मुंबई में दूध को गर्म करने पर रबर जैसी चीज बनने का दावा; FDA से जांच की मांग

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गोरेगांव वेस्ट में Shree Modern Dairy के दूध को गर्म करने पर रबर जैसी सख्त चीज बनने की शिकायत हुई है। FDA से सैंपल टेस्ट की मांग की गई है। पूरी खबर जानें।

मुंबई: गोरेगांव वेस्ट के S.V. Road स्थित Shree Modern Dairy से खरीदे गए दूध को लेकर एक consumer ने गंभीर शिकायत की है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह दूध Shop No. 2, 7/2, Geet Govind Building, Jawahar Nagar, Opposite Cinemax Theatre, Swami Vivekanand Road, Goregaon West, Mumbai-400104 स्थित डेयरी से खरीदा गया था। घर लाकर दूध गर्म करने के बाद उसमें कुछ हिस्सा रबर जैसी सख्त स्थिति में बदलने का दावा किया गया है। मामले की शिकायत Food and Drug Administration (FDA) और मुंबई महानगरपालिका के P/South विभाग के Medical Officer of Health (MOH) के पास करने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, दूध खरीदने के बाद उसे घर लाकर सामान्य तरीके से गर्म किया गया था। गर्म करने के दौरान दूध में असामान्य बदलाव दिखाई दिया और उसके कुछ घटक रबर जैसी कठोर स्थिति में आ गए। इसके बाद इस मामले की जानकारी Shree Modern Dairy को दी गई।

इसके बाद डेयरी का एक कर्मचारी शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और वहां खराब हुए दूध को प्रत्यक्ष देखा। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरी मुलाकात का video उसके पास सुरक्षित है। इसके अलावा दूध की photographs, packet और बचा हुआ milk sample भी सुरक्षित रखा गया है।

यही वजह है कि अब मामला सिर्फ consumer complaint तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता चाहता है कि मौजूद sample को official तरीके से जांच के लिए लिया जाए और laboratory report के जरिए पता लगाया जाए कि आखिर दूध में ऐसा बदलाव क्यों आया।

असली सवाल: दूध में ऐसा बदलाव आखिर क्यों हुआ?

दूध गर्म करने के बाद रबर जैसी सख्त चीज दिखाई देने का मतलब अपने-आप यह साबित नहीं करता कि उसमें रबर या plastic मिलाया गया था। बिना laboratory testing के किसी मिलावट या chemical की मौजूदगी का दावा करना जल्दबाजी होगी।

दूध की quality पर असर storage, temperature control, contamination, microbial activity, processing या दूसरे कारणों से भी पड़ सकता है। इस मामले में सही कारण तभी सामने आएगा जब sample की scientific जांच होगी।

इसीलिए complaint में FDA से दूध का sample लेकर उसकी quality और safety की जांच करने की मांग की गई है।

अब FDA की जांच में किन बातों पर नजर होनी चाहिए?

इस मामले में सबसे अहम चीज milk sample है। अगर sample official जांच के लिए लिया जाता है तो उसकी laboratory examination से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दूध applicable food-safety standards के मुताबिक था या नहीं।

जांच के दौरान दूध की composition, microbiological safety, possible adulteration और दूसरे applicable safety parameters जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। इसके साथ storage और handling conditions की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दूध गर्म करने के बाद कैसा दिखा, बल्कि यह भी पता करना जरूरी है कि वह consumer तक पहुंचने से पहले किस तरह store और handle हुआ था।

दूध दुकान से घर तक कैसे पहुंचा, यह भी अहम सवाल

Milk quality की जांच में उसकी पूरी journey महत्वपूर्ण हो सकती है। दूध खरीदते समय वह chilled था या नहीं, घर पहुंचने में कितना समय लगा, खरीदने के बाद उसे किस temperature पर रखा गया और कितनी देर बाद boil किया गया—ये details investigation में मदद कर सकती हैं।

प्राप्त वीडियो से मिली जानकारी के मुताबिक दूध dairy की तरफ से अलग प्लास्टिक की pouch में भरकर दिया गया था तो source, filling और packaging process की भी जांच की जरूरत हो सकती है।

Plastic pouch को लेकर भी उठ रहा सवाल

शिकायतकर्ता ने एक और point उठाया है। उसका कहना है कि dairy की मशीन पर “प्लास्टिक पिशवी मागू नका” लिखा हुआ है, जबकि दूध plastic bags में दिया जा रहा है।

हालांकि सिर्फ plastic pouch में दूध मिलना अपने-आप में illegal होने का सबूत नहीं है। Milk packaging के लिए food-grade plastic pouches का इस्तेमाल कई परिस्थितियों में किया जाता है।

इसलिए यहां असली सवाल यह है कि इस्तेमाल की जा रही pouch food-grade है या नहीं और क्या वह लागू packaging तथा plastic-waste rules के मुताबिक है।

मशीन पर लिखे message और इस्तेमाल हो रही milk pouch के बीच क्या संबंध है, यह भी मौके की जांच के बाद ही साफ हो सकता है।

Goregaon में पहले भी सामने आ चुका है milk safety का बड़ा मामला

इस complaint के बीच Goregaon West में सामने आया हालिया milk-tampering case भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। 15 जुलाई 2026 को Mumbai Crime Branch Unit 11 और FDA की joint कार्रवाई में branded milk pouches के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया था।

उस कार्रवाई में 558 litres दूध और 822 milk pouches जब्त कर नष्ट किए गए थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने original milk pouches को खोलकर उसमें contaminated water मिलाया और उन्हें दोबारा seal करके बेचने का कथित तरीका अपनाया था।

इस मामले में Krishna Venkayya Lingampally और Ravi Kanahya Patipaka को गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई Mumbai Police Commissioner Deven Bharti और Joint Commissioner of Police (Crime) Anil Kumbhare की supervision में हुई थी, जबकि Assistant Police Inspector Bansode ने आगे की जांच संभाली थी।

यह पुराना मामला और Shree Modern Dairy से जुड़ी मौजूदा consumer complaint अलग-अलग घटनाएं हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों के बीच कोई connection सामने नहीं आया है।

इस शिकायत में consumer के पास क्या evidence है?

शिकायतकर्ता के मुताबिक उसके पास:

  • खराब हुए दूध का sample
  • दूध का packet
  • दूध की photographs
  • डेयरी कर्मचारी के घर आने का video
  • डेयरी कर्मचारी द्वारा खराब दूध को प्रत्यक्ष देखने की जानकारी

मौजूद है।

ऐसे evidence की वजह से laboratory testing और official inspection से मामले की स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है।

FDA और BMC से क्या कार्रवाई की मांग?

शिकायतकर्ता ने FDA और BMC P/South विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच की जाए।

उसकी प्रमुख मांगों में दूध का sample official custody में लेकर laboratory testing कराना, दूध की quality और safety verify करना, संबंधित dairy premises का inspection करना और अगर कोई food-safety violation सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करना शामिल है।

इसके साथ यह भी देखा जाना जरूरी है कि संबंधित dairy का food business registration/licence, milk handling process, storage व्यवस्था और packaging व्यवस्था applicable rules के मुताबिक है या नहीं।

अगर आपके घर में भी दूध गर्म करने पर ऐसा बदलाव दिखे तो क्या करें?

ऐसी स्थिति में सबसे पहले उस दूध को consume करने से बचना चाहिए। दूध या packet को तुरंत फेंकने के बजाय उसे सुरक्षित रखना ज्यादा useful हो सकता है।

Packet की clear photographs लें और उस पर लिखे batch number, packing date, use-by date, MRP और manufacturer की details record करें। अगर purchase bill या digital payment proof है तो उसे भी संभालकर रखें।

दूध गर्म करने से पहले और बाद में जो बदलाव दिखाई दिया हो, उसका photo या video भी evidence के तौर पर रखा जा सकता है। इसके बाद seller या dairy को complaint करने के साथ food-safety authority के पास शिकायत की जा सकती है।

अब सबसे बड़ा इंतजार laboratory report का

फिलहाल इस complaint के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि दूध में रबर, plastic या कोई खास chemical मिला हुआ था। शिकायत में दिखाई गई असामान्य स्थिति की पुष्टि laboratory testing से ही हो सकती है।

अगर official sample की जांच होती है तो report यह समझने में अहम होगी कि दूध वास्तव में substandard, unsafe या adulterated था या फिर बदलाव के पीछे कोई दूसरा कारण था।

इसलिए अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—Shree Modern Dairy से खरीदे गए इस दूध के sample की जांच में आखिर क्या सामने आता है?

Indian FastTrack इस मामले में FDA, BMC P/South और Shree Modern Dairy की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को update करेगा।

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