Category: Crime News

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  • मिस्र में महिला टीवी एंकर समेत 12 लोगों को फांसी की सजा, 750 किलो ड्रग्स ने खोला पूरा राज

    मिस्र में महिला टीवी एंकर समेत 12 लोगों को फांसी की सजा, 750 किलो ड्रग्स ने खोला पूरा राज

    मिस्र में टीवी एंकर सारा ख़लीफ़ा समेत 12 को फांसी की सजा मिली। 750 किलो ड्रग्स, हथियार और डिजिटल सबूतों वाले केस में अब अपील होगी।

    मिस्र: टीवी एंकर और निर्माता सारा ख़लीफ़ा समेत 12 लोगों को ड्रग्स बनाने और उसकी तस्करी के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। काहिरा की आपराधिक अदालत ने शनिवार, 5 सितंबर को यह फैसला सुनाया। अदालत के मुताबिक आरोपियों ने विदेश से नशीले पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल मंगाकर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने और उन्हें बेचने के लिए एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाया था। मामले में 750 किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ और उन्हें बनाने की सामग्री जब्त किए जाने की बात सामने आई है।

    सारा ख़लीफ़ा को उनके अपराध और सुरक्षा से जुड़े टीवी कार्यक्रम ‘मिशन इम्पॉसिबल’ के लिए जाना जाता है। वह इस मामले में खुद को निर्दोष बताती रही हैं। उनके वकील ने फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

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    सारा खलीफा की उसके स्टूडियो में ली गई फाइल तस्वीर

    सारा ख़लीफ़ा को फांसी की सजा क्यों मिली?

    अदालत के सामने अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सारा ख़लीफ़ा और अन्य आरोपियों ने एक संगठित आपराधिक गिरोह बनाया था। इस गिरोह पर विदेश से ऐसे कच्चे माल को मंगाने का आरोप था, जिसका इस्तेमाल सिंथेटिक नशीले पदार्थ बनाने में किया जाता था।

    आरोप केवल ड्रग्स रखने या बेचने तक सीमित नहीं थे। अभियोजन के मुताबिक नेटवर्क पर ड्रग्स के निर्माण, तस्करी और बिना लाइसेंस हथियार व गोला-बारूद रखने के आरोप भी थे। अदालत ने इन्हीं आरोपों में दोषी ठहराए गए 12 लोगों को मौत की सजा सुनाई।

    750 किलो से ज्यादा ड्रग्स और दो ठिकानों पर चल रही थी कथित लैब

    मामले की जांच में अधिकारियों ने 750 किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल बरामद करने का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक दो अपार्टमेंट का इस्तेमाल कथित तौर पर ड्रग्स तैयार करने और रखने के लिए किया जाता था।

    जांच में बिना लाइसेंस हथियार और गोला-बारूद भी बरामद होने की बात सामने आई। यही वजह है कि मामला केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे एक संगठित आपराधिक नेटवर्क के रूप में पेश किया गया।

    अदालत में 20 गवाह और डिजिटल सबूत भी पेश किए गए

    अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 20 गवाहों के बयान पेश किए। इसके अलावा अदालत में तकनीकी और डिजिटल सबूत भी रखे गए, जिनमें संदेश, तस्वीरें और वीडियो शामिल थे।

    अभियोजन का दावा था कि ये सबूत आरोपियों की कथित आपराधिक गतिविधियों को जोड़ते हैं। अदालत ने इन्हीं सबूतों और गवाहियों पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।

    सारा ख़लीफ़ा ने आरोपों पर क्या कहा?

    सारा ख़लीफ़ा ने मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्होंने ड्रग्स पहले कभी नहीं देखे थे और उनका दावा था कि पहली बार उन्हें नशीले पदार्थ तब दिखाई दिए, जब उनकी तस्वीर नशीला पदार्थ विरोधी एजेंसी के कार्यालय में ली गई।

    उनके बचाव पक्ष ने अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। फैसले के बाद उनके वकील ने कहा कि वह तय कानूनी समय सीमा के भीतर अपील दाखिल करेंगे।

    28 आरोपियों में 12 को फांसी, बाकी का क्या हुआ?

    यह मामला कुल 28 आरोपियों का था। अदालत के फैसले के मुताबिक:

    • 12 आरोपियों को मौत की सजा
    • 9 आरोपियों को उम्रकैद
    • 7 आरोपियों को बरी

    यानी अदालत ने सभी आरोपियों को एक जैसा दोषी नहीं माना।

    क्या सारा ख़लीफ़ा को अब तुरंत फांसी दी जाएगी?

    नहीं।

    मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी सारा ख़लीफ़ा और अन्य दोषियों के पास कानूनी अपील का रास्ता है। वे मिस्र की सर्वोच्च आपराधिक अपीलीय अदालत, कोर्ट ऑफ कैसैशन, में फैसले को चुनौती दे सकते हैं।

    मौत की सजा से पहले ग्रैंड मुफ़्ती की राय क्यों ली गई?

    मिस्र में मौत की सजा वाले मामलों में अदालत अंतिम फैसला सुनाने से पहले मामले के कागजात देश के ग्रैंड मुफ़्ती के पास भेजती है। अगस्त में सारा ख़लीफ़ा और अन्य आरोपियों के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी।

    ग्रैंड मुफ़्ती की राय अदालत के लिए सलाहकारी होती है, बाध्यकारी नहीं। इसके बाद अदालत ने 5 सितंबर को अपना फैसला सुनाया।

    सारा ख़लीफ़ा कौन हैं?

    सारा ख़लीफ़ा मिस्र की टीवी एंकर और मीडिया निर्माता हैं। वह ‘मिशन इम्पॉसिबल’ नाम के कार्यक्रम से चर्चा में आई थीं, जिसमें अपराध और सुरक्षा से जुड़े मामले दिखाए जाते थे।

    ड्रग्स मामले में उनकी गिरफ्तारी अप्रैल 2025 में हुई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और मामला मिस्र के चर्चित ‘ग्रैंड ड्रग केस’ के रूप में सामने आया।

    फांसी की सजा वाले मामले के साथ सारा को दूसरी सजा भी मिली

    5 सितंबर को ही सारा ख़लीफ़ा को एक अलग मामले में 3 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई गई। यह मामला एक युवक के साथ कथित मारपीट, उसके कपड़े उतरवाकर वीडियो बनाने और उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार से जुड़ा था।

    मिस्र की स्थानीय अदालत के मुताबिक इस मामले में दूसरे आरोपियों को भी अलग-अलग अवधि की सजा मिली।

    इस मामले में आगे क्या होगा?

    अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम अपील होगा। सारा ख़लीफ़ा के वकील ने साफ कहा है कि मौत की सजा के खिलाफ अपील की जाएगी। इसलिए आने वाले समय में अदालत के सामने यह सवाल होगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहता है, बदलता है या मामले में आगे कोई कानूनी राहत मिलती है।

  • नलदुर्ग किले में 3 बच्चों के साथ कूदी पहलवान अश्विनी, 3 की मौत; FIR में ससुराल पर गंभीर आरोप

    नलदुर्ग किले में 3 बच्चों के साथ कूदी पहलवान अश्विनी, 3 की मौत; FIR में ससुराल पर गंभीर आरोप

    नलदुर्ग किले में राष्ट्रीय पहलवान अश्विनी पौळ ने तीन बच्चों के साथ छलांग लगाई। अश्विनी समेत दो बच्चों की मौत, FIR में ससुराल पर गंभीर आरोप।

    मुंबई: महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के नलदुर्ग किले में राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान अश्विनी मनोहर पौळ ने अपने तीन छोटे बच्चों के साथ उपली बुर्ज से छलांग लगा दी। घटना में अश्विनी, उनके साढ़े पांच साल के बेटे अजिंक्य और ढाई साल की बेटी क्रांति की मौत हो गई। दूसरी बेटी वीरा गंभीर रूप से घायल है और उसका धाराशिव के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक वह वेंटिलेटर पर है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    अश्विनी की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उनके पिता ने पति और ससुराल पक्ष पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के आधार पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

    किले में प्रवेश के समय क्या हुआ था?

    पुलिस जांच से जुड़े ताजा विवरण के मुताबिक अश्विनी 3 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजकर 13 मिनट पर अपने तीनों बच्चों के साथ नलदुर्ग किले में दाखिल हुई थीं। प्रवेश रजिस्टर में उनकी एंट्री दर्ज होने की बात सामने आई है।

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    किले की फाइल तस्वीर

    खबर के अनुसार, प्रवेश के समय उन्होंने पुरातत्व विभाग के कर्मचारी से कहा था कि उनके पति पीछे से आ रहे हैं। हालांकि, पति वास्तव में उनके पीछे किले में पहुंचे थे या नहीं, इसकी पुष्टि अभी जांच का हिस्सा है।

    घटना के बाद पुलिस के सामने यह सवाल भी है कि किले में दाखिल होने के बाद अश्विनी और बच्चों के साथ क्या हुआ और बुर्ज तक पहुंचने के दौरान उनके साथ कौन मौजूद था।

    बच्चों के लिए केक और चॉकलेट भी लाई थीं

    जांच से जुड़े एक और विवरण ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। अश्विनी किले में केक और चॉकलेट लेकर पहुंची थीं। किले में खाने की चीजें ले जाने को लेकर कर्मचारियों ने आपत्ति की तो उन्होंने कथित तौर पर बच्चे का जन्मदिन होने की बात कही।

    बाद की जांच में यह जानकारी सामने आने का दावा किया गया कि उनके तीनों बच्चों में से किसी का जन्मदिन उस दिन नहीं था। हालांकि इस जानकारी का घटना से क्या संबंध है, यह अभी स्पष्ट नहीं है और पुलिस इसकी जांच कर रही है।

    FIR में पति और ससुराल पर क्या आरोप?

    अश्विनी के पिता की शिकायत के बाद सामने आई जानकारी में पति मनोहर पौळ, सास कालिंदा पौळ, ससुर अंकुश पौळ और पति की आत्या विमलाबाई के खिलाफ मामला दर्ज होने की बात कही गई है।

    परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि शादी के बाद अश्विनी को लगातार मानसिक और शारीरिक परेशानी दी जा रही थी। शिकायत में सोने की पाटली और ऑटो रिक्शा खरीदने के लिए पैसे लाने के दबाव जैसे आरोप भी बताए गए हैं। परिवार का दावा है कि इसी तरह के घरेलू तनाव के बीच अश्विनी पिछले कुछ समय से अपने मायके में रह रही थीं।

    इन आरोपों पर पुलिस की जांच जारी है। लेकिन घटना के पीछे के कारणों का पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है।

    राष्ट्रीय स्तर की पहलवान थीं अश्विनी

    अश्विनी पौळ की पहचान सिर्फ इस दर्दनाक घटना से नहीं थी। वह राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान थीं और कुश्ती जगत में उन्हें ‘महाराष्ट्राची वाघीण’ यानी महाराष्ट्र की वाघिन के नाम से जाना जाता था।

    उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 5 स्वर्ण और 6 रजत पदक जीते थे। उनके परिवार का भी कुश्ती से जुड़ाव रहा है।

    खेल के साथ अश्विनी महाराष्ट्र सुरक्षा बल में भी काम कर चुकी थीं। उन्होंने करीब चार से पांच महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। परिवार की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने पति के कहने पर नौकरी छोड़ी थी। इस दावे की भी जांच होनी बाकी है।

    नलदुर्ग किले की सुरक्षा भी सवालों में

    इस घटना के बाद सिर्फ पारिवारिक परिस्थितियों पर ही नहीं, बल्कि नलदुर्ग किले में पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    नलदुर्ग महाराष्ट्र के प्रमुख ऐतिहासिक किलों में शामिल है। जिला प्रशासन के मुताबिक यह विशाल भुईकोट किला करीब ढाई किलोमीटर के घेरे में फैला है और इसमें उपली बुर्ज समेत कई बड़े बुर्ज हैं। उपली बुर्ज किले का सबसे ऊंचा हिस्सा बताया गया है।

    इससे पहले मई 2024 में भी नलदुर्ग किले के उपली बुर्ज से एक 22 वर्षीय नवविवाहिता निलोफर की गिरने से मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वह तस्वीर लेते समय तेज हवा के कारण संतुलन खो बैठी थीं।

    लगातार ऐसी घटनाओं के बाद अब यह सवाल अहम हो गया है कि किले के ऊंचे और जोखिम वाले हिस्सों में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त निगरानी, चेतावनी और रोकथाम के इंतजाम हैं या नहीं।

    नलदुर्ग किले पर पहले से चल रहा है संरक्षण का काम

    नलदुर्ग सिर्फ पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर भी है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार किले में उपली, परांडा और संग्राम जैसे प्रमुख बुर्ज, ऐतिहासिक दरवाजे और प्रसिद्ध पानी महल मौजूद हैं।

    फरवरी 2026 में महाराष्ट्र सरकार ने नलदुर्ग किले के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए 10.38 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए कुल 14.38 करोड़ रुपये की योजना का भी उल्लेख किया गया था।

    अब ताजा घटना के बाद संरक्षण के साथ-साथ पर्यटक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत का सवाल भी सामने आया है।

    पुलिस के सामने अब कई सवाल

    अश्विनी और उनके दो बच्चों की मौत के बाद पुलिस की जांच अब घटना के पूरे घटनाक्रम और उसके पीछे की परिस्थितियों पर केंद्रित है। प्रवेश रजिस्टर में दर्ज समय, पति के किले में आने की बात, परिवार की शिकायत और FIR में लगाए गए आरोपों को जांच में जोड़ा जा रहा है।

    फिलहाल एक बच्ची वीरा की हालत गंभीर है। वहीं अश्विनी और उनके दो बच्चों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां थीं और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों का घटना से कोई संबंध है या नहीं।

  • आदिवासी महिला से बर्बरता, पति समेत 10 पर केस दर्ज, 7 डिटेन

    आदिवासी महिला से बर्बरता, पति समेत 10 पर केस दर्ज, 7 डिटेन

    बांसवाड़ा में आदिवासी महिला के बाल काटकर मारपीट और निर्वस्त्र घुमाने का आरोप है। पति समेत 10 पर केस दर्ज, 7 लोग डिटेन किए गए हैं।

    बांसवाड़ा: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक आदिवासी महिला के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट, बाल काटने और कपड़े फाड़कर गांव में घुमाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। महिला की शिकायत पर पति समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है और 7 लोगों को डिटेन कर पूछताछ की जा रही है। पुलिस वीडियो के आधार पर बाकी लोगों की पहचान भी कर रही है।

    युवक के साथ जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद

    पुलिस के मुताबिक महिला करीब 10 दिन पहले पास के गांव के एक युवक के साथ गई थी। इसके बाद उसके परिजन युवक के घर पहुंचे और महिला को वापस लेकर आए। आरोप है कि इसके बाद पति और उसके परिवार के लोगों ने महिला पर युवक के साथ भागने का आरोप लगाकर उसके साथ मारपीट की।

    हालांकि, महिला ने पुलिस को दिए बयान में अलग वजह बताई है। उसका कहना है कि वह युवक के साथ मजदूरी करने गई थी। पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों और घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    1 सितंबर की घटना, दो दिन बाद सामने आया वीडियो

    पुलिस के अनुसार घटना 1 सितंबर की शाम की बताई जा रही है। इसका वीडियो 3 सितंबर को सामने आया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आया।

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    वीडियो में महिला को सड़क पर नंगे पैर ले जाते हुए बड़ी संख्या में लोग दिखाई दे रहे हैं। भीड़ में कुछ लोगों की आवाजें सुनाई देती हैं, जिनमें महिला के बाल काटने और उसके साथ मारपीट की बात कही जा रही है। इसके बाद महिला के बाल काटे जाने और उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप है।

    महिला की शिकायत के मुताबिक, उसके कपड़े भी फाड़े गए और उसे निर्वस्त्र कर गांव में घुमाया गया। इस दौरान वह खुद को बचाने की कोशिश करती रही। वीडियो में कु8छ लोग घटना को मोबाइल से रिकॉर्ड करते हुए भी दिखाई देते हैं।

    पति समेत 10 लोगों पर मामला, 7 डिटेन

    घटना के बाद महिला थाने पहुंची और पति समेत परिवार की अन्य महिलाओं के खिलाफ मारपीट और अभद्रता की शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पति समेत 10 लोगों को नामजद करते हुए मामला दर्ज किया है।

    थानाधिकारी विनोद कुमार के मुताबिक मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है। 7 लोगों को डिटेन कर पूछताछ की जा रही है। वीडियो में दिखाई देने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    गढ़ी डीएसपी बाबूलाल के मुताबिक महिला को युवक के घर से वापस लाए जाने के बाद उसके साथ मारपीट की गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका रही।

    महिला का मेडिकल कराया गया

    घटना के बाद महिला का मेडिकल कराया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फिलहाल महिला अपने पिता के पास है। पुलिस की जांच में उसके बयान, मेडिकल रिपोर्ट, वीडियो और नामजद आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को अहम माना जा रहा है।

    वीडियो ने भीड़ की भूमिका पर उठाए सवाल

    इस मामले में सिर्फ आरोपियों की भूमिका ही जांच का विषय नहीं है, बल्कि घटना के दौरान मौजूद भीड़ भी सवालों के घेरे में है। वीडियो में कई लोग मौके पर मौजूद दिखाई देते हैं। कुछ लोगों द्वारा घटना को रिकॉर्ड किए जाने की बात भी सामने आई है।

    अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि वीडियो में दिख रहे लोगों में से किसने महिला के साथ मारपीट की, किसने उसके बाल काटे और किन लोगों ने उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करने में भूमिका निभाई।

    महिला पर युवक के साथ जाने का आरोप सही था या वह अपनी मर्जी से मजदूरी के लिए गई थी, यह भी जांच में स्पष्ट होना बाकी है। हालांकि किसी भी आरोप की स्थिति में किसी व्यक्ति को भीड़ के जरिए सजा देने का अधिकार नहीं है।

    मामले में पुलिस की जांच जारी है और वीडियो के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

  • मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    दहिसर में टैक्सी-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 5 आरोपी और 5 वाहन पकड़े। अब पूरे मुंबई में जांच की मांग।

    मुंबई: मुंबई में टैक्सी या रिक्शा में बैठने के बाद मीटर पर दिखने वाला किराया ही यात्री के लिए भरोसे का आधार होता है। लेकिन दहिसर में किराया मीटर के साथ इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दहिसर पुलिस ने मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर किराए में हेरफेर करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पांच वाहन जब्त किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर टैक्सी और रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए छेड़छाड़ कर यात्रियों से निर्धारित किराए से ज्यादा रकम वसूलने का आरोप है। कार्रवाई में दो काली-पिली टैक्सी, दो रिक्शा और एक मारुति आर्टिगा जब्त की गई है।

    एक टैक्सी से खुला मामला, जांच में सामने आए पांच वाहन

    दहिसर पुलिस को टैक्सी और रिक्शा के मीटर में छेड़छाड़ कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन की जांच शुरू की।

    1 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक यात्री को टैक्सी क्रमांक MH 01 CJ 6487 से सफर के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, टैक्सी चालक द्वारा मीटर में छेड़छाड़ किए जाने का संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, बोरीवली भेजा गया।

    आरटीओ की जांच में मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट जैसी डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए मीटर की रीडिंग को प्रभावित कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था।

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को ऐसे ही दूसरे वाहनों की भी जानकारी मिली। इसके बाद कुल पांच वाहनों को जब्त किया गया।

    कौन-कौन से वाहन पकड़े गए?

    पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में ये वाहन जब्त किए गए हैं—

    • काली-पिली टैक्सी — MH 01 CJ 6487
    • काली-पिली रिक्शा — MH 02 DU 0777
    • काली-पिली रिक्शा — MH 03 BY 4268
    • काली-पिली टैक्सी — MH 02 BQ 7392
    • मारुति आर्टिगा — MH 01 EM 6048

    पुलिस ने मीटर में छेड़छाड़ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट को भी जब्त किया है।

    पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

    इस मामले में पुलिस ने जौएब अल्ताफ देशमुख (32), अमीन रमजान पठाण (39), रियाज अब्दुलगनी शेख (45), नाजीर इब्राहिम पटेल (57) और आनंद कुमार नानाकप्रसाद राय (60) के खिलाफ कार्रवाई की है।

    पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    मुंबई के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल

    दहिसर में पांच वाहनों में मीटर से छेड़छाड़ सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ इन पांच वाहनों तक सीमित नहीं है।

    अगर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए किराया मीटर में हेरफेर किया जा सकता है, तो मुंबई के दूसरे इलाकों में चल रहे टैक्सी और रिक्शा के मीटर कितने सुरक्षित हैं?

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मुंबईकर टैक्सी और रिक्शा से सफर करते हैं। यात्री मीटर में दिखाई देने वाली रकम को सही मानकर भुगतान करता है। ऐसे में मीटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ होने पर उसे अतिरिक्त किराया वसूले जाने का पता भी नहीं चल सकता।

    हालांकि, दहिसर के इन पांच वाहनों के मामले से पूरे मुंबई में इस तरह की धोखाधड़ी हो रही है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जांच का मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।

    अब आरटीओ की जवाबदेही पर सवाल

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की भूमिका को लेकर भी है।

    दहिसर पुलिस की कार्रवाई के बाद क्या मुंबई के अलग-अलग इलाकों में टैक्सी और रिक्शा के मीटरों की विशेष जांच की जाएगी?

    क्या आरटीओ यह जांच करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर मीटर की रीडिंग में हेरफेर करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे वाहनों में कहीं हो तो नहीं रहा?

    और अगर ऐसी जांच होती है तो कितने वाहनों के मीटर सही पाए जाते हैं और कितनों में गड़बड़ी सामने आती है, इसकी जानकारी क्या सार्वजनिक की जाएगी?

    इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मीटर में हेरफेर का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। जिसमें, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज एरवडे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सर्जेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अधिकारी मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।

    कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके के साथ पुलिसकर्मी हेमंत बाबुराव दिवारे, सुनील चंद्रकांत राठोड, संतोष काशिनाथ भागवत और ऋषिकेश प्रवीण मोरे शामिल थे। बताया गया कि सबसे पहले इसकी जानकारी सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके को मिली थी जिसके निगरानी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से जांच के निर्देश मिले।

    दहिसर की कार्रवाई ने खोल दिया बड़ा सवाल

    दहिसर पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल पांच वाहनों और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया है। लेकिन इससे मुंबई के परिवहन तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ दहिसर में ही मीटर की ऐसी जांच होगी या आरटीओ पूरे मुंबई में टैक्सी-रिक्शा के मीटरों की व्यापक जांच शुरू करेगा?

    क्योंकि अगर मीटर ही गलत रीडिंग दिखाए, तो यात्री के पास सही किराया जानने का भरोसेमंद आधार क्या बचेगा?

    यही वह सवाल है जिसका जवाब अब मुंबई के यात्रियों को आरटीओ और संबंधित परिवहन अधिकारियों से चाहिए।

  • BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    BMC रिश्वत कांड: ₹70 हजार मांगे, ₹60 हजार पर सौदा; ACB ने इंजीनियर और कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ा

    मुंबई के अंधेरी में BMC के जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी पर ₹60 हजार रिश्वत लेने का आरोप। ACB ट्रैप में गिरफ्तारी, ₹2.78 लाख कैश बरामद।

    मुंबई: अंधेरी पश्चिम के BMC K/West Ward कार्यालय में Anti-Corruption Bureau (ACB) ने रिश्वत के मामले में BMC के एक जूनियर इंजीनियर और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। ACB के मुताबिक, एक बेकरी संचालक से कथित तौर पर ₹70 हजार की रिश्वत मांगी गई थी। बातचीत के बाद ₹60 हजार में सौदा तय हुआ, जिसके बाद ACB ने ट्रैप लगाकर कर्मचारी को रकम लेते हुए पकड़ लिया।

    मामले में जूनियर इंजीनियर नीरवकुमार चुनीलाल जैसूर (43) और BMC कर्मचारी विजय रमेश पाटील (46) को आरोपी बनाया गया है।

    बेकरी पर कार्रवाई रोकने के बदले रिश्वत का आरोप

    ACB के मुताबिक, शिकायतकर्ता 50 वर्षीय बेकरी संचालक है। आरोप है कि पाटील ने उससे ₹70 हजार मांगे थे। कथित तौर पर यह रकम बेकरी को चलाने देने और उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने के बदले मांगी गई थी।

    शिकायत मिलने के बाद ACB ने रिश्वत की मांग की पुष्टि की। इसी दौरान पाटील ने शिकायतकर्ता की मुलाकात जूनियर इंजीनियर जैसूर से कराई। इसके बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम ₹70 हजार से घटकर ₹60 हजार तय हुई।

    ₹60 हजार लेते ही ACB का ट्रैप

    रकम तय होने के बाद ACB ने K/West Ward कार्यालय में ट्रैप लगाया।

    ACB के अनुसार, विजय पाटील को ₹60 हजार स्वीकार करते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद जांच टीम ने BMC के छठी मंजिल स्थित कार्यालय से जूनियर इंजीनियर जैसूर को भी हिरासत में लिया।

    दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    कर्मचारी के पास ₹2.78 लाख कैश मिला

    ट्रैप के बाद ACB ने पाटील की तलाशी ली। उसके पास से ₹40,820 नकद और बैग से ₹2,37,600 नकद बरामद हुआ।

    इस तरह कुल ₹2,78,420 कैश मिला।

    तीन मोबाइल फोन भी जब्त

    ACB ने मामले में मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जूनियर इंजीनियर जैसूर के दो मोबाइल फोन और पाटील का एक मोबाइल फोन जांच के लिए लिया गया है।

    अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वत की मांग और लेन-देन में दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।

    अब आगे क्या होगा?

    ACB की कार्रवाई के बाद मामले की जांच जारी है। इस केस में सबसे अहम सवाल अब यह है कि ₹2.78 लाख की अतिरिक्त नकदी का स्रोत क्या था और क्या उसका कथित रिश्वत प्रकरण से कोई संबंध सामने आता है।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि ACB ने ₹60 हजार की कथित रिश्वत के ट्रैप में BMC के दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है।

  • मुंबई में जज की SUV रोककर ‘न्यायाधीश’ प्लेट का बनाया वीडियो, विरोध पर जान से मारने की धमकी

    मुंबई में जज की SUV रोककर ‘न्यायाधीश’ प्लेट का बनाया वीडियो, विरोध पर जान से मारने की धमकी

    मुंबई के दादर में MACT सदस्य शशिकांत बांगर की SUV रोककर दो लोगों ने ‘Nyayadhish’ प्लेट की रिकॉर्डिंग की और धमकी दी। पुलिस ने FIR दर्ज की।

    मुंबई: दादर में Motor Accident Claims Tribunal (MACT) के सदस्य शशिकांत एकनाथराव बांगर की SUV रोककर दो अज्ञात लोगों द्वारा कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। दोनों ने कार के dashboard पर लगी ‘Nyayadhish’ प्लेट को लेकर सवाल किए। विरोध करने पर कथित तौर पर जज और उनकी पत्नी से गाली-गलौज की गई और एक व्यक्ति ने उन्हें धक्का देने की कोशिश भी की। मामले में Matunga Police ने दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दादर में आखिर हुआ क्या था?

    मामला 13 जुलाई की रात करीब 10.15 बजे का है। 54 वर्षीय शशिकांत बांगर अपनी पत्नी और बेटी के साथ दादर इलाके में थे। बेटी को छोड़ने के बाद जब वे Dadar TT में Irani Mansion के पास से लौट रहे थे, तभी दो लोगों ने कथित तौर पर उनकी SUV का रास्ता रोक लिया। इसके बाद दोनों उनकी गाड़ी की फोटो और वीडियो बनाने लगे।

    बांगर की शिकायत के मुताबिक, दोनों का खास ध्यान dashboard पर रखी ‘Nyayadhish’ प्लेट पर था। उन्होंने सवाल किया कि गाड़ी पर यह प्लेट क्यों लगाई गई है और इसे लगाने की अनुमति किसने दी है।

    बांगर ने उन्हें बताया कि वह District Judge और MACT के सदस्य हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वाहन का इस्तेमाल residence और court के बीच official travel के लिए किया जाता है और वाहन की जानकारी Bombay High Court को दी गई है। इसके बाद भी दोनों कथित तौर पर आक्रामक हो गए।

    पत्नी से भी गाली-गलौज, जज को धक्का देने की कोशिश

    शिकायत के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर दोनों लोगों ने जज और उनकी पत्नी के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की। जब उनकी पत्नी और मौके पर मौजूद एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की, तो एक आरोपी ने बांगर को धक्का देने की कोशिश की।

    बांगर ने दोनों को शांत होने के लिए कहा और पुलिस को बुलाकर अपनी पहचान तथा वाहन की जानकारी verify कराने की बात कही। उन्होंने emergency helpline नंबर 100 और 112 से संपर्क करने की भी कोशिश की। आरोप है कि दोनों लोगों ने पुलिस से संपर्क करने की कोशिश का भी विरोध किया।

    इसके बाद दोनों कथित तौर पर वहां से निकल गए। शिकायत के आधार पर Matunga Police ने मामले की जांच शुरू की है। आरोपियों की पहचान और इस पूरे विवाद की वजह फिलहाल पुलिस की जांच का विषय है।

    50 दिन बाद सामने आया मामला

    इस घटना की शिकायत 1 सितंबर को Matunga Police में की गई, यानी 13 जुलाई की घटना के करीब 50 दिन बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को दो अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। उपलब्ध रिपोर्टों में शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है।

    FIR में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 126(2), 130, 3(5), 351(3) और 352 लगाई गई हैं। इन धाराओं में रास्ता रोकने, assault से जुड़े आचरण, common intention, गंभीर criminal intimidation और जानबूझकर अपमान जैसे आरोपों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

    पुलिस अब आरोपियों तक कैसे पहुंचेगी?

    Matunga Police के मुताबिक, आरोपियों की पहचान अभी नहीं हुई है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस घटना वाली जगह और आसपास के CCTV footage के साथ दूसरे available evidence को verify कर रही है।

    शिकायत में बांगर ने एक आरोपी के बारे में बताया कि उसने dark-coloured checked shirt पहनी थी और motorcycle पर था। यह जानकारी CCTV और दूसरे evidence के साथ मिलाकर आरोपियों की पहचान करने में इस्तेमाल की जा सकती है।

    ‘Nyayadhish’ प्लेट पर इतना विवाद क्यों हुआ?

    इस मामले की सबसे अहम कड़ी यही प्लेट बनी। आरोपियों ने कथित तौर पर इसी को लेकर सवाल शुरू किए और पूछा कि इसे लगाने की अनुमति किसने दी।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस particular SUV पर ‘Nyayadhish’ प्लेट लगाने की अनुमति किस नियम या आदेश के तहत थी। बांगर ने पुलिस को बताया है कि वाहन की details Bombay High Court को submitted थीं। इसलिए इस मामले में दो अलग सवाल हैं—आरोपियों ने प्लेट पर आपत्ति क्यों की और वाहन पर ऐसी पहचान प्रदर्शित करने की official व्यवस्था क्या थी। इन दोनों बातों का अंतिम जवाब पुलिस की जांच या संबंधित judicial authorities की पुष्टि के बाद ही साफ होगा।

    शशिकांत बांगर कौन हैं?

    शशिकांत एकनाथराव बांगर judicial officer हैं। उपलब्ध court records में उनका नाम Mumbai City Civil & Sessions Court में Special Judge under the Prevention of Corruption Act के रूप में दर्ज है। National Judicial Academy के रिकॉर्ड में भी उन्हें District Judge और Additional Sessions Judge के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। वर्तमान घटना में वे Motor Accident Claims Tribunal से जुड़े judicial officer के तौर पर शिकायतकर्ता हैं।

    अब आगे क्या?

    फिलहाल FIR दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ है। उनकी पहचान, घटना के पीछे की वजह और क्या दोनों ने किसी योजना के तहत जज की गाड़ी को रिकॉर्ड किया था—इन सवालों का जवाब CCTV और दूसरे evidence की जांच के बाद सामने आएगा।

    एक और अहम बात यह है कि पुलिस से मिली जानकारी में अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच जारी है और फिलहाल सबसे ज्यादा नजर CCTV footage से दोनों की पहचान होने, उनकी motorcycle/route की जानकारी मिलने और ‘Nyayadhish’ प्लेट को लेकर हुए विवाद की असली वजह सामने आने पर है।

  • 10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।

    जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।

    ₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी

    इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।

    APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।

    साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।

    YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक

    पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।

    इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।

    Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?

    पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।

    सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।

    Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।

    1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं

    इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।

    पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।

    Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।

    rdpwale.in पर आज भी दिख रही हैं RDP services

    जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

    MGL के नाम पर पहले भी हो चुकी है बड़ी ठगी

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।

    अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।

    यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

    Laptop और mobile से खुलेगा आगे का राज

    पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।

    अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel का वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हुई। युवक पुलिस वाहन के अंदर कैसे पहुंचा, चाबी और CCTV पर सवाल हैं।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Instagram Reel बनाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है। वायरल वीडियो में एक युवक पुलिस की गाड़ी की ड्राइवर सीट पर बैठकर स्टीयरिंग पकड़े नजर आ रहा है। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि वह पुलिस वाहन के अंदर पहुंचा कैसे?

    वीडियो में क्या दिखा?

    वायरल क्लिप में युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर कैमरे के लिए पोज करता दिखाई देता है। वीडियो में “Daddy’s Home” ऑडियो इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन रिपोर्ट्स में वीडियो को Instagram अकाउंट @harijan6282 से जोड़ा गया है और युवक का नाम विजय हरिजन बताया गया है। हालांकि, उसकी पुलिस से किसी तरह की आधिकारिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है।

    वायरल हो रहा यह वीडियो Instagram पर अब उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद वीडियो डिलीट कर दिया गया। जबकि वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में एक युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर Reel बनाता नजर आता है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहे हैं कि उसे पुलिस वाहन के अंदर जाने की अनुमति कैसे मिली और वाहन की चाबी उसके पास कैसे पहुंची।

    चाबी किसके पास थी?

    इस मामले में सिर्फ Reel बनाना मुद्दा नहीं है। बड़ा सवाल पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी तक पहुंच का है।

    अगर युवक पुलिसकर्मी नहीं था, तो वह वाहन के अंदर कैसे पहुंचा? क्या SUV उस समय लॉक थी? चाबी किसके पास थी? वाहन किसकी ड्यूटी में था और क्या किसी ने उसे अंदर जाने की अनुमति दी?

    इन सवालों के जवाब CCTV फुटेज, वाहन की ड्यूटी एंट्री और संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ के जरिए सामने आ सकते हैं।

    वीडियो में युवक को ड्राइवर सीट पर बैठे देखा जा सकता है, लेकिन वह वाहन चला रहा था, ऐसा साबित करने वाला कोई स्पष्ट दृश्य सामने नहीं आया है।

    पुलिस के सोशल मीडिया नियम भी अहम

    फरवरी 2026 में मुंबई पुलिस ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। करीब 51,000 पुलिसकर्मियों को जारी आदेश में वर्दी में Reels और mini-vlogs बनाने पर रोक लगाई गई थी। पुलिस ने इसकी वजह सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े जोखिम बताए थे, क्योंकि ऐसे वीडियो में सरकारी वाहन, पुलिस परिसर और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

    महाराष्ट्र सरकार ने 2025 में सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें सरकारी वाहन और संपत्ति को निजी सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाने को लेकर नियम शामिल थे।

    पुलिस वाहन की निगरानी पर फिर सवाल

    मुंबई में हाल ही में Coastal Road पर पुलिस वाहन से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया था। जहां एक पुलिस वाहन कथित तौर पर बिना निगरानी रह गया था और उसकी चाबी वाहन में थी। बाद में वाहन को लेकर घटना हुई और CCTV की जांच की गई।

    दोनों मामले अलग हैं, लेकिन इनके सामने आने से पुलिस वाहनों की चाबी, custody और निगरानी को लेकर सवाल जरूर उठे हैं।

    जांच में अब क्या साफ होना बाकी?

    जांच में सबसे पहले वाहन की पहचान, घटना की जगह और समय तथा उस वक्त वाहन किस पुलिसकर्मी के जिम्मे था, यह स्पष्ट होना जरूरी है। इसके साथ CCTV, वाहन रिकॉर्ड और चाबी की स्थिति से यह पता चल सकता है कि युवक को SUV तक पहुंच कैसे मिली।

    अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या अनुमति सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, अगर युवक ने बिना अनुमति पुलिस वाहन में प्रवेश किया था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल FIR, गिरफ्तारी या किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही है—पुलिस की पेट्रोलिंग SUV तक युवक पहुंचा कैसे और उस वक्त वाहन की जिम्मेदारी किसके पास थी?

  • PNB में ₹17 करोड़ के जाली नोट का मामला, 3 मैनेजर सस्पेंड; जानें ग्राहकों के पैसे और बैंकिंग सेवाओं पर असर

    PNB में ₹17 करोड़ के जाली नोट का मामला, 3 मैनेजर सस्पेंड; जानें ग्राहकों के पैसे और बैंकिंग सेवाओं पर असर

    PNB की करेंसी चेस्ट में जाली नोटों का मामला करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचा। 3 मैनेजर सस्पेंड हैं और SIT जांच कर रही है। ग्राहकों पर असर जानें।

    उत्तरप्रदेश: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों का मामला अब करीब ₹17 करोड़ तक पहुंच गया है। शुरुआती जांच में ₹7.40 करोड़ के जाली नोट मिले थे, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ रकम बढ़ती गई। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है और करेंसी चेस्ट से जुड़े तीन PNB अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

    इस खबर के बाद PNB ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले का उनके खाते में जमा पैसे या रोजमर्रा की banking services पर कोई असर पड़ेगा।

    पहले ₹7.40 करोड़ मिले, फिर आंकड़ा करीब ₹17 करोड़ पहुंचा

    मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित PNB की सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट का है। शुरुआती जांच में 148 बंडल जाली नोट मिले थे। हर बंडल में ₹500 के 1,000 नोट थे, जिससे पहली गिनती में रकम ₹7.40 करोड़ निकली।

    जांच और गिनती आगे बढ़ने के बाद जाली नोटों की कुल रकम करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की बात सामने आई है। यही इस मामले का latest reported figure है।

    तीन PNB मैनेजर सस्पेंड, FIR दर्ज

    मामले में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और खेरा बाजार-जगाधरी करेंसी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार को निलंबित किया गया है। PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की शिकायत पर तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

    करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने वाले पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को भी काम से हटा दिया गया है। पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है।

    FIR और suspension जांच के दौरान हुई कार्रवाई है। इससे किसी व्यक्ति की भूमिका या दोष अंतिम रूप से साबित नहीं माना जा सकता।

    असली नोट निकालकर जाली नोट रखने की आशंका

    जांच में यह आशंका सामने आई है कि करेंसी चेस्ट में जाली नोट जमा कर उनके बदले असली नोट निकाले गए हो सकते हैं। अभी यह जांच का हिस्सा है और इसे अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना गया है।

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और अगर असली करेंसी निकाली गई तो उसका पूरा cash trail क्या है।

    CCTV फुटेज से क्या सामने आया?

    पुलिस करेंसी चेस्ट की CCTV फुटेज खंगाल रही है। फुटेज में हाउसकीपर विशाल कुमार को नोटों की गड्डियों से रुपये निकालते हुए दिखाई देने की बात सामने आई है। उसे करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियां व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी मिली थी।

    हालांकि CCTV में दिखाई देने वाली गतिविधि की पूरी भूमिका और उसका जाली नोटों के मामले से संबंध जांच का विषय है।

    SIT के सामने अब क्या सवाल हैं?

    SIT और पुलिस के सामने अब मुख्य सवाल हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और cash handling के दौरान वे पकड़े क्यों नहीं गए।

    जांच में करेंसी चेस्ट के records, CCTV footage और संबंधित कर्मचारियों-अधिकारियों की भूमिका को देखा जा रहा है। पुलिस नामजद आरोपियों की तलाश में हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के जिलों में दबिश दे रही है। जांच आगे बढ़ने पर दूसरे बैंक अधिकारियों और शाखा प्रबंधकों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

    सहारनपुर रेंज के DIG अभिषेक सिंह ने बताया कि करेंसी चेस्ट से जरूरी दस्तावेज लिए गए हैं और जाली नोट कहां से आए, इसकी भी जांच की जा रही है।

    PNB ग्राहकों के पैसे पर क्या असर?

    देशभर के PNB ग्राहकों के लिए फिलहाल ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि इस मामले के कारण उनके savings या current account में जमा रकम पर कोई सीधा असर पड़ा है।

    मामला एक specific currency chest में cash और counterfeit notes की जांच से जुड़ा है। इसलिए इसे PNB के सभी ग्राहकों के account balance या देशभर की banking services पर असर के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    क्या PNB की banking services बंद होंगी?

    नहीं, देशभर में PNB की सामान्य banking services बंद होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    हालांकि सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट से नकदी का लेन-देन फिलहाल बंद है। जांच पूरी होने तक विभिन्न PNB शाखाओं का cash-related काम गंगोह करेंसी चेस्ट के जरिए संभालने की व्यवस्था की गई है।

    इसका मतलब यह है कि असर local cash operations पर है, PNB की nationwide banking services पर नहीं।

    PNB ग्राहक को अभी क्या करना चाहिए?

    अगर किसी ग्राहक को कोई नोट नकली या संदिग्ध लगता है तो उसे आगे किसी दूसरे व्यक्ति को payment में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसे नोट को बैंक में दिखाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच कराई जा सकती है।

    सिर्फ इस घटना की वजह से PNB ग्राहक को अपना account बंद करने, पैसा निकालने या सामान्य digital banking transactions रोकने की जरूरत का कोई verified निर्देश सामने नहीं आया है।

    अब नजर किस पर है?

    अब जांच का फोकस तीन चीजों पर है—जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे, असली करेंसी का क्या हुआ और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

    शुरुआत ₹7.40 करोड़ के जाली नोटों से हुई थी और जांच बढ़ने के साथ यह रकम करीब ₹17 करोड़ तक पहुंची है। आगे की जांच से इस रकम का पूरा हिसाब, जाली नोटों का source और संभावित cash trail ज्यादा साफ होने की उम्मीद है।

  • Malad Road Accident: 65 साल के ड्राइवर पर केस, महिला की मौत; थाने में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

    Malad Road Accident: 65 साल के ड्राइवर पर केस, महिला की मौत; थाने में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

    Malad Road Accident में महिला की मौत के बाद 65 वर्षीय ड्राइवर गिरफ्तार हुआ। पुलिस स्टेशन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों ने मामले को और गरमा दिया है।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में 30 अगस्त की रात हुए सड़क हादसे के मामले में 65 वर्षीय कार ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, मामलतदार वाडी जंक्शन पर कार ने एक स्कूटर और इसके बाद तीन ऑटो रिक्शा को टक्कर मारी, जिसमें प्रियंका शाह की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। वहीं, आरोपी को पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर VIP सुविधाएं दिए जाने के आरोपों ने अब हादसे के साथ-साथ पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मामलेदार वाडी जंक्शन पर कैसे हुआ हादसा?

    पुलिस के मुताबिक, हादसा 30 अगस्त की रात करीब 8 बजे मालाड वेस्ट के मामलेदार वाडी जंक्शन पर हुआ। उस वक्त Mayank Satra अपनी पत्नी Priyanka Satra के साथ Activa स्कूटर पर थे और दोनों ट्रैफिक सिग्नल पर रुके हुए थे।

    पुलिस का आरोप है कि कृष्ण चमनाकर नाम के 65 वर्षीय ड्राइवर ने कथित तौर पर तेज और लापरवाही से कार चलाते हुए स्कूटर को टक्कर मारी। इसके बाद कार तीन अन्य ऑटो रिक्शा से भी जा टकराई। हादसे में कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई। प्रियंका सातरा को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई।

    आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार, इन धाराओं में केस

    प्रियंका सातरा के परिवार की शिकायत के आधार पर मालाड पुलिस ने आरोपी कृष्ण चमनाकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार उस पर BNS की धारा 106(1), 281 और 125(A)(B) के साथ Motor Vehicles Act की धारा 184 के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है।

    अब पुलिस स्टेशन में ‘VIP ट्रीटमेंट’ के आरोप क्यों?

    हादसे के बाद मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों की तरफ से मालाड पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित तौर पर विशेष व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

    आरोपों में कहा गया है कि आरोपी को लॉकअप में मोबाइल इस्तेमाल करने दिया गया, बैठने के लिए कुर्सी दी गई और बाद में उसे पुलिस स्टेशन के पीछे एक AC कमरे में बैठाए जाने की बात सामने आई। यह भी दावा किया गया कि मेडिकल जांच के नाम पर आरोपी को लॉकअप से बाहर ले जाया गया और परिजनों को उसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

    इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध पुलिस बयान से नहीं हुई है। इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इस मामले में पुलिस की ओर से कथित VIP सुविधाओं पर कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने तक इन दावों को पुख्ता तथ्य मानना सही नहीं होगा।

    ‘20 लोगों को रौंदने’ के दावे पर क्या सामने आया?

    इस घटना को लेकर अब तक की जानकारी में 20 लोगों के चपेट में आने और दो लोगों की मौत का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्ट में हादसे में एक महिला की मौत, स्कूटर और तीन ऑटो रिक्शा के क्षतिग्रस्त होने तथा कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जांच के बाद मामला साफ होने की गुंजाइश जताई जा रहीं है।

    अब नजर पुलिस की जांच पर

    फिलहाल सबसे अहम दो पहलू हैं—हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच और पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित विशेष व्यवहार की शिकायतों की जांच।

    सड़क हादसे के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया है। वहीं, अगर पुलिस स्टेशन में मोबाइल, AC कमरे या अन्य विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

    पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज समेत उपलब्ध सबूतों की जांच की जाए। अब आगे की कार्रवाई और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया से यह साफ होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।