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मुंबई के 2009 मुलुंड हत्याकांड में 17 साल से फरार फिरोज शेख गिरफ्तार। बिहार से टिटवाला तक ठिकाना बदलकर रह रहा था आरोपी, पुलिस ने ऐसे पकड़ा।
मुंबई: मुलुंड में 2009 में हुए हत्या के मामले में 17 साल से फरार आरोपी फिरोज मोहम्मद सुलेमान शेख को मुलुंड पुलिस ने टिटवाला पूर्व के बनेली गांव से गिरफ्तार किया है। आरोपी बिहार में अपने पैतृक गांव से लेकर कई जगहों पर ठिकाना बदलकर रह रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह अपनी पहचान छिपाने के लिए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बदलता रहता था। आखिरकार गुप्त सूचना और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस उसकी लोकेशन तक पहुंचने में सफल रही।
गिरफ्तार आरोपी की उम्र पुलिस से संबंधित उपलब्ध जानकारी में 39 वर्ष बताई गई है। वह बनेली गांव की लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में अपने परिवार के साथ रह रहा था और एक निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था।
पुराने विवाद में हुई थी मसकूर की हत्या
यह मामला 20 जून 2009 का है। मुलुंड पुलिस थाना क्षेत्र में इराम उर्फ मसकूर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फिरोज, अफरोज और उनके दो अन्य साथियों पर हत्या में शामिल होने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे पुरानी रंजिश थी। बताया जाता है कि फिरोज के भाई को मृतक के साथ काम करते समय आंखों में चोट लगी थी, जिसके बाद उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी। इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच गांव की जमीन को लेकर भी विवाद चल रहा था।
इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने कथित तौर पर मसकूर के सिर पर हथौड़े से वार किया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मुलुंड पुलिस थाने में CR No. 218/2009 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।
बिहार में तलाश के बाद टिटवाला में मिला ठिकाना
हत्या के बाद फिरोज पुलिस की गिरफ्त से बाहर हो गया था। पुलिस ने बिहार में उसके पैतृक गांव में भी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद उसे वांटेड आरोपी घोषित किया गया।
पुलिस को जांच के दौरान जानकारी मिली कि आरोपी अलग-अलग स्थानों पर रह रहा है और मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड बदलता रहता है। इस वजह से उसकी तलाश में परेशानी आ रही थी।
मुलुंड पुलिस ने बिहार में अपने गुप्त मुखबिरों के नेटवर्क की मदद से उसकी जानकारी जुटाई। गुप्त सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर पता चला कि आरोपी अब बिहार में नहीं, बल्कि टिटवाला पूर्व के बनेली गांव में रह रहा है।
इसके बाद पुलिस टीम ने लक्ष्मण चॉल के कमरा नंबर 2 में कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया। वह वहां परिवार के साथ रह रहा था और निर्माण स्थल पर फिटर का काम कर रहा था। पूछताछ और जांच में उसकी पहचान 2009 के हत्या मामले के वांटेड आरोपी के रूप में हुई।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) मनोज कुमार, अपर पुलिस आयुक्त पूर्व प्रादेशिक विभाग धनंजय कुलकर्णी, पुलिस उपायुक्त पूर्व परिमंडल-3 अभयसिंह देशमुख और सहायक पुलिस आयुक्त मुलुंड विभाग सुदर्शन होनवडजकर के मार्गदर्शन में की गई।
वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संतोष घाटेकर की निगरानी में सहायक पुलिस निरीक्षक विनोद लभडे और पुलिस उपनिरीक्षक स्वप्निल महाजन ने टीम के साथ कार्रवाई की।
इस टीम में पुलिस हवलदार चव्हाण, शेडगे और चौघुले तथा पुलिस सिपाही शिंपी, करदोरे, गावडे, सरकटे और आव्हाड शामिल थे। बिहार में मुखबिरों से मिली जानकारी और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में टीम को सफलता मिली।
गिरफ्तारी के बाद पुराने मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर
करीब 17 साल पुराने इस हत्या मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में शामिल बताए गए अन्य तीन आरोपियों की वर्तमान स्थिति और पुराने मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी सामने आना बाकी है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का अपराध गंभीर श्रेणी में आता है, जबकि धारा 34 साझा मंशा से किए गए अपराध में सामूहिक जिम्मेदारी से संबंधित है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कार्रवाई अदालत और पुलिस जांच के अनुसार होगी।
Mumbai News: वरळी कोळीवाडा में आधी रात आत्महत्या के इरादे से समुद्र में उतरे व्यक्ति को PSI व्हावळे और कांस्टेबल पवार ने सुरक्षित बाहर निकालकर जान बचाई।
मुंबई: वरळी कोळीवाडा इलाके में 2 नवंबर 2026 की आधी रात समुद्र में आत्महत्या के इरादे से उतरे एक व्यक्ति की जान पुलिस की सतर्कता से बच गई। मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से सूचना मिलने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और कांस्टेबल पवार मौके पर पहुंचे और समुद्र में उतरकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला।
घटना रात 12 बजकर 26 मिनट की है। समय पर की गई पुलिस कार्रवाई से संभावित जनहानि टल गई।
मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली थी सूचना
वरळी कोळीवाडा इलाके में एक व्यक्ति आत्महत्या करने के उद्देश्य से समुद्र में उतर गया था। इसकी जानकारी मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष को मिली। नियंत्रण कक्ष से सूचना मिलने के बाद पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और बीट मार्शल-1 पर तैनात पुलिस कांस्टेबल क्रमांक 111052 पवार तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुए।
मौके पर पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने देखा कि एक व्यक्ति समुद्र के पानी में मौजूद है और उसकी जान को खतरा है।
समुद्र में उतरकर पुलिसकर्मियों ने किया बचाव
व्यक्ति की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और कांस्टेबल पवार ने समुद्र में उतरकर उसे बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। दोनों पुलिसकर्मियों के प्रयासों के बाद व्यक्ति को सुरक्षित समुद्र से बाहर निकाल लिया गया।
इस कार्रवाई में पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना तत्काल कदम उठाया। समय पर किए गए बचाव अभियान से एक संभावित जानलेवा घटना टल गई।
बचाए गए व्यक्ति की पहचान और चिकित्सा सहायता
समुद्र से बाहर निकालने के बाद पुलिस ने व्यक्ति की पहचान और घटना से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त करने की कार्रवाई की। साथ ही उसकी प्रकृति की जांच करते हुए उसे जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगे की कार्रवाई की गई।
हालांकि, बचाए गए व्यक्ति की उम्र, पहचान, अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति और आत्महत्या का प्रयास करने के पीछे की वजह के बारे में फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
आधी रात की पुलिस सतर्कता से टली संभावित जनहानि
वरळी कोळीवाडा की इस घटना में मुंबई पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली सूचना के बाद तत्काल घटनास्थल पर पहुंचना और समुद्र में उतरकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना महत्वपूर्ण रहा।
पुलिस उपनिरीक्षक व्हावळे और पुलिस कांस्टेबल पवार की इस कार्रवाई से संभावित जनहानि टल गई। घटना की जानकारी दादर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक श्री बालकृष्ण घाडीगांवकर को सविनय प्रस्तुत की गई।
आत्महत्या के प्रयास से संबंधित ऐसी घटनाओं में समय पर सहायता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है। संकट में फंसे किसी व्यक्ति की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस या आपातकालीन सहायता से संपर्क करना उसकी जान बचाने में मददगार हो सकता है।
मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव के कबाड़ गोदाम से 1,150 मोबाइल मदरबोर्ड जब्त किए। इनकी कीमत ₹1.15 करोड़ बताई गई, एक आरोपी गिरफ्तार।
मुंबई: मुंबई में मोबाइल चोरी के बाद उनके पार्ट्स निकालकर बेचने के कथित कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। दिंडोशी पुलिस ने नासिक जिले के मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई कर 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड जब्त किए हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस की जांच मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क में हुई दो मोबाइल की चोरी से शुरू हुई थी, लेकिन इसकी कड़ी मालेगांव तक पहुंच गई। अब पुलिस जब्त मदरबोर्ड की पहचान कर यह पता लगाने में जुटी है कि वे मुंबई और दूसरे इलाकों से चोरी हुए किन मोबाइल फोन के हैं और इस कथित कारोबार में और कौन-कौन शामिल है।
मालाड के पुष्पा पार्क से शुरू हुई थी जांच
इस मामले की शुरुआत 22 सितंबर 2026 को मालाड पूर्व के पुष्पा पार्क इलाके में हुई मोबाइल चोरी की शिकायत से हुई थी। यहां एक महिला के बैग से दो मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। इसके बाद दिंडोशी पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 1073/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।
चोरी की इस घटना की जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मुंबई से चोरी किए गए मोबाइल फोन मालेगांव ले जाए जा रहे हैं। वहां मोबाइल खोलकर उनके अलग-अलग पार्ट्स निकाले जाते हैं और मदरबोर्ड को कबाड़ के रूप में बेचने का कारोबार किया जा रहा है।
मालेगांव के कबाड़ गोदाम से मिले 1,150 मदरबोर्ड
जांच के दौरान मिली जानकारी के आधार पर दिंडोशी पुलिस ने मालेगांव में एक कबाड़ गोदाम पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान वहां से 1,150 मोबाइल के मदरबोर्ड बरामद किए गए। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 1.15 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जब्त किए गए मदरबोर्ड के स्रोत और उनकी पहचान की जांच की जा रही है।
चोरी के मोबाइल के पार्ट्स अलग करके बेचने का शक
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू चोरी के मोबाइल फोन को खोलकर उनके पार्ट्स अलग-अलग बेचने का कथित तरीका है। मोबाइल का पूरा हैंडसेट बेचने के बजाय उसके मदरबोर्ड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को अलग करके बेचने से चोरी के फोन की पहचान और बरामदगी की जांच जटिल हो सकती है।
1,150 मदरबोर्ड किन मोबाइल फोन के हैं?
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल जब्त मदरबोर्ड की पहचान करना है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ये मदरबोर्ड मुंबई में चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन से जुड़े हैं या दूसरे इलाकों के मामलों से भी इनका संबंध है।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गोदाम तक ये मदरबोर्ड किस माध्यम से पहुंचे, उन्हें किसने खरीदा और आगे किन लोगों को बेचने की तैयारी थी। फिलहाल अबतक पूरे सप्लाई नेटवर्क या अन्य आरोपियों की संख्या की जांच नहीं हुई है।
मोबाइल चोरी होने पर क्या करें?
मोबाइल चोरी होने पर सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद फोन का IMEI नंबर और जरूरी दस्तावेज तैयार रखकर केंद्र सरकार के CEIR पोर्टल पर मोबाइल ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।
CEIR के जरिए चोरी या गुम हुए मोबाइल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक कराया जा सकता है। यदि ब्लॉक किया गया फोन किसी नेटवर्क पर दोबारा इस्तेमाल होता है, तो उसकी ट्रेसिंग में पुलिस को मदद मिल सकती है।
दिंडोशी पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का मुख्य फोकस जब्त किए गए 1,150 मदरबोर्ड की पहचान और उनके वास्तविक स्रोत का पता लगाना है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद पुर्जे किन मोबाइल चोरी के मामलों से जुड़े हैं और मालेगांव तक पहुंचने वाले इस कथित कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।
मुंबई के चारकोप में फर्जी Apple-Amazon कस्टमर केयर कॉल सेंटर का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार और दो फरार।
मुंबई: चारकोप में Apple और Amazon जैसी नामी कंपनियों का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर कथित तौर पर देश-विदेश के लोगों को फोन करने वाले बोगस कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में आसिफ हनीफ कुरैशी और स्मार्ट पी. जॉन को गिरफ्तार किया गया है, जबकि शाहरुख शेख और सिमरन सिंह उर्फ सिमरन रंधावा की तलाश जारी है। पुलिस ने मौके से चार लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, नौ चार्जर, नौ हेडफोन और कॉलिंग स्क्रिप्ट वाली एक डायरी जब्त की है।
चारकोप पुलिस स्टेशन में 27 अक्टूबर 2026 को इस मामले में FIR दर्ज की गई। पुलिस की 28 अक्टूबर की जानकारी मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिए ग्राहकों को फोन करते थे और खुद को Apple या Amazon का कस्टमर केयर प्रतिनिधि बताकर आर्थिक फायदा उठाने की कोशिश करते थे।
ग्राहकों की शिकायतों से जुड़ी जानकारी का कथित दुरुपयोग
इस मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्राहकों की शिकायतों से जुड़ी जानकारी का कथित इस्तेमाल है। जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, ग्राहकों की समस्याओं, अकाउंट बंद होने या ऑर्डर डिलीवर नहीं होने जैसी बातों का हवाला देकर उन्हें फोन किया जाता था। ऐसे मामलों में ग्राहक को लगता है कि फोन करने वाला व्यक्ति उसकी वास्तविक समस्या से परिचित है और वह संबंधित कंपनी का प्रतिनिधि हो सकता है।
हालांकि, इस मामले में ग्राहकों की जानकारी किस स्रोत से हासिल की गई, कितने लोगों की जानकारी का इस्तेमाल हुआ और कितने लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। कथित ठगी की कुल रकम का भी स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
चारकोप के फ्लैट से लैपटॉप, मोबाइल और कॉलिंग स्क्रिप्ट जब्त
पुलिस के अनुसार, कथित कॉल सेंटर चारकोप के भाब्रेकर नगर स्थित Acme Avenue की ए विंग में फ्लैट नंबर 1304 से संचालित किया जा रहा था। 26 अक्टूबर 2026 को रात 11 बजे से पहले की अवधि में वहां कथित गतिविधियों का उल्लेख पुलिस दस्तावेज में किया गया है।
जांच के दौरान पुलिस ने चार लैपटॉप, नौ चार्जर, नौ हेडफोन, चार मोबाइल फोन और स्क्रिप्ट लिखी हुई एक डायरी जब्त की। इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से कथित कॉलिंग गतिविधियों, संपर्कों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के बारे में जानकारी मिलने की संभावना है। हालांकि, जब्त सामग्री से अब तक कितने पीड़ितों की पहचान हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
कौन गिरफ्तार और कौन वांछित?
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आसिफ हनीफ कुरैशी (31) और स्मार्ट पी. जॉन (40) के रूप में हुई है। पुलिस से मिली जानकारी में दोनों को ऑपरेटर बताया गया है।
पुलिस के मुताबिक, शाहरुख शेख और सिमरन सिंह उर्फ सिमरन रंधावा कथित तौर पर इस गतिविधि से जुड़े थे और फिलहाल वांछित हैं। उनकी भूमिका, कथित कॉल सेंटर के संचालन में जिम्मेदारी और आर्थिक लेनदेन से संबंधित विवरण की जांच की जा रही है।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
चारकोप पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2), 318(4) और 3(5) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है।
फर्जी कस्टमर केयर कॉल से कैसे बचें?
इस घटना के मद्देनजर ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। किसी अनजान कॉलर के Apple, Amazon या किसी अन्य कंपनी का प्रतिनिधि होने के दावे पर तुरंत भरोसा न करें। अपनी शिकायत या ऑर्डर की जानकारी की पुष्टि संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के जरिए करें।
किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड, डिवाइस पासकोड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। अगर कोई कॉलर अकाउंट बंद करने, ऑर्डर रद्द होने या तत्काल भुगतान की धमकी देकर दबाव बनाता है, तो कॉल समाप्त करके आधिकारिक कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें।
अगर साइबर ठगी के जरिए पैसे निकल जाते हैं, तो तुरंत 1930 पर साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करें और https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत करने से संबंधित वित्तीय लेनदेन पर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
चारकोप पुलिस की जांच में अब कथित ठगी की कुल रकम, प्रभावित ग्राहकों की संख्या, ग्राहकों की शिकायतों से जुड़ी जानकारी के स्रोत और वांछित आरोपियों की भूमिका जैसे सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे। इन पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
Tiger Shroff firing case: मुंबई क्राइम ब्रांच ने सूरत से दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए। जानें जांच, गिरफ्तारियों और बैलिस्टिक टेस्ट की अहमियत।
मुंबई: बॉलीवुड के एक्शन हीरो टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच को अहम सुराग मिला है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने गुजरात के सूरत से दो पिस्तौल और 10 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को की गई। अब जांच में हथियारों के स्रोत, उनकी सप्लाई चेन और फायरिंग में उनके इस्तेमाल की पुष्टि अहम है।
पुलिस के मुताबिक, क्राइम ब्रांच की टीम हथियारों को हमलावरों तक पहुंचाने से जुड़े लॉजिस्टिकल नेटवर्क की पड़ताल कर रही थी। इसी कड़ी में टीम सूरत के एक ठिकाने तक पहुंची, जहां से दोनों हथियार बरामद किए गए। मामले में हथियारों की बरामदगी के बाद जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि इनका फायरिंग की घटना से सीधा संबंध है या नहीं।
सूरत से मिले हथियारों की होगी जांच
बरामद दो हथियार और 10 जिंदा कारतूस इस केस की जांच में महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं। हालांकि, सिर्फ हथियार बरामद होने से यह साबित नहीं होता कि उनका इस्तेमाल टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के दौरान किया गया था।
इसके लिए बैलिस्टिक जांच अहम होगी। इसमें बरामद हथियारों की तकनीकी जांच कर घटनास्थल से मिले खाली कारतूसों या अन्य फॉरेंसिक सबूतों से उनका मिलान किया जा सकता है। जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि हथियारों का घटना से संबंध है या नहीं।
हथियार कहां से आए, उन्हें किसने उपलब्ध कराया और आरोपियों तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका रही, इन सवालों के जवाब भी जांच का हिस्सा हैं। फिलहाल इस बरामदगी को अंतिम फॉरेंसिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
18 अक्टूबर को जुहू में हुई थी फायरिंग
यह मामला 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई गोलीबारी से जुड़ा है। जहां टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाकर फायरिंग की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और मामले की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
घटना के बाद जांचकर्ताओं ने हमले में शामिल लोगों की पहचान, हथियारों की व्यवस्था और आरोपियों के बीच संपर्कों की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में कथित रेकी और हमले से पहले की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठे।
तीन आरोपियों की पुलिस हिरासत, गिरफ्तारियों की भी जांच
इस मामले में गिरफ्तारियों और कथित मददगारों की भूमिका की भी जांच हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत से पकड़े गए तीन आरोपियों को 28 अक्टूबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया था। जांच में उनकी कथित भूमिका, हथियारों की व्यवस्था और अन्य संदिग्धों के साथ संपर्कों की पड़ताल शामिल है।
21 अक्टूबर के आसपास सामने आई जानकारी में मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 10 तक पहुंच गया।
हथियारों की सप्लाई चेन से क्या खुल सकता है?
सूरत में हुई बरामदगी जांचकर्ताओं को हथियारों की सप्लाई चेन समझने में मदद कर सकती है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कहां से आए, उन्हें किसने रखा और कथित तौर पर हमलावरों तक पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था।
जांच में कथित रेकी, आरोपियों के आपसी संपर्क और घटना से पहले की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण हैं। लेकिन किसी बड़े नेटवर्क, गिरोह या हमले के मकसद को लेकर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब उसके समर्थन में पर्याप्त सबूत सामने आएं।
इस मामले में आगे की जांच के लिए हथियारों की फॉरेंसिक रिपोर्ट, आरोपियों से पूछताछ और पुलिस की ओर से सामने आने वाली अतिरिक्त जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल दो हथियारों और 10 जिंदा कारतूसों की बरामदगी जांच का नया घटनाक्रम है। अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद हथियारों का फायरिंग से क्या संबंध है और हथियारों की सप्लाई चेन में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताया। जानें नए प्रदर्शन स्थल और पूरा मामला।
नई दिल्ली:दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताते हुए कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।”
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं:
रामलीला मैदान
बुराड़ी मैदान
CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली
यह निर्णय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की निर्धारित जगह से हटा दिया गया है और अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उनके बयान में सरकार और व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक आलोचना भी शामिल थी।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध दर्ज कराने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जंतर-मंतर को सूची से हटाने से पहले संबंधित पक्षों से सलाह ली गई थी या नहीं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कानूनी स्थिति
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर संविधान के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से जुड़े मामले पर 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई थी। प्रदर्शन के दौरान कथित उत्पीड़न से संबंधित एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में भी दिल्ली में प्रदर्शन के प्रबंधन और उससे जुड़े प्रतिबंधों के मुद्दे पर कार्यवाही हुई।
इस मामले में निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और हर परिस्थिति में सभी प्रकार के शांतिपूर्ण विरोध पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बीच अंतर करना जरूरी है। वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित आदेश, अनुमति प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद के बीच अब तीन वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था लागू की गई है। अभिजीत दीपके का “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा” वाला बयान इसी फैसले के विरोध में आया है।
गुजरात के अरावली में करीब 500 किलो पोशडोडा (अफीम की भूसी) और दो माउजर पिस्तौल बरामद हुईं। फायरिंग में एक आरोपी घायल हुआ, जबकि तीन पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए।
गुजरात: अरावली जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस और संदिग्ध तस्करों के बीच फायरिंग हो गई। मालपुर क्षेत्र के मोरडूंगरी के पास तड़के करीब तीन बजे हुई कार्रवाई में करीब 500 किलो पोशडोडा (अफीम की भूसी) और दो माउजर पिस्तौल बरामद की गईं। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए भेजा गया, जबकि उसका साथी फरार हो गया। मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
वाहन रोकने पर शुरू हुई फायरिंग
स्थानीय क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि मध्य प्रदेश से राजस्थान की ओर पोशडोडा (अफीम की भूसी) की खेप ले जाई जा रही है। निगरानी के दौरान संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक, वाहन में सवार लोगों ने इस दौरान दो राउंड फायर किए, जिसके बाद टीम ने जवाबी कार्रवाई की।
घायल आरोपी की पहचान राजाराम बिश्नोई के रूप में हुई है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फरार आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस ने मौके से दो माउजर पिस्तौल और अन्य सामग्री जब्त की है।
कार्रवाई में LCB PI एम.एच. झाला, PSI पी.पी. सोलंकी और ASI कल्पेश सिंह घायल हुए। उनकी चोटों की विस्तृत स्थिति की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
10 दिन में दूसरी बार ड्रग तस्करी के दौरान फायरिंग
अरावली में यह घटना करीब 10 दिन के भीतर ऐसी दूसरी कार्रवाई है, जिसमें मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के दौरान पुलिस को फायरिंग का सामना करना पड़ा।
22 सितंबर को धंसूरा तालुका के शिनोल के पास पुलिस ने एक स्कॉर्पियो से 278.77 किलो पोशडोडा बरामद किया था। उस मामले में दो संदिग्ध फरार हो गए थे। वाहन से मोबाइल फोन, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और अलग-अलग नंबर प्लेट भी मिली थीं। जब्त सामग्री और वाहन की कुल अनुमानित कीमत करीब 50.10 लाख रुपये बताई गई थी।
उस जांच में पुलिस को मंदसौर, मध्य प्रदेश से सांचौर, राजस्थान तक पोशडोडा पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जानकारी मिली थी। 2 अक्टूबर की कार्रवाई में भी खेप के स्रोत और संभावित गंतव्य की जांच इसी वजह से महत्वपूर्ण हो गई है।
2025 में भी सामने आया था ऐसा मामला
अरावली के मालपुर क्षेत्र में इससे पहले अगस्त 2025 में करीब 437 किलो पोशडोडा पकड़ा गया था। उस कार्रवाई में भी पुलिस के पीछा करने के दौरान फायरिंग हुई थी। एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था, जबकि दूसरा भाग निकला था। जांच में मंदसौर से गुजरात होते हुए राजस्थान तक खेप पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अनुसार पोशडोडा की छोटी मात्रा एक किलोग्राम और कॉमर्शियल मात्रा 50 किलोग्राम है। ऐसे में करीब 500 किलो की बरामदगी कॉमर्शियल मात्रा की सीमा से लगभग दस गुना है।
NDPS Act की धारा 15 के तहत कमर्शियल मात्रा वाले पोशडोडा के अपराध में 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि पर निर्भर करेगी।
अब जांच में किन कड़ियों की तलाश
पुलिस की जांच अब फरार आरोपी की तलाश के साथ हथियारों के स्रोत और पोशडोडा की सप्लाई चेन तक पहुंचने पर केंद्रित है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि खेप मध्य प्रदेश में कहां से चली, गुजरात के रास्ते किस नेटवर्क ने इसे आगे बढ़ाया और राजस्थान में इसका अंतिम प्राप्तकर्ता कौन था।
जांच में 22 सितंबर की बरामदगी और पुराने मामलों से कोई सीधा संबंध सामने आता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल एक आरोपी गिरफ्तार है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
Borivali East के Khodiyar Nagar में ANC ने 691 ग्राम हेरोइन जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। NDPS Act के तहत मामला दर्ज, सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी।
मुंबई: Borivali East में Anti-Narcotics Cell (ANC) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 691 ग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस के मुताबिक बरामद हेरोइन की अनुमानित कीमत करीब 1.38 करोड़ रुपये है। कार्रवाई Khodiyar Nagar इलाके में हुई, जहां संदिग्ध गतिविधि नजर आने के बाद एक व्यक्ति को रोककर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान रक्सैक से हेरोइन बरामद हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
यह कार्रवाई ANC की Kandivali Unit ने की। पुलिस के अनुसार टीम इलाके में गश्त कर रही थी, इसी दौरान एक व्यक्ति के व्यवहार पर संदेह हुआ। उसे रोककर जांच की गई तो उसके पास मौजूद रक्सैक से 691 ग्राम हेरोइन मिली। पुलिस ने हेरोइन और उसे रखने के लिए इस्तेमाल किए गए बैग को जब्त कर लिया।
691 ग्राम हेरोइन का मामला कितना गंभीर है?
बरामद मात्रा NDPS Act के तहत तय commercial quantity की सीमा से काफी अधिक है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार हेरोइन की small quantity 5 ग्राम और commercial quantity 250 ग्राम निर्धारित है। इस लिहाज से 691 ग्राम बरामदगी commercial quantity की सीमा से करीब 2.76 गुना अधिक है।
मामले में आरोपी के खिलाफ Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 की धारा 8(c) और 21(c) के तहत केस दर्ज किया गया है। Commercial quantity से जुड़े Section 21(c) के मामले में दोष सिद्ध होने पर 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि इस मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।
Kasturba Marg Police Station में केस दर्ज
हेरोइन बरामद होने के बाद मामले में Kasturba Marg Police Station में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद नशीला पदार्थ आरोपी तक कहां से पहुंचा था और इसे मुंबई या आसपास के इलाकों में किसे दिया जाना था।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि आरोपी खुद इस नेटवर्क का हिस्सा था या किसी अन्य व्यक्ति के लिए हेरोइन लेकर जा रहा था। फिलहाल पुलिस की ओर से इस संबंध में अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
कार्रवाई DCP (ANC) Purnima Chougule-Shringi और ACP Sudhir Hirdekar की निगरानी में हुई। Kandivali Unit की टीम का नेतृत्व Senior Police Inspector Rahul Lokhande और Police Sub-Inspector Nikhil Shelke ने किया।
Borivali में पहले भी मिली थी बड़ी मात्रा में हेरोइन
Borivali East में हेरोइन से जुड़ी यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। दिसंबर 2025 में ANC की Kandivali Unit ने Rashtriya Udyan Metro Station के पास एक घर से 511 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। उस कार्रवाई में दो मोबाइल फोन और एक mixer grinder भी जब्त किया गया था। पुलिस की जांच में उस मामले में घर पर हेरोइन तैयार कर उसे छोटे पैकेटों में स्थानीय स्तर पर बेचने के आरोप सामने आए थे।
हालांकि दिसंबर 2025 की उस कार्रवाई और Borivali East की मौजूदा 691 ग्राम हेरोइन बरामदगी के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
Mumbai में लगातार सामने आ रही बड़ी हेरोइन बरामदगी
इस साल मुंबई के अलग-अलग इलाकों में हेरोइन की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। मई 2026 में ANC की Kandivali Unit ने Versova में 765 ग्राम हेरोइन जब्त की थी और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की जांच में दोनों के मुंबई में कई बार आकर नशीले पदार्थ की आपूर्ति करने की बात सामने आई थी।
जून में Goregaon में ANC ने 750 ग्राम हेरोइन के साथ 20 वर्षीय Subhan Imran Gada को गिरफ्तार किया था। इस मामले में भी पुलिस ने source और आगे की supply chain की जांच शुरू की थी।
अगस्त में Kandivali West में Crime Branch Unit 11 ने 651 ग्राम हेरोइन जब्त कर दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में हेरोइन के अलावा नकदी और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए थे तथा कथित interstate network की जांच की जा रही थी।
इससे पहले मई में Santacruz East में भी ANC की Kandivali Unit ने 508 ग्राम हेरोइन जब्त की थी। उस मामले में पुलिस source और intended recipients का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।
इन अलग-अलग मामलों को एक ही गिरोह से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल की कार्रवाइयों में जांच का प्रमुख फोकस नशीले पदार्थ की खेप के source, supplier और आगे के recipients तक पहुंचने पर रहा है।
अब पुलिस की जांच किस दिशा में?
Borivali के मौजूदा मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल हेरोइन की supply chain को लेकर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 691 ग्राम की खेप कहां से आई, आरोपी को यह किसने दी और इसे आगे किस स्थान या व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।
जांच में आरोपी के संपर्कों, संभावित suppliers और अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। अगर पूछताछ या आगे की जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और हेरोइन जब्ती के साथ दर्ज मामले की जांच जारी है। असली source और इस खेप के पीछे मौजूद नेटवर्क का पता चलना अब इस कार्रवाई का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Jogeshwari East के Acme Boulevard मामले में CBI ने 5 पूर्व प्रमोटर्स-डायरेक्टर्स पर chargesheet दाखिल की। जानिए project, insolvency और homebuyers की पूरी स्थिति।
मुंबई: Jogeshwari East स्थित Acme Boulevard housing project से जुड़े कथित homebuyer fraud मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने पांच पूर्व promoters/directors और Acme Realties Private Limited की holding company Acme Housing India Private Limited के खिलाफ chargesheet दाखिल की है। यह chargesheet Additional Chief Judicial Magistrate (CBI Cases), 3rd Court, Esplanade Court, Mumbai के सामने दाखिल हुई है। CBI के अनुसार, जांच में homebuyers को कथित तौर पर false assurances और fraudulent representations के जरिए प्रभावित कर financial benefits हासिल करने के आरोप सामने आए हैं।
CBI ने आरोपों में criminal conspiracy, cheating, criminal breach of trust और dishonest receipt of stolen property से जुड़े भारतीय दंड संहिता के प्रावधान लगाए हैं। हालांकि chargesheet दाखिल होना आरोपों का न्यायिक रूप से साबित होना नहीं है और मामले में आगे अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
Acme Boulevard की कहानी सिर्फ CBI chargesheet तक सीमित नहीं है। इस project से जुड़े homebuyers के विवाद, MahaRERA proceedings, redevelopment dispute और बाद में शुरू हुई insolvency resolution process का लंबा background है। यही वजह है कि इस मामले में मौजूदा CBI कार्रवाई के साथ यह समझना भी जरूरी है कि project की स्थिति यहां तक कैसे पहुंची।
Acme Boulevard project कहां है और विवाद क्या है?
Acme Boulevard Village Majas, Sarvodaya Nagar, Jogeshwari East में स्थित redevelopment project है। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार जिस जमीन पर redevelopment हुआ, वह MHADA की लगभग 40,429.64 वर्ग मीटर जमीन थी। यहां पहले 88 chawls में 655 tenements थे। वर्ष 2008 में Majaswadi Sarvodayanagar Co-operative Housing Society के सदस्यों ने इस property के composite redevelopment का फैसला लिया था और redevelopment के लिए developers को आमंत्रित किया गया था।
Project के development structure में J.P. Infra Mumbai Private Limited, Keemaya Developers Private Limited और Acme Realities Private Limited से जुड़े arrangements का उल्लेख NCLT और MahaRERA records में मिलता है। Acme Boulevard के Boulevard Tower 4 और Boulevard Tower 5 इसी redevelopment framework का हिस्सा हैं।
Acme Boulevard Tower 5 के MahaRERA record में project की proposed completion date 30 December 2022 दर्ज थी। बाद में revised completion date 30 December 2023 की गई, लेकिन promoter ने extension के लिए आवेदन नहीं किया था। MahaRERA के 2025 interim order में project को 30 December 2023 के बाद lapsed बताया गया और उस समय Occupation Certificate भी नहीं मिला था।
इसी दौरान Majaswadi Sarvodayanagar Society ने नवंबर 2022 में termination notice और public notice जारी किया था। Acme Realities ने इसका विरोध करते हुए legal proceedings शुरू कीं। MahaRERA के रिकॉर्ड में Acme की ओर से यह भी दर्ज है कि विवाद को Bombay High Court के सामने ले जाया गया और arbitration का रास्ता अपनाया गया।
यानी project का विवाद केवल individual homebuyers की possession समस्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि developer और redevelopment society के बीच भी गंभीर विवाद सामने आया।
Acme Boulevard Tower 4 और Tower 5 के homebuyers ने possession में देरी को लेकर insolvency proceedings का रास्ता अपनाया। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार Abhishek Ranganathan और अन्य homebuyers ने Acme Realities के खिलाफ Corporate Insolvency Resolution Process यानी CIRP शुरू करने की मांग की थी। Petition में इन buyers को financial creditors/homebuyers के रूप में दर्ज किया गया और बताया गया कि उन्होंने Boulevard Tower 4 और Boulevard Tower 5 में residential units खरीदे थे।
NCLT ने 21 February 2024 को Acme Realities के खिलाफ CIRP शुरू किया। इसके बाद company के लिए resolution process शुरू हुआ। IBBI के रिकॉर्ड में Acme Realities Private Limited के लिए resolution plan process और Resolution Professional के रूप में Subodh Kumar Agrawal का उल्लेख मिलता है।
Homebuyers के दावे कितने बड़े थे?
CIRP के दौरान homebuyers के admitted claims लगभग 525.65 करोड़ रुपये दर्ज किए गए। यह रकम CBI द्वारा बताए गए alleged fraud amount के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। यह insolvency proceedings में homebuyers के admitted financial claims से संबंधित figure है।
यही अंतर इस मामले को समझने में महत्वपूर्ण है। CBI की मौजूदा chargesheet में इस specific case के alleged fraud की कुल रकम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है, जबकि insolvency proceedings में homebuyers के financial claims का अलग रिकॉर्ड मौजूद है।
Project के लिए आया resolution plan
Acme Realities की insolvency process के दौरान Mantra Properties & Developers Private Limited resolution applicant के तौर पर सामने आया। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार Mantra Properties को 13 February 2025 को 100 प्रतिशत voting के साथ Successful Resolution Applicant घोषित किया गया था। इसके बाद 26 August 2025 को NCLT ने resolution plan को मंजूरी दी।
Resolution plan में homebuyers के लिए flats की delivery को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया था। NCLT के रिकॉर्ड में homebuyers से संबंधित flats की aggregate value लगभग 525.67 करोड़ रुपये बताई गई है। Acme Boulevard के Tower 4 और Tower 5 के लिए Effective Date से 18 महीने के भीतर completion और delivery का framework रखा गया था, हालांकि इसके साथ project implementation और अन्य आवश्यक conditions भी जुड़ी थीं।
इसका मतलब यह है कि CBI की criminal proceedings और Acme project की insolvency-resolution process दो अलग कानूनी tracks हैं। CBI chargesheet पूर्व promoters/directors के खिलाफ alleged criminal conduct से जुड़ी है, जबकि NCLT resolution plan project को आगे बढ़ाने और creditors तथा homebuyers के claims को resolution mechanism के जरिए address करने से संबंधित है।
MahaRERA में homebuyers की शिकायतें भी दर्ज
Acme Boulevard Tower 5 के खिलाफ MahaRERA proceedings में homebuyers की शिकायतें सामने आई हैं। एक MahaRERA proceeding में Vijay Rammurat Singh तथा Anoop Chokhani और Jaigovind Chokhani की complaints दर्ज हैं, जिसमें Acme Realities, J.P. Infra और संबंधित entities को respondents बनाया गया था।
इन proceedings में homebuyers को RERA के तहत allottees और संबंधित companies को promoters के रूप में दर्ज किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि project से संबंधित buyer disputes CBI investigation से पहले भी regulatory और insolvency forums तक पहुंच चुके थे।
Project की completion अब कब तक?
Acme Boulevard के Tower 4 और Tower 5 के उपलब्ध RERA-linked records में original completion timeline December 2022 की थी। बाद की project information में revised completion timeline June 2027 दिखाई देती है। इस बदलाव को project की लंबी regulatory, redevelopment और insolvency journey के संदर्भ में देखना जरूरी है।
इसलिए homebuyers के लिए मौजूदा सबसे बड़ा सवाल केवल CBI chargesheet नहीं है। असली सवाल यह है कि resolution plan के तहत project completion और flat possession का implementation किस गति से आगे बढ़ता है।
92 redevelopment members के लिए भी अलग obligations
NCLT resolution proceedings में Majaswadi Sarvodayanagar Society के 92 members से जुड़े obligations का भी उल्लेख है। Resolution arrangement में पुराने rent dues, hardship compensation और आगे के rent से जुड़े भुगतान का framework रखा गया था।
इसके अलावा redevelopment/rehabilitation component के Occupation Certificate को लेकर भी समयसीमा से जुड़ी condition दर्ज है। यदि निर्धारित अवधि में आवश्यक Occupation Certificate हासिल नहीं होता, तो settlement terms में कुछ परिस्थितियों में enhanced rent का प्रावधान रखा गया था।
इससे Acme Boulevard dispute का असर केवल private flat buyers तक सीमित नहीं रहता। Project के पुराने occupants और redevelopment beneficiaries भी इसके outcome से जुड़े हुए हैं।
CBI की chargesheet के बाद मामला अदालत की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। आरोपों पर न्यायिक निर्णय होना बाकी है। दूसरी तरफ Acme Realities की insolvency resolution process के तहत मंजूर किए गए plan का project completion और homebuyers की delivery पर प्रभाव अलग से बना रहेगा।
CBI ने कहा है कि Acme मामला उसकी nationwide homebuyer fraud investigation का हिस्सा है। Agency के अनुसार इस broader investigation में विभिन्न builder companies और financial institutions के unidentified officials से जुड़े 32 अन्य मामले भी जांच के दायरे में हैं। Acme मामले की chargesheet इस nationwide probe में 21वीं chargesheet है।
Homebuyers के लिए सबसे अहम बात
Acme Boulevard मामले में फिलहाल तीन अलग-अलग developments को एक साथ समझना जरूरी है। पहला, CBI ने पांच पूर्व promoters/directors के खिलाफ alleged cheating और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत chargesheet दाखिल की है। दूसरा, Acme Realities पहले ही insolvency proceedings से गुजर चुकी है और Mantra Properties का resolution plan NCLT से मंजूर हो चुका है। तीसरा, homebuyers और redevelopment society से जुड़े विवादों का रिकॉर्ड MahaRERA और NCLT proceedings में पहले से मौजूद है।
इसलिए CBI की नई chargesheet मामले का एक नया कानूनी चरण है, लेकिन Acme Boulevard project की पूरी कहानी इससे कहीं पुरानी है। अब इस मामले में आगे की निगरानी दो स्तरों पर होगी—अदालत में criminal proceedings और दूसरी तरफ resolution plan के तहत project completion तथा homebuyers को possession मिलने की प्रक्रिया।
बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।
बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
नंदन यादव के पैर में लगी गोली
मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।
दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।
रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई
मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।
पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।
120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR
जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
FIR में POCSO और BNS की धाराएं
मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।
घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।
महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान
घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।