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  • गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    गरीब फेरीवाले भी नागरिक हैं: मुंबई में नो-फेरीवाला जोन की तैयारी पर सवाल

    मुंबई में फेरीवालों के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। नो-फेरीवाला जोन बनाने की योजना, बुलडोजर कार्रवाई और लाइसेंस के सवाल पर गरीब फेरीवालों का भविष्य फिर संकट में है।

    मुंबई: एक बार फिर गरीब फेरीवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाने की तैयारी चल रही है। रेलवे स्टेशन इलाकों से अभियान की शुरुआत होगी। सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री से लेकर सरकारें फेरीवालों को सुरक्षा देने की बात करती हैं, तो ज़मीन पर बुलडोजर ही क्यों गरजता है?

    🏙️ मुंबई में फेरीवालों की समस्या: पुरानी, लेकिन अनसुलझी

    मुंबई में फेरीवालों की समस्या कोई नई नहीं है। दशकों से लाखों लोग फल, सब्ज़ी, कपड़े और रोजमर्रा का सामान बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।
    हकीकत यह है कि फेरीवाले शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा मार भी इन्हीं पर पड़ती है।

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    अंधेरी पश्चिम बीएमसी तोडफोड की ताजा तस्वीर

    🧨 बुलडोजर, तोड़-फोड़ और डर का माहौल

    जहां देखो वहीं BMC के तोड़क दस्ते, ट्रॉली तोड़ना, रेहड़ी जब्त करना और सामान फेंक देना—ये सब अब आम बात हो चुकी है।
    चुनाव से पहले कार्रवाई रोक दी जाती है और चुनाव खत्म होते ही फिर से अभियान शुरू हो जाता है। गरीब फेरीवालों के लिए यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।

    🗳️ चुनाव से पहले राहत, बाद में कार्रवाई

    महानगरपालिका चुनाव से पहले फेरीवालों को हटाने के लिए विशेष दस्ते तैनात किए गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रोक दी गई।
    अब चुनाव खत्म होते ही फिर से फेरीवालों को शहर से हटाने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

    🚉 रेलवे स्टेशन पहले निशाने पर

    सूत्रों के अनुसार, अभियान के पहले चरण में

    • रेलवे स्टेशन परिसर
    • स्टेशन रोड
    • प्रमुख जंक्शन

    से फेरीवालों को हटाया जाएगा। इसके लिए मनपा की अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी जा रही है।

    🏢 गुप्त आदेश, गुप्त कार्रवाई

    बताया जा रहा है कि

    • कार्रवाई की योजना सहायक आयुक्त स्तर तक ही सीमित रहेगी
    • किस इलाके में कब कार्रवाई होगी, इसकी जानकारी बाहर नहीं जाएगी
    • हर विभाग को अपने स्तर पर प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं

    इसका मकसद यह बताया जा रहा है कि फेरीवालों को पहले से भनक न लगे

    💸 हफ्ता, राजनीति और दोहरा मापदंड

    हकीकत यह भी है कि

    • कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोग फेरीवालों से हफ्ता वसूलते हैं
    • कई जगह मनपा कर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर मुफ्त फल-सब्ज़ी लेते हैं
    • प्रांतीयता और भाषा के आधार पर भी भेदभाव होता है

    इस सिस्टम में सबसे आसान शिकार हमेशा गरीब फेरीवाले ही बनते हैं।

    ❓ लाइसेंस क्यों नहीं?

    सबसे बड़ा सवाल यही है—
    अगर सरकार और मनपा चाहें तो फेरीवालों को लाइसेंस देकर “अवैध” शब्द खत्म किया जा सकता है।
    लेकिन ऐसा नहीं किया जाता, क्योंकि अवैध रहेंगे तो

    • हफ्ता वसूली चलेगी
    • दबाव बनाना आसान रहेगा
    • तोड़क कार्रवाई का डर बना रहेगा

    🏗️ अवैध इमारतें सुरक्षित, गरीब असुरक्षित

    मुंबई में हजारों इमारतें ऐसी हैं

    • जिनका नक्शा पास नहीं
    • जिनके पास NOC नहीं
    • जो सरकारी ज़मीन पर बनी हैं

    लेकिन उन पर बुलडोजर चलाने की हिम्मत कोई नहीं करता।
    वहीं गरीब फेरीवाले पर कार्रवाई सबसे आसान मानी जाती है।

    🏚️ झोपड़ी मुक्त आदेश की खुलेआम अवहेलना

    आरोप यह भी है कि

    • झोपड़ी मुक्त आदेश के बावजूद
    • लाखों रुपये के लेन-देन से
    • झोपड़ियां और कमर्शियल गाले बनवाए जाते हैं
    • और उन्हें संरक्षण दिया जाता है

    यह दोहरा रवैया गरीबों के खिलाफ व्यवस्था की सोच को उजागर करता है।

    ⚖️ नागरिक अधिकारों का सवाल

    गरीब फेरीवाले भी भारत के नागरिक हैं।
    राज्य का दायित्व लोगों को रुलाना नहीं, बल्कि रोजगार और आय के साधन देना है।
    संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर भी दिखने चाहिए।


    ❓ FAQ

    Q1. क्या पूरी मुंबई को नो-फेरीवाला जोन बनाया जाएगा?
    सूत्रों के अनुसार, ऐसी योजना पर काम चल रहा है, हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है।

    Q2. कार्रवाई की शुरुआत कहां से होगी?
    पहले चरण में रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों से फेरीवालों को हटाया जाएगा।

    Q3. फेरीवालों को लाइसेंस क्यों नहीं दिया जाता?
    आरोप है कि सिस्टम में अवैध स्थिति बनाए रखना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद है।

    Q4. क्या यह कार्रवाई सभी अवैध निर्माणों पर होगी?
    जमीनी हकीकत में कार्रवाई ज़्यादातर गरीब फेरीवालों तक ही सीमित रहती है।

  • FDA को मिला फुल-टाइम आयुक्त, डूबे-पाटील से कड़े एक्शन की उम्मीद

    FDA को मिला फुल-टाइम आयुक्त, डूबे-पाटील से कड़े एक्शन की उम्मीद

    करीब तीन महीने बाद महाराष्ट्र FDA को स्थायी आयुक्त मिला। IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील की फुल-टाइम नियुक्ति से प्रशासनिक मजबूती, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्ती की उम्मीद बढ़ी।

    मुंबई: करीब तीन महीने तक प्रभारी व्यवस्था में चल रहे महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (FDA) को आखिरकार फुल-टाइम आयुक्त मिल गया है। राज्य सरकार ने IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील को FDA का स्थायी आयुक्त नियुक्त किया है। अब तक वे प्रभारी आयुक्त की भूमिका निभा रहे थे। लंबे समय से नेतृत्व के अभाव में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे थे, ऐसे में इस नियुक्ति को प्रशासनिक सख़्ती, पारदर्शिता और सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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    🔹 तीन महीने बाद मिली स्थायी कमान

    पूर्व FDA आयुक्त राजेश नार्वेकर पिछले लगभग तीन महीनों से अवकाश पर थे। इस दौरान विभाग प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहा था। ऐसे में श्रीधर डूबे-पाटील को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, जो महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं।
    अब सरकार ने इसी अस्थायी व्यवस्था को खत्म करते हुए उन्हें फुल-टाइम आयुक्त बना दिया है।

    🔹 प्रभारी व्यवस्था से बिगड़ी प्रशासनिक रफ्तार

    प्रभारी आयुक्त के भरोसे चल रहे FDA में नीतिगत फैसलों, निरीक्षण और कार्रवाई की गति पर असर पड़ने की चर्चा लंबे समय से थी। सूत्रों के मुताबिक, इसी दौर में विभाग के भीतर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले बढ़ गए थे।
    निगरानी ढीली पड़ने से शिकायतों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई, जिससे आम जनता और व्यापारियों दोनों में नाराज़गी देखी गई।

    🔹 राजेश नार्वेकर की छुट्टी और उठते सवाल

    पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे अवकाश को लेकर प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल उठते रहे। उनके अवकाश के पीछे अलग-अलग कारण बताए जाते हैं।
    सूत्रों का कहना है कि वे FDA के कुछ अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज़ थे। एक ईमानदार अधिकारी की सराहना करना उन्हें महंगा पड़ गया, क्योंकि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने इसे तोड़-मरोड़कर विधानसभा तक पहुंचा दिया।

    🔹 भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर

    इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि FDA में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की जड़ें कितनी गहरी हैं।
    इतना ही नहीं, FSO उत्तरेश्वर बड़े जैसे अधिकारियों को लेकर व्यापारियों द्वारा कई शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक उन पर जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है। इससे विभाग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।

    🔹 श्रीधर डूबे-पाटील से क्यों हैं ज्यादा उम्मीदें

    श्रीधर डूबे-पाटील पहले ही प्रभारी आयुक्त के तौर पर FDA की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसे में विभाग की आंतरिक समस्याओं, अधिकारियों की भूमिका और सिस्टम की कमजोरियों से वे भली-भांति परिचित हैं।
    सरकारी हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि वे अपने कार्यकाल में—

    • FDA की प्रशासनिक पकड़ मजबूत करेंगे
    • भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे
    • खाद्य सुरक्षा और दवा नियंत्रण को प्रभावी बनाएंगे
    • जनहित से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस अपनाएंगे

    🔹 जनहित से जुड़ा अहम विभाग

    FDA ऐसा विभाग है जिसका सीधा संबंध आम जनता के स्वास्थ्य से है। मिलावटी खाद्य पदार्थ, नकली दवाएं और अवैध कारोबार पर लगाम लगाना इसकी मुख्य जिम्मेदारी है।
    ऐसे में फुल-टाइम आयुक्त की नियुक्ति से न सिर्फ प्रशासनिक स्थिरता आएगी, बल्कि भरोसा भी मजबूत होगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. महाराष्ट्र FDA के नए फुल-टाइम आयुक्त कौन बने हैं?
    👉 IAS अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील।

    Q2. FDA को फुल-टाइम आयुक्त मिलने में देरी क्यों हुई?
    👉 पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे अवकाश के कारण विभाग प्रभारी व्यवस्था में चल रहा था।

    Q3. नई नियुक्ति से क्या बदलाव उम्मीद की जा रही है?
    👉 भ्रष्टाचार पर सख्ती, तेज़ कार्रवाई और प्रशासनिक पारदर्शिता।

    Q4. किन अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं?
    👉 FSO उत्तरेश्वर बड़े सहित कुछ अधिकारियों पर व्यापारियों ने शिकायतें की हैं।

  • कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली शताब्दी अस्पताल में बिना रजिस्ट्रेशन लैब टेक्नीशियन, मरीजों की सुरक्षा पर सवाल

    कांदिवली के शताब्दी अस्पताल में पांच लैब टेक्नीशियन बिना महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के काम करते पाए गए. शिकायत के बाद MPC ने कार्रवाई के निर्देश दिए. पूरी रिपोर्ट पढ़ें.

    मुंबई: कांदिवली पश्चिम स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल (शताब्दी अस्पताल) में मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. अस्पताल में कम से कम पांच लैब टेक्नीशियन ऐसे पाए गए हैं, जो महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल (MPC) में रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसके बावजूद वे इमरजेंसी लैब में भी सेवाएं दे रहे थे. एक शिकायत के बाद MPC ने संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है.

    कैसे सामने आया पूरा मामला?

    यह मामला तब उजागर हुआ जब स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिवक्ता तुषार भोसले ने “आपले सरकार” पोर्टल के जरिए महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि शताब्दी अस्पताल में बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले लैब टेक्नीशियन मरीजों के सैंपल, जांच और इमरजेंसी मामलों को संभाल रहे हैं, जो कानून और मरीजों की सुरक्षा—दोनों के खिलाफ है.

    शिकायत मिलने के बाद MPC ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

    MPC के निर्देश के बाद अस्पताल का आदेश

    पैरामेडिकल काउंसिल के निर्देश के बाद शताब्दी अस्पताल प्रशासन ने एक आंतरिक आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि सभी लैब टेक्नीशियन के लिए MPC रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा.

    हालांकि, इस आदेश का विरोध अस्पताल के कुछ स्थायी और वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जो वर्षों से सेवा में हैं लेकिन जरूरी योग्यता और मान्यता प्राप्त डिग्री के अभाव में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे.

    अस्पताल प्रशासन की दुविधा

    अस्पताल प्रशासन इस समय असमंजस में है. एक ओर कानून का पालन करना जरूरी है, तो दूसरी ओर लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का भविष्य भी सवालों में है.

    इस मुद्दे पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में कुल 18 लैब टेक्नीशियन कार्यरत हैं, जिनमें कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ भी शामिल है. इनमें से पांच टेक्नीशियन फिलहाल महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं हैं.

    पांच टेक्नीशियन ने किया आवेदन, फिर भी अड़चन

    डॉ. अजय गुप्ता के अनुसार,

    • सभी पांच टेक्नीशियन ने MPC रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है
    • प्रत्येक ने ₹2,000 की निर्धारित फीस जमा की है
    • आवेदन की रसीद भी उन्हें मिल चुकी है

    लेकिन समस्या यह है कि इनमें से कुछ के पास BSc माइक्रोबायोलॉजी की डिग्री है या वे ऐसे संस्थानों से पासआउट हैं, जो MPC की मान्यता सूची में शामिल नहीं हैं. इसी वजह से उनके रजिस्ट्रेशन पर अंतिम फैसला अटका हुआ है.

    DMLT अनिवार्य, कानून साफ

    स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के मुताबिक,
    ब्लड बैंक टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन के लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी) अनिवार्य है.

    अतीत में कई भर्तियां इन नियमों को दरकिनार कर की गईं, जिसका खामियाजा अब कर्मचारियों और अस्पताल—दोनों को भुगतना पड़ रहा है.

    कानूनी चेतावनी: अपराध है बिना रजिस्ट्रेशन काम करना

    इस मामले पर शिकायतकर्ता अधिवक्ता तुषार भोसले ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:

    “कानून के मुताबिक लैब टेक्नीशियन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, भले ही इसके लिए उन्हें अब DMLT करना पड़े. बिना रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है. महाराष्ट्र स्टेट पैरामेडिकल एक्ट पूरे राज्य में लागू है, जिसमें BMC भी शामिल है. इस पर कोई भ्रम नहीं है.”

    उन्होंने बताया कि MPC ने इस बाबत BMC आयुक्त को भी अनिवार्य रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और CMS ने भी समर्थन में सर्कुलर जारी किया है.

    मरीजों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

    बिना रजिस्टर्ड टेक्नीशियन द्वारा इमरजेंसी लैब सेवाएं संभालना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ माना जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में जरा-सी चूक भी गंभीर परिणाम ला सकती है.


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. शताब्दी अस्पताल में कितने लैब टेक्नीशियन बिना रजिस्ट्रेशन के पाए गए?
    👉 कुल पांच लैब टेक्नीशियन MPC में रजिस्टर्ड नहीं थे.

    Q2. क्या वे इमरजेंसी सेवाओं में काम कर रहे थे?
    👉 हां, आरोप है कि वे इमरजेंसी लैब में भी कार्यरत थे.

    Q3. लैब टेक्नीशियन के लिए कौन-सी योग्यता जरूरी है?
    👉 सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त DMLT अनिवार्य है.

    Q4. क्या बिना रजिस्ट्रेशन काम करना अपराध है?
    👉 हां, यह संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है.

    Q5. अस्पताल प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
    👉 MPC के निर्देश पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है और सभी पांच टेक्नीशियन ने आवेदन किया है.

  • कांदिवली में मुंबई का सबसे बड़ा क्लस्टर रिडेवलपमेंट, 53 सोसाइटी होंगी शामिल

    कांदिवली में मुंबई का सबसे बड़ा क्लस्टर रिडेवलपमेंट, 53 सोसाइटी होंगी शामिल

    कांदिवली पश्चिम के एकतानगर में 12 एकड़ में फैले छत्रपती शिवाजी राजे संकुल का समूह पुनर्विकास प्रस्तावित है। 53 हाउसिंग सोसाइटी, 3,488 परिवारों को नए घर और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

    मुंबई: कांदिवली इलाके में शहर का अब तक का सबसे बड़ा क्लस्टर रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट आकार ले रहा है। एकतानगर के छत्रपती शिवाजी राजे संकुल में मौजूद 53 गृहनिर्माण संस्थाओं का एक साथ पुनर्विकास प्रस्तावित है। करीब 12 एकड़ में फैले इस संकुल में 3,488 परिवार रहते हैं, जिन्हें इस परियोजना के जरिए बड़े, सुरक्षित और आधुनिक घर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

    🏙️ क्या है कांदिवली का यह मेगा क्लस्टर रिडेवलपमेंट?

    क्लस्टर रिडेवलपमेंट यानी कई हाउसिंग सोसाइटी एक साथ मिलकर पुनर्विकास करना। इससे:

    • बेहतर प्लानिंग
    • ज्यादा खुली जगह
    • चौड़ी सड़कें
    • आधुनिक सुविधाएं
    • और मजबूत इमारतें

    उपलब्ध कराई जा सकती हैं। कांदिवली में प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट इसी मॉडल पर आधारित है।

    📍 छत्रपती शिवाजी राजे संकुल: 12 एकड़ में बसा बड़ा आवासीय परिसर

    यह संकुल साल 2000 में MHADA के भूखंड पर बसाया गया था। इसमें:

    • कुल 53 हाउसिंग सोसाइटी
    • लगभग 3,488 छोटे फ्लैट (करीब 220 स्क्वायर फीट)
    • करीब 26 साल पुरानी इमारतें

    मौजूद हैं, जो अब काफी हद तक जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं।

    🚧 जर्जर इमारतें और संकरी सड़कें बनीं बड़ी समस्या

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक:

    • इमारतों की उम्र 25 साल से ज्यादा हो चुकी है
    • कई जगह सीपेज और स्ट्रक्चरल दिक्कतें हैं
    • आंतरिक सड़कें बेहद संकरी हैं
    • पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है

    इन्हीं कारणों से लंबे समय से पुनर्विकास की मांग की जा रही थी।

    🤝 53 में से 34 सोसाइटी ने दी सहमति

    अब तक:

    • 34 गृहनिर्माण संस्थाओं ने पुनर्विकास को मंजूरी दे दी है
    • 19 सोसाइटी अभी विचार-विमर्श की स्थिति में हैं

    जैसे-जैसे सहमति का आंकड़ा बढ़ेगा, प्रोजेक्ट को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

    🏠 हर परिवार को मिलेगा 610 स्क्वायर फीट का नया घर

    प्रस्तावित योजना के मुताबिक:

    • हर सदस्य को 610 स्क्वायर फीट का फ्लैट
    • आधुनिक लेआउट और सुविधाएं
    • लिफ्ट, पार्किंग, गार्डन और कॉमन एरिया

    उपलब्ध होंगे, जो मौजूदा घरों से लगभग तीन गुना बड़े होंगे।

    💰 भाड़ा और कॉर्पस फंड का पूरा गणित

    पुनर्विकास की अवधि में:

    • पहले साल: ₹25,000 प्रति माह भाड़ा
    • दूसरे साल: ₹27,000 प्रति माह
    • तीसरे साल: ₹30,000 प्रति माह

    इसके अलावा:

    • ₹2.25 लाख कॉर्पस फंड
    • हर एक फ्लैट मालिक को दिया जाएगा

    🏗️ डेवलपर को भी मिलेगा बिक्री का अधिकार

    इस प्रोजेक्ट में:

    • जितनी सदनिका निवासियों को मिलेंगी
    • उतनी ही यानी 3,488 फ्लैट्स
    • डेवलपर को ओपन मार्केट में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगी

    जिससे प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित होगी।

    🏢 मुंबई में क्लस्टर रिडेवलपमेंट का बढ़ता चलन

    MHADA और निजी डेवलपर्स द्वारा:

    • मोतीलाल नगर
    • अभ्युदयनगर
    • आदर्शनगर
    • बांद्रा रिक्लेमेशन
    • GTB नगर
    • कामाठीपुरा

    जैसे इलाकों में भी क्लस्टर रिडेवलपमेंट पर काम चल रहा है।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. यह क्लस्टर रिडेवलपमेंट कहां हो रहा है?
    ➡️ कांदिवली स्थित छत्रपती शिवाजी राजे संकुल में।

    Q2. कुल कितनी सोसाइटी शामिल हैं?
    ➡️ 53 गृहनिर्माण संस्थाएं।

    Q3. हर परिवार को कितना बड़ा फ्लैट मिलेगा?
    ➡️ 610 स्क्वायर फीट का नया फ्लैट।

    Q4. पुनर्विकास के दौरान रहने का क्या इंतजाम होगा?
    ➡️ डेवलपर द्वारा मासिक भाड़ा दिया जाएगा।

    Q5. कॉर्पस फंड कितना मिलेगा?
    ➡️ ₹2.25 लाख प्रति सदनिका।

  • अंधेरी इर्ला रोड पर BMC की सख्त कार्रवाई, 200 अवैध फेरीवाले हटाए

    अंधेरी इर्ला रोड पर BMC की सख्त कार्रवाई, 200 अवैध फेरीवाले हटाए

    मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित राम गणेश गडकरी मार्ग पर BMC ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 200 अवैध फेरीवालों और फुटपाथों पर बने अनधिकृत निर्माण हटाए। कूपर अस्पताल जाने वाले रास्ते को किया गया साफ।

    मुंबई: फुटपाथ, अतिक्रमण और अवैध फेरीवालों के खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने सख्त रुख अपनाया है। अंधेरी (पश्चिम) के राम गणेश गडकरी मार्ग (इर्ला रोड) इलाके में बीएमसी के के पश्चिम वार्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 अवैध फेरीवालों और फुटपाथों पर बने अनधिकृत निर्माणों को हटाया है। यह कार्रवाई 29 जनवरी 2026 को की गई।

    कूपर अस्पताल जाने वाले रास्ते पर अतिक्रमण बना था मुसीबत

    राम गणेश गडकरी मार्ग, जो स्वामी विवेकानंद रोड और गुलमोहर रोड को जोड़ता है, साथ ही डॉ. आर. एन. कूपर अस्पताल के प्रवेश मार्ग से जुड़ा हुआ है।
    इस सड़क और फुटपाथों पर लंबे समय से अवैध फेरीवालों और बढ़े हुए निर्माणों के कारण:

    • एम्बुलेंस की आवाजाही में दिक्कत
    • मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी
    • पैदल चलने वालों को भारी परेशानी

    जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही थीं।

    आयुक्त के निर्देश पर हुई कार्रवाई

    यह पूरी कार्रवाई महानगरपालिका आयुक्त एवं प्रशासक भूषण गगराणी के निर्देश पर की गई।
    उप आयुक्त (परिमंडल-4) भाग्यश्री कापसे के मार्गदर्शन में और
    सहायक आयुक्त (के पश्चिम) चक्रपाणी अल्ले के नेतृत्व में निष्कासन अभियान चलाया गया।

    200 से ज्यादा अवैध फेरीवाले हटाए गए

    अभियान के दौरान:

    • करीब 200 अनधिकृत फेरीवालों को हटाया गया
    • फुटपाथों पर बने अवैध बढ़ी हुई दुकानों और ढांचों को तोड़ा गया
    • सड़क और फुटपाथों को पैदल चलने लायक बनाया गया

    इससे पूरे इलाके में यातायात और पैदल आवाजाही काफी हद तक सुचारु हो गई है।

    BMC-takes-strict-action-on-Andheri-Irla-Road-removes-200-illegal-hawkers-news

    भारी मशीनरी और पुलिस बंदोबस्त तैनात

    कार्रवाई को सफल बनाने के लिए बीएमसी ने:

    • 4 अतिक्रमण हटाने वाले वाहन
    • 3 जेसीबी मशीनें
    • अन्य आवश्यक उपकरण

    तैनात किए थे।
    इसके अलावा करीब 100 बीएमसी अधिकारी-कर्मचारी और पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद था, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।

    स्थानीय नागरिकों ने जताया संतोष

    इस कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस इलाके में अव्यवस्था थी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी।

    बीएमसी प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. कार्रवाई कहां हुई?
    अंधेरी पश्चिम के राम गणेश गडकरी मार्ग (इर्ला रोड) पर।

    Q2. कितने फेरीवाले हटाए गए?
    करीब 200 अवैध फेरीवाले।

    Q3. कार्रवाई क्यों की गई?
    एम्बुलेंस और पैदल यात्रियों को हो रही परेशानी के कारण।

    Q4. कौन सा विभाग शामिल था?
    बीएमसी का के पश्चिम वार्ड।

    Q5. क्या आगे भी ऐसी कार्रवाई होगी?
    हां, बीएमसी ने नियमित कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।

  • Vidyavihar Flyover Update: 25 जून 2026 तक पूरा होगा विद्याविहार उड्डाणपुल

    Vidyavihar Flyover Update: 25 जून 2026 तक पूरा होगा विद्याविहार उड्डाणपुल

    BMC ने विद्याविहार फ्लाईओवर का काम 25 जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने मौके पर निरीक्षण कर मानसून से पहले सभी जरूरी काम पूरे करने के निर्देश दिए।

    मुंबई: विद्याविहार में पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित विद्याविहार रेलवे स्टेशन फ्लाईओवर अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इस परियोजना को 25 जून 2026 तक पूरा कर ट्रैफिक के लिए खोलने का लक्ष्य तय किया है। इस संबंध में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रकल्प) अभिजीत बांगर ने गुरुवार को स्थल निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों को साफ निर्देश दिए कि मानसून से पहले सभी जरूरी काम पूरे किए जाएं।

    Vidyavihar Flyover क्यों है इतना अहम?

    विद्याविहार और घाटकोपर इलाके में रहने वाले लोगों के लिए यह फ्लाईओवर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
    यह उड्डाणपुल—

    • पूर्व में रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग
    • पश्चिम में लालबहादुर शास्त्री मार्ग (LBS रोड)

    को सीधे जोड़ता है।
    अभी रेलवे फाटक और वैकल्पिक रास्तों के कारण लोगों को भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। फ्लाईओवर शुरू होने के बाद पूर्व-पश्चिम यात्रा आसान और तेज हो जाएगी।

    कब तक पूरा होगा काम? BMC का स्पष्ट टाइमलाइन

    BMC की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार—

    • पूर्वी हिस्से का सारा काम: 28 फरवरी 2026 तक
    • मानसून से पहले जरूरी काम: 31 मई 2026 तक
    • पूरे फ्लाईओवर का उद्घाटन: 25 जून 2026 तक

    अभिजीत बांगर ने कहा कि मानसून को देखते हुए स्ट्रक्चरल और जरूरी काम पहले पूरे किए जाएं और बाद में फिनिशिंग की जाए।

    फ्लाईओवर की पूरी डिटेल: लंबाई से लेकर लेन तक

    यह फ्लाईओवर कुल 650 मीटर लंबा है और इसमें—

    • रेलवे लाइनों पर बना 100 मीटर का मुख्य पुल
    • पूर्व दिशा में 220 मीटर का अप्रोच रोड
    • पश्चिम दिशा में 330 मीटर का अप्रोच रोड

    शामिल है।
    यह दो लेन का फ्लाईओवर होगा, जिससे ट्रैफिक स्मूद तरीके से चल सकेगा।

    रेलवे स्टेशन से सीधा कनेक्शन भी मिलेगा

    इस परियोजना की एक खास बात यह है कि—

    • फ्लाईओवर से विद्याविहार रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक पैदल पहुंच
    • दोनों ओर नए टिकट काउंटर,
    • स्टेशन मास्टर ऑफिस
    • और नई सीढ़ियों (सीढ़ी मार्ग) का निर्माण

    भी किया गया है। इससे यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी।

    पश्चिमी हिस्से में काम बना चुनौती

    BMC अधिकारियों के मुताबिक, फ्लाईओवर के पश्चिमी हिस्से में—

    • अब तक 6 पिलर तैयार हो चुके हैं
    • अभी 4 पिलर, स्पैन और अप्रोच रोड का काम बाकी है

    यहां सबसे बड़ी चुनौती ट्रैफिक डाइवर्जन और
    प्रभावित रिहायशी व व्यावसायिक निर्माणों को हटाना है।

    अभिजीत बांगर ने निर्देश दिए कि पहले सड़क चौड़ीकरण और रियलाइन्मेंट पूरा किया जाए, ताकि काम में तेजी लाई जा सके।

    मानसून से पहले क्यों है इतनी जल्दी?

    मुंबई में बारिश के दौरान—

    • कंस्ट्रक्शन स्लो हो जाता है
    • सेफ्टी रिस्क बढ़ जाता है
    • ट्रैफिक और ज्यादा बिगड़ता है

    इसी वजह से BMC चाहती है कि 31 मई 2026 तक सभी प्रमुख काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि मानसून में परेशानी न हो।

    अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

    निरीक्षण के दौरान अभिजीत बांगर ने साफ कहा—

    “किसी भी हालत में 25 जून 2026 तक फ्लाईओवर पूरा कर ट्रैफिक के लिए खोला जाए।”

    इस मौके पर मुख्य अभियंता (पुल) उत्तम श्रोते सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

    विद्याविहार फ्लाईओवर मुंबई के पूर्व-पश्चिम ट्रैफिक के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अगर तय समयसीमा में काम पूरा होता है, तो घाटकोपर-विद्याविहार इलाके में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।


    FAQ – Vidyavihar Flyover

    Q1. विद्याविहार फ्लाईओवर कब तक पूरा होगा?
    ➡️ BMC के अनुसार 25 जून 2026 तक।

    Q2. फ्लाईओवर की कुल लंबाई कितनी है?
    ➡️ लगभग 650 मीटर।

    Q3. यह फ्लाईओवर किन सड़कों को जोड़ता है?
    ➡️ रामचंद्र चेंबूरकर मार्ग और LBS रोड।

    Q4. मानसून से पहले क्या काम पूरे होंगे?
    ➡️ सभी जरूरी स्ट्रक्चरल काम 31 मई 2026 तक।

  • कांदीवली के वडार पाड़ा में भव्य आरोग्य शिविर, सैकड़ों लोगों को मिली मुफ्त स्वास्थ्य जांच

    कांदीवली के वडार पाड़ा में भव्य आरोग्य शिविर, सैकड़ों लोगों को मिली मुफ्त स्वास्थ्य जांच

    कांदिवली (पूर्व) के वडार पाड़ा में 26 जनवरी को सागर सेवा फाउंडेशन की ओर से भव्य आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया, जहां रक्तदान, आंखों की जांच, डायबिटीज, ईसीजी सहित कई मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं।

    मुंबई: कांदिवली (पूर्व) स्थित वडार पाड़ा में 26 जनवरी, स्थापना दिवस और गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर एक भव्य आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर जय बजरंगबली गोविंदा पथक (रजि.) सागर सेवा फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों मरीजों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला। शिविर का आयोजन गणेश कृपा को.ऑप.हौ.सो. लि., हनुमान नगर, वडार पाड़ा रोड नंबर-2 के परिसर में किया गया।

    स्थापना दिवस पर समाजसेवा की मिसाल

    26 जनवरी को सागर सेवा फाउंडेशन के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस आरोग्य शिविर का मुख्य उद्देश्य कांदिवली (पूर्व) और आसपास के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों तक जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग शिविर स्थल पर पहुंचे और मुफ्त जांच एवं इलाज का लाभ लिया।

    इन स्वास्थ्य सुविधाओं का मिला मुफ्त लाभ

    इस भव्य आरोग्य शिविर में मरीजों को कई तरह की निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिनमें प्रमुख रूप से:

    • रक्तदान शिविर
    • आंखों की मुफ्त जांच
    • जरूरतमंदों को मुफ्त चश्मा वितरण
    • सीवीसी खून की जांच (सफेद और लाल रक्त कणिकाएं)
    • डायबिटीज जांच
    • ब्लड प्रेशर (BP) चेकअप
    • ईसीजी टेस्ट
    • फ्री जनरल हेल्थ चेकअप

    एक ही जगह पर इतनी सारी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से स्थानीय नागरिकों में काफी उत्साह देखा गया।

    आयोजन में आयोजक और डॉक्टर्स की अहम भूमिका

    इस शिविर का सफल आयोजन श्री समीर शंकर उत्तेकर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम को जीवन ज्योति होम हेल्थ केयर सर्विसेस एंड डायग्नोस्टिक तथा डॉ. राहुल एस. विश्वकर्मा के सौजन्य से सफल बनाया गया। मेडिकल टीम ने पूरे दिन मरीजों की जांच कर उन्हें जरूरी सलाह और मार्गदर्शन दिया।

    कांदीवली के स्थानीय नागरिकों की जबरदस्त भागीदारी

    आरोग्य शिविर में वडार पाड़ा, हनुमान नगर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई लोगों ने कहा कि इस तरह के शिविर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं, क्योंकि निजी अस्पतालों में जांच कराना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

    आगे भी ऐसे आयोजनों की उम्मीद

    सागर सेवा फाउंडेशन और जय बजरंगबली गोविंदा पथक द्वारा किए गए इस आयोजन की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना की जा रही है। लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह के स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कांदिवली और अन्य इलाकों में किया जाएगा।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. आरोग्य शिविर कहां आयोजित किया गया था?
    👉 गणेश कृपा को.ऑप.हौ.सो. लि., हनुमान नगर, वडार पाड़ा रोड नंबर-2, कांदिवली (पूर्व)।

    Q2. शिविर का आयोजन किस संस्था ने किया?
    👉 जय बजरंगबली गोविंदा पथक (रजि.) सागर सेवा फाउंडेशन।

    Q3. कौन-कौन सी जांच मुफ्त की गई?
    👉 आंखों की जांच, खून की जांच, डायबिटीज, बीपी, ईसीजी और जनरल हेल्थ चेकअप।

    Q4. शिविर कब आयोजित हुआ?
    👉 26 जनवरी, स्थापना दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर।

    Q5. क्या भविष्य में ऐसे शिविर फिर लगेंगे?
    👉 आयोजकों के अनुसार आगे भी समाजहित में ऐसे कार्यक्रम किए जाएंगे।

  • गोरेगांव–मुलुंड कनेक्टवीटी रोड़ पर काम तेज, फिल्म सिटी में लॉन्चिंग शाफ्ट की खुदाई जोरों पर

    गोरेगांव–मुलुंड कनेक्टवीटी रोड़ पर काम तेज, फिल्म सिटी में लॉन्चिंग शाफ्ट की खुदाई जोरों पर

    मुंबई के बहुप्रतीक्षित गोरेगांव–मुलुंड कनेक्टवीटी रोड़ (GMLR) प्रोजेक्ट के तहत दादासाहेब फाळके चित्रनगरी परिसर में लॉन्चिंग शाफ्ट की खुदाई तेजी से जारी है। जून 2026 से टनल खोदने का काम शुरू होगा।

    मुंबई: शहर के पूर्व और पश्चिम उपनगरों को जोड़ने वाले गोरेगांव–मुलुंड कनेक्टवीटी रोड़ (GMLR) प्रोजेक्ट का काम रफ्तार पकड़ चुका है। गोरेगांव स्थित दादासाहेब फाळके चित्रनगरी (फिल्म सिटी) परिसर में 5.3 किलोमीटर लंबे जुड़वां टनल के लिए लॉन्चिंग शाफ्ट की खुदाई तेजी से चल रही है। 10 मार्च 2026 तक टनल बोरिंग मशीन (TBM) शाफ्ट में उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि जून 2026 से वास्तविक टनल खुदाई की योजना है।

    गोरेगांव के फिल्म सिटी परिसर में लॉन्चिंग शाफ्ट का काम तेज

    बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा संचालित GMLR प्रोजेक्ट के तीसरे चरण (3B) के तहत गोरेगांव के दादासाहेब फाळके चित्रनगरी इलाके में लॉन्चिंग शाफ्ट का उत्खनन किया जा रहा है।
    यह शाफ्ट करीब 200 मीटर लंबा, 50 मीटर चौड़ा और 30 मीटर गहरा होगा। फिलहाल लगभग 23 मीटर गहराई तक खुदाई पूरी कर ली गई है। बाकी 7 मीटर खुदाई पूरी होते ही टनल बोरिंग मशीन को उतारने के लिए जरूरी क्रैडल (सांचा) तैयार किया जाएगा।

    दो अत्याधुनिक TBM से होगी टनल की खुदाई

    इस प्रोजेक्ट में भूमिगत जुड़वां टनल बनाने के लिए दो आधुनिक टनल बोरिंग मशीनों (TBM) का इस्तेमाल किया जाएगा।
    ▪ एक TBM के सभी हिस्से साइट पर पहुंच चुके हैं
    ▪ दूसरी TBM के बाकी हिस्से 22 जनवरी 2026 की रात तक साइट पर पहुंचने वाले हैं

    बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, 10 मार्च 2026 तक मशीनों को शाफ्ट में उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

    रोजाना निकल रहा 1500 क्यूबिक मीटर मलबा

    खुदाई के दौरान रोजाना करीब 1400 से 1500 क्यूबिक मीटर मिट्टी और पत्थर बाहर निकाला जा रहा है।
    ▪ लगभग 120 ट्रकों से रोज मलबा हटाया जा रहा है
    ▪ दीवारों को सुरक्षित रखने के लिए रॉक एंकरिंग की गई है

    अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि तय समयसीमा में काम पूरा करने के लिए गति और बढ़ाई जाए।

    अभिजीत बांगर ने किया साइट का निरीक्षण

    अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रोजेक्ट) अभिजीत बांगर ने 21 जनवरी 2026 को साइट का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
    उन्होंने साफ कहा कि:

    • काम की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो
    • तय समयसीमा में प्रोजेक्ट पूरा किया जाए
    • सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो

    निरीक्षण के दौरान बीएमसी के वरिष्ठ इंजीनियर और सलाहकार भी मौजूद थे।

    जून 2026 से शुरू होगी असली टनल खुदाई

    अभिजीत बांगर के मुताबिक:

    • मार्च 2026 तक TBM शाफ्ट में उतारी जाएंगी
    • अगले 3 महीनों में मशीन और 3 गैंट्री जोड़ी जाएंगी
    • जून 2026 से टनल की वास्तविक खुदाई शुरू होगी

    यह तिहरी लेन वाली पेटी टनल इंजीनियरिंग के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

    मुंबई की ट्रैफिक को मिलेगा बड़ा फायदा

    गोरेगांव–मुलुंड जोड़ मार्ग मुंबई के पूर्व और पश्चिम उपनगरों को सीधे जोड़ेगा।
    ▪ जोगेश्वरी–विक्रोली लिंक रोड (JVLR) की तुलना में
    करीब 8.8 किलोमीटर का सफर कम होगा
    ▪ समय, ईंधन और खर्च की बचत होगी
    ▪ ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी
    ▪ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी

    यह प्रोजेक्ट खासकर उत्तर मुंबई की ट्रैफिक समस्या के लिए गेम चेंजर साबित माना जा रहा है।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. गोरेगांव–मुलुंड जोड़ मार्ग कब शुरू होगा?
    👉 जून 2026 से टनल खुदाई शुरू होने की योजना है।

    Q2. टनल की कुल लंबाई कितनी होगी?
    👉 जुड़वां टनल की लंबाई करीब 5.3 किलोमीटर होगी, पेटी टनल समेत कुल दूरी 6.62 किमी होगी।

    Q3. इस प्रोजेक्ट से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
    👉 ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और ईंधन की बचत होगी।

  • हाजी मलंग पहाड़ पर फ्युनिक्युलर ट्रेन शुरू, श्रद्धालुओं की मुश्किलें हुईं आसान

    हाजी मलंग पहाड़ पर फ्युनिक्युलर ट्रेन शुरू, श्रद्धालुओं की मुश्किलें हुईं आसान

    कल्याण के हाजी मलंग पहाड़ पर फ्युनिक्युलर ट्रेन सेवा की शुरुआत हो गई है। अब श्रद्धालुओं को 1500 सीढ़ियां और घंटों की चढ़ाई नहीं करनी पड़ेगी। किराया, समय, उरुस और पूरी जानकारी पढ़ें।

    महाराष्ट्र: कल्याण स्थित हाजी मलंग पहाड़ पर रविवार, 18 जनवरी 2026 से फ्युनिक्युलर ट्रेन सेवा शुरू हो गई है। इस सेवा के शुरू होने से हाजी मलंग दरगाह जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है। अब उन्हें करीब 1500 सीढ़ियां चढ़ने और दो से तीन घंटे की कठिन पहाड़ी चढ़ाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह लंबे समय से लंबित परियोजना सांसद श्रीकांत शिंदे के प्रयासों से पूरी हुई है और राज्य लोक निर्माण विभाग द्वारा इसे अमल में लाया गया है।

    🚡 क्या है फ्युनिक्युलर ट्रेन और कैसे देगी राहत?

    फ्युनिक्युलर ट्रेन एक खास तरह की पहाड़ी रेल सेवा होती है, जो खड़ी चढ़ाई पर सुरक्षित तरीके से लोगों को ऊपर तक पहुंचाती है।
    हाजी मलंग पहाड़ पर शुरू की गई यह ट्रेन लगभग 1 किलोमीटर लंबी और 320 मीटर की खड़ी चढ़ाई को आसान बनाती है।
    मलंगगढ़ पहाड़ समुद्र तल से करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां तक पहुंचना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक हो गया है।

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    🕰️ पहले कैसी थी हाजी मलंग की यात्रा?

    अब तक श्रद्धालुओं को दरगाह तक पहुंचने के लिए:

    • 1500 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती थीं
    • 2 से 3 घंटे का समय लगता था
    • बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए सफर बेहद कठिन था
    • बारिश और गर्मी में जोखिम भी बढ़ जाता था

    फ्युनिक्युलर ट्रेन के शुरू होने से ये सारी परेशानियां अब बीते दिनों की बात हो गई हैं।

    💰 किराया और संचालन का समय

    फ्युनिक्युलर ट्रेन सेवा को आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती रखा गया है:

    • एकतरफा टिकट: ₹75
    • रिटर्न टिकट: ₹150

    यह ट्रेन सेवा रोजाना करीब 12 घंटे संचालित की जाएगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु इसका लाभ ले सकें।

    🕌 उरुस के दौरान बढ़ेगी ट्रेन सेवा

    फरवरी 2026 में हाजी मलंग पहाड़ पर सालाना उरुस का आयोजन होना है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    उरुस का कार्यक्रम:

    • 24, 25 और 26 फरवरी: सैयद अब्दुल रहमान शाह का उरुस
    • 27 और 28 फरवरी: मीर सकी सुल्तान का उरुस

    उरुस के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ट्रेन सेवा में दोनों दिशाओं में दो-दो कोच चलाए जाएंगे, जबकि सामान्य दिनों में एक-एक कोच संचालित होगा।

    🤝 हाजी मलंग दरगाह: भाईचारे की मिसाल

    हाजी मलंग दरगाह एक ऐतिहासिक सूफी स्थल है, जो हजरत बाबा अब्दुर रहमान मलंग को समर्पित है।
    यह स्थान सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए भी जाना जाता है।
    परंपरा के अनुसार यहां:

    • हिंदू वहिवटदार (करांडेकर परिवार)
    • मुस्लिम मुतवल्ली

    मिलकर सभी धार्मिक रस्में निभाते हैं, जो इस स्थल को खास बनाता है।

    🏔️ मलंगगढ़ पहाड़ के तीन प्रमुख हिस्से

    हाजी मलंग पहाड़ को तीन भागों में बांटा गया है:

    • पीर माची: जहां मुख्य दरगाह स्थित है
    • सोने माची: ऊपरी चट्टानी क्षेत्र
    • बालेकिल्ला: पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी

    फ्युनिक्युलर ट्रेन से पीर माची तक पहुंचना अब बेहद आसान हो गया है।

    🙏 श्रद्धालुओं ने जताया आभार

    ट्रेन सेवा शुरू होते ही श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल देखा गया।
    खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों के साथ आने वाले परिवारों ने इस सुविधा को “वरदान” बताया।
    श्रद्धालुओं ने प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र एवं सांसद श्रीकांत शिंदे का आभार व्यक्त किया।


    FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

    Q1. फ्युनिक्युलर ट्रेन किस दिन से शुरू हुई है?
    👉 रविवार, 18 जनवरी 2026 से।

    Q2. ट्रेन का किराया कितना है?
    👉 एकतरफा ₹75 और रिटर्न ₹150।

    Q3. क्या उरुस के दौरान ट्रेन सेवा बढ़ाई जाएगी?
    👉 हां, उरुस के दिनों में दोनों दिशाओं में दो-दो कोच चलेंगे।

    Q4. क्या बुजुर्ग और बच्चे सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं?
    👉 हां, यह सेवा पूरी तरह सुरक्षित और सुविधाजनक है।

  • बोरीवली में ‘चीन-जापान’ वाला नज़ारा! स्काई सिटी मॉल की रूफटॉप वॉकवे बनी लोगों की नई पसंद

    बोरीवली में ‘चीन-जापान’ वाला नज़ारा! स्काई सिटी मॉल की रूफटॉप वॉकवे बनी लोगों की नई पसंद

    मुंबई के बोरीवली स्थित स्काई सिटी मॉल में बनी रूफटॉप वॉकिंग स्पेस लोगों को कर रही है आकर्षित। शाम की सैर, जगमगाती लाइट्स और मुंबई स्काईलाइन का शानदार नज़ारा।

    मुंबई: अब मुंबई में घूमने और सुकून भरी शाम बिताने के लिए चीन या जापान जाने की ज़रूरत नहीं। बोरीवली का स्काई सिटी मॉल इन दिनों अपनी अनोखी रूफटॉप वॉकिंग स्पेस की वजह से चर्चा में है। जगमगाती लाइट्स, खुला माहौल, आरामदायक बैठने की जगह और सामने फैली मुंबई की स्काईलाइन लोगों को खूब लुभा रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बाद यहां आने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है।

    क्या है स्काई सिटी मॉल की खासियत

    स्काई सिटी मॉल पहले से ही बोरीवली इलाके का एक बड़ा शॉपिंग और एंटरटेनमेंट हब है। यहां शॉपिंग, फूड कोर्ट और मल्टीप्लेक्स की सुविधा मौजूद है। अब मॉल में जोड़ी गई रूफटॉप वॉकवे और ओपन एरिया ने इसकी पहचान को और खास बना दिया है।

    यह जगह खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है, जो शॉपिंग या मूवी के बाद कुछ समय शांति से बिताना चाहते हैं।

    रूफटॉप वॉकिंग स्पेस का अनुभव

    मॉल की छत पर बनी यह वॉकिंग स्पेस एक तरह से

    • शाम की सैर (Evening Walk)
    • ओपन एयर रिलैक्सिंग ज़ोन
    • फोटोग्राफी और वीडियो के लिए परफेक्ट स्पॉट

    मानी जा रही है।
    यहां की फर्श पर लगी लाइट्स रात के समय अलग ही माहौल बना देती हैं। ऊपर खुला आसमान, आसपास ऊंची-ऊंची इमारतें और सामने फैली मुंबई की स्काईलाइन इस जगह को बेहद खास बना देती है।

    सोशल मीडिया पर क्यों हो रही है चर्चा

    मुंबई के मशहूर व्लॉगर आवी वाडेकर ने इस रूफटॉप वॉकिंग स्पेस का वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा –

    “ये चीन नहीं, मुंबई है!”

    इसके बाद यह जगह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। लोग हैरान हैं कि बोरीवली में भी ऐसा इंटरनेशनल फील देने वाला स्पेस मौजूद है।

    क्यों पसंद कर रहे हैं लोग

    इस रूफटॉप स्पेस को पसंद करने के पीछे कई वजहें हैं:

    • भीड़भाड़ से दूर खुला माहौल
    • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए बढ़िया जगह
    • शाम के वक्त सुकून और हल्की-फुल्की वॉक
    • सोशल मीडिया रील्स और फोटोज़ के लिए शानदार लोकेशन

    बोरीवली वालों के लिए नई पहचान

    अब तक लोग बांद्रा, लोअर परेल या साउथ मुंबई में ऐसे नज़ारों की उम्मीद करते थे, लेकिन स्काई सिटी मॉल ने बोरीवली को भी इस लिस्ट में शामिल कर दिया है। यही वजह है कि आसपास के इलाकों से भी लोग खास तौर पर इस रूफटॉप वॉकवे को देखने आ रहे हैं।


    FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. स्काई सिटी मॉल कहां स्थित है?
    👉 मुंबई के बोरीवली इलाके में।

    Q2. रूफटॉप वॉकिंग स्पेस क्या है?
    👉 मॉल की छत पर बना खुला एरिया, जहां लोग टहल सकते हैं, बैठ सकते हैं और नज़ारा देख सकते हैं।

    Q3. क्या यहां एंट्री फ्री है?
    👉 मॉल में आने वाले सभी विज़िटर्स के लिए यह स्पेस उपलब्ध है।

    Q4. घूमने का सही समय क्या है?
    👉 शाम और रात के समय, जब लाइट्स ऑन होती हैं।

    Q5. क्या यहां फैमिली के साथ आ सकते हैं?
    👉 हां, यह फैमिली और फ्रेंड्स दोनों के लिए सुरक्षित और आरामदायक जगह है।