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मुंबई पुलिस ने लोकभवन के फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों के जरिए रेलवे के इमरजेंसी कोटे से टिकट दिलाने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जांच में देशभर में फैले 200 एजेंटों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने रेलवे के वीआईपी और इमरजेंसी कोटे के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि महाराष्ट्र के लोकभवन के नाम पर फर्जी लेटरहेड, नकली मुहर और राज्यपाल कार्यालय के जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर यात्रियों के वेटिंग टिकट कन्फर्म कराए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह नेटवर्क केवल मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में फैले करीब 200 एजेंटों के जरिए संचालित किया जा रहा था। ये एजेंट यात्रियों को तत्काल और कन्फर्म टिकट दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सबसे पहले यात्रियों के नाम पर वेटिंग टिकट बुक करते थे। इसके बाद महाराष्ट्र लोकभवन के नाम से तैयार किए गए फर्जी पत्र रेलवे अधिकारियों तक पहुंचाए जाते थे। इन पत्रों में राज्यपाल के निजी सहायक के कथित नकली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया जाता था।
इमरजेंसी कोटे के जरिए सीट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों से अतिरिक्त पैसे वसूले जाते थे।
रेलवे सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
फरवरी 2026 में मध्य रेलवे के चीफ कमर्शियल मैनेजर कार्यालय ने लोकभवन से कुछ संदिग्ध पत्रों का सत्यापन मांगा था। जांच के दौरान पता चला कि पत्रों पर किए गए हस्ताक्षर और मुहर फर्जी थे।
लोकभवन प्रशासन ने दस्तावेजों की जांच के बाद मलबार हिल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शत्रुंजय राजकुमार यादव उर्फ अनूप (34) समेत चार दलाल शामिल हैं। वहीं, अमरीश ठक्कर को इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट के जरिए अब तक कितने फर्जी पत्र तैयार किए गए और कितने यात्रियों को टिकट उपलब्ध कराए गए।
किन ट्रेनों में कन्फर्म कराए गए टिकट?
प्रारंभिक जांच में एलटीटी-राजगीर एक्सप्रेस और छपरा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के नाम सामने आए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रेलवे को इस घोटाले से कितना आर्थिक नुकसान हुआ।
यात्रियों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्री केवल अधिकृत रेलवे प्लेटफॉर्म और लाइसेंस प्राप्त एजेंटों के माध्यम से ही टिकट बुक करें। सोशल मीडिया या निजी एजेंटों के जरिए “गारंटीड कन्फर्म टिकट” के दावों से बचें।
मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को सप्लाई करने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार 92 APK फाइलों से ₹63 करोड़ की ठगी हुई, जबकि 967 नई फाइलों से ₹1000 करोड़ तक की संभावित साइबर ठगी की आशंका थी।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर ठगों तक पहुंचाने वाले कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी की बनाई गई APK फाइलों का इस्तेमाल कर अब तक करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी की जा चुकी है। जांच के दौरान आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें भी बरामद हुई हैं। पुलिस का कहना है कि यदि इनका इस्तेमाल हो जाता, तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साइबर फ्रॉड मामले की जांच के दौरान सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
कैसे खुला पूरे नेटवर्क का राज?
इस मामले की शुरुआत दक्षिण मुंबई के एक व्यक्ति के साथ हुई साइबर ठगी से हुई। पीड़ित को महानगर गैस (MGL) का बिल भरने के नाम पर एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक कर APK फाइल डाउनलोड करते ही उसके बैंक खाते से करीब ₹70 हजार निकाल लिए गए।
मामले की जांच करते-करते मुंबई पुलिस सीधे उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी APK फाइलें तैयार करता था। इसी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
मुंबई पुलिस की डीसीपी राजसुधा आर. के अनुसार गिरफ्तार आरोपी केवल फर्जी APK फाइलें ही नहीं बनाता था, बल्कि साइबर ठगों को संभावित शिकारों का डेटा भी उपलब्ध कराता था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 37,200 लोगों का बैंकिंग और व्यक्तिगत डेटा भी बरामद किया है। इस डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
मुंबई पुलिस के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
92 फर्जी APK फाइलें देशभर के साइबर अपराधियों को बेची गईं।
इनसे जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की साइबर ठगी सामने आई।
देशभर से 2,993 शिकायतें दर्ज हुईं।
इनमें 512 शिकायतें महाराष्ट्र और मुंबई की हैं।
आरोपी के पास से 967 नई APK फाइलें बरामद हुईं, जिनके इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी की आशंका जताई गई है।
पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं।
जांच के अनुसार आरोपी प्रत्येक APK फाइल ₹15,000 से ₹20,000 में बेचता था। इन फाइलों की वैधता लगभग 40 से 45 दिन होती थी। समय पूरा होने पर साइबर अपराधियों को नई APK फाइल खरीदनी पड़ती थी।
पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
कैसे काम करती हैं ये फर्जी APK फाइलें?
साइबर अपराधी लोगों को गैस बिल, RTO चालान, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक वेरिफिकेशन या अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।
जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करता, उसके मोबाइल की कई महत्वपूर्ण अनुमतियां ठगों के हाथ में चली जाती थीं। इसके बाद बैंकिंग जानकारी, OTP और अन्य संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग कर खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे।
कौन है गिरफ्तार आरोपी?
मुंबई पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान एस.के. मंडल के रूप में हुई है। उसे पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह का रहने वाला है।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने साइंस से पढ़ाई की थी और सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कोडिंग सीखी। इसके बाद उसने फर्जी APK फाइलें तैयार कर साइबर अपराधियों को बेचना शुरू कर दिया।
मुंबई पुलिस अब उन साइबर अपराधियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस आरोपी से APK फाइलें खरीदी थीं। जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल, हार्ड डिस्क और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य राज्यों या अंतरराज्यीय गिरोहों के लिंक सामने आते हैं, तो संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आम लोगों के लिए जरूरी सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड न करें। Android फोन में केवल Google Play Store जैसे अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। गैस, बैंक, बिजली, KYC या सरकारी विभाग के नाम पर आए किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि जरूर करें।
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairs – https://i4c.mha.gov.in/
FAQ
Q1. मुंबई पुलिस ने किसे गिरफ्तार किया है?
मुंबई पुलिस ने फर्जी APK फाइलें बनाकर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित मास्टरमाइंड एस.के. मंडल को गिरफ्तार किया है।
Q2. APK फ्रॉड क्या होता है?
यह ऐसा साइबर फ्रॉड है जिसमें फर्जी Android ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल और बैंकिंग डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई जाती है।
Q3. अब तक कितनी साइबर ठगी सामने आई है?
मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपी की APK फाइलों से जुड़े मामलों में करीब ₹63 करोड़ की ठगी सामने आई है। पुलिस ने यह भी कहा है कि बरामद 967 नई फाइलों का इस्तेमाल होता तो संभावित ठगी का आंकड़ा ₹1000 करोड़ तक पहुंच सकता था।
Q4. इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करें, किसी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें और बैंकिंग या KYC संबंधी संदेशों की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
केंद्र के केस वापसी के आश्वासन के बावजूद CJP प्रदर्शनकारियों को मुंबई पुलिस की ओर से नोटिस मिलने पर विवाद बढ़ गया है। पुलिस ने जांच जारी रखने की वजह स्पष्ट की है।
मुंबई: दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच प्रदर्शन समाप्त कराने के लिए हुए समझौते के बाद उम्मीद थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों में राहत मिलेगी। लेकिन मुंबई में कई प्रदर्शनकारियों को अब भी पुलिस नोटिस मिलने और बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बीच मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसे जांच रोकने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है, इसलिए कानूनी प्रक्रिया जारी है। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा कि 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं किया गया है।
आखिर नोटिस क्यों मिल रहे हैं?
मुंबई पुलिस के अनुसार, पिछले सप्ताह CJP समर्थित प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR की जांच कानून के मुताबिक जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सक्षम प्राधिकारी की ओर से लिखित निर्देश नहीं मिलते, जांच बीच में नहीं रोकी जा सकती। इसलिए जिन लोगों के बयान दर्ज होने बाकी हैं, उन्हें प्रक्रिया के तहत बुलाया जा रहा है।
पुलिस ने क्या सफाई दी?
मुंबई पुलिस ने सोमवार को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि केस वापसी के आश्वासन के बाद भी नए नोटिस भेजे जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, 26 जुलाई के बाद कोई नया नोटिस जारी नहीं हुआ और जिन नोटिसों की चर्चा हो रही है, वे पहले ही जारी किए जा चुके थे।
25 जुलाई को केंद्र सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्रियों ने घोषणा की थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसी घोषणा के बाद CJP ने अपना आंदोलन वापस लेने का फैसला किया था।
The bjp regime MUST withdraw all the notices, FIRs and stop intimidation of students.
For all those who have received these notices, we will stand with you, just like we did during the protests.
We have begun our legal work and will fight pro bono anyway, for all those who are…
CJP का आरोप है कि समझौते के बाद भी कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों को नोटिस मिल रहे हैं और पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार अपने आश्वासन के अनुरूप जल्द लिखित कार्रवाई नहीं करती, तो वह दोबारा आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा।
कानूनी प्रक्रिया में कहां है अड़चन?
कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी FIR को वापस लेने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक घोषणा से पूरी नहीं होती। इसके लिए प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। कई मामलों में जांच पूरी होने, संबंधित प्राधिकरण की सिफारिश और अदालत की प्रक्रिया भी आवश्यक हो सकती है। इसी कारण घोषणा और वास्तविक केस वापसी के बीच समय लग सकता है।
जिन छात्रों और युवाओं को नोटिस मिले हैं, उनका कहना है कि सरकार के आश्वासन के बाद उन्हें लगा था कि पुलिस कार्रवाई रुक जाएगी। लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए बुलाए जाने से उनके बीच असमंजस बना हुआ है। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि यह नियमित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका अंतिम निर्णय सरकार एवं न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल दो बातें साफ हैं। पहली, केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का सार्वजनिक आश्वासन दिया था। दूसरी, मुंबई पुलिस का कहना है कि उसे जांच रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है और 26 जुलाई के बाद नए नोटिस भी जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में आगे की स्थिति सरकार की औपचारिक कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
MHT-CET परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद महाराष्ट्र CET Cell ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस से जांच की मांग की है। जानिए पूरा मामला और छात्रों पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
मुंबई: क्या MHT-CET परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी? सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो के बाद यह सवाल कई छात्रों और अभिभावकों के मन में उठने लगा है। हालांकि इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) Cell ने पूरे मामले की जांच के लिए मुंबई के आजाद मैदान पुलिस स्टेशन और महाराष्ट्र साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
परीक्षा प्राधिकरण का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित सामग्री छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम फैला सकती है तथा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए तथ्यों की जांच आवश्यक है।
CET Cell के अनुसार सोशल मीडिया पर MHT-CET परीक्षा से जुड़े दो वीडियो वायरल हुए हैं। इन वीडियो में परीक्षा की पारदर्शिता और संचालन को लेकर कई दावे किए गए हैं।
हालांकि प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस और साइबर पुलिस से अनुरोध किया गया है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार का कानूनी उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायत में CET Cell ने कहा है कि वायरल वीडियो तैयार करने, अपलोड करने और प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि साझा की गई जानकारी तथ्यात्मक है या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
छात्रों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है।
अब तक CET Cell ने परीक्षा रद्द करने, परिणाम रोकने या परीक्षा प्रक्रिया में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की है।
यह कार्रवाई केवल सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सत्यता की जांच के लिए की गई है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी जाती है।
अब मामले की जांच मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र साइबर पुलिस करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
यदि वायरल दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी, और यदि दावे भ्रामक पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जा सकते हैं।
MHT-CET से जुड़े वायरल वीडियो की सच्चाई अभी जांच के दायरे में है। ऐसे में किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय छात्रों और अभिभावकों को केवल महाराष्ट्र CET Cell और संबंधित सरकारी एजेंसियों की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।
मुंबई की वर्सोवा खाड़ी में मानसून मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के उल्लंघन के आरोप में तीन ट्रॉलरों पर संयुक्त कार्रवाई की गई।
मुंबई: वर्सोवा खाड़ी में मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के बावजूद मछली पकड़ने के आरोप में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई के दौरान सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) और वर्सोवा के लाइसेंस अधिकारी ने संयुक्त रूप से तीनों नौकाओं की जांच की। जांच के बाद मामले में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य अधिनियम, 1981 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
20 जुलाई 2026 को वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर वर्सोवा खाड़ी के बाहर तीन ट्रॉलर लंगर डालकर खड़े होने की जानकारी मिली थी। सूचना के बाद अधिकारियों ने रात के समय मौके पर जाकर जांच की। इन नौकाओं के मछली पकड़कर लौटने और मछली उतारने की तैयारी में होने का संदेह जताया गया।
जानकारी के मुताबिक, तीन नौकाओं के वर्सोवा खाड़ी के बाहर खड़े होने की सूचना मिलने के बाद वर्सोवा जेटी पर तैनात लाइसेंस अधिकारी और सुरक्षाकर्मियों ने रातभर गश्त की। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित नौकाएं जेटी पर आती हैं या नहीं।
हालांकि, उस रात तेज हवा और भारी बारिश के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। बताया गया कि संबंधित नौकाएं जेटी पर न रुककर खाड़ी के अंदर की ओर चली गईं।
रात 3 बजे के आसपास अंधेरे में नौकाएं नजरों से ओझल
जानकारी के अनुसार, संबंधित नौकाएं रात करीब 3 बजे खाड़ी के अंदर की दिशा में चली गईं। तेज बारिश, अंधेरे और खराब मौसम के कारण अधिकारियों को यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका कि नौकाएं आगे किस दिशा में गईं।
इसके अलावा, वर्सोवा में उस समय गश्ती नौका उपलब्ध नहीं थी। इसलिए इतनी रात में संबंधित नौकाओं का पीछा कर पाना भी संभव नहीं था।
अगली सुबह संबंधित नौकाओं की तलाश और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (MMB) और वर्सोवा के लाइसेंस अधिकारी ने संयुक्त रूप से तीनों नौकाओं की जांच की।
जांच के दौरान अधिकारियों के मुताबिक, तीनों नौकाओं द्वारा मानसून के दौरान लागू मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी का उल्लंघन किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा, कुछ नौकाओं पर आवश्यक कानूनी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।
महाराष्ट्र में समुद्री मछली पकड़ने से जुड़े नियमों और प्रतिबंधों का नियमन महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत किया जाता है।
जांच के दायरे में आईं तीन नौकाएं
1. अमरनाथ (AMARNATH)
पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2615
पंजीकरण की तारीख: 4 जनवरी 2019
मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: न्यू फेरी व्हार्फ (New Ferrywharf)
2. जय बाबा अमरनाथ (JAY BABA AMARNATH)
पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2683
पंजीकरण की तारीख: 13 फरवरी 2019
मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: ससून डॉक (Sassoon Dock)
3. जरीमरी तिसाई (JARI MARI TISAI)
पंजीकरण नंबर: IND-MH-7-MM-2170
पंजीकरण की तारीख: 19 दिसंबर 2019
मूल मछली पकड़ने का बंदरगाह: न्यू फेरी व्हार्फ (New Ferrywharf)
महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम के तहत कार्रवाई
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित तीनों नौकाओं के खिलाफ महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। दंड या अन्य अंतिम कार्रवाई के संबंध में निर्णय संबंधित विभागीय और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।
वर्सोवा खाड़ी में मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी के उल्लंघन के आरोप में तीन ट्रॉलरों की जांच की गई। खराब मौसम और रात के अंधेरे के कारण शुरुआती निगरानी के दौरान नौकाओं का पीछा नहीं किया जा सका। हालांकि, अगले दिन सागरी पुलिस, महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड और लाइसेंस अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई कर तीनों नौकाओं की जांच की। मामले में संबंधित कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर लगी पाबंदी का उल्लंघन किए जाने का मामला सामने आया है। कुछ नौकाओं पर आवश्यक कानूनी दस्तावेज नहीं होने की जानकारी भी दी गई है।
किस कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है?
मामले में महाराष्ट्र समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
मुंबई के दादर में वायरल वीडियो को लेकर पुलिस अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप लगा। मुंबई पुलिस ने आरोपों को खारिज कर सफाई दी।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई के दादर में छात्र प्रदर्शन के दौरान एक वायरल वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस विवादों में है। वीडियो के आधार पर एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी को कथित तौर पर गलत तरीके से पकड़ने और घसीटने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, मुंबई पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई।
वायरल वीडियो को लेकर मुंबई पुलिस पर उठे सवाल
दादर में छात्र प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। वीडियो में एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों के बीच एक महिला को पकड़ता हुआ दिखाई देता है। विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस दृश्य को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी के साथ अनुचित तरीके से व्यवहार किया और उसे पकड़कर घसीटा। हालांकि, वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों और घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
वर्षा गायकवाड़ और रोहित पवार ने कार्रवाई की मांग की
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने वीडियो साझा करते हुए पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए पूछा कि एक पुरुष पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारी के साथ इस तरह क्यों पेश आया और महिला पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई।
Ma’am, please note, this is being irresponsibly misinterpreted- the official, while managing law & order there, was trying to hold on to a male protestor when a lady unknowingly stepped in between, while he was looking away- Being a public figure, you are expected to verify… https://t.co/xwVqirsYf1
— मुंबई पोलीस Mumbai Police (@MumbaiPolice) July 24, 2026
एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने भी पुलिस के रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिसकर्मी का उद्देश्य किसी पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ना था और उसे बाद में पता चला कि बीच में महिला आ गई है, तो उसे अपना हाथ तुरंत पीछे हटा लेना चाहिए था। इस मामले में उन्होंने पुलिस अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए।
मुंबई पुलिस ने आरोपों को किया खारिज
विवाद बढ़ने के बाद मुंबई पुलिस ने वायरल वीडियो को लेकर अपना पक्ष रखा। पुलिस के मुताबिक, वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और उसी दौरान महिला प्रदर्शनकारी अचानक बीच में आ गई।
मुंबई पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो की जांच की और उन्हें अधिकारी के व्यवहार में कोई अनुचित हरकत नहीं मिली। पुलिस ने आरोपों को गलत बताया है।
वीडियो को लेकर जारी है विवाद
पुलिस की सफाई के बावजूद वीडियो को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वीडियो में अधिकारी को महिला की मौजूदगी का पता चलने के बाद भी उसे पकड़े हुए देखा जा सकता है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि वीडियो को पूरे घटनाक्रम के संदर्भ से अलग करके देखा जा रहा है।
इसलिए फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्य और पुलिस के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बीच स्पष्ट मतभेद नजर आ रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर महिला प्रदर्शनकारी के साथ कथित बदसलूकी का आरोप अभी आरोप के स्तर पर है और इस संबंध में किसी न्यायिक निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब छात्र प्रदर्शनों से जुड़े एक अन्य वायरल वीडियो को लेकर भी मुंबई पुलिस की आलोचना हुई थी। उस मामले में एक पुलिसकर्मी पर प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर ड्रग्स से जुड़े झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगा था। विवाद के बाद पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी और मामले में जांच शुरू की गई।
दादर के इस नए मामले में मुंबई पुलिस ने फिलहाल वायरल वीडियो की अपनी जांच के आधार पर अधिकारी के खिलाफ अनुचित आचरण के आरोपों को खारिज किया है। मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर बहस जारी है।
दादर के छात्र प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां विपक्षी नेताओं ने अधिकारी पर महिला प्रदर्शनकारी से बदसलूकी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं मुंबई पुलिस ने कहा है कि अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच विवाद जारी है।
क्या मुंबई पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है?
इस मामले में उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच के बाद अधिकारी के आचरण में कोई अनुचित हरकत नहीं पाए जाने की बात कही है। अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल वीडियो में क्या आरोप लगाया गया है?
वीडियो के आधार पर आरोप लगाया गया कि एक सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस अधिकारी ने महिला प्रदर्शनकारी को गलत तरीके से पकड़ा और घसीटा। मुंबई पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया है।
मुंबई पुलिस ने क्या सफाई दी?
पुलिस के मुताबिक अधिकारी एक पुरुष प्रदर्शनकारी को पकड़ने की कोशिश कर रहा था और महिला अचानक बीच में आ गई थी
आयशा खान ने दावा किया कि मुंबई पुलिस ने उन्हें बिना वजह हिरासत में लिया और जबरदस्ती पुलिस वैन में खींचा। जानिए पूरा मामला।
मुंबई: एक्ट्रेस और धुरंधर फेम आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयशा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो शेयर कर दावा किया कि उन्हें, उनके भाई और कुछ दोस्तों को बिना किसी स्पष्ट वजह के हिरासत में लिया गया। एक्ट्रेस के मुताबिक, वे सड़क किनारे शांतिपूर्वक खड़ी थीं और किसी तरह का प्रदर्शन या हंगामा नहीं कर रही थीं।
आयशा खान ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में बैठाया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आयशा खान ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर कई वीडियो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने हिरासत में लिए जाने की पूरी घटना के बारे में बताया। एक वीडियो में एक्ट्रेस काफी परेशान और घबराई हुई नजर आ रही हैं।
आयशा का दावा है कि उनके हाथ डर और गुस्से की वजह से कांप रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो कोई विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और न ही कोई हंगामा किया था। उनके मुताबिक, वे केवल सड़क किनारे खड़ी थीं।
एक्ट्रेस ने दावा किया कि उनके भाई और कुछ पुरुष दोस्तों को हिरासत में लिए जाने के बाद वह वहां मौजूद थीं। इसके बाद उन्हें भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
एक्ट्रेस ने दावा किया कि वह, उनका भाई और उनके दोस्त शांतिपूर्वक खड़े थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो नारे लगाए और न ही कोई गैर-कानूनी गतिविधि की।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए आयशा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
पुलिस वैन में मौजूद छात्र ने भी बताई परेशानी
आयशा द्वारा शेयर किए गए एक अन्य वीडियो में पुलिस वैन में मौजूद एक छात्र अपनी परेशानी बताते हुए नजर आया।
छात्र ने कहा कि उसका मैथ्स का प्रैक्टिकल एग्जाम था और उसे बिना किसी गलती के हिरासत में लिए जाने की चिंता थी। उसने आशंका जताई कि अगर वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पाया, तो इसका असर उसकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।
वीडियो में छात्र की चिंता साफ नजर आ रही थी। हालांकि, छात्र की पहचान और हिरासत में लिए जाने की आधिकारिक वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
आयशा ने पुलिस से पूछा- हमें कहां ले जाया जा रहा है?
एक अन्य क्लिप में आयशा खान पुलिस वैन में मौजूद पुलिसकर्मियों से बार-बार पूछती दिखाई दीं कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है।
आयशा का दावा है कि उनके सवालों का उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इस वजह से उनकी चिंता और बढ़ गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पूरी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।
इस वीडियो के साथ एक्ट्रेस ने सवाल उठाया कि अगर उन्होंने कोई हंगामा या बहस नहीं की थी, तो उन्हें इस तरह अंदर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल किया कि केवल सड़क पर खड़े होने के लिए उन्हें हिरासत में क्यों लिया गया।
आयशा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और दावा किया कि उन्होंने किसी तरह का विरोध या गैर-कानूनी काम नहीं किया था।
पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल इस मामले में आयशा खान की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा शेयर किए गए वीडियो ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का मुख्य आधार हैं। मुंबई पुलिस की ओर से हिरासत की वजह, कार्रवाई और पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर बिना स्पष्ट वजह हिरासत में लेने और जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाने का आरोप लगाया है। एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर सवाल उठाए हैं। फिलहाल पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
FAQ
क्या आयशा खान को मुंबई पुलिस ने हिरासत में लिया था?
आयशा खान ने सोशल मीडिया वीडियो के जरिए दावा किया है कि उन्हें, उनके भाई और दोस्तों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस की ओर से इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं है।
आयशा खान ने मुंबई पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
आयशा खान ने आरोप लगाया कि वह शांतिपूर्वक सड़क किनारे खड़ी थीं, फिर भी उन्हें हिरासत में लिया गया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरदस्ती पुलिस वैन में ले जाया।
आयशा खान को किस पुलिस स्टेशन ले जाया गया?
आयशा खान द्वारा शेयर किए गए वीडियो के अनुसार, उन्हें दादर से वर्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
Mumbai Protest Today: शिवाजी पार्क में प्रदर्शन जारी, चेंबूर में भी विरोध की खबर। मुंबई पुलिस ने कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई और निषेधाज्ञा लागू की।
मुंबई: CJP आंदोलन के समर्थन में मुंबई में भी विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। 22 जुलाई को शिवाजी पार्क में छात्रों और समर्थकों की भीड़ जुटी है, जबकि चेंबूर में भी पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन हुआ। पुलिस ने दक्षिण मुंबई सहित कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई है। 23 जुलाई से 6 अगस्त तक पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध का आदेश भी जारी किया गया है।
मुंबई में आज, 22 जुलाई 2026, CJP आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस कार्रवाई के विरोध में मुंबई के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार, शिवाजी पार्क, दादर और चेंबूर इस पूरे घटनाक्रम के प्रमुख केंद्र रहे हैं। वहीं, दक्षिण मुंबई में आजाद मैदान, CSMT और BMC मुख्यालय के आसपास पुलिस की भारी तैनाती की गई है।
Mumbai Protest Today: आज मुंबई में कहां-कहां प्रदर्शन ?
शिवाजी पार्क, दादर
आज के लिए सबसे स्पष्ट और प्रमुख प्रदर्शन स्थल शिवाजी पार्क रहा। खबर के मुताबिक, मंगलवार शाम यहां 500 से अधिक युवा और छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए। बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी यहां मौजूद रहे और शिक्षा व्यवस्था तथा CJP आंदोलन से जुड़े मुद्दों को लेकर नारे लगाए। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें थोड़े समय के लिए प्रदर्शन की अनुमति दी गई।
चेंबूर
चेंबूर के शिवाजी नगर/शिद्धार्थ कॉलोनी क्षेत्र में भी दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन हुए। यहां के स्थानीय निवासियों ने दिल्ली में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन किया।
आजाद मैदान और दक्षिण मुंबई
आजाद मैदान, CSMT और BMC मुख्यालय के आसपास मुंबई पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है। यह तैनाती संभावित विरोध प्रदर्शनों और भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए की गई है। इन इलाकों को मुख्य रूप से संवेदनशील या संभावित सभा स्थलों के रूप में बताया जाता है। इसलिए पुलिस ने दक्षिण मुंबई के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और पुलिस मार्च भी किए।
मुंबई पुलिस ने सुरक्षा क्यों बढ़ाई?
यह पूरा घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्च से जुड़ा हुआ है। CJP आंदोलन के समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
20 जुलाई को दिल्ली में CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद मुंबई सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हुए। इसके बाद मुंबई पुलिस ने संभावित सभाओं को रोकने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है।
1,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को नोटिस, कई FIR दर्ज
मुंबई में पिछले दिनों हुए प्रदर्शनों को लेकर पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शनिवार, रविवार और सोमवार को आजाद मैदान, शिवाजी पार्क और चैत्यभूमि में हुए प्रदर्शनों के संबंध में करीब 1,000 लोगों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा और नोटिस जारी किए गए। इस सिलसिले में लगभग 12 FIR दर्ज की गई हैं।
मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। पुलिस के अनुसार, यह आदेश शांति भंग और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए लागू किया गया है।
इसका मतलब यह है कि इस अवधि में किसी भी सार्वजनिक सभा या प्रदर्शन के लिए लागू स्थानीय अनुमति और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से पहले नागरिकों को स्थानीय पुलिस और प्रशासन के आधिकारिक निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए।
आज मुंबई में पुलिस की तैनाती कहां-कहां?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस की विशेष मौजूदगी और निगरानी इन प्रमुख क्षेत्रों में रही:
शिवाजी पार्क और दादर
चेंबूर के कुछ इलाके
आजाद मैदान
CSMT
BMC मुख्यालय के आसपास
दक्षिण मुंबई के अन्य संवेदनशील क्षेत्र
हालांकि, यह सूची पुलिस तैनाती और रिपोर्ट किए गए प्रदर्शन स्थलों पर आधारित है। इसे मुंबई में आज होने वाले सभी प्रदर्शन स्थलों की आधिकारिक और पूर्ण सूची नहीं माना जाना चाहिए।
मुंबई में विरोध प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर कई संदेश और पोस्ट तेजी से साझा किए जा रहे हैं। इनमें शिवाजी पार्क, चेंबूर और अन्य स्थानों के नाम शामिल हैं। लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट में दी गई जानकारी हमेशा आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं होती।
इसलिए नागरिकों को किसी भी वायरल पोस्ट के आधार पर किसी स्थान पर पहुंचने के बजाय मुंबई पुलिस, स्थानीय प्रशासन या विश्वसनीय समाचार स्रोतों से ताजा जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
Mumbai Protest Today के तहत 22 जुलाई को सबसे स्पष्ट रूप से सामने आया प्रमुख प्रदर्शन शिवाजी पार्क, दादर में रहा, जबकि चेंबूर में भी विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट सामने आई है। दूसरी ओर, आजाद मैदान, CSMT और BMC मुख्यालय सहित दक्षिण मुंबई के महत्वपूर्ण इलाकों में पुलिस की भारी तैनाती की गई है।
मुंबई पुलिस ने संभावित सभाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई है। 23 जुलाई से 6 अगस्त तक पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध लागू होने के कारण आने वाले दिनों में विरोध प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई पर नजर बनी रहेगी।
Q. आज मुंबई में सबसे प्रमुख प्रदर्शन कहां हुआ? शिवाजी पार्क, दादर में प्रदर्शन प्रमुख रूप से सामने आया है। इसके साथ ही, चेंबूर में भी विरोध प्रदर्शन की रिपोर्ट है।
Q. क्या आज मुंबई में सभी प्रदर्शन स्थलों की आधिकारिक सूची जारी हुई है? उपलब्ध जानकारी में ऐसी कोई पूर्ण और आधिकारिक शहरव्यापी सूची नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर प्रसारित स्थानों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
Q. मुंबई में निषेधाज्ञा कब से लागू है? पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक लागू किया गया है
मुंबई के मलाड में 3,135 वर्गफुट पार्किंग एरिया को ऑफिस यूनिट बताकर मॉर्गेज कराने के आरोप में डेवलपर समेत 5 पर FIR हुई है।
मुंबई: मलाड ईस्ट के Atharva Landmark CHS में कथित तौर पर 3,135 वर्गफुट के कॉमन पार्किंग एरिया को कमर्शियल ऑफिस यूनिट के रूप में दिखाकर मॉर्गेज कराने के मामले में डिंडोशी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में डेवलपर दीपक शाह और Khush Housing Finance Pvt. Ltd. से जुड़े अधिकारियों के नाम शामिल हैं। पुलिस दस्तावेजों की जांच कर रही है।
मलाड में पार्किंग एरिया को ऑफिस यूनिट बताने का आरोप
मुंबई के मलाड ईस्ट में एक हाउसिंग सोसाइटी के कॉमन पार्किंग एरिया को कथित रूप से कमर्शियल ऑफिस यूनिट के रूप में दिखाकर वित्तीय लेनदेन में इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। Atharva Landmark CHS के निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी के दूसरे पोडियम पर मौजूद करीब 3,135 वर्गफुट के पार्किंग क्षेत्र को दस्तावेजों में तीन कथित ऑफिस यूनिट—201, 202 और 203—के रूप में दिखाया गया।
इस मामले में दिंडोशी पुलिस ने अमित मागिया, किरण मागिया, कल्पेश डेडिया, हर्षिता कनोजिया और डेवलपर दीपक शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपों में कथित धोखाधड़ी, जालसाजी और cheating शामिल हैं। मामले की जांच अभी जारी है।
सोसाइटी के अनुसार, पार्किंग को लोन की सुरक्षा के तौर पर रखा गया
सोसाइटी के सदस्यों के अनुसार, वर्ष 2011 से 2021 के बीच कई फ्लैट खरीदारों ने अपने घरों के साथ बेसमेंट, ग्राउंड, पहले और दूसरे पोडियम लेवल पर पार्किंग स्पेस खरीदे थे।
बाद में निवासियों को कथित तौर पर पता चला कि दूसरे पोडियम का पार्किंग क्षेत्र Khush Housing Finance Pvt. Ltd. (KHFL) के पास डेवलपर के लोन के लिए सुरक्षा के तौर पर मॉर्गेज किया गया था।
इसके बाद वित्तीय संस्था ने SARFAESI Act के तहत कथित तीन “ऑफिस यूनिट्स” पर कब्जे की कार्रवाई शुरू की। सोसाइटी का दावा है कि ये ऑफिस यूनिट वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं और संबंधित क्षेत्र स्वीकृत योजना के अनुसार पार्किंग के लिए निर्धारित है।
दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियों का आरोप
सोसाइटी ने Sub-Registrar कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों और अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के बीच कथित अंतर होने का दावा किया है।
सोसाइटी के आरोपों के अनुसार, दस्तावेजों में कथित तौर पर:
मॉर्गेज की तारीखों में अंतर था
खाली स्थानों को बाद में भरे जाने का संदेह है
कुछ दस्तावेजों में स्टांप से जुड़ी विसंगतियां थीं
हस्तलिखित बदलाव किए गए
संपत्ति का विवरण बदला हुआ दिखाई दिया
प्रॉपर्टी शेड्यूल में असंगतियां थीं
कथित रूप से हस्ताक्षरों में छेड़छाड़ की गई
तारीखों में कथित बदलाव कर मॉर्गेज को लोन जारी होने से पहले का दिखाने का आरोप है
सोसाइटी ने यह भी दावा किया कि कुछ दस्तावेजों में 23वीं और 24वीं मंजिल का संदर्भ है, जबकि उसके अनुसार BMC की स्वीकृत योजना में इमारत को 22वीं मंजिल तक मंजूरी मिली थी।
इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कैलाशनाथ डी यादव (बाएं), सचिव, और जगदीश राजपोपत, अध्यक्ष, अथर्व लैंडमार्क
सोसाइटी सचिव ने क्या कहा?
Atharva Landmark CHSL के सचिव कैलाशनाथ डी. यादव के अनुसार, स्वीकृत योजनाओं के मुताबिक दूसरा पोडियम केवल पार्किंग के लिए है। उनका आरोप है कि इसी क्षेत्र को वित्तीय संस्था (बैंक) के सामने ऑफिस यूनिट के रूप में पेश किया गया और डेवलपर के लोन के लिए मॉर्गेज किया गया।
सोसाइटी का यह भी कहना है कि उसे SARFAESI Act के तहत कथित कार्रवाई की कोई उचित नोटिस नहीं दी गई, जिसके बाद निवासियों में चिंता पैदा हो गई।
मामला DRT और Bombay High Court तक पहुंचा
विवाद अब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं है। Atharva Landmark CHSL और Khush Housing Finance के बीच SARFAESI कार्रवाई को लेकर मामला Debt Recovery Tribunal और Debt Recovery Appellate Tribunal के समक्ष भी चल रहा है।
Bombay High Court ने 25 मार्च 2026 को मामले में सीमित राहत देते हुए विवादित secured assets का physical possession लेने की कार्रवाई को 2 अप्रैल 2026 तक स्थगित किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसने मामले के merits पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और संबंधित पक्षों को वैधानिक अपील के माध्यम से DRAT में जाने का निर्देश दिया था।
बाद में DRAT से जुड़े घटनाक्रम में KHFL की कब्जे की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, विवादित संपत्तियों में दो आवासीय फ्लैट और एक पार्किंग पोडियम शामिल था।
KHFL ने आरोपों को बताया निराधार
Khush Housing Finance ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे शिकायत की विस्तृत जानकारी और दस्तावेजों की जांच करने का अवसर अभी नहीं मिला है।
वित्तीय संस्था के अनुसार, उसने डेवलपर को लोन दिया था और डेवलपर ने फ्लैट्स, ऑफिस और प्रोजेक्ट कैश फ्लो को सुरक्षा के रूप में मॉर्गेज किया था। KHFL का कहना है कि डेवलपर के डिफॉल्ट के बाद SARFAESI Act के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई शुरू की गई।
KHFL ने अपने खिलाफ लगाए गए जालसाजी के आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताया है। कंपनी का दावा है कि संभव है कि डेवलपर ने सोसाइटी और वित्तीय संस्था—दोनों को गुमराह किया हो। कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत उसकी वैध वसूली कार्रवाई को रोकने के लिए की गई है।
पुलिस जांच में अब किन बिंदुओं पर फोकस?
पुलिस के सामने अब मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी:
विवादित पार्किंग क्षेत्र का वास्तविक कानूनी और स्वीकृत उपयोग
कथित ऑफिस यूनिट्स का अस्तित्व और वैधता
मॉर्गेज दस्तावेजों की वास्तविकता
दस्तावेजों में कथित बदलाव और तारीखों की जांच
कथित हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच
डेवलपर और वित्तीय संस्था के अधिकारियों की भूमिका
लोन और मॉर्गेज प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए रिकॉर्ड
पुलिस अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है और विवादित संपत्ति के मॉर्गेज तथा संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच की जाएगी।
इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है, लेकिन अभी किसी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है। दस्तावेजों में कथित जालसाजी, पार्किंग क्षेत्र के कथित गलत इस्तेमाल और मॉर्गेज प्रक्रिया में किसी भी पक्ष की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
विवादित संपत्तियों को लेकर कानूनी कार्यवाही DRT/DRAT और अदालतों के समक्ष जारी है। Bombay High Court ने भी अपने 25 मार्च 2026 के आदेश में मामले के merits पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की थी।
मलाड के Atharva Landmark CHS का मामला एक ओर कथित दस्तावेजी हेरफेर और कॉमन पार्किंग एरिया के इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ा है, तो दूसरी ओर डेवलपर के लोन और वित्तीय संस्था की SARFAESI कार्रवाई से भी संबंधित है। अब पुलिस जांच और चल रही न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि विवादित दस्तावेज कैसे तैयार हुए और इस पूरे मामले में किसकी वास्तविक भूमिका थी।
क्या इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है?
हां। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डिंडोशी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामले में डेवलपर दीपक शाह और चार अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
विवादित संपत्ति क्या है?
सोसाइटी के अनुसार, करीब 3,135 वर्गफुट का दूसरा-पोडियम क्षेत्र कॉमन पार्किंग के लिए निर्धारित है, जबकि आरोप है कि इसे तीन कथित ऑफिस यूनिट्स के रूप में दिखाया गया।
क्या आरोपियों को दोषी ठहराया गया है?
नहीं। मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया में है। अभी अदालत ने किसी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है।
SARFAESI Act क्या है?
SARFAESI Act के तहत पात्र बैंक और वित्तीय संस्थाएं डिफॉल्ट किए गए secured loans की वसूली के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत secured assets पर कार्रवाई कर सकती हैं।
मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त तक जमावबंदी लागू की है। सार्वजनिक जगहों पर 5 या ज्यादा लोगों के जमावड़े, जुलूस और लाउडस्पीकर पर रोक रहेगी।
मुंबई: मुंबई पुलिस ने 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक शहर में जमावबंदी लागू करने का आदेश जारी किया है। इस अवधि में सार्वजनिक जगहों पर पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने और कुछ अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस के मुताबिक, यह कदम शांति भंग और सार्वजनिक व्यवस्था में खलल की आशंका को देखते हुए उठाया गया है।
मुंबई में 23 जुलाई से लागू होगी जमावबंदी
मुंबई पुलिस ने सोमवार, 20 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया। यह आदेश मुंबई पुलिस आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों में 23 जुलाई को रात 12:01 बजे से 6 अगस्त 2026 की आधी रात तक लागू रहेगा।
आदेश पुलिस उपायुक्त (ऑपरेशन्स) अकबर पठान द्वारा जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी में शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
किन गतिविधियों पर रहेगी रोक?
जमावबंदी के दौरान सार्वजनिक जगहों पर पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक रहेगी। इसके अलावा आदेश के तहत निम्न गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है:
जुलूस या प्रोसेशन निकालना
लाउडस्पीकर और आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों का इस्तेमाल
म्यूजिकल बैंड का उपयोग
जुलूस के दौरान पटाखे फोड़ना
ऐसी अन्य गतिविधियां जिनसे सार्वजनिक शांति और व्यवस्था प्रभावित हो सकती है
पुलिस के मुताबिक, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी स्थिति को रोकना और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इन आयोजनों को दी गई छूट
आदेश में कुछ सामाजिक, धार्मिक और आधिकारिक गतिविधियों को छूट दी गई है। इनमें शादी-ब्याह और उससे जुड़े कार्यक्रम, अंतिम संस्कार के लिए होने वाला जमावड़ा और अंतिम संस्कार से संबंधित जुलूस शामिल हैं।
इसके अलावा कंपनियों, क्लबों और सहकारी समितियों की कानूनी बैठकों तथा क्लबों और एसोसिएशनों के नियमित कामकाज से जुड़ी सामाजिक सभाओं को भी छूट दी गई है।
सिनेमा हॉल, थिएटर और अन्य मनोरंजन स्थलों पर सामान्य रूप से होने वाले जमावड़े भी इस आदेश के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
सरकारी कामकाज और शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होगा आदेश
मुंबई पुलिस के आदेश के अनुसार, अदालतों, सरकारी कार्यालयों और स्थानीय निकायों में आधिकारिक कार्यों के लिए होने वाले जमावड़े पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
इसी तरह स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियां भी इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगी। फैक्ट्रियों, दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में सामान्य व्यापारिक और कामकाजी गतिविधियों के लिए लोगों के इकट्ठा होने पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
पुलिस ने कानून-व्यवस्था को बताया मुख्य कारण
पुलिस के अनुसार, विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को लेकर संभावित खतरे का आकलन किया गया। आदेश में सार्वजनिक व्यवस्था में खलल, लोगों की जान को खतरा और संपत्ति को नुकसान की आशंका का उल्लेख किया गया है।
महाराष्ट्र पुलिस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रतिबंधात्मक आदेश सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए जा सकते हैं और ऐसे आदेशों में सभा या जुलूस जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।
मुंबई में जमावबंदी कब तक रहेगी?
मुंबई पुलिस का यह प्रतिबंधात्मक आदेश 23 जुलाई 2026 को रात 12:01 बजे से 6 अगस्त 2026 की आधी रात तक लागू रहेगा। आदेश मुंबई पुलिस आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों पर लागू होगा।
मुंबई पुलिस ने संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों को देखते हुए 23 जुलाई से 6 अगस्त तक प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया है। हालांकि, रोजमर्रा के कामकाज, शैक्षणिक गतिविधियों, आधिकारिक कार्यों और आदेश में विशेष रूप से छूट प्राप्त आयोजनों को इससे बाहर रखा गया है।
क्या मुंबई में पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है?
हां। 23 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक जगहों पर पांच या उससे ज्यादा लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध रहेगा, हालांकि आदेश में कई गतिविधियों को छूट दी गई है।
यह प्रतिबंध कब से कब तक लागू रहेगा?
यह आदेश 23 जुलाई 2026 को रात 12:01 बजे से 6 अगस्त 2026 की आधी रात तक लागू रहेगा।
क्या स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे?
नहीं। आदेश में स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियों को छूट दी गई है।