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मुंबई के बोरीवली पुलिस स्टेशन ने गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन उनके असली मालिकों को लौटाकर एक बार फिर लोगों का भरोसा जीता। जानिए कैसे तकनीकी जांच के जरिए शिकायतकर्ताओं को मिली बड़ी राहत।
मुंबई: मोबाइल फोन आज केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि बैंकिंग, जरूरी दस्तावेज, निजी यादें और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मोबाइल गुम या चोरी होने पर ज्यादातर लोग उसके वापस मिलने की उम्मीद छोड़ देते हैं। लेकिन मुंबई के बोरीवली पुलिस स्टेशन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि समय पर शिकायत और तकनीकी जांच के जरिए खोया हुआ मोबाइल भी उसके असली मालिक तक पहुंचाया जा सकता है।
इसी पहल के तहत 5 अगस्त 2026 को बोरीवली पुलिस स्टेशन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गुम और चोरी हुए 50 मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे गए। वर्षों बाद अपना मोबाइल वापस मिलने पर कई शिकायतकर्ताओं के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और उन्होंने मुंबई पुलिस का आभार व्यक्त किया।
तकनीकी जांच से मिली सफलता
बोरीवली पुलिस ने बताया कि गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन की तलाश के लिए आधुनिक तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग का सहारा लिया गया। मोबाइल बरामद होने के बाद उनकी पहचान और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने एक बार फिर यह साबित किया कि समय पर दर्ज की गई शिकायत कई बार खोया हुआ मोबाइल वापस दिला सकती है।
बोरीवली पुलिस की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती पुष्पलता मंडले ने बताया कि, वर्ष 2019 से 2025 के दौरान 450 गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए गए। वहीं 1 जनवरी 2026 से अब तक 225 मोबाइल फोन सफलतापूर्वक रिकवर कर शिकायतकर्ताओं को सौंपे जा चुके हैं। पुलिस प्रत्येक शिकायत निवारण दिवस के दौरान भी बरामद मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को लौटाने की प्रक्रिया जारी रखे हुए है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ मोबाइल वितरण
मोबाइल वितरण कार्यक्रम में पुलिस उपायुक्त (परिमंडल-02) श्री संदीप घुगे, सहायक पुलिस आयुक्त (बोरीवली विभाग) श्री संतोष घेवरे तथा वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्रीमती पुष्पलता मंडले मौजूद रहीं। इसके अलावा बोरीवली पुलिस स्टेशन के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं को मोबाइल सौंपते हुए नागरिकों से अपील की कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने पर बिना देरी किए पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते तकनीकी जांच शुरू की जा सके।
शिकायतकर्ताओं के चेहरों पर लौटी मुस्कान
कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका मोबाइल दोबारा मिल पाएगा। किसी के मोबाइल में परिवार की तस्वीरें थीं तो किसी के लिए वह रोजमर्रा के काम और महत्वपूर्ण दस्तावेजों का जरिया था। मोबाइल वापस मिलने के बाद लोगों ने बोरीवली पुलिस की सराहना करते हुए इसे आम नागरिकों के लिए भरोसा बढ़ाने वाली पहल बताया।
पुलिस का कहना है कि मोबाइल गुम होने या चोरी होने की स्थिति में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, उसके बरामद होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। नागरिक ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर इस प्रक्रिया में सहयोग कर सकते हैं।
फरीदाबाद के निजी स्कूल में शिक्षिका की हत्या के मामले में आरोपी गिरफ्तार। पुलिस जांच में सामने आई कथित साजिश, पहले की शिकायतें, CCTV और पूरे मामले की टाइमलाइन पढ़ें।
फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में एक निजी स्कूल के बाहर शिक्षिका की दिनदहाड़े हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्कूल परिसर के बाहर हुई इस वारदात का CCTV वीडियो सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया। पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों के भीतर 21 वर्षीय आरोपी अमित को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से शिक्षिका का पीछा कर रहा था और उसने पहले से हत्या की योजना बनाई थी।
हमले की सीसीटीवी फुटेज की तस्वीर
पति का नाम लेकर स्कूल गेट तक बुलाया
पुलिस जांच के अनुसार आरोपी सोमवार सुबह चेहरे पर कपड़ा बांधकर स्कूल पहुंचा। उसने स्कूल स्टाफ से खुद को शिक्षिका के पति का परिचित बताते हुए उन्हें बाहर बुलाने के लिए कहा। जैसे ही शिक्षिका स्कूल गेट पर पहुंचीं, आरोपी ने उन पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। पूरी घटना कुछ ही सेकंड में घटित हुई और स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
CCTV में कैद हुई पूरी वारदात
घटना स्कूल परिसर में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में आरोपी लगातार चाकू से हमला करता दिखाई देता है। शोर सुनकर स्कूल के कर्मचारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक शिक्षिका गंभीर रूप से घायल हो चुकी थीं। बीच-बचाव करने की कोशिश करने वाले एक अधिकारी पर भी आरोपी ने हमला किया।
हमले के तुरंत बाद शिक्षिका को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
दो साल से कर रहा था पीछा
पुलिस और परिजनों के मुताबिक आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से शिक्षिका को परेशान कर रहा था। शिक्षिका ने पहले भी उसके खिलाफ छेड़छाड़ और उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद आरोपी का उत्पीड़न पूरी तरह नहीं रुका और आखिरकार उसने इस वारदात को अंजाम दिया।
पहले से रची थी हत्या की साजिश
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी ने घटना से करीब दो महीने पहले ही हत्या की योजना बना ली थी। उसने इसी उद्देश्य से चाकू खरीदा था और मौके की तलाश कर रहा था। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करने की बात भी पुलिस ने कही है।
मृतक शिक्षिका विवाहित थीं और उनके दो छोटे बच्चे हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार आरोपी की हरकतों की शिकायत की थी। पति ने आरोप लगाया कि यदि शुरुआती शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
दिनदहाड़े स्कूल परिसर तक आरोपी का पहुंच जाना और शिक्षिका को बाहर बुलाकर हमला कर देना स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी है। कई लोगों ने स्कूलों में विजिटर वेरिफिकेशन और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त बनाने की मांग की है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ जारी है। मामले में उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और आरोपपत्र मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में पेश किया जाएगा।
मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी होने का मामला सामने आया है। जानिए घोटाला कैसे पकड़ा गया, किन अधिकारियों पर एफआईआर हुई और आगे क्या होगा।
मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय प्रभाग (नॉर्थ रीजनल डिवीजन) में करोड़ों रुपये के कथित वेतन घोटाले का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच के मुताबिक, पुलिस के पेरोल सिस्टम में 10 ऐसे लोगों के नाम दर्ज पाए गए, जिनका विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था। आरोप है कि इन नामों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी की गई। मामला तब सामने आया, जब कर्मचारियों का डेटा पुरानी ‘सेवार्थ’ (Sevaarth) प्रणाली से नए सिस्टम में ट्रांसफर किया जा रहा था।
घोटाला कैसे सामने आया?
पुलिस विभाग में कर्मचारियों के रिकॉर्ड को पुराने पेरोल सिस्टम से नए सिस्टम में स्थानांतरित किया जा रहा था। इसी दौरान डेटा मिलान और आंतरिक ऑडिट में कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, दिसंबर 2019, जनवरी और फरवरी 2020 के अलावा जून से सितंबर 2020 के बीच संदिग्ध भुगतान किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ नाम ऐसे थे, जिनके सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
इसके बाद नॉर्थ रीजन के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने समता नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
कौन हैं वे 10 लोग, जिनके नाम पर निकली सैलरी?
जांच में जिन दस नामों का उल्लेख सामने आया है, उनमें—
रामदास भोगले
सुधाकर कदम
सरजू यादव
भगवत भोसले
गुणाजी खावकर
महादेव हलदणकर
राजेंद्र सोनार
उत्तम थोरात
सूर्यकांत पाटिल
पांडुरंग कदम
शामिल हैं।
हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी वास्तविक व्यक्ति हैं या केवल फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए इन नामों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस संबंधित बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर
समता नगर पुलिस स्टेशन में पांच तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस थाने की तस्वीर
इनमें शामिल हैं—
रामकिशन गोस्वामी (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
नागेश तलवडेकर (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
विजया चव्हाण (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
अजय राठौड़ (मुख्य लिपिक)
अमोल मेश्राम (वरिष्ठ लिपिक)
इन पर सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी आरोपी को निलंबित किया गया है या नहीं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120(बी) और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।
हालांकि, एफआईआर वर्ष 2026 में दर्ज हुई है, लेकिन कथित अपराध 2019 और 2020 के दौरान हुआ था। इसी वजह से मामले में IPC की धाराएं लगाई गई हैं।
इन धाराओं में सरकारी धन का गबन, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, सबूत मिटाना और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।
नोट: 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है, लेकिन 1 जुलाई 2024 से पहले हुए अपराधों पर कई मामलों में IPC के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
📊 6.41 करोड़ रुपये का हिसाब
नोट: नीचे दिया गया गणित उपलब्ध जानकारी के आधार पर अनुमान है। पुलिस ने अभी तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।
विवरण
अनुमानित आंकड़ा
कुल कथित रकम
6.41 करोड़ रुपये
फर्जी कर्मचारियों की संख्या
10
प्रति व्यक्ति औसत रकम
64.1 लाख रुपये
संदिग्ध अवधि
7 महीने
प्रति व्यक्ति औसत मासिक भुगतान
9.15 लाख रुपये
सभी 10 लोगों को प्रति माह कुल भुगतान
91.5 लाख रुपये
यदि 6.41 करोड़ रुपये को 10 लोगों में बराबर बांटा जाए, तो प्रत्येक व्यक्ति के नाम पर औसतन 64.1 लाख रुपये निकले होंगे।
टाइमलाइन: कब क्या हुआ?
दिसंबर 2019: संदिग्ध भुगतान शुरू हुए।
जनवरी–फरवरी 2020: कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी रहा।
जून–सितंबर 2020: भुगतान जारी रहने का दावा।
2026: डेटा माइग्रेशन के दौरान गड़बड़ी सामने आई।
अगस्त 2026: समता नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।
🏛️ इस घोटाले का मुंबई पुलिस और आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है। इसने सरकारी विभागों की पेरोल व्यवस्था, डिजिटल सुरक्षा और ऑडिट सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कर्मचारियों के रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन हो सकता है।
पेरोल सिस्टम का तकनीकी ऑडिट कराया जा सकता है।
संवेदनशील विभागों में एक्सेस कंट्रोल सख्त किया जा सकता है।
वेतन भुगतान प्रक्रिया की निगरानी बढ़ सकती है।
क्या अन्य यूनिटों का भी ऑडिट होगा?
फिलहाल जांच नॉर्थ रीजन तक सीमित है, लेकिन अगर सिस्टम स्तर की खामियां सामने आती हैं, तो मुंबई पुलिस की अन्य इकाइयों के रिकॉर्ड की भी जांच हो सकती है।
टैक्सपेयर्स के पैसे पर क्या असर होगा?
सरकारी कर्मचारियों का वेतन जनता के टैक्स से दिया जाता है। यदि जांच में गबन की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला मामला माना जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल: बिना भर्ती हुए सिस्टम तक पहुंचे कैसे?
पूरे मामले का सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल यही है कि जिन लोगों की कभी भर्ती ही नहीं हुई, उनके नाम पुलिस के पेरोल सिस्टम में कैसे दर्ज हुए।
जांच एजेंसियां फिलहाल इन बिंदुओं पर काम कर रही हैं—
क्या फर्जी कर्मचारी आईडी बनाई गई थीं?
क्या किसी अधिकारी के लॉगिन का गलत इस्तेमाल हुआ?
क्या फर्जी नियुक्ति दस्तावेज तैयार किए गए?
क्या बैंक खाते पहले से खोले गए थे?
क्या विभाग के बाहर के लोग भी शामिल हैं?
इन्हीं सवालों के जवाब से पूरे घोटाले की असली तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल लॉग और विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।
अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं—
एफआईआर नंबर क्या है?
शिकायत किस अधिकारी ने दर्ज कराई?
6.41 करोड़ रुपये किन खातों में भेजे गए?
क्या किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है?
क्या विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है?
क्या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जांच में शामिल होगी?
🔎 समझिए पूरा मामला
घोस्ट एम्प्लॉई (Ghost Employee) क्या होता है?
ऐसे व्यक्ति को “घोस्ट एम्प्लॉई” कहा जाता है, जिसका नाम किसी संस्था के रिकॉर्ड में कर्मचारी के रूप में दर्ज हो, लेकिन वह वास्तव में वहां काम नहीं करता हो।
सेवार्थ महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल पेरोल और कर्मचारी प्रबंधन प्लेटफॉर्म है। इसी सिस्टम के जरिए सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, बैंक खातों और सेवा रिकॉर्ड का प्रबंधन किया जाता है।
मुंबई में SRA के PAP फ्लैट दिलाने के नाम पर 47 परिवारों से 5.57 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मुंबई: मुंबई में SRA (Slum Rehabilitation Authority) के PAP (Project Affected Person) फ्लैट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 5.57 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में दावा किया गया है कि करीब 47 लोगों से फ्लैट दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन बाद में दिए गए कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि FIR में जिन लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं, उनमें एक वर्तमान सांसद के पर्सनल असिस्टेंट (PA) और एक राजनीतिक दल से जुड़े पूर्व सहयोगी का भी नाम शामिल है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
पुलिस शिकायत के अनुसार, वर्ष 2017 में शिकायतकर्ता आकाश राधेश्याम सोनी और उनके कारोबारी साझेदार रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात शैलेश काकण और उसके सहयोगियों से हुई। आरोप है कि उन्होंने खुद को SRA अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए मुंबई में PAP फ्लैट उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
शिकायत के मुताबिक अंधेरी, सांताक्रूज, बांद्रा, कांदिवली और माटुंगा जैसे इलाकों में फ्लैट दिलाने का प्रस्ताव दिया गया। प्रत्येक फ्लैट के लिए 15 लाख से 28 लाख रुपये तक की राशि तय की गई।
47 ग्राहकों से जुटाए गए 5.57 करोड़ रुपये
शिकायत में कहा गया है कि भरोसा होने के बाद शिकायतकर्ता ने अपनी कंपनी के माध्यम से करीब 47 ग्राहकों से रकम एकत्र की। आरोप है कि आरोपियों ने पहले टोकन राशि और फिर किस्तों के रूप में लगातार भुगतान लिया।
दस्तावेजों के अनुसार, चेक और RTGS सहित विभिन्न माध्यमों से कुल 5,57,50,000 रुपये का भुगतान किया गया।
SRA के नाम पर कथित फर्जी दस्तावेज दिए गए
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने SRA के लेटरहेड पर कथित आवंटन पत्र, कलेक्टर कार्यालय से जुड़े दस्तावेज, सक्षम प्राधिकारी के पत्र, सोसायटी NOC, बिजली बिल और अन्य सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध कराए।
हालांकि, बाद में जब इन दस्तावेजों की SRA कार्यालय में जांच कराई गई तो शिकायतकर्ता को बताया गया कि दस्तावेज कथित रूप से सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते।
2024 में अधिकारियों से मुलाकात के बाद दर्ज हुई शिकायत
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में SRA के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात के दौरान दस्तावेजों की सत्यता की जांच कराई गई। इसके बाद कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
किन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई?
FIR में शैलेश काकण, रूपेश वेलेंकर, अभिषेक गुजर और विश्वनाथ जाधव सहित कई अन्य लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभी ने मिलकर PAP फ्लैट दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये लिए।
शिकायत के अनुसार, विश्वनाथ जाधव पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) से जुड़े एक MLC के पर्सनल सेक्रेटरी रह चुके हैं और वर्तमान में एक कांग्रेस सांसद के पर्सनल असिस्टेंट (PA) के रूप में कार्यरत हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ भी FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह उल्लेख केवल शिकायत और FIR में दर्ज आरोपों के आधार पर है।
PAP फ्लैट क्या होते हैं?
PAP (Project Affected Person) फ्लैट उन लोगों के पुनर्वास के लिए दिए जाते हैं, जो सरकारी परियोजनाओं के कारण प्रभावित होते हैं। ऐसे फ्लैटों का आवंटन निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत किया जाता है। किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार का फ्लैट लेने से पहले संबंधित प्राधिकरण से दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी योजना या पुनर्वास परियोजना के नाम पर फ्लैट देने का दावा करता है, तो भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग से दस्तावेजों का सत्यापन करना बेहद जरूरी है। केवल निजी दस्तावेजों या मौखिक आश्वासन के आधार पर बड़ी रकम का भुगतान करना आर्थिक जोखिम पैदा कर सकता है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान बैंक लेन-देन, दस्तावेजों की प्रामाणिकता और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।
मुंबई साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल और कई बैंक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में देशभर के 84 साइबर अपराधों से कनेक्शन सामने आया है।
मुंबई साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश
मुंबई साइबर पुलिस के मध्य विभाग ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, 22 चेकबुक, 23 सिम कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है।
गिरफ्तार आरोपियों के साथ केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की तस्वीर
गुप्त सूचना के बाद बोरीवली में बिछाया जाल
मुंबई साइबर पुलिस थाना, मध्य विभाग, वर्ली को 29 जुलाई 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि सलमान पठान और उसके साथी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने आने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक, चंदावरकर रोड, बोरीवली (पश्चिम) में जाल बिछाया।
करीब तीन बजे सलमान पठान और उसके साथी बैंक से 10 लाख रुपये निकाल चुके थे और अन्य 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस जांच में पता चला कि सलमान पठान के भाईंदर पश्चिम स्थित केजीएन एंटरप्राइजेज और मीरा रोड के शांति शॉपिंग सेंटर स्थित रिचा एंटरप्राइजेज कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने दोनों जगहों पर छापेमारी कर चार अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खोलकर चेक के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालते थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध भारत के विभिन्न राज्यों में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
मुंबई साइबर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 106/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 61(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से कमाए गए पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने के लिए करते हैं।
आसान भाषा में समझें तो साइबर ठग सीधे अपने बैंक खाते में पैसे नहीं मंगवाते। वे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं या किसी लालच में फंसाकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को ही “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।
साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
साइबर अपराधी पहले लोगों को फर्जी कॉल, निवेश योजना, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन नौकरी या लॉटरी जैसे झांसे में फंसाकर पैसे ठगते हैं। इसके बाद यह रकम सीधे उनके खाते में न जाकर म्यूल अकाउंट में भेजी जाती है।
इसके बाद आरोपी—
बैंक से नकद रकम निकाल लेते हैं।
रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
चेक और एटीएम कार्ड के जरिए पैसे निकालते हैं।
कई बैंक खातों के जरिए पैसों का स्रोत छिपाने की कोशिश करते हैं।
लोग अनजाने में कैसे बन जाते हैं म्यूल अकाउंट होल्डर?
कई बार अपराधी लोगों को हर महीने कमीशन देने का लालच देकर उनका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।
आमतौर पर अपराधी लोगों से कहते हैं—
“आपके खाते में पैसा आएगा, आपको सिर्फ़ निकालकर देना है।”
“घर बैठे कमाई का मौका है।”
“कंपनी के लिए बैंक अकाउंट चाहिए।”
“किराये पर बैंक खाता दीजिए।”
ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
इस मामले में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे किया गया?
मुंबई साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकाल रहे थे। आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से पाया गया है।
साइबर पुलिस की चेतावनी
मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। अगर कोई व्यक्ति साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले खाते का मालिक पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इन अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के नेतृत्व में की गई। इस ऑपरेशन में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) बजरंग बनसोडे और सहायक पुलिस आयुक्त सुवर्णा शिंदे का मार्गदर्शन रहा।
कार्रवाई को सफल बनाने में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढाव, पुलिस निरीक्षक रविकिरण डोरले, सहायक पुलिस निरीक्षक अतुल सानप, मानसिंग वचकले, सविता कावरे, पुलिस हवलदार अभिजीत गोंजारी, नवनाथ वेताले, विकास तटकरे, किरण पाटिल, श्रीकांत पोंल, नंदकिशोर महाजन, तनिषा मयेकर और कैलाश बाबरे ने अहम भूमिका निभाई।
मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट ने एंटीलिया बम प्रकरण और मनसुख हिरेन हत्याकांड में सचिन वाजे, प्रदीप शर्मा समेत 10 आरोपियों पर आरोप तय किए। जानिए अब मुकदमे में आगे क्या होगा।
मुंबई: मुंबई के बहुचर्चित एंटीलिया बम प्रकरण और मनसुख हिरेन हत्याकांड में शनिवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने पूर्व पुलिस अधिकारियों सचिन वाजे, प्रदीप शर्मा और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए हैं। आरोप तय होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई ट्रायल के अगले चरण में प्रवेश करेगी।
करीब साढ़े पांच साल पुराने इस मामले में पहली बार अदालत में सबूतों और गवाहों की विस्तृत जांच शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है। यही वजह है कि यह फैसला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे मामले की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर एक स्कॉर्पियो कार मिली थी। कार के अंदर जिलेटिन की छड़ें और धमकी भरा पत्र बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में पता चला कि यह वाहन ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन का था।
बॉम्बे हाईकोर्ट की फाइल तस्वीर
कार मिलने के महज आठ दिन बाद, 5 मार्च 2021 को मनसुख हिरेन का शव ठाणे की खाड़ी से बरामद हुआ। इसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और जांच महाराष्ट्र एटीएस से होते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तक पहुंच गई।
एनआईए ने सचिन वाजे पर क्या आरोप लगाए?
एनआईए के आरोपपत्र के मुताबिक, तत्कालीन पुलिस अधिकारी सचिन वाजे पर आरोप है कि उन्होंने एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी कार खड़ी करने की साजिश रची थी। एजेंसी का दावा है कि इसका उद्देश्य शहर के प्रभावशाली लोगों के बीच डर पैदा करना और कथित तौर पर उगाही के लिए माहौल बनाना था।
जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया है कि जब मनसुख हिरेन ने इस मामले की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, तो उन्हें साजिश की “कमजोर कड़ी” माना गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई।
हालांकि, सभी आरोपियों ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है और आरोपों से इनकार किया है।
प्रदीप शर्मा की भूमिका को लेकर क्या है दावा?
एनआईए के अनुसार, पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा पर भी इस कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। एजेंसी का कहना है कि शर्मा और अन्य आरोपियों ने मिलकर पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने में भूमिका निभाई थी।
हालांकि, अदालत में अभी इन आरोपों की सुनवाई होगी और अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही आएगा।
अब अदालत में क्या होगा?
आरोप तय होने के बाद अब अभियोजन पक्ष अपने गवाह और सबूत पेश करेगा। इसके बाद बचाव पक्ष को जिरह का मौका मिलेगा।
आने वाले महीनों में अदालत इन अहम सवालों पर सुनवाई करेगी—
एंटीलिया के बाहर कार किसने खड़ी की?
मनसुख हिरेन की मौत आत्महत्या थी या हत्या?
क्या सचिन वाजे और अन्य आरोपी कथित साजिश का हिस्सा थे?
जांच एजेंसियों के डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत कितने मजबूत हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ट्रायल लंबा चल सकता है क्योंकि मामले में बड़ी संख्या में गवाह, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक दस्तावेज शामिल हैं।
नवी मुंबई पुलिस ने थाईलैंड से जुड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जानिए कैसे तुर्भे, चेंबूर, घाटकोपर और डोंबिवली तक फैला था 1.36 करोड़ रुपये का यह रैकेट।
महाराष्ट्र: नवी मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसके तार थाईलैंड से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से करीब 1.36 करोड़ रुपये कीमत का हाइड्रो गांजा, कोकीन और अन्य सामान बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल नवी मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि घाटकोपर, चेंबूर, डोंबिवली, मीरा रोड और तुर्भे तक फैला हुआ था।
पहली गिरफ्तारी की तस्वीर
कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?
पूरे ऑपरेशन की शुरुआत 10 जुलाई को हुई, जब नवी मुंबई एंटी-नारकोटिक्स सेल को सूचना मिली कि तुर्भे के होटल Monday में ठहरे दो युवक ड्रग्स सप्लाई से जुड़े हैं। इसके बाद पुलिस ने होटल पर छापा मारकर तलोजा निवासी अब्दुल रऊफ खान और वाशी निवासी मिथुन मानकुरे को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से 648.5 ग्राम हाइड्रो गांजा और पांच ग्राम कोकीन बरामद की गई।
पूछताछ के दौरान पुलिस को मीरा रोड निवासी अयान राजकोटवाला का नाम मिला। अयान की गिरफ्तारी के बाद जांच चेंबूर तक पहुंची, जहां से गौरव चिंदारकर को पकड़ा गया। यहीं से पुलिस को पहली बार थाईलैंड कनेक्शन का पता चला।
थाईलैंड से मुंबई तक कैसे पहुंचता था ड्रग्स?
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी वृषांग भनुशाली है, जो फिलहाल थाईलैंड में रह रहा है। जांच में सामने आया है कि वह वहीं से हाइड्रो गांजा भारत भेजता था। भारत में उसके दो कथित सहयोगी—घाटकोपर निवासी नीरज शाह और डोंबिवली निवासी सुरेश भनुशाली—ड्रग्स की सप्लाई संभालते थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सप्लाई चेन कुछ इस तरह काम करती थी—
तुर्भे: 648.5 ग्राम हाइड्रो गांजा और 5 ग्राम कोकीन
मीरा रोड: 203 ग्राम हाइड्रो गांजा
डोंबिवली: 451.5 ग्राम हाइड्रो गांजा
घाटकोपर: 4.3 ग्राम हाइड्रो गांजा
12 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
पढ़े-लिखे युवा क्राइम में शामिल
इस मामले का एक चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में कुछ पढ़े-लिखे युवा भी शामिल हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और डिजिटल पेमेंट के जरिए यह नेटवर्क चलाया जा रहा था? फिलहाल जब्त किए गए मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इस मामले में अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं।
ड्रग्स भारत में किस रास्ते से पहुंचा?
क्या एयर कार्गो या कुरियर नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ?
थाईलैंड में बैठा मास्टरमाइंड किन लोगों के संपर्क में था?
क्या मुंबई के दूसरे इलाकों में भी सप्लाई हो रही थी?
क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं?
नवी मुंबई पुलिस ने मुख्य आरोपी वृषांग भनुशाली के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कांदिवली में 17 साल की लड़की की हत्या के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी उसे गिफ्ट के बहाने जंगल ले गया था।
मुंबई: कांदिवली ईस्ट में 17 वर्षीय छात्रा की हत्या के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। समतानगर पुलिस के अनुसार, 22 वर्षीय आरोपी सूरज वाघमारे ने कथित तौर पर टीवी पर क्राइम शो देखकर हत्या की योजना बनाई थी। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने लड़की को “यूनिक गिफ्ट” देने के बहाने दामूनगर जंगल इलाके में बुलाया और वहां वारदात को अंजाम दिया।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और पुलिस हत्या की पूरी साजिश, घटनास्थल से मिले सबूतों और दोनों के रिश्ते के हर पहलू की जांच कर रही है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुंबई के कांदिवली ईस्ट स्थित समतानगर पुलिस थाना क्षेत्र का है। जंगल में गश्त के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को एक नाबालिग लड़की का शव मिला, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा। शुरुआती जांच के बाद मृतका की पहचान 17 वर्षीय सिद्धि विश्वकर्मा के रूप में हुई।
जांच में सामने आया कि सिद्धि और आरोपी सूरज वाघमारे पिछले करीब डेढ़ साल से एक-दूसरे को जानते थे।
दोस्ती से हत्या तक की टाइमलाइन
समय
क्या हुआ
डेढ़ साल पहले
गणपति मंडल में दोनों की मुलाकात हुई
बाद में
दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू हुए
पिछले कुछ महीनों में
शादी को लेकर विवाद बढ़ा
घटना वाले दिन
आरोपी ने लड़की को जंगल में बुलाया
जंगल में
आंखों पर पट्टी बांधने के बाद हमला
कुछ घंटे बाद
जंगल में शव बरामद हुआ
जांच के बाद
आरोपी सूरज वाघमारे गिरफ्तार
पुलिस जांच में हुआ खुलासा
पुलिस के अनुसार, आरोपी शादी को लेकर लड़की पर दबाव बना रहा था, लेकिन नाबालिग ने कथित तौर पर इससे इनकार कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने हत्या की योजना बनाई।
जांच अधिकारियों का दावा है कि आरोपी ने पहले से पूरी साजिश तैयार की थी। लड़की को एक खास तोहफा देने का झांसा देकर जंगल में बुलाया और उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी।
पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की।
जांच के दौरान पुलिस को शक है कि आरोपी ने टीवी पर प्रसारित क्राइम शो देखकर हत्या और सबूत मिटाने के तरीकों के बारे में जानकारी जुटाई थी।
हालांकि, यह जांच का हिस्सा है और पुलिस इस बात की पुष्टि करने के लिए आरोपी के मोबाइल फोन, इंटरनेट हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच कर रही है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी टीवी शो या फिल्म को सीधे तौर पर अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस फिलहाल आरोपी के इरादों और मानसिक स्थिति की भी जांच कर रही है।
जंगल क्यों चुना गया?
दामूनगर का जंगल इलाका अपेक्षाकृत सुनसान माना जाता है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपी ने ऐसी जगह इसलिए चुनी, जहां लोगों की आवाजाही कम हो और वारदात के बाद पहचान छिपाना आसान हो।
पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में ट्रैफिक डायवर्जन, पुलिस सुरक्षा, भीड़, बंद रास्ते और यात्रियों पर असर की पूरी रिपोर्ट पढ़िए।
कांवड़ यात्रा 2026: अगले 10 दिनों में देश के करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है असर
सावन शुरू होते ही कांवड़ यात्रा 2026 ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की सड़क व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख से गंगाजल लेने के लिए लाखों श्रद्धालु सड़कों पर उतर चुके हैं। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू हो चुके हैं, हजारों पुलिसकर्मी तैनात हैं और कई शहरों में रूट डायवर्जन शुरू हो गया है।
With #KanwarYatra2026 underway and the monsoon in full swing, Joint CP/Traffic reviewed the operational preparedness of Traffic personnel and Patrol Motorcycles to strengthen field response, ensure safe movement of Kanwariyas and maintain smooth traffic flow across the Range. pic.twitter.com/ZEnaqq9FN7
लेकिन यह खबर सिर्फ धार्मिक यात्रा की नहीं है। इसका सीधा असर उन करोड़ों लोगों पर पड़ने वाला है जो रोजाना ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के लिए इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले कुछ दिनों में ट्रैफिक, सुरक्षा और आम लोगों की जिंदगी पर इसका कितना असर पड़ सकता है।
कांवड़ यात्रा शुरू होते ही दिल्ली से हरिद्वार तक बदली ट्रैफिक व्यवस्था
कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 11 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और हरिद्वार के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
Watch this video carefully, Muslims are celebrating Muharram with full religious freedom, while sections of the Hindu community are voluntarily making way for them and even performing their own rituals nearby.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जीटी रोड के कई हिस्सों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है, जबकि कुछ रास्तों को पूरी तरह कांवड़ियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
इसके अलावा, दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग और गंगा नहर मार्ग पर 4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच सामान्य वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
प्रशासन ने लोगों को पहले से वैकल्पिक रास्ते तय करने की सलाह दी है।
सिर्फ श्रद्धालु नहीं, इन करोड़ों लोगों पर भी पड़ेगा असर
कांवड़ यात्रा का असर सिर्फ कांवड़ियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सबसे ज्यादा प्रभाव इन शहरों और इलाकों पर पड़ सकता है—
दिल्ली
नोएडा
गाजियाबाद
मेरठ
मुजफ्फरनगर
हरिद्वार
ऋषिकेश
देहरादून
बागपत
शामली
इन शहरों से हर दिन लाखों लोग नौकरी, व्यापार और शिक्षा के लिए सफर करते हैं। ट्रैफिक डायवर्जन की वजह से कई जगहों पर यात्रा का समय बढ़ सकता है।
VIDEO | Lucknow: On preparations and control room setup for Kanwar Yatra, LR Kumar, IG (Law and Order), says, “With regard to this year's Kanwar Yatra, the Uttar Pradesh Police has completed all its preparations. All high-level review meetings have been held, and based on those… pic.twitter.com/xdgllqC9iT
सुबह 7 बजे से 11 बजे और शाम 5 बजे से 9 बजे तक सबसे ज्यादा दबाव रहने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।
स्कूल और कॉलेज के छात्र
कई स्कूल बसों और निजी वाहनों के रूट बदल सकते हैं। माता-पिता को सुबह निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखना चाहिए।
पर्यटक
हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून और मसूरी जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
Ahead of #KanwarYatra2026, Muzaffarnagar Police conducted a four-hour intensive security check from Shiv Chowk to the Railway Station with LIU, Bomb Disposal Squad and Dog Squad. The operation focused on suspicious persons, vehicles and crowded locations to ensure a safe… pic.twitter.com/80hYUEnqww
दिल्ली पुलिस ने कांवड़ियों के लिए बनाए आठ विशेष रूट
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कांवड़ियों की सुरक्षा और यात्रा को सुचारु बनाने के लिए आठ अलग-अलग रूट तय किए हैं।
इसके साथ ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार ट्रैफिक और सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ट्रैफिक दबाव और बढ़ सकता है।
35 हजार पुलिसकर्मी, ड्रोन और AI कैमरों से होगी निगरानी
उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए 35 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी, पीएसी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है।
मुजफ्फरनगर और हरिद्वार जैसे संवेदनशील इलाकों में चौबीस घंटे निगरानी की जा रही है।
हरिद्वार में बढ़ रही भीड़, प्रशासन ने शुरू की विशेष तैयारी
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
हर की पौड़ी, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई है और लगभग एक हजार अतिरिक्त सफाईकर्मियों को तैनात किया है।
कांवड़ यात्रा से जुड़े वीडियो, ट्रैफिक अपडेट और अफवाहों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करने की सलाह दी गई है।
सरकार और प्रशासन ने क्या इंतजाम किए हैं?
24 घंटे कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
अतिरिक्त बस सेवाएं शुरू की गई हैं।
मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।
जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है।
पुलिस की बाइक पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है।
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है।
आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं।
A 21-year-old Muslim youth from Meerut is undertaking the Kanwar Yatra with his Hindu friend, carrying a 251-litre Kanwar from Haridwar to promote social harmony. pic.twitter.com/NLH3eXhOna
4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच ट्रैफिक दबाव अपने चरम पर पहुंच सकता है। ऐसे में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देखें।
मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से तड़ीपार कर दिया है। जानिए किन इलाकों के आरोपी इस सूची में शामिल हैं और उन पर क्या आरोप हैं।
मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई शहर और उपनगरों की सीमा से तड़ीपार (Externment) कर दिया है। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, मारपीट, लूट, हथियारों के दम पर धमकाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे मामलों में शामिल रहे हैं।
पुलिस ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?
मुंबई पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों की गतिविधियों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में डर का माहौल बन गया था। कई लोग शिकायत दर्ज कराने से भी डर रहे थे। इसी वजह से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत इन अपराधियों के खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की गई।
पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी क्षेत्र) के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया।
मुंबई पुलिस ने साफ किया है कि अगर तड़ीपार किया गया कोई भी आरोपी आदेश का उल्लंघन करते हुए मुंबई शहर या उपनगरों में प्रवेश करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके इलाके में कोई तड़ीपार अपराधी दिखाई देता है या किसी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी मिलती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन 100 और 112 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
इस कार्रवाई का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और व्यापारियों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही, इलाके में जबरन वसूली, दादागिरी और हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
FAQ
सवाल: मुंबई पुलिस ने कितने अपराधियों को तड़ीपार किया है?
नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए तड़ीपार किया गया है।
सवाल: तड़ीपार कितने समय के लिए किया गया है?
सभी आरोपियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से बाहर रहने का आदेश दिया गया है।
सवाल: किन पुलिस स्टेशनों के आरोपी शामिल हैं?
कस्तूरबा मार्ग, समतानगर और दहिसर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के आरोपी शामिल हैं।
सवाल: अगर तड़ीपार आरोपी मुंबई में दिखे तो क्या करें?
तुरंत 100, 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें।