कांदिवली में प्रस्तावित मेगा रेल टर्मिनस को बड़ा झटका लगा है। रक्षा मंत्रालय ने 65 एकड़ जमीन ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया, अब रेलवे को वैकल्पिक जमीन तलाशनी होगी।
मुंबई: मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए प्रस्तावित कांदिवली मेगा रेल टर्मिनस की योजना को बड़ा झटका लगा है। रक्षा मंत्रालय ने रेलवे की करीब 65 एकड़ रक्षा भूमि ट्रांसफर करने की मांग को खारिज कर दिया। अब Western Railway को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वैकल्पिक जगह तलाशनी होगी या अपनी दीर्घकालिक योजना में बदलाव करना होगा।
कांदिवली मेगा रेल टर्मिनस की योजना क्यों अटकी?
प्रस्तावित टर्मिनस के लिए कांदिवली और मालाड स्टेशनों के बीच स्थित रक्षा मंत्रालय की जमीन मांगी गई थी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह जमीन Central Ordnance Depot (COD) और Equipment Support Depot (ESD), Kandivali के सक्रिय कब्जे में है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कांदिवली में ट्रांसफर के लिए कोई वैकल्पिक रक्षा भूमि उपलब्ध नहीं है।
रक्षा मंत्रालय का यह रुख रेलवे को भेजे गए एक आधिकारिक संचार में सामने आया था। यह जवाब 2025 के मध्य में रेलवे की ओर से सरकारी NOC Portal के जरिए किए गए आवेदन के बाद दिया गया।
65 एकड़ जमीन पर क्या बनना था?
Western Railway की योजना के अनुसार, इस जमीन पर मुंबई के पश्चिमी उपनगरों के लिए एक बड़ा Long-Distance Railway Terminus विकसित किया जाना था। प्रस्तावित साइट Kandivali Car Shed और Poisar Metro Station के आसपास स्थित है और Western Railway Corridor के साथ मौजूद बड़े contiguous land parcels में से एक मानी जाती है।

इस टर्मिनस में करीब 9 प्लेटफॉर्म बनाने की योजना थी। प्रत्येक प्लेटफॉर्म लगभग 625 मीटर लंबा होता और 24-कोच वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को संभालने में सक्षम होता।
योजना के अनुसार, यहां:
- 6 Pit Lines
- 9 Stabling Lines
- 2 Dedicated Shunting Necks
- Integrated Maintenance Facilities
जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। इनका इस्तेमाल Mail और Express Trains के साथ-साथ अगली पीढ़ी की ट्रेनों, जिसमें Vande Bharat Services भी शामिल हैं, के रखरखाव के लिए किया जा सकता था।
कितनी ट्रेनों और यात्रियों को फायदा होता?
प्रस्तावित टर्मिनस की क्षमता लगभग 48 से 50 जोड़ी लंबी दूरी की ट्रेनों को संभालने की बताई गई थी। यह क्षमता मुंबई के प्रमुख टर्मिनसों में से एक Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus (CSMT) के स्तर के करीब होती।
रेलवे की योजना का उद्देश्य मुंबई के मौजूदा प्रमुख टर्मिनसों पर दबाव कम करना था। इनमें:
- Mumbai Central
- Bandra Terminus
- Lokmanya Tilak Terminus
- CSMT
शामिल हैं।
इस परियोजना से मुंबई के पश्चिमी उपनगरों और Mumbai Metropolitan Region के यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेन पकड़ने के लिए शहर के दूसरे हिस्सों तक जाने की जरूरत कम हो सकती थी। गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत के अन्य राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद थी।
रेलवे ने जमीन के लिए क्या योजना बनाई थी?
Western Railway ने मौजूदा Kandivali Coaching Facilities को Virar स्थानांतरित करने की संभावना पर भी अध्ययन किया था। इसके बाद कांदिवली में उपलब्ध जमीन पर बड़े Long-Distance Terminus और Coaching Infrastructure को विकसित करने की योजना पर विचार किया गया।
यह प्रस्ताव मुंबई में लंबी दूरी की ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने की रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा था। जून 2026 में रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई के व्यस्त रेलवे स्टेशनों के Master Plan की समीक्षा के दौरान Kandivali को Borivali के समानांतर विकसित करने और Western Railway Route पर क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया था।
अब रेलवे के सामने क्या विकल्प हैं?
रक्षा मंत्रालय द्वारा जमीन ट्रांसफर से इनकार किए जाने के बाद प्रस्तावित कांदिवली टर्मिनस की मौजूदा योजना आगे बढ़ाने में बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
अब रेलवे को:
- किसी वैकल्पिक साइट की तलाश करनी होगी।
- उपलब्ध अन्य जमीन पर परियोजना की व्यवहार्यता जांचनी होगी।
- या फिर मुंबई की Long-Distance Rail Capacity बढ़ाने की अपनी दीर्घकालिक योजना में बदलाव करना होगा।
हालांकि, इससे यह जरूरी नहीं है कि कांदिवली टर्मिनस का विचार पूरी तरह खत्म हो गया है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, Western Railway ने इस परियोजना के लिए भूमि की जरूरत और संभावित विकल्पों पर काम किया है। लेकिन 65 एकड़ की प्रस्तावित रक्षा भूमि के बिना मूल योजना को उसी रूप में आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होगा।
मुंबई के लिए क्यों महत्वपूर्ण थी यह योजना?
मुंबई में लंबी दूरी की ट्रेनों की मांग लगातार अधिक है और मौजूदा टर्मिनसों पर परिचालन दबाव भी बना रहता है। पश्चिमी उपनगरों में एक बड़े टर्मिनस के निर्माण से यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती थी और मौजूदा टर्मिनसों पर ट्रेनों का दबाव कम किया जा सकता था।
फिलहाल, रक्षा मंत्रालय के जमीन ट्रांसफर से इनकार के बाद कांदिवली मेगा रेल टर्मिनस योजना का अगला कदम रेलवे के वैकल्पिक भूमि विकल्पों और दोनों मंत्रालयों के बीच आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

