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  • मुंबई में आज से टोल महंगा: ट्रक-बस समेत इन वाहनों के नए रेट, 2029 तक जारी रहेगी वसूली

    मुंबई में आज से टोल महंगा: ट्रक-बस समेत इन वाहनों के नए रेट, 2029 तक जारी रहेगी वसूली

    मुंबई के पांच प्रवेश टोल नाकों पर 1 अक्टूबर से नए रेट लागू हो गए हैं। जानें किस वाहन पर कितना टोल, किसे छूट और 2029 तक वसूली क्यों जारी रहेगी।

    मुंबई: 1 अक्टूबर 2026 से मुंबई के पांच प्रमुख प्रवेश टोल नाकों पर कॉमर्शियल और भारी वाहनों के लिए टोल की नई दरें लागू हो गई हैं। मिनी बस और हल्के कॉमर्शियल वाहन के लिए अब 90 रुपये, ट्रक और बस के लिए 180 रुपये तथा भारी मोटर वाहन के लिए 225 रुपये प्रति यात्रा टोल देना होगा। इससे अलग निजी कार, एसयूवी और पहले से छूट प्राप्त हल्के वाहनों पर इस बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ेगा।

    नई दरें मुंबई के वाशी, ऐरोली, मुलुंड एलबीएस रोड, मुलुंड ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और दहिसर वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे स्थित पांच प्रवेश बिंदुओं पर लागू हुई हैं। अटल सेतु का टोल इस व्यवस्था से अलग है।

    मुंबई के पांच टोल नाकों पर अब कितना शुल्क

    वाहन श्रेणीपुराना टोलनया टोलबढ़ोतरी
    मिनी बस और एलसीवी75 रुपये90 रुपये15 रुपये
    ट्रक और बस150 रुपये180 रुपये30 रुपये
    भारी मोटर वाहन190 रुपये225 रुपये35 रुपये

    महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल यानी एमएसआरडीसी के आधिकारिक सार्वजनिक नोटिस में 1 अक्टूबर 2023 से 30 सितंबर 2026 तक मिनी बस/एलसीवी के लिए 75 रुपये, ट्रक/बस के लिए 150 रुपये और भारी मोटर वाहनों के लिए 190 रुपये प्रति यात्रा दर निर्धारित थी। इसलिए भारी वाहन की नई दर 190 से बढ़कर 225 रुपये हुई है।

    इस हिसाब से मिनी बस और एलसीवी तथा ट्रक-बस श्रेणी में वृद्धि 20 प्रतिशत है, जबकि भारी मोटर वाहन की बढ़ोतरी करीब 18.4 प्रतिशत है।

    निजी कार और एसयूवी चालकों को क्या देना होगा

    इस बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर कॉमर्शियल और भारी वाहनों पर है। निजी कार और एसयूवी के लिए मुंबई के इन पांच प्रवेश बिंदुओं पर टोल छूट जारी है। हल्के मोटर वाहन, स्कूल बस और राज्य परिवहन बसों को अक्टूबर 2024 से दी गई छूट भी जारी है। सार्वजनिक परिवहन बस, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी भी इस टोल से मुक्त हैं।

    यानी सामान्य निजी कार से मुंबई में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को 1 अक्टूबर की इस नई दर के कारण अतिरिक्त टोल नहीं देना पड़ेगा।

    एक महीने में कितना बढ़ सकता है खर्च

    नई दर प्रति यात्रा लागू है। इसलिए नियमित रूप से मुंबई आने-जाने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए कुल खर्च उनकी टोल-योग्य यात्राओं की संख्या पर निर्भर करेगा।

    उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 26 दिनों तक रोज एक टोल-योग्य यात्रा करता है, तो एलसीवी के मामले में पुराने और नए टोल के बीच करीब 390 रुपये महीने का अतिरिक्त अंतर होगा। ट्रक या बस के लिए यह अंतर 780 रुपये और भारी मोटर वाहन के लिए 910 रुपये महीने होगा।

    यदि साल में ऐसी 312 यात्राएं मानी जाएं तो अतिरिक्त राशि क्रमशः 4,680 रुपये, 9,360 रुपये और 10,920 रुपये तक पहुंच सकती है। यह केवल गणना का उदाहरण है; वास्तविक खर्च वाहन की यात्रा और टोल नाके से गुजरने की संख्या पर निर्भर करेगा।

    50 और 100 कूपन लेने पर टोल में कितनी छूट

    बार-बार मुंबई आने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए अग्रिम टोल कूपन की व्यवस्था भी है। एमएसआरडीसी के अनुसार 50 कूपन खरीदने पर 25 प्रतिशत और 100 कूपन खरीदने पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। टोल प्लाजा पर रियायती यात्रा स्मार्ट कार्ड भी जारी किए जाते हैं।

    नई दर पर प्रकाशित छूट प्रतिशत को लागू करने पर 90 रुपये के टोल पर 25 प्रतिशत छूट के बाद प्रभावी राशि 67.50 रुपये और 50 प्रतिशत छूट के बाद 45 रुपये बैठती है। 180 रुपये के टोल पर ये राशि 135 और 90 रुपये तथा 225 रुपये के टोल पर 168.75 और 112.50 रुपये होगी।

    टोल बढ़ाने की व्यवस्था क्या है

    मुंबई के इन पांच प्रवेश बिंदुओं पर टोल कलेक्शन सितंबर 2002 में शुरू हुआ था। मौजूदा रियायत व्यवस्था में दरों का संशोधन तीन वर्ष के अंतराल पर किया जाता है। अक्टूबर 2023 में पिछली दरें लागू हुई थीं और 30 सितंबर 2026 को वह अवधि पूरी हुई। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से संशोधित दरें लागू की गई हैं।

    2010 में मुंबई एंट्री पॉइंट्स लिमिटेड यानी एमईपीएल ने एमएसआरडीसी को बुनियादी ढांचे से जुड़े पूंजीगत खर्च के लिए 2,100 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान किया था। इसके बाद कंपनी को टोल संग्रह के जरिए निवेश के साथ वित्तपोषण, प्रशासन, संचालन और रखरखाव से जुड़े खर्चों की वसूली की व्यवस्था मिली।

    इन प्रवेश बिंदुओं की टोल व्यवस्था मुंबई और आसपास विकसित किए गए फ्लाईओवर, पुल, सबवे और रोड ओवरब्रिज जैसे बुनियादी ढांचे की लागत तथा उससे जुड़ी व्यवस्थाओं से जुड़ी रही है। ऐतिहासिक रूप से इस परियोजना के तहत 55 फ्लाईओवर बनाए जाने का उल्लेख मिलता है।

    2026 में टोल खत्म होना था, फिर 2029 तक क्यों बढ़ा

    यह इस समय टोल व्यवस्था से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। पांच प्रवेश बिंदुओं पर टोल कलेक्शन की मौजूदा अवधि पहले नवंबर 2026 में समाप्त होनी थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इसे 17 सितंबर 2029 तक बढ़ाने की व्यवस्था की है।

    अक्टूबर 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में पांच प्रवेश टोल नाकों पर कारों और छोटे वाहनों को टोल से छूट दी गई थी। इस छूट से टोल संचालक को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए बाद में मुआवजे की व्यवस्था की गई। उपलब्ध सरकारी निर्णय के अनुसार इसी व्यवस्था के तहत टोल संग्रह की अवधि 2029 तक बढ़ाई गई।

    2025 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में पांच प्रवेश बिंदुओं पर दी गई टोल छूट से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई को मंजूरी दी गई थी। इस व्यवस्था के साथ 19 नवंबर 2026 से 17 सितंबर 2029 तक अलग-अलग वाहन श्रेणियों की वास्तविक समय वाहन संख्या का आंकड़ा रखने और सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया।

    इसी निर्णय में मुंबई और उपनगरों के 27 फ्लाईओवर तथा संबंधित संरचनाओं के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी निजी ठेकेदार के पास जारी रखने को मंजूरी दी गई। वाशी क्रीक ब्रिज से संबंधित टोल राजस्व में कमी की भरपाई के लिए 775.58 करोड़ रुपये की चरणबद्ध नकद व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई थी।

    टोल बढ़ने से माल ढुलाई और जरूरी सामान पर क्या असर पड़ेगा

    टोल वृद्धि का सीधा असर कॉमर्शियल वाहनों के परिचालन खर्च पर पड़ेगा। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के सलाहकार और पूर्व अध्यक्ष बाल मलकीत सिंह ने बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा है कि अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए परिवहन कंपनियां माल ढुलाई शुल्क बढ़ा सकती हैं और इसका असर आगे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। उन्होंने भारी कॉमर्शियल वाहनों को भी छोटे वाहनों की तरह टोल छूट देने की मांग की है।

    ऐसा नहीं है कि टोल बढ़ते ही फल, सब्जी या दूसरी आवश्यक वस्तुओं की कीमत निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। अंतिम कीमत पर ईंधन, दूरी, माल ढुलाई, मांग-आपूर्ति और अन्य लागतों का भी असर होता है। फिलहाल उपभोक्ता कीमतों पर असर को लेकर परिवहन क्षेत्र की चिंता सामने आई है, वास्तविक कीमत वृद्धि का कोई समान या निश्चित आंकड़ा सामने नहीं आया है।

    आगे क्या बदलेगा

    19 नवंबर 2026 से 17 सितंबर 2029 तक वाहन श्रेणीवार वास्तविक समय यातायात आंकड़ा रखने की व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पांचों प्रवेश बिंदुओं से गुजरने वाले वाहनों की संख्या और श्रेणीवार यातायात का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

    फिलहाल 1 अक्टूबर 2026 से लागू नई दरों के अनुसार मिनी बस और एलसीवी के लिए 90 रुपये, ट्रक और बस के लिए 180 रुपये तथा भारी मोटर वाहन के लिए 225 रुपये प्रति यात्रा टोल देना होगा। निजी कार और एसयूवी समेत पहले से छूट प्राप्त वाहनों पर इस संशोधन का टोल प्रभाव नहीं है। मुंबई के पांच प्रवेश बिंदुओं की मौजूदा टोल व्यवस्था अब 17 सितंबर 2029 तक जारी रहने की निर्धारित व्यवस्था के तहत चल रही है।

  • मुंबई में 2 अक्टूबर से DigiHealth Connect अभियान, ABHA से Ayushman Card तक जानें किसे क्या फायदा

    मुंबई में 2 अक्टूबर से DigiHealth Connect अभियान, ABHA से Ayushman Card तक जानें किसे क्या फायदा

    मुंबई में 2 अक्टूबर से 100 दिन का DigiHealth Connect अभियान शुरू होगा। ABHA, 70+ Ayushman Card और PMJAY-MJPJAY रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी यहां जानें।

    मुंबई: 2 अक्टूबर 2026 से मुंबई में 100 दिनों के लिए Mumbai DigiHealth Connect (MDC) अभियान शुरू होने जा रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका का यह अभियान सिर्फ ABHA कार्ड बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के Ayushman Vay Vandana Card, पात्र लाभार्थियों के PMJAY/MJPJAY कार्ड, BMC की स्वास्थ्य संस्थाओं और healthcare professionals को डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से जोड़ने पर भी केंद्रित होगा।

    अभियान के दौरान मुंबई के अलग-अलग इलाकों में नागरिकों का ABHA registration कराने के साथ अस्पतालों, दवाखानों, आपला दवाखाना, प्रसूतिगृह, प्रशासनिक कार्यालय, स्कूल-कॉलेज, गृहनिर्माण संस्थाओं, झोपड़पट्टी बस्तियों, बाजारों और राशन दुकानों तक registration अभियान पहुंचाया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों के लिए विशेष जनसंपर्क और डोर टू डोर अभियान भी चलाया जाएगा।

    इस अभियान को समझने से पहले आप को बतादें कि —ABHA और Ayushman Card एक ही चीज नहीं हैं। ABHA डिजिटल हेल्थ पहचान है, जबकि Ayushman Vay Vandana और PM-JAY स्वास्थ्य उपचार के लिए पात्र लाभार्थियों को health coverage उपलब्ध कराने से जुड़ी योजनाएं हैं।

    ABHA Card क्या है और इससे मुंबईकरों को क्या फायदा होगा?

    Ayushman Bharat Health Account यानी ABHA एक डिजिटल हेल्थ पहचान है, जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से जोड़ने और उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। ABDM के तहत ABHA, Health Facility Registry और Healthcare Professionals Registry जैसे digital building blocks तैयार किए गए हैं।

    सितंबर 2026 की स्थिति में देश में 97.8 करोड़ से ज्यादा ABHA बनाए जा चुके थे और 121 करोड़ से ज्यादा health records इनसे link हो चुके थे। इसके अलावा 5.6 लाख से ज्यादा health facilities और लगभग 11 लाख healthcare professionals ABDM ecosystem में registered थे।

    ABHA का फायदा उस समय ज्यादा महत्वपूर्ण होता है जब नागरिक का health record ABDM-enabled health facilities और digital systems से link होता है। इसके जरिए उपलब्ध digital health services में health records, laboratory reports, treatment information और discharge summaries जैसे records को डिजिटल रूप से access करने की सुविधा शामिल हो सकती है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि ABHA बनते ही किसी व्यक्ति के पुराने सभी मेडिकल रिकॉर्ड अपने आप online हो जाएंगे। Records को संबंधित digital health systems से link किया जाना और health information के access/share के लिए consent-based व्यवस्था लागू होती है।

    क्या ABHA Card से मुफ्त इलाज मिलता है?

    नहीं। ABHA को मुफ्त इलाज या health insurance card समझना सही नहीं है।

    ABHA मुख्य रूप से digital health identity है। वहीं PM-JAY और उससे जुड़ी पात्र health assurance schemes उपचार के लिए health coverage उपलब्ध कराती हैं। इसलिए ABHA बनवाने और Ayushman Card बनवाने को दो अलग प्रक्रियाओं के रूप में समझना चाहिए।

    70 साल या उससे अधिक उम्र के नागरिकों के लिए क्या मिलेगा?

    MDC अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के Ayushman Vay Vandana Card से जुड़ा है।

    सरकारी व्यवस्था के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक, उसकी आय या सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, इस coverage के लिए पात्र है। 70+ senior citizens के लिए Aadhaar-based e-KYC की आवश्यकता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना में आय की कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

    इसका annual health cover ₹5 लाख तक है। यदि परिवार में एक से अधिक 70+ सदस्य हैं, तो ₹5 लाख की सीमा परिवार के आधार पर लागू होती है; हर बुजुर्ग के लिए अलग से ₹5 लाख जोड़कर ₹10 लाख या उससे ज्यादा मान लेना सही नहीं होगा। पहले से PM-JAY beneficiary परिवार में 70+ सदस्य के लिए अतिरिक्त benefit का प्रावधान है और इसके लिए Aadhaar e-KYC दोबारा करना पड़ सकता है।

    यानी 70+ नागरिकों के मामले में ABHA और Ayushman Vay Vandana Card की भूमिका अलग है। ABHA digital health identity है, जबकि Vay Vandana Card PM-JAY health coverage से संबंधित है।

    राशन दुकान पर PMJAY और MJPJAY Card भी बनेंगे

    Mumbai DigiHealth Connect अभियान में राशन दुकानों को भी registration network का हिस्सा बनाया गया है। पात्र राशन कार्डधारकों की पहचान, राशन कार्ड या E-KYC के जरिए eligibility verification और इसके बाद PMJAY/MJPJAY Card registration की व्यवस्था की जाएगी।

    इस काम में सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेविका यानी CHV और ASHA कार्यकर्ताओं की भूमिका रहेगी। राशन दुकानों के लिए समय निर्धारित किया जाएगा, ताकि वहां आने वाले पात्र लाभार्थियों का registration किया जा सके।

    आप को बता दें, कि केवल राशन कार्ड होना हर व्यक्ति को स्वतः किसी एक scheme का beneficiary नहीं बना देता। PM-JAY और MJPJAY में beneficiary identification के लिए निर्धारित eligibility criteria लागू होते हैं।

    महाराष्ट्र की मौजूदा MJPJAY व्यवस्था में अलग-अलग beneficiary categories हैं। इनमें Yellow, Antyodaya Anna Yojana, Annapurna और Orange ration card categories के साथ-साथ expanded scheme में White ration card और अन्य निर्धारित categories भी शामिल हैं। पात्रता category के अनुसार अलग हो सकती है और अंतिम verification scheme के निर्धारित documents तथा beneficiary database के आधार पर होती है।

    PM-JAY benefits की portability भी महत्वपूर्ण है। पात्र beneficiary को देशभर में empanelled hospitals में scheme के नियमों के अनुसार cashless treatment की सुविधा मिल सकती है, जबकि MJPJAY के तहत महाराष्ट्र के network hospitals में cashless treatment की व्यवस्था है।

    मुंबई में ABHA और दूसरे कार्ड कहां बनाए जाएंगे?

    BMC के अभियान के दौरान registration को नागरिकों के नजदीक पहुंचाने की योजना है। इसके लिए BMC hospitals, dispensaries, Aapla Dawakhana, maternity homes, administrative ward offices, schools, colleges, housing societies, slum settlements, markets और ration shops जैसे स्थानों पर registration activities की जाएंगी।

    BMC headquarters और विभागीय तथा प्रशासनिक कार्यालयों में अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए विशेष ABHA registration camps भी आयोजित किए जाएंगे।

    अभियान के तीसरे चरण में senior citizens, persons with disabilities और disadvantaged sections के लिए special outreach तथा घरपोच यानी डोर टू डोर registration अभियान पर जोर रहेगा।

    हालांकि BMC की घोषणा में अभी प्रत्येक ward के लिए अलग-अलग camp की तारीख, समय और exact location की विस्तृत सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए नागरिकों को अपने इलाके के camp की जानकारी के लिए BMC की आगे जारी होने वाली स्थानीय सूचना पर ध्यान देना होगा।

    अभियान तीन चरणों में चलेगा

    पहले चरण में जनजागृति अभियान, अधिकारियों-कर्मचारियों और volunteers का training, volunteer registration तथा प्रचार सामग्री का वितरण किया जाएगा।

    दूसरे चरण में बड़े पैमाने पर नागरिकों का registration किया जाएगा। इसमें अस्पतालों, दवाखानों, आपला दवाखाना, प्रसूतिगृह, प्रशासनिक कार्यालय, educational institutions, housing societies, slum areas, markets और ration shops को शामिल किया गया है।

    तीसरे चरण में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों तक विशेष outreach पहुंचाई जाएगी। इस दौरान घरपोच registration और विशेष ABHA camps आयोजित किए जाएंगे।

    BMC की पूरी व्यवस्था में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी?

    अभियान में Medical Health Officers की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रत्येक administrative ward में ABHA registration की progress की निगरानी Assistant Commissioners और Deputy Commissioners करेंगे।

    BMC Commissioner Ashwini Bhide ने नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। Additional Municipal Commissioner (City) Prajakta Verma ने Public Health Department को अधिक से अधिक नागरिकों को ABHA registration से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने BMC की सभी health institutions को Health Facility Registry यानी HFR में register करने तथा पात्र doctors, nurses, AYUSH practitioners, pharmacists और physiotherapists सहित healthcare professionals को Healthcare Professional Registry यानी HPR में register करने का लक्ष्य रखने को कहा है।

    Public Health Committee Chairman Harish Bhandirge ने भी अधिक से अधिक मुंबईकरों से इस अभियान में भाग लेने की अपील की है।

    HFR और HPR से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?

    HFR यानी Health Facility Registry में health facilities को digital ecosystem में register किया जाता है, जबकि HPR में healthcare professionals की verified digital registry तैयार होती है।

    इससे MDC अभियान केवल नागरिकों के ABHA बनाने की drive नहीं रह जाता। इसका दूसरा हिस्सा BMC की health facilities और healthcare workforce को national digital health ecosystem से जोड़ना है।

    राष्ट्रीय स्तर पर ABDM में 5.6 लाख से अधिक health facilities और लगभग 11 लाख healthcare professionals registered हो चुके हैं।

    BMC में digital health services का अगला चरण क्या होगा?

    MDC अभियान के objectives में ABHA-linked health records के साथ Scan & Share, e-prescription, e-discharge summary, digital laboratory और radiology reports तथा EMR/HMIS जैसी digital services का विस्तार शामिल है।

    BMC पहले से अपनी कुछ health facilities में HMIS आधारित digital health infrastructure का इस्तेमाल कर रहा है। BMC के उपलब्ध Year Book में B.Y.L. Nair Hospital और Kasturba Hospital में cloud-based HMIS/Aarogya Sanchayani के implementation का उल्लेख है, जिसमें patient data और कुछ medical information को digital रूप में manage करने की व्यवस्था शामिल है।

    इसलिए MDC को केवल नया registration campaign समझना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसका एक उद्देश्य BMC की health services को broader ABDM digital ecosystem के साथ जोड़ना और digital health services का इस्तेमाल बढ़ाना भी है।

    क्या ABHA बनने के बाद medical records सुरक्षित रहेंगे?

    ABDM framework में health information sharing consent-based व्यवस्था पर आधारित है। ABHA digital identity बनने का अर्थ यह नहीं है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को नागरिक के सभी medical records स्वतः देखने की अनुमति मिल जाती है।

    Digital health records को link और share करने की प्रक्रिया में consent और authorised access की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ABDM का उद्देश्य interoperable digital health ecosystem तैयार करना है, जिसमें नागरिक अपने health records को digital रूप से manage कर सके।

    मुंबईकरों के लिए सबसे जरूरी बात

    अगर किसी परिवार में 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र का सदस्य है, तो इस अभियान के दौरान ABHA और Ayushman Vay Vandana Card को अलग-अलग समझना सबसे जरूरी है। ABHA digital health identity है, जबकि 70+ senior citizens के लिए Ayushman Vay Vandana PM-JAY health coverage से संबंधित है।

    इसी तरह PMJAY/MJPJAY registration को भी ABHA registration से अलग समझना होगा। राशन दुकानों पर होने वाला registration पात्र लाभार्थियों की eligibility verification के बाद किया जाएगा।

    MDC अभियान के जरिए BMC नागरिकों, health facilities और healthcare professionals—तीनों को digital health framework से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले 100 दिनों के अभियान में registration, awareness, training और targeted outreach के जरिए इसका विस्तार किया जाएगा।

    राष्ट्रीय स्तर पर ABDM पहले ही 97.8 करोड़ से ज्यादा ABHA और 121 करोड़ से ज्यादा linked health records का आंकड़ा पार कर चुका है। ऐसे में मुंबई में शुरू होने वाला यह 100 दिवसीय अभियान नागरिकों तक digital health services और पात्र health-assurance benefits को जमीनी स्तर पर पहुंचाने की दिशा में BMC की महत्वपूर्ण पहल है।

  • मुंबई में 96.64% पानी फिर भी 10% कटौती क्यों? BMC ने बताई मई 2027 तक की स्थिति

    मुंबई में 96.64% पानी फिर भी 10% कटौती क्यों? BMC ने बताई मई 2027 तक की स्थिति

    मुंबई की 7 झीलों में 96.64% पानी के बावजूद 10% कटौती जारी है। BMC ने मई 2027 तक के स्टॉक, 500 MLD गैप और नए जल प्लान की जानकारी दी।

    मुंबई: सातों जलापूर्ति झीलों में 96.64% पानी होने के बावजूद मुंबई में 10% पानी की कटौती हटाने की तैयारी नहीं है। BMC ने अब साफ किया है कि मौजूदा जल भंडार को बचाकर चलाना जरूरी है और उपलब्ध स्टॉक का अनुमान 17 मई 2027 तक लगाया गया है। ऐसे में सवाल है कि जब झीलें लगभग भर चुकी हैं तो मुंबई में पानी की कटौती क्यों जारी है और आने वाले महीनों में इसका असर कितना बढ़ सकता है।

    BMC के अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने नागरिक निकाय की बैठक में बताया कि मौजूदा पानी का स्टॉक मई 2027 तक चलाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और सदन में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने 10% पानी की कटौती वापस लेने की मांग उठाई थी। इसके जवाब में BMC प्रशासन ने मौजूदा कटौती जारी रखने की जरूरत बताई।

    मुंबई की सात झीलों में कितना पानी है?

    मुंबई को पानी देने वाली सात प्रमुख झीलें तुलसी, विहार, भातसा, तानसा, मोडक सागर, अपर वैतरणा और मिडिल वैतरणा हैं। 29 सितंबर को इनमें कुल 13,98,722 मिलियन लीटर उपयोगी पानी था, जो 14,47,363 मिलियन लीटर की कुल उपयोगी क्षमता का 96.64% है। 30 सितंबर की सुबह यह स्टॉक 96.37% दर्ज किया गया। यानी झीलों का स्तर ऊंचा होने के बावजूद उसमें लगातार मामूली गिरावट भी देखी जा रही है।

    पिछले दो वर्षों की तुलना करें तो 29 सितंबर 2025 को यही स्टॉक 97.57% और 2024 में 99.09% था। इस साल सातों झीलें 100% के स्तर तक नहीं पहुंच सकीं।

    96% पानी होने के बावजूद संकट क्यों?

    सिर्फ झीलों में मौजूद पानी का प्रतिशत देखकर पूरे साल की जल सुरक्षा तय नहीं होती। मुंबई की सालाना जरूरत पूरी करने के लिए सातों जलाशयों का पूरा उपयोगी भंडार करीब 14.47 लाख मिलियन लीटर होना जरूरी माना जाता है। मौजूदा स्टॉक इस स्तर से नीचे है और अगले मानसून तक शहर को लगातार पानी उपलब्ध कराना है।

    यही वजह है कि BMC फिलहाल पानी की बचत को प्राथमिकता दे रहा है। मई में जब सातों झीलों का स्टॉक सिर्फ 23.5% के आसपास रह गया था, तब 15 मई से पूरे मुंबई में 10% पानी की कटौती लागू की गई थी। बाद में जुलाई की भारी बारिश से जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ा, लेकिन कटौती वापस नहीं ली गई।

    मुंबई की पानी की जरूरत और सप्लाई में भी बड़ा अंतर

    मुंबई के जल संकट की एक वजह सिर्फ बारिश नहीं है। शहर में पानी की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच भी बड़ा अंतर बना हुआ है। BMC के आंकड़ों के अनुसार शहर को करीब 4,100 MLD पानी की आपूर्ति होती है, जबकि मांग लगभग 4,600 MLD है। यानी करीब 500 MLD का अंतर है। इसके अलावा पानी के वितरण तंत्र में 32 से 35% तक पानी लीकेज और चोरी के कारण नुकसान होने का अनुमान है।

    इसका मतलब यह है कि जलाशयों में पानी बढ़ने के बावजूद शहर के सामने पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और वितरण व्यवस्था में होने वाले नुकसान को कम करने की चुनौती बनी हुई है।

    महाराष्ट्र के सूखे का मुंबई पर भी असर

    महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह राज्य के करीब 74% तालुकों के बराबर है। 18 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18.8% कम बारिश दर्ज की गई थी। मराठवाड़ा और विदर्भ के कई हिस्सों में कमी और ज्यादा रही।

    मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था सात प्रमुख झीलों पर निर्भर है, लेकिन कुछ अतिरिक्त जल स्रोत राज्य के नियंत्रण में हैं। राज्य के दूसरे हिस्सों में जल संकट बढ़ने की स्थिति में इन संसाधनों के इस्तेमाल और जल उपलब्धता को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है। इसलिए मुंबई के लिए सिर्फ अपने सात जलाशयों का मौजूदा प्रतिशत देखना पर्याप्त नहीं है।

    El Niño और बढ़ते तापमान की चिंता

    BMC ने अक्टूबर और नवंबर के दौरान El Niño के प्रभाव के मजबूत होने की संभावना और उससे तापमान बढ़ने की स्थिति में झीलों से पानी के तेजी से वाष्पीकरण की चिंता जताई है। इसी कारण प्रशासन मौजूदा जल भंडार को बिना अतिरिक्त दबाव के अगले मानसून तक खींचना चाहता है।

    इस साल जुलाई में हुई भारी बारिश ने मुंबई को बड़ी राहत दी थी। जुलाई की शुरुआत में सातों जलाशयों का स्टॉक बेहद निचले स्तर पर था, लेकिन कुछ ही दिनों में भारी बारिश के कारण इसमें तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि अगस्त और सितंबर में जलाशयों में बढ़ोतरी की रफ्तार काफी धीमी रही।

    BMC का नया प्लान: 3,000 कुएं और 10,000 रिचार्ज स्ट्रक्चर

    जल संकट की आशंका के बीच BMC अब पारंपरिक जल स्रोतों को भी दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। करीब 3,000 पुराने कुओं को साफ कर उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाने की योजना पर काम हो रहा है। कुओं की सफाई, पानी की गुणवत्ता और खारेपन की जांच की जा रही है, क्योंकि मुंबई के तटीय इलाकों में भूजल में समुद्री पानी के प्रवेश की समस्या भी सामने आ सकती है।

    इसके साथ ही भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए करीब 10,000 रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना भी सामने आई है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को जमीन में उतारकर भूजल स्तर को मजबूत करना है।

    पानी की कमी बढ़ी तो टैंकर व्यवस्था भी बदल सकती है

    जल संकट की स्थिति में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने की संभावना को देखते हुए BMC एक नई टैंकर नियमन नीति तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य पानी की कमी वाले इलाकों में टैंकर आपूर्ति को नियंत्रित करना और संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाना है। प्रस्तावित नीति को संबंधित समितियों के सामने रखा जाना है और मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

    मुंबई में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ेगा?

    जून में जब सातों झीलों का स्टॉक 10% के करीब पहुंच गया था, तब BMC ने निर्माण स्थलों और स्विमिंग पूल के लिए पानी की आपूर्ति रोकने तथा औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 20% अतिरिक्त कटौती लागू करने का फैसला किया था।

    मौजूदा समय में ऐसे पुराने प्रतिबंधों को स्वतः लागू मानना सही नहीं होगा। लेकिन अगर जल भंडार में दोबारा गंभीर गिरावट आती है तो BMC के पास पहले इस्तेमाल किए गए संरक्षण उपायों को दोबारा लागू करने का विकल्प मौजूद रहेगा।

    मुंबई के लिए आगे की बड़ी योजनाएं

    दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए BMC की योजनाओं में गारगाई बांध से 440 MLD, मनोरी desalination project से 400 MLD और वर्सोवा desalination project से करीब 200 MLD अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। इन परियोजनाओं से कुल करीब 1,040 MLD अतिरिक्त क्षमता तैयार करने की योजना है।

    इसके अलावा बारिश के पानी के इस्तेमाल और भूजल रिचार्ज पर भी जोर बढ़ाया जा रहा है। मुंबई में भारी बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में stormwater को बाढ़ रोकने के लिए समुद्र और खाड़ियों की ओर पंप करना पड़ता है। इसी बीच वसई-विहार प्रणाली से अतिरिक्त पानी हासिल करने और stormwater management को बेहतर बनाने जैसी योजनाओं पर भी काम हो रहा है।

    फिलहाल क्या स्थिति है?

    मुंबई में 10% पानी की कटौती अभी जारी है। सातों झीलों का स्टॉक करीब 96% से अधिक है, लेकिन पिछले दो वर्षों की तुलना में इस साल का स्तर कम है। BMC ने मौजूदा भंडार को 17 मई 2027 तक बनाए रखने का अनुमान दिया है और पानी की कटौती को हटाने के बजाय जल संरक्षण पर जोर दिया है।

    आने वाले महीनों में मुंबई के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक झीलों के catchment में बारिश, तापमान और वाष्पीकरण, शहर की पानी की मांग, वितरण में होने वाला नुकसान और अगले मानसून से पहले उपलब्ध जल भंडार रहेगा। अभी उपलब्ध आंकड़े तत्काल पानी खत्म होने का संकेत नहीं देते, लेकिन BMC की रणनीति साफ है कि मौजूदा स्टॉक को अगले मानसून तक सुरक्षित रखने के लिए पानी की बचत जारी रखनी होगी।

  • बोरिवली में 35 अतिक्रमणों पर बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, 8 किमी फुटपाथ होंगे मुक्त

    बोरिवली में 35 अतिक्रमणों पर बीएमसी की बड़ी कार्रवाई, 8 किमी फुटपाथ होंगे मुक्त

    बोरिवली पश्चिम में बीएमसी ने 20 अनधिकृत निर्माण और 15 स्टॉल हटाए। 6 फुटपाथ के करीब 8 किमी हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने की मुहिम जारी है।

    मुंबई: बोरिवली पश्चिम में पैदल चलने वालों के लिए रास्ता खाली कराने की मुहिम के तहत बीएमसी ने 20 अनधिकृत निर्माण और 15 अनधिकृत स्टॉल पर कार्रवाई की है। 29 सितंबर को लोकमान्य तिलक रोड, मार्केट लेन और बोरिवली सबवे रोड क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के साथ पहले चरण में चिन्हित 6 फुटपाथ के करीब 8 किलोमीटर हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने का काम आगे बढ़ाया गया है।

    यह कार्रवाई ‘पादचारी प्रथम’ अभियान के तहत की गई। बीएमसी का उद्देश्य फुटपाथ पर मौजूद ऐसे अतिक्रमण और निर्माण हटाकर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित, लगातार और बाधामुक्त रास्ता उपलब्ध कराना है। इसका सीधा असर बोरिवली पश्चिम रेलवे स्टेशन से आने-जाने वाले यात्रियों और आसपास के इलाकों में पैदल चलने वाले नागरिकों पर पड़ने की उम्मीद है।

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    कार्यवाही की तस्वीर

    बोरिवली पश्चिम में इन जगहों पर हुई कार्रवाई

    बीएमसी के अनुसार लोकमान्य तिलक रोड, मार्केट लेन और बोरिवली सबवे रोड परिसर में कार्रवाई की गई। कुल 20 अनधिकृत निर्माण और 15 अनधिकृत स्टॉल हटाए गए।

    कार्रवाई के लिए बीएमसी ने 2 जेसीबी, 5 डंपर, 10 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और 20 कामगार तैनात किए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 15 से अधिक पुलिसकर्मियों का बंदोबस्त भी किया गया।

    उपायुक्त परिमंडल-7 मनीष वळंजु के मार्गदर्शन में और आर-मध्य विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल तांबे के नेतृत्व में संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और कामगारों की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

    6 पदपथों पर करीब 8 किलोमीटर का अभियान

    बीएमसी ने बोरिवली क्षेत्र में पहले चरण के तहत 6 फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का काम शुरू किया है। इन सभी हिस्सों की कुल लंबाई करीब 8 किलोमीटर बताई गई है।

    फिलहाल बीएमसी की ओर से जारी जानकारी में इन 6 फुटपाथ की पूरी सूची और प्रत्येक फुटपाथ की अलग-अलग लंबाई सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, अभियान का उद्देश्य इन मार्गों पर पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह को बाधामुक्त करना है।

    बोरिवली पश्चिम में फुटपाथ पर अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से सामने आती रही है। वर्ष 2019 में भी रोकडिया लेन से बोरिवली स्टेशन पश्चिम की ओर जाने वाले पदपथ पर अतिक्रमण के कारण लोगों को सड़क पर चलने की स्थिति का उल्लेख किया गया था।

    मुंबई में बड़े अभियान का हिस्सा है कार्रवाई

    बोरिवली की कार्रवाई मुंबई के व्यापक ‘पादचारी प्रथम’ अभियान का हिस्सा है। अभियान के पहले चरण में बीएमसी ने 200 फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने का लक्ष्य रखा था। अगस्त के अंत तक 134 पदपथों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी थी और करीब 197 किलोमीटर फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का दावा किया गया था। उस समय 1,459 स्थानों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।

    बीएमसी ने अगस्त में पहले चरण के लिए करीब 320 किलोमीटर पदपथों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी दिए थे। अभियान में अनधिकृत फेरीवालों के साथ फुटपाथ पर मौजूद अन्य प्रकार के अवरोध हटाने और फुटपाथ की सुधार, सुरक्षा तथा सुंदरीकरण से जुड़े काम करने पर भी जोर दिया गया था।

    सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं, पदपथ की मरम्मत भी

    बोरिवली पश्चिम में फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब बीएमसी ने इसी क्षेत्र में फुटपाथ की मरम्मत के लिए भी निविदा प्रक्रिया शुरू की है।

    आर-मध्य विभाग के बीट नंबर 17 में बोरिवली पश्चिम के विभिन्न स्थानों पर फुटपाथ की मरम्मत के लिए करीब 18.09 लाख रुपये की निविदा जारी की गई थी। इसकी निविदा प्रक्रिया सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई और बोली खोलने की तारीख 30 सितंबर रखी गई थी।

    इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में फुटपाथ को उपयोगी बनाने के लिए अतिक्रमण हटाने के साथ मरम्मत का काम भी अलग स्तर पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, 29 सितंबर की कार्रवाई में हटाए गए अतिक्रमण वाले सभी स्थान इस मरम्मत परियोजना में शामिल हैं या नहीं, इसकी अलग से पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    अब असली चुनौती दोबारा अतिक्रमण रोकने की

    फुटपाथ खाली कराने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह रहेगी कि इन जगहों पर दोबारा अतिक्रमण न हो और पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध रास्ता लगातार बना रहे। बोरिवली पश्चिम के अलग-अलग इलाकों में इस वर्ष भी फुटपाथ और सड़क पर फेरीवालों तथा अन्य अवरोधों को लेकर नागरिक शिकायतें सामने आती रही हैं। चीकूवाड़ी और साईबाबा नगर रोड जैसे इलाकों में पैदल यात्रियों के लिए जगह कम होने की शिकायतें दर्ज हुई थीं।

    इसलिए 29 सितंबर की कार्रवाई के बाद केवल हटाए गए निर्माणों की संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि यह भी देखना होगा कि इन मार्गों पर पैदल चलने की जगह कितनी लगातार और उपयोगी रहती है।

    पैदल चलना अब मौलिक अधिकार

    बोरिवली की यह कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब सर्वोच्च न्यायालय ने 19 जून 2026 के फैसले में सुरक्षित और चिन्हित फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है। अदालत ने कहा कि सड़क होने पर नगर निगमों और अन्य संबंधित स्थानीय निकायों का दायित्व है कि पैदल चलने वालों के लिए चिन्हित और अच्छी तरह बनाए गए फुटपाथ उपलब्ध कराए जाएं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चिन्हित फुटपाथ पर पैदल चलने का अधिकार मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता रखता है।

    ऐसे में बोरिवली में 6 फुटपाथ के करीब 8 किलोमीटर हिस्से को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है। इसके बाद इन रास्तों का रखरखाव, पैदल यात्रियों के लिए लगातार उपलब्ध जगह और दोबारा अतिक्रमण रोकने की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

    फिलहाल बीएमसी की कार्रवाई जारी है और बोरिवली पश्चिम के चिन्हित फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त करने का काम अभियान के अगले चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    मुंबई एयरपोर्ट पर मौसम का असर, 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट; 1,255 यात्री सुरक्षित

    Mumbai Airport पर तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश से उड़ानें प्रभावित हुईं। 8 फ्लाइटें सूरत डायवर्ट हुईं, 1,255 यात्री सुरक्षित रहे।

    मुंबई : मुंबई एयरपोर्ट पर मंगलवार 29 सितंबर की शाम खराब मौसम ने हवाई परिचालन को प्रभावित कर दिया। गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश के बीच मुंबई आने वाली कई उड़ानों को दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। इनमें सूरत डायवर्ट की गई 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री सवार थे। सभी विमानों ने सूरत एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। वहीं, व्यापक स्तर पर मुंबई एयरपोर्ट पर उड़ानों की देरी और कुछ उड़ानों के रद्द होने की भी जानकारी सामने आई है।

    मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे से मुंबई जाने वाली उड़ानों के डायवर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले तिरुचिरापल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-2017 सूरत पहुंची। इसमें 182 यात्री सवार थे। इसके कुछ ही मिनट बाद दिल्ली से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-864 को भी सूरत डायवर्ट किया गया। इस विमान में 122 यात्री थे।

    इसके बाद दिल्ली से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2941 सूरत पहुंची। इस विमान में 186 यात्री सवार थे। चेन्नई से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5104 और गोवा से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-2746 को भी सूरत भेजा गया। AI-2746 में 135 यात्री सवार थे।

    बेंगलुरु से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5255 करीब 7:47 बजे सूरत पहुंची। इसमें 135 यात्री थे। इसके लगभग तीन मिनट बाद चेन्नई से मुंबई जा रही Air India की फ्लाइट AI-640 ने सूरत में लैंडिंग की। इसमें 112 यात्री सवार थे। सबसे आखिर में भोपाल से मुंबई जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E-5312 करीब 8 बजे सूरत पहुंची। इस विमान में 204 यात्री सवार थे।

    इस तरह सूरत डायवर्ट की गई इन 8 उड़ानों में कुल 1,255 यात्री थे। सूरत एयरपोर्ट पर सभी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। सूरत एयरपोर्ट के निदेशक आनंद नारायण शर्मा ने भी इन उड़ानों के डायवर्जन और सुरक्षित लैंडिंग की पुष्टि की थी।

    सिर्फ सूरत ही नहीं, दूसरे एयरपोर्ट भी बने वैकल्पिक ठिकाने

    मुंबई में मौसम बिगड़ने के बाद सूरत के अलावा दूसरे एयरपोर्ट का भी इस्तेमाल वैकल्पिक लैंडिंग के लिए किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कम-से-कम 11 से 12 मुंबई आने वाली उड़ानों के डायवर्जन की स्थिति सामने आई, हालांकि अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में अंतर रहा। एक अपडेट में 8 उड़ानों के सूरत और 4 उड़ानों के वडोदरा पहुंचने की जानकारी दी गई। वडोदरा पहुंचने वाली उड़ानों में Air India की AI 2447, AI 599, AI 1780 और IndiGo की 6E 329 शामिल थीं।

    वहीं एक अन्य अपडेट में 11 उड़ानों के डायवर्ट होने की जानकारी सामने आई, जिनमें 6 उड़ानों को सूरत और 3 को अहमदाबाद भेजे जाने का विवरण दिया गया। इनमें IndiGo की 6E864, 6E2017 और 6E5104, Air India की AI2941, AI640 और AI2746 शामिल थीं। अहमदाबाद के लिए QP1150, 6E5259 और 6E5163 को डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई।

    इस अंतर की वजह से डायवर्ट हुई कुल उड़ानों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े सामने आए। हालांकि इतना स्पष्ट है कि मुंबई के खराब मौसम का असर कई मुंबई-बाउंड उड़ानों पर पड़ा और उन्हें सुरक्षित रूप से वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारा गया।

    213 उड़ानों में देरी, 16 रद्द होने की भी जानकारी

    मौसम का असर सिर्फ डायवर्ट हुई उड़ानों तक सीमित नहीं रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मुंबई एयरपोर्ट पर 213 उड़ानों में देरी हुई, जबकि 16 उड़ानें रद्द हुईं। डायवर्जन के कारण सूरत और दूसरे वैकल्पिक एयरपोर्ट पर भी यात्रियों और विमानों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी।

    मुंबई में क्यों बिगड़ा मौसम?

    मंगलवार शाम मुंबई के कई हिस्सों में अचानक बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखा गया। मुलुंड, कुर्ला और अंधेरी समेत कई इलाकों में बारिश हुई और कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बनी। अंधेरी क्षेत्र में जलभराव के कारण आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुंबई-पवई पूर्वानुमान में 29 सितंबर को बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज-चमक की संभावना दर्ज थी। 30 सितंबर के लिए भी एक-दो दौर की बारिश या गरज-चमक का पूर्वानुमान दिया गया था।

    हवाई परिचालन पर मौसम का सीधा असर पड़ा। तेज हवाओं, बिजली चमकने और गरज-चमक जैसी परिस्थितियों में मुंबई में विमानों की लैंडिंग प्रभावित होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आने वाली उड़ानों को वैकल्पिक एयरपोर्ट की ओर भेजा। सभी डायवर्ट विमान सुरक्षित उतरे।

    सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए क्या इंतजाम?

    डायवर्ट किए गए विमानों के यात्रियों को वैकल्पिक एयरपोर्ट पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। सूरत और वडोदरा में यात्रियों के लिए पीने के पानी और रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था की गई। वडोदरा में पहुंचे कुछ विमानों के यात्रियों को तत्काल विमान से बाहर नहीं उतारा गया था और आगे की उड़ान के लिए मौसम तथा परिचालन की स्थिति का इंतजार किया जा रहा था।

    अब यात्रियों को मुंबई कब पहुंचाया जाएगा?

    डायवर्ट किए गए विमानों की मुंबई वापसी वहां के मौसम और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मिलने वाली अनुमति पर निर्भर रही। मौसम सामान्य होने और मुंबई एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद विमानों को मुंबई भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। इसलिए जिन यात्रियों की उड़ान प्रभावित हुई है, उनके लिए वास्तविक यात्रा समय एयरलाइन और फ्लाइट स्टेटस के अनुसार बदल सकता है।

    30 सितंबर को भी मौसम पर नजर

    मुंबई में 30 सितंबर को भी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है। ऐसे में मुंबई से उड़ान भरने या मुंबई पहुंचने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी फ्लाइट का ताजा स्टेटस जांचना महत्वपूर्ण है। मौसम की स्थिति के अनुसार देरी, रूट में बदलाव या डायवर्जन जैसी स्थिति दोबारा बन सकती है।

    मंगलवार की घटना में राहत की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डायवर्ट की गई उड़ानों की लैंडिंग सुरक्षित रही और किसी यात्री के हताहत होने की जानकारी सामने नहीं आई। अब यात्रियों की आगे की यात्रा और उड़ानों के सामान्य संचालन की स्थिति मुंबई के मौसम तथा एयर ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगी।

  • मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

    मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

    मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर नया मोड़ आया है। आयुक्त अश्विनी भिडे के स्पष्टीकरण से अभियान पर सवाल उठे।

    मुंबई: 39 हजार 111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर आखिरी वक्त में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 19 सितंबर को महापालिका ने 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले 39,111 अनधिकृत झोपड़ी निर्माणों के खिलाफ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक विशेष कार्रवाई की घोषणा की थी। अब 29 सितंबर को BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के साथ हुई बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इन 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई अलग से आदेश जारी नहीं किया गया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ के अनुसार, आयुक्त ने बताया कि महापालिका नियमित कार्रवाई कर रही है।

    इस स्पष्टीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली वह विशेष कार्रवाई अब किस रूप में होगी, जिसकी घोषणा खुद महापालिका प्रशासन ने की थी।

    39,111 का आंकड़ा आया कहां से?

    BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें 39,111 ऐसी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें मुंबई शहर की 3,348, पश्चिमी उपनगरों की 4,536 और पूर्वी उपनगरों की सबसे अधिक 31,227 संरचनाएं शामिल हैं।

    यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 39,111 का आंकड़ा उन संरचनाओं का है जिन्हें BMC ने कार्रवाई के लिए चिन्हित किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी 39,111 घरों को अलग-अलग demolition notice जारी हो चुके हैं।

    BMC के अनुसार 4,584 संरचनाओं पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी, जबकि 611 को नोटिस दिए जा चुके थे। बाकी चिन्हित संरचनाओं के अनधिकृत हिस्से खुद हटाने के लिए कहा गया था और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की बात कही गई थी।

    1 अक्टूबर से क्या होने वाला था?

    19 सितंबर को घोषित योजना के मुताबिक 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक तीन महीने की विशेष मुहिम चलनी थी। इसका फोकस झोपड़पट्टी क्षेत्रों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण पर था। BMC ने लोगों से अपने स्तर पर अनधिकृत हिस्से हटाने की अपील भी की थी।

    यह कार्रवाई ऐसे समय घोषित हुई जब कुर्ला में पहाड़ी किनारे बसे आवासीय क्षेत्र में भूस्खलन की घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी और मानखुर्द में भी मकान गिरने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद अनधिकृत और असुरक्षित निर्माणों पर कार्रवाई का मुद्दा और गंभीर हुआ। हालांकि 39,111 सभी संरचनाओं को खतरनाक घोषित किया गया है, ऐसा उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता।

    अब आयुक्त के स्पष्टीकरण से क्या बदला?

    28 सितंबर को वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में सांसदों, विधायक असलम शेख और नगरसेवकों के प्रतिनिधिमंडल ने BMC आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात की। इसके बाद गायकवाड़ ने बताया कि आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई आदेश प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है और नियमित कार्रवाई ही जारी है।

    लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद मामला पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। उसी दिन BMC General Body में इस मुद्दे पर पांच घंटे से ज्यादा समय तक विवाद चला। BJP के Leader of House गणेश खनकर ने मांग की कि आयुक्त खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करें। आयुक्त के बैठक में नहीं पहुंचने के बाद Mayor रितु तावड़े ने सदन स्थगित कर दिया।

    यानी एक तरफ 19 सितंबर की विशेष कार्रवाई की घोषणा मौजूद है और दूसरी तरफ 29 सितंबर को आयुक्त के बारे में सामने आया स्पष्टीकरण है। 1 अक्टूबर को वास्तव में कौन-सी कार्रवाई होगी, इसका स्पष्ट प्रशासनिक स्वरूप अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

    14 फीट की सीमा पर भी उठे सवाल

    इस कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा 14 फीट की ऊंचाई की सीमा है। Govandi New Sangam Welfare Society की ओर से अधिवक्ता Faiyaz Alam Shaikh ने BMC आयुक्त, SRA, MMRDA और Housing Department के Principal Secretary को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में 14 फीट की सीमा को पुराने कानूनी प्रावधान से जोड़ते हुए कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई और demolition के बजाय structural audit, eligibility verification और rehabilitation जैसे विकल्पों की मांग की गई।

    समाजवादी पार्टी के विधायक Rais Shaikh ने कहा था कि इस कार्रवाई से करीब 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह प्रभावित आबादी का राजनीतिक दावा है, BMC द्वारा जारी आधिकारिक population figure नहीं।

    रिहायश और पुनर्वसन का सवाल

    कार्रवाई के विरोध में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि यदि कोई संरचना हटाई जाती है तो वहां रहने वाले पात्र परिवारों का पुनर्वसन किस व्यवस्था के तहत होगा।

    वर्षा गायकवाड़ ने SRA, MHADA, PAP और cluster redevelopment जैसी व्यवस्थाओं के जरिए पात्र परिवारों के पुनर्वसन की मांग की है। BMC में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी झोपड़ीवासियों की पात्रता की जांच, 2011 या लागू cut-off date के आधार पर verification और उसके बाद rehabilitation की मांग उठाई है।

    इस बीच BMC House के Leader गणेश खनकर ने भी कार्रवाई स्थगित करने की मांग की थी। वहीं Mayor रितु तावड़े ने General Body में कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना फैसला आगे बढ़ाया गया तो उसे पलटने की मांग उठ सकती है।

    अब सवाल सिर्फ झोपड़ी तोड़ने का नहीं

    इस पूरे विवाद में एक और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने BJP पर दबाव में अपनी स्थिति संभालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर कुछ नागरिक कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई के विरोध को अनधिकृत झोपड़ियों को राजनीतिक संरक्षण देने के रूप में देखने की बात कही है। इन दावों और आरोपों के बीच प्रशासन के वास्तविक लिखित आदेश और कार्रवाई की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है।

    वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर प्रस्तावित कार्रवाई रोकने की मांग की। बैठक के बाद उनके हवाले से यह बात सामने आई कि इतनी बड़ी संख्या में संरचनाओं को एक ही दिन में गिराना व्यावहारिक नहीं होगा।

    BMC के अभियान की कमान किसके पास?

    19 सितंबर की योजना में आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी। इसके लिए अतिरिक्त महापालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन और संयुक्त आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।

    इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल यह है कि 1 अक्टूबर से प्रस्तावित विशेष अभियान के लिए जारी की गई आंतरिक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति में क्या बदलाव हुआ है।

    आम झोपड़ीवासी क्या समझें?

    फिलहाल 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना का BMC की सूची में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसी दिन पूरा घर गिरा दिया जाएगा। इसी तरह किसी संरचना पर जारी नोटिस, पहले की गई कार्रवाई और नई प्रस्तावित कार्रवाई—तीनों की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अलग हो सकती है।

    जिन लोगों को BMC का नोटिस मिला है, उन्हें अपने पास उपलब्ध पुराने दस्तावेज, पात्रता से जुड़े कागजात, redevelopment या SRA से संबंधित रिकॉर्ड और नोटिस की प्रतियां सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी भी कार्रवाई की स्थिति में संबंधित BMC विभाग से लिखित स्थिति और लागू प्रक्रिया की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा।

    फिलहाल 1 अक्टूबर सबसे अहम तारीख बनी हुई है। 19 सितंबर को घोषित तीन महीने की विशेष मुहिम, 39,111 चिन्हित संरचनाओं का आंकड़ा और 29 सितंबर को सामने आया आयुक्त का स्पष्टीकरण—इन तीनों के बीच प्रशासनिक स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 1 अक्टूबर से BMC किस प्रकार की कार्रवाई शुरू करती है और क्या उसके लिए कोई स्पष्ट लिखित आदेश या वार्ड-स्तरीय प्रक्रिया सामने आती है।

  • Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा, समुद्री जीवन और मछुआरों की रोजी पर उठे सवाल

    Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा, समुद्री जीवन और मछुआरों की रोजी पर उठे सवाल

    Manori Desalination Plant के खिलाफ 19 अक्टूबर को मोर्चा होगा। 400 MLD परियोजना, brine discharge, मछली कारोबार और पर्यावरणीय शर्तों पर जानिए पूरा मामला।

    मुंबई: मनोरी में प्रस्तावित समुद्री जल शुद्धिकरण परियोजना को लेकर मछुआरा समुदाय और तटीय गांवों के लोगों का विरोध अब तेज हो गया है। गोरेई में 26 सितंबर को हुई बैठक में 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक मोर्चा निकालने का फैसला लिया गया। प्रदर्शनकारी बृहन्मुंबई महानगरपालिका की मनोरी-गोरेई Desalination Plant परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल समुद्र से बड़े पैमाने पर पानी खींचने, अत्यधिक नमक वाले brine को वापस समुद्र में छोड़ने और इसके संभावित असर को लेकर है।

    बैठक में गोरेई, मनोरी, पाली, मालवणी, उत्तन और उरण से जुड़े मछुआरा, किसान और तटीय समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में गोरेई विलेजर्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष स्विटी हेन्रिक्स, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के कार्याध्यक्ष और उत्तन निवासी बर्नार्ड डी’मेलो, गोरेई मच्छीमार सोसायटी के अध्यक्ष ओल्डिन वसाईकर, अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति के अध्यक्ष देवेंद्र तांडेल, नगरसेविका शर्मिला बागाजी, राजाराम पाटील, मनोज माशेलकर, हेमंत कोली, पाली-उत्तन मच्छिमार सहकारी सोसायटी के सचिव आल्सन निग्रेल लिंटन मुनीस, डेनिस डिसोजा और धारावी बेट के स्थानीय नागरिक मौजूद थे।

    19 अक्टूबर के मोर्चे में क्या मांग होगी?

    मछुआरा समुदाय की मुख्य मांग परियोजना को रद्द करने की है। समुदाय का कहना है कि मनोरी-गोरेई तट के समुद्री क्षेत्र पर उनकी आजीविका निर्भर है और परियोजना के कारण समुद्र से पानी लेने तथा प्रक्रिया के बाद अधिक नमक वाले पानी को वापस समुद्र में छोड़ने से मछली पकड़ने के क्षेत्र, समुद्री जैव विविधता और पारंपरिक रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।

    स्विटी हेन्रिक्स ने कहा कि स्थानीय लोगों से पर्याप्त चर्चा किए बिना पर्यावरण प्रभाव आकलन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और परियोजना का मछली पकड़ने, नौवहन तथा मछुआरों की आजीविका पर क्या असर होगा, इस पर स्पष्टता नहीं है। सितंबर में हुए विरोध के बाद अधिकारियों की ओर से बातचीत की पहल होने की बात भी सामने आई है।

    बर्नार्ड डी’मेलो ने कहा कि कोली समुदाय के लिए समुद्र केवल आय का साधन नहीं बल्कि उनकी परंपरा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने परियोजना से मछली पकड़ने के क्षेत्रों पर खतरे की आशंका जताई है।

    400 MLD की परियोजना में पहले कितना पानी बनेगा?

    मनोरी परियोजना को Sea Water Reverse Osmosis यानी SWRO तकनीक पर विकसित किया जा रहा है। इसकी पहली चरण की क्षमता 200 MLD रखी गई है और आगे इसे 400 MLD तक बढ़ाया जा सकता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 200 MLD Phase-I और भविष्य में 400 MLD क्षमता का उल्लेख है।

    परियोजना के लिए मनोरी गांव में लगभग 20 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार यह महाराष्ट्र सरकार की जमीन है, जो महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अधिकार क्षेत्र में थी। इसमें सर्वे नंबर 257 (भाग), 263, 289/1, 290 और 291 शामिल हैं। जमीन को पथरीली और बंजर प्रकृति की बताया गया है।

    समुद्र से पानी लेने के बाद क्या समुद्र में वापस जाएगा?

    यही विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहलू है।

    RO प्रक्रिया में समुद्री पानी से कम लवणता वाला पानी अलग किया जाता है और बचा हुआ ज्यादा लवणता वाला पानी brine के रूप में निकलता है। मनोरी परियोजना में इस brine को समुद्र में छोड़े जाने का प्रस्ताव है।

    पर्यावरणीय आकलन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार Phase-I में brine reject करीब 300 MLD और Phase-II में करीब 600 MLD तक पहुंच सकता है। प्रस्तावित brine की औसत लवणता लगभग 56.8 PSU बताई गई है, जबकि intake क्षेत्र के समुद्री पानी की लवणता करीब 35.5 PSU बताई गई है।

    मछुआरा संगठनों को आशंका है कि इस तरह के concentrated brine discharge से मछलियों के प्रजनन क्षेत्र, plankton और समुद्री food chain पर असर पड़ सकता है। हालांकि उपलब्ध पर्यावरणीय दस्तावेजों में इसे संभावित प्रभाव के रूप में जांचने और नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल किए गए हैं; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि परियोजना से निश्चित रूप से समुद्री नुकसान होगा।

    सरकारी दस्तावेजों में भी brine के असर पर सवाल उठा

    25 मार्च 2026 की महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में परियोजना पर चर्चा के दौरान concentrated brine discharge और मछलियों पर संभावित असर से जुड़ा सवाल सामने आया था। परियोजना के सलाहकार पक्ष ने discharge location और उससे जुड़े नियंत्रण उपायों की जानकारी दी थी।

    इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली, लेकिन मंजूरी के साथ marine ecology की निगरानी और brine के दीर्घकालीन प्रभाव का अध्ययन करने की शर्तें भी रखी गईं। पर्यावरणीय असर पर शोध के लिए शुरुआती तौर पर 10 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की शर्त सामने आई है। इसमें brine के पुन: उपयोग, बेहतर desalination technology और marine pollution कम करने के उपायों पर भी शोध शामिल है।

    मनोरी क्रीक और मैंग्रोव को लेकर क्या शर्तें हैं?

    परियोजना से जुड़े CRZ दस्तावेजों में साइट को CRZ-I(B), CRZ-III और CRZ-IV क्षेत्रों से संबंधित बताया गया है। मनोरी क्रीक में स्थानीय मछुआरों की गतिविधियों और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को लेकर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

    CRZ मंजूरी में मनोरी क्रीक में गतिविधियों पर प्रतिबंध, आसपास के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और समुद्र की सतह तथा समुद्री तल पर असर कम करने के उपाय शामिल किए गए हैं। पाइपलाइन बिछाने में tunnelling का इस्तेमाल करने की शर्त भी रखी गई है ताकि seabed disturbance कम किया जा सके।

    इसका मतलब यह है कि परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन मंजूरी बिना शर्त नहीं है। Marine ecology, brine discharge, मैंग्रोव और समुद्री क्षेत्र की निगरानी से जुड़ी जिम्मेदारियां भी परियोजना का हिस्सा हैं।

    मछुआरों की आजीविका का सवाल कितना बड़ा है?

    मनोरी और आसपास के तटीय इलाकों में विवाद केवल समुद्र में मछली पकड़ने तक सीमित नहीं है। पर्यावरणीय आकलन से जुड़ी जानकारी के अनुसार परियोजना क्षेत्र की लगभग 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से fishing और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर बताई गई है। मनोरी में करीब 200 motorised और 150 non-motorised boats तथा उत्तन में लगभग 400 fishing boats का उल्लेख किया गया है।

    मछली कारोबार से जुड़े रोजगार में मछली पकड़ने के अलावा fish-seed collection, sorting, झींगा छीलना, मछली सुखाना, बिक्री, जाल बनाना, नावों की मरम्मत और अन्य shore-based activities भी शामिल हैं। महिलाओं की भूमिका भी इस पूरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बताई गई है।

    मछली पकड़ने का सामान्य मौसम 15 अगस्त से 31 मई तक बताया गया है। ऐसे में अक्टूबर में प्रस्तावित मोर्चा उस समय हो रहा है जब स्थानीय fishing season चल रहा होगा।

    BMC को इस परियोजना की जरूरत क्यों लगती है?

    मुंबई की बढ़ती जल जरूरत को देखते हुए BMC desalination को अतिरिक्त और climate-resilient water source के रूप में विकसित करना चाहता है। BMC के आधिकारिक दस्तावेजों में मनोरी परियोजना को शहर की जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रस्तावित किया गया है। 2041 के लिए मुंबई की projected water demand 6,424 MLD बताई गई है।

    इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा जल स्रोतों पर निर्भरता के साथ एक अतिरिक्त समुद्री जल स्रोत तैयार करना है। Phase-I में 200 MLD और आगे 400 MLD तक क्षमता बढ़ाने की योजना इसी दीर्घकालीन जरूरत से जुड़ी है।

    मनोरी से मुंबई तक पानी कैसे पहुंचेगा?

    Desalination plant से तैयार पानी को शहर के वितरण नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए अलग underground conveyance system तैयार किया जा रहा है। मनोरी से चर्कोप और आगे महावीर नगर, कांदिवली तक लगभग 7.2 किलोमीटर का underground tunnel प्रस्तावित है।

    इस tunnel और संबंधित infrastructure के लिए लगभग 2,241.3 करोड़ रुपये का contract Afcons Infrastructure Ltd से जुड़ा है। परियोजना को पूरा करने की अवधि 45 महीने और commissioning का लक्ष्य दिसंबर 2029 बताया गया है।

    11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा सिर्फ plant की निर्माण लागत नहीं

    मनोरी परियोजना की लागत को लेकर अलग-अलग आंकड़ों के कारण भ्रम की स्थिति रही है। BMC से जुड़े दस्तावेजों और tender information के अनुसार 11,166 करोड़ रुपये का आंकड़ा केवल plant बनाने की लागत नहीं बल्कि लंबे समय के operation, maintenance, electricity और अन्य खर्चों को भी शामिल करता है। GVPR Engineers Limited को परियोजना के लिए चुना गया था।

    परियोजना की मूल construction cost करीब 4,077 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा 20 साल के maintenance और electricity समेत अन्य lifecycle expenses जुड़े हैं। दूसरी ओर, 2,241.3 करोड़ रुपये का आंकड़ा अलग underground water-conveyance tunnel package से संबंधित है।

    परियोजना की शुरुआत से अब तक क्या हुआ?

    मनोरी desalination project को BMC के Standing Committee और Municipal Corporation से फरवरी 2021 में मंजूरी मिली थी। शुरुआत में 200 MLD plant को भविष्य में 400 MLD तक विस्तार योग्य बनाने की योजना रखी गई थी। शुरुआती tender प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद BMC ने 28 मई 2025 को Design-Build-Operate आधार पर नया tender जारी किया।

    मार्च 2026 में पुराने baseline environmental data की validity समाप्त होने के बाद जनवरी-फरवरी 2026 में environmental baseline monitoring दोबारा की गई और updated EIA पेश किया गया।

    इसके बाद परियोजना को CRZ मंजूरी मिली। मंजूरी के साथ marine research, brine monitoring, मैंग्रोव सुरक्षा, मनोरी क्रीक की सुरक्षा, tunnelling और renewable-energy से जुड़ी शर्तें लागू की गईं।

    अब आगे क्या होगा?

    26 सितंबर की बैठक के बाद 19 अक्टूबर को जिला कलेक्टर कार्यालय तक प्रस्तावित मोर्चा इस विवाद का अगला बड़ा घटनाक्रम होगा। मछुआरा और तटीय समुदाय परियोजना को रद्द करने की मांग पर कायम हैं।

    दूसरी ओर, परियोजना को CRZ मंजूरी मिल चुकी है और BMC इसे मुंबई की दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए विकसित कर रहा है। अब विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहेगा कि पर्यावरणीय मंजूरी में रखी गई marine monitoring, brine management, मैंग्रोव संरक्षण और मनोरी क्रीक से जुड़ी शर्तों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और स्थानीय मछुआरा समुदाय के साथ आगे कितनी प्रभावी बातचीत होती है।

    19 अक्टूबर का मोर्चा इसी टकराव का अगला चरण होगा—एक तरफ मुंबई की बढ़ती पानी की जरूरत और दूसरी तरफ मनोरी-गोरेई के समुद्र पर निर्भर समुदाय की पर्यावरण और आजीविका संबंधी चिंताएं।

  • मानखुर्द से अगवा 2 साल का बच्चा 40 घंटे बाद मिला, महिला और पति गिरफ्तार

    मानखुर्द से अगवा 2 साल का बच्चा 40 घंटे बाद मिला, महिला और पति गिरफ्तार

    मानखुर्द मार्केट रोड से लापता 2 साल 4 महीने के बच्चे को 40 घंटे की तलाश के बाद पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। महिला और उसका पति गिरफ्तार।

    मुंबई: मानखुर्द मार्केट रोड इलाके से लापता हुए 2 साल 4 महीने के बच्चे को मुंबई पुलिस ने करीब 40 घंटे की लगातार तलाश के बाद सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने बच्चे को ले जाने वाली महिला मुस्कान भोलाकुमार साह और उसके पति भोलाकुमार जग्गु साह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, महिला बच्चे को अपने साथ ले गई थी, जबकि उसके पति ने कथित तौर पर इस वारदात में उसकी मदद की।

    घटना 23 सितंबर 2026 की शाम करीब 6 बजे की है। बच्चा अपने परिवार के साथ मानखुर्द के मार्केट रोड इलाके में था। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गया। परिजनों की शिकायत के बाद मानखुर्द पुलिस ने अपराध क्रमांक 627/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत मामला दर्ज किया।

    सीसीटीवी से मिली अहम कड़ी

    बच्चे की तलाश के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में मानखुर्द, देवनार, आरसीएफ और ट्रॉम्बे पुलिस थानों की कुल आठ टीमें बनाई गईं। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान एक महिला बच्चे को अपने साथ ले जाती दिखाई दी।

    इसके बाद पुलिस ने महिला की संभावित गतिविधियों और आवाजाही का पता लगाने के लिए तकनीकी जानकारी का विश्लेषण शुरू किया। संदिग्धों की गतिविधियों की जांच के साथ पुलिस ने मानवीय सूचना तंत्र की भी मदद ली। बच्चे को मुंबई से बाहर ले जाए जाने की आशंका को देखते हुए रेलवे स्टेशनों सहित दूसरे संभावित स्थानों पर भी तलाश की गई।

    40 घंटे बाद बच्चे की सकुशल बरामदगी

    पुलिस की दिन-रात लगातार चली करीब 40 घंटे की तलाश के बाद बच्चे का पता लगा लिया गया। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर उसके परिवार के हवाले कर दिया। बच्चे के मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली।

    मामले में मुस्कान भोलाकुमार साह और उसके पति भोलाकुमार जग्गु साह, दोनों निवासी दुर्गामाता मंदिर गली, महाराष्ट्र नगर, मानखुर्द, मुंबई को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, महिला की भूमिका बच्चे को अपने साथ ले जाने की थी, जबकि उसके पति पर इस अपराध में उसकी मदद करने का आरोप है।

    अपहरण के पीछे की वजह की जांच

    पुलिस जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि बच्चे को ले जाने के पीछे आरोपियों का कथित मकसद क्या था। बच्चे को कहां रखा गया था और आरोपी उसे किस दिशा में ले गए थे, इसकी विस्तृत जानकारी भी जांच का हिस्सा है। पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर इस पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है।

    इस मामले में बच्चे को सकुशल बरामद करना जांच की सबसे अहम सफलता रही। हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महिला ने बच्चे को क्यों अपने साथ ले जाया और इस घटना में उसके पति की भूमिका किस स्तर तक थी।

    धारा 137(2) में सात साल तक की सजा का प्रावधान

    भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 नाबालिग को उसके वैध अभिभावक की देखरेख से बिना सहमति ले जाने से संबंधित है। धारा 137(2) के तहत दोष सिद्ध होने पर सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

    मुंबई में लापता बच्चों के मामलों पर भी पुलिस की लगातार नजर रहती है। 2025 में मुंबई पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, नाबालिगों के लापता होने के 2,182 मामले दर्ज हुए थे और 2,165 बच्चों को तलाश कर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया था। इन आंकड़ों में लापता नाबालिगों के वे मामले भी शामिल होते हैं जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत अपहरण के रूप में दर्ज किया जाता है।

    फिलहाल मानखुर्द मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बच्चे की बरामदगी के बाद पुलिस अब उसके अपहरण की वजह, आरोपियों की पूरी भूमिका और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

  • Mount Mary Fair में नशे में धुत्त महिला का हंगामा, हिरासत में लेने गई महिला पुलिसकर्मी को काटा

    Mount Mary Fair में नशे में धुत्त महिला का हंगामा, हिरासत में लेने गई महिला पुलिसकर्मी को काटा

    मुंबई के Mount Mary Fair में हंगामा कर रही 28 वर्षीय KJ Nikki ने महिला कांस्टेबल यशोदा चौगुले को कथित तौर पर काटा। Bandra Court ने कस्टडी में भेजा।

    मुंबई: बांद्रा वेस्ट में Mount Mary Fair के दौरान हंगामा कर रही 28 वर्षीय महिला को हिरासत में लेने की कोशिश के दौरान महिला पुलिस कांस्टेबल पर कथित हमला करने और उसका हाथ काटने का मामला सामने आया है। घटना 20 सितंबर की रात करीब 9:10 बजे Carmel Church, Chapel Road के बाहर हुई। पुलिस ने आरोपी KJ Nikki को गिरफ्तार कर Bandra Court में पेश किया, जहां उसे कस्टडी में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस के मुताबिक, Mount Mary Fair के दौरान सड़क पर दो महिलाओं के हंगामा करने की सूचना मिली थी। इसके बाद Bandra Police Mobile 06 की टीम मौके पर पहुंची। Beat officer API Varapde ने स्थिति संभालने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की मदद मांगी थी। पुलिस के अनुसार दोनों महिलाएं नशे की हालत में थीं।

    क्या हुआ था Mount Mary Fair में?

    पुलिस के अनुसार, मौके पर पहुंची महिला पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को शांत करने और वहां से चले जाने के लिए कहा। आरोप है कि KJ Nikki ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की और पुलिस वाहन में जाने से इनकार करते हुए हिरासत का विरोध किया।

    इसी दौरान स्थिति बिगड़ गई। शिकायत के अनुसार, Nikki ने महिला पुलिस कांस्टेबल यशोदा चौगुले (37) को पीछे से पकड़ लिया और उनके बाएं हाथ पर काट लिया। इससे चौगुले के हाथ से खून निकलने की बात सामने आई है। दूसरी महिला कांस्टेबल Padvi ने हस्तक्षेप कर चौगुले को छुड़ाया, जबकि अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने आरोपी को काबू में किया।

    शिकायत में डंडे से मारने का भी आरोप

    इस मामले में सिर्फ काटने का ही आरोप नहीं है। यशोदा चौगुले की शिकायत के अंतिम विवरण में आरोप लगाया गया है कि काटने से पहले उनके बाएं हाथ पर डंडे से वार किया गया था।

    पुलिस ने आरोपी महिला को Bandra Police Station ले जाने के बाद यशोदा चौगुले और आरोपी दोनों का medical examination कराया। शिकायत में आरोपी पर सार्वजनिक शांति भंग करने, पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज करने और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।

    Bandra Court में पेशी के बाद क्या हुआ?

    गिरफ्तारी के बाद KJ Nikki को Bandra Court के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने उसे कस्टडी में भेज दिया। मामले की आगे की जांच Bandra Police कर रही है।

    Mount Mary Fair में भारी पुलिस बंदोबस्त क्यों था?

    Mount Mary Fair के दौरान Bandra में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और लोगों की आवाजाही रहती है। इसी वजह से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे ही सुरक्षा बंदोबस्त के दौरान यह विवाद सामने आया।

    इस घटना में फिलहाल पुलिस की कार्रवाई, महिला कांस्टेबल यशोदा चौगुले की शिकायत और आरोपी की कोर्ट में पेशी प्रमुख घटनाक्रम हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।

  • मुंबई Water Cut: 29 सितंबर को चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 24 घंटे पानी बंद, 7 दिन लो-प्रेशर

    मुंबई Water Cut: 29 सितंबर को चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 24 घंटे पानी बंद, 7 दिन लो-प्रेशर

    मुंबई के चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द में 29 सितंबर से 24 घंटे पानी बंद रहेगा। पूरी प्रभावित इलाकों की सूची और 7 दिन के लो-प्रेशर की जानकारी देखें।

    मुंबई: चेंबूर, गोवंडी और मानखुर्द के कई इलाकों में 29 सितंबर को 24 घंटे पानी की सप्लाई बंद रहेगी। BMC नए water tunnel की commissioning का काम करेगी, जिसके चलते 29 सितंबर सुबह 10 बजे से 30 सितंबर सुबह 10 बजे तक प्रभावित क्षेत्रों में पानी नहीं आएगा। इसके बाद भी करीब सात दिनों तक कुछ इलाकों में पानी कम दबाव यानी low pressure से मिलने की संभावना है।

    BMC ने प्रभावित इलाकों के निवासियों को shutdown शुरू होने से पहले पर्याप्त पानी जमा रखने और पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने की सलाह दी है।

    कब से कब तक बंद रहेगी पानी की सप्लाई?

    पानी की सप्लाई 29 सितंबर सुबह 10 बजे से बंद होगी और 30 सितंबर सुबह 10 बजे बहाल की जाएगी। हालांकि, supply शुरू होने के बाद तुरंत सामान्य pressure मिलने की गारंटी नहीं है। BMC के अनुसार, इसके बाद लगभग सात दिनों तक affected areas में low-pressure water supply की स्थिति रह सकती है।

    इसका मतलब है कि 24 घंटे का complete shutdown खत्म होने के बाद भी ऊपरी मंजिलों, ज्यादा ऊंचाई वाली इमारतों और उन housing societies में परेशानी रह सकती है जहां पानी पहुंचने के लिए पर्याप्त pressure जरूरी होता है।

    M-East Ward में किन इलाकों पर असर?

    M-East Ward में Lallubhai Compound, Shivajinagar, Washinaka, Mankhurd, Govandi, Bainganwadi, Bharat Nagar, Cheetah Camp, Deonar Village और Deonar Colony, Rafiq Nagar, Mandala, Padma Nagar, Vishnu Nagar, Maharashtra Nagar और Indian Oil Nagar प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

    इसके अलावा BD Patil Marg के आसपास refinery area के कुछ हिस्सों में भी पानी की सप्लाई प्रभावित होगी।

    M-West Ward में किन इलाकों में पानी बंद रहेगा?

    M-West Ward में Chembur के बड़े हिस्से में पानी की सप्लाई प्रभावित होगी। इनमें Maitri Park, Ghatla, Chembur Gaothan, Subhash Nagar, Suman Nagar, Tilak Nagar, Sindhi Camp, Chembur Camp, Gandhi Market, Central Avenue Road, R C Marg, Mahul Village, Wadala, Vashi Naka, Bhakti Park और Sahakar Nagar शामिल हैं।

    Shell Colony और P L Lokhande Marg के आसपास के इलाकों में भी असर पड़ेगा।

    कौन-कौन से बड़े संस्थान प्रभावित क्षेत्र में हैं?

    प्रभावित क्षेत्र की सूची में BPCL, Mazagon Dock, Tata Power, Aegis Ltd और BPT जैसे बड़े institutional और industrial establishments भी शामिल हैं।

    इन संस्थानों के अपने internal water-storage और supply arrangements अलग हो सकते हैं, इसलिए इनके operational impact को residential water supply के समान मानना उचित नहीं होगा।

    नए water tunnel की commissioning क्यों हो रही है?

    यह shutdown केवल सामान्य पाइपलाइन maintenance के लिए नहीं है। BMC Mumbai के eastern और central हिस्सों के water-distribution network को मजबूत करने के लिए नए underground water tunnel system की commissioning कर रही है।

    इस broader network में Amar Mahal से Pratiksha Nagar तक का करीब 1,800-mm diameter का tunnel शामिल है। यह network Parel, Trombay Reservoir और आगे Turbhe High Level Reservoir से जुड़ता है। ऐसे connection का उद्देश्य water distribution network को मजबूत करना और अलग-अलग water-supply systems के बीच distribution capacity को बेहतर बनाना है।

    29 सितंबर का shutdown इसी broader tunnel commissioning process की अगली operational stage से जुड़ा है।

    2026 में पहले भी हो चुके हैं water shutdown

    Chembur, Govandi और Mankhurd के लिए 2026 में tunnel-related water-supply disruptions पहले भी हो चुके हैं। मई में Amar Mahal से Pratiksha Nagar तक नए 1,800-mm tunnel को commission करने के लिए 30 घंटे का बड़ा shutdown किया गया था। इसके बाद मई में ही Chembur, Govandi और Mankhurd के कुछ हिस्सों में tunnel commissioning से जुड़े काम के कारण अलग water cut भी हुआ था।

    इसलिए 29 सितंबर का shutdown इस क्षेत्र के water infrastructure में चल रहे बड़े commissioning और network-integration work की अगली कड़ी है।

    30 सितंबर के बाद पानी पूरी तरह सामान्य कब होगा?

    30 सितंबर सुबह 10 बजे से supply बहाल होने की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में करीब सात दिनों तक low pressure रहने की संभावना है। इसलिए पानी आने का मतलब यह नहीं होगा कि हर इलाके में तुरंत सामान्य pressure बहाल हो जाएगा।

    खासकर ऊपरी मंजिलों और ऐसे residential buildings में जहां पानी overhead tanks तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त pressure की जरूरत होती है, recovery period के दौरान ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है।

    Residents को क्या करना चाहिए?

    प्रभावित इलाकों के घरों और housing societies को 29 सितंबर सुबह 10 बजे से पहले अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त पानी का भंडारण कर लेना चाहिए। पानी का इस्तेमाल पीने, खाना बनाने, सफाई और अन्य जरूरी घरेलू कामों के लिए प्राथमिकता के आधार पर करना उपयोगी रहेगा।

    Housing societies को shutdown से पहले अपने overhead और storage tanks की स्थिति भी जांच लेनी चाहिए, ताकि 24 घंटे की supply disruption के दौरान उपलब्ध storage का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।

    क्या BMC टैंकर से पानी उपलब्ध कराएगी?

    29 सितंबर के shutdown के लिए उपलब्ध ताजा सार्वजनिक जानकारी में प्रभावित इलाकों के लिए किसी specific tanker point या अलग tanker deployment schedule की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए किसी particular location पर tanker उपलब्ध होने का दावा बिना BMC की पुष्टि के नहीं किया जाना चाहिए।

    अभी सबसे जरूरी बात यह है कि प्रभावित निवासी shutdown से पहले अपनी पानी की जरूरत पूरी करने की तैयारी रखें।

    पानी की सप्लाई पर असर क्यों महत्वपूर्ण है?

    Chembur, Govandi और Mankhurd के प्रभावित हिस्सों में बड़ी residential आबादी के साथ commercial, institutional और industrial establishments भी हैं। ऐसे में 24 घंटे का shutdown केवल घरेलू पानी की समस्या तक सीमित नहीं रहेगा। इसके बाद सात दिनों तक low pressure रहने की स्थिति भी उन इमारतों और कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो नियमित municipal water pressure पर निर्भर हैं।

    BMC का यह काम पूरा होने के बाद नए tunnel और existing water-distribution network के बीच connection और commissioning प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल residents के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थिति 29 सितंबर से शुरू होने वाला 24-hour shutdown और उसके बाद संभावित सात दिन का low-pressure period है।