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कांदिवली पश्चिम में क्राइम ब्रांच ने 651 ग्राम हेरोइन बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्त सामान की कुल कीमत 3.28 करोड़ रुपये बताई गई है।
मुंबई: कांदिवली पश्चिम में मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 11 ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के दौरान नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया है।
कांदिवली में पुलिस ने ऐसे बिछाया जाल
मुंबई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मुंबई और उपनगरों में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम को कांदिवली पश्चिम में हेरोइन की तस्करी से जुड़ी अहम जानकारी मिली थी।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कांदिवली पश्चिम में बीएमसी गार्डन के सामने खजुरिया रोड के पास जाल बिछाया। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो लोगों को पकड़ा गया।
तलाशी में 651 ग्राम हेरोइन मिली
पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाशी ली तो उनके पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस के अनुसार, इस हेरोइन की अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये है।
इसके अलावा आरोपियों के पास से 2 लाख 10 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और करीब 50,400 रुपये कीमत का अन्य सामान भी जब्त किया गया।
पुलिस के मुताबिक, बरामद हेरोइन, नकदी और अन्य सामान समेत जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 3 करोड़ 28 लाख 10 हजार 400 रुपये है।
इस मामले में कांदिवली पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 110/2026 नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 8(ए), 21(ए) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर रही है।
मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की जांच
पुलिस की शुरुआती जांच में हेरोइन की तस्करी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह की संभावित भूमिका सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह ड्रग्स कहां से लाई गई थी और मुंबई में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
मामले में आगे की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती के मार्गदर्शन में की गई। क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे सह-आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त नवनाथ ढवळे और दिनकर शिलवाते की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
कार्रवाई में क्राइम ब्रांच यूनिट-11 के वरिष्ठ निरीक्षक शशिकांत जगदाळे, निरीक्षक विश्वास पाटिल, एसपी एन. दादासाहेब बनसोडे, एसपी एन. अमित पाटिल, निरीक्षक बालासाहेब शिंदे और उनकी टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कांदिवली में NRI के लॉकर से 610 ग्राम सोना गायब हुआ। पुलिस ने पूर्व डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर पूरी jewellery बरामद कर ली।
मुंबई: कांदिवली में बैंक लॉकर से करीब 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने के मामले ने बैंकिंग सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में पुलिस ने बैंक के ही पूर्व डिप्टी ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने NRI ग्राहक के लॉकर में रखे सोने के गहनों को कथित तौर पर अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान पूरे 610 ग्राम गहने बरामद करने का दावा किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप रामचंद साहनी के तौर पर हुई है।
मामला कांदिवली पश्चिम के MG Road स्थित IndusInd Bank की शाखा का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता 74 वर्षीय NRI हैं और लंबे समय से दुबई में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका मुंबई में घर और इसी बैंक में अकाउंट है। उन्होंने 22 मार्च 2024 को बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे। उस समय इन गहनों की कीमत करीब 81.80 लाख रुपये बताई गई थी।
विदेश में लंबे समय तक रहने की वजह से शिकायतकर्ता नियमित रूप से अपना लॉकर चेक नहीं कर पाए। करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक जाकर लॉकर खोला, तो अंदर रखा पूरा सोना गायब मिला। इसके बाद उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस से शिकायत की।
12 अगस्त को शिकायत दर्ज होने के बाद कांदिवली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इतने पुराने मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सोना आखिर लॉकर से कब और कैसे बाहर निकला।
पुलिस की नजर बैंक के डिप्टी मैनेजर पर क्यों गई?
जांच के दौरान पुलिस ने लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की। इसी दौरान सामने आया कि शिकायतकर्ता को लॉकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तत्कालीन डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी की भूमिका थी।
इसके बाद पुलिस ने सिर्फ बैंक रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय आरोपी के पिछले करीब दो साल के financial transactions की जांच शुरू की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये तक के transactions मिले। इन transactions का एक बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों से जुड़ा था जो सोना गिरवी रखकर loan या mortgage का कारोबार करती हैं। पुलिस ने इन transactions की जांच आगे बढ़ाई तो उसे उन firms तक पहुंच मिली जहां आरोपी द्वारा कथित तौर पर सोने के गहने गिरवी रखे गए थे।
फोटो से हुआ गहनों का मिलान
पुलिस ने संबंधित gold mortgage firms से pledged jewellery की तस्वीरें मांगीं। तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए जो NRI ग्राहक के लॉकर में रखे गए गहनों से मेल खाते थे।
इसके बाद पुलिस ने उन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के 610 ग्राम सोने के गहने बरामद कर लिए गए।
पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ ही दिनों के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता हासिल की। इसके बाद कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित वारदात में उसके साथ कोई और बैंक कर्मचारी या दूसरा व्यक्ति शामिल था या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल: दो साल तक बैंक को पता क्यों नहीं चला?
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मार्च 2024 में लॉकर में रखे गए गहने आखिर कब गायब हुए।
शिकायतकर्ता करीब दो साल बाद मुंबई लौटे। इसका मतलब यह भी है कि पुलिस को यह पता लगाना होगा कि लॉकर को किस तारीख और किस तरीके से access किया गया था। इसके लिए locker operation records, access details, CCTV और बैंक के internal records जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
RBI के locker framework में banks को locker area की security, unauthorized access रोकने के उपाय और CCTV व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। Common areas और strong-room entry/exit की CCTV recording कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। अगर customer unauthorized access या theft की शिकायत करता है, तो संबंधित CCTV footage को police investigation और dispute settlement पूरा होने तक preserve किया जाना चाहिए।
हालांकि इस मामले में पुलिस को दो साल पुरानी कौन-कौन सी CCTV या access recording मिली है, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। फिलहाल investigation में financial transactions एक अहम सुराग बनकर सामने आए हैं।
अगर बैंक कर्मचारी ही locker से gold निकाल दे तो जिम्मेदारी किसकी?
यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।
RBI के revised locker rules में bank employee के fraud से होने वाले loss को भी liability framework में शामिल किया गया है। अगर loss bank की negligence या deficiency से जुड़ा है और prescribed conditions पूरी होती हैं, तो bank की liability prevailing annual locker rent के 100 गुना तक हो सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अगर locker में 82 लाख रुपये का gold रखा था तो bank automatically 82 लाख रुपये customer को देगा।
उदाहरण के लिए अगर किसी locker का annual rent 5,000 रुपये है, तो 100 गुना रकम 5 लाख रुपये होगी। Actual compensation का सवाल case के facts, bank की liability और लागू कानूनी प्रक्रिया पर depend करेगा।
यानी locker में रखा gold जितना महंगा है, bank की regulatory liability उसी proportion में बढ़ती जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।
Supreme Court भी bank locker को लेकर क्या कह चुका है?
Bank locker disputes में Supreme Court का 2021 का फैसला भी महत्वपूर्ण है। Amitabha Dasgupta बनाम United Bank of India मामले में Supreme Court ने banks की duty of care को लेकर महत्वपूर्ण observations दिए थे। Court ने यह माना कि bank सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह नहीं बच सकता कि उसे locker के अंदर रखी चीजों की जानकारी नहीं थी।
लेकिन locker में वास्तव में कितना gold या दूसरा सामान रखा था और उसकी exact value कितनी थी, यह अलग evidentiary issue हो सकता है। यानी ग्राहक को अपने valuables के ownership और value को साबित करने के लिए documents और दूसरे evidence की जरूरत पड़ सकती है।
इसीलिए bank locker में महंगी jewellery रखने वाले ग्राहकों के लिए purchase bills, valuation records, jewellery की photographs, hallmark details और insurance documents जैसे records संभालकर रखना काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या देश में पहले भी bank lockers से gold गायब होने के मामले आए हैं?
कांदिवली का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से bank lockers में रखे gold और valuables के गायब होने के मामले सामने आए हैं।
Kanpur में एक महिला ने आरोप लगाया था कि करीब 17 साल बाद SBI locker खोलने पर उसमें रखी लगभग 50 लाख रुपये की jewellery गायब थी। इस मामले में लंबे समय तक locker operate नहीं किए जाने और bank records से जुड़े सवाल सामने आए।
Bengaluru में एक bank assistant manager पर customers के lockers से करीब 2.7 किलो gold jewellery चोरी करने का आरोप लगा था। उस मामले में भी कथित तौर पर jewellery को pawn किया गया था और जांच में bank employee की भूमिका सामने आई।
Kolkata में एक former bank employee पर करीब 571 ग्राम gold jewellery से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई थी। वहां भी jewellery को loan collateral के तौर पर इस्तेमाल किए जाने और documents/signature से जुड़े सवाल जांच का हिस्सा बने।
Pune में भी bank locker से करोड़ों रुपये के gold, silver, diamond jewellery और दूसरे valuables गायब होने का मामला सामने आ चुका है, जिसमें bank employees की कथित भूमिका की जांच हुई थी।
इन मामलों को देखकर एक बात साफ है कि bank locker से जुड़े disputes सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में locker access, employee control, documentation, dormant lockers और pledged jewellery का trail भी जांच का हिस्सा बनता है।
क्या भारत में bank locker theft बहुत आम है?
इस सवाल का जवाब भी आंकड़ों से समझना जरूरी है।
केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 31 मार्च 2025 तक Public Sector Banks में करीब 1.10 करोड़ lockers operational थे। FY2020-21 से FY2024-25 के बीच Public Sector Banks में 40 established locker theft cases सामने आए थे। RBI के पास सभी banks के locker theft cases का consolidated database नहीं है।
बाद के 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2021-22 से FY2025-26 तक Public Sector Banks में 40 established locker theft cases दर्ज हुए। FY2025-26 में 12 Public Sector Banks में established locker theft का कोई मामला reported नहीं हुआ।
इन पांच साल के आंकड़ों में Maharashtra में 5 established cases दर्ज हुए थे। लेकिन यह आंकड़ा Public Sector Banks का है। कांदिवली का मौजूदा मामला IndusInd Bank जैसे private sector bank से जुड़ा है, इसलिए इसे इन सरकारी PSB आंकड़ों में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
यानी available data के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि देश के bank lockers में चोरी आम बात है। लेकिन यह भी साफ है कि locker को पूरी तरह risk-free मानना ठीक नहीं है।
NRI customers के लिए यह मामला क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण है?
कांदिवली की घटना NRI customers के लिए खास warning लेकर आई है।
जो लोग साल में एक-दो बार ही भारत आते हैं, उनके लिए locker की physical checking नियमित रूप से करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक locker operate नहीं होने पर किसी unauthorized access या दूसरे dispute का पता काफी देर से चल सकता है।
RBI के locker framework में ऐसे customers का भी ध्यान रखा गया है जो NRI हैं या job transfer जैसी वजह से लंबे समय तक locker operate नहीं कर पाते।
इसलिए विदेश में रहने वाले customers के लिए bank में mobile number, email और address जैसे contact details updated रखना, locker records की जानकारी संभालकर रखना और संभव हो तो trusted family arrangement के बारे में bank के applicable rules समझना जरूरी है।
अगर आपके bank locker से jewellery गायब मिले तो क्या करें?
सबसे पहले locker की स्थिति की photographs और video अपने पास रखें। इसके बाद तुरंत bank को written complaint दें और complaint की acknowledgement लें।
इसके साथ police complaint करना भी जरूरी है। Locker access records, CCTV, locker operation records और bank से जुड़े documents सुरक्षित रखने के लिए लिखित request देना भी उपयोगी हो सकता है।
अगर jewellery के bills, valuation certificate, photographs, hallmark details या insurance documents हैं तो उन्हें सुरक्षित रखें। यही documents बाद में ownership और value establish करने में काम आ सकते हैं।
यह समझना भी जरूरी है कि bank locker और jewellery insurance एक ही चीज नहीं हैं।
Government ने Parliament में बताया है कि banks को locker-related contingencies से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Board-approved insurance policies रखने की सलाह दी गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि customer के locker में रखे हर gold item का पूरा value automatically insured है।
इसलिए बहुत high-value jewellery रखने वाले customers को अपने bank से applicable locker terms और अलग jewellery insurance की जरूरत को समझना चाहिए।
कांदिवली के इस मामले में अब आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपी कुलदीप साहनी गिरफ्तार हो चुका है और शिकायतकर्ता के 610 ग्राम gold jewellery की recovery की जानकारी सामने आई है।
अब जांच में यह पता लगाया जाना बाकी है कि jewellery locker से किस तरीके से निकाली गई, उसे अलग-अलग mortgage firms तक कैसे पहुंचाया गया, करीब 9 करोड़ रुपये के financial transactions में इस मामले से जुड़े कौन-कौन से transactions थे और क्या किसी दूसरे व्यक्ति या bank employee ने कथित तौर पर उसकी मदद की।
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि करीब दो साल पुराने locker theft का सुराग CCTV से ज्यादा financial trail से सामने आया। और अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि NRI का 82 लाख का gold कौन ले गया, बल्कि यह भी है कि bank locker में रखी आपकी lifetime savings कितनी सुरक्षित हैं और अगर कभी ऐसी घटना हो जाए तो आपकी legal और financial protection कितनी है। फिलहाल कांदिवली पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
मुंबई से रेप के आरोपी सब-इंस्पेक्टर अजमल हक गिरफ्तार। सॉल्ट लेक गेस्ट हाउस केस में बिधाननगर पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया।
मुंबई: पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक में महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे सब-इंस्पेक्टर अजमल हक को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता ले जाया गया है और अब उसे बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सॉल्ट लेक इलाके में एक महिला से रेप के आरोप में फरार चल रहे पुलिस अधिकारी को बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजमल हक के रूप में हुई है, जो बीरभूम जिले के नलहाटी थाने में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात था।
पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार करने के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया। वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता ले गई है। अब आरोपी सब-इंस्पेक्टर को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है।
सॉल्ट लेक के गेस्ट हाउस में रेप का आरोप
पुलिस के मुताबिक, मामला पिछले साल का बताया जा रहा है। महिला ने जुलाई में बिधाननगर ईस्ट थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सब-इंस्पेक्टर अजमल हक महिला को सॉल्ट लेक के सीएल ब्लॉक स्थित एक गेस्ट हाउस में लेकर गया था, जहां उसके साथ रेप किया गया।
शिकायत मिलने के बाद बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी पुलिस अधिकारी की तलाश की।
जमानत मिलने के बाद हो गया था फरार
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में आरोपी सब-इंस्पेक्टर को पहले जमानत मिल गई थी। इसके बाद जब बिधाननगर ईस्ट पुलिस ने बीरभूम जिला पुलिस से आरोपी अधिकारी के संबंध में संपर्क किया, तो उसके गायब होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज कर दी।
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई में मौजूद है। सूचना के आधार पर बिधाननगर ईस्ट पुलिस की टीम ने कार्रवाई की और उसे मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की परिस्थितियां क्या थीं और मामले से जुड़े कौन-कौन से सबूत उपलब्ध हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच करेगी।
फिलहाल आरोपी पर लगाए गए रेप के आरोप जांच का विषय हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।
दहिसर और कांदिवली में फर्जी आधार व दस्तावेज बनाने वाले दो ठिकानों पर पुलिस की कार्रवाई, 4 आरोपी गिरफ्तार और बड़ी संख्या में फर्जी कागजात जब्त।
मुंबई: दहिसर और कांदिवली में फर्जी आधार कार्ड और दूसरे सरकारी दस्तावेज बनाने के कथित नेटवर्क पर दहिसर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया गया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, रहिवासी प्रमाणपत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र और आधार से जुड़े उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत दहिसर पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक निलेश साळुंखे को मिली एक जानकारी से हुई। पुलिस को पता चला था कि दहिसर इलाके में फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने का काम किया जा रहा है।
जानकारी की जांच के बाद पुलिस टीम ने दहिसर पूर्व के बालाजी इलाके में विद्यामंदिर स्कूल के पास स्थित यू-एस इंटरप्राइजेज और कांदिवली पूर्व के हनुमान नगर स्थित सैम इन्कोटेक आधार सेंटर पर कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके जरिए आधार कार्ड में जानकारी अपडेट कराने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल-कॉलेज छोड़ने के प्रमाणपत्र तैयार कर उनका इस्तेमाल आधार अपडेट के लिए किया जा रहा था।
दहिसर-कांदिवली की पहली कार्रवाई में क्या मिला?
इस कार्रवाई में पुलिस ने 32 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बरामद किए। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के नाम वाले हस्ताक्षर-मुहर तथा दो ऐसे मुहर भी मिले, जिनका इस्तेमाल फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने में किए जाने का शक है।
पुलिस ने मौके से कंप्यूटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस और प्रिंटर के साथ आधार अपडेट मशीन, आईरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और वेब कैमरा भी जब्त किया।
इस मामले में पुलिस ने सुरजकुमार रामचंद्र यादव और उपेंद्र कप्तान सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं उमेश राजेश यादव उर्फ समीर को फरार आरोपी बताया गया है।
इसके बाद पुलिस ने कांदिवली पूर्व के पोइसर इलाके में स्थित शिवम इंटरप्राइजेज पर भी कार्रवाई की।
यहां पुलिस को और भी कई तरह के कथित फर्जी दस्तावेज मिले। दहिसर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में 14 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, 7 फर्जी रहिवासी प्रमाणपत्र, 26 फर्जी एसबीआई मेडिकल पॉलिसी और 3 फर्जी भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र बरामद किए गए।
इसके साथ ही कंप्यूटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, आधार अपडेट मशीन, आईरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और वेब कैमरा भी पुलिस ने जब्त किया।
इस कार्रवाई में सत्यम ललन मिश्रा और आकाश भगवान पटवा को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस को अब किस बात की है तलाश?
दोनों जगहों से फर्जी दस्तावेज और आधार अपडेट से जुड़े उपकरण मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह काम कितने समय से चल रहा था और इनके जरिए कितने लोगों के आधार या दूसरे दस्तावेजों में जानकारी बदली गई।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों को तैयार करने के पीछे और कौन-कौन लोग हैं और इनका इस्तेमाल किन कामों के लिए किया जाना था।
मामले में दहिसर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज रणवरे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सरजेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अपराध विभाग के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मारुति सांगळे के मार्गदर्शन में की गई।
कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश साळुंखे, पुलिसकर्मी सुनील राठोड, संतोष गाडे, संतोष भागवत, संतोष गाडे और राजेश शिरसाट समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क की जांच
फिलहाल दहिसर पुलिस की कार्रवाई का दायरा सिर्फ इन दो ठिकानों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। दो अलग-अलग जगहों से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और आधार से जुड़े उपकरण मिलने के बाद पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं।
Bigg Boss फेम लोपामुद्रा राउत के घर ₹1 करोड़ की चोरी का आरोपी दरभंगा से गिरफ्तार। पुलिस ने ₹51 लाख की नकदी और कीमती सामान बरामद किया।
मुंबई: फिल्म अभिनेत्री और मॉडल लोपामुद्रा राउत के मुंबई स्थित घर में हुई करीब ₹1 करोड़ की चोरी के मामले में मुंबई पुलिस ने बिहार के दरभंगा से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान चंदन मुखिया के रूप में हुई है, जो दरभंगा जिले के सोनकी थाना क्षेत्र के गोठ मिट्टी गांव का रहने वाला बताया गया है।
मुंबई पुलिस की टीम ने दरभंगा पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ा। उसके पास से महंगी घड़ी, सोने के बिस्किट और नकदी समेत चोरी से जुड़ी करीब ₹51 लाख की संपत्ति बरामद होने की जानकारी सामने आई है।
सांताक्रूज पुलिस थाने में दर्ज हुई थी FIR
लोपामुद्रा राउत के घर चोरी के बाद मुंबई के सांताक्रूज पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान तकनीकी जानकारी, मोबाइल फोन और लोकेशन से जुड़े सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। जांच की कड़ी बिहार के दरभंगा तक पहुंचने के बाद मुंबई पुलिस की टीम वहां गई और स्थानीय पुलिस के सहयोग से सोनकी थाना क्षेत्र में छापेमारी कर चंदन मुखिया को गिरफ्तार किया गया।
वेंटिलेटर के रास्ते घर में घुसने का दावा
पुलिस जांच से जुड़ी अहम कड़ी के अनुसार, आरोपी ने अभिनेत्री के घर में वेंटिलेटर के रास्ते प्रवेश किया था। बताया गया है कि वारदात से पहले घर की रेकी की गई थी और आरोपी ने कथित तौर पर यह सुनिश्चित किया कि घर में कोई मौजूद न हो।
सांताक्रूज पुलिस से मिली जानकारी में यह भी बताया गया है कि आरोपी बंद घरों की रेकी करता था। इसी दौरान उसकी नजर लोपामुद्रा राउत के सांताक्रूज स्थित घर पर पड़ी। इसके बाद कथित तौर पर मौका देखकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया।
₹12.50 लाख की लग्जरी घड़ी और सोने के बिस्किट बरामद
दरभंगा में गिरफ्तारी के बाद आरोपी के पास से चोरी से जुड़ी कई कीमती वस्तुएं बरामद होने की बात सामने आई है। इनमें करीब ₹12.50 लाख कीमत की लग्जरी घड़ी, लगभग ₹30 लाख मूल्य के दो सोने के बिस्किट और करीब ₹9 लाख नकद शामिल बताए गए हैं।
मिली जानकारी में इन बरामद वस्तुओं और नकदी की कुल कीमत कभी करीब ₹51 लाख बता रही है। तो कभी पुलिस सूत्रों में कभी करीब ₹50 लाख के सामान और ₹9 लाख नकद बरामद होने का उल्लेख किया जा रहा है।
हालांकि, चोरी की पूरी रकम और संपत्ति की बरामदगी अभी नहीं हुई है। पुलिस अन्य सामानों का पता लगाने में जुटी है।
चोरी की रकम से जमीन खरीदने की भी जांच
जांच में आरोपी के बिहार कनेक्शन के सामने आने के बाद पुलिस ने उसके आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार, चंदन मुखिया ने कथित तौर पर चोरी के पैसों का इस्तेमाल अपनी बहन के नाम पर करीब दो कट्ठा जमीन खरीदने में किया।
इस जमीन की खरीद से जुड़े मामले में सोनकी थाना क्षेत्र के देकुली बाजार के एक हार्डवेयर व्यवसायी कैलाश साह से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की रकम का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में आरोपी के साथ कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
ज्वेलरी कारोबारी से पूछताछ के बाद सोने के बिस्किट मिले
खबर के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने एक ज्वेलरी कारोबारी से भी पूछताछ की। इसके बाद दो सोने के बिस्किट बरामद किए गए।
इन दोनों बिस्किट की कीमत करीब ₹30 लाख बताई गई है। इसके अलावा आरोपी के पास से महंगी घड़ी और नकदी बरामद होने की बात सामने आई है।
मुंबई से दरभंगा तक पहुंची पुलिस की जांच
इस मामले में मुंबई पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया। मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर जांच दरभंगा तक पहुंची।
इसके बाद मुंबई पुलिस की टीम ने दरभंगा की स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
करीब ₹1 करोड़ की चोरी, आधे से ज्यादा रकम की बरामदगी
लोपामुद्रा राउत के घर से चोरी की कुल कीमत करीब ₹1 करोड़ बताई गई है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस करीब ₹51 लाख की संपत्ति और नकदी बरामद कर चुकी है।
बरामदगी में लग्जरी घड़ी, सोने के बिस्किट और नकदी शामिल हैं। पुलिस अब चोरी की बाकी संपत्ति का पता लगाने के साथ-साथ यह भी जांच कर रही है कि चोरी की रकम को कहां-कहां इस्तेमाल किया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले में उसके संभावित सहयोगियों और चोरी के पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही है। मामले की आगे की जांच जारी है।
एमएचबी पुलिस ने छह सेंधमारी की वारदातों का खुलासा करते हुए 26 वर्षीय आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी से ₹45.26 लाख का मुद्देमाल बरामद हुआ।
मुंबई: मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्थित एमएचबी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई सेंधमारी की छह वारदातों का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 26 वर्षीय आरोपी कुलजीत सिंह उर्फ सनी को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के पास से सोने के आभूषण, नकदी, मोबाइल फोन और स्मार्ट वॉच समेत कुल ₹45 लाख 26 हजार 690 रुपये का मुद्देमाल बरामद किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, एमएचबी पुलिस थाना क्षेत्र में हुई सेंधमारी की वारदातों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपियों की तलाश और मामलों के खुलासे के निर्देश दिए थे। इसके बाद अपराध प्रकटीकरण टीम ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज और वारदात के तरीके का विश्लेषण करते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग जगहों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके साथ ही वारदात को अंजाम देने के तरीके और आरोपी की गतिविधियों की तकनीकी जानकारी का विश्लेषण किया गया।
जांच में आरोपी के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिलने के बाद पुलिस ने मुंबई के अलावा नवी मुंबई, तुर्भे, वाशी और कोपरखैरणे इलाके में उसकी तलाश शुरू की।
पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी मुंबई से बाहर निकल गया है। इसके बाद उसकी संभावित आवाजाही और ठिकानों पर नजर रखी गई।
राजस्थान जाने की खबर, गुजरात में पुलिस ने पकड़ा
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, उन्हें सूचना मिली थी कि आरोपी राजस्थान के जयपुर की ओर जा रहा है। जांच के दौरान उसके गुजरात की तरफ जाने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने गुजरात पुलिस की मदद से उसकी तलाश तेज की।
पुलिस रिकॉर्ड की जांच में आरोपी के खिलाफ दादर, माहिम, कांदिवली, आरसीएफ, धारावी, भायखला, खेरवाड़ी और मानपाडा समेत अन्य पुलिस थाना क्षेत्रों में भी सेंधमारी के मामले दर्ज होने की जानकारी प्रेस नोट में दी गई है।
पुलिस टीम की कार्रवाई
यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में एमएचबी पुलिस थाने की अपराध प्रकटीकरण टीम ने की। प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस आयुक्त देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त संदीप पुणे, सहायक पुलिस आयुक्त सुधाकर हुंबे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनवणे के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।
वहीं, पुलिस निरीक्षक मिलिंद नागपुरे (अपराध) के मार्गदर्शन में एमएचबी पुलिस थाने के अपराध प्रकटीकरण अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक वत्रे तथा पुलिसकर्मी साळुंखे, ढामळे, पवार, मस्के और घाडगे ने तकनीकी जांच और मैदानी स्तर पर जानकारी जुटाकर आरोपी की तलाश शुरू की। आरोपी के मुंबई से बाहर निकलने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम उसकी तलाश करते हुए गुजरात पहुंची और नियोल चेक पोस्ट के पास उसे गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में पूरी अपराध प्रकटीकरण टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक व्यापारी के घर और दुकान से 106 बोरों में भरे 5,666 किलो सिक्के बरामद हुए। व्यापारी फरार है, पुलिस ने स्पेशल टीम गठित कर जांच शुरू कर दी है।
हाथरस (उत्तर प्रदेश): आमतौर पर पुलिस छापों में नकदी, सोना, हथियार या नशीले पदार्थ बरामद होने की खबरें सामने आती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई एक कार्रवाई ने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यहां एक स्टेशनरी व्यापारी के घर और दुकान से 106 बोरों में भरे 5,666 किलोग्राम (करीब 6 टन) सिक्के बरामद हुए। छापेमारी शुरू होते ही व्यापारी फरार हो गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर सिक्के क्यों जमा किए गए थे और इनके पीछे पूरा खेल क्या था।
सूचना मिली और खुल गया करोड़ों के सिक्कों का रहस्य
प्रशासन को सूचना मिली थी कि नयागंज क्षेत्र में एक स्टेशनरी व्यापारी बड़ी मात्रा में सिक्के जमा कर रहा है। सूचना के आधार पर जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापारी की दुकान तथा हनुमान गली स्थित घर पर संयुक्त छापेमारी की।
शुरुआत में अधिकारियों को लगा कि मौके पर 70 से 80 बोरे मिलेंगे, लेकिन तलाशी बढ़ने पर 106 प्लास्टिक के बोरे बरामद हुए। सभी बोरों में अलग-अलग मूल्यवर्ग के सिक्के भरे हुए थे। सिक्कों की संख्या इतनी अधिक थी कि मौके पर उनकी गिनती करना संभव नहीं था। इसलिए उनका वजन कराया गया, जो 5,666 किलोग्राम निकला।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई की भनक लगते ही व्यापारी मौके से फरार हो गया। उसके खिलाफ Coinage Act, 2011 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
आखिर 6 टन सिक्कों का क्या होने वाला था?
यही सवाल इस पूरे मामले को रहस्यमय बना रहा है।
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि—
इतने बड़े पैमाने पर सिक्के कहां से जुटाए गए?
इन्हें किस उद्देश्य से जमा किया गया?
क्या इन्हें दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था?
क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
इस कारोबार से किसे आर्थिक फायदा पहुंच रहा था?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने स्पेशल जांच टीम का गठन किया है।
छापेमारी के दौरान व्यापारी के एक रिश्तेदार ने अधिकारियों को बताया कि इस कारोबार में कथित तौर पर 3 से 4 प्रतिशत कमीशन पर सिक्कों का लेन-देन किया जाता था।
उसने दावा किया कि 500 और 1000 रुपये मूल्य के सिक्कों के पैकेट तैयार कर दिल्ली के मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशनों तक भेजे जाते थे। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की जांच की जा रही है और अभी इन्हें अंतिम सत्य नहीं माना गया है।
क्या इतने सिक्के रखना गैरकानूनी है?
पुलिस के अनुसार Coinage Act, 2011 के तहत सिक्कों का दुरुपयोग, उन्हें कानूनी मुद्रा के अलावा अन्य उद्देश्यों में इस्तेमाल करना या कानून के विपरीत परिस्थितियों में उनका संग्रह अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
इसी आधार पर पुलिस ने व्यापारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
एक नजर में पूरा मामला
स्थान: नयागंज और हनुमान गली, हाथरस (उत्तर प्रदेश)
बरामदगी: 106 प्लास्टिक के बोरे
कुल वजन: 5,666 किलोग्राम (करीब 6 टन)
आरोपी: स्टेशनरी व्यापारी, फिलहाल फरार
कार्रवाई: Coinage Act, 2011 के तहत FIR
जांच: स्पेशल पुलिस टीम गठित
पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?
इस मामले में पुलिस सिर्फ बरामद सिक्कों की गिनती तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
सिक्कों का स्रोत क्या था?
क्या बैंकों से बड़ी मात्रा में सिक्के निकाले गए थे?
इस कार्रवाई के बाद लोगों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं। क्या बड़ी मात्रा में सिक्के रखना अपराध है? क्या कोई व्यापारी वैध तरीके से इतने सिक्के इकट्ठा कर सकता है? क्या यह मामला केवल अवैध कारोबार से जुड़ा है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है?
इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस फरार व्यापारी की गिरफ्तारी पर है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद सिक्कों की सप्लाई चेन, उनके स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने तक इस मामले के कई पहलू रहस्य बने हुए हैं।
मुंबई साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल और कई बैंक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में देशभर के 84 साइबर अपराधों से कनेक्शन सामने आया है।
मुंबई साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट रैकेट का पर्दाफाश
मुंबई साइबर पुलिस के मध्य विभाग ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 लाख रुपये नकद, 16 मोबाइल फोन, 22 चेकबुक, 23 सिम कार्ड और कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है।
गिरफ्तार आरोपियों के साथ केस का खुलासा करने वाली पुलिस टीम की तस्वीर
गुप्त सूचना के बाद बोरीवली में बिछाया जाल
मुंबई साइबर पुलिस थाना, मध्य विभाग, वर्ली को 29 जुलाई 2026 को गुप्त सूचना मिली थी कि सलमान पठान और उसके साथी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालने आने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक, चंदावरकर रोड, बोरीवली (पश्चिम) में जाल बिछाया।
करीब तीन बजे सलमान पठान और उसके साथी बैंक से 10 लाख रुपये निकाल चुके थे और अन्य 10 लाख रुपये निकालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस जांच में पता चला कि सलमान पठान के भाईंदर पश्चिम स्थित केजीएन एंटरप्राइजेज और मीरा रोड के शांति शॉपिंग सेंटर स्थित रिचा एंटरप्राइजेज कार्यालयों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने दोनों जगहों पर छापेमारी कर चार अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया।
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खाते खोलकर चेक के जरिए साइबर ठगी की रकम निकालते थे।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों के बैंक खातों का संबंध भारत के विभिन्न राज्यों में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला
मुंबई साइबर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 106/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 318(4), 61(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया है।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट (Mule Account) वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से कमाए गए पैसे को एक जगह से दूसरी जगह भेजने या निकालने के लिए करते हैं।
आसान भाषा में समझें तो साइबर ठग सीधे अपने बैंक खाते में पैसे नहीं मंगवाते। वे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता खुलवाते हैं या किसी लालच में फंसाकर उसका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को ही “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।
साइबर अपराधी म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे करते हैं?
साइबर अपराधी पहले लोगों को फर्जी कॉल, निवेश योजना, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन नौकरी या लॉटरी जैसे झांसे में फंसाकर पैसे ठगते हैं। इसके बाद यह रकम सीधे उनके खाते में न जाकर म्यूल अकाउंट में भेजी जाती है।
इसके बाद आरोपी—
बैंक से नकद रकम निकाल लेते हैं।
रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते हैं।
चेक और एटीएम कार्ड के जरिए पैसे निकालते हैं।
कई बैंक खातों के जरिए पैसों का स्रोत छिपाने की कोशिश करते हैं।
लोग अनजाने में कैसे बन जाते हैं म्यूल अकाउंट होल्डर?
कई बार अपराधी लोगों को हर महीने कमीशन देने का लालच देकर उनका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।
आमतौर पर अपराधी लोगों से कहते हैं—
“आपके खाते में पैसा आएगा, आपको सिर्फ़ निकालकर देना है।”
“घर बैठे कमाई का मौका है।”
“कंपनी के लिए बैंक अकाउंट चाहिए।”
“किराये पर बैंक खाता दीजिए।”
ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
इस मामले में म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल कैसे किया गया?
मुंबई साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी इंडियन ओवरसीज बैंक की बोरीवली और माहिम शाखा में खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी की रकम निकाल रहे थे। आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देशभर में दर्ज 84 से अधिक साइबर अपराधों से पाया गया है।
साइबर पुलिस की चेतावनी
मुंबई साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। अगर कोई व्यक्ति साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले खाते का मालिक पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इन अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती के नेतृत्व में की गई। इस ऑपरेशन में संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त (साइबर अपराध) बजरंग बनसोडे और सहायक पुलिस आयुक्त सुवर्णा शिंदे का मार्गदर्शन रहा।
कार्रवाई को सफल बनाने में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढाव, पुलिस निरीक्षक रविकिरण डोरले, सहायक पुलिस निरीक्षक अतुल सानप, मानसिंग वचकले, सविता कावरे, पुलिस हवलदार अभिजीत गोंजारी, नवनाथ वेताले, विकास तटकरे, किरण पाटिल, श्रीकांत पोंल, नंदकिशोर महाजन, तनिषा मयेकर और कैलाश बाबरे ने अहम भूमिका निभाई।
कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड में ट्रैफिक डायवर्जन, पुलिस सुरक्षा, भीड़, बंद रास्ते और यात्रियों पर असर की पूरी रिपोर्ट पढ़िए।
कांवड़ यात्रा 2026: अगले 10 दिनों में देश के करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है असर
सावन शुरू होते ही कांवड़ यात्रा 2026 ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की सड़क व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। हरिद्वार, गंगोत्री और गौमुख से गंगाजल लेने के लिए लाखों श्रद्धालु सड़कों पर उतर चुके हैं। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू हो चुके हैं, हजारों पुलिसकर्मी तैनात हैं और कई शहरों में रूट डायवर्जन शुरू हो गया है।
With #KanwarYatra2026 underway and the monsoon in full swing, Joint CP/Traffic reviewed the operational preparedness of Traffic personnel and Patrol Motorcycles to strengthen field response, ensure safe movement of Kanwariyas and maintain smooth traffic flow across the Range. pic.twitter.com/ZEnaqq9FN7
लेकिन यह खबर सिर्फ धार्मिक यात्रा की नहीं है। इसका सीधा असर उन करोड़ों लोगों पर पड़ने वाला है जो रोजाना ऑफिस, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट के लिए इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगले कुछ दिनों में ट्रैफिक, सुरक्षा और आम लोगों की जिंदगी पर इसका कितना असर पड़ सकता है।
कांवड़ यात्रा शुरू होते ही दिल्ली से हरिद्वार तक बदली ट्रैफिक व्यवस्था
कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 11 अगस्त तक चलेगी। इस दौरान दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और हरिद्वार के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए गए हैं।
Watch this video carefully, Muslims are celebrating Muharram with full religious freedom, while sections of the Hindu community are voluntarily making way for them and even performing their own rituals nearby.
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जीटी रोड के कई हिस्सों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है, जबकि कुछ रास्तों को पूरी तरह कांवड़ियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
इसके अलावा, दिल्ली-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग और गंगा नहर मार्ग पर 4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच सामान्य वाहनों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
प्रशासन ने लोगों को पहले से वैकल्पिक रास्ते तय करने की सलाह दी है।
सिर्फ श्रद्धालु नहीं, इन करोड़ों लोगों पर भी पड़ेगा असर
कांवड़ यात्रा का असर सिर्फ कांवड़ियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सबसे ज्यादा प्रभाव इन शहरों और इलाकों पर पड़ सकता है—
दिल्ली
नोएडा
गाजियाबाद
मेरठ
मुजफ्फरनगर
हरिद्वार
ऋषिकेश
देहरादून
बागपत
शामली
इन शहरों से हर दिन लाखों लोग नौकरी, व्यापार और शिक्षा के लिए सफर करते हैं। ट्रैफिक डायवर्जन की वजह से कई जगहों पर यात्रा का समय बढ़ सकता है।
VIDEO | Lucknow: On preparations and control room setup for Kanwar Yatra, LR Kumar, IG (Law and Order), says, “With regard to this year's Kanwar Yatra, the Uttar Pradesh Police has completed all its preparations. All high-level review meetings have been held, and based on those… pic.twitter.com/xdgllqC9iT
सुबह 7 बजे से 11 बजे और शाम 5 बजे से 9 बजे तक सबसे ज्यादा दबाव रहने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।
स्कूल और कॉलेज के छात्र
कई स्कूल बसों और निजी वाहनों के रूट बदल सकते हैं। माता-पिता को सुबह निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखना चाहिए।
पर्यटक
हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून और मसूरी जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
Ahead of #KanwarYatra2026, Muzaffarnagar Police conducted a four-hour intensive security check from Shiv Chowk to the Railway Station with LIU, Bomb Disposal Squad and Dog Squad. The operation focused on suspicious persons, vehicles and crowded locations to ensure a safe… pic.twitter.com/80hYUEnqww
दिल्ली पुलिस ने कांवड़ियों के लिए बनाए आठ विशेष रूट
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कांवड़ियों की सुरक्षा और यात्रा को सुचारु बनाने के लिए आठ अलग-अलग रूट तय किए हैं।
इसके साथ ही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कांवड़ यात्रियों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार ट्रैफिक और सुरक्षा कारणों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ट्रैफिक दबाव और बढ़ सकता है।
35 हजार पुलिसकर्मी, ड्रोन और AI कैमरों से होगी निगरानी
उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा के लिए 35 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी, पीएसी और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है।
मुजफ्फरनगर और हरिद्वार जैसे संवेदनशील इलाकों में चौबीस घंटे निगरानी की जा रही है।
हरिद्वार में बढ़ रही भीड़, प्रशासन ने शुरू की विशेष तैयारी
हरिद्वार में कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
हर की पौड़ी, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई है और लगभग एक हजार अतिरिक्त सफाईकर्मियों को तैनात किया है।
कांवड़ यात्रा से जुड़े वीडियो, ट्रैफिक अपडेट और अफवाहों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करने की सलाह दी गई है।
सरकार और प्रशासन ने क्या इंतजाम किए हैं?
24 घंटे कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
अतिरिक्त बस सेवाएं शुरू की गई हैं।
मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस तैनात की गई हैं।
जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है।
पुलिस की बाइक पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है।
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है।
आपातकालीन सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं।
A 21-year-old Muslim youth from Meerut is undertaking the Kanwar Yatra with his Hindu friend, carrying a 251-litre Kanwar from Haridwar to promote social harmony. pic.twitter.com/NLH3eXhOna
4 अगस्त से 12 अगस्त के बीच ट्रैफिक दबाव अपने चरम पर पहुंच सकता है। ऐसे में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि घर से निकलने से पहले ट्रैफिक एडवाइजरी जरूर देखें।
मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से तड़ीपार कर दिया है। जानिए किन इलाकों के आरोपी इस सूची में शामिल हैं और उन पर क्या आरोप हैं।
मुंबई: शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने नॉर्थ ज़ोन-3 में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए मुंबई शहर और उपनगरों की सीमा से तड़ीपार (Externment) कर दिया है। पुलिस का कहना है कि ये आरोपी हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, मारपीट, लूट, हथियारों के दम पर धमकाने और सार्वजनिक शांति भंग करने जैसे मामलों में शामिल रहे हैं।
पुलिस ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई?
मुंबई पुलिस के अनुसार, इन अपराधियों की गतिविधियों के कारण आम नागरिकों, व्यापारियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में डर का माहौल बन गया था। कई लोग शिकायत दर्ज कराने से भी डर रहे थे। इसी वजह से महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत इन अपराधियों के खिलाफ तड़ीपार की कार्रवाई की गई।
पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी क्षेत्र) के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया गया।
मुंबई पुलिस ने साफ किया है कि अगर तड़ीपार किया गया कोई भी आरोपी आदेश का उल्लंघन करते हुए मुंबई शहर या उपनगरों में प्रवेश करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अगर उनके इलाके में कोई तड़ीपार अपराधी दिखाई देता है या किसी संदिग्ध व्यक्ति की जानकारी मिलती है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या पुलिस हेल्पलाइन 100 और 112 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
इस कार्रवाई का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
पुलिस का मानना है कि इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और व्यापारियों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। साथ ही, इलाके में जबरन वसूली, दादागिरी और हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
FAQ
सवाल: मुंबई पुलिस ने कितने अपराधियों को तड़ीपार किया है?
नॉर्थ ज़ोन-3 के 12 आदतन अपराधियों को एक साल के लिए तड़ीपार किया गया है।
सवाल: तड़ीपार कितने समय के लिए किया गया है?
सभी आरोपियों को एक साल के लिए मुंबई और उपनगरों से बाहर रहने का आदेश दिया गया है।
सवाल: किन पुलिस स्टेशनों के आरोपी शामिल हैं?
कस्तूरबा मार्ग, समतानगर और दहिसर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के आरोपी शामिल हैं।
सवाल: अगर तड़ीपार आरोपी मुंबई में दिखे तो क्या करें?
तुरंत 100, 112 या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें।