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  • 3383 करोड़ की संपत्ति वाले BJP विधायक पराग शाह भिखारी बनकर क्यों घूमे? वायरल वीडियो की वजह सामने आई

    3383 करोड़ की संपत्ति वाले BJP विधायक पराग शाह भिखारी बनकर क्यों घूमे? वायरल वीडियो की वजह सामने आई

    BJP विधायक पराग शाह का भिखारी के वेश में मुंबई की सड़कों पर घूमने का वीडियो वायरल है। जानिए 3383 करोड़ की संपत्ति वाले विधायक ने ऐसा क्यों किया।

    मुंबई: घाटकोपर पूर्व से भाजपा विधायक पराग शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह भिखारी के वेश में सड़क किनारे बैठे और लोगों से भीख मांगते नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में दाखिल हलफनामे के मुताबिक पराग शाह ने 3,383.06 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की थी।

    ऐसे में लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने संपन्न विधायक ने भिखारी का रूप क्यों अपनाया?

    जैन धर्मगुरु की सलाह पर लिया भिखारी का रूप

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पराग शाह ने यह अनुभव जैन धर्मगुरु नम्रमुनि महाराज के सुझाव पर लिया। जैन धर्म के चातुर्मास के दौरान उन्हें एक दिन भिखारी की तरह जीवन जीकर आम लोगों की परिस्थितियों को करीब से समझने की सलाह दी गई थी।

    इसके बाद शाह ने अपनी सामान्य पहचान, सुरक्षा और सुविधाओं से दूर रहकर एक दिन भिखारी के रूप में बिताया।

    घाटकोपर की सड़कों पर किसी ने नहीं पहचाना

    वीडियो में पराग शाह मेकअप और भिखारी के वेश में घाटकोपर के इलाके में घूमते और सड़क किनारे बैठे दिखाई देते हैं। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनके साथ मौजूद सामान्य पहचान और सुविधाएं नहीं थीं, जिसके कारण आसपास के लोग उन्हें पहचान नहीं सके।

    उन्होंने लोगों से भीख मांगी और सड़क किनारे भोजन किया। इस अनुभव का उद्देश्य कथित तौर पर यह समझना था कि सड़क पर रहने वाले जरूरतमंद लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

    मेकअप हटाकर उसी जगह लोगों से मिले

    इस प्रयोग का एक और हिस्सा वीडियो में दिखाई देता है। भिखारी के वेश में समय बिताने के बाद पराग शाह ने अपना मेकअप हटाया और फिर उन्हीं इलाकों में अपनी वास्तविक पहचान के साथ पहुंचे।

    इस तरह उन्होंने यह देखने की कोशिश की कि लोग उन्हें सामान्य रूप से कैसे देखते हैं और भिखारी के रूप में रहने के दौरान उनके प्रति लोगों का व्यवहार कैसा था।

    2024 के हलफनामे में घोषित की थी 3383 करोड़ की संपत्ति

    पराग शाह की संपत्ति का आंकड़ा इस वायरल वीडियो को और चर्चा में ला रहा है। 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार, उन्होंने 33,83,06,20,898 रुपये यानी करीब 3,383 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति घोषित की थी। इनमें करीब 3,315.52 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 67.53 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल थी।

    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण में भी पराग शाह को 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले उम्मीदवारों में शीर्ष पर रखा गया था।

    2019 के चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति करीब 500.62 करोड़ रुपये थी। 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,383 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।

    रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं पराग शाह

    पराग शाह पेशे से कारोबारी और रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। 2024 के चुनावी रिकॉर्ड में उनका पेशा बिजनेस दर्ज है। वह घाटकोपर पूर्व से भाजपा के विधायक हैं और 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने यह सीट दोबारा जीती थी।

    भिखारी के वेश में मुंबई की सड़कों पर घूमने का उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे प्रयोग के जरिए उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर और सड़क पर जीवन बिताने वाले लोगों की परिस्थितियों को प्रत्यक्ष रूप से समझने की कोशिश की।

  • गणेशोत्सव में BMC का ‘मोदक महोत्सव 2026’, महिला बचत समूहों के हाथों से बने मोदक अब घर पहुंचेंगे

    गणेशोत्सव में BMC का ‘मोदक महोत्सव 2026’, महिला बचत समूहों के हाथों से बने मोदक अब घर पहुंचेंगे

    BMC के ‘मोदक महोत्सव 2026’ में महिला बचत समूहों द्वारा तैयार उकडी और तले हुए मोदक मुंबईकरों को मिलेंगे। 14 सितंबर से होम डिलीवरी के लिए shgeshop.com पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे।

    मुंबई: गणपति बाप्पा के आगमन के साथ ही घरों में नैवेद्य की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गणेशोत्सव में भगवान गणेश को प्रिय माने जाने वाले मोदक की मांग को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से इस वर्ष ‘मोदक महोत्सव 2026’ का आयोजन किया गया है। इस पहल के तहत BMC द्वारा संचालित महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए उकडी के और तले हुए मोदक मुंबईकरों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

    इस पहल के तहत नागरिकों को मोदक खरीदने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है। https://shgeshop.com वेबसाइट के माध्यम से पूरे गणेशोत्सव के दौरान ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकेगा। ऑनलाइन पंजीकरण करने वाले नागरिकों को 14 सितंबर 2026 से मोदक की होम डिलीवरी उपलब्ध कराई जाएगी।

    एक दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण जरूरी

    BMC के नियोजन विभाग के अनुसार, मोदक की होम डिलीवरी का लाभ लेने के लिए मुंबईकरों को कम से कम एक दिन पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। यह होम डिलीवरी सेवा केवल मुंबई क्षेत्र में उपलब्ध रहेगी।

    ‘मोदक महोत्सव 2026’ पूरे गणेशोत्सव काल के दौरान जारी रहेगा। इसके तहत नागरिकों को उकडी के साथ-साथ तले हुए मोदक भी उपलब्ध होंगे।

    महिला बचत समूहों ने तैयार किए मोदक

    गणेशोत्सव के दौरान मोदक की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए BMC द्वारा आर्थिक सहायता प्राप्त महिला बचत समूहों के माध्यम से इस महोत्सव का आयोजन किया गया है। इन समूहों द्वारा तैयार किए गए मोदक गणेशोत्सव के पूरे कालखंड में ग्राहकों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

    इस पहल का उद्देश्य केवल गणेशोत्सव के दौरान नागरिकों को मोदक उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि महिला बचत समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और उनके व्यवसाय को बढ़ावा देना भी है।

    महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर जोर

    मुंबई महानगर में महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से BMC के माध्यम से महिला बचत समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, उनके व्यवसाय को गति देने और उन्हें अधिक व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए BMC की ओर से अलग-अलग नवाचारपूर्ण और व्यवसाय-केंद्रित पहल की जाती हैं।

    इसी प्रयास के तहत इस वर्ष गणेशोत्सव के अवसर पर ‘मोदक महोत्सव 2026’ आयोजित किया गया है।

    गणेशोत्सव के साथ महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

    BMC के अनुसार, इस पहल के माध्यम से महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण मोदक नागरिकों को उपलब्ध होंगे। साथ ही, मुंबईकरों को गणेशोत्सव की खुशियों के साथ महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का अवसर भी मिलेगा।

    इस संबंध में निदेशक (नियोजन) डॉ. (श्रीमती) प्राची जांभेकर ने जानकारी दी कि महिला बचत समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके व्यवसाय को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण है।

    मीनल तुर्डे के मार्गदर्शन में आयोजन

    यह उपक्रम महिला व बालकल्याण समिति की अध्यक्षा श्रीमती मीनल तुर्डे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।

    BMC की ओर से मुंबईकरों से अपील की गई है कि वे ‘मोदक महोत्सव 2026’ को उत्स्फूर्त प्रतिसाद दें और महिला बचत समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को प्रोत्साहित करें।

    मोदक की होम डिलीवरी कैसे मिलेगी?

    • मोदक: उकडी के और तले हुए मोदक
    • ऑनलाइन पंजीकरण: https://shgeshop.com
    • होम डिलीवरी शुरू: 14 सितंबर 2026 से
    • पंजीकरण: डिलीवरी से कम से कम एक दिन पहले
    • डिलीवरी क्षेत्र: केवल मुंबई
    • उपलब्धता: पूरे गणेशोत्सव काल में
    • तैयारी: BMC द्वारा संचालित/आर्थिक सहायता प्राप्त महिला बचत समूह
    • आयोजन: ‘मोदक महोत्सव 2026’
    • मार्गदर्शन: महिला व बालकल्याण समिति अध्यक्षा श्रीमती मीनल तुर्डे
    • जानकारी: BMC नियोजन विभाग तथा निदेशक (नियोजन) डॉ. (श्रीमती) प्राची जांभेकर
  • Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case: सजा के बाद समझौते से खत्म हुई Conviction, Bombay HC के फैसले का असर

    Cheque Bounce Case में समझौते के बाद दोषसिद्धि खत्म करने का रास्ता कैसे खुलता है? Bombay HC के 2019 फैसले और 2026 के Supreme Court आदेश से समझिए।

    मुंबई: चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी समझौते से राहत मिल सकती है। बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 अक्टूबर 2019 के एक फैसले में ललिता कमल व्यास की दोषसिद्धि और उसके खिलाफ पारित निचली अदालतों के आदेश रद्द कर दिए गए थे। इस पुराने फैसले की कानूनी अहमियत अब इसलिए फिर सामने आती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2025 और 2026 में भी चेक अनादरण के मामलों में दोषसिद्धि के बाद समझौते को स्वीकार करते हुए राहत दी है।

    ललिता कमल व्यास मामले में क्या हुआ था?

    ललिता कमल व्यास को मुंबई के अंधेरी स्थित 48वें महानगरीय मजिस्ट्रेट न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। यह मामला C.C. No. 4281/SS/2017 से संबंधित था। 8 मार्च 2018 के इस आदेश को चुनौती दी गई, लेकिन 19 जनवरी 2019 को सत्र न्यायालय ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। इसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा।

    हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता और ललिता कमल व्यास के बीच विवाद आपसी समझौते से समाप्त हो गया। दोनों पक्षों ने 1 अक्टूबर 2019 को समझौता शर्तें और सहमति पत्र तैयार किया। शिकायतकर्ता की ओर से शपथपत्र भी दिया गया, जिसमें उसने आरोपी के खिलाफ आगे कोई शिकायत या दावा नहीं होने की बात कही।

    शिकायतकर्ता अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ और समझौते की पुष्टि की। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने निचली अदालत और सत्र न्यायालय के आदेशों को रद्द करते हुए ललिता कमल व्यास को धारा 138 के अपराध से बरी कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे ने 4 अक्टूबर 2019 को सुनाया था।

    क्या दोषसिद्धि के बाद भी चेक बाउंस मामले में समझौता हो सकता है?

    यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलू है।

    परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 147 के तहत धारा 138 का अपराध समझौते के जरिए समाप्त किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि मामला केवल इसलिए खत्म होने की संभावना से बाहर नहीं हो जाता कि आरोपी को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।

    हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच निजी समझौता होते ही दोषसिद्धि अपने आप समाप्त हो जाती है। समझौते को न्यायिक प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाना जरूरी है और अदालत के सामने पक्षों की सहमति तथा समझौते की शर्तों को रिकॉर्ड पर लाना महत्वपूर्ण होता है।

    2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही सिद्धांत दोहराया

    इस कानूनी स्थिति को अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने और स्पष्ट किया।

    Gian Chand Garg बनाम Harpal Singh मामले में आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत की दोषसिद्धि को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका भी खारिज हो गई। इसके बाद 6 अप्रैल 2025 को शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हुआ।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 147 के कारण धारा 138 का अपराध समझौते योग्य है और पक्षों के स्वैच्छिक समझौते की स्थिति में कार्यवाही को उचित चरण पर समाप्त किया जा सकता है। अदालत ने शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण और अंतिम समझौते के रूप में राशि स्वीकार किए जाने के बाद दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया।

    2026 का सुप्रीम कोर्ट फैसला: जेल जाने के बाद भी मिली राहत

    इस कानूनी स्थिति का सबसे ताजा और महत्वपूर्ण उदाहरण Parsharvanath Weld Wires Pvt. Ltd. बनाम State of Chhattisgarh है।

    इस मामले में धारा 138 के तहत दोषसिद्धि के बाद आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को 28 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा मिली थी। सत्र न्यायालय और बाद में हाई कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

    मामला यहां तक पहुंच गया कि कंपनी के निदेशक को 23 अप्रैल 2026 को सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया गया। इसके केवल दो दिन बाद, 25 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत शिकायतकर्ता को 30 लाख रुपये देकर पूरे विवाद का अंतिम निपटारा किया गया।

    निचली अदालत और हाई कोर्ट ने अंतिम दोषसिद्धि के बाद मामले को दोबारा खोलने पर राहत देने से इनकार किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को समझौता स्वीकार करते हुए धारा 138 के अपराध को समझौते के जरिए समाप्त किया और दोषसिद्धि तथा सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्रीय जेल, रायपुर के अधीक्षक को आरोपी को तत्काल रिहा करने का निर्देश भी दिया।

    इसका सीधा मतलब क्या है?

    इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि हो जाने के बाद भी समझौते का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता।

    लेकिन इसे स्वतः मिलने वाली राहत नहीं माना जा सकता। शिकायतकर्ता की स्वैच्छिक सहमति, समझौते की वास्तविक शर्तें, भुगतान और मामले की न्यायिक स्थिति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत ही यह तय करती है कि समझौते को स्वीकार कर दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है या नहीं।

    2025 के Gian Chand Garg फैसले और 2026 के Parsharvanath Weld Wires फैसले ने इस बात को और मजबूत किया है कि केवल इस आधार पर समझौते को अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि धारा 138 के मामले में दोषसिद्धि पहले ही अंतिम स्तर तक पहुंच चुकी है।

    ललिता कमल व्यास के फैसले की आज क्यों चर्चा हो रही है?

    ललिता कमल व्यास का मामला स्वयं 2026 का नया फैसला नहीं है। बॉम्बे हाई कोर्ट का मूल निर्णय 4 अक्टूबर 2019 का है। हाल में कानूनी वेबसाइटों पर इस पुराने फैसले को दोबारा प्रकाशित या सूचीबद्ध किए जाने के कारण यह मामला फिर सामने आया है।

    इसकी मौजूदा प्रासंगिकता इसलिए है क्योंकि 2025 और 2026 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने उसी व्यापक कानूनी सिद्धांत को आगे स्पष्ट किया है—यानी धारा 138 के मामले में स्वैच्छिक समझौते के बाद, उचित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए दोषसिद्धि और सजा समाप्त की जा सकती है।

    क्या हर चेक बाउंस मामले में समझौते के बाद सजा खत्म हो जाएगी?

    नहीं। ऐसा कोई स्वतः लागू होने वाला नियम नहीं है।

    समझौता होने के बाद भी उसे अदालत के समक्ष उचित तरीके से प्रस्तुत करना और न्यायिक आदेश प्राप्त करना जरूरी है। इसके अलावा, समझौते की शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं और शिकायतकर्ता की सहमति वास्तविक और स्वैच्छिक है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इसलिए धारा 138 के किसी मामले में केवल निजी समझौता हो जाने को अपने आप दोषसिद्धि समाप्त होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

    आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

    चेक अनादरण के मामलों में मुकदमा लंबा चलने के बावजूद विवाद को समझौते से समाप्त करने का रास्ता उपलब्ध रह सकता है। यहां तक कि दोषसिद्धि के बाद भी अदालत के समक्ष समझौते के आधार पर राहत मांगी जा सकती है।

    ललिता कमल व्यास का 2019 का बॉम्बे हाई कोर्ट फैसला और 2025-26 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले मिलकर यह दिखाते हैं कि धारा 138 के मामलों में समझौता केवल मुकदमे की शुरुआती अवस्था तक सीमित विकल्प नहीं है।

    हालांकि, अंतिम राहत अदालत के आदेश पर निर्भर करती है और प्रत्येक मामले के तथ्य तथा समझौते की शर्तें अलग हो सकती हैं।

  • मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास मस्जिद को लेकर विवाद, MMRDA ने दिए मस्जिद हटाने के निर्देश

    मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास मस्जिद को लेकर विवाद, MMRDA ने दिए मस्जिद हटाने के निर्देश

    मुंबई एयरपोर्ट T2 के पास धार्मिक ढांचे को लेकर विवाद बढ़ा है। MMRDA ने MIAL को तय प्रक्रिया के तहत इसे हटाने के निर्देश दिए हैं।

    मुंबई: विलेपार्ले स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 के पास मौजूद एक मस्जिद को लेकर विवाद बढ़ गया है। महाराष्ट्र महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 8 सितंबर 2026 के पत्र में कहा कि संबंधित धार्मिक ढांचे के लिए उसकी ओर से कोई अनुमति जारी नहीं की गई है। प्राधिकरण ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसे हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    यह ढांचा टर्मिनल-2 के वीआईपी आगमन और टैक्सी स्टैंड क्षेत्र के पास बनाया गया है। MMRDA के अनुसार संबंधित अधिसूचित क्षेत्र की अंतरिम विकास योजना में सार्वजनिक पूजा स्थल के लिए कोई प्रावधान या निर्धारित भूखंड नहीं है।

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    मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल 2 की ताजा तस्वीर

    MMRDA के पत्र में क्या कहा गया?

    प्राधिकरण ने MIAL से संबंधित ढांचे को हटाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने तथा कार्रवाई की अनुपालन जानकारी देने को कहा है। पत्र में एयरपोर्ट के अधिसूचित क्षेत्र में योजना, विकास, निर्माण और बुनियादी ढांचे के रखरखाव से जुड़ी MIAL की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया गया है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ढांचा हटाने की कोई निश्चित तारीख आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है।

    3 सितंबर को सोमैया ने उठाया था मामला

    भाजपा नेता किरीट सोमैया ने 3 सितंबर को एयरपोर्ट क्षेत्र का दौरा कर इस ढांचे का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि एयरपोर्ट के पास धार्मिक निर्माण आवश्यक अनुमति के बिना किया गया है और इसे हटाया जाना चाहिए।

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    मुंबई एयरपोर्ट टर्मिनल 2

    सोमैया ने बाद में इस मामले को “मुंबई एयरपोर्ट लैंड जिहाद” बताया। हालांकि “लैंड जिहाद” कोई आधिकारिक कानूनी या प्रशासनिक श्रेणी नहीं है। MMRDA के रिकॉर्ड में मुख्य मुद्दा संबंधित ढांचे की अनुमति और भूमि उपयोग से जुड़ा है।

    क्या मस्जिद तुरंत गिराई जाएगी?

    अभी उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। MMRDA ने MIAL को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए हटाने की कार्रवाई करने को कहा है।

    सोमैया ने करीब दो सप्ताह में कार्रवाई की उम्मीद जताई है, लेकिन इसे प्रशासन की ओर से घोषित अंतिम तारीख नहीं माना जा सकता।

    प्राथमिकी को लेकर क्या स्थिति है?

    सोमैया ने संबंधित ट्रस्टियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। इस मामले में प्राथमिकी को लेकर कोई जानकारी नहीं है।

    एयरपोर्ट पर यात्रियों को क्या असर होगा?

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इस कार्रवाई के कारण टर्मिनल-2 की उड़ानों, यात्रियों की आवाजाही या सामान्य एयरपोर्ट संचालन पर असर पड़ने की कोई पुष्टि नहीं है।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास निर्माण को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल जरूर उठाए गए हैं, लेकिन उपलब्ध MMRDA जानकारी में इस ढांचे को एयरपोर्ट सुरक्षा के लिए खतरा घोषित नहीं किया गया है।

    अब आगे क्या होगा?

    अब मुख्य रूप से MIAL की कार्रवाई पर नजर रहेगी। उसे MMRDA के निर्देश के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी है और कार्रवाई की अनुपालन जानकारी प्राधिकरण को देनी है।

    इस मामले में आगे की तस्वीर हटाने की वास्तविक तारीख, MIAL की कार्रवाई और संबंधित पुलिस कार्रवाई स्पष्ट होने के बाद सामने आएगी।

  • Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    Mumbai Local: दिवा-मुंब्रा के बीच महिला लोकल से गिरी, VIDEO ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल

    दिवा-मुंब्रा के बीच भीड़भरी लोकल से महिला नीचे गिर गई। सिग्नल पर ट्रेन रुकी होने से जान बची। वायरल VIDEO ने लोकल सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    मुंबई: Mumbai local train में सुबह की भीड़ किस तरह जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है, इसका ताजा मामला गुरुवार सुबह दिवा-मुंब्रा के बीच सामने आया। CSMT की ओर जा रही भीड़भाड़ वाली लोकल से एक महिला यात्री नीचे गिर गई। गनीमत रही कि उस समय ट्रेन सिग्नल के कारण रुकी हुई थी, जिससे बड़ा हादसा टल गया। महिला रेलवे ट्रैक के किनारे बने नाले में गिरकर फंस गई और उसे मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    सिग्नल पर रुकी थी ट्रेन, तभी हुआ हादसा

    प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, सुबह मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में काफी भीड़ थी। दिवा और मुंब्रा के बीच ट्रेन सिग्नल पर रुकी हुई थी। इसी दौरान दरवाजे के पास मौजूद महिला यात्री भीड़ के दबाव में अपना संतुलन खो बैठी और ट्रेन से नीचे जा गिरी।

    महिला रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद नाले में जा गिरी। इसी वजह से वह सीधे ट्रेन के पहियों की चपेट में आने से बच गई। घटना के दौरान एक यात्री मोबाइल फोन से वीडियो बना रहा था, जिसके कैमरे में महिला के नीचे गिरने का पूरा घटनाक्रम रिकॉर्ड हो गया।

    घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। उपलब्ध शुरुआती जानकारी के अनुसार महिला को मामूली चोटें आई हैं। उसकी पहचान और अस्पताल में इलाज से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    दिवा-मुंब्रा का यह रेल मार्ग फिर सवालों के घेरे में

    महिला के लोकल से गिरने की यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दिवा-मुंब्रा रेल मार्ग पहले भी इसी तरह की दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है।

    9 जून 2025 को इसी इलाके में दो लोकल ट्रेनों के बीच से गुजरते समय दरवाजे पर खड़े यात्रियों के गिरने की भीषण दुर्घटना हुई थी। हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। उस घटना के बाद ट्रेन की भीड़, दरवाजे पर खड़े होकर यात्रा करने और इस हिस्से के तीखे मोड़ को लेकर सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे थे।

    उस हादसे की जांच के दौरान दुर्घटना के कारण को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई थीं। रेलवे की जांच में यात्रियों के सामान और आपस में टकराने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया, जबकि पुलिस जांच में ट्रैक और इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की गई।

    एक साल बाद भी भीड़ से राहत क्यों नहीं?

    2025 की दुर्घटना के बाद रेलवे की ओर से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क पर सेवाएं बढ़ाने और यात्री सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए। सरकारी रिकॉर्ड में दिवा के लिए 14 और मुंब्रा के लिए 16 नई उपनगरीय सेवाओं का उल्लेख किया गया था।

    इसके बावजूद 2026 में भी दिवा-मुंब्रा और आसपास के मार्गों पर सुबह के व्यस्त समय में अत्यधिक भीड़ की शिकायतें सामने आती रही हैं। डोंबिवली से मुंबई की ओर जाने वाली लोकल में भीड़ का एक कारण दिवा-मुंब्रा क्षेत्र से आने वाले यात्रियों की संख्या को भी बताया गया है।

    यही वजह है कि आज की घटना के बाद सिर्फ यह सवाल नहीं है कि महिला लोकल से कैसे गिरी, बल्कि यह भी सवाल है कि अतिरिक्त सेवाओं और सुरक्षा उपायों के बावजूद peak hours में यात्रियों को दरवाजे तक पहुंचने वाली स्थिति क्यों बन रही है।

    Automatic Door वाली लोकल से क्या बदलेगा?

    2025 की दुर्घटना के बाद मुंबई में automatic door वाली non-AC लोकल का विकल्प भी तेजी से आगे बढ़ा। ऐसी लोकल में दरवाजे अपने आप बंद होने की व्यवस्था होगी, जिससे ट्रेन चलने के दौरान यात्रियों के दरवाजे पर खड़े रहने या बाहर लटकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।

    रेलवे की ओर से नए non-AC automatic-door rake को आगे बढ़ाया गया है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की रोजाना जरूरत को देखते हुए ऐसी ट्रेनों की नियमित उपलब्धता और peak-hour capacity अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    सिर्फ चेतावनी से नहीं रुकेगा खतरनाक सफर

    मुंबई की उपनगरीय रेलवे में यात्रियों को footboard पर यात्रा नहीं करने की लगातार चेतावनी दी जाती है। स्टेशनों पर घोषणाएं, जागरूकता अभियान और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

    लेकिन दिवा-मुंब्रा के बीच हुई आज की घटना एक अलग चुनौती सामने रखती है। जब ट्रेन में क्षमता से ज्यादा भीड़ हो और यात्रियों का दबाव दरवाजे तक पहुंच जाए, तब सिर्फ चेतावनी के बजाय भीड़ प्रबंधन, पर्याप्त लोकल सेवाएं और सुरक्षित कोच व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।

    आज महिला की जान इसलिए बच गई क्योंकि ट्रेन उस समय सिग्नल पर रुकी हुई थी। वायरल वीडियो ने इस घटना को सामने ला दिया है, लेकिन असली सवाल अब भी वही है—दिवा-मुंब्रा जैसे संवेदनशील रेल मार्ग पर यात्रियों को सुरक्षित यात्रा देने के लिए रेलवे अगला ठोस कदम कब उठाएगा?

  • 36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    36 की उम्र में 35 अपराध, एक तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गोरेगांव में गिरफ्तार

    गोरेगांव में वनराई पुलिस ने 36 वर्षीय रोहित सावंत को तमंचा और 3 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। आरोपी पर 35 मामले दर्ज हैं।

    मुंबई: गोरेगांव पूर्व में आगामी उत्सव से पहले वनराई पुलिस ने अवैध हथियार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 36 वर्षीय रोहित अविनाश सावंत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके पास से एक तमंचा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। खास बात यह है कि आरोपी के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

    यह कार्रवाई 9 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे और एटीसी पथक को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिली थी कि रोहित सावंत शिवधाम हिंदू श्मशानभूमि के बाहर, पश्चिम द्रुतगति महामार्ग की दक्षिण दिशा में गोरेगांव पूर्व में मौजूद है। सूचना की पुष्टि के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में दो पुलिस टीमें तैयार की गईं और मौके पर जाल बिछाया गया।

    कमर के पास मिला तमंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी मौके पर दिखाई देने के बाद टीम ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसकी पहचान रोहित अविनाश सावंत, उम्र 36 वर्ष, निवासी मलपा डोंगरी नंबर-1, चकाला, अंधेरी पूर्व के रूप में हुई।

    तलाशी के दौरान उसकी कमर के पास लोहे की नली और काली मुठ वाला एक तमंचा मिला। पुलिस ने इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये बताई है। वहीं दाहिनी जेब से तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस के अनुसार हथियार और कारतूस की कुल अनुमानित कीमत 58 हजार रुपये है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी के पास हथियार रखने का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। इसके बाद वनराई पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 675/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया।

    आरोपी पर पहले से 35 मामले

    पुलिस के अनुसार रोहित सावंत के खिलाफ पहले से 35 मामले दर्ज हैं। हालांकि पुलिस की ओर से जारी जानकारी में इन मामलों की धाराओं और उनकी वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    मौजूदा मामले में पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ हथियार बरामदगी के संबंध की भी जांच कर रही है। हथियार उसे कहां से मिला और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, यह भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।

    आगामी उत्सव के दौरान किस काम के लिए लाया था हथियार?

    इस मामले का सबसे अहम पहलू आगामी उत्सव को लेकर पुलिस की जांच है। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है और यह कार्रवाई उत्सव शुरू होने से कुछ दिन पहले हुई है। पुलिस के मुताबिक अब यह पता लगाया जा रहा है कि रोहित सावंत यह अवैध हथियार आगामी उत्सव की अवधि में किस उद्देश्य से लेकर आया था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी द्वारा किसी विशेष वारदात की तैयारी या किसी व्यक्ति को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं की है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले हथियार बरामदगी को किसी संभावित हमले या साजिश से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    इस कार्रवाई में पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), अतिरिक्त पुलिस आयुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग, पुलिस उपायुक्त उत्तर प्रादेशिक विभाग-3 और सहायक पुलिस आयुक्त दिंडोशी के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई।

    वनराई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अब्दुल रऊफ शेख, पुलिस निरीक्षक सुभाषचंद्र पोस्टुरे, पुलिस निरीक्षक संदीप वाघमारे तथा पुलिस उपनिरीक्षक प्रदीप शिंदे की टीम ने कार्रवाई में भूमिका निभाई। पुलिसकर्मी 01920/सालुंखे, 041277/तेली और पुलिस सिपाही 140073/शिंदे भी कार्रवाई में शामिल रहे।

    मामले में वनराई पुलिस ने अपराध क्रमांक 675/26 दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 तथा महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(अ) और 135 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब हथियार की आपूर्ति, आरोपी के पुराने मामलों और हथियार रखने के वास्तविक उद्देश्य से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

  • Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai C&D Waste: BMC ने 23 सितंबर तक MDCTS Registration किया अनिवार्य

    Mumbai में C&D Waste पर BMC सख्त, MDCTS registration की deadline 23 सितंबर 2026। बिना VTMS वाले वाहनों पर ₹25,000 जुर्माने की कार्रवाई होगी।

    मुंबई: शहर में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाले मलबे (C&D Waste) पर BMC ने अब डिजिटल निगरानी सख्त कर दी है।** 9 सितंबर 2026 की सार्वजनिक सूचना के मुताबिक C&D Waste से जुड़े projects, waste generators, transporters और processing/recycling से जुड़े stakeholders को Mumbai Debris Control & Tracking System (MDCTS) पर registration करना होगा। इसकी deadline 23 सितंबर 2026 है।

    इसके साथ C&D Waste ले जाने वाले वाहनों में BMC द्वारा अधिकृत Vehicle Tracking and Monitoring System (VTMS) लगाना अनिवार्य किया गया है। बिना registration या authorised और functioning VTMS के transport करने वाले वाहन पर प्रति वाहन, प्रति उल्लंघन ₹25,000 का दंड लगाया जा सकता है।

    किन लोगों को MDCTS Registration करना होगा?

    यह नियम सिर्फ बड़े builders तक सीमित नहीं है। C&D Waste पैदा करने वाले projects, developers, contractors, सरकारी व अन्य agencies, transporters तथा processing, recycling, unloading और authorised backfilling से जुड़े stakeholders इसके दायरे में हैं।

    संबंधित पक्षों को निर्धारित format में C&D Waste Management Plan भी देना होगा। Excavation से निकलने वाली मिट्टी या अन्य सामग्री को C&D Waste से अलग रखना और अलग transport करना जरूरी होगा।

    VTMS से मलबे वाले वाहनों पर कैसे नजर रखी जाएगी?

    VTMS के जरिए वाहन की movement को source से authorised destination तक track करने की व्यवस्था होगी। इससे route और disposal location की निगरानी के साथ unauthorised dumping की पहचान आसान हो सकती है।

    BMC ने यह भी अनिवार्य किया है कि transport के दौरान वाहनों को ठीक से cover रखा जाए, ताकि मलबा सड़क पर न गिरे और धूल से प्रदूषण न फैले।

    घर में Renovation कराने वालों पर क्या असर होगा?

    घर, दुकान या अन्य property में repair, renovation या demolition से निकलने वाला मलबा भी C&D Waste management व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।

    इसलिए renovation कराने वालों को मलबा सड़क, खाली प्लॉट या किसी अनधिकृत जगह पर नहीं डलवाना चाहिए। इसे authorised collection, transportation और disposal/processing व्यवस्था के जरिए भेजना होगा।

    छोटे स्तर के debris के लिए BMC की मौजूदा व्यवस्था में authorised collection सुविधा का प्रावधान है। लागू मात्रा और प्रक्रिया के लिए MDCTS/BMC की वर्तमान guidelines देखना जरूरी होगा।

    नियम तोड़ने पर ₹25,000 के अलावा क्या होगा?

    MDCTS registration या authorised VTMS के बिना C&D Waste transport करने वाले वाहन पर ₹25,000 प्रति vehicle, प्रति violation का दंड लगाया जा सकता है।

    Unauthorised dumping, बिना अनुमति transportation या disposal तथा अन्य नियमों के उल्लंघन पर काम रोकने, permissions cancel करने, bank guarantee जब्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

    BMC ने पहले ही कितनी कार्रवाई की?

    C&D Waste dumping पर BMC की कार्रवाई पहले से जारी है। 1 अप्रैल से 31 अगस्त 2026 के बीच 419 C&D Waste-related violations में ₹31.64 लाख का जुर्माना लगाया गया। इनमें 349 unauthorised dumping और 70 approved plan के बिना transportation के मामले थे।

    अगस्त में ही 65 C&D Waste violations पर ₹8.54 लाख की कार्रवाई हुई।

    मुंबई में रोज 8,000 टन मलबा, Processing Capacity कितनी?

    MDCTS की जरूरत के पीछे मुंबई में पैदा होने वाला भारी C&D Waste भी बड़ी वजह है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुंबई में रोज करीब 8,000 टन C&D Waste निकलता है, जबकि Dahisar और Diaghar की मौजूदा processing facilities की combined capacity करीब 1,200 टन प्रतिदिन है। इससे waste generation और processing capacity के बीच बड़ा gap सामने आता है।

    यह gap illegal dumping, road dust, drainage blockage और खुले स्थानों पर debris जमा होने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है।

    BMC 2,000 TPD नई Processing Capacity जोड़ने की तैयारी में

    BMC City, Eastern Suburbs और Western Suburbs में integrated C&D Waste processing facilities विकसित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। इसके जरिए कुल 2,000 TPD तक additional processing capacity विकसित करने का प्रस्ताव है।

    BMC tender records के अनुसार संबंधित प्रक्रिया में bid submission की deadline 10 सितंबर 2026 और bid opening 11 सितंबर 2026 निर्धारित थी।

    इससे स्पष्ट है कि महानगरपालिका illegal dumping पर enforcement के साथ processing infrastructure बढ़ाने पर भी काम कर रही है।

    MDCTS से क्या बदलेगा?

    MDCTS और VTMS का उद्देश्य C&D Waste की movement को अधिक traceable बनाना है। यानी waste generator से transporter और फिर authorised processing/disposal location तक की chain पर digital monitoring बढ़ेगी।

    इससे unauthorised dumping करने वाले वाहनों की पहचान और transporter तथा waste generator की accountability मजबूत हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता authorised processing capacity, collection network और field-level enforcement पर भी निर्भर करेगी।

    23 सितंबर से पहले क्या करना जरूरी है?

    C&D Waste से जुड़े stakeholders को deadline से पहले:

    • MDCTS registration पूरा करना होगा।
    • जरूरी C&D Waste Management Plan जमा करना होगा।
    • authorised transporter का इस्तेमाल करना होगा।
    • वाहनों में authorised, functioning VTMS रखना होगा।
    • excavation material को C&D Waste से अलग रखना होगा।
    • मलबा केवल authorised destination पर भेजना होगा।
    • transport के दौरान vehicle को ठीक से cover रखना होगा।

    BMC ने MDCTS portal पर जारी होने वाली आगे की instructions पर नजर रखने की सलाह दी है।

    23 सितंबर 2026 के बाद compliance को लेकर BMC की enforcement और सख्त हो सकती है। मुंबई में C&D Waste की बड़ी मात्रा को देखते हुए अब चुनौती सिर्फ illegal dumping रोकने की नहीं, बल्कि waste की पूरी chain—generation, collection, transportation, tracking और processing—को प्रभावी बनाने की है।

  • साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसा: असलम शेख की पत्नी को ₹10 लाख मिले, जिम्मेदारी पर सवाल बरकरार

    साकीनाका मैनहोल हादसे में असलम शेख की पत्नी के खाते में ₹10 लाख जमा हुए। जानिए जांच, BMC कार्रवाई और जिम्मेदारी पर अब तक क्या हुआ।

    मुंबई: साकीनाका स्थित खैरानी रोड मैनहोल हादसे में दिवंगत असलम शेख के परिवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की ओर से ₹10 लाख की आर्थिक सहायता मिल गई है। यह रकम असलम शेख की पत्नी अंजुम शेख के बैंक खाते में 4 अगस्त 2026 को सीधे जमा की गई थी। 8 सितंबर को उनकी ओर से महानगरपालिका को लिखित आभार पत्र दिए जाने के बाद यह जानकारी सामने आई।

    लेकिन इस आर्थिक मदद के साथ करीब दो महीने पुराने इस मामले में एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—2 जुलाई को खुले मैनहोल में गिरकर हुई असलम शेख की मौत के लिए अंतिम जिम्मेदारी किसकी तय हुई और जांच अब किस स्थिति में है?

    अंजुम शेख के खाते में कब जमा हुए ₹10 लाख?

    BMC के मुताबिक, दुर्घटना के बाद मुंबई की महापौर रितू तावडे ने शेख परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद एल विभाग कार्यालय ने परिवार से बैंक खाते और वारसाहक्क से जुड़े जरूरी दस्तावेज पूरे कराए।

    2 जुलाई को खैरानी रोड पर क्या हुआ था?

    2 जुलाई 2026 को साकीनाका के खैरानी रोड पर drainage-related काम के दौरान एक मैनहोल खुला हुआ था। इसी दौरान असलम शेख उसमें गिर गए और तेज पानी के बहाव में बह गए। कई घंटे की तलाश के बाद उनका शव drainage channel से बरामद किया गया। उस समय मौके पर पर्याप्त barricading और सुरक्षा इंतजाम नहीं होने को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

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    मृतक असलम शेख की फाइल तस्वीर

    जानकारी के अनुसार असलम शेख साकीनाका के यादव नगर इलाके के रहने वाले थे। घटना के बाद BMC और पुलिस दोनों स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई।

    हादसे के बाद BMC ने क्या कार्रवाई की?

    हादसे के तत्काल बाद BMC ने चार अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके साथ contractor की भूमिका की भी जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने भी contractor और उससे जुड़े तीन contractual workers के खिलाफ मामला दर्ज किया था। तीन workers को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी, जबकि contractor के बारे में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी।

    इससे मामला केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि manhole maintenance, contractor supervision और civic accountability का मुद्दा बन गया।

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    घटना की पुरानी तस्वीर

    जांच में work order को लेकर क्यों उठे सवाल?

    इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच के दौरान सामने आया।

    BMC की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई। इसके बाद यह सवाल उठा कि जिस स्थान पर protective grille लगाने का काम चल रहा था, उस काम के लिए औपचारिक work order किसके पास था और काम किसकी अनुमति से शुरू हुआ था।

    अगस्त में सामने आई जानकारी के मुताबिक contractor ने show-cause notice के जवाब में दावा किया कि उसके work order की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी और उसने किसी को काम नहीं दिया था। इस दावे ने जांच को और जटिल बना दिया।

    सबसे गंभीर सवाल—अगर contractor का work order समाप्त हो चुका था, तो मैनहोल पर protective work कौन कर रहा था और वह काम किस अनुमति या निगरानी में किया जा रहा था?

    हालांकि यह सवाल जांच के संदर्भ में है और इसे किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और पुलिस की कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

    BMC की जांच में contractor और अधिकारियों की भूमिका पर क्या सामने आया?

    जुलाई के अंत तक BMC की inquiry report सार्वजनिक नहीं होने को लेकर भी सवाल उठे थे। 31 जुलाई की रिपोर्टों में बताया गया था कि हादसे के करीब एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी।

    बाद की रिपोर्टिंग में fact-finding exercise से contractor और संबंधित ward अधिकारियों की ओर से safety और procedural lapses की बात सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि जांच केवल contractor तक सीमित नहीं थी, बल्कि civic supervision की भूमिका भी जांच के दायरे में थी।

    हालांकि अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    हादसे से पहले ही BMC को High Court से मिल चुकी थी चेतावनी

    असलम शेख की मौत से कुछ ही दिन पहले Bombay High Court ने मुंबई में खुले मैनहोल को लेकर BMC को कड़ी फटकार लगाई थी।

    अदालत ने monsoon के दौरान खुले मैनहोल से किसी इंसानी जान के जाने की स्थिति को गंभीरता से लिया था और BMC से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। असलम शेख की मौत के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया कि जब manhole safety पहले से न्यायिक निगरानी में थी, तब खैरानी रोड पर maintenance work के दौरान सुरक्षा व्यवस्था क्यों विफल हुई।

    BMC ने पूरे मुंबई के मैनहोल की safety को लेकर क्या कहा?

    हादसे के बाद BMC ने शहर के सभी 26 wards में manhole inspection और सुरक्षा उपायों को लेकर कार्रवाई शुरू करने की बात कही थी।

    लेकिन जुलाई में BMC के Additional Municipal Commissioner ने यह भी स्पष्ट किया था कि महानगरपालिका यह प्रमाणित नहीं कर सकती कि मुंबई के हर manhole chamber में protective safety net मौजूद है, क्योंकि safety-net installation एक continuous process है।

    यही बात इस मामले को सिर्फ साकीनाका की एक दुर्घटना से आगे ले जाती है। Mumbai में manhole safety की समस्या में पुराने covers, maintenance के दौरान खोले गए chambers, protective grills, barricading और monitoring—सभी शामिल हैं।

    जानकारी के अनुसार मुंबई में करीब 3,400 किलोमीटर का storm-water drain network और 2,081 किलोमीटर का sewer network है, जिसके maintenance के लिए बड़ी संख्या में manholes का इस्तेमाल होता है।

    क्या ₹10 लाख मिलने से मामला खत्म हो गया?

    नहीं। ₹10 लाख की आर्थिक सहायता परिवार के लिए तत्काल वित्तीय सहारा है, लेकिन इससे पुलिस जांच या प्रशासनिक जवाबदेही अपने आप समाप्त नहीं होती।

    असलम शेख की मौत के मामले में तीन अलग-अलग स्तरों को अलग-अलग देखना जरूरी है—

    • परिवार को आर्थिक सहायता: ₹10 लाख खाते में जमा हो चुके हैं।
    • प्रशासनिक कार्रवाई: BMC अधिकारियों के निलंबन और विभागीय जांच की प्रक्रिया हुई।
    • कानूनी जिम्मेदारी: contractor और workers के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई और जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी महत्वपूर्ण है।

    इसलिए आर्थिक सहायता को अंतिम कानूनी compensation या मामले की पूरी जिम्मेदारी तय होने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जवाबदेही स्पष्ट न करे।

  • QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति की मांग, 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा

    मुंबई के QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार की अनुमति देने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन 10 सितंबर को बोरीवली में मोर्चा निकालेगी।

    मुंबई: QR-Code धारक फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति देने और उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग को लेकर आजाद हॉकर यूनियन की ओर से 10 सितंबर 2026 को बोरीवली पश्चिम में मोर्चा निकाला जाएगा। यूनियन का दावा है कि QR-Code होने के बावजूद बड़ी संख्या में फेरीवाले पिछले दो वर्षों से कारोबार से वंचित हैं।

    यूनियन के मुताबिक, इस स्थिति के कारण फेरीवालों के सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर फेरीवालों में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर यह मोर्चा आयोजित किया जा रहा है।

    मोर्चा 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे जांभली गली, मोक्ष प्लाजा, एस.वी. रोड, बोरीवली पश्चिम से शुरू होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी महानगरपालिका के आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचेंगे।

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    QR-Code के बाद भी कारोबार से वंचित रखने का आरोप

    आजाद हॉकर यूनियन का कहना है कि QR-Code जारी होने के बावजूद संबंधित फेरीवालों को कारोबार करने की अनुमति नहीं मिल रही है। यूनियन ने दावा किया है कि पिछले करीब दो वर्षों से इस समस्या के कारण कई फेरीवाले अपने रोजमर्रा के रोजगार से वंचित हैं।

    यूनियन के अनुसार, एक तरफ फेरीवालों को पहचान और नियमन से जुड़ी प्रक्रिया के तहत QR-Code दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ कारोबार करने के दौरान कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने इसे लेकर प्रशासन से स्पष्ट नीति और कानूनी व्यवस्था के तहत कारोबार की अनुमति देने की मांग की है।

    Street Vendors Act लागू करने की मांग

    मोर्चे में Street Vendors Act, 2014 को पूरी तरह लागू करने की मांग भी उठाई जाएगी। यूनियन ने न्यायालय के आदेशों का पालन करने तथा संरक्षित फेरीवालों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न रोकने की मांग की है।

    आजाद हॉकर यूनियन की प्रमुख मांगों में QR-Code धारक फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई तत्काल रोकना, पिछले दो वर्षों से रोजगार से वंचित फेरीवालों को कारोबार का अवसर देना और कानून के तहत उन्हें सुरक्षित तरीके से कारोबार करने की व्यवस्था करना शामिल है।

    यूनियन का कहना है कि फेरीवालों को सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने वाले लोगों के रूप में देखने के बजाय उन्हें कानून के दायरे में लाकर रोजगार का अवसर दिया जाना चाहिए।

    “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों का मुद्दा नहीं”

    यूनियन पदाधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल बोरीवली तक सीमित नहीं है। मुंबई में बड़ी संख्या में फेरीवाले अपने परिवार का खर्च इसी रोजगार से चलाते हैं।

    यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा, “यह सिर्फ बोरीवली के फेरीवालों की लड़ाई नहीं है, बल्कि मुंबई के हजारों मेहनतकश फेरीवालों के रोजगार और अधिकार की लड़ाई है। रोजगार हमारा अधिकार है। प्रशासन को फेरीवालों की समस्या को सहानुभूति और कानूनी दृष्टिकोण से देखना चाहिए।”

    यूनियन ने मुंबई के सभी QR-Code धारक फेरीवालों और अन्य मेहनतकश फेरीवालों से मोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

    कौन-कौन होंगे शामिल?

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चे में नगर पथ विक्रेता समिति, मुंबई के सदस्य दया शंकर सिंह और जय शंकर सिंह तथा जोन 7 के सदस्य प्रकाश उदेसी और शांताराम शिंदे प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। इनके अलावा लवकुश तिवारी और सलाउद्दीन पटेल के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    मोर्चे का आयोजन शांताराम शिंदे, प्रवीण पाठक, रवी खावडिया, राकेश खावडिया, श्याम सुंदर झा, रविंद्र मिश्रा, फिरोज खान, अहसान अंसारी, पवन तांडले, मनोज राय और राजेश राऊत की ओर से किया जा रहा है।

    10 सितंबर को बोरीवली में जुटेंगे फेरीवाले

    आयोजकों के अनुसार, मोर्चा शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा। इसकी शुरुआत दोपहर 12 बजे जांभली गली से होगी और आर/मध्य विभाग कार्यालय के सामने पहुंचकर फेरीवालों की मांगों को प्रशासन के सामने रखा जाएगा।

    अब मुख्य नजर इस बात पर रहेगी कि QR-Code धारक फेरीवालों की कारोबार संबंधी मांग और Street Vendors Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महानगरपालिका प्रशासन क्या कदम उठाता है।

  • Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA Action: IRCTC Kitchen और ISKCON Juhu पर बड़ा एक्शन, Zepto-linked Facility भी घेरे में

    Mumbai FDA ने IRCTC की Kurla kitchen और ISKCON Juhu के 3 food units पर कार्रवाई की। Zepto-linked facility में भी food safety violations मिले।

    मुंबई: शहर में food safety को लेकर महाराष्ट्र FDA का crackdown लगातार सख्त होता जा रहा है। ताजा कार्रवाई में Kurla की IRCTC-linked base kitchen का licence suspend किया गया है, जबकि Juhu स्थित ISKCON के तीन food establishments पर भी licence suspension की कार्रवाई हुई है। जांच में cockroaches, खुले में रखा खाना, जाम नालियां, खराब hygiene और food-safety records में गंभीर कमियां सामने आईं। Zepto से जुड़ी एक facility में भी pest infestation और cold-chain management में खामियां मिली हैं।

    IRCTC की Kurla kitchen में क्या मिला?

    महाराष्ट्र FDA ने 2 सितंबर को Kurla West स्थित R K Associates & Hoteliers Pvt Ltd की base kitchen का निरीक्षण किया। यह kitchen IRCTC network के जरिए railway passengers के लिए food supply करती है।

    जांच के दौरान food storage और preparation areas में cockroaches पाए गए। कुछ food खुले में रखा था और garbage के पास food preparation होने की बात सामने आई। Kitchen infrastructure में भी कमियां मिलीं, जिनमें damaged tiles और अस्वच्छ surfaces शामिल हैं। बर्तनों और food-contact equipment पर गंदगी तथा जंग की शिकायत भी inspection findings में शामिल रही।

    Food handlers से जुड़े records ने भी सवाल खड़े किए। कुल 34 food handlers में केवल 21 के medical fitness certificates उपलब्ध थे। एक कर्मचारी उंगली पर चोट होने के बावजूद food handling करता मिला। Food transport vehicle की cleanliness और maintenance को लेकर भी FDA ने कमियां दर्ज कीं।

    इन findings के बाद संबंधित kitchen का food licence suspend कर दिया गया।

    क्या IRCTC की पूरी catering service बंद हो गई?

    नहीं। कार्रवाई एक specific IRCTC-linked kitchen पर हुई है। FDA ने मुंबई और ठाणे में IRCTC से जुड़े कुल पांच base kitchens/food plazas की जांच की थी। R K Associates का licence suspend किया गया, जबकि Om Sai Ram Enterprises, Ambuj Hotels & Real Estate Pvt Ltd, Express Food Services और Araha Hospitality Pvt Ltd को improvement notices दिए गए।

    इसका मतलब यह है कि पूरे IRCTC food network को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है।

    ISKCON Juhu के तीन food units पर भी licence suspension

    3 सितंबर को Juhu स्थित ISKCON परिसर में food operations की जांच की गई। FDA को यहां भी कई food-safety violations मिले और तीन establishments के licences suspend किए गए।

    Food Services Restaurant से जुड़ी findings में खुले kitchen entrance, pest-control में कमी, clogged drains, drains में food waste और pest droppings जैसी समस्याएं शामिल हैं। Raw material inspection, laboratory testing, cleaning, employee medical examination, vaccination और staff training से जुड़े records में भी deficiencies बताई गई हैं।

    Govindas Restaurant में pest infestation, clogged drains और cold-storage area में पानी जमा होने की बात सामने आई। Raw और cooked food को पर्याप्त रूप से अलग नहीं रखने की कमी भी दर्ज की गई, जिससे cross-contamination का risk पैदा हो सकता है। Food testing, drinking-water testing, raw-material inspection, pest control और staff records से जुड़े compliance gaps भी पाए गए।

    Zepto-linked facility में cockroaches और cold-chain की समस्या

    FDA की कार्रवाई में Malad West स्थित Drogheria Sellers Pvt Ltd भी शामिल है, जिसे Zepto-linked food facility के तौर पर रिपोर्ट किया गया है।

    Inspection में food-storage areas में cockroaches मिलने की जानकारी सामने आई। Dairy products की storage temperature को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक milk, paneer और curd करीब 14–15°C पर रखे मिले, जबकि cold room का temperature करीब 20–21°C बताया गया। इससे cold-chain management पर सवाल खड़े हुए।

    दूसरे food businesses पर भी कार्रवाई

    FDA की ताजा कार्रवाई केवल IRCTC, ISKCON और Zepto-linked facility तक सीमित नहीं रही। मुंबई और आसपास कई अन्य food businesses भी regulatory action की चपेट में आए हैं।

    Bombay’s The Food Fusion Cafe, Ghatkopar के खिलाफ licence suspension की recommendation की गई। यहां uncovered cooked rice, खुले container में raw chicken, improperly sealed vegetables, refrigeration और drainage से जुड़ी कमियां तथा जरूरी testing/training records की कमी रिपोर्ट हुई।

    Shree Madhuram, Borivali East के registration को suspend करने की recommendation की गई। Kothari Sweet और Mulund Farsan Mart पर भी food production, expired products और pest-related violations को लेकर कार्रवाई हुई।

    Maharashtra Biryani Center, Goregaon East का licence hygiene, pest control, drainage और जरूरी food-safety documentation से जुड़ी कमियों के कारण suspend किया गया।

    FDA की कार्रवाई में Mateshwari Milk, Kharghar भी शामिल है। यहां milk processing, temperature monitoring, calibration, sanitation और labelling से जुड़ी compliance deficiencies report हुई हैं।

    Licence suspend होने का क्या मतलब है?

    Food licence suspension का मतलब संबंधित food business को उस licence के तहत food activity जारी रखने की अनुमति नहीं रहती, जब तक regulatory compliance और आगे की प्रक्रिया पूरी न हो। इसलिए “licence suspended” और “improvement notice” को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

    इसी कार्रवाई में कुछ businesses के licences suspend हुए हैं, जबकि कुछ को केवल improvement notices दिए गए हैं और कुछ के खिलाफ suspension की recommendation की गई है।

    Maharashtra FDA का crackdown क्यों बढ़ा?

    यह कार्रवाई किसी एक दिन की isolated inspection नहीं दिखती। महाराष्ट्र FDA ने पिछले कुछ महीनों में food adulteration और hygiene violations के खिलाफ enforcement तेज किया है। Commissioner Tukaram Mundhe के नेतृत्व में विभाग ने food businesses की inspections और enforcement को अधिक systematic बनाने पर जोर दिया है।

    FDA ने अब year-round “Festival Enforcement Calendar” भी शुरू किया है। इसके तहत festivals, fairs, religious events और बड़े public gatherings के दौरान food adulteration और hygiene violations पर पहले से तय surveillance और sampling की व्यवस्था की जा रही है।

    इस plan में dairy products, sweets, edible oils, paneer, dry fruits और दूसरे high-risk food items पर विशेष निगरानी की जा सकती है। Festival से पहले manufacturing units, markets, cold stores, godowns और wholesale markets तक inspections की योजना बनाई गई है।

    आगे क्या होगा?

    ताजा कार्रवाई से संकेत साफ है कि Maharashtra FDA अब केवल restaurants पर ही नहीं, बल्कि railway food suppliers, institutional kitchens, e-commerce-linked food facilities, dairy businesses और festival-related food operations पर भी निगरानी बढ़ा रहा है।

    ऐसे में जिन businesses के licences suspend हुए हैं, उनके लिए अगला महत्वपूर्ण चरण compliance और regulatory review होगा, जबकि improvement notices पाने वाले establishments को FDA की बताई कमियों को दूर करना होगा।

    मुंबई में food safety को लेकर चल रहा यह crackdown आने वाले festival season में और तेज हो सकता है। FDA का नया enforcement calendar भी इसी दिशा में संकेत देता है कि high-risk food categories और बड़े food-distribution operations पर निगरानी अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से की जाएगी।