DSP नेहा पच्चीसिया पर बड़ा शिकंजा, FIR के बाद ₹10 हजार का इनाम और LOC जारी, क्या विदेश भागने की थी तैयारी? जमीन सौदे का पूरा मामला

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DSP नेहा पच्चीसिया पर FIR, गिरफ्तारी का ₹10 हजार इनाम और LOC जारी हो चुका है। क्या विदेश भागने की तैयारी थी? जानिए जमीन सौदे से जुड़ा पूरा मामला।

मध्यप्रदेश: निलंबित DSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ पहले निलंबन, फिर FIR, गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम, अग्रिम जमानत खारिज और अब LOC जारी होने तक की कार्रवाई हो चुकी है।

जमीन सौदे से जुड़े इस मामले में नेहा पच्चीसिया के साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी भी आरोपी हैं। पुलिस तीनों को फरार बता रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

अब LOC यानी लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस को आरोपियों के विदेश भागने की आशंका थी?

LOC क्यों जारी करना पड़ा?

पुलिस को आशंका है कि फरार आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए देश से बाहर जाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से उनके खिलाफ LOC की कार्रवाई की गई है।

LOC जारी होने के बाद अगर आरोपी किसी international airport या immigration point के जरिए विदेश जाने की कोशिश करते हैं तो संबंधित एजेंसियों को alert मिल सकता है और पुलिस को इसकी जानकारी दी जा सकती है।

यानी मामला अब सिर्फ गिरफ्तारी की तलाश तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह भी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि आरोपी देश से बाहर निकलकर जांच से बच न सकें।

लेकिन DSP पर इतनी बड़ी कार्रवाई की नौबत क्यों आई?

इसकी शुरुआत एक जमीन सौदे से हुई।

मामला कटनी के कन्हवारा इलाके की करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन से जुड़ा बताया गया है। खबर के मुताबिक जमीन का खसरा नंबर 2618/1 है।

शिकायत में आरोप है कि जमीन का सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था, लेकिन इसकी registry सिर्फ 18.20 लाख रुपये में कराई गई। इस जमीन की guideline value करीब 82.86 लाख रुपये बताई गई है।

यहीं से सवाल खड़ा हुआ कि अगर सौदा करीब 1.07 करोड़ रुपये का था, तो registry में सिर्फ 18.20 लाख रुपये क्यों दिखाए गए?

1.07 करोड़ के सौदे में 18.20 लाख की registry

जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल 2026 को जमीन की registry हुई थी। दस्तावेजों में 18.20 लाख रुपये की रकम दर्ज की गई।

इसमें करीब 15 लाख रुपये cheque के जरिए और लगभग 3.20 लाख रुपये cash का उल्लेख सामने आया है।

शिकायत में आरोप है कि करीब 92 लाख रुपये की बाकी रकम का भुगतान नहीं किया गया।

अब SIT यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के वास्तविक सौदे, registry में दर्ज रकम और बैंक खातों में हुए transactions के बीच क्या connection था।

Registry वाले दिन खाते में आए 15 लाख

जांच में सामने आया financial trail इस केस का एक अहम हिस्सा है।

जानकारी के मुताबिक 15 अप्रैल को, जिस दिन registry हुई, मारूफ अहमद हनफी के बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा हुए।

बताया गया है कि इसमें 10 लाख रुपये Shine Partners के account से और 5 लाख रुपये क्षितिज राज बारापात्रे के account से आए।

जांच में Shine Partners और क्षितिज राज बारापात्रे के bank accounts में एक ही PAN number जुड़े होने की बात भी सामने आई है।

SIT अब इन transactions को जमीन की registry और पूरे सौदे की बाकी कड़ियों से जोड़कर देख रही है।

जमीन सौदे के पीछे हत्या केस की कड़ी कैसे आई?

यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है।

जमीन का विवाद रमेश लोधी के परिवार से जुड़ा बताया गया है। उनके बेटे आकाश लोधी से जुड़े हत्या केस और जमीन सौदे के बीच भी connection की जांच की जा रही है।

खबर के मुताबिक आकाश लोधी को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे bail मिली। हत्या मामले में chargesheet दाखिल होने की timeline और 90 दिनों के भीतर chargesheet दाखिल न होने से जुड़े default bail के मुद्दे को भी जांच के दौरान देखा गया।

शिकायत में आरोप है कि जमीन सौदे और पुलिस कार्रवाई के बीच संबंध था। हालांकि यह आरोप अभी जांच का हिस्सा है और इसे अदालत से साबित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

नेहा पच्चीसिया, क्षितिज और मारूफ की भूमिका क्या है?

इस मामले में तीन आरोपी हैं।

नेहा पच्चीसिया — निलंबित DSP और इस मामले की मुख्य आरोपी अधिकारियों में से एक। उनके ऊपर पद के कथित दुरुपयोग और जमीन सौदे में दबाव बनाने से जुड़े आरोप हैं।

क्षितिज राज बारापात्रे — प्राप्त जानकारी में उन्हें कथित financier और जमीन transaction से जुड़े व्यक्ति के रूप में बताया गया है।

मारूफ अहमद हनफी — registry में buyer के तौर पर उनका नाम सामने आया है। उनके खाते में 15 लाख रुपये आने की भी जांच की जा रही है।

तीनों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

FIR में कौन-कौन सी धाराएं लगी हैं?

मामले में BNS की धारा 61, 198, 199(B), 308(7) और 318(4) के तहत FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

जांच आगे बढ़ने के बाद Prevention of Corruption Act की धारा 7, 12 और 13 भी जोड़ा गया है।

इससे जांच का दायरा जमीन के पैसों के विवाद से आगे बढ़कर सरकारी पद के कथित misuse और corruption angle तक पहुंच गया है।

SIT अब क्या-क्या खंगाल रही है?

मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय SIT बनाई गई है। इसकी कमान ASP अंजना तिवारी को दी गई है।

SIT जमीन की registry, mutation records, bank transactions, payment details, CCTV footage, statements और digital evidence की जांच कर रही है।

इससे पहले मामले की जांच अलग-अलग स्तर पर हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला आगे बढ़ा और फिर FIR दर्ज हुई। अब SIT अलग-अलग records और statements को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की timeline तैयार कर रही है।

सील CSP ऑफिस क्यों बना जांच का अहम हिस्सा?

नेहा पच्चीसिया से जुड़े CSP office को पहले ही सील किया जा चुका है। वहां मौजूद files, registers और digital records भी जांच के दायरे में हैं।

SIT इन records की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन सौदे और कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े कोई दस्तावेज या electronic evidence वहां मौजूद हैं या नहीं।

फिलहाल किसी खास document या electronic evidence के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस आरोपियों तक पहुंची या नहीं?

फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं।

SIT और पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। 28 अगस्त को टीम मारूफ अहमद हनफी के घर भी पहुंची थी, लेकिन वहां ताला मिला। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई।

यानी पुलिस की कार्रवाई अब सिर्फ FIR दर्ज करने तक नहीं है। आरोपियों की तलाश के साथ-साथ उनके financial और digital links भी खंगाले जा रहे हैं।

29 अगस्त को कोर्ट से नेहा को क्या झटका लगा?

गिरफ्तारी से पहले राहत के लिए नेहा पच्चीसिया ने anticipatory bail की मांग की थी।

29 अगस्त को जिला एवं सत्र न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

इसके बाद गिरफ्तारी का दबाव और बढ़ गया है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और अब LOC जारी होने से विदेश जाने की संभावना पर भी रोक लगाने की कोशिश की गई है।

हालांकि अग्रिम जमानत खारिज होना किसी आरोपी को दोषी साबित नहीं करता। अंतिम स्थिति जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

नेहा पच्चीसिया पर पहले भी उठे थे सवाल

जमीन मामले से पहले भी नेहा पच्चीसिया से जुड़ा एक अलग विवाद सामने आया था। प्राप्त जानकारी में vehicle checking के दौरान एक transporter से 30 हजार रुपये मांगने के आरोप का उल्लेख हुआ है।

इस मामले में एक driver constable के suspension और उनके jurisdiction से कुछ थानों का charge हटाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल इस केस में सबसे बड़ा सवाल नेहा पच्चीसिया और बाकी दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर है।

दूसरी तरफ SIT financial transactions, registry documents, CCTV, statements और digital records की कड़ियां जोड़ रही है। अगर जांच में इन सबके बीच ठोस connection सामने आता है तो मामले का दायरा आगे बढ़ सकता है।

आरोपियों के पास आगे High Court से कानूनी राहत लेने का रास्ता भी हो सकता है। अगर गिरफ्तारी होती है तो उसके बाद regular bail की प्रक्रिया सामने आएगी।

लेकिन इस वक्त सबसे बड़ा अपडेट यही है कि एक निलंबित DSP के खिलाफ मामला अब सिर्फ FIR और departmental action तक नहीं रहा। गिरफ्तारी पर इनाम, anticipatory bail खारिज होने और LOC जारी होने के बाद पुलिस का शिकंजा काफी कस चुका है।

अब नजर इस बात पर है कि नेहा पच्चीसिया और बाकी दोनों आरोपी कब पकड़े जाते हैं और SIT की जांच में जमीन के 1.07 करोड़ रुपये के कथित सौदे, 18.20 लाख की registry और 15 लाख रुपये के bank transaction के बीच अगली बड़ी कड़ी क्या सामने आती है।

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