Category: Crime News

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  • मुंबई पुलिसकर्मी सस्पेंड, छात्रों को ड्रग्स केस की धमकी

    मुंबई पुलिसकर्मी सस्पेंड, छात्रों को ड्रग्स केस की धमकी

    मुंबई में छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाला पुलिस ड्राइवर सस्पेंड, वायरल वीडियो पर जांच शुरू।

    मुंबई: NEET धोखाधड़ी के खिलाफ मुंबई में प्रदर्शन कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर फर्जी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने वाले पुलिस ड्राइवर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। वायरल वीडियो के बाद मुंबई पुलिस ने विभागीय जांच के आदेश दिए और संबंधित पुलिसकर्मी को सस्पेंड कर दिया है। वीडियो में छात्रों को दोबारा प्रदर्शन करने पर उनके बैग में ड्रग्स रखने की धमकी दिए जाने का आरोप है।

    मुंबई में NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी छात्र प्रदर्शनों के बीच एक वायरल वीडियो ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर हिरासत में लिए गए छात्रों को दोबारा प्रदर्शन में शामिल होने पर उनकी जिंदगी बर्बाद करने और उन्हें ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देता सुनाई दे रहा है।

    मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू की और संबंधित पुलिस ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की। खबर के मुताबिक, पुलिसकर्मी की पहचान पवन सांगले के रूप में हुई है, जो मुंबई पुलिस के Motor Transport विभाग से जुड़े ड्राइवर हैं और सायन पुलिस स्टेशन से अटैच बताए गए हैं।

    वायरल वीडियो में छात्रों को क्या कहते सुनाई दे रहा है?

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस वाहन के अंदर मौजूद एक पुलिसकर्मी छात्रों को कथित तौर पर प्रदर्शन में दोबारा नहीं आने की चेतावनी देता सुनाई दे रहा है।

    वीडियो में वह कथित रूप से कहता है कि अगर छात्र दोबारा प्रदर्शन में दिखाई दिए तो उनके बैग या जेब में “50 ग्राम पाउडर” रखकर उन्हें ड्रग्स केस में फंसाया जा सकता है। वह यह भी कहता सुनाई देता है कि ऐसी कार्रवाई से छात्रों की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी और उन्हें जमानत मिलने में परेशानी होगी।

    हालांकि, वायरल वीडियो की परिस्थितियों और उसके पूरे संदर्भ की जांच आधिकारिक जांच का विषय है। इसलिए वीडियो में कही गई बातों को पुलिसकर्मी के खिलाफ अंतिम रूप से साबित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि वायरल वीडियो में दिखाई और सुनाई दे रहे कथित बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

    मुंबई पुलिस ने जांच के आदेश दिए, पुलिस ड्राइवर सस्पेंड

    वीडियो सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच पूरी होने तक संबंधित ड्राइवर को उसकी मौजूदा पोस्टिंग से हटाया गया है। बाद में उसके सस्पेंड किए जाने की जानकारी दी गई।

    मिली जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मी का नाम पवन सांगले बताया गया है। वह मुंबई पुलिस के Motor Transport विभाग से जुड़े ड्राइवर हैं। वह प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ड्यूटी पर तैनात थे।

    फिलहाल, विभागीय जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि वीडियो में कही गई धमकी किन परिस्थितियों में दी गई, वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि क्या थी और क्या पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे कोई अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी।

    वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया

    वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और अन्य राजनीतिक संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। कांग्रेस की मुंबई इकाई ने आरोप लगाया कि अगर वीडियो में दिखाई दे रही घटना सही है, तो यह छात्रों को डराने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने का गंभीर मामला है।

    आम आदमी पार्टी और Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े लोगों ने भी वीडियो को लेकर पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को संबंधित दलों के आरोप और बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    मुंबई में छात्र प्रदर्शनों के बीच बढ़ा विवाद

    मुंबई में हाल के दिनों में छात्रों और समर्थकों ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर विवाद बढ़ा है।

    मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक शहर में पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर रोक लगाने वाला आदेश भी जारी किया था। आदेश में जुलूस और कुछ अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। यह आदेश DCP (Operations) अकबर पठान द्वारा जारी किया गया था।

    इसी पृष्ठभूमि में वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर सार्वजनिक बहस और तेज हो गई है।

    अब जांच के नतीजे पर नजर

    मुंबई पुलिस की विभागीय जांच इस पूरे मामले में अहम होगी। जांच के दौरान वीडियो की प्रामाणिकता, घटना का पूरा संदर्भ और संबंधित पुलिसकर्मी के आचरण की जांच की जाएगी।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वायरल वीडियो के बाद संबंधित पुलिस ड्राइवर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है और उसे सस्पेंड किया गया है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

    इस मामले ने प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस व्यवहार और कानून के संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय विभागीय जांच के नतीजे का इंतजार करना जरूरी है। मुंबई पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले के सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

    Official Sources

  • आयशा खान हिरासत में, मुंबई पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    आयशा खान हिरासत में, मुंबई पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    आयशा खान ने दावा किया कि मुंबई पुलिस ने उन्हें बिना वजह हिरासत में लिया और जबरदस्ती पुलिस वैन में खींचा। जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: एक्ट्रेस और धुरंधर फेम आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयशा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर कर दावा किया कि उन्हें, उनके भाई और कुछ दोस्तों को बिना किसी स्पष्ट वजह के हिरासत में लिया गया। एक्ट्रेस के मुताबिक, वे सड़क किनारे शांतिपूर्वक खड़ी थीं और किसी तरह का प्रदर्शन या हंगामा नहीं कर रही थीं।

    आयशा खान ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में बैठाया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    आयशा खान ने सोशल मीडिया पर शेयर किए कई वीडियो

    आयशा खान ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई वीडियो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने हिरासत में लिए जाने की पूरी घटना के बारे में बताया। एक वीडियो में एक्ट्रेस काफी परेशान और घबराई हुई नजर आ रही हैं।

    आयशा का दावा है कि उनके हाथ डर और गुस्से की वजह से कांप रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कोई विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और न ही कोई हंगामा किया था। उनके मुताबिक, वे केवल सड़क किनारे खड़ी थीं।

    एक्ट्रेस ने दावा किया कि उनके भाई और कुछ पुरुष दोस्तों को हिरासत में लिए जाने के बाद वह वहां मौजूद थीं। इसके बाद उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

    वर्ली पुलिस स्टेशन से आयशा ने शेयर किया वीडियो

    आयशा खान ने वर्ली पुलिस स्टेशन से भी एक वीडियो शेयर किया। उनके मुताबिक, यह कार्रवाई CJP के विरोध प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के दौरान हुई।

    एक्ट्रेस ने दावा किया कि वह, उनका भाई और उनके दोस्त शांतिपूर्वक खड़े थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो नारे लगाए और न ही कोई गैर-कानूनी गतिविधि की।

    हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए आयशा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

    पुलिस वैन में मौजूद छात्र ने भी बताई परेशानी

    आयशा द्वारा शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में पुलिस वैन में मौजूद एक छात्र अपनी परेशानी बताते हुए नजर आया।

    छात्र ने कहा कि उसका मैथ्स का प्रैक्टिकल एग्जाम था और उसे बिना किसी गलती के हिरासत में लिए जाने की चिंता थी। उसने आशंका जताई कि अगर वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, तो इसका असर उसकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।

    वीडियो में छात्र की चिंता साफ नजर आ रही थी। हालांकि, छात्र की पहचान और हिरासत में लिए जाने की आधिकारिक वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

    आयशा ने पुलिस से पूछा- हमें कहां ले जाया जा रहा है?

    एक अन्य क्लिप में आयशा खान पुलिस वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछती दिखाई दीं कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।

    आयशा का दावा है कि उनके सवालों का उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस वजह से उनकी चिंता और बढ़ गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पूरी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।

    चार महिला पुलिसकर्मियों द्वारा वैन में ले जाने का वीडियो शेयर

    आयशा खान ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें कुछ महिला पुलिसकर्मी उन्हें पुलिस वैन के अंदर ले जाती दिखाई दे रही हैं।

    इस वीडियो के साथ एक्ट्रेस ने सवाल उठाया कि अगर उन्होंने कोई हंगामा या बहस नहीं की थी, तो उन्हें इस तरह अंदर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि केवल सड़क पर खड़े होने के लिए उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया।

    आयशा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और दावा किया कि उन्होंने किसी तरह का विरोध या गैर-कानूनी काम नहीं किया था।

    पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में आयशा खान की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मुख्य आधार हैं। मुंबई पुलिस की ओर से हिरासत की वजह, कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

    आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर बिना स्पष्ट वजह हिरासत में लेने और जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाने का आरोप लगाया है। एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर सवाल उठाए हैं। फिलहाल पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

    FAQ

    क्या आयशा खान को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था?

    आयशा खान ने सोशल मीडिया वीडियो के जरिए दावा किया है कि उन्हें, उनके भाई और दोस्तों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस की ओर से इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं है।

    आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर क्या आरोप लगाए?

    आयशा खान ने आरोप लगाया कि वह शांतिपूर्वक सड़क किनारे खड़ी थीं, फिर भी उन्हें हिरासत में लिया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाया।

    आयशा खान को किस पुलिस स्टेशन ले जाया गया?

    आयशा खान द्वारा शेयर किए गए वीडियो के अनुसार, उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

  • Jhansi News: मुंबई कोर्ट के नाम पर कारोबारी से 51 लाख की ठगी

    Jhansi News: मुंबई कोर्ट के नाम पर कारोबारी से 51 लाख की ठगी

    Jhansi News: मुंबई की बोरीवली कोर्ट में पेपर सप्लाई का ऑर्डर दिलाने के नाम पर कारोबारी से 51 लाख की कथित ठगी, पांच पर FIR।

    झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक कारोबारी से मुंबई की बोरीवली मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेपर सप्लाई का बड़ा ऑर्डर दिलाने के नाम पर 51.62 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि खुद को कोर्ट का परचेज अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कारोबारी से करीब 17 हजार पेपर की सप्लाई कराई और भुगतान के बदले फर्जी चेक दिए। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    झांसी के कोतवाली क्षेत्र में सराय जामा मस्जिद के पास रहने वाले कारोबारी मोहम्मद इरशाद की मोहम्मद एंटरप्राइजेज नाम से फर्म है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 24 अप्रैल को उनके पास एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को मुंबई की बोरीवली मजिस्ट्रेट कोर्ट का परचेज अधिकारी बताया। उसने कोर्ट के लिए बड़ी मात्रा में पेपर की जरूरत होने की बात कही और जेम पोर्टल के जरिए खरीदारी की जानकारी दी।

    बड़े ऑर्डर का झांसा देकर कराई पेपर की सप्लाई

    शिकायत के मुताबिक, कारोबारी ने कम दरों का हवाला देते हुए सीधे सप्लाई करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद कथित आरोपी ने उनसे कोटेशन मंगवाया और उसे मंजूर होने की जानकारी दी। इसके बाद पेपर सप्लाई का ऑर्डर देने की बात कही गई।

    आरोप है कि इसके बाद कारोबारी को एक परिचित वेंडर से तत्काल माल उपलब्ध कराने के लिए संपर्क कराया गया। कारोबारी ने इस भरोसे पर करीब 51.62 लाख रुपये की लागत से लगभग 17 हजार पेपर खरीदकर सप्लाई कर दिए।

    भुगतान के नाम पर दिए गए चेक नहीं हुए क्लियर

    मामले में आरोप है कि रौनक एंटरप्राइजेज के पार्टनर द्रिवेंद्र पाठक के कहने पर आफरीन हुसैन सैयद के खाते में 33.36 लाख रुपये का भुगतान कराया गया। वेंडर की ओर से माल भेजे जाने की पुष्टि भी की गई और कथित तौर पर निराला मदन ने माल प्राप्त होने की जानकारी दी।

    हालांकि, बिल के एवज में कारोबारी को केवल 3.65 लाख रुपये का भुगतान किया गया। शेष रकम मांगने पर कथित आरोपी पक्ष ने 14.63 लाख रुपये और 17.65 लाख रुपये के दो चेक दिए।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, इन चेकों पर एसीजेएम, बोरीवली के परचेज अधिकारी की मुहर भी लगी हुई थी। लेकिन बैंक में जमा करने के बाद चेकों का भुगतान नहीं हो सका।

    बैंक औपचारिकताओं के नाम पर लगातार टालमटोल

    चेक बाउंस होने के बाद कारोबारी ने भुगतान के लिए संपर्क किया। आरोप है कि निराला मदन ने अकाउंट ऑफिसर महेश चौहान का हवाला देते हुए बैंक से जुड़ी औपचारिकताओं का बहाना बनाया और भुगतान को लगातार टालता रहा।

    काफी समय बाद 3 जुलाई को 58.36 लाख रुपये के भुगतान का एक और चेक देने की बात कही गई। शिकायत के मुताबिक, यह चेक भी भुन नहीं सका।

    जांच में सामने आया कथित आरोपी का दूसरा नाम

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब उन्होंने मामले की जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि निराला मदन नाम से संपर्क करने वाले व्यक्ति का वास्तविक नाम पुनीत वेदप्रकाश बगड़िया है। इसके बाद कारोबारी को कथित ठगी का एहसास हुआ।

    आरोप है कि जब कारोबारी ने अपने रुपये वापस मांगे तो माल वापस लेने के नाम पर भी उन्हें कथित तौर पर टालमटोल का सामना करना पड़ा।

    पांच लोगों के खिलाफ FIR, पुलिस कर रही जांच

    पीड़ित कारोबारी की शिकायत पर पुलिस ने द्रिवेंद्र पाठक, निराला मदन उर्फ पुनीत वेदप्रकाश बगड़िया, आफरीन हुसैन सैयद, महेश चौहान समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।

    कोतवाली थाना प्रभारी राजेश कुमार के मुताबिक, कारोबारी के साथ व्यापारिक लेनदेन के नाम पर धोखाधड़ी की शिकायत मिली है। मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस मामले में आरोपों की जांच कर रही है। आरोपियों की भूमिका, भुगतान से जुड़े बैंक खातों और कथित फर्जी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

  • Mumbai Protest Today: शिवाजी पार्क में प्रदर्शन, पुलिस अलर्ट

    Mumbai Protest Today: शिवाजी पार्क में प्रदर्शन, पुलिस अलर्ट

    Mumbai Protest Today: शिवाजी पार्क में प्रदर्शन जारी, चेंबूर में भी विरोध की खबर। मुंबई पुलिस ने कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई और निषेधाज्ञा लागू की।

    मुंबई: CJP आंदोलन के समर्थन में मुंबई में भी विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। 22 जुलाई को शिवाजी पार्क में छात्रों और समर्थकों की भीड़ जुटी है, जबकि चेंबूर में भी पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन हुआ। पुलिस ने दक्षिण मुंबई सहित कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई है। 23 जुलाई से 6 अगस्त तक पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध का आदेश भी जारी किया गया है।

    मुंबई में आज, 22 जुलाई 2026, CJP आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुंबई के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

    उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार, शिवाजी पार्क, दादर और चेंबूर इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख केंद्र रहे हैं। वहीं, दक्षिण मुंबई में आजाद मैदान, CSMT और BMC मुख्यालय के आसपास पुलिस की भारी तैनाती की गई है।

    Mumbai Protest Today: आज मुंबई में कहां-कहां प्रदर्शन ?

    शिवाजी पार्क, दादर

    आज के लिए सबसे स्पष्ट और प्रमुख प्रदर्शन स्थल शिवाजी पार्क रहा। खबर के मुताबिक, मंगलवार शाम यहां 500 से अधिक युवा और छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी यहां मौजूद रहे और शिक्षा व्यवस्था तथा CJP आंदोलन से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें थोड़े समय के लिए प्रदर्शन की अनुमति दी गई।

    चेंबूर

    चेंबूर के शिवाजी नगर/शिद्धार्थ कॉलोनी क्षेत्र में भी दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन हुए। यहां के स्थानीय निवासियों ने दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन किया।

    आजाद मैदान और दक्षिण मुंबई

    आजाद मैदान, CSMT और BMC मुख्यालय के आसपास मुंबई पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है। यह तैनाती संभावित विरोध प्रदर्शनों और भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए की गई है। इन इलाकों को मुख्य रूप से संवेदनशील या संभावित सभा स्थलों के रूप में बताया जाता है। इसलिए पुलिस ने दक्षिण मुंबई के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और पुलिस मार्च भी किए।

    मुंबई पुलिस ने सुरक्षा क्यों बढ़ाई?

    यह पूरा घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्च से जुड़ा हुआ है। CJP आंदोलन के समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

    20 जुलाई को दिल्ली में CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद मुंबई सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हुए। इसके बाद मुंबई पुलिस ने संभावित सभाओं को रोकने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है।

    1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को नोटिस, कई FIR दर्ज

    मुंबई में पिछले दिनों हुए प्रदर्शनों को लेकर पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शनिवार, रविवार और सोमवार को आजाद मैदान, शिवाजी पार्क और चैत्यभूमि में हुए प्रदर्शनों के संबंध में करीब 1,000 लोगों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा और नोटिस जारी किए गए। इस सिलसिले में लगभग 12 FIR दर्ज की गई हैं।

    23 जुलाई से मुंबई में निषेधाज्ञा

    मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। पुलिस के अनुसार, यह आदेश शांति भंग और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए लागू किया गया है।

    इसका मतलब यह है कि इस अवधि में किसी भी सार्वजनिक सभा या प्रदर्शन के लिए लागू स्थानीय अनुमति और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले नागरिकों को स्थानीय पुलिस और प्रशासन के आधिकारिक निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए।

    आज मुंबई में पुलिस की तैनाती कहां-कहां?

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस की विशेष मौजूदगी और निगरानी इन प्रमुख क्षेत्रों में रही:

    • शिवाजी पार्क और दादर
    • चेंबूर के कुछ इलाके
    • आजाद मैदान
    • CSMT
    • BMC मुख्यालय के आसपास
    • दक्षिण मुंबई के अन्य संवेदनशील क्षेत्र

    हालांकि, यह सूची पुलिस तैनाती और रिपोर्ट किए गए प्रदर्शन स्थलों पर आधारित है। इसे मुंबई में आज होने वाले सभी प्रदर्शन स्थलों की आधिकारिक और पूर्ण सूची नहीं माना जाना चाहिए।

    सोशल मीडिया पर प्रदर्शन स्थलों को लेकर भ्रम

    मुंबई में विरोध प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर कई संदेश और पोस्ट तेजी से साझा किए जा रहे हैं। इनमें शिवाजी पार्क, चेंबूर और अन्य स्थानों के नाम शामिल हैं। लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट में दी गई जानकारी हमेशा आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं होती।

    इसलिए नागरिकों को किसी भी वायरल पोस्ट के आधार पर किसी स्थान पर पहुंचने के बजाय मुंबई पुलिस, स्थानीय प्रशासन या विश्वसनीय समाचार स्रोतों से ताजा जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

    Mumbai Protest Today के तहत 22 जुलाई को सबसे स्पष्ट रूप से सामने आया प्रमुख प्रदर्शन शिवाजी पार्क, दादर में रहा, जबकि चेंबूर में भी विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट सामने आई है। दूसरी ओर, आजाद मैदान, CSMT और BMC मुख्यालय सहित दक्षिण मुंबई के महत्वपूर्ण इलाकों में पुलिस की भारी तैनाती की गई है।

    मुंबई पुलिस ने संभावित सभाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई है। 23 जुलाई से 6 अगस्त तक पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध लागू होने के कारण आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर नजर बनी रहेगी।

    Official / Authoritative Sources

    FAQ

    Q. आज मुंबई में सबसे प्रमुख प्रदर्शन कहां हुआ?
    शिवाजी पार्क, दादर में प्रदर्शन प्रमुख रूप से सामने आया है। इसके साथ ही, चेंबूर में भी विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट है।

    Q. क्या आज मुंबई में सभी प्रदर्शन स्थलों की आधिकारिक सूची जारी हुई है?
    उपलब्ध जानकारी में ऐसी कोई पूर्ण और आधिकारिक शहरव्यापी सूची नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर प्रसारित स्थानों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    Q. मुंबई में निषेधाज्ञा कब से लागू है?
    पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक लागू किया गया है

  • मुंबई में पार्किंग को ऑफिस बताकर मॉर्गेज कराने का आरोप, 5 पर FIR

    मुंबई में पार्किंग को ऑफिस बताकर मॉर्गेज कराने का आरोप, 5 पर FIR

    मुंबई के मलाड में 3,135 वर्गफुट पार्किंग एरिया को ऑफिस यूनिट बताकर मॉर्गेज कराने के आरोप में डेवलपर समेत 5 पर FIR हुई है।

    मुंबई: मलाड ईस्ट के Atharva Landmark CHS में कथित तौर पर 3,135 वर्गफुट के कॉमन पार्किंग एरिया को कमर्शियल ऑफिस यूनिट के रूप में दिखाकर मॉर्गेज कराने के मामले में डिंडोशी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में डेवलपर दीपक शाह और Khush Housing Finance Pvt. Ltd. से जुड़े अधिकारियों के नाम शामिल हैं। पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    मलाड में पार्किंग एरिया को ऑफिस यूनिट बताने का आरोप

    मुंबई के मलाड ईस्ट में एक हाउसिंग सोसाइटी के कॉमन पार्किंग एरिया को कथित रूप से कमर्शियल ऑफिस यूनिट के रूप में दिखाकर वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। Atharva Landmark CHS के निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी के दूसरे पोडियम पर मौजूद करीब 3,135 वर्गफुट के पार्किंग क्षेत्र को दस्तावेजों में तीन कथित ऑफिस यूनिट—201, 202 और 203—के रूप में दिखाया गया।

    इस मामले में दिंडोशी पुलिस ने अमित मागिया, किरण मागिया, कल्पेश डेडिया, हर्षिता कनोजिया और डेवलपर दीपक शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपों में कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और cheating शामिल हैं। मामले की जांच अभी जारी है।

    सोसाइटी के अनुसार, पार्किंग को लोन की सुरक्षा के तौर पर रखा गया

    सोसाइटी के सदस्यों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2021 के बीच कई फ्लैट खरीदारों ने अपने घरों के साथ बेसमेंट, ग्राउंड, पहले और दूसरे पोडियम लेवल पर पार्किंग स्पेस खरीदे थे।

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    बाद में निवासियों को कथित तौर पर पता चला कि दूसरे पोडियम का पार्किंग क्षेत्र Khush Housing Finance Pvt. Ltd. (KHFL) के पास डेवलपर के लोन के लिए सुरक्षा के तौर पर मॉर्गेज किया गया था।

    इसके बाद वित्तीय संस्था ने SARFAESI Act के तहत कथित तीन “ऑफिस यूनिट्स” पर कब्जे की कार्रवाई शुरू की। सोसाइटी का दावा है कि ये ऑफिस यूनिट वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं और संबंधित क्षेत्र स्वीकृत योजना के अनुसार पार्किंग के लिए निर्धारित है।

    दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियों का आरोप

    सोसाइटी ने Sub-Registrar कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों और अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के बीच कथित अंतर होने का दावा किया है।

    सोसाइटी के आरोपों के अनुसार, दस्तावेजों में कथित तौर पर:

    • मॉर्गेज की तारीखों में अंतर था
    • खाली स्थानों को बाद में भरे जाने का संदेह है
    • कुछ दस्तावेजों में स्टांप से जुड़ी विसंगतियां थीं
    • हस्तलिखित बदलाव किए गए
    • संपत्ति का विवरण बदला हुआ दिखाई दिया
    • प्रॉपर्टी शेड्यूल में असंगतियां थीं
    • कथित रूप से हस्ताक्षरों में छेड़छाड़ की गई
    • तारीखों में कथित बदलाव कर मॉर्गेज को लोन जारी होने से पहले का दिखाने का आरोप है

    सोसाइटी ने यह भी दावा किया कि कुछ दस्तावेजों में 23वीं और 24वीं मंजिल का संदर्भ है, जबकि उसके अनुसार BMC की स्वीकृत योजना में इमारत को 22वीं मंजिल तक मंजूरी मिली थी।

    इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    Kailashnath D Yadav (left), secretary, and Jagdish Rajpopat, chairman, Atharva Landmark
    कैलाशनाथ डी यादव (बाएं), सचिव, और जगदीश राजपोपत, अध्यक्ष, अथर्व लैंडमार्क

    सोसाइटी सचिव ने क्या कहा?

    Atharva Landmark CHSL के सचिव कैलाशनाथ डी. यादव के अनुसार, स्वीकृत योजनाओं के मुताबिक दूसरा पोडियम केवल पार्किंग के लिए है। उनका आरोप है कि इसी क्षेत्र को वित्तीय संस्था (बैंक) के सामने ऑफिस यूनिट के रूप में पेश किया गया और डेवलपर के लोन के लिए मॉर्गेज किया गया।

    सोसाइटी का यह भी कहना है कि उसे SARFAESI Act के तहत कथित कार्रवाई की कोई उचित नोटिस नहीं दी गई, जिसके बाद निवासियों में चिंता पैदा हो गई।

    मामला DRT और Bombay High Court तक पहुंचा

    विवाद अब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं है। Atharva Landmark CHSL और Khush Housing Finance के बीच SARFAESI कार्रवाई को लेकर मामला Debt Recovery Tribunal और Debt Recovery Appellate Tribunal के समक्ष भी चल रहा है।

    Bombay High Court ने 25 मार्च 2026 को मामले में सीमित राहत देते हुए विवादित secured assets का physical possession लेने की कार्रवाई को 2 अप्रैल 2026 तक स्थगित किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसने मामले के merits पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और संबंधित पक्षों को वैधानिक अपील के माध्यम से DRAT में जाने का निर्देश दिया था।

    बाद में DRAT से जुड़े घटनाक्रम में KHFL की कब्जे की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, विवादित संपत्तियों में दो आवासीय फ्लैट और एक पार्किंग पोडियम शामिल था।

    KHFL ने आरोपों को बताया निराधार

    Khush Housing Finance ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे शिकायत की विस्तृत जानकारी और दस्तावेजों की जांच करने का अवसर अभी नहीं मिला है।

    वित्तीय संस्था के अनुसार, उसने डेवलपर को लोन दिया था और डेवलपर ने फ्लैट्स, ऑफिस और प्रोजेक्ट कैश फ्लो को सुरक्षा के रूप में मॉर्गेज किया था। KHFL का कहना है कि डेवलपर के डिफॉल्ट के बाद SARFAESI Act के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई शुरू की गई।

    KHFL ने अपने खिलाफ लगाए गए जालसाजी के आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताया है। कंपनी का दावा है कि संभव है कि डेवलपर ने सोसाइटी और वित्तीय संस्था—दोनों को गुमराह किया हो। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत उसकी वैध वसूली कार्रवाई को रोकने के लिए की गई है।

    पुलिस जांच में अब किन बिंदुओं पर फोकस?

    पुलिस के सामने अब मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी:

    • विवादित पार्किंग क्षेत्र का वास्तविक कानूनी और स्वीकृत उपयोग
    • कथित ऑफिस यूनिट्स का अस्तित्व और वैधता
    • मॉर्गेज दस्तावेजों की वास्तविकता
    • दस्तावेजों में कथित बदलाव और तारीखों की जांच
    • कथित हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच
    • डेवलपर और वित्तीय संस्था के अधिकारियों की भूमिका
    • लोन और मॉर्गेज प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए रिकॉर्ड

    पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और विवादित संपत्ति के मॉर्गेज तथा संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जाएगी।

    मामला अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया में

    इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है, लेकिन अभी किसी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। दस्तावेजों में कथित जालसाजी, पार्किंग क्षेत्र के कथित गलत इस्तेमाल और मॉर्गेज प्रक्रिया में किसी भी पक्ष की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    विवादित संपत्तियों को लेकर कानूनी कार्यवाही DRT/DRAT और अदालतों के समक्ष जारी है। Bombay High Court ने भी अपने 25 मार्च 2026 के आदेश में मामले के merits पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की थी।

    मलाड के Atharva Landmark CHS का मामला एक ओर कथित दस्तावेजी हेरफेर और कॉमन पार्किंग एरिया के इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ा है, तो दूसरी ओर डेवलपर के लोन और वित्तीय संस्था की SARFAESI कार्रवाई से भी संबंधित है। अब पुलिस जांच और चल रही न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि विवादित दस्तावेज कैसे तैयार हुए और इस पूरे मामले में किसकी वास्तविक भूमिका थी।

    Official / Authoritative Sources


    FAQ

    क्या इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है?

    हां। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डिंडोशी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में डेवलपर दीपक शाह और चार अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

    विवादित संपत्ति क्या है?

    सोसाइटी के अनुसार, करीब 3,135 वर्गफुट का दूसरा-पोडियम क्षेत्र कॉमन पार्किंग के लिए निर्धारित है, जबकि आरोप है कि इसे तीन कथित ऑफिस यूनिट्स के रूप में दिखाया गया।

    क्या आरोपियों को दोषी ठहराया गया है?

    नहीं। मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। अभी अदालत ने किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है।

    SARFAESI Act क्या है?

    SARFAESI Act के तहत पात्र बैंक और वित्तीय संस्थाएं डिफॉल्ट किए गए secured loans की वसूली के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत secured assets पर कार्रवाई कर सकती हैं।

  • कल्याण मर्डर: बॉयफ्रेंड की हत्या, बाथरूम में शव छिपाकर फरार लड़की

    कल्याण मर्डर: बॉयफ्रेंड की हत्या, बाथरूम में शव छिपाकर फरार लड़की

    कल्याण मर्डर केस में लड़की पर बॉयफ्रेंड की हत्या कर शव बाथरूम में छिपाने का आरोप है। पुलिस आरोपी की तलाश में कोलकाता पहुंची।

    ठाणे: मुंबई से सटे थाने जिले के कल्याण में एक युवक की संदिग्ध हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, युवक का शव एक फ्लैट के बाथरूम में बोरे के अंदर मिला। इस मामले में उसकी कथित गर्लफ्रेंड पर हत्या का आरोप है, जो वारदात के बाद कोलकाता भाग गई। पुलिस उसकी तलाश में जांच कर रही है।

    महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण में एक चौंकाने वाला मर्डर केस सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक महिला ने कथित तौर पर अपने बॉयफ्रेंड की हत्या करने के बाद उसके शव को बोरे में भरकर फ्लैट के बाथरूम में छिपा दिया और वहां से फरार हो गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी महिला के कोलकाता भागने की आशंका है।

    कल्याण मर्डर केस में बाथरूम से मिला शव

    मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला कल्याण ईस्ट के मलंग रोड स्थित नीलकंठ सोसायटी के एक फ्लैट से जुड़ा है। फ्लैट के बाथरूम में एक व्यक्ति का अत्यधिक सड़ी-गली हालत में शव बोरे के अंदर मिला। मृतक की पहचान 37 वर्षीय हमीदुल्लाह इस्लाम के रूप में बताई गई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    पुलिस के अनुसार, मृतक और आरोपी महिला पिछले करीब ढाई महीने से इस फ्लैट में रह रहे थे। प्रारंभिक जांच में पुलिस को शक है कि युवक की हत्या धारदार हथियार से की गई हो सकती है। हालांकि, हत्या की वास्तविक परिस्थितियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े निष्कर्षों की आधिकारिक जांच अभी जारी है।

    मकान मालिक को Voice Note भेजकर दी जानकारी

    इस मामले का खुलासा उस समय हुआ जब फ्लैट के मकान मालिक को आरोपी महिला की ओर से एक Voice Note मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने कथित तौर पर फ्लैट के बाथरूम में शव पड़े होने की जानकारी दी। इसके बाद मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दी।

    पुलिस जब फ्लैट पर पहुंची तो दरवाजा बाहर से बंद था। दरवाजा खोलने के बाद बाथरूम से बोरे में रखा शव बरामद किया गया। मौके पर फॉरेंसिक टीम और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने भी जांच की।

    नल खुला छोड़ने को लेकर पुलिस को शक

    जांच के दौरान पुलिस को बाथरूम का नल खुला मिला। अधिकारियों को आशंका है कि पानी का बहाव जानबूझकर जारी रखा गया हो सकता है। पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि क्या ऐसा शव के सड़ने की प्रक्रिया को तेज करने या संभावित फॉरेंसिक सबूतों को प्रभावित करने के लिए किया गया हो। यह जांच का हिस्सा है और इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

    आरोपी महिला की तलाश में पुलिस टीम कोलकाता रवाना

    पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला वारदात के बाद कोलकाता चली गई हो सकती है। उसे तलाशने के लिए पुलिस की विशेष टीम कोलकाता भेजी गई है। पुलिस से मिली जानकारी में तीन विशेष पुलिस टीमों के तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है, जबकि अन्य सोर्स में पुलिस टीम के कोलकाता पहुंचने का उल्लेख किया जा रहा है।

    पुलिस हत्या के पीछे की वजह और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। आरोपी महिला की गिरफ्तारी के बाद ही मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब स्पष्ट हो सकेंगे।

    आरोपी महिला ने क्या दावा किया?

    मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी महिला ने मकान मालिक को भेजे गए Voice Note में दावा किया कि मृतक उसे पुणे से कल्याण लेकर आया था और कथित तौर पर उसे एक सेक्स रैकेट में बेचने की योजना बना रहा था। महिला ने यह भी दावा किया कि उसे बाद में अपनी जान को खतरा महसूस हुआ और उसने कथित रूप से आत्मरक्षा में युवक की हत्या की।

    हालांकि, ये दावे आरोपी महिला की ओर से बताए गए कथित बयान पर आधारित हैं। पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। फिलहाल अदालत के समक्ष मामले की पूरी जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

    पुलिस जांच में अब किन बिंदुओं पर फोकस?

    कल्याण मर्डर केस में पुलिस मुख्य रूप से इन पहलुओं की जांच कर रही है:

    • हत्या की वास्तविक वजह क्या थी?
    • युवक की मौत कब और कैसे हुई?
    • इस्तेमाल किए गए हथियार या अन्य साक्ष्य कहां हैं?
    • आरोपी महिला के Voice Note और उसके दावों की पुष्टि कैसे होती है?
    • हत्या के बाद वह किस रास्ते से कोलकाता पहुंची?
    • क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था?

    पुलिस आरोपी महिला की तलाश के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

    कल्याण का यह मामला फिलहाल जांच के चरण में है। पुलिस आरोपी महिला की तलाश कर रही है और हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने में जुटी है। आरोपी के दावों और पुलिस जांच के निष्कर्षों के बीच स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी।

    Official Sources

    FAQ

    कल्याण मर्डर केस में क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, एक युवक का शव कल्याण के एक फ्लैट के बाथरूम में बोरे के अंदर मिला। उसकी कथित गर्लफ्रेंड पर हत्या का आरोप है।

    आरोपी महिला कहां गई?

    पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला के कोलकाता भागने की आशंका है और उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम वहां भेजी गई है।

    क्या आरोपी महिला गिरफ्तार हुई है?

    उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल पुलिस उसकी तलाश कर रही है। गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

  • Mumbai Boss Scam: WhatsApp से 10.40 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

    Mumbai Boss Scam: WhatsApp से 10.40 करोड़ की ठगी, 6 गिरफ्तार

    Mumbai Boss Scam में फर्जी WhatsApp प्रोफाइल से कंपनी के अधिकारी को फंसाकर 10.40 करोड़ रुपये ठगे गए। पुलिस ने 5.63 करोड़ रुपये फ्रीज किए।

    मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने कथित WhatsApp इम्पर्सोनेशन से जुड़े एक बड़े ‘Boss Scam’ का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर वाले फर्जी WhatsApp अकाउंट से निर्देश भेजे गए, जिसके बाद 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।

    मुंबई में साइबर ठगी का तरीका लगातार बदल रहा है। अब हर फ्रॉड में OTP, बैंकिंग पासवर्ड या फिशिंग लिंक की जरूरत नहीं पड़ती। मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने आए इस मामले में कथित तौर पर ठगों ने तकनीकी हैकिंग के बजाय कंपनी के अंदर मौजूद भरोसे और वरिष्ठ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया। इसी वजह से इस तरह की ठगी को ‘Boss Scam’ कहा जा रहा है।

    WhatsApp पर बॉस बनकर भेजे गए भुगतान के निर्देश

    पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी से WhatsApp के जरिए संपर्क किया और खुद को कंपनी के डायरेक्टर के रूप में पेश किया। फर्जी प्रोफाइल पर वरिष्ठ अधिकारी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था।

    कथित तौर पर आरोपी ने अधिकारी को बताया कि डायरेक्टर एक महत्वपूर्ण मीटिंग में व्यस्त हैं और कुछ जरूरी कारोबारी भुगतान तत्काल करने हैं। संदेशों को वास्तविक समझकर अधिकारी ने कंपनी के बैंक खाते से अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।

    जांच के अनुसार, इस तरह कुल 63 ट्रांजैक्शन में 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर हुई। बाद में जब अधिकारी ने वास्तविक डायरेक्टर से संपर्क किया, तब कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

    इस मामले की खास बात यह है कि उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, ठगी का मुख्य तरीका किसी OTP या बैंकिंग क्रेडेंशियल को हासिल करना नहीं था। ठगों ने कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारी की पहचान और कारोबारी भरोसे का इस्तेमाल कर भुगतान के निर्देश मनवाए।

    5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज

    शिकायत मिलने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने बैंकिंग ट्रेल और पैसों के लेन-देन की जांच शुरू की। जांच के दौरान रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजे जाने का पता चला।

    पुलिस की कार्रवाई के बाद 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली से जुड़े संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की और छह लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस कथित मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

    ठगी की रकम से खरीदा जाता था सोना

    जांच में कथित तौर पर ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए आगे भेजने और उसके बाद सोना खरीदने का तरीका सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों के डिजिटल ट्रेल को जटिल बनाना और रकम की सीधी पहचान मुश्किल करना था।

    रिपोर्टों के मुताबिक, कथित तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र में अलग-अलग ज्वेलरी शोरूम से सोना खरीदा गया। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस प्रक्रिया में किन लोगों और खातों का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर कथित मनी ट्रेल और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच की जा रही है।

    बॉस स्कैम से कंपनियों को क्यों है बड़ा खतरा?

    इस तरह के साइबर फ्रॉड में अपराधी किसी CEO, Director या Senior Executive की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं। कारोबारी माहौल में वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आने वाले तत्काल भुगतान निर्देशों पर कर्मचारी कई बार बिना अतिरिक्त पुष्टि के भरोसा कर लेते हैं।

    इसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित ठग:

    • वरिष्ठ अधिकारी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर सकते हैं
    • अलग WhatsApp नंबर को “Personal” या “Private Number” बता सकते हैं
    • तत्काल भुगतान का दबाव बना सकते हैं
    • कर्मचारी को निर्देश किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करने को कह सकते हैं
    • रकम को कई बैंक खातों में भेजकर ट्रेल को जटिल बना सकते हैं

    मुंबई के इस मामले की जांच से यह संकेत मिलता है कि कंपनियों को केवल OTP और पासवर्ड आधारित साइबर सुरक्षा पर निर्भर रहने के बजाय Payment Verification Protocol भी मजबूत करना होगा।

    मुंबई पुलिस की कंपनियों से अपील

    ऐसे मामलों से बचने के लिए किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आए बड़े या असामान्य भुगतान निर्देश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए। केवल WhatsApp मैसेज, प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

    कंपनियां बड़े भुगतान के लिए:

    • Two-Person Approval System लागू कर सकती हैं
    • भुगतान से पहले Voice या Video Call Verification कर सकती हैं
    • नए बैंक अकाउंट पर भुगतान के लिए अतिरिक्त मंजूरी ले सकती हैं
    • अचानक आए “Urgent” Payment Requests को दोबारा Verify कर सकती हैं
    • कर्मचारियों को Executive Impersonation और Boss Scam के बारे में प्रशिक्षित कर सकती हैं

    यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए। त्वरित रिपोर्टिंग से बैंकिंग चैनल के जरिए रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।

    जांच जारी, मास्टरमाइंड की तलाश

    मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले में कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी तरह के WhatsApp इम्पर्सोनेशन मॉडल से अन्य कंपनियों या वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया था।

    मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और जांच पूरी होने तक आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    मुंबई का यह कथित Boss Scam इस बात का संकेत है कि साइबर ठगी अब केवल OTP या फिशिंग लिंक तक सीमित नहीं रही। वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर भरोसे के जरिए किए जाने वाले फर्जी भुगतान से बचने के लिए कंपनियों को हर बड़े वित्तीय निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि करनी चाहिए।

    Official Sources

    • Mumbai Police – Official Website — मुंबई पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट और साइबर क्राइम विभाग की जानकारी।
    • National Cyber Crime Reporting Portal — भारत सरकार का आधिकारिक साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल।
    • Cyber Crime Helpline 1930 — वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन जानकारी।

    FAQ

    Boss Scam क्या होता है?

    Boss Scam में साइबर अपराधी CEO, Director या किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी से भुगतान या संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।

    इस मुंबई साइबर फ्रॉड में कितनी रकम की ठगी हुई?

    पुलिस जांच से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, कंपनी के खाते से 10.40 करोड़ रुपये से अधिक की रकम 63 ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर हुई।

    क्या इस मामले में कोई रकम फ्रीज हुई है?

    हां। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 5.63 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज कराई गई है।

    साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

    तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।

  • मुंबई में जमावबंदी: 23 जुलाई से 6 अगस्त तक 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक

    मुंबई में जमावबंदी: 23 जुलाई से 6 अगस्त तक 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक

    मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक जमावबंदी लागू की है। सार्वजनिक जगहों पर 5 या ज्यादा लोगों के जमावड़े, जुलूस और लाउडस्पीकर पर रोक रहेगी।

    मुंबई: मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक शहर में जमावबंदी लागू करने का आदेश जारी किया है। इस अवधि में सार्वजनिक जगहों पर पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने और कुछ अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस के मुताबिक, यह कदम शांति भंग और सार्वजनिक व्यवस्था में खलल की आशंका को देखते हुए उठाया गया है।

    मुंबई में 23 जुलाई से लागू होगी जमावबंदी

    मुंबई पुलिस ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया। यह आदेश मुंबई पुलिस आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में 23 जुलाई को रात 12:01 बजे से 6 अगस्त 2026 की आधी रात तक लागू रहेगा।

    आदेश पुलिस उपायुक्त (ऑपरेशन्स) अकबर पठान द्वारा जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी में शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।

    किन गतिविधियों पर रहेगी रोक?

    जमावबंदी के दौरान सार्वजनिक जगहों पर पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक रहेगी। इसके अलावा आदेश के तहत निम्न गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है:

    • जुलूस या प्रोसेशन निकालना
    • लाउडस्पीकर और आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल
    • म्यूजिकल बैंड का उपयोग
    • जुलूस के दौरान पटाखे फोड़ना
    • ऐसी अन्य गतिविधियां जिनसे सार्वजनिक शांति और व्यवस्था प्रभावित हो सकती है

    पुलिस के मुताबिक, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति को रोकना और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    इन आयोजनों को दी गई छूट

    आदेश में कुछ सामाजिक, धार्मिक और आधिकारिक गतिविधियों को छूट दी गई है। इनमें शादी-ब्याह और उससे जुड़े कार्यक्रम, अंतिम संस्कार के लिए होने वाला जमावड़ा और अंतिम संस्कार से संबंधित जुलूस शामिल हैं।

    इसके अलावा कंपनियों, क्लबों और सहकारी समितियों की कानूनी बैठकों तथा क्लबों और एसोसिएशनों के नियमित कामकाज से जुड़ी सामाजिक सभाओं को भी छूट दी गई है।

    सिनेमा हॉल, थिएटर और अन्य मनोरंजन स्थलों पर सामान्य रूप से होने वाले जमावड़े भी इस आदेश के दायरे से बाहर रखे गए हैं।

    सरकारी कामकाज और शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होगा आदेश

    मुंबई पुलिस के आदेश के अनुसार, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और स्थानीय निकायों में आधिकारिक कार्यों के लिए होने वाले जमावड़े पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

    इसी तरह स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियां भी इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगी। फैक्ट्रियों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में सामान्य व्यापारिक और कामकाजी गतिविधियों के लिए लोगों के इकट्ठा होने पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

    पुलिस ने कानून-व्यवस्था को बताया मुख्य कारण

    पुलिस के अनुसार, विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को लेकर संभावित खतरे का आकलन किया गया। आदेश में सार्वजनिक व्यवस्था में खलल, लोगों की जान को खतरा और संपत्ति को नुकसान की आशंका का उल्लेख किया गया है।

    महाराष्ट्र पुलिस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रतिबंधात्मक आदेश सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए जा सकते हैं और ऐसे आदेशों में सभा या जुलूस जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।

    मुंबई में जमावबंदी कब तक रहेगी?

    मुंबई पुलिस का यह प्रतिबंधात्मक आदेश 23 जुलाई 2026 को रात 12:01 बजे से 6 अगस्त 2026 की आधी रात तक लागू रहेगा। आदेश मुंबई पुलिस आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों पर लागू होगा।

    मुंबई पुलिस ने संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों को देखते हुए 23 जुलाई से 6 अगस्त तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया है। हालांकि, रोजमर्रा के कामकाज, शैक्षणिक गतिविधियों, आधिकारिक कार्यों और आदेश में विशेष रूप से छूट प्राप्त आयोजनों को इससे बाहर रखा गया है।

    Official Sources

    FAQ

    क्या मुंबई में पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है?

    हां। 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक जगहों पर पांच या उससे ज्यादा लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध रहेगा, हालांकि आदेश में कई गतिविधियों को छूट दी गई है।

    यह प्रतिबंध कब से कब तक लागू रहेगा?

    यह आदेश 23 जुलाई 2026 को रात 12:01 बजे से 6 अगस्त 2026 की आधी रात तक लागू रहेगा।

    क्या स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे?

    नहीं। आदेश में स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियों को छूट दी गई है।

  • मालाड में 1.10 लाख रुपये चोरी, CCTV से बेघर महिला गिरफ्तार

    मालाड में 1.10 लाख रुपये चोरी, CCTV से बेघर महिला गिरफ्तार

    मालाड में मोतियाबिंद सर्जरी के लिए रखे ₹1.10 लाख चोरी के मामले में 35 वर्षीय महिला गिरफ्तार। CCTV से पुलिस गोरेगांव तक पहुंची।

    मुंबई: मालाड पश्चिम में 1.10 लाख रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने 35 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह रकम शिकायतकर्ता ने अपनी मौसी की प्रस्तावित Cataract Surgery यानी मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए घर में रखी थी। जांच के दौरान CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपी तक मालाड से गोरेगांव पहुंची।

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार महिला की पहचान सुनीता सुनील धोत्रे के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह गोरेगांव ईस्ट में बस डिपो के पास फुटपाथ पर रह रही थी। मामले में चोरी की रकम की बरामदगी और अन्य संभावित पहलुओं की जांच जारी है।

    House-theft
    गिरफ्तार आरोपी की तस्वीर

    मालाड के फ्लैट से 1.10 लाख रुपये चोरी

    पुलिस के अनुसार, चोरी की घटना 14 जुलाई को मालाड पश्चिम के साईनाथ रोड स्थित तुलसी निवास में हुई। शिकायतकर्ता दिलीप प्रकाश हसीजा (41) काम के सिलसिले में घर से बाहर गए थे।

    शिकायत के अनुसार, घर में एक बैग के अंदर 1.10 लाख रुपये रखे गए थे। यह रकम उनकी मौसी की प्रस्तावित मोतियाबिंद सर्जरी के लिए अलग रखी गई थी।

    दोपहर करीब 1:30 बजे जब शिकायतकर्ता घर लौटे, तो उन्हें हॉल में रखा बैग गायब मिला। इसके बाद उन्होंने मालाड पुलिस से संपर्क कर चोरी की शिकायत दर्ज कराई।

    CCTV फुटेज से मालाड से गोरेगांव तक आरोपी की तलाश

    मालाड पुलिस ने जांच के दौरान बिल्डिंग और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस के अनुसार, फुटेज में एक महिला शिकायतकर्ता के फ्लैट में दाखिल होती और कुछ समय बाद दो बैग लेकर बाहर निकलती दिखाई दी।

    जांचकर्ताओं ने अलग-अलग CCTV कैमरों की मदद से महिला की गतिविधियों को ट्रैक किया। पुलिस के मुताबिक, महिला मालाड रेलवे स्टेशन की दिशा में गई और वहां से ट्रेन के जरिए गोरेगांव पहुंची।

    इसके बाद पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर उसके संभावित रास्ते की जानकारी जुटाई और गोरेगांव ईस्ट स्थित बस डिपो के आसपास उसकी तलाश शुरू की।

    गोरेगांव बस डिपो के पास से गिरफ्तारी

    पुलिस के अनुसार, तलाश के दौरान संदिग्ध महिला गोरेगांव बस डिपो के पास दिखाई दी। महिला पुलिसकर्मियों की सहायता से उसे हिरासत में लेकर मालाड पुलिस स्टेशन लाया गया।

    पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान महिला ने चोरी की घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की। इसके बाद उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चोरी की पूरी रकम की बरामदगी को लेकर स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। इस पहलू पर पुलिस की जांच जारी है।

    वकोला के पुराने चोरी के मामले से कथित कनेक्शन की जांच

    जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि आरोपी महिला का नाम वकोला पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अन्य घर में चोरी के मामले की जांच में भी सामने आया है।

    पुलिस इस संभावित संबंध की जांच कर रही है। हालांकि, किसी अन्य मामले में नाम सामने आना अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करता। आरोपी के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

    16 जुलाई को दर्ज हुई FIR

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मालाड पुलिस ने इस मामले में 16 जुलाई को FIR दर्ज की। केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 305(a) के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस CCTV फुटेज, आरोपी की गतिविधियों और संभावित अन्य कनेक्शनों की पड़ताल कर रही है। चोरी की रकम की बरामदगी और किसी अन्य व्यक्ति की संभावित भूमिका भी जांच के दायरे में है।

    पुलिस टीम ने CCTV और फील्ड इनपुट के आधार पर की कार्रवाई

    पुलिस के अनुसार, मामले की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी में निम्न अधिकारियों की भूमिका रही:

    • DCP दत्ता कराले — North Region, Zone 1
    • Senior Inspector विलास लोकारे
    • PSI अक्षय मंडले

    फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    Latest Update

    • चोरी की रकम: ₹1.10 लाख
    • घटना का स्थान: मालाड पश्चिम, मुंबई
    • FIR: 16 जुलाई
    • गिरफ्तार आरोपी: 35 वर्षीय महिला
    • गिरफ्तारी का स्थान: गोरेगांव ईस्ट, बस डिपो के पास
    • जांच का आधार: CCTV फुटेज और पुलिस जांच
    • अन्य मामले से कथित संबंध: जांच के दायरे में

    Official Sources

  • कल्याण में बच्चे के अपहरण का खुलासा, मां की कहानी निकली झूठी

    कल्याण में बच्चे के अपहरण का खुलासा, मां की कहानी निकली झूठी

    Kalyan Baby Kidnapping Case: छह महीने के बच्चे के अपहरण की शिकायत जांच में झूठी निकली। CCTV जांच में सामने आया कि बच्चा पहले ही वाराणसी में नाना-नानी के पास था।

    कल्याण में बच्चे के अपहरण का खुलासा, मां की कहानी निकली झूठी

    Kalyan Baby Kidnapping Case: कल्याण रेलवे स्टेशन के बाहर छह महीने के बच्चे के कथित अपहरण की शिकायत ने पुलिस को चौंका दिया। जांच के दौरान CCTV फुटेज और पूछताछ से सामने आया कि बच्चा वाराणसी में अपने नाना-नानी के पास सुरक्षित था। पुलिस के अनुसार, बच्चे की मां ने पति से अलग रहने के लिए अपहरण की झूठी कहानी रची थी।

    मुंबई से सटे कल्याण में छह महीने के बच्चे के कथित अपहरण का मामला अब एक अलग ही मोड़ ले चुका है। शुरुआत में पुलिस ने मां की शिकायत पर बच्चे की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर जांच शुरू की थी। हालांकि, CCTV फुटेज की जांच के दौरान महिला के बयान और उसकी यात्रा से जुड़ी जानकारी में कई विरोधाभास सामने आए।

    मां ने दर्ज कराई थी बच्चे के अपहरण की शिकायत

    पुलिस के अनुसार, गुजरात के वापी की रहने वाली 21 वर्षीय रोशनी सूरज साहू ने शिकायत दी थी कि 14 जुलाई की सुबह कल्याण रेलवे स्टेशन के बाहर स्काईवॉक/फ्लाईओवर के नीचे सोते समय उसके छह महीने के बेटे आर्यन का अपहरण हो गया।

    शुरुआती शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरण और चोरी के मामले की जांच शुरू की। पुलिस टीमों ने रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाले। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती जांच में महिला के मोबाइल फोन के गायब होने की बात भी सामने आई थी।

    CCTV फुटेज से खुलने लगा पूरा मामला

    जांच के दौरान पुलिस को महिला के बयान और CCTV फुटेज में अंतर दिखाई दिया। महिला ने शुरुआत में बताया था कि वह वापी से कल्याण आई थी। हालांकि, पुलिस को वह वापी से आने वाली ट्रेन से कल्याण स्टेशन पर उतरती हुई दिखाई नहीं दी।

    इसके बाद जांचकर्ताओं ने दूसरी दिशाओं से आने वाली ट्रेनों और आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की। पुलिस के अनुसार, महिला वाराणसी से आने वाली महानगरी एक्सप्रेस से कल्याण पहुंची थी। फुटेज में उसके साथ बच्चा दिखाई नहीं दिया।

    पुलिस ने इसके बाद महिला से लगातार पूछताछ की। उसके बयानों में बदलाव आने के बाद जांचकर्ताओं का शक और गहरा गया।

    पूछताछ में सामने आई अपहरण की झूठी कहानी

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान महिला ने स्वीकार किया कि उसके बेटे आर्यन का कल्याण स्टेशन के बाहर से अपहरण नहीं हुआ था। उसने बच्चे को कल्याण आने से पहले ही वाराणसी में अपने माता-पिता के पास छोड़ दिया था।

    इसके बाद उसने बच्चे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, महिला ने यह कहानी अपने पति के साथ आगे नहीं रहना चाहने के कारण रची थी।

    कल्याण डिवीजन के एसीपी अशोक होनमाने के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया है कि महिला के बदलते बयानों के बाद पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।

    बच्चा कहां था? वाराणसी में मिला आर्यन

    जांच में पता चला कि छह महीने का आर्यन वाराणसी में अपने नाना-नानी के पास था। इसके बाद महात्मा फुले पुलिस की एक टीम वाराणसी पहुंची और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बच्चे को अपनी कस्टडी में लिया।

    पुलिस टीम बच्चे और उसकी मां को लेकर कल्याण लौट रही है। बच्चे की सुरक्षित बरामदगी के बाद पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि झूठी अपहरण की शिकायत दर्ज कराने के मामले में महिला के खिलाफ आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    पुलिस की जांच में क्या सामने आया?

    पुलिस के अनुसार, महिला की पहले भी शादी हो चुकी थी और पहली शादी से उसका एक बच्चा है, जो उसके माता-पिता के साथ रहता है। जांचकर्ताओं के अनुसार, दूसरी शादी के बाद उसने अपने छह महीने के बेटे आर्यन को भी अपने माता-पिता के पास छोड़ दिया था।

    हालांकि, इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। महिला के खिलाफ किसी विशेष कानूनी धारा में कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी अलग से सामने नहीं आई है।

    Important Points

    • छह महीने के बच्चे के कथित अपहरण की शिकायत दर्ज हुई थी।
    • पुलिस ने कल्याण स्टेशन और आसपास के CCTV फुटेज की जांच की।
    • महिला के बयानों में कथित तौर पर विरोधाभास सामने आया।
    • पुलिस के अनुसार, बच्चा पहले ही वाराणसी में नाना-नानी के पास था।
    • बच्चे को पुलिस ने वाराणसी से अपनी कस्टडी में लिया।
    • झूठी शिकायत के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर पुलिस विचार कर रही है।

    कल्याण रेलवे स्टेशन के बाहर छह महीने के बच्चे के कथित अपहरण का मामला पुलिस जांच में पूरी तरह बदल गया। पुलिस के अनुसार, CCTV फुटेज और पूछताछ के बाद सामने आया कि बच्चा वाराणसी में अपने नाना-नानी के पास सुरक्षित था और अपहरण की कहानी कथित तौर पर उसकी मां ने रची थी। अब पुलिस बच्चे को सुरक्षित कल्याण ला रही है और झूठी शिकायत के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय जांच पूरी होने के बाद लिया जाएगा।

    Official / Authoritative Sources

    Official Sources

    FAQ

    कल्याण में बच्चे के अपहरण का मामला झूठा कैसे सामने आया?

    पुलिस के अनुसार, CCTV फुटेज और महिला से पूछताछ के दौरान उसके बयानों में विरोधाभास सामने आया। इसके बाद जांच में पता चला कि बच्चा पहले ही वाराणसी में उसके माता-पिता के पास था।

    छह महीने का बच्चा कहां मिला?

    पुलिस के अनुसार, बच्चा वाराणसी में अपने नाना-नानी के पास सुरक्षित था। पुलिस टीम ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे अपनी कस्टडी में लिया।

    क्या बच्चे की मां के खिलाफ मामला दर्ज होगा?

    पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कथित तौर पर झूठी अपहरण शिकायत दर्ज कराने के मामले में उसके खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अंतिम कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।