अंधेरी MIDC में माथाडी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क? 7 गिरफ्तार, 4 फरार

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अंधेरी MIDC में माथाडी यूनियन की आड़ में कथित वसूली के मामले में 7 गिरफ्तार, 4 फरार। MCOCA कार्रवाई और पुलिस जांच की पूरी जानकारी।

मुंबई: अंधेरी पूर्व MIDC में माथाडी कामगार यूनियन के नाम पर कंपनियों, कारोबारियों और निर्माण व्यावसायिकों से कथित प्रोटेक्शन मनी वसूलने के मामले में मुंबई पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चार अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस ने मामले में महाराष्ट्र संघटित गुन्हेगारी नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की है। जांच में कथित नेटवर्क की पहुंच अंधेरी से आगे पवई, गोरेगांव पूर्व और फिल्म स्टूडियो क्षेत्र तक होने की जानकारी सामने आई है।

ट्रेड स्टार इमारत में ₹10 लाख की कथित मांग

यह मामला 16 अगस्त को अंधेरी पूर्व के कोंडिविटा रोड स्थित ट्रेड स्टार इमारत में हुई घटना से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, पांचवीं मंजिल पर एक कंपनी के कार्यालय में नवीनीकरण का काम चल रहा था। वहां कुछ लोग पहुंचे और कथित तौर पर ₹10 लाख की प्रोटेक्शन मनी की मांग की। कार्यालय में पहले से काम कर रहे माथाडी कामगारों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है।

पुलिस के अनुसार, इस घटना में 27 वर्षीय माथाडी कामगार नदीम नसरुद्दीन शेख पर भी हमला हुआ। 17 अगस्त को MIDC पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि लकड़ी के डंडों से उसके सिर और पैरों पर वार किया गया। इसी हमले के बाद पुलिस को कथित वसूली नेटवर्क का पता चला।

माथाडी के नाम पर काम रोककर पैसे मांगने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, आरोपी किसी कंपनी में काम हासिल करने के बजाय वहां काम कर रहे श्रमिकों पर दबाव बनाकर पैसे वसूलने का प्रयास करते थे। इस मामले में एक अन्य शिकायत के अनुसार, नदीम शेख से काम जारी रखने की अनुमति के बदले ₹20,000 प्रति माह मांगने का आरोप है।

अलग-अलग घटनाओं से संबंधित

इन दोनों रकमों को एक ही मांग मानना सही नहीं होगा। ट्रेड स्टार कार्यालय मामले में ₹10 लाख की कथित मांग का उल्लेख है, जबकि नदीम शेख से संबंधित मामले में ₹20,000 मासिक मांग का विवरण सामने आया है। वास्तविक वसूली और सभी संबंधित घटनाओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

करीब 1,000 कंपनियों तक पहुंच का पुलिस दावा

पुलिस जांच के अनुसार, कथित नेटवर्क की पहुंच करीब 1,000 MIDC कंपनियों तक होने की आशंका जताई गई है। कंपनियों से ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की कथित मांग और निर्माण व्यावसायिकों से प्रोजेक्ट के आकार के आधार पर ₹120 प्रति वर्ग फुट तक वसूली के दावे भी सामने आए हैं।

हालांकि, इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि सभी कंपनियों से वसूली साबित हो चुकी है। पुलिस को अब यह पता लगाना है कि कितने कारोबारी वास्तव में इस कथित नेटवर्क के संपर्क में आए, कितनों से पैसे मांगे गए और कितने लोगों ने शिकायत दर्ज कराई।

अंधेरी से पवई और गोरेगांव तक कथित गतिविधियां

जांच में अंधेरी MIDC के अलावा पवई के कार्यालयों, गोरेगांव पूर्व के फिल्म स्टूडियो और SEEPZ क्षेत्र का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कथित गिरोह उन कंपनियों पर नजर रखता था जहां नया काम शुरू होने वाला हो।

अंधेरी SEEPZ क्षेत्र में करीब 450 कंपनियां और कार्यालय तथा MIDC क्षेत्र में लगभग 350 कंपनियां होने की जानकारी जांच में सामने आई है। यह औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए मामले की संभावित व्यापकता को समझा जा सकता है।

माथाडी व्यवस्था और कथित गैरकानूनी वसूली में अंतर

माथाडी व्यवस्था महाराष्ट्र माथाडी, हमाल तथा अन्य मैनुअल कामगार (रोजगार और कल्याण का विनियमन) अधिनियम, 1969 के तहत संचालित होती है। इसका उद्देश्य असुरक्षित मैनुअल कामगारों के रोजगार और कल्याण को विनियमित करना है।

माथाडी व्यवस्था में मुकादम श्रमिकों की टोली का नेतृत्व करता है। कंपनियां काम की जरूरत के अनुसार संबंधित व्यवस्था के माध्यम से कामगारों की सेवाएं लेती हैं। इस व्यवस्था का नाम इस्तेमाल कर किसी कंपनी पर कथित धमकी या अवैध वसूली करना एक अलग आपराधिक आरोप है।

सात आरोपी गिरफ्तार, चार फरार

MIDC पुलिस ने मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. पूरण अरुण सिंह उर्फ चड्डा
  2. रोहित मधुकर साळुंखे
  3. इमरान बसुद्दीन हवाळदार
  4. सुरेश गुलाबचंद गौड उर्फ किसान
  5. आकाश मानसिंग सिंह उर्फ नेपाली
  6. राजकुमार सेल्वन मुन्नुस्वामी उर्फ लाला
  7. अर्जुन मुनियन मुथु उर्फ डाकू
    पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना समेत चार आरोपी फरार हैं। वन्नियार को कथित नेटवर्क का प्रमुख बताया गया है।

बड़ा कन्ना और छोटा कन्ना कि हो राही है जांच

पुलिस के अनुसार, कन्नन चिन्नादुरई वन्नियार उर्फ बड़ा कन्ना और उसके भाई कन्नन स्वामी उर्फ छोटा कन्ना का नाम कथित नेटवर्क से जुड़ा है। जांच में करीब दो दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय कथित गिरोहों का भी उल्लेख हुआ है।

पुलिस ने बड़ा कन्ना के खिलाफ लगभग 20 पुराने मारपीट और वसूली से जुड़े मामलों का उल्लेख किया है। पूरे कथित नेटवर्क के खिलाफ 24 से अधिक पुराने मामलों का पुलिस दावा भी सामने आया है। इन मामलों का वास्तविक स्वरूप और वर्तमान कानूनी स्थिति संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है।

MCOCA के तहत कार्रवाई क्यों?

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ MCOCA की धाराएं 3(1)(ii), 3(2) और 3(4) के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज गंभीर मामलों और कथित संगठित आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए इस कानून का इस्तेमाल किया गया।

मामले में MCOCA लगाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने का भी उल्लेख सामने आया है। इसका मतलब यह है कि जांच अब केवल एक मारपीट या कथित वसूली की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस कथित संगठित अपराध के पैटर्न की भी जांच कर रही है।

कथित वसूली से कारोबारियों और कामगारों पर असर

इस मामले में पुलिस के दावों की पुष्टि होने पर कंपनियों और निर्माण व्यावसायिकों के लिए काम शुरू करने के दौरान अनधिकृत दबाव और धमकी का जोखिम महत्वपूर्ण जांच का विषय बनता है। इसी तरह, माथाडी व्यवस्था का नाम कथित तौर पर इस्तेमाल होने से वास्तविक माथाडी कामगारों और पंजीकृत यूनियनों की पहचान को लेकर भी सवाल उठते हैं।

पुलिस ने माथाडी यूनियनों से कामगारों के पूर्ववृत्त और संबंधित पहचान की जांच करने का आग्रह करने की बात कही है। यह कदम कथित गैरकानूनी वसूली को रोकने और वैध कामगार व्यवस्था की पहचान स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

अब आगे क्या होगा?

सात गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने चार फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ कथित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की जांच की चुनौती है। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि वसूली की रकम किस तरह ली जाती थी, कितनी कंपनियों से पैसे मांगे गए और क्या अन्य कारोबारी भी शिकायत दर्ज कराने आगे आएंगे।

मामले में कार और सोने के आभूषणों से जुड़े वित्तीय जांच के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, कुल बरामदगी, रकम और संपत्तियों की पुष्टि आधिकारिक जांच रिकॉर्ड के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

अंधेरी MIDC में कथित माथाडी वसूली नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार चार आरोपी फरार हैं और मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायालयीन प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। गिरफ्तार आरोपियों को दोषी साबित होने तक कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है।

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