Category: Police Action

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  • जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई कांड में बड़ा एक्शन: नंदन यादव को पैर में गोली, हरेराम भी गिरफ्तार; 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।

    बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

    नंदन यादव के पैर में लगी गोली

    मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।

    दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।

    रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई

    मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।

    पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।

    120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

    जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    FIR में POCSO और BNS की धाराएं

    मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।

    पुलिस पेट्रोलिंग भी जांच के दायरे में

    घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।

    महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान

    घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

    जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

    फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।

  • Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    Chakan Reel Stunt: चार SUVs से सड़क Block, Drone से शूट; Traffic Crisis के बीच Police Action

    चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।

    पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।

    चाकण MIDC में 3 सितंबर को क्या हुआ?

    पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।

    इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।

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    पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर

    पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।

    कौन-कौन सी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ?

    मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।

    पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।

    किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

    मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।

    इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।

    Drone को लेकर भी कार्रवाई का सवाल

    इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।

    फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।

    चाकण में पहले से Traffic का बड़ा दबाव

    चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।

    सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।

    17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।

    यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।

    Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।

    इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।

    इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।

    अब सवाल केवल एक Reel का नहीं

    पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

    फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।

  • मुंबई में तीन दशक पुराने दो मामलों के आरोपी गिरफ्तार, पुराने रिकॉर्ड से मिली लोकेशन

    मुंबई में तीन दशक पुराने दो मामलों के आरोपी गिरफ्तार, पुराने रिकॉर्ड से मिली लोकेशन

    मुंबई में 1995 और 1997 के अलग-अलग मामलों में वांछित दो आरोपी करीब तीन दशक बाद गिरफ्तार हुए। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी सुरागों से तलाश की।

    मुंबई: करीब तीन दशक पुराने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में वांछित दो आरोपियों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस ने 53 वर्षीय सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा को कांदिवली ईस्ट से गिरफ्तार किया, जबकि मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने 48 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा सैयद को बांद्रा ईस्ट के बेहरामपाड़ा इलाके से पकड़ा है। दोनों मामलों में आरोपी लंबे समय से पुलिस की तलाश में थे।

    1997 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी

    समता नगर पुलिस के अनुसार, विश्वकर्मा के खिलाफ Crime No. 347/1997 दर्ज किया गया था। मामले में IPC की धारा 363, 366 और 376 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार मामला नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा था।

    करीब 29 साल से लंबित इस मामले में पुलिस ने पुराने पते और परिचितों से जुड़ी जानकारी दोबारा जुटाई। स्थानीय पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी सुरागों के आधार पर उसके कांदिवली ईस्ट के ठाकुर विलेज स्थित जीवाला पाड़ा में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने उसे 3 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।

    1995 के मामले में बेहरामपाड़ा से आरोपी पकड़ा

    दिंडोशी पुलिस के अनुसार, मोहम्मद मुस्तफा सैयद के खिलाफ Crime No. 146/1995 में IPC की धारा 376(1) के तहत मामला दर्ज था। पुलिस के मुताबिक कथित अपराध के समय सैयद नाबालिग था। उसके खिलाफ डोंगरी स्थित Juvenile Court से search warrant जारी हुआ था।

    करीब 30 साल बाद उसके बेहरामपाड़ा में होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने इलाके में चार दिनों तक तलाश की। पुराने स्थानीय निवासियों, पड़ोसियों, दुकानदारों और अन्य लोगों से मिली जानकारी के साथ उपलब्ध रिकॉर्ड और मतदाता सूची का इस्तेमाल कर उसकी पहचान की गई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर Juvenile Court के समक्ष पेश किया गया।

    पुराने मामलों में ऐसे पहुंची पुलिस

    दोनों मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दशकों बाद आरोपियों की मौजूदा पहचान और ठिकाना तलाशना था। इसके लिए पुराने पुलिस रिकॉर्ड और पते को वर्तमान स्थानीय जानकारी से जोड़ा गया। समता नगर मामले में तकनीकी जानकारी से मिले सुराग भी जांच का हिस्सा रहे, जबकि दिंडोशी पुलिस ने स्थानीय स्तर पर लगातार पूछताछ की।

    दोनों गिरफ्तारियों के बाद संबंधित मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

  • अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

    यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।

    कारोबारी और पत्नी को ऑफिस तक कैसे ले जाया गया?

    पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।

    कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।

    ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।

    ₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।

    आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।

    यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।

    पूर्व ड्राइवर पर क्यों गया पुलिस का शक?

    जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?

    Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।

    पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।

    पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।

    अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

    • Santosh Uday Khopatkar, 37
    • Vinay Ramesh More, 37
    • Prem Kishan Sabnani, 50
    • Pragya Harish Main/Maine, 27
    • Reshma Shyamrao Warang, 41
    • Sabina Hafiz Shaikh, 48

    पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।

    क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?

    जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।

    जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।

    फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?

    इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

    लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।

    इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।

    कारोबारी ऐसी स्थिति में क्या सावधानी रखें?

    अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।

    खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।

    हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।

    पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

    Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।

    पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।

    फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

  • 10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    10वीं पास ने यूट्यूब से सीख कर साइबर ठगों को Server दिए, 17.42 लाख की ठगी के बाद खुला 1,100 लोगों का नेटवर्क

    मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।

    जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।

    ₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी

    इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।

    APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।

    साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।

    YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक

    पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।

    इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।

    Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?

    पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।

    सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।

    Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।

    1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं

    इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।

    पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।

    Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।

    rdpwale.in पर आज भी दिख रही हैं RDP services

    जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।

    यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।

    MGL के नाम पर पहले भी हो चुकी है बड़ी ठगी

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।

    अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।

    यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

    Laptop और mobile से खुलेगा आगे का राज

    पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।

    सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।

    अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • मुंबई Eid-e-Milad Clash: Viral Video पर 3 Instagram Accounts पर FIR, अब पुलिस का अगला एक्शन

    मुंबई Eid-e-Milad Clash: Viral Video पर 3 Instagram Accounts पर FIR, अब पुलिस का अगला एक्शन

    मुंबई Eid-e-Milad clash के viral video पर 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR हुई है। Police अब video source और account operators की जांच कर रही है।

    मुंबई: Parel-Chinchpokli इलाके में Eid-e-Milad procession के दौरान हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 26 अगस्त की घटना के बाद सामने आए एक viral video को लेकर Kalachowki Police ने 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि video कहां से आया, इसे किसने upload किया और इसके साथ किया गया दावा असल घटना से कितना मेल खाता है।

    यानी मामला अब सिर्फ सड़क पर हुए clash तक नहीं है। पुलिस की नजर उस video को social media पर फैलाने के तरीके पर भी है।

    क्या हुआ था Parel-Chinchpokli में?

    26 अगस्त को Eid-e-Milad procession के बाद Parel-Chinchpokli इलाके में दो groups के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद धक्कामुक्की और तनाव की स्थिति बनी और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।

    घटना के बाद social media पर कई तरह के videos और claims सामने आए। इसी वजह से पुलिस ने लोगों से बिना पुष्टि किसी भी जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी।

    Joint Commissioner of Police (Law and Order) Manoj Sharma ने उस समय कहा था कि senior police officers मौके पर मौजूद हैं और situation control में है। उन्होंने लोगों से rumours से बचने की अपील की थी।

    Original clash में पहले क्या कार्रवाई हुई?

    इस विवाद के मामले में पहले पुलिस ने तीन लोगों को book किया था। Rehan Masood Sayyad, Adil Khan Ahmed Khan और Miraj Mohammad Firoz Rais के नाम सामने आए थे।

    पुलिस दूसरे लोगों की पहचान को लेकर भी जांच कर रही थी। लेकिन अब इस मामले में social media से जुड़ा एक अलग angle सामने आया है।

    29 अगस्त को Police की नजर पड़ी Viral Video पर

    Kalachowki Police के Cyber Squad में तैनात Police Constable Vikram Khaire की complaint के मुताबिक, 29 अगस्त को social-media monitoring के दौरान पुलिस की नजर एक video पर पड़ी।

    Complaint के अनुसार यह video करीब तीन दिन पहले Instagram पर upload किया गया था। Video में दो groups के बीच confrontation दिखाई देता है और police personnel भीड़ को control करते नजर आते हैं।

    लेकिन पुलिस की जांच का सबसे अहम point video के साथ लिखा गया caption है।

    Ganpati banner को लेकर क्या दावा किया गया?

    Police complaint के मुताबिक video के साथ लगाए गए caption में दावा किया गया था कि Parel-Lalbaug इलाके में Ganpati banner को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के reaction में यह confrontation हुआ।

    पुलिस को आशंका है कि इस तरह घटना को धार्मिक angle से जोड़कर पेश करने वाला post लोगों के बीच गलतफहमी या तनाव बढ़ा सकता है।

    Complaint में video के background में “Jalwa Re Jalwa” song इस्तेमाल किए जाने का भी जिक्र है।

    यहीं से सवाल उठता है कि video में जो घटना दिखाई गई, क्या उसके साथ लगाया गया दावा भी सही था?

    फिलहाल पुलिस इसी कड़ी को verify कर रही है।

    3 Instagram Accounts पर FIR

    Kalachowki Police ने complaint के आधार पर 3 Instagram accounts को जांच के दायरे में लिया है। पुलिस का आरोप है कि इन accounts से allegedly ऐसा material circulate किया गया, जिसे misleading और inflammatory माना गया।

    पुलिस यह जांच रही है कि footage असल में कब और कहां record हुआ, उसका original source क्या है और उसे Instagram पर किसने upload किया।

    Police अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है?

    सवालपुलिस की जांच
    Video कहां का है?Original footage का source पता किया जा रहा है
    Video किसने upload किया?3 Instagram accounts चलाने वालों की पहचान
    Video कब बना?Recording और upload की timeline की जांच
    Caption में किया गया दावाGanpati banner से जुड़े claim की पड़ताल
    Video का पूरा contextघटना में वास्तव में क्या हुआ, इसकी जांच

    इस जांच का एक अहम हिस्सा उन लोगों तक पहुंचना है जो इन Instagram accounts को operate कर रहे थे।

    Police का पहले भी था साफ message

    Parel-Chinchpokli विवाद के बाद Joint Commissioner Manoj Sharma ने लोगों से social media पर चल रहे rumours पर भरोसा नहीं करने को कहा था। पुलिस ने साफ किया था कि senior officers मौके पर मौजूद हैं और हालात control में हैं।

    अब उसी घटना से जुड़े viral video पर FIR होने के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि social media पर सामने आई जानकारी original घटना को सही तरीके से दिखाती है या उसे अलग तरीके से पेश किया गया।

    Ganpati Aagman के बीच Parel-Lalbaug में हलचल

    इस बीच Parel-Lalbaug-Chinchpokli belt में Ganpati Aagman को लेकर भी बड़ी भीड़ जुट रही है। Chinchpokli Cha Chintamani Aagman के दौरान भारी police deployment की रिपोर्ट सामने आई थी।

    Aagman के दौरान करीब 800 से 1,000 police personnel deployment में लगाए गए थे।

    हालांकि इस deployment को Instagram FIR से सीधे जोड़ने की कोई official confirmation सामने नहीं आई है।

    अब पुलिस का अगला एक्शन

    3 Instagram accounts पर FIR के बाद अब पुलिस video के original source, उसके साथ किए गए claim और accounts चलाने वाले लोगों की पहचान पर आगे बढ़ रही है।

    फिलहाल investigation जारी है। इसलिए viral video या उसके caption को पूरी घटना का final सच मानना सही नहीं होगा।

    26 अगस्त के Parel-Chinchpokli clash के बाद सामने आया यह नया मामला दिखाता है कि अब पुलिस की जांच सिर्फ मौके पर हुए विवाद तक सीमित नहीं है। Viral video की पूरी कहानी, उसका source और उसके साथ किया गया दावा जांच के बाद ही साफ होगा।

  • DSP नेहा पच्चीसिया पर बड़ा शिकंजा, FIR के बाद ₹10 हजार का इनाम और LOC जारी, क्या विदेश भागने की थी तैयारी? जमीन सौदे का पूरा मामला

    DSP नेहा पच्चीसिया पर बड़ा शिकंजा, FIR के बाद ₹10 हजार का इनाम और LOC जारी, क्या विदेश भागने की थी तैयारी? जमीन सौदे का पूरा मामला

    DSP नेहा पच्चीसिया पर FIR, गिरफ्तारी का ₹10 हजार इनाम और LOC जारी हो चुका है। क्या विदेश भागने की तैयारी थी? जानिए जमीन सौदे से जुड़ा पूरा मामला।

    मध्यप्रदेश: निलंबित DSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ पहले निलंबन, फिर FIR, गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम, अग्रिम जमानत खारिज और अब LOC जारी होने तक की कार्रवाई हो चुकी है।

    जमीन सौदे से जुड़े इस मामले में नेहा पच्चीसिया के साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी भी आरोपी हैं। पुलिस तीनों को फरार बता रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

    अब LOC यानी लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस को आरोपियों के विदेश भागने की आशंका थी?

    LOC क्यों जारी करना पड़ा?

    पुलिस को आशंका है कि फरार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए देश से बाहर जाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से उनके खिलाफ LOC की कार्रवाई की गई है।

    LOC जारी होने के बाद अगर आरोपी किसी international airport या immigration point के जरिए विदेश जाने की कोशिश करते हैं तो संबंधित एजेंसियों को alert मिल सकता है और पुलिस को इसकी जानकारी दी जा सकती है।

    यानी मामला अब सिर्फ गिरफ्तारी की तलाश तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह भी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि आरोपी देश से बाहर निकलकर जांच से बच न सकें।

    लेकिन DSP पर इतनी बड़ी कार्रवाई की नौबत क्यों आई?

    इसकी शुरुआत एक जमीन सौदे से हुई।

    मामला कटनी के कन्हवारा इलाके की करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा बताया गया है। खबर के मुताबिक जमीन का खसरा नंबर 2618/1 है।

    शिकायत में आरोप है कि जमीन का सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था, लेकिन इसकी registry सिर्फ 18.20 लाख रुपये में कराई गई। इस जमीन की guideline value करीब 82.86 लाख रुपये बताई गई है।

    यहीं से सवाल खड़ा हुआ कि अगर सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये का था, तो registry में सिर्फ 18.20 लाख रुपये क्यों दिखाए गए?

    1.07 करोड़ के सौदे में 18.20 लाख की registry

    जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल 2026 को जमीन की registry हुई थी। दस्तावेजों में 18.20 लाख रुपये की रकम दर्ज की गई।

    इसमें करीब 15 लाख रुपये cheque के जरिए और लगभग 3.20 लाख रुपये cash का उल्लेख सामने आया है।

    शिकायत में आरोप है कि करीब 92 लाख रुपये की बाकी रकम का भुगतान नहीं किया गया।

    अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के वास्तविक सौदे, registry में दर्ज रकम और बैंक खातों में हुए transactions के बीच क्या connection था।

    Registry वाले दिन खाते में आए 15 लाख

    जांच में सामने आया financial trail इस केस का एक अहम हिस्सा है।

    जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल को, जिस दिन registry हुई, मारूफ अहमद हनफी के बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा हुए।

    बताया गया है कि इसमें 10 लाख रुपये Shine Partners के account से और 5 लाख रुपये क्षितिज राज बारापात्रे के account से आए।

    जांच में Shine Partners और क्षितिज राज बारापात्रे के bank accounts में एक ही PAN number जुड़े होने की बात भी सामने आई है।

    SIT अब इन transactions को जमीन की registry और पूरे सौदे की बाकी कड़ियों से जोड़कर देख रही है।

    जमीन सौदे के पीछे हत्या केस की कड़ी कैसे आई?

    यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है।

    जमीन का विवाद रमेश लोधी के परिवार से जुड़ा बताया गया है। उनके बेटे आकाश लोधी से जुड़े हत्या केस और जमीन सौदे के बीच भी connection की जांच की जा रही है।

    खबर के मुताबिक आकाश लोधी को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे bail मिली। हत्या मामले में chargesheet दाखिल होने की timeline और 90 दिनों के भीतर chargesheet दाखिल न होने से जुड़े default bail के मुद्दे को भी जांच के दौरान देखा गया।

    शिकायत में आरोप है कि जमीन सौदे और पुलिस कार्रवाई के बीच संबंध था। हालांकि यह आरोप अभी जांच का हिस्सा है और इसे अदालत से साबित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    नेहा पच्चीसिया, क्षितिज और मारूफ की भूमिका क्या है?

    इस मामले में तीन आरोपी हैं।

    नेहा पच्चीसिया — निलंबित DSP और इस मामले की मुख्य आरोपी अधिकारियों में से एक। उनके ऊपर पद के कथित दुरुपयोग और जमीन सौदे में दबाव बनाने से जुड़े आरोप हैं।

    क्षितिज राज बारापात्रे — प्राप्त जानकारी में उन्हें कथित financier और जमीन transaction से जुड़े व्यक्ति के रूप में बताया गया है।

    मारूफ अहमद हनफी — registry में buyer के तौर पर उनका नाम सामने आया है। उनके खाते में 15 लाख रुपये आने की भी जांच की जा रही है।

    तीनों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

    FIR में कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं?

    मामले में BNS की धारा 61, 198, 199(B), 308(7) और 318(4) के तहत FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

    जांच आगे बढ़ने के बाद Prevention of Corruption Act की धारा 7, 12 और 13 भी जोड़ा गया है।

    इससे जांच का दायरा जमीन के पैसों के विवाद से आगे बढ़कर सरकारी पद के कथित misuse और corruption angle तक पहुंच गया है।

    SIT अब क्या-क्या खंगाल रही है?

    मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय SIT बनाई गई है। इसकी कमान ASP अंजना तिवारी को दी गई है।

    SIT जमीन की registry, mutation records, bank transactions, payment details, CCTV footage, statements और digital evidence की जांच कर रही है।

    इससे पहले मामले की जांच अलग-अलग स्तर पर हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला आगे बढ़ा और फिर FIR दर्ज हुई। अब SIT अलग-अलग records और statements को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की timeline तैयार कर रही है।

    सील CSP ऑफिस क्यों बना जांच का अहम हिस्सा?

    नेहा पच्चीसिया से जुड़े CSP office को पहले ही सील किया जा चुका है। वहां मौजूद files, registers और digital records भी जांच के दायरे में हैं।

    SIT इन records की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन सौदे और कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े कोई दस्तावेज या electronic evidence वहां मौजूद हैं या नहीं।

    फिलहाल किसी खास document या electronic evidence के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस आरोपियों तक पहुंची या नहीं?

    फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं।

    SIT और पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। 28 अगस्त को टीम मारूफ अहमद हनफी के घर भी पहुंची थी, लेकिन वहां ताला मिला। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई।

    यानी पुलिस की कार्रवाई अब सिर्फ FIR दर्ज करने तक नहीं है। आरोपियों की तलाश के साथ-साथ उनके financial और digital links भी खंगाले जा रहे हैं।

    29 अगस्त को कोर्ट से नेहा को क्या झटका लगा?

    गिरफ्तारी से पहले राहत के लिए नेहा पच्चीसिया ने anticipatory bail की मांग की थी।

    29 अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

    इसके बाद गिरफ्तारी का दबाव और बढ़ गया है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और अब LOC जारी होने से विदेश जाने की संभावना पर भी रोक लगाने की कोशिश की गई है।

    हालांकि अग्रिम जमानत खारिज होना किसी आरोपी को दोषी साबित नहीं करता। अंतिम स्थिति जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

    नेहा पच्चीसिया पर पहले भी उठे थे सवाल

    जमीन मामले से पहले भी नेहा पच्चीसिया से जुड़ा एक अलग विवाद सामने आया था। प्राप्त जानकारी में vehicle checking के दौरान एक transporter से 30 हजार रुपये मांगने के आरोप का उल्लेख हुआ है।

    इस मामले में एक driver constable के suspension और उनके jurisdiction से कुछ थानों का charge हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल इस केस में सबसे बड़ा सवाल नेहा पच्चीसिया और बाकी दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर है।

    दूसरी तरफ SIT financial transactions, registry documents, CCTV, statements और digital records की कड़ियां जोड़ रही है। अगर जांच में इन सबके बीच ठोस connection सामने आता है तो मामले का दायरा आगे बढ़ सकता है।

    आरोपियों के पास आगे High Court से कानूनी राहत लेने का रास्ता भी हो सकता है। अगर गिरफ्तारी होती है तो उसके बाद regular bail की प्रक्रिया सामने आएगी।

    लेकिन इस वक्त सबसे बड़ा अपडेट यही है कि एक निलंबित DSP के खिलाफ मामला अब सिर्फ FIR और departmental action तक नहीं रहा। गिरफ्तारी पर इनाम, anticipatory bail खारिज होने और LOC जारी होने के बाद पुलिस का शिकंजा काफी कस चुका है।

    अब नजर इस बात पर है कि नेहा पच्चीसिया और बाकी दोनों आरोपी कब पकड़े जाते हैं और SIT की जांच में जमीन के 1.07 करोड़ रुपये के कथित सौदे, 18.20 लाख की registry और 15 लाख रुपये के bank transaction के बीच अगली बड़ी कड़ी क्या सामने आती है।

  • मेरठ की अनु कॉलिस का LIVE: ‘यही है वो फ्रॉक…’, QR कोड पर दी सफाई, बोलीं- मुझे गलत तरीके से पेश किया गया

    मेरठ की अनु कॉलिस का LIVE: ‘यही है वो फ्रॉक…’, QR कोड पर दी सफाई, बोलीं- मुझे गलत तरीके से पेश किया गया

    अनु कॉलिस ने LIVE में वायरल वीडियो पर सफाई दी। फ्रॉक, QR कोड, सोशल मीडिया पोस्ट और खुद पर लगे आरोपों को लेकर कई सवालों का जवाब दिया।

    मेरठ: निलंबित महिला दरोगा अनु कॉलिस एक बार फिर चर्चा में हैं। वायरल वीडियो को लेकर उन्होंने LIVE आकर अपना पक्ष रखा है। इस दौरान उन्होंने उस फ्रॉक को भी कैमरे के सामने दिखाया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।

    LIVE में अनु कॉलिस ने सीधे अमित किलोर को संबोधित करते हुए कहा, “अमित भैया, यही है वो फ्रॉक जिसका आपने स्क्रीनशॉट लिया है। अभी स्क्रीनशॉट ले लो, ठीक है?”

    उन्होंने दावा किया कि इसी फ्रॉक को लेकर उनके खिलाफ गलत तरीके से बातें फैलाई गईं और इसे उनकी मां के साथ आगरा के एक मॉल से खरीदा गया था।

    ‘मेरी लाइफ खराब करके आपको क्या मिला?’

    अनु कॉलिस ने कहा कि उनके वीडियो और तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर जिस तरह की बातें फैलाई गईं, उससे उनकी निजी जिंदगी और परिवार पर काफी असर पड़ा है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पोस्ट और वीडियो के जरिए माहौल बनाया गया, जबकि उनके मुताबिक अब तक संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    अनु ने कहा कि उनका चैनल एक दिन के लिए बंद हुआ, लेकिन बाद में फिर शुरू हो गया। उनका सवाल था कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

    वायरल वीडियो पर बोलीं- मेरे कपड़े को गलत तरीके से दिखाया गया

    अनु कॉलिस ने अपने LIVE में सबसे ज्यादा जोर उस फ्रॉक पर दिया, जिसे लेकर विवाद शुरू हुआ। उन्होंने वही कपड़ा पहनकर कैमरे के सामने आने की वजह भी बताई।

    उनका कहना था कि वह दिखाना चाहती हैं कि जिस कपड़े को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया, वह सामान्य कपड़ा है और उसे उनके खिलाफ अलग संदर्भ में इस्तेमाल किया गया।

    उन्होंने कहा कि उनके परिवार में ऐसे कपड़े पहनना सामान्य है और उन्हें इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि लोग क्या सोचते हैं।

    ‘मैं साइबर विक्टिम हूं’

    अनु कॉलिस ने खुद को इस पूरे मामले में साइबर विक्टिम बताते हुए कहा कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और उनके परिवार के लोगों को भी परेशान किया जा रहा है।

    उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से वह मानसिक रूप से काफी परेशान हैं और उनके परिवार पर भी इसका असर पड़ा है।

    अनु ने कहा कि वह चुप हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह गलत हैं। उनके मुताबिक, वह लगातार यह समझाने की कोशिश कर रही हैं कि उनके साथ गलत हुआ है।

    ‘सेक्स चैट’ वाले आरोप पर भी सवाल

    वायरल कंटेंट को लेकर लगाए जा रहे “सेक्स चैट” जैसे आरोपों पर भी अनु कॉलिस ने सवाल उठाया।

    उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो वह उसे उनके विभाग, साइबर थाने और वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेज सकता है।

    अनु ने जांच की मांग करते हुए कहा कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं और अपने पक्ष को जांच के सामने रखने से उन्हें कोई डर नहीं है।

    QR कोड को लेकर क्या बोलीं अनु?

    वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले QR कोड को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। अनु कॉलिस ने LIVE में दावा किया कि वह QR कोड उनके Instagram हैंडल का था।

    उन्होंने कहा कि वह अपने वीडियो में लोगों से चैनल को सब्सक्राइब करने, वीडियो को लाइक और शेयर करने तथा उन्हें फॉलो करने की अपील करती थीं। उनके मुताबिक इसी वजह से QR कोड का इस्तेमाल किया गया था।

    उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि QR कोड की जांच कराई जा सकती है और इससे पता चल जाएगा कि वह किस चीज से जुड़ा था।

    हालांकि, QR कोड को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। इसलिए इस हिस्से को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही साफ होगा।

    ‘मैंने वर्दी में कोई गलत वीडियो नहीं बनाया’

    अनु कॉलिस ने अपनी पुलिस सेवा को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने वर्दी में ऐसा कोई वीडियो नहीं बनाया जिससे पुलिस विभाग की गरिमा प्रभावित हो।

    उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो और निजी कंटेंट को अलग-अलग संदर्भ में दिखाकर उनकी छवि खराब की गई।

    उन्होंने खुद को पढ़ाई में अच्छा बताते हुए कहा कि वह सब-इंस्पेक्टर हैं और उन्हें सोशल मीडिया की गाइडलाइंस की जानकारी है। उनका कहना था कि उन्हें पता है कि सोशल मीडिया पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की टिप्पणी का भी जिक्र

    LIVE के दौरान अनु कॉलिस ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से हुई बातचीत का भी जिक्र किया।

    उन्होंने दावा किया कि अधिकारी ने उनसे कहा कि उन्होंने विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया है। इसके जवाब में अनु ने सवाल उठाया कि अगर उनके साथ गलत हुआ है तो सिर्फ उनके ऊपर ही सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?

    उन्होंने एक पुराने कथित वायरल वीडियो का उदाहरण देते हुए कहा कि जब किसी पुरुष अधिकारी का वीडियो गलत तरीके से प्रसारित हो सकता है, तो उनके मामले को भी उसी नजर से देखा जाना चाहिए।

    मीडिया रिपोर्टिंग पर भी भड़कीं अनु

    अनु कॉलिस ने कुछ बड़े समाचार चैनलों और पत्रकारों की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बारे में खबर चलाने से पहले उनसे या संबंधित पुलिस अधिकारियों से पूरी जानकारी नहीं ली गई।

    उन्होंने कहा कि उनके बारे में पुराने वीडियो, चैट और सोशल मीडिया कंटेंट को दोबारा निकालकर दिखाया गया और इससे उन्हें लेकर गलत धारणा बनी।

    अनु ने कहा कि अगर किसी चैनल को उनके बारे में पूरी जानकारी चाहिए थी तो संबंधित अधिकारियों से फोन पर जानकारी ली जा सकती थी।

    ‘मेरा चैनल सिर्फ फिटनेस के लिए था’

    अपने सोशल मीडिया कंटेंट के बारे में अनु कॉलिस ने कहा कि उनका एक छोटा चैनल था, जहां वह मुख्य रूप से फिटनेस और जिम से जुड़े वीडियो बनाती थीं।

    उन्होंने बताया कि वह जिम जाती थीं, व्यायाम और जुंबा से जुड़े वीडियो बनाती थीं और उनका मकसद लोगों को फिटनेस के लिए प्रेरित करना था।

    उनका आरोप है कि इसी पुराने कंटेंट को अलग-अलग तरीके से पेश करके उनके खिलाफ माहौल बनाया गया।

    ‘मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं’

    LIVE के आखिर में अनु कॉलिस ने अपने बैंक खातों और फंडिंग को लेकर भी जांच की चुनौती दी।

    उन्होंने कहा कि अगर किसी को लगता है कि उन्होंने सोशल मीडिया से गलत तरीके से पैसा कमाया है तो उनके खातों की जांच की जा सकती है। उन्होंने अपने परिवार के खातों की भी जांच कराने की बात कही।

    अनु कॉलिस का कहना था कि वह किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं और उन्हें भरोसा है कि जांच में उनका पक्ष सामने आएगा।

    अब बड़ा सवाल- वायरल वीडियो के पीछे की पूरी कहानी क्या है?

    अनु कॉलिस के LIVE के बाद विवाद का एक और पक्ष सामने आया है। एक तरफ उनके पुराने सोशल मीडिया कंटेंट और वायरल वीडियो को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी तरफ अनु खुद इसे गलत तरीके से पेश किए जाने और साइबर उत्पीड़न का मामला बता रही हैं।

    फ्रॉक, QR कोड, पुराने सोशल मीडिया पोस्ट, कथित चैट और वायरल वीडियो को लेकर अब कई सवाल एक साथ सामने हैं। अनु कॉलिस ने अपने LIVE में इन सभी मुद्दों पर अपना पक्ष रखा है।

    फिलहाल इस पूरे विवाद में उनके LIVE में कही गई बातें उनका पक्ष हैं। उनके लगाए आरोपों और सामने आए दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही पूरी तरह साफ होगी।

    साफ बात यह है कि अनु कॉलिस के इस LIVE ने वायरल वीडियो विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मामले में आगे पुलिस और साइबर जांच में क्या सामने आता है।

  • Malad West Sex Racket का भंडाफोड़, H2O Luxury Spa से 2 गिरफ्तार; 4 महिलाएं Rescue, मालिक की तलाश

    Malad West Sex Racket का भंडाफोड़, H2O Luxury Spa से 2 गिरफ्तार; 4 महिलाएं Rescue, मालिक की तलाश

    Malad West के H2O Luxury Spa पर Crime Branch Unit-8 की raid में 2 गिरफ्तार और 4 महिलाएं rescue हुईं। Spa owner wanted है और BNS-PITA Act में केस दर्ज हुआ।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में H2O Luxury Spa & Salon को लेकर Crime Branch Unit-8 की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। पुलिस के मुताबिक, मसाज सेंटर की आड़ में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियां चलाए जाने की सूचना मिलने के बाद Crime Branch ने यहां छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 2 स्पा संचालकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 4 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया है।

    मामले में स्पा के मालिक की भी तलाश की जा रही है। पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और PITA Act के तहत केस दर्ज किया है। अब जांच का फोकस सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस कथित गतिविधि से जुड़े दूसरे लोगों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी है।

    मालाड वेस्ट के स्पा में आखिर क्या चल रहा था?

    पुलिस को जानकारी मिली थी कि मालाड वेस्ट स्थित H2O Luxury Spa & Salon में सामान्य मसाज और स्पा सर्विस की आड़ में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियां चल रही हैं। इसी सूचना के आधार पर Crime Branch Unit-8 ने मामले की जांच शुरू की और इसके बाद कार्रवाई की गई।

    पुलिस की कार्रवाई के बाद स्पा से जुड़ी गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर यह पूरा काम किस तरह संचालित किया जा रहा था और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

    2 संचालक गिरफ्तार, 4 महिलाओं को किया गया Rescue

    कार्रवाई में 2 लोगों को गिरफ्तार किए जाने के साथ 4 महिलाओं को वहां से रेस्क्यू किया गया। पुलिस की कार्रवाई में महिलाओं को आरोपी मानने के बजाय उन्हें रेस्क्यू किए जाने की बात सामने आई है।

    इन महिलाओं की पहचान और निजी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। मामले की जांच के दौरान पुलिस यह भी देखेगी कि वे वहां किस परिस्थिति में पहुंचीं और क्या उन्हें किसी तरह के दबाव, लालच या शोषण का सामना करना पड़ा था।

    रेस्क्यू की गई महिलाओं के मामले में आगे की प्रक्रिया उनकी सुरक्षा, बयान और जरूरत के मुताबिक सहायता से जुड़ी हो सकती है।

    Spa Owner की तलाश तेज

    इस मामले में H2O Luxury Spa & Salon के मालिक को भी फिलहाल वांटेड बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित गतिविधियों में उसकी भूमिका क्या थी।

    जांच में यह भी साफ होना बाकी है कि स्पा का संचालन किसके निर्देश पर किया जा रहा था और गिरफ्तार किए गए दोनों संचालकों तथा मालिक के बीच क्या संबंध था।

    यही इस केस की जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है।

    BNS और PITA Act के तहत मामला

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS और Immoral Traffic (Prevention) Act यानी PITA Act के तहत केस दर्ज किया है।

    PITA Act में prostitution से जुड़े अलग-अलग अपराधों के लिए प्रावधान हैं। वहीं BNS में human trafficking और उससे जुड़े exploitation के लिए भी अलग कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

    क्या पूरे नेटवर्क की भी जांच होगी?

    2 लोगों की गिरफ्तारी और 4 महिलाओं के rescue के बाद जांच का अगला सवाल यही है कि क्या यह मामला सिर्फ एक spa तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा network भी काम कर रहा था।

    पुलिस को यह पता लगाना होगा कि महिलाओं को वहां तक कौन लेकर आया, spa का संचालन कौन कर रहा था, पैसों का लेन-देन कैसे होता था और इस कथित गतिविधि में और कौन लोग जुड़े हुए थे।

    अगर जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो इस मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।

    Rescue की गई महिलाओं के लिए आगे क्या?

    इस तरह की कार्रवाई में सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही पूरी प्रक्रिया नहीं होती। रेस्क्यू की गई महिलाओं की सुरक्षा और rehabilitation भी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    मानव तस्करी या sexual exploitation के मामलों में महिलाओं को stigma, मानसिक दबाव और दोबारा शोषण के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में counselling, सुरक्षित रहने की जगह और जरूरी सहायता अहम होती है।

    इस मामले में भी रेस्क्यू की गई 4 महिलाओं को लेकर पुलिस की आगे की प्रक्रिया जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय होगी।

    इस कार्रवाई का Malad पर क्या असर?

    Malad West में spa की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियों का मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर उन लोगों के बीच जो genuine wellness और massage services के लिए ऐसे centres का इस्तेमाल करते हैं।

    हालांकि एक कथित आपराधिक मामले के आधार पर पूरे spa या wellness sector को संदेह की नजर से देखना सही नहीं होगा। जांच जिस specific establishment और उसमें सामने आए आरोपों तक सीमित है, उसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल Crime Branch Unit-8 की जांच आगे बढ़ रही है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ, वांटेड spa owner की तलाश और कथित गतिविधि से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की जांच इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।

    अगर जांच में नए नाम या नए links सामने आते हैं तो केस में आगे और गिरफ्तारियां या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    मामले में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल पुलिस जांच के स्तर पर हैं। किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले उसे दोषी मानना उचित नहीं होगा।

    नोट: यह खबर उपलब्ध पुलिस जानकारी और रिपोर्ट किए गए तथ्यों के आधार पर है। रेस्क्यू की गई महिलाओं की पहचान और निजी जानकारी उनकी सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रकाशित नहीं की गई है।

  • कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार, जानिए पूरा मामला और अब आगे क्या होगा ?

    मुंबई: कांदिवली पूर्व के पोईसर इलाके में हफ्ता वसूली और मारपीट के आरोप में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समता नगर पुलिस के मुताबिक, यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा और उसकी कथित टोली के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी MCOCA के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला 15 जून 2026 की रात करीब 12:30 बजे पोईसर, कांदिवली पूर्व में हुई एक गंभीर मारपीट की घटना से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, फिर्यादी ए.बी.के. ने कथित तौर पर हफ्ता नहीं दिया था। इसी बात को लेकर आरोपियों ने उसके कपड़े उतारकर गालीगलौज की और लोहे की रॉड, लकड़ी के स्टंप और लात-मुक्कों से मारपीट की।

    आरोप है कि यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा ने फिर्यादी को जान से मारने की धमकी भी दी और उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया। इस हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद भी आरोपियों ने इलाज के लिए जमा हुए नागरिकों को धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी।

    घटना के बाद समता नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, इस केस में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी

    इस मामले में रोहित कृष्णप्रताप सिंह, उम्र 33 वर्ष और सागर अनिल राठोड, उम्र 22 वर्ष को 15 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायालयीन हिरासत में हैं।

    पुलिस के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा अभी फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।

    यमेश दरेकर के खिलाफ पहले से 37 गंभीर मामले

    पुलिस के मुताबिक यमेश दरेकर को गंभीर अपराधों में शामिल आरोपी बताया जा रहा है। समता नगर पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ कुल 37 मामले दर्ज हैं।

    इन मामलों में हत्या की कोशिश, जान से मारने की धमकी, जबरन चोरी, घातक हथियार का डर दिखाकर चोरी, गली गलौज और मारपीट, विनयभंग, गंभीर चोट पहुंचाना, आपराधिक षड्यंत्र, घर में अतिक्रमण और दूसरे गंभीर अपराधों का उल्लेख है।

    पुलिस के अनुसार, यमेश दरेकर के खिलाफ इससे पहले समता नगर पुलिस स्टेशन के माध्यम से दो बार MPDA के तहत स्थानबद्ध करने और दो बार तडीपारी की कार्रवाई भी की जा चुकी है।

    रोहित सिंह और सागर राठोड पर भी गंभीर मामले

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी रोहित कृष्णप्रताप सिंह भी यमेश दरेकर की कथित टोली का सदस्य है। उसके खिलाफ समता नगर पुलिस स्टेशन में कुल 13 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें जबरन चोरी, गालीगलौज और मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाना, जान से मारने की धमकी और घर में अतिक्रमण जैसे अपराधों का उल्लेख है।

    दूसरा आरोपी सागर अनिल राठोड भी इसी कथित टोली का सदस्य बताया गया है। उसके खिलाफ दो मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने बताया, कि साल 2023 में उसके खिलाफ BNS की संबंधित धारा के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई थी।

    MCOCA की कार्रवाई क्यों हुई?

    पुलिस के मुताबिक, यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली अलग-अलग गंभीर अपराधों के जरिए इलाके में दहशत और वर्चस्व कायम कर आर्थिक फायदा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। इसी आधार पर पुलिस ने इस मामले को संगठित अपराध की दिशा में देखा।

    पुलिस उपायुक्त, परिमंडल-03, मुंबई गजानन शिवलिंग राजमाने के मार्गदर्शन में MCOCA के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया गया। यह प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा गया, जिसके बाद संबंधित मंजूरी मिलने पर यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई की गई।

    मामले की आगे की जांच सहायक पुलिस आयुक्त कैलास बर्वे कर रहे हैं।

    MCOCA लगने के बाद अब क्या होगा?

    MCOCA के तहत कार्रवाई होना इस मामले में एक गंभीर कानूनी कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं। अब मामले में पुलिस की आगे की जांच, जरूरी कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।

    मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार है, इसलिए पुलिस के सामने उसकी गिरफ्तारी भी एक अहम कदम है। वहीं गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों और मौजूदा केस में उनकी कथित भूमिका की जांच आगे जारी रहेगी।

    पोईसर-कांदिवली के लोगों के लिए यह मामला क्यों अहम है?

    हफ्ता वसूली का आरोप सिर्फ एक व्यक्ति से पैसे मांगने तक सीमित नहीं रहता। अगर किसी इलाके में धमकी, मारपीट और दबाव का माहौल बनता है तो इसका असर आम लोगों, छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, ठेलेवालों और दूसरे स्थानीय लोगों की सुरक्षा की भावना पर पड़ सकता है।

    मुंबई में 2025 के दौरान extortion के 314 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में 199 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में सिर्फ पारंपरिक organised gang extortion ही शामिल नहीं था; sextortion और local goons द्वारा builders, contractors और hawkers से protection money मांगने जैसे मामले भी सामने आए थे। इसलिए हर extortion case को organised gang activity मानना सही नहीं है।

    पोईसर का मौजूदा मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पुलिस ने यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, कथित लगातार आपराधिक गतिविधियों और मौजूदा मामले को देखते हुए MCOCA के तहत कार्रवाई की है।

    फिलहाल पुलिस का फोकस फरार मुख्य आरोपी यमेश दरेकर को पकड़ने और मामले की आगे की जांच पूरी करने पर है। इस कार्रवाई के बाद पोईसर-कांदिवली इलाके में कथित हफ्ता वसूली और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।