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  • ‘अगर पढ़े-लिखे होते तो ऑफिस में बैठते’… मराठी नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो चालकों की 3 दिन की हड़ताल

    ‘अगर पढ़े-लिखे होते तो ऑफिस में बैठते’… मराठी नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो चालकों की 3 दिन की हड़ताल

    मुंबई में मराठी नियम के विरोध में ऑटो चालकों के वर्ग की 3 दिन की हड़ताल शुरू, कांदिवली में सड़क रोकी गई। जानिए नियम, नोटिस, यात्रियों पर असर और आगे क्या होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप बेस्ड कैब चालकों के लिए मराठी भाषा की working knowledge अनिवार्य किए जाने के बाद विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। सोमवार को मुंबई के कांदिवली इलाके में ऑटो चालकों के एक वर्ग ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया और तीन दिन की हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया।

    कांदिवली लिंक रोड पर चालकों ने अपनी गाड़ियां रोककर प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। इस विरोध के बीच मुंबई और MMR के कई हिस्सों में ऑटो और टैक्सी की availability पर भी असर देखने को मिला। खासकर residential areas से railway stations तक जाने वाले feeder routes पर commuters को परेशानी हुई।

    लेकिन इस पूरे विवाद की शुरुआत आज के प्रदर्शन से नहीं हुई। पिछले कुछ दिनों से RTO की Marathi checking और drivers को दिए जा रहे notices के बाद नाराजगी लगातार बढ़ रही थी।

    कांदिवली में सड़क पर क्यों उतरे ऑटो चालक?

    प्रदर्शन कर रहे गैर-मराठी भाषी चालकों का कहना है कि सरकार का नया नियम उनके लिए परेशानी बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि कई चालक उम्रदराज हैं, कम पढ़े-लिखे हैं और सालों से मुंबई में ऑटो चलाकर अपना घर चला रहे हैं। ऐसे में अचानक language test और कार्रवाई का दबाव उनके लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।

    कांदिवली में प्रदर्शन कर रहे एक चालक ने कहा, “हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? अगर हम पढ़े-लिखे होते, तो ऑफिस में बैठकर काम कर रहे होते।”

    चालक का कहना था कि कई लोग टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समय देने के बजाय कार्रवाई का डर दिखाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर उन पर हजारों रुपये का आर्थिक बोझ आया तो वे उसे कैसे संभालेंगे।

    क्या पूरे मुंबई के ऑटो बंद हैं?

    यहां एक बात समझना जरूरी है। यह पूरे मुंबई के सभी ऑटो और टैक्सी चालकों की आधिकारिक हड़ताल नहीं बताई गई है। विरोध में चालकों का एक वर्ग शामिल है और कुछ transport representatives ने भी कहा है कि शहरव्यापी union strike call नहीं दिया गया है।

    यानी मुंबई में हर जगह ऑटो बंद हैं, ऐसा मानना सही नहीं होगा। हालांकि जहां drivers protest या checking से बचने के लिए routes बदल रहे हैं, वहां availability पर असर पड़ रहा है।

    यात्रियों के लिए परेशानी क्यों बढ़ी?

    मुंबई में ऑटो और टैक्सी सिर्फ point-to-point travel का साधन नहीं हैं। बड़ी संख्या में लोग residential areas से railway stations तक पहुंचने के लिए इन पर निर्भर रहते हैं।

    सोमवार को मुंबई महानगर में ऐसे feeder routes पर ऑटो और टैक्सी की कमी महसूस हुई। सुबह के समय office जाने वाले लोगों और railway station तक पहुंचने वाले commuters को ज्यादा परेशानी हुई। कुछ drivers RTO checking वाले प्रमुख रास्तों से बचने के लिए internal और residential roads की तरफ जाने लगे, जिससे सामान्य यात्रियों के लिए भी availability प्रभावित हुई।

    कांदिवली लिंक रोड पर प्रदर्शन के दौरान traffic movement भी प्रभावित हुआ। प्रदर्शन स्थल सड़क पर करीब 20 मिनट तक disruption रहा।

    आखिर मराठी का नया नियम है क्या?

    महाराष्ट्र सरकार ने commercial passenger transport drivers के लिए working knowledge of Marathi को जरूरी किया है। इसके दायरे में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के साथ app-based commercial cabs भी आते हैं।

    RTO अब drivers की रोजमर्रा के passenger communication से जुड़ी मराठी समझ और बोलने की क्षमता check कर रहा है। इसमें destination बताना, fare और travel time समझना, route से जुड़े सवालों का जवाब देना और UPI payment जैसी सामान्य बातचीत शामिल हो सकती है।

    महाराष्ट्र मोटर वाहन विभाग की वेबसाइट पर 14 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में किए गए संशोधन की अधिसूचना भी दर्ज है।

    मराठी नहीं आई तो क्या कार्रवाई होगी?

    यही इस विवाद का सबसे बड़ा हिस्सा है।

    RTO की checking में जिस driver को working Marathi knowledge में कमी मिलती है, उसे तुरंत licence छीनने की प्रक्रिया में नहीं डाला जाता। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक पहले show-cause notice दिया जाता है और driver को एक महीने का समय दिया जाता है कि वह जरूरी Marathi knowledge हासिल करे।

    इसके बाद भी नियम का पालन नहीं होने पर badge को तीन महीने तक suspend किया जा सकता है। लगातार नियम नहीं मानने पर आगे cancellation जैसी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

    इसलिए प्रदर्शन कर रहे चालकों की ओर से बताए जा रहे ₹15,000-20,000 के जुर्माने को सीधे सरकारी तय fine के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चालकों ने आर्थिक दंड को लेकर अपनी चिंता और संभावित financial burden की बात कही है, जबकि सरकार की बताई गई मौजूदा प्रक्रिया में पहले notice और compliance का समय दिया जा रहा है।

    RTO की checking में अब तक क्या हुआ?

    20 अगस्त से महाराष्ट्र में RTO की flying squads ने ऑटो और टैक्सी चालकों की practical Marathi checking शुरू की।

    पहले दिन पूरे महाराष्ट्र में 8,217 drivers की जांच हुई। इनमें Mumbai region में 3,995 drivers शामिल थे और 604 को notice जारी किया गया। इन drivers को Marathi सीखने के लिए एक महीने का समय दिया गया।

    इसके बाद दो दिनों के आंकड़ों में MMR में करीब 7,937 drivers की checking और 1,326 notices की जानकारी सामने आई। यही कार्रवाई अब drivers के विरोध का बड़ा कारण बन रही है।

    RTO की checking में drivers से classroom-style लिखित परीक्षा नहीं ली जा रही, बल्कि रोज की passenger बातचीत के आधार पर उनकी functional Marathi देखी जा रही है।

    सरकार का कहना क्या है?

    सरकार का तर्क है कि public transport में driver और passenger के बीच basic communication होना जरूरी है। इसी वजह से working Marathi knowledge को requirement बनाया गया है।

    Transport Minister Pratap Sarnaik ने भी इस policy का बचाव किया है। सरकार की तरफ से यह कहा गया है कि requirement का उद्देश्य drivers से साहित्यिक या कठिन Marathi लिखवाना नहीं, बल्कि passenger से basic बातचीत करने लायक भाषा की जानकारी सुनिश्चित करना है।

    नए badges और permits के मामले में Marathi verification को और formal बनाया गया है। 20 अगस्त से नए auto-rickshaw, taxi और aggregator cab 3badges के लिए practical verification process को video-record करने की व्यवस्था भी लागू की गई है।

    क्या सरकार ने drivers को Marathi सिखाने की कोशिश नहीं की?

    ऐसा नहीं है। सरकार की तरफ से drivers के लिए Marathi communication training programme चलाया गया था।

    Transport officials के मुताबिक बड़ी संख्या में auto और taxi drivers ने training पूरी की है। करीब 1.65 लाख drivers के training complete करने की जानकारी सामने आई है।

    हालांकि दूसरी तरफ drivers और unions का कहना है कि इतनी बड़ी workforce के लिए training व्यवस्था और समय पर्याप्त नहीं रहा। Mumbai Autorickshaw-Taximens Union ने deadline बढ़ाने की मांग भी उठाई थी।

    यहीं से विवाद का दूसरा पहलू सामने आता है। सरकार कह रही है कि drivers को Marathi सीखने का मौका दिया गया, जबकि drivers का सवाल है कि जिन लोगों की उम्र ज्यादा है और जिन्होंने formal education नहीं ली, उनके लिए language requirement को practical तरीके से पूरा करने के लिए पर्याप्त support और समय मिला या नहीं।

    RTO की लाइन में खड़े होने से driver की कमाई पर भी असर

    Marathi checking के साथ एक और समस्या सामने आई है। RTO office में certificate और verification के लिए लगने वाली लंबी queues के कारण drivers को कई घंटे काम से बाहर रहना पड़ रहा है।

    कुछ drivers ने शिकायत की कि RTO के चक्कर में उनकी रोज की कमाई प्रभावित हो रही है। रिपोर्टों में drivers की तरफ से करीब ₹500-700 तक daily earning loss की बात सामने आई है।

    यानी विवाद सिर्फ language सीखने तक सीमित नहीं है। एक driver के लिए training, RTO visit, checking और certificate process का मतलब कई बार उस दिन की कमाई का नुकसान भी है।

    क्या Ola-Uber और Rapido drivers पर भी नियम लागू है?

    हां। यह नियम सिर्फ traditional black-yellow taxi या auto तक सीमित नहीं है। App-based commercial cabs भी इसके दायरे में हैं।

    मुंबई एयरपोर्ट पर भी aggregator cab drivers के एक वर्ग ने इससे जुड़े मुद्दों को लेकर protest किया था। वहां drivers ने Marathi requirement के साथ fare regulation और app-based taxi operations से जुड़े दूसरे मुद्दे भी उठाए थे।

    इससे साफ है कि language issue के साथ drivers की दूसरी आर्थिक और operational परेशानियां भी जुड़ी हुई हैं।

    2017 में Bombay High Court ने Marathi rule पर क्या कहा था?

    इस विवाद का एक पुराना legal background भी है।

    2017 में Bombay High Court ने उस समय के Maharashtra government’s rule को रद्द कर दिया था जिसमें नए auto-rickshaw permits के लिए Marathi knowledge को condition बनाया गया था। Court के सामने उस समय यह सवाल था कि Motor Vehicles Act और मौजूदा rules के तहत सरकार ऐसी permit condition लगा सकती है या नहीं।

    लेकिन 2026 की स्थिति को उसी फैसले के बराबर नहीं माना जा सकता। इस बार Maharashtra government ने motor vehicle rules में amendments के जरिए working Marathi knowledge से जुड़ी व्यवस्था को नए legal framework में शामिल किया है।

    इसलिए 2017 का फैसला सामने आने के बावजूद मौजूदा 2026 rule की legal स्थिति अलग आधार पर तय होगी।

    क्या driver High Court जा सकते हैं?

    विरोध कर रहे drivers और unions की तरफ से legal challenge की संभावना भी सामने आई है। Mumbai Rickshawmen’s Union के प्रतिनिधियों ने कहा है कि drivers High Court का रुख करने पर विचार कर रहे हैं।

    उनकी मुख्य आपत्ति language requirement से ज्यादा उसके implementation को लेकर है। उनका कहना है कि पर्याप्त training और समय के बिना compliance का दबाव livelihood पर असर डाल सकता है।

    अगर मामला court तक जाता है तो आगे यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि working Marathi knowledge की requirement को किस तरीके से लागू किया जाए और drivers को compliance के लिए कितना practical support दिया जाए।

    Pune में भी दिख रहा है असर

    मामला सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है। पुणे में भी Marathi requirement को लेकर कुछ auto drivers में चिंता और विरोध सामने आया है।

    वहां passengers के साथ trip refusal जैसी पुरानी शिकायतें भी जारी हैं। यानी सरकार की कोशिश जहां language communication बेहतर करने की है, वहीं ground पर passenger service से जुड़े दूसरे सवाल अभी भी बने हुए हैं।

    इस विवाद का असर समाज पर क्या पड़ सकता है?

    मुंबई में language और livelihood का सवाल एक साथ जुड़ गया है।

    एक तरफ local language जानने से passenger और driver के बीच communication आसान हो सकता है। Destination, fare, route, emergency situation या किसी समस्या के समय basic Marathi समझना passenger के लिए मददगार हो सकता है।

    दूसरी तरफ बड़ी संख्या में drivers ऐसे हैं जिनकी रोज की कमाई उनके driving work पर निर्भर है। अगर language compliance की प्रक्रिया में उन्हें बार-बार RTO जाना पड़े, route बदलना पड़े या badge suspension का डर बना रहे, तो इसका सीधा असर उनकी income पर पड़ सकता है।

    इसका असर commuters पर भी वापस आता है। अगर बड़ी संख्या में drivers सड़क से कम हो जाते हैं तो railway station तक पहुंचने, short-distance travel और peak-hour commute में passengers को ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है।

    यही वजह है कि यह मामला सिर्फ Marathi सीखने या नहीं सीखने का सवाल नहीं रह गया है। अब इसके साथ driver की रोजी-रोटी, passenger की सुविधा और public transport की availability भी जुड़ गई है।

    अगले तीन दिन मुंबई के लिए क्यों अहम?

    ऑटो चालकों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इसका असर किस हद तक बढ़ता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने drivers protest में शामिल होते हैं और RTO की checking किस तरह जारी रहती है।

    अगर ज्यादा drivers routes से दूर रहते हैं तो railway stations के feeder routes, residential pockets और peak office hours में auto availability प्रभावित हो सकती है।

    दूसरी तरफ अगर सरकार और driver representatives के बीच कोई बातचीत या राहत की व्यवस्था सामने आती है तो स्थिति बदल सकती है।

    फिलहाल कांदिवली का विरोध यह संकेत दे रहा है कि Marathi language rule को लेकर drivers की नाराजगी खत्म नहीं हुई है। RTO की checking, notices, training का सवाल, रोज की कमाई और proposed legal challenge अब इस पूरे विवाद के अगले चरण को तय करेंगे।

  • मुंबई में दूध को गर्म करने पर रबर जैसी चीज बनने का दावा; FDA से जांच की मांग

    मुंबई में दूध को गर्म करने पर रबर जैसी चीज बनने का दावा; FDA से जांच की मांग

    गोरेगांव वेस्ट में Shree Modern Dairy के दूध को गर्म करने पर रबर जैसी सख्त चीज बनने की शिकायत हुई है। FDA से सैंपल टेस्ट की मांग की गई है। पूरी खबर जानें।

    मुंबई: गोरेगांव वेस्ट के S.V. Road स्थित Shree Modern Dairy से खरीदे गए दूध को लेकर एक consumer ने गंभीर शिकायत की है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह दूध Shop No. 2, 7/2, Geet Govind Building, Jawahar Nagar, Opposite Cinemax Theatre, Swami Vivekanand Road, Goregaon West, Mumbai-400104 स्थित डेयरी से खरीदा गया था। घर लाकर दूध गर्म करने के बाद उसमें कुछ हिस्सा रबर जैसी सख्त स्थिति में बदलने का दावा किया गया है। मामले की शिकायत Food and Drug Administration (FDA) और मुंबई महानगरपालिका के P/South विभाग के Medical Officer of Health (MOH) के पास करने की बात कही गई है।

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, दूध खरीदने के बाद उसे घर लाकर सामान्य तरीके से गर्म किया गया था। गर्म करने के दौरान दूध में असामान्य बदलाव दिखाई दिया और उसके कुछ घटक रबर जैसी कठोर स्थिति में आ गए। इसके बाद इस मामले की जानकारी Shree Modern Dairy को दी गई।

    इसके बाद डेयरी का एक कर्मचारी शिकायतकर्ता के घर पहुंचा और वहां खराब हुए दूध को प्रत्यक्ष देखा। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरी मुलाकात का video उसके पास सुरक्षित है। इसके अलावा दूध की photographs, packet और बचा हुआ milk sample भी सुरक्षित रखा गया है।

    यही वजह है कि अब मामला सिर्फ consumer complaint तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता चाहता है कि मौजूद sample को official तरीके से जांच के लिए लिया जाए और laboratory report के जरिए पता लगाया जाए कि आखिर दूध में ऐसा बदलाव क्यों आया।

    असली सवाल: दूध में ऐसा बदलाव आखिर क्यों हुआ?

    दूध गर्म करने के बाद रबर जैसी सख्त चीज दिखाई देने का मतलब अपने-आप यह साबित नहीं करता कि उसमें रबर या plastic मिलाया गया था। बिना laboratory testing के किसी मिलावट या chemical की मौजूदगी का दावा करना जल्दबाजी होगी।

    दूध की quality पर असर storage, temperature control, contamination, microbial activity, processing या दूसरे कारणों से भी पड़ सकता है। इस मामले में सही कारण तभी सामने आएगा जब sample की scientific जांच होगी।

    इसीलिए complaint में FDA से दूध का sample लेकर उसकी quality और safety की जांच करने की मांग की गई है।

    अब FDA की जांच में किन बातों पर नजर होनी चाहिए?

    इस मामले में सबसे अहम चीज milk sample है। अगर sample official जांच के लिए लिया जाता है तो उसकी laboratory examination से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि दूध applicable food-safety standards के मुताबिक था या नहीं।

    जांच के दौरान दूध की composition, microbiological safety, possible adulteration और दूसरे applicable safety parameters जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। इसके साथ storage और handling conditions की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

    यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दूध गर्म करने के बाद कैसा दिखा, बल्कि यह भी पता करना जरूरी है कि वह consumer तक पहुंचने से पहले किस तरह store और handle हुआ था।

    दूध दुकान से घर तक कैसे पहुंचा, यह भी अहम सवाल

    Milk quality की जांच में उसकी पूरी journey महत्वपूर्ण हो सकती है। दूध खरीदते समय वह chilled था या नहीं, घर पहुंचने में कितना समय लगा, खरीदने के बाद उसे किस temperature पर रखा गया और कितनी देर बाद boil किया गया—ये details investigation में मदद कर सकती हैं।

    प्राप्त वीडियो से मिली जानकारी के मुताबिक दूध dairy की तरफ से अलग प्लास्टिक की pouch में भरकर दिया गया था तो source, filling और packaging process की भी जांच की जरूरत हो सकती है।

    Plastic pouch को लेकर भी उठ रहा सवाल

    शिकायतकर्ता ने एक और point उठाया है। उसका कहना है कि dairy की मशीन पर “प्लास्टिक पिशवी मागू नका” लिखा हुआ है, जबकि दूध plastic bags में दिया जा रहा है।

    हालांकि सिर्फ plastic pouch में दूध मिलना अपने-आप में illegal होने का सबूत नहीं है। Milk packaging के लिए food-grade plastic pouches का इस्तेमाल कई परिस्थितियों में किया जाता है।

    इसलिए यहां असली सवाल यह है कि इस्तेमाल की जा रही pouch food-grade है या नहीं और क्या वह लागू packaging तथा plastic-waste rules के मुताबिक है।

    मशीन पर लिखे message और इस्तेमाल हो रही milk pouch के बीच क्या संबंध है, यह भी मौके की जांच के बाद ही साफ हो सकता है।

    Goregaon में पहले भी सामने आ चुका है milk safety का बड़ा मामला

    इस complaint के बीच Goregaon West में सामने आया हालिया milk-tampering case भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। 15 जुलाई 2026 को Mumbai Crime Branch Unit 11 और FDA की joint कार्रवाई में branded milk pouches के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया था।

    उस कार्रवाई में 558 litres दूध और 822 milk pouches जब्त कर नष्ट किए गए थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने original milk pouches को खोलकर उसमें contaminated water मिलाया और उन्हें दोबारा seal करके बेचने का कथित तरीका अपनाया था।

    इस मामले में Krishna Venkayya Lingampally और Ravi Kanahya Patipaka को गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई Mumbai Police Commissioner Deven Bharti और Joint Commissioner of Police (Crime) Anil Kumbhare की supervision में हुई थी, जबकि Assistant Police Inspector Bansode ने आगे की जांच संभाली थी।

    यह पुराना मामला और Shree Modern Dairy से जुड़ी मौजूदा consumer complaint अलग-अलग घटनाएं हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों के बीच कोई connection सामने नहीं आया है।

    इस शिकायत में consumer के पास क्या evidence है?

    शिकायतकर्ता के मुताबिक उसके पास:

    • खराब हुए दूध का sample
    • दूध का packet
    • दूध की photographs
    • डेयरी कर्मचारी के घर आने का video
    • डेयरी कर्मचारी द्वारा खराब दूध को प्रत्यक्ष देखने की जानकारी

    मौजूद है।

    ऐसे evidence की वजह से laboratory testing और official inspection से मामले की स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है।

    FDA और BMC से क्या कार्रवाई की मांग?

    शिकायतकर्ता ने FDA और BMC P/South विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच की जाए।

    उसकी प्रमुख मांगों में दूध का sample official custody में लेकर laboratory testing कराना, दूध की quality और safety verify करना, संबंधित dairy premises का inspection करना और अगर कोई food-safety violation सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करना शामिल है।

    इसके साथ यह भी देखा जाना जरूरी है कि संबंधित dairy का food business registration/licence, milk handling process, storage व्यवस्था और packaging व्यवस्था applicable rules के मुताबिक है या नहीं।

    अगर आपके घर में भी दूध गर्म करने पर ऐसा बदलाव दिखे तो क्या करें?

    ऐसी स्थिति में सबसे पहले उस दूध को consume करने से बचना चाहिए। दूध या packet को तुरंत फेंकने के बजाय उसे सुरक्षित रखना ज्यादा useful हो सकता है।

    Packet की clear photographs लें और उस पर लिखे batch number, packing date, use-by date, MRP और manufacturer की details record करें। अगर purchase bill या digital payment proof है तो उसे भी संभालकर रखें।

    दूध गर्म करने से पहले और बाद में जो बदलाव दिखाई दिया हो, उसका photo या video भी evidence के तौर पर रखा जा सकता है। इसके बाद seller या dairy को complaint करने के साथ food-safety authority के पास शिकायत की जा सकती है।

    अब सबसे बड़ा इंतजार laboratory report का

    फिलहाल इस complaint के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि दूध में रबर, plastic या कोई खास chemical मिला हुआ था। शिकायत में दिखाई गई असामान्य स्थिति की पुष्टि laboratory testing से ही हो सकती है।

    अगर official sample की जांच होती है तो report यह समझने में अहम होगी कि दूध वास्तव में substandard, unsafe या adulterated था या फिर बदलाव के पीछे कोई दूसरा कारण था।

    इसलिए अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—Shree Modern Dairy से खरीदे गए इस दूध के sample की जांच में आखिर क्या सामने आता है?

    Indian FastTrack इस मामले में FDA, BMC P/South और Shree Modern Dairy की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को update करेगा।

  • Malad West Sex Racket का भंडाफोड़, H2O Luxury Spa से 2 गिरफ्तार; 4 महिलाएं Rescue, मालिक की तलाश

    Malad West Sex Racket का भंडाफोड़, H2O Luxury Spa से 2 गिरफ्तार; 4 महिलाएं Rescue, मालिक की तलाश

    Malad West के H2O Luxury Spa पर Crime Branch Unit-8 की raid में 2 गिरफ्तार और 4 महिलाएं rescue हुईं। Spa owner wanted है और BNS-PITA Act में केस दर्ज हुआ।

    मुंबई: मालाड वेस्ट में H2O Luxury Spa & Salon को लेकर Crime Branch Unit-8 की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। पुलिस के मुताबिक, मसाज सेंटर की आड़ में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियां चलाए जाने की सूचना मिलने के बाद Crime Branch ने यहां छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 2 स्पा संचालकों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 4 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया है।

    मामले में स्पा के मालिक की भी तलाश की जा रही है। पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और PITA Act के तहत केस दर्ज किया है। अब जांच का फोकस सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस कथित गतिविधि से जुड़े दूसरे लोगों और पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने पर भी है।

    मालाड वेस्ट के स्पा में आखिर क्या चल रहा था?

    पुलिस को जानकारी मिली थी कि मालाड वेस्ट स्थित H2O Luxury Spa & Salon में सामान्य मसाज और स्पा सर्विस की आड़ में कथित तौर पर अनैतिक गतिविधियां चल रही हैं। इसी सूचना के आधार पर Crime Branch Unit-8 ने मामले की जांच शुरू की और इसके बाद कार्रवाई की गई।

    पुलिस की कार्रवाई के बाद स्पा से जुड़ी गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर यह पूरा काम किस तरह संचालित किया जा रहा था और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

    2 संचालक गिरफ्तार, 4 महिलाओं को किया गया Rescue

    कार्रवाई में 2 लोगों को गिरफ्तार किए जाने के साथ 4 महिलाओं को वहां से रेस्क्यू किया गया। पुलिस की कार्रवाई में महिलाओं को आरोपी मानने के बजाय उन्हें रेस्क्यू किए जाने की बात सामने आई है।

    इन महिलाओं की पहचान और निजी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। मामले की जांच के दौरान पुलिस यह भी देखेगी कि वे वहां किस परिस्थिति में पहुंचीं और क्या उन्हें किसी तरह के दबाव, लालच या शोषण का सामना करना पड़ा था।

    रेस्क्यू की गई महिलाओं के मामले में आगे की प्रक्रिया उनकी सुरक्षा, बयान और जरूरत के मुताबिक सहायता से जुड़ी हो सकती है।

    Spa Owner की तलाश तेज

    इस मामले में H2O Luxury Spa & Salon के मालिक को भी फिलहाल वांटेड बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित गतिविधियों में उसकी भूमिका क्या थी।

    जांच में यह भी साफ होना बाकी है कि स्पा का संचालन किसके निर्देश पर किया जा रहा था और गिरफ्तार किए गए दोनों संचालकों तथा मालिक के बीच क्या संबंध था।

    यही इस केस की जांच का एक अहम हिस्सा बन गया है।

    BNS और PITA Act के तहत मामला

    पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS और Immoral Traffic (Prevention) Act यानी PITA Act के तहत केस दर्ज किया है।

    PITA Act में prostitution से जुड़े अलग-अलग अपराधों के लिए प्रावधान हैं। वहीं BNS में human trafficking और उससे जुड़े exploitation के लिए भी अलग कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।

    क्या पूरे नेटवर्क की भी जांच होगी?

    2 लोगों की गिरफ्तारी और 4 महिलाओं के rescue के बाद जांच का अगला सवाल यही है कि क्या यह मामला सिर्फ एक spa तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा network भी काम कर रहा था।

    पुलिस को यह पता लगाना होगा कि महिलाओं को वहां तक कौन लेकर आया, spa का संचालन कौन कर रहा था, पैसों का लेन-देन कैसे होता था और इस कथित गतिविधि में और कौन लोग जुड़े हुए थे।

    अगर जांच में दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो इस मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।

    Rescue की गई महिलाओं के लिए आगे क्या?

    इस तरह की कार्रवाई में सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही पूरी प्रक्रिया नहीं होती। रेस्क्यू की गई महिलाओं की सुरक्षा और rehabilitation भी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    मानव तस्करी या sexual exploitation के मामलों में महिलाओं को stigma, मानसिक दबाव और दोबारा शोषण के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में counselling, सुरक्षित रहने की जगह और जरूरी सहायता अहम होती है।

    इस मामले में भी रेस्क्यू की गई 4 महिलाओं को लेकर पुलिस की आगे की प्रक्रिया जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तय होगी।

    इस कार्रवाई का Malad पर क्या असर?

    Malad West में spa की आड़ में कथित अनैतिक गतिविधियों का मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर उन लोगों के बीच जो genuine wellness और massage services के लिए ऐसे centres का इस्तेमाल करते हैं।

    हालांकि एक कथित आपराधिक मामले के आधार पर पूरे spa या wellness sector को संदेह की नजर से देखना सही नहीं होगा। जांच जिस specific establishment और उसमें सामने आए आरोपों तक सीमित है, उसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल Crime Branch Unit-8 की जांच आगे बढ़ रही है। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ, वांटेड spa owner की तलाश और कथित गतिविधि से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की जांच इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।

    अगर जांच में नए नाम या नए links सामने आते हैं तो केस में आगे और गिरफ्तारियां या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    मामले में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल पुलिस जांच के स्तर पर हैं। किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने से पहले उसे दोषी मानना उचित नहीं होगा।

    नोट: यह खबर उपलब्ध पुलिस जानकारी और रिपोर्ट किए गए तथ्यों के आधार पर है। रेस्क्यू की गई महिलाओं की पहचान और निजी जानकारी उनकी सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए प्रकाशित नहीं की गई है।

  • मुंबई में 22 फीट की गणेश प्रतिमा गिरी, 2 की मौत; 5 घायल — क्या सड़क का गड्ढा बना हादसे का कारण?

    मुंबई में 22 फीट की गणेश प्रतिमा गिरी, 2 की मौत; 5 घायल — क्या सड़क का गड्ढा बना हादसे का कारण?

    मुंबई के भुलेश्वर में 22 फीट की ‘भुलेश्वरचा राजा’ गणेश प्रतिमा गिरने से 2 लोगों की मौत और 5 घायल हुए। पुलिस ने ADR दर्ज कर जांच शुरू की।

    मुंबई: भायखला के भुलेश्वर में गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच शनिवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। ‘भुलेश्वरचा राजा’ की 22 फीट से ज्यादा ऊंची गणेश प्रतिमा आगमन जुलूस के दौरान अचानक गिर गई। प्रतिमा के नीचे दबने से भुलेश्वर गणपति मंडल के अध्यक्ष संकेत नेवशे और बृजेश हेमंत जोशी की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों में 5 और 7 साल की दो बच्चियां भी शामिल हैं। हादसा रात करीब 9:50 से 10 बजे के बीच भुलेश्वर के बलराम मर्चेंट रोड पर कबूतरखाना के पास जय अंबे चौक पर हुआ।

    मंडप से करीब 50 मीटर पहले हुआ हादसा

    जानकारी के मुताबिक विशाल प्रतिमा को भुलेश्वर की तरफ लाया जा रहा था और वह मंडप तक पहुंचने से करीब 50 मीटर पहले थी। इसी दौरान प्रतिमा अचानक असंतुलित होकर आगे की तरफ गिर गई। हादसे के वक्त आगमन जुलूस में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कुछ लोग प्रतिमा को ले जा रही trolley के आसपास या उस पर भी थे।

    प्रतिमा गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। उसके नीचे कई लोग फंस गए। सूचना मिलते ही BMC, Mumbai Fire Brigade, Mumbai Police, Traffic Police, 108 Emergency Ambulance Service और ward staff की टीमें मौके पर पहुंचीं और rescue operation शुरू किया।

    आखिर 22 फीट की प्रतिमा गिरी कैसे?

    हादसे की वजह को लेकर शुरुआती जानकारी सामने आ चुकी है। पुलिस की preliminary जांच में प्रतिमा को संभालने वाले frame के support में तकनीकी समस्या का angle सामने आया है। एक fire brigade official के मुताबिक frame की welding ठीक से नहीं हुई होने की आशंका है, जिससे प्रतिमा centre से support से बाहर निकलकर गिर सकती है। दूसरी ओर, मौके की कुछ eyewitness जानकारी में trolley के wheel के सड़क के गड्ढे में फंसने और झटका लगने की बात भी सामने आई है। हादसे की final वजह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

    कुछ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गिरने से ठीक पहले प्रतिमा में हलचल दिखाई दी थी। एक स्थानीय रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रतिमा का हार पहले नीचे गिरा और उसके बाद structure में movement नजर आया। इन eyewitness observations को पुलिस की technical जांच से अलग देखा जा रहा है।

    हादसे में किन लोगों की मौत हुई?

    इस हादसे में संकेत नेवशे और बृजेश हेमंत जोशी की जान चली गई। संकेत नेवशे की उम्र 33 साल बताई गई है और वह भुलेश्वर गणपति मंडल के अध्यक्ष थे। बृजेश हेमंत जोशी की उम्र latest civic और police-based reports में 30 साल बताई गई है। दोनों को अस्पताल ले जाने के बाद brought dead घोषित किया गया।

    पांच लोग घायल, दो छोटी बच्चियां भी शामिल

    हादसे में घायल पांच लोगों की पहचान वैभव घेनंद, पवन चौरसिया, कुणाल काशीद, 5 साल की लावण्या गनेर और 7 साल की दिव्या गनेर के तौर पर हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सभी घायलों की हालत स्थिर बताई गई है।

    घायलों को हादसे के बाद अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचाया गया। शुरुआती hospital information के मुताबिक GT Hospital, JJ Hospital, HN Reliance Hospital और Saifee Hospital में घायलों को ले जाया गया था।

    DB Marg Police ने ADR दर्ज की

    हादसे की जांच DB Marg Police कर रही है। पुलिस ने Accidental Death Report यानी ADR दर्ज की है और यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिमा को transport करने वाले frame और support system में क्या तकनीकी खामी थी। इसके साथ ही हादसे के दौरान इस्तेमाल की गई trolley और पूरी transportation व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।

    हादसे के बाद मूर्ति का क्या हुआ?

    गिरने के बाद 22 फीट से ज्यादा ऊंची गणेश प्रतिमा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और मिली जानकारी के मुताबिक तीन हिस्सों में टूट गई। बाद में मंडल के सदस्यों ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा को dumper पर रखा। बाद की जानकारी के मुताबिक प्रतिमा का Girgaon Chowpatty में विसर्जन किया गया।

    ‘भुलेश्वरचा राजा’ मंडल का इस साल 63वां उत्सव

    जिस प्रतिमा के आगमन के दौरान यह हादसा हुआ, वह ‘भुलेश्वरचा राजा’ के नाम से जानी जाती है। मंडल इस साल अपना 63वां वार्षिक उत्सव मना रहा है। इस विशाल प्रतिमा को sculptor Aniket Desai ने तैयार किया था।

    मुंबई में Ganeshotsav के दौरान बड़े-बड़े गणपति मंडलों की आगमन मिरवणूक शहर की खास पहचान है। इसी सिलसिले में ‘भुलेश्वरचा राजा’ की प्रतिमा को भी शनिवार रात मंडप तक लाया जा रहा था, लेकिन मंडप पहुंचने से कुछ ही दूरी पहले हुए हादसे ने उत्सव की खुशी को मातम में बदल दिया।

    अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?

    पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि प्रतिमा को support देने वाला frame किस तरह तैयार किया गया था, उसकी welding और fixing कितनी मजबूत थी और transport से पहले उसकी safety checking हुई थी या नहीं। इसके साथ trolley की स्थिति, रास्ते की हालत और पूरी transportation व्यवस्था की भी जांच अहम होगी।

    फिलहाल police investigation जारी है। हादसे की final वजह और इसके लिए किसी की जिम्मेदारी तय होने की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

  • महाराष्ट्र में मराठी सख्ती: 1,499 ऑटो-कैब ड्राइवरों को नोटिस, नहीं सीखी भाषा तो 3 महीने सस्पेंड होगा बैज

    महाराष्ट्र में मराठी सख्ती: 1,499 ऑटो-कैब ड्राइवरों को नोटिस, नहीं सीखी भाषा तो 3 महीने सस्पेंड होगा बैज

    महाराष्ट्र में मराठी सख्ती के दूसरे दिन 1,499 ऑटो-कैब ड्राइवरों को नोटिस मिला। मराठी नहीं सीखने पर बैज 3 महीने के लिए सस्पेंड होगा।

    मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और कैब ड्राइवरों के लिए व्यवहारिक मराठी को लेकर परिवहन विभाग की सख्ती अब तेज हो गई है। अभियान के दूसरे दिन मुंबई महानगर क्षेत्र और राज्य के दूसरे हिस्सों में कुल 9,153 व्यावसायिक वाहन चालकों की जांच की गई। इनमें 1,499 ड्राइवर व्यवहारिक मराठी के टेस्ट में पर्याप्त जानकारी नहीं दिखा सके, जिसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया है।

    परिवहन विभाग की यह जांच मुहिम 20 अगस्त से शुरू हुई है और 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। इस दौरान ऑटो-रिक्शा और कैब समेत व्यावसायिक वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के मराठी भाषा के व्यवहारिक ज्ञान की जांच की जा रही है।

    मुंबई में 722 ड्राइवरों को नोटिस

    मुंबई महानगर क्षेत्र में दूसरे दिन 3,942 ड्राइवरों की जांच की गई। इनमें 722 चालक व्यवहारिक मराठी के मामले में निर्धारित स्तर पर खरे नहीं उतर पाए। इन सभी को नोटिस जारी किया गया है।

    परिवहन विभाग के मुताबिक ड्राइवरों से रोजमर्रा के काम और यात्रियों से बातचीत में इस्तेमाल होने वाली मराठी समझने और बोलने की क्षमता देखी जा रही है।

    राज्य के दूसरे हिस्सों में 777 चालकों पर कार्रवाई

    मुंबई महानगर क्षेत्र के बाहर महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में 5,211 ड्राइवरों की जांच हुई। यहां 777 चालक व्यवहारिक मराठी के पर्याप्त ज्ञान के बिना पाए गए और उन्हें भी नोटिस दिया गया।

    इस तरह दूसरे दिन हुई कुल 9,153 जांच में 1,499 चालकों को नोटिस जारी किया गया।

    क्षेत्रजांच किए गए ड्राइवरनोटिस
    मुंबई महानगर क्षेत्र3,942722
    शेष महाराष्ट्र5,211777
    कुल9,1531,499

    नोटिस के बाद मिलेगा एक महीने का समय

    मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने पर तुरंत बैज सस्पेंड नहीं किया जाएगा। पहले संबंधित चालक को नोटिस दिया जाएगा और उसके बाद मराठी सीखने के लिए एक महीने की अवधि मिलेगी।

    इस दौरान चालक को व्यवहारिक मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल करना होगा। निर्धारित समय पूरा होने के बाद परिवहन विभाग दोबारा यह देखेगा कि चालक भाषा के स्तर को पूरा करता है या नहीं।

    मराठी नहीं सीखी तो 3 महीने के लिए बैज सस्पेंड

    महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि नोटिस मिलने के बाद एक महीने के भीतर मराठी नहीं सीखने वाले चालक के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    निर्धारित अवधि के बाद भी व्यवहारिक मराठी का ज्ञान साबित नहीं करने पर संबंधित चालक का बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा।

    इसका मतलब यह है कि पहले चरण में नोटिस, दूसरे चरण में मराठी सीखने के लिए समय और उसके बाद भी नियम पूरा नहीं करने पर बैज सस्पेंशन की कार्रवाई होगी।

    30 सितंबर तक जारी रहेगा अभियान

    परिवहन विभाग की मौजूदा जांच मुहिम 20 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस दौरान राज्य में व्यावसायिक वाहन चालकों के व्यवहारिक मराठी ज्ञान की जांच की जाएगी।

    परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए मराठी का ज्ञान सिर्फ नियमों से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से भी संबंधित है। विभाग की ओर से ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए समय दिया जा रहा है।

    फिलहाल दूसरे दिन की कार्रवाई में 1,499 चालकों को नोटिस मिलने के बाद अब इन ड्राइवरों के लिए अगले एक महीने की अवधि अहम होगी। इस दौरान उन्हें व्यवहारिक मराठी का जरूरी ज्ञान हासिल करना होगा, वरना नियम के अगले चरण में बैज तीन महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।

    मुख्य आंकड़े

    20 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक जांच अभियान

    दूसरे दिन कुल 9,153 ड्राइवरों की जांच

    1,499 चालकों को नोटिस

    मुंबई महानगर क्षेत्र में 722 नोटिस

    शेष महाराष्ट्र में 777 नोटिस

    नोटिस के बाद मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय

    नियम पूरा नहीं करने पर बैज 3 महीने के लिए सस्पेंड

  • कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

    कांदिवली में हफ्ता वसूली के आरोप में बड़ी कार्रवाई, 37 केस वाले यमेश दरेकर पर MCOCA; दो गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार, जानिए पूरा मामला और अब आगे क्या होगा ?

    मुंबई: कांदिवली पूर्व के पोईसर इलाके में हफ्ता वसूली और मारपीट के आरोप में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। समता नगर पुलिस के मुताबिक, यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा और उसकी कथित टोली के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी MCOCA के तहत कार्रवाई की गई है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, यह मामला 15 जून 2026 की रात करीब 12:30 बजे पोईसर, कांदिवली पूर्व में हुई एक गंभीर मारपीट की घटना से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, फिर्यादी ए.बी.के. ने कथित तौर पर हफ्ता नहीं दिया था। इसी बात को लेकर आरोपियों ने उसके कपड़े उतारकर गालीगलौज की और लोहे की रॉड, लकड़ी के स्टंप और लात-मुक्कों से मारपीट की।

    आरोप है कि यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा ने फिर्यादी को जान से मारने की धमकी भी दी और उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया। इस हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद भी आरोपियों ने इलाज के लिए जमा हुए नागरिकों को धमकाते हुए जान से मारने की धमकी दी।

    घटना के बाद समता नगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। पुलिस के अनुसार, इस केस में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।

    दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी की तलाश जारी

    इस मामले में रोहित कृष्णप्रताप सिंह, उम्र 33 वर्ष और सागर अनिल राठोड, उम्र 22 वर्ष को 15 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायालयीन हिरासत में हैं।

    पुलिस के मुताबिक, मामले का मुख्य आरोपी यमेश दिलीप दरेकर उर्फ दादा अभी फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।

    यमेश दरेकर के खिलाफ पहले से 37 गंभीर मामले

    पुलिस के मुताबिक यमेश दरेकर को गंभीर अपराधों में शामिल आरोपी बताया जा रहा है। समता नगर पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ कुल 37 मामले दर्ज हैं।

    इन मामलों में हत्या की कोशिश, जान से मारने की धमकी, जबरन चोरी, घातक हथियार का डर दिखाकर चोरी, गली गलौज और मारपीट, विनयभंग, गंभीर चोट पहुंचाना, आपराधिक षड्यंत्र, घर में अतिक्रमण और दूसरे गंभीर अपराधों का उल्लेख है।

    पुलिस के अनुसार, यमेश दरेकर के खिलाफ इससे पहले समता नगर पुलिस स्टेशन के माध्यम से दो बार MPDA के तहत स्थानबद्ध करने और दो बार तडीपारी की कार्रवाई भी की जा चुकी है।

    रोहित सिंह और सागर राठोड पर भी गंभीर मामले

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी रोहित कृष्णप्रताप सिंह भी यमेश दरेकर की कथित टोली का सदस्य है। उसके खिलाफ समता नगर पुलिस स्टेशन में कुल 13 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें जबरन चोरी, गालीगलौज और मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाना, जान से मारने की धमकी और घर में अतिक्रमण जैसे अपराधों का उल्लेख है।

    दूसरा आरोपी सागर अनिल राठोड भी इसी कथित टोली का सदस्य बताया गया है। उसके खिलाफ दो मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस ने बताया, कि साल 2023 में उसके खिलाफ BNS की संबंधित धारा के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई थी।

    MCOCA की कार्रवाई क्यों हुई?

    पुलिस के मुताबिक, यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली अलग-अलग गंभीर अपराधों के जरिए इलाके में दहशत और वर्चस्व कायम कर आर्थिक फायदा हासिल करने की कोशिश कर रही थी। इसी आधार पर पुलिस ने इस मामले को संगठित अपराध की दिशा में देखा।

    पुलिस उपायुक्त, परिमंडल-03, मुंबई गजानन शिवलिंग राजमाने के मार्गदर्शन में MCOCA के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार किया गया। यह प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजा गया, जिसके बाद संबंधित मंजूरी मिलने पर यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के खिलाफ MCOCA के तहत कार्रवाई की गई।

    मामले की आगे की जांच सहायक पुलिस आयुक्त कैलास बर्वे कर रहे हैं।

    MCOCA लगने के बाद अब क्या होगा?

    MCOCA के तहत कार्रवाई होना इस मामले में एक गंभीर कानूनी कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो चुके हैं। अब मामले में पुलिस की आगे की जांच, जरूरी कानूनी प्रक्रिया और अदालत में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।

    मुख्य आरोपी यमेश दरेकर अभी फरार है, इसलिए पुलिस के सामने उसकी गिरफ्तारी भी एक अहम कदम है। वहीं गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों और मौजूदा केस में उनकी कथित भूमिका की जांच आगे जारी रहेगी।

    पोईसर-कांदिवली के लोगों के लिए यह मामला क्यों अहम है?

    हफ्ता वसूली का आरोप सिर्फ एक व्यक्ति से पैसे मांगने तक सीमित नहीं रहता। अगर किसी इलाके में धमकी, मारपीट और दबाव का माहौल बनता है तो इसका असर आम लोगों, छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, ठेलेवालों और दूसरे स्थानीय लोगों की सुरक्षा की भावना पर पड़ सकता है।

    मुंबई में 2025 के दौरान extortion के 314 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में 199 मामले दर्ज हुए थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में सिर्फ पारंपरिक organised gang extortion ही शामिल नहीं था; sextortion और local goons द्वारा builders, contractors और hawkers से protection money मांगने जैसे मामले भी सामने आए थे। इसलिए हर extortion case को organised gang activity मानना सही नहीं है।

    पोईसर का मौजूदा मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पुलिस ने यमेश दरेकर और उसकी कथित टोली के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, कथित लगातार आपराधिक गतिविधियों और मौजूदा मामले को देखते हुए MCOCA के तहत कार्रवाई की है।

    फिलहाल पुलिस का फोकस फरार मुख्य आरोपी यमेश दरेकर को पकड़ने और मामले की आगे की जांच पूरी करने पर है। इस कार्रवाई के बाद पोईसर-कांदिवली इलाके में कथित हफ्ता वसूली और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर पुलिस की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

  • Mumbai Crime: ट्रांसजेंडर बनकर पति को ठीक करने के नाम पर घर में घुसा, पानी छिड़का और Air Hostess से रेप का आरोप

    Mumbai Crime: ट्रांसजेंडर बनकर पति को ठीक करने के नाम पर घर में घुसा, पानी छिड़का और Air Hostess से रेप का आरोप

    मुंबई के Powai में पति को काला जादू से ठीक करने का झांसा देकर Air Hostess से रेप का आरोप, 100+ CCTV की मदद से आरोपी Anil Shinde गिरफ्तार।

    मुंबई: अंधेरी पूर्व के Powai इलाके से एक चौंकाने वाली अपराध की घटना सामने आई है। यहां 25 साल की एक Air Hostess ने आरोप लगाया है कि उसके बीमार पति को ठीक करने और उसकी दृष्ट उतारने के नाम पर एक व्यक्ति उसके फ्लैट में घुसा और उसके साथ sexual assault किया। आरोपी ने खुद को transgender होने का भास दिया था। पुलिस ने 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान 28 साल के Anil Shinde के तौर पर हुई है। घटना 19 अगस्त की दोपहर करीब 12:20 से 12:50 बजे के बीच Powai की एक housing society में हुई बताई जा रही है।

    पति को ठीक करने का झांसा देकर Society में पहुंचा

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले Society के security guard का भरोसा हासिल किया। इसके बाद वह building के अंदर गया और अलग-अलग flats के doors knock करने लगा। इसी दौरान वह तीसरी मंजिल पर रहने वाली Air Hostess के flat तक पहुंच गया।

    महिला का पति उस समय अस्पताल में इलाज करा रहा था। आरोपी ने दावा किया कि वह उसके पति पर आई बुरी नजर या किसी तरह की परेशानी को दूर कर सकता है। इसी बहाने उसने महिला से घर के अंदर आने की permission ली।

    पानी छिड़का और सिर पर हाथ रखा

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने घर में आने के बाद उस पर पानी छिड़का और उसके सिर पर हाथ रखा। इसके बाद उसने महिला से आंखें बंद करके बेड पर लेटने को कहा।

    महिला के मुताबिक उस समय उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह संमोहित या hypnotised अवस्था में चली गई हो। इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ sexual assault किया।

    जब महिला को कुछ होश आया तो उसने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद आरोपी ने उससे 200 रुपये लिए और वहां से निकल गया।

    घटना के बाद रात में Police तक पहुंची महिला

    घटना दोपहर में होने के बाद महिला करीब रात 11 बजे Police Station पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक वह काफी परेशान और traumatised थी और शुरुआत में घटना के बारे में बोलने की स्थिति में नहीं थी। एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसे भरोसा दिलाया, जिसके बाद उसने पूरी घटना पुलिस को बताई।

    इसके बाद मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की।

    Powai से Kalwa तक 100 से ज्यादा CCTV खंगाले

    आरोपी घटना के बाद वहां से निकलकर कथित तौर पर rickshaw से Kalwa की तरफ गया था। पुलिस ने उसके movement को track करने के लिए Powai से Kalwa तक लगे 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की footage की जांच की।

    CCTV footage के जरिए पुलिस को आरोपी के route और उसकी पहचान से जुड़े सुराग मिले। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए Anil Shinde को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक FIR दर्ज होने के कुछ घंटों के भीतर पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।

    क्या आरोपी ने पहले भी ऐसी वारदात की?

    Anil Shinde से पूछताछ के दौरान पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उसने इससे पहले भी इसी तरह किसी महिला को निशाना बनाया था।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बताया है कि उसका परिवार transgender का भास बनाकर begging करता था। इस दावे की भी पुलिस जांच कर रही है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरोपी ने पहले भी इसी तरह की कोई वारदात की है।

    Hypnosis को लेकर क्या सामने आया?

    इस मामले में पानी छिड़कने और महिला को hypnotised करने की बात सामने आई है। लेकिन पुलिस के सामने महिला ने बताया है कि उसे उस वक्त संमोहित जैसा महसूस हुआ था। इसे ऐसे नहीं समझना चाहिए कि पानी छिड़कने से किसी व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह दूसरे व्यक्ति के control में चला जाता है।

    घटना में आरोपी ने कथित तौर पर डर, भरोसे और पति को ठीक करने के दावे का इस्तेमाल करके महिला को अपने झांसे में लिया। इसलिए इस मामले में “hypnotised” शब्द को पीड़िता के अनुभव के तौर पर समझना ज्यादा सही है।

    Maharashtra में Black Magic के नाम पर क्या कानून है?

    महाराष्ट्र में अंधविश्वास और Black Magic के नाम पर लोगों को धोखा देने और उनका शोषण करने के खिलाफ Maharashtra Prevention and Eradication of Human Sacrifice and Other Inhuman, Evil and Aghori Practices and Black Magic Act, 2013 लागू है।

    इस कानून के तहत Schedule में बताए गए प्रतिबंधित अंधविश्वासी और कथित supernatural practices को करना, बढ़ावा देना या लोगों को उनके जरिए गुमराह करना अपराध हो सकता है। ऐसे मामलों में 6 महीने से 7 साल तक की सजा और 5,000 से 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

    इस मामले में पुलिस ने Black Magic से जुड़ी कानूनी provisions के तहत भी कार्रवाई की बात कही है। आरोपी के खिलाफ अंतिम आरोप और अदालत में मामला किस तरह आगे बढ़ता है, यह जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से साफ होगा।

    Rape के मामले में कानून क्या कहता है?

    Bharatiya Nyaya Sanhita यानी BNS में rape और उसकी punishment को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। कानून में consent यानी सहमति का मतलब voluntary और साफ agreement है। सिर्फ किसी महिला के physical resistance नहीं करने को consent नहीं माना जाता।

    इस मामले में पुलिस ने महिला के बयान के आधार पर sexual assault की शिकायत दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया है। आगे की कार्रवाई investigation, medical evidence और court proceedings के आधार पर होगी।

    Transgender community को लेकर एक जरूरी बात

    इस घटना में आरोपी पर आरोप है कि उसने transgender होने का भास किया था। इसे पूरी transgender community से जोड़ना सही नहीं होगा।

    किसी आरोपी द्वारा किसी पहचान या वेश का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करना उस पूरी community के बारे में निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में जांच का फोकस आरोपी के कथित deception, घर में entry लेने और महिला के साथ किए गए अपराध पर है।

    Mumbai की Housing Societies के लिए इस घटना से क्या सीख?

    इस घटना के बाद housing societies में visitor verification को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसी अनजान व्यक्ति को सिर्फ किसी धार्मिक, इलाज, दृष्ट उतारने या काला जादू दूर करने के दावे पर building या flat तक पहुंच नहीं मिलनी चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति पति-पत्नी या परिवार के किसी सदस्य की बीमारी ठीक करने, दृष्ट उतारने या किसी supernatural ताकत से परेशानी दूर करने का दावा करता है, तो पहले उसकी पहचान verify करना जरूरी है।

    Society security को भी बिना verification किसी stranger को अंदर भेजने से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर resident से phone या intercom पर confirmation लिया जा सकता है।

    अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति घर में आने की कोशिश करे तो दरवाजा खोलने के बजाय security guard, Society management या Police को इसकी जानकारी देना ज्यादा सुरक्षित है।

    इस मामले में अभी क्या पता है?

    Powai में 25 वर्षीय Air Hostess ने sexual assault की शिकायत की है।

    पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पति को ठीक करने और बुरी नजर दूर करने का बहाना बनाया था।

    आरोपी ने transgender होने का भास किया था।

    महिला के बयान के मुताबिक पानी छिड़कने और सिर पर हाथ रखने के बाद उसे संमोहित जैसा महसूस हुआ।

    आरोपी पर sexual assault का आरोप है और उसे गिरफ्तार किया जा चुका है।

    Police ने 100 से ज्यादा CCTV cameras की मदद से उसके movement को trace किया।

    आरोपी के पुराने criminal activities या इसी तरह की किसी दूसरी वारदात में शामिल होने की जांच अभी जारी है।

    मामला अब आगे की police investigation और कानूनी प्रक्रिया में है।

  • मुंबई लोकल अपडेट: दिवा में Night Block, कलवा-डोंबिवली रूट पर 3 रात बदलाव; Kasara-Karjat लोकल डायवर्ट

    मुंबई लोकल अपडेट: दिवा में Night Block, कलवा-डोंबिवली रूट पर 3 रात बदलाव; Kasara-Karjat लोकल डायवर्ट

    मुंबई लोकल यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट: दिवा स्टेशन पर FOB काम के चलते 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात कलवा-डोंबिवली रूट पर बदलाव रहेगा। जानें रूट डिटेल!

    मुंबई: मुंबई की लोकल से देर रात सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी अपडेट है। दिवा स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज यानी FOB के निर्माण कार्य के चलते मध्य रेल ने 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात विशेष ट्रैफिक और पावर ब्लॉक लेने का फैसला किया है। यह ब्लॉक रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे तक रहेगा।

    इस दौरान कलवा और डोंबिवली के बीच अप और डाउन स्लो लाइन पर लोकल ट्रेन की आवाजाही प्रभावित रहेगी। इसलिए अगर आप रात की आखिरी लोकल या देर रात की यात्रा करने वाले हैं, तो घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का रूट और ठहराव जरूर चेक कर लें।

    तीन रात कब रहेगा ब्लॉक?

    मध्य रेल का यह विशेष ब्लॉक लगातार तीन रात लिया जा रहा है।

    21/22 अगस्त की रात
    रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे तक

    22/23 अगस्त की रात
    रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे तक

    23/24 अगस्त की रात
    रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे तक

    यानी 21 अगस्त की रात से शुरू हुआ यह काम 24 अगस्त की सुबह तक तीन अलग-अलग रातों में किया जाएगा।

    दिवा स्टेशन पर क्या काम हो रहा है?

    दिवा स्टेशन के कल्याण एंड की तरफ फुट ओवर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इसी काम के लिए ट्रैक और बिजली से जुड़ा यह विशेष ब्लॉक लिया गया है।

    रेलवे स्टेशनों पर बेहतर passenger movement और wider FOB जैसी सुविधाओं को बढ़ाने पर भी रेलवे की तरफ से लगातार जोर दिया जा रहा है।

    इस block का मकसद निर्माण कार्य को सुरक्षित तरीके से पूरा करना है, इसलिए देर रात के उस समय में संबंधित स्लो लाइन पर ट्रेन संचालन को नियंत्रित किया जाएगा।

    Kasara और Karjat जाने वाली इन दो लोकल का रूट बदलेगा

    ब्लॉक के दौरान CSMT से चलने वाली दो रात की उपनगरीय ट्रेनों पर खास असर पड़ेगा।

    CSMT से रात 12:08 बजे कसारा जाने वाली लोकल को ठाणे और कल्याण के बीच डाउन फास्ट लाइन से डायवर्ट किया जाएगा।

    इसी तरह CSMT से रात 12:12 बजे कर्जत जाने वाली लोकल को भी ठाणे और कल्याण के बीच डाउन फास्ट लाइन से चलाया जाएगा।

    इस बदलाव की वजह से दोनों ट्रेनें ठाकुर्ली और कोपर स्टेशन पर नहीं रुकेंगी।

    यानी अगर आपका उतरने का स्टेशन ठाकुर्ली या कोपर है और आप इन दोनों रात की लोकल में सफर करने वाले हैं, तो इस बदलाव को नजरअंदाज न करें।

    ठाकुर्ली और कोपर जाने वालों के लिए सबसे जरूरी बात

    इन दोनों स्टेशनों पर ट्रेन का halt नहीं होने की वजह से यात्रियों को अपनी यात्रा पहले से plan करनी होगी।

    खासकर देर रात ऑफिस, होटल, दुकान, हॉस्पिटल या दूसरे काम से घर लौटने वाले यात्रियों को यह देखना जरूरी है कि जिस लोकल में वे सवार होने वाले हैं, उसमें ठाकुर्ली या कोपर का ठहराव है या नहीं।

    सिर्फ “कसारा लोकल” या “कर्जत लोकल” देखकर ट्रेन में न चढ़ें। 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात के इस block के दौरान संबंधित ट्रेन का route बदल रहा है।

    क्या कलवा-डोंबिवली की सभी लोकल बंद रहेंगी?

    नहीं। इस जानकारी का मतलब यह नहीं है कि तीनों रातों में कलवा और डोंबिवली के बीच चलने वाली हर लोकल पूरी तरह बंद रहेगी।

    मुख्य असर रात 1:20 बजे से सुबह 3:20 बजे के block window में अप और डाउन स्लो लाइन पर रहेगा। वहीं CSMT-कसारा और CSMT-कर्जत की ऊपर बताई गई दोनों services को अलग route से चलाया जाएगा।

    इसलिए यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी specific train का running status और route देखकर ही स्टेशन के लिए निकलें।

    सुबह की पहली लोकल को लेकर क्या करें?

    ब्लॉक सुबह 3:20 बजे तक निर्धारित है। लेकिन अगर आप सुबह की शुरुआती लोकल पकड़ने वाले हैं, तो स्टेशन पहुंचने से पहले live running status और रेलवे की announcement जरूर check करें।

    निर्माण कार्य पूरा होने के बाद traffic normal करने की प्रक्रिया भी जरूरी होती है, इसलिए सिर्फ block खत्म होने का समय देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर ट्रेन बिल्कुल उसी समय अपने normal schedule पर आ जाएगी।

    Mail और Express यात्रियों के लिए क्या?

    इस विशेष block की उपलब्ध जानकारी में मुख्य बदलाव suburban local services से जुड़ा है। इसलिए अगर आप Mail या Express ट्रेन से सफर करने वाले हैं, तो अपनी specific train का status अलग से check करें।

    किसी दूसरी train के timetable को देखकर अपनी यात्रा का फैसला न करें।

    देर रात सफर करने वालों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

    अगर आपकी यात्रा 1:20 बजे से 3:20 बजे के बीच या उसके आसपास है, तो स्टेशन निकलने से पहले कुछ मिनट निकालकर train status check करना बेहतर रहेगा।

    अपनी ट्रेन का destination, route और बीच में आने वाले station जरूर देख लें।

    ठाकुर्ली या कोपर जाना है तो खास तौर पर यह confirm करें कि आपकी ट्रेन वहां रुक रही है या नहीं।

    अगर रात की यात्रा के लिए कोई alternative transport लेना पड़े, तो official railway information और available public transport को देखकर ही फैसला करें।

    अकेले सफर करने वाले यात्रियों, खासकर महिलाओं के लिए देर रात route change होने पर बिना जानकारी के किसी अनजान जगह उतरने से बचना ज्यादा जरूरी है। मुंबई suburban railway से जुड़े gender studies में भी station access, safety और सुविधाओं को women commuters के लिए महत्वपूर्ण travel concerns माना गया है।

    यात्रियों को असुविधा क्यों झेलनी पड़ रही है?

    देर रात का यह block कुछ यात्रियों के लिए परेशानी वाला जरूर हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी shift देर रात खत्म होती है या जिन्हें रात की आखिरी local से घर पहुंचना होता है।

    लेकिन यह block दिवा स्टेशन के infrastructure work को सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। रात के समय traffic और passenger movement comparatively कम होने की वजह से ऐसे कामों के लिए night block लिया जाता है।

    इसलिए अगले तीन रात देर से सफर करने वाले passengers के लिए सबसे जरूरी चीज है कि वे अपनी ट्रेन की जानकारी पहले से check करके निकलें।

    दिवा स्टेशन पर काम पूरा होने के बाद क्या फायदा होगा?

    FOB जैसे infrastructure work का सीधा मकसद स्टेशन पर passengers की movement को बेहतर बनाना है। रेलवे की मौजूदा station-upgradation policy में wider FOB, बेहतर connectivity, passenger movement और accessibility पर जोर दिया जा रहा है।

    दिवा जैसे busy suburban station पर infrastructure का काम पूरा होने के बाद यात्रियों के लिए platform से आने-जाने की सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है।

    फिलहाल इस काम को पूरा करने के लिए 21/22, 22/23 और 23/24 अगस्त की रात में विशेष block रखा गया है।

    निकलने से पहले यह जरूर check करें

    रात की यात्रा है तो सबसे पहले अपनी specific local का running status देखें।

    अगर आप Kasara या Karjat जाने वाली रात की local पकड़ रहे हैं, तो route diversion ध्यान में रखें।

    ठाकुर्ली या कोपर उतरना है तो खास तौर पर train का halt confirm करें।

    रात 1:20 से 3:20 बजे के बीच यात्रा है तो block window को ध्यान में रखकर निकलें।

    स्टेशन पर पहुंचने के बाद announcement और display board पर latest update जरूर देखें।

    मध्य रेल का यह night block तीन रातों के लिए है, लेकिन इसका असर हर यात्री पर एक जैसा नहीं होगा। इसलिए “लोकल बंद है” मानकर परेशान होने के बजाय अपनी specific train, destination और timing check करना सबसे सही तरीका रहेगा।

  • कांदिवली में 3.28 करोड़ की हेरोइन के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

    कांदिवली में 3.28 करोड़ की हेरोइन के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई

    कांदिवली पश्चिम में क्राइम ब्रांच ने 651 ग्राम हेरोइन बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जब्त सामान की कुल कीमत 3.28 करोड़ रुपये बताई गई है।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम में मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 11 ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई के दौरान नकदी, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किया गया है।

    कांदिवली में पुलिस ने ऐसे बिछाया जाल

    मुंबई पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर मुंबई और उपनगरों में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम को कांदिवली पश्चिम में हेरोइन की तस्करी से जुड़ी अहम जानकारी मिली थी।

    सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कांदिवली पश्चिम में बीएमसी गार्डन के सामने खजुरिया रोड के पास जाल बिछाया। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दो लोगों को पकड़ा गया।

    तलाशी में 651 ग्राम हेरोइन मिली

    पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाशी ली तो उनके पास से 651 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस के अनुसार, इस हेरोइन की अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ 25 लाख 50 हजार रुपये है।

    इसके अलावा आरोपियों के पास से 2 लाख 10 हजार रुपये नकद, दो मोबाइल फोन और करीब 50,400 रुपये कीमत का अन्य सामान भी जब्त किया गया।

    पुलिस के मुताबिक, बरामद हेरोइन, नकदी और अन्य सामान समेत जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 3 करोड़ 28 लाख 10 हजार 400 रुपये है।

    NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

    इस मामले में कांदिवली पुलिस स्टेशन में गु.र.क्र. 110/2026 नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 8(ए), 21(ए) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर रही है।

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    मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट 11 की टीम के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर

    अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की जांच

    पुलिस की शुरुआती जांच में हेरोइन की तस्करी से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह की संभावित भूमिका सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह ड्रग्स कहां से लाई गई थी और मुंबई में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

    मामले में आगे की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई

    यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती के मार्गदर्शन में की गई। क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे सह-आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) कृष्णकांत उपाध्याय, पुलिस उपायुक्त नवनाथ ढवळे और दिनकर शिलवाते की निगरानी में पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    कार्रवाई में क्राइम ब्रांच यूनिट-11 के वरिष्ठ निरीक्षक शशिकांत जगदाळे, निरीक्षक विश्वास पाटिल, एसपी एन. दादासाहेब बनसोडे, एसपी एन. अमित पाटिल, निरीक्षक बालासाहेब शिंदे और उनकी टीम के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस मामले में ड्रग्स की सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • कांदिवली के बैंक लॉकर से ₹82 लाख का सोना गायब, डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार; 9 करोड़ के ट्रांजैक्शन ने चौंकाया

    कांदिवली के बैंक लॉकर से ₹82 लाख का सोना गायब, डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार; 9 करोड़ के ट्रांजैक्शन ने चौंकाया

    कांदिवली में NRI के लॉकर से 610 ग्राम सोना गायब हुआ। पुलिस ने पूर्व डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर पूरी jewellery बरामद कर ली।

    मुंबई: कांदिवली में बैंक लॉकर से करीब 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने के मामले ने बैंकिंग सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में पुलिस ने बैंक के ही पूर्व डिप्टी ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने NRI ग्राहक के लॉकर में रखे सोने के गहनों को कथित तौर पर अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया था। पुलिस ने जांच के दौरान पूरे 610 ग्राम गहने बरामद करने का दावा किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप रामचंद साहनी के तौर पर हुई है।

    कांदिवली में NRI के लॉकर से कैसे गायब हुआ सोना?

    मामला कांदिवली पश्चिम के MG Road स्थित IndusInd Bank की शाखा का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता 74 वर्षीय NRI हैं और लंबे समय से दुबई में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। उनका मुंबई में घर और इसी बैंक में अकाउंट है। उन्होंने 22 मार्च 2024 को बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे। उस समय इन गहनों की कीमत करीब 81.80 लाख रुपये बताई गई थी।

    विदेश में लंबे समय तक रहने की वजह से शिकायतकर्ता नियमित रूप से अपना लॉकर चेक नहीं कर पाए। करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक जाकर लॉकर खोला, तो अंदर रखा पूरा सोना गायब मिला। इसके बाद उन्होंने बैंक अधिकारियों से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस से शिकायत की।

    12 अगस्त को शिकायत दर्ज होने के बाद कांदिवली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इतने पुराने मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सोना आखिर लॉकर से कब और कैसे बाहर निकला।

    पुलिस की नजर बैंक के डिप्टी मैनेजर पर क्यों गई?

    जांच के दौरान पुलिस ने लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की। इसी दौरान सामने आया कि शिकायतकर्ता को लॉकर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तत्कालीन डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी की भूमिका थी।

    इसके बाद पुलिस ने सिर्फ बैंक रिकॉर्ड पर निर्भर रहने के बजाय आरोपी के पिछले करीब दो साल के financial transactions की जांच शुरू की।

    यहीं से जांच को बड़ा सुराग मिला।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी के बैंक खातों में करीब 9 करोड़ रुपये तक के transactions मिले। इन transactions का एक बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों से जुड़ा था जो सोना गिरवी रखकर loan या mortgage का कारोबार करती हैं। पुलिस ने इन transactions की जांच आगे बढ़ाई तो उसे उन firms तक पहुंच मिली जहां आरोपी द्वारा कथित तौर पर सोने के गहने गिरवी रखे गए थे।

    फोटो से हुआ गहनों का मिलान

    पुलिस ने संबंधित gold mortgage firms से pledged jewellery की तस्वीरें मांगीं। तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए जो NRI ग्राहक के लॉकर में रखे गए गहनों से मेल खाते थे।

    इसके बाद पुलिस ने उन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के 610 ग्राम सोने के गहने बरामद कर लिए गए।

    पुलिस ने FIR दर्ज होने के कुछ ही दिनों के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता हासिल की। इसके बाद कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित वारदात में उसके साथ कोई और बैंक कर्मचारी या दूसरा व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    सबसे बड़ा सवाल: दो साल तक बैंक को पता क्यों नहीं चला?

    इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मार्च 2024 में लॉकर में रखे गए गहने आखिर कब गायब हुए।

    शिकायतकर्ता करीब दो साल बाद मुंबई लौटे। इसका मतलब यह भी है कि पुलिस को यह पता लगाना होगा कि लॉकर को किस तारीख और किस तरीके से access किया गया था। इसके लिए locker operation records, access details, CCTV और बैंक के internal records जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

    RBI के locker framework में banks को locker area की security, unauthorized access रोकने के उपाय और CCTV व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। Common areas और strong-room entry/exit की CCTV recording कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखने का प्रावधान है। अगर customer unauthorized access या theft की शिकायत करता है, तो संबंधित CCTV footage को police investigation और dispute settlement पूरा होने तक preserve किया जाना चाहिए।

    हालांकि इस मामले में पुलिस को दो साल पुरानी कौन-कौन सी CCTV या access recording मिली है, इसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। फिलहाल investigation में financial transactions एक अहम सुराग बनकर सामने आए हैं।

    अगर बैंक कर्मचारी ही locker से gold निकाल दे तो जिम्मेदारी किसकी?

    यही सवाल इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है।

    RBI के revised locker rules में bank employee के fraud से होने वाले loss को भी liability framework में शामिल किया गया है। अगर loss bank की negligence या deficiency से जुड़ा है और prescribed conditions पूरी होती हैं, तो bank की liability prevailing annual locker rent के 100 गुना तक हो सकती है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि अगर locker में 82 लाख रुपये का gold रखा था तो bank automatically 82 लाख रुपये customer को देगा।

    उदाहरण के लिए अगर किसी locker का annual rent 5,000 रुपये है, तो 100 गुना रकम 5 लाख रुपये होगी। Actual compensation का सवाल case के facts, bank की liability और लागू कानूनी प्रक्रिया पर depend करेगा।

    यानी locker में रखा gold जितना महंगा है, bank की regulatory liability उसी proportion में बढ़ती जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।

    Supreme Court भी bank locker को लेकर क्या कह चुका है?

    Bank locker disputes में Supreme Court का 2021 का फैसला भी महत्वपूर्ण है। Amitabha Dasgupta बनाम United Bank of India मामले में Supreme Court ने banks की duty of care को लेकर महत्वपूर्ण observations दिए थे। Court ने यह माना कि bank सिर्फ यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह नहीं बच सकता कि उसे locker के अंदर रखी चीजों की जानकारी नहीं थी।

    लेकिन locker में वास्तव में कितना gold या दूसरा सामान रखा था और उसकी exact value कितनी थी, यह अलग evidentiary issue हो सकता है। यानी ग्राहक को अपने valuables के ownership और value को साबित करने के लिए documents और दूसरे evidence की जरूरत पड़ सकती है।

    इसीलिए bank locker में महंगी jewellery रखने वाले ग्राहकों के लिए purchase bills, valuation records, jewellery की photographs, hallmark details और insurance documents जैसे records संभालकर रखना काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

    क्या देश में पहले भी bank lockers से gold गायब होने के मामले आए हैं?

    कांदिवली का यह मामला अकेला नहीं है। पिछले कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से bank lockers में रखे gold और valuables के गायब होने के मामले सामने आए हैं।

    Kanpur में एक महिला ने आरोप लगाया था कि करीब 17 साल बाद SBI locker खोलने पर उसमें रखी लगभग 50 लाख रुपये की jewellery गायब थी। इस मामले में लंबे समय तक locker operate नहीं किए जाने और bank records से जुड़े सवाल सामने आए।

    Bengaluru में एक bank assistant manager पर customers के lockers से करीब 2.7 किलो gold jewellery चोरी करने का आरोप लगा था। उस मामले में भी कथित तौर पर jewellery को pawn किया गया था और जांच में bank employee की भूमिका सामने आई।

    Kolkata में एक former bank employee पर करीब 571 ग्राम gold jewellery से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई थी। वहां भी jewellery को loan collateral के तौर पर इस्तेमाल किए जाने और documents/signature से जुड़े सवाल जांच का हिस्सा बने।

    Pune में भी bank locker से करोड़ों रुपये के gold, silver, diamond jewellery और दूसरे valuables गायब होने का मामला सामने आ चुका है, जिसमें bank employees की कथित भूमिका की जांच हुई थी।

    इन मामलों को देखकर एक बात साफ है कि bank locker से जुड़े disputes सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में locker access, employee control, documentation, dormant lockers और pledged jewellery का trail भी जांच का हिस्सा बनता है।

    क्या भारत में bank locker theft बहुत आम है?

    इस सवाल का जवाब भी आंकड़ों से समझना जरूरी है।

    केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि 31 मार्च 2025 तक Public Sector Banks में करीब 1.10 करोड़ lockers operational थे। FY2020-21 से FY2024-25 के बीच Public Sector Banks में 40 established locker theft cases सामने आए थे। RBI के पास सभी banks के locker theft cases का consolidated database नहीं है।

    बाद के 2026 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक FY2021-22 से FY2025-26 तक Public Sector Banks में 40 established locker theft cases दर्ज हुए। FY2025-26 में 12 Public Sector Banks में established locker theft का कोई मामला reported नहीं हुआ।

    इन पांच साल के आंकड़ों में Maharashtra में 5 established cases दर्ज हुए थे। लेकिन यह आंकड़ा Public Sector Banks का है। कांदिवली का मौजूदा मामला IndusInd Bank जैसे private sector bank से जुड़ा है, इसलिए इसे इन सरकारी PSB आंकड़ों में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

    यानी available data के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि देश के bank lockers में चोरी आम बात है। लेकिन यह भी साफ है कि locker को पूरी तरह risk-free मानना ठीक नहीं है।

    NRI customers के लिए यह मामला क्यों ज्यादा महत्वपूर्ण है?

    कांदिवली की घटना NRI customers के लिए खास warning लेकर आई है।

    जो लोग साल में एक-दो बार ही भारत आते हैं, उनके लिए locker की physical checking नियमित रूप से करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में लंबे समय तक locker operate नहीं होने पर किसी unauthorized access या दूसरे dispute का पता काफी देर से चल सकता है।

    RBI के locker framework में ऐसे customers का भी ध्यान रखा गया है जो NRI हैं या job transfer जैसी वजह से लंबे समय तक locker operate नहीं कर पाते।

    इसलिए विदेश में रहने वाले customers के लिए bank में mobile number, email और address जैसे contact details updated रखना, locker records की जानकारी संभालकर रखना और संभव हो तो trusted family arrangement के बारे में bank के applicable rules समझना जरूरी है।

    अगर आपके bank locker से jewellery गायब मिले तो क्या करें?

    सबसे पहले locker की स्थिति की photographs और video अपने पास रखें। इसके बाद तुरंत bank को written complaint दें और complaint की acknowledgement लें।

    इसके साथ police complaint करना भी जरूरी है। Locker access records, CCTV, locker operation records और bank से जुड़े documents सुरक्षित रखने के लिए लिखित request देना भी उपयोगी हो सकता है।

    अगर jewellery के bills, valuation certificate, photographs, hallmark details या insurance documents हैं तो उन्हें सुरक्षित रखें। यही documents बाद में ownership और value establish करने में काम आ सकते हैं।

    बैंक locker में रखा gold क्या insured होता है?

    यह समझना भी जरूरी है कि bank locker और jewellery insurance एक ही चीज नहीं हैं।

    Government ने Parliament में बताया है कि banks को locker-related contingencies से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Board-approved insurance policies रखने की सलाह दी गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि customer के locker में रखे हर gold item का पूरा value automatically insured है।

    इसलिए बहुत high-value jewellery रखने वाले customers को अपने bank से applicable locker terms और अलग jewellery insurance की जरूरत को समझना चाहिए।

    कांदिवली के इस मामले में अब आगे क्या होगा?

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। आरोपी कुलदीप साहनी गिरफ्तार हो चुका है और शिकायतकर्ता के 610 ग्राम gold jewellery की recovery की जानकारी सामने आई है।

    अब जांच में यह पता लगाया जाना बाकी है कि jewellery locker से किस तरीके से निकाली गई, उसे अलग-अलग mortgage firms तक कैसे पहुंचाया गया, करीब 9 करोड़ रुपये के financial transactions में इस मामले से जुड़े कौन-कौन से transactions थे और क्या किसी दूसरे व्यक्ति या bank employee ने कथित तौर पर उसकी मदद की।

    इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात यही है कि करीब दो साल पुराने locker theft का सुराग CCTV से ज्यादा financial trail से सामने आया। और अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि NRI का 82 लाख का gold कौन ले गया, बल्कि यह भी है कि bank locker में रखी आपकी lifetime savings कितनी सुरक्षित हैं और अगर कभी ऐसी घटना हो जाए तो आपकी legal और financial protection कितनी है। फिलहाल कांदिवली पुलिस की जांच इन सवालों के जवाब तलाश रही है।