Cooper Hospital Death Certificate Case: 6 साल बाद भी जांच का जवाब नहीं, डॉक्टर अब BMC के अहम पद पर

cooper-hospital-death-certificate-case-bmc-doctor

Cooper Hospital के 2020 death certificate मामले में ₹10,000 रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। डॉक्टर Niranjan Kshirsagar suspend हुए, लेकिन जांच का अंतिम नतीजा अब भी स्पष्ट नहीं।

मुंबई: Cooper Hospital में अप्रैल 2020 में मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ₹10,000 मांगने और ₹7,000 लेने के आरोप से जुड़ा मामला छह साल बाद फिर सवालों के घेरे में है। उस समय BMC ने Casualty Medical Officer Dr Niranjan Kshirsagar को जांच लंबित रहने तक निलंबित किया था। अब 2026 में इसी नाम के Dr Niranjan Kshirsagar को Jogeshwari के Hindu Hriday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Municipal Hospital में Medical Superintendent के रूप में सार्वजनिक रूप से दर्ज किया गया है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से दोनों पदों पर दर्ज व्यक्ति की पहचान को अंतिम रूप से एक ही व्यक्ति साबित करने वाला BMC सेवा रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

2020 में क्या हुआ था

अप्रैल 2020 में Andheri West के Gaondevi निवासी Abu Bakar Gulab Khan की हार्ट अटैक से मौत के बाद उनके परिवार को Cooper Hospital में मृत्यु प्रमाणपत्र लेने के दौरान कथित तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ा था। परिवार के सदस्य Yusuf Jafri Ali Shaikh ने दावा किया था कि अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों ने Covid-19 के कारण मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने में कई दिन लगने की बात कही और ₹10,000 की मांग की। आरोप के मुताबिक बाद में ₹7,000 पर मामला तय हुआ और परिवार को एक डॉक्टर के पास भेजा गया।

मामला सामने आने के बाद Andheri West के तत्कालीन BJP MLA Ameet Satam ने ऑडियो रिकॉर्डिंग Municipal Commissioner Praveen Pardeshi को भेजकर जांच की मांग की थी। Cooper Hospital के तत्कालीन Dean Dr Pinakin Gujjar ने जांच शुरू होने की पुष्टि की थी, जबकि तत्कालीन Additional Municipal Commissioner (Health) Suresh Kakani ने दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही थी।

Dr Niranjan Kshirsagar ने रिश्वत लेने से इनकार किया था। उनका कहना था कि वह उस रात ड्यूटी पर नहीं थे और परिवार ने करीब रात 2 बजे उनसे संपर्क किया था। उनके अनुसार ₹7,000 रिश्वत नहीं बल्कि उनकी फीस थी, जिसमें देर रात consultation का charge भी शामिल था। उन्होंने यह भी कहा था कि परिवार postmortem नहीं चाहता था और उन्होंने मदद की थी। Kshirsagar ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह 15 वर्षों की सेवा में पहले कभी रिश्वत के आरोप का सामना नहीं कर चुके थे।

BMC ने क्या कार्रवाई की थी

ऑडियो सामने आने के एक दिन बाद BMC ने Dr Niranjan Kshirsagar को inquiry pending रहने तक suspend कर दिया था। उस समय सामने आई जानकारी के अनुसार preliminary inquiry में परिवार जिस डॉक्टर को private doctor बता रहा था, उसके Cooper Hospital से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी। Ameet Satam ने उन दूसरे डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच की मांग की थी, जिन्होंने परिवार को Kshirsagar तक पहुंचाया था।

लेकिन इस मामले का सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल आज भी यही है कि उस departmental inquiry का अंतिम परिणाम क्या निकला। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में इस specific मामले की final inquiry report, अंतिम disciplinary order, charge-sheet, clean chit, dismissal या अन्य अंतिम कार्रवाई का स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आता।

Death Certificate और Cause of Death Certificate एक नहीं

इस मामले को समझने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र और Medical Certificate of Cause of Death के बीच अंतर समझना जरूरी है।

Medical Certificate of Cause of Death वह चिकित्सकीय प्रमाणपत्र है जिसमें मृत्यु का कारण दर्ज किया जाता है। Registration of Births and Deaths Act की मौजूदा Section 10 के अनुसार, किसी medical institution में मृत्यु होने पर institution को cause-of-death certificate बिना शुल्क उपलब्ध कराना होता है। इस प्रमाणपत्र पर उस medical practitioner के हस्ताक्षर होते हैं जिसने मृतक को हाल की बीमारी के दौरान attend किया था और इसकी एक copy निकटतम रिश्तेदार को दी जानी है।

2023 के संशोधन के बाद यह जिम्मेदारी medical institution के स्तर पर और स्पष्ट की गई। नए प्रावधान के मुताबिक medical institution, चाहे वह सरकारी हो या निजी, death होने पर cause-of-death certificate free of charge उपलब्ध कराएगा।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर परिस्थिति में मृत्यु से जुड़े किसी भी अलग medical service के लिए कोई निजी शुल्क असंभव है। लेकिन Cooper मामले में Dr Kshirsagar द्वारा बताए गए ₹7,000 को official death-certificate fee मानने का कोई सार्वजनिक BMC fee record उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष यह था कि यह late-night consultation की फीस थी।

आज BMC से Death Certificate लेने की प्रक्रिया क्या है

महाराष्ट्र सरकार के Aaple Sarkar portal पर BMC के लिए Death Certificate जारी करने की notified service timeline 3 दिन है। इसमें designated officer Divisional Medical Health Officer (Deputy Registrar), first appellate officer Divisional Deputy Executive Health Officer और second appellate officer Executive Health Officer बताए गए हैं।

यह वर्तमान व्यवस्था है। इसे अप्रैल 2020 में लागू Covid-period procedure पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। 2020 में महामारी के दौरान deaths की जांच और documentation को लेकर अलग प्रशासनिक व्यवस्था लागू थी।

Covid काल में death certificate को लेकर क्या बदला था

Cooper Hospital का यह मामला ऐसे समय सामने आया था जब Covid-19 के कारण मृत्यु की जांच और documentation को लेकर अस्पतालों और परिवारों के सामने अतिरिक्त प्रक्रियात्मक दबाव था। बाद में BMC ने non-Covid deaths को लेकर यह स्पष्ट किया था कि apparent non-Covid death के मामले में death certificate पाने के लिए Covid certificate जरूरी नहीं था। उस समय BMC ने non-Covid deaths के cause-of-death certificate को लेकर अलग procedure भी जारी की थी।

इसलिए 2020 की घटना में परिवार को बताई गई संभावित देरी और उस समय लागू वास्तविक BMC procedure के बीच अंतर की जांच इस मामले की महत्वपूर्ण कड़ी है।

₹7,000 की payment पर अब भी बड़ा सवाल

Dr Kshirsagar का दावा था कि ₹7,000 उनकी फीस थी। दूसरी तरफ परिवार की ओर से इसे death certificate जल्दी दिलाने के लिए भुगतान बताया गया था। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इस राशि की कोई ऐसी receipt, official fee schedule या BMC-authorised private consultation record सामने नहीं आया जिससे इस payment की प्रकृति निर्णायक रूप से स्पष्ट हो सके।

उपलब्ध जानकारी में यह आरोप और डॉक्टर का अलग बचाव दोनों मौजूद हैं, जबकि departmental inquiry का अंतिम सार्वजनिक निष्कर्ष स्पष्ट नहीं है।

अगर सरकारी काम के बदले पैसे मांगे जाएं तो क्या करें

महाराष्ट्र Anti-Corruption Bureau की मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सरकारी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत ACB में की जा सकती है। ACB के complaint system में public servant, department, bribe demand और pending government work जैसी जानकारी देने के साथ audio, video और image evidence उपलब्ध कराने की सुविधा भी है।

ऐसी स्थिति में नागरिक को payment का receipt मांगने, अधिकारी का नाम और पद दर्ज करने, तारीख-समय नोट करने और उपलब्ध documentary या audio-video evidence सुरक्षित रखने की जरूरत है। प्रशासनिक service में देरी या certificate जारी नहीं होने जैसी समस्या के लिए BMC की grievance mechanism भी उपलब्ध है।

2026 में death registration के नियमों में भी बदलाव

महाराष्ट्र सरकार ने 31 जुलाई 2026 को Maharashtra Registration of Births and Deaths (Amendment) Rules, 2026 को notify किया है। यह बदलाव Maharashtra Birth and Death Registration Rules, 2000 में संशोधन करता है।

इसके अलावा केंद्र के स्तर पर Registration of Births and Deaths कानून में हालिया संशोधनों के बाद birth और death registration व्यवस्था में कई बदलाव लागू हुए हैं। Cause-of-death certificate से संबंधित statutory provisions भी 2023 के संशोधन के बाद बदले हैं।

2026 में Dr Niranjan Kshirsagar की वर्तमान भूमिका

अगस्त 2026 की सार्वजनिक रिपोर्टों में Jogeshwari के Hindu Hriday Samrat Balasaheb Thackeray Trauma Care Municipal Hospital में Medical Superintendent के रूप में Dr Niranjan Kshirsagar का नाम सामने आया है। 20 अगस्त 2026 की hospital inspection report में Medical Superintendents Dr Chhaya Shinde और Dr Niranjan Kshirsagar की मौजूदगी दर्ज है।

15 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में भी इसी अस्पताल के Medical Superintendent Dr Niranjan Kshirsagar ने canteen से जुड़े विवाद पर hospital administration का पक्ष रखा था।

हालांकि 2020 के Cooper Hospital मामले में दर्ज Dr Niranjan Kshirsagar और 2026 में Jogeshwari Trauma Care Hospital में दर्ज Dr Niranjan Kshirsagar एक ही व्यक्ति हैं, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए BMC का आधिकारिक service/transfer record जरूरी है। इसलिए दोनों records को अभी एक ही व्यक्ति मानकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा

सबसे बड़ा सवाल अब भी जांच के अंतिम नतीजे का

Cooper Hospital के 2020 के मामले में तत्कालीन कार्रवाई स्पष्ट है—जांच शुरू हुई और Dr Niranjan Kshirsagar को suspension का सामना करना पड़ा। लेकिन छह साल बाद भी उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं होता कि departmental inquiry अंततः किस निष्कर्ष पर पहुंची।

यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण unanswered question है: क्या ₹7,000 की payment को लेकर डॉक्टर की सफाई स्वीकार हुई, क्या कोई departmental punishment हुआ, क्या आरोप साबित नहीं हुए, या जांच किसी अन्य निष्कर्ष तक पहुंची?

जब तक BMC की final inquiry report या संबंधित service record सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आता, इस मामले को आरोप, suspension और डॉक्टर के defence के स्तर पर ही तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

Ismail Shaikh Avatar
Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Discover more from  Indian fasttrack news

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading