Read the latest police action news, investigations and official updates from India and around the world. Stay informed with coverage on arrests, raids, law enforcement operations, crime investigations, court proceedings and public safety actions, only on Indian FastTrack.
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया। CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताया। जानें नए प्रदर्शन स्थल और पूरा मामला।
नई दिल्ली:दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विरोध जताते हुए कहा, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।”
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर की जगह तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं:
रामलीला मैदान
बुराड़ी मैदान
CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली
यह निर्णय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है।
अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन की निर्धारित जगह से हटा दिया गया है और अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा। उनके बयान में सरकार और व्यवस्था के खिलाफ राजनीतिक आलोचना भी शामिल थी।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने भी फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध दर्ज कराने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जंतर-मंतर को सूची से हटाने से पहले संबंधित पक्षों से सलाह ली गई थी या नहीं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कानूनी स्थिति
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर संविधान के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से जुड़े मामले पर 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की गई थी। प्रदर्शन के दौरान कथित उत्पीड़न से संबंधित एक अन्य याचिका भी सुनवाई के लिए रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में भी दिल्ली में प्रदर्शन के प्रबंधन और उससे जुड़े प्रतिबंधों के मुद्दे पर कार्यवाही हुई।
इस मामले में निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और हर परिस्थिति में सभी प्रकार के शांतिपूर्ण विरोध पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बीच अंतर करना जरूरी है। वास्तविक कानूनी स्थिति संबंधित आदेश, अनुमति प्रक्रिया और अदालतों के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर CJP और दिल्ली पुलिस के बीच विवाद के बीच अब तीन वैकल्पिक स्थलों की व्यवस्था लागू की गई है। अभिजीत दीपके का “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा” वाला बयान इसी फैसले के विरोध में आया है।
गुजरात के अरावली में करीब 500 किलो पोशडोडा (अफीम की भूसी) और दो माउजर पिस्तौल बरामद हुईं। फायरिंग में एक आरोपी घायल हुआ, जबकि तीन पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए।
गुजरात: अरावली जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिस और संदिग्ध तस्करों के बीच फायरिंग हो गई। मालपुर क्षेत्र के मोरडूंगरी के पास तड़के करीब तीन बजे हुई कार्रवाई में करीब 500 किलो पोशडोडा (अफीम की भूसी) और दो माउजर पिस्तौल बरामद की गईं। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए भेजा गया, जबकि उसका साथी फरार हो गया। मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
वाहन रोकने पर शुरू हुई फायरिंग
स्थानीय क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली थी कि मध्य प्रदेश से राजस्थान की ओर पोशडोडा (अफीम की भूसी) की खेप ले जाई जा रही है। निगरानी के दौरान संदिग्ध वाहन को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक, वाहन में सवार लोगों ने इस दौरान दो राउंड फायर किए, जिसके बाद टीम ने जवाबी कार्रवाई की।
घायल आरोपी की पहचान राजाराम बिश्नोई के रूप में हुई है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फरार आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस ने मौके से दो माउजर पिस्तौल और अन्य सामग्री जब्त की है।
कार्रवाई में LCB PI एम.एच. झाला, PSI पी.पी. सोलंकी और ASI कल्पेश सिंह घायल हुए। उनकी चोटों की विस्तृत स्थिति की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
10 दिन में दूसरी बार ड्रग तस्करी के दौरान फायरिंग
अरावली में यह घटना करीब 10 दिन के भीतर ऐसी दूसरी कार्रवाई है, जिसमें मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के दौरान पुलिस को फायरिंग का सामना करना पड़ा।
22 सितंबर को धंसूरा तालुका के शिनोल के पास पुलिस ने एक स्कॉर्पियो से 278.77 किलो पोशडोडा बरामद किया था। उस मामले में दो संदिग्ध फरार हो गए थे। वाहन से मोबाइल फोन, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और अलग-अलग नंबर प्लेट भी मिली थीं। जब्त सामग्री और वाहन की कुल अनुमानित कीमत करीब 50.10 लाख रुपये बताई गई थी।
उस जांच में पुलिस को मंदसौर, मध्य प्रदेश से सांचौर, राजस्थान तक पोशडोडा पहुंचाने वाले कथित नेटवर्क की जानकारी मिली थी। 2 अक्टूबर की कार्रवाई में भी खेप के स्रोत और संभावित गंतव्य की जांच इसी वजह से महत्वपूर्ण हो गई है।
2025 में भी सामने आया था ऐसा मामला
अरावली के मालपुर क्षेत्र में इससे पहले अगस्त 2025 में करीब 437 किलो पोशडोडा पकड़ा गया था। उस कार्रवाई में भी पुलिस के पीछा करने के दौरान फायरिंग हुई थी। एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था, जबकि दूसरा भाग निकला था। जांच में मंदसौर से गुजरात होते हुए राजस्थान तक खेप पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अनुसार पोशडोडा की छोटी मात्रा एक किलोग्राम और कॉमर्शियल मात्रा 50 किलोग्राम है। ऐसे में करीब 500 किलो की बरामदगी कॉमर्शियल मात्रा की सीमा से लगभग दस गुना है।
NDPS Act की धारा 15 के तहत कमर्शियल मात्रा वाले पोशडोडा के अपराध में 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि पर निर्भर करेगी।
अब जांच में किन कड़ियों की तलाश
पुलिस की जांच अब फरार आरोपी की तलाश के साथ हथियारों के स्रोत और पोशडोडा की सप्लाई चेन तक पहुंचने पर केंद्रित है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि खेप मध्य प्रदेश में कहां से चली, गुजरात के रास्ते किस नेटवर्क ने इसे आगे बढ़ाया और राजस्थान में इसका अंतिम प्राप्तकर्ता कौन था।
जांच में 22 सितंबर की बरामदगी और पुराने मामलों से कोई सीधा संबंध सामने आता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल एक आरोपी गिरफ्तार है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है।
Borivali East के Khodiyar Nagar में ANC ने 691 ग्राम हेरोइन जब्त कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। NDPS Act के तहत मामला दर्ज, सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी।
मुंबई: Borivali East में Anti-Narcotics Cell (ANC) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 691 ग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस के मुताबिक बरामद हेरोइन की अनुमानित कीमत करीब 1.38 करोड़ रुपये है। कार्रवाई Khodiyar Nagar इलाके में हुई, जहां संदिग्ध गतिविधि नजर आने के बाद एक व्यक्ति को रोककर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान रक्सैक से हेरोइन बरामद हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
यह कार्रवाई ANC की Kandivali Unit ने की। पुलिस के अनुसार टीम इलाके में गश्त कर रही थी, इसी दौरान एक व्यक्ति के व्यवहार पर संदेह हुआ। उसे रोककर जांच की गई तो उसके पास मौजूद रक्सैक से 691 ग्राम हेरोइन मिली। पुलिस ने हेरोइन और उसे रखने के लिए इस्तेमाल किए गए बैग को जब्त कर लिया।
691 ग्राम हेरोइन का मामला कितना गंभीर है?
बरामद मात्रा NDPS Act के तहत तय commercial quantity की सीमा से काफी अधिक है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार हेरोइन की small quantity 5 ग्राम और commercial quantity 250 ग्राम निर्धारित है। इस लिहाज से 691 ग्राम बरामदगी commercial quantity की सीमा से करीब 2.76 गुना अधिक है।
मामले में आरोपी के खिलाफ Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 की धारा 8(c) और 21(c) के तहत केस दर्ज किया गया है। Commercial quantity से जुड़े Section 21(c) के मामले में दोष सिद्ध होने पर 10 से 20 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि इस मामले में आरोपी के खिलाफ आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।
Kasturba Marg Police Station में केस दर्ज
हेरोइन बरामद होने के बाद मामले में Kasturba Marg Police Station में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद नशीला पदार्थ आरोपी तक कहां से पहुंचा था और इसे मुंबई या आसपास के इलाकों में किसे दिया जाना था।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि आरोपी खुद इस नेटवर्क का हिस्सा था या किसी अन्य व्यक्ति के लिए हेरोइन लेकर जा रहा था। फिलहाल पुलिस की ओर से इस संबंध में अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
कार्रवाई DCP (ANC) Purnima Chougule-Shringi और ACP Sudhir Hirdekar की निगरानी में हुई। Kandivali Unit की टीम का नेतृत्व Senior Police Inspector Rahul Lokhande और Police Sub-Inspector Nikhil Shelke ने किया।
Borivali में पहले भी मिली थी बड़ी मात्रा में हेरोइन
Borivali East में हेरोइन से जुड़ी यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। दिसंबर 2025 में ANC की Kandivali Unit ने Rashtriya Udyan Metro Station के पास एक घर से 511 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। उस कार्रवाई में दो मोबाइल फोन और एक mixer grinder भी जब्त किया गया था। पुलिस की जांच में उस मामले में घर पर हेरोइन तैयार कर उसे छोटे पैकेटों में स्थानीय स्तर पर बेचने के आरोप सामने आए थे।
हालांकि दिसंबर 2025 की उस कार्रवाई और Borivali East की मौजूदा 691 ग्राम हेरोइन बरामदगी के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
Mumbai में लगातार सामने आ रही बड़ी हेरोइन बरामदगी
इस साल मुंबई के अलग-अलग इलाकों में हेरोइन की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। मई 2026 में ANC की Kandivali Unit ने Versova में 765 ग्राम हेरोइन जब्त की थी और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की जांच में दोनों के मुंबई में कई बार आकर नशीले पदार्थ की आपूर्ति करने की बात सामने आई थी।
जून में Goregaon में ANC ने 750 ग्राम हेरोइन के साथ 20 वर्षीय Subhan Imran Gada को गिरफ्तार किया था। इस मामले में भी पुलिस ने source और आगे की supply chain की जांच शुरू की थी।
अगस्त में Kandivali West में Crime Branch Unit 11 ने 651 ग्राम हेरोइन जब्त कर दो लोगों को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में हेरोइन के अलावा नकदी और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए थे तथा कथित interstate network की जांच की जा रही थी।
इससे पहले मई में Santacruz East में भी ANC की Kandivali Unit ने 508 ग्राम हेरोइन जब्त की थी। उस मामले में पुलिस source और intended recipients का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।
इन अलग-अलग मामलों को एक ही गिरोह से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हाल की कार्रवाइयों में जांच का प्रमुख फोकस नशीले पदार्थ की खेप के source, supplier और आगे के recipients तक पहुंचने पर रहा है।
अब पुलिस की जांच किस दिशा में?
Borivali के मौजूदा मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल हेरोइन की supply chain को लेकर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि 691 ग्राम की खेप कहां से आई, आरोपी को यह किसने दी और इसे आगे किस स्थान या व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था।
जांच में आरोपी के संपर्कों, संभावित suppliers और अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। अगर पूछताछ या आगे की जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
फिलहाल पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और हेरोइन जब्ती के साथ दर्ज मामले की जांच जारी है। असली source और इस खेप के पीछे मौजूद नेटवर्क का पता चलना अब इस कार्रवाई का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Jogeshwari East के Acme Boulevard मामले में CBI ने 5 पूर्व प्रमोटर्स-डायरेक्टर्स पर chargesheet दाखिल की। जानिए project, insolvency और homebuyers की पूरी स्थिति।
मुंबई: Jogeshwari East स्थित Acme Boulevard housing project से जुड़े कथित homebuyer fraud मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने पांच पूर्व promoters/directors और Acme Realties Private Limited की holding company Acme Housing India Private Limited के खिलाफ chargesheet दाखिल की है। यह chargesheet Additional Chief Judicial Magistrate (CBI Cases), 3rd Court, Esplanade Court, Mumbai के सामने दाखिल हुई है। CBI के अनुसार, जांच में homebuyers को कथित तौर पर false assurances और fraudulent representations के जरिए प्रभावित कर financial benefits हासिल करने के आरोप सामने आए हैं।
CBI ने आरोपों में criminal conspiracy, cheating, criminal breach of trust और dishonest receipt of stolen property से जुड़े भारतीय दंड संहिता के प्रावधान लगाए हैं। हालांकि chargesheet दाखिल होना आरोपों का न्यायिक रूप से साबित होना नहीं है और मामले में आगे अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
Acme Boulevard की कहानी सिर्फ CBI chargesheet तक सीमित नहीं है। इस project से जुड़े homebuyers के विवाद, MahaRERA proceedings, redevelopment dispute और बाद में शुरू हुई insolvency resolution process का लंबा background है। यही वजह है कि इस मामले में मौजूदा CBI कार्रवाई के साथ यह समझना भी जरूरी है कि project की स्थिति यहां तक कैसे पहुंची।
Acme Boulevard project कहां है और विवाद क्या है?
Acme Boulevard Village Majas, Sarvodaya Nagar, Jogeshwari East में स्थित redevelopment project है। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार जिस जमीन पर redevelopment हुआ, वह MHADA की लगभग 40,429.64 वर्ग मीटर जमीन थी। यहां पहले 88 chawls में 655 tenements थे। वर्ष 2008 में Majaswadi Sarvodayanagar Co-operative Housing Society के सदस्यों ने इस property के composite redevelopment का फैसला लिया था और redevelopment के लिए developers को आमंत्रित किया गया था।
Project के development structure में J.P. Infra Mumbai Private Limited, Keemaya Developers Private Limited और Acme Realities Private Limited से जुड़े arrangements का उल्लेख NCLT और MahaRERA records में मिलता है। Acme Boulevard के Boulevard Tower 4 और Boulevard Tower 5 इसी redevelopment framework का हिस्सा हैं।
Acme Boulevard Tower 5 के MahaRERA record में project की proposed completion date 30 December 2022 दर्ज थी। बाद में revised completion date 30 December 2023 की गई, लेकिन promoter ने extension के लिए आवेदन नहीं किया था। MahaRERA के 2025 interim order में project को 30 December 2023 के बाद lapsed बताया गया और उस समय Occupation Certificate भी नहीं मिला था।
इसी दौरान Majaswadi Sarvodayanagar Society ने नवंबर 2022 में termination notice और public notice जारी किया था। Acme Realities ने इसका विरोध करते हुए legal proceedings शुरू कीं। MahaRERA के रिकॉर्ड में Acme की ओर से यह भी दर्ज है कि विवाद को Bombay High Court के सामने ले जाया गया और arbitration का रास्ता अपनाया गया।
यानी project का विवाद केवल individual homebuyers की possession समस्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि developer और redevelopment society के बीच भी गंभीर विवाद सामने आया।
Acme Boulevard Tower 4 और Tower 5 के homebuyers ने possession में देरी को लेकर insolvency proceedings का रास्ता अपनाया। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार Abhishek Ranganathan और अन्य homebuyers ने Acme Realities के खिलाफ Corporate Insolvency Resolution Process यानी CIRP शुरू करने की मांग की थी। Petition में इन buyers को financial creditors/homebuyers के रूप में दर्ज किया गया और बताया गया कि उन्होंने Boulevard Tower 4 और Boulevard Tower 5 में residential units खरीदे थे।
NCLT ने 21 February 2024 को Acme Realities के खिलाफ CIRP शुरू किया। इसके बाद company के लिए resolution process शुरू हुआ। IBBI के रिकॉर्ड में Acme Realities Private Limited के लिए resolution plan process और Resolution Professional के रूप में Subodh Kumar Agrawal का उल्लेख मिलता है।
Homebuyers के दावे कितने बड़े थे?
CIRP के दौरान homebuyers के admitted claims लगभग 525.65 करोड़ रुपये दर्ज किए गए। यह रकम CBI द्वारा बताए गए alleged fraud amount के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। यह insolvency proceedings में homebuyers के admitted financial claims से संबंधित figure है।
यही अंतर इस मामले को समझने में महत्वपूर्ण है। CBI की मौजूदा chargesheet में इस specific case के alleged fraud की कुल रकम सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है, जबकि insolvency proceedings में homebuyers के financial claims का अलग रिकॉर्ड मौजूद है।
Project के लिए आया resolution plan
Acme Realities की insolvency process के दौरान Mantra Properties & Developers Private Limited resolution applicant के तौर पर सामने आया। NCLT के रिकॉर्ड के अनुसार Mantra Properties को 13 February 2025 को 100 प्रतिशत voting के साथ Successful Resolution Applicant घोषित किया गया था। इसके बाद 26 August 2025 को NCLT ने resolution plan को मंजूरी दी।
Resolution plan में homebuyers के लिए flats की delivery को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया था। NCLT के रिकॉर्ड में homebuyers से संबंधित flats की aggregate value लगभग 525.67 करोड़ रुपये बताई गई है। Acme Boulevard के Tower 4 और Tower 5 के लिए Effective Date से 18 महीने के भीतर completion और delivery का framework रखा गया था, हालांकि इसके साथ project implementation और अन्य आवश्यक conditions भी जुड़ी थीं।
इसका मतलब यह है कि CBI की criminal proceedings और Acme project की insolvency-resolution process दो अलग कानूनी tracks हैं। CBI chargesheet पूर्व promoters/directors के खिलाफ alleged criminal conduct से जुड़ी है, जबकि NCLT resolution plan project को आगे बढ़ाने और creditors तथा homebuyers के claims को resolution mechanism के जरिए address करने से संबंधित है।
MahaRERA में homebuyers की शिकायतें भी दर्ज
Acme Boulevard Tower 5 के खिलाफ MahaRERA proceedings में homebuyers की शिकायतें सामने आई हैं। एक MahaRERA proceeding में Vijay Rammurat Singh तथा Anoop Chokhani और Jaigovind Chokhani की complaints दर्ज हैं, जिसमें Acme Realities, J.P. Infra और संबंधित entities को respondents बनाया गया था।
इन proceedings में homebuyers को RERA के तहत allottees और संबंधित companies को promoters के रूप में दर्ज किया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि project से संबंधित buyer disputes CBI investigation से पहले भी regulatory और insolvency forums तक पहुंच चुके थे।
Project की completion अब कब तक?
Acme Boulevard के Tower 4 और Tower 5 के उपलब्ध RERA-linked records में original completion timeline December 2022 की थी। बाद की project information में revised completion timeline June 2027 दिखाई देती है। इस बदलाव को project की लंबी regulatory, redevelopment और insolvency journey के संदर्भ में देखना जरूरी है।
इसलिए homebuyers के लिए मौजूदा सबसे बड़ा सवाल केवल CBI chargesheet नहीं है। असली सवाल यह है कि resolution plan के तहत project completion और flat possession का implementation किस गति से आगे बढ़ता है।
92 redevelopment members के लिए भी अलग obligations
NCLT resolution proceedings में Majaswadi Sarvodayanagar Society के 92 members से जुड़े obligations का भी उल्लेख है। Resolution arrangement में पुराने rent dues, hardship compensation और आगे के rent से जुड़े भुगतान का framework रखा गया था।
इसके अलावा redevelopment/rehabilitation component के Occupation Certificate को लेकर भी समयसीमा से जुड़ी condition दर्ज है। यदि निर्धारित अवधि में आवश्यक Occupation Certificate हासिल नहीं होता, तो settlement terms में कुछ परिस्थितियों में enhanced rent का प्रावधान रखा गया था।
इससे Acme Boulevard dispute का असर केवल private flat buyers तक सीमित नहीं रहता। Project के पुराने occupants और redevelopment beneficiaries भी इसके outcome से जुड़े हुए हैं।
CBI की chargesheet के बाद मामला अदालत की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। आरोपों पर न्यायिक निर्णय होना बाकी है। दूसरी तरफ Acme Realities की insolvency resolution process के तहत मंजूर किए गए plan का project completion और homebuyers की delivery पर प्रभाव अलग से बना रहेगा।
CBI ने कहा है कि Acme मामला उसकी nationwide homebuyer fraud investigation का हिस्सा है। Agency के अनुसार इस broader investigation में विभिन्न builder companies और financial institutions के unidentified officials से जुड़े 32 अन्य मामले भी जांच के दायरे में हैं। Acme मामले की chargesheet इस nationwide probe में 21वीं chargesheet है।
Homebuyers के लिए सबसे अहम बात
Acme Boulevard मामले में फिलहाल तीन अलग-अलग developments को एक साथ समझना जरूरी है। पहला, CBI ने पांच पूर्व promoters/directors के खिलाफ alleged cheating और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत chargesheet दाखिल की है। दूसरा, Acme Realities पहले ही insolvency proceedings से गुजर चुकी है और Mantra Properties का resolution plan NCLT से मंजूर हो चुका है। तीसरा, homebuyers और redevelopment society से जुड़े विवादों का रिकॉर्ड MahaRERA और NCLT proceedings में पहले से मौजूद है।
इसलिए CBI की नई chargesheet मामले का एक नया कानूनी चरण है, लेकिन Acme Boulevard project की पूरी कहानी इससे कहीं पुरानी है। अब इस मामले में आगे की निगरानी दो स्तरों पर होगी—अदालत में criminal proceedings और दूसरी तरफ resolution plan के तहत project completion तथा homebuyers को possession मिलने की प्रक्रिया।
बिहार के जमुई में नाबालिगों से बदसलूकी मामले में नंदन यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। हरेराम गिरफ्तार और 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR हुई।
बिहार: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकत के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले के प्रमुख आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी, जबकि दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पकड़ लिया गया है। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इसी मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम जमुई-लखीसराय मार्ग के पास मड़वा पहाड़ क्षेत्र में हुई थी। नाबालिग छात्रा अपने एक नाबालिग दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी। दोनों इलाके में गए थे, जहां कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रा के साथ अश्लील हरकत किए जाने का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। वाहन के नंबर की मदद से पुलिस पीड़ितों तक पहुंची और इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
नंदन यादव के पैर में लगी गोली
मामले में फरार चल रहे प्रमुख आरोपी नंदन यादव की तलाश के दौरान पुलिस की उसके साथ मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर जमुई सदर अस्पताल पहुंचाया गया। नंदन यादव जमुई सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है और ट्रैक्टर चलाकर बालू ढोने का काम करता था।
दूसरे आरोपी हरेराम यादव को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। हरेराम यादव भी प्रतापपुर गांव का रहने वाला बताया गया है और उसके ट्रैक्टर चालक होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके पैर में चोट लगने की भी जानकारी है। मामले में दोनों की भूमिका की जांच की जा रही है।
रामआशीष चौधरी समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई
मामले की जांच में रामआशीष चौधरी नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा कुछ नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।
पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। जांच में वीडियो बनाने वाले लोगों, घटना में सीधे शामिल आरोपियों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर देखी जा रही है।
120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR
जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल घटना में शामिल आरोपियों तक सीमित नहीं रही। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल संचालकों के खिलाफ साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से जुड़ा वीडियो डाउनलोड, शेयर या दोबारा पोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है और वीडियो को आगे प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
FIR में POCSO और BNS की धाराएं
मामले में BNS की धारा 74, 76 और 3(5) के साथ POCSO Act की धारा 8 और 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी जमुई थाना कांड संख्या 428/26 के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की कार्रवाई के साथ स्पष्ट होगी।
घटना के बाद सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही जांच का विषय नहीं है। घटना जिस इलाके में हुई और जिस समय नाबालिग छात्र-छात्रा वहां मौजूद थे, उस दौरान पुलिस पेट्रोलिंग की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर भी जांच की बात सामने आई है।
महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान
घटना के बाद महिला सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। बिहार महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से मामले का संज्ञान लिए जाने और प्रशासन से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी लेना है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि घटना में कुल कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, वीडियो किसने बनाया, इसे सोशल मीडिया पर किसने सबसे पहले प्रसारित किया और किन लोगों ने इसे आगे फैलाया। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना के समय वहां मौजूद अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
फिलहाल नंदन यादव और हरेराम यादव पुलिस की गिरफ्त में हैं। नंदन यादव का अस्पताल में उपचार कराया जा रहा है। मामले में SIT की जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। वहीं, नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स पर दर्ज मामलों की साइबर जांच भी आगे बढ़ रही है।
चाकण MIDC में चार SUVs से सड़क रोककर Reel शूट करने के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार हुए। Drone, Traffic Block और Police Action के बीच पूरा मामला जानें।
पुणे: चाकण MIDC इलाके में सोशल मीडिया Reel बनाने के लिए चार वाहनों से सड़क पर कथित खतरनाक स्टंट और Traffic Block करने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 3 सितंबर की शाम चार वाहनों को एक साथ सड़क पर चलाने, अचानक स्पीड कम करने और बीच सड़क पर रोककर वीडियो शूट करने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस दौरान Camera के साथ Drone का भी इस्तेमाल किया गया, जबकि सभी चार वाहनों को जब्त किए जाने की बात कही गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चाकण के औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही Traffic Congestion कम करने के लिए प्रशासन अलग-अलग स्तर पर कदम उठा रहा है। 17 सितंबर को पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने चाकण में Traffic, सड़क, बढ़ते औद्योगिक वाहन आवागमन और अनधिकृत पार्किंग की समस्या के लिए विभिन्न विभागों को समन्वित Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए। ऐसे में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकना इस पूरे Traffic Management challenge को और गंभीर बनाता है।
पुलिस के अनुसार, 3 सितंबर की शाम चाकण के Mahalunge MIDC क्षेत्र में Sant Tukaram Chowk से Mindewadi Road की दिशा में चार वाहन एक साथ चलाए गए। आरोप है कि वाहनों को एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर चलाने के साथ कई बार तेज किया गया, धीमा किया गया और सड़क पर रोका गया।
इसके बाद Vasuli गांव में Pack Time Company के सामने वाहनों को सड़क के बीच में रोककर वीडियो शूट किया गया। पीछे से आने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और Traffic Congestion की स्थिति बनी। वीडियो बनाने के लिए Camera और Drone का इस्तेमाल किया गया था।
पुलिस द्वारा जप्त गाड़ियों की तस्वीर
पुलिस ने जिन चार लोगों को आरोपी बनाया है, उनके नाम Ram Hiraman Raut, Sahil Barku Jambhale, Aditya Kailas Nikhade और Pranav Malak Pachpute हैं। ये सभी Khed तहसील के Bhamboli और Vasuli क्षेत्र से जुड़े बताए गए हैं।
मामले में चार वाहनों की पहचान की गई है। इनमें Toyota Fortuner क्रमांक MH 14 NN 0005, सफेद Mahindra Scorpio क्रमांक MH 14 EC 1658, सफेद Maruti Suzuki Swift क्रमांक MH 14 HW 4708 और सफेद Hyundai Creta क्रमांक MH 14 LL 2520 शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, इन वाहनों को इस तरह चलाया और रोका गया जिससे दूसरे वाहन सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सके। बाद में इन्हें सड़क के बीच में पार्क किए जाने का भी आरोप है।
किस धाराओं में मामला दर्ज हुआ?
मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 285, 281, 223 और 3(5) तथा Motor Vehicles Act की धारा 184 और 122 के तहत कार्रवाई की गई है।
इनमें सार्वजनिक रास्ते में खतरा या अवरोध पैदा करना, लापरवाही या खतरनाक तरीके से वाहन चलाना, सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवहेलना और खतरनाक स्थिति में वाहन छोड़ने जैसे प्रावधान शामिल हैं। मामले का अंतिम कानूनी परिणाम जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
जांच में Police Inspector Anil Devre की भूमिका अहम रही है। वहीं मामले की शुरुआती FIR में Police Constable Sampat Maruti Mule की शिकायत के आधार पर कार्रवाई दर्ज की गई है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी Shweta Khedkar ने सार्वजनिक सड़क पर Traffic रोककर Reel बनाने को लेकर कार्रवाई की पुष्टि की।
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू Drone से वीडियो शूट करना भी है। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को Pimpri-Chinchwad के Joint Commissioner of Police की ओर से Drone operations को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद Drone का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामला केवल Traffic obstruction और dangerous driving तक सीमित नहीं है; जांच में Drone से जुड़े आदेश के उल्लंघन का पहलू भी शामिल है।
फिलहाल इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। हालांकि, सड़क पर कई वाहनों को एक साथ रोकने और दूसरे motorists की आवाजाही प्रभावित करने से road safety का जोखिम जरूर पैदा हुआ।
चाकण MIDC कोई सामान्य सड़क क्षेत्र नहीं है। यह बड़ा औद्योगिक इलाका है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, निजी वाहन, दोपहिया और commercial vehicles आते-जाते हैं। इसी कारण यहां Traffic Congestion कम करना प्रशासन के लिए अलग से चुनौती बना हुआ है।
सितंबर की शुरुआत में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने औद्योगिक इकाइयों के shift timings में अंतर रखने की व्यवस्था शुरू कराई। कुछ कंपनियों में staggered shifts के बाद peak hours में Traffic में कुछ राहत की जानकारी सामने आई। लेकिन 16 सितंबर तक औद्योगिक क्षेत्र के बाहर स्थित कई कंपनियों में इन बदलावों के सीमित implementation के कारण समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
17 सितंबर को भी चाकण के लिए सड़क सुधार, प्रमुख junctions पर Traffic management, heavy vehicles के लिए alternative routes, organised parking और आधुनिक technology के इस्तेमाल को लेकर नया coordinated Action Plan तैयार करने के निर्देश दिए गए।
यानी जिस क्षेत्र में Traffic flow सुधारने के लिए प्रशासन को अलग से manpower, road management, parking और technology-based उपायों पर काम करना पड़ रहा है, उसी क्षेत्र में सार्वजनिक सड़क को Reel शूट के लिए रोकने की घटना सामने आई है।
Pune में इससे पहले भी सामने आया था ऐसा मामला
चाकण की घटना से कुछ दिन पहले 27 अगस्त को Pune-Bengaluru Highway के Bavdhan-Wakad stretch पर भी नए वाहन की Reel शूट करने के लिए Traffic प्रभावित करने का मामला सामने आया था। Sahyadri Mahindra showroom और Bhujbal Chowk के बीच वाहनों को रोककर शूट किए गए Video के बाद Bavdhan Police ने कार्रवाई की थी।
इस मामले में Somnath Ashok Kedari, दो Fortuner के drivers और SC Photography के Soham Chavan सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। Somnath Ashok Kedari और Ajay Sambhaji Yadav को हिरासत में लिया गया था तथा दो Toyota Fortuner जब्त की गई थीं।
इसके बाद 7 सितंबर को चाकण MIDC में एक अलग Fortuner को सड़क के बीच आड़े खड़ा कर Reel शूट करने का Video भी सामने आया। इस Video में दूसरे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती दिखाई दी थी। यह घटना चार वाहनों वाले 3 सितंबर के मामले से अलग थी।
पुणे और Pimpri-Chinchwad में कुछ ही दिनों के भीतर सार्वजनिक सड़कों पर Social Media Video बनाने के लिए वाहनों को रोकने या Traffic प्रभावित करने के कई मामले सामने आए हैं। 3 सितंबर के चाकण मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है, जबकि 7 सितंबर को सामने आए अलग Fortuner Video ने भी public road पर Reel shooting को लेकर सवाल खड़े किए थे।
ऐसी घटनाओं में मुख्य सवाल यह है कि Social Media content तैयार करने के लिए public road का इस्तेमाल करते समय दूसरे motorists की सुरक्षा और Traffic movement को कितना प्रभावित किया गया। चाकण जैसे industrial corridor में थोड़े समय का road obstruction भी peak-hour traffic पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
फिलहाल 3 सितंबर के मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चौथे आरोपी की तलाश और चारों वाहनों की जब्ती के बाद जांच जारी है। पुलिस की जांच में Video footage, वाहनों की भूमिका, road obstruction और Drone के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं को आगे देखा जा रहा है।
मुंबई में 1995 और 1997 के अलग-अलग मामलों में वांछित दो आरोपी करीब तीन दशक बाद गिरफ्तार हुए। पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और तकनीकी सुरागों से तलाश की।
मुंबई: करीब तीन दशक पुराने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में वांछित दो आरोपियों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस ने 53 वर्षीय सुकेन शिवसागर विश्वकर्मा को कांदिवली ईस्ट से गिरफ्तार किया, जबकि मलाड पूर्व की दिंडोशी पुलिस ने 48 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा सैयद को बांद्रा ईस्ट के बेहरामपाड़ा इलाके से पकड़ा है। दोनों मामलों में आरोपी लंबे समय से पुलिस की तलाश में थे।
1997 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी
समता नगर पुलिस के अनुसार, विश्वकर्मा के खिलाफ Crime No. 347/1997 दर्ज किया गया था। मामले में IPC की धारा 363, 366 और 376 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार मामला नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों से जुड़ा था।
करीब 29 साल से लंबित इस मामले में पुलिस ने पुराने पते और परिचितों से जुड़ी जानकारी दोबारा जुटाई। स्थानीय पूछताछ और उपलब्ध तकनीकी सुरागों के आधार पर उसके कांदिवली ईस्ट के ठाकुर विलेज स्थित जीवाला पाड़ा में होने की जानकारी मिली। पुलिस ने उसे 3 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया।
1995 के मामले में बेहरामपाड़ा से आरोपी पकड़ा
दिंडोशी पुलिस के अनुसार, मोहम्मद मुस्तफा सैयद के खिलाफ Crime No. 146/1995 में IPC की धारा 376(1) के तहत मामला दर्ज था। पुलिस के मुताबिक कथित अपराध के समय सैयद नाबालिग था। उसके खिलाफ डोंगरी स्थित Juvenile Court से search warrant जारी हुआ था।
करीब 30 साल बाद उसके बेहरामपाड़ा में होने की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने इलाके में चार दिनों तक तलाश की। पुराने स्थानीय निवासियों, पड़ोसियों, दुकानदारों और अन्य लोगों से मिली जानकारी के साथ उपलब्ध रिकॉर्ड और मतदाता सूची का इस्तेमाल कर उसकी पहचान की गई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर Juvenile Court के समक्ष पेश किया गया।
दोनों मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती दशकों बाद आरोपियों की मौजूदा पहचान और ठिकाना तलाशना था। इसके लिए पुराने पुलिस रिकॉर्ड और पते को वर्तमान स्थानीय जानकारी से जोड़ा गया। समता नगर मामले में तकनीकी जानकारी से मिले सुराग भी जांच का हिस्सा रहे, जबकि दिंडोशी पुलिस ने स्थानीय स्तर पर लगातार पूछताछ की।
दोनों गिरफ्तारियों के बाद संबंधित मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।
पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।
कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।
ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।
₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।
आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।
यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।
जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।
हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?
Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।
पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
Santosh Uday Khopatkar, 37
Vinay Ramesh More, 37
Prem Kishan Sabnani, 50
Pragya Harish Main/Maine, 27
Reshma Shyamrao Warang, 41
Sabina Hafiz Shaikh, 48
पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।
क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?
जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।
जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।
फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?
इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।
लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।
इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।
अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।
खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।
हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।
Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।
पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।
फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।
मुंबई में ₹17.42 लाख की MGL ठगी की जांच में 1,100 VPS users का नेटवर्क सामने आया। पुलिस ने हरियाणा से 10वीं पास आरोपी को गिरफ्तार किया।
मुंबई: ₹17.42 लाख की साइबर ठगी की जांच करते-करते मुंबई पुलिस ऐसे सर्वर नेटवर्क तक पहुंच गई, जिसके करीब 1,100 users सामने आए हैं। इस मामले में मुंबई पुलिस की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 10वीं पास प्रवीण ने YouTube और ऑनलाइन tutorials से RDP और VPS की तकनीक सीखी और बाद में server किराये पर देने का काम शुरू किया।
जांच में सामने आया है कि उसके customers से जुड़े कुछ मोबाइल नंबर पहले से लगभग 30 cybercrime complaints में दर्ज हैं। अब Crime Branch यह पता लगाने में जुटी है कि इन 1,100 users में कितने लोग वास्तव में cyber fraud से जुड़े थे और प्रवीण को उनकी गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।
₹17.42 लाख की ठगी से खुली server की कड़ी
इस पूरे मामले की शुरुआत एक MGL Gas Bill Update वाले fraud से हुई। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को Mahanagar Gas Limited के नाम से message भेजा गया और bill update करने के नाम पर एक APK install करने के लिए कहा गया।
APK मोबाइल में install होने के बाद उसमें मौजूद malware ने फोन की sensitive information तक पहुंच बनाई। इसी दौरान करीब ₹17.42 लाख की बैंकिंग ठगी हुई।
साउथ रीजन साइबर पुलिस ने जब इस मामले की technical investigation शुरू की तो फर्जी APK के पीछे इस्तेमाल हो रहे server का IP address सामने आया। इसी digital trail को आगे बढ़ाते हुए जांचकर्ता server provider Hostinger तक पहुंचे और वहां से मिली जानकारी के आधार पर VPS operation का connection प्रवीण हुकुम चंद तक पहुंचा।
YouTube से सीखी RDP-VPS की तकनीक
पुलिस के मुताबिक, प्रवीण ने computer या IT की कोई formal technical education नहीं ली थी। उसने YouTube videos और internet पर उपलब्ध tutorials से web development, Remote Desktop Protocol यानी RDP और Virtual Private Server यानी VPS चलाना सीखा।
इसके बाद उसने rdpwale.in नाम से website शुरू की और VPS तथा RDP services उपलब्ध कराने लगा। पुलिस का आरोप है कि customers से KYC या पहचान की पर्याप्त जानकारी लिए बिना server उपलब्ध कराए जाते थे। जांच के मुताबिक, अलग-अलग configurations के लिए ₹1,699 से ₹13,199 महीने तक charge किया जाता था।
Server का इस्तेमाल सिर्फ website चलाने के लिए नहीं हुआ?
पुलिस की जांच में आरोप है कि प्रवीण से लिए गए कुछ VPS का इस्तेमाल malicious APK चलाने वाले operators ने command-and-control यानी C2 server की तरह किया।
सरल भाषा में समझें तो ऐसे server को fraudsters अपने malware और compromised मोबाइल के बीच communication के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे संक्रमित फोन से मिलने वाला sensitive data attacker तक पहुंच सकता है।
Cyber forensic expert Nishant Salunkhe के मुताबिक, ऐसे fraudulent APK SMS, notifications और accessibility जैसी permissions का गलत इस्तेमाल करके OTP और दूसरी sensitive जानकारी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि OTP को technically crack करने के बजाय compromised device से intercept किया जा सकता है। APK, उसके permissions, network connections और server infrastructure की जांच से investigators fraud की पूरी digital chain को समझ सकते हैं।
1,100 customers का मतलब 1,100 cyber criminals नहीं
इस मामले का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि प्रवीण से server लेने वाले करीब 1,100 लोगों में वास्तव में कितने cybercrime में शामिल थे।
पुलिस ने अभी सभी customers को cyber criminals घोषित नहीं किया है। जांच में सिर्फ इतना सामने आया है कि इन customers से जुड़े कुछ mobile numbers लगभग 30 NCRP cybercrime complaints में दिखाई दिए हैं।
Crime Branch अब इन 1,100 users को अलग-अलग cybercrime cases से match कर रही है। साथ ही subscription के जरिए प्रवीण को मिली रकम, customer details, server logs और IP addresses की भी जांच हो रही है।
जांच के बीच rdpwale.in की public website भी उपलब्ध है। Website पर RDP plans ₹699 महीने से शुरू होते दिख रहे हैं। अलग-अलग plans में Windows Server, dedicated/private IP और full admin access जैसी सुविधाएं दी गई हैं। Website के “About RDPWALE” हिस्से में इसे “Owned by Praveen” बताया गया है और Bhiwani, Haryana का address दिया गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी सामने आता है। पुलिस की रिपोर्ट में उस समय उपलब्ध कराई गई services की कीमत ₹1,699 से ₹13,199 महीने बताई गई है, जबकि current public website पर ₹699, ₹899 और ₹1,499 जैसे plans दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों pricing details के बीच अंतर का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में MGL के नाम पर fake APK वाले कई cyber fraud cases सामने आ चुके हैं।
अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक महीने में 100 से ज्यादा MGL consumers और applicants से करीब ₹2.7 करोड़ की ठगी की गई थी। Victims में 26 से 83 साल तक के लोग शामिल थे। Fraudsters gas connection बंद होने या bill update नहीं होने का डर दिखाकर APK download करवाते थे।
यानी इस मामले में ₹17.42 लाख की एक ठगी सिर्फ एक isolated incident नहीं थी। इसी तरह के APK-based fraud में पहले भी लोगों के मोबाइल और banking information को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
पुलिस ने प्रवीण के पास से laptop और mobile phone जब्त किया है। अब इन devices से customer records, server logs, payment details, IP addresses और communications की जांच की जा रही है।
सबसे अहम सवाल यह है कि प्रवीण को अपने servers के इस्तेमाल की जानकारी कितनी थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसने जानबूझकर cybercrime operators को infrastructure दिया या customers की गतिविधियों को नजरअंदाज किया।
अगर server logs और payment records से customers का connection अलग-अलग cyber fraud cases से साबित होता है, तो यह जांच सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। 1,100 users की mapping से देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे cybercrime cases के बीच नई कड़ियां सामने आ सकती हैं। फिलहाल इन सभी connections की जांच जारी है और आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मुंबई Eid-e-Milad clash के viral video पर 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR हुई है। Police अब video source और account operators की जांच कर रही है।
मुंबई: Parel-Chinchpokli इलाके में Eid-e-Milad procession के दौरान हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। 26 अगस्त की घटना के बाद सामने आए एक viral video को लेकर Kalachowki Police ने 3 Instagram accounts के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि video कहां से आया, इसे किसने upload किया और इसके साथ किया गया दावा असल घटना से कितना मेल खाता है।
यानी मामला अब सिर्फ सड़क पर हुए clash तक नहीं है। पुलिस की नजर उस video को social media पर फैलाने के तरीके पर भी है।
क्या हुआ था Parel-Chinchpokli में?
26 अगस्त को Eid-e-Milad procession के बाद Parel-Chinchpokli इलाके में दो groups के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद धक्कामुक्की और तनाव की स्थिति बनी और पुलिस को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।
घटना के बाद social media पर कई तरह के videos और claims सामने आए। इसी वजह से पुलिस ने लोगों से बिना पुष्टि किसी भी जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी।
Joint Commissioner of Police (Law and Order) Manoj Sharma ने उस समय कहा था कि senior police officers मौके पर मौजूद हैं और situation control में है। उन्होंने लोगों से rumours से बचने की अपील की थी।
Original clash में पहले क्या कार्रवाई हुई?
इस विवाद के मामले में पहले पुलिस ने तीन लोगों को book किया था। Rehan Masood Sayyad, Adil Khan Ahmed Khan और Miraj Mohammad Firoz Rais के नाम सामने आए थे।
पुलिस दूसरे लोगों की पहचान को लेकर भी जांच कर रही थी। लेकिन अब इस मामले में social media से जुड़ा एक अलग angle सामने आया है।
29 अगस्त को Police की नजर पड़ी Viral Video पर
Kalachowki Police के Cyber Squad में तैनात Police Constable Vikram Khaire की complaint के मुताबिक, 29 अगस्त को social-media monitoring के दौरान पुलिस की नजर एक video पर पड़ी।
Complaint के अनुसार यह video करीब तीन दिन पहले Instagram पर upload किया गया था। Video में दो groups के बीच confrontation दिखाई देता है और police personnel भीड़ को control करते नजर आते हैं।
लेकिन पुलिस की जांच का सबसे अहम point video के साथ लिखा गया caption है।
Ganpati banner को लेकर क्या दावा किया गया?
Police complaint के मुताबिक video के साथ लगाए गए caption में दावा किया गया था कि Parel-Lalbaug इलाके में Ganpati banner को नुकसान पहुंचाने की कोशिश के reaction में यह confrontation हुआ।
पुलिस को आशंका है कि इस तरह घटना को धार्मिक angle से जोड़कर पेश करने वाला post लोगों के बीच गलतफहमी या तनाव बढ़ा सकता है।
Complaint में video के background में “Jalwa Re Jalwa” song इस्तेमाल किए जाने का भी जिक्र है।
यहीं से सवाल उठता है कि video में जो घटना दिखाई गई, क्या उसके साथ लगाया गया दावा भी सही था?
Kalachowki Police ने complaint के आधार पर 3 Instagram accounts को जांच के दायरे में लिया है। पुलिस का आरोप है कि इन accounts से allegedly ऐसा material circulate किया गया, जिसे misleading और inflammatory माना गया।
पुलिस यह जांच रही है कि footage असल में कब और कहां record हुआ, उसका original source क्या है और उसे Instagram पर किसने upload किया।
Police अब किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
सवाल
पुलिस की जांच
Video कहां का है?
Original footage का source पता किया जा रहा है
Video किसने upload किया?
3 Instagram accounts चलाने वालों की पहचान
Video कब बना?
Recording और upload की timeline की जांच
Caption में किया गया दावा
Ganpati banner से जुड़े claim की पड़ताल
Video का पूरा context
घटना में वास्तव में क्या हुआ, इसकी जांच
इस जांच का एक अहम हिस्सा उन लोगों तक पहुंचना है जो इन Instagram accounts को operate कर रहे थे।
Police का पहले भी था साफ message
Parel-Chinchpokli विवाद के बाद Joint Commissioner Manoj Sharma ने लोगों से social media पर चल रहे rumours पर भरोसा नहीं करने को कहा था। पुलिस ने साफ किया था कि senior officers मौके पर मौजूद हैं और हालात control में हैं।
अब उसी घटना से जुड़े viral video पर FIR होने के बाद पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि social media पर सामने आई जानकारी original घटना को सही तरीके से दिखाती है या उसे अलग तरीके से पेश किया गया।
Ganpati Aagman के बीच Parel-Lalbaug में हलचल
इस बीच Parel-Lalbaug-Chinchpokli belt में Ganpati Aagman को लेकर भी बड़ी भीड़ जुट रही है। Chinchpokli Cha Chintamani Aagman के दौरान भारी police deployment की रिपोर्ट सामने आई थी।
Aagman के दौरान करीब 800 से 1,000 police personnel deployment में लगाए गए थे।
हालांकि इस deployment को Instagram FIR से सीधे जोड़ने की कोई official confirmation सामने नहीं आई है।
3 Instagram accounts पर FIR के बाद अब पुलिस video के original source, उसके साथ किए गए claim और accounts चलाने वाले लोगों की पहचान पर आगे बढ़ रही है।
फिलहाल investigation जारी है। इसलिए viral video या उसके caption को पूरी घटना का final सच मानना सही नहीं होगा।
26 अगस्त के Parel-Chinchpokli clash के बाद सामने आया यह नया मामला दिखाता है कि अब पुलिस की जांच सिर्फ मौके पर हुए विवाद तक सीमित नहीं है। Viral video की पूरी कहानी, उसका source और उसके साथ किया गया दावा जांच के बाद ही साफ होगा।