मुंबई पुलिस में बिना भर्ती 10 लोग लेते रहे सैलरी, 6.41 करोड़ रुपये के घोटाले ने उठाए बड़े सवाल

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मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी होने का मामला सामने आया है। जानिए घोटाला कैसे पकड़ा गया, किन अधिकारियों पर एफआईआर हुई और आगे क्या होगा।

मुंबई पुलिस के उत्तरी क्षेत्रीय प्रभाग (नॉर्थ रीजनल डिवीजन) में करोड़ों रुपये के कथित वेतन घोटाले का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच के मुताबिक, पुलिस के पेरोल सिस्टम में 10 ऐसे लोगों के नाम दर्ज पाए गए, जिनका विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था। आरोप है कि इन नामों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी की गई। मामला तब सामने आया, जब कर्मचारियों का डेटा पुरानी ‘सेवार्थ’ (Sevaarth) प्रणाली से नए सिस्टम में ट्रांसफर किया जा रहा था।

घोटाला कैसे सामने आया?

पुलिस विभाग में कर्मचारियों के रिकॉर्ड को पुराने पेरोल सिस्टम से नए सिस्टम में स्थानांतरित किया जा रहा था। इसी दौरान डेटा मिलान और आंतरिक ऑडिट में कई रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, दिसंबर 2019, जनवरी और फरवरी 2020 के अलावा जून से सितंबर 2020 के बीच संदिग्ध भुगतान किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ नाम ऐसे थे, जिनके सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।

इसके बाद नॉर्थ रीजन के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने समता नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

कौन हैं वे 10 लोग, जिनके नाम पर निकली सैलरी?

जांच में जिन दस नामों का उल्लेख सामने आया है, उनमें—

  • रामदास भोगले
  • सुधाकर कदम
  • सरजू यादव
  • भगवत भोसले
  • गुणाजी खावकर
  • महादेव हलदणकर
  • राजेंद्र सोनार
  • उत्तम थोरात
  • सूर्यकांत पाटिल
  • पांडुरंग कदम

शामिल हैं।

हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ये सभी वास्तविक व्यक्ति हैं या केवल फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए इन नामों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस संबंधित बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच कर रही है।

पांच अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर

समता नगर पुलिस स्टेशन में पांच तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

कांदिवली पूर्व की समता नगर पुलिस थाने की तस्वीर

इनमें शामिल हैं—

  • रामकिशन गोस्वामी (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
  • नागेश तलवडेकर (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
  • विजया चव्हाण (तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी)
  • अजय राठौड़ (मुख्य लिपिक)
  • अमोल मेश्राम (वरिष्ठ लिपिक)

इन पर सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किसी आरोपी को निलंबित किया गया है या नहीं।

किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120(बी) और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

हालांकि, एफआईआर वर्ष 2026 में दर्ज हुई है, लेकिन कथित अपराध 2019 और 2020 के दौरान हुआ था। इसी वजह से मामले में IPC की धाराएं लगाई गई हैं।

इन धाराओं में सरकारी धन का गबन, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, सबूत मिटाना और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।

नोट: 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हो चुकी है, लेकिन 1 जुलाई 2024 से पहले हुए अपराधों पर कई मामलों में IPC के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

📊 6.41 करोड़ रुपये का हिसाब

नोट: नीचे दिया गया गणित उपलब्ध जानकारी के आधार पर अनुमान है। पुलिस ने अभी तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।

विवरणअनुमानित आंकड़ा
कुल कथित रकम6.41 करोड़ रुपये
फर्जी कर्मचारियों की संख्या10
प्रति व्यक्ति औसत रकम64.1 लाख रुपये
संदिग्ध अवधि7 महीने
प्रति व्यक्ति औसत मासिक भुगतान9.15 लाख रुपये
सभी 10 लोगों को प्रति माह कुल भुगतान91.5 लाख रुपये

यदि 6.41 करोड़ रुपये को 10 लोगों में बराबर बांटा जाए, तो प्रत्येक व्यक्ति के नाम पर औसतन 64.1 लाख रुपये निकले होंगे।

टाइमलाइन: कब क्या हुआ?

  • दिसंबर 2019: संदिग्ध भुगतान शुरू हुए।
  • जनवरी–फरवरी 2020: कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर वेतन जारी रहा।
  • जून–सितंबर 2020: भुगतान जारी रहने का दावा।
  • 2026: डेटा माइग्रेशन के दौरान गड़बड़ी सामने आई।
  • अगस्त 2026: समता नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।

🏛️ इस घोटाले का मुंबई पुलिस और आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?

यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है। इसने सरकारी विभागों की पेरोल व्यवस्था, डिजिटल सुरक्षा और ऑडिट सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुंबई पुलिस विभाग पर संभावित असर

  • कर्मचारियों के रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन हो सकता है।
  • पेरोल सिस्टम का तकनीकी ऑडिट कराया जा सकता है।
  • संवेदनशील विभागों में एक्सेस कंट्रोल सख्त किया जा सकता है।
  • वेतन भुगतान प्रक्रिया की निगरानी बढ़ सकती है।

क्या अन्य यूनिटों का भी ऑडिट होगा?

फिलहाल जांच नॉर्थ रीजन तक सीमित है, लेकिन अगर सिस्टम स्तर की खामियां सामने आती हैं, तो मुंबई पुलिस की अन्य इकाइयों के रिकॉर्ड की भी जांच हो सकती है।

टैक्सपेयर्स के पैसे पर क्या असर होगा?

सरकारी कर्मचारियों का वेतन जनता के टैक्स से दिया जाता है। यदि जांच में गबन की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला मामला माना जाएगा।

सबसे बड़ा सवाल: बिना भर्ती हुए सिस्टम तक पहुंचे कैसे?

पूरे मामले का सबसे बड़ा और सबसे अहम सवाल यही है कि जिन लोगों की कभी भर्ती ही नहीं हुई, उनके नाम पुलिस के पेरोल सिस्टम में कैसे दर्ज हुए।

जांच एजेंसियां फिलहाल इन बिंदुओं पर काम कर रही हैं—

  • क्या फर्जी कर्मचारी आईडी बनाई गई थीं?
  • क्या किसी अधिकारी के लॉगिन का गलत इस्तेमाल हुआ?
  • क्या फर्जी नियुक्ति दस्तावेज तैयार किए गए?
  • क्या बैंक खाते पहले से खोले गए थे?
  • क्या विभाग के बाहर के लोग भी शामिल हैं?

इन्हीं सवालों के जवाब से पूरे घोटाले की असली तस्वीर सामने आएगी।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल लॉग और विभागीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं—

  • एफआईआर नंबर क्या है?
  • शिकायत किस अधिकारी ने दर्ज कराई?
  • 6.41 करोड़ रुपये किन खातों में भेजे गए?
  • क्या किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है?
  • क्या विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है?
  • क्या आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जांच में शामिल होगी?

🔎 समझिए पूरा मामला

घोस्ट एम्प्लॉई (Ghost Employee) क्या होता है?

ऐसे व्यक्ति को “घोस्ट एम्प्लॉई” कहा जाता है, जिसका नाम किसी संस्था के रिकॉर्ड में कर्मचारी के रूप में दर्ज हो, लेकिन वह वास्तव में वहां काम नहीं करता हो।

आमतौर पर ऐसे मामलों में—

  • फर्जी कर्मचारी आईडी बनाई जाती है।
  • नकली दस्तावेज तैयार किए जाते हैं।
  • बैंक खाते खोले जाते हैं।
  • वेतन सीधे उन खातों में ट्रांसफर किया जाता है।

सेवार्थ (Sevaarth) सिस्टम क्या है?

सेवार्थ महाराष्ट्र सरकार का डिजिटल पेरोल और कर्मचारी प्रबंधन प्लेटफॉर्म है। इसी सिस्टम के जरिए सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, बैंक खातों और सेवा रिकॉर्ड का प्रबंधन किया जाता है।

Official Sources

FAQ

मुंबई पुलिस वेतन घोटाला क्या है?

यह मामला मुंबई पुलिस के नॉर्थ रीजन में 10 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर 6.41 करोड़ रुपये की सैलरी जारी होने से जुड़ा है।

कितने लोगों के नाम सामने आए हैं?

जांच में 10 ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनका पुलिस विभाग से कोई आधिकारिक संबंध नहीं बताया गया है।

मामला कैसे सामने आया?

सेवार्थ पेरोल सिस्टम से नए सिस्टम में डेटा ट्रांसफर के दौरान रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई।

किन अधिकारियों पर मामला दर्ज हुआ है?

पांच तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

जांच अब किस दिशा में बढ़ रही है?

पुलिस बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और विभागीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।


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