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  • मुंबई में बिल्डर ने दिया कम कारपेट एरिया, फ्लैट मालिकों को ₹6.64 लाख लौटाने का आदेश

    मुंबई में बिल्डर ने दिया कम कारपेट एरिया, फ्लैट मालिकों को ₹6.64 लाख लौटाने का आदेश

    मुंबई मालाड के बिल्डर को कम कारपेट एरिया देने पर ₹6.64 लाख मुआवजा, 9% ब्याज, मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी खर्च देने का आदेश।

    मुंबई: मालाड पश्चिम में agreement में तय carpet area से कम फ्लैट देने के मामले में महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने Sion के बिल्डर Chinnappan Anthony, proprietor of M/s Milan Builders and Developers, को फ्लैट मालिकों को ₹6,64,640 मुआवजा 9 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। इसके अलावा प्रत्येक शिकायतकर्ता को ₹50,000 मानसिक परेशानी और ₹25,000 मुकदमेबाजी खर्च भी देना होगा।

    560 की जगह मिला 518.46 वर्गफुट area

    मामला मालाड पश्चिम के Shree Balaji Ashirwad प्रोजेक्ट का है। प्रोजेक्ट का पता नहर नगर रोड, भंडारवाड़ा मार्ग, Smt. KG Mittal Institute of Management के सामने, नेवी कॉलोनी के पास, मालाड पश्चिम, मुंबई – 400064 बताया गया है। यह इलाका लिंक रोड कॉरिडोर और पश्चिमी उपनगरों से जुड़ा हुआ है तथा आसपास बैंक, ATM और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    शिकायतकर्ता के 11 जनवरी 2016 के registered Agreement for Sale में फ्लैट का carpet area 560 वर्गफुट तय था। नवंबर 2016 में possession मिलने के बाद registered architect से measurement कराई गई, जिसमें area 518.46 वर्गफुट निकला।

    यानी agreement में तय area से 41.54 वर्गफुट, करीब 7.42 प्रतिशत कम जगह मिली।

    शिकायतकर्ता ने ₹16,000 प्रति वर्गफुट के आधार पर नुकसान की गणना की, जिससे ₹6,64,640 की राशि बनी।

    बिल्डर की दलील नहीं मानी

    Developer ने architect की measurement पर सवाल उठाते हुए complaint का विरोध किया। उसने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता landowner है, इसलिए उसे consumer नहीं माना जाना चाहिए।

    आयोग ने दोनों दलीलों को खारिज कर दिया। उसके मुताबिक developer ने architect की report को चुनौती देने के लिए कोई स्वतंत्र expert measurement पेश नहीं की। वहीं development arrangement के तहत constructed flat पाने वाला landowner भी structural deficiency और statutory non-compliance के मामलों में consumer हो सकता है।

    आयोग ने कहा कि agreement में तय carpet area को purchaser की लिखित सहमति या उचित consideration adjustment के बिना कम करना सेवा में कमी और unfair trade practice है।

    Full OC और society formation पर भी आदेश

    मामले में building का पूर्ण Occupation Certificate (OC) नहीं होने और cooperative housing society का गठन नहीं किए जाने की शिकायत भी की गई थी। आयोग ने इन statutory obligations को continuing nature का माना और developer को संबंधित authorities के साथ जरूरी formalities पूरी करने का निर्देश दिया।

    इसी वजह से developer की यह दलील भी नहीं चली कि शिकायत पुरानी होने के कारण limitation से बाहर है। हालांकि हर पुराने property dispute में यही नियम लागू नहीं होता; complaint की तारीख और cause of action के आधार पर limitation तय होती है।

    Flat मालिकों के लिए क्या मायने?

    इस फैसले से साफ है कि flat खरीदते समय Agreement for Sale में दर्ज carpet area को ध्यान से जांचना जरूरी है। Possession के बाद area में अंतर मिले तो independent architect से measurement कराकर report सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। Buyer को OC, sanctioned plan, society formation और conveyance की स्थिति भी जांचनी चाहिए।

    यह फैसला यह भी नहीं कहता कि हर carpet-area dispute में ₹6.64 लाख compensation मिलेगा। इस मामले में रकम 41.54 वर्गफुट की कमी और ₹16,000 प्रति वर्गफुट के valuation basis पर तय हुई।

  • Andheri में BMC की बड़ी कार्रवाई: 34,000 वर्ग फुट में बने 9 अवैध ढांचे हटे, Fire Station का रास्ता साफ

    Andheri में BMC की बड़ी कार्रवाई: 34,000 वर्ग फुट में बने 9 अवैध ढांचे हटे, Fire Station का रास्ता साफ

    Andheri के Chitrakoot Ground पर BMC ने 34,000 वर्ग फुट में बने अवैध ढांचे हटाए। 1991 से लंबित Fire Station का रास्ता साफ, अब निर्माण की बारी।

    मुंबई: Andheri West के Link Road स्थित Chitrakoot Ground पर BMC ने सोमवार को बड़ी demolition कार्रवाई करते हुए Fire Station के लिए आरक्षित जमीन पर बने अनधिकृत ढांचों को हटा दिया है। करीब 34,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली संरचनाओं पर हुई इस कार्रवाई में garage, banquet/marriage hall और अन्य निर्माण शामिल थे। Bombay High Court में इसी विवाद से जुड़े मामले में नौ संरचनाओं का उल्लेख है। अदालत ने 25 अगस्त 2026 को दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए कुल ₹10 लाख की लागत भी लगाई थी।

    यह कार्रवाई इसलिए अहम है क्योंकि Chitrakoot Ground का यह हिस्सा 1991 से Fire Station के लिए आरक्षित बताया जाता रहा है। करीब 34 साल से अटकी इस परियोजना के लिए अब जमीन खाली कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हालांकि, जमीन खाली होने के बाद अगला सवाल अब यही है कि Ambivali Fire Station का वास्तविक निर्माण कब शुरू होगा।

    BMC ने क्या-क्या हटाया?

    BMC के K-West Ward ने Chitrakoot Ground पर करीब 34,000 वर्ग फुट में फैले अनधिकृत निर्माण हटाए। इनमें DRM Motors, DRM Apparels और Chitrakoot Banquet Hall के अवैध ढांचे बनाए गए थे। कार्रवाई के दौरान BMC के Building and Factory विभाग ने भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया और Amboli Police Station की पुलिस टीम personnel सुरक्षा के लिए मौजूद रहे।

    Bombay High Court में दाखिल मामले में संबंधित निर्माणों के रूप में porta cabins, temporary office structures, car workshop और तीन banquet halls समेत नौ संरचनाओं का विवाद सामने आया था।

    मामला Bombay High Court तक कैसे पहुंचा?

    BMC की कार्रवाई से पहले संबंधित निजी निर्माण कंपनी ने civic body’s demolition notices और orders को Bombay High Court में चुनौती दी थी। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक BMC ने 13 मई 2026 को notices जारी किए और बाद में 1 जुलाई 2026 को removal orders जारी किए।

    मामला Shah Constructions Co. Ltd. बनाम Municipal Corporation of Greater Mumbai के रूप में हाई कोर्ट पहुंचा। 25 अगस्त 2026 को जस्टिस A.S. Gadkari और जस्टिस Kamal Khata की पीठ ने दोनों writ petitions खारिज कर दीं। अदालत ने प्रत्येक याचिका पर ₹5 लाख यानी कुल ₹10 लाख की लागत लगाई।

    हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण को लेकर क्या कहा?

    मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पुराने municipal records, tax assessments, licences और repair permissions जैसे दस्तावेजों पर भरोसा किया गया था। अदालत ने माना कि ऐसे दस्तावेज अपने आप किसी निर्माण को कानूनी नहीं बना देते। किसी संरचना को वैध साबित करने के लिए sanctioned plan और उसके मूल निर्माण की विश्वसनीय जानकारी जरूरी थी।

    मामले में लगभग 34,000 वर्ग फुट constructed area में से करीब 18,000 वर्ग फुट हिस्सा हटाने की पेशकश भी की गई थी, लेकिन अदालत ने बाकी निर्माण को बचाने का आधार स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार यह साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं था कि पुराने और बाद में किए गए निर्माण को स्पष्ट रूप से अलग किया जा सकता है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि property-tax assessment, licences या repair permissions किसी अनधिकृत निर्माण को स्वतः regularise नहीं करते। इसी आधार पर BMC के notices और demolition orders को बरकरार रखा गया।

    1991 से Fire Station के लिए आरक्षित है जमीन

    Chitrakoot Ground का यह हिस्सा Development Plan में Fire Station के लिए आरक्षित किए जाने के बाद भी दशकों तक अपने उद्देश्य के अनुसार विकसित नहीं हो सका। स्थानीय नागरिक संगठनों और पुरानी रिपोर्टों के अनुसार reservation का इतिहास 1991 तक जाता है।

    इस परियोजना को लेकर 2009 में एक और महत्वपूर्ण कदम सामने आया था। जानकारी के अनुसार BMC के Building Proposal Department ने Ambivali Fire Station के निर्माण के लिए Commencement Certificate जारी किया था। लेकिन निर्माण आगे नहीं बढ़ा और बाद में वह अनुमति रद्द हो गई।

    यानी जमीन आरक्षित होने, construction permission मिलने और वर्षों तक प्रशासनिक follow-up के बावजूद Fire Station जमीन पर आकार नहीं ले सका।

    2016 से 2024 तक चलता रहा प्रशासनिक Follow-Up

    यह मामला केवल हाल की demolition drive से शुरू नहीं हुआ। उपलब्ध जानकारी में Mumbai Fire Brigade की 2016 से 2024 तक की correspondence और administrative follow-up का उल्लेख है।

    इस दौरान जमीन के acquisition, handover, development proposal और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर पत्राचार और बैठकें हुईं। 2022 में Suburban Collector के साथ बैठक हुई थी। 2023 में Ambivali Fire Station development proposal से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई थी।

    2025 में भी Fire Brigade ने जमीन को Fire Station के लिए उपलब्ध कराने को लेकर Collector स्तर पर मामला उठाया था। उस समय करीब 5,500 वर्ग मीटर के plot का उल्लेख किया गया था।

    2026 में जमीन खाली कराने की प्रक्रिया तेज हुई

    मार्च 2026 में BMC ने संबंधित पक्ष को Fire Station के लिए आरक्षित जमीन hand over करने के लिए सात दिन का अंतिम समय दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले notice और reminder communication के जरिए जमीन सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।

    इसके बाद project से जुड़ी ₹1.33 करोड़ की bank guarantee भी सामने आई। जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2026 को Municipal Commissioner के पक्ष में यह guarantee जमा की गई थी। अप्रैल में अधिकारियों की ओर से आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी।

    लेकिन सितंबर तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में Fire Station का actual construction शुरू होने की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई थी। यही वजह है कि मौजूदा demolition के बाद परियोजना की अगली समयसीमा सबसे अहम सवाल बन गई है।

    Chitrakoot Ground पर पहले भी हो चुकी है आग की घटना

    Fire Station की जरूरत केवल कागजों में दर्ज reservation का मामला नहीं है। जुलाई 2022 में इसी Chitrakoot Ground पर एक फिल्म सेट में आग लगने से 32 वर्षीय मजदूर की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी इलाके में Fire Station की जरूरत और emergency response को लेकर सवाल उठे थे।

    Lokhandwala-Oshiwara और Link Road का इलाका पिछले वर्षों में तेजी से विकसित हुआ है। यहां residential towers, commercial establishments और high-rise buildings बढ़े हैं। ऐसे इलाके में Fire Brigade के लिए response time बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

    एक वरिष्ठ Fire official के अनुसार वर्तमान में Andheri West के लिए fire brigades को Vile Parle, Goregaon और Bandra जैसे स्थानों से dispatch करना पड़ सकता है, जबकि peak traffic के दौरान दूरी और congestion response time को प्रभावित कर सकते हैं।

    पुरानी रिपोर्टों में traffic और दूरी के कारण emergency response में 30 से 45 मिनट तक की देरी की चिंता भी दर्ज की गई हैं।

    स्थानीय नागरिक वर्षों से उठा रहे हैं मांग

    Lokhandwala-Oshiwara Citizens Association सहित स्थानीय नागरिक समूह लंबे समय से इस जमीन पर Fire Station विकसित करने की मांग करते रहे हैं।

    नागरिकों का कहना है कि केवल demolition करके मामला खत्म नहीं होना चाहिए। पूरी आरक्षित जमीन को दोबारा encroachment से सुरक्षित करना और construction process को आगे बढ़ाना जरूरी है।

    स्थानीय BJP corporator Rupesh Sawarkar ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि उन्होंने चुनाव के बाद से Fire Station की जमीन से encroachment हटाने के लिए प्रशासन के साथ follow-up किया। उनका दावा है कि आरक्षित जमीन का इस्तेमाल wedding functions, film shoots और turf cricket जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और lease arrangements में financial irregularities की आशंका थी।

    अब जमीन खाली होने के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या?

    BMC की कार्रवाई ने Fire Station के लिए लंबे समय से अटकी जमीन से अनधिकृत निर्माण हटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। लेकिन demolition का मतलब Fire Station का निर्माण शुरू होना नहीं है।

    अब प्रशासन के सामने अगली जिम्मेदारियां हैं—क्या पूरा आरक्षित भूखंड सुरक्षित और उपलब्ध हो चुका है, Fire Department को possession कब मिलेगा, final building plan की स्थिति क्या है, project की लागत कितनी है, tender जारी हुआ है या नहीं, निर्माण एजेंसी कौन होगी और Fire Station कब तक operational होगा।

    फरवरी 2026 में करीब 18 महीने के संभावित construction timeline की चर्चा हुई थी, जबकि अप्रैल में आने वाले महीनों में काम शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी। अब सितंबर की demolition कार्रवाई के बाद इस timeline की स्थिति स्पष्ट करना BMC के लिए जरूरी होगा।

    34 साल पुराने Ambivali Fire Station के लिए रास्ते का एक बड़ा अवरोध जरूर हटा है, लेकिन Andheri West के लोगों को अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद निर्माण शुरू होने और Fire Station operational होने की तारीख का इंतजार है।

  • अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax Raid का खुलासा, कारोबारी से ₹1 करोड़ की मांग; 6 गिरफ्तार

    अंधेरी में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों ने कारोबारी पर रेड का नाटक कर ₹1 करोड़ मांगे। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

    मुंबई: अंधेरी ईस्ट में फर्जी Income Tax और Crime Branch अधिकारियों की पूरी टीम बनाकर एक कारोबारी के ऑफिस पर कथित रेड डालने और उससे ₹1 करोड़ की मांग करने का मामला सामने आया है। Andheri Police ने इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

    यह घटना 17 जुलाई 2026 को चकाला के Sahar Cargo Estate स्थित Two M Ophthotronics Pvt Ltd में हुई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी पहचान पत्र, दस्तावेज और कथित search warrant के सहारे खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए करीब चार घंटे तक कारोबारी और कर्मचारियों पर दबाव बनाते रहे।

    कारोबारी और पत्नी को ऑफिस तक कैसे ले जाया गया?

    पुलिस के मुताबिक कंपनी के मालिक राजकुमार कंदासामी, 49, को कर्मचारियों से फोन पर जानकारी मिली कि Income Tax अधिकारियों ने उनके ऑफिस में रेड की है। इसके बाद उन्हें तुरंत ऑफिस पहुंचने के लिए कहा गया।

    कंदासामी अपनी पत्नी के साथ घर से निकले। रास्ते में कथित तौर पर दो लोगों ने खुद को Income Tax अधिकारी बताया, पहचान पत्र दिखाया और दोनों को उसी कैब में बैठकर ऑफिस ले गए। इसी दौरान आरोपियों ने कारोबारी और उनकी पत्नी के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए।

    ऑफिस पहुंचने के बाद कथित फर्जी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की, कंपनी के दस्तावेजों की जांच की और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण रखा। एक आरोपी ने कथित तौर पर search warrant दिखाकर कंदासामी के हस्ताक्षर भी लिए।

    ₹1.70 लाख से ₹1.44 करोड़ की धमकी और फिर ₹1 करोड़ की मांग

    पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कारोबारी से उसके cash expenses के बारे में पूछताछ की। उन्होंने कथित तौर पर ₹1.70 लाख के cash transaction को आधार बनाकर भारी penalty की धमकी दी।

    आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1.44 करोड़ की penalty का डर दिखाया और इसके बाद मामला खत्म करने के लिए ₹1 करोड़ देने की मांग की। कारोबारी ने पैसे देने के बजाय कहा कि यदि कोई tax violation है तो Income Tax Department की ओर से उसे औपचारिक notice दिया जाए और वह पैसा सीधे विभाग को देगा।

    यहीं से आरोपियों की योजना कमजोर पड़ गई। कारोबारी ने बाद में अपने Chartered Accountant से संपर्क किया और Income Tax Department से इसकी पुष्टि कराई। तब पता चला कि उसके ऑफिस में कोई अधिकृत Income Tax raid नहीं हुई थी। इसके बाद उसने Andheri Police से शिकायत की।

    पूर्व ड्राइवर पर क्यों गया पुलिस का शक?

    जांच में संतोष उदय खोपटकर का नाम सामने आया, जो कारोबारी का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। पुलिस के अनुसार उसके पास कारोबारी की आर्थिक गतिविधियों और ऑफिस में cash होने की जानकारी थी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार जांचकर्ताओं का कहना है कि खोपटकर अपने पूर्व मालिक से नाराज था और उसने कथित तौर पर कारोबारी की financial information दूसरे आरोपियों तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर ऑफिस को निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    हालांकि, यह पुलिस की जांच में सामने आया आरोप है और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।

    पुलिस ने मोबाइल बंद होने के बाद भी मुख्य आरोपी को कैसे पकड़ा?

    Andheri Police ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए Call Detail Records (CDR), mobile numbers, dump data, cell-ID और location inputs के साथ CCTV फुटेज का इस्तेमाल किया। अलग-अलग टीमों ने Andheri, Vile Parle, Pune और Nalasopara में जांच की।

    पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी प्रेम किसन सबनानी, 50, ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया था। इससे उसकी live location नहीं मिल रही थी। लेकिन पुराने CDR और cell-ID data से उसके फोन से जुड़े लोगों की लोकेशन Pune के Sinhagad Road इलाके में मिलने लगी।

    पुलिस टीम ने वहां Mumbai-registered वाहनों की तलाश की। एक scooter मिलने के बाद उसके registration details के जरिए सबनानी के ठिकाने तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ के बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया।

    अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

    पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

    • Santosh Uday Khopatkar, 37
    • Vinay Ramesh More, 37
    • Prem Kishan Sabnani, 50
    • Pragya Harish Main/Maine, 27
    • Reshma Shyamrao Warang, 41
    • Sabina Hafiz Shaikh, 48

    पुलिस ने Jitendra More और Ashok Shinde समेत अन्य संदिग्धों की पहचान की है। पुलिस उनकी भूमिका और मौजूदा कानूनी स्थिति की जांच कर रही है।

    क्या आरोपी पहले भी ऐसी वारदात कर चुके हैं?

    जांच में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी Prem Sabnani के खिलाफ तीन समान मामलों के पहले से दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या मौजूदा गिरोह ने इसी तरीके से दूसरे कारोबारियों को भी निशाना बनाया था।

    जांच टीम फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लोगो, rubber stamps, letterheads और search-warrant documents की तलाश कर रही है। जब्त किए गए मोबाइल फोन से calls, WhatsApp chats और financial transactions की भी जांच की जा रही है।

    फर्जी Income Tax Raid को असली समझने की गलती क्यों हुई?

    इस मामले में आरोपियों ने केवल पहचान पत्र दिखाकर भरोसा हासिल करने की कोशिश नहीं की, बल्कि formal कपड़े, files और कथित search warrant का इस्तेमाल किया। इससे पूरी कार्रवाई को वास्तविक सरकारी raid जैसा दिखाने की कोशिश की गई।

    लेकिन Income Tax Department की वास्तविक search और seizure कार्रवाई कानून के तहत अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाती है। Income-tax Act की Section 132 अधिकृत अधिकारी को search और seizure की निर्धारित शक्तियां देती है। विभाग के official Search and Seizure Manual में भी authorised officer और search authorisation की भूमिका स्पष्ट की गई है।

    इसलिए केवल ID card, uniform-जैसे कपड़े या कोई कागज देखकर किसी टीम को genuine मान लेना सुरक्षित नहीं है। किसी संदिग्ध कार्रवाई में स्वतंत्र और आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना महत्वपूर्ण है।

    कारोबारी ऐसी स्थिति में क्या सावधानी रखें?

    अगर कोई व्यक्ति खुद को Income Tax या किसी अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर अचानक कार्रवाई शुरू करता है, तो घबराने के बजाय उसकी पहचान और अधिकार की पुष्टि करना जरूरी है।

    खास तौर पर किसी कथित अधिकारी को व्यक्तिगत खाते, cash handover या मौके पर “settlement” के नाम पर पैसा देना गंभीर red flag हो सकता है। यदि मामला संदिग्ध लगे तो कारोबारी अपने Chartered Accountant या कानूनी सलाहकार से संपर्क कर सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकता है।

    हालांकि, genuine statutory search में अधिकृत अधिकारियों के पास कानून द्वारा निर्धारित search और seizure powers हो सकती हैं। इसलिए केवल इस आधार पर कि कोई notice पहले नहीं आया, हर search को fake मानना भी सही नहीं होगा। क्यों कि Section 132 के तहत अधिकृत अधिकारी को निर्धारित परिस्थितियों में search और seizure की शक्ति दी गई है।

    पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?

    Andheri Police अब कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि आरोपियों को कारोबारी की financial information कहां से मिली और क्या इस जानकारी का इस्तेमाल पहले भी किसी दूसरे businessman को निशाना बनाने में हुआ था।

    पुलिस जब्त मोबाइल फोन, CCTV footage, call records और financial transactions की जांच के साथ उन लोगों की भूमिका भी verify कर रही है जिनके नाम पूछताछ के दौरान Income Tax Department से कथित तौर पर जोड़े गए हैं। पुलिस ने अभी तक ऐसे किसी departmental connection को अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं किया है।

    फिलहाल मामला फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर कार्रवाई करने, कारोबारी और उसकी पत्नी को कथित तौर पर जबरन ले जाने तथा ₹1 करोड़ की कथित extortion demand के आरोपों की जांच के केंद्र में है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और फरार संदिग्धों की तलाश के साथ पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

  • मालाड में दही हांडी के दौरान खंभा गिरा, 7 साल के रुद्र की मौत

    मालाड में दही हांडी के दौरान खंभा गिरा, 7 साल के रुद्र की मौत

    मालाड के मालवणी में दही हांडी फोड़ते समय ईंट का खंभा गिरने से 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा शनिवार दोपहर हुआ।

    मुंबई: मालाड के मालवणी इलाके में शनिवार दोपहर दही हांडी के दौरान 7 साल के रुद्र कदम की मौत हो गई। हादसा करीब 3:01 बजे एकता वेलफेयर सोसायटी, चिकुवाड़ी में हुआ। दही हांडी फोड़ने के लिए बच्चे मानव पिरामिड बना रहे थे। इसी दौरान हांडी को बांधने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी से जुड़े ईंट के खंभे का हिस्सा दबाव में गिर गया, जिसकी चपेट में रुद्र आ गया।

    हांडी फोड़ते समय गिरा खंभा

    जानकारी के मुताबिक, दही हांडी की रस्सी एक पेड़ और जमीन तल की संरचना के ईंट के खंभे से बांधी गई थी। हांडी फोड़ने की कोशिश के दौरान खंभा दबाव नहीं सह सका और उसका हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया। मलबे की चोट रुद्र के सिर पर लगी।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। रुद्र को तुरंत मालवणी जनरल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया।

    मुंबई में 32 गोविंदा घायल

    मालाड की इस घटना के अलावा दही हांडी के दौरान मुंबई के अलग-अलग इलाकों में 32 गोविंदाओं के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से कई को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ का इलाज जारी था।

    दही हांडी आयोजन से पहले बीएमसी ने प्रमुख और उपनगरीय अस्पतालों में घायल गोविंदाओं के इलाज के लिए अतिरिक्त व्यवस्था रखने की जानकारी दी थी।

    हादसे की जांच

    रुद्र की मौत के बाद अब यह जांच का विषय है कि दही हांडी के लिए रस्सी किस तरह बांधी गई थी, जिस खंभे से उसे जोड़ा गया था उसकी स्थिति कैसी थी और आयोजन स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारियों की ओर से हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

  • गेटवे ऑफ इंडिया के पास समुद्र में फेरी बंद, 38 लोग फंसे; दूसरी नाव ने किया रेस्क्यू

    गेटवे ऑफ इंडिया के पास समुद्र में फेरी बंद, 38 लोग फंसे; दूसरी नाव ने किया रेस्क्यू

    मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के पास अनवारी फेरी प्रोपेलर में रस्सी फंसने से समुद्र में बंद हो गई। 34 यात्रियों समेत 38 लोगों को दूसरी नाव ने सुरक्षित निकाला।

    मुंबई: गेटवे ऑफ इंडिया से समुद्री सैर पर निकली अनवारी फेरी गुरुवार रात समुद्र में अचानक बंद हो गई। फेरी में 34 यात्री और चार चालक दल के सदस्य समेत कुल 38 लोग सवार थे। करीब रात 8:30 बजे खराबी आने के बाद चालक दल ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पास चल रही दूसरी फेरी की मदद से सभी लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

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    घटना के बाद रेस्क्यू कि तस्वीर

    प्रोपेलर में फंसी थी रस्सी

    पुलिस के मुताबिक, फेरी के प्रोपेलर में रस्सी फंस गई थी, जिसकी वजह से वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। उस समय अनवारी गेटवे से करीब 1.5 समुद्री मील दूर थी और करीब 30 मिनट की समुद्री सैर पूरी करके लौट रही थी।

    फेरी के चालक दल ने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी। गेटवे की बीट चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने आसपास मौजूद नावों से मदद लेने की कोशिश शुरू की।

    ‘आजाद हिंद’ ने खींचकर पहुंचाया जेट्टी तक

    पुलिस को पता चला कि आजाद हिंद नाम की एक दूसरी फेरी आसपास चल रही है। पुलिस ने उसके मालिक जुनैद मुल्ला से संपर्क किया। इसके बाद आजाद हिंद को अनवारी की मदद के लिए भेजा गया।

    आजाद हिंद ने खराब पड़ी फेरी को खींचकर गेटवे ऑफ इंडिया की जेट्टी नंबर 2 तक पहुंचाया। उपलब्ध पुलिस-आधारित बयान के अनुसार करीब 9:10 बजे सभी 38 लोगों को सुरक्षित उतार लिया गया।

    पुलिस करेगी चालक दल से पूछताछ

    घटना के बाद पुलिस चालक दल से पूछताछ करेगी। इसका मकसद यह पता लगाना है कि प्रोपेलर में रस्सी कैसे फंसी और फेरी समुद्र में रुकने की स्थिति में कैसे पहुंची। फिलहाल किसी यात्री के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    2024 के हादसे के बाद सुरक्षा फिर चर्चा में

    गेटवे से चलने वाली नावों की सुरक्षा का मुद्दा नया नहीं है। दिसंबर 2024 में गेटवे के पास हुए गंभीर नौका हादसे के बाद महाराष्ट्र में नावों में यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करने और सुरक्षा जांच बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए थे।

    हालांकि, गुरुवार रात अनवारी में सवार यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी थी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसी तरह फेरी की तकनीकी जांच, फिटनेस और आगे की कार्रवाई को लेकर भी पुलिस की पूछताछ के बाद ही स्थिति साफ होगी।

    फिलहाल इस घटना में सभी 38 लोग सुरक्षित हैं। अब जांच का मुख्य सवाल यही है कि समुद्र में फेरी के प्रोपेलर में रस्सी कैसे फंसी और ऐसी स्थिति से बचने के लिए आगे क्या सुरक्षा कदम उठाए जाते हैं।

  • मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    मुंबई में यात्रियों की जेब पर ‘मीटर गेम’ का खतरा? दहिसर में 5 वाहन पकड़े, आरटीओ से बड़े सवाल

    दहिसर में टैक्सी-रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 5 आरोपी और 5 वाहन पकड़े। अब पूरे मुंबई में जांच की मांग।

    मुंबई: मुंबई में टैक्सी या रिक्शा में बैठने के बाद मीटर पर दिखने वाला किराया ही यात्री के लिए भरोसे का आधार होता है। लेकिन दहिसर में किराया मीटर के साथ इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद इस भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दहिसर पुलिस ने मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर किराए में हेरफेर करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है और पांच वाहन जब्त किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर टैक्सी और रिक्शा के मीटर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए छेड़छाड़ कर यात्रियों से निर्धारित किराए से ज्यादा रकम वसूलने का आरोप है। कार्रवाई में दो काली-पिली टैक्सी, दो रिक्शा और एक मारुति आर्टिगा जब्त की गई है।

    एक टैक्सी से खुला मामला, जांच में सामने आए पांच वाहन

    दहिसर पुलिस को टैक्सी और रिक्शा के मीटर में छेड़छाड़ कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूले जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध वाहन की जांच शुरू की।

    1 सितंबर 2026 की रात करीब 9 बजे एक यात्री को टैक्सी क्रमांक MH 01 CJ 6487 से सफर के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, टैक्सी चालक द्वारा मीटर में छेड़छाड़ किए जाने का संदेह हुआ। इसके बाद वाहन को जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय, बोरीवली भेजा गया।

    आरटीओ की जांच में मीटर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट जैसी डिवाइस लगाए जाने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक इसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ के जरिए मीटर की रीडिंग को प्रभावित कर यात्रियों से ज्यादा किराया वसूला जा रहा था।

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को ऐसे ही दूसरे वाहनों की भी जानकारी मिली। इसके बाद कुल पांच वाहनों को जब्त किया गया।

    कौन-कौन से वाहन पकड़े गए?

    पुलिस के मुताबिक कार्रवाई में ये वाहन जब्त किए गए हैं—

    • काली-पिली टैक्सी — MH 01 CJ 6487
    • काली-पिली रिक्शा — MH 02 DU 0777
    • काली-पिली रिक्शा — MH 03 BY 4268
    • काली-पिली टैक्सी — MH 02 BQ 7392
    • मारुति आर्टिगा — MH 01 EM 6048

    पुलिस ने मीटर में छेड़छाड़ के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक रिंगिंग सर्किट को भी जब्त किया है।

    पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई

    इस मामले में पुलिस ने जौएब अल्ताफ देशमुख (32), अमीन रमजान पठाण (39), रियाज अब्दुलगनी शेख (45), नाजीर इब्राहिम पटेल (57) और आनंद कुमार नानाकप्रसाद राय (60) के खिलाफ कार्रवाई की है।

    पुलिस के मुताबिक मामले में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

    मुंबई के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल

    दहिसर में पांच वाहनों में मीटर से छेड़छाड़ सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ इन पांच वाहनों तक सीमित नहीं है।

    अगर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए किराया मीटर में हेरफेर किया जा सकता है, तो मुंबई के दूसरे इलाकों में चल रहे टैक्सी और रिक्शा के मीटर कितने सुरक्षित हैं?

    यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में मुंबईकर टैक्सी और रिक्शा से सफर करते हैं। यात्री मीटर में दिखाई देने वाली रकम को सही मानकर भुगतान करता है। ऐसे में मीटर के साथ तकनीकी छेड़छाड़ होने पर उसे अतिरिक्त किराया वसूले जाने का पता भी नहीं चल सकता।

    हालांकि, दहिसर के इन पांच वाहनों के मामले से पूरे मुंबई में इस तरह की धोखाधड़ी हो रही है, ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इस कार्रवाई ने परिवहन विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जांच का मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है।

    अब आरटीओ की जवाबदेही पर सवाल

    इस मामले में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की भूमिका को लेकर भी है।

    दहिसर पुलिस की कार्रवाई के बाद क्या मुंबई के अलग-अलग इलाकों में टैक्सी और रिक्शा के मीटरों की विशेष जांच की जाएगी?

    क्या आरटीओ यह जांच करेगा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाकर मीटर की रीडिंग में हेरफेर करने जैसी तकनीक का इस्तेमाल दूसरे वाहनों में कहीं हो तो नहीं रहा?

    और अगर ऐसी जांच होती है तो कितने वाहनों के मीटर सही पाए जाते हैं और कितनों में गड़बड़ी सामने आती है, इसकी जानकारी क्या सार्वजनिक की जाएगी?

    इन सवालों का जवाब जरूरी है, क्योंकि मीटर में हेरफेर का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ता है।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई

    यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। जिसमें, अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज एरवडे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सर्जेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अधिकारी मारुती सांगळे के मार्गदर्शन में टीम ने कार्रवाई की।

    कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके के साथ पुलिसकर्मी हेमंत बाबुराव दिवारे, सुनील चंद्रकांत राठोड, संतोष काशिनाथ भागवत और ऋषिकेश प्रवीण मोरे शामिल थे। बताया गया कि सबसे पहले इसकी जानकारी सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश शिवाजी साळुंके को मिली थी जिसके निगरानी के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से जांच के निर्देश मिले।

    दहिसर की कार्रवाई ने खोल दिया बड़ा सवाल

    दहिसर पुलिस की इस कार्रवाई से फिलहाल पांच वाहनों और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला सामने आया है। लेकिन इससे मुंबई के परिवहन तंत्र के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा हो गया है—क्या सिर्फ दहिसर में ही मीटर की ऐसी जांच होगी या आरटीओ पूरे मुंबई में टैक्सी-रिक्शा के मीटरों की व्यापक जांच शुरू करेगा?

    क्योंकि अगर मीटर ही गलत रीडिंग दिखाए, तो यात्री के पास सही किराया जानने का भरोसेमंद आधार क्या बचेगा?

    यही वह सवाल है जिसका जवाब अब मुंबई के यात्रियों को आरटीओ और संबंधित परिवहन अधिकारियों से चाहिए।

  • मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel, जांच शुरू; आखिर युवक ड्राइवर सीट तक पहुंचा कैसे? चाबी और CCTV पर सवाल

    मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Reel का वीडियो वायरल होने के बाद जांच शुरू हुई। युवक पुलिस वाहन के अंदर कैसे पहुंचा, चाबी और CCTV पर सवाल हैं।

    मुंबई: मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग SUV में Instagram Reel बनाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है। वायरल वीडियो में एक युवक पुलिस की गाड़ी की ड्राइवर सीट पर बैठकर स्टीयरिंग पकड़े नजर आ रहा है। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि वह पुलिस वाहन के अंदर पहुंचा कैसे?

    वीडियो में क्या दिखा?

    वायरल क्लिप में युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर कैमरे के लिए पोज करता दिखाई देता है। वीडियो में “Daddy’s Home” ऑडियो इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन रिपोर्ट्स में वीडियो को Instagram अकाउंट @harijan6282 से जोड़ा गया है और युवक का नाम विजय हरिजन बताया गया है। हालांकि, उसकी पुलिस से किसी तरह की आधिकारिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है।

    वायरल हो रहा यह वीडियो Instagram पर अब उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि विवाद के बाद वीडियो डिलीट कर दिया गया। जबकि वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में एक युवक मुंबई पुलिस की SUV के ड्राइवर सीट पर बैठकर Reel बनाता नजर आता है। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहे हैं कि उसे पुलिस वाहन के अंदर जाने की अनुमति कैसे मिली और वाहन की चाबी उसके पास कैसे पहुंची।

    चाबी किसके पास थी?

    इस मामले में सिर्फ Reel बनाना मुद्दा नहीं है। बड़ा सवाल पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी तक पहुंच का है।

    अगर युवक पुलिसकर्मी नहीं था, तो वह वाहन के अंदर कैसे पहुंचा? क्या SUV उस समय लॉक थी? चाबी किसके पास थी? वाहन किसकी ड्यूटी में था और क्या किसी ने उसे अंदर जाने की अनुमति दी?

    इन सवालों के जवाब CCTV फुटेज, वाहन की ड्यूटी एंट्री और संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ के जरिए सामने आ सकते हैं।

    वीडियो में युवक को ड्राइवर सीट पर बैठे देखा जा सकता है, लेकिन वह वाहन चला रहा था, ऐसा साबित करने वाला कोई स्पष्ट दृश्य सामने नहीं आया है।

    पुलिस के सोशल मीडिया नियम भी अहम

    फरवरी 2026 में मुंबई पुलिस ने अपने कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। करीब 51,000 पुलिसकर्मियों को जारी आदेश में वर्दी में Reels और mini-vlogs बनाने पर रोक लगाई गई थी। पुलिस ने इसकी वजह सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े जोखिम बताए थे, क्योंकि ऐसे वीडियो में सरकारी वाहन, पुलिस परिसर और ड्यूटी से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।

    महाराष्ट्र सरकार ने 2025 में सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनमें सरकारी वाहन और संपत्ति को निजी सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाने को लेकर नियम शामिल थे।

    पुलिस वाहन की निगरानी पर फिर सवाल

    मुंबई में हाल ही में Coastal Road पर पुलिस वाहन से जुड़ा एक अलग मामला भी सामने आया था। जहां एक पुलिस वाहन कथित तौर पर बिना निगरानी रह गया था और उसकी चाबी वाहन में थी। बाद में वाहन को लेकर घटना हुई और CCTV की जांच की गई।

    दोनों मामले अलग हैं, लेकिन इनके सामने आने से पुलिस वाहनों की चाबी, custody और निगरानी को लेकर सवाल जरूर उठे हैं।

    जांच में अब क्या साफ होना बाकी?

    जांच में सबसे पहले वाहन की पहचान, घटना की जगह और समय तथा उस वक्त वाहन किस पुलिसकर्मी के जिम्मे था, यह स्पष्ट होना जरूरी है। इसके साथ CCTV, वाहन रिकॉर्ड और चाबी की स्थिति से यह पता चल सकता है कि युवक को SUV तक पहुंच कैसे मिली।

    अगर किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या अनुमति सामने आती है तो विभागीय कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, अगर युवक ने बिना अनुमति पुलिस वाहन में प्रवेश किया था, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल FIR, गिरफ्तारी या किसी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही है—पुलिस की पेट्रोलिंग SUV तक युवक पहुंचा कैसे और उस वक्त वाहन की जिम्मेदारी किसके पास थी?

  • मुंबई लोकल में बड़ा बदलाव: Borivali की 2 ट्रेनें नहीं रुकेंगी, 6 नई सेवाएं और 6 बंद; AC लोकल बढ़ीं, Dadar-Dahanu direct, Virar-Churchgate भी बदला

    मुंबई लोकल में बड़ा बदलाव: Borivali की 2 ट्रेनें नहीं रुकेंगी, 6 नई सेवाएं और 6 बंद; AC लोकल बढ़ीं, Dadar-Dahanu direct, Virar-Churchgate भी बदला

    Western Railway का नया लोकल टाइमटेबल लागू है। Borivali halt, AC लोकल, नई-बंद सेवाओं और Virar-Dahanu connectivity में क्या बदला, जानें।

    मुंबई: मुंबईकरों के लिए Western Railway का नया Suburban Timetable No. 79 आज, 1 सितंबर 2026 से लागू हो गया है। इस बार कुल लोकल सेवाओं की संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूदा 1,414 services का timetable बदला गया है। सबसे बड़ा प्रयोग Borivali में होगा, जहां शाम की 18:22 बजे वाली Churchgate–Virar AC और 19:05 बजे वाली Churchgate–Virar service को trial basis पर Borivali halt से हटा दिया गया है। दोनों सेवाओं का Dahisar halt बरकरार रखा गया है।

    रेलवे का मकसद Borivali के peak-hour congestion और उससे होने वाले train detention को कम करना है। लेकिन Borivali से रोज सफर करने वालों के लिए सीधा सवाल है—इन बदलावों से उनकी रोज की यात्रा आसान होगी या भीड़ सिर्फ दूसरी लोकल में चली जाएगी?

    Borivali में ट्रेन रोकना क्यों कम किया गया?

    Western Railway के मुताबिक Borivali पर peak hours में एक साथ बड़ी संख्या में passengers के चढ़ने-उतरने से door area में crowding बढ़ती है और train को station पर ज्यादा समय रुकना पड़ सकता है। इससे पीछे आने वाली services का punctuality pattern भी प्रभावित हो सकता है। इसी operational bottleneck को कम करने के लिए दो Churchgate–Virar services को Borivali पर रोकने का फैसला trial के तौर पर किया गया है।

    Borivali का passenger load इस फैसले को समझने के लिए अहम है। केंद्र सरकार के जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक स्टेशन करीब 3.65 लाख passengers रोज handle करता है। यहां करीब 1,200 suburban और करीब 191 long-distance train services आती-जाती हैं। Borivali suburban यात्रियों के साथ long-distance passengers के लिए भी boarding, de-boarding और interchange point है, जिससे peak hours में passenger movement और ज्यादा complex हो जाता है।

    यानी रेलवे का experiment सिर्फ दो trains का halt हटाने तक सीमित नहीं है। असली test यह होगा कि Borivali पर बचा हुआ crowd दूसरी services में कितना shift होता है और पूरे corridor की punctuality पर उसका क्या असर पड़ता है।

    18:22 और 19:05 वाली ट्रेन से Borivali जाने वालों को क्या करना होगा?

    18:22 बजे Churchgate से चलने वाली AC service के passengers के लिए एक स्पष्ट alternative मौजूद है। 18:28 बजे Churchgate से दूसरी AC local चलती है और वह Borivali पर रुकती है। यानी दोनों trains के बीच सिर्फ छह मिनट का अंतर है।

    19:05 वाली Churchgate–Virar service के लिए भी railway ने alternative services उपलब्ध होने की बात कही है, लेकिन इस particular train के Borivali passengers के लिए किसी एक replacement service को उसी तरह निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे यात्रियों के लिए revised timetable देखकर अपनी regular journey को adjust करना जरूरी होगा।

    दोनों affected trains का Dahisar halt बरकरार है। इसका मतलब Borivali पर उतरने या चढ़ने वाला passenger जरूरत के मुताबिक Dahisar तक जा सकता है, लेकिन वहां से आगे की यात्रा के लिए उसे अपनी सुविधा के हिसाब से अलग व्यवस्था करनी होगी।

    6 नई लोकल आईं, लेकिन कुल संख्या फिर भी 1,414

    नई timetable का दूसरा बड़ा बदलाव services की redistribution है। Western Railway ने 6 नई services शुरू की हैं और कम मांग वाली 6 existing services को withdraw किया है। इसलिए कुल suburban services की संख्या 1,414 पर ही बनी हुई है।

    नई services में मुख्य बदलाव extended suburban और late-night connectivity में हैं:

    नई सेवासमयबदलाव का फायदा
    Bhayandar–Virar07:46सुबह Virar side connectivity
    Bandra–Churchgate11:58दिन में अतिरिक्त service
    Borivali–Bhayandar22:14देर रात connectivity
    Borivali–Virar22:51Virar के लिए late-night option
    Virar–Borivali23:51रात में return connectivity
    Borivali–Bhayandar00:28आधी रात के बाद अतिरिक्त service

    इन बदलावों से खासकर late-evening और night commuters को अतिरिक्त options मिलेंगे।

    कौन-सी 6 services बंद हुईं?

    नए timetable में छह existing services हटाई गई हैं। इनमें दो Up और चार Down services शामिल हैं।

    Up direction में:

    • 94138 — Borivali–Churchgate AC
    • 90540 — Borivali–Churchgate

    Down direction में:

    • 94137 — Churchgate–Borivali AC
    • 90359 — Churchgate–Mumbai Central
    • 90483 — Churchgate–Borivali
    • 90911 — Churchgate–Mumbai Central

    Railway के मुताबिक withdrawn services मुख्य रूप से low-demand/non-peak runs हैं, इसलिए इन services को हटाकर उनके train paths और resources को दूसरे जरूरत वाले slots में इस्तेमाल किया गया है।

    AC लोकल 145 से बढ़कर 147, लेकिन तरीका क्या है?

    Weekdays पर AC local services अब 145 से बढ़कर 147 होंगी। इसके लिए दो existing non-AC services को AC में convert किया गया है।

    इनमें:

    • Churchgate–Borivali: 17:28
    • Borivali–Churchgate: 18:24

    शामिल हैं। इन services के route और timings को बरकरार रखते हुए AC operation किया गया है। इसलिए इसे दो पूरी तरह अतिरिक्त train services बढ़ने के बजाय existing network की AC capacity बढ़ने के रूप में समझना चाहिए।

    Virar और Dahanu Road वालों के लिए क्या बदला?

    नए timetable में extended suburban belt को भी ध्यान में रखा गया है।

    सुबह 08:23 बजे Virar से चलने वाली Virar–Dadar service को अब Churchgate तक extend किया गया है। यह करीब 09:48 बजे Churchgate पहुंचेगी। इससे सुबह Virar side से South Mumbai जाने वाले passengers को Churchgate तक direct option मिलता है।

    शाम को Dadar से Dahanu Road तक direct connectivity भी दी गई है। revised service Dadar से 17:22 बजे रवाना होकर करीब 19:30 बजे Dahanu Road पहुंचेगी। इसके लिए existing Dadar–Virar और Virar–Dahanu Road operations को integrate किया गया है।

    इस बदलाव का खास फायदा उन यात्रियों को मिलेगा जिन्हें शाम के समय Dadar से Virar के आगे Dahanu Road belt तक जाना होता है।

    Borivali की 10:24 वाली AC Slow भी बदली

    Borivali से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव सुबह की AC service में है।

    Churchgate से 10:24 बजे चलने वाली AC Slow, जो पहले Borivali तक जाती थी, अब Goregaon तक operate करेगी। इसका return operation भी Goregaon से होगा। इसलिए जो passenger इस service को Borivali तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल करते थे, उन्हें अब अपनी journey के लिए दूसरा option देखना होगा।

    रात में देर तक लोकल मिलने का फायदा

    नई timetable में late-night connectivity को भी जगह दी गई है। Borivali–Bhayandar–Virar corridor में रात 10 बजे के बाद और आधी रात के आसपास नई services जोड़ी गई हैं।

    इसका मतलब यह है कि timetable का पूरा focus सिर्फ office peak पर नहीं है। Western Railway ने रात के उन slots में भी service gaps को target किया है जहां यात्रियों के पास पहले comparatively कम options होते थे।

    सिर्फ timetable नहीं, capacity बढ़ाने की भी कोशिश

    Western Railway की strategy को केवल “नई ट्रेनें नहीं बढ़ीं” के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता।

    मार्च 2026 में 16 existing 12-car suburban services को 15-car trains में convert किया गया था। इससे 15-car services की संख्या 211 से बढ़कर 227 हुई, जबकि कुल suburban services 1,414 ही रहीं। इनमें आठ services morning और evening peak hours में operate की गईं।

    इससे एक बात साफ होती है—रेलवे केवल train count बढ़ाने के बजाय एक train में ज्यादा passengers carry करने, AC capacity बढ़ाने और existing train paths को ज्यादा efficiently इस्तेमाल करने की strategy पर भी काम कर रही है।

    इसी broader infrastructure push के तहत Kandivali–Borivali के बीच 3.21 किलोमीटर की sixth line जनवरी 2026 में commission की गई थी।

    Borivali के लिए station redevelopment और passenger circulation सुधारने की planning भी चल रही है। केंद्र सरकार के अनुसार proposed master plan में additional platform, बेहतर passenger circulation, upgraded concourse, foot overbridges और access systems जैसे काम शामिल हैं।

    अब सबसे बड़ा सवाल: Borivali experiment सफल हुआ या नहीं?

    इसका जवाब आने वाले दिनों के operational data से मिलेगा।

    अगर दो trains को Borivali से हटाने के बाद station पर boarding और alighting का pressure कम होता है, trains कम देर रुकती हैं और पीछे आने वाली services ज्यादा punctual होती हैं, तो रेलवे के इस experiment को फायदा माना जा सकता है।

    लेकिन अगर Borivali का passenger load अगली local में चला जाता है और दूसरी trains में crowding बढ़ने लगती है, तो यात्रियों के लिए समस्या सिर्फ एक train से दूसरी train में shift हो सकती है।

    इसीलिए नए timetable का सबसे अहम measure सिर्फ यह नहीं होगा कि Borivali पर दो trains कितनी जल्दी निकल गईं। असली सवाल यह होगा कि Churchgate–Borivali–Virar corridor की overall punctuality और passenger crowding में कितना वास्तविक सुधार आता है।

    यात्रियों के लिए एक जरूरी बदलाव

    Western Railway की official timetable listing में 1 सितंबर 2026 से लागू Mumbai Suburban Timetable उपलब्ध है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि en-route stations पर कुछ suburban trains scheduled departure time से 3 मिनट पहले तक निकल सकती हैं। इसलिए रोज के commuters को सिर्फ अपनी पुरानी timing याद रखने के बजाय नए timetable के अनुसार departure check करना जरूरी है।

    फिलहाल Borivali की दो peak-hour services का halt हटाना trial basis पर है। बाकी बदलाव—नई और withdrawn services, AC conversion, Dadar–Dahanu direct connectivity, Virar–Churchgate extension और late-night services—नए timetable का हिस्सा हैं।

    अब नजर इस बात पर रहेगी कि Western Railway का यह “smart timetable” वास्तव में Borivali की भीड़ और Western line की delays को कितना कम कर पाता है और इसका फायदा सबसे ज्यादा किस corridor के यात्रियों को मिलता है।

  • मुंबई पोर्ट में अचानक पलटी क्रेन, जहाज से टकराते ही लगी आग; 2 कर्मचारी घायल

    मुंबई पोर्ट में अचानक पलटी क्रेन, जहाज से टकराते ही लगी आग; 2 कर्मचारी घायल

    मुंबई पोर्ट के बल्लार्ड पियर में क्रेन पलटकर जहाज से टकरा गई और आग लग गई। हादसे में दो कर्मचारी घायल हुए, पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मुंबई: मुंबई पोर्ट के बल्लार्ड पियर इलाके में रविवार शाम अचानक एक क्रेन पलटकर जहाज से टकरा गई। टक्कर के बाद क्रेन में आग लग गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे में क्रेन संचालन से जुड़े दो कर्मचारी घायल हुए हैं। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    माल उतारते समय बिगड़ा क्रेन का संतुलन

    यह हादसा बीपीएस बंदरगाह क्षेत्र में हुआ। पुलिस के मुताबिक, बारबाडोस के झंडे वाले मालवाहक जहाज ‘वियना’ से करीब 140 मीट्रिक टन माल उतारा जा रहा था। इसके लिए दो क्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

    माल उठाने के दौरान एक क्रेन से जुड़ा पट्टा असंतुलित होकर निकल गया। इसके बाद भार दूसरी क्रेन पर आ गया और उसका संतुलन बिगड़ गया। क्रेन का आगे का हिस्सा जहाज से जा टकराया।

    टक्कर के बाद लगी आग

    जहाज से टकराने के बाद क्रेन में आग लग गई। सूचना मिलते ही मुंबई पोर्ट के दमकल दल मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। करीब एक घंटे के भीतर आग बुझा दी गई।

    हादसे में बरकत कंपनी के कर्मचारी रंजीत सिंह और निशांत सिंह घायल हुए। दोनों को सेंट जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया। उनकी चोटों की गंभीरता को लेकर फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    जहाज और बंदरगाह के काम पर क्या असर?

    हादसे के बाद जहाज ‘वियना’ को मौके पर रखा गया और नुकसान का आकलन किया जा रहा था। प्रभावित जगह पर माल संभालने का काम कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। हालांकि पूरे मुंबई पोर्ट के कामकाज पर कितना असर पड़ा, इसकी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

    हादसा कैसे हुआ, इसकी जांच जारी

    पुलिस शुरुआती तौर पर तकनीकी गड़बड़ी और भार का संतुलन बिगड़ने की वजह की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि माल उठाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और इस्तेमाल किए गए उपकरणों की स्थिति कैसी थी।

    फिलहाल हादसे में दो कर्मचारियों के घायल होने की पुष्टि है। क्रेन और जहाज को हुए नुकसान की पूरी तस्वीर तकनीकी आकलन के बाद साफ होगी। पुलिस की जांच जारी है और हादसे की वास्तविक वजह पर अब जांच एजेंसियों की नजर है।

  • Malad Road Accident: 65 साल के ड्राइवर पर केस, महिला की मौत; थाने में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

    Malad Road Accident: 65 साल के ड्राइवर पर केस, महिला की मौत; थाने में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से मचा बवाल

    Malad Road Accident में महिला की मौत के बाद 65 वर्षीय ड्राइवर गिरफ्तार हुआ। पुलिस स्टेशन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों ने मामले को और गरमा दिया है।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में 30 अगस्त की रात हुए सड़क हादसे के मामले में 65 वर्षीय कार ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, मामलतदार वाडी जंक्शन पर कार ने एक स्कूटर और इसके बाद तीन ऑटो रिक्शा को टक्कर मारी, जिसमें प्रियंका शाह की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। वहीं, आरोपी को पुलिस स्टेशन में कथित तौर पर VIP सुविधाएं दिए जाने के आरोपों ने अब हादसे के साथ-साथ पुलिस के रवैये पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मामलेदार वाडी जंक्शन पर कैसे हुआ हादसा?

    पुलिस के मुताबिक, हादसा 30 अगस्त की रात करीब 8 बजे मालाड वेस्ट के मामलेदार वाडी जंक्शन पर हुआ। उस वक्त Mayank Satra अपनी पत्नी Priyanka Satra के साथ Activa स्कूटर पर थे और दोनों ट्रैफिक सिग्नल पर रुके हुए थे।

    पुलिस का आरोप है कि कृष्ण चमनाकर नाम के 65 वर्षीय ड्राइवर ने कथित तौर पर तेज और लापरवाही से कार चलाते हुए स्कूटर को टक्कर मारी। इसके बाद कार तीन अन्य ऑटो रिक्शा से भी जा टकराई। हादसे में कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई। प्रियंका सातरा को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मौत हो गई।

    आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार, इन धाराओं में केस

    प्रियंका सातरा के परिवार की शिकायत के आधार पर मालाड पुलिस ने आरोपी कृष्ण चमनाकर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार उस पर BNS की धारा 106(1), 281 और 125(A)(B) के साथ Motor Vehicles Act की धारा 184 के तहत कार्रवाई की गई है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। मामले की आगे की जांच जारी है।

    अब पुलिस स्टेशन में ‘VIP ट्रीटमेंट’ के आरोप क्यों?

    हादसे के बाद मृतका के परिजनों और स्थानीय लोगों की तरफ से मालाड पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित तौर पर विशेष व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

    आरोपों में कहा गया है कि आरोपी को लॉकअप में मोबाइल इस्तेमाल करने दिया गया, बैठने के लिए कुर्सी दी गई और बाद में उसे पुलिस स्टेशन के पीछे एक AC कमरे में बैठाए जाने की बात सामने आई। यह भी दावा किया गया कि मेडिकल जांच के नाम पर आरोपी को लॉकअप से बाहर ले जाया गया और परिजनों को उसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

    इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध पुलिस बयान से नहीं हुई है। इसलिए इन्हें आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इस मामले में पुलिस की ओर से कथित VIP सुविधाओं पर कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने तक इन दावों को पुख्ता तथ्य मानना सही नहीं होगा।

    ‘20 लोगों को रौंदने’ के दावे पर क्या सामने आया?

    इस घटना को लेकर अब तक की जानकारी में 20 लोगों के चपेट में आने और दो लोगों की मौत का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्ट में हादसे में एक महिला की मौत, स्कूटर और तीन ऑटो रिक्शा के क्षतिग्रस्त होने तथा कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। पुलिस जांच के बाद मामला साफ होने की गुंजाइश जताई जा रहीं है।

    अब नजर पुलिस की जांच पर

    फिलहाल सबसे अहम दो पहलू हैं—हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच और पुलिस स्टेशन में आरोपी के साथ कथित विशेष व्यवहार की शिकायतों की जांच।

    सड़क हादसे के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर केस दर्ज कर लिया है। वहीं, अगर पुलिस स्टेशन में मोबाइल, AC कमरे या अन्य विशेष सुविधाएं दिए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

    पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज समेत उपलब्ध सबूतों की जांच की जाए। अब आगे की कार्रवाई और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया से यह साफ होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।