रंगपुर में गणपति चक्रवर्ती परिवार के 4 लोगों की हत्या का मामला। पुलिस के मुताबिक आरोपी 7 घंटे घर में रहे। मुग्ध और सिद्धार्थ गिरफ्तार।
बांग्लादेश: चार लोगों की हत्या के बाद कोई घर से भागने के बजाय वहीं करीब सात घंटे रुका रहे—रंगपुर के मछुआपाड़ा में सामने आए इस हत्याकांड की सबसे असामान्य कड़ी यही है। पुलिस का कहना है कि 20 अगस्त की रात गणपति चक्रवर्ती के घर में चार लोगों की हत्या के बाद मुग्ध दास और सिद्धार्थ दास काफी देर तक उसी मकान में मौजूद रहे। दोनों ने कथित तौर पर याबा का सेवन किया, घर में रखे खजूर और खीरे खाए और बाद में स्नान भी किया।
मामला 22 अगस्त की रात सामने आया, जब रंगपुर शहर के मछुआपाड़ा इलाके में एक बंद घर से चार शव बरामद हुए। घर में रहने वाले 65 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी प्रीतिलता, 23 वर्षीय बेटी आगामी चक्रवर्ती प्रार्थी और 12 वर्षीय बेटे प्रियम की मौत हो चुकी थी।
परिवार से कई घंटों तक संपर्क नहीं हुआ था। रात में घर से दुर्गंध आने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। घर खोला गया तो गणपति का शव छत पर मिला। प्रीतिलता और उनकी बेटी के शव सीढ़ियों के पास थे, जबकि प्रियम का शव कमरे में पलंग के नीचे मिला।
पहली नजर में मामला लूट का लगा। घर के भीतर सामान बिखरा था और पैसे तथा कीमती सामान रखने वाली जगहों से छेड़छाड़ के निशान मिले थे। बिजली का कनेक्शन काटे जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने घटनास्थल से मिले सुरागों को जोड़ना शुरू किया, हत्या की वजह को लेकर तस्वीर बदलती गई।
छत पर नशा करते हुए पकड़े जाने का डर
पुलिस की जांच के मुताबिक, पूरी घटना की शुरुआत 20 अगस्त की रात घर की छत से हुई।
मुग्ध दास और सिद्धार्थ दास पड़ोसी इमारत के रास्ते गणपति के घर की छत पर पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि दोनों वहां याबा नाम की नशीली गोली का सेवन कर रहे थे।
छत से आवाज आने पर गणपति ऊपर पहुंचे। दोनों युवकों को उन्होंने पहले से पहचान रखा था और वे उन्हें ‘सर’ कहकर बुलाते थे। गणपति ने वहां मौजूद होने की वजह पूछी।
पुलिस के मुताबिक, यहीं से मामला हिंसा में बदल गया। दोनों युवकों को डर था कि गणपति उन्हें पहचान चुके हैं। आरोप है कि इसी डर में उन्होंने गणपति के कंधे पर रखे गमछे से उनका गला घोंट दिया।
गणपति ने बचने की कोशिश की और शोर हुआ। यह आवाज उनकी पत्नी प्रीतिलता तक पहुंची। वह सीढ़ियों से ऊपर आने लगीं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें भी रास्ते में पकड़ लिया और कपड़े से गला घोंट दिया।
फिर बेटी और 12 साल के बेटे की बारी आई
घर में अब गणपति और उनकी पत्नी दोनों की हत्या हो चुकी थी। लेकिन पुलिस का दावा है कि आरोपियों को अब एक और डर था—कहीं घर में मौजूद लोग उन्हें पहचान न लें।
इसी वजह से उनकी बेटी आगामी को भी मार दिया गया।
सबसे कम उम्र का सदस्य 12 साल का प्रियम था। पुलिस के अनुसार, प्रियम सिद्धार्थ के छोटे भाई का दोस्त था और आरोपियों को पहचानता था। जांचकर्ताओं का दावा है कि इसी पहचान के कारण दोनों को डर था कि बच्चा उनके बारे में बता सकता है। इसके बाद उसकी भी गला घोंटकर हत्या कर दी गई।
पुलिस के मुताबिक, परिवार के चारों सदस्यों की मौत गला घोंटने से हुई।
हत्या के बाद घर से निकलने की जल्दी नहीं थी
चार लोगों की जान लेने के बाद भी दोनों आरोपी तुरंत वहां से नहीं निकले। पुलिस के अनुसार, वे करीब 6 से 7 घंटे तक घर के भीतर रहे।
यही हिस्सा जांचकर्ताओं के लिए भी अहम सुराग बना। घर में उनकी मौजूदगी के दौरान याबा का सेवन किए जाने, खजूर और खीरा खाने और स्नान करने के कथित सबूत मिले।
घर में कुछ चूड़ियों को आग में तपाए जाने के निशान भी मिले। इससे जांच का एक सिरा सोने के काम से जुड़े व्यक्ति की तरफ भी गया।
उधर, पुलिस अलग-अलग सुरागों को जोड़ रही थी। मामले की जांच में रंगपुर महानगर पुलिस के साथ डिटेक्टिव ब्रांच और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट भी शामिल हुए।
23 अगस्त तड़के दोनों पकड़े गए
जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस मुग्ध दास और सिद्धार्थ दास तक पहुंची। दोनों को 23 अगस्त तड़के हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका स्वीकार की। उनके पास से कथित तौर पर हत्या में इस्तेमाल सामान और लूटे गए सोने के आभूषण भी बरामद किए गए।
पुलिस की शुरुआती आशंका लूट की थी, लेकिन बाद की जांच में उसने कहा कि परिवार को निशाना बनाए जाने की मुख्य वजह छत पर याबा का सेवन करते हुए पकड़े जाने का डर था। पुलिस ने परिवार की किसी के साथ ज्ञात दुश्मनी या विवाद की बात भी सामने नहीं रखी है।
शिक्षक से लेकर 12 साल के बेटे तक—चार जिंदगियां खत्म
गणपति चक्रवर्ती रंगपुर जिला स्कूल में शिक्षक थे। पिछले साल 31 दिसंबर को वह सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी उम्र 65 साल थी। रिटायरमेंट के बाद वह होम्योपैथिक चिकित्सा से भी जुड़े थे।
उनकी पत्नी प्रीतिलता की उम्र करीब 50 साल थी। बेटी आगामी ने अंग्रेजी में मास्टर्स किया था। 12 वर्षीय प्रियम उसी रंगपुर जिला स्कूल में पढ़ता था, जहां उसके पिता शिक्षक रह चुके थे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक परिवार पिछले कुछ वर्षों से इलाके में रह रहा था और गणपति को शांत और मिलनसार व्यक्ति के तौर पर जाना जाता था।
फिलहाल मामले में सामने आया पूरा घटनाक्रम पुलिस की जांच और आरोपियों से पूछताछ में सामने आए दावों पर आधारित है। मुग्ध और सिद्धार्थ के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि और दोष का फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
