मुंबई में पार्किंग को ऑफिस बताकर मॉर्गेज कराने का आरोप, 5 पर FIR

mumbai-malad-parking-area-office-forgery-case-five-booked

मुंबई के मलाड में 3,135 वर्गफुट पार्किंग एरिया को ऑफिस यूनिट बताकर मॉर्गेज कराने के आरोप में डेवलपर समेत 5 पर FIR हुई है।

मुंबई: मलाड ईस्ट के Atharva Landmark CHS में कथित तौर पर 3,135 वर्गफुट के कॉमन पार्किंग एरिया को कमर्शियल ऑफिस यूनिट के रूप में दिखाकर मॉर्गेज कराने के मामले में डिंडोशी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में डेवलपर दीपक शाह और Khush Housing Finance Pvt. Ltd. से जुड़े अधिकारियों के नाम शामिल हैं। पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है।

मलाड में पार्किंग एरिया को ऑफिस यूनिट बताने का आरोप

मुंबई के मलाड ईस्ट में एक हाउसिंग सोसाइटी के कॉमन पार्किंग एरिया को कथित रूप से कमर्शियल ऑफिस यूनिट के रूप में दिखाकर वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। Atharva Landmark CHS के निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी के दूसरे पोडियम पर मौजूद करीब 3,135 वर्गफुट के पार्किंग क्षेत्र को दस्तावेजों में तीन कथित ऑफिस यूनिट—201, 202 और 203—के रूप में दिखाया गया।

इस मामले में दिंडोशी पुलिस ने अमित मागिया, किरण मागिया, कल्पेश डेडिया, हर्षिता कनोजिया और डेवलपर दीपक शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपों में कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और cheating शामिल हैं। मामले की जांच अभी जारी है।

सोसाइटी के अनुसार, पार्किंग को लोन की सुरक्षा के तौर पर रखा गया

सोसाइटी के सदस्यों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2021 के बीच कई फ्लैट खरीदारों ने अपने घरों के साथ बेसमेंट, ग्राउंड, पहले और दूसरे पोडियम लेवल पर पार्किंग स्पेस खरीदे थे।

mumbai-malad-parking-area-office-forgery-case-five-booked

बाद में निवासियों को कथित तौर पर पता चला कि दूसरे पोडियम का पार्किंग क्षेत्र Khush Housing Finance Pvt. Ltd. (KHFL) के पास डेवलपर के लोन के लिए सुरक्षा के तौर पर मॉर्गेज किया गया था।

इसके बाद वित्तीय संस्था ने SARFAESI Act के तहत कथित तीन “ऑफिस यूनिट्स” पर कब्जे की कार्रवाई शुरू की। सोसाइटी का दावा है कि ये ऑफिस यूनिट वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं और संबंधित क्षेत्र स्वीकृत योजना के अनुसार पार्किंग के लिए निर्धारित है।

दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियों का आरोप

सोसाइटी ने Sub-Registrar कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों और अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के बीच कथित अंतर होने का दावा किया है।

सोसाइटी के आरोपों के अनुसार, दस्तावेजों में कथित तौर पर:

  • मॉर्गेज की तारीखों में अंतर था
  • खाली स्थानों को बाद में भरे जाने का संदेह है
  • कुछ दस्तावेजों में स्टांप से जुड़ी विसंगतियां थीं
  • हस्तलिखित बदलाव किए गए
  • संपत्ति का विवरण बदला हुआ दिखाई दिया
  • प्रॉपर्टी शेड्यूल में असंगतियां थीं
  • कथित रूप से हस्ताक्षरों में छेड़छाड़ की गई
  • तारीखों में कथित बदलाव कर मॉर्गेज को लोन जारी होने से पहले का दिखाने का आरोप है

सोसाइटी ने यह भी दावा किया कि कुछ दस्तावेजों में 23वीं और 24वीं मंजिल का संदर्भ है, जबकि उसके अनुसार BMC की स्वीकृत योजना में इमारत को 22वीं मंजिल तक मंजूरी मिली थी।

इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

Kailashnath D Yadav (left), secretary, and Jagdish Rajpopat, chairman, Atharva Landmark
कैलाशनाथ डी यादव (बाएं), सचिव, और जगदीश राजपोपत, अध्यक्ष, अथर्व लैंडमार्क

सोसाइटी सचिव ने क्या कहा?

Atharva Landmark CHSL के सचिव कैलाशनाथ डी. यादव के अनुसार, स्वीकृत योजनाओं के मुताबिक दूसरा पोडियम केवल पार्किंग के लिए है। उनका आरोप है कि इसी क्षेत्र को वित्तीय संस्था (बैंक) के सामने ऑफिस यूनिट के रूप में पेश किया गया और डेवलपर के लोन के लिए मॉर्गेज किया गया।

सोसाइटी का यह भी कहना है कि उसे SARFAESI Act के तहत कथित कार्रवाई की कोई उचित नोटिस नहीं दी गई, जिसके बाद निवासियों में चिंता पैदा हो गई।

मामला DRT और Bombay High Court तक पहुंचा

विवाद अब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं है। Atharva Landmark CHSL और Khush Housing Finance के बीच SARFAESI कार्रवाई को लेकर मामला Debt Recovery Tribunal और Debt Recovery Appellate Tribunal के समक्ष भी चल रहा है।

Bombay High Court ने 25 मार्च 2026 को मामले में सीमित राहत देते हुए विवादित secured assets का physical possession लेने की कार्रवाई को 2 अप्रैल 2026 तक स्थगित किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसने मामले के merits पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और संबंधित पक्षों को वैधानिक अपील के माध्यम से DRAT में जाने का निर्देश दिया था।

बाद में DRAT से जुड़े घटनाक्रम में KHFL की कब्जे की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, विवादित संपत्तियों में दो आवासीय फ्लैट और एक पार्किंग पोडियम शामिल था।

KHFL ने आरोपों को बताया निराधार

Khush Housing Finance ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे शिकायत की विस्तृत जानकारी और दस्तावेजों की जांच करने का अवसर अभी नहीं मिला है।

वित्तीय संस्था के अनुसार, उसने डेवलपर को लोन दिया था और डेवलपर ने फ्लैट्स, ऑफिस और प्रोजेक्ट कैश फ्लो को सुरक्षा के रूप में मॉर्गेज किया था। KHFL का कहना है कि डेवलपर के डिफॉल्ट के बाद SARFAESI Act के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई शुरू की गई।

KHFL ने अपने खिलाफ लगाए गए जालसाजी के आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताया है। कंपनी का दावा है कि संभव है कि डेवलपर ने सोसाइटी और वित्तीय संस्था—दोनों को गुमराह किया हो। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत उसकी वैध वसूली कार्रवाई को रोकने के लिए की गई है।

पुलिस जांच में अब किन बिंदुओं पर फोकस?

पुलिस के सामने अब मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी:

  • विवादित पार्किंग क्षेत्र का वास्तविक कानूनी और स्वीकृत उपयोग
  • कथित ऑफिस यूनिट्स का अस्तित्व और वैधता
  • मॉर्गेज दस्तावेजों की वास्तविकता
  • दस्तावेजों में कथित बदलाव और तारीखों की जांच
  • कथित हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच
  • डेवलपर और वित्तीय संस्था के अधिकारियों की भूमिका
  • लोन और मॉर्गेज प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए रिकॉर्ड

पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और विवादित संपत्ति के मॉर्गेज तथा संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जाएगी।

मामला अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया में

इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है, लेकिन अभी किसी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। दस्तावेजों में कथित जालसाजी, पार्किंग क्षेत्र के कथित गलत इस्तेमाल और मॉर्गेज प्रक्रिया में किसी भी पक्ष की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

विवादित संपत्तियों को लेकर कानूनी कार्यवाही DRT/DRAT और अदालतों के समक्ष जारी है। Bombay High Court ने भी अपने 25 मार्च 2026 के आदेश में मामले के merits पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की थी।

मलाड के Atharva Landmark CHS का मामला एक ओर कथित दस्तावेजी हेरफेर और कॉमन पार्किंग एरिया के इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ा है, तो दूसरी ओर डेवलपर के लोन और वित्तीय संस्था की SARFAESI कार्रवाई से भी संबंधित है। अब पुलिस जांच और चल रही न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि विवादित दस्तावेज कैसे तैयार हुए और इस पूरे मामले में किसकी वास्तविक भूमिका थी।

Official / Authoritative Sources


FAQ

क्या इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है?

हां। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डिंडोशी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में डेवलपर दीपक शाह और चार अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

विवादित संपत्ति क्या है?

सोसाइटी के अनुसार, करीब 3,135 वर्गफुट का दूसरा-पोडियम क्षेत्र कॉमन पार्किंग के लिए निर्धारित है, जबकि आरोप है कि इसे तीन कथित ऑफिस यूनिट्स के रूप में दिखाया गया।

क्या आरोपियों को दोषी ठहराया गया है?

नहीं। मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। अभी अदालत ने किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है।

SARFAESI Act क्या है?

SARFAESI Act के तहत पात्र बैंक और वित्तीय संस्थाएं डिफॉल्ट किए गए secured loans की वसूली के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत secured assets पर कार्रवाई कर सकती हैं।


Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading