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मुंबई के मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिले। FDA ने फूड लाइसेंस तत्काल सस्पेंड कर खाने की बिक्री, स्टोरेज और सप्लाई भी रोक दी
मुंबई: मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिलने के बाद महाराष्ट्र FDA ने होटल का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। 18 अगस्त को हुई जांच में किचन की सफाई, ड्रेनेज, स्टोरेज और फूड हैंडलिंग को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं।
मालाड के Hotel Radha में FDA की अचानक जांच
FDA ने 18 अगस्त को मालाड वेस्ट स्थित Hotel Radha की किचन की जांच की। जांच के दौरान अधिकारियों को किचन में जिंदा चूहे और कॉकरोच मिले। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ चूहे छत के पास दिखाई दिए, जबकि कुछ खुले ड्रेनेज के रास्ते किचन में आते मिले।
किचन के ड्रेनेज खुले और खराब हालत में पाए गए। इससे चूहों और दूसरे कीड़ों के अंदर आने का रास्ता बना हुआ था।
फूड तैयार करने वाले उपकरणों पर कॉकरोच मिले। रिपोर्ट के मुताबिक dough-mixing machine पर भी कॉकरोच दिखाई दिए। काउंटर और बर्तन गंदे थे, जबकि कई बर्तनों पर जंग के निशान मिले।
टोस्टर के ऊपर रखा था खुला Dustbin
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। किचन में खुला dustbin रखा हुआ था और उसके ठीक ऊपर toaster रखा था, जहां खाना तैयार किया जा रहा था।
इसके अलावा कुछ food items धूल और गंदगी के बीच रखे मिले। स्टोरेज बॉक्स और कंटेनर भी साफ नहीं थे। इससे food storage और handling को लेकर भी सवाल उठे।
FDA ने Hotel Radha का फूड लाइसेंस क्यों सस्पेंड किया?
इन गंभीर food safety और hygiene violations के बाद FDA ने Food Safety and Standards Act, 2006 के Section 32(3) के तहत Hotel Radha का food business licence तत्काल प्रभाव से suspend कर दिया।
आदेश के तहत 18 अगस्त से होटल में food की manufacturing, storage, sale और distribution से जुड़ी गतिविधियां रोक दी गई हैं। यानी कार्रवाई सिर्फ warning या सफाई के निर्देश तक सीमित नहीं रही, बल्कि होटल के food business पर तत्काल रोक लगाई गई है।
क्या Hotel Radha में अभी खाना मिल सकता है?
FDA के suspension order के मुताबिक food की manufacturing, storage, sale और distribution वाली गतिविधियां रोकने का आदेश दिया गया है।
इसलिए फिलहाल Hotel Radha के food business को लेकर FDA का suspension लागू है। होटल की बाकी सेवाओं पर क्या असर है, यह food licence suspension से अलग विषय है और उपलब्ध FDA कार्रवाई में मुख्य रोक food-related activities पर है।
क्या Hotel Radha का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द हुआ है?
नहीं। यहां suspension और cancellation को अलग समझना जरूरी है।
FDA ने Hotel Radha का food business licence suspend किया है। उपलब्ध कार्रवाई में licence को हमेशा के लिए cancel करने की बात नहीं कही गई है। आगे compliance और FDA की कार्रवाई के बाद स्थिति में बदलाव हो सकता है।
क्या Hotel Radha का खाना खाने से किसी के बीमार होने की पुष्टि हुई?
अभी सामने आई FDA कार्रवाई में किसी ग्राहक के बीमार होने की पुष्टि नहीं की गई है।
जांच में किचन की hygiene, pest control, drainage, storage और food handling से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आई हैं। इसलिए इसे food safety risk के तौर पर देखा गया है, लेकिन बिना मेडिकल या laboratory confirmation के यह कहना सही नहीं होगा कि होटल का खाना खाने से किसी व्यक्ति को बीमारी हुई।
Hotel Radha पर हुई कार्रवाई अकेली कार्रवाई नहीं है। महाराष्ट्र FDA ने हाल की statewide inspection drive में 31 hotels, restaurants, roadside eateries और दूसरे food establishments की जांच की।
इस कार्रवाई में 22 establishments को improvement notices दिए गए, जबकि पांच food business licences suspend किए गए। करीब 25 लाख रुपये के banned और दूसरे food products जब्त किए गए। 10 लोगों की गिरफ्तारी, आठ FIR और छह establishments को seal किए जाने की जानकारी भी FDA कार्रवाई के बाद सामने आई है।
इसी अभियान के दौरान Hotel Radha, Malad West का नाम भी उन establishments में शामिल रहा जिनका food business licence suspend किया गया। FDA ने इस अभियान को “Safe Food, Safe Maharashtra” के तहत चलाया है।
FDA की हालिया inspections में सिर्फ kitchen की सफाई ही नहीं, बल्कि food storage, temperature control, waste disposal, pest control और food handling जैसी चीजों को भी देखा जा रहा है।
Hotel Radha के मामले में खुले drains, rodents, cockroaches, गंदे utensils, जमा पानी, grease, खराब storage और खुले dustbin जैसी कई कमियां एक साथ सामने आईं।
मालाड में इससे पहले भी food safety पर कार्रवाई
मालाड वेस्ट में इससे पहले FDA ने Blinkit के एक dark store पर भी food safety violations को लेकर कार्रवाई की थी। 7 अगस्त की inspection के बाद वहां cockroaches, expired food, floor पर रखे food items और storage तथा pest-control से जुड़ी कमियां सामने आने की रिपोर्ट आई थी। उस facility का food licence भी suspend किया गया था।
ऐसे में मालाड में लगातार सामने आ रही food safety कार्रवाई ने restaurants और food-storage facilities की hygiene व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Restaurant में खाना खाने से पहले ग्राहक क्या देखें?
बाहर से restaurant कितना भी साफ और अच्छा दिखे, असली food safety kitchen के अंदर की व्यवस्था पर depend करती है।
ग्राहक restaurant में food licence/FSSAI details देख सकते हैं। अगर किसी जगह पर खुले में रखा खाना, गंदे utensils, cockroaches, rats, खराब storage या दूसरी गंभीर hygiene problem दिखाई देती है तो उसकी शिकायत food safety authorities तक की जा सकती है।
Hotel Radha पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यही सवाल सामने ला दिया है कि restaurant की table और kitchen के बीच food safety की असली तस्वीर क्या है।
फिलहाल FDA की कार्रवाई के बाद Hotel Radha का food business licence suspend है और food की manufacturing, storage, sale और distribution पर रोक लागू है। आगे होटल की compliance और FDA की अगली कार्रवाई से ही पता चलेगा कि licence कब बहाल होता है।
मुंबई के विले पार्ले में 210 कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर ₹4.15 करोड़ का लोन घोटाला सामने आया है। पूर्व CEO समेत 4 पर FIR दर्ज हुई।
मुंबई: विले पार्ले में बैंक से जुड़े एक बड़े लोन घोटाले का मामला सामने आया है। पुलिस ने मराठा बैंक के पूर्व CEO समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि 210 कथित ‘भूतिया कर्मचारियों’ के नाम पर कुल ₹4.15 करोड़ से ज्यादा का लोन जारी कराया गया।
पुलिस के मुताबिक, लोन लेने के लिए जिन लोगों के नाम और दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, उन्होंने बाद में इन कंपनियों में काम करने से इनकार किया। मामले में बैंक के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
एफआईआर के मुताबिक, मुंबई पैरामेडिकल कंपनी के 126 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹2.47 करोड़ के लोन जारी किए गए। वहीं पीपल पैरामेडिकल कंपनी के 84 कथित कर्मचारियों के नाम पर करीब ₹1.68 करोड़ का लोन दिया गया।
इस तरह कुल 210 लोगों के नाम पर 210 लोन खातों से ₹4,15,05,000 की रकम निकाले जाने का आरोप है।
लोन के लिए लगाए गए दस्तावेज भी कथित तौर पर फर्जी
पुलिस की जांच में सामने आया कि लोन के लिए इस्तेमाल किए गए कई दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी थे।
इनमें:
आईडी कार्ड
Salary Slips
Salary Certificates
Rubber Stamps
शामिल हैं।
जिन लोगों के नाम पर लोन लिया गया, उन्होंने कथित तौर पर कंपनियों में काम करने से ही इनकार कर दिया।
Merger के बाद Cosmos Bank की शिकायत पर विले पार्ले पुलिस ने FIR दर्ज की।
अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में कथित फर्जी documents, 210 loan accounts, पैसों के transactions और इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को भी देखा जा रहा है।
कांदिवली के Rock Highland टावर पर ₹62 करोड़ के सरकारी बकाये से रोक लगी। 105 खरीदारों और 500+ residents पर क्या असर होगा, जानिए पूरा मामला।
मुंबई: कांदिवली वेस्ट के चारकोप से इस वक्त रियल एस्टेट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। यहां Rock Highland के 39-मंजिला के तौर पर marketed किए जा रहे under-construction residential tower का काम सरकारी जमीन से जुड़े करीब ₹62 करोड़ के revenue dues के विवाद में रोक दिया गया है।
इस फैसले का असर सिर्फ construction site तक सीमित नहीं है। करीब 105 prospective homebuyers के लिए अब possession, construction और उनके लगाए पैसे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, उसी बड़े land parcel पर बनी 11 existing buildings में रहने वाले 500 से ज्यादा residents भी जमीन के lease और ownership status को लेकर चिंता में आ गए हैं।
मामला उस जमीन की lease और उसके बाद हुए development से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 5 एकड़ जमीन 1957 में अखंड शिवर पाटिल को खेती के इस्तेमाल के लिए 999 साल की lease पर दी गई थी। बाद में खेती के अलावा दूसरे इस्तेमाल की अनुमति से जुड़े payments किए गए।
विवाद तब सामने आया जब revenue authorities ने जमीन के actual development और government-owned parcel के area को लेकर सवाल उठाए। आरोप है कि development करीब 7.4 एकड़ के बड़े parcel पर हुआ, जबकि original lease करीब 5 एकड़ की थी।
यानी विवाद का एक बड़ा हिस्सा करीब 2.4 एकड़ अतिरिक्त जमीन के इस्तेमाल से जुड़ता है।
इसी जमीन पर Power of Attorney holder के तौर पर काम कर रहे Ravi Group से जुड़ी development activities के तहत पहले Rock Enclave की 11 buildings बनीं और बाद में Rock Highland tower का construction शुरू हुआ।
Collector की तरफ से developer पर करीब ₹62 करोड़ की demand रखी गई है। इसमें lease से जुड़े पुराने dues, interest और करीब 2.4 एकड़ जमीन के occupation/regularisation से जुड़े charges शामिल बताए जा रहे हैं।
करीब 2.4 एकड़ जमीन के occupation/regularisation से जुड़े charges
अन्य संबंधित revenue charges
इस रकम का exact head-wise breakup सामने आने पर यह साफ होगा कि principal dues और interest में कितना-कितना पैसा शामिल है।
Collector ने क्या आदेश दिया?
Mumbai Suburban Collector Saurabh Katiyar ने निर्देश दिया है कि संबंधित dues clear होने तक नए tower का construction आगे नहीं बढ़ाया जाए।
यानी फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि developer और government के बीच ₹62 करोड़ की demand का dispute कब और कैसे resolve होता है।
यह मामला शिकायतकर्ता Reji Abraham की ओर से government revenue के कथित नुकसान की शिकायत के बाद सामने आया था। मामला कई साल तक government level पर pending रहने के बाद Collector की कार्रवाई तक पहुंचा।
Developer ने Collector की demand और construction रोकने के फैसले को challenge किया है।
Ravi Group से जुड़े Jayesh Shah का कहना है कि करीब ₹62 करोड़ की demand लागू नहीं होती, क्योंकि जमीन के non-agricultural use से जुड़े जरूरी payments पहले ही किए जा चुके हैं।
Developer ने यह भी दावा किया है कि action एक RTI activist की शिकायत और दबाव के बाद लिया गया।
यानी फिलहाल government और developer की तरफ से जमीन के dues को लेकर दो अलग-अलग positions सामने हैं।
Developer ने Collector के action को court में challenge किया है। हालांकि, सिर्फ court में challenge किए जाने का मतलब यह नहीं है कि construction पर लगी रोक अपने आप हट गई है। इस मामले में court का current interim order और आगे की hearing स्थिति सबसे अहम होगी।
Rock Highland का MahaRERA registration number P51800049632 है। RERA record में project का promoter Rock Estates दर्ज है।
RERA-linked project details के मुताबिक project:
Kandivali West के CTS No. 1A/1, Village Kandivali में है
February 2023 में registered हुआ
RERA completion date 30 December 2026 दर्ज है
Project में करीब 199 residential units का record सामने आता है
यहीं एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है।
मीडिया reports में करीब 105 prospective buyers के प्रभावित होने की बात कही जा रही है, जबकि RERA-linked data में project की total inventory इससे काफी ज्यादा है। इसलिए 105 का आंकड़ा किस category के buyers को दर्शाता है—booked flats, affected allottees या prospective purchasers—इसे current RERA records से साफ करना जरूरी है।
39 मंजिल या 38 मंजिल?
Project की अलग-अलग marketing और property listings में floor configuration को लेकर भी फर्क दिखाई देता है।
कुछ marketing material इसे 39-storey project बताता है, जबकि कुछ records और property listings में 38 floors या अलग configuration दिखाई देता है।
इसलिए फिलहाल इसे 39-मंजिला के तौर पर marketed Rock Highland tower के रूप में समझना ज्यादा सुरक्षित है। Final sanctioned configuration संबंधित approved plan और Collector record से स्पष्ट होगी।
यह सवाल हर existing buyer के लिए सबसे important है।
अगर project में लंबे समय तक delay होता है या promoter की contractual/RERA obligations प्रभावित होती हैं, तो buyer के पास applicable RERA provisions के तहत remedies का सवाल उठ सकता है।
लेकिन “हर buyer को तुरंत पूरा पैसा वापस मिलेगा” ऐसा कहना सही नहीं होगा।
Refund, interest या compensation का अधिकार circumstances, agreement और competent authority/court के order पर depend करेगा।
इसलिए buyer को सबसे पहले अपने Agreement for Sale और current MahaRERA project status की जांच करनी चाहिए।
Leasehold जमीन पर flat खरीदने वालों के लिए क्या जरूरी है?
Rock Highland का विवाद सिर्फ construction का नहीं है। इसकी जड़ leasehold land से जुड़ी है।
RERA के तहत leasehold land पर project होने की स्थिति में promoter को lease से जुड़ी जानकारी और compliance maintain करनी होती है। RERA Section 11(4)(c) में lease certificate, lease period और leasehold land से जुड़े dues/charges की स्थिति से संबंधित requirements दी गई हैं।
इसका मतलब buyer के लिए एक बेहद जरूरी सवाल है:
क्या project की lease से जुड़े government dues और required certificates अभी पूरी तरह clear और valid हैं?
यही वह document है जिसे buyer को developer से मांगकर देखना चाहिए।
999 साल की lease का मतलब क्या flat की जमीन आपकी नहीं है?
999-year lease सुनने में ownership जैसा लग सकता है, लेकिन leasehold और freehold एक चीज नहीं हैं।
Leasehold arrangement में जमीन के underlying rights और leaseholder के rights अलग हो सकते हैं।
इसीलिए 1957 की original lease deed, बाद के assignments, development rights और government revenue records इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
Buyer के लिए सिर्फ builder का brochure देखना पर्याप्त नहीं है।
अगर original lease करीब 5 acres की थी और development करीब 7.4 acres के government-owned parcel से जुड़ा है, तो अतिरिक्त 2.4 acres का legal status समझना जरूरी है।
यही वजह है कि revenue authorities की करीब ₹62 करोड़ की demand में land occupation/regularisation से जुड़े charges का भी उल्लेख सामने आया है।
इसलिए मामला सिर्फ यह नहीं है कि:
“बिल्डर पर ₹62 करोड़ बकाया है।”
असली सवाल है:
“जिस जमीन पर development हुआ, उसका पूरा legal और revenue trail क्या है?”
इसके लिए CTS records, Property Card, original lease deed, mutation entries और development documents महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा कि 500+ residents के flats पर कोई सीधा खतरा पैदा हो गया है।
लेकिन अगर government dispute उसी land parcel के underlying lease/title से जुड़ा है, तो residents के लिए अपने documents की स्थिति समझना जरूरी हो जाता है।
खासकर:
Property Card + Lease Deed + Conveyance/Deemed Conveyance + Society records
की जांच महत्वपूर्ण होगी।
क्या resale या redevelopment पर असर पड़ सकता है?
अगर land/lease dispute लंबे समय तक unresolved रहता है तो future property transactions में buyers, banks और legal teams ज्यादा documents मांग सकते हैं।
इससे resale, mortgage या redevelopment जैसे मामलों में additional legal scrutiny की संभावना हो सकती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर existing flat की resale automatically बंद हो जाएगी।
असल असर इस बात पर depend करेगा कि dispute का exact land area और existing societies के legal documents से क्या संबंध निकलता है।
देश के दूसरे शहरों में ऐसे मामले पहले भी buyers को प्रभावित कर चुके हैं
यह सिर्फ मुंबई की समस्या नहीं है।
Greater Noida में जून 2026 में 14 developers के खिलाफ करीब ₹315.5 करोड़ के land dues की recovery के लिए कार्रवाई की गई। इससे करीब 8,856 homebuyers से जुड़े registration और possession issues सामने आए।
यानी एक बात साफ है:
Developer और government authority के बीच land dues का dispute आखिरकार homebuyer तक पहुंच सकता है।
Greater Noida में stalled projects को revive करने के लिए dues restructuring और relief mechanisms भी इस्तेमाल किए गए हैं।
एक अन्य stalled project, Antriksh Valley, में करीब ₹45 करोड़ के land dues और दूसरे liabilities resolve होने के बाद project revival के लिए करीब ₹115 करोड़ तक SWAMIH funding sanction हुई।
मुंबई में भी Nirmal Lifestyle, Mulund जैसे मामले में government premium dues और stalled construction के कारण homebuyers की परेशानी सामने आ चुकी है।
इससे यह भी साफ होता है कि government dues वाला project हमेशा permanently बंद हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। कई मामलों में dues resolution और financing के बाद construction दोबारा शुरू हुआ है।
Maharashtra में leasehold land पर अभी इतनी चर्चा क्यों?
इस पूरे मामले का एक broader Maharashtra context भी है।
2026 में Maharashtra government ने government leasehold land records को लेकर statewide overhaul शुरू किया है। नई व्यवस्था में government को land record में “Occupant” और leaseholder को “Other Rights” category में दर्ज करने की दिशा में बदलाव किया गया है।
इसका मकसद government-owned leasehold land पर ownership को लेकर confusion और गलत claims को कम करना है।
मुंबई में हजारों cooperative housing societies leasehold/collector land पर बनी हैं। इसलिए lease status, property records और redevelopment rights का सवाल सिर्फ Kandivali तक सीमित नहीं है।
Rock Highland मामले में अब तीन चीजें सबसे ज्यादा important हैं:
₹62 करोड़ की demand
क्या developer इसे pay करेगा, challenge करेगा या government के साथ कोई legal resolution निकलेगा?
Court का फैसला
Developer की challenge petition में court क्या interim या final order देता है?
Land records
5-acre original lease, disputed 2.4-acre portion और 7.4-acre development parcel का exact legal connection क्या है?
इन तीनों का जवाब मिलने के बाद ही यह साफ होगा कि 105 reported buyers और 500+ existing residents के लिए यह dispute कितना बड़ा बन सकता है।
फिलहाल इतना जरूर है कि कांदिवली का यह मामला सिर्फ एक under-construction tower रुकने की खबर नहीं है। यह सवाल सीधे उस जमीन के lease rights, government revenue, developer approvals और homebuyers के future से जुड़ गया है।
और जब तक ₹62 करोड़ के dispute और जमीन के legal status पर पूरी clarity नहीं आती, Rock Highland के buyers के लिए सबसे जरूरी बात यही है—अपने documents check करें, MahaRERA status देखें और Collector तथा court proceedings की latest update पर नजर रखें।
Andheri में टिकटलेस यात्री ने Western Railway के TC को धक्का देकर घायल कर दिया। आंख के ऊपर चोट लगी। यात्री को पकड़कर GRP के हवाले किया गया।
मुंबई: Andheri स्टेशन पर मंगलवार शाम ticket checking के दौरान हंगामा हो गया। Western Railway के Ticket Checker (TC) Prakash Dubey को एक ticketless passenger ने कथित तौर पर धक्का दे दिया। धक्का लगने से Dubey जमीन पर गिर गए और उनकी बाईं आंख के ऊपर चोट लग गई, जिससे bleeding शुरू हो गई।
घटना के तुरंत बाद passenger को पकड़ लिया गया और आगे की कार्रवाई के लिए Andheri GRP के हवाले कर दिया गया।
Borivali से शुरू हुआ था पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक, Dubey शाम करीब 6:40 बजे Borivali में Virar-Dadar local के second-class ordinary coach में ticket checking कर रहे थे। इसी दौरान एक passenger बिना ticket यात्रा करता मिला।
Dubey ने passenger से fine भरने को कहा। आरोप है कि passenger ने ticket arrange करने की बात कही। जब local Andheri स्टेशन पहुंची, तो Dubey ने उसे ट्रेन से उतरने को कहा।
आरोप है कि ट्रेन से नीचे उतरते ही passenger ने Dubey को धक्का दे दिया। अचानक हुए इस हमले में TC गिर पड़े और उनकी आंख के ऊपर चोट लग गई।
घायल होने के बावजूद passenger को पकड़ा
चोट लगने के बावजूद Dubey ने senior railway staffer Ganesh Rokde की मदद से passenger को पकड़ लिया। उसे पहले TC office ले जाया गया और बाद में Andheri GRP को सौंप दिया गया।
वहीं, Dubey को master office को जानकारी देने के बाद railway dispensary ले जाया गया, जहां उनकी चोट का treatment किया गया।
बिना टिकट यात्रा पर अब ₹500 minimum excess charge
इस घटना के बीच commuters के लिए यह जानना भी जरूरी है कि 2026 में railway के ticketless-travel rules में minimum excess charge ₹500 किया गया है। इसके अलावा applicable fare या fare difference भी देना पड़ सकता है।
यानी ticket को लेकर कोई dispute हो तो passenger को railway की तय प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहिए। Ticket checking के दौरान physical confrontation करना अलग कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
Passenger को Andheri GRP के हवाले किए जाने के बाद अब मामले में FIR, आरोपी पर लगने वाली धाराएं और आगे की legal action महत्वपूर्ण होगी।
Western Railway ने ticket checking के दौरान होने वाले disputes को record करने के लिए body-camera pilot भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य passenger और railway staff के बीच विवाद की स्थिति में recorded evidence उपलब्ध कराना है।
Mumbai GMLR tunnel: SGNP के नीचे TBM Tulsi ने 5.3 किमी tunnel की खुदाई शुरू की। जानिए Goregaon-Mulund route, 20 मिनट सफर, safety और 2029 deadline की जानकारी।
मुंबई: Goregaon और Mulund के बीच सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। Goregaon-Mulund Link Road (GMLR) project के तहत Sanjay Gandhi National Park (SGNP) के नीचे twin tunnel की actual खुदाई शुरू हो गई है। BMC ने पहली Tunnel Boring Machine यानी TBM ‘Tulsi’ को excavation के लिए commission कर दिया है। यह tunnel Goregaon East की Dadasaheb Phalke Chitranagari यानी Film City को Mulund West के Amar Nagar से जोड़ेगी।
यह सिर्फ एक और road project का construction update नहीं है। GMLR पूरा होने के बाद Mumbai के western और eastern suburbs के बीच direct east-west connectivity तैयार होगी। अभी Goregaon से Mulund जाने में traffic और route के हिसाब से काफी समय लगता है, जबकि project के पूरा होने के बाद travel time करीब 90 मिनट से घटकर 20 मिनट तक आने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि यह estimated corridor travel time है, यानी हर हालत में door-to-door 20 मिनट की guarantee नहीं है।
GMLR की कुल length करीब 12.2 किलोमीटर है और project को चार phases में execute किया जा रहा है। SGNP के नीचे बनने वाला tunnel हिस्सा Phase 3(B) का सबसे अहम component है। यहां दो तीन-लेन वाली tunnels बनाई जा रही हैं, जो Film City side से शुरू होकर Mulund West के Amar Nagar तक जाएंगी।
BMC की latest जानकारी के मुताबिक tunnel package की total length करीब 6.6 किलोमीटर है। इसमें twin tunnels के साथ 17 cross passages, 720 मीटर के twin-box tunnel और Goregaon तथा Mulund की तरफ करीब 600 मीटर approach roads भी शामिल हैं। यानी सिर्फ underground boring पूरा होना ही पूरा काम नहीं है; इसके बाद approach roads, internal systems और बाकी infrastructure को भी ready करना होगा।
जिस machine ने अब खुदाई शुरू की है उसका नाम Tulsi रखा गया है। यह अत्याधुनिक Earth Pressure Balance (EPB) TBM technology पर काम करेगी। इसका इस्तेमाल खास तौर पर इस तरह किया जा रहा है कि SGNP के sensitive forest area में surface-level construction का impact कम से कम रहे।
पहली TBM की assembly पूरी हो चुकी थी और उसका Site Acceptance Test भी successfully complete किया गया। अब यही machine underground excavation का actual काम शुरू कर चुकी है। दूसरी TBM की assembly अभी चल रही है और BMC के मुताबिक उससे October 2026 में excavation शुरू करने का target है।
जंगल के नीचे tunnel बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
GMLR का सबसे sensitive हिस्सा SGNP के नीचे से गुजरता है। जमीन के ऊपर बड़ी road बनाने से forest और biodiversity पर ज्यादा disturbance हो सकता था। इसलिए tunnel boring technology के जरिए road को underground ले जाने का रास्ता चुना गया है। पुराने project documents में भी SGNP के अंदर किसी shaft की जरूरत न पड़े, इसके लिए TBM-based tunnelling का प्रस्ताव रखा गया था।
SGNP में Tulsi और Vihar lakes भी हैं, जो Mumbai की water supply का हिस्सा हैं। इसलिए इस project में tunnel construction के दौरान environment और water-related concerns को लेकर safeguards खास महत्व रखते हैं।
यही वजह है कि इस project की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ चट्टान काटकर tunnel बनाना नहीं, बल्कि sensitive forest और आसपास के ecological system को ध्यान में रखते हुए construction पूरा करना भी है।
इतनी लंबी underground road tunnel में सिर्फ road बना देना काफी नहीं है। किसी accident, fire या emergency की situation में लोगों को safe तरीके से बाहर निकालना भी जरूरी है।
GMLR tunnel में mechanical ventilation, mist-based firefighting system, CCTV surveillance, SCADA control system, LED lighting और modern signage लगाए जाएंगे। दोनों tunnels के बीच 17 cross passages भी होंगे। इनका मकसद emergency situation में एक tunnel से दूसरी tunnel तक access और evacuation की सुविधा देना है।
Tunnel में utility ducts भी रखे जाएंगे और हर tunnel में 1,800 mm diameter की water pipeline के लिए provision किया गया है। यानी underground corridor का इस्तेमाल सिर्फ traffic movement तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि city utilities के लिए भी space रखा गया है।
Goregaon से Mulund का सफर कितना बदल सकता है?
GMLR का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है जिन्हें रोज western suburbs से eastern suburbs की तरफ जाना पड़ता है।
अभी Goregaon, Jogeshwari, Powai, Mulund और आसपास के routes पर traffic के कारण east-west movement काफी समय ले सकता है। GMLR के जरिए एक direct high-capacity corridor मिलने से existing roads पर traffic pressure कम करने का target है।
Project operational होने के बाद Goregaon-Mulund journey करीब 20 मिनट तक आने की उम्मीद है। इससे travel time के साथ fuel consumption में भी कमी आ सकती है। लेकिन actual journey time इस बात पर भी depend करेगा कि tunnel के entry-exit points, approach roads और आगे के connecting roads पर उस समय कितना traffic है।
Mumbai के लिए इसका फायदा सिर्फ Goregaon और Mulund तक नहीं
GMLR का असर सिर्फ इन दो इलाकों तक सीमित नहीं रहने वाला। यह western suburbs को eastern side के Mulund, Thane और आगे Navi Mumbai की तरफ जाने वाले road network से बेहतर तरीके से connect करने में मदद कर सकता है।
इससे उन commuters को भी फायदा मिलने की उम्मीद है जिन्हें रोज east-west direction में travel करना पड़ता है। Emergency services, logistics और commercial movement के लिए भी faster connectivity महत्वपूर्ण हो सकती है।
Project से प्रभावित लोगों का क्या होगा?
GMLR की construction के कारण प्रभावित होने वाले करीब 906 project-affected persons के rehabilitation का काम भी project का हिस्सा है। BMC के मुताबिक Kanjurmarg में छह ground-plus-23-storey buildings में इनका rehabilitation किया जा रहा है।
इसका मतलब GMLR की कहानी सिर्फ road और tunnel की नहीं है। Project के साथ उन लोगों का rehabilitation भी जुड़ा है जिनकी property या रहने की जगह infrastructure work से प्रभावित हुई है।
पहली TBM Tulsi ने excavation शुरू कर दिया है। दूसरी TBM की assembly चल रही है और BMC ने October 2026 में उसकी excavation शुरू करने का target रखा है।
पूरे GMLR project को February 2029 तक complete करने का target रखा गया है। BMC के मुताबिक project में अब तक करीब 21% physical progress हो चुकी है।
यानी अभी Mumbai commuters को 20 मिनट के सफर का फायदा तुरंत नहीं मिलने वाला। पहले tunnels की excavation और lining, cross passages, approach roads, ventilation, firefighting, CCTV, lighting और बाकी systems का काम पूरा होगा। उसके बाद testing और commissioning के बाद यह corridor traffic के लिए open किया जाएगा।
GMLR की असली परीक्षा अब शुरू हुई है
Goregaon-Mulund Link Road लंबे समय से Mumbai के बड़े connectivity projects में शामिल है, लेकिन अब इसका सबसे challenging underground phase जमीन पर दिखाई देने लगा है।
TBM Tulsi के शुरू होने का मतलब है कि project अब planning और preparation से निकलकर actual tunnelling phase में पहुंच गया है। आगे दूसरी TBM का काम शुरू होना, दोनों tunnels की excavation पूरी होना और बाकी road infrastructure का समय पर तैयार होना सबसे अहम रहेगा।
अगर BMC का February 2029 वाला target पूरा होता है, तो Mumbai को western और eastern suburbs के बीच एक नया direct high-capacity route मिलेगा। और अगर travel-time estimate के मुताबिक सफर करीब 20 मिनट तक आता है, तो Goregaon-Mulund के बीच रोज travel करने वाले हजारों लोगों के लिए यह सिर्फ एक नई road नहीं, बल्कि daily commute में बड़ा बदलाव हो सकता है।
कांदिवली वेस्ट में तड़के कमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। दमकल ने धुएं से भरी इमारत से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, कोई घायल नहीं हुआ।
मुंबई: कांदिवली वेस्ट में सोमवार तड़के एक कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से हड़कंप मच गया। कांदिवली रेल्वे स्टेशन फाटक रोड पर अभिराही होटल के पास स्थित चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में करीब सुबह 4:14 बजे आग लगने की सूचना मुंबई फायर ब्रिगेड को मिली।
आग के बाद पूरी बिल्डिंग में धुआं फैल गया था। ऐसे में दूसरी मंजिल पर मौजूद लॉजिंग हाउस में रह रहे 11 लोगों को दमकलकर्मियों ने सीढ़ियों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल वायरिंग और इंस्टॉलेशन, लकड़ी के फर्नीचर, तिरपाल, बांस के साथ प्लास्टिक और एल्युमिनियम की सजावटी सामग्री तक सीमित रही। चौथी मंजिल पर मौजूद तिरुपति बैंक्वेट के करीब 50 वर्ग फीट हिस्से में भी आग का असर हुआ, जहां फर्नीचर, कपड़े और फॉल्स सीलिंग को नुकसान पहुंचा।
फायर ब्रिगेड ने बचाई जान
घटना की जानकारी मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के साथ-साथ बिल्डिंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। करीब 6:07 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। शुरुआती तौर पर इस घटना को Level-1 Fire के तौर पर बताया गया है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि आग के दौरान बिल्डिंग में मौजूद 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी जनहानि की खबर नहीं है। हालांकि, बिल्डिंग के कुछ हिस्सों और अंदर रखे सामान को नुकसान पहुंचा है।
आग आखिर किस वजह से लगी? इसका अभी तक कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही आग लगने की सही वजह और नुकसान की पूरी जानकारी सामने आ सकेगी।
मुंबई के दहिसर पश्चिम में घर के अंदर हाइड्रोपोनिक गांजा उगाने का खुलासा। MHB पुलिस ने बब्बू कामत को गिरफ्तार किया, 2 आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
मुंबई: मुंबई में गांजे की खेती का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया है। दहिसर पश्चिम के गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4 यानी (आएसी कॉलोनी) के एक घर में कथित तौर पर हाइड्रोपोनिक तरीके से गांजा उगाया जा रहा था। MHB पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि सूत्रों के मुताबिक दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान बब्बू सोनू कामत के रूप में हुई है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक राहुल और अभिषेक कन्नौजिया इस मामले में फरार बताए जा रहे हैं। दोनों की भूमिका और इस पूरे मामले में उनकी exact involvement की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही होगी।
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह है कि पुलिस को सिर्फ तैयार गांजा नहीं मिला, बल्कि घर के अंदर पौधे उगाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा setup भी बरामद हुआ है।
दहिसर के घर में चल रहा था कथित गांजा cultivation setup
मिली जानकारी के मुताबिक MHB पुलिस ने गणपत पाटील नगर, गली नंबर 4, दहिसर पश्चिम स्थित एक घर में कार्रवाई की।
पुलिस से उपलब्ध विवरण के मुताबिक यहां हाइड्रोपोनिक पद्धति से गांजा उगाने का कथित setup तैयार किया गया था। मौके से सूखा गांजा, जीवित पौधे और cultivation में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के equipment और chemicals बरामद किए गए।
बरामद पौधे और सूखे गंजे कि तस्वीर
यानी मामला सिर्फ गांजा रखने तक सीमित था या इसके पीछे बाकायदा local production और supply का network काम कर रहा था, अब पुलिस की जांच का बड़ा focus यही है।
54 ग्राम गांजा और 179 ग्राम जीवित पौधे बरामद
एनएचबी पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे ने बताया कि कार्रवाई में करीब 54 ग्राम सूखा गांजा बरामद किया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब ₹1.62 लाख आंकी गई है।
इसके अलावा करीब 179 ग्राम जीवित गांजे के पौधे भी मिले हैं। इनकी अनुमानित कीमत करीब ₹2.68 लाख आंकी जा रही है।
यानी सूखे गांजे और जीवित पौधों की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹4.30 लाख बताई गई है।
लेकिन पुलिस के लिए इससे भी ज्यादा important बरामदगी उस cultivation setup की है, जिसे कथित तौर पर इन पौधों को grow करने के लिए तैयार किया गया था।
घर में मिला AC, LED, Pump से लेकर pH Meter तक
पुलिस के मुताबिक मौके से cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाले कई equipment और chemicals बरामद किए गए हैं।
इनमें पानी की टंकी, water pump, air filter, LED lights, AC, fans, pH meter, TDS meter, temperature meter, air circulation से जुड़े सामान, grow tent और अलग-अलग chemicals शामिल बताए गए हैं।
इन equipment और chemicals की पुलिस द्वारा बताई गई अनुमानित कीमत करीब ₹1.76 लाख है।
इस तरह मुंबई पुलिस के मुताबिक गांजा, पौधे और cultivation equipment व chemicals सहित पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत करीब ₹6.07 लाख है।
यह valuation पुलिस द्वारा बताई गई estimated value है।
आखिर घर में गांजा उगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
अगर पुलिस की शुरुआती जांच में यह साबित होता है कि बरामद equipment का इस्तेमाल cannabis cultivation के लिए किया जा रहा था, तो investigation सिर्फ बब्बू कामत की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी।
गिरफ्तार आरोपी के साथ एनएचबी पुलिस की टीम
पुलिस को यह पता लगाना होगा कि बीज या पौधे कहां से आए, equipment किसने खरीदा, यह setup कब से चल रहा था और तैयार गांजा किसे supply किया जाना था।
इसके अलावा आरोपी के mobile phone, WhatsApp या दूसरे communication channels और financial transactions की जांच से भी आगे की कड़ी मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में राहुल और अभिषेक कन्नौजिया नाम के दो अन्य लोग फरार बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन दोनों के खिलाफ आरोपों और उनकी exact भूमिका को अभी पुलिस की जांच के आधार पर ही समझना होगा। इसलिए फिलहाल उन्हें “फरार बताए जा रहे आरोपी” के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अगर पुलिस की जांच में दोनों की भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना अहम होगा कि cultivation setup तैयार करने, पौधे लाने, गांजा बेचने या customers तक पहुंचाने में उनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस टीम की निगरानी में हुई कार्रवाई
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्रवाई को वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।
इसमें पुलिस उपायुक्त संदीप पुंजे, गोरेगांव विभाग के ACP सुधाकर शिंदे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विवेक सोनावणे, पुलिस निरीक्षक मिलिंद नागपुरे और पुलिस निरीक्षक दिलीप इंगळे के मार्गदर्शन का उल्लेख है।
जांच टीम में पुलिस उपनिरीक्षक संदीप वत्रे समेत पुलिसकर्मियों के नाम भी कार्रवाई से जुड़े बताए गए हैं।
मामले की जांच फिलहाल MHB पुलिस कर रही है।
मुंबई में Hydroponic Weed का बढ़ता नेटवर्क?
दहिसर का यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुंबई में hydroponic weed से जुड़े बड़े smuggling cases भी सामने आते रहे हैं।
मार्च 2026 में Mumbai Customs के Air Intelligence Unit ने Bangkok से आने वाले चार passengers के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 64.394 kg suspected hydroponic weed जब्त किया था। इसकी estimated illicit market value करीब ₹64.394 करोड़ बताई गई थी। खबर के मुताबिक उस समय तक वित्त वर्ष 2025-26 में CSMIA Airport Commissionerate ने 244 मामलों में 1,330 kg से ज्यादा hydroponic weed जब्त की थी और 286 लोगों को गिरफ्तार किया था।
जून 2026 में भी Mumbai Airport पर Bangkok से आए passenger से करीब 11.824 kg hydroponic weed बरामद होने का मामला सामने आया था। Customs के मुताबिक इसकी estimated illicit market value करीब ₹11.82 करोड़ थी।
इससे साफ है कि मुंबई में hydroponic cannabis को लेकर enforcement agencies पहले से alert हैं।
यह सवाल इस कार्रवाई के बाद काफी लोगों के मन में आएगा।
NDPS Act के तहत cannabis plant की cultivation प्रतिबंधित है। इसलिए सिर्फ यह कहने से कि पौधे घर के अंदर, गमले में या किसी controlled setup में उगाए जा रहे थे, activity legal नहीं हो जाती।
हालांकि किसी specific case में कौन-सी धाराएं लागू होंगी और prosecution को क्या साबित करना होगा, यह FIR, seizure, forensic evidence और investigation पर depend करता है।
इसलिए दहिसर मामले में भी आगे की legal position MHB पुलिस की FIR और court proceedings से ज्यादा साफ होगी।
मामला सिर्फ गांजे की खेती का है या पीछे कोई बड़ा network?
अगर घर में सिर्फ कुछ पौधे मिलते तो मामला अलग होता। लेकिन यहां पुलिस के मुताबिक जीवित पौधे, सूखा गांजा और cultivation के लिए इस्तेमाल होने वाला equipment व chemicals भी मिले हैं।
अब पुलिस के सामने तीन बड़ी कड़ियां हैं—
पौधे कहां से आए?
गांजा किसे जाना था?
पैसा किसके जरिए आ रहा था और किस तक पहुंच रहा था?
अगर इन सवालों के जवाब में कोई supplier या buyer सामने आता है, तो दहिसर की यह कार्रवाई एक बड़े drug network की तरफ भी इशारा कर सकती है।
हालांकि अभी ऐसा कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
Drug cultivation और supply का असर सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहता।
सबसे बड़ा concern यह है कि drug networks में युवाओं को छोटे-level sellers, couriers या carriers के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। Mumbai Airport के पुराने और हालिया मामलों में भी agencies ने international routes और larger syndicates की जांच की है। मार्च 2026 की एक बड़ी कार्रवाई में Customs ने कहा था कि गिरफ्तार किए गए passengers को Bangkok से cannabis लेकर Mumbai में associates तक पहुंचाना था।
ऐसे में दहिसर जैसे residential area में कथित cultivation setup मिलना local community के लिए भी चिंता की बात है।
अब पुलिस को यह पता लगाना होगा कि यह isolated operation था या इसके पीछे customers, suppliers और distributors की कोई chain भी थी।
बब्बू कामत की गिरफ्तारी के बाद investigation का अगला step सिर्फ पूछताछ तक सीमित नहीं होगा।
पुलिस को कथित तौर पर बीज और पौधों का source, cultivation equipment की खरीद, mobile communication, financial transactions, potential buyers और suppliers तक पहुंचने की कोशिश करनी होगी।
साथ ही सूत्रों के मुताबिक फरार बताए जा रहे राहुल और अभिषेक कन्नौजिया की भूमिका और whereabouts की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बब्बू सोनू कामत गिरफ्तार है, राहुल और अभिषेक कन्नौजिया फरार बताए जा रहे हैं और MHB पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कार्रवाई में 54 ग्राम सूखा गांजा, करीब 179 ग्राम जीवित पौधे और cultivation equipment व chemicals समेत करीब ₹6.07 लाख का माल जब्त किया गया है।
मुंबई के चेंबूर में FDA ने Expired Frooti, Appy Fizz समेत beverages का stock जब्त किया। Warehouse और 2 vehicles seal, आगे की sale पर रोक।
मुंबई: चेंबूर में FDA की रातभर चली कार्रवाई में expired Frooti, Appy Fizz और दूसरे beverages का stock पकड़ा गया है। वाशी नाका के प्रयाग नगर स्थित warehouse में हुई इस कार्रवाई के बाद गोदाम और दो vehicles को seal कर दिया गया।
मुंबई में cold drink या packaged beverage खरीदने वालों के लिए यह खबर सीधे काम की है। वजह है कि FDA की जांच में expired beverages का stock सामने आया है और अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गोदाम में expired माल क्यों रखा था, बल्कि यह भी है कि यह stock आगे कहां जाने वाला था।
चेंबूर में रातभर चला FDA का Raid
महाराष्ट्र Food and Drug Administration यानी FDA ने चेंबूर के वाशी नाका, प्रयाग नगर, L.U. गडकरी मार्ग स्थित एक warehouse में कार्रवाई की।
यह कार्रवाई 13 अगस्त की शाम करीब 6 बजे से 14 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे तक चली। यानी FDA की टीम ने रातभर warehouse की जांच की। कार्रवाई में 8 अधिकारी शामिल थे।
जांच के दौरान अधिकारियों को expired food और beverages का stock मिला।
Frooti और Appy Fizz समेत Expired Drinks मिले
जांच में सामने आए stock में Frooti, Appy Fizz, Candy Juice और दूसरे beverages शामिल बताए गए हैं।
खबर के मुताबिक Chembur warehouse से करीब 1,000 expired flavoured sparkling drink bottles मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस कार्रवाई से जुड़ी earlier report में जब्त stock की कुल कीमत करीब ₹1 लाख बताई गई थी।
यानी मामला सिर्फ एक-दो expired bottles का नहीं था, बल्कि warehouse level पर रखे गए stock का था।
FDA ने Warehouse के साथ 2 Vehicles भी किए Seal
इस कार्रवाई का एक अहम हिस्सा यह है कि FDA ने सिर्फ expired stock जब्त नहीं किया।
Warehouse को seal किया गया और दो vehicles को भी seal कर दिया गया।
चेंबूर की कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब Mumbai और Maharashtra में FDA food-safety violations पर लगातार action ले रहा है।
ताजा statewide inspections में expired food, खराब storage और hygiene violations को लेकर कई establishments पर कार्रवाई की गई है। ताजा जानकारी के मुताबिक Mumbai FDA ने inspections के बाद 10 food business licences suspend किए हैं और Chembur warehouse से expired flavoured sparkling drinks भी जब्त किए गए।
इससे साफ है कि FDA का focus सिर्फ restaurants तक सीमित नहीं है। Warehouse और supply chain level पर भी food products की जांच की जा रही है।
क्या Frooti या Appy Fizz खरीदना बंद कर दें?
नहीं।
इस कार्रवाई को देखकर किसी भी पूरे brand के सभी products को unsafe मानना सही नहीं होगा।
यह कार्रवाई एक specific warehouse में मिले expired stock को लेकर है। इसका मतलब यह नहीं है कि market में बिक रहे हर Frooti या Appy Fizz product में कोई समस्या है।
लेकिन इस घटना के बाद एक काम जरूर करना चाहिए—
कोई भी packaged drink खरीदने से पहले उसकी date जरूर check करें।
Cold Drink खरीदते समय ये 3 चीजें जरूर देखें
सबसे पहले bottle या packet पर Expiry/Use By या Best Before date देखें।
दूसरा, seal और packaging check करें।
और तीसरा, अगर bottle या packet में leakage, damage या असामान्य swelling दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचें।
FSSAI के food-labelling requirements में packaged food पर जरूरी product और date-related information देने का प्रावधान है। इसलिए label पढ़ना consumer के लिए सबसे आसान safety check है।
Expiry Date और Best Before में फर्क समझना भी जरूरी
कई लोग Expiry Date और Best Before को एक ही समझते हैं, जबकि दोनों का मतलब अलग हो सकता है।
FSSAI के अनुसार Use By/Expiry date food की safety से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है, जबकि Best Before मुख्य रूप से उस अवधि को बताता है जिसमें product की quality अपने best level पर रहने की उम्मीद होती है।
इसलिए packaged food या drink खरीदते समय सिर्फ तारीख देखकर नहीं, बल्कि label पर तारीख किस रूप में दी गई है, यह भी देखना चाहिए।
चेंबूर FDA Raid से क्या साफ हुआ?
चेंबूर की इस कार्रवाई ने एक important सवाल सामने रखा है—expired food और beverages की supply chain पर निगरानी कितनी जरूरी है।
एक warehouse में stock पकड़े जाने के बाद अब यह जानना अहम होगा कि यह माल वहां कब से था, इसकी आगे की destination क्या थी और इस मामले में FDA की अगली कार्रवाई क्या होती है।
फिलहाल इतना साफ है कि चेंबूर के वाशी नाका में FDA ने expired beverage stock पर action लिया है, warehouse और दो vehicles को seal किया है और आगे की sale तथा transportation रोक दी गई है।
मुंबई में packaged drinks खरीदने वाले consumers के लिए इस पूरे मामले की सबसे जरूरी सीख यही है—
Brand देखकर नहीं, bottle की date और condition देखकर खरीदें।
Mumbai के कांदिवली में Amul-Gokul के नाम पर दूध में मिलावट का मामला सामने आया है। पुलिस ने 74 लीटर मिलावटी दूध और पाउच जब्त कर 48 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला और इसका Mumbai connection.
Mumbai Breaking News: अगर आप रोज सुबह packet वाला दूध खरीदते हैं और सिर्फ brand देखकर उसे safe मान लेते हैं, तो Kandivali से सामने आई यह खबर आपके लिए important है।
मुंबई के Kandivali East में Samta Nagar Police ने दूध में कथित मिलावट करने के आरोप में एक 48 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया है। Police के मुताबिक आरोपी branded milk में impure water मिलाकर उसे आगे बेचने की तैयारी कर रहा था। Raid के दौरान करीब 74 litres adulterated milk, Amul और Gokul के नाम वाले empty milk pouches और मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई।
Police के मुताबिक आरोपी को मौके पर ही पकड़ा गया। मामला इसलिए ज्यादा serious है क्योंकि यहां सिर्फ दूध में पानी मिलाने की बात नहीं है। Amul और Gokul के नाम वाले pouches मिलने से अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या branded packaging का इस्तेमाल करके मिलावटी दूध customers तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी?
हालांकि, अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Amul या Gokul की official supply chain का दूध मिलावटी पाया गया है। उपलब्ध reports के मुताबिक आरोपी के पास इन brands के नाम वाले pouches मिले हैं। यह जांच का विषय है कि ये pouches genuine थे या fake।
Kandivali में raid के दौरान क्या मिला?
Police के मुताबिक Samta Nagar Police की Detection Squad को information मिली थी कि Kandivali East में एक जगह पर branded milk में मिलावट की जा रही है।
इसके बाद 12 August 2026 की सुबह करीब 5:50 बजे police team ने raid की। Police का दावा है कि आरोपी को milk में impure water मिलाते हुए पकड़ा गया।
Raid में करीब 74 litres adulterated milk मिला। इसके अलावा Amul और Gokul के नाम वाले empty pouches और कथित तौर पर milk में मिलावट करने के लिए इस्तेमाल होने वाला material भी जब्त किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक milk को 1-litre और 500-ml packets में तैयार किया जा रहा था और आरोपी की पहचान Iranna Lingayya Gopanabonei, 48 के तौर पर हुई है।
74 लीटर दूध पकड़ा गया, लेकिन असली सवाल इससे बड़ा है
Police ने raid के दौरान 74 litres milk जब्त किया है। लेकिन यह सिर्फ वही quantity है जो कार्रवाई के समय मिली।
अब सबसे important सवाल यह है कि:
क्या इससे पहले भी इसी तरह का milk market में भेजा गया था?
अगर हां, तो कितना?
Police investigation में अब यह पता लगाना important होगा कि आरोपी यह काम कितने time से कर रहा था, रोज कितनी quantity तैयार करता था और यह milk किन लोगों या दुकानों तक पहुंचने वाला था।
यह भी पता लगाना होगा कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई supplier, distributor या retailer भी जुड़ा हुआ था।
Amul-Gokul का नाम क्यों आया और इसका क्या मतलब है?
यह बात consumers के लिए समझना बहुत जरूरी है।
“Amul या Gokul का original milk adulterated था” और “किसी ने Amul-Gokul के नाम वाले pouches का इस्तेमाल करके adulterated milk तैयार किया”—ये दोनों अलग बातें हैं।
Available reports में आरोपी के पास Amul और Gokul के नाम वाले pouches मिलने की बात है।
इसलिए investigation का एक बड़ा हिस्सा यह होना चाहिए कि ये pouches original supply chain के थे या counterfeit।
जब तक इसकी official confirmation नहीं होती, तब तक consumers को यह मान लेना सही नहीं होगा कि Amul या Gokul का पूरा branded milk unsafe है।
Mumbai में पहले भी सामने आ चुका है Fake Milk का मामला
Kandivali की यह घटना Mumbai में सामने आए recent milk-related cases से अलग नहीं देखी जा सकती।
कुछ समय पहले Mumbai Crime Branch ने Dahisar और Vasai area में एक alleged milk-adulteration network पर action लिया था।
उस case में police ने counterfeit Amul और Gokul milk pouches तैयार करने वाली alleged unit तक पहुंचने की बात कही थी। चार लोगों की गिरफ्तारी की report भी सामने आई थी। इसलिए Mumbai में अब सवाल सिर्फ milk की quality का नहीं है।
Fake packaging और branded names के misuse का angle भी सामने आ रहा है।
लेकिन Kandivali के आरोपी को उस पुराने case से जोड़ना अभी सही नहीं होगा। दोनों cases के बीच कोई direct link police investigation से confirm होना बाकी है।
Maharashtra में Synthetic Milk पर भी बड़ी कार्रवाई
Kandivali का मामला ऐसे time पर सामने आया है जब Maharashtra में synthetic milk और food adulteration को लेकर authorities पहले से action mode में हैं।
July में Maharashtra FDA ने Thane, Ahilyanagar, Solapur, Jalna और Pune में simultaneous raids की थीं। इन raids में alleged synthetic milk network के खिलाफ action लिया गया और कई लोगों की गिरफ्तारी की गई। Officials ने supply chain के अलग-अलग हिस्सों की जांच की बात कही थी।
Maharashtra में food-safety authorities अब सिर्फ manufacturing point तक सीमित रहने के बजाय milk collection से लेकर transport, distribution और retail तक पूरी chain पर ज्यादा focus करने की कोशिश कर रही हैं।
यही वजह है कि Kandivali case में भी supply chain की जांच आगे की सबसे important कड़ी हो सकती है।
Dharashiv से Mathura तक, Milk Adulteration का बड़ा सवाल
Maharashtra के Dharashiv district में भी synthetic milk को लेकर बड़ा मामला सामने आ चुका है। Reports में officials के हवाले से 2.3 crore litres तक कथित adulterated/synthetic milk से जुड़े अनुमान की बात कही गई थी।
वहीं Mathura में food-safety officials की कार्रवाई में करीब 1,500 kg alleged fake paneer और 3,000 litres synthetic milk मिलने की report सामने आई है।
दोनों cases Kandivali case से अलग हैं, लेकिन consumer concern एक ही है:
जो milk और dairy products हम रोज खरीदते हैं, उनकी quality और authenticity कैसे ensure होगी?
क्या मिलावटी दूध पीना dangerous हो सकता है?
इसका जवाब इस बात पर depend करता है कि milk में क्या मिलाया गया है।
Kandivali case में police ने impure water मिलाने का आरोप लगाया है। अगर पानी contaminated हो, तो उसमें harmful bacteria या दूसरे contaminants होने का risk हो सकता है।
लेकिन seized milk में कौन-सा exact adulterant था और उससे health पर कितना असर हो सकता है, यह laboratory testing के बाद ही confirm होगा।
इसलिए फिलहाल “जहरीला दूध”, “cancer वाला दूध” या किसी specific disease का दावा करना सही नहीं होगा।
घर पर दूध में मिलावट कैसे check करें?
FSSAI के DART यानी Detect Adulteration with Rapid Test programme में milk और दूसरे food products में common adulterants की basic screening के तरीके बताए गए हैं।
Kandivali case में आगे की investigation से consumers के लिए कुछ सवालों के जवाब सबसे ज्यादा important होंगे:
क्या 74 litres seized milk की laboratory testing हुई?
उसमें exact adulterant क्या मिला?
आरोपी यह काम कितने समय से कर रहा था?
क्या इससे पहले भी adulterated milk market में भेजा गया?
यह milk किन shops या customers तक पहुंचने वाला था?
Amul-Gokul के pouches original थे या counterfeit?
क्या कोई supplier, distributor या retailer भी इस मामले से जुड़ा है?
क्या Mumbai में ऐसे दूसरे locations पर भी action होगा?
इन सवालों के जवाब मिलने पर ही पता चलेगा कि यह सिर्फ एक local incident था या इसके पीछे कोई बड़ा network था।
Kandivali की raid ने Mumbai के Milk Supply Chain पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया
Kandivali East में Samta Nagar Police ने 74 litres कथित adulterated milk जब्त कर 48 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया है। Police के मुताबिक branded milk में impure water मिलाया जा रहा था और मौके से Amul-Gokul के नाम वाले pouches भी मिले।
इन सवालों के जवाब police investigation और laboratory reports के बाद ही साफ होंगे।
फिलहाल consumers के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी suspicious milk packet को blindly consume न करें, packaging और batch details check करें और शक होने पर official food-safety authorities को complaint करें।
आपके दिए हुए Social Distribution & Traffic Optimization framework के अनुसार, इस खबर के लिए captions ऐसे रखे जाएंगे—तीनों platforms पर अलग strategy के साथ।
मालाड में आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण के साथ चिंचोली बंदर खेल मैदान के विकास की मांग उठी। RPI (आ) ने मनपा पी-उत्तर के सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।
मुंबई: मालाड (पश्चिम) में आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण सहित चिंचोली बंदर रोड स्थित खेल मैदान के संरक्षण और विकास की मांग को लेकर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले गुट) के पदाधिकारियों ने मनपा पी-उत्तर विभाग के सहायक आयुक्त कुंदन वलवी से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने इलाके की नागरिक समस्याओं पर चर्चा करते हुए सहायक आयुक्त को अपनी मांग पत्र सौंपा।
बैठक में आनंद रोड और साईनाथ रोड के विस्तारीकरण का लंबे समय से लंबित मामला प्रमुखता से उठाया गया। RPI (आ) के पदाधिकारियों ने मांग की कि इन दोनों सड़कों के चौड़ीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि इलाके के नागरिकों को इसका फायदा मिल सके।
इसके अलावा चिंचोली बंदर रोड स्थित खेल मैदान के संरक्षण और विकास का मुद्दा भी उठाया गया। शिष्टमंडल ने कहा कि खेल मैदान के साथ-साथ इलाके में पड़ी अन्य सरकारी खाली जमीन का भी सही तरीके से इस्तेमाल होना चाहिए। इसके लिए मनपा प्रशासन को तत्काल जरूरी कदम उठाने की मांग की गई।
पहले भी हो चुका है पत्राचार
RPI (आ) के उत्तर मुंबई जिला सचिव विनोद घोलप की ओर से इस मामले को लेकर पहले भी मनपा प्रशासन के साथ पत्राचार किया गया था। इतना ही नहीं, समाचार पत्रों के माध्यम से भी इस मुद्दे को सामने लाया गया था। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर शिष्टमंडल ने एक बार फिर मनपा प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया।
शिष्टमंडल ने सहायक आयुक्त कुंदन वलवी से कहा कि सड़क चौड़ीकरण और खेल मैदान से जुड़े मामलों को सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीन पर भी जल्द काम दिखाई देना चाहिए।
सहायक आयुक्त ने दिया कार्रवाई का भरोसा
मांगों पर चर्चा के बाद सहायक आयुक्त कुंदन वलवी ने सकारात्मक विचार करने और आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया। खेल मैदान के मामले में संबंधित विभागों के माध्यम से उचित कार्रवाई करने की बात भी कही गई।
अब स्थानीय नागरिकों की नजर इस बात पर है कि लंबे समय से लंबित आनंद रोड और साईनाथ रोड के चौड़ीकरण तथा चिंचोली बंदर खेल मैदान के विकास को लेकर मनपा प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
इस दौरान RPI (आ) के जिला कोषाध्यक्ष ओम यादव, मुंबई सचिव आशीष सिंह, जिला उपाध्यक्ष सुदन कांबले, वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र राजभर, दैनिक पब्लिक भारत के संपादक शिवकुमार सोनी, पत्रकार एवं समाजसेवक नंदू अहिरे और सुनील जोंधले सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।