से ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की कथित मांग और निर्माण व्यावसायिकों से प्रोजेक्ट के आकार के आधार पर ₹120 प्रति वर्ग फुट तक वसूली के दावे भी सामने आए हैं।

    हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियों से वसूली साबित हो चुकी है। पुलिस को अब यह पता लगाना है कि कितने कारोबारी वास्तव में इस कथित नेटवर्क के संपर्क में आए, कितनों से पैसे मांगे गए और कितने लोगों ने शिकायत दर्ज कराई।

    अंधेरी से पवई और गोरेगांव तक कथित गतिविधियां

    जांच में अंधेरी MIDC के अलावा पवई के कार्यालयों, गोरेगांव पूर्व के फिल्म स्टूडियो और SEEPZ क्षेत्र का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कथित गिरोह उन कंपनियों पर नजर रखता था जहां नया काम शुरू होने वाला हो।

    अंधेरी SEEPZ क्षेत्र में करीब 450 कंपनियां और कार्यालय तथा MIDC क्षेत्र में लगभग 350 कंपनियां होने की जानकारी जांच में सामने आई है। यह औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए मामले की संभावित व्यापकता को समझा जा सकता है।

    माथाडी व्यवस्था और कथित गैरकानूनी वसूली में अंतर

    माथाडी व्यवस्था महाराष्ट्र माथाडी, हमाल तथा अन्य मैनुअल कामगार (रोजगार और कल्याण का विनियमन) अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होती है। इसका उद्देश्य असुरक्षित मैनुअल कामगारों के रोजगार और कल्याण को विनियमित करना है।

    माथाडी व्यवस्था में मुकादम श्रमिकों की टोली का नेतृत्व करता है। कंपनियां काम की जरूरत के अनुसार संबंधित व्यवस्था के माध्यम से कामगारों की सेवाएं लेती हैं। इस व्यवस्था का नाम इस्तेमाल कर किसी कंपनी पर कथित धमकी या अवैध वसूली करना एक अलग आपराधिक आरोप है।

    सात आरोपी गिरफ्तार, चार फरार

    MIDC पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

    1. पूरण अरुण सिंह उर्फ चड्डा
    2. रोहित मधुकर साळुंखे
    3. इमरान बसुद्दीन हवाळदार
    4. सुरेश गुलाबचंद गौड उर्फ किसान
    5. आकाश मानसिंग सिंह उर्फ नेपाली
    6. राजकुमार सेल्वन मुन्नुस्वामी उर्फ लाला
    7. अर्जुन मुनियन मुथु उर्फ डाकू
      पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना समेत चार आरोपी फरार हैं। वन्नियार को कथित नेटवर्क का प्रमुख बताया गया है।

    बड़ा कन्ना और छोटा कन्ना कि हो राही है जांच

    पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना और उसके भाई कन्नन स्वामी उर्फ छोटा कन्ना का नाम कथित नेटवर्क से जुड़ा है। जांच में करीब दो दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय कथित गिरोहों का भी उल्लेख हुआ है।

    पुलिस ने बड़ा कन्ना के खिलाफ लगभग 20 पुराने मारपीट और वसूली से जुड़े मामलों का उल्लेख किया है। पूरे कथित नेटवर्क के खिलाफ 24 से अधिक पुराने मामलों का पुलिस दावा भी सामने आया है। इन मामलों का वास्तविक स्वरूप और वर्तमान कानूनी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।

    MCOCA के तहत कार्रवाई क्यों?

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ MCOCA की धाराएं 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज गंभीर मामलों और कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए इस कानून का इस्तेमाल किया गया।

    मामले में MCOCA लगाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने का भी उल्लेख सामने आया है। इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल एक मारपीट या कथित वसूली की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस कथित संगठित अपराध के पैटर्न की भी जांच कर रही है।

    कथित वसूली से कारोबारियों और कामगारों पर असर

    इस मामले में पुलिस के दावों की पुष्टि होने पर कंपनियों और निर्माण व्यावसायिकों के लिए काम शुरू करने के दौरान अनधिकृत दबाव और धमकी का जोखिम महत्वपूर्ण जांच का विषय बनता है। इसी तरह, माथाडी व्यवस्था का नाम कथित तौर पर इस्तेमाल होने से वास्तविक माथाडी कामगारों और पंजीकृत यूनियनों की पहचान को लेकर भी सवाल उठते हैं।

    पुलिस ने माथाडी यूनियनों से कामगारों के पूर्ववृत्त और संबंधित पहचान की जांच करने का आग्रह करने की बात कही है। यह कदम कथित गैरकानूनी वसूली को रोकने और वैध कामगार व्यवस्था की पहचान स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

    अब आगे क्या होगा?

    सात गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने चार फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच की चुनौती है। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि वसूली की रकम किस तरह ली जाती थी, कितनी कंपनियों से पैसे मांगे गए और क्या अन्य कारोबारी भी शिकायत दर्ज कराने आगे आएंगे।

    मामले में कार और सोने के आभूषणों से जुड़े वित्तीय जांच के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, कुल बरामदगी, रकम और संपत्तियों की पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

    अंधेरी MIDC में कथित माथाडी वसूली नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार चार आरोपी फरार हैं और मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। गिरफ्तार आरोपियों को दोषी साबित होने तक कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है।

  • बोईसर में ₹70 हजार की चेन स्नैचिंग का खुलासा, नवी मुंबई से आरोपी गिरफ्तार

    बोईसर में ₹70 हजार की चेन स्नैचिंग का खुलासा, नवी मुंबई से आरोपी गिरफ्तार

    बोईसर में महिला से ₹70 हजार की सोने की चेन झपटने के मामले में आरोपी गिरफ्तार। चेन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटर बरामद, जांच जारी।

    महाराष्ट्र/पालघर: बोईसर में महिला के गले से ₹70 हजार की सोने की चेन झपटकर फरार हुए आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 18 जुलाई को हुई इस वारदात के करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने नवी मुंबई से आरोपी राहुल सुरेश जखवाडीया को पकड़ा। पुलिस के अनुसार उसके पास से कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल स्कूटर बरामद की गई है।

    18 जुलाई की सुबह करीब 10:20 बजे डहाणू तालुका के पेठ इलाके में रहने वाली रोहिणी रोहिदास ठाकूर अपनी बहन आशा पंडित पाटील के साथ बोईसर के खैरापाड़ा स्थित इको ईडन सिटी परिसर के रास्ते पर ऑटो का इंतजार कर रही थीं। इसी दौरान लाल और काले रंग की स्कूटर पर आए एक अज्ञात व्यक्ति ने रोहिणी ठाकूर के गले से करीब ₹70 हजार कीमत की सोने की चेन कथित तौर पर जबरदस्ती खींच ली और फरार हो गया।

    घटना के बाद रोहिणी ठाकूर की शिकायत पर बोईसर पुलिस थाने में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वारदात को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आरोपी की पहचान के लिए तकनीकी विश्लेषण तथा गोपनीय जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

    जांच के दौरान पुलिस टीम नवी मुंबई तक पहुंची, जहां से राहुल सुरेश जखवाडीया को हिरासत में लिया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने इस वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने कथित तौर पर चोरी की गई सोने की चेन और वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटर बरामद कर ली।

    इस मामले की जांच पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में अपर पुलिस अधीक्षक विनायक नरळे, उपविभागीय पुलिस अधिकारी दिनेश बैसाने और बोईसर पुलिस निरीक्षक सुनील जाधव के नेतृत्व में सहायक पुलिस निरीक्षक सुनील साळुंखे, पुलिस उपनिरीक्षक ऋषिकेश मुठे और कमलाकर मुंडे शामिल रहे।

    पुलिस टीम में पुलिस हवलदार विजय दुबळा, नीरज शुक्ला, सुनील मलावकर, योगेश गावित, गणेश वस्कोटी, मयूर पाटील, धीरज साळुंखे, देवेंद्र पाटील, मच्छिंद्र पाटील, शुभम सपकाळे, सचिन सोनवणे, रोहित पाटील और किरण वाघ के साथ साइबर शाखा के रामदास दुर्गेश्ट और मनोहर सांगवे ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बोईसर में हाल में सामने आया एक और अलग मामला

    बोईसर में सोने के आभूषण से जुड़ा एक अलग मामला अगस्त में भी सामने आया था। आठवडा बाजार में एक 70 वर्षीय महिला के गले से करीब 28 ग्राम वजन की और लगभग ₹3 लाख कीमत की सोन्याची बोरमाळ चोरी होने के मामले में पुलिस ने रजाबाई मोहन हतागळे और रेणुका संजय हतागळे को गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और गोपनीय जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी।

    हालांकि, जुलाई की चेन स्नैचिंग और अगस्त के इस अलग चोरी के मामले के बीच किसी आपराधिक संबंध की पुष्टि नहीं है। दोनों घटनाओं को अलग-अलग है।

    आगे की जांच जारी

    जुलाई की चेन स्नैचिंग के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और कथित चोरी के माल की बरामदगी के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस की कार्रवाई में तकनीकी विश्लेषण और साइबर शाखा की भूमिका भी सामने आई है। मामले की आगे की जांच पुलिस उपनिरीक्षक कमलाकर मुंडे कर रहे हैं।

  • मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मालवणी में धारदार हथियार से कई लोगों पर हमला, 16 वर्षीय किशोर की मौत; आरोपी गिरफ्तार

    मुंबई के मालवणी में धारदार हथियार से पांच लोगों पर हमला। 16 वर्षीय किशोर की मौत और अन्य लोगों के घायल होने के बाद आरोपी गिरफ्तार।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित मालवणी इलाके में शुक्रवार को धारदार हथियार से लगातार कई लोगों पर हमले की घटना सामने आई। पुलिस के अनुसार, हमले में पांच लोगों को निशाना बनाया गया, जिसमें 16 वर्षीय एक किशोर की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए हैं। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हमले के पीछे की वजह की जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना मालवणी के न्यू कलेक्टर कंपाउंड इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, हमले के दौरान आरोपी ने बिना किसी स्पष्ट उकसावे के लोगों पर चाकू से वार किए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

    पहले पानी मांगा, फिर किशोर पर किया हमला

    घटना से जुड़े शुरुआती घटनाक्रम में सामने आया है कि शुक्रवार तड़के करीब 2 बजे एक युवक न्यू कलेक्टर कंपाउंड में एक घर के दरवाजे पर पहुंचा और पानी मांगा। घर के 14 वर्षीय लड़के ने उसे पानी दिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसकी गर्दन पर धारदार हथियार से वार कर दिया।

    घायल किशोर को तत्काल कांदिवली के भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (शताब्दी) अस्पताल ले जाया गया। उसके गले पर करीब 15 टांके लगाए जाने की जानकारी सामने आई और शुरुआती स्थिति में उसकी हालत स्थिर बताई गई थी।

    इसके बाद आरोपी के दोपहर में दोबारा न्यू कलेक्टर कंपाउंड के प्लॉट नंबर 35 और गेट नंबर 7 के आसपास फिर हंगामा खड़ा कर दिया। वहां उसने एक अन्य युवक पर धारदार हथियार से हमला किया। इस दौरान आसपास मौजूद कुछ अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।

    हमले में 16 वर्षीय किशोर की मौत

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम में पांच लोगों पर चाकू से हमला हुआ। इनमें 16 वर्षीय एक किशोर की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हुए हैं। घायलों में कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है।

    स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा

    हमले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपी का पीछा किया और उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मालवणी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है।

    आरोपी से पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर मुंबई में लोगों को निशाना बनाने के पीछे बदले की बात कही है। हालांकि इस दावे की पुलिस जांच कर रही है और हमले का वास्तविक मकसद अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।

    “बंगाली” होने की पुष्टि नहीं

    घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आरोपी को “बंगाली” बताए जाने की बात सामने आई, लेकिन उपलब्ध पुलिस-सूत्र आधारित जानकारी में आरोपी को हैदराबाद का रहने वाला बताया गया है। उसकी पहचान या क्षेत्रीय पृष्ठभूमि को लेकर ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर उसे “बंगाली” कहा जा सके।

    मालवणी पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस आरोपी की गतिविधियों, हमले के क्रम और उसके कथित मकसद की पड़ताल कर रही है। हमले में घायल लोगों की स्थिति तथा मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी जांच के साथ स्पष्ट होगी।

  • Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।

    पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।

    चाकण MIDC में 3 सितंबर को क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।

    इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।

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    पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर

    पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।

    कौन-कौन सी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ?

    मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।

    किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

    मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।

    इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।

    Drone को लेकर भी कार्रवाई का सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।

    फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।

    चाकण में पहले से Traffic का बड़ा दबाव

    चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।

    सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

    17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।

    यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।

    Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।

    इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।

    इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।

    अब सवाल केवल एक Reel का नहीं

    पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।

  • महिला के इरादे ना भांप सका युवक: एप पर दोस्ती, मेट्रो स्टेशन पर बुलाकर ले गई घर, फिर शख्स को मिला ऐसा दर्द

    महिला के इरादे ना भांप सका युवक: एप पर दोस्ती, मेट्रो स्टेशन पर बुलाकर ले गई घर, फिर शख्स को मिला ऐसा दर्द

    डेटिंग एप के जरिए दोस्ती कर युवक को घर बुलाकर 2.15 लाख रुपये की उगाही का आरोप, दिल्ली के छावला में चार गिरफ्तार, 70,500 रुपये बरामद।

    दिल्ली: छावला इलाके में डेटिंग एप के जरिए दोस्ती कर एक 44 वर्षीय व्यक्ति को कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसाकर 2.15 लाख रुपये की उगाही करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला पहले उसे ढांसा मेट्रो स्टेशन बुलाकर नजफगढ़ स्थित एक घर ले गई, जहां दो महिलाएं और एक पुरुष मौजूद थे। इसके बाद दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे नकदी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ली गई। छावला थाना पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 70,500 रुपये बरामद किए हैं।

    14 सितंबर को मथुरा निवासी चंद्रभान सिंह ने छावला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जानकारी के अनुसार वह फरीदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं। चंद्रभान की पहचान QuackQuack एप के जरिए एक महिला से हुई थी। बातचीत के बाद महिला ने उन्हें ढांसा मेट्रो स्टेशन मिलने के लिए बुलाया। वहां से वह उन्हें नजफगढ़ के एक मकान में ले गई।

    घर पहुंचने के बाद दो महिलाएं और एक पुरुष वहां मौजूद मिले। आरोप है कि इसी दौरान गिरोह के एक सदस्य ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर चंद्रभान को दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद उनसे पैसे देने के लिए दबाव बनाया गया।

    22 हजार रुपये नकद और 1.93 लाख रुपये ऑनलाइन लिए

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित से कुल 2.15 लाख रुपये लिए गए। इसमें 22 हजार रुपये नकद थे, जबकि 1.93 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई ट्रांजैक्शन के जरिए लिए गए। यानी रकम लेने के लिए आरोपियों ने नकदी के साथ डिजिटल भुगतान का भी इस्तेमाल किया।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने लेनदेन से जुड़े बैंक खातों और अन्य उपलब्ध जानकारियों की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपियों की पहचान सामने आई और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    चार आरोपी गिरफ्तार, 70,500 रुपये बरामद

    पुलिस ने इस मामले में गन्नौर, सोनीपत निवासी मनदीप, गाजियाबाद निवासी प्रीति, नजफगढ़ निवासी कमलेश और रितु को गिरफ्तार किया है। मनदीप की उम्र 38 वर्ष, प्रीति की 32 वर्ष, कमलेश की 42 वर्ष और रितु की 40 वर्ष बताई गई है।

    पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 70,500 रुपये बरामद किए गए हैं। बाकी रकम से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों को होल्ड कराया गया है। पुलिस अब इन खातों में हुए लेनदेन की जांच के साथ बाकी रकम की रिकवरी की कोशिश कर रही है।

    मनदीप और कमलेश के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज

    जांच में पुलिस ने मनदीप और कमलेश के पुराने आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया है। पुलिस के अनुसार मनदीप के खिलाफ सोनीपत और दिल्ली में पहले के मामले दर्ज हैं, जबकि कमलेश के खिलाफ द्वारका नॉर्थ थाने में 2023 का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन पुराने मामलों की प्रकृति और मौजूदा मामले से उनका संबंध जांच का विषय है।

    डेटिंग एप से शुरू होकर धमकी तक पहुंचा मामला

    इस मामले में घटनाक्रम एक सामान्य ऑनलाइन संपर्क से शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही समय में यह कथित वित्तीय उगाही में बदल गया। महिला से एप पर दोस्ती होने के बाद पीड़ित को पहले सार्वजनिक स्थान यानी ढांसा मेट्रो स्टेशन बुलाया गया और वहां से निजी मकान तक ले जाया गया। घर में अन्य लोगों की मौजूदगी के बाद कथित तौर पर पुलिस और दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी गई।

    यही तरीका इस मामले को सामान्य ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से अलग बनाता है। इसमें ऑनलाइन पहचान और बातचीत के बाद आमने-सामने की मुलाकात और फिर कथित धमकी के जरिए पैसे लेने का आरोप है।

    दिल्ली में पहले भी सामने आया था डेटिंग एप हनी ट्रैप

    दिल्ली में मई 2026 में भी डेटिंग एप से जुड़े एक अलग हनी ट्रैप और उगाही के मामले का खुलासा हुआ था। उस मामले में fake Tinder/QuackQuack महिला प्रोफाइल के जरिए पुरुषों से संपर्क कर मुलाकात के लिए बुलाने और बाद में पुलिस कार्रवाई या आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे वसूलने का आरोप सामने आया था।

    मौजूदा छावला मामले को उस पुराने मामले से सीधे जोड़ने का कोई आधार अभी सामने नहीं आया है। हालांकि दोनों मामलों में डेटिंग एप के जरिए संपर्क, आमने-सामने मुलाकात और पुलिस या आपराधिक मामले के नाम पर कथित दबाव बनाने जैसी समानताएं जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

    अगर डेटिंग एप की मुलाकात के बाद धमकी मिले तो क्या करें?

    ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी होने का दावा करना अपने आप में उसकी पहचान का प्रमाण नहीं है। यदि कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो घबराकर तुरंत भुगतान करने के बजाय सुरक्षित स्थान पर जाना और उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

    यदि पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर हो चुके हैं, तो वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर दी जा सकती है। National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर, चैट, कॉल डिटेल से संबंधित उपलब्ध जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखना जांच में उपयोगी हो सकता है।

    मामले की जांच जारी

    छावला थाना पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित उगाही में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं, क्या किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरीके से निशाना बनाया गया और 2.15 लाख रुपये में से शेष रकम का कितना हिस्सा बरामद किया जा सकता है। बैंक खातों को होल्ड कराने के बाद वित्तीय लेनदेन की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है।

  • कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में NCR के बाद दस्तावेज और डेवलपर बदलाव पर सवाल

    कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में NCR के बाद दस्तावेज और डेवलपर बदलाव पर सवाल

    कांदिवली के गांधी नगर SRA विवाद में धमकी के आरोप पर NCR दर्ज हुआ। पुराने SRA रिकॉर्ड, डेवलपर बदलाव और Annexure-II पर उठे सवालों की पड़ताल।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम के गांधी नगर क्षेत्र की SRA योजना को लेकर विवाद अब धमकी के आरोप और पुलिस NCR तक पहुंच गया है। समाजसेवक महबूब ए. शाह को कथित तौर पर जान से मरवा देने की धमकी दिए जाने के मामले में 9 सितंबर 2026 को सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज किया गया है। विवाद की पृष्ठभूमि में SRA योजना में कथित दस्तावेजी अनियमितताओं और पात्रता के आधार पर पुनर्वसन फ्लैट मिलने से जुड़े गंभीर सवाल हैं।

    मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गांधी नगर की संबंधित SRA योजना के पुराने और बाद के सार्वजनिक रिकॉर्ड में डेवलपर तथा CTS विवरण में अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध SRA project record में Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) के लिए 2 मई 2016 की LOI दर्ज है और उस समय डेवलपर के रूप में M/s Hari Om Developer का नाम सामने आता है। वहीं 2025 के आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम दर्ज है।

    यही बदलाव अब इस पूरे विवाद का एक अहम दस्तावेजी सवाल बन गया है कि डेवलपर में यह परिवर्तन कब, किस प्रक्रिया के तहत और किस SRA आदेश के आधार पर हुआ।

    गांधी नगर SRA योजना का पुराना रिकॉर्ड क्या बताता है?

    SRA project record के अनुसार Jai Hind Gandhi Nagar CHS (Prop) का proposal number R-S/MHADA&PVT/0002/20060509 दर्ज है। रिकॉर्ड में योजना को Active status के साथ दिखाया गया है और 2 मई 2016 की LOI का reference SRA/ENG/1406/RS/STGL/PL/LOI दिया गया है। इस entry में M/s Hari Om Developer को developer और Shri Vivek Bhole Architect Pvt. Ltd./Neo Modern को architect के रूप में दर्ज किया गया है।

    बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में इसी नाम से जुड़ी गांधी नगर SRA योजना के साथ Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। 13 जून 2025 के Apex Grievance Redressal Committee के cause list record में Jai Hind Gandhi Nagar SRA CHS (P) और Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. बनाम CEO/SRA, Competent Authority-7/SRA तथा Assistant Registrar/SRA के बीच Appeal (L) No. 07 of 2025 दर्ज है।

    इससे यह स्पष्ट है कि गांधी नगर SRA योजना से जुड़ा विवाद केवल स्थानीय स्तर की शिकायत तक सीमित नहीं रहा है। हालांकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर इस न्यायिक कार्यवाही को अपने आप में भ्रष्टाचार का मामला नहीं कहा जा सकता

    डेवलपर और CTS रिकॉर्ड में अंतर क्यों?

    पुराने SRA record में योजना से जुड़े कई CTS numbers दर्ज हैं, जिनमें CTS 486(Pt), 487 से 490, 492 से 494, 495(Pt), 497, 498(Pt), 499, 500 से 509, 512, 513(Pt), 514, 515, 518(Pt), 536, 538, 539, 543(Pt) और 738(Pt) शामिल हैं।

    वहीं 2025 के न्यायिक रिकॉर्ड में CTS 98(Pt), 737(Pt), 738(Pt), 739, 740, 741, 755(Pt), 756(Pt), 757(Pt), 759(Pt), 761, 762 और 763 का उल्लेख मिलता है।

    CTS विवरण में यह अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। SRA योजना में संशोधन, जमीन के पुनर्गठन, CTS बदलाव, अलग हिस्सों के समावेश या revised proposal जैसे कारण हो सकते हैं। लेकिन इन बदलावों का आधिकारिक कारण SRA के संबंधित आदेशों और revised records से स्पष्ट होना जरूरी है।

    यही वह बिंदु है जहां गांधी नगर SRA विवाद में दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

    फर्जी दस्तावेजों के आरोप की जांच कैसे होगी?

    मामले में स्थानीय रहवासियों और समाजसेवक महबूब ए. शाह की ओर से आरोप लगाया गया है कि गरीब परिवारों को SRA योजना में फ्लैट दिलाने के भरोसे के साथ कथित तौर पर allotment letters, आदेश प्रतियां, Collector office से जुड़े दस्तावेज, सक्षम प्राधिकारी के पत्र, society NOC, बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड दिखाए जा रहे हैं।

    इन दस्तावेजों की वास्तविकता का फैसला आरोप के आधार पर नहीं किया जा सकता। प्रत्येक दस्तावेज को उस विभाग के मूल रिकॉर्ड से मिलाना होगा जिसने उसे जारी किया है।

    SRA मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज Annexure-II है। SRA की व्यवस्था में survey और document verification के बाद eligibility तय करने की प्रक्रिया Annexure-II से जुड़ी है। इसलिए किसी व्यक्ति के पास कोई पत्र या अन्य supporting document होना अपने आप में SRA rehabilitation eligibility का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    किसी दावे की वास्तविक स्थिति जानने के लिए survey record, Annexure-II, eligibility determination, Competent Authority record और allotment से जुड़े दस्तावेजों के बीच समानता देखना जरूरी होगा।

    धमकी के आरोप के बाद पुलिस NCR

    एक प्रकाशित खबर को लेकर समाजसेवक महबूब ए. शाह और सोसाइटी अध्यक्ष शमशुद्दीन जमील चौधरी के बीच विवाद सामने आया। आरोप है कि चौधरी की ओर से गाली-गलौज के साथ महबूब ए. शाह को जान से मरवा देने की धमकी दी गई।

    महबूब ए. शाह ने इसकी सूचना कांदिवली पुलिस स्टेशन को दी। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 9 सितंबर 2026 को शमशुद्दीन जमील चौधरी के खिलाफ NCR दर्ज की गई। NCR में BNS 351(3) और 352 से संबंधित प्रावधान दर्ज किए गए हैं।

    SRA योजना में अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

    गांधी नगर मामले में अब केवल यह सवाल नहीं है कि महबूब ए. शाह को धमकी क्यों दी गई। उससे बड़ा सवाल यह है कि जिस SRA योजना को लेकर दस्तावेजों और पात्रता पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी आधिकारिक रिकॉर्ड श्रृंखला क्या कहती है।

    2016 के उपलब्ध SRA record में Hari Om Developer का नाम है, जबकि 2025 के न्यायिक record में Ruparel Indra & Realty Pvt. Ltd. का नाम सामने आता है। इसी तरह पुराने और बाद के रिकॉर्ड में CTS विवरण भी अलग दिखाई देते हैं।

    इसलिए संबंधित दस्तावेजों से यह स्पष्ट होना जरूरी है कि developer में बदलाव हुआ था या scheme structure में कोई अन्य संशोधन हुआ, वह कब हुआ, किस authority ने मंजूर किया और उसके पीछे कौन-सा official order है।

    रहवासियों पर क्या पड़ सकता है असर?

    SRA योजना में eligibility या supporting documents को लेकर विवाद लंबा खिंचने पर वास्तविक पात्र परिवारों के rehabilitation process पर असर पड़ सकता है। दस्तावेजों की जांच में किसी दावे में कमी मिलने पर संबंधित व्यक्ति की पात्रता पर सवाल उठ सकता है, जबकि genuine beneficiaries के लिए भी redevelopment और rehabilitation की प्रक्रिया विवादित होने से लंबी हो सकती है।

    इसी कारण SRA योजना में survey record और Annexure-II से लेकर allotment तथा rehabilitation status तक दस्तावेजों की स्पष्टता महत्वपूर्ण होती है।

    अब आगे क्या?

    गांधी नगर SRA विवाद में अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की जांच है। विशेष रूप से 2016 की LOI, उसके बाद के revised orders, developer appointment या change से जुड़े दस्तावेज, latest Annexure-II, Competent Authority के रिकॉर्ड और Appeal (L) No. 07 of 2025 से संबंधित आदेश इस पूरे मामले की स्थिति को अधिक स्पष्ट कर सकते हैं।

    साथ ही कथित दस्तावेजों को उनके संबंधित सरकारी विभागों के मूल रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी होगा। जब तक यह verification पूरा नहीं होता, फर्जी दस्तावेजों के आरोप को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    गांधी नगर SRA योजना में उठे ये सवाल अब केवल एक NCR तक सीमित नहीं हैं। असली जवाब उन सरकारी रिकॉर्ड में छिपा है जो यह बताएंगे कि योजना में पात्रता, सोसाइटी की भूमिका, डेवलपर की स्थिति और पुनर्वसन से जुड़े दस्तावेज वास्तव में एक-दूसरे से कितने मेल खाते हैं।