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  • कांदिवली स्टेशन के बाहर कथित देह व्यापार के आरोप, लॉज और Fire Safety पर उठे सवाल

    कांदिवली स्टेशन के बाहर कथित देह व्यापार के आरोप, लॉज और Fire Safety पर उठे सवाल

    कांदिवली स्टेशन के आसपास कथित देह व्यापार और लॉज को लेकर शिकायतों से सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। Fire NOC और पुलिस कार्रवाई पर भी नजर।

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम रेलवे स्टेशन के आसपास कथित देह व्यापार और एक लॉज की गतिविधियों को लेकर स्थानीय नागरिकों की शिकायतों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्टेशन परिसर और स्टेशन के बाहर के रास्तों, पोस्ट ऑफिस गली और फाटक रोड इलाके में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इन शिकायतों के बीच अब लॉज की licensing, fire-safety compliance और पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग उठ रही है।

    रात में स्टेशन के बाहर क्या आरोप लगाए गए?

    स्थानीय लोगों का दावा है कि शाम करीब 8 बजे के बाद पोस्ट ऑफिस गली, फाटक रोड और स्टेशन परिसर और आसपास कुछ महिलाएं और अन्य लोग व्यभिचार की लेनदेन करते हुए जमा देखे जाते हैं। इसका एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया है। नागरिकों के मुताबिक, इसका असर वहां से गुजरने वाले यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा और सहज आवाजाही पर पड़ रहा है।

    Happy Guest House को लेकर भी सवाल

    स्थानीय स्तर पर Happy Guest House/Happy Lodge को लेकर भी जांच की मांग की गई है। आरोप लगाए गए हैं कि वहां ठहरने वाले लोगों के दस्तावेजों और बांग्लादेशी नागरिकों के verification की जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस लॉज के खिलाफ मौजूदा समय में देह व्यापार, अवैध विदेशी नागरिकों को ठहराने या अन्य अपराध को लेकर कोई आधिकारिक FIR या पुलिस कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

    ऐसे में अब सबसे अहम सवाल यही है कि संबंधित प्रशासन ने इस लॉज की licensing, guest records और सुरक्षा मानकों की जांच की है या नहीं।

    Fire Safety को लेकर चिंता क्यों बढ़ी?

    कांदिवली स्टेशन रोड पर 17 अगस्त 2026 को एक commercial building में आग लगी थी। दमकल विभाग ने smoke-filled building से 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था। इस घटना के बाद स्टेशन रोड और आसपास के lodging establishments में fire-safety व्यवस्था की जांच का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है।

    हालांकि, Happy Guest House के पास Fire NOC नहीं होने का specific दावा अभी किसी आधिकारिक स्रोत से confirm नहीं हुआ है। इसलिए इसकी जांच Mumbai Fire Brigade और संबंधित civic authorities के रिकॉर्ड से होना जरूरी है।

    GRP, RPF और स्थानीय पुलिस की भूमिका भी अहम

    रेलवे परिसर में GRP और RPF की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं। GRP रेलवे परिसर में law and order और criminal cases देखती है, जबकि RPF की प्रमुख जिम्मेदारी रेलवे संपत्ति और सुरक्षा से जुड़ी है।

    स्टेशन से बाहर के इलाके में स्थानीय पुलिस और civic authorities की भूमिका बनती है। इसलिए नागरिकों की शिकायत पर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किस agency ने क्या कार्रवाई की और क्या कोई शिकायत या मामला दर्ज हुआ है।

    अब नजर किस पर?

    फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम आरोपों की स्वतंत्र जांच है। स्टेशन परिसर और आसपास के CCTV, स्थानीय शिकायतें, लॉज के licence और guest records, Fire NOC तथा संबंधित पुलिस रिकॉर्ड की जांच से ही तस्वीर साफ हो सकती है।

    फिलहाल कांदिवली परिसर में इन बाजारू महिलाओं का जमावड़ा सवालों के घेरे में है। इनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

  • Mumbai Accident: बांद्रा में 8 साल के बच्चे की मौत, फोन पर बात करने का आरोप; महिला ड्राइवर गिरफ्तार

    Mumbai Accident: बांद्रा में 8 साल के बच्चे की मौत, फोन पर बात करने का आरोप; महिला ड्राइवर गिरफ्तार

    मुंबई के बांद्रा में सड़क पार कर रहे 8 साल के बच्चे की कार की टक्कर से मौत हो गई। पुलिस ने महिला ड्राइवर को गिरफ्तार कर जांच शुरू की है।

    मुंबई: बांद्रा में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में 8 साल के बच्चे की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, जान बैपटिस्ट रोड पर जीजामाता गार्डन के सामने सड़क पार कर रहे बच्चे को एक कार ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद पुलिस ने कार चला रही महिला को गिरफ्तार किया है।

    पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे के वक्त महिला ड्राइवर के मोबाइल फोन पर बात करने और कार तेज रफ्तार में होने का आरोप है। हालांकि, इन पहलुओं की पुलिस अभी जांच कर रही है।

    बांद्रा में सड़क पार करते समय हुआ हादसा

    मृतक बच्चे की पहचान अंश रवींद्र गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर अंश जान बैपटिस्ट रोड पर जीजामाता गार्डन के सामने सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान कार की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    टक्कर के बाद आसपास मौजूद लोगों की मदद से बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    महिला ड्राइवर गिरफ्तार

    हादसे के बाद पुलिस ने कार चला रही करीब 45 वर्षीय महिला को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान बांद्रा निवासी मेघा रावल के तौर पर बताई गई है।

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में कार की रफ्तार और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। हादसे के वक्त वास्तव में क्या हुआ था, इसे लेकर पुलिस दूसरे पहलुओं को भी verify कर रही है।

    BNS और Motor Vehicles Act के तहत मामला

    पुलिस ने महिला ड्राइवर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ Motor Vehicles Act के तहत भी केस दर्ज किया है।

    अब पुलिस हादसे की पूरी परिस्थितियों की जांच कर रही है। इसमें कार की रफ्तार, घटना के समय ड्राइवर के मोबाइल इस्तेमाल और हादसा किस तरह हुआ, जैसे अहम पहलुओं को verify किया जा रहा है।

    फिलहाल मामले में जांच जारी है। पुलिस की आगे की जांच से यह साफ होगा कि हादसे के वक्त ड्राइविंग में किन परिस्थितियों की भूमिका रही और आरोपी ड्राइवर के खिलाफ दर्ज आरोपों में आगे क्या कार्रवाई होती है।

  • Mumbai Bank Election: Shinde camp की एंट्री से Darekar के गढ़ में मुकाबला, जानिए क्यों खास है ये चुनाव

    Mumbai Bank Election: Shinde camp की एंट्री से Darekar के गढ़ में मुकाबला, जानिए क्यों खास है ये चुनाव

    Mumbai Bank Election में Shinde camp की एंट्री से BJP के Pravin Darekar के गढ़ को चुनौती मिल रही है। जानिए बैंक, redevelopment और politics का पूरा कनेक्शन।

    मुंबई: Mumbai Bank Election को लेकर Maharashtra की सियासत में नया मोड़ आ गया है। Eknath Shinde camp ने Mumbai District Central Cooperative Bank यानी Mumbai Bank के चुनाव में अपना panel उतारने की तैयारी शुरू कर दी है। इससे BJP के वरिष्ठ नेता और मौजूदा Bank Chairman Pravin Darekar के मजबूत cooperative network को पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती मिलती दिख रही है।

    खास बात ये है कि Shinde camp का ये कदम ऐसे समय आया है, जब हाल ही में Thane-Palghar District Central Cooperative Bank चुनाव में Shinde-backed Sahakar Panel ने 21 में से 16 सीटें जीतकर cooperative politics में अपनी ताकत दिखाई है। अब नजर Mumbai Bank पर है, जहां 2021 के चुनाव में Darekar-led Sahakar Panel ने 21 में 21 सीटों पर कब्जा जमाया था।

    Shinde camp की नजर Mumbai Bank पर क्यों?

    Shrikant Shinde की अगुवाई में Shinde camp Mumbai Bank चुनाव में अपनी ताकत आजमाने की तैयारी कर रहा है। मौजूदा स्थिति में इसे BJP और Shinde Sena के बीच सीधी political fight के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसकी तस्वीर सिर्फ दो पार्टियों के मुकाबले तक सीमित नहीं है।

    Cooperative banks Maharashtra की local politics में काफी अहम माने जाते हैं। इनके जरिए cooperative societies, credit network और स्थानीय नेताओं के बीच लंबे समय से political influence तैयार होता रहा है।

    Mumbai Bank का network भी काफी बड़ा है। Bank के 31 March 2025 के official आंकड़ों के मुताबिक उसकी deposits करीब ₹8,738 करोड़ और loans and advances करीब ₹6,437 करोड़ थे। Working capital ₹10,282 करोड़ से ज्यादा था, जबकि total business करीब ₹15,175 करोड़ रहा।

    यानी चुनाव सिर्फ एक board की कुर्सियों का मामला नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा financial और cooperative network भी है।

    2021 में Darekar camp ने किया था clean sweep

    Mumbai Bank पर BJP camp की पकड़ नई नहीं है। 2021-22 के चुनाव में Pravin Darekar के नेतृत्व वाले Sahakar Panel ने 21 में से सभी 21 elected seats जीत ली थीं।

    इसके बाद Darekar Mumbai Bank के chairman बने और cooperative sector में BJP का influence मजबूत रहा।

    हालांकि Mumbai Bank का इतिहास यह भी बताता है कि director election का result और chairman-level power equation हमेशा एक जैसी नहीं होती। 2022 में chairman चुनाव में NCP के Siddharth Kamble ने BJP के Prasad Lad को 11-9 से हराया था। बाद में political समीकरण बदलने के साथ Pravin Darekar फिर chairman पद पर लौटे।

    यही वजह है कि आने वाले चुनाव में सिर्फ यह देखना महत्वपूर्ण नहीं होगा कि कौन कितनी seats जीतता है, बल्कि चुनाव के बाद board के अंदर power equation कैसी बनती है, इस पर भी नजर रहेगी।

    Thane-Palghar result ने बढ़ाया Shinde camp का confidence

    Shinde camp के लिए Mumbai Bank की चुनौती अचानक नहीं आई है। हालिया Thane-Palghar District Central Cooperative Bank चुनाव में Shinde-backed Sahakar Panel ने 21 में से 16 seats जीती थीं।

    हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है। Sahakar Panel सिर्फ Shiv Sena (Shinde) का अकेला panel नहीं था। इसमें Bahujan Vikas Aghadi और दूसरे स्थानीय राजनीतिक नेताओं का support भी था।

    चुनाव के बाद BJP और Shiv Sena समर्थित directors के बीच फिर Mahayuti-style power arrangement बना और Arun Patil chairman चुने गए।

    इससे Maharashtra की cooperative politics का एक pattern सामने आया है—चुनाव के दौरान अलग-अलग panels के बीच मुकाबला हो सकता है, लेकिन result के बाद सत्ता-साझेदारी की संभावना भी बनी रहती है।

    Mumbai में भी यही सबसे बड़ा सवाल रहेगा।

    Mumbai Bank इतना important क्यों है?

    Bank के financial numbers इसकी importance को समझने में मदद करते हैं।

    Financial position31 March 2025
    Deposits₹8,738.08 करोड़
    Loans & Advances₹6,437.35 करोड़
    Working Capital₹10,282.07 करोड़
    Investments₹2,790.08 करोड़
    Total Business₹15,175.43 करोड़
    Net Profit₹20.25 करोड़

    Bank का network सिर्फ traditional cooperative banking तक सीमित नहीं है। Mumbai में housing societies और self-redevelopment इसका एक बड़ा हिस्सा हैं।

    Housing society और redevelopment से क्या connection है?

    Mumbai Bank अपनी self-redevelopment policy के तहत cooperative housing societies को project finance उपलब्ध कराता है। Bank की official policy के मुताबिक eligible projects में construction cost, rent, shifting expenses, premiums और अन्य project-related खर्चों के लिए funding का provision है। Loan project cost के 85% तक या ₹50 करोड़ तक हो सकता है, applicable norms के अनुसार।

    ऐसे projects में society की consent, technical assessment, financial viability, escrow mechanism और mortgage जैसी conditions भी लागू होती हैं।

    इसका मतलब यह नहीं है कि किसी political camp के bank board में आने से किसी society का redevelopment loan automatically approve हो जाएगा। लेकिन इतना जरूर है कि Mumbai के बड़े cooperative housing ecosystem में bank का governance और decision-making structure महत्वपूर्ण है।

    Bank के official data के मुताबिक 2024-25 में उसके 18,691 society members थे। वहीं bank अपने self-redevelopment programme के तहत 9,000 से ज्यादा cooperative housing societies के network को target करता है।

    Government salary और PSU deposits वाला angle भी अहम

    Mumbai Bank की importance पिछले कुछ सालों में एक और वजह से बढ़ी है।

    January 2025 में Maharashtra government ने Mumbai Bank को government employees के salary और allowances से जुड़े accounts खोलने की अनुमति दी थी। इसके अलावा कुछ government-linked institutions और public-sector entities के surplus funds के investment के लिए भी bank को eligible बनाया गया।

    इस development ने bank और government financial ecosystem के रिश्ते को और महत्वपूर्ण बना दिया।

    यही वजह है कि अब Mumbai Bank की political importance को सिर्फ cooperative societies तक सीमित करके देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

    Bank बड़ा है, लेकिन financial picture का दूसरा पहलू भी है

    Bank के कारोबार में growth के साथ उसकी financial health पर भी नजर जरूरी है।

    2024-25 के official आंकड़ों के मुताबिक Mumbai Bank का net profit ₹20.25 करोड़ था और उसे A audit classification मिली थी। लेकिन इसी financial year में उसका Net NPA 10.30% और CRAR 10.03% था।

    इसलिए Mumbai Bank की कहानी सिर्फ “₹10,000 करोड़ से ज्यादा working capital वाला बड़ा bank” कहकर खत्म नहीं होती। आने वाले board के सामने business growth के साथ loan recovery और asset quality भी महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।

    क्या ये Mahayuti में टकराव का संकेत है?

    Mahayuti सरकार में BJP और Shinde-led Shiv Sena अभी साथ हैं। लेकिन cooperative elections में local-level power और organisational influence का calculation अलग हो सकता है।

    इसका एक ताजा example Thane-Palghar है, जहां चुनाव में अलग-अलग ताकतों के बीच मुकाबला हुआ, लेकिन बाद में Mahayuti के समर्थक directors के बीच power-sharing देखने को मिली।

    Mumbai Bank में भी असली राजनीतिक message सिर्फ जीत या हार से नहीं निकलेगा।

    अगर BJP-led camp अपना मजबूत control बनाए रखता है, तो यह Darekar network की पकड़ कायम रहने का संकेत होगा।

    अगर Shinde camp कुछ महत्वपूर्ण seats हासिल कर लेता है, तो बिना majority हासिल किए भी यह BJP के लंबे समय से चले आ रहे complete dominance को चुनौती का बड़ा संकेत होगा।

    और अगर दोनों camps चुनाव के बाद किसी arrangement पर पहुंचते हैं, तो यह Maharashtra की cooperative politics में Mahayuti के अंदर power-sharing का एक और example बन सकता है।

    Mumbai में इसका असर कहां दिख सकता है?

    Mumbai में cooperative housing और redevelopment का scale लगातार बड़ा है। 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 2026 की पहली तिमाही में housing societies ने 70 redevelopment agreements किए थे और 2020 से ongoing society redevelopment projects की cumulative संख्या 1,094 तक पहुंच गई थी।

    ऐसे माहौल में Mumbai Bank जैसे institution पर control का महत्व और बढ़ जाता है।

    हालांकि किसी particular society, loan या redevelopment project के outcome को सीधे इस election से जोड़ना अभी सही नहीं होगा। उसका फैसला bank की applicable policy, financial assessment और regulatory requirements के आधार पर ही होगा।

    अब नजर किन चीजों पर रहेगी?

    सबसे पहले Mumbai Bank चुनाव का official programme सामने आना बाकी है। फिलहाल reports में December 2026 या January 2027 के आसपास चुनाव होने की संभावना बताई गई है।

    इसके बाद सबसे अहम होंगे:

    • Shinde camp के final candidates और panel की घोषणा
    • BJP/Darekar camp का counter-panel
    • constituency और category-wise electoral arithmetic
    • voter list और eligible cooperative societies
    • दोनों camps के बीच seat-sharing या समझौते की संभावना
    • चुनाव के बाद chairman और key positions को लेकर समीकरण

    फिलहाल इतना साफ है कि Thane-Palghar के बाद Shinde camp ने Mumbai के cooperative sector में अगला बड़ा political test चुन लिया है। Mumbai Bank पर 2021 में 21 में 21 सीटों का कब्जा रखने वाले Darekar camp के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह अपना पुराना dominance दोहरा पाएगा, या Shinde camp पहली बार इस मजबूत गढ़ में अपनी जगह बना पाएगा।

  • चेंबूर में महिला की मौत के बाद Boyfriend गिरफ्तार, लेकिन मौत का राज खुला तो उड़ गए सबके होश

    चेंबूर में महिला की मौत के बाद Boyfriend गिरफ्तार, लेकिन मौत का राज खुला तो उड़ गए सबके होश

    चेंबूर में महिला की अचानक मौत के बाद Boyfriend गिरफ्तार हुआ। शुरुआत में मामला सामान्य लगा, लेकिन जांच आगे बढ़ी तो Murder का चौंकाने वाला राज सामने आया।

    मुंबई: चेंबूर में एक महिला की अचानक हुई मौत ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत में मामला एक सामान्य या संदिग्ध मौत जैसा लग रहा था, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ते ही पूरी कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि महिला की मौत का मामला Murder Case में बदल गया।

    इस मामले में महिला के Boyfriend Ashish Magar को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने उसे पांच दिन की Police Custody में भेजा है। लेकिन पुलिस को आखिर ऐसा क्या मिला, जिससे मौत की पूरी कहानी बदल गई?

    25 अगस्त की रात चेंबूर में क्या हुआ?

    मामला RCF Police Station के तहत आने वाली Mysore Colony के Bungalow No. 57-A का है। खबर के मुताबिक 25 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे महिला की तबीयत अचानक खराब हो गई।

    पुलिस के मुताबिक इससे कुछ समय पहले महिला और उसके Boyfriend के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी को कथित तौर पर महिला के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध होने का शक था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हुई।

    कुछ देर बाद मामला शांत हुआ, लेकिन इसके बाद महिला की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

    अचानक उल्टी हुई और बिगड़ती चली गई हालत

    महिला को उल्टी होने लगी और उसकी हालत खराब होती गई। परिवार के लोग उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे।

    पुलिस के मुताबिक उसे पहले एक Private Hospital ले जाया गया और बाद में चेम्बूर के सरकारी Shatabdi Hospital पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    उस वक्त तक यह मामला एक अचानक हुई मौत जैसा ही नजर आ रहा था।

    लेकिन इसके बाद जांच में ऐसी कड़ी सामने आई, जिसने पुलिस का शक बढ़ा दिया।

    मौत के बाद पुलिस ने जांच का रुख बदला

    महिला की मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस ने उसके आसपास मौजूद लोगों और घटना से जुड़े लोगों के बयान लेने शुरू किए।

    मेडिकल और Post-mortem findings को भी जांच में शामिल किया गया। इसी दौरान पुलिस को महिला की मौत सामान्य तरीके से होने पर संदेह हुआ।

    जांच आगे बढ़ी तो उसके Boyfriend की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई।

    यहीं से इस केस का सबसे बड़ा राज सामने आने लगा।

    कहानी में Cold Drink की एंट्री कैसे हुई?

    पुलिस के मुताबिक विवाद के बाद आरोपी ने महिला को एक Cold Drink दी थी। महिला ने उसे पीने के बाद ही तबीयत खराब होने की शिकायत शुरू की और उसकी हालत बिगड़ गई।

    इसके बाद पुलिस ने Cold Drink और उसमें कथित तौर पर मिलाए गए जहरीले पदार्थ के angle से जांच शुरू की।

    यानी जिस चीज को शुरुआत में एक सामान्य पेय समझा जा रहा था, वही अब इस पूरे Murder Investigation की अहम कड़ी बन गई।

    कुछ पुलिस सूत्रों में जहरीले पदार्थ को Mothballs यानी डांबर की गोलियों से जोड़ा गया। लेकिन इसकी exact nature की पुष्टि Forensic जांच के बाद की सामने आएगी।

    पुलिस को Boyfriend पर क्यों हुआ शक?

    पुलिस का आरोप है कि Ashish Magar को महिला के Character और उसके किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध को लेकर शक था।

    इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस के मुताबिक इसके बाद महिला को कथित तौर पर जहरीली Cold Drink दी गई।

    जांच में पुलिस इस बात को भी देख रही है कि महिला की मौत को Natural या Accidental Death जैसा दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई थी।

    यही वजह है कि मामला सिर्फ एक suspicious death तक सीमित नहीं रहा।

    महिला Pregnant भी थी

    इस मामले को और गंभीर बनाने वाली जानकारी यह है कि महिला करीब 2 से 2.5 महीने की Pregnant बताई जा रही थी।

    यह जानकारी भी Medical और Post-mortem जांच के दौरान सामने आने की बात कही गई है।

    28 अगस्त को Murder Case दर्ज

    जांच आगे बढ़ने के बाद 28 अगस्त को BNS की Section 103(1) के तहत Murder Case दर्ज किए जाने की रिपोर्ट है।

    इसके बाद पुलिस ने Ashish Magar को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने आरोपी को पांच दिन की Police Custody में भेजा है।

    अब पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में लगी है।

    अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है?

    जांच में कई अहम सवालों का जवाब मिलना बाकी है—

    • Cold Drink में कथित तौर पर कौन-सा पदार्थ मिलाया गया था?
    • वह पदार्थ आरोपी तक कैसे पहुंचा?
    • महिला ने Drink किस परिस्थिति में पी?
    • Medical और Forensic findings क्या कहती हैं?
    • घटना के समय कौन-कौन लोग मौजूद थे?
    • आरोपी के बयान और बाकी सबूतों में कितना मेल है?
    • क्या मौत को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई थी?
    • महिला और आरोपी के बीच विवाद का असली कारण क्या था?

    इन सवालों के जवाब इस केस की आगे की दिशा तय करेंगे।

    आरोपी गिरफ्तार है, लेकिन दोषी साबित नहीं हुआ

    फिलहाल Ashish Magar पुलिस की गिरफ्त में है और मामले की जांच जारी है। Police Custody में उससे पूछताछ और उपलब्ध सबूतों की जांच की जा रही है।

    यह भी समझना जरूरी है कि गिरफ्तारी का मतलब अदालत में दोष साबित होना नहीं है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध सबूतों के आधार पर होगी।

    चेंबूर केस में सबसे बड़ा सवाल अब यही

    एक महिला की अचानक मौत से शुरू हुई यह कहानी अब Murder Investigation तक पहुंच चुकी है। विवाद, अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत और फिर Cold Drink से जुड़े Poisoning के शक ने इस मामले को पूरी तरह बदल दिया है।

    अब सबकी नजर इस बात पर है कि Police Custody और Forensic जांच के बाद इस केस में और कौन-सी कड़ियां सामने आती हैं और उस रात वास्तव में क्या हुआ था।

  • मुंबई के सरकारी अस्पताल में लापरवाही का आरोप, गर्भ में बच्चे की मौत

    मुंबई के सरकारी अस्पताल में लापरवाही का आरोप, गर्भ में बच्चे की मौत

    मुंबई के राजावाड़ी सरकारी अस्पताल में गर्भ में बच्चे की मौत के बाद महिला ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस ने जांच शुरू कर दस्तावेज मांगे हैं।

    मुंबई: घाटकोपर पूर्व स्थित राजावाड़ी अस्पताल में गर्भ में बच्चे की मौत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। गोवंडी की 33 वर्षीय हीरा भंडारी ने डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

    हीरा का दावा है कि 19 अगस्त को डॉक्टरों ने उन्हें C-Section की लिखित सलाह दी थी। इसके बावजूद उनकी डिलीवरी नहीं कराई गई और उन्हें सोनोग्राफी के लिए बुलाया जाता रहा। करीब एक हफ्ते बाद 26 अगस्त को डॉक्टरों ने उनके बच्चे को गर्भ में मृत बताया।

    19 अगस्त को दी गई थी C-Section की सलाह

    हीरा के मुताबिक, 19 अगस्त को डॉक्टरों ने C-Section कराने की लिखित सलाह दी थी। परिवार को उम्मीद थी कि अब जल्द डिलीवरी होगी, लेकिन उनका आरोप है कि अस्पताल में ऐसा नहीं हुआ।

    परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्हें लगातार सोनोग्राफी कराने के लिए कहा गया और डिलीवरी आगे टलती रही।

    24 अगस्त की रात बच्चे की movement महसूस नहीं हुई

    24 अगस्त की आधी रात को हीरा को बच्चे की movement महसूस नहीं हुई। वह तुरंत राजावाड़ी अस्पताल पहुंचीं।

    उनके मुताबिक, अस्पताल में सोनोग्राफी की गई और उन्हें बताया गया कि बच्चा ठीक है। स्टाफ ने कथित तौर पर कहा कि गर्भ में बच्चा बड़ा होने के बाद उसकी movement कम हो सकती है।

    इसके बाद उन्हें 26 अगस्त को दोबारा अस्पताल आने के लिए कहा गया।

    26 अगस्त को एक घंटे में बदल गई स्थिति

    26 अगस्त की सुबह करीब 7 बजे हीरा अस्पताल पहुंचीं। उनके मुताबिक, करीब 10 बजे सोनोग्राफी की गई और डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा ठीक है।

    लेकिन करीब 11 बजे पेट में दर्द होने के बाद फिर सोनोग्राफी की गई। इस बार डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे की गर्भ में ही मौत हो चुकी है।

    इस जानकारी के बाद परिवार सदमे में आ गया।

    परिवार ने डॉक्टरों से मांगा जवाब

    हीरा की बहन सोनी पाटिल का आरोप है कि परिवार ने डॉक्टरों से बच्चे की मौत की वजह पूछी तो अलग-अलग कारण बताए गए।

    परिवार के मुताबिक, गर्भ में पानी के असंतुलन से लेकर पीलिया तक की बातें कही गईं। परिवार का कहना है कि उन्हें यह साफ जवाब नहीं मिला कि बच्चे की हालत कब बिगड़ी और 19 अगस्त को C-Section की सलाह के बाद डिलीवरी क्यों नहीं हुई।

    अस्पताल में विरोध के बाद पुलिस पहुंची

    बच्चे की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में विरोध किया। परिवार का दावा है कि इस दौरान कुछ अन्य गर्भवती महिलाओं के रिश्तेदार भी उनके साथ आए और उन्होंने अस्पताल को लेकर अपने अनुभव बताए।

    इसके बाद परिवार तिलक नगर पुलिस स्टेशन पहुंचा।

    परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी लिखित शिकायत नहीं ली गई और हीरा की सास को पुलिस स्टेशन से बाहर कर दिया गया।

    पुलिस ने आरोप से अलग बताई घटना

    ड्यूटी पर मौजूद API सरिता मनवर ने परिवार के इस आरोप से इनकार किया।

    उनके मुताबिक, परिवार उस दिन पुलिस स्टेशन शिकायत करने नहीं आया था। पुलिस को राजावाड़ी अस्पताल से फोन मिला था कि बच्चे की मौत के बाद कुछ रिश्तेदारों ने अस्पताल में हंगामा किया है।

    पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और हीरा के पति गणेश भंडारी के साथ बातचीत की। मनवर के मुताबिक, परिवार को सलाह दी गई कि बच्चे का शव तुरंत न लिया जाए, ताकि आगे की जांच में परेशानी न हो।

    उन्होंने कहा कि किसी रिश्तेदार को पुलिस स्टेशन से बाहर नहीं निकाला गया था। केवल महिला वार्ड और OT परिसर से बाहर जाने को कहा गया था, क्योंकि वहां दूसरी गर्भवती महिलाएं मौजूद थीं।

    पुलिस ने मांगे अस्पताल के दस्तावेज

    Senior PI संतोष धेमरे के मुताबिक, पुलिस ने अस्पताल से मेडिकल दस्तावेज और रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं।

    अब मामले से जुड़े सभी दस्तावेज जेजे अस्पताल की लापरवाही जांच समिति को भेजे जाएंगे। समिति की सिफारिश के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    राजावाड़ी अस्पताल ने लापरवाही के आरोप से किया इनकार

    राजावाड़ी अस्पताल प्रशासन ने परिवार के आरोपों को खारिज किया है।

    अस्पताल का कहना है कि OT में maintenance होना सामान्य प्रक्रिया है। अगर एक OT में काम चल रहा हो तो दूसरा OT उपलब्ध रहता है।

    अस्पताल के मुताबिक, 26 अगस्त को कम से कम 5 से 6 C-Section किए गए थे। इसलिए OT उपलब्ध नहीं होने के कारण डिलीवरी में देरी हुई, यह कहना सही नहीं है।

    अस्पताल ने बताया कि हीरा के बच्चे की heartbeat जांच के दौरान सुनाई नहीं दी। इसके बाद सोनोग्राफी की गई, जिसमें बच्चे की मौत की पुष्टि हुई।

    अब जांच में सामने आएगा सच

    इस मामले में फिलहाल परिवार और अस्पताल के दावे अलग-अलग हैं। परिवार का कहना है कि 19 अगस्त को C-Section की सलाह के बाद भी डिलीवरी नहीं हुई और 24 अगस्त की रात बच्चे की movement नहीं होने के बाद भी उन्हें 26 अगस्त तक इंतजार करना पड़ा।

    वहीं अस्पताल ने OT की कमी और लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।

    अब 19 अगस्त की C-Section सलाह, सोनोग्राफी रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज से जुड़े बाकी दस्तावेज जांच में अहम होंगे। जेजे अस्पताल की जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा कि बच्चे की मौत की मेडिकल वजह क्या थी और क्या इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी।

  • BMC Mayor पर BJP-शिंदे सेना में नया टकराव! सवा साल के फॉर्मूले ने बढ़ाया मुंबई का सियासी सस्पेंस

    BMC Mayor पर BJP-शिंदे सेना में नया टकराव! सवा साल के फॉर्मूले ने बढ़ाया मुंबई का सियासी सस्पेंस

    मुंबई BMC Mayor को लेकर BJP और शिंदे सेना आमने-सामने हैं। शिंदे ने सवा साल के power-sharing फॉर्मूले का दावा किया, BJP ने अनभिज्ञता जताई। जानें पूरा नंबर गेम।

    मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी BMC में सत्ता संभाल रही BJP और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच Mayor पद को लेकर नया सियासी ट्विस्ट सामने आया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि BJP और शिवसेना के बीच Mayor पद को लेकर power-sharing का फॉर्मूला पहले ही तय हो चुका है। इसके मुताबिक मौजूदा BJP Mayor ऋतु तावड़े अपने ढाई साल का कार्यकाल पूरा करेंगी। इसके बाद अगले ढाई साल में पहले सवा साल शिवसेना का Mayor और आखिरी सवा साल फिर BJP का Mayor रहेगा।

    लेकिन शिंदे के इस दावे के बाद कहानी और दिलचस्प हो गई। BJP के वरिष्ठ नेता और मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी सहमति की जानकारी नहीं है। Mayor ऋतु तावड़े और BMC में BJP के गुटनेता गणेश खणकर ने भी कहा कि ऐसे बड़े फैसले senior leadership के स्तर पर ही लिए जाएंगे। यानी एक तरफ शिंदे इस फॉर्मूले को तय हुआ बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ BJP के कई बड़े चेहरे इससे अनजान नजर आ रहे हैं।

    आखिर सवा साल का ये Mayor Formula है क्या?

    BMC में अभी BJP की रितु तावड़े Mayor हैं। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक उनका शुरुआती ढाई साल का कार्यकाल BJP के हिस्से में है। शिंदे के दावे के अनुसार इसके बाद अगले ढाई साल को दो हिस्सों में बांटा जाएगा।

    अवधिMayor का दावा किया गया फॉर्मूला
    पहला ढाई सालBJP
    अगला सवा सालशिंदे सेना
    आखिरी सवा सालBJP

    यानी पांच साल के पूरे कार्यकाल में BJP को कुल साढ़े तीन साल और शिंदे सेना को सवा साल Mayor पद मिलने की बात सामने आई है। यह वही फॉर्मूला है जिसकी चर्चा BMC चुनाव के बाद से राजनीतिक गलियारों में चलती रही है और फरवरी में भी शिंदे सेना ने कम से कम सवा साल के Mayor पद की मांग रखी थी।

    लेकिन क्या सवा साल का Mayor कानून में लिखा है?

    यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। सवा साल का power-sharing फॉर्मूला BMC Act में लिखा हुआ कोई अलग कानूनी प्रावधान नहीं है। यह BJP और शिंदे सेना के बीच कथित political understanding है।

    Mayor का चुनाव BMC के councillors में से होता है और Mayor का सामान्य कार्यकाल ढाई साल का होता है। इसलिए अगर राजनीतिक तौर पर सवा साल के rotation पर सहमति है, तो उस समय की कानूनी प्रक्रिया और लागू reservation व्यवस्था के मुताबिक नया Mayor चुनना होगा।

    यानी आज शिंदे सेना का दावा सामने आने का मतलब यह नहीं है कि 2028 में उसका Mayor अपने आप बन जाएगा। उस समय चुनाव की प्रक्रिया, House का समीकरण और लागू reservation rules भी अहम होंगे।

    BJP ने फॉर्मूले से किनारा किया तो मामला क्यों गंभीर है?

    क्योंकि BMC में BJP सबसे बड़ी पार्टी है। जनवरी 2026 के चुनाव में BJP को 89 और शिंदे सेना को 29 सीटें मिली थीं। दोनों मिलकर 118 पर पहुंचते हैं, जबकि 227 सदस्यीय सदन में सामान्य बहुमत का आंकड़ा 114 है।

    यानी चुनावी नतीजों के हिसाब से Mahayuti के पास बहुमत से चार सीट ज्यादा थीं। हालांकि पांच पार्षदों के OBC certificate से जुड़े मामलों में अयोग्यता के बाद House की effective strength बदलने की प्रक्रिया भी चल रही है। नए पार्षद आने के बाद Mahayuti की संख्या बढ़ने की संभावना बताई गई है।

    इस नंबर गेम का सीधा मतलब है कि BJP सबसे बड़ी पार्टी जरूर है, लेकिन BMC में Mahayuti की सत्ता के लिए शिंदे सेना का 29 पार्षदों वाला bloc राजनीतिक तौर पर काफी अहम है।

    शिंदे सेना को Mayor पद की जरूरत क्यों?

    यही इस पूरे विवाद का असली राजनीतिक angle है।

    BMC लंबे समय तक मुंबई की Shiv Sena politics का सबसे बड़ा गढ़ रहा है। अब BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है और शिंदे सेना भी सत्ता में साझेदार है। ऐसे में अगर शिंदे सेना को पांच साल के कार्यकाल में सवा साल Mayor मिलता है, तो उसे Mumbai politics में अपनी स्वतंत्र political identity मजबूत करने का बड़ा मौका मिलेगा।

    यह सिर्फ Mayor की कुर्सी का सवाल नहीं है। यह संदेश भी होगा कि BMC में BJP सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद Shinde Sena alliance में एक महत्वपूर्ण stakeholder है।

    असली ताकत सिर्फ Mayor की कुर्सी में नहीं है

    BMC की सत्ता को समझने के लिए Mayor के साथ committees का खेल भी समझना जरूरी है।

    BMC में Standing, Improvement, Education और BEST जैसी चार बड़ी statutory committees हैं। इनमें Standing Committee को सबसे अहम माना जाता है क्योंकि बड़े financial और civic infrastructure decisions में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फरवरी में BJP के पास Standing और Education committees की chairmanship गई, जबकि शिंदे सेना को Improvement और BEST committees मिलीं।

    यानी BJP और शिंदे सेना के बीच power-sharing की तस्वीर पहले से सिर्फ Mayor तक सीमित नहीं रही है।

    इसीलिए अमेय घोले का यह दावा भी महत्वपूर्ण है कि committees का बंटवारा पहले से तय योजना के मुताबिक हुआ था। हालांकि BJP की तरफ से इस कथित overall formula पर सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।

    BMC में एक और दिलचस्प power equation

    फरवरी में शिंदे सेना के 29 पार्षदों और NCP के दोनों गुटों के कुल चार पार्षदों ने BMC में एक bloc के तौर पर registration किया था। इससे committee-level arithmetic में भी उनकी bargaining position मजबूत हुई।

    इससे साफ है कि BMC में political parties सिर्फ Mayor पद पर निर्भर नहीं हैं। Committee positions, financial decisions और local civic work में influence भी सत्ता का बड़ा हिस्सा हैं।

    BJP और शिंदे सेना के बीच तनाव के संकेत पहले भी मिले

    Mayor Formula पर विवाद अचानक सामने नहीं आया है। BMC में Deputy Mayor संजय घाड़ी को लेकर BJP और शिंदे सेना के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं।

    Mumbai Clean League के एक कार्यक्रम में घाड़ी ने protocol को लेकर आपत्ति जताई थी। Mayor की गैरमौजूदगी में उन्हें मंच पर चौथे स्थान पर रखे जाने पर सवाल उठे और अमेय घोले ने BMC से apology की मांग की थी।

    इसके बाद नालों की सफाई के inspection को लेकर भी घाड़ी ने कहा था कि उन्हें साथ नहीं लिया गया। यानी मामला सिर्फ एक पद या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा है।

    घाड़ी ने BMC के ‘Nisarg’ bungalow की मांग भी की थी। BJP और Mayor ने इस मांग का समर्थन किया था, लेकिन बाद में bungalow Additional Municipal Commissioner अविनाश धाकने को allot हो गया।

    अब कहानी में आया Operation Tiger

    BMC की राजनीति में एक और factor शिंदे सेना के लिए अहम हो सकता है—Operation Tiger।

    इस अभियान के जरिए शिवसेना UBT के करीब 45 पार्षदों को अपने साथ लाने की चर्चा पहले से चल रही है। 45 का आंकड़ा political target या reported claim के तौर पर सामने आया है, इसे अभी 45 पार्षदों के पाला बदलने की confirmed खबर नहीं माना जा सकता।

    अगर आने वाले समय में UBT के कुछ पार्षद शिंदे सेना के साथ जाते हैं, तो BMC में शिंदे सेना की numerical और political bargaining power बढ़ सकती है।

    यही वजह है कि Mayor Formula और Operation Tiger को अलग-अलग घटनाओं की तरह देखना मुश्किल है। एक तरफ शिंदे सेना Mayor पद में अपना हिस्सा मांग रही है, दूसरी तरफ उसका संगठनात्मक प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों की चर्चा है।

    BJP के सामने भी बड़ा political dilemma

    यहां BJP के सामने एक दिलचस्प स्थिति बनती है।

    अगर BJP UBT को कमजोर करने के लिए Operation Tiger को राजनीतिक तौर पर बढ़ावा देती है, तो उसका फायदा शिंदे सेना को भी मिल सकता है। शिंदे सेना की संख्या और influence बढ़ा तो आगे Mayor, committees और BMC के दूसरे फैसलों में उसकी bargaining power भी बढ़ सकती है।

    दूसरी तरफ अगर BJP Mayor पद पूरी तरह अपने पास रखने पर जोर देती है, तो alliance के अंदर power-sharing को लेकर असहजता बढ़ सकती है।

    यानी BJP के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि Mayor किस पार्टी का होगा। सवाल यह भी है कि Mumbai BMC में alliance का power balance कितना BJP-centric और कितना shared रहेगा।

    UBT के लिए भी बड़ा खतरा

    BMC में BJP के बाद UBT शिवसेना सबसे बड़ी opposition force है। ऐसे में अगर Operation Tiger के जरिए UBT के पार्षद टूटते हैं, तो उसका असर सिर्फ BMC की संख्या पर नहीं बल्कि ठाकरे परिवार की Mumbai political base पर भी पड़ सकता है।

    BMC लंबे समय से Thackeray-led Shiv Sena की Mumbai politics का सबसे बड़ा political symbol रहा है। अब BJP के सत्ता में आने के बाद Shinde Sena अगर UBT के पार्षदों को अपने साथ जोड़ती है, तो आने वाले समय में यह सवाल और बड़ा होगा कि Mumbai में Shiv Sena की political legacy का असली वारिस कौन है।

    Mayor की कुर्सी से आगे क्या बदलेगा?

    अगर शिंदे सेना का सवा साल वाला दावा आगे चलकर औपचारिक political agreement के रूप में सामने आता है, तो Mumbai की politics में तीन बड़े असर दिख सकते हैं।

    पहला, शिंदे सेना को BMC में अपनी अलग पहचान मजबूत करने का मौका मिलेगा।

    दूसरा, BJP और शिंदे सेना के बीच alliance के भीतर power-sharing का नया balance बनेगा।

    तीसरा, UBT के पार्षदों को अपने साथ लाने की कोशिशें तेज हुईं तो BMC का पूरा number game बदल सकता है।

    लेकिन अभी इन तीनों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस agreement का दावा शिंदे कर रहे हैं, क्या BJP leadership भी उसे उसी रूप में स्वीकार करती है?

    असली सवाल अब यही है

    BMC में BJP के पास सबसे ज्यादा पार्षद हैं। शिंदे सेना के पास संख्या कम है, लेकिन alliance arithmetic में उसकी भूमिका अहम है। Mayor पद का कथित सवा साल का फॉर्मूला इसी bargaining power का संकेत माना जा रहा है।

    और इसी वजह से आने वाले समय में सिर्फ यह देखना काफी नहीं होगा कि अगला Mayor कौन बनेगा।

    नजर इस बात पर भी रहेगी कि BJP और शिंदे सेना के बीच BMC की बाकी committees, civic projects और political influence का बंटवारा किस तरह होता है।

    फिलहाल एक बात साफ है—मुंबई की सबसे बड़ी civic body में Mahayuti की सत्ता कायम है, लेकिन Mayor की कुर्सी ने alliance के अंदर power-sharing का सवाल फिर से सामने ला दिया है। शिंदे का दावा सामने आ चुका है, BJP के कई बड़े नेता इससे अनजान हैं और अब निगाहें senior leadership के अगले फैसले पर टिक गई हैं।

  • मुंबई में तबेले के दूध के दाम में 9 रुपये का बड़ा इजाफा, 1 सितंबर से नया रेट लागू

    मुंबई में तबेले के दूध के दाम में 9 रुपये का बड़ा इजाफा, 1 सितंबर से नया रेट लागू

    मुंबई में तबेले के ताजे भैंस के दूध का रेट 1 सितंबर से ₹9 बढ़ेगा। जानिए नया wholesale rate, retail कीमत, घर के budget और मिठाई-लस्सी पर असर।

    मुंबई: मुंबईकरों के लिए दूध को लेकर बड़ी खबर है। तबेले से मिलने वाले ताजे भैंस के दूध का wholesale rate 1 सितंबर 2026 से 9 रुपये प्रति लीटर बढ़ने वाला है। मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (MMPA) ने मौजूदा 93 रुपये प्रति लीटर के rate को बढ़ाकर 102 रुपये करने का फैसला किया है।

    नई दर 1 सितंबर से लागू होगी और 28 फरवरी 2027 तक रहेगी। इसके बाद दूध उत्पादकों की दोबारा बैठक होगी और उस समय के हालात को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा।

    लेकिन मुंबईकरों के लिए बड़ा सवाल अब यह है कि wholesale rate बढ़ने के बाद उनके इलाके में तबेले का दूध कितने रुपये लीटर मिलेगा।

    1 सितंबर से दूध का नया wholesale rate क्या होगा?

    अभी तबेले के ताजे भैंस के दूध का wholesale rate 93 रुपये प्रति लीटर है। 1 सितंबर से इसमें 9 रुपये की बढ़ोतरी होगी और नया wholesale rate 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।

    जानकारीरेट
    मौजूदा wholesale rate₹93/L
    1 सितंबर से नया rate₹102/L
    बढ़ोतरी₹9/L
    नई दर1 सितंबर 2026 से
    लागू रहेगी28 फरवरी 2027 तक

    ध्यान देने वाली बात यह है कि 102 रुपये wholesale rate है। ग्राहक को दुकान या तबेले पर यही final retail price देना होगा, ऐसा जरूरी नहीं है।

    Retail में कितना महंगा हो सकता है दूध?

    Wholesale rate बढ़ने के बाद अब नजर retail market पर है।

    MMPA Chairman C.K. Singh के मुताबिक कुछ इलाकों में तबेले के ताजे दूध का retail rate 115 से 125 रुपये प्रति लीटर या उससे ऊपर जा सकता है। हालांकि यह पूरे मुंबई के लिए तय retail price नहीं है। अलग-अलग इलाके और दूध विक्रेता के हिसाब से अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

    यानी 1 सितंबर के बाद मुंबईकरों को अपने इलाके में नया retail rate कितना तय होता है, उस पर नजर रखनी होगी।

    दूध का दाम बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?

    दूध उत्पादकों का कहना है कि पिछले समय में दुधारू पशुओं के साथ-साथ उनके खाने-पीने की लागत भी बढ़ी है।

    बैठक में दाना, तुवर चूनी, चना चूनी, घास, पिंडा और भूसे जैसी चीजों की बढ़ी कीमतों का मुद्दा उठाया गया। दूध उत्पादकों के मुताबिक इन लागतों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।

    इसी वजह से तबेला मालिकों ने wholesale rate में 15 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने की मांग रखी थी। लंबी चर्चा के बाद 9 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी का फैसला लिया गया।

    बोरीवली के National Dairy Farm के मालिक नागेश सिंह ने भी बढ़ती पशु और चारे की लागत को लेकर परेशानी जताई है। उनका कहना है कि मुंबई में तबेला चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

    घर के महीने के budget पर कितना असर पड़ेगा?

    दूध रोज की जरूरत है, इसलिए rate बढ़ने का असर सीधे kitchen budget पर पड़ सकता है।

    अगर retail में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी होती है, तो सिर्फ समझने के लिए हिसाब देखें:

    रोज की खपतरोज extra खर्च30 दिन में extra
    1 लीटर₹9₹270
    2 लीटर₹18₹540
    3 लीटर₹27₹810
    4 लीटर₹36₹1,080

    यह calculation सिर्फ 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को आधार मानकर है। अगर किसी इलाके में retail rate इससे ज्यादा बढ़ता है, तो परिवार का monthly खर्च भी उसी हिसाब से बढ़ेगा।

    क्या packet milk भी 9 रुपये महंगा होगा?

    नहीं। MMPA का यह फैसला ताजे भैंस के तबेले वाले दूध के wholesale rate से जुड़ा है।

    इसका मतलब यह नहीं है कि Amul, Mother Dairy या किसी दूसरे packaged milk brand का दूध भी 1 सितंबर से अपने आप 9 रुपये महंगा हो जाएगा। Packaged milk कंपनियां अपने product के rate अलग से तय करती हैं।

    इसलिए packet milk खरीदने वाले ग्राहकों पर इस फैसले का automatic 9 रुपये का असर नहीं माना जा सकता।

    मुंबई में कितने sellers पर असर पड़ेगा?

    MMPA के मुताबिक मुंबई में 3,000 से ज्यादा retail sellers ताजे भैंस का दूध बेचते हैं। Wholesale rate बढ़ने के बाद इस पूरे supply network की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

    इसका असर सिर्फ घर में दूध खरीदने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। जिन कारोबारों में रोज बड़ी मात्रा में दूध इस्तेमाल होता है, उनके लिए भी लागत बढ़ने की संभावना है।

    मिठाई, लस्सी और छाछ के दाम पर भी दबाव

    दूध की कीमत बढ़ने का असर दूध से बनने वाले दूसरे products पर भी पड़ सकता है। मिठाई, दही, लस्सी, छाछ, घी और milk-based desserts बनाने वाले कारोबारियों की raw material cost बढ़ सकती है।

    इस बार बढ़ोतरी का समय भी महत्वपूर्ण है। सितंबर से festive और marriage season शुरू हो रहा है, जब दूध की मांग सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ने की उम्मीद रहती है।

    MMPA Chairman C.K. Singh के मुताबिक festive और marriage season में demand सामान्य से 35 से 40 फीसदी तक बढ़ सकती है।

    ऐसे में कारोबारियों के सामने बढ़ी हुई लागत को खुद absorb करने या उसका कुछ हिस्सा ग्राहक की कीमत में जोड़ने का विकल्प होगा। इसलिए हर दुकान पर कीमत एक जैसी बढ़ेगी, यह जरूरी नहीं है।

    इस बार की बढ़ोतरी इतनी बड़ी क्यों मानी जा रही है?

    मुंबई में तबेले के भैंस के दूध के wholesale rate में पिछले कुछ वर्षों में कई बार बदलाव हुआ है। लेकिन इस बार 93 से 102 रुपये का jump पिछले revisions की तुलना में काफी बड़ा है।

    अवधिWholesale rate
    2022₹73 → ₹78
    2023₹80 → ₹85 → ₹87
    2024₹87 → ₹89
    2025₹89 → ₹91
    फरवरी 2026₹91 → ₹93
    सितंबर 2026₹93 → ₹102

    MMPA की ओर से मौजूदा 9 रुपये की बढ़ोतरी को उसके करीब 70 साल के इतिहास की सबसे बड़ी बढ़ोतरी बताया गया है।

    दूध महंगा हुआ, लेकिन quality पर भी नजर

    दूध की कीमत बढ़ने के साथ उसकी quality और safety का सवाल भी अहम है। महाराष्ट्र FDA इस समय milk adulteration और food safety को लेकर लगातार कार्रवाई कर रहा है।

    FDA Commissioner तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में food safety inspections और raids का अभियान चल रहा है। मुंबई और आसपास दूध में मिलावट से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई हुई है।

    इसी वजह से MMPA की बैठक में तुकाराम मुंढे के काम की तारीफ भी हुई। हालांकि दूध के दाम बढ़ाने के फैसले को FDA की कार्रवाई से जोड़ना सही नहीं होगा। दूध उत्पादकों ने price hike की वजह पशुओं और feed की बढ़ी हुई लागत बताई है।

    अब मुंबईकरों की नजर किस पर रहेगी?

    1 सितंबर से wholesale rate 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। इसके बाद सबसे अहम चीज आपके इलाके का actual retail rate होगा।

    अगर wholesale बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा retail तक पहुंचता है, तो रोज दूध खरीदने वाले परिवारों के budget पर दबाव बढ़ेगा। वहीं festive season में मिठाई, लस्सी, दही, छाछ और दूसरे dairy products की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी तरफ packaged milk लेने वालों के लिए यह फैसला अपने आप 9 रुपये की बढ़ोतरी नहीं है।

    यानी 1 सितंबर से मुंबई में दूध की कीमतों में सिर्फ एक नया wholesale rate नहीं आ रहा है। आने वाले दिनों में असली तस्वीर retail market में साफ होगी—और इसी से पता चलेगा कि तबेले के दूध की यह बढ़ोतरी मुंबईकरों की रोजमर्रा की जेब और festive shopping पर कितनी भारी पड़ती है।

  • BREAKING: लोकल यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट! 37 लाइनें हटाकर नायगांव-भायंदर में बनेगी नई स्टैबलिंग व्यवस्था

    BREAKING: लोकल यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट! 37 लाइनें हटाकर नायगांव-भायंदर में बनेगी नई स्टैबलिंग व्यवस्था

    मुंबई लोकल यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट! पश्चिम रेलवे 37 स्टैबलिंग लाइन हटाकर नायगांव-भायंदर में नई व्यवस्था बनाएगा। जानिए लोकल पर क्या असर होगा।

    मुंबई: मुंबई की लोकल ट्रेन से रोज सफर करने वाले यात्रियों के लिए पश्चिम रेलवे की योजना से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। पांचवीं-छठी रेल लाइन और गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार के लिए मौजूदा स्टैबलिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। इसके तहत 37 मौजूदा स्टैबलिंग लाइनें हटाई जाएंगी और इनके बदले नायगांव-भायंदर के बीच नई स्टैबलिंग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

    पहली नजर में यह सिर्फ रेलवे की ट्रेन पार्किंग व्यवस्था बदलने की खबर लग सकती है, लेकिन इसके पीछे पश्चिमी उपनगरों में रेल क्षमता बढ़ाने की बड़ी योजना जुड़ी है। इसलिए इसका असर आने वाले समय में भायंदर, नायगांव, वसई, नालासोपारा और विरार की लोकल सेवाओं पर भी देखने को मिल सकता है।

    37 स्टैबलिंग लाइनें आखिर क्यों हटाई जा रही हैं?

    स्टैबलिंग लाइन उन जगहों को कहा जाता है जहां सेवा में नहीं रहने वाली लोकल ट्रेनों के रेक खड़े किए जाते हैं। नई मुख्य रेल लाइन बनाने के लिए जहां जगह चाहिए, वहीं इन रेक को खड़ा करने की सुविधा भी बनाए रखना जरूरी है।

    इसी वजह से रेलवे पुरानी स्टैबलिंग लाइनों को हटाकर उनकी जगह दूसरी जगह नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। यानी पुरानी जगह का इस्तेमाल नई रेल परियोजनाओं के लिए होगा और लोकल रेक के लिए वैकल्पिक सुविधा नायगांव-भायंदर के बीच तैयार की जाएगी।

    सबसे ज्यादा 22 लाइनें भायंदर से हटेंगी

    प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत कुल 37 मौजूदा स्टैबलिंग लाइन हटाने की योजना है।

    इसमें गोरेगांव उत्तर की 5, बोरीवली की 8, भायंदर की 22 और भायंदर दक्षिण की 2 लाइनें शामिल हैं।

    गोरेगांव उत्तर की 5 और बोरीवली की 4 स्टैबलिंग लाइनें गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार के लिए हटाई जाएंगी। वहीं बोरीवली-विरार पांचवीं-छठी रेल लाइन के लिए बोरीवली की बाकी 4, भायंदर की 22 और भायंदर दक्षिण की 2 लाइनें हटाने का प्रस्ताव है।

    इसमें सबसे बड़ा बदलाव भायंदर में होगा, जहां 22 स्टैबलिंग लाइनें हटाई जाएंगी।

    फिर लोकल ट्रेनें कहां खड़ी होंगी?

    यही इस योजना का अहम हिस्सा है।

    रेलवे नायगांव-भायंदर के बीच रेल कॉरिडोर के पश्चिमी हिस्से में नई स्टैबलिंग सुविधा तैयार करने की योजना बना रहा है। यहां 31 नई स्टैबलिंग लाइनें बनाने का प्रस्ताव है।

    इससे पुरानी लाइनें हटने के बाद भी सेवा से बाहर लोकल रेक को खड़ा करने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक जगह उपलब्ध रहेगी।

    नई सुविधा के लिए करीब 6,961.53 वर्ग मीटर जमीन की जरूरत होगी। इसमें निजी, सरकारी और नमक की खेती वाली जमीन शामिल है।

    क्या 31 नई लाइन का मतलब 31 नई लोकल ट्रेनें?

    ऐसा नहीं है।

    स्टैबलिंग लाइन का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन लोकल रेक को खड़ा करने के लिए होता है जो उस समय सेवा में नहीं होते। इसलिए 31 नई स्टैबलिंग लाइन बनने का सीधा मतलब 31 नई लोकल ट्रेनें शुरू होना नहीं है।

    लेकिन नई स्टैबलिंग सुविधा भविष्य में अतिरिक्त रेक और ट्रेन सेवाओं को संभालने के लिए जरूरी ढांचा जरूर तैयार करेगी।

    मुंबई की उपनगरीय रेल क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे 12 डिब्बों वाले 238 नए रेक की खरीद की दिशा में भी काम कर रहा है। इनकी स्वीकृत लागत 19,293 करोड़ रुपये बताई गई है। मुंबई क्षेत्र में रोज करीब 3,200 उपनगरीय ट्रेन सेवाएं चलती हैं। ऐसे में रेक को खड़ा करने और रखरखाव के लिए पर्याप्त जगह भी उतनी ही जरूरी है।

    असली बड़ा बदलाव बोरीवली-विरार की पांचवीं-छठी लाइन से आएगा

    स्टैबलिंग लाइन का यह पूरा बदलाव बोरीवली-विरार के बीच बनने वाली पांचवीं-छठी रेल लाइन से जुड़ा है।

    यह परियोजना करीब 26 किलोमीटर लंबी है और इसकी स्वीकृत लागत 2,184 करोड़ रुपये है। जुलाई 2026 के अंत तक इस परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 30 प्रतिशत बताई गई थी।

    इस नई रेल क्षमता से उपनगरीय लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों को संभालने में रेलवे को ज्यादा जगह मिलेगी। अभी इस व्यस्त हिस्से में सीमित रेल क्षमता के कारण अलग-अलग सेवाओं का परिचालन एक-दूसरे पर असर डाल सकता है।

    नई लाइनें तैयार होने के बाद लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को ज्यादा व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

    बोरीवली तक पहुंचेगी हार्बर लाइन

    इसी योजना का दूसरा बड़ा हिस्सा गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार है।

    करीब 7 किलोमीटर के इस विस्तार के बाद हार्बर लाइन को बोरीवली तक ले जाने की योजना है। परियोजना की स्वीकृत लागत 826 करोड़ रुपये है।

    इसका फायदा पश्चिमी उपनगरों के उन यात्रियों को हो सकता है जिन्हें हार्बर लाइन की तरफ जाने के लिए अभी दूसरी जगह जाकर ट्रेन बदलनी पड़ती है।

    बोरीवली तक हार्बर सेवा पहुंचने के बाद पश्चिमी उपनगरों और हार्बर नेटवर्क के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकती है।

    लोकल यात्रियों को असली फायदा क्या मिलेगा?

    सबसे बड़ा फायदा तुरंत टिकट या किराये में नहीं, बल्कि भविष्य की रेल क्षमता में दिखाई देगा।

    अगर पांचवीं-छठी लाइन, हार्बर विस्तार और नई स्टैबलिंग व्यवस्था तय योजना के मुताबिक पूरी होती है तो रेलवे के पास अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं के लिए ज्यादा परिचालन क्षमता होगी।

    इससे आगे चलकर ज्यादा लोकल चलाने, सेवाओं को व्यवस्थित करने और लंबी दूरी की ट्रेनों तथा उपनगरीय ट्रेनों के बीच बेहतर संचालन की गुंजाइश बढ़ सकती है।

    हालांकि सिर्फ 31 नई स्टैबलिंग लाइन के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि लोकल की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी या भीड़ तुरंत कम हो जाएगी। इसके लिए नए रेक, पटरियां, प्लेटफॉर्म, रखरखाव और समय-सारिणी में अतिरिक्त सेवाओं की जगह भी जरूरी होगी।

    6,961.53 वर्ग मीटर जमीन के अधिग्रहण का सवाल

    नई स्टैबलिंग व्यवस्था के लिए जमीन अधिग्रहण इस परियोजना का एक अहम हिस्सा है।

    प्रस्तावित जमीन में निजी और सरकारी जमीन के साथ नमक की खेती वाली जमीन भी शामिल है। इसलिए स्थानीय स्तर पर जमीन के इस्तेमाल और प्रभावित भूखंडों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे।

    हालांकि अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर बड़े पैमाने पर घरों के टूटने या लोगों के विस्थापन का दावा करना सही नहीं होगा। इसका वास्तविक असर जमीन अधिग्रहण की अंतिम प्रक्रिया और प्रभावित भूखंडों के विवरण से ही साफ होगा।

    पर्यावरण पर भी रहेगी नजर

    मुंबई में रेल विस्तार के साथ पर्यावरण का मुद्दा भी लगातार महत्वपूर्ण रहा है।

    बोरीवली-विरार पांचवीं-छठी लाइन परियोजना में मैंग्रोव से जुड़ा पर्यावरणीय मामला पहले सामने आ चुका है। परियोजना से जुड़े दस्तावेजों में मैंग्रोव हटाने की अनुमति और उसके बदले प्रतिपूरक पौधारोपण की व्यवस्था का उल्लेख है।

    इसलिए नई रेल क्षमता का फायदा महत्वपूर्ण है, लेकिन जमीन और पर्यावरण से जुड़े प्रभावों की निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी।

    क्या इससे मुंबई की लोकल की भीड़ कम होगी?

    यह सवाल सबसे ज्यादा यात्रियों के मन में होगा।

    सीधा जवाब है—इस परियोजना से भविष्य में क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन अकेले इसी वजह से भीड़ तुरंत कम होने की गारंटी नहीं है।

    रेलवे की योजना में नई पटरियों के साथ नए रेक और अतिरिक्त सेवाओं की क्षमता बढ़ाना भी शामिल है। 238 नए 12 डिब्बों वाले रेक इसी बड़े क्षमता विस्तार का हिस्सा हैं।

    इसलिए आने वाले समय में अगर नई रेल लाइनें और अतिरिक्त रेक दोनों समय पर उपलब्ध होते हैं, तो पश्चिमी उपनगरों में लोकल सेवाओं को बढ़ाने की ज्यादा गुंजाइश बन सकती है।

    एक आंकड़ा जो इस पूरी कहानी को समझाता है

    मुंबई क्षेत्र में रोज करीब 3,200 उपनगरीय ट्रेन सेवाओं के अलावा करीब 120 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का भी परिचालन होता है।

    इतने व्यस्त नेटवर्क में नई रेल लाइन का मतलब सिर्फ एक और पटरी जोड़ना नहीं है। इसके साथ ट्रेनें कहां खड़ी होंगी, कहां से चलेंगी और किस लाइन पर किस तरह का परिचालन होगा—इन सभी चीजों की योजना बनानी पड़ती है।

    यही वजह है कि 37 पुरानी स्टैबलिंग लाइन हटाकर नायगांव-भायंदर में नई व्यवस्था तैयार करने का फैसला पांचवीं-छठी लाइन और हार्बर विस्तार के साथ जोड़कर देखना होगा।

    31 नई लाइन का आंकड़ा क्यों अहम है?

    रेलवे के पुराने सरकारी विवरण में नायगांव क्षेत्र में 30 स्टैबलिंग लाइनें दर्ज थीं, जबकि मौजूदा योजना में 31 नई स्टैबलिंग लाइन तैयार करने की बात सामने आई है।

    यह अंतर अलग-अलग समय की योजना या स्टैबलिंग व्यवस्था के पुनर्गठन से जुड़ा हो सकता है। इसलिए अंतिम इंजीनियरिंग योजना के आधार पर इसकी स्थिति साफ होगी।

    लेकिन इतना तय है कि रेलवे मौजूदा रेक-स्टैबलिंग व्यवस्था को नई रेल परियोजनाओं के हिसाब से दोबारा व्यवस्थित कर रहा है।

    मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य

    बोरीवली-विरार पांचवीं-छठी रेल लाइन और गोरेगांव-बोरीवली हार्बर लाइन विस्तार को मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    अगर दोनों परियोजनाएं और उनसे जुड़ी स्टैबलिंग व्यवस्था तय समय पर तैयार हो जाती है, तो पश्चिमी उपनगरों में रेल नेटवर्क की तस्वीर काफी बदल सकती है।

    भायंदर और नायगांव में स्टैबलिंग व्यवस्था का पुनर्गठन, बोरीवली-विरार के बीच नई रेल लाइन और बोरीवली तक हार्बर लाइन का विस्तार—ये तीनों बदलाव मिलकर पश्चिम रेलवे को भविष्य की ज्यादा ट्रेन सेवाओं के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम होंगे।

    यानी 37 स्टैबलिंग लाइन हटने की यह खबर सिर्फ पुरानी ट्रेन पार्किंग जगह बदलने की कहानी नहीं है। इसके पीछे मुंबई की बढ़ती लोकल जरूरत के लिए नई रेल क्षमता तैयार करने की पूरी योजना जुड़ी हुई है।

  • मुंबई महापौर के सोशल मीडिया पर 25 लाख का विवाद, अब प्रस्ताव खारिज; जानिए पूरा मामला

    मुंबई महापौर के सोशल मीडिया पर 25 लाख का विवाद, अब प्रस्ताव खारिज; जानिए पूरा मामला

    मुंबई महापौर रितू तावडे के सोशल मीडिया प्रबंधन पर 25 लाख रुपये के प्रस्ताव से विवाद बढ़ा। किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाए, अब स्थायी समिति ने प्रस्ताव खारिज कर दिया।

    मुंबई: मुंबई महानगरपालिका में महापौर रितू तावडे के कार्यालय के सोशल मीडिया प्रबंधन को लेकर शुरू हुआ 25 लाख रुपये से ज्यादा का विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिस प्रस्ताव को लेकर विपक्ष ने मनपा के पैसों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे, उसे स्थायी समिति ने अब आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

    मामला सिर्फ 25 लाख रुपये का नहीं था। सवाल यह भी उठा कि जब मनपा के पास पहले से जनसंपर्क विभाग और सोशल मीडिया व्यवस्था मौजूद है, तो महापौर कार्यालय के लिए अलग से इतनी बड़ी रकम की जरूरत क्यों पड़ी?

    क्या था पूरा मामला?

    मनपा में महापौर कार्यालय के सोशल मीडिया प्रबंधन से जुड़ा 25 लाख 12 हजार 786 रुपये का प्रस्ताव सामने आया था। यह रकम 1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2027 तक एक साल की अवधि के लिए बताई गई थी।

    प्रस्ताव में महापौर कार्यालय की बैठकों, दौरे, निरीक्षण और दूसरे आधिकारिक कार्यक्रमों की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था की बात थी।

    मामले ने तब राजनीतिक रंग पकड़ लिया, जब यह सवाल उठने लगा कि क्या मुंबईकरों से मिलने वाले टैक्स का पैसा महापौर की सोशल मीडिया मौजूदगी और प्रचार पर खर्च किया जा रहा है।

    किशोरी पेडणेकर ने उठाए सवाल

    मुंबई मनपा में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने इस मुद्दे पर महापौर और सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोला।

    पेडणेकर का कहना था कि मुंबईकर टैक्स इसलिए नहीं देते कि उनकी मेहनत की कमाई सोशल मीडिया प्रचार पर खर्च हो। उनके मुताबिक शहर में सड़कें, गड्ढे, कचरा, नालियों और नालों की सफाई, ट्रैफिक और दूसरी बुनियादी नागरिक सुविधाओं से जुड़े सवाल अब भी मौजूद हैं।

    ऐसे में सोशल मीडिया प्रबंधन पर लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत पर उन्होंने सवाल खड़ा किया।

    विपक्ष की आपत्ति का सीधा सवाल यही था—जब मनपा के पास पहले से जनसंपर्क और सोशल मीडिया का ढांचा है, तो महापौर कार्यालय के लिए अलग खर्च क्यों?

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    लेकिन महापौर रितू तावडे का पक्ष क्या है?

    विवाद बढ़ने के बाद महापौर रितू तावडे ने सफाई दी कि इस पूरे मामले में उनकी तरफ से किसी एजेंसी को चुनने या ठेका देने में कोई दखल नहीं है।

    उनके मुताबिक, मनपा में सोशल मीडिया से जुड़ी एजेंसी पहले से काम कर रही है और पिछले करीब दो वर्षों से मनपा के सोशल मीडिया काम को संभाल रही है। महापौर ने यह भी कहा कि उनके कार्यालय से संबंधित तकनीकी जरूरतों के लिए कुछ कर्मचारियों की व्यवस्था की बात कही गई थी, जिसे लेकर उन्होंने पत्र दिया था।

    महापौर ने यह आरोप भी लगाया कि उनके नाम को इस मामले में राजनीतिक विवाद खड़ा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

    25 लाख का मतलब महापौर की निजी प्रसिद्धि के लिए अलग एजेंसी नहीं?

    यहीं इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू सामने आता है।

    मनपा और महापौर कार्यालय की सफाई के मुताबिक, 25 लाख रुपये किसी नई अलग एजेंसी को सिर्फ महापौर की निजी प्रसिद्धि के लिए देने का मामला नहीं था। मनपा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म संभालने वाली Runtime Solutions Private Limited को ही एक साल के लिए काम जारी रखने का प्रस्ताव था और उसी व्यवस्था के तहत महापौर कार्यालय के सोशल मीडिया काम को भी संभाला जाना था।

    यानी विपक्ष ने जिस खर्च को महापौर की सोशल मीडिया प्रसिद्धि से जोड़कर सवाल उठाया, मनपा का पक्ष यह है कि यह मनपा की मौजूदा सोशल मीडिया व्यवस्था से जुड़ा खर्च था, न कि महापौर के लिए अलग नई प्रचार एजेंसी की नियुक्ति।

    फिर विवाद इतना बढ़ा क्यों?

    विवाद इसलिए बड़ा क्योंकि प्रस्ताव में महापौर कार्यालय के सोशल मीडिया प्रबंधन के लिए 25 लाख 12 हजार 786 रुपये की रकम साफ तौर पर सामने आई।

    रिपोर्टों के मुताबिक यह खर्च करीब 2.09 लाख रुपये प्रति महीने और लगभग 6,900 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बैठता था। प्रस्ताव में महापौर के आधिकारिक कार्यक्रमों, बैठकों, निरीक्षण दौरों और सार्वजनिक गतिविधियों की जानकारी सोशल मीडिया पर पहुंचाने की बात थी।

    इसके बाद विपक्ष ने सवाल किया कि मनपा के पास पहले से जनसंपर्क विभाग और केंद्रीय सोशल मीडिया व्यवस्था होने के बावजूद इस तरह का अतिरिक्त खर्च जरूरी क्यों है।

    अब आया सबसे बड़ा मोड़

    इस पूरे विवाद का फिलहाल सबसे अहम अपडेट यह है कि स्थायी समिति ने 25 लाख रुपये वाले इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया।

    21 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक स्थायी समिति की बैठक में प्रस्ताव को ‘नॉट टेकन’ घोषित कर दिया गया। यानी जिस प्रस्ताव को लेकर पिछले दिनों सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए थे, वह फिलहाल मंजूरी की दिशा में आगे नहीं गया।

    बताया गया कि विवाद बढ़ने के बाद महापौर ने भी अपनी स्थिति साफ करते हुए कहा था कि स्थायी समिति के सामने आने वाले प्रस्ताव उनकी व्यक्तिगत अनुमति से नहीं आते और अगर उन्हें पहले से इसकी जानकारी होती तो वह इस प्रस्ताव को रोकने की कोशिश करतीं।

    मुंबईकरों के लिए असली सवाल क्या है?

    इस विवाद ने मनपा के खर्च को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।

    मुंबई जैसे शहर में जहां सड़क, गड्ढे, सफाई, नाले, ट्रैफिक और दूसरी नागरिक सुविधाएं लगातार लोगों की रोजमर्रा की परेशानी बनी रहती हैं, वहां सोशल मीडिया और प्रचार से जुड़े खर्च की जरूरत और उसका फायदा जनता को कितना मिलेगा—इसका हिसाब साफ होना जरूरी है।

    दूसरी तरफ मनपा का कहना है कि यह कोई नई अलग प्रचार एजेंसी नियुक्त करने का मामला नहीं था, बल्कि पहले से चल रही मनपा की सोशल मीडिया व्यवस्था से जुड़ा काम था।

    फिलहाल 25 लाख 12 हजार 786 रुपये का विवादित प्रस्ताव स्थायी समिति में आगे नहीं बढ़ा है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक सवाल जरूर छोड़ दिया है—मुंबईकरों के टैक्स से होने वाले हर खर्च की प्राथमिकता आखिर तय कैसे होनी चाहिए?

    एक नजर में

    मामलाजानकारी
    विवादमहापौर कार्यालय के सोशल मीडिया प्रबंधन का खर्च
    प्रस्तावित रकम25 लाख 12 हजार 786 रुपये
    अवधि1 अगस्त 2026 से 31 जुलाई 2027
    एजेंसीRuntime Solutions Private Limited
    मुख्य आपत्तिमनपा के मौजूदा सोशल मीडिया और जनसंपर्क ढांचे के बावजूद खर्च
    विपक्ष का रुखमुंबईकरों के टैक्स के पैसे के इस्तेमाल पर सवाल
    महापौर का पक्षअलग नई प्रचार एजेंसी नहीं, प्रक्रिया में उनका हस्तक्षेप नहीं
    ताजा स्थितिस्थायी समिति ने प्रस्ताव को ‘नॉट टेकन’ घोषित किया
  • मुंबई मझगांव में गणेश आगमन पर अंडे फेंकने से तनाव, FIR दर्ज; भारी पुलिस बंदोबस्त

    मुंबई मझगांव में गणेश आगमन पर अंडे फेंकने से तनाव, FIR दर्ज; भारी पुलिस बंदोबस्त

    मुंबई के मझगांव में गणेश आगमन शोभायात्रा पर अंडे फेंके जाने के बाद तनाव, एफआईआर और भारी पुलिस बंदोबस्त। आरोपी की तलाश, सीसीटीवी जांच जारी है। आरोपी नहीं पकड़ा

    मुंबई: मझगांव में रविवार रात गणेश प्रतिमा की आगमन के दौरान अंडे फेंके जाने के आरोप के बाद अचानक तनाव की स्थिति बन गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़क पर जमा हो गए और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। फिलहाल इलाके में हालात काबू में हैं और गणेश पंडाल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    मझगांवचा मोरया की प्रतिमा ले जाई जा रही थी

    पुलिस के मुताबिक, मझगांवचा मोरया गणेशोत्सव मंडल की गणेश प्रतिमा को पंडाल तक ले जाने के लिए आगमन शोभायात्रा निकाली जा रही थी। इसी दौरान पास की इमारतों की तरफ से कथित तौर पर अंडे फेंके गए। पुलिस के अनुसार इनमें से एक अंडा गणेश प्रतिमा पर जा गिरा, जिसके बाद शोभायात्रा में शामिल लोगों में नाराजगी फैल गई।

    मंडल के उपसचिव विवेक राणे ने बताया कि पंडाल से करीब 30 से 40 मीटर की दूरी पर स्थित एक इमारत की तरफ से अंडे फेंके जाने का आरोप है। आयोजकों ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    इसके बाद सड़क पर बड़ी भीड़ जुट गई

    अंडा फेंके जाने की खबर फैलने के बाद शोभायात्रा में शामिल लोग संबंधित इमारत के बाहर जमा हो गए। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने लोगों को शांत कराया और भीड़ को वहां से हटाया।

    खबर के मुताबिक, इस दौरान करीब 10 हजार से 15 हजार लोग सड़क पर जमा हो गए थे। तनाव चार घंटे से ज्यादा समय तक बना रहा और सोमवार सुबह तक स्थिति नियंत्रण में आने की बात सामने आई है।

    मझगांव में तनाव बढ़ने के बाद पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई और गणेश पंडाल के आसपास भी जवान तैनात किए गए। मुंबई पुलिस के मुताबिक अब स्थिति शांतिपूर्ण और नियंत्रण में है।

    डीसीपी जयंत मीणा मौके पर पहुंचे

    स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, पुलिस उपायुक्त जयंत मीणा ने मौके पर पहुंचकर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भीड़ को शांत कराया गया और इलाके में अतिरिक्त बंदोबस्त लगाया गया।

    भायखला पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया मामला

    भायखला पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और 196 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार जांच जारी है और फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

    धारा 299 जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों से जुड़ी है, जबकि धारा 196 अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने या सद्भाव बिगाड़ने वाले कृत्यों से संबंधित है।

    आखिर अंडे किस इमारत से फेंके गए?

    यही सवाल अब पुलिस की जांच का सबसे अहम हिस्सा है। शुरुआती पुलिस जानकारी में अंडे कथित तौर पर कॉन्टिनेंटल हाइट्स इमारत की तरफ से फेंके जाने की बात सामने आई है, लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक घटनास्थल के आसपास मौजूद तीन से चार बड़ी इमारतों में से वास्तव में अंडे किस इमारत से फेंके गए, यह अभी साफ नहीं हुआ है।

    मंडल की तरफ से एक खास इमारत पर शक जताया गया है, लेकिन पुलिस सभी संभावनाओं की जांच कर रही है। इसलिए अभी किसी व्यक्ति या इमारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

    सीसीटीवी से आरोपी तक पहुंचने की कोशिश

    पुलिस आसपास के इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। जांच का मकसद अंडे फेंकने वाले लोगों की पहचान करना और घटना की सही जगह का पता लगाना है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

    यानी सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या समुदाय को जिम्मेदार बताने वाले दावों से अलग पुलिस की आधिकारिक जांच अभी आरोपी की पहचान तक नहीं पहुंची है।

    आयोजकों ने 24 घंटे में कार्रवाई की मांग की

    अखिल पब्लिक फेस्टिवल कमेटी के अध्यक्ष हितेश जाधव ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस से तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। जाधव के मुताबिक, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार की तरफ से भी कार्रवाई को लेकर समर्थन और आश्वासन मिला है।

    अब इस मामले में अगला बड़ा अपडेट पुलिस की जांच और आरोपी की पहचान को लेकर होगा।

    अंडों के साथ पत्थर फेंकने का भी आरोप

    घटना के बाद कुछ आयोजकों और स्थानीय लोगों की तरफ से अंडों के साथ पत्थर फेंके जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि उपलब्ध पुलिस-आधारित जानकारी में अंडे फेंके जाने की बात स्पष्ट रूप से दर्ज है, जबकि पत्थर फेंके जाने की स्वतंत्र पुलिस पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर दावों के बीच पुलिस की जांच अहम

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ पोस्ट में घटना को सीधे सामुदायिक पहचान से जोड़कर पेश किया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने अभी तक किसी आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

    ऐसे में इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराने से बचा जाए। अभी आधिकारिक रूप से मामला अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज है और सीसीटीवी समेत दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

    मुंबई में पहले भी सामने आया था ऐसा मामला

    मझगांव की घटना से पहले मुंबई में गणेश प्रतिमा की आगमन शोभायात्रा के दौरान अंडा फेंके जाने का मामला अगस्त 2022 में सामने आया था। नागपाड़ा के कमाठीपुरा इलाके में गणेश प्रतिमा लेकर जा रहे समूह पर अंडा फेंकने के आरोप में 25 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। उस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए और 295ए के तहत कार्रवाई की थी।

    2022 के उस मामले में पुलिस ने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया था, जबकि मझगांव की मौजूदा घटना में अभी किसी गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है। इस बार जांच सीसीटीवी और आसपास के इलाके से जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

    गणेशोत्सव से पहले क्यों अहम है मझगांव का मामला?

    मझगांव की घटना ऐसे समय सामने आई है जब मुंबई में गणेशोत्सव की तैयारियां चल रही हैं। इस साल गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा और शहर में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गणेश मंडल अपने कार्यक्रम और आगमन समारोह की तैयारी कर रहे हैं।

    ऐसे में मझगांव की घटना के बाद संवेदनशील इलाकों में आगमन शोभायात्राओं के दौरान पुलिस बंदोबस्त, भीड़ नियंत्रण और निगरानी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल पुलिस की तरफ से पूरे मुंबई के लिए किसी नए विशेष सुरक्षा आदेश की जानकारी सामने नहीं आई है।

    अभी मझगांव में क्या स्थिति है?

    सोमवार को मझगांव में स्थिति शांतिपूर्ण बताई गई है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर इलाके और गणेश पंडाल के आसपास अतिरिक्त जवान तैनात रखे हैं। भायखला पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।

    फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस की अगली कार्रवाई अब इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में अंडे फेंकने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान कब होती है। आयोजकों की 24 घंटे में कार्रवाई की मांग के बीच अब मझगांव की नजर पुलिस की अगली अपडेट पर है।