Category: Police Action

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  • 6 टन सिक्के, 106 बोरे और फरार व्यापारी… हाथरस में छापे के बाद पुलिस भी हैरान

    6 टन सिक्के, 106 बोरे और फरार व्यापारी… हाथरस में छापे के बाद पुलिस भी हैरान

    उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक व्यापारी के घर और दुकान से 106 बोरों में भरे 5,666 किलो सिक्के बरामद हुए। व्यापारी फरार है, पुलिस ने स्पेशल टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है।

    हाथरस (उत्तर प्रदेश): आमतौर पर पुलिस छापों में नकदी, सोना, हथियार या नशीले पदार्थ बरामद होने की खबरें सामने आती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई एक कार्रवाई ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यहां एक स्टेशनरी व्यापारी के घर और दुकान से 106 बोरों में भरे 5,666 किलोग्राम (करीब 6 टन) सिक्के बरामद हुए। छापेमारी शुरू होते ही व्यापारी फरार हो गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर सिक्के क्यों जमा किए गए थे और इनके पीछे पूरा खेल क्या था।

    सूचना मिली और खुल गया करोड़ों के सिक्कों का रहस्य

    प्रशासन को सूचना मिली थी कि नयागंज क्षेत्र में एक स्टेशनरी व्यापारी बड़ी मात्रा में सिक्के जमा कर रहा है। सूचना के आधार पर जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापारी की दुकान तथा हनुमान गली स्थित घर पर संयुक्त छापेमारी की।

    शुरुआत में अधिकारियों को लगा कि मौके पर 70 से 80 बोरे मिलेंगे, लेकिन तलाशी बढ़ने पर 106 प्लास्टिक के बोरे बरामद हुए। सभी बोरों में अलग-अलग मूल्यवर्ग के सिक्के भरे हुए थे। सिक्कों की संख्या इतनी अधिक थी कि मौके पर उनकी गिनती करना संभव नहीं था। इसलिए उनका वजन कराया गया, जो 5,666 किलोग्राम निकला।

    छापा पड़ते ही फरार हुआ व्यापारी

    पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई की भनक लगते ही व्यापारी मौके से फरार हो गया। उसके खिलाफ Coinage Act, 2011 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।

    आखिर 6 टन सिक्कों का क्या होने वाला था?

    यही सवाल इस पूरे मामले को रहस्यमय बना रहा है।

    जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि—

    • इतने बड़े पैमाने पर सिक्के कहां से जुटाए गए?
    • इन्हें किस उद्देश्य से जमा किया गया?
    • क्या इन्हें दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था?
    • क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
    • इस कारोबार से किसे आर्थिक फायदा पहुंच रहा था?

    इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने स्पेशल जांच टीम का गठन किया है।

    रिश्तेदार ने किया बड़ा दावा

    छापेमारी के दौरान व्यापारी के एक रिश्तेदार ने अधिकारियों को बताया कि इस कारोबार में कथित तौर पर 3 से 4 प्रतिशत कमीशन पर सिक्कों का लेन-देन किया जाता था।

    उसने दावा किया कि 500 और 1000 रुपये मूल्य के सिक्कों के पैकेट तैयार कर दिल्ली के मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशनों तक भेजे जाते थे। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की जांच की जा रही है और अभी इन्हें अंतिम सत्य नहीं माना गया है।

    क्या इतने सिक्के रखना गैरकानूनी है?

    पुलिस के अनुसार Coinage Act, 2011 के तहत सिक्कों का दुरुपयोग, उन्हें कानूनी मुद्रा के अलावा अन्य उद्देश्यों में इस्तेमाल करना या कानून के विपरीत परिस्थितियों में उनका संग्रह अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

    इसी आधार पर पुलिस ने व्यापारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।

    एक नजर में पूरा मामला

    • स्थान: नयागंज और हनुमान गली, हाथरस (उत्तर प्रदेश)
    • बरामदगी: 106 प्लास्टिक के बोरे
    • कुल वजन: 5,666 किलोग्राम (करीब 6 टन)
    • आरोपी: स्टेशनरी व्यापारी, फिलहाल फरार
    • कार्रवाई: Coinage Act, 2011 के तहत FIR
    • जांच: स्पेशल पुलिस टीम गठित

    पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?

    इस मामले में पुलिस सिर्फ बरामद सिक्कों की गिनती तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

    • सिक्कों का स्रोत क्या था?
    • क्या बैंकों से बड़ी मात्रा में सिक्के निकाले गए थे?
    • क्या अन्य राज्यों से भी कनेक्शन है?
    • क्या इस कारोबार में और लोग शामिल हैं?
    • बरामद सिक्कों की कुल कीमत कितनी है?

    इन सभी बिंदुओं पर जांच जारी है।

    आम लोगों के मन में उठ रहे सवाल

    इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं। क्या बड़ी मात्रा में सिक्के रखना अपराध है? क्या कोई व्यापारी वैध तरीके से इतने सिक्के इकट्ठा कर सकता है? क्या यह मामला केवल अवैध कारोबार से जुड़ा है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है?

    इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

    आगे क्या?

    फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस फरार व्यापारी की गिरफ्तारी पर है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद सिक्कों की सप्लाई चेन, उनके स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने तक इस मामले के कई पहलू रहस्य बने हुए हैं।

  • कांवड़ यात्रा 2026: ट्रैफिक, सुरक्षा, रूट और भीड़ की पूरी तस्वीर, अगले 10 दिनों में क्या बदलने वाला है?

    कांवड़ यात्रा 2026: ट्रैफिक, सुरक्षा, रूट और भीड़ की पूरी तस्वीर, अगले 10 दिनों में क्या बदलने वाला है?

    कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में ट्रैफिक डायवर्जन, पुलिस सुरक्षा, भीड़, बंद रास्ते और यात्रियों पर असर की पूरी रिपोर्ट पढ़िए।

    कांवड़ यात्रा 2026: अगले 10 दिनों में देश के करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है असर

    सावन शुरू होते ही कांवड़ यात्रा 2026 ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की सड़क व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख से गंगाजल लेने के लिए लाखों श्रद्धालु सड़कों पर उतर चुके हैं। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू हो चुके हैं, हजारों पुलिसकर्मी तैनात हैं और कई शहरों में रूट डायवर्जन शुरू हो गया है।

    लेकिन यह खबर सिर्फ धार्मिक यात्रा की नहीं है। इसका सीधा असर उन करोड़ों लोगों पर पड़ने वाला है जो रोजाना ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के लिए इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले कुछ दिनों में ट्रैफिक, सुरक्षा और आम लोगों की जिंदगी पर इसका कितना असर पड़ सकता है।

    कांवड़ यात्रा शुरू होते ही दिल्ली से हरिद्वार तक बदली ट्रैफिक व्यवस्था

    कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 11 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और हरिद्वार के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

    दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जीटी रोड के कई हिस्सों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है, जबकि कुछ रास्तों को पूरी तरह कांवड़ियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।

    इसके अलावा, दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग और गंगा नहर मार्ग पर 4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच सामान्य वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

    प्रशासन ने लोगों को पहले से वैकल्पिक रास्ते तय करने की सलाह दी है।

    सिर्फ श्रद्धालु नहीं, इन करोड़ों लोगों पर भी पड़ेगा असर

    कांवड़ यात्रा का असर सिर्फ कांवड़ियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सबसे ज्यादा प्रभाव इन शहरों और इलाकों पर पड़ सकता है—

    • दिल्ली
    • नोएडा
    • गाजियाबाद
    • मेरठ
    • मुजफ्फरनगर
    • हरिद्वार
    • ऋषिकेश
    • देहरादून
    • बागपत
    • शामली

    इन शहरों से हर दिन लाखों लोग नौकरी, व्यापार और शिक्षा के लिए सफर करते हैं। ट्रैफिक डायवर्जन की वजह से कई जगहों पर यात्रा का समय बढ़ सकता है।

    किन लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है?

    ऑफिस जाने वाले कर्मचारी

    सुबह 7 बजे से 11 बजे और शाम 5 बजे से 9 बजे तक सबसे ज्यादा दबाव रहने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।

    स्कूल और कॉलेज के छात्र

    कई स्कूल बसों और निजी वाहनों के रूट बदल सकते हैं। माता-पिता को सुबह निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखना चाहिए।

    पर्यटक

    हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून और मसूरी जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।

    ट्रक और मालवाहक वाहन चालक

    भारी वाहनों पर प्रतिबंध की वजह से कई ट्रकों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

    रेलवे और बस यात्री

    रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर अतिरिक्त भीड़ देखने को मिल सकती है।

    दिल्ली पुलिस ने कांवड़ियों के लिए बनाए आठ विशेष रूट

    दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कांवड़ियों की सुरक्षा और यात्रा को सुचारु बनाने के लिए आठ अलग-अलग रूट तय किए हैं।

    इसके साथ ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार ट्रैफिक और सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ट्रैफिक दबाव और बढ़ सकता है।

    35 हजार पुलिसकर्मी, ड्रोन और AI कैमरों से होगी निगरानी

    उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए 35 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी, पीएसी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है।

    इसके अलावा—

    • ड्रोन कैमरे
    • हजारों CCTV कैमरे
    • AI निगरानी प्रणाली
    • ATS और STF टीमें
    • बम निरोधक दस्ते
    • इंटेलिजेंस यूनिट

    को भी अलर्ट पर रखा गया है।

    मुजफ्फरनगर और हरिद्वार जैसे संवेदनशील इलाकों में चौबीस घंटे निगरानी की जा रही है।

    हरिद्वार में बढ़ रही भीड़, प्रशासन ने शुरू की विशेष तैयारी

    हरिद्वार में कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

    हर की पौड़ी, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई है और लगभग एक हजार अतिरिक्त सफाईकर्मियों को तैनात किया है।

    अधिकारियों का अनुमान है कि शिवरात्रि से पहले अंतिम तीन दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिल सकती है।

    इस बार सोशल मीडिया और वीडियो मॉनिटरिंग पर भी खास नजर

    इस बार प्रशासन सिर्फ सड़कों की निगरानी नहीं कर रहा है, बल्कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल भी बनाई गई है।

    कांवड़ यात्रा से जुड़े वीडियो, ट्रैफिक अपडेट और अफवाहों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।

    यही वजह है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करने की सलाह दी गई है।

    सरकार और प्रशासन ने क्या इंतजाम किए हैं?

    • 24 घंटे कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
    • अतिरिक्त बस सेवाएं शुरू की गई हैं।
    • मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।
    • जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है।
    • पुलिस की बाइक पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है।
    • सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है।
    • आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं।

    अगले 10 दिन क्यों हैं सबसे महत्वपूर्ण?

    प्रशासन के अनुसार, अभी यात्रा की शुरुआत हुई है। सबसे ज्यादा भीड़ शिवरात्रि से पहले के अंतिम दिनों में देखने को मिल सकती है।

    4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच ट्रैफिक दबाव अपने चरम पर पहुंच सकता है। ऐसे में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देखें।

    घर से निकलने से पहले ये 7 काम जरूर करें

    • ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देखें।
    • Google Maps पर वैकल्पिक रास्ता चेक करें।
    • अतिरिक्त समय लेकर निकलें।
    • मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें।
    • रेलवे और बसों की स्थिति पहले से जांच लें।
    • जरूरी दस्तावेज साथ रखें।
    • आपातकालीन नंबर सेव रखें।

    Official Sources

  • मुंबई पुलिस का बड़ा एक्शन: नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 हिस्ट्रीशीटर एक साल के लिए शहर से तड़ीपार

    मुंबई पुलिस का बड़ा एक्शन: नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 हिस्ट्रीशीटर एक साल के लिए शहर से तड़ीपार

    मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से तड़ीपार कर दिया है। जानिए किन इलाकों के आरोपी इस सूची में शामिल हैं और उन पर क्या आरोप हैं।

    मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई शहर और उपनगरों की सीमा से तड़ीपार (Externment) कर दिया है। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, मारपीट, लूट, हथियारों के दम पर धमकाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे मामलों में शामिल रहे हैं।

    पुलिस ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों की गतिविधियों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में डर का माहौल बन गया था। कई लोग शिकायत दर्ज कराने से भी डर रहे थे। इसी वजह से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत इन अपराधियों के खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की गई।

    पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी क्षेत्र) के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया।

    किन अपराधों में शामिल थे आरोपी?

    पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, तड़ीपार किए गए आरोपी निम्नलिखित अपराधों में शामिल रहे हैं—

    • हत्या की कोशिश
    • मारपीट और धमकी
    • जबरन वसूली
    • लूटपाट
    • हथियारों के बल पर डर फैलाना
    • सार्वजनिक शांति भंग करना
    • व्यापारियों और स्थानीय लोगों को धमकाना

    इन गतिविधियों की वजह से इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था।

    किन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई?

    मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत यह कार्रवाई की है।

    कानूनकितने आरोपी
    धारा 57(1)(अ)(1)2
    धारा 56(1)(अ)(ब)7
    धारा 553

    एक साल के लिए तड़ीपार किए गए आरोपी

    कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन क्षेत्र

    kasturba-police-station
    नामउम्रतड़ीपार आदेश
    तीनू दिलीप धोड़ी28 वर्ष29 जुलाई 2026
    शौकत अली नियामत अली शेख51 वर्ष11 जून 2026

    समतानगर पुलिस स्टेशन क्षेत्र

    samtanagar-police-station
    नामउम्रतड़ीपार आदेश
    आसिफ पाशा पठान30 वर्ष23 जुलाई 2026
    सतीश कुमार त्रिलोकीनाथ सोनी उर्फ जगत38 वर्ष23 जुलाई 2026
    परवेज हुसैन पटेल34 वर्ष8 जून 2026
    सागर सुनील निगुडकर32 वर्ष8 जून 2026
    जय उपेश पटेल25 वर्ष8 जून 2026

    दहिसर पुलिस स्टेशन क्षेत्र

    dahisar-police-station
    नामउम्रतड़ीपार आदेश
    आदेश अरुण लगाडे21 वर्ष17 जून 2026
    कपिल सुरेश माने29 वर्ष7 जून 2026
    सुजीत रामपाल मिश्रा38 वर्ष7 जून 2026
    रमेश्वर बालासाहेब ठेंगे35 वर्ष27 मई 2026
    जगदीश कलीराम जोशी उर्फ सुरेश उर्फ सुफिया37 वर्ष27 मई 2026

    तड़ीपार का आदेश तोड़ने पर क्या होगा?

    मुंबई पुलिस ने साफ किया है कि अगर तड़ीपार किया गया कोई भी आरोपी आदेश का उल्लंघन करते हुए मुंबई शहर या उपनगरों में प्रवेश करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने नागरिकों से क्या अपील की?

    मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके इलाके में कोई तड़ीपार अपराधी दिखाई देता है या किसी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी मिलती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन 100 और 112 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

    इस कार्रवाई का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

    पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और व्यापारियों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही, इलाके में जबरन वसूली, दादागिरी और हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

    FAQ

    सवाल: मुंबई पुलिस ने कितने अपराधियों को तड़ीपार किया है?

    नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए तड़ीपार किया गया है।

    सवाल: तड़ीपार कितने समय के लिए किया गया है?

    सभी आरोपियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से बाहर रहने का आदेश दिया गया है।

    सवाल: किन पुलिस स्टेशनों के आरोपी शामिल हैं?

    कस्तूरबा मार्ग, समतानगर और दहिसर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के आरोपी शामिल हैं।

    सवाल: अगर तड़ीपार आरोपी मुंबई में दिखे तो क्या करें?

    तुरंत 100, 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें।

    Official Sources

  • लोकभवन के फर्जी दस्तावेज, 200 एजेंट और कन्फर्म टिकट का खेल, मुंबई पुलिस के खुलासे से हड़कंप

    लोकभवन के फर्जी दस्तावेज, 200 एजेंट और कन्फर्म टिकट का खेल, मुंबई पुलिस के खुलासे से हड़कंप

    मुंबई पुलिस ने लोकभवन के फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों के जरिए रेलवे के इमरजेंसी कोटे से टिकट दिलाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जांच में देशभर में फैले 200 एजेंटों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

    मुंबई: मुंबई पुलिस ने रेलवे के वीआईपी और इमरजेंसी कोटे के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के लोकभवन के नाम पर फर्जी लेटरहेड, नकली मुहर और राज्यपाल कार्यालय के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर यात्रियों के वेटिंग टिकट कन्फर्म कराए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले करीब 200 एजेंटों के जरिए संचालित किया जा रहा था। ये एजेंट यात्रियों को तत्काल और कन्फर्म टिकट दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।

    कैसे चलता था पूरा खेल?

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी सबसे पहले यात्रियों के नाम पर वेटिंग टिकट बुक करते थे। इसके बाद महाराष्ट्र लोकभवन के नाम से तैयार किए गए फर्जी पत्र रेलवे अधिकारियों तक पहुंचाए जाते थे। इन पत्रों में राज्यपाल के निजी सहायक के कथित नकली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया जाता था।

    इमरजेंसी कोटे के जरिए सीट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते थे।

    रेलवे सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा

    फरवरी 2026 में मध्य रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय ने लोकभवन से कुछ संदिग्ध पत्रों का सत्यापन मांगा था। जांच के दौरान पता चला कि पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर और मुहर फर्जी थे।

    लोकभवन प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद मलबार हिल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    पांच आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप (34) समेत चार दलाल शामिल हैं। वहीं, अमरीश ठक्कर को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

    जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने फर्जी पत्र तैयार किए गए और कितने यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराए गए।

    किन ट्रेनों में कन्फर्म कराए गए टिकट?

    प्रारंभिक जांच में एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रेलवे को इस घोटाले से कितना आर्थिक नुकसान हुआ।

    यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री केवल अधिकृत रेलवे प्लेटफॉर्म और लाइसेंस प्राप्त एजेंटों के माध्यम से ही टिकट बुक करें। सोशल मीडिया या निजी एजेंटों के जरिए “गारंटीड कन्फर्म टिकट” के दावों से बचें।

    फिलहाल पुलिस कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

    Official Sources

    1. मलबार हिल पुलिस स्टेशन (मुंबई पुलिस)
      मलबार हिल पुलिस स्टेशन की आधिकारिक वेबसाइट
    2. मध्य रेलवे – चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय
      मध्य रेलवे (कॉमर्शियल विभाग) संपर्क पेज
    3. महाराष्ट्र लोकभवन (राजभवन)
      महाराष्ट्र लोकभवन की आधिकारिक वेबसाइट

    FAQ

    सवाल: इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?

    अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सवाल: घोटाला कैसे किया जाता था?

    फर्जी सरकारी पत्रों और नकली हस्ताक्षरों के जरिए इमरजेंसी कोटे से टिकट कन्फर्म कराए जाते थे।

    सवाल: कितने एजेंट इस नेटवर्क से जुड़े थे?

    प्रारंभिक जांच के मुताबिक, देशभर में करीब 200 एजेंट सक्रिय थे।

    सवाल: किन ट्रेनों में टिकट कन्फर्म कराए गए?

    एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं।

  • देश की बड़ी खबर: साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

    देश की बड़ी खबर: साइबर क्राइम के मास्टरमाइंड को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 92 APK फाइलों से ₹63 करोड़ की ठगी हुई, जबकि 967 नई फाइलों से ₹1000 करोड़ तक की संभावित साइबर ठगी की आशंका थी।

    मुंबई: मुंबई पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की बनाई गई APK फाइलों का इस्तेमाल कर अब तक करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी की जा चुकी है। जांच के दौरान आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल हो जाता, तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

    मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?

    इस मामले की शुरुआत दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित को महानगर गैस (MGL) का बिल भरने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करते ही उसके बैंक खाते से करीब ₹70 हजार निकाल लिए गए।

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    मामले की जांच करते-करते मुंबई पुलिस सीधे उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। इसी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।

    DCP राजसुधा आर. ने क्या बताया?

    मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार गिरफ्तार आरोपी केवल फर्जी APK फाइलें ही नहीं बनाता था, बल्कि साइबर ठगों को संभावित शिकारों का डेटा भी उपलब्ध कराता था।

    पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 37,200 लोगों का बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा भी बरामद किया है। इस डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।

    जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

    मुंबई पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

    • 92 फर्जी APK फाइलें देशभर के साइबर अपराधियों को बेची गईं।
    • इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई।
    • देशभर से 2,993 शिकायतें दर्ज हुईं।
    • इनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई की हैं।
    • आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें बरामद हुईं, जिनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की आशंका जताई गई है।

    पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।

    साइबर ठगों को ऐसे बेचता था APK फाइलें

    जांच के अनुसार आरोपी प्रत्येक APK फाइल ₹15,000 से ₹20,000 में बेचता था। इन फाइलों की वैधता लगभग 40 से 45 दिन होती थी। समय पूरा होने पर साइबर अपराधियों को नई APK फाइल खरीदनी पड़ती थी।

    पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।

    कैसे काम करती हैं ये फर्जी APK फाइलें?

    साइबर अपराधी लोगों को गैस बिल, RTO चालान, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।

    जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां ठगों के हाथ में चली जाती थीं। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।

    कौन है गिरफ्तार आरोपी?

    मुंबई पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है। उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने साइंस से पढ़ाई की थी और सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कोडिंग सीखी। इसके बाद उसने फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को बेचना शुरू कर दिया।

    अब आगे क्या होगा?

    मुंबई पुलिस अब उन साइबर अपराधियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस आरोपी से APK फाइलें खरीदी थीं। जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय गिरोहों के लिंक सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    आम लोगों के लिए जरूरी सलाह

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें। Android फोन में केवल Google Play Store जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। गैस, बैंक, बिजली, KYC या सरकारी विभाग के नाम पर आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि जरूर करें।

    Official Sources

    1. Mumbai Policehttps://mumbaipolice.gov.in/
    2. National Cyber Crime Reporting Portal (I4C)https://cybercrime.gov.in/
    3. Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairshttps://i4c.mha.gov.in/

    FAQ

    Q1. मुंबई पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया है?

    मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित मास्टरमाइंड एस.के. मंडल को गिरफ्तार किया है।

    Q2. APK फ्रॉड क्या होता है?

    यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें फर्जी Android ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।

    Q3. अब तक कितनी साइबर ठगी सामने आई है?

    मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपी की APK फाइलों से जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की ठगी सामने आई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि बरामद 967 नई फाइलों का इस्तेमाल होता तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

    Q4. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?

    केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, किसी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग या KYC संबंधी संदेशों की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।

  • केस वापसी के वादे के बाद भी CJP प्रदर्शनकारियों को नोटिस क्यों? मुंबई पुलिस ने जांच पर दिया बड़ा जवाब

    केस वापसी के वादे के बाद भी CJP प्रदर्शनकारियों को नोटिस क्यों? मुंबई पुलिस ने जांच पर दिया बड़ा जवाब

    केंद्र के केस वापसी के आश्वासन के बावजूद CJP प्रदर्शनकारियों को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस मिलने पर विवाद बढ़ गया है। पुलिस ने जांच जारी रखने की वजह स्पष्ट की है।

    मुंबई: दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए हुए समझौते के बाद उम्मीद थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों में राहत मिलेगी। लेकिन मुंबई में कई प्रदर्शनकारियों को अब भी पुलिस नोटिस मिलने और बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसे जांच रोकने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है।

    आखिर नोटिस क्यों मिल रहे हैं?

    मुंबई पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह CJP समर्थित प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR की जांच कानून के मुताबिक जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी की ओर से लिखित निर्देश नहीं मिलते, जांच बीच में नहीं रोकी जा सकती। इसलिए जिन लोगों के बयान दर्ज होने बाकी हैं, उन्हें प्रक्रिया के तहत बुलाया जा रहा है।

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    पुलिस ने क्या सफाई दी?

    मुंबई पुलिस ने सोमवार को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि केस वापसी के आश्वासन के बाद भी नए नोटिस भेजे जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं हुआ और जिन नोटिसों की चर्चा हो रही है, वे पहले ही जारी किए जा चुके थे।

    सरकार ने क्या आश्वासन दिया था?

    25 जुलाई को केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने घोषणा की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी घोषणा के बाद CJP ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था।

    फिर विवाद क्यों बढ़ा?

    CJP का आरोप है कि समझौते के बाद भी कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को नोटिस मिल रहे हैं और पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार अपने आश्वासन के अनुरूप जल्द लिखित कार्रवाई नहीं करती, तो वह दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।

    कानूनी प्रक्रिया में कहां है अड़चन?

    कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी FIR को वापस लेने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक घोषणा से पूरी नहीं होती। इसके लिए प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। कई मामलों में जांच पूरी होने, संबंधित प्राधिकरण की सिफारिश और अदालत की प्रक्रिया भी आवश्यक हो सकती है। इसी कारण घोषणा और वास्तविक केस वापसी के बीच समय लग सकता है।

    प्रदर्शनकारियों की चिंता क्या है?

    जिन छात्रों और युवाओं को नोटिस मिले हैं, उनका कहना है कि सरकार के आश्वासन के बाद उन्हें लगा था कि पुलिस कार्रवाई रुक जाएगी। लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से उनके बीच असमंजस बना हुआ है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि यह नियमित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अंतिम निर्णय सरकार एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।

    फिलहाल क्या है स्थिति?

    फिलहाल दो बातें साफ हैं। पहली, केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का सार्वजनिक आश्वासन दिया था। दूसरी, मुंबई पुलिस का कहना है कि उसे जांच रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है और 26 जुलाई के बाद नए नोटिस भी जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में आगे की स्थिति सरकार की औपचारिक कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    Official Sources

    FAQ

    Q1. क्या CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी केस वापस हो गए हैं?
    उत्तर: नहीं। अभी तक सभी मामलों की वापसी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

    Q2. मुंबई पुलिस नोटिस क्यों भेज रही है?
    उत्तर: पुलिस का कहना है कि उसे जांच रोकने का कोई लिखित आदेश नहीं मिला है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    Q3. क्या पुलिस अब भी नए नोटिस जारी कर रही है?
    उत्तर: मुंबई पुलिस के अनुसार 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है।

  • MHT-CET पर वायरल वीडियो के बाद क्या हो रहा है? CET Cell ने पुलिस जांच क्यों मांगी

    MHT-CET पर वायरल वीडियो के बाद क्या हो रहा है? CET Cell ने पुलिस जांच क्यों मांगी

    MHT-CET परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद महाराष्ट्र CET Cell ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस से जांच की मांग की है। जानिए पूरा मामला और छात्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

    मुंबई: क्या MHT-CET परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी? सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के बाद यह सवाल कई छात्रों और अभिभावकों के मन में उठने लगा है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) Cell ने पूरे मामले की जांच के लिए मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    परीक्षा प्राधिकरण का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित सामग्री छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैला सकती है तथा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए तथ्यों की जांच आवश्यक है।

    क्या है पूरा मामला?

    CET Cell के अनुसार सोशल मीडिया पर MHT-CET परीक्षा से जुड़े दो वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में परीक्षा की पारदर्शिता और संचालन को लेकर कई दावे किए गए हैं।

    हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और साइबर पुलिस से अनुरोध किया गया है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का कानूनी उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

    CET Cell ने पुलिस से क्या मांग की है?

    शिकायत में CET Cell ने कहा है कि वायरल वीडियो तैयार करने, अपलोड करने और प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि साझा की गई जानकारी तथ्यात्मक है या नहीं।

    यदि जांच में किसी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?

    फिलहाल छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    अब तक CET Cell ने परीक्षा रद्द करने, परिणाम रोकने या परीक्षा प्रक्रिया में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है।

    यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सत्यता की जांच के लिए की गई है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी जाती है।

    आगे क्या होगा?

    अब मामले की जांच मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    यदि वायरल दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी, और यदि दावे भ्रामक पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं।

    MHT-CET से जुड़े वायरल वीडियो की सच्चाई अभी जांच के दायरे में है। ऐसे में किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय छात्रों और अभिभावकों को केवल महाराष्ट्र CET Cell और संबंधित सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।

    Official Sources

    FAQ

    MHT-CET मामले में शिकायत किसने दर्ज कराई है?

    महाराष्ट्र स्टेट CET Cell ने मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

    क्या MHT-CET परीक्षा रद्द हो गई है?

    नहीं। अभी तक परीक्षा रद्द करने या परिणाम रोकने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    क्या वायरल वीडियो सही साबित हो चुके हैं?

    नहीं। वीडियो में किए गए दावों की जांच की जा रही है। उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    छात्रों को क्या करना चाहिए?

    केवल महाराष्ट्र CET Cell की आधिकारिक वेबसाइट और सरकारी सूचना पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट दावों से बचें।

  • मुंबई: पाबंदी के दौरान मछली पकड़ते 3 ट्रॉलर पकड़े गए

    मुंबई: पाबंदी के दौरान मछली पकड़ते 3 ट्रॉलर पकड़े गए

    मुंबई की वर्सोवा खाड़ी में मानसून मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के उल्लंघन के आरोप में तीन ट्रॉलरों पर संयुक्त कार्रवाई की गई।

    मुंबई: वर्सोवा खाड़ी में मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के बावजूद मछली पकड़ने के आरोप में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई के दौरान सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) और वर्सोवा के लाइसेंस अधिकारी ने संयुक्त रूप से तीनों नौकाओं की जांच की। जांच के बाद मामले में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य अधिनियम, 1981 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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    20 जुलाई 2026 को वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर वर्सोवा खाड़ी के बाहर तीन ट्रॉलर लंगर डालकर खड़े होने की जानकारी मिली थी। सूचना के बाद अधिकारियों ने रात के समय मौके पर जाकर जांच की। इन नौकाओं के मछली पकड़कर लौटने और मछली उतारने की तैयारी में होने का संदेह जताया गया।

    वर्सोवा खाड़ी में तीन ट्रॉलरों पर कार्रवाई

    जानकारी के मुताबिक, तीन नौकाओं के वर्सोवा खाड़ी के बाहर खड़े होने की सूचना मिलने के बाद वर्सोवा जेटी पर तैनात लाइसेंस अधिकारी और सुरक्षाकर्मियों ने रातभर गश्त की। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित नौकाएं जेटी पर आती हैं या नहीं।

    हालांकि, उस रात तेज हवा और भारी बारिश के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। बताया गया कि संबंधित नौकाएं जेटी पर न रुककर खाड़ी के अंदर की ओर चली गईं।

    रात 3 बजे के आसपास अंधेरे में नौकाएं नजरों से ओझल

    जानकारी के अनुसार, संबंधित नौकाएं रात करीब 3 बजे खाड़ी के अंदर की दिशा में चली गईं। तेज बारिश, अंधेरे और खराब मौसम के कारण अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका कि नौकाएं आगे किस दिशा में गईं।

    इसके अलावा, वर्सोवा में उस समय गश्ती नौका उपलब्ध नहीं थी। इसलिए इतनी रात में संबंधित नौकाओं का पीछा कर पाना भी संभव नहीं था।

    अगले दिन सागरी पुलिस और MMB ने की संयुक्त जांच

    अगली सुबह संबंधित नौकाओं की तलाश और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) और वर्सोवा के लाइसेंस अधिकारी ने संयुक्त रूप से तीनों नौकाओं की जांच की।

    जांच के दौरान अधिकारियों के मुताबिक, तीनों नौकाओं द्वारा मानसून के दौरान लागू मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी का उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा, कुछ नौकाओं पर आवश्यक कानूनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।

    महाराष्ट्र में समुद्री मछली पकड़ने से जुड़े नियमों और प्रतिबंधों का नियमन महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत किया जाता है।

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    जांच के दायरे में आईं तीन नौकाएं

    1. अमरनाथ (AMARNATH)

    • पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2615
    • पंजीकरण की तारीख: 4 जनवरी 2019
    • मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: न्यू फेरी व्हार्फ (New Ferrywharf)

    2. जय बाबा अमरनाथ (JAY BABA AMARNATH)

    • पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2683
    • पंजीकरण की तारीख: 13 फरवरी 2019
    • मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: ससून डॉक (Sassoon Dock)

    3. जरीमरी तिसाई (JARI MARI TISAI)

    • पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2170
    • पंजीकरण की तारीख: 19 दिसंबर 2019
    • मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: न्यू फेरी व्हार्फ (New Ferrywharf)

    महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई

    अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित तीनों नौकाओं के खिलाफ महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    मामले में आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। दंड या अन्य अंतिम कार्रवाई के संबंध में निर्णय संबंधित विभागीय और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।

    वर्सोवा खाड़ी में मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के उल्लंघन के आरोप में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई। खराब मौसम और रात के अंधेरे के कारण शुरुआती निगरानी के दौरान नौकाओं का पीछा नहीं किया जा सका। हालांकि, अगले दिन सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और लाइसेंस अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई कर तीनों नौकाओं की जांच की। मामले में संबंधित कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    आधिकारिक स्रोत


    FAQ

    वर्सोवा में कितने ट्रॉलरों की जांच की गई?

    इस मामले में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई।

    ट्रॉलरों पर कार्रवाई क्यों की गई?

    अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी का उल्लंघन किए जाने का मामला सामने आया है। कुछ नौकाओं पर आवश्यक कानूनी दस्तावेज नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।

    किस कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है?

    मामले में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

  • मुंबई पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप

    मुंबई पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप

    मुंबई के दादर में वायरल वीडियो को लेकर पुलिस अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप लगा। मुंबई पुलिस ने आरोपों को खारिज कर सफाई दी।

    डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई के दादर में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक वायरल वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस विवादों में है। वीडियो के आधार पर एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर गलत तरीके से पकड़ने और घसीटने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई।

    वायरल वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस पर उठे सवाल

    दादर में छात्र प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। वीडियो में एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों के बीच एक महिला को पकड़ता हुआ दिखाई देता है। विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस दृश्य को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

    वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी के साथ अनुचित तरीके से व्यवहार किया और उसे पकड़कर घसीटा। हालांकि, वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों और घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

    वर्षा गायकवाड़ और रोहित पवार ने कार्रवाई की मांग की

    मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने वीडियो साझा करते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए पूछा कि एक पुरुष पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारी के साथ इस तरह क्यों पेश आया और महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई।

    एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने भी पुलिस के रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिसकर्मी का उद्देश्य किसी पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ना था और उसे बाद में पता चला कि बीच में महिला आ गई है, तो उसे अपना हाथ तुरंत पीछे हटा लेना चाहिए था। इस मामले में उन्होंने पुलिस अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए।

    मुंबई पुलिस ने आरोपों को किया खारिज

    विवाद बढ़ने के बाद मुंबई पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर अपना पक्ष रखा। पुलिस के मुताबिक, वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और उसी दौरान महिला प्रदर्शनकारी अचानक बीच में आ गई।

    मुंबई पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो की जांच की और उन्हें अधिकारी के व्यवहार में कोई अनुचित हरकत नहीं मिली। पुलिस ने आरोपों को गलत बताया है।

    वीडियो को लेकर जारी है विवाद

    पुलिस की सफाई के बावजूद वीडियो को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वीडियो में अधिकारी को महिला की मौजूदगी का पता चलने के बाद भी उसे पकड़े हुए देखा जा सकता है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि वीडियो को पूरे घटनाक्रम के संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है।

    इसलिए फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्य और पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बीच स्पष्ट मतभेद नजर आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर महिला प्रदर्शनकारी के साथ कथित बदसलूकी का आरोप अभी आरोप के स्तर पर है और इस संबंध में किसी न्यायिक निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।

    लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब छात्र प्रदर्शनों से जुड़े एक अन्य वायरल वीडियो को लेकर भी मुंबई पुलिस की आलोचना हुई थी। उस मामले में एक पुलिसकर्मी पर प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर ड्रग्स से जुड़े झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगा था। विवाद के बाद पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी और मामले में जांच शुरू की गई।

    दादर के इस नए मामले में मुंबई पुलिस ने फिलहाल वायरल वीडियो की अपनी जांच के आधार पर अधिकारी के खिलाफ अनुचित आचरण के आरोपों को खारिज किया है। मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

    दादर के छात्र प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां विपक्षी नेताओं ने अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं मुंबई पुलिस ने कहा है कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच विवाद जारी है।

    Official Sources

    FAQ

    क्या मुंबई पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है?

    इस मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच के बाद अधिकारी के आचरण में कोई अनुचित हरकत नहीं पाए जाने की बात कही है। अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।

    वायरल वीडियो में क्या आरोप लगाया गया है?

    वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी को गलत तरीके से पकड़ा और घसीटा। मुंबई पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है।

    मुंबई पुलिस ने क्या सफाई दी?

    पुलिस के मुताबिक अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई थी