Category: Crime News

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  • मालाड में 1.30 करोड़ के गहनों की चोरी का खुलासा, दुकान के कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार

    मालाड में 1.30 करोड़ के गहनों की चोरी का खुलासा, दुकान के कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार

    मुंबई के मालाड में रक्षा ज्वेलर्स से 1.30 करोड़ के सोने-चांदी के गहनों की चोरी में चार आरोपी गिरफ्तार। जानें CCTV, बदली चाबी और बरामदगी का पूरा मामला।

    मुंबई: मालाड पश्चिम स्थित रक्षा ज्वेलर्स से करीब 1.30 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के गहने चोरी करने के मामले में मालाड पुलिस ने दुकान के कर्मचारी समेत चार आरोपियों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। जांच में दुकान की मूल चाबी के जैसी दूसरी चाबी बनाकर चोरी की साजिश रचने की बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए ज्यादातर गहने बरामद कर लिए गए हैं।

    यह मामला मालाड पश्चिम के नटराज मार्केट स्थित रक्षा ज्वेलर्स का है। दुकान के मालिक विकास जैन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। मामले में गिरफ्तार आरोपियों में खुमानसिंग दासाना, उसका भाई सोहनसिंग तुलसीसिंग दासाना और उनके दो साथी सुमनसिंग दासाना और गणेशसिंग कडेचा शामिल हैं। सभी आरोपियों को राजस्थान से पकड़कर मुंबई लाया गया और अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    चाबी बदलकर चोरी करने का आरोप

    दुकान के मालिक विकास जैन 2 अक्टूबर को परिवार के साथ राजस्थान गए थे। उस दौरान दुकान को खोलने और बंद करने की जिम्मेदारी कर्मचारी भुरेलाल राठोड को सौंपी गई थी।

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    3 अक्टूबर को भुरेलाल दुकान खोलने पहुंचा, लेकिन उसके पास मौजूद चाबी से ताला नहीं खुला। इसके बाद दुकान के कर्मचारी खुमानसिंग दासाना से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका फोन बंद था। इसकी जानकारी मिलने पर विकास जैन मुंबई लौटे और दुकान की जांच की।

    दुकान का ताला खोलकर अंदर जाने पर सोने-चांदी के गहने गायब मिले। शुरुआती जांच में चाबियों के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई। पुलिस जांच के अनुसार, दुकान की मूल चाबी के जैसी दूसरी चाबी तैयार कर उसे चाबियों के गुच्छे में बदल दिया गया था। इसी तरीके से चोरी की साजिश रचने का आरोप है।

    CCTV से मिला आरोपियों का सुराग

    चोरी का पता चलने के बाद दुकान के मालिक और कर्मचारी ने आसपास के दुकानों के CCTV फुटेज की जांच की। इसमें खुमानसिंग दासाना अपने तीन साथियों के साथ दुकान में प्रवेश करता और बाद में बैग लेकर बाहर निकलता दिखाई दिया।

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    CCTV में संदिग्धों की गतिविधियों का समय 2 अक्टूबर की रात करीब 10:15 से 10:50 बजे के बीच बताया गया है। CCTV से मिले सुराग और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को आरोपियों के राजस्थान में होने की जानकारी मिली। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से चारों को गिरफ्तार किया गया।

    सोने और चांदी के गहनों की बड़ी मात्रा चोरी

    शिकायत में चोरी हुए गहनों की कीमत करीब 1.30 करोड़ रुपये बताई गई है। चोरी हुए सामान में सोने की मूर्तियों के अलावा चांदी की मूर्तियां, कड़े, चेन और पायल जैसी वस्तुएं शामिल थीं।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, चोरी हुए सामान में लगभग 116.74 किलोग्राम चांदी और 900 ग्राम सोना शामिल था। इन वस्तुओं की एक रिपोर्टेड कीमत क्रमशः करीब 55.98 लाख और 72 लाख रुपये बताई गई है।

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    पुलिस के मुताबिक, चोरी हुए ज्यादातर गहने राजस्थान से बरामद कर लिए गए हैं। लेकिन कितनी मात्रा में सोना-चांदी वापस मिला, कितने रुपये का सामान बरामद हुआ और क्या कोई गहना अब भी गायब है, इसका पूरा विवरण फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

    आरोपी कर्मचारी करीब दो साल से दुकान में काम कर रहा था

    जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, आरोपी खुमानसिंग दासाना की उम्र करीब 22 साल बताई गई है और वह लगभग दो साल से दुकान में काम कर रहा था। दुकान की गतिविधियों और चाबी तक उसकी पहुंच इस मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    हालांकि, चोरी की योजना कब बनाई गई, दूसरे आरोपियों की इसमें क्या भूमिका थी और चोरी के बाद गहनों को कहां-कहां रखा गया, इन सवालों के जवाब जांच के विस्तृत निष्कर्षों से ही स्पष्ट होंगे।

    पुलिस हिरासत में चारों आरोपी

    गिरफ्तारी के बाद चारों आरोपियों को मुंबई लाकर अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया, ताकि चोरी के पूरे घटनाक्रम, आरोपियों की भूमिका और बरामदगी से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सके।

    फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल चोरी हुए गहनों की पूरी बरामदगी और उनकी सटीक कीमत का है। पुलिस जांच के आगे बढ़ने के साथ शेष सामान, कथित साजिश और वारदात में शामिल प्रत्येक आरोपी की भूमिका से संबंधित अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।

  • Mumbai Human Trafficking Case: मालाड का शख्स गिरफ्तार, जेजू द्वीप तक तस्करी की जांच

    Mumbai Human Trafficking Case: मालाड का शख्स गिरफ्तार, जेजू द्वीप तक तस्करी की जांच

    मुंबई में मानव तस्करी के कथित प्रयास में मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा गिरफ्तार। जेजू द्वीप, फर्जी पासपोर्ट, ₹7.5 लाख के कथित भुगतान पर मुंबई पुलिस कर रही है जांच।

    मुंबई: मालाड निवासी विल्सन सुनील डिसिल्वा (47) को एक महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप ले जाने की कथित योजना के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर 2026 को यह कार्रवाई की। इससे एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोक लिया था। मामले में फर्जी पासपोर्ट, विदेश भेजने वाले कथित एजेंटों और ब्रिटेन तथा फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की जांच की जा रही है।

    इस मामले में कथित भुगतान की रकम भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को 50,000 रुपये अग्रिम और महिला के जेजू द्वीप पहुंचने के बाद 7 लाख रुपये मिलने का वादा किया गया था। हालांकि, इस रकम के वास्तविक भुगतान और पूरे नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच जारी है।

    मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट स्कैन करते ही आया अलर्ट

    इमिग्रेशन अधिकारी विजया सोनावणे (51) के अनुसार, विल्सन सुनील डिसिल्वा का पासपोर्ट सिस्टम में स्कैन किए जाने पर मानव तस्करी से संबंधित अलर्ट दिखाई दिया था। अलर्ट में संकेत था कि वह पहले भी महिलाओं को फर्जी पासपोर्ट के जरिए विदेश ले जा चुका है।

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    इसके बाद अधिकारियों ने उससे पूछताछ की और मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची। सहार पुलिस ने 10 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर लिया।

    जांच के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि आर्थिक परेशानियों के कारण उसने पांच लोगों के लिए फर्जी पासपोर्ट हासिल किए थे। आरोप है कि वह इन लोगों को विदेश ले जाने के दौरान कभी उनका पति तो कभी पिता बनकर पेश आता था। इस कथित बयान के आधार पर पुलिस पुराने मामलों और विदेश यात्रा से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है।

    महिला को मलेशिया के रास्ते दक्षिण कोरिया ले जाने की कथित योजना

    इस मामले में प्रस्तावित यात्रा मार्ग मुंबई से मलेशिया होते हुए दक्षिण कोरिया के जेजू द्वीप तक बताया गया है। पुलिस के सामने यह जांचना महत्वपूर्ण है कि महिला को किस उद्देश्य से विदेश ले जाया जा रहा था, यात्रा की व्यवस्था किसने की थी और आरोपी को भुगतान करने का प्रस्ताव किस व्यक्ति या एजेंट ने दिया था।

    जेजू दक्षिण कोरिया का एक द्वीप है। इस मामले में उसका नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कथित योजना में महिला को वहीं पहुंचाने की बात सामने आई है। हालांकि, महिला की यात्रा का उद्देश्य, उसे दिए गए प्रस्ताव और उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने मामलों की भी जांच

    पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने पहले महिलाओं और बच्चों को फर्जी पासपोर्ट के जरिए ब्रिटेन और फ्रांस पहुंचाने में क्या भूमिका निभाई थी। इन पुराने मामलों में कथित रूप से विदेश ले जाए गए लोगों की पहचान, उनकी यात्रा के दस्तावेज और दूसरे संभावित आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    पुलिस उन एजेंटों की तलाश में भी है जिन्होंने कथित तौर पर डिसिल्वा से संपर्क किया था। जांच का एक अन्य पहलू यह पता लगाना है कि पासपोर्ट तैयार कराने, यात्रा की व्यवस्था करने और विदेश पहुंचाने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

    सरकारी या इमिग्रेशन अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, किसी अधिकारी की संलिप्तता साबित होने या इस मामले में किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

    मुंबई एयरपोर्ट पर फर्जी पासपोर्ट के अन्य मामले भी सामने आए

    मुंबई एयरपोर्ट पर पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले इससे पहले भी सामने आए हैं। 5 अक्टूबर 2026 को तीन विदेशी नागरिकों को कथित फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने से जुड़े अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में भी एजेंटों की भूमिका जांच के दायरे में थी।

    इसके अलावा, सहार पुलिस ने मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच पासपोर्ट फर्जीवाड़े के मामलों में 20 एजेंटों को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 10 अगस्त 2026 तक सहार पुलिस के कुल 4,229 अपराध संबंधी FIR में से 1,459 पासपोर्ट फर्जीवाड़े से जुड़े थे।

    मानव तस्करी के मामलों में क्या है सबसे अहम सवाल?

    इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला को विदेश ले जाने की वास्तविक योजना क्या थी और क्या इस कथित प्रयास के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसके साथ ही, पुलिस को ब्रिटेन और फ्रांस से जुड़े पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि करनी होगी और उन लोगों की पहचान करनी होगी जिन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए विदेश ले जाया गया था।

  • मलाड में अमन सोनी की संदिग्ध मौत: परिवार के आरोप, पुलिस जांच और मृतक की पूरी जानकारी

    मलाड में अमन सोनी की संदिग्ध मौत: परिवार के आरोप, पुलिस जांच और मृतक की पूरी जानकारी

    मुंबई के मलाड में अमन सोनी की संदिग्ध मौत के मामले में चार दोस्तों को हिरासत में लिया गया। परिवार ने नशीले इंजेक्शन और शराब पिलाने का आरोप लगाया।

    मुंबई: मलाड पूर्व स्थित अप्पापाड़ा में अमन सोनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में कुरार पुलिस जांच कर रही है। परिवार ने आरोप लगाया है कि अमन को घर से ले जाकर नशीले पदार्थ के इंजेक्शन लगाए गए और शराब पिलाई गई। घटना से जुड़ा एक कथित वीडियो भी सामने आया है। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में अमन के साथ मौजूद चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों से होनी है।

    कौन था अमन सोनी?

    अमन सोनी मुंबई के कुरार इलाके में रहने वाला युवक था। उसकी उम्र 19 वर्ष बताई गई है। परिवार के मुताबिक, अमन पहले नशीले पदार्थों का सेवन करता था, लेकिन दोस्तों के साथ विवाद होने के बाद उसने नशा छोड़ दिया था। परिवार का आरोप है कि घटना वाले दिन उसके परिचित उसे घर से अपने साथ ले गए थे।

    अप्पापाड़ा के उद्यान में क्या हुआ था?

    यह घटना मलाड पूर्व के कुरार इलाके में स्थित शारदाबाई गोविंद पवार सार्वजनिक उद्यान में हुई। परिवार का आरोप है कि अमन को वहां ले जाने के बाद नशीले पदार्थ के इंजेक्शन लगाए गए और शराब भी पिलाई गई। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।

    घटना से जुड़े कथित वीडियो में कुछ युवकों के उद्यान में मौजूद होने और एक युवक को इंजेक्शन लगाए जाने का दावा किया गया है। परिवार ने वीडियो में दिखाई देने वाले युवक की पहचान अमन के रूप में की है।

    चार युवक हिरासत में, पांच लोगों पर मामला दर्ज होने की जानकारी

    शुरुआती पुलिस कार्रवाई में अमन के साथ मौजूद चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। बाद की जानकारी में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने का उल्लेख भी सामने आया है। इनमें चार लोगों को अमन का परिचित बताया गया, जबकि पांचवें व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं हुई थी। पुलिस ने आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।

    पुलिस जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी?

    कुरार पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस के मुताबिक, अमन को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। शुरुआती जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि अमन को कौन-सा पदार्थ दिया गया था, क्या उसे जबरन इंजेक्शन लगाया गया और उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद उसे समय पर चिकित्सकीय सहायता क्यों नहीं मिली। साथ ही, नशीला पदार्थ कहां से आया और घटना में प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसकी भी जांच जरूरी है।

    फिलहाल, अमन की मौत की असली वजह और परिवार के आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही होगी।

  • कोल्हापुर में तरन्नुम की मौत: प्रेमी गिरफ्तार, चैट हिस्ट्री से हत्या का शक गहराया

    कोल्हापुर में तरन्नुम की मौत: प्रेमी गिरफ्तार, चैट हिस्ट्री से हत्या का शक गहराया

    कोल्हापुर में 23 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा तरन्नुम की मौत के मामले में प्रेमी गिरफ्तार। चैट हिस्ट्री, पोस्टमॉर्टम और पुलिस जांच में सामने आए अहम पहलू जानें।

    महाराष्ट्र: कोल्हापुर जिले में 23 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा तरन्नुम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में उसके प्रेमी श्रीपाद वडार को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को आरोपी के बयानों और मोबाइल चैट हिस्ट्री में ऐसे अंतर मिले, जिनके बाद मामले की जांच हत्या के एंगल से शुरू की गई। आरोपी ने कथित तौर पर दोनों के आत्महत्या करने का फैसला लेने की बात कही थी, लेकिन पुलिस को इस दावे पर संदेह हुआ।

    तरन्नुम का शव कोल्हापुर के भुदरगढ़ तालुका में नाईकवाडी जलप्रपात के नीचे गहरी खाई में मिला था। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का आरोप जोड़ा गया है। आरोपी को 15 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    आरोपी के बयानों में क्या अंतर मिला?

    पुलिस के अनुसार, श्रीपाद वडार और तरन्नुम पिछले पांच साल से रिलेशनशिप में थे। तरन्नुम की शादी दूसरे युवक से तय होने के बाद दोनों के रिश्ते में तनाव आने की बात सामने आई है। उसकी शादी 12 नवंबर को होने वाली थी।

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    शुरुआत में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पानी लेने गया था और वापस लौटने पर तरन्नुम वहां नहीं मिली। बाद में उसने दावा किया कि तरन्नुम फोन पर बात करते समय खाई में गिर गई थी।

    इसके बाद आरोपी ने पुलिस को बताया कि दोनों ने साथ में आत्महत्या करने का फैसला किया था, लेकिन आखिरी समय में वह खुद ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।

    हालांकि, पुलिस को उसके अलग-अलग बयानों पर संदेह हुआ। मोबाइल चैट हिस्ट्री की जांच में भी कथित आत्महत्या समझौते के दावे को समर्थन नहीं मिलने की बात सामने आई।

    सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर विवेक पाटील के मुताबिक, चैट में ऐसे संकेत मिले कि तरन्नुम की शादी कहीं और तय होने से श्रीपाद नाराज था। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में हत्या की धारा जोड़ी। हालांकि, आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

    नाईकवाडी जलप्रपात के पास मिला था शव

    यह घटना भुदरगढ़ तालुका के पाटगांव के पास नाईकवाडी जलप्रपात क्षेत्र की है। 9 अक्टूबर को हुई कथित घटना के बाद तरन्नुम का शव गहरी खाई में मिला।

    दुर्गम इलाके में शव तक पहुंचना आसान नहीं था। पुलिस ने आंबोली की सह्याद्री रेस्क्यू टीम की मदद ली। शव को खाई से निकालने के लिए करीब चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद शव को कोल्हापुर के CPR अस्पताल भेजा गया।

    पोस्टमॉर्टम और मोबाइल की जांच अहम

    मामले में पोस्टमॉर्टम को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। परिजनों की मांग पर इन-कैमरा पोस्टमॉर्टम और वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया और उसकी अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्ष अलग-अलग बातें हैं। अंतिम मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही मौत से संबंधित तथ्य सामने आ सकता है।

    पुलिस ने आरोपी और तरन्नुम के मोबाइल फोन जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए रखे हैं। चैट हिस्ट्री की जांच पहले ही पुलिस के संदेह का अहम आधार बनी है। अब डिजिटल साक्ष्यों, पूछताछ और अन्य उपलब्ध सबूतों को मिलाकर घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

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    स्थानीय लोगों की मोर्चे की तस्वीर

    आरोपी पुलिस हिरासत में, स्थानीय लोगों ने की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग

    आरोपी श्रीपाद वडार को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 15 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। कोर्ट के अनुसर पुलिस हिरासत का उद्देश्य मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करना है।

    इस घटना के बाद गारगोटी में स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने तक मार्च निकालकर मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई की मांग की।

    भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) हत्या के अपराध में सजा से संबंधित है। दोष सिद्ध होने पर कानून में मृत्युदंड या आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। फिलहाल मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

    पुलिस के सामने अब आरोपी के बयानों, मोबाइल चैट, पोस्टमॉर्टम के निष्कर्षों और घटनास्थल से जुड़े सबूतों के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट करने की चुनौती है। मामले में आगे की कार्रवाई इन जांच निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

  • जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की रोक पर CJP ने कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा”

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की रोक पर CJP ने कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा”

    दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताया। जानें नए प्रदर्शन स्थल और पूरा मामला।

    नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताते हुए कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।”

    यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित मतदाता सूची अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन हुए। CJP ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी थी।

    दिल्ली पुलिस ने कौन-से तीन प्रदर्शन स्थल तय किए?

    दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं:

    • रामलीला मैदान
    • बुराड़ी मैदान
    • CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली

    यह निर्णय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है।

    अभिजीत दीपके ने क्या कहा?

    जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की निर्धारित जगह से हटा दिया गया है और अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उनके बयान में सरकार और व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक आलोचना भी शामिल थी।

    CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध दर्ज कराने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जंतर-मंतर को सूची से हटाने से पहले संबंधित पक्षों से सलाह ली गई थी या नहीं।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कानूनी स्थिति

    जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर संविधान के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

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    दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से जुड़े मामले पर 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई थी। प्रदर्शन के दौरान कथित उत्पीड़न से संबंधित एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में भी दिल्ली में प्रदर्शन के प्रबंधन और उससे जुड़े प्रतिबंधों के मुद्दे पर कार्यवाही हुई।

    इस मामले में निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और हर परिस्थिति में सभी प्रकार के शांतिपूर्ण विरोध पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बीच अंतर करना जरूरी है। वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित आदेश, अनुमति प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों पर निर्भर करेगी।

    जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद के बीच अब तीन वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था लागू की गई है। अभिजीत दीपके का “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा” वाला बयान इसी फैसले के विरोध में आया है।

  • मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

    मुंबई CDR रैकेट: दो पुलिस कांस्टेबल समेत 5 गिरफ्तार, 550 से ज्यादा नंबरों की लोकेशन डेटा सप्लाई का आरोप

    मुंबई में कथित CDR रैकेट में पांच लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल शामिल हैं। जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी सामने आई।

    मुंबई: कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR) और मोबाइल लोकेशन डेटा की कथित अवैध सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें झारखंड और बिहार पुलिस के दो कांस्टेबल भी शामिल हैं। शुरुआती जांच में 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी, 520 से अधिक SDR और 420 से ज्यादा IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी सामने आई है।

    मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार तक फैले कथित नेटवर्क के नौ संदिग्ध सदस्यों की पहचान होने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में सात मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि संवेदनशील मोबाइल डेटा आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था।

    खोए हुए मोबाइल फोन खोजने के नाम पर सामने आया मामला

    जांच के अनुसार, यह मामला सोशल मीडिया पर खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन वापस दिलाने का दावा करने वाले एक व्यक्ति से जुड़ा है। आरोपी ने इंस्टाग्राम पर इस तरह की सेवा का प्रचार किया था। आरोप है कि उसने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए अपना परिचय “इंस्पेक्टर संजय” के रूप में दिया और मोबाइल फोन तलाशने के लिए संपर्क करने वाले लोगों से पैसे लिए।

    क्राइम ब्रांच को सूचना मिलने के बाद जोगेश्वरी पश्चिम में कार्रवाई की गई। आरोपी के पास मौजूद दो मोबाइल फोन की जांच के दौरान कथित तौर पर CDR, SDR और लोकेशन डेटा हासिल करने से जुड़े संपर्कों की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और दूसरे राज्यों में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की गई।

    जांच में पांच गिरफ्तार, दो पुलिस कांस्टेबल भी शामिल

    इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों में झारखंड और बिहार पुलिस के दो सक्रिय कांस्टेबल शामिल हैं। हालांकि, दोनों की कथित भूमिका क्या थी, उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल किया था या नहीं और डेटा हासिल करने में उनकी वास्तविक भागीदारी कितनी थी, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।

    ओशिवारा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले की प्राथमिकी संख्या 935/2026 और क्राइम ब्रांच केस संख्या 68/2026 बताई गई है। मुख्य संदिग्ध को 22 जून 2026 को जोगेश्वरी पश्चिम में पकड़े जाने का विवरण भी सामने आया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

    550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी मिली

    प्रारंभिक जांच में सामने आए डेटा का विवरण इस प्रकार है:

    • लगभग 50 कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)
    • 520 से अधिक सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड (SDR)
    • 550 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की लोकेशन संबंधी जानकारी
    • 420 से अधिक IMEI नंबरों से जुड़ी जानकारी
    • सात मोबाइल फोन जब्त

    CDR में आमतौर पर कॉल का समय, अवधि और संबंधित नंबरों जैसी जानकारी हो सकती है। SDR में मोबाइल कनेक्शन के ग्राहक से जुड़ी जानकारी हो सकती है, जबकि IMEI मोबाइल उपकरण की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाला नंबर है। लोकेशन डेटा का विवरण इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी किस तकनीक और रिकॉर्ड से हासिल की गई थी।

    इन आंकड़ों को सीधे प्रभावित व्यक्तियों की संख्या नहीं माना जा सकता। एक ही मोबाइल नंबर से कई रिकॉर्ड जुड़े हो सकते हैं और एक व्यक्ति के पास एक से ज्यादा मोबाइल नंबर भी हो सकते हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस कथित नेटवर्क से कुल कितने लोगों की निजी जानकारी प्रभावित हुई।

    मोबाइल डेटा का गलत इस्तेमाल कैसे नुकसान पहुंचा सकता है?

    कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी संवेदनशील होती है। यदि ऐसी जानकारी अनधिकृत लोगों तक पहुंच जाए, तो उससे किसी व्यक्ति के संपर्कों, कॉल करने के पैटर्न और मोबाइल उपकरण की गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकता है। परिस्थितियों के अनुसार इसका इस्तेमाल ठगी, निजी जानकारी जुटाने या किसी की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किए जाने का जोखिम हो सकता है।

    हालांकि, इस मामले में बरामद या सप्लाई किए गए डेटा का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में हुआ है या किसी व्यक्ति की निजता को वास्तविक नुकसान पहुंचा है, इसकी पुष्टि जानकारी इस वक्त नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि डेटा के बदले कितनी रकम दी जाती थी, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और क्या किसी दूरसंचार कंपनी या सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग हुआ था।

    कानूनी पहलू पर भी जरूरी जांच

    कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन संबंधी जानकारी तक पहुंच अधिकृत प्रक्रिया और लागू कानूनों के अधीन होती है। किसी व्यक्ति के पास मोबाइल नंबर होने से उसे उस नंबर के मालिक के कॉल रिकॉर्ड या लोकेशन डेटा तक पहुंच का अधिकार नहीं मिल जाता।

    खोया मोबाइल खोजने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें

    मोबाइल फोन खो जाने पर अनजान सोशल मीडिया खातों या खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों को बिना सत्यापन पैसे देना जोखिमपूर्ण हो सकता है। फोन खोने या चोरी होने की स्थिति में नागरिक संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध CEIR सुविधा के जरिए मोबाइल ब्लॉक करने की प्रक्रिया देख सकते हैं। धोखाधड़ी होने पर साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर की जा सकती है। तत्काल वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य कथित डेटा सप्लाई के स्रोत, नेटवर्क में शामिल बाकी संदिग्धों की भूमिका और संवेदनशील मोबाइल जानकारी के इस्तेमाल का पता लगाना है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि डेटा किस माध्यम से हासिल किया गया और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की भूमिका सामने आती है।

  • भाईंदर के प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार पर छापा, 17 महिलाओं को बचाने का दावा

    भाईंदर के प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार पर छापा, 17 महिलाओं को बचाने का दावा

    भाईंदर पूर्व के प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार में छापेमारी के दौरान 17 महिलाओं को बचाने, 10 कर्मचारियों की गिरफ्तारी और नकदी व शराब जब्ती के दावों की पूरी जानकारी।

    मीरा-भाईंदर: मुंबई से सटे भाईंदर पूर्व के नवघर रोड स्थित प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार पर 9 अक्टूबर को मीरा-भाईंदर, वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस की क्राइम ब्रांच की छापेमारी की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई में कथित तौर पर एक छिपे कमरे से 10 महिलाओं को बाहर निकाला गया, जबकि परिसर से कुल 17 महिलाओं को बचाए जाने का दावा है। कार्रवाई में कर्मचारियों की गिरफ्तारी, ग्राहकों से पूछताछ और नकदी व शराब की जब्ती से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। हालांकि, इन सभी आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

    प्यासा बार में छिपे कमरे से 10 महिलाओं को निकालने का दावा

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने नवघर रोड स्थित प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर कमरे की छिपी हुई संरचना सामने आई, जहां से 10 महिलाओं को बाहर निकाला गया।

    इस मामले में कुल 17 महिलाओं को बचाए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, बाकी सात महिलाएं परिसर के किस हिस्से में मिलीं और सभी महिलाओं को किस परिस्थिति में बाहर निकाला गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कमरे का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था, वहां आने-जाने की व्यवस्था कैसी थी और क्या किसी महिला को वहां रोककर रखा गया था। इन सवालों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेज जरूरी हैं।

    10 कर्मचारियों की गिरफ्तारी, 15 ग्राहकों की स्थिति स्पष्ट नहीं

    छापेमारी से जुड़ी जानकारी में बार के मैनेजर, कैशियर, वेटर और स्टीवर्ड समेत कुल 10 कर्मचारियों को गिरफ्तार किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, गिरफ्तार लोगों के नाम, उनकी व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ दर्ज आरोपों का पूरा विवरण अभी स्पष्ट नहीं है।

    इसके अलावा, बार में मौजूद 15 ग्राहकों के संबंध में भी जानकारी सामने आई है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इन सभी ग्राहकों को हिरासत में लिया गया था, उनसे केवल पूछताछ की गई या किसी अन्य कानूनी कार्रवाई के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

    इसलिए ग्राहकों की संख्या को गिरफ्तार आरोपियों की संख्या नहीं कहा जा सकता।पुलिस का आधिकारिक बयान अबतक सामने नहीं आया है।

    ₹55 हजार नकद और ₹50 हजार की शराब जब्त होने का दावा

    इस कार्रवाई में ₹55,000 नकद और लगभग ₹50,000 मूल्य की अंग्रेजी शराब जब्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    हालांकि, नकदी की जब्ती और शराब के मूल्यांकन की पुष्टि के लिए आधिकारिक जब्ती सूची या पुलिस का विस्तृत बयान उपलब्ध होना जरूरी है। शराब कितनी मात्रा में मिली, उसे किस आधार पर जब्त किया गया और क्या इस संबंध में अलग से कोई मामला दर्ज हुआ, इसकी जानकारी भी अभी स्पष्ट नहीं है।

    बार के मालिक और लाइसेंसधारक की भूमिका पर भी नजर

    इस मामले में केवल कर्मचारियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि बार के संचालन और प्रबंधन से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। यह पता लगाना जरूरी होगा कि बार का लाइसेंस किसके नाम पर है, संचालन की जिम्मेदारी किसके पास थी और कथित छिपे कमरे के निर्माण या इस्तेमाल के संबंध में कोई नियम उल्लंघन हुआ था या नहीं।

    फिलहाल बार के मालिक या लाइसेंसधारक के खिलाफ कार्रवाई, लाइसेंस रद्द किए जाने, परिसर सील होने या नगर पालिका की ओर से किसी कदम की पुष्टि नहीं है।

    भाईंदर क्षेत्र में इससे पहले भी कुछ ऑर्केस्ट्रा बारों में कथित गुप्त कमरों को लेकर पुलिस कार्रवाई हो चुकी हैं।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब मिलने जरूरी हैं?

    इस मामले में संबंधित पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर नंबर, लागू कानूनी धाराएं, गिरफ्तार लोगों की अदालत में पेशी और उनकी वर्तमान कानूनी स्थिति की जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, 17 महिलाओं को बचाए जाने के दावे, 15 ग्राहकों की स्थिति और जब्त नकदी व शराब के आंकड़ों की पुष्टि भी जरूरी है।

    महिलाओं को बचाए जाने की जानकारी अपने आप में मानव तस्करी, जबरन काम कराने या बंधक बनाए जाने का प्रमाण नहीं है। इन पहलुओं पर निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

    फिलहाल प्यासा ऑर्केस्ट्रा बार की छापेमारी से जुड़े आंकड़ों और कार्रवाई के विवरण की आधिकारिक पुष्टि स्पष्ट नहीं है। एमबीवीवी पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आने पर गिरफ्तारी, जब्ती और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • चोरी के मोबाइल अपराधियों के लिए बेकार होंगे? UK पुलिस का बड़ा एक्शन

    चोरी के मोबाइल अपराधियों के लिए बेकार होंगे? UK पुलिस का बड़ा एक्शन

    UK में Operation Reckoning के तहत 700 से ज्यादा मोबाइल दुकानों पर कार्रवाई हुई। पुलिस ने चोरी के फोन रोकने के लिए Apple, Google और Samsung से मदद मांगी है।

    United Kingdom: UK में चोरी के मोबाइल फोन के खिलाफ अब सिर्फ चोरों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि चोरी के फोन की पूरी resale chain को खत्म करने पर फोकस किया जा रहा है। Operation Reckoning के तहत सितंबर में England और Wales की 17 पुलिस फोर्सेज ने second-hand mobile phone market को target किया। इस दौरान 700 से ज्यादा दुकानों पर visits की गईं, जबकि Metropolitan Police की कार्रवाई में 705 arrests और 281 suspected stolen phones बरामद किए गए।

    पुलिस अब mobile phone manufacturers से ऐसी technology अपनाने की मांग कर रही है, जिससे चोरी के बाद किसी फोन को reset, activate या दोबारा बेच पाना बेहद मुश्किल हो जाए। इसका सीधा मकसद चोरी के मोबाइल की resale value खत्म करना है, ताकि अपराधियों के लिए फोन चोरी करने से कुछ भी फायदा हासिल न हो।

    चोरी के फोन का पूरा नेटवर्क निशाने पर

    मोबाइल चोरी केवल सड़क पर फोन छीनने तक सीमित नहीं है। चोरी किए गए फोन robbery, burglary, pickpocketing और delivery networks से चोरी के बाद handlers, second-hand market और international export networks तक पहुंच रहा है।

    इस पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई के दौरान second-hand retailers को ID checks, IMEI verification और खरीदारी के proper records रखने की सलाह दी गई। संदिग्ध फोन या संदिग्ध activity की जानकारी पुलिस को देने के लिए भी retailers को कहा गया।

    Metropolitan Police की कार्रवाई में 51 warrants execute किए गए और 281 suspected stolen mobile phones recover हुए। कार्रवाई के दौरान cash, drugs, illegal e-bikes, counterfeit सामान और tobacco भी बरामद किया गया।

    40 हजार चोरी के फोन China तक पहुंचाने वाला नेटवर्क

    चोरी के मोबाइल के international कारोबार का बड़ा उदाहरण London से सामने आए एक organised network का है। जांच में करीब 40,000 stolen phones को UK से China भेजे जाने की कड़ी सामने आई थी।

    इस नेटवर्क से जुड़े तीन लोगों को कुल 25 साल की जेल की सजा सुनाई गई। जांच के दौरान 5,000 से ज्यादा फोन बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब £5.5 million बताई गई। इससे साफ होता है कि चोरी का मोबाइल सिर्फ local resale का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे international organised crime network भी काम कर रहा है।

    London में मोबाइल चोरी में करीब 19% की कमी

    सख्त कार्रवाई के बीच London में phone theft के आंकड़ों में भी गिरावट दर्ज हुई है। जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान 39,793 phone theft और robbery cases दर्ज हुए, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह संख्या 49,136 थी। यानी करीब 9,343 कम मामले दर्ज हुए और गिरावट लगभग 19 प्रतिशत रही।

    अगस्त 2026 तक 12 महीने की अवधि में भी London में street phone theft पिछले साल की तुलना में लगभग 21 प्रतिशत कम रही।

    हालांकि, मोबाइल चोरी की समस्या खत्म नहीं हुई है। पुलिस का फोकस अब चोरी के बाद फोन की पहचान, blocking और resale को मुश्किल बनाने पर है।

    Apple, Google और Samsung से बदलाव की मांग

    मोबाइल चोरी रोकने की strategy में manufacturers की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। पुलिस Apple, Google और Samsung से ऐसी security व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रही है, जिससे चोरी हुआ फोन दोबारा इस्तेमाल करना आसान न रहे।

    Apple के साथ stolen-device identifiers को लेकर intelligence sharing शुरू की गई है। इससे चोरी के फोन दोबारा activate या network पर दिखाई देने पर उनकी पहचान करने में मदद मिल सकती है। Samsung और Google की ओर से भी security changes पर काम किया जा रहा है।

    पुलिस visible IMEI जैसी व्यवस्था पर भी जोर दे रही है, ताकि चोरी के फोन की पहचान और verification को आसान बनाया जा सके।

    IMEI नंबर क्यों जरूरी है?

    IMEI मोबाइल की unique 15-digit पहचान संख्या होती है। फोन चोरी होने की स्थिति में यह नंबर device को identify और block कराने में मदद कर सकता है।

    अपना IMEI नंबर *#06# dial करके, phone settings में या original box पर देखा जा सकता है। इसे सुरक्षित जगह पर लिखकर रखना जरूरी है, क्योंकि फोन चोरी होने के बाद यही जानकारी पुलिस और network provider के लिए उपयोगी हो सकती है।

    Second-hand phone खरीदने वालों के लिए भी IMEI verification महत्वपूर्ण है। बहुत सस्ता या संदिग्ध source से मिला फोन खरीदने से पहले उसकी device identity और ownership की जांच करना जरूरी है।

    फोन secure होने पर criminals का नया तरीका

    चोरी के मोबाइल को reset और reuse करना मुश्किल होने के साथ अपराधियों का तरीका भी बदल रहा है। अब चोरी के बाद victim को social engineering के जरिए target करने का खतरा बढ़ रहा है।

    अपराधी दूसरे device या किसी trusted organisation का नाम इस्तेमाल करके victim से password, account details या दूसरी sensitive information हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ मामलों में धमकी या दबाव का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    इसलिए फोन चोरी होने के बाद खतरा सिर्फ handset की कीमत तक सीमित नहीं रहता। Banking apps, email, social media accounts, personal documents और दूसरे financial accounts भी risk में आ सकते हैं।

    फोन चोरी हो जाए तो तुरंत क्या करें?

    फोन चोरी होने पर सबसे पहले mobile network provider को जानकारी देकर SIM और device को block कराने की कोशिश करनी चाहिए। फोन में remote lock या Lost Mode उपलब्ध है तो उसे तुरंत activate करना चाहिए।

    Bank और financial service providers को भी सूचना देना जरूरी है। इसके बाद महत्वपूर्ण passwords बदलने चाहिए और अपने accounts में किसी suspicious activity की जांच करनी चाहिए। पुलिस को complaint देते समय IMEI number उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।

    Emergency की स्थिति में 999 और non-emergency crime या suspicious activity के लिए 101 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अब अगला फोकस क्या होगा?

    मोबाइल चोरी के खिलाफ यह कार्रवाई अब street-level arrests से आगे बढ़कर पूरे stolen-device market को target कर रही है। Police, second-hand retailers, technology companies और अन्य partners के बीच information sharing को मजबूत करना इसका अहम हिस्सा है।

    2026 के Crime and Policing Act के तहत electronically tracked stolen goods से जुड़े कुछ मामलों में police powers को भी मजबूत किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में कार्रवाई को तेज करना है, जहां चोरी के सामान को जल्दी हटाए जाने या छिपाए जाने का खतरा हो।

    आगे की चुनौती यह होगी कि चोरी किए गए फोन को सिर्फ UK में नहीं, बल्कि international resale market में भी बेकार बनाया जाए। अगर stolen device की reset, reactivation और resale value लगातार घटती है, तो पुलिस की रणनीति का सबसे बड़ा लक्ष्य पूरा हो सकता है—मोबाइल चोरी को अपराधियों के लिए कम फायदे वाला बनाना।

  • डोसे में चूहे के वीडियो से ₹25 लाख की मांग, दो महिलाएं पकड़ी गईं

    डोसे में चूहे के वीडियो से ₹25 लाख की मांग, दो महिलाएं पकड़ी गईं

    बोरीवली के राधाकृष्ण होटल में डोसे में चूहा मिलने का वीडियो वायरल होने के बाद होटल मालिक से ₹25 लाख की कथित जबरन वसूली की मांग हुई। ₹6 लाख लेते दो महिलाएं पुलिस के जाल में फंसीं।

    मुंबई: बोरीवली के राधाकृष्ण होटल में डोसे के अंदर चूहा मिलने का वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब कथित जबरन वसूली के मामले तक पहुंच गया है। होटल मालिक से कथित तौर पर ₹25 लाख की मांग की गई थी। बातचीत के बाद रकम ₹7 लाख तय हुई। इसमें से ₹1 लाख दिए जाने के बाद बाकी ₹6 लाख लेते समय दो महिलाओं को पुलिस ने पकड़ लिया। मामले में बोरीवली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।

    पुलिस के अनुसार, पकड़ी गई महिलाओं की पहचान मानसी अमित आचार्य, उम्र 36 वर्ष और किंजल सुभाष भाटिया, उम्र 29 वर्ष के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने होटल मालिक से कार्रवाई और मामला दर्ज कराने से बचने के लिए पैसों की मांग की।

    24 सितंबर की रात शुरू हुआ था विवाद

    जानकारी के अनुसार, 24 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे बोरीवली पश्चिम स्थित राधाकृष्ण होटल-बैंक्वेट-फास्ट फूड में एक ग्राहक को दिए गए मसाला डोसे में चूहा मिलने का आरोप सामने आया था। इस घटना का वीडियो बनाया गया और 26 सितंबर के आसपास वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने होटल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान केवल डोसे में चूहा मिलने की शिकायत ही नहीं, बल्कि होटल में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कमियां भी सामने आने की जानकारी है।

    एफडीए की कार्रवाई में होटल का खाद्य लाइसेंस निलंबित किया गया। निरीक्षण के दौरान मक्खियां, फर्श पर रखी खाद्य सामग्री, खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण और नाली एवं जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी गंदगी जैसी कमियां सामने आई थीं। महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंढे और खाद्य विभाग के संयुक्त आयुक्त संतोष कृष्ण कांबळे के स्तर पर विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है।

    ₹25 लाख से शुरू हुई कथित मांग

    पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होटल मालिक से संपर्क कर कथित तौर पर ₹25 लाख की मांग की गई। बातचीत के बाद रकम घटाकर ₹7 लाख करने पर सहमति बनी।

    इस रकम में से ₹1 लाख 30 सितंबर को दिए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। इसके बाद बाकी ₹6 लाख 5 अक्टूबर को देने की बात तय हुई। पुलिस ने इसी दौरान जाल बिछाया।

    5 अक्टूबर को करीब शाम 5:45 बजे जब दोनों महिलाएं बाकी ₹6 लाख लेने पहुंचीं, तब पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। पुलिस ने इस मामले में बोरीवली पुलिस स्टेशन में CR No. 1265/2026 दर्ज किया है।

    गिरफ्तारी की स्थिति में क्या है?

    इस मामले में दोनों महिलाओं को ₹6 लाख लेते समय पुलिस ने पकड़ा है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में उनकी आगे की कानूनी स्थिति को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं। इसलिए फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दोनों पुलिस की कार्रवाई में पकड़ी गई हैं और मामले की जांच जारी है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित पैसों की मांग में इनके अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। उपलब्ध जानकारी में अमर नाम के एक व्यक्ति का भी उल्लेख सामने आया है, जिसकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

    वीडियो बनाने और वायरल करने को लेकर भी जांच

    डोसे में चूहा मिलने की मूल घटना और उसका वीडियो कैसे बना, इसकी भी जांच जारी है। उपलब्ध जानकारी में अमित त्रिवेदी का नाम उस घटनाक्रम से जुड़ा बताया गया है। हालांकि मूल घटना में चूहा डोसे तक कैसे पहुंचा, इसे लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    यानी एक तरफ होटल में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़ी एफडीए की कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी तरफ इसी घटना को लेकर होटल मालिक से कथित रूप से पैसे मांगने का मामला सामने आया है। पुलिस अब दोनों घटनाक्रमों के बीच की पूरी कड़ी की जांच कर रही है।

    पुलिस टीम ने ऐसे पकड़ा

    इस कार्रवाई में उत्तर क्षेत्र-2 के पुलिस उपायुक्त संदीप घुगे, सहायक पुलिस आयुक्त संतोष धनवटे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पुष्पलता मंडले, पुलिस निरीक्षक अपराध दिग्विजय पाटील के मार्गदर्शन में अपराध जांच टीम ने कार्रवाई की।

    टीम में राजू कोरडे, पुलिस कांस्टेबल 092951 पेडणेकर, पुलिस कांस्टेबल 111809 जाधव और महिला पुलिस कांस्टेबल 112473 नवले शामिल थीं।

    मामला अब किस दिशा में जाएगा?

    बोरीवली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। धारा 308(2) जबरन वसूली से संबंधित है, जबकि धारा 3(5) समान उद्देश्य से किए गए कृत्य में साझा मंशा से जुड़ी है।

    अब पुलिस कथित रूप से मांगी गई रकम, पहले दिए गए ₹1 लाख, 5 अक्टूबर को लिए जाने वाले ₹6 लाख, फोन और अन्य संपर्कों तथा इस पूरे घटनाक्रम में शामिल संभावित अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। वहीं डोसे में चूहा मिलने की मूल घटना और होटल की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी एफडीए कार्रवाई भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा बनी हुई है।

  • दुबई में ₹72 लाख का Gold Fraud, नकली Jewellery से असली सोना बदला; 2 गिरफ्तार

    दुबई में ₹72 लाख का Gold Fraud, नकली Jewellery से असली सोना बदला; 2 गिरफ्तार

    दुबई की Kanz Jewels में ₹72 लाख के Gold Fraud का आरोप, नकली Jewellery से असली सोना बदला गया। शिकायत के बाद ₹50 लाख मांगने का भी आरोप।

    मुंबई: दुबई की Jewellery firm Kanz Jewels में करीब ₹72 लाख के सोने के आभूषणों की कथित चोरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी के दो कर्मचारियों ने असली Jewellery निकालकर उसके वजन के बराबर नकली आभूषण Stock में रख दिए। मामला सामने आने और शिकायत के बाद दोनों ने कथित तौर पर कंपनी के executive manager Devendra Dhanak को फोन कर ₹50 लाख देने की धमकी दी। मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले में Subroto/Subrato Burman और Ajay Pathar को गिरफ्तार किया है।

    दोनों आरोपी 2017 से कंपनी से जुड़े थे। Burman Sales In-charge के तौर पर काम करता था, जबकि Ajay Pathar Cashier था। पुलिस की जांच में अब कथित Gold Theft के साथ-साथ नकली Jewellery के source, चोरी के सोने की बिक्री और भारत भेजी गई रकम की पूरी trail खंगाली जा रही है।

    नकली Jewellery से कैसे हुआ खेल?

    जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों ने कथित तौर पर असली सोने के आभूषणों को पुराने सोने के तौर पर बेचने का तरीका अपनाया। इसके बाद असली Jewellery के वजन के बराबर नकली आभूषण तैयार कर उन्हें वापस Stock में रख दिया जाता था।

    इन Jewellery को कथित तौर पर damaged या altered Stock के तौर पर दिखाया जाता था। इस तरह असली सोना धीरे-धीरे Stock से बाहर निकलता रहा और उसकी जगह नकली Jewellery आती रही।

    मामले का अहम सवाल यही है कि नकली आभूषण तैयार कहां किए गए और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों के अलावा किसी और की भूमिका थी या नहीं। फिलहाल इस बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

    675 ग्राम की जांच में खुला नकली सोने का राज

    जून 2026 में कंपनी को Stock में रखे कुछ damaged या altered gold पर शक हुआ। इसके बाद करीब 675 ग्राम सोने की जांच की गई। इस जांच में 386 ग्राम नकली पाया गया।

    इसके बाद Stock verification के दौरान 84.33 ग्राम अतिरिक्त नकली Jewellery मिलने की बात सामने आई। यानी जांच के अलग-अलग चरणों में 470.33 ग्राम नकली Jewellery सामने आई।

    हालांकि, इस आंकड़े को ₹72 लाख की कथित चोरी का कुल वजन नहीं माना जा सकता। ₹72 लाख की रकम कथित चोरी किए गए आभूषणों की कीमत है, जबकि 386 ग्राम और 84.33 ग्राम की मात्रा जांच में मिले नकली Stock से संबंधित है।

    शिकायत के बाद ₹50 लाख की कथित धमकी

    कंपनी को कथित चोरी का पता चलने के बाद मामला सिर्फ Gold Theft तक सीमित नहीं रहा। शिकायतकर्ता Devendra Dhanak, जो Kanz Jewels में General Manager के तौर पर काम करते हैं, को कथित तौर पर दुबई से फोन किया गया।

    आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने उनसे ₹50 लाख की मांग की और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। कथित तौर पर यह भी कहा गया कि दुकान से एक किलो और सोना गायब किया जा सकता है।

    यही वह point है जिसने मामले को चोरी के साथ कथित extortion और criminal intimidation के angle से भी गंभीर बना दिया।

    चोरी के सोने की रकम भारत भेजने का आरोप

    जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर चोरी किए गए असली सोने से मिलने वाली रकम भारत भेजी जाती थी। रिपोर्ट में इसके लिए Ajay Pathar की भूमिका का उल्लेख है।

    अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि रकम भारत में किन accounts या लोगों तक पहुंची। उपलब्ध जानकारी में अभी तक पूरी banking trail, रकम पाने वाले व्यक्तियों या चोरी के सोने की recovery का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।

    यही कारण है कि ₹72 लाख के कथित चोरी किए गए सोने या उसकी बिक्री से मिली रकम की बरामदगी इस मामले में सबसे अहम सवालों में बनी हुई है।

    आरोपी Subroto Burman और Ajay Pathar कौन हैं?

    Subroto/Subrato Burman और Ajay Pathar दोनों 2017 से Kanz Jewels से जुड़े थे। Burman Sales In-charge था, जबकि Pathar Cashier के पद पर काम करता था।

    पुलिस के मुताबिक, Burman भारत आने के बाद पश्चिम बंगाल के एक नक्सल प्रभावित इलाके में भी ठहरा था। आरोप है कि उसे उम्मीद थी कि वहां पुलिस उस तक आसानी से नहीं पहुंच पाएगी।

    दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें Police Custody में भेजा गया।

    Kanz Jewels का Dubai connection

    Kanz Jewels Dubai के Gold Souq से जुड़ा पुराना Jewellery business है। कंपनी की public information के मुताबिक इसका Dubai में कई outlets के साथ manufacturing setup भी है। कंपनी के General Manager Devendra Dhanak का नाम भी उसके business activities से जुड़ा रहा है।

    2025 में Kanz Jewels को ‘Iconic Brand of the Year’ award भी मिला था। ऐसे में कंपनी के अंदर सामने आया यह alleged insider fraud केवल financial loss का मामला नहीं है, बल्कि high-value jewellery business में Stock verification और internal controls पर भी सवाल खड़े करता है।

    अब पुलिस के सामने सबसे बड़े सवाल

    जांच में अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ₹72 लाख के कथित चोरी किए गए Jewellery का कितना हिस्सा बरामद हुआ है, नकली Jewellery किसने तैयार की, दोनों आरोपियों के बीच पैसों और Jewellery को लेकर क्या communication हुआ और भारत में भेजी गई रकम की पूरी trail कहां तक जाती है।

    इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या इस मामले में Burman और Pathar के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति या कोई अन्य link शामिल था।

    फिलहाल दोनों आरोपी Police Custody में हैं और मामले की जांच जारी है। सबसे अहम जानकारी अब कथित चोरी के सोने की recovery, financial trail और नकली Jewellery के source से जुड़ी जांच से सामने आ सकती है।