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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने हरियाणा के सोनीपत से अमन को गिरफ्तार किया। बैंक खाते में 50 हजार रुपये के लेनदेन की जांच जारी है।
मुंबई: टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में मुंबई क्राइम ब्रांच ने 12वीं गिरफ्तारी की है। हरियाणा के सोनीपत जिले के रोहणा गांव से अमन को गिरफ्तार किया गया है। उसके बैंक खाते में 50 हजार रुपये के कथित लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रकम का 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू में हुई फायरिंग से क्या संबंध है।
अमन को पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी कुणाल का दोस्त बताया जा रहा है। मुंबई पुलिस की टीम उसे आगे की पूछताछ के लिए मुंबई लेकर आई है। जांच का मुख्य फोकस अब पैसों के लेनदेन, आरोपियों के आपसी संपर्क और फायरिंग की कथित साजिश में अमन की भूमिका पर है।
अमन के बैंक खाते में 50 हजार रुपये की जांच
जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, अमन का नाम बैंक खाते में हुए लेनदेन की पड़ताल के दौरान सामने आया। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि उसके खाते में रकम किसने भेजी, पैसे भेजने का उद्देश्य क्या था और क्या इसका संबंध फायरिंग मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों से है।
फिलहाल 50 हजार रुपये के लेनदेन को लेकर जांच जारी है। केवल खाते में रकम आने से किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका साबित नहीं होती। पुलिस की पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से इस संबंध में आगे की जानकारी सामने आ सकती है।
11 आरोपियों को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत
अमन की गिरफ्तारी से पहले इस मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों को 29 अक्टूबर को मुंबई की विशेष MCOCA अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
इन आरोपियों में दो महिलाएं भी शामिल हैं। क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए 10 दिन की हिरासत मांगी थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के बीच कथित साजिश, हथियारों की व्यवस्था और आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच की जानी है।
मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के प्रावधान भी लागू किए गए हैं। पुलिस ने कथित संगठित आपराधिक नेटवर्क, आर्थिक लाभ और समाज में डर पैदा करने की आशंका को जांच का हिस्सा बनाया है। अदालत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अनिल पंडित की तलाश, कथित गैंग कनेक्शन की जांच
इस मामले में अनिल पंडित को वांछित आरोपी बताया गया है। पुलिस को संदेह है कि उसका लॉरेंस बिश्नोई गैंग से संबंध हो सकता है। जांच एजेंसी कथित हमले की योजना, हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने अदालत में डिजिटल सबूत, वॉइस चैट और मैसेजिंग ऐप पर हुई बातचीत की जांच का भी जिक्र किया है। इन सबूतों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित हमले के निर्देश किसने दिए और इसमें शामिल लोगों की क्या भूमिका थी। अनिल पंडित की कथित भूमिका और गैंग से संबंधों को अभी आरोपों और जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग
यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, टाइगर श्रॉफ फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे, तभी मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उनकी कार पर गोलियां चलाईं। अभिनेता इस घटना में सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए।
घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में कथित हमलावरों के अलावा हथियारों की सप्लाई, वित्तीय लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
अमन की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि उसके बैंक खाते में आए 50 हजार रुपये का मामले से कोई सीधा संबंध है या नहीं। साथ ही, पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पहले गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसके संपर्क किस प्रकार के थे और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
मुंबई के धारावी में 62 वर्षीय महिला से SRA फ्लैट दिलाने के नाम पर ₹35 लाख की कथित ठगी। सात महीने से फरार आरोपी Murugan Anbalagan Pallan गिरफ्तार।
मुंबई: धारावी में 62 वर्षीय महिला को निर्माणाधीन Slum Rehabilitation Authority (SRA) प्रोजेक्ट में फ्लैट दिलाने का कथित झांसा देकर ₹35 लाख लेने के मामले में पुलिस ने Murugan Anbalagan Pallan को गिरफ्तार किया है। आरोपी करीब सात महीने से फरार बताया जा रहा था। इस मामले में Rajesh Pillai और Vinita Samadhan Surwade के नाम भी सह-आरोपियों के तौर पर सामने आए हैं।
पुलिस के मुताबिक, महिला ने अपना पुराना फ्लैट बेचकर नए घर के लिए रकम जुटाई थी। आरोप है कि ₹35 लाख देने के बावजूद उन्हें न फ्लैट का कब्जा मिला और न ही उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज दिए गए। शिकायत के बाद धारावी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुराने फ्लैट को बेचकर जुटाए थे पैसे
मामले की जानकारी के अनुसार, महिला ने 2005 में अपने पति के माध्यम से धारावी में एक फ्लैट खरीदा था। बाद में उन्होंने यह फ्लैट ₹10 लाख के डिपॉजिट पर किराये पर दे दिया था। परिवार कुछ समय के लिए रायगढ़ चला गया था और करीब डेढ़ साल बाद वापस धारावी लौटा।
इस दौरान महिला के पति की तबीयत खराब थी और उनके बेटे ने हाल ही में नई नौकरी शुरू की थी। ऐसे में किरायेदार से अपना फ्लैट वापस लेने के लिए ₹10 लाख का डिपॉजिट लौटाना परिवार के लिए मुश्किल हो रहा था।
महिला ने इसके बाद अपना फ्लैट बेचने का फैसला किया। उन्होंने संपत्ति ₹40 लाख में बेची और किरायेदार को ₹10 लाख लौटाए। इसके बाद वह बची हुई रकम से दूसरी जगह घर खरीदना चाहती थीं।
SRA या MHADA में सस्ता फ्लैट दिलाने का वादा
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान महिला की मुलाकात Murugan Anbalagan Pallan से हुई। आरोप है कि उसने उन्हें Slum Rehabilitation Authority (SRA) या Maharashtra Housing and Area Development Authority (MHADA) की योजना के तहत कम कीमत पर फ्लैट दिलाने का भरोसा दिया।
महिला को कथित तौर पर बताया गया कि आरोपियों ने पहले भी कई लोगों को कम कीमत पर कमरे या फ्लैट दिलाने में मदद की है। इसके बाद धारावी में निर्माणाधीन SRA प्रोजेक्ट में ₹35 लाख में फ्लैट दिलाने का वादा किया गया।
महिला ने इस वादे पर भरोसा करके आरोपियों को किस्तों में ₹35 लाख दिए। हालांकि, आरोप है कि रकम लेने के बाद उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं सौंपा गया और न ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।
शिकायत करने पर कथित तौर पर टालने लगे आरोपी
महिला ने जब फ्लैट के कब्जे और दस्तावेजों के बारे में आरोपियों से जवाब मांगा, तो कथित तौर पर वे उन्हें टालने लगे। इसके बाद महिला ने धारावी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने Murugan Anbalagan Pallan, Rajesh Pillai और Vinita Samadhan Surwade के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और अन्य संबंधित अपराधों के तहत मामला दर्ज किया।
मामले में Murugan Anbalagan Pallan को करीब सात महीने तक फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया। अन्य दो सह-आरोपियों की गिरफ्तारी और उनकी मौजूदा कानूनी स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
SRA फ्लैट लेने से पहले किन बातों की जांच जरूरी?
यह मामला उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो मुंबई में SRA या दूसरी सरकारी आवास योजनाओं के तहत कम कीमत पर फ्लैट खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
किसी भी निर्माणाधीन पुनर्वसन प्रोजेक्ट में फ्लैट लेने से पहले संबंधित प्राधिकरण से आवंटन और पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है। केवल एजेंट या बिचौलिए के भरोसे बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है।
खरीदारों को संबंधित फ्लैट के आवंटन पत्र, विक्रेता के अधिकार, लागू हस्तांतरण नियमों और भवन के जरूरी अनुमोदनों की जांच करनी चाहिए। भुगतान की रसीदें, बैंक ट्रांसफर का रिकॉर्ड और लिखित समझौते भी सुरक्षित रखने चाहिए।
धारावी के इस मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर जिस फ्लैट का वादा किया गया था, वह किस विशेष SRA प्रोजेक्ट या भवन में था।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस की जांच में कथित भुगतान, फ्लैट के वादे और आरोपियों की भूमिका से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
मुंबई के गोरेगांव में पैर कुचलने का आरोप लगाकर एक कार चालक से 1,000 रुपये लेने का मामला सामने आया। जानें पुलिस की सलाह और बचाव के तरीके।
मुंबई: गोरेगांव पश्चिम में सड़क हादसे के नाम पर पैसे वसूलने का संदिग्ध मामला सामने आया है। स्कूल से अपने दो बच्चों को लेकर घर लौट रहे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दोपहिया सवार ने उसका रास्ता रोककर पैर कुचलने का दावा किया और इलाज के नाम पर पैसे मांगे। विवाद खत्म करने के लिए व्यक्ति ने कथित तौर पर 1,000 रुपये ऑनलाइन दे दिए। घटना के बाद गोरेगांव पुलिस ने वाहन चालकों को दबाव में पैसे न देने और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेने की सलाह दी है।
यह घटना अनमोल फॉर्च्यून इमारत के पास की बताई गई है। कार चला रहे शुक्ला के मुताबिक, वह हाल ही में दोपहर करीब 4:15 बजे अपने बच्चों को स्कूल से लेकर घर जा रहे थे। इसी दौरान एक दोपहिया सवार ने उनकी कार के पीछे के शीशे पर हाथ मारा और उन्हें रुकने के लिए कहा।
पैर कुचलने का आरोप लगाकर मांगे पैसे
शुक्ला ने बताया कि दोपहिया सवार ने उन पर गाड़ी से अपना पैर कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने इस आरोप को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें न तो किसी टक्कर का एहसास हुआ था और न ही दोपहिया वाहन के कार से टकराने का।
शुक्ला के अनुसार, बाइक सवार ने इलाज के खर्च के नाम पर पैसे मांगे। जब उन्होंने नकद पैसे नहीं होने की बात कही, तो उसने ऑनलाइन भुगतान के लिए क्यूआर कोड दिखा दिया। इस दौरान कार में बैठे दोनों बच्चे डर गए थे।
शुक्ला ने बताया कि विवाद बढ़ने और बच्चों को और परेशानी से बचाने के लिए उन्होंने आखिरकार 1,000 रुपये का भुगतान कर दिया। उनके अनुसार, पैसे मिलने के बाद बाइक सवार ने भुगतान का स्क्रीनशॉट भी मांगा और कहा कि क्यूआर कोड उसके एक दोस्त का है।
पुलिस की गश्ती गाड़ी पहुंची, फिर भी विवाद खत्म करने की मांग
शुक्ला के मुताबिक, घटना के दौरान पुलिस की गश्ती गाड़ी वहां से गुजरी और पुलिसकर्मियों ने रुककर दोनों पक्षों से बातचीत की। उन्होंने दोनों को विवाद सुलझाने के लिए पुलिस थाने चलने को कहा।
शुक्ला का आरोप है कि बाद में दोपहिया सवार ने पुलिस के सामने मामला सुलझाने के बजाय आपस में विवाद खत्म करने पर जोर दिया। बच्चों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने पैसे देने का फैसला किया।
घटना के बाद शुक्ला ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया, ताकि दूसरे वाहन चालक भी सावधान रहें। उनकी पोस्ट पर कई लोगों ने इसी तरह के कथित अनुभव बताए।
बांद्रा, जोगेश्वरी और चेंबूर से भी आए ऐसे अनुभव
शुक्ला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जॉन सी. ने बताया कि पिछले साल उनके चालक को दो लोगों ने रोककर आरोप लगाया था कि उसकी गाड़ी से उनकी एसयूवी पर खरोंच आई है। चालक ने इस आरोप पर सवाल उठाया, क्योंकि दूसरी गाड़ी उसकी गाड़ी से आगे खड़ी थी। इसके बाद उसने दोनों से बातचीत बंद कर दी और पास के सांताक्रूज पुलिस थाने चलने को कहा। जॉन सी. के मुताबिक, पुलिस थाने चलने की बात सुनकर दोनों वहां से चले गए।
एस. ए. थेवर ने बताया कि उनके साथ भी कई बार इसी तरह की घटना हुई। उनके मुताबिक, पहली बार एक वाहन चालक ने बीमार बच्चे के इलाज का हवाला देकर उनसे पैसे लिए थे। बाद में जब इसी तरह की कहानी दोबारा सुनाई गई, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी उन्होंने कम से कम छह बार ऐसी बातें सुनीं।
निमेश दवे ने बताया कि जोगेश्वरी से एक दोपहिया सवार उनका पीछा कर रहा था। फ्लाईओवर पर पहुंचने के बाद उसने वाहन रोककर टक्कर मारने का आरोप लगाया और दावा किया कि वह गाड़ी चलाते समय फोन पर बात कर रहे थे। दवे के अनुसार, जब उन्होंने सवार से नीचे चलकर बात करने को कहा और उसने उनकी गाड़ी पर मीडिया का स्टिकर देखा, तो वह वहां से चला गया।
दवे ने बताया कि बाद में पुलिस से बातचीत करने पर उन्हें जानकारी दी गई कि कथित तौर पर पैसे वसूलने वाले लोग फ्लाईओवर जैसी जगहों को चुन सकते हैं, जहां आसपास पैदल चलने वाले लोग या पुलिसकर्मी कम दिखाई देते हैं।
गोरेगांव पुलिस ने क्या सलाह दी?
गोरेगांव पुलिस थाने के प्रभारी पुलिस निरीक्षक सतीश उमारे ने वाहन चालकों से कहा कि विवाद होने पर दबाव में आकर किसी को पैसे न दें। ऐसी स्थिति में नजदीकी पुलिस थाने जाएं या रास्ते में पुलिसकर्मी अथवा यातायात पुलिस दिखाई देने पर उनसे मदद लें।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को खतरा महसूस हो रहा है, तो उसे जरूरी स्थिति को छोड़कर वाहन से बाहर निकलने से बचना चाहिए। दुर्घटना होने या किसी के घायल होने पर चिकित्सा सहायता देना जरूरी है।
उमारे के अनुसार, वाहन चालक पुलिस से मदद लेने के लिए 100 या 112 पर फोन कर सकते हैं अथवा नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस जरूरी कार्रवाई करेगी।
अगर कोई हादसे का आरोप लगाकर पैसे मांगे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी और वाहन में बैठे यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखें। किसी के आरोप पर तुरंत पैसे देने के बजाय पुलिस की मदद लें और घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी दें।
अगर वास्तव में दुर्घटना हुई है या कोई घायल है, तो चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं। विवाद के दौरान वाहन का नंबर, घटना का समय और जगह, गवाहों की जानकारी तथा सुरक्षित तरीके से उपलब्ध तस्वीरें या कैमरे की रिकॉर्डिंग संभालकर रखें।
अगर आपने ऑनलाइन भुगतान कर दिया है, तो लेनदेन की पहचान संख्या, भुगतान का समय और प्राप्तकर्ता की जानकारी सुरक्षित रखें। संदिग्ध वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में बैंक या भुगतान सेवा को सूचित करें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। धमकी या तत्काल खतरे की स्थिति में 112 पर संपर्क करें।
वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि वास्तविक दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करें, लेकिन किसी विवादित मांग के दबाव में आने के बजाय पुलिस को सूचना दें।
मुंबई के चारकोप में फर्जी Apple-Amazon कस्टमर केयर कॉल सेंटर का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार और दो फरार।
मुंबई: चारकोप में Apple और Amazon जैसी नामी कंपनियों का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर कथित तौर पर देश-विदेश के लोगों को फोन करने वाले बोगस कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में आसिफ हनीफ कुरैशी और स्मार्ट पी. जॉन को गिरफ्तार किया गया है, जबकि शाहरुख शेख और सिमरन सिंह उर्फ सिमरन रंधावा की तलाश जारी है। पुलिस ने मौके से चार लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, नौ चार्जर, नौ हेडफोन और कॉलिंग स्क्रिप्ट वाली एक डायरी जब्त की है।
चारकोप पुलिस स्टेशन में 27 अक्टूबर 2026 को इस मामले में FIR दर्ज की गई। पुलिस की 28 अक्टूबर की जानकारी मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिए ग्राहकों को फोन करते थे और खुद को Apple या Amazon का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर आर्थिक फायदा उठाने की कोशिश करते थे।
ग्राहकों की शिकायतों से जुड़ी जानकारी का कथित दुरुपयोग
इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्राहकों की शिकायतों से जुड़ी जानकारी का कथित इस्तेमाल है। जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, ग्राहकों की समस्याओं, अकाउंट बंद होने या ऑर्डर डिलीवर नहीं होने जैसी बातों का हवाला देकर उन्हें फोन किया जाता था। ऐसे मामलों में ग्राहक को लगता है कि फोन करने वाला व्यक्ति उसकी वास्तविक समस्या से परिचित है और वह संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि हो सकता है।
हालांकि, इस मामले में ग्राहकों की जानकारी किस स्रोत से हासिल की गई, कितने लोगों की जानकारी का इस्तेमाल हुआ और कितने लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। कथित ठगी की कुल रकम का भी स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
चारकोप के फ्लैट से लैपटॉप, मोबाइल और कॉलिंग स्क्रिप्ट जब्त
पुलिस के अनुसार, कथित कॉल सेंटर चारकोप के भाब्रेकर नगर स्थित Acme Avenue की ए विंग में फ्लैट नंबर 1304 से संचालित किया जा रहा था। 26 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजे से पहले की अवधि में वहां कथित गतिविधियों का उल्लेख पुलिस दस्तावेज में किया गया है।
जांच के दौरान पुलिस ने चार लैपटॉप, नौ चार्जर, नौ हेडफोन, चार मोबाइल फोन और स्क्रिप्ट लिखी हुई एक डायरी जब्त की। इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से कथित कॉलिंग गतिविधियों, संपर्कों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। हालांकि, जब्त सामग्री से अब तक कितने पीड़ितों की पहचान हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
कौन गिरफ्तार और कौन वांछित?
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आसिफ हनीफ कुरैशी (31) और स्मार्ट पी. जॉन (40) के रूप में हुई है। पुलिस से मिली जानकारी में दोनों को ऑपरेटर बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, शाहरुख शेख और सिमरन सिंह उर्फ सिमरन रंधावा कथित तौर पर इस गतिविधि से जुड़े थे और फिलहाल वांछित हैं। उनकी भूमिका, कथित कॉल सेंटर के संचालन में जिम्मेदारी और आर्थिक लेनदेन से संबंधित विवरण की जांच की जा रही है।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
चारकोप पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2), 318(4) और 3(5) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फर्जी कस्टमर केयर कॉल से कैसे बचें?
इस घटना के मद्देनजर ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। किसी अनजान कॉलर के Apple, Amazon या किसी अन्य कंपनी का प्रतिनिधि होने के दावे पर तुरंत भरोसा न करें। अपनी शिकायत या ऑर्डर की जानकारी की पुष्टि संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के जरिए करें।
किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड, डिवाइस पासकोड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। अगर कोई कॉलर अकाउंट बंद करने, ऑर्डर रद्द होने या तत्काल भुगतान की धमकी देकर दबाव बनाता है, तो कॉल समाप्त करके आधिकारिक कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें।
अगर साइबर ठगी के जरिए पैसे निकल जाते हैं, तो तुरंत 1930 पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें और https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत करने से संबंधित वित्तीय लेनदेन पर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
चारकोप पुलिस की जांच में अब कथित ठगी की कुल रकम, प्रभावित ग्राहकों की संख्या, ग्राहकों की शिकायतों से जुड़ी जानकारी के स्रोत और वांछित आरोपियों की भूमिका जैसे सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे। इन पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
Malad Cyber Crime: वोटर ID में नाम सुधारने के नाम पर 79 वर्षीय बुजुर्ग से ₹6.48 लाख की ऑनलाइन ठगी। जानें कैसे हुआ फ्रॉड और बचाव के तरीके।
मुंबई: मालाड पश्चिम में वोटर ID पर नाम की गलती सुधारने का झांसा देकर 79 वर्षीय बुजुर्ग से 6 लाख 48 हजार रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने खुद को भारतीय निर्वाचन आयोग का अधिकारी बताकर नाम सुधारने के लिए सिर्फ 5 रुपये ऑनलाइन जमा करने को कहा। इस बहाने बुजुर्ग से बैंकिंग ऐप से जुड़ा कोड हासिल किया गया और उनके खाते से बड़ी रकम निकाल ली गई। मामले में 26 अक्टूबर 2026 को बांगुरनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया।
पीड़ित की पहचान रामनाधम फनिंद्र काजा (79) के रूप में हुई है। वह मालाड पश्चिम के इवरशाइन नगर इलाके में रहते हैं। वह और उनकी पत्नी बैंक में जमा बचत पर निर्भर हैं और रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन के लिए Axis Bank के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते हैं।
वोटर ID में नाम सुधारने के बहाने शुरू हुई ठगी
मिली जानकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को दोपहर करीब एक बजे काजा के WhatsApp नंबर पर एक अनजान व्यक्ति का कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को भारतीय निर्वाचन आयोग का अधिकारी बताया और कहा कि काजा तथा उनकी पत्नी के वोटर ID कार्ड पर नाम में सुधार करना है।
इसके लिए केवल 5 रुपये ऑनलाइन फीस जमा करने की बात कही गई। कम रकम होने और सरकारी काम से जुड़ा मामला बताए जाने के कारण यह प्रक्रिया सामान्य लग सकती थी। लेकिन इसी बहाने आरोपी ने बैंकिंग ऐप से संबंधित कोड मांगा।
काजा ने उस व्यक्ति पर भरोसा करके कोड साझा कर दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर होने की बात सामने आई।
खाते से कितनी रकम निकाली गई?
इस मामले में कुल 6,48,017.70 रुपये की रकम का उल्लेख किया गया है। इस ठगी की पूरी प्रक्रिया, ट्रांजैक्शन का समय और रकम किन खातों में भेजी गई, इसकी पुष्टि जांच से ही हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीड़ित की शिकायत पर बांगुरनगर पुलिस स्टेशन में 26 अक्टूबर को मामला दर्ज किया गया है।
महाराष्ट्र में वोटर ID के नाम पर साइबर ठगी के दूसरे मामले भी
वोटर ID में नाम सुधारने या मतदाता रिकॉर्ड की जांच के बहाने ठगी की ऐसी घटनाएं महाराष्ट्र के दूसरे शहरों में भी सामने आई हैं।
पुणे में 79 वर्षीय व्यक्ति को मतदाता पहचान पत्र में नाम बदलने के बहाने करीब 11.92 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाए जाने की खबर सामने आई थी। वहीं, नवी मुंबई के वाशी में वोटर ID सत्यापन के नाम पर एक व्यक्ति के खाते से 8,21,884 रुपये निकाले जाने का मामला भी सामने आया।
ठाणे में भी दो वरिष्ठ नागरिकों को मतदाता सूची में सुधार के नाम पर निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इन मामलों में ठगी के तरीके अलग-अलग बताए गए थे। हालांकि, इन सभी घटनाओं के पीछे एक ही गिरोह होने का कोई पुष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
मुंबई में फर्जी APK फाइलों के जरिए साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ भी पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। लेकिन मालाड के इस मामले में किसी APK फाइल को डाउनलोड कराने की पुष्टि नहीं हुई है।
वोटर ID में नाम की गलती हो तो क्या करें?
वोटर ID या मतदाता सूची में नाम, पता अथवा अन्य जानकारी में सुधार के लिए निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सेवा का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आयोग के Voters’ Service Portal पर Form 8 के जरिए आवेदन किया जा सकता है।
किसी अनजान व्यक्ति के WhatsApp कॉल या मैसेज पर भरोसा करके बैंकिंग जानकारी साझा न करें। किसी सरकारी अधिकारी के नाम से संपर्क किए जाने पर भी उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
ध्यान रखें कि OTP, UPI PIN, बैंकिंग पासवर्ड और ट्रांजैक्शन की मंजूरी देने वाले गोपनीय कोड किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में APK फाइल या रिमोट एक्सेस ऐप भी इंस्टॉल न करें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत कहां शिकायत करें?
अगर बैंक खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाते हैं, तो तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर संपर्क करें। इसके साथ ही बैंक को सूचित करके अनधिकृत ट्रांजैक्शन की शिकायत दर्ज कराएं और जरूरत के अनुसार बैंकिंग एक्सेस सुरक्षित करवाएं।
ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर भी दर्ज की जा सकती है। कॉल लॉग, WhatsApp चैट, SMS, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी और शिकायत संख्या जैसे सबूत संभालकर रखें।
समय पर शिकायत करने से संबंधित ट्रांजैक्शन को रोकने या रकम को आगे ट्रांसफर होने से बचाने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
मालाड के इस मामले में आरोपी की पहचान, रकम की रिकवरी और ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंकिंग तरीके की पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। जांच से ही यह पता चल सकेगा कि पैसे किन खातों में भेजे गए और उन्हें वापस हासिल करने के लिए क्या कार्रवाई की गई।
वसई की अन्नपूर्णा गैस एजेंसी में OTP के कथित दुरुपयोग और फर्जी डिलीवरी की जांच। छह लोगों पर केस, स्टॉक और बुकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल जारी।
मुंबई: मुंबई से सटे पालघर जिले के वसई में गैस सिलेंडर की कथित हेराफेरी के मामले में अन्नपूर्णा गैस एजेंसी के मालिक, प्रबंधक और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के बिक्री प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। ग्राहकों के OTP का कथित दुरुपयोग कर फर्जी डिलीवरी दिखाने और गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी किए जाने के आरोपों की जांच जारी है। मामले में एजेंसी के पिछले छह महीने के स्टॉक, बुकिंग और डिलीवरी रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।
इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब वसई न्यायालय के तीसरे संयुक्त दीवानी न्यायाधीश (कनिष्ठ स्तर) यश काने को बिना गैस सिलेंडर बुक किए ही बुकिंग का मैसेज मिला। इसके बाद उन्होंने आपूर्ति विभाग में शिकायत दर्ज कराई।
बिना बुकिंग के आया गैस सिलेंडर का मैसेज
28 सितंबर 2026 को न्यायाधीश यश काने के मोबाइल पर LPG सिलेंडर बुक होने का संदेश आया था, जबकि उन्होंने कोई बुकिंग नहीं की थी। इस संदिग्ध मैसेज के बाद उन्होंने वसई के आपूर्ति विभाग को इसकी जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद आपूर्ति निरीक्षक भागवत सोनार और जिला स्तरीय जांच दल ने वसई स्थित अन्नपूर्णा गैस एजेंसी पर छापा मारकर रिकॉर्ड की जांच शुरू की। जांच में ग्राहकों की बुकिंग और वास्तविक डिलीवरी के बीच संभावित गड़बड़ी की पड़ताल की जा रही है।
एजेंसी के रिकॉर्ड में मिलीं अनियमितताएं
जांच के दौरान एजेंसी में डिलीवरी कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका में उनके नामों का रिकॉर्ड नहीं मिला। वहीं, स्टॉक रजिस्टर में पेंसिल से प्रविष्टियां की गई थीं, जिन्हें बाद में बदले जाने की आशंका हो सकती है। दस्तावेजों के संबंध में पूछे जाने पर एजेंसी प्रबंधन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन अनियमितताओं के आधार पर जांच दल एजेंसी के कामकाज और गैस सिलेंडरों की आवक-जावक का मिलान कर रहा है। हालांकि, रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ियों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि सभी संबंधित लोगों ने अपराध किया है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।
छह महीने के स्टॉक और डिलीवरी रिकॉर्ड की जांच
आपूर्ति निरीक्षक भागवत सोनार के अनुसार, एजेंसी के पिछले छह महीने के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसमें स्टॉक रजिस्टर, सिलेंडरों की आवक-जावक, ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग तथा ग्राहकों को की गई डिलीवरी का विवरण शामिल है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कितने मामलों में बुकिंग और डिलीवरी के रिकॉर्ड में अंतर था, कितने ग्राहक प्रभावित हुए और कथित कालाबाजारी किस स्तर तक हुई। फिलहाल प्रभावित ग्राहकों की कुल संख्या और कथित रूप से हेराफेरी किए गए सिलेंडरों की मात्रा स्पष्ट नहीं है।
मामले में एजेंसी के मालिक, प्रबंधक और HPCL के बिक्री प्रबंधक समेत छह लोगों के खिलाफ वसई पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज धाराओं, गिरफ्तारी और पुलिस की आगे की कार्रवाई की जानकारी अभी प्राप्त होना बाकी है।
ग्राहकों के OTP का दुरुपयोग कैसे हो सकता है?
LPG डिलीवरी में डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का इस्तेमाल ग्राहक तक सिलेंडर पहुंचने की पुष्टि के लिए किया जाता है। सामान्य प्रक्रिया में ग्राहक कोड डिलीवरी के समय साझा करता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य डिलीवरी रिकॉर्ड को सत्यापित करना है।
यदि किसी मामले में बिना वास्तविक डिलीवरी के रिकॉर्ड दर्ज किया गया हो या कोड का गलत इस्तेमाल हुआ हो, तो बुकिंग विवरण, कैश मेमो, DAC रिकॉर्ड और वास्तविक डिलीवरी के बीच मिलान जांच का अहम हिस्सा बन सकता है। हालांकि, वसई मामले में OTP हासिल करने या उसका कथित दुरुपयोग करने का सटीक तरीका अभी स्पष्ट नहीं है।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
यदि आपने गैस सिलेंडर बुक नहीं किया है, लेकिन बुकिंग या डिलीवरी का मैसेज आया है, तो उसे नजरअंदाज न करें। मैसेज का स्क्रीनशॉट और समय सुरक्षित रखें तथा अपनी गैस एजेंसी और संबंधित कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सहायता माध्यम से बुकिंग की स्थिति जांचें।
बिना सिलेंडर मिले किसी को भी डिलीवरी OTP या DAC न बताएं। HP Gas के ग्राहक अपनी शिकायत के लिए आधिकारिक टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं। यदि मामले में बैंक खाते से पैसे निकलने जैसी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी भी हुई है, तो 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
वसई के इस मामले में अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितने ग्राहकों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली, कथित कालाबाजारी का वास्तविक पैमाना क्या था और संबंधित लोगों की भूमिका क्या रही। आपूर्ति विभाग की रिकॉर्ड जांच और पुलिस की कार्रवाई से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बिपिन अग्रवाल की 2017 की गिरफ्तारी अवैध घोषित की। महाराष्ट्र सरकार को ₹5 लाख मुआवजा देने और पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुंबई:बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2017 में बिपिन सतीश चंद्र अग्रवाल की गिरफ्तारी को गैरकानूनी घोषित करते हुए महाराष्ट्र सरकार को ₹5 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है। 22 अक्टूबर 2026 को दिए गए इस फैसले में अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और रिमांड मंजूर करने वाले मजिस्ट्रेट की भूमिका को प्रशासनिक स्तर पर जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने Criminal Writ Petition No. 4458 of 2017 में यह फैसला सुनाया। अदालत के मुताबिक, अग्रवाल को छह दिन पुलिस हिरासत और 20 दिन न्यायिक हिरासत में रहना पड़ा था।
क्या है पूरा मामला?
बिपिन अग्रवाल मुंबई के अंधेरी ईस्ट स्थित The New Aarti Co-operative Housing Society के पुनर्विकास से जुड़े मामले में शामिल थे। वह अपनी करीब 70 साल की सास आसावरी कुलकर्णी के पावर ऑफ अटॉर्नी धारक थे और सोसायटी के फ्लैट के पुनर्विकास को लेकर डेवलपर के साथ बातचीत कर रहे थे।
अदालत के सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक, फ्लैट के सौदे के लिए करीब ₹1.64 करोड़ की रकम पर बातचीत चल रही थी। इसी दौरान डेवलपर की ओर से ₹2 लाख अग्रिम दिए गए। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अग्रवाल को हिरासत में ले लिया गया। मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 के तहत जबरन वसूली की FIR दर्ज की गई थी।
अग्रवाल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें गिरफ्तारी की वैधता, पुलिस की कार्रवाई और मजिस्ट्रेट द्वारा रिमांड मंजूर करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी क्यों माना?
अदालत ने पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच में कई गंभीर विसंगतियां पाईं। FIR दर्ज होने और गिरफ्तारी के समय को लेकर विरोधाभास सामने आए। रिकॉर्ड से संकेत मिला कि गिरफ्तारी FIR दर्ज होने से पहले हुई थी।
अरेस्ट मेमो में भी तारीख बदलने से संबंधित विसंगतियां थीं। दस्तावेज में 5 अगस्त 2017 की तारीख को कई जगह बदलकर 4 अगस्त किया गया था।
पुलिस की ओर से 23 जून 2017 की एक कथित शिकायत का उल्लेख किया गया, लेकिन संबंधित स्टेशन डायरी और RTI के तहत मिले जवाब में उस शिकायत के प्राप्त होने का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। चार्जशीट के साथ शिकायत की प्रति संलग्न होने को लेकर भी विरोधाभास सामने आए।
गिरफ्तारी से पहले नोटिस देने के नियम का पालन नहीं हुआ
इस मामले में उस समय लागू दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41A भी अहम थी। यह प्रावधान कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी के बजाय पुलिस के सामने उपस्थित होने का नोटिस देने से जुड़ा था।
हाई कोर्ट ने पाया कि संबंधित नोटिस गिरफ्तारी के बाद दिया गया था और अग्रवाल को उसका पालन करने का वास्तविक अवसर दिए जाने का रिकॉर्ड नहीं था। अदालत को ऐसा पर्याप्त आधार भी नहीं मिला जिससे साबित हो कि जांच के लिए उनकी गिरफ्तारी जरूरी थी।
कानून के मुताबिक, केवल FIR दर्ज होने से हर मामले में गिरफ्तारी जरूरी नहीं हो जाती। पुलिस को संबंधित कानूनी शर्तों और गिरफ्तारी की आवश्यकता पर विचार करना होता है।
26 दिन हिरासत में रहे, फिर मिली जमानत
अग्रवाल को 4 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया गया था। वह छह दिन पुलिस हिरासत और 20 दिन न्यायिक हिरासत में रहे। 28 अगस्त 2017 को सेशंस कोर्ट ने उन्हें ₹25,000 के बॉन्ड पर जमानत दी थी।
हाई कोर्ट ने रिमांड की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। अदालत के अनुसार, हिरासत बढ़ाने के आदेशों में जरूरी कारणों और स्वतंत्र न्यायिक विचार का पर्याप्त उल्लेख नहीं था।
रिमांड मंजूर करना केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। मजिस्ट्रेट को रिकॉर्ड और हिरासत की आवश्यकता पर स्वतंत्र रूप से विचार करना होता है।
फॉरेंसिक वॉइस सैंपल की जांच पर भी सवाल
हाई कोर्ट ने वॉइस सैंपल की जांच से जुड़े रिकॉर्ड पर भी ध्यान दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर 2017 को वॉइस सैंपल भेजने, उसका विश्लेषण करने, रिपोर्ट तैयार करने और पुलिस स्टेशन में वापस प्राप्त होने की प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी होने पर अदालत ने सवाल उठाए।
रिपोर्ट को चार्जशीट के साथ संलग्न नहीं किए जाने और पहले के न्यायालयीन निर्देशों के पालन पर भी टिप्पणी की गई। अदालत ने इन तथ्यों को मामले में जांच और दस्तावेजों की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों के संदर्भ में देखा।
महाराष्ट्र सरकार को ₹5 लाख देने का निर्देश
हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अग्रवाल को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। भुगतान की समय-सीमा फैसले को हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की तारीख से दो सप्ताह थी।
यह राशि इस खास मामले के तथ्यों और अदालत के आदेश के आधार पर तय की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर अवैध गिरफ्तारी के मामले में अपने आप ₹5 लाख मुआवजा मिलता है। दूसरे मामलों में राहत और उसकी राशि संबंधित तथ्यों तथा कानूनी आधार पर निर्भर करेगी।
मामले में डेवलपर और पुलिस अधिकारी की कथित मिलीभगत को लेकर भी अदालत ने गंभीर निष्कर्ष दर्ज किए। हालांकि, इस आदेश को डेवलपर के खिलाफ किसी अलग आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
अवैध गिरफ्तारी के मामले में नागरिक क्या कर सकते हैं?
अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी गिरफ्तारी गैरकानूनी तरीके से हुई है, तो वह मामले के तथ्यों के अनुसार वकील से सलाह लेकर उचित कानूनी उपाय अपना सकता है।
ऐसी स्थिति में FIR, अरेस्ट मेमो, पुलिस नोटिस, रिमांड आदेश, जमानत आदेश और संबंधित अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। गिरफ्तारी का कारण और कानूनी आधार समझना भी जरूरी है।
संविधान का अनुच्छेद 21 व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जबकि अनुच्छेद 22 गिरफ्तारी के बाद कुछ महत्वपूर्ण संवैधानिक संरक्षण देता है। हालांकि, किसी खास मामले में कौन-सा कानूनी उपाय उपलब्ध है, यह उसके तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करेगा।
पुराने और वर्तमान कानून में क्या अंतर है?
2017 की गिरफ्तारी पर उस समय लागू CrPC के प्रावधानों की जांच की गई थी। 1 जुलाई 2024 से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 लागू हुई, जिसने सामान्य आपराधिक प्रक्रिया में CrPC की जगह ली।
वर्तमान कानून में BNSS की धारा 35 गिरफ्तारी और कुछ परिस्थितियों में नोटिस देने से संबंधित है, जबकि धारा 187 जांच के दौरान रिमांड और हिरासत की प्रक्रिया से जुड़ी है। इस पुराने मामले का मूल्यांकन उस समय लागू कानून के आधार पर किया जाना चाहिए।
गिरफ्तारी की आवश्यकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों में Arnesh Kumar v. State of Bihar (2014), Joginder Kumar v. State of Uttar Pradesh (1994), D.K. Basu v. State of West Bengal (1997) और Satender Kumar Antil v. CBI (2022) शामिल हैं। इन फैसलों में गिरफ्तारी की कानूनी शर्तों, हिरासत के दौरान अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़े सिद्धांत स्पष्ट किए गए हैं।
इस फैसले का महत्व केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। यह गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया, पुलिस रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और रिमांड मंजूर करते समय न्यायिक स्वतंत्र विचार की जिम्मेदारी को भी सामने लाता है।
यह खबर कानूनी जनजागरूकता के उद्देश्य से है। किसी व्यक्तिगत मामले में कानूनी कार्रवाई करने से पहले मूल न्यायनिर्णय और लागू कानून का पूरा पाठ देखना चाहिए।
मुंबई एयरपोर्ट पर कथित गोल्ड स्मगलिंग में एयरलाइन कर्मचारी और श्रीलंकाई यात्री गिरफ्तार। सोने की बरामदगी, कीमत और जांच से जुड़ी अहम जानकारी जानें।
मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर कथित गोल्ड स्मगलिंग के मामले में एक महिला एयरलाइन कर्मचारी और श्रीलंका के 43 वर्षीय ट्रांजिट यात्री को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में करीब 1.8 करोड़ रुपये मूल्य के सोने की बरामदगी का विवरण सामने आया है। जांच में एयरपोर्ट के अंदर कथित तौर पर सोने का हस्तांतरण करने और एक विदेशी स्मगलिंग नेटवर्क से संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
आरोपियों की पहचान 30 वर्षीय N. Yadav, जो भिवंडी की निवासी बताई गई हैं, और Mohamed Usman Mohamed Hanifa (43) के रूप में हुई है। मामले में सोने की मात्रा और उसके स्वरूप को लेकर अलग-अलग विवरण सामने आए हैं, जबकि कथित नेटवर्क की पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
एयरपोर्ट के अंदर कथित तौर पर कैसे हुआ सोने का हस्तांतरण?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया सूचना और यात्रियों की प्रोफाइलिंग के आधार पर एक संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी थी। इसके बाद एयरपोर्ट के Departure Area में महिला एयरलाइन कर्मचारी और श्रीलंकाई ट्रांजिट यात्री को पकड़ा गया।
जांच से जुड़े घटनाक्रम में Boarding Gate 65 के पास लिफ्ट में कथित तौर पर सोने के हस्तांतरण का जिक्र सामने आया है। शुरुआती कार्रवाई CISF की ओर से किए जाने और बाद में दोनों को Customs की Airport Intelligence Unit (AIU) को सौंपे जाने की जानकारी है।
तलाशी के दौरान यात्री के अंडरगारमेंट में छिपाए गए सोने से जुड़े पदार्थ मिलने की बात सामने आई। जांच का मुख्य पहलू यह है कि सोना एयरपोर्ट के अंदर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने की कथित योजना क्या थी और इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
सोने की मात्रा और कीमत को लेकर क्या जानकारी है?
इस मामले में 1,490 ग्राम गोल्ड डस्ट (सोने की धूल) बरामद होने की जानकारी सामने आई है। बरामद सोने की अनुमानित कीमत करीब 1.83 करोड़ रुपये बताई गई है। मामले में सोने की तस्करी के कथित प्रयास को लेकर जांच जारी है।
एयरलाइन कर्मचारी की कथित भूमिका की जांच
इस मामले में महिला एयरलाइन कर्मचारी की भूमिका जांच का अहम हिस्सा है। आरोप है कि उन्होंने यात्री के साथ मिलकर टर्मिनल के अंदर सोने को प्राप्त करने या आगे पहुंचाने में मदद की। इसके बदले पहले से तय भुगतान मिलने की बात भी सामने आई है।
यात्री से पूछताछ के दौरान सोने को अपने पास रखने और उसकी तस्करी में शामिल होने से संबंधित जानकारी मिलने का दावा किया गया है। कथित तौर पर उसने खुद को विदेश में सक्रिय एक नेटवर्क के लिए सोना ले जाने वाला माध्यम बताया।
हालांकि, किसी कथित नेटवर्क का वास्तविक आकार, उसके संचालकों की पहचान और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है। इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही हो सकती है।
मुंबई एयरपोर्ट पर हाल के गोल्ड स्मगलिंग मामलों का संदर्भ
मुंबई एयरपोर्ट पर अक्टूबर 2026 में सोने की तस्करी से जुड़े अन्य मामले भी सामने आए हैं। इन घटनाओं का मौजूदा गिरफ्तारी मामले से संबंध स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन वे एयरपोर्ट पर जारी जांच और प्रवर्तन गतिविधियों का महत्वपूर्ण संदर्भ देते हैं।
2 अक्टूबर को Directorate of Revenue Intelligence (DRI) की कार्रवाई में 8.564 किलोग्राम विदेशी मूल का 24 कैरेट सोना जब्त किया गया था, जिसकी कीमत लगभग 12.64 करोड़ रुपये बताई गई। इसी कार्रवाई में 1,168.97 कैरेट हीरे, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 1.09 करोड़ रुपये थी, भी जब्त किए गए और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में एयरपोर्ट कर्मचारी और ट्रांजिट यात्रियों की कथित भूमिका की जांच की गई थी।
इससे पहले 11 अक्टूबर 2025 को Operation Golden Sweep के तहत DRI ने मुंबई एयरपोर्ट पर 10.488 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया था। इसकी कीमत लगभग 12.58 करोड़ रुपये बताई गई थी और कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस कार्रवाई में भी अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों की कथित संलिप्तता सामने आई थी।
इन अलग-अलग मामलों से यह स्पष्ट होता है कि एयरपोर्ट के भीतर सोने के कथित हस्तांतरण और ट्रांजिट यात्रियों के इस्तेमाल की जांच पहले भी की गई है। हालांकि, इन घटनाओं को मौजूदा मामले के एक ही सिंडिकेट से जोड़ने जैसा कोई ठोस सबूत अभी नहीं मिला है।
आगे की जांच में किन सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं?
जांच में अब यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि सोना कहां से लाया गया था, इसे किसे सौंपा जाना था और कथित हस्तांतरण के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था या नहीं। एयरपोर्ट के CCTV फुटेज, उपलब्ध यात्रा रिकॉर्ड और अन्य संबंधित साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।
इसके अलावा, दोनों आरोपियों की अदालत में पेशी, हिरासत की स्थिति और उनके खिलाफ लागू किए गए कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी भी सामने आना बाकी है। Customs Act, 1962 के तहत कार्रवाई की संभावना हो सकती है।
मुंबई के मालाड में फर्जी CID अधिकारी बनकर व्यापारी से ₹26.5 लाख की कथित ठगी हुई। पुलिस ने बैंक खाते की भूमिका के आरोप में बाप-बेटे को गिरफ्तार किया।
मुंबई: मालाड में 55 वर्षीय कपड़ा व्यापारी धनेश शाह से ₹26.5 लाख की कथित साइबर ठगी के मामले में उत्तर क्षेत्रीय साइबर सेल ने बाप-बेटे को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ठगों ने खुद को CID अधिकारी बताकर व्यापारी को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी। जांच में अतुल गायकवाड़ और उनके बेटे विनीत गायकवाड़ से जुड़े एक कथित फर्जी कंपनी के बैंक खाते की भूमिका सामने आई, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अतुल गायकवाड़ (48) और विनीत गायकवाड़ (24) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने कथित साइबर अपराधियों को बैंक खाते की जानकारी उपलब्ध कराई थी, ताकि ठगी से हासिल रकम उसमें जमा की जा सके। मामले में कंपनी के निदेशकों के रूप में अतुल, उनकी पत्नी और विनीत के नाम सामने आए हैं।
फर्जी CID अधिकारी बनकर व्यापारी को गिरफ्तारी की धमकी
शिकायत के मुताबिक, मालाड में Shraddha Garments चलाने वाले धनेश शाह को 27 अगस्त 2026 को एक व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को CID अधिकारी बताया और दावा किया कि आदिल गौर नाम के व्यक्ति के घर पर हुई छापेमारी के दौरान शाह का आधार कार्ड मिला है।
आदिल गौर को पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े एक आरोपी के रूप में पेश करते हुए कॉल करने वाले ने शाह को कथित तौर पर ₹95 करोड़ के घोटाले से जोड़ने की कोशिश की। उसे बताया गया कि उसकी पहचान का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला गया था, जिसके जरिए ₹7 करोड़ के लेन-देन हुए थे।
शाह पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने खाता खुलवाने में मदद करने के बदले ₹5 लाख और 15 प्रतिशत कमीशन लिया था। व्यापारी ने किसी तरह के संबंध से इनकार किया, लेकिन कथित ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर उस पर दबाव बनाए रखा।
वीडियो कॉल पर पूछताछ, परिवार और बैंक खातों की जानकारी मांगी
ठगी को असली जांच जैसा दिखाने के लिए कथित आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ की। इस दौरान शाह से उनके परिवार के सदस्यों, बैंक खातों, सोने और निवेश से जुड़ी जानकारी मांगी गई।
उन्हें सुप्रीम कोर्ट और मुंबई क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों के कथित हस्ताक्षर वाले दस्तावेज भी भेजे गए। इन दस्तावेजों का उद्देश्य आरोपों को विश्वसनीय दिखाना और व्यापारी के मन में गिरफ्तारी का डर पैदा करना बताया गया है।
इसके बाद शाह को परिवार का सोना गिरवी रखने और निर्धारित बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। कथित ठगों ने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी।
गिरफ्तारी के डर से शाह ने निर्देशों का पालन किया और कुल ₹26.5 लाख ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब कॉल करने वालों ने जवाब देना बंद कर दिया और रकम वापस नहीं मिली, तब उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
बैंक खाते की जांच में सामने आई बाप-बेटे की कथित भूमिका
शिकायत मिलने के बाद पुलिस और साइबर सेल ने रकम के लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान ट्रांसफर की गई राशि का संबंध गायकवाड़ परिवार से जुड़े एक निजी बैंक खाते से मिला।
पुलिस के अनुसार, अतुल और विनीत ने कथित तौर पर एक फर्जी कंपनी के नाम पर बैंक खाता खुलवाने और उसकी जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचाने में मदद की थी। इस खाते का इस्तेमाल ठगी से प्राप्त रकम हासिल करने के लिए किया गया।
जांच में विनीत गायकवाड़ को पहले गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसके पिता अतुल गायकवाड़ को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस को संदेह है कि खाते की सुविधा उपलब्ध कराने के बदले आरोपियों को कमीशन मिलता था।
हालांकि, कंपनी का पूरा विवरण, खाते में जमा रकम का आगे कहां ट्रांसफर हुआ, कितनी राशि फ्रीज या बरामद की गई और क्या अन्य लोग भी इस नेटवर्क में शामिल थे, इन सवालों पर अभी स्पष्ट जानकारी सामने आना बाकी है।
मुंबई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी के अन्य मामले
मुंबई में सरकारी जांच एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को डराने और पैसे ट्रांसफर करवाने के दूसरे मामले भी सामने आए हैं।
सितंबर 2026 में दहिसर के एक 68 वर्षीय व्यक्ति से कथित डिजिटल अरेस्ट के जरिए ₹1.12 करोड़ की ठगी के मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी किया गया था। जांच में बैंक खातों और SIM कार्ड के जरिए रकम प्राप्त करने तथा आगे भेजने की कथित भूमिका की पड़ताल की गई थी।
अक्टूबर 2026 में महाराष्ट्र साइबर की तकनीकी जांच और दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय से एक अन्य महिला को कथित डिजिटल अरेस्ट से बचाने की जानकारी भी सामने आई। उस मामले में महिला पहले ही ₹27 लाख ट्रांसफर कर चुकी थी।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी में केवल फर्जी कॉल ही नहीं, बल्कि बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और कथित सरकारी दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
डिजिटल अरेस्ट की धमकी मिले तो क्या करें?
किसी व्यक्ति का खुद को पुलिस, CID, क्राइम ब्रांच या दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताना उसकी पहचान का प्रमाण नहीं है। भारत में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। इसलिए वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगने वालों के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति जांच के नाम पर बैंक खाते, OTP, पासवर्ड, निवेश या परिवार की संपत्ति की जानकारी मांगता है, तो उसकी पहचान संबंधित एजेंसी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से सत्यापित करें। किसी भी कथित जांच को पूरा करने या गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे ट्रांसफर न करें।
अगर साइबर ठगी हो चुकी है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज करें। बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी, UTR नंबर, कॉल रिकॉर्ड और मैसेज को सुरक्षित रखना भी जांच में मददगार हो सकता है।
पुलिस जांच जारी
मामले में धोखाधड़ी, जबरन वसूली और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी और बैंक खाते की कथित भूमिका की जांच के बाद अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण हो गया है, कि ठगी की रकम का आगे क्या हुआ और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
मुंबई के दिंडोशी कोर्ट में पेशी के बाद इब्राहिम साजिद मुजावर पुलिस हिरासत से फरार हो गया। कुरार पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज, तलाश जारी।
मुंबई: गोरेगांव पूर्व के दिंडोशी कोर्ट में पेशी के बाद हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी इब्राहिम साजिद मुजावर पुलिस हिरासत से फरार हो गया। 23 अक्टूबर 2026 को हुई इस घटना के बाद कुरार पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। आरोपी ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी को धक्का दिया, सड़क पार की और ऑटो-रिक्शा से मौके से भाग निकला। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
आर्थर रोड जेल से कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था आरोपी
इब्राहिम साजिद मुजावर को हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी बनाया गया है। यह मामला अंबोली पुलिस स्टेशन से संबंधित बताया गया है। 23 अक्टूबर को उसे आर्थर रोड जेल से जरूरी वारंट के साथ मुंबई के दिंडोशी कोर्ट में पेश करने के लिए लाया गया था।
आरोपी को पश्चिमी उपनगर स्थित दिंडोशी कोर्ट के कोर्ट नंबर 10 में पेश किया जाना था, जहां संबंधित आपराधिक मामले की सुनवाई होनी थी। दोपहर करीब 2 बजे उसकी पेशी हुई।
शाम 4:15 बजे पुलिस हिरासत से भागा
कोर्ट की कार्यवाही पूरी होने के बाद आरोपी को वापस जेल ले जाने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान शाम करीब 4:15 बजे वह पुलिस की हिरासत से फरार हो गया।
पुलिसकर्मी माने के बयान के मुताबिक, आरोपी पुलिस वाहन के पास खड़ा था। तभी उसने अचानक पुलिसकर्मी को धक्का दिया और उसकी हिरासत से निकलकर सड़क पार कर गया। पुलिसकर्मी ने उसे पकड़ने के लिए पीछा करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ऑटो-रिक्शा में बैठकर वहां से निकल गया।
घटना के बाद पुलिस के सामने फरार आरोपी का पता लगाने और उसे दोबारा गिरफ्तार करने की चुनौती खड़ी हो गई।
कुरार पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज
इस घटना को लेकर मलाड पूर्व के कुरार पुलिस स्टेशन में इब्राहिम साजिद मुजावर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोपी की फरारी के संबंध में पुलिसकर्मी के बयान को मामले का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
CCTV फुटेज और पुलिस की कार्रवाई पर नजर
घटना के बाद आरोपी किस रास्ते से गया, ऑटो-रिक्शा की पहचान हुई या नहीं और आसपास लगे CCTV कैमरों से क्या जानकारी मिली, इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है। पुलिस की तलाश के दौरान इन पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण रहेगी।
साथ ही, यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी को वापस ले जाने के दौरान कितने पुलिसकर्मी तैनात थे और क्या इस घटना के संबंध में किसी विभागीय जांच या कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
आरोपी की गिरफ्तारी पर अभी स्पष्ट अपडेट नहीं
आज की ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस इब्राहिम साजिद मुजावर की तलाश कर रही है। उसकी गिरफ्तारी, फरारी में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका और मूल हत्या के प्रयास के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर कोई नया अपडेट नहीं है।
फिलहाल, इस घटना में सबसे अहम सवाल आरोपी की गिरफ्तारी और फरारी के पूरे घटनाक्रम की जांच का है। पुलिस की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक अपडेट से ही साफ हो सकेगा कि आरोपी को कब पकड़ा गया और अदालत परिसर से फरार होने के मामले में आगे क्या कदम उठाए गए।