मुंबई के विले पार्ले में 210 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर ₹4.15 करोड़ का लोन घोटाला सामने आया है। पूर्व CEO समेत 4 पर FIR दर्ज हुई।
मुंबई: विले पार्ले में बैंक से जुड़े एक बड़े लोन घोटाले का मामला सामने आया है। पुलिस ने मराठा बैंक के पूर्व CEO समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि 210 कथित ‘भूतिया कर्मचारियों’ के नाम पर कुल ₹4.15 करोड़ से ज्यादा का लोन जारी कराया गया।
पुलिस के मुताबिक, लोन लेने के लिए जिन लोगों के नाम और दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, उन्होंने बाद में इन कंपनियों में काम करने से इनकार किया। मामले में बैंक के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
210 लोगों के नाम पर ऐसे निकाली गई रकम
एफआईआर के मुताबिक, मुंबई पैरामेडिकल कंपनी के 126 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹2.47 करोड़ के लोन जारी किए गए। वहीं पीपल पैरामेडिकल कंपनी के 84 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹1.68 करोड़ का लोन दिया गया।
इस तरह कुल 210 लोगों के नाम पर 210 लोन खातों से ₹4,15,05,000 की रकम निकाले जाने का आरोप है।
लोन के लिए लगाए गए दस्तावेज भी कथित तौर पर फर्जी
पुलिस की जांच में सामने आया कि लोन के लिए इस्तेमाल किए गए कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे।
इनमें:
- आईडी कार्ड
- Salary Slips
- Salary Certificates
- Rubber Stamps
शामिल हैं।
जिन लोगों के नाम पर लोन लिया गया, उन्होंने कथित तौर पर कंपनियों में काम करने से ही इनकार कर दिया।
सभी लोन में बताया गया था एक ही कारण
मामले में खास बात यह सामने आई है कि सभी 210 लोन घर की मरम्मत के नाम पर लिए गए थे।
इसके लिए Western Construction Engineer और Laxmi Interior के नाम से कथित फर्जी quotations लगाए गए थे।
एफआईआर के मुताबिक, लोन approve होने वाले दिन ही संबंधित लोगों के savings accounts खोले गए थे।
बैंक खाते में पैसे आते ही शुरू हुआ cash withdrawal
लोन की रकम संबंधित खातों में जमा होने के बाद करीब ₹15 हजार से ₹20 हजार तक cash withdrawal किए जाने का आरोप है।
इसके अलावा कुछ रकम FD में भेजी गई। बची हुई रकम को Pay Order के जरिए एजेंट तक पहुंचाने का आरोप है।
एफआईआर में कहा गया है कि इन Pay Order पर शाखा प्रमुख गोपाल मुकुंद परब के signatures थे।
पूर्व CEO समेत 4 लोगों पर FIR
विले पार्ले पुलिस ने इस मामले में बैंक के चार तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
FIR में जिन लोगों के नाम हैं:
- रमेश विठ्ठल शिरगांवकर — तत्कालीन CEO
- दशरथ पुंडलिक नाइक — महाप्रबंधक
- वैशाली कृष्णा मायेकर — लोन मैनेजर
- गोपाल मुकुंद परब — शाखा प्रमुख
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि कथित लोन फर्जीवाड़े में इन लोगों की क्या भूमिका थी और इसके पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
9 से 10 साल तक बकाया रहे कई लोन
बैंक के मुताबिक, इस मामले से जुड़े कई लोन 9 से 10 साल तक बकाया रहे। आरोप है कि इस दौरान प्रभावी recovery action नहीं लिया गया।
बाद में लोन की recovery नहीं होने के बाद RBI ने 29 मई 2023 को मराठा बैंक का Cosmos Bank में merger कर दिया।
Merger के बाद Cosmos Bank की शिकायत पर विले पार्ले पुलिस ने FIR दर्ज की।
अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में कथित फर्जी documents, 210 loan accounts, पैसों के transactions और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को भी देखा जा रहा है।
