मुंबई की 7 झीलों में 96.64% पानी के बावजूद 10% कटौती जारी है। BMC ने मई 2027 तक के स्टॉक, 500 MLD गैप और नए जल प्लान की जानकारी दी।
मुंबई: सातों जलापूर्ति झीलों में 96.64% पानी होने के बावजूद मुंबई में 10% पानी की कटौती हटाने की तैयारी नहीं है। BMC ने अब साफ किया है कि मौजूदा जल भंडार को बचाकर चलाना जरूरी है और उपलब्ध स्टॉक का अनुमान 17 मई 2027 तक लगाया गया है। ऐसे में सवाल है कि जब झीलें लगभग भर चुकी हैं तो मुंबई में पानी की कटौती क्यों जारी है और आने वाले महीनों में इसका असर कितना बढ़ सकता है।
BMC के अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने नागरिक निकाय की बैठक में बताया कि मौजूदा पानी का स्टॉक मई 2027 तक चलाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और सदन में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने 10% पानी की कटौती वापस लेने की मांग उठाई थी। इसके जवाब में BMC प्रशासन ने मौजूदा कटौती जारी रखने की जरूरत बताई।
मुंबई की सात झीलों में कितना पानी है?
मुंबई को पानी देने वाली सात प्रमुख झीलें तुलसी, विहार, भातसा, तानसा, मोडक सागर, अपर वैतरणा और मिडिल वैतरणा हैं। 29 सितंबर को इनमें कुल 13,98,722 मिलियन लीटर उपयोगी पानी था, जो 14,47,363 मिलियन लीटर की कुल उपयोगी क्षमता का 96.64% है। 30 सितंबर की सुबह यह स्टॉक 96.37% दर्ज किया गया। यानी झीलों का स्तर ऊंचा होने के बावजूद उसमें लगातार मामूली गिरावट भी देखी जा रही है।
पिछले दो वर्षों की तुलना करें तो 29 सितंबर 2025 को यही स्टॉक 97.57% और 2024 में 99.09% था। इस साल सातों झीलें 100% के स्तर तक नहीं पहुंच सकीं।
96% पानी होने के बावजूद संकट क्यों?
सिर्फ झीलों में मौजूद पानी का प्रतिशत देखकर पूरे साल की जल सुरक्षा तय नहीं होती। मुंबई की सालाना जरूरत पूरी करने के लिए सातों जलाशयों का पूरा उपयोगी भंडार करीब 14.47 लाख मिलियन लीटर होना जरूरी माना जाता है। मौजूदा स्टॉक इस स्तर से नीचे है और अगले मानसून तक शहर को लगातार पानी उपलब्ध कराना है।
यही वजह है कि BMC फिलहाल पानी की बचत को प्राथमिकता दे रहा है। मई में जब सातों झीलों का स्टॉक सिर्फ 23.5% के आसपास रह गया था, तब 15 मई से पूरे मुंबई में 10% पानी की कटौती लागू की गई थी। बाद में जुलाई की भारी बारिश से जलाशयों का स्तर तेजी से बढ़ा, लेकिन कटौती वापस नहीं ली गई।
मुंबई की पानी की जरूरत और सप्लाई में भी बड़ा अंतर
मुंबई के जल संकट की एक वजह सिर्फ बारिश नहीं है। शहर में पानी की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच भी बड़ा अंतर बना हुआ है। BMC के आंकड़ों के अनुसार शहर को करीब 4,100 MLD पानी की आपूर्ति होती है, जबकि मांग लगभग 4,600 MLD है। यानी करीब 500 MLD का अंतर है। इसके अलावा पानी के वितरण तंत्र में 32 से 35% तक पानी लीकेज और चोरी के कारण नुकसान होने का अनुमान है।
इसका मतलब यह है कि जलाशयों में पानी बढ़ने के बावजूद शहर के सामने पानी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और वितरण व्यवस्था में होने वाले नुकसान को कम करने की चुनौती बनी हुई है।
महाराष्ट्र के सूखे का मुंबई पर भी असर
महाराष्ट्र में इस साल बारिश की कमी ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। राज्य सरकार ने 358 में से 265 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह राज्य के करीब 74% तालुकों के बराबर है। 18 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18.8% कम बारिश दर्ज की गई थी। मराठवाड़ा और विदर्भ के कई हिस्सों में कमी और ज्यादा रही।
मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था सात प्रमुख झीलों पर निर्भर है, लेकिन कुछ अतिरिक्त जल स्रोत राज्य के नियंत्रण में हैं। राज्य के दूसरे हिस्सों में जल संकट बढ़ने की स्थिति में इन संसाधनों के इस्तेमाल और जल उपलब्धता को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है। इसलिए मुंबई के लिए सिर्फ अपने सात जलाशयों का मौजूदा प्रतिशत देखना पर्याप्त नहीं है।
El Niño और बढ़ते तापमान की चिंता
BMC ने अक्टूबर और नवंबर के दौरान El Niño के प्रभाव के मजबूत होने की संभावना और उससे तापमान बढ़ने की स्थिति में झीलों से पानी के तेजी से वाष्पीकरण की चिंता जताई है। इसी कारण प्रशासन मौजूदा जल भंडार को बिना अतिरिक्त दबाव के अगले मानसून तक खींचना चाहता है।
इस साल जुलाई में हुई भारी बारिश ने मुंबई को बड़ी राहत दी थी। जुलाई की शुरुआत में सातों जलाशयों का स्टॉक बेहद निचले स्तर पर था, लेकिन कुछ ही दिनों में भारी बारिश के कारण इसमें तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि अगस्त और सितंबर में जलाशयों में बढ़ोतरी की रफ्तार काफी धीमी रही।
BMC का नया प्लान: 3,000 कुएं और 10,000 रिचार्ज स्ट्रक्चर
जल संकट की आशंका के बीच BMC अब पारंपरिक जल स्रोतों को भी दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। करीब 3,000 पुराने कुओं को साफ कर उन्हें दोबारा उपयोग योग्य बनाने की योजना पर काम हो रहा है। कुओं की सफाई, पानी की गुणवत्ता और खारेपन की जांच की जा रही है, क्योंकि मुंबई के तटीय इलाकों में भूजल में समुद्री पानी के प्रवेश की समस्या भी सामने आ सकती है।
इसके साथ ही भूजल रिचार्ज बढ़ाने के लिए करीब 10,000 रिचार्ज स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना भी सामने आई है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को जमीन में उतारकर भूजल स्तर को मजबूत करना है।
पानी की कमी बढ़ी तो टैंकर व्यवस्था भी बदल सकती है
जल संकट की स्थिति में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ने की संभावना को देखते हुए BMC एक नई टैंकर नियमन नीति तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य पानी की कमी वाले इलाकों में टैंकर आपूर्ति को नियंत्रित करना और संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाना है। प्रस्तावित नीति को संबंधित समितियों के सामने रखा जाना है और मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
मुंबई में निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर क्या असर पड़ेगा?
जून में जब सातों झीलों का स्टॉक 10% के करीब पहुंच गया था, तब BMC ने निर्माण स्थलों और स्विमिंग पूल के लिए पानी की आपूर्ति रोकने तथा औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 20% अतिरिक्त कटौती लागू करने का फैसला किया था।
मौजूदा समय में ऐसे पुराने प्रतिबंधों को स्वतः लागू मानना सही नहीं होगा। लेकिन अगर जल भंडार में दोबारा गंभीर गिरावट आती है तो BMC के पास पहले इस्तेमाल किए गए संरक्षण उपायों को दोबारा लागू करने का विकल्प मौजूद रहेगा।
मुंबई के लिए आगे की बड़ी योजनाएं
दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए BMC की योजनाओं में गारगाई बांध से 440 MLD, मनोरी desalination project से 400 MLD और वर्सोवा desalination project से करीब 200 MLD अतिरिक्त क्षमता जोड़ने का लक्ष्य शामिल है। इन परियोजनाओं से कुल करीब 1,040 MLD अतिरिक्त क्षमता तैयार करने की योजना है।
इसके अलावा बारिश के पानी के इस्तेमाल और भूजल रिचार्ज पर भी जोर बढ़ाया जा रहा है। मुंबई में भारी बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में stormwater को बाढ़ रोकने के लिए समुद्र और खाड़ियों की ओर पंप करना पड़ता है। इसी बीच वसई-विहार प्रणाली से अतिरिक्त पानी हासिल करने और stormwater management को बेहतर बनाने जैसी योजनाओं पर भी काम हो रहा है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
मुंबई में 10% पानी की कटौती अभी जारी है। सातों झीलों का स्टॉक करीब 96% से अधिक है, लेकिन पिछले दो वर्षों की तुलना में इस साल का स्तर कम है। BMC ने मौजूदा भंडार को 17 मई 2027 तक बनाए रखने का अनुमान दिया है और पानी की कटौती को हटाने के बजाय जल संरक्षण पर जोर दिया है।
आने वाले महीनों में मुंबई के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक झीलों के catchment में बारिश, तापमान और वाष्पीकरण, शहर की पानी की मांग, वितरण में होने वाला नुकसान और अगले मानसून से पहले उपलब्ध जल भंडार रहेगा। अभी उपलब्ध आंकड़े तत्काल पानी खत्म होने का संकेत नहीं देते, लेकिन BMC की रणनीति साफ है कि मौजूदा स्टॉक को अगले मानसून तक सुरक्षित रखने के लिए पानी की बचत जारी रखनी होगी।
