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Goregaon में Salman Hotel के बाहर युवक की मौत के मामले में Police ने 24 घंटे में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों Police Custody में, जांच जारी है।
मुंबई: Goregaon West के Prem Nagar इलाके में Salman Hotel के सामने हुई मारपीट में 30 साल के युवक की मौत के मामले में Goregaon Police ने बड़ी कार्रवाई की है। घटना के करीब 24 घंटे के अंदर Police ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी फिलहाल Police Custody में हैं और मामले की आगे की जांच जारी है।
मामला 11 अगस्त 2026 की रात करीब 11:30 बजे का है। Police को Salman Hotel, Prem Nagar, Goregaon West के सामने मारपीट की जानकारी मिली थी। बताया गया कि यहां एक युवक के साथ विवाद के बाद मारपीट हुई और उसके सिर पर लकड़ी के डंडे से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल युवक को इलाज के लिए Trauma Care Hospital, Jogeshwari East ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान अजीज मोहम्मद अतिक खान, उम्र 30 साल, निवासी Prem Nagar, Goregaon West के तौर पर हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही Goregaon Police Station की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
होटल के बिल को लेकर शुरू हुआ था विवाद
Police के मुताबिक, मृतक के भाई हबीब मोहम्मद अतिक खान का Salman Hotel के मालिक दानीश खान से बिल को लेकर विवाद हुआ था। हबीब ने होटल का पूरा बिल देने के लिए कहा था। इसी दौरान वहां मौजूद दो लोगों से अजीज खान का भी विवाद हो गया।
आरोप है कि दोनों लोगों ने अजीज खान के साथ बहस करने के बाद उसे धमकी दी और हाथापाई शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने लकड़ी के डंडे से अजीज खान के सिर पर हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
इस मामले में Goregaon Police Station में BNS 2023 की धारा 103(1), 115(2), 352, 351(3) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया।
मामले की शुरुआत में दोनों आरोपी Police के लिए अज्ञात थे। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के पास भी उनकी पहचान से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं थी। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचना Police के लिए बड़ी चुनौती थी।
इसके बाद North Region-9 के DCP के मार्गदर्शन में Police ने Crime Detection Team बनाई। टीम ने Goregaon और आसपास के इलाकों में लगातार आरोपियों की तलाश शुरू की। Police ने मिली हुई local information और जांच के दौरान सामने आई दूसरी जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों का पता लगाया।
जांच आगे बढ़ने के बाद दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और जांच में उनकी इस मामले में भूमिका सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
13 अगस्त की रात दोनों आरोपी गिरफ्तार
Police के मुताबिक, दोनों आरोपियों को 13 अगस्त 2026 को रात करीब 2:43 बजे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय मुन्नी उपाध्याय, उम्र 39 साल, निवासी Hanuman Nagar, Goregaon West और विकास देवराज पासवान, उम्र 23 साल, निवासी Prem Nagar, Goregaon West के रूप में हुई है।
गोरेगांव पुलिस के साथ गिरफ्तार आरोपियों की तस्वीर
दोनों को Court में पेश किया गया। Court ने आरोपियों को 23 अगस्त 2026 तक Police Custody में भेज दिया है। मामले की आगे की जांच Goregaon Police Station की टीम कर रही है।
24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी
इस केस में Goregaon Police की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि गंभीर घटना के बाद Police ने तेजी से जांच करते हुए करीब 24 घंटे के अंदर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई के लिए Mumbai Police Commissioner देवेन भारती, Joint Commissioner of Police (Law & Order) मनोजकुमार शर्मा, Additional Commissioner of Police, North Regional Division शशिकुमार मीना, Additional Commissioner of Police, Western Regional Division अभिनव देशमुख, DCP North Region-9 पुरुषोत्तम कराड और ACP Goregaon Division सुनील जाधव का मार्गदर्शन रहा।
Goregaon Police Station के Senior Police Inspector सतीश उमरे के नेतृत्व में उमेश दांडेले, PSI सोहन पेचे, API सतीश चौगले, राठोड, दीपक खराड, योगेश रंधे, Police Naik नवनाथ कांबणे, आकाश काळे, सत्यपाल बोधे, विशाल दौडकर, अक्षय मांडके, रोहन कोल्हारे, सुर्यभान घोलप और गजानन हरवळे ने जांच में काम किया।
Crime Detection Team में Police Amaldar पो.ह.वा. प्रदीप कुंटे, विनोद चव्हाण, दिनकर तावडे, दत्तात्रय बागुल, सचिन ढवळी, कल्पेश नेहरे, भरत कदम, पो.शि. सौरभ चव्हाण, प्रज्वल मोहिते, भूपेंद्र सालकर, विशाल दानी, सतीश पाटील, सचिन मेघाम और सुहास शिंदे ने भी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Police की इस तेज कार्रवाई के बाद अब इस बात की जांच की जा रही है कि विवाद की शुरुआत किस वजह से हुई और घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। फिलहाल दोनों आरोपी Police Custody में हैं और आगे की जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
Mumbai Crime News: निर्मलनगर पुलिस ने ऑटो चोरी के मामले में 20 साल के आरोपी को गिरफ्तार किया। 4 चोरी की रिक्शा बरामद, आरोपी पर 14 केस दर्ज हैं।
मुंबई: मुंबई में ऑटो-रिक्शा चोरी की लगातार सामने आ रही वारदातों के बीच निर्मलनगर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 20 साल के कार्तिक शिवशंकर उपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद ऑटो चोरी के 4 मामलों का खुलासा हुआ है। आरोपी के पास से कुल 4 चोरी की ऑटो-रिक्शा बरामद की गई हैं, जिनकी कीमत करीब ₹2.35 लाख बताई गई है।
खार ईस्ट से ऑटो चोरी के बाद शुरू हुई जांच
मामला 5 अगस्त 2026 का है। पुलिस के मुताबिक, गोलीबार रोड, अंबेवाडी पुलिस चौकी के सामने, खार ईस्ट से MH 02 DU 2868 नंबर की ऑटो-रिक्शा चोरी हो गई थी। शिकायत मिलने के बाद निर्मलनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने इस मामले में CCTV footage, technical information और local sources की मदद से जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध की activity के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले MH 02 DU 0995 नंबर की ऑटो लेकर आया था और बाद में चोरी की गई रिक्शा लेकर वहां से निकल गया।
Surveillance के बाद आरोपी पुलिस के हाथ लगा
जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध की पहचान कार्तिक शिवशंकर उपाध्याय (20) के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने उसकी movement पर नजर रखी।
पुलिस के मुताबिक, 10 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 3 बजे से रात 11 बजे तक इलाके में surveillance रखा गया। इसके बाद आरोपी को पकड़ा गया और पुलिस स्टेशन लाकर पूछताछ की गई।
पूछताछ और आगे की जांच के दौरान पुलिस को चोरी की अन्य ऑटो-रिक्शा के बारे में भी जानकारी मिली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कुल 4 चोरी की ऑटो-रिक्शा recover कीं।
4 चोरी की रिक्शा बरामद, कुल कीमत ₹2.35 लाख
पुलिस के मुताबिक बरामद की गई ऑटो-रिक्शाओं में MH 02 DU 2868, MH 02 FB 9636, MH 02 DU 0995 और MH 02 LE 3450 शामिल हैं।
इन चारों रिक्शाओं को निर्मलनगर, खेरवाडी और वाकोला पुलिस स्टेशन में दर्ज अलग-अलग चोरी के मामलों से जोड़ा गया है। पुलिस के अनुसार, इनकी कुल estimated value करीब ₹2.35 लाख है।
आरोपी पर पहले से 14 चोरी के केस
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले से निर्मलनगर, वाकोला और खेरवाडी पुलिस स्टेशन में चोरी के कुल 14 मामले दर्ज हैं।
इस वजह से पुलिस अब आरोपी से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसके पुराने मामलों के अलावा वह और कितनी ऑटो चोरी की वारदातों में शामिल रहा है और क्या इन घटनाओं में उसके साथ कोई और व्यक्ति भी जुड़ा हुआ था।
Senior Officers की निगरानी में हुई कार्रवाई
इस ताजा घटना में कार्यवाही पर आप को बता दें, कि यह कार्रवाई मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती, पुलिस सह आयुक्त मनोजकुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख, पुलिस उपायुक्त निमित गोयल और सहायक पुलिस आयुक्त संजय गायकवाड के guidance में की गई।
इस कार्रवाई में निर्मलनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अजय कुलकर्णी, Police Inspector (Crime) सूर्यकांत पारटकर और Police Sub-Inspector भीमराव धापटे शामिल रहे।
टीम में स. फौ. फाटक, पुलिस हवलदार पवार (क्र. 9283), पुलिस हवलदार सावंत (क्र. 0453), पुलिस हवलदार शेख (क्र. 0899), पुलिस हवलदार माने (क्र. 0933) और पुलिस शिपाई राठोड (क्र. 3732) ने भी कार्रवाई में सहयोग किया।
फिलहाल पुलिस आरोपी से आगे पूछताछ कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि आरोपी का ऑटो चोरी का network कितना बड़ा है और क्या वह मुंबई में हुई दूसरी ऐसी वारदातों से भी जुड़ा हुआ है।
दहिसर और कांदिवली में फर्जी आधार व दस्तावेज बनाने वाले दो ठिकानों पर पुलिस की कार्रवाई, 4 आरोपी गिरफ्तार और बड़ी संख्या में फर्जी कागजात जब्त।
मुंबई: दहिसर और कांदिवली में फर्जी आधार कार्ड और दूसरे सरकारी दस्तावेज बनाने के कथित नेटवर्क पर दहिसर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया गया है। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, रहिवासी प्रमाणपत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र और आधार से जुड़े उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत दहिसर पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक निलेश साळुंखे को मिली एक जानकारी से हुई। पुलिस को पता चला था कि दहिसर इलाके में फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाने का काम किया जा रहा है।
जानकारी की जांच के बाद पुलिस टीम ने दहिसर पूर्व के बालाजी इलाके में विद्यामंदिर स्कूल के पास स्थित यू-एस इंटरप्राइजेज और कांदिवली पूर्व के हनुमान नगर स्थित सैम इन्कोटेक आधार सेंटर पर कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके जरिए आधार कार्ड में जानकारी अपडेट कराने का आरोप है। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल-कॉलेज छोड़ने के प्रमाणपत्र तैयार कर उनका इस्तेमाल आधार अपडेट के लिए किया जा रहा था।
दहिसर-कांदिवली की पहली कार्रवाई में क्या मिला?
इस कार्रवाई में पुलिस ने 32 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बरामद किए। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज के नाम वाले हस्ताक्षर-मुहर तथा दो ऐसे मुहर भी मिले, जिनका इस्तेमाल फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने में किए जाने का शक है।
पुलिस ने मौके से कंप्यूटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस और प्रिंटर के साथ आधार अपडेट मशीन, आईरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और वेब कैमरा भी जब्त किया।
इस मामले में पुलिस ने सुरजकुमार रामचंद्र यादव और उपेंद्र कप्तान सिंह को गिरफ्तार किया है। वहीं उमेश राजेश यादव उर्फ समीर को फरार आरोपी बताया गया है।
इसके बाद पुलिस ने कांदिवली पूर्व के पोइसर इलाके में स्थित शिवम इंटरप्राइजेज पर भी कार्रवाई की।
यहां पुलिस को और भी कई तरह के कथित फर्जी दस्तावेज मिले। दहिसर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में 14 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, 7 फर्जी रहिवासी प्रमाणपत्र, 26 फर्जी एसबीआई मेडिकल पॉलिसी और 3 फर्जी भारतीय नागरिकता प्रमाणपत्र बरामद किए गए।
इसके साथ ही कंप्यूटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, आधार अपडेट मशीन, आईरिस स्कैनर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और वेब कैमरा भी पुलिस ने जब्त किया।
इस कार्रवाई में सत्यम ललन मिश्रा और आकाश भगवान पटवा को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस को अब किस बात की है तलाश?
दोनों जगहों से फर्जी दस्तावेज और आधार अपडेट से जुड़े उपकरण मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह काम कितने समय से चल रहा था और इनके जरिए कितने लोगों के आधार या दूसरे दस्तावेजों में जानकारी बदली गई।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों को तैयार करने के पीछे और कौन-कौन लोग हैं और इनका इस्तेमाल किन कामों के लिए किया जाना था।
मामले में दहिसर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई अपर पुलिस आयुक्त शशिकुमार मीना, पुलिस उपायुक्त गजानन शिवलिंग राजमाने, सहायक पुलिस आयुक्त जयराज रणवरे, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सरजेराव पाटील और दहिसर पुलिस थाने के अपराध विभाग के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मारुति सांगळे के मार्गदर्शन में की गई।
कार्रवाई करने वाली टीम में सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश साळुंखे, पुलिसकर्मी सुनील राठोड, संतोष गाडे, संतोष भागवत, संतोष गाडे और राजेश शिरसाट समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क की जांच
फिलहाल दहिसर पुलिस की कार्रवाई का दायरा सिर्फ इन दो ठिकानों तक सीमित नहीं माना जा रहा है। दो अलग-अलग जगहों से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और आधार से जुड़े उपकरण मिलने के बाद पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस कथित नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं।
मुंबई में BMC ने जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आसान की है। जानिए 3 दिन की समयसीमा, QR प्रमाणपत्र और सुधार की पूरी जानकारी।
मुंबई: मुंबईकरों के लिए जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र से जुड़ी प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले आसान और तेज होने जा रही है। बीएमसी ने नए जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र के आवेदनों को तीन कार्य दिवस में निपटाने की व्यवस्था की है। जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम जोड़ने की सुविधा भी तीन कार्य दिवस में देने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। तीन दिन की समयसीमा पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने या जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में सुधार के लिए नहीं है। इन मामलों में ज्यादा समय लग सकता है।
बीएमसी की यह नई व्यवस्था ऐसे समय में आई है जब मुंबई में जन्म प्रमाणपत्रों की लंबित अर्जियों, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने और क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्र की बढ़ती मांग को लेकर नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
बीएमसी के वार्ड कार्यालय में मौजूद नागरी सुविधा केंद्र यानी सीएफसी के जरिए जन्म और मृत्यु पंजीकरण पोर्टल पर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्र में सुधार के लिए भी आवेदन की सुविधा इसी व्यवस्था के जरिए उपलब्ध होगी।
आवेदन जमा करने के बाद नागरिक को यूनिक पहचान संख्या वाली पावती दी जाएगी। इस पहचान संख्या से आवेदन की स्थिति की जानकारी ली जा सकेगी।
इससे नागरिकों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि उनका आवेदन किस स्थिति में है और उसे लेकर बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
मुंबई में बड़ी संख्या में लोगों के पास पुराने समय के कागजी या हस्तलिखित जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र हैं। ऐसे लोगों के लिए बीएमसी ने पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की सुविधा शुरू की है।
इसके लिए सीएफसी में अलग खिड़की उपलब्ध कराई गई है।
पुराने प्रमाणपत्र की मूल प्रति जमा करनी होगी। इसके बाद बीएमसी अपने विभागीय रिकॉर्ड से उसकी जानकारी का मिलान करेगी।
सामान्य स्थिति में पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र को क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की प्रक्रिया करीब 25 कार्य दिवस में पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।
लेकिन अगर रिकॉर्ड बहुत पुराना है, स्थानीय कार्यालय में उपलब्ध नहीं है या उसे खोजने में परेशानी आती है, तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है।
इसलिए पुराने प्रमाणपत्र के मामले में तीन दिन वाली समयसीमा लागू समझना सही नहीं होगा।
क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र क्यों जरूरी हो रहा है?
क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र सिर्फ नया दिखने वाला कागज नहीं है। इसका एक बड़ा फायदा दस्तावेज की जानकारी को डिजिटल रिकॉर्ड से सत्यापित करने में हो सकता है।
देश के कई नगर निकायों में क्यूआर कोड के जरिए प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। इससे फर्जी प्रमाणपत्रों की पहचान करने और सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन आसान हो सकता है।
मुंबई में भी इसकी जरूरत खास तौर पर उन लोगों को महसूस हो रही है जिन्हें जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल पासपोर्ट, विदेश में पढ़ाई, वीजा या दूसरे जरूरी दस्तावेजी कामों में करना पड़ता है।
हालांकि, यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर काम के लिए क्यूआर प्रमाणपत्र अनिवार्य है। किसी खास विभाग की अपनी अलग दस्तावेजी जरूरत हो सकती है।
जन्म प्रमाणपत्र में किन चीजों में सुधार कराया जा सकता है?
बीएमसी की नई व्यवस्था में जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े कई तरह के सुधार के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।
इनमें बच्चे के:
नाम में सुधार
पता बदलना
जन्म तारीख से जुड़ा सुधार
लिंग संबंधी सुधार
जैसे मामले शामिल हैं।
लेकिन इन सुधारों के लिए तीन कार्य दिवस वाली सुविधा लागू नहीं है। बीएमसी के मुताबिक ऐसे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र सुधार मामलों के निपटारे के लिए करीब 25 कार्य दिवस की व्यवस्था है।
मृत्यु प्रमाणपत्र में भी सुधार की सुविधा
अगर मृत्यु प्रमाणपत्र में जानकारी गलत दर्ज हो गई है तो उसके सुधार के लिए भी सीएफसी के जरिए आवेदन किया जा सकेगा।
यह सुविधा उन परिवारों के लिए खास तौर पर काम की हो सकती है जिन्हें मृत्यु प्रमाणपत्र का इस्तेमाल बैंक, बीमा, पेंशन, संपत्ति या दूसरे सरकारी कामों में करना पड़ता है।
मृत्यु प्रमाणपत्र में किसी गलती के कारण परिवार को आगे की प्रक्रिया रोकनी पड़ती है। ऐसे मामलों में आवेदन की स्थिति पता चलना और तय समयसीमा मिलना नागरिकों के लिए राहत की बात है।
विवाह प्रमाणपत्र में सुधार कितने दिन में होगा?
विवाह प्रमाणपत्र में सुधार के मामलों के लिए बीएमसी ने तीन कार्य दिवस में आवेदन निपटाने की व्यवस्था बताई है।
यह उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जिन्हें विवाह प्रमाणपत्र में दर्ज जानकारी में सुधार कराने की जरूरत है और आगे किसी सरकारी या कानूनी काम के लिए सही प्रमाणपत्र चाहिए।
बीएमसी ने सीएफसी पर क्या बदलाव करने को कहा?
बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने इस नई व्यवस्था को लेकर लोगों में ज्यादा से ज्यादा जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
सीएफसी में अलग-अलग सेवाओं और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी देने वाले नोटिस बोर्ड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसका फायदा यह होगा कि नागरिकों को आवेदन से पहले यह पता चल सके कि किस सेवा के लिए कहां और किस तरह आवेदन करना है।
यही इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा हो सकता है।
पहले प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद नागरिकों को यह पता नहीं रहता था कि उनका आवेदन किस स्थिति में है और काम कब तक होगा। ऐसे में कई बार उन्हें सीएफसी या संबंधित कार्यालय में जाकर जानकारी लेनी पड़ती थी।
अब यूनिक पहचान संख्या और आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा से यह प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकती है।
लेकिन असली बदलाव तभी माना जाएगा जब तय समयसीमा जमीन पर भी लागू हो और पुराने रिकॉर्ड वाले मामलों में अनावश्यक देरी कम हो।
मुंबई में क्यूआर प्रमाणपत्र की मांग क्यों बढ़ी?
बीएमसी पहले से ही जन्म प्रमाणपत्रों की लंबित अर्जियों को कम करने के लिए डिजिटल व्यवस्था, अतिरिक्त कर्मचारियों और सीएफसी की सेवाओं को बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है।
क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्रों की मांग भी बढ़ी है। खासकर शिक्षा, पासपोर्ट और विदेश जाने से जुड़े कामों में दस्तावेजों के सत्यापन की जरूरत ज्यादा होती है।
यही वजह है कि पुराने प्रमाणपत्रों को भी नए क्यूआर कोड वाले प्रमाणपत्र में बदलने की सुविधा महत्वपूर्ण बन गई है।
देश में भी बदल रहा है प्रमाणपत्रों का तरीका
मुंबई का यह कदम अकेला बदलाव नहीं है। देश के दूसरे शहरों में भी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र को डिजिटल बनाने, ऑनलाइन उपलब्ध कराने और क्यूआर कोड के जरिए उसकी प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था बढ़ रही है।
दिल्ली में नगर निकाय की सेवाओं को डिजिटल लॉकर जैसी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी काम चल रहा है। इसका मकसद नागरिकों को प्रमाणपत्र आसानी से उपलब्ध कराना और उनके सत्यापन को तेज करना है।
यानी आने वाले समय में जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे प्रमाणपत्र सिर्फ कागज पर निर्भर दस्तावेज नहीं रहेंगे, बल्कि उनका डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन सत्यापन भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
आम मुंबईकर पर क्या असर पड़ेगा?
इस बदलाव का सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जिन्हें किसी जरूरी काम के लिए प्रमाणपत्र जल्दी चाहिए।
बच्चे के स्कूल या आगे की पढ़ाई से जुड़े काम, पासपोर्ट, विदेश जाने की तैयारी, बैंक और बीमा के काम या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद जरूरी कागजी प्रक्रिया—इन सभी मामलों में प्रमाणपत्र समय पर मिलना काफी महत्वपूर्ण होता है।
अगर बीएमसी की तीन कार्य दिवस वाली समयसीमा सही तरीके से लागू होती है तो नागरिकों का समय बचेगा और कार्यालयों के चक्कर भी कम हो सकते हैं।
दूसरी तरफ, पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने में रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की समस्या अभी भी चुनौती बनी रहेगी।
सबसे जरूरी बात: तीन दिन वाली खबर को ऐसे समझें
मुंबईकरों को इस नई व्यवस्था को लेकर तीन अलग-अलग समयसीमा याद रखनी चाहिए:
नया जन्म, मृत्यु और विवाह प्रमाणपत्र — तीन कार्य दिवस।
जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे का नाम दर्ज करना — तीन कार्य दिवस।
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में सुधार और पुराने प्रमाणपत्र को क्यूआर वाले प्रमाणपत्र में बदलना — सामान्य मामलों में करीब 25 कार्य दिवस।
पुराना रिकॉर्ड बीएमसी के रिकॉर्ड में नहीं मिलता है या उसे खोजने में परेशानी होती है तो इसमें और समय लग सकता है।
बीएमसी ने समयसीमा तय करके नागरिकों की एक बड़ी परेशानी को कम करने की कोशिश की है। लेकिन इस फैसले की असली परीक्षा अब शुरू होगी।
मुंबई जैसे बड़े शहर में रोजाना बड़ी संख्या में जन्म, मृत्यु और विवाह से जुड़े आवेदन आते हैं। ऐसे में तीन कार्य दिवस की समयसीमा तभी सफल होगी जब सीएफसी में पर्याप्त कर्मचारी हों, पुराने रिकॉर्ड आसानी से मिलें और डिजिटल व्यवस्था बिना रुकावट काम करे।
फिलहाल मुंबईकरों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि प्रमाणपत्र के आवेदन को लेकर समयसीमा और आवेदन की स्थिति जानने की व्यवस्था पहले से ज्यादा साफ की जा रही है।
और अगर आपके पास कोई बहुत पुराना जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र है, तो उसे आखिरी समय तक संभालकर रखने के बजाय यह जांच लेना बेहतर होगा कि उसे क्यूआर कोड वाले नए प्रमाणपत्र में बदलने की जरूरत है या नहीं।
Vile Parle की Shanta Building में लगी आग में 2.5 साल के Abir और 23 वर्षीय Ankita की मौत हो गई। चार लोग घायल हैं, जांच जारी है।
मुंबई: Vile Parle West में मंगलवार रात एक दर्दनाक fire incident में दो लोगों की मौत हो गई। Church Road पर Baptista Road के पास स्थित Shanta Bhavan Building की 11वीं मंजिल पर करीब रात 10:02 बजे आग लगने की सूचना मिली। कुछ ही समय में मौके पर Fire Brigade, Police और ambulance teams पहुंच गईं और rescue operation शुरू किया गया।
दो परिवारों में मातम
इस हादसे में जान गंवाने वालों में सिर्फ 2.5 साल का Abir और 23 वर्षीय Ankita शामिल हैं। एक तरफ जहां emergency teams building में फंसे लोगों को बाहर निकालने में लगी थीं, वहीं हादसे ने दो परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
आग की चपेट में आने से चार अन्य लोग घायल हुए हैं। उन्हें इलाज के लिए hospital ले जाया गया और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनकी हालत stable बताई जा रही है। Firefighters ने काफी मशक्कत के बाद आग पर control पाया और building में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया।
आग लगने का क्या है कारण ?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल अब आग लगने की वजह को लेकर है। फिलहाल इसका exact cause सामने नहीं आया है। Fire Brigade और संबंधित authorities मामले की जांच कर रही हैं। इसलिए अभी electrical fault, short circuit या किसी appliance को आग का कारण मानना जल्दबाजी होगी।
सुरक्षा को लेकर चिंता
इस घटना ने Mumbai की high-rise buildings में fire safety को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ऐसी इमारतों में emergency staircase, fire alarms, smoke detection system और firefighting equipment सिर्फ मौजूद होना ही काफी नहीं है, बल्कि उनका regularly working condition में रहना भी जरूरी है।
Residents के लिए भी यह घटना एक जरूरी reminder है। Emergency के समय lift के बजाय designated staircase का इस्तेमाल करना, fire exit का रास्ता पहले से पता रखना और building की evacuation drill में participate करना जान बचाने में अहम हो सकता है।
फिलहाल authorities का focus rescue के बाद घटना की पूरी जांच पर है। आने वाले updates में यह साफ होगा कि आग किस वजह से लगी और क्या इस हादसे में building की fire-safety व्यवस्था से जुड़ा कोई factor सामने आता है।
मुंबई लोकल में 56 भोग और भजन के बीच मलाड नमाज मामले की याद क्यों आई? जानिए रेलवे के नियम, समानता और धार्मिक गतिविधियों पर उठे बड़े सवाल।
मुंबई: मुंबई की लोकल में सफर करने वाले यात्रियों के लिए हर दिन लगभग एक जैसा होता है—भागती ट्रेन, भीड़, काम पर पहुंचने की जल्दी और कुछ मिनटों का सफर। लेकिन मंगलवार को भायंदर से दादर जा रही एक लोकल का माहौल अचानक भक्तिमय हो गया। ट्रेन में 56 भोग सजाए गए, देवी की पूजा और आरती हुई और भजन गाए गए। इस आयोजन का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा हो रही है।
पहली नजर में यह मुंबई की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की एक खूबसूरत तस्वीर लगती है। लेकिन इसी तस्वीर के साथ एक सवाल भी खड़ा होता है।
अगर रेलवे की जगह पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर नियम हैं, तो क्या वे नियम सभी के लिए समान हैं?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ समय पहले मलाड रेलवे स्टेशन परिसर में नमाज पढ़ने के मामले में तीन लोगों के खिलाफ रेलवे पुलिस ने कार्रवाई की थी। वहां भी मामला धार्मिक गतिविधि का था और यहां भी। फर्क जगह, परिस्थितियों और गतिविधि के तरीके का हो सकता है। इसलिए दोनों घटनाओं को बिल्कुल एक जैसा कहना सही नहीं होगा।
लेकिन दोनों घटनाओं को देखकर यह पूछना जरूर बनता है कि रेलवे आखिर धार्मिक गतिविधियों को लेकर किस नियम के आधार पर फैसला करता है?
पहले समझिए, मुंबई लोकल में हुआ क्या?
मंगलवार को सामने आए वीडियो में Omkar Bhajan Mandali से जुड़े लोगों को लोकल ट्रेन में देवी को 56 भोग अर्पित करते और भजन-आरती करते देखा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह आयोजन भायंदर से दादर जाने वाली सुबह करीब 10:20 बजे की लोकल में हुआ।
मंडली से जुड़ी जानकारी के अनुसार, लोकल में भजन करने की यह परंपरा नई नहीं है। समूह की शुरुआत 6 अगस्त 2006 से होने का दावा किया जाता है और इसी यात्रा से जुड़े आयोजन के रूप में इस बार 56 भोग चढ़ाया गया।
यानी यह सिर्फ एक दिन का वायरल वीडियो नहीं है। इसके पीछे करीब दो दशक पुरानी एक परंपरा होने का दावा किया जा रहा है।
मुंबई की लोकल में भजन कोई नई बात नहीं
मुंबई की लोकल में भजन मंडलियों की मौजूदगी वर्षों से रही है। 2018 में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि मुंबई की लोकल में भजन मंडलियों को रोका नहीं जाना चाहिए और उन्हें शहर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताया था। हालांकि उसी दौर में रेलवे ने एक भजन मंडली पर कार्रवाई और जुर्माना भी किया था।
इसका मतलब यह है कि रेलवे और भजन मंडलियों का रिश्ता बिल्कुल नया नहीं है।
लेकिन 2018 की बात को 2026 की आधिकारिक नीति मान लेना भी सही नहीं होगा।
आज सवाल यह है कि क्या Western Railway के पास ऐसी धार्मिक गतिविधियों को लेकर कोई स्पष्ट नियम या व्यवस्था है?
वीडियो वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। BJP नेता किरीट सोमैया ने कार्रवाई की मांग की और इसके बाद रेलवे अधिकारियों की ओर से मामला दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक तीन लोगों—मुश्ताक बाबू लोने, सोहेब सदाकत साहा और बिस्मिल्लाह दीन अंसारी—के खिलाफ RPF ने Railway Act की Section 147 के तहत कार्रवाई की।
यहां एक जरूरी बात समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
Section 147 नमाज पढ़ने पर रोक लगाने वाली धारा नहीं है। यह रेलवे की संपत्ति पर trespass या रेलवे परिसर से हटने के निर्देश के बावजूद वहां बने रहने जैसे मामलों से संबंधित है। इसलिए इस मामले को “नमाज पढ़ना अपराध है” कहना कानूनी तौर पर सही तस्वीर नहीं होगी।
मान लीजिए किसी धार्मिक गतिविधि से ट्रेन में किसी यात्री का रास्ता बंद हो रहा है, अत्यधिक शोर हो रहा है या सुरक्षा संबंधी समस्या पैदा हो रही है।
तब कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन अगर कोई धार्मिक गतिविधि निर्धारित नियमों के भीतर है, किसी यात्री का रास्ता नहीं रोकती और रेलवे की अनुमति या स्थापित व्यवस्था के अनुसार हो रही है, तो उसे केवल धार्मिक पहचान के कारण गलत नहीं कहा जा सकता।
यही सिद्धांत हर धर्म पर लागू होना चाहिए।
भजन हो या नमाज, पूजा हो या कीर्तन—नियम एक ही होना चाहिए।
क्या दोनों घटनाएं बिल्कुल एक जैसी हैं?
नहीं।
और यही बात समझना जरूरी है।
मलाड में मामला रेलवे स्टेशन परिसर का था। वहां RPF ने Railway Act की Section 147 के तहत कार्रवाई की। दूसरी तरफ 56 भोग का आयोजन चलती लोकल ट्रेन के अंदर हुआ।
इसलिए सिर्फ इतना देखकर कि दोनों जगह धार्मिक गतिविधि हुई, दोनों मामलों को कानूनी रूप से समान नहीं माना जा सकता।
लेकिन इससे एक और सवाल पैदा होता है:
क्या रेलवे के पास स्टेशन और ट्रेन—दोनों के लिए धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट और समान नीति है?
अगर परिस्थितियां अलग हैं, तो रेलवे को यह बताना चाहिए कि अंतर क्या है।
इसी तरह किसी व्यक्ति के लिए नमाज उसकी धार्मिक जरूरत हो सकती है, लेकिन रेलवे की जमीन का इस्तेमाल किस तरीके और किस जगह किया जा सकता है, यह प्रशासनिक नियमों का विषय भी है।
इसलिए समाधान किसी एक धर्म को रोकना या दूसरे को विशेष छूट देना नहीं हो सकता।
समाधान है—एक स्पष्ट नियम और उसका समान पालन।
Bombay High Court का हालिया फैसला भी यही बात समझाता है
मुंबई एयरपोर्ट के पास रमजान के दौरान नमाज के लिए अस्थायी जगह की मांग वाले मामले में Bombay High Court ने भी यह स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी व्यक्ति को किसी भी सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। Airport की सुरक्षा और सार्वजनिक हित को अदालत ने महत्व दिया।
इस फैसले का मतलब नमाज पर रोक नहीं है।
इसका व्यापक संदेश यह है कि धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थान के नियमों के बीच संतुलन जरूरी है।
यही बात रेलवे पर भी लागू हो सकती है।
अब Western Railway से सबसे जरूरी सवाल
इस 56 भोग वाली घटना के बाद रेलवे को सिर्फ यह नहीं बताना चाहिए कि उसे आयोजन की जानकारी थी या नहीं।
उसे यह स्पष्ट करना चाहिए:
क्या लोकल ट्रेन में धार्मिक आयोजन की अनुमति है?
क्या Omkar Bhajan Mandali के पास कोई अनुमति या निर्धारित व्यवस्था है?
क्या यात्रियों की सुविधा और शोर को लेकर कोई नियम हैं?
क्या किसी अन्य धर्म की धार्मिक गतिविधि के लिए भी यही नियम लागू होंगे?
और अगर कोई activity नियमों का उल्लंघन करती है, तो क्या कार्रवाई धर्म से स्वतंत्र होकर की जाएगी?
इन सवालों के जवाब आने के बाद ही यह साफ होगा कि मुंबई लोकल में दिखाई दिया यह आयोजन सिर्फ एक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है या रेलवे की किसी औपचारिक व्यवस्था के तहत चल रहा है।
असली सवाल यही है
मुंबई लोकल में 56 भोग की तस्वीर अपने आप में लोगों का ध्यान खींचती है। देवी की पूजा, भजन और आरती के बीच चलती ट्रेन का यह दृश्य निश्चित रूप से अलग है।
लेकिन इस खबर को सिर्फ “मुंबई लोकल में भक्ति का अनोखा नजारा” कहकर खत्म कर देना कहानी का आधा हिस्सा ही बताना होगा।
दूसरा आधा हिस्सा उस सवाल में छिपा है जो मलाड की घटना के बाद और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
अगर रेलवे की जमीन और ट्रेन सार्वजनिक स्थान हैं, तो वहां धार्मिक गतिविधियों के लिए नियम क्या हैं?
और उससे भी बड़ा सवाल—
क्या वही नियम हर धर्म के लिए समान हैं?
अगर भजन के लिए कोई व्यवस्था है, तो वही व्यवस्था नमाज के लिए भी होनी चाहिए।
अगर नमाज के मामले में रेलवे की जमीन के इस्तेमाल पर कार्रवाई होती है, तो समान परिस्थितियों में किसी भी दूसरे धार्मिक आयोजन पर भी वही नियम लागू होने चाहिए।
और अगर दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, तो रेलवे को यह अंतर साफ-साफ बताना चाहिए।
कल्याण पश्चिम में आवारा कुत्ते ने 130 से ज्यादा लोगों को काटा। 25 लोग अस्पताल में भर्ती, 11 साल की बच्ची को सायन अस्पताल रेफर किया गया।
कल्याण: ठाणे जिले के कल्याण पश्चिम में रविवार 9 अगस्त को एक आवारा कुत्ते के हमले से लोगों में दहशत फैल गई। दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुए हमलों में शाम तक 130 से अधिक लोगों के कुत्ते के काटने की जानकारी सामने आई है। घायलों को इलाज के लिए रुक्मिणीबाई अस्पताल ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों का उपचार किया गया। गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय बच्ची को आगे के इलाज के लिए मुंबई के सायन स्थित लोकमान्य तिलक महानगरपालिका अस्पताल रेफर किया गया।
दोपहर 2 बजे शुरू हुआ हमला
जानकारी के अनुसार, पहला हमला रविवार दोपहर करीब 2 बजे बिरला कॉलेज से खड़कपाड़ा मार्ग के बीच स्थित संदीप होटल के आसपास हुआ। इसके बाद शाम करीब 8 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आती रहीं।
बताया गया कि एक सफेद आवारा कुत्ते ने सड़क से गुजर रहे लोगों को निशाना बनाया। कुत्ते ने पैदल चलने वालों के अलावा दोपहिया वाहन सवारों और ऑटो-रिक्शा में जा रहे लोगों पर भी हमला किया। अचानक हुए हमलों के कारण इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपने बच्चों को घरों से बाहर निकालने से बचते रहे।
हमलों के बाद बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए रुक्मिणीबाई अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. संदीप पगारे के अनुसार, रविवार को करीब 130 dog-bite cases सामने आए। कई लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि कम से कम 25 लोगों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया गया।
घायलों को एंटी-रेबीज उपचार दिया गया। गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए सायन अस्पताल रेफर किया गया।
एक ही कुत्ते के हमले की जानकारी
अस्पताल पहुंचे कई पीड़ितों ने एक सफेद आवारा कुत्ते के हमले की जानकारी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 130 लोगों के dog-bite cases इसी घटना से जुड़े बताए जा रहे हैं।
हालांकि, कुत्ते के रेबीज संक्रमित होने की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए उसे सीधे रेबीज संक्रमित बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल उसे एक आक्रामक आवारा कुत्ते के रूप में बताया गया है।
KDMC ने शुरू किया कुत्ते को पकड़ने का अभियान
घटना की जानकारी मिलने के बाद कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के पशु नियंत्रण विभाग ने हमलावर कुत्ते को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया। कार्रवाई में स्थानीय पुलिस की भी मदद ली गई।
आवारा कुत्तों की समस्या पर फिर उठे सवाल
एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में dog-bite cases सामने आने के बाद कल्याण-डोंबिवली में आवारा कुत्तों की समस्या और उन्हें नियंत्रित करने की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब KDMC क्षेत्र में एक दिन में बड़ी संख्या में dog-bite cases सामने आए हों। सितंबर 2025 में कल्याण और डोंबिवली में एक ही दिन 67 लोगों के कुत्ते के काटने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय KDMC की ओर से हर महीने करीब 1,000 से 1,100 कुत्तों की नसबंदी किए जाने की जानकारी दी गई।
ताजा घटना ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि नसबंदी और पशु नियंत्रण कार्यक्रम के बावजूद आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर और क्या कदम उठाए जाने की जरूरत है।
कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या करें?
कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन और जरूरत पड़ने पर अन्य उपचार दिया जाता है।
कुत्ते के काटने के बाद इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए और केवल घरेलू उपचार पर निर्भर रहने से बचना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का इलाज और हमले के लिए जिम्मेदार कुत्ते के संबंध में कार्रवाई करना है। घटना के बाद कल्याण पश्चिम के लोगों में आवारा कुत्तों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मुंबई के हीरा कारोबार में ₹4 करोड़ के मामले में कई व्यापारियों की जांच, 983 कैरेट हीरों के भुगतान विवाद पर BKC Police ने केस दर्ज किया।
मुंबई: मुंबई के BKC स्थित Bharat Diamond Bourse से जुड़े हीरा कारोबार में करीब ₹4 करोड़ के कथित भुगतान विवाद ने पुलिस जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एक कारोबारी पर 983 कैरेट के हीरे बिक्री के लिए लेने के बाद उनका भुगतान नहीं करने और माल वापस नहीं करने का आरोप है। इस मामले में BKC Police ने Smit Alpeshbhai Shah के खिलाफ मामला दर्ज किया है और उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी द्वारा BDB के कुछ अन्य कारोबारियों से भी इसी तरह हीरे लेने की बात सामने आई है।
मामला Stellar Gems Private Limited की शिकायत पर दर्ज किया गया है। कंपनी के sales manager Mrugesh Hasmukh Shah ने पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी की Smit Shah की firm Parshwapadya Diamond के साथ पिछले कुछ महीनों से diamond trading चल रही थी। शुरुआती transactions में payment समय पर मिलने के कारण दोनों के बीच कारोबारी भरोसा बना।
इसके बाद कारोबार का दायरा बढ़ा और Stellar Gems ने कई consignments में 983 कैरेट के diamonds बिक्री के लिए दिए। इनकी कीमत करीब ₹4 करोड़ बताई गई है।
भुगतान का समय आया तो संपर्क टूट गया
शिकायत के मुताबिक, diamonds दिए जाने के बाद तय समय में payment नहीं किया गया। कंपनी की ओर से रकम के लिए आरोपी से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन payment नहीं मिला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि diamonds भी वापस नहीं किए गए।
मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब जून 2026 के बाद आरोपी ने कथित तौर पर फोन कॉल और messages का जवाब देना बंद कर दिया। इसके बाद Stellar Gems की ओर से BKC Police में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो सामने आया कि आरोपी ने Bharat Diamond Bourse से जुड़े कुछ अन्य diamond traders से भी इसी तरह diamonds लिए थे। हालांकि, दूसरे कारोबारियों की संख्या, उनसे लिए गए diamonds की मात्रा और उनकी कुल कीमत अभी जांच का विषय है।
शिकायत में आरोपी और Stellar Gems के बीच बने कारोबारी संबंध की शुरुआत का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता Mrugesh Hasmukh Shah, Shum Diamond Company के proprietor Rajendra Momaya को जानते थे। शिकायत के अनुसार, Momaya ने उनकी पहचान Smit Shah की firm Parshwapadya Diamond से कराई थी।
इसके बाद दोनों firms के बीच diamond trading शुरू हुई। शुरुआत में transactions का payment समय पर होने के कारण कारोबारी संबंध आगे बढ़े। इसी दौरान बाद की consignments में बड़ी मात्रा में diamonds दिए गए।
यानी पुलिस के सामने अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि करीब ₹4 करोड़ के diamonds का payment क्यों नहीं हुआ, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि आरोपी ने दूसरे कारोबारियों के साथ कितने ऐसे transactions किए और उन transactions का बाद में क्या हुआ।
इस मामले को समझने के लिए diamond industry में इस्तेमाल होने वाली Memo या Jangad व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। B2B diamond trade में कई बार supplier दूसरे trader को diamonds बिक्री के लिए देता है। इसे memorandum या consignment arrangement के तहत किया जा सकता है। माल बिकने के बाद settlement हो सकता है और तय शर्तों के अनुसार unsold stock वापस किया जा सकता है।
Gem & Jewellery Export Promotion Council (GJEPC) के Code of Ethics में memorandum transactions के लिए consignment records, stock register, receiving confirmation और insurance जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है।
इसी वजह से इस मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि Stellar Gems और आरोपी की firm के बीच diamonds किस कारोबारी arrangement के तहत दिए गए थे, delivery और receiving का रिकॉर्ड क्या था तथा payment और return की शर्तें क्या तय थीं।
हालांकि, इन specific agreements या documents की पूरी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
जांच अब सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं
इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि पुलिस की शुरुआती जांच में BDB के अन्य कारोबारियों से भी diamonds लेने की बात सामने आई है। अगर इन transactions की पुष्टि होती है, तो मामले का दायरा एक कंपनी के कथित ₹4 करोड़ के नुकसान से आगे बढ़ सकता है।
पुलिस को अब अलग-अलग transactions की कड़ियों को जोड़ना होगा। इसमें यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपी ने किन कारोबारियों से diamonds लिए, कब लिए, किस value के लिये लिए, payment या return की क्या शर्तें थीं और संबंधित stock की स्थिति क्या है।
फिलहाल दूसरे कारोबारियों से जुड़े कथित transactions की कुल value सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए करीब ₹4 करोड़ को पूरे मामले का अंतिम financial loss मानना जल्दबाजी होगी।
शिकायत में Smit Shah पर diamond traders को कथित तौर पर धोखा देने के लिए bogus company बनाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, यह शिकायत में लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
Police investigation में इस आरोप के साथ-साथ आरोपी की firm, उसके कारोबारी transactions और दूसरे traders के साथ हुए लेन-देन की भी जांच की जा सकती है। जब तक जांच में इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
BKC Police ने मामले में cheating और criminal misappropriation के आरोपों के तहत कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
अब जांच का फोकस आरोपी से जुड़े कारोबारी transactions, दूसरे traders से लिए गए diamonds और उनके payment या return की स्थिति पर रहेगा। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि 983 कैरेट diamonds में से कोई हिस्सा बरामद हुआ है या नहीं।
फिलहाल diamonds की recovery या ₹4 करोड़ की रकम वापस मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
एक कारोबारी विवाद से बड़े जांच दायरे तक पहुंचा मामला
मुंबई के diamond business से जुड़े इस मामले में शुरुआत एक कंपनी के करीब ₹4 करोड़ के कथित payment dispute से हुई, लेकिन BDB के अन्य कारोबारियों से भी diamonds लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा अब बढ़ गया है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सभी transactions सामान्य कारोबारी व्यवस्था के तहत हुए थे और बाद में payment dispute पैदा हुआ, या जांच में कई कारोबारियों से जुड़े transactions में कोई समान pattern सामने आता है।
इसका जवाब पुलिस की आगे की जांच और संबंधित कारोबारी रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल Smit Alpeshbhai Shah पर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। अदालत की ओर से उनकी दोषसिद्धि नहीं हुई है।
मुंबई लोकल के महिला डिब्बे में सांप होने की अफवाह से हड़कंप मच गया। यात्रियों ने अलार्म चेन खींच दी, जिससे ट्रेन 12 मिनट तक रुकी रही। रेलवे और RPF की जांच में क्या सामने आया, जानिए पूरी खबर।
मुंबई: मुंबई की सेंट्रल लाइन पर शुक्रवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे में सांप होने की सूचना फैल गई। घबराई महिला यात्रियों ने अलार्म चेन खींच दी, जिसके बाद ट्रेन को नाहुर स्टेशन के पास रोकना पड़ा। करीब 12 मिनट तक चली जांच के बाद ट्रेन को दोबारा रवाना किया गया, लेकिन रेलवे और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को कोच में कोई सांप नहीं मिला।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना शुक्रवार सुबह करीब 9:15 बजे की बताई जा रही है। ठाणे से मुंबई की ओर जा रही लोकल ट्रेन जैसे ही नाहुर स्टेशन के पास पहुंची, तभी महिला डिब्बे में मौजूद कुछ यात्रियों ने सांप दिखाई देने का दावा किया।
कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे डिब्बे में फैल गई और यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को देखते हुए महिला यात्रियों ने अलार्म चेन खींच दी, जिसके कारण ट्रेन को तुरंत रोकना पड़ा।
12 मिनट तक रुकी रही लोकल
अलार्म चेन खींचे जाने के बाद रेलवे अधिकारी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने महिला डिब्बे समेत पूरे कोच की गहन जांच की।
रेलवे के मुताबिक, ट्रेन करीब 12 मिनट तक रुकी रही। जांच पूरी होने के बाद सुबह लगभग 9:26 बजे ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया।
दो स्टेशनों पर हुई जांच
रेलवे अधिकारियों ने सबसे पहले नाहुर स्टेशन के पास ट्रेन की तलाशी ली। इसके बाद एहतियात के तौर पर कुर्ला स्टेशन पर भी दोबारा जांच की गई।
हालांकि, दोनों जगहों पर हुई जांच में किसी तरह का सांप या अन्य सरीसृप नहीं मिला। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए गए।
रेलवे ने क्या कहा?
सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) के अनुसार, कई महिला यात्रियों ने डिब्बे में सांप देखने की सूचना दी थी। इसी वजह से तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रेन को रोका गया और पूरी जांच की गई।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में ट्रेन के अंदर सांप मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
यात्रियों में मचा हड़कंप
सांप की सूचना मिलते ही महिला यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि, अधिकारियों ने यात्रियों को शांत कराया और पूरी जांच के बाद ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी।
इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या किसी अन्य नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
एक नजर में
घटना का समय: शुक्रवार सुबह करीब 9:15 बजे
स्थान: नाहुर स्टेशन के पास
ट्रेन रुकी: करीब 12 मिनट
जांच: नाहुर और कुर्ला स्टेशन पर तलाशी
नतीजा: ट्रेन में सांप नहीं मिला
नुकसान: किसी के घायल होने की सूचना नहीं
नोट: रेलवे और आरपीएफ की जांच में अब तक ट्रेन के अंदर सांप मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। कई यात्रियों ने सांप देखने का दावा किया था, लेकिन अधिकारियों को तलाशी के दौरान कोई सरीसृप नहीं मिला।
मुंबई के गोराई-2 इलाके में सड़क पर बर्थडे पार्टी के दौरान कथित एअरगन फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद बोरीवली पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुंबई: मुंबई के गोराई-2 इलाके में सड़क पर जन्मदिन की पार्टी मनाना 10 लोगों को भारी पड़ गया। 5 अगस्त की मध्यरात्रि को गोराई स्थित घारकुल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के बाहर सड़क पर आयोजित बर्थडे सेलिब्रेशन के दौरान कथित तौर पर एअरगन से फायरिंग किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बोरीवली पुलिस ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया है।
Mumbai – Borivali police have taken action against 10 people for creating a public nuisance while celebrating a birthday on a public road. The incident occurred near Sukhsagar Cooperative Housing Society in Gorai-2, where the group cut a cake on the public road to mark the… pic.twitter.com/AKooF6VVzr
पुलिस के मुताबिक, जन्मदिन का जश्न सार्वजनिक सड़क पर मनाया जा रहा था। आरोप है कि पार्टी के दौरान सड़क के बीच खड़ी कार के बोनट पर केक काटा गया और कुछ समय के लिए लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की।
क्या है पूरा मामला?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, 5 अगस्त की रात गोराई-2 इलाके में कुछ युवक अपने एक दोस्त का जन्मदिन मनाने के लिए जमा हुए थे। आधी रात के आसपास सड़क पर खड़ी एक कार के बोनट पर केक काटा गया। इसी दौरान कथित तौर पर एअरगन से फायरिंग किए जाने का आरोप है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस अब वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
आकाश रामकृपाल गुप्ता, जिनका जन्मदिन था (बीच में), जिन पर इस मामले में नौ अन्य लोगों के साथ केस दर्ज किया गया है।
किन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला?
बोरीवली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के अलावा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 201, 122 और 177, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(1)(e) और 135 तथा आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।
बोरीवली पुलिस स्टेशन की वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पुष्पलता मंडले ने कहा, “हमने सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। मामले की जांच जारी है।”
जांच की कमान वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में
मामले की जांच पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) संदीप घुगे की निगरानी में की जा रही है। जांच टीम में सहायक पुलिस आयुक्त संतोष धनवटे, पुलिस निरीक्षक दिग्विजय पाटिल, क्राइम डिटेक्शन स्क्वाड के पुलिस निरीक्षक आनंद भगत, पुलिस उपनिरीक्षक राजू कोर्डे और पुलिस उपनिरीक्षक निर्मल कुमार भोसले शामिल हैं।
पुलिस अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित फायरिंग किसने की, एअरगन किसकी थी और वीडियो सबसे पहले किसने रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर अपलोड किया।
किन लोगों को हिरासत में लिया गया?
पुलिस ने इस मामले में आकाश रामकृपाल गुप्ता (26), जतिन नवीन शर्मा (26), विजयेश विजयप्रकाश उपाध्याय (26), विक्रम मंगलीलाल चौधरी उर्फ टॉम (29), ऐश्वर्या मधुकर गोमणे (26), अजिंक्य जयंत आढव (24), जय धर्मेंद्र कपाड़िया (27), रोहन जगदीश पाटिल (27), मुकुंद असराम थोरवे (25) और प्रशांत सुभाष हरिजन (25) को हिरासत में लिया है।
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े हर पहलू की जांच जारी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई है। वायरल क्लिप में कुछ युवक सड़क पर जश्न मनाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कार के बोनट पर केक काटने और सड़क पर भीड़ जमा होने के दृश्य भी देखे जा सकते हैं।
हालांकि, पुलिस अभी इस बात की जांच कर रही है कि वीडियो में दिखाई दे रही कथित फायरिंग किस परिस्थिति में हुई और क्या उससे किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा।
मुंबई और उसके उपनगरों में सार्वजनिक सड़कों पर जन्मदिन मनाने, बाइक स्टंट करने और हथियारों के प्रदर्शन से जुड़े कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे आयोजनों के कारण कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के आयोजनों पर सख्ती से रोक लगाई जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल बोरीवली पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।