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कांदिवली वेस्ट में तड़के कमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। दमकल ने धुएं से भरी इमारत से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, कोई घायल नहीं हुआ।
मुंबई: कांदिवली वेस्ट में सोमवार तड़के एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। कांदिवली रेल्वे स्टेशन फाटक रोड पर अभिराही होटल के पास स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में करीब सुबह 4:14 बजे आग लगने की सूचना मुंबई फायर ब्रिगेड को मिली।
आग के बाद पूरी बिल्डिंग में धुआं फैल गया था। ऐसे में दूसरी मंजिल पर मौजूद लॉजिंग हाउस में रह रहे 11 लोगों को दमकलकर्मियों ने सीढ़ियों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल वायरिंग और इंस्टॉलेशन, लकड़ी के फर्नीचर, तिरपाल, बांस के साथ प्लास्टिक और एल्युमिनियम की सजावटी सामग्री तक सीमित रही। चौथी मंजिल पर मौजूद तिरुपति बैंक्वेट के करीब 50 वर्ग फीट हिस्से में भी आग का असर हुआ, जहां फर्नीचर, कपड़े और फॉल्स सीलिंग को नुकसान पहुंचा।
फायर ब्रिगेड ने बचाई जान
घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के साथ-साथ बिल्डिंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। करीब 6:07 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। शुरुआती तौर पर इस घटना को Level-1 Fire के तौर पर बताया गया है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि आग के दौरान बिल्डिंग में मौजूद 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी जनहानि की खबर नहीं है। हालांकि, बिल्डिंग के कुछ हिस्सों और अंदर रखे सामान को नुकसान पहुंचा है।
आग आखिर किस वजह से लगी? इसका अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही आग लगने की सही वजह और नुकसान की पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।
मुंबई के दहिसर पश्चिम में घर के अंदर हाइड्रोपोनिक गांजा उगाने का खुलासा। MHB पुलिस ने बब्बू कामत को गिरफ्तार किया, 2 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
मुंबई: मुंबई में गांजे की खेती का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया है। दहिसर पश्चिम के गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4 यानी (आएसी कॉलोनी) के एक घर में कथित तौर पर हाइड्रोपोनिक तरीके से गांजा उगाया जा रहा था। MHB पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि सूत्रों के मुताबिक दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान बब्बू सोनू कामत के रूप में हुई है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक राहुल और अभिषेक कन्नौजिया इस मामले में फरार बताए जा रहे हैं। दोनों की भूमिका और इस पूरे मामले में उनकी exact involvement की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह है कि पुलिस को सिर्फ तैयार गांजा नहीं मिला, बल्कि घर के अंदर पौधे उगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा setup भी बरामद हुआ है।
दहिसर के घर में चल रहा था कथित गांजा cultivation setup
मिली जानकारी के मुताबिक MHB पुलिस ने गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4, दहिसर पश्चिम स्थित एक घर में कार्रवाई की।
पुलिस से उपलब्ध विवरण के मुताबिक यहां हाइड्रोपोनिक पद्धति से गांजा उगाने का कथित setup तैयार किया गया था। मौके से सूखा गांजा, जीवित पौधे और cultivation में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के equipment और chemicals बरामद किए गए।
बरामद पौधे और सूखे गंजे कि तस्वीर
यानी मामला सिर्फ गांजा रखने तक सीमित था या इसके पीछे बाकायदा local production और supply का network काम कर रहा था, अब पुलिस की जांच का बड़ा focus यही है।
54 ग्राम गांजा और 179 ग्राम जीवित पौधे बरामद
एनएचबी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे ने बताया कि कार्रवाई में करीब 54 ग्राम सूखा गांजा बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹1.62 लाख आंकी गई है।
इसके अलावा करीब 179 ग्राम जीवित गांजे के पौधे भी मिले हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब ₹2.68 लाख आंकी जा रही है।
यानी सूखे गांजे और जीवित पौधों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹4.30 लाख बताई गई है।
लेकिन पुलिस के लिए इससे भी ज्यादा important बरामदगी उस cultivation setup की है, जिसे कथित तौर पर इन पौधों को grow करने के लिए तैयार किया गया था।
घर में मिला AC, LED, Pump से लेकर pH Meter तक
पुलिस के मुताबिक मौके से cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाले कई equipment और chemicals बरामद किए गए हैं।
इनमें पानी की टंकी, water pump, air filter, LED lights, AC, fans, pH meter, TDS meter, temperature meter, air circulation से जुड़े सामान, grow tent और अलग-अलग chemicals शामिल बताए गए हैं।
इन equipment और chemicals की पुलिस द्वारा बताई गई अनुमानित कीमत करीब ₹1.76 लाख है।
इस तरह मुंबई पुलिस के मुताबिक गांजा, पौधे और cultivation equipment व chemicals सहित पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत करीब ₹6.07 लाख है।
यह valuation पुलिस द्वारा बताई गई estimated value है।
आखिर घर में गांजा उगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
अगर पुलिस की शुरुआती जांच में यह साबित होता है कि बरामद equipment का इस्तेमाल cannabis cultivation के लिए किया जा रहा था, तो investigation सिर्फ बब्बू कामत की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी।
गिरफ्तार आरोपी के साथ एनएचबी पुलिस की टीम
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि बीज या पौधे कहां से आए, equipment किसने खरीदा, यह setup कब से चल रहा था और तैयार गांजा किसे supply किया जाना था।
इसके अलावा आरोपी के mobile phone, WhatsApp या दूसरे communication channels और financial transactions की जांच से भी आगे की कड़ी मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में राहुल और अभिषेक कन्नौजिया नाम के दो अन्य लोग फरार बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन दोनों के खिलाफ आरोपों और उनकी exact भूमिका को अभी पुलिस की जांच के आधार पर ही समझना होगा। इसलिए फिलहाल उन्हें “फरार बताए जा रहे आरोपी” के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अगर पुलिस की जांच में दोनों की भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना अहम होगा कि cultivation setup तैयार करने, पौधे लाने, गांजा बेचने या customers तक पहुंचाने में उनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस टीम की निगरानी में हुई कार्रवाई
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
इसमें पुलिस उपायुक्त संदीप पुंजे, गोरेगांव विभाग के ACP सुधाकर शिंदे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे, पुलिस निरीक्षक मिलिंद नागपुरे और पुलिस निरीक्षक दिलीप इंगळे के मार्गदर्शन का उल्लेख है।
जांच टीम में पुलिस उपनिरीक्षक संदीप वत्रे समेत पुलिसकर्मियों के नाम भी कार्रवाई से जुड़े बताए गए हैं।
मामले की जांच फिलहाल MHB पुलिस कर रही है।
मुंबई में Hydroponic Weed का बढ़ता नेटवर्क?
दहिसर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में hydroponic weed से जुड़े बड़े smuggling cases भी सामने आते रहे हैं।
मार्च 2026 में Mumbai Customs के Air Intelligence Unit ने Bangkok से आने वाले चार passengers के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 64.394 kg suspected hydroponic weed जब्त किया था। इसकी estimated illicit market value करीब ₹64.394 करोड़ बताई गई थी। खबर के मुताबिक उस समय तक वित्त वर्ष 2025-26 में CSMIA Airport Commissionerate ने 244 मामलों में 1,330 kg से ज्यादा hydroponic weed जब्त की थी और 286 लोगों को गिरफ्तार किया था।
जून 2026 में भी Mumbai Airport पर Bangkok से आए passenger से करीब 11.824 kg hydroponic weed बरामद होने का मामला सामने आया था। Customs के मुताबिक इसकी estimated illicit market value करीब ₹11.82 करोड़ थी।
इससे साफ है कि मुंबई में hydroponic cannabis को लेकर enforcement agencies पहले से alert हैं।
यह सवाल इस कार्रवाई के बाद काफी लोगों के मन में आएगा।
NDPS Act के तहत cannabis plant की cultivation प्रतिबंधित है। इसलिए सिर्फ यह कहने से कि पौधे घर के अंदर, गमले में या किसी controlled setup में उगाए जा रहे थे, activity legal नहीं हो जाती।
हालांकि किसी specific case में कौन-सी धाराएं लागू होंगी और prosecution को क्या साबित करना होगा, यह FIR, seizure, forensic evidence और investigation पर depend करता है।
इसलिए दहिसर मामले में भी आगे की legal position MHB पुलिस की FIR और court proceedings से ज्यादा साफ होगी।
मामला सिर्फ गांजे की खेती का है या पीछे कोई बड़ा network?
अगर घर में सिर्फ कुछ पौधे मिलते तो मामला अलग होता। लेकिन यहां पुलिस के मुताबिक जीवित पौधे, सूखा गांजा और cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाला equipment व chemicals भी मिले हैं।
अब पुलिस के सामने तीन बड़ी कड़ियां हैं—
पौधे कहां से आए?
गांजा किसे जाना था?
पैसा किसके जरिए आ रहा था और किस तक पहुंच रहा था?
अगर इन सवालों के जवाब में कोई supplier या buyer सामने आता है, तो दहिसर की यह कार्रवाई एक बड़े drug network की तरफ भी इशारा कर सकती है।
हालांकि अभी ऐसा कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Drug cultivation और supply का असर सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहता।
सबसे बड़ा concern यह है कि drug networks में युवाओं को छोटे-level sellers, couriers या carriers के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। Mumbai Airport के पुराने और हालिया मामलों में भी agencies ने international routes और larger syndicates की जांच की है। मार्च 2026 की एक बड़ी कार्रवाई में Customs ने कहा था कि गिरफ्तार किए गए passengers को Bangkok से cannabis लेकर Mumbai में associates तक पहुंचाना था।
ऐसे में दहिसर जैसे residential area में कथित cultivation setup मिलना local community के लिए भी चिंता की बात है।
अब पुलिस को यह पता लगाना होगा कि यह isolated operation था या इसके पीछे customers, suppliers और distributors की कोई chain भी थी।
बब्बू कामत की गिरफ्तारी के बाद investigation का अगला step सिर्फ पूछताछ तक सीमित नहीं होगा।
पुलिस को कथित तौर पर बीज और पौधों का source, cultivation equipment की खरीद, mobile communication, financial transactions, potential buyers और suppliers तक पहुंचने की कोशिश करनी होगी।
साथ ही सूत्रों के मुताबिक फरार बताए जा रहे राहुल और अभिषेक कन्नौजिया की भूमिका और whereabouts की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बब्बू सोनू कामत गिरफ्तार है, राहुल और अभिषेक कन्नौजिया फरार बताए जा रहे हैं और MHB पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कार्रवाई में 54 ग्राम सूखा गांजा, करीब 179 ग्राम जीवित पौधे और cultivation equipment व chemicals समेत करीब ₹6.07 लाख का माल जब्त किया गया है।
मुंबई के चेंबूर में FDA ने Expired Frooti, Appy Fizz समेत beverages का stock जब्त किया। Warehouse और 2 vehicles seal, आगे की sale पर रोक।
मुंबई: चेंबूर में FDA की रातभर चली कार्रवाई में expired Frooti, Appy Fizz और दूसरे beverages का stock पकड़ा गया है। वाशी नाका के प्रयाग नगर स्थित warehouse में हुई इस कार्रवाई के बाद गोदाम और दो vehicles को seal कर दिया गया।
मुंबई में cold drink या packaged beverage खरीदने वालों के लिए यह खबर सीधे काम की है। वजह है कि FDA की जांच में expired beverages का stock सामने आया है और अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गोदाम में expired माल क्यों रखा था, बल्कि यह भी है कि यह stock आगे कहां जाने वाला था।
चेंबूर में रातभर चला FDA का Raid
महाराष्ट्र Food and Drug Administration यानी FDA ने चेंबूर के वाशी नाका, प्रयाग नगर, L.U. गडकरी मार्ग स्थित एक warehouse में कार्रवाई की।
यह कार्रवाई 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे से 14 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे तक चली। यानी FDA की टीम ने रातभर warehouse की जांच की। कार्रवाई में 8 अधिकारी शामिल थे।
जांच के दौरान अधिकारियों को expired food और beverages का stock मिला।
Frooti और Appy Fizz समेत Expired Drinks मिले
जांच में सामने आए stock में Frooti, Appy Fizz, Candy Juice और दूसरे beverages शामिल बताए गए हैं।
खबर के मुताबिक Chembur warehouse से करीब 1,000 expired flavoured sparkling drink bottles मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस कार्रवाई से जुड़ी earlier report में जब्त stock की कुल कीमत करीब ₹1 लाख बताई गई थी।
यानी मामला सिर्फ एक-दो expired bottles का नहीं था, बल्कि warehouse level पर रखे गए stock का था।
FDA ने Warehouse के साथ 2 Vehicles भी किए Seal
इस कार्रवाई का एक अहम हिस्सा यह है कि FDA ने सिर्फ expired stock जब्त नहीं किया।
Warehouse को seal किया गया और दो vehicles को भी seal कर दिया गया।
चेंबूर की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब Mumbai और Maharashtra में FDA food-safety violations पर लगातार action ले रहा है।
ताजा statewide inspections में expired food, खराब storage और hygiene violations को लेकर कई establishments पर कार्रवाई की गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक Mumbai FDA ने inspections के बाद 10 food business licences suspend किए हैं और Chembur warehouse से expired flavoured sparkling drinks भी जब्त किए गए।
इससे साफ है कि FDA का focus सिर्फ restaurants तक सीमित नहीं है। Warehouse और supply chain level पर भी food products की जांच की जा रही है।
क्या Frooti या Appy Fizz खरीदना बंद कर दें?
नहीं।
इस कार्रवाई को देखकर किसी भी पूरे brand के सभी products को unsafe मानना सही नहीं होगा।
यह कार्रवाई एक specific warehouse में मिले expired stock को लेकर है। इसका मतलब यह नहीं है कि market में बिक रहे हर Frooti या Appy Fizz product में कोई समस्या है।
लेकिन इस घटना के बाद एक काम जरूर करना चाहिए—
कोई भी packaged drink खरीदने से पहले उसकी date जरूर check करें।
Cold Drink खरीदते समय ये 3 चीजें जरूर देखें
सबसे पहले bottle या packet पर Expiry/Use By या Best Before date देखें।
दूसरा, seal और packaging check करें।
और तीसरा, अगर bottle या packet में leakage, damage या असामान्य swelling दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचें।
FSSAI के food-labelling requirements में packaged food पर जरूरी product और date-related information देने का प्रावधान है। इसलिए label पढ़ना consumer के लिए सबसे आसान safety check है।
Expiry Date और Best Before में फर्क समझना भी जरूरी
कई लोग Expiry Date और Best Before को एक ही समझते हैं, जबकि दोनों का मतलब अलग हो सकता है।
FSSAI के अनुसार Use By/Expiry date food की safety से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है, जबकि Best Before मुख्य रूप से उस अवधि को बताता है जिसमें product की quality अपने best level पर रहने की उम्मीद होती है।
इसलिए packaged food या drink खरीदते समय सिर्फ तारीख देखकर नहीं, बल्कि label पर तारीख किस रूप में दी गई है, यह भी देखना चाहिए।
चेंबूर FDA Raid से क्या साफ हुआ?
चेंबूर की इस कार्रवाई ने एक important सवाल सामने रखा है—expired food और beverages की supply chain पर निगरानी कितनी जरूरी है।
एक warehouse में stock पकड़े जाने के बाद अब यह जानना अहम होगा कि यह माल वहां कब से था, इसकी आगे की destination क्या थी और इस मामले में FDA की अगली कार्रवाई क्या होती है।
फिलहाल इतना साफ है कि चेंबूर के वाशी नाका में FDA ने expired beverage stock पर action लिया है, warehouse और दो vehicles को seal किया है और आगे की sale तथा transportation रोक दी गई है।
मुंबई में packaged drinks खरीदने वाले consumers के लिए इस पूरे मामले की सबसे जरूरी सीख यही है—
Brand देखकर नहीं, bottle की date और condition देखकर खरीदें।
Mumbai के कांदिवली में Amul-Gokul के नाम पर दूध में मिलावट का मामला सामने आया है। पुलिस ने 74 लीटर मिलावटी दूध और पाउच जब्त कर 48 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला और इसका Mumbai connection.
Mumbai Breaking News: अगर आप रोज सुबह packet वाला दूध खरीदते हैं और सिर्फ brand देखकर उसे safe मान लेते हैं, तो Kandivali से सामने आई यह खबर आपके लिए important है।
मुंबई के Kandivali East में Samta Nagar Police ने दूध में कथित मिलावट करने के आरोप में एक 48 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया है। Police के मुताबिक आरोपी branded milk में impure water मिलाकर उसे आगे बेचने की तैयारी कर रहा था। Raid के दौरान करीब 74 litres adulterated milk, Amul और Gokul के नाम वाले empty milk pouches और मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई।
Police के मुताबिक आरोपी को मौके पर ही पकड़ा गया। मामला इसलिए ज्यादा serious है क्योंकि यहां सिर्फ दूध में पानी मिलाने की बात नहीं है। Amul और Gokul के नाम वाले pouches मिलने से अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या branded packaging का इस्तेमाल करके मिलावटी दूध customers तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी?
हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Amul या Gokul की official supply chain का दूध मिलावटी पाया गया है। उपलब्ध reports के मुताबिक आरोपी के पास इन brands के नाम वाले pouches मिले हैं। यह जांच का विषय है कि ये pouches genuine थे या fake।
Kandivali में raid के दौरान क्या मिला?
Police के मुताबिक Samta Nagar Police की Detection Squad को information मिली थी कि Kandivali East में एक जगह पर branded milk में मिलावट की जा रही है।
इसके बाद 12 August 2026 की सुबह करीब 5:50 बजे police team ने raid की। Police का दावा है कि आरोपी को milk में impure water मिलाते हुए पकड़ा गया।
Raid में करीब 74 litres adulterated milk मिला। इसके अलावा Amul और Gokul के नाम वाले empty pouches और कथित तौर पर milk में मिलावट करने के लिए इस्तेमाल होने वाला material भी जब्त किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक milk को 1-litre और 500-ml packets में तैयार किया जा रहा था और आरोपी की पहचान Iranna Lingayya Gopanabonei, 48 के तौर पर हुई है।
74 लीटर दूध पकड़ा गया, लेकिन असली सवाल इससे बड़ा है
Police ने raid के दौरान 74 litres milk जब्त किया है। लेकिन यह सिर्फ वही quantity है जो कार्रवाई के समय मिली।
अब सबसे important सवाल यह है कि:
क्या इससे पहले भी इसी तरह का milk market में भेजा गया था?
अगर हां, तो कितना?
Police investigation में अब यह पता लगाना important होगा कि आरोपी यह काम कितने time से कर रहा था, रोज कितनी quantity तैयार करता था और यह milk किन लोगों या दुकानों तक पहुंचने वाला था।
यह भी पता लगाना होगा कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई supplier, distributor या retailer भी जुड़ा हुआ था।
Amul-Gokul का नाम क्यों आया और इसका क्या मतलब है?
यह बात consumers के लिए समझना बहुत जरूरी है।
“Amul या Gokul का original milk adulterated था” और “किसी ने Amul-Gokul के नाम वाले pouches का इस्तेमाल करके adulterated milk तैयार किया”—ये दोनों अलग बातें हैं।
Available reports में आरोपी के पास Amul और Gokul के नाम वाले pouches मिलने की बात है।
इसलिए investigation का एक बड़ा हिस्सा यह होना चाहिए कि ये pouches original supply chain के थे या counterfeit।
जब तक इसकी official confirmation नहीं होती, तब तक consumers को यह मान लेना सही नहीं होगा कि Amul या Gokul का पूरा branded milk unsafe है।
Mumbai में पहले भी सामने आ चुका है Fake Milk का मामला
Kandivali की यह घटना Mumbai में सामने आए recent milk-related cases से अलग नहीं देखी जा सकती।
कुछ समय पहले Mumbai Crime Branch ने Dahisar और Vasai area में एक alleged milk-adulteration network पर action लिया था।
उस case में police ने counterfeit Amul और Gokul milk pouches तैयार करने वाली alleged unit तक पहुंचने की बात कही थी। चार लोगों की गिरफ्तारी की report भी सामने आई थी। इसलिए Mumbai में अब सवाल सिर्फ milk की quality का नहीं है।
Fake packaging और branded names के misuse का angle भी सामने आ रहा है।
लेकिन Kandivali के आरोपी को उस पुराने case से जोड़ना अभी सही नहीं होगा। दोनों cases के बीच कोई direct link police investigation से confirm होना बाकी है।
Maharashtra में Synthetic Milk पर भी बड़ी कार्रवाई
Kandivali का मामला ऐसे time पर सामने आया है जब Maharashtra में synthetic milk और food adulteration को लेकर authorities पहले से action mode में हैं।
July में Maharashtra FDA ने Thane, Ahilyanagar, Solapur, Jalna और Pune में simultaneous raids की थीं। इन raids में alleged synthetic milk network के खिलाफ action लिया गया और कई लोगों की गिरफ्तारी की गई। Officials ने supply chain के अलग-अलग हिस्सों की जांच की बात कही थी।
Maharashtra में food-safety authorities अब सिर्फ manufacturing point तक सीमित रहने के बजाय milk collection से लेकर transport, distribution और retail तक पूरी chain पर ज्यादा focus करने की कोशिश कर रही हैं।
यही वजह है कि Kandivali case में भी supply chain की जांच आगे की सबसे important कड़ी हो सकती है।
Dharashiv से Mathura तक, Milk Adulteration का बड़ा सवाल
Maharashtra के Dharashiv district में भी synthetic milk को लेकर बड़ा मामला सामने आ चुका है। Reports में officials के हवाले से 2.3 crore litres तक कथित adulterated/synthetic milk से जुड़े अनुमान की बात कही गई थी।
वहीं Mathura में food-safety officials की कार्रवाई में करीब 1,500 kg alleged fake paneer और 3,000 litres synthetic milk मिलने की report सामने आई है।
दोनों cases Kandivali case से अलग हैं, लेकिन consumer concern एक ही है:
जो milk और dairy products हम रोज खरीदते हैं, उनकी quality और authenticity कैसे ensure होगी?
क्या मिलावटी दूध पीना dangerous हो सकता है?
इसका जवाब इस बात पर depend करता है कि milk में क्या मिलाया गया है।
Kandivali case में police ने impure water मिलाने का आरोप लगाया है। अगर पानी contaminated हो, तो उसमें harmful bacteria या दूसरे contaminants होने का risk हो सकता है।
लेकिन seized milk में कौन-सा exact adulterant था और उससे health पर कितना असर हो सकता है, यह laboratory testing के बाद ही confirm होगा।
इसलिए फिलहाल “जहरीला दूध”, “cancer वाला दूध” या किसी specific disease का दावा करना सही नहीं होगा।
घर पर दूध में मिलावट कैसे check करें?
FSSAI के DART यानी Detect Adulteration with Rapid Test programme में milk और दूसरे food products में common adulterants की basic screening के तरीके बताए गए हैं।
Kandivali case में आगे की investigation से consumers के लिए कुछ सवालों के जवाब सबसे ज्यादा important होंगे:
क्या 74 litres seized milk की laboratory testing हुई?
उसमें exact adulterant क्या मिला?
आरोपी यह काम कितने समय से कर रहा था?
क्या इससे पहले भी adulterated milk market में भेजा गया?
यह milk किन shops या customers तक पहुंचने वाला था?
Amul-Gokul के pouches original थे या counterfeit?
क्या कोई supplier, distributor या retailer भी इस मामले से जुड़ा है?
क्या Mumbai में ऐसे दूसरे locations पर भी action होगा?
इन सवालों के जवाब मिलने पर ही पता चलेगा कि यह सिर्फ एक local incident था या इसके पीछे कोई बड़ा network था।
Kandivali की raid ने Mumbai के Milk Supply Chain पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया
Kandivali East में Samta Nagar Police ने 74 litres कथित adulterated milk जब्त कर 48 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है। Police के मुताबिक branded milk में impure water मिलाया जा रहा था और मौके से Amul-Gokul के नाम वाले pouches भी मिले।
इन सवालों के जवाब police investigation और laboratory reports के बाद ही साफ होंगे।
फिलहाल consumers के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी suspicious milk packet को blindly consume न करें, packaging और batch details check करें और शक होने पर official food-safety authorities को complaint करें।
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मालाड में आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण के साथ चिंचोली बंदर खेल मैदान के विकास की मांग उठी। RPI (आ) ने मनपा पी-उत्तर के सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।
मुंबई: मालाड (पश्चिम) में आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण सहित चिंचोली बंदर रोड स्थित खेल मैदान के संरक्षण और विकास की मांग को लेकर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) के पदाधिकारियों ने मनपा पी-उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वलवी से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने इलाके की नागरिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए सहायक आयुक्त को अपनी मांग पत्र सौंपा।
बैठक में आनंद रोड और साईनाथ रोड के विस्तारीकरण का लंबे समय से लंबित मामला प्रमुखता से उठाया गया। RPI (आ) के पदाधिकारियों ने मांग की कि इन दोनों सड़कों के चौड़ीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि इलाके के नागरिकों को इसका फायदा मिल सके।
इसके अलावा चिंचोली बंदर रोड स्थित खेल मैदान के संरक्षण और विकास का मुद्दा भी उठाया गया। शिष्टमंडल ने कहा कि खेल मैदान के साथ-साथ इलाके में पड़ी अन्य सरकारी खाली जमीन का भी सही तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। इसके लिए मनपा प्रशासन को तत्काल जरूरी कदम उठाने की मांग की गई।
पहले भी हो चुका है पत्राचार
RPI (आ) के उत्तर मुंबई जिला सचिव विनोद घोलप की ओर से इस मामले को लेकर पहले भी मनपा प्रशासन के साथ पत्राचार किया गया था। इतना ही नहीं, समाचार पत्रों के माध्यम से भी इस मुद्दे को सामने लाया गया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर शिष्टमंडल ने एक बार फिर मनपा प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया।
शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त कुंदन वलवी से कहा कि सड़क चौड़ीकरण और खेल मैदान से जुड़े मामलों को सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीन पर भी जल्द काम दिखाई देना चाहिए।
सहायक आयुक्त ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मांगों पर चर्चा के बाद सहायक आयुक्त कुंदन वलवी ने सकारात्मक विचार करने और आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। खेल मैदान के मामले में संबंधित विभागों के माध्यम से उचित कार्रवाई करने की बात भी कही गई।
अब स्थानीय नागरिकों की नजर इस बात पर है कि लंबे समय से लंबित आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण तथा चिंचोली बंदर खेल मैदान के विकास को लेकर मनपा प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
इस दौरान RPI (आ) के जिला कोषाध्यक्ष ओम यादव, मुंबई सचिव आशीष सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुदन कांबले, वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र राजभर, दैनिक पब्लिक भारत के संपादक शिवकुमार सोनी, पत्रकार एवं समाजसेवक नंदू अहिरे और सुनील जोंधले सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
Goregaon में Salman Hotel के बाहर युवक की मौत के मामले में Police ने 24 घंटे में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों Police Custody में, जांच जारी है।
मुंबई: Goregaon West के Prem Nagar इलाके में Salman Hotel के सामने हुई मारपीट में 30 साल के युवक की मौत के मामले में Goregaon Police ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना के करीब 24 घंटे के अंदर Police ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी फिलहाल Police Custody में हैं और मामले की आगे की जांच जारी है।
मामला 11 अगस्त 2026 की रात करीब 11:30 बजे का है। Police को Salman Hotel, Prem Nagar, Goregaon West के सामने मारपीट की जानकारी मिली थी। बताया गया कि यहां एक युवक के साथ विवाद के बाद मारपीट हुई और उसके सिर पर लकड़ी के डंडे से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल युवक को इलाज के लिए Trauma Care Hospital, Jogeshwari East ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान अजीज मोहम्मद अतिक खान, उम्र 30 साल, निवासी Prem Nagar, Goregaon West के तौर पर हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही Goregaon Police Station की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
होटल के बिल को लेकर शुरू हुआ था विवाद
Police के मुताबिक, मृतक के भाई हबीब मोहम्मद अतिक खान का Salman Hotel के मालिक दानीश खान से बिल को लेकर विवाद हुआ था। हबीब ने होटल का पूरा बिल देने के लिए कहा था। इसी दौरान वहां मौजूद दो लोगों से अजीज खान का भी विवाद हो गया।
आरोप है कि दोनों लोगों ने अजीज खान के साथ बहस करने के बाद उसे धमकी दी और हाथापाई शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने लकड़ी के डंडे से अजीज खान के सिर पर हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
इस मामले में Goregaon Police Station में BNS 2023 की धारा 103(1), 115(2), 352, 351(3) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया।
मामले की शुरुआत में दोनों आरोपी Police के लिए अज्ञात थे। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के पास भी उनकी पहचान से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं थी। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना Police के लिए बड़ी चुनौती थी।
इसके बाद North Region-9 के DCP के मार्गदर्शन में Police ने Crime Detection Team बनाई। टीम ने Goregaon और आसपास के इलाकों में लगातार आरोपियों की तलाश शुरू की। Police ने मिली हुई local information और जांच के दौरान सामने आई दूसरी जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों का पता लगाया।
जांच आगे बढ़ने के बाद दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और जांच में उनकी इस मामले में भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
13 अगस्त की रात दोनों आरोपी गिरफ्तार
Police के मुताबिक, दोनों आरोपियों को 13 अगस्त 2026 को रात करीब 2:43 बजे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय मुन्नी उपाध्याय, उम्र 39 साल, निवासी Hanuman Nagar, Goregaon West और विकास देवराज पासवान, उम्र 23 साल, निवासी Prem Nagar, Goregaon West के रूप में हुई है।
गोरेगांव पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
दोनों को Court में पेश किया गया। Court ने आरोपियों को 23 अगस्त 2026 तक Police Custody में भेज दिया है। मामले की आगे की जांच Goregaon Police Station की टीम कर रही है।
24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी
इस केस में Goregaon Police की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि गंभीर घटना के बाद Police ने तेजी से जांच करते हुए करीब 24 घंटे के अंदर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई के लिए Mumbai Police Commissioner देवेन भारती, Joint Commissioner of Police (Law & Order) मनोजकुमार शर्मा, Additional Commissioner of Police, North Regional Division शशिकुमार मीना, Additional Commissioner of Police, Western Regional Division अभिनव देशमुख, DCP North Region-9 पुरुषोत्तम कराड और ACP Goregaon Division सुनील जाधव का मार्गदर्शन रहा।
Goregaon Police Station के Senior Police Inspector सतीश उमरे के नेतृत्व में उमेश दांडेले, PSI सोहन पेचे, API सतीश चौगले, राठोड, दीपक खराड, योगेश रंधे, Police Naik नवनाथ कांबणे, आकाश काळे, सत्यपाल बोधे, विशाल दौडकर, अक्षय मांडके, रोहन कोल्हारे, सुर्यभान घोलप और गजानन हरवळे ने जांच में काम किया।
Crime Detection Team में Police Amaldar पो.ह.वा. प्रदीप कुंटे, विनोद चव्हाण, दिनकर तावडे, दत्तात्रय बागुल, सचिन ढवळी, कल्पेश नेहरे, भरत कदम, पो.शि. सौरभ चव्हाण, प्रज्वल मोहिते, भूपेंद्र सालकर, विशाल दानी, सतीश पाटील, सचिन मेघाम और सुहास शिंदे ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Police की इस तेज कार्रवाई के बाद अब इस बात की जांच की जा रही है कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। फिलहाल दोनों आरोपी Police Custody में हैं और आगे की जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
Mumbai Crime News: निर्मलनगर पुलिस ने ऑटो चोरी के मामले में 20 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया। 4 चोरी की रिक्शा बरामद, आरोपी पर 14 केस दर्ज हैं।
मुंबई: मुंबई में ऑटो-रिक्शा चोरी की लगातार सामने आ रही वारदातों के बीच निर्मलनगर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 20 साल के कार्तिक शिवशंकर उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ऑटो चोरी के 4 मामलों का खुलासा हुआ है। आरोपी के पास से कुल 4 चोरी की ऑटो-रिक्शा बरामद की गई हैं, जिनकी कीमत करीब ₹2.35 लाख बताई गई है।
खार ईस्ट से ऑटो चोरी के बाद शुरू हुई जांच
मामला 5 अगस्त 2026 का है। पुलिस के मुताबिक, गोलीबार रोड, अंबेवाडी पुलिस चौकी के सामने, खार ईस्ट से MH 02 DU 2868 नंबर की ऑटो-रिक्शा चोरी हो गई थी। शिकायत मिलने के बाद निर्मलनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने इस मामले में CCTV footage, technical information और local sources की मदद से जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध की activity के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले MH 02 DU 0995 नंबर की ऑटो लेकर आया था और बाद में चोरी की गई रिक्शा लेकर वहां से निकल गया।
Surveillance के बाद आरोपी पुलिस के हाथ लगा
जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध की पहचान कार्तिक शिवशंकर उपाध्याय (20) के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने उसकी movement पर नजर रखी।
पुलिस के मुताबिक, 10 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 3 बजे से रात 11 बजे तक इलाके में surveillance रखा गया। इसके बाद आरोपी को पकड़ा गया और पुलिस स्टेशन लाकर पूछताछ की गई।
पूछताछ और आगे की जांच के दौरान पुलिस को चोरी की अन्य ऑटो-रिक्शा के बारे में भी जानकारी मिली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कुल 4 चोरी की ऑटो-रिक्शा recover कीं।
4 चोरी की रिक्शा बरामद, कुल कीमत ₹2.35 लाख
पुलिस के मुताबिक बरामद की गई ऑटो-रिक्शाओं में MH 02 DU 2868, MH 02 FB 9636, MH 02 DU 0995 और MH 02 LE 3450 शामिल हैं।
इन चारों रिक्शाओं को निर्मलनगर, खेरवाडी और वाकोला पुलिस स्टेशन में दर्ज अलग-अलग चोरी के मामलों से जोड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, इनकी कुल estimated value करीब ₹2.35 लाख है।
आरोपी पर पहले से 14 चोरी के केस
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले से निर्मलनगर, वाकोला और खेरवाडी पुलिस स्टेशन में चोरी के कुल 14 मामले दर्ज हैं।
इस वजह से पुलिस अब आरोपी से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके पुराने मामलों के अलावा वह और कितनी ऑटो चोरी की वारदातों में शामिल रहा है और क्या इन घटनाओं में उसके साथ कोई और व्यक्ति भी जुड़ा हुआ था।
Senior Officers की निगरानी में हुई कार्रवाई
इस ताजा घटना में कार्यवाही पर आप को बता दें, कि यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख, पुलिस उपायुक्त निमित गोयल और सहायक पुलिस आयुक्त संजय गायकवाड के guidance में की गई।
इस कार्रवाई में निर्मलनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अजय कुलकर्णी, Police Inspector (Crime) सूर्यकांत पारटकर और Police Sub-Inspector भीमराव धापटे शामिल रहे।
टीम में स. फौ. फाटक, पुलिस हवलदार पवार (क्र. 9283), पुलिस हवलदार सावंत (क्र. 0453), पुलिस हवलदार शेख (क्र. 0899), पुलिस हवलदार माने (क्र. 0933) और पुलिस शिपाई राठोड (क्र. 3732) ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
फिलहाल पुलिस आरोपी से आगे पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि आरोपी का ऑटो चोरी का network कितना बड़ा है और क्या वह मुंबई में हुई दूसरी ऐसी वारदातों से भी जुड़ा हुआ है।
दहिसर और कांदिवली में फर्जी आधार व दस्तावेज बनाने वाले दो ठिकानों पर पुलिस की कार्रवाई, 4 आरोपी गिरफ्तार और बड़ी संख्या में फर्जी कागजात जब्त।
मुंबई: दहिसर और कांदिवली में फर्जी आधार कार्ड और दूसरे सरकारी दस्तावेज बनाने के कथित नेटवर्क पर दहिसर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया गया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, रहिवासी प्रमाणपत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र और आधार से जुड़े उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत दहिसर पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक निलेश साळुंखे को मिली एक जानकारी से हुई। पुलिस को पता चला था कि दहिसर इलाके में फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने का काम किया जा रहा है।
जानकारी की जांच के बाद पुलिस टीम ने दहिसर पूर्व के बालाजी इलाके में विद्यामंदिर स्कूल के पास स्थित यू-एस इंटरप्राइजेज और कांदिवली पूर्व के हनुमान नगर स्थित सैम इन्कोटेक आधार सेंटर पर कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके जरिए आधार कार्ड में जानकारी अपडेट कराने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल-कॉलेज छोड़ने के प्रमाणपत्र तैयार कर उनका इस्तेमाल आधार अपडेट के लिए किया जा रहा था।
दहिसर-कांदिवली की पहली कार्रवाई में क्या मिला?
इस कार्रवाई में पुलिस ने 32 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बरामद किए। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के नाम वाले हस्ताक्षर-मुहर तथा दो ऐसे मुहर भी मिले, जिनका इस्तेमाल फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने में किए जाने का शक है।
पुलिस ने मौके से कंप्यूटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस और प्रिंटर के साथ आधार अपडेट मशीन, आईरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और वेब कैमरा भी जब्त किया।
इस मामले में पुलिस ने सुरजकुमार रामचंद्र यादव और उपेंद्र कप्तान सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं उमेश राजेश यादव उर्फ समीर को फरार आरोपी बताया गया है।
इसके बाद पुलिस ने कांदिवली पूर्व के पोइसर इलाके में स्थित शिवम इंटरप्राइजेज पर भी कार्रवाई की।
यहां पुलिस को और भी कई तरह के कथित फर्जी दस्तावेज मिले। दहिसर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में 14 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, 7 फर्जी रहिवासी प्रमाणपत्र, 26 फर्जी एसबीआई मेडिकल पॉलिसी और 3 फर्जी भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र बरामद किए गए।
इसके साथ ही कंप्यूटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, आधार अपडेट मशीन, आईरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और वेब कैमरा भी पुलिस ने जब्त किया।
इस कार्रवाई में सत्यम ललन मिश्रा और आकाश भगवान पटवा को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस को अब किस बात की है तलाश?
दोनों जगहों से फर्जी दस्तावेज और आधार अपडेट से जुड़े उपकरण मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह काम कितने समय से चल रहा था और इनके जरिए कितने लोगों के आधार या दूसरे दस्तावेजों में जानकारी बदली गई।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों को तैयार करने के पीछे और कौन-कौन लोग हैं और इनका इस्तेमाल किन कामों के लिए किया जाना था।
मामले में दहिसर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज रणवरे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सरजेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अपराध विभाग के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मारुति सांगळे के मार्गदर्शन में की गई।
कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश साळुंखे, पुलिसकर्मी सुनील राठोड, संतोष गाडे, संतोष भागवत, संतोष गाडे और राजेश शिरसाट समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क की जांच
फिलहाल दहिसर पुलिस की कार्रवाई का दायरा सिर्फ इन दो ठिकानों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। दो अलग-अलग जगहों से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और आधार से जुड़े उपकरण मिलने के बाद पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं।
मुंबई में BMC ने जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आसान की है। जानिए 3 दिन की समयसीमा, QR प्रमाणपत्र और सुधार की पूरी जानकारी।
मुंबई: मुंबईकरों के लिए जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले आसान और तेज होने जा रही है। बीएमसी ने नए जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र के आवेदनों को तीन कार्य दिवस में निपटाने की व्यवस्था की है। जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम जोड़ने की सुविधा भी तीन कार्य दिवस में देने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। तीन दिन की समयसीमा पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने या जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में सुधार के लिए नहीं है। इन मामलों में ज्यादा समय लग सकता है।
बीएमसी की यह नई व्यवस्था ऐसे समय में आई है जब मुंबई में जन्म प्रमाणपत्रों की लंबित अर्जियों, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने और क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्र की बढ़ती मांग को लेकर नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
बीएमसी के वार्ड कार्यालय में मौजूद नागरी सुविधा केंद्र यानी सीएफसी के जरिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण पोर्टल पर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्र में सुधार के लिए भी आवेदन की सुविधा इसी व्यवस्था के जरिए उपलब्ध होगी।
आवेदन जमा करने के बाद नागरिक को यूनिक पहचान संख्या वाली पावती दी जाएगी। इस पहचान संख्या से आवेदन की स्थिति की जानकारी ली जा सकेगी।
इससे नागरिकों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि उनका आवेदन किस स्थिति में है और उसे लेकर बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
तीन दिन में कौन-कौन से प्रमाणपत्र मिलेंगे?
नई व्यवस्था के तहत नए आवेदन वाले:
जन्म प्रमाणपत्र
मृत्यु प्रमाणपत्र
विवाह प्रमाणपत्र
को तीन कार्य दिवस में जारी करने की व्यवस्था की गई है।
जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम दर्ज कराने की सुविधा भी तीन कार्य दिवस में उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
यानी अगर किसी बच्चे का जन्म दर्ज हो चुका है लेकिन प्रमाणपत्र में नाम दर्ज नहीं है, तो उसके लिए भी अलग से लंबी प्रक्रिया का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों के पास पुराने समय के कागजी या हस्तलिखित जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र हैं। ऐसे लोगों के लिए बीएमसी ने पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की सुविधा शुरू की है।
इसके लिए सीएफसी में अलग खिड़की उपलब्ध कराई गई है।
पुराने प्रमाणपत्र की मूल प्रति जमा करनी होगी। इसके बाद बीएमसी अपने विभागीय रिकॉर्ड से उसकी जानकारी का मिलान करेगी।
सामान्य स्थिति में पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की प्रक्रिया करीब 25 कार्य दिवस में पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।
लेकिन अगर रिकॉर्ड बहुत पुराना है, स्थानीय कार्यालय में उपलब्ध नहीं है या उसे खोजने में परेशानी आती है, तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है।
इसलिए पुराने प्रमाणपत्र के मामले में तीन दिन वाली समयसीमा लागू समझना सही नहीं होगा।
क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र क्यों जरूरी हो रहा है?
क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र सिर्फ नया दिखने वाला कागज नहीं है। इसका एक बड़ा फायदा दस्तावेज की जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से सत्यापित करने में हो सकता है।
देश के कई नगर निकायों में क्यूआर कोड के जरिए प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। इससे फर्जी प्रमाणपत्रों की पहचान करने और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन आसान हो सकता है।
मुंबई में भी इसकी जरूरत खास तौर पर उन लोगों को महसूस हो रही है जिन्हें जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल पासपोर्ट, विदेश में पढ़ाई, वीजा या दूसरे जरूरी दस्तावेजी कामों में करना पड़ता है।
हालांकि, यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर काम के लिए क्यूआर प्रमाणपत्र अनिवार्य है। किसी खास विभाग की अपनी अलग दस्तावेजी जरूरत हो सकती है।
जन्म प्रमाणपत्र में किन चीजों में सुधार कराया जा सकता है?
बीएमसी की नई व्यवस्था में जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े कई तरह के सुधार के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
इनमें बच्चे के:
नाम में सुधार
पता बदलना
जन्म तारीख से जुड़ा सुधार
लिंग संबंधी सुधार
जैसे मामले शामिल हैं।
लेकिन इन सुधारों के लिए तीन कार्य दिवस वाली सुविधा लागू नहीं है। बीएमसी के मुताबिक ऐसे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र सुधार मामलों के निपटारे के लिए करीब 25 कार्य दिवस की व्यवस्था है।
मृत्यु प्रमाणपत्र में भी सुधार की सुविधा
अगर मृत्यु प्रमाणपत्र में जानकारी गलत दर्ज हो गई है तो उसके सुधार के लिए भी सीएफसी के जरिए आवेदन किया जा सकेगा।
यह सुविधा उन परिवारों के लिए खास तौर पर काम की हो सकती है जिन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र का इस्तेमाल बैंक, बीमा, पेंशन, संपत्ति या दूसरे सरकारी कामों में करना पड़ता है।
मृत्यु प्रमाणपत्र में किसी गलती के कारण परिवार को आगे की प्रक्रिया रोकनी पड़ती है। ऐसे मामलों में आवेदन की स्थिति पता चलना और तय समयसीमा मिलना नागरिकों के लिए राहत की बात है।
विवाह प्रमाणपत्र में सुधार कितने दिन में होगा?
विवाह प्रमाणपत्र में सुधार के मामलों के लिए बीएमसी ने तीन कार्य दिवस में आवेदन निपटाने की व्यवस्था बताई है।
यह उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जिन्हें विवाह प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी में सुधार कराने की जरूरत है और आगे किसी सरकारी या कानूनी काम के लिए सही प्रमाणपत्र चाहिए।
बीएमसी ने सीएफसी पर क्या बदलाव करने को कहा?
बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने इस नई व्यवस्था को लेकर लोगों में ज्यादा से ज्यादा जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
सीएफसी में अलग-अलग सेवाओं और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी देने वाले नोटिस बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसका फायदा यह होगा कि नागरिकों को आवेदन से पहले यह पता चल सके कि किस सेवा के लिए कहां और किस तरह आवेदन करना है।
यही इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा हो सकता है।
पहले प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद नागरिकों को यह पता नहीं रहता था कि उनका आवेदन किस स्थिति में है और काम कब तक होगा। ऐसे में कई बार उन्हें सीएफसी या संबंधित कार्यालय में जाकर जानकारी लेनी पड़ती थी।
अब यूनिक पहचान संख्या और आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा से यह प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकती है।
लेकिन असली बदलाव तभी माना जाएगा जब तय समयसीमा जमीन पर भी लागू हो और पुराने रिकॉर्ड वाले मामलों में अनावश्यक देरी कम हो।
मुंबई में क्यूआर प्रमाणपत्र की मांग क्यों बढ़ी?
बीएमसी पहले से ही जन्म प्रमाणपत्रों की लंबित अर्जियों को कम करने के लिए डिजिटल व्यवस्था, अतिरिक्त कर्मचारियों और सीएफसी की सेवाओं को बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है।
क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्रों की मांग भी बढ़ी है। खासकर शिक्षा, पासपोर्ट और विदेश जाने से जुड़े कामों में दस्तावेजों के सत्यापन की जरूरत ज्यादा होती है।
यही वजह है कि पुराने प्रमाणपत्रों को भी नए क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्र में बदलने की सुविधा महत्वपूर्ण बन गई है।
देश में भी बदल रहा है प्रमाणपत्रों का तरीका
मुंबई का यह कदम अकेला बदलाव नहीं है। देश के दूसरे शहरों में भी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र को डिजिटल बनाने, ऑनलाइन उपलब्ध कराने और क्यूआर कोड के जरिए उसकी प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था बढ़ रही है।
दिल्ली में नगर निकाय की सेवाओं को डिजिटल लॉकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम चल रहा है। इसका मकसद नागरिकों को प्रमाणपत्र आसानी से उपलब्ध कराना और उनके सत्यापन को तेज करना है।
यानी आने वाले समय में जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे प्रमाणपत्र सिर्फ कागज पर निर्भर दस्तावेज नहीं रहेंगे, बल्कि उनका डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सत्यापन भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
आम मुंबईकर पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिन्हें किसी जरूरी काम के लिए प्रमाणपत्र जल्दी चाहिए।
बच्चे के स्कूल या आगे की पढ़ाई से जुड़े काम, पासपोर्ट, विदेश जाने की तैयारी, बैंक और बीमा के काम या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद जरूरी कागजी प्रक्रिया—इन सभी मामलों में प्रमाणपत्र समय पर मिलना काफी महत्वपूर्ण होता है।
अगर बीएमसी की तीन कार्य दिवस वाली समयसीमा सही तरीके से लागू होती है तो नागरिकों का समय बचेगा और कार्यालयों के चक्कर भी कम हो सकते हैं।
दूसरी तरफ, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने में रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की समस्या अभी भी चुनौती बनी रहेगी।
सबसे जरूरी बात: तीन दिन वाली खबर को ऐसे समझें
मुंबईकरों को इस नई व्यवस्था को लेकर तीन अलग-अलग समयसीमा याद रखनी चाहिए:
नया जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र — तीन कार्य दिवस।
जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम दर्ज करना — तीन कार्य दिवस।
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में सुधार और पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर वाले प्रमाणपत्र में बदलना — सामान्य मामलों में करीब 25 कार्य दिवस।
पुराना रिकॉर्ड बीएमसी के रिकॉर्ड में नहीं मिलता है या उसे खोजने में परेशानी होती है तो इसमें और समय लग सकता है।
बीएमसी ने समयसीमा तय करके नागरिकों की एक बड़ी परेशानी को कम करने की कोशिश की है। लेकिन इस फैसले की असली परीक्षा अब शुरू होगी।
मुंबई जैसे बड़े शहर में रोजाना बड़ी संख्या में जन्म, मृत्यु और विवाह से जुड़े आवेदन आते हैं। ऐसे में तीन कार्य दिवस की समयसीमा तभी सफल होगी जब सीएफसी में पर्याप्त कर्मचारी हों, पुराने रिकॉर्ड आसानी से मिलें और डिजिटल व्यवस्था बिना रुकावट काम करे।
फिलहाल मुंबईकरों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि प्रमाणपत्र के आवेदन को लेकर समयसीमा और आवेदन की स्थिति जानने की व्यवस्था पहले से ज्यादा साफ की जा रही है।
और अगर आपके पास कोई बहुत पुराना जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र है, तो उसे आखिरी समय तक संभालकर रखने के बजाय यह जांच लेना बेहतर होगा कि उसे क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की जरूरत है या नहीं।
Vile Parle की Shanta Building में लगी आग में 2.5 साल के Abir और 23 वर्षीय Ankita की मौत हो गई। चार लोग घायल हैं, जांच जारी है।
मुंबई: Vile Parle West में मंगलवार रात एक दर्दनाक fire incident में दो लोगों की मौत हो गई। Church Road पर Baptista Road के पास स्थित Shanta Bhavan Building की 11वीं मंजिल पर करीब रात 10:02 बजे आग लगने की सूचना मिली। कुछ ही समय में मौके पर Fire Brigade, Police और ambulance teams पहुंच गईं और rescue operation शुरू किया गया।
दो परिवारों में मातम
इस हादसे में जान गंवाने वालों में सिर्फ 2.5 साल का Abir और 23 वर्षीय Ankita शामिल हैं। एक तरफ जहां emergency teams building में फंसे लोगों को बाहर निकालने में लगी थीं, वहीं हादसे ने दो परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
आग की चपेट में आने से चार अन्य लोग घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए hospital ले जाया गया और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनकी हालत stable बताई जा रही है। Firefighters ने काफी मशक्कत के बाद आग पर control पाया और building में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया।
आग लगने का क्या है कारण ?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल अब आग लगने की वजह को लेकर है। फिलहाल इसका exact cause सामने नहीं आया है। Fire Brigade और संबंधित authorities मामले की जांच कर रही हैं। इसलिए अभी electrical fault, short circuit या किसी appliance को आग का कारण मानना जल्दबाजी होगी।
सुरक्षा को लेकर चिंता
इस घटना ने Mumbai की high-rise buildings में fire safety को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ऐसी इमारतों में emergency staircase, fire alarms, smoke detection system और firefighting equipment सिर्फ मौजूद होना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका regularly working condition में रहना भी जरूरी है।
Residents के लिए भी यह घटना एक जरूरी reminder है। Emergency के समय lift के बजाय designated staircase का इस्तेमाल करना, fire exit का रास्ता पहले से पता रखना और building की evacuation drill में participate करना जान बचाने में अहम हो सकता है।
फिलहाल authorities का focus rescue के बाद घटना की पूरी जांच पर है। आने वाले updates में यह साफ होगा कि आग किस वजह से लगी और क्या इस हादसे में building की fire-safety व्यवस्था से जुड़ा कोई factor सामने आता है।