मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर BMC की कार्रवाई का क्या होगा? आयुक्त के स्पष्टीकरण से 1 अक्टूबर पर बड़ा सवाल

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मुंबई की 39,111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर नया मोड़ आया है। आयुक्त अश्विनी भिडे के स्पष्टीकरण से अभियान पर सवाल उठे।

मुंबई: 39 हजार 111 झोपड़ियों पर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली प्रस्तावित BMC कार्रवाई को लेकर आखिरी वक्त में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 19 सितंबर को महापालिका ने 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले 39,111 अनधिकृत झोपड़ी निर्माणों के खिलाफ 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक विशेष कार्रवाई की घोषणा की थी। अब 29 सितंबर को BMC आयुक्त अश्विनी भिडे के साथ हुई बैठक के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इन 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई अलग से आदेश जारी नहीं किया गया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ के अनुसार, आयुक्त ने बताया कि महापालिका नियमित कार्रवाई कर रही है।

इस स्पष्टीकरण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली वह विशेष कार्रवाई अब किस रूप में होगी, जिसकी घोषणा खुद महापालिका प्रशासन ने की थी।

39,111 का आंकड़ा आया कहां से?

BMC के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में कुल 2 लाख 23 हजार 150 झोपड़ी संरचनाएं हैं। इनमें 39,111 ऐसी संरचनाएं चिन्हित की गई हैं जिनकी ऊंचाई 14 फीट या उससे अधिक है। इनमें मुंबई शहर की 3,348, पश्चिमी उपनगरों की 4,536 और पूर्वी उपनगरों की सबसे अधिक 31,227 संरचनाएं शामिल हैं।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 39,111 का आंकड़ा उन संरचनाओं का है जिन्हें BMC ने कार्रवाई के लिए चिन्हित किया है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी 39,111 घरों को अलग-अलग demolition notice जारी हो चुके हैं।

BMC के अनुसार 4,584 संरचनाओं पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी, जबकि 611 को नोटिस दिए जा चुके थे। बाकी चिन्हित संरचनाओं के अनधिकृत हिस्से खुद हटाने के लिए कहा गया था और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की बात कही गई थी।

1 अक्टूबर से क्या होने वाला था?

19 सितंबर को घोषित योजना के मुताबिक 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक तीन महीने की विशेष मुहिम चलनी थी। इसका फोकस झोपड़पट्टी क्षेत्रों में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण पर था। BMC ने लोगों से अपने स्तर पर अनधिकृत हिस्से हटाने की अपील भी की थी।

यह कार्रवाई ऐसे समय घोषित हुई जब कुर्ला में पहाड़ी किनारे बसे आवासीय क्षेत्र में भूस्खलन की घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी और मानखुर्द में भी मकान गिरने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद अनधिकृत और असुरक्षित निर्माणों पर कार्रवाई का मुद्दा और गंभीर हुआ। हालांकि 39,111 सभी संरचनाओं को खतरनाक घोषित किया गया है, ऐसा उपलब्ध आंकड़ों से साबित नहीं होता।

अब आयुक्त के स्पष्टीकरण से क्या बदला?

28 सितंबर को वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में सांसदों, विधायक असलम शेख और नगरसेवकों के प्रतिनिधिमंडल ने BMC आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात की। इसके बाद गायकवाड़ ने बताया कि आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि 39,111 झोपड़ियों को गिराने का कोई आदेश प्रशासन की ओर से जारी नहीं किया गया है और नियमित कार्रवाई ही जारी है।

लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद मामला पूरी तरह साफ नहीं हुआ है। उसी दिन BMC General Body में इस मुद्दे पर पांच घंटे से ज्यादा समय तक विवाद चला। BJP के Leader of House गणेश खनकर ने मांग की कि आयुक्त खुद सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करें। आयुक्त के बैठक में नहीं पहुंचने के बाद Mayor रितु तावड़े ने सदन स्थगित कर दिया।

यानी एक तरफ 19 सितंबर की विशेष कार्रवाई की घोषणा मौजूद है और दूसरी तरफ 29 सितंबर को आयुक्त के बारे में सामने आया स्पष्टीकरण है। 1 अक्टूबर को वास्तव में कौन-सी कार्रवाई होगी, इसका स्पष्ट प्रशासनिक स्वरूप अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

14 फीट की सीमा पर भी उठे सवाल

इस कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा 14 फीट की ऊंचाई की सीमा है। Govandi New Sangam Welfare Society की ओर से अधिवक्ता Faiyaz Alam Shaikh ने BMC आयुक्त, SRA, MMRDA और Housing Department के Principal Secretary को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में 14 फीट की सीमा को पुराने कानूनी प्रावधान से जोड़ते हुए कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई और demolition के बजाय structural audit, eligibility verification और rehabilitation जैसे विकल्पों की मांग की गई।

समाजवादी पार्टी के विधायक Rais Shaikh ने कहा था कि इस कार्रवाई से करीब 34 हजार निवासियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। यह प्रभावित आबादी का राजनीतिक दावा है, BMC द्वारा जारी आधिकारिक population figure नहीं।

रिहायश और पुनर्वसन का सवाल

कार्रवाई के विरोध में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि यदि कोई संरचना हटाई जाती है तो वहां रहने वाले पात्र परिवारों का पुनर्वसन किस व्यवस्था के तहत होगा।

वर्षा गायकवाड़ ने SRA, MHADA, PAP और cluster redevelopment जैसी व्यवस्थाओं के जरिए पात्र परिवारों के पुनर्वसन की मांग की है। BMC में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी झोपड़ीवासियों की पात्रता की जांच, 2011 या लागू cut-off date के आधार पर verification और उसके बाद rehabilitation की मांग उठाई है।

इस बीच BMC House के Leader गणेश खनकर ने भी कार्रवाई स्थगित करने की मांग की थी। वहीं Mayor रितु तावड़े ने General Body में कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना फैसला आगे बढ़ाया गया तो उसे पलटने की मांग उठ सकती है।

अब सवाल सिर्फ झोपड़ी तोड़ने का नहीं

इस पूरे विवाद में एक और राजनीतिक मोड़ सामने आया है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने BJP पर दबाव में अपनी स्थिति संभालने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर कुछ नागरिक कार्यकर्ताओं ने कार्रवाई के विरोध को अनधिकृत झोपड़ियों को राजनीतिक संरक्षण देने के रूप में देखने की बात कही है। इन दावों और आरोपों के बीच प्रशासन के वास्तविक लिखित आदेश और कार्रवाई की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है।

वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी आयुक्त अश्विनी भिडे से मुलाकात कर प्रस्तावित कार्रवाई रोकने की मांग की। बैठक के बाद उनके हवाले से यह बात सामने आई कि इतनी बड़ी संख्या में संरचनाओं को एक ही दिन में गिराना व्यावहारिक नहीं होगा।

BMC के अभियान की कमान किसके पास?

19 सितंबर की योजना में आयुक्त अश्विनी भिडे के निर्देश पर कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई थी। इसके लिए अतिरिक्त महापालिका आयुक्त (शहर) प्राजक्ता वर्मा-लवंगारे के मार्गदर्शन और संयुक्त आयुक्त (दक्षता) देवेंदर सिंह के नेतृत्व में कार्रवाई की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।

इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक सवाल यह है कि 1 अक्टूबर से प्रस्तावित विशेष अभियान के लिए जारी की गई आंतरिक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति में क्या बदलाव हुआ है।

आम झोपड़ीवासी क्या समझें?

फिलहाल 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचना का BMC की सूची में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसी दिन पूरा घर गिरा दिया जाएगा। इसी तरह किसी संरचना पर जारी नोटिस, पहले की गई कार्रवाई और नई प्रस्तावित कार्रवाई—तीनों की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति अलग हो सकती है।

जिन लोगों को BMC का नोटिस मिला है, उन्हें अपने पास उपलब्ध पुराने दस्तावेज, पात्रता से जुड़े कागजात, redevelopment या SRA से संबंधित रिकॉर्ड और नोटिस की प्रतियां सुरक्षित रखनी चाहिए। किसी भी कार्रवाई की स्थिति में संबंधित BMC विभाग से लिखित स्थिति और लागू प्रक्रिया की जानकारी लेना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल 1 अक्टूबर सबसे अहम तारीख बनी हुई है। 19 सितंबर को घोषित तीन महीने की विशेष मुहिम, 39,111 चिन्हित संरचनाओं का आंकड़ा और 29 सितंबर को सामने आया आयुक्त का स्पष्टीकरण—इन तीनों के बीच प्रशासनिक स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 1 अक्टूबर से BMC किस प्रकार की कार्रवाई शुरू करती है और क्या उसके लिए कोई स्पष्ट लिखित आदेश या वार्ड-स्तरीय प्रक्रिया सामने आती है।

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